Mameri Bahan Chudai Kahani
यह कहानी मेरे और मामा की लड़की की है जो करीब एक साल पहले हुई। पहले मैं उसकी परिचय करवा दूँ। नाम काजल उम्र बीस साल। बड़ी बड़ी स्तन और कद से ज्यादा बड़े नितंब। मैं अपने मामा के घर पर ही रहता था और मेरी और काजल की बहुत अच्छी दोस्ती थी। Mameri Bahan Chudai Kahani
हम लोग हमेशा एक दूसरे से अपना समस्या साझा करते थे। काजल की स्तनों को देखकर मैं हमेशा उसे चोदने के चक्कर में रहता था लेकिन वह मेरा इशारा समझती ही नहीं थी या फिर समझकर अनजान बनती थी। कई बार जब वह सोती तो मैं चुपके से उसके पास जाकर उसकी स्तनों को सिर्फ हल्के से छूता पर नींद में होने की वजह से वह कुछ प्रतिक्रिया नहीं करती।
एक बार रात को मैं luckily उसके बाजू में सो रहा था और भी कई बच्चे सो रहे थे वहाँ। मैंने धीरे से उसकी स्तनों पर हाथ रख दिया। उसने कुछ नहीं बोला। फिर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैं उन्हें दबाने लगा। अचानक उसकी नींद खुली और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा यह क्या कर रहे हो।
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मेरी तो जान निकल गई। मैं बिल्कुल डर गया। वह उठी मेरा हाथ पकड़ा और सीधे ऊपर वाले कमरे में ले गई और बोलने लगी मैं तुम लड़कों को जानती हूँ तुम लोग क्या चाहते हो चलो जो करना है करो। मैं तो बिल्कुल डर गया था। मैंने कहा मुझसे गलती हो गई माफ कर दो।
थोड़ी देर में वह मान गई और हम फिर वापस आकर अपनी जगह पर लेट गए लेकिन मुझे अभी भी डर लग रहा था कि कहीं वह अपनी माँ से बोल न दे। सो मैं उसके सामने रोने का बहाना करने लगा और कहा कि अब ऐसा नहीं करूँगा। वह बोली ठीक है और मेरा हाथ खुद से पकड़कर अपनी स्तनों पर रख दिया।
मैं यह देखकर खुश हो गया और खूब दोनों स्तनों को दबाया। अब हमारे बीच निकटता बढ़ गई और मैं हमेशा मौका पाकर उसकी स्तनों को खूब दबाता और चाहता कि उसकी सलवार खोलकर उसकी योनि का भी नजारा कर लूँ लेकिन वह कभी भी छूने नहीं देती।
ऐसे ही करते करते मैं मुंबई आ गया और उसकी शादी हो गई। करीब छह महीने के बाद मुझे फिर घर जाना हुआ क्योंकि मेरे पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई थी और घर पर केवल मेरी माँ और पिता ही थे। सो मैं घर पहुँच गया और पिता को अस्पताल में भर्ती कराया और ऑपरेशन हुआ।
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डॉक्टर ने दस दिन तक उन्हें अस्पताल में ही रहने को कहा। सो मेरी माँ भी अस्पताल में ही रहती थी क्योंकि अस्पताल में एक ही आदमी को अनुमति थी तो मुझे घर पर रहना पड़ता था और मेरे खाना बनाने के लिए मेरे मामा ने काजल को मेरे घर भेज दिया क्योंकि वह उस समय अपने मायके में ही आई थी।
जब मैं शाम को घर पहुँचा और उसे अपने घर देखा तो मेरा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह जल्दी से खाना तैयार की और खाकर हम सीधे अपने बिस्तर में चले गए क्योंकि ठंड का मौसम था तो मैं रजाई में घुस गया। कुछ देर बाद वह आई और मेरे पास बैठ गई और बिना कुछ कहे मेरे कंधे पर सिर रखकर रोने लगी।
मैं कुछ समझ नहीं पाया और उसके आँसू पोंछते हुए उससे पूछा कि क्या बात है। तब उसने कहा कि वह अपने पति के साथ खुश नहीं है क्योंकि उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता है और जल्दी ही झड़ जाता है। मैंने कहा चिंता मत करो मैं हूँ मैं तुमको दस दिन तक रात भर संतुष्ट करूँगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
यह सुनकर वह मुस्कुराई और मेरे ही बिस्तर में घुस गई और मेरे शरीर से खेलने लगी। मैं भी उसे बाहों में भर लिया और चूमने लगा। जैसे ही मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से छुआ उसकी आह निकल गई और वह मेरे होंठ को ऐसे चूसने लगी जैसे कितने दिनों से भूखी प्यासी हो।
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मेरा हाथ अब उसकी स्तनों की तरफ था और मैं उन बड़े बड़े स्तनों को ऊपर से हल्के हल्के सहला रहा था और वह एकदम मचल रही थी। फिर मैंने धीरे से उसके कुरते को पीछे से खोला और उसने मेरा पूरा साथ दिया और वह ऊपर में सिर्फ ब्रा में थी।
मैंने ब्रा को ऊपर किया और उसके मस्त स्तनों पर टूट पड़ा। वह भी एकदम मस्त हो रही थी और मेरे बाल पकड़कर नीचे की तरफ दबा रही थी। ऐसा करते हुए मैंने अपना एक हाथ उसके सलवार की तरफ बढ़ाया और उसका नाड़ा खोल दिया और सलवार को उतार फेंका और कच्छी को नीचे किया।
वाह क्या खुशबू आ रही थी। मैंने धीरे से एक उँगली उसके योनि में डाली तो वह एकदम काँप गई। अब मैं उसके स्तनों को चूमते चूमते नीचे आने लगा और उसके नाभि पर गहरा चूमा किया। फिर धीरे से और नीचे आया और जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसके योनि के छेद पर रखा वह एकदम पागल हो गई और अपना नितंब ऊपर कर दिया।
मैंने अपनी जीभ उसके योनि में डाली और जीभ से संभोग करने लगा। वह एकदम से पागल हो रही थी और जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी। मैं ऐसे करीब पाँच मिनट तक करता रहा और साथ साथ उसके स्तनों को भी दबाता रहा। पाँच मिनट बाद उसने मेरे सिर को जोर से दबाया और नितंब ऊपर उठाया।
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मुझे लगा अब यह झड़ने वाली है और फिर उसके योनि से मानो नदी निकली हो इतना पानी निकला। मेरा पूरा मुँह भर गया और उसकी जाँघें और योनि पूरी तरह से गीली हो चुकी थीं। वह एकदम शांत हो गई। अब मैं ऊपर आया और अपना लंड उसके हाथों में देते हुए कहा अब तुम्हारी बारी है।
वह मेरे लंड को हाथों में लेकर खेल रही थी और मेरा तो हालत खराब हो रहा था। मेरा लंड एकदम कुतबमीनार की तरह खड़ा था। मैं और ऊपर उठा और बिना कुछ कहे मैंने अपना लंड उसके मुँह में ठेल दिया। वह एकदम परेशान हो गई लेकिन समझ गई और मेरे लंड को प्यार से चूसने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तकरीबन दस मिनट उसके मुँह को चोदने के बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया। हम दोनों थक गए थे। दस मिनट आराम करने के बाद फिर मैं उसके स्तनों को हाथों में लेकर मसलने लगा और मुँह में लेकर चूसने लगा। पाँच मिनट में ही वह फिर तैयार हो गई और मेरा लंड अब चोदने को एकदम तैयार था।
मैं उसके दोनों जाँघों के बीच में आया और जाँघों को अपने कंधे पर रखकर अपना लंड उसके योनि पर रगड़ने लगा। वह एकदम पागल हो रही थी और जैसे मुझसे भीख माँग रही हो प्लीज अब डाल दो। मैं उसे और रगड़ते देखना चाह रहा था। फिर मैंने अचानक एक जोर का झटका मारा और उसके मुँह से चीख निकल गई। मेरा आधा लंड उसके योनि में जा चुका था और उसकी आँख से आँसू निकलने लगे थे।
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उसका योनि बहुत ही गरम और टाइट था। मैं वैसा ही रुका रहा और उसके होंठों को चूसने लगा। फिर एक और झटका मारा तो मेरा छह इंच का लंड उसके योनि में समा गया और उसे बहुत दर्द हो रहा था। फिर मैं धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। थोड़ी ही देर में वह मेरा साथ देने लगी और अपना नितंब ऊपर नीचे करने लगी। और जोर से चोदो और जोर से कहने लगी। मैं भी पूरे जोश में उसे चोद रहा था। मैं उसे करीब पंद्रह मिनट तक चोदता रहा। इस बीच वह दो बार झड़ चुकी थी।
और उसका योनि एकदम गीला और गरम हो चुका था और फच फच की आवाज आ रही थी। पंद्रह मिनट के बाद मैं भी अब झड़ने वाला था। उसने कहा अंदर ही झड़ जाओ और मैं जोर से धक्का मारते हुए अंदर ही झड़ गया और साथ में वह भी झड़ गई। फिर हम करीब दस मिनट तक एक दूसरे के शरीर पर पड़े रहे और एक दूसरे के अंगों से खेलते रहे। उस रात मैंने उसे चार बार चोदा था। अगले दिन मैंने उसे उसकी गांड़ मारने के लिए कैसे राजी किया यह आपके प्रतिक्रिया मिलने के बाद अगली कहानी में बताऊँगा।
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