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मोटे लंड की शौक़ीन माँ बेटी की कहानी

जुलाई 1, 2026 by hamari Leave a Comment

Long Incest Sex Story

आशा जब बीस साल की थी तब उसकी शादी अजीत से दस साल पहले हुई थी। शुरू-शुरू में उसकी सुहागन की जिंदगी और उसकी चूत की चुदाई ठीक-ठाक चल रही थी। अजीत उसकी चूत को हर रोज सुबह और रात को खूब जमकर चोदता था और इससे आशा को चूत भी संतुष्ट थी। Long Incest Sex Story

लेकिन कुछ सालों के बाद अजीत कमजोर पड़ने लगा और ठीक से आशा की चूत को चोद नहीं पाता था। घंटों उसका लंड चूसने पर उसका लंड खड़ा होता था और लंड खड़ा होते ही वह जल्दी-जल्दी आशा की चूत में डाल चोदने लगता था ताकि उसका लंड फिर से मुरझा न जाए।

इससे आशा की चूत भूखी रह जाती थी और हमेशा लंड की ठोकर मांगती थी। वह अजीत के सामने अपनी चूत में उंगली डालकर अपनी चूत को शांत करने का नाटक करती थी। आशा अपनी जवानी को ऐसे ही बर्बाद नहीं करना चाहती थी और वह अपनी चूत में एक मोटा और लंबा लंड से चुदवाने के लिए तरसती थी।

कुछ दिनों तक तो आशा चुपचाप थी पर उसकी चूत उसे शांत नहीं रहने देती थी और एक दिन वह नरेंद्र से मिली। शुरू-शुरू में तो आशा नहीं चाहती थी कि वह नरेंद्र के सामने अपनी साड़ी उठाए और उससे अपनी चूत चुदवाए, लेकिन आशा अब बिना चूत में लंड लिए जी नहीं सकती थी और इसलिए आशा ने नरेंद्र से अपनी चूत चुदवाना शुरू कर दिया और यह बात अजीत से छुपा रखी।

आशा को नरेंद्र से चुदवाना धीरे-धीरे पसंद आने लगा और उसके मन में इससे कोई ग्लानि नहीं थी क्योंकि उसके माँ-बाप यही करते थे। आशा के माँ-बाप अपने एक छोटे भाई (बाप का भाई) के साथ रहते थे। अपनी छोटी उम्र से ही आशा और उसकी बहन यह जानती थीं कि उनकी माँ अपने देवर और अपने पति से अपनी चूत मरवाती है।

दोनों बहनें रोज दोपहर को, जब उनके पिताजी खेत पर काम रहे होते, अपने चाचा को माँ के बेडरूम में जाते देखती थीं। जब दोनों बहनें कुछ बड़ी हुईं और समझदार हुईं तो उन्होंने दरवाजे की झिरी से अंदर झाँकने का सोच लिया। जब वे बहनें अंदर झाँकीं तो उन्हें पहली बार यह मालूम हुआ कि अंदर क्या चल रहा है।

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अंदर उनकी माँ और चाचा दोनों नंगे थे और चाचा उनकी माँ के ऊपर उल्टे लेटकर अपना चूतड़ ऊपर-नीचे कर रहे थे। बाद में उन्हें मालूम पड़ा कि जो कुछ भी उन्होंने देखा था वह माँ और चाचा की चुदाई थी। कभी वे देखती थीं कि उनकी माँ चाचा का लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही है। यह देखकर उन बहनों को बहुत मज़ा आता था।

कभी-कभी उन्होंने देखा कि चाचा उनकी माँ की चूत को चोदने से पहले अपने जीभ से चाट रहा है और अपने होठों में भरकर चूस रहा है। रात को वे बहनें अपनी माँ की चूत की चुदाई अपने बाप के लंड से होते देखा करती थीं। कभी-कभी उनकी माँ अपने पति से चुदवाकर अपनी चूत को धोकर उनके चाचा के कमरे में चली जाती थीं और फिर वे दोनों फिर से चुदाई करने लगते थे।

चुदाई के बाद उनकी माँ फिर से अपनी चूत धोकर उनके पिताजी के पास जा कर सो जाया करती थीं। उन बहनों को अपनी माँ, पिताजी और चाचा की चुदाई देख-देखकर काफी कुछ जानकारी हो गई थी और कुछ दिनों के बाद वे एक-दूसरे से खेलने लगीं थीं। वे अपने कम्बल के नीचे एक-दूसरे की चुन्चियों और चूत से खेला करती थीं।

वे एक-दूसरे की चूत को चाटा और चूसा भी करती थीं और इससे उन्हें बहुत मज़ा मिलता था। लेकिन एक दिन उनकी माँ ने उन्हें यह सब करते देख लिया और उनको सेक्स के बारे में सब कुछ समझा दिया। उनकी माँ ने बताया कि जब वे छोटी थीं तो वे बहुत चुदक्कड़ थीं।

अपनी शादी के बाद से ही उनके ससुरजी ने बता दिया था कि उनका आदमी चुदाई में कमजोर है और इसलिए वे अपने देवर से अपनी चूत चुदवा सकती हैं। इसमें कोई पाप नहीं है क्योंकि उनके पति का लंड कमजोर है और उनकी चूत की गर्मी को पूरी तरह से शांत नहीं कर सकता है।

“मुझे इस बात पर खुशी है कि तुम दोनों भी हमारे रास्ते पर चल रही हो। मुझे तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा तगड़ा सा पति ढूँढना पड़ेगा। लेकिन फिलहाल तुम दोनों अपने आप को शांत करना पड़ेगा। अब से मैं तुम दोनों को मेरी चूत की चुदाई देखने के लिए अपना दरवाजा थोड़ा सा खुला रखूँगी। तुम दोनों खुलकर मेरी चूत की चुदाई देख सकती हो और हर काम ठीक से समझ सकती हो,” उनकी माँ ने उनसे कहा।

उस दिन के बाद से वे बहनें बिना झिझक और डर के खुल्लमखुल्ला अपनी माँ की चूत की चुदाई देखा करती थीं। उनकी माँ और पिताजी अपने कमरे में ऐसे एक-दूसरे को चोदते थे जैसे कि वे चुदाई का नुमाइश लगा रखा हो। अक्सर वे अपने कमरे की लाइट बिना बुझाए ही चुदाई करते थे।

दोनों बहनें अपनी माँ और पिताजी की चुदाई देख-देखकर एक-दूसरे की चूत में उंगली डालकर एक-दूसरे की चूत को उंगलियों से चोदा करती थीं और अपनी-अपनी मस्ती झाड़ा करती थीं। उनके चाचा बहुत चुदक्कड़ थे और वे उनकी माँ को कई तरह से — आगे से, पीछे से, अपने गोद में बिठाकर, लेटकर, कुतिया बनाकर — चोदते थे और उनकी चुदाई काफी लंबे समय तक चलती थी।

उनकी माँ अपने देवर से अपनी चूत चुदवाते वक्त तरह-तरह की आवाज निकालती थीं और बहुत बड़बड़ाती थीं। उनकी माँ की चूत में जैसे ही उनके चाचा का लंड घुसता था तो उनकी माँ अपने दोनों हाथ और पैरों से अपने देवर को बाँधकर अपनी चूतड़ उछाल-उछालकर अपनी चूत में लंड पिलवाती थीं, और उनका चाचा उनकी माँ की चुन्चियों को पकड़ चूसता और अपना चूतड़ उठा-उठाकर अपनी भाभी की चूत में लंड पेलता था।

जब उनका चाचा झरकर अपने बीर्य से उनकी चूत को भर देता था तो उनकी माँ भी झरकर शांत हो जाया करती थीं। आशा अपने मन ही मन में यह जान चुकी थी कि एक औरत एक से ज्यादा आदमियों के लंड से अपनी चूत चुदवा सकती है। जब अजीत का लंड आशा की चूत की गर्मी शांत करने के काबिल नहीं रहा तो आशा ने यह बात अजीत को भी समझा दी थी।

अजीत अपने 15 साल की उम्र में अनाथ हो गया था। अजीत को उसके चाचा-चाची ने अपने गाँव में ले जाकर पाल-पोसकर बड़ा किया। उनके चाचा-चाची को शादी के कई साल बाद भी कोई संतान नहीं थी। अजीत के पिताजी की जमीन बटाई पर कोई दूसरा आदमी जोतता था।

अजीत के चाचा को अजीत के हिस्से की जमीन पर ज्यादा दिलचस्पी थी और अजीत पर कम। उसकी चाची बहुत कोमल हृदय की औरत थी और वह अजीत का हर तरह से देखभाल किया करती थी। बाद में अजीत को पता चला कि उसकी चाची को उससे प्यार भी था।

अजीत के चाचा-चाची एक छोटे से एक कमरे वाले मकान में रहते थे। वह हॉल में सोता था, उसकी चाची कमरे के अंदर सोती थीं और उसका चाचा बाहर वरांडे में सोता था क्योंकि अंदर कमरे में बहुत गर्मी हुआ करती थी। एक रात अजीत को गर्मी से परेशान नींद नहीं आ रही थी और उसने देखा कि उसका चाचा उठकर चुपचाप उसकी चाची के कमरे में जा रहे हैं।

चाचा अंदर कमरे में जाकर चुपचाप चाची के पास लेट गए और धीरे से उनको जगा दिया। उन लोगों ने अपने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया था क्योंकि वे लोग सोच रहे थे कि अजीत अपनी गहरी नींद में सो रहा होगा। कमरे में एक हल्की सी लाइट जल रही थी और उसकी रोशनी में अजीत को कमरे के अंदर सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था।

चाचा ने जमीन पर चाची के पास बैठकर उनके कपड़ों को उतारना शुरू कर दिया। उन्होंने पहले चाची की ब्लाउज को फिर ब्रा उतार दी। चाची खड़ी हो गई और अजीत अपनी चाची की नंगी चुन्चियाँ देख रहा था। फिर उसके चाचा ने चाची की साड़ी को उठाकर उसके अंदर घुस गए और कुछ करने लगे।

चाची उसके चाचा का साड़ी से ढका सर पकड़कर अपनी चूतड़ हिला रही थी। फिर चाची ने धीरे से अपनी साड़ी उतारकर पूरी तरह से नंगी हो गई। अजीत को यह देखकर बहुत ताज्जुब हुआ कि उसका चाचा अपनी बीवी की चूत पर मुँह लगाकर उसकी झांतों से भरी चूत चाट रहा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

कुछ मिनटों के बाद चाचा ने अपनी बीवी को अपने पास जमीन पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गए। ऊपर चढ़ने के बाद चाचा ने अपना चूतड़ ऊपर-नीचे करने लगे। अजीत ने पहले से ही सेक्स के बारे में सुन रखा था लेकिन आज वह पहली बार चूत की चुदाई देख रहा था।

जल्दी ही उसके चाचा शांत हो गए और थोड़ी देर के बाद उठकर बाहर वरांडे में सोने के लिए चले गए। चाची थोड़ी देर के बाद बड़बड़ाकर बाथरूम में गई और फिर नंगी ही वापस आ गई। चाची नंगी ही अपने बिस्तर पर लेटकर अपने पैरों के बीच कुछ करने लगी।

उनकी हाथ अपने पैरों के बीच बहुत जोर-जोर से हिल रहा था और थोड़ी देर के बाद चाची शांत होकर लेट गई। फिर चाची मुँह करके अजीत की तरफ अपनी चूतड़ करके नंगी ही सो गई। अपनी चाची की नंगी चूतड़ देख-देखकर और यह सोचते हुए कि उसने अभी-अभी क्या देखा, अजीत अपने लंड पर हाथ फेरने लगा और थोड़ी देर के बाद झरकर सो गया।

अगले दिन अजीत की चाची ऐसा बर्ताव किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। यह सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा और अजीत अपने चाचा और चाची की चुदाई देखता रहा। लेकिन एक दिन जब अजीत के चाचा गाँव से बाहर गए थे तो चाची ने अजीत से पूछा, “क्यों तुम रोज रात को हमारी करवाई देख-देखकर मज़ा लूटते हो? मैं सोच रही हूँ कि मैं यह बात तुम्हारे चाचा से कह दूँ,” चाची ने अजीत से कहा।

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अजीत डर गया और अपनी चाची से यह सब बात चाचा से न कहने के लिए बोला। “चाचा मुझे बहुत मारेंगे और मुझे अपने घर से निकाल देंगे। मेरे पास और कोई ठिकाना नहीं है, मैं कहाँ जाऊँगा? चाची प्लीज चाचा से यह बात मत कहना।” “ठीक है, मैं नहीं बोलूँगी, लेकिन मैं कहूँ वैसे ही करना पड़ेगा, ठीक है?” चाची ने अजीत से कहा। “तुम जो भी कहोगी, मैं वैसे ही करूँगा,” अजीत ने अपनी चाची से कहा।

“अजीत तुम तो जानते ही हो कि तुम्हारा चाचा जल्दी-जल्दी से अपना काम खत्म करके सोने चला जाता है और मैं कैसे अपने आप को अपनी उंगली से शांत करती हूँ। अब मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे जहाँ-जहाँ कहूँ शांत करो। समझ गए?” चाची ने अजीत से कहा। “हाँ चाची मैं सब कुछ समझ गया, लेकिन मैं कुछ नहीं जानता हूँ,” अजीत ने धीरे से अपनी चाची से कहा। “मैं तुझे सब कुछ अभी आज से समझा दूँगी,” चाची अजीत से बोली।

फिर चाची ने अजीत को अपने कमरे ले गई। जमीन पर चटाई बिछाई और उसपर दो तकिए लगा दिए। अब वह अजीत के सामने खड़ी हो गई और अपनी ब्लाउज उतारने को बोली। अजीत बहुत घबराया हुआ था और उसका हाथ ब्लाउज के हुक खोलते वक्त काँप रहा था। अजीत का डर देखकर चाची ने उसको धीरे-धीरे बातों से समझाया और फिर अपने बाहों में भर लिया।

चाची ने तब अजीत को अपनी ब्लाउज के हुक खोलने में मदद करने लगी और फिर अपना ब्लाउज उतार दिया। फिर वह मुँह करके खड़ी हो गई और अपनी ब्रा की हुक खोलने के लिए बोली। जब ब्रा की हुक खुल गई तो चाची फिर से अजीत के सामने हो गई और अपने दोनों हाथों से अपनी चुन्चियाँ और ब्रा पकड़कर खड़ी हो गई और धीरे से अपना ब्रा उतार दिया।

अजीत मुँह बाए और फटी-फटी आँखों से अपनी चाची की नंगी चुन्चियाँ देखने लगा। यह पहला मौका था कि अजीत किसी औरत की नंगी चुन्चियाँ देख रहा था और वह भी अपनी चाची की चुन्चियाँ। “तुम्हें ये चुन्चियाँ पसंद हैं?” चाची ने अपनी दोनों चुन्चियों को अपने हाथों से उठाते हुए अजीत से पूछा। “लो इनको छूकर देखो, इनसे खेलो,” चाची ने अपनी चुन्चियाँ अजीत के हाथों में थमाते हुए बोली।

चाची देख रही थी कि अजीत कुछ हिचकिचा रहा है। फिर चाची ने अजीत के हाथों को पकड़कर अपनी चुन्चियों से लगा दिया। अजीत उन चुन्चियों की गर्मी और कड़ापन से उत्तेजित होकर उन चुन्चियों से खेलने लगा। अजीत उन चुन्चियों के निप्पल को पकड़ देखने लगा। चाची ने अजीत का सर पकड़कर उसके चेहरे से अपनी चुन्चियाँ रगड़ दीं और बोलने लगी,

“अजीत मेरी चुन्चियों को चूसो, जैसा एक बच्चा माँ का दूध पीता है वैसे ही तुम मेरी चुन्चियों को चूसो।” अजीत को जैसा बोला गया वो करने लगा। पहले उसने निप्पल को अपने मुँह में लिया फिर थोड़ी सी चुन्ची अपने मुँह में भरकर जोर-जोर से चूसने लगा। फिर चाची ने अपनी दूसरी चुन्ची उसके मुँह से लगाकर बोली, “अब तुम दूसरी चुन्ची को भी चूसो।”

“अब मेरी साड़ी उतारो,” चाची ने अजीत से बोली। “और मैं तुम्हें अपनी झांतों से भरी चूत दिखाऊँगी। मैं तुम्हें सब कुछ दिखाऊँगी। मैं तुम्हें आसमान की सैर करवाऊँगी।” अजीत ने तब अपनी चाची की साड़ी और फिर उनकी पेटीकोट उतार दी। चाची ने अपना चूतड़ हिला-डुलाकर अपनी पेटीकोट उतार दी और अपनी नंगी शरीर लेकर अजीत के सामने खड़ी हो गई।

फिर चाची ने अजीत का पाजामा और उसका अंडरवीयर उतारकर उसको भी अपनी तरह नंगा कर दिया। अजीत अपनी चाची के सामने नंगा होकर खड़ा होने से शर्मा रहा था। लेकिन उसका लंड अब तक खड़ा हो चुका था और अपना सिर हिला-हिलाकर चाची की चूत को अपने पास बुला रहा था। चाची ने अजीत के खड़े लंड को अपने हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा।

“वाह, तुम्हारा लंड तो तुम्हारी उम्र से कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है। क्यों है न?” चाची बोली। फिर चाची झुककर अजीत के लंड को अपने होठों से लगा कर चूमी और फिर मुँह में भर लिया और उस पर अपनी जीभ फिराने लगी। थोड़ी देर अजीत के लंड पर अपनी जीभ फिराने के बाद चाची बोली, “चलो तुम्हारा क्लास अभी से शुरू किया जाए।”

चाची जमीन पर बिछी चटाई पर लेटकर अपने पैरों को फैला दी और अजीत को अपने पाँव के बीच में बैठने के लिए बोली। अपने चूतड़ के नीचे एक तकिया रखने के बाद चाची ने अपने जाँघों को और खोल दिया और अजीत से बोली, “और पास आकर मेरी चूत को देखो।”

अजीत का चेहरा अपनी चाची की चूत से करीब चार इंच दूर था और उसके नाक में अपनी चाची की चूत से निकलती हुई सोंधी-सोंधी खुशबू घुस रही थी। चाची ने अपने हाथों से अपनी झांतों भरी चूत को और फैला दिया और अजीत से अपनी चूत के अंदर लाल-लाल हिस्सा देखने के लिए बोली। फिर अपने हाथों से अजीत को अपनी चूत के दाने को दिखाकर उसको चूसने के लिए बोली।

अजीत ने तब अपनी चाची की चूत के दाने को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया और इससे उसको बहुत मज़ा मिलने लगा। चाची ने अपनी चूत के होठों के बीच का हिस्सा भी अजीत से चाटने के लिए बोली। अजीत ने वैसे ही किया। उसने अपनी जीभ अंदर तक डालकर अपनी जीभ घुमा-घुमाकर चूसने लगा। वह गहरी और धीरे-धीरे चाट रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

उसकी चाची कराह उठी। उसने अपने चूतड़ हिला दिए। उसकी चूत के अंदर से मीठा चिपचिपा रस टपक रहा था। अजीत को उसका स्वाद तुरंत पसंद आ गया और वह और गहराई से चाटने लगा ताकि और मिले। उसकी चाची अब और सहन नहीं कर पा रही थी। उसने दोनों मांसल जाँघों से अजीत के सिर को जकड़ लिया और उसके सिर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया, लगभग उसे दम घोंटते हुए।

फिर चाची ने अजीत से चोदने के लिए बोली और अजीत ने अपनी चाची की चूत में अपना लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया। पहले अजीत ने चाची को जमीन पर लेटाकर, फिर उनको कुतिया की तरफ झुकाकर और खुद उनके पीछे से, और फिर खुद जमीन पर लेटकर और चाची को अपने ऊपर चढ़ाकर चोदा। अजीत की जवानी अपने पूरे जोश पर थी।

वह रोज दिन को अपनी चाची की चूत अपने लंड से भगाता था और तब तक चाची को नहीं छोड़ता था जब तक चाची अपनी चूत चुदवाते-चुदवाते थक नहीं जाती। फिर चाची निढाल होकर चुपचाप जमीन पर लेट जाती और अपनी टाँगें फैलाकर अजीत से अपनी चूत पीछे से चोदने को बोलती।

अजीत धीरे से अपना खड़ा हुआ लंड उनकी चूत के अंदर उतार देता था और उनको अपने हाथों में भरकर अपना लंड जितना जा सके उतना डालकर रगड़ के चोदता। वो जैसे ही अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ाता था उसकी चाची गालियाँ बकने लगती, “अरे हरामजादे, क्या तू अपनी चाची को मार ही डालेगा क्या। तेरा लंड तो पूरा गधे का लंड जैसा है। ऐ माँ मैं मरी जा रही हूँ। छोड़ मेरी चूत, निकाल ले अपना लंड, मेरी चूत फटी जा रही है। देख तेरे लंड की धक्के से मेरी गुलाबी चूत काली पड़ चुकी है।”

तब अजीत ने अपना लंड पूरे जोर तक चाची की चूत में डालकर वो झर गया। अजीत झरने के बाद चुपचाप अपनी चाची की पीठ पर लेट गया और महसूस करने लगा कि चाची की चूत से पानी निकलकर उसके अंडों को गीला कर रही है। रात को जब अजीत के चाचा अपनी बीवी को चोदते थे तो अजीत उनके चुदाई अंधेरे में लेटकर देखता था और अपने लंड पर हाथ फेरता था।

जब चाचा अपनी बीवी को चोदकर वरांडे में सोने के लिए चले जाते थे तब चाची अजीत को अपने कमरे में बुला लेती थी और उससे अपनी चूत को फिर से चोदने के लिए बोलती थी। अजीत उस समय जब अपनी चाची को चोदता था तो अपने चाचा का बीर्य चाची की चूत से निकलकर उसके अंडों और जाँघों पर फैल जाता था।

यह चाची और भतीजे की चुदाई का किस्सा बहुत दिनों तक चलता रहा लेकिन एक दिन अजीत और उसकी चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया। चाचा ने अजीत को इसके लिए बहुत मारा और अजीत को अपने घर से अगले दिन निकाल दिया।

चाचा ने अपनी बीवी को भी बहुत लताड़ा लेकिन उसने जो सुख अपनी चूत को दिए हैं यह सोचकर चाचा ने चाची को घर से नहीं निकाला। अजीत पर तरस खाकर और जो सुख अजीत ने अपने लौड़े से चाची की चूत को दिया है यह सोचकर चाची ने अजीत को ढेर सारा रुपया-पैसा चुपके से दे दिया। अजीत अपने गाँव वापस आ गया और अपनी खेती संभालने लगा।

थोड़े दिनों के बाद अजीत की शादी आशा के साथ हो गई। शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक-ठाक था और जब भी वो चाहता था वो आशा को पकड़कर उसके कपड़े खोलकर उसको चोद लेता था। लेकिन आशा बहुत ही कामुक औरत थी और इसलिए उसकी चुदाई की भूख बहुत ज्यादा थी और वो भूख उससे शांत नहीं होती थी।

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समय के साथ-साथ अजीत का लंड ढीला पड़ गया और वो आशा की चूत की गर्मी शांत करने के काबिल नहीं रहा। अजीत ने बहुत कोशिश की, आशा ने भी अजीत को काफी मदद की, लेकिन अजीत का लंड अब थक चुका था। इसके तीन साल बाद आशा की मुलाकात नरेंद्र से हो गई।

शुरू-शुरू में आशा ने अपनी नरेंद्र के साथ चुदाई की कहानी अजीत से छुपाकर रखी। आशा और नरेंद्र कभी-कभी मिलते थे और आशा अपनी चूत की भूख नरेंद्र के मोटे और लंबे लंड से चुदवाकर शांत कर लेती थी। आशा को नरेंद्र की जरूरत सिर्फ अपने चूत में उसके लंबे और मोटे लंड के लिए थी। यह नरेंद्र के साथ चुदाई आशा ने आनंद से मिलने तक जारी रखी।

आनंद से मुलाकात के कुछ ही दिनों के बाद अजीत ने आशा और आनंद को अपने कमरे के दरवाजे की झिरी से देख लिया। अजीत को आशा और आनंद की चुदाई देखकर अपने पुराने जमाने की बात याद आ गई। वो जब आशा को आनंद के लंड के मजे ले-लेकर चुदवाते देखा तो उसके लंड में भी कुछ-कुछ होने लगा और थोड़ी देर के बाद उसका लंड भी तनकर खड़ा हो गया।

बाद में जब आशा अपनी चूत आनंद से ठुकवा कर वापस अपने कमरे में सोने के लिए आई तो अजीत ने आशा को अपने बाहों में जकड़ लिया और आशा को नंगा करके उसकी चूत पर बुरी तरह से पिल पड़ा और काफी देर तक आशा को चोदता रहा। आशा अपने पति की चुदाई से बहुत दिनों के बाद खुश हुई।

जब अजीत और आशा की जबरदस्त चुदाई की गर्मी शांत हो गई तब अजीत ने आशा को कहा कि कैसे वो आशा और आनंद की चुदाई देख-देखकर गरम हो गया था और उसका लंड खड़ा हो गया था। उस दिन के बाद से अजीत और आशा का यह सिलसिला चलता रहा। अजीत अपनी बीवी की चूत की ठुकाई आनंद से होते देखकर उसका लंड खड़ा हो जाता था और फिर आनंद के जाने के बाद अजीत अपना खड़ा लंड आशा की चूत में पेलता था।

फिर अजीत और आशा ने आनंद को अपने घर पर एक कमरा दे दिया रहने के लिए। उन्होंने आनंद से घुमा-फिराकर उसका आशा के साथ चल रहा चुदाई का मामला अपना लेने की बात बोल दी और यह भी बोल दिया कि अजीत को इससे कोई एतराज नहीं है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

“तुमको मेरे घर से रोज रात को घुसना और आधी रात को निकलना देख सकता है और यह बात अच्छी नहीं है। इसलिए हम लोगों के पास तुम्हारे लिए एक सुझाव है। अगर तुम मानो तो,” आशा ने आनंद से कहा।

आनंद अजीत और आशा को कुछ आश्चर्य से देखता रहा और सोचता रहा कि इससे और क्या आश्चर्य की बात हो सकती है इस समय हम तीनों लोग नंगे एक कमरे में बैठे हैं और इसकी चिंता किसी को भी नहीं है।

“आशा की एक छोटी बहन है जो कि आशा से 5 साल छोटी है, अगर तुम चाहो तो हम उससे तुम्हारी शादी करवा सकते हैं। इस तरह से तुम हमारे घर में रह सकते हो और इससे किसी को भी कोई एतराज नहीं होगा,” अजीत ने आनंद से बोला।

“आशा कल ही अपने घर जा सकती है और तुम्हारी शादी की बात पक्की कर सकती है।” “यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मुझे कोई एतराज नहीं है। लेकिन क्या आशा की बहन इस शादी के लिए राज़ी होगी?” आनंद ने अजीत से पूछा।

“तुम घबराओ मत। मैं खुद अपनी साली को मना लूँगा। यह तो तुम जानते ही हो कि हम लोगों का परिवार बहुत घुला-मिला है। मेरी साली मेरी बात मान जाएगी। खासकर मैं जब उसको हम लोगों का प्लान बताऊँगा। मैं अपनी साली को भी अपने प्लान में शामिल करना चाहता हूँ,” आशा ने आनंद का हाथ अपने हाथों में पकड़कर बोली।

“मैं अपनी छोटी बहन को अपने साथ कुछ दिनों के लिए साथ रहने के लिए बुलाऊँगी और धीरे-धीरे उसको भी अपने खेल में शामिल कर लूँगी,” आशा ने कहा।

इस तरह से आशा अगले दिन ही अपने मायके चली गई और दो दिनों के बाद अपनी बहन को साथ लेकर लौटी। आशा की बहन हालाँकि आशा से 5 साल की छोटी थी लेकिन उसका रूप-रंग और कद-काठी बिल्कुल आशा जैसी थी।

“यह रेखा है,” आशा ने अपनी बहन की मुलाकात आनंद से उसी दिन शाम को करवा दी, “और यह आनंद है, जिसके बारे में मैं तुझको पहले ही बताया था।” रेखा आनंद को शर्मीली आँखों से देखती रही।

आनंद सोचता रहा कि आशा ने अपनी बहन को कितना बता चुकी है। वे लोग रेखा के रहने तक अपना काम-क्रम बंद रखा। रेखा धीरे-धीरे आनंद से घुल-मिल गई और उसने अपनी दीदी से आनंद से शादी करने की हामी भर दी। यह सुनकर सब लोग बहुत खुश हो गए और आशा अपनी बहन की शादी की तैयारी में लग गई।

आशा के माता-पिता भी इस बात पर खुश थे कि उनकी बेटी के लिए एक सरकारी नौकर मिल गया और दोनों बहनें एक साथ एक ही गाँव में रहेंगी। आनंद और रेखा की शादी बहुत धूमधाम से हुई। उनके सारे परिवार के लोग शादी में शामिल हुए और खूब दावत उड़ाई।

धीरे-धीरे सारे परिवार के लोग शाम को नए दुल्हा और दुल्हन को आशीर्वाद देकर अपने-अपने घर वापस चले गए। रेखा के माता-पिता भी शाम को बेटी और दामाद को आशीर्वाद देकर अपने गाँव वापस चले गए। जैसा कि रीति और रिवाज है, आनंद और रेखा की सुहागरात अजीत के घर में होना था।

आशा अपनी बहन की सुहागरात के लिए सारी तैयारियाँ कर चुकी थी। रेखा को नहला कर उसके शरीर पर अच्छा सा scent लगाया गया और उसको सजाया गया। आनंद और रेखा ने फिर रात का खाना खाया और आशा नए दुल्हन को अंदर के कमरे ले गई।

कमरे में आनंद पहले से ही अपनी पत्नी के लिए इंतजार कर रहा था। कमरे में बीचोबीच एक बड़ा सा बिस्तर लगा हुआ था। कमरे के अंदर एक बड़ा सा दिया जल रहा था और उसकी रोशनी से पूरा कमरा साफ-साफ दिख रहा था। आनंद बिस्तर पर बैठा था और बिस्तर पर बेला के फूल फैले हुए थे।

जैसा कि रिवाज है, रेखा ने आनंद को दूध पीने के लिए दूध से भरा गिलास थमाया। आनंद ने रेखा को खींचकर अपने पास बिठा लिया। फिर आनंद ने गिलास से थोड़ा सा दूध पीकर गिलास को रेखा के मुँह से लगा दिया। रेखा शर्माती हुई गिलास से दूध पीने लगी। फिर आनंद ने गिलास रखकर रेखा को अपने बाहों में भर लिया और उसकी गाल पर चुम्मा दे दिया। रेखा पहले तो शरमाई पर फिर उसने भी आनंद के चुम्मे के जवाब में चुम्मा देना शुरू कर दिया।

रेखा को अपने शरीर में कुछ अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी। हालाँकि रेखा को मालूम था कि सुहागरात में क्या होने वाला है और उसने अपनी माँ और अपने पिताजी या अपने चाचा की चुदाई भी देख रखी थी फिर भी रेखा कुछ-कुछ घबरा रही थी।

यह रेखा के लिए पहली बार था। रेखा को आनंद का अपने चुन्चियों पर जाते ही बहुत अच्छा लगा। आनंद थोड़ी-थोड़ी देर में रेखा की होठों की चुम्मा ले रहा था। रेखा ने अपने आप को आनंद के हाथों में सौंप दिया और आनंद जो भी कर रहा था रेखा को अच्छा लग रहा था।

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आनंद ने रेखा की साड़ी की पल्लू को धीरे से हटाया और उसकी ब्लाउज के अंदर चुन्चियाँ तनकर दिखने लगीं। आनंद तब धीरे-धीरे रेखा की ब्लाउज की हुक खोलने शुरू किया। रेखा ने आनंद को अपनी ब्लाउज की हुक खोलने में मदद की। रेखा अपने ब्लाउज के नीचे काले रंग का ब्रा पहने हुए थी।

रेखा की चुन्चियाँ ब्रा के अंदर से फट पड़ रही थीं और यह देखकर आनंद बहुत उत्तेजित हो गया। आनंद पहले तो रेखा के ब्रा के ऊपर से चुन्चियों पर हाथ फेरता रहा और इससे रेखा के शरीर में करंट दौड़ने लगा। आनंद ने तब ब्रा का हुक भी खोल दिया और चुन्चियों पर से ब्रा को हटा दिया।

अब रेखा की चुन्चियाँ बिल्कुल नंगी हो गई थीं। आनंद उन नंगी चुन्चियों को देख पागल सा हो गया और उनको बुरी तरह से मसलने लगा। रेखा पानी चुन्चियाँ मसलने से “ओह! ओह! आह! हाँ हाँ दबाओ, मेरी चुन्चियाँ और दबाओ” बोलने लगी।

आनंद ने फिर रेखा को बिस्तर पर लिटा दिया और रेखा की चुन्चियों के दोनों निप्पल को अपने मुँह में भरकर बारी-बारी से चूसने लगा। रेखा की निप्पल जो कि चुन्ची मसलने ही तन गई थी अब चूसाई से फूल गई। आनंद ने अपनी रेखा की एक चुन्ची जितना भर सकता था भरकर मसलने लगा। रेखा अपने हाथों से आनंद का सर पकड़ अपनी चुन्ची पर दबाने लगी।

आनंद ने तब अपना हाथ रेखा की जाँघों के तरफ बढ़ाया। उसने रेखा की जाँघों को पहले साड़ी के ऊपर से सहलाया और फिर अपना हाथ साड़ी को उठाकर रेखा की गरम-गरम जाँघों पर हाथ फेरने लगा। रेखा ने अपनी जाँघों को और फैला दिया और आनंद के हाथ को अपने हाथों से पकड़कर अपनी जाँघों पर दबाने लगी। थोड़ी देर के बाद आनंद का हाथ रेखा की चूत पर चला गया।

अपना हाथ चूत पर पहुँचते ही आनंद ने चूत को अपने हाथ से पकड़ लिया और एक हाथ से ही उसको मसलने लगा। रेखा की चूत पर काफी झांते थीं और इस समय वो बहुत गीली हो चुकी थी। अब तक आनंद का लंड धोती के अंदर खड़ा होकर रेखा की चूत में घुसने के लिए बेचैन हो रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

रेखा ने अपनी जाँघों को और फैलाकर अपने पैर मोड़ लिए और इससे आनंद को रेखा की चूत से खेलने के लिए सुविधा हो गई। आनंद ने अपना एक उंगली रेखा की चूत में घुसाना चाहा लेकिन रेखा ने अपने हाथों से अपनी चूत ढँक ली। फिर उसने रेखा को साड़ी उतारने के लिए बोला और जब तक रेखा अपनी साड़ी उतारती आनंद ने अपना धोती और अंडरवीयर उतारकर पूरी तरह से नंगा हो गया।

जैसे ही रेखा अपनी साड़ी उतारकर आनंद की तरफ नंगी हुई तो उसकी आँखें फटी-फटी रह गईं क्योंकि उसकी आँखों के सामने आनंद का 10 इंच लंबा लंड खड़ा था और उसका लाल-लाल सुपाड़ा भी खुला था। रेखा बिल्कुल चौंक पड़ी और उसके मुँह से “इतना बड़ा! मुझे डर लग रही है! प्लीज, मुझे फाड़ मत देना!” रेखा ने आनंद से बोली।

“नहीं रेखा, डरो मत मैं बहुत संभालकर करूँगा, मैं तुमको चोट नहीं पहुँचाऊँगा,” आनंद ने रेखा को समझाया।

“तुम देखना, यह तुमको बिल्कुल कोई चोट नहीं पहुँचाएगा, तुम बस चुपचाप अपने आप को ढीला करके बिस्तर पर लेट जाओ,” आनंद ने रेखा से बोला।

रेखा बिस्तर पर बैठ गई और आनंद की कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी। आनंद भी रेखा के बगल में बैठ गया और रेखा की एक हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया। रेखा अपना हाथ चौंककर आनंद के लौड़े से हटा लिया जैसे कि वो कोई गरम लोहा छू लिया हो। “इसको अपने हाथों में पकड़कर देखो, फिर तुमको कोई डर नहीं लगेगा,” आनंद ने रेखा को समझाया।

आनंद ने अपने लौड़े का सुपाड़ा खोलकर रेखा से बोला, “देखो रेखा देखो यह कैसे तुम्हारे हाथों से प्यार माँग रहा है। इसको कम से कम एक बार तो अपने हाथों से पकड़कर देखो।” आनंद ने फिर से रेखा का हाथ अपने लौड़े पर रख दिया। रेखा ने इस बार अपना हाथ नहीं हटाया। रेखा ने आनंद के लौड़े को ध्यान से देखा और अपने हाथों से सहलाने लगी।

“यह कितना बड़ा है, मुझे डर लग रहा है कि यह मुझे फाड़ डालेगा,” रेखा ने फिर से आनंद से बोली। फिर रेखा जोर-जोर से डर के मारे रोने लगी।

अपनी बहन की रोने की आवाज सुनकर आशा जल्दी से कमरे के अंदर आ गई और रेखा से पूछने लगी, “क्या बात है रेखा? क्यों? क्या हुआ? तू रो क्यों रही है?” आशा ने रेखा से पूछा।

“मुझे डर लग रही है। इनका वो कितना बड़ा है!” रेखा सुबकते हुए आशा से बोली। रेखा को इस समय इस बात का एहसास भी नहीं था कि उसकी दीदी इस समय उनके बेडरूम में है और वो और उसका आदमी दोनों बिना कोई कपड़े के नंगे हैं।

“रेखा बहुत डरी हुई है, मैं बहुत समझाने की कोशिश किया लेकिन यह अपनी बात पर अड़ी हुई है,” आनंद ने आशा से बोला। “बेवकूफ लड़की। हटो मैं इसको समझाती हूँ,” आशा ने आनंद से बोली और फिर अपने कपड़े उतारने लगी और थोड़ी देर में वो भी अपनी बहन के सामने बिल्कुल नंगी हो गई।

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रेखा अपनी दीदी को फटी-फटी आँखों से देख रही थी और उसको अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था। “दीदी, तुम? मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूँ,” रेखा ने अपनी दीदी से बोली। “बहुत सी ऐसी बातें हैं जो तू नहीं जानती, मैं अभी तुझको सब समझाती हूँ,” आशा ने मुस्कुराकर अपनी बहन से बोली और उसकी गालों पर चुम्मा दिया।

“आनंद तुम इधर हमारे पास आओ, रेखा को सब करके दिखाना है कि कैसे यह सब काम किया जाता है, और तू रेखा तू बिल्कुल चौंक मत, तू बस हम लोगों के काम-काज को देखती जा। हम लोगों के काम-काज को देखने से ही तेरे को यह पता चलेगा कि हम औरत कितना भी बड़ा लंड क्यों न हो अपनी चूत से सब कुछ खा सकती हैं। हाँ कैसे चूत इतने बड़े लंड खा सकती है, तू देखती जा।”

आशा जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेट गई और अपनी टाँगों को फैला दी और फिर आनंद से बोली, “आनंद मेरे पास आओ और रेखा को दिखाओ कि कैसे चुदाई की जाती है।” आनंद यह सुनकर आशा की खुली टाँगों के बीच बैठ गया और आशा की चूत को चाटने लगा। आशा ने तब अपनी टाँगों को और फैला दिया और रेखा को अपने पास बुलाकर नजदीक से और ध्यान से देखने के लिए बोली।

जब आशा की चूत आनंद की जीभ और अपनी पानी काफी गीली हो गई तब आशा ने आनंद को अपना मस्त खड़ा लंड अपनी चूत में घुसाने के लिए बोली। रेखा अपनी फटी-फटी आँखों से देखने लगी कि उसका आदमी का मोटा फूला हुआ लंड आसानी से अपनी दीदी की चूत में धीरे-धीरे घुस रहा है। रेखा को यह देखकर बड़ा ताज्जुब हुआ कि कैसे आनंद का लंड घुसने से दीदी की चूत फूल गई है और कैसे दीदी की चूत बड़े आराम से आनंद का लंड खा रही है।

थोड़ी देर के बाद रेखा देखी कि आनंद का पूरा का पूरा लंबा और मोटा लंड दीदी की चूत में घुस गया और दीदी की चूत के होठ फैल गए हैं उस लंड को अपने अंदर दबा रही है। दीदी को इतने बड़े और मोटे लंड अपने चूत में लेने से कोई तकलीफ नहीं हो रही है उल्टे दीदी काफी खुश लग रही है।

रेखा अपने आप को रोक न सकी और अपनी दीदी से पूछी, “दीदी तुमको कोई तकलीफ नहीं हो रही है?” आशा अपनी बहन की नंगी चुन्चियों पर हाथ फेरते हुए बोली, “तकलीफ कैसी, इतना लंड खाकर मेरी चूत बहुत खुश है और तू मेरी चूत में अपनी हाथ लगा कर देख कि कैसे वो अपनी लार बहा रही है।”

“बेवकूफ लड़की, इसमें कोई दर्द नहीं है उल्टे मजे ही मजे हैं। देख ना कैसे मेरी चूत इतना लंबा और मोटा लंड खाकर फूल गई है। तू अपनी हाथ मेरी चूत पर लगा कर देख कैसे वो लंड पाकर खुशी से अपनी लार बहा रही है। आनंद अब तुम मेरी चूत छोड़कर रेखा को दिखा दो कैसे चुदाई की जाती है।”

यह सुनते ही आनंद ने अपना चूतड़ उठाकर आशा की चूत में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया। अपने चूत में लंड अंदर-बाहर होते ही आशा फिर से रेखा से बोली, “देख! देख! रेखा देख! कैसे आनंद का मोटा और लंबा लंड मेरी चूत में अंदर जा रहा है और कैसे बाहर निकल रहा है।”

आशा अपने सर उठाकर अपनी चूत में आनंद का लंड का आना-जाना देखती रही और रेखा को दिखाती रही। फिर आशा अपनी बहन की चुन्चियाँ अपने हाथों से मसलते हुए बोली, “देखी आनंद का लंड घुसने से मुझे कोई तकलीफ नहीं हो रही है और देख कैसे आनंद मुझे चोद रहा है और कैसे मेरी चूत चुद रही है। क्या अब तू आनंद का अपनी चूत में ले सकती है?” आशा ने रेखा की चुन्चियाँ मसलते हुए पूछी।

“ठीक है दीदी, मैं कोशिश करती हूँ। लेकिन एक शर्त है कि तू भी मेरे पास बैठी रहोगी।” रेखा अपनी दीदी की चूत को आनंद का खाते हुए देखकर बोली।

तब आशा ने अपने ऊपर से आनंद को हटाया और बैठकर रेखा को चूमकर बोली, “ठीक है तेरी चूत की पहली चुदाई पूरा होने तक मैं तेरे सामने ही बैठी रहूँगी। तू बिल्कुल मत चिंता कर। सब ठीक हो जाएगा।”

फिर आशा ने आनंद से बोली, “आनंद इधर आओ और नई बीवी की संभालो।”

आशा अपने हाथ से रेखा की चूत को छूकर देखी तो पाया कि रेखा की चूत भीगी तो है लेकिन पूरी तरह से गीली नहीं है तो आशा ने आनंद से बोली, “तुम लोग फिर शुरुआत करो।” “मैं तुम लोगों के पास बैठकर तुम लोगों की मदद करूँगी,” रेखा ने आनंद से बोली। आशा ने तब आनंद को रेखा के सामने बिठा दिया और अब रेखा के सामने आनंद का खड़ा लंड फिर से सामने था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

आशा ने अपने हाथों से आनंद का लंड पकड़कर सहलाते हुए रेखा से बोली, “रेखा ले आनंद का लंड अपने हाथों से पकड़कर इस तरफ इसको सहला। देख यह कितना कड़ा है। देख इसको इस तरफ अपने हाथों से पकड़कर सहला। तूने तो हमारी माँ को भी इस तरफ से हमारे पिताजी और चाचा का लंड पकड़ उनको सहलाते हुए देखा है, है न?” आशा ने रेखा से बोली।

“हाँ मैंने देखा तो जरूर है, पर मैंने नहीं सहलाया कभी, और पिताजी और चाचा का लंड भी इतना बड़ा नहीं था,” रेखा ने आशा से बोली।

रेखा तब अपनी दीदी की बात मानते हुए अपने पति का लंड अपने कोमल हाथों में पकड़कर उसके ऊपर अपना हाथ फेरने लगी। “हाँ ऐसे ही अपने पति का लंड अपने हाथों से पकड़कर सहला और उसको अपने हाथों से कस-कस मसल, इससे आनंद को भी बहुत मज़ा आएगा,” आशा ने रेखा की हाथ पकड़ दिखाते हुए बोली। “क्या तुमको मज़ा मिल रहा है आनंद?” आशा ने आनंद से पूछी।

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आनंद तब एक हाथ से रेखा की एक चुन्ची और दूसरे हाथ से आशा की एक चुन्ची को दबाते हुए अपना सर हिलाया।

“ठीक है अब इस लंड को अपने मुँह में लेकर इसका सुपाड़ा चूस,” आशा ने फिर रेखा से बोली।

“देख ऐसे इसको अपने मुँह में भर ले,” इतना कहकर आशा ने आनंद का लंड अपने मुँह में भर लिया और उसके सुपाड़े को अपने होठों से दाना कर चूसने लगी। आशा ने तब आनंद का लंड अपने मुँह में पूरा का पूरा भरकर अपनी सर ऊपर-नीचे करके जोर-जोर से चूसने लगी।

रेखा अब धीरे-धीरे गरम हो रही थी। अपनी दीदी के कहे अनुसार रेखा ने आनंद का लंड अपने मुँह में ले लिया और जैसा आशा ने दिखाया था उसको चूसने लगी। लंड चूसने से रेखा को बहुत मज़ा मिल रहा था, क्योंकि वो पहली बार कोई लंड अपने मुँह में भरकर चूस रही थी।

आशा ने रेखा को आनंद का चूसने दिया और खुद रेखा के पीछे जा कर उसकी दोनों चुन्चियाँ अपने हाथों में लेकर मसलने लगी। रेखा की चुन्चियाँ आशा की चुन्चियों के बराबर बड़ी थीं और उससे और कड़ी थीं। रेखा की निप्पल को अपने उंगलियों के बीच लेकर आशा उनको मरोड़ने लगी। आशा उसके बाद रेखा को अपने बाहों में भरकर उसकी गर्दन और कंधों में चुम्मा दिया।

आशा पीछे से झाँककर देखी कि रेखा अपने पति के हथियार को बड़े मन लगाकर चूस रही है। आशा ने तब अपनी एक हाथ रेखा की गांड़ के नीचे से लाकर रेखा की चूत को टटोलने लगी। उसने रेखा की चूत पर हाथ फेरने के बाद अपनी एक उंगली उसकी चूत के ऊपर घुमाने लगी।

आशा ने फिर रेखा की क्लिट को अपने हाथों में लेकर मसलना शुरू कर दिया। इससे रेखा बहुत गर्म हो गई और उसकी गले से तरह-तरह की आवाज निकलने लगी। आशा ने तब अपनी एक उंगली रेखा की चूत के अंदर डाल दी। रेखा अब बहुत उत्तेजित हो गई थी और उसकी चूत से ढेर सारा रस निकल रहा था।

आशा अपनी बहन को और गरमाना चाहती थी। उसने आनंद को रेखा की खुली जाँघों के बीच जा कर उसकी चूत को चाटने को बोली। आनंद जैसे आशा की बात सुना, खुशी-खुशी रेखा की चूत को अपने जीभ से चाटने लगा और अपना जीभ जितना हो सके अंदर डालकर चूत का रस पीने लगा।

आशा को अब लगा कि उसकी बहन अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार है। उसने रेखा को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके पैर घुटने से मोड़कर उसकी जाँघों को अपने हाथों से फैला दिया। फिर आशा ने एक तकिया रेखा की चूतड़ के नीचे रख दिया जिससे कि रेखा की चूत पहली बार लंड खाने के लिए और खुल जाए और रेखा से आराम से लेटने के लिए बोली।

आशा ने तब आनंद से अपनी बीवी के ऊपर चढ़ने के लिए बोली। “देख छोटी, बिल्कुल घबराना नहीं, मैं तेरे साथ ही हूँ। मैं आनंद से कह दिया है कि वो अपना लंड धीरे-धीरे तेरी चूत में डाले। आनंद तेरे को बहुत आराम के साथ चोदेगा। मैं अपने हाथों से आनंद का लंड तेरी चूत में डालूँगा, तू बस जोर-जोर से साँस अंदर ले,” आशा ने अपनी छोटी बहन को समझाते हुए बोली।

फिर आशा ने आनंद का खड़ा लंड अपने हाथों में लेकर उसको रेखा की चूत के दरवाजे पर रख दिया। आनंद अपना लंड को रेखा की चूत के दरवाजे पर रखकर चुपचाप रुका रहा। फिर आशा ने आनंद से धीरे-धीरे अपना लंड रेखा की चूत में डालने के लिए बोली। आनंद ने वैसे ही किया।

रेखा चुपचाप अपनी टाँगें उठाए और जाँघों को फैलाए बिस्तर पर पड़ी रही। आनंद अपना लंड थोड़ा सा और रेखा की चूत में घुसेड़ा। जैसे-जैसे आनंद का लंड रेखा की चूत में घुसता गया, आशा अपने हाथों से रेखा की चूत पर मालिश करने लगी। थोड़ी देर में आनंद का करीब आधा लंड रेखा की चूत में चला गया। आनंद अपना लंड अपनी बीवी की चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

रेखा की चूत में अब तक पानी रिसने से काफी फिसलन हो गई थी और बहुत टाइट और गरम थी। धीरे-धीरे आशा के समझाने से रेखा ने अपनी जाँघों को और फैला लिया और आनंद का पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में पिलवाने की कोशिश करने लगी।

“दीदी चूत में दर्द हो रही है। लगता है कि मेरी चूत आनंद के लंड से फट जाएगी,” रेखा ने अपनी दीदी से बोली। “देख छोटी बस अब थोड़ा सा लंड ही बाहर रहा गया है, तू बस अब और थोड़ा सा बर्दाश्त कर ले, फिर तो मजे ही मजे हैं। अभी आनंद अपना पूरा का पूरा लंड तेरी चूत में घुसेड़कर तुझको चोदेगा, और इससे तेरे को और आनंद को भी बहुत मज़ा आएगा,” आशा ने रेखा की चुन्ची पर अपनी हाथ चलाते हुए बोली।

“ठीक है दीदी, जैसा तुम और आनंद चाहते हो, आनंद से बोलो कि वो अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दे। चाहे मेरी चूत रहे या न रहे मैं भी पूरे लंड की चुदाई का आनंद लेना चाहती हूँ। अब मुझे कोई डर नहीं है दीदी, तुम आनंद से बोलो वो अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दे।” रेखा मारे उत्तेजना के आशा से बोली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

फिर रेखा अपने पति की तरफ देखते हुए बोली, “आनंद मेरे राजा तुम अपना लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुसेड़ दो और मुझको अच्छे तरीके से चोदो।” आनंद तब धीरे-धीरे अपना पूरा का पूरा मूसल जैसा लंड रेखा की चूत में डाल दिया और अपनी बीवी को मजे से चोदने लगा।

रेखा अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और अपनी चूत की पहली चुदाई का मज़ा ले रही थी। जैसे-जैसे आनंद ने अपना चोदने का रफ्तार बढ़ाने लगा रेखा अपनी जाँघों को और फैलाकर आनंद को अपने हाथों से बाँध लिया और बड़बड़ाने लगी।

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“ओह! ओह! आह! हाँ मेरे राजा और जोर से चोदो। तुम्हारी चुदाई हमें बहुत मज़ा मिल रहा है। तुम्हारे लंड को खाकर हमारी चूत का भाग्य खुल गया। हाँ हाँ ऐसे ही चोदते रहो। हाँ देखो देखो मेरी चूत कैसे तुम्हारे लंड पिलवाकर फूल गई है। बस ऐसे ही पेलते रहो। अब मुझे कोई डर नहीं है। अब रोज, नहीं नहीं हर वक्त तुम मुझे ऐसे ही चोदना। अब तुम जब चाहो, जहाँ चाहो और जैसे चाहो मुझे चोद सकते हो। मैं हमेशा तुम्हारे लंड खाने के लिए अपना चूत खुला रखूँगी।”

आशा तब अपनी बहन से दूर जा कर बैठ गई और अपनी बहन की चूत अपने यार के लंड से चुदते देखती रही और अपने हाथों से अपनी चूत को सहलाती रही। ठीक उसी समय अजीत बिल्कुल नंगा होकर कमरे में घुस गया। आशा कमरे में नंगा अजीत को देखते ही उसका लंड अपने हाथों से पकड़ लिया और अजीत से बोली, “आओ मेरे राजा, मेरी चूत के मालिक, मुझे इस समय तुम्हारी बहुत जरूरत है।”

आशा ने अजीत को अपने पास बुला लिया और खुद पीछे मुँह करके अपने चार हाथ और पैर के बल झुक गई। अजीत ने जब आशा को झुककर अपनी गांड़ उठाकर बैठते देखा तो वो भी झट आशा के पीछे से जा कर अपना लंड आशा की चूत में एक झटके के साथ डाल दिया।

रेखा अपनी दीदी और जीजा को चुदाई करते देख बहुत शर्मा गई, लेकिन इस समय उसकी चूत में भी बहुत बड़ा तूफान चल रहा था। इसलिए रेखा ने अपनी दीदी और जीजा की चुदाई देख-देखकर अपनी कमर उछालने लगी और अपनी चूत में आनंद का लंड अंदर लेने लगी।

कमरे के अंदर दो जोड़ों की चुदाई से अब बहुत गर्मी हो गई थी। इस समय आनंद और अजीत दोनों अपनी बीवियों को अपनी कमर हिला-हिलाकर जोर-जोर से चोद रहे थे। कमरे के अंदर इस समय चुदाई की सिसकारियाँ और चूत और लंड की खुशबू से भर गया था। दोनों जोड़े अपनी चुदाई करते-करते एक-दूसरे को देख रहे थे और मस्ती से भर रहे थे।

आशा अपने पति के लंड की ताकत को अपनी चूत से महसूस करके बहुत ताज्जुब और खुश हो रही थी। आशा अपने पति के हर धक्के के साथ अपना कमर आगे-पीछे करके जवाब दे रही थी और मुँह से तरह-तरह की आवाज निकाल रही थी। आशा को अजीत का लंड अपने बच्चेदानी के मुँह में धक्के मारने का एहसास हो रहा था। अजीत इस समय आशा की चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था और अपनी बीवी को रगड़कर चोद रहा था।

इसी तरह से धक्के मारते हुए अजीत अपना पूरा का पूरा लंड आशा की चूत में ठूँसकर अपनी पिचकारी छोड़ दी और अपने पानी से आशा की चूत को भर दिया। अजीत और आशा अपनी चुदाई खत्म करके धीरे-धीरे अलग होकर आनंद और रेखा की चुदाई देखते रहे।

इस समय आनंद और रेखा दोनों एक-दूसरे को अपने बाहों में समेटकर अपनी-अपनी कमर हिला-हिलाकर चुदाई कर रहे थे। रेखा अपनी कमर उछाल-उछालकर आनंद के लंड के झटके का जवाब दे रही थी। थोड़ी देर के बाद आनंद ने एक जोरदार झटका मारा और रेखा की चूत के अंदर अपनी पिचकारी छोड़ दी। आनंद की पिचकारी छूटने से रेखा का चूत लबालब भर गया और वो अपने हाथों से आनंद को पकड़कर हाँफने लगी। पूरा कमरा में शांति छा गई।

आशा लेटे-लेटे ही रेखा के पास पहुँच गई और रेखा को अपने बाहों में ले लिया और उसको चूमकर पूछी, “बता छोटी कैसा रहा तेरी चूत की चुदाई अपने पति के लंड से? क्या बहुत तकलीफ हुई?” तब रेखा भी अपनी दीदी को चूमते हुए बोली, “बहुत अच्छा था मेरी चूत की चुदाई। मुझे बहुत मज़ा आया दीदी।”

फिर रेखा ने कमरे के चारों तरफ देखी तो पाया कि कमरे में सब के सब नंगे लेटे हुए हैं। रेखा को बहुत शर्म महसूस हुई और अपने शरीर को कपड़ों से ढँकने लगी, लेकिन आशा ने रेखा को रोक दिया। फिर आशा बोली, “यह हम लोगों का परिवार है, और हम सब लोग एक हैं। इस कमरे में हम लोग जो भी करते हैं वो हम लोगों का अपना राज़ है। छोटी तू बिल्कुल मत शर्मा। तेरे पति ने हम लोगों का कई उपकार किए हैं और हम लोग आनंद के आभारी हैं।

जब हम लोगों ने तेरी शादी आनंद से करने चाही तो मुझे पता था कि तू मान जाएगी। हम लोग जब छोटे थे, हम लोग आपस में बहुत मज़ा लूटा है। अब हम लोगों के पास अपने-अपने पति हैं और उनको हम लोग मिल-बाँटकर मज़ा लेंगे, ठीक जैसे हम लोगों की माँ हमारे पिताजी और चाचा को मिल-बाँटकर मजे लेती थी। जब हम लोगों की माँ को यह बात मालूम चलेगा तो वो भी बहुत खुश होंगी।”

रेखा ने अपनी दीदी से बोली, “दीदी मैं तुम्हारी हर बात को समझ रही हूँ। लेकिन मेरे लिए बिल्कुल नया है।” “रेखा तुम बिल्कुल चिंता मत करो, हम सब लोग तुम्हारी हर तरफ से ख्याल रखेंगे,” अजीत ने अपनी साली से बोला। “एक तरफ से तुम भी आशा और मुझको मदद कर रही हो,” अजीत फिर से बोला।

इन सब बातों को सुनकर और सुस्ताने के बाद आनंद का लंड फिर से खड़ा होने लगा। आनंद के लंड को खड़ा होते देखकर आशा अपनी छोटी बहन से बोली, “जा छोटी जा, तेरे पति का लंड फिर से खड़ा हो रहा है। जा तू फिर अपनी चूत को चुदवा कर मजे ले।”

“दीदी, जैसे अभी तुम चुदवा रही थी मैं भी उसी तरह से अपनी चूत चुदवाना चाहती हूँ,” रेखा अपनी दीदी से बोली।

एक बार की चुदाई से ही रेखा अब अपनी सारी शर्म और हया भूल चुकी थी और चुदाई के बारे में खुलकर सब सामने बोल रही थी। आनंद जैसे ही रेखा की बात सुना, उठकर रेखा के पास गया और रेखा को अपने घुटने बल झुकाकर उसके पीछे से अपना तन-तनाया हुआ लंड रेखा की चूत में पेल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

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रेखा भी कम नहीं थी, वो भी अपनी कमर को आगे-पीछे हिलाकर आनंद का लंड अपनी चूत में पिलवा रही थी। आनंद ने तब अपनी एक उंगली रेखा की गांड़ में पेल दी और गांड़ के अंदर घुमाने लगा। रेखा को इससे बहुत मस्ती चढ़ गई और अपनी कमर जोर-जोर से हिलाने लगी और अपनी दीदी से बोली,

“दीदी देखो तो तुम्हारी छोटी बहन अपने पति का लंड ठीक तरीके से अपने अंदर ले रही है या नहीं। दीदी ठीक-ठीक बोलना हम ठीक तरीके से अपनी चूत चुदवा रही हैं कि नहीं? अगर कोई कमी है तो बोलो दीदी, मैं अभी ठीक कर लेती हूँ।”

रेखा को कुतिया की तरह चुदते देखकर आशा अपनी छोटी बहन से बोली, “शाबाश मेरी बहन शाबाश, तूने मेरा नाम रख लिया और दूसरी चुदाई के समय ही तूने अपने पति का लंड पीछे से अपनी चूत में पिलवा लिया। आगे चलकर तू बहुत चुदक्कड़ बनेगी और हम लोगों की माँ का नाम रोशन करेगी। चुदवा छोटी चुदवा, खूब चुदवा अपने पति के लंड का सारा का सारा रस निचोड़ ले अपनी चूत से।”

अजीत अपनी साली की चुदाई देखकर फिर से गरम हो गया और अपना खड़ा हुआ लंड आशा को दिखलाया। आशा ने जैसे ही अजीत का लंड खड़ा हुआ देखा तो झट से अजीत को जमीन पर लेटा कर खुद अजीत के ऊपर चढ़ बैठी और अजीत के लंड को अपनी चूत में लेकर अजीत को चोदने लगी।

कमरे के अंदर फिर से चुदाई का माहौल बन गया और आनंद और अजीत दोनों ने फिर से अपनी-अपनी बीवी की चूत को जमकर चोदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर के बाद चारों लोग हाँफ रहे थे लेकिन अपनी-अपनी कमर उठा-उठाकर धक्के मार रहे थे या धक्कों का जवाब दे रहे थे।

थोड़ी देर के बाद जब आनंद और अजीत अपना-अपना वीर्य अपनी-अपनी बीवी की चूत में छोड़ चुके तो चारों बिस्तर पर लुड़क गए और सुस्ताने लगे। उस समय किसी की कुछ होश नहीं था कि कौन कहाँ लेटा हुआ है सब के सब एक ही जगह पर पड़े हुए थे।

रेखा अपने हाथों के पास झांतों से भरा हुआ लंड को खड़ा होते हुए पाया और बिना कुछ समझे-बूझे उसको आनंद का लंड समझकर अपने हाथों में लेकर उसके साथ खेलने लगी। थोड़ी देर के बाद जब आशा तकिया ठीक करने के लिए उठी तो देखा कि रेखा अपने हाथों से अजीत का लंड मरोड़ रही है।

“ओह! बाह रे मेरी चुदक्कड़ बहन, तू तो बहुत जल्दी ही सब कुछ समझ गई। तेरे को मेरे पति का लंड कैसा लग रहा है? आज तेरी सुहागरात है और तूने आज ही मेरे पति का लंड अपने हाथों में लेकर मसलना शुरू कर दिया?” आशा ने रेखा से बनावटी गुस्से में बोली।

तब शर्मा कर रेखा बोली, “दीदी इस लंड को मैं अपने पति का लंड समझ रही थी, मेरे मन में ऐसी कोई गलत भावना नहीं थी।” “ठीक है, कोई बात नहीं। अब देखते हैं कि तू इस लंड को क्या करती है। मैं तेरे से मजाक कर रही थी और कोई गुस्सा नहीं कर रही थी,” आशा अपनी छोटी बहन से बोली।

आशा ने फिर रेखा की मदद की और रेखा को अजीत का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने को कहा। रेखा शर्म के मारे अपनी आँखें झुकाकर अजीत का आधा खड़ा लंड अपने मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगी। अजीत ने अपने जाँघों को और फैला दिया जिससे कि रेखा को लंड चूसने में आसानी हो।

आशा अपने घुटनों के बल रेखा के मुँह के पास अपना चेहरा लेकर देखने लगी कि कैसे रेखा उसके पति का लंड चूस रही है। आनंद ने जब देखा कि आशा अपने घुटनों के बल झुकी है तो फौरन आशा के पीछे जा कर आशा की चूत में अपनी उंगली पेल दी और उंगली को अंदर-बाहर करने लगा।

आशा ने भी अपनी गांड़ हिलाने लगी। इससे आनंद को बहुत मज़ा मिला और उसने अपनी दूसरी उंगली आशा की गांड़ में भर दी और अपना उंगली से आशा की गांड़ चोदने लगा। आशा थोड़ी देर के बाद रेखा के साथ मिलकर अजीत के अंडों को सहलाने लगी। दोनों बहनों ने थोड़ी देर तक कोशिश किया पर कोई फायदा नहीं मिला।

आशा ने तब अपनी चुन्चियाँ अजीत के सामने कर दीं और अजीत उन चुन्चियों को पकड़ मसल और फिर पीना शुरू कर दिया। अपनी चुन्चियाँ चुसाई से आशा तो गर्म हो गई लेकिन अजीत का लंड फिर से खड़ा नहीं हुआ। आनंद अब तक तैयार हो गया था।

आनंद ने अपने उंगलियों से आशा की चूत के होठों को फैलाकर उसने अपना लंड डाल दिया और आशा की चूतड़ों को पकड़कर अपना कमर चला-चलाकर आशा को चोदना शुरू कर दिया। अजीत जैसे ही देखा कि आनंद का लंड आशा की चूत में पानी झर रहा है, वो बहुत उत्तेजित हो गया और उसका लंड तनकर खड़ा होने लगा। रेखा को भी अपने मुँह में अजीत का लंड का खड़ा होने का एहसास होने लगा।

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जब अजीत का लंड पूरा खड़ा हो गया तो उसको रेखा ने अपने मुँह से निकाल दिया और अजीत ने रेखा को अपने ऊपर उठा लिया और बोला, “साली जी अब तुम मुझको अपनी चूत से चोदो।” रेखा को जैसा बताया गया उसने वैसे ही किया। वो अजीत के चारों तरफ उसके कमर के पास बैठ गई और अजीत का लंड अपने हाथों से लेकर और अपनी गांड़ उठाकर अपनी चूत से लगा दिया।

लंड को चूत से भिड़ाते ही रेखा उस पर बैठ गई और अपनी गांड़ उठा-उठाकर अजीत को चोदने लगी। अजीत और रेखा के बगल में ही आनंद और आशा अपनी चुदाई चालू रखे हुए थे। आशा इस समय अपनी गांड़ हिला-हिलाकर आनंद का लंड अपने अंदर पिलवा रही थी और मुँह से जीभ निकालकर हाँफ रही थी।

आशा को अपने पति की चुदाई का जोर देख-देखकर बहुत ताज्जुब हो रहा था। आशा सोच रही थी आज क्या बात हो गई है और कैसे आज अजीत तीन-तीन बार लंड खड़ा करके हमारी और रेखा की चूत को धुन रहा है। लेकिन फटी-फटी आँखों से रेखा को अजीत के खड़े लंड पर उछलते हुए देख रही थी।

अजीत को रेखा की चूत बहुत टाइट और कसी-कसी लग रही थी। रेखा की आज ही पहली बार चुदाई हुई थी और वो इस समय अजीत के लंड को बुरी तरह से अपने होठों से पकड़ रखी थी। अजीत ने रेखा को नीचे गिरा दिया और उसको पलटकर पीछे से रेखा की चूत में फिर से अपना लंड घुसेड़ दिया और दनादन चोदने लगा।

इस समय दोनों बहनें अगल-बगल अपने घुटनों के बल झुककर अपनी चूत में लंड पिलवा रही थीं और पीछे से उनकी चूतड़ पकड़कर आनंद और अजीत उनको पेल रहे थे। दोनों बहनें एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थीं और अपनी-अपनी कमर हिलाकर हर धक्के का जवाब दे रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

अजीत अब जोर-जोर से रेखा की चूत में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था। उसको महसूस हो रहा था कि उसका पानी छूटने वाला है। अजीत अपनी आँखें बंद करके बस रेखा को चोद रहा था और फिर एक जोरदार झटके के साथ अपना पानी रेखा की चूत के अंदर छोड़ दिया जिससे रेखा की चूत फिर से भर गई।

थोड़ी देर के बाद अजीत ने रेखा से बोला, “भाभी रेखा सॉरी, मैं बहुत जल्दी झर गया। लेकिन मैं मजबूर था।” रेखा ने अजीत से बोली, “नहीं भाई साहब, इसमें सॉरी की कोई बात ही नहीं है। मुझे आपसे अपनी चूत चुदवाकर बहुत मज़ा मिला। जब भी आपको मेरी चूत चोदने की इच्छा हो मुझसे जरूर कहिएगा, मैं हमेशा आपके लंड का इंतजार करूँगी।”

दोनों जीजा और साली एक-दूसरे के बाहों में पड़ लेट गए और आनंद और आशा की चुदाई देखते रहे। थोड़ी देर के बाद आनंद और आशा भी झर गए और बिस्तर पर ढेर हो गए। चारों अब चुदाई करते-करते बहुत थक चुके थे और आपस में बात करते-करते सो गए।

इस तरह से उन चार लोगों की चुदाई भरी जिंदगी चलने लगी। आनंद और अजीत को पता लग चुका था कि दोनों बहनें आशा और रेखा बहुत ही चुदासी औरत हैं और ये दोनों बहनें कभी भी आनंद और अजीत से अपनी चूत चोदने के लिए कह सकती हैं। यह तो बहुत अच्छी बात थी कि इन लोगों का घर गाँव के बिल्कुल किनारे पर था नहीं तो कोई भी इन चार लोगों को कभी भी एक साथ सामूहिक चुदाई करते देख लेता।

अजीत की परेशानी अभी भी वही थी। अजीत का लंड तब ही खड़ा होता जब वो आनंद को या तो आशा के साथ या रेखा के साथ चुदाई करते देखता था। जब भी अजीत का लंड खड़ा हो जाता था तो जो कोई भी बहन खाली रहती उनकी चूत में अपना लंड डाल उसकी चुदाई शुरू कर देता।

दोनों बहनों में भी इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कौन उनको चोद रहा है, उनको तो बस अपने हमेशा भूखी चूत के लिए खड़ा लंड की जरूरत थी, चाहे वो लंड आनंद का हो या अजीत का, क्या फर्क पड़ता, उनकी चूत तो लंड खाती। बस और क्या चाहिए।

रेखा अपनी चुदाई जल्दी ही पेट से हो गई। फिर भी इन चार लोगों की चुदाई भरी दिन चलते रहे। जैसे-जैसे रेखा के दिन पूरे होते गए तो वो आनंद या अजीत का लंड चूसकर ही अपना काम चला लिया करती थी। और आनंद और अजीत बारी-बारी से रेखा की चूत चूस दिया करते थे। आशा दोनों मर्दों का पूरा का पूरा ख्याल रखती थी और इससे रेखा को कभी-कभी जलन महसूस हुआ करती थी।

आशा और रेखा की माँ अपनी बेटी को संभालने रेखा के अंतिम हफ्ते में इन लोगों के घर पहुँच गई। माँ के आने से इन लोगों का सारा का सारा मामला बंद हो गया और सब चुपचाप रहने लगे। एक दिन शाम को रेखा को दर्द चढ़ा और उसको अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। अस्पताल में रेखा को एक रात के लिए रखा गया और सब मिलकर रेखा के पास ही रात रुक गए।

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सुबह होने पर डॉक्टर ने बताया कि रेखा को बच्चा होने में अभी कुछ समय और लगेगा और हो सकता है कि रेखा का बच्चा रात को हो। फिर यह तय हुआ कि आशा अपनी बहन के पास रात के लिए रुक जाएगी और आशा की माँ घर जा कर आराम करेंगी। अजीत भी आशा के रुकने के लिए तैयार हो गया और आनंद फिर अपनी सास के साथ घर वापस चला आया।

आनंद अपनी सास के साथ करीब सुबह दस बजे गाँव पहुँचा। आनंद रास्ते की दुकान से डबल रोटी नाश्ते के लिए खरीद लिया। घर जाकर वो पहले नहा लिया और कमरे में बैठकर अखबार पढ़ने लगा। आनंद की सास, कमला, अपने कमरे में नहाने के लिए तैयारियाँ कर रही थी।

कमला अपने कमरे से बोली, “आनंद मैं नहा लेती हूँ फिर तुमको चाय बना कर पिलाती हूँ।” अखबार से पानी आँख उठाकर अपनी सास को देख आनंद चौंक गया। इस समय कमला सिर्फ अपने पेटीकोट में थी और उस पेटीकोट को उन्होंने अपनी चुन्चियों तक उठा बाँध रखा था और इससे सास की आधी से ज्यादा सुडौल चिकनी जाँघें खुली दिख रही थीं।

उनकी चुन्चियाँ भी करीब आधी से ज्यादा पेटीकोट के बाहर दिख रही थीं। कमला अपने एक हाथ से अपने कपड़े ले रखी थीं। जैसे ही आनंद की सास दरवाजे के पास खड़ी हुई तो आनंद को बाहर की लाइट से उनकी सुडौल जाँघें और चूतड़ साफ-साफ दिखाई पड़े। आनंद को अपना लंड खड़ा होने का आभास लगने लगा क्योंकि उसकी लुंगी धीरे-धीरे उठ रही थी। आनंद जल्दी से दूसरी तरफ देखकर हामी भर दी।

कमला बाथरूम में जाकर नहा-धोकर बाहर निकली चाय बनाने लगी। आनंद अपनी सास की तरफ देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, लेकिन वो बिना देखे रुक भी नहीं सकता। इस समय कमला एक सफेद रंग का ब्लाउज पहने हुए थी, लेकिन वो कहीं-कहीं गीला होने से लग रहा था उनके ब्लाउज के नीचे और कुछ भी नहीं है। उनका पेटीकोट इस समय उनके चूतड़ पर था लेकिन यह यकीन था कि पेटीकोट के नीचे भी कुछ नहीं है।

जैसे ही कमला अपने कमरे में गई तो वो आनंद की तरफ देखकर मुस्कुराई। आनंद उनके हिलते हुए चूतड़ देखता रहा। आनंद अपने अखबार पढ़ने के बहाने अपने कमरे में बैठकर अपनी सास की इंतजार करने लगा। कमला जल्दी ही अपने कमरे से बाहर निकलकर किचन की तरफ गई, लेकिन उनका पहनावा अभी भी वही था।

जल्दी ही कमला किचन से चाय बनाकर नाश्ता लेकर निकली। उन्होंने चाय और नाश्ता जमीन पर दोनों के प्लेट आमने-सामने रखे और आनंद को नाश्ता लेने के लिए बुलाई। आनंद कमरे में आकर जमीन पर पलथी मारकर अपनी सास के सामने बैठ गया और नाश्ते के लिए इंतजार करने लगा।

कमला भी तब जमीन पर पलथी मारकर बैठ गई। पलथी मारकर बैठने से कमला की पेटीकोट उनकी जाँघों तक उठ गई और आनंद को अपनी सास की सुडौल, चिकनी और गोरी-गोरी जाँघें देखने लगा। कमला ने झुककर कुछ ब्रेड के टुकड़े उठाए और आनंद से भी ब्रेड लेने के लिए बोली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

आनंद ब्रेड लेकर खाते-खाते अपनी सास की जाँघों को देख रहा था। जैसे ही कमला ने अपने पैर थोड़े फैलाए तो आनंद को उनकी भरा-पूरा शेव किया हुआ चूत दिखने लगा। जैसे-जैसे वो लोग नाश्ता करने लगे, कमला खुद ही आनंद से हल्की-फुल्की बात करना शुरू कर दी। लेकिन आनंद को अपनी सास के बातों में कोई ध्यान नहीं दे पा रहा था।

कमला ने तब अपनी दोनों टाँगों को फैला दिया और अब आनंद को कमला की चूत कमरे की रोशनी में साफ-साफ दिखाई देने लगी। आनंद को अपनी आँख कमला की चूत पर से हटाना मुश्किल पड़ गया। आनंद का लंड अब पूरी तरह से खड़ा हो गया। आनंद अपने खड़े लंड को अपने हाथों से छुपाने की कोशिश करने लगा लेकिन उसका 10 इंच लंबा खड़ा लंड उसके हाथों से छुप नहीं रहा था।

“तुम्हें पसंद है?” आनंद की सास ने आनंद से पूछी। “उन! आपने क्या पूछा?” आनंद ने कमला से पूछा। “मुझको लग रहा है कि जो तुम अपनी आँख गड़ा कर देख रहे हो, वो तुम्हें पसंद है और तुम्हारा खड़ा लंड इस बात की गवाही है,” कमला ने आनंद से बोली।

आनंद अब अपने दोनों हाथों से अपने खड़े लंड को छुपाने की कोशिश करने लगा। इस बात से आनंद की सास हँस पड़ी और आनंद से बोली, “आनंद, बेवकूफी मत करो। तुम्हारा उतना बड़ा लंड जो कि इस समय खड़ा हो गया है हाथों से छुपाना मुश्किल है। तुम मत घबराओ, हमारी बेटी ने हमसे तुम्हारे लंड के बारे में सब कुछ बता दिया है।

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अब तुम क्या छिपाना, मैं भी इस लंड का स्वाद लेना चाहती हूँ। मैं करीब पिछले एक-दो हफ्ते से अपनी चूत नहीं चुदवाई है, और यह बात मेरे जैसी औरत जो कि दो आदमियों दिन में कम से कम दो या तीन बार चुदती है, बर्दाश्त के बाहर है। मेरी चूत में तीन-चार दिनों से खुजली हो रही है। चलो जल्दी से अपना नाश्ता खत्म करो, मुझे तुमसे अभी चुदवानी है।”

आनंद जब अपनी सास की यह सब बात सुनी तब वो कमला से बोला, “अगर यही आपकी इच्छा है तो मैं आपकी इच्छा को टाल नहीं सकता हूँ,” और आनंद जल्दी-जल्दी अपना नाश्ता खत्म किया और उठकर अपना हाथ धोने चला गया।

कमला ने भी अपना नाश्ता जल्दी से खत्म करके हाथ धो लिया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और आनंद के पास जाकर खड़ी हो गई। आनंद का खड़ा लंड को जो कि इस समय लुंगी से बाहर निकल चुका था पकड़कर अपने हाथों से धीरे-धीरे सहलाने लगी।

“ओह! तुम्हारा लंड तो वाकई बहुत बड़ा और मोटा है। मेरी बेटियाँ बहुत ही भाग्यशाली हैं जो तुमको पाया है। ओह! कितना कड़ा है, चलो जल्दी से मुझको चोदो,” इतना कहकर कमला अपने हाथों से आनंद को पकड़कर बेडरूम में ले गई। बेडरूम में घुसकर कमला ने जल्दी से अपनी पेटीकोट का नाड़ा खींचकर खोल दिया और उनकी पेटीकोट जमीन पर गिर गया।

अब आनंद के सामने उसकी सास नंगी खड़ी थी और आनंद उनकी नंगी रूप को देखकर मचल गया। तब कमला घूमकर आनंद के सामने पीठ करके खड़ी हो गई और अपनी ब्लाउज को उतारने के लिए आनंद से बोली। जैसे-जैसे आनंद उनकी ब्लाउज के हुक खोल रहा था, उसका लंड तनकर उनकी चूतड़ से टकरा रहा था।

अपने चूतड़ पर आनंद का लंड को ठोकर महसूस करने के बाद कमला ने अपनी चूतड़ पीछे की तरफ धकेल दी और अपनी चूतड़ आनंद के लंड पर मलने लगी। आनंद ने अपनी सास का ब्लाउज उतार दिया और उनकी नंगी पीठ पर चुम्मा देने लगा। फिर उसने अपना हाथ आगे करके उनकी चुन्चियों से खेलने लगा।

आनंद ने अपना लंड कमला के गांड़ पर रखकर घुमाने लगा और उसके इस हरकत से कमला ने अपनी गांड़ कमर हिलाकर और आनंद की तरफ कर दी। अब कमला आनंद की तरफ घूम गई और उससे बोली, “चलो अपना लौड़ा मुझको दो, मैं बहुत दिनों से लौड़ा नहीं चूसी है, मैं तुम्हारे लौड़े को चूसना चाहती हूँ,”

और कमला झुककर आनंद के सामने बैठ गई और आनंद का लौड़ा को अपने हाथों से पकड़कर उसका सुपाड़ा निकाल लिया और लौड़े को अपने मुँह में भरकर बच्चों जैसा चूसने लगी। कमला के मुँह से लार बहा रही थी और वो आनंद के लौड़े को जितना हो सके अपने मुँह में घुसेड़कर बड़े आराम से चूस रही थी।

आनंद को अपने सुपाड़े पर अपनी सास की जीभ का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था। कमला अपने सर की आगे-पीछे करके आनंद के लौड़े को धीरे-धीरे अपने मुँह में घुसा रही थी और निकाल रही थी और अपने होठों से सुपाड़े को चूस रही थी।

आनंद का लौड़ा खड़ा होकर तन गया था और अपनी सास की मुँह के अंदर ठुकाई मार रहा था। आनंद की सास को लंड चुसाई की कला बहुत अच्छे तरीके से आती थी और बड़े मजे लेकर अपने दामाद का लंड चूस रही थी। “बहुत अच्छे, माँ, ओह्ह्ह! बहुत मज़ा आ रहा है, हाँ ऐसे ही मेरे लौड़े को चूसिए। आप बहुत अच्छे तरीके से लंड चूस रही हैं।”

आनंद धीरे-धीरे अपना कमर चला-चलाकर अपना लौड़ा को अपनी सास के मुँह में डाल रहा था और निकाल रहा था। “और जोर चूसिए माँ, और जोर से मेरे लंड की चूसिए,” आनंद अपनी सास से बोला। लेकिन कमला को मालूम था कि कैसे अपने दामाद का लंड चूसना है और वो कोई जल्दबाजी नहीं कर रही थी।

कमला धीरे-धीरे जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेट गई और अपने पैरों को फैलाकर आनंद से बोली, “आओ मेरे जमाई…” आनंद अपनी सास के नंगे शरीर को देखकर पागल हो गया। उसने कमला को बिस्तर पर लिटाया और उनकी जाँघों को फैलाकर उनकी चूत को चाटने लगा।

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कमला ने अपने हाथ से आनंद के सिर को अपनी चूत पर दबाया और कराहने लगीं। “अह्ह्ह… जमाई… बहुत अच्छा चाट रहे हो… अंदर तक जीभ डालो…” कुछ देर चूत चाटने के बाद आनंद ने अपना मोटा लंड कमला की चूत के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। कमला की चूत अभी भी काफी टाइट थी। “हाय रे… इतना मोटा… धीरे… आह… पूरा डाल दो जमाई…” कमला ने चूतड़ उठा-उठाकर मदद की। जल्दी ही आनंद का पूरा 10 इंच का लंड कमला की चूत में समा गया।

आनंद ने तेजी से चोदना शुरू कर दिया। कमला चीख रही थीं, “हाँ… हाँ… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… अजीत जैसा कमजोर नहीं हो तुम… मारो… और मारो…” आनंद ने उन्हें कई पोजीशन में चोदा — कुतिया बनाकर, ऊपर बिठाकर, पैर कंधे पर रखकर। आखिरकार आनंद ने अपनी सास की चूत में अपना सारा वीर्य उंडेल दिया। इसके बाद यह सिलसिला भी चलता रहा। आशा, रेखा, अजीत, आनंद और अब कमला — पूरा परिवार एक-दूसरे के साथ खुलकर चुदाई का आनंद लेने लगा। कमला भी अपनी बेटियों के साथ मिलकर दोनों दामादों की सेवा करने लगीं।

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