Night Me Bhabhi Chudai
जवान औरत से सेक्स करना और औरत को चोदना हर जवान लड़के का सपना होता है। मेरा भी था कि किसी अल्हड़, मस्त, जवान औरत की गांड मारी जाए और उसकी चूत में जीभ डालकर उसका रस चखा जाए। औरत की भारी-भारी कसी-कसी उठान लिए ब्लाउज में कैद दूध से भरी चुचियाँ (बूब्स) हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी ओर आकर्षित करतीं. Night Me Bhabhi Chudai
और मैं उनको दबाने के सपनों में खो जाता कि कब ब्लाउज के बटन खोल उन चुचियों को आजाद करूँगा, ब्लाउज का हुक खोलकर, ब्रा को हटाकर, दोनों चुचियाँ (बूब्स) अपने हाथों में ले दबाऊँगा। कब औरत के बूब्स, स्तन मेरे हाथों में आएंगे? कब मैं भी उन निप्पल्स को मुँह में लेकर पी पाऊँगा?
दिल्ली की हर जवान, गोरी, सुंदर और प्यारी भाभी के बारे में सोचता कि रात को यह कितना मजा लुटवाती होंगी और लंड की सवारी कर रोज जन्नत घूमने जाती होंगी। हर भाभी भी मुझसे बहुत घुली-मिली थीं। कभी भी कोई काम होता तो उनका यह देवर हमेशा काम करने को तैयार रहता था।
एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहाँ अपनी बीवी के साथ रहने आए। बात एक रात की है कि मुझे गर्मी के कारण नींद नहीं आ रही थी। हम ऐसे ही बाहर आँगन में निकल आए। सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूबलाइट की रोशनी बाहर आ रही थी क्योंकि खिड़की के काँच पर कपड़ा पड़ा था।
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परंतु खिड़की का एक दरवाजा हल्का टेढ़ा खुला था ताकि साफ हवा कमरे में आ-जा सके। मैंने सोचा यह भैया क्या पढ़ रहे हैं? मैंने बस हल्के से दबे पाँव पास जाकर खिड़की के नीचे से अंदर देखा तो मेरी साँस जैसे रुक गई। भाभी पूरी नंगी हो पेट के बल लेटी थीं और उनकी मस्त, मसल गांड ऊपर की ओर थी।
भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे, साथ-साथ वो उनके चूतड़ों का मसाज कर रहे थे। भाभी हल्के-हल्के मुँह से “आह्ह्ह… स्स्स… आह्ह्ह…” कर रही थीं। “ह्ह्हम्म्म… म्म्म… ओओओ…” और जब भैया तेल लगाकर अपनी उँगली भाभी के चूतड़ों को फैलाकर गांड में अंदर घुसा डालते तो भाभी कह उठती, “धीरे-धीरे डालो बाबा, दर्द होता है।”
भैया लुंगी पहने अपने दोनों हाथों से उनकी ऊपर जाँघों पर बैठकर दोनों चूतड़ों का मसाज कर रहे थे। गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नजर आ रही थीं। भाभी के उल्टा हो लेटने से मैंने देखा कि भैया हल्के से लेटकर पीछे से उनकी गांड में अपनी जीभ भी लगा रहे थे, जिससे भाभी “आआह्ह्ह… ओओ…” करती जाती थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर पीछे से ही भैया ने भाभी के चूतड़ों को फैलाया जिससे उनकी चूत भी दो फाँकों में बँट गई और चूत के गुलाबी छेद में उँगली डाल वो अंदर-बाहर करने लगे। भाभी को अजीब सा नशा चढ़ने लगा। वो मदहोश होने लगीं। भैया धीरे से भाभी के चूतड़ों के नीचे आ गए और अपनी जीभ से भाभी की चूत को लप-लप कर चाटना शुरू किया।
इससे भाभी की सिसकियाँ और साँसें और गरम और तेज हो गई थीं। फिर भाभी अपनी पीठ के बल लेट गईं और भैया ने आगे वाले हिस्से की मालिश शुरू की। भाभी की दोनों टाँगों को फैलाकर उनकी गोरी, मांसल जाँघों को रगड़कर मालिश किया और अपने अँगूठों से चूत के दोनों सिंहारों का मसाज किया।
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फिर खूब सारी थूक डालकर उनकी चूत पर लेप लगा दिया। फिर अपनी जीभ से चूत को रगड़-रगड़ लाल कर उसके गुलाबी छेद में जीभ अंदर-बाहर करके, उँगली से तेजी से अंदर-बाहर कर चूत को गीला कर चोदने का प्रोग्राम बनाया। भैया बार-बार भाभी की चूत के ठीक बीच ऊपर उगी हुई हल्की काली, घुँघराली झांटों को भी अपने मुँह से होंठों में दबाकर नोचते, जिससे भाभी को बहुत नशा छा जाता।
झांटों के नीचे चूत की सुंदरता देखते ही बनती थी। बड़ा ही सुहावना सीन था जिसे देख मेरा लंड तनकर कुतुब मीनार सा टाइट खड़ा हो गया था और चड्डी में लंड ने पानी भी छोड़ दिया था। मेरा लौड़ा भी खड़ा हो मन में भाभी को चोदने का हो गया। मैंने देखा भैया भाभी के सिर की तरफ टाँगों को कर लेट गए हैं और भाभी की चूत में जीभ से खेल रहे हैं.
और भाभी भैया का 6 इंच लंबा और तीन उँगल मोटा लौड़ा पकड़कर अपनी जीभ से भैया के लंड का गुलाबी सुपाड़ा चाट रही थीं। थोड़ी देर में भाभी ने भैया का लौड़ा मुँह में लिया और शांति के साथ अंदर-बाहर का मजा कर “हम्मम… ओओ… येह” कह हाथ से मजबूती से लंड पकड़कर लंड को पूरा खड़ा कर दिया।
अब भैया ने लंड को भाभी की चूत फैलाकर अंदर डाला और लंड “खप” की आवाज के साथ नरम रेशम सी चिकनी चूत की मखमली गहराई में समा गया। अंदर-बाहर लंड चला। भैया ने भाभी को जन्नत की सैर करवानी शुरू की। फिर भाभी बोली, “अब गांड भी तो मारो।”
इतना सुनने पर भैया ने भाभी की चूत से लंड को निकालकर गांड के छेद पर लगाया, धक्का दिया। गांड की धुनाई कर भैया 3-4 मिनट में झड़ गए। उनके लंड से गरम वीर्य का फव्वारा देख मेरा भी लौड़ा भीग आया। पर क्या करता, दबे पाँव वापस आकर सोना पड़ा। बड़ी मुश्किल से रात कटी।
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अब मैंने भी भाभी की गांड मारने की सोची। कुछ दिन बाद मौका मिल गया। एक दिन मैं अचानक भाभी के बेडरूम में जा घुसा। भाभी नहाकर तौलिए में लपेटकर निकली थी। वो मुझे देखकर समझ तो गईं कि इस लड़के को मेरी चूत चाहिए पर मुस्कुराकर बोलीं, “आज घर में कोई नहीं है, सब शादी में गए हैं, कल तक हम दोनों अकेले हैं इस घर में।”
मैंने कहा, “जानता हूँ, भाभी आप बहुत सुंदर हो।”
“आज इतनी तारीफ क्यों?” भाभी ने मुस्कुराकर कहा।
“वो भाभी आज मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दो।”
“क्या है तुम्हारी तमन्ना?” भाभी के चेहरे पर एक कातिल हसीना वाली मुस्कुराहट थी।
“आपकी गांड मारनी है। सच भाभी, इतनी खूबसूरत जवान, मदमस्त, भारी-फूली हुई साँचे में ढली गांड, मैंने आज तक नहीं देखी। इतनी मसल है तुम्हारी गांड। गोरी-गोरी गांड के दर्शन करवा दो भाभी, तुम्हारी खूबसूरती की कसम, जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम रहूँगा।” यह कह मैं उनके तौलिए से लिपट गया और उनको अपनी बाहों में उठा लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
भाभी को बाहों में भर, गोद में उठाने से उनका तौलिया निकलकर जमीन पर गिर गया। और वो ब्रा और पैंटी में आ गईं। हल्की गुलाबी ब्रा और पैंटी में वो बहुत ही मदाक लग रही थीं। वो मुस्कुरा उठीं। मैंने भी जल्दी से उनके होंठों को अपने होंठों में कैद किया और 3-4 मिनट तक होंठ अपने होंठों में दबाए रखा।
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जीभ से जीभ लड़ रही थी और थूक का आदान-प्रदान हो रहा था। मैं उनके होंठ चूसता, वो मेरे। बहुत मीठे थे उनके होंठ। गुलाबी, मुलायम और गुलाब की पंखुड़ी की तरह। मैं उनको गोद में ऊपर उठाए था। उनकी दोनों गोरी जाँघें मेरी कमर के इधर-उधर थीं। अब मैंने उनको बिस्तर पर लाकर लिटा दिया और उनको मसाज करने लगा।
भाभी की ब्रा खोल उनकी दोनों बड़ी-बड़ी चुचियाँ पीने लगा। निप्पल्स तो बहुत ही मीठे थे। अपने अँगूठे की चुटकी बनाकर निप्पल्स की मालिश की और फिर सक करता रहा। दोनों बूब्स की अच्छी तरह मर्दन किया जिससे उनकी चुचियाँ टाइट हो फूलकर बड़ी हो गईं और फिर उनकी टोंडी को जीभ से चाटा।
गोल गहरी नाभि महक कर बता रही थी कि कस्तूरी हिरन के समान थी भाभी। भाभी बोलीं, “जल्दी से पैंटी उतारो और चूत को चाटकर चूत की खुजली मिटाओ।” मैंने भी उनकी आज्ञा का पालन एक होनहार देवर की तरह किया और बिना समय गँवाए उनकी चूत की अपनी जीभ से सेवा शुरू कर दी। “हाय यार कितना मजा देते हो… य्य्यययय आह्ह्ह ओओ…” उनको अपनी चूत की खुजली और जलन शांत करवाने में बड़ा मजा मिल रहा था।
मेरी जीभ भाभी की बुर में अंदर-बाहर साँप की तरह आ जा रही थी। लप-लप कर मैं उनकी चूत को गीला कर पूरी रफ्तार से चूत चाटने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उनके चूतड़ ऊपर किए और गांड के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे मैंने उनकी गांड के ऊपर भी अपने प्यार का लेप लगाया। मैं चूत को अपने होंठों में दबाता. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर जीभ बाहर कर गांड के काले छेद पर भी थूक लगाकर हल्के से जीभ से गांड सहला देता जिससे उनकी जवानी को एक करंट लगता। अब मैं लंड को तैयार कर चुका था। मैंने भाभी को कहा, “टाँगें फैला लो ताकि गांड में लंड डालने में आसानी हो।” जोर लगाकर धक्का दिया जिससे लंड गांड के अंदर एडमिट हो गया। बड़े मजा लेकर गांड मारी। फिर मैं नीचे सीधा लेट गया और भाभी सामने की ओर मुँह कर मेरे लंड पर अपनी गांड टिका बैठ गईं। मैंने उनकी गांड को फिर चीरना शुरू किया और पीछे से हाथ बढ़ा दोनों चुचियाँ दबाने लगा।
नीचे गांड की धुनाई करता जाता और पीछे से दोनों बूब्स की मालिश जिससे उनको आराम मिलता। गांड के अंदर-बाहर करने से लंड को एक अलग ही सुख मिल रहा था। साथ ही मैंने अपनी दोनों उँगलियों को सामने चूत के गुलाबी छेद में अंदर डाल चूत की फकिंग भी की जिससे भाभी को दुगना मजा मिल सके और वो जन्नत की सैर का भरपूर आनंद ले सकें। थोड़ी देर बाद मैंने लंड को गांड से खींच लिया और भाभी की बूब्स पर सारा सदका (वीर्य) गिरा दिया। भाभी की गांड की सैर कर मैं उनका गुलाम बन गया। आज भी उनकी गांड मारने जाता हूँ।
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