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चोदना है तो चुपचाप चोद लो

जून 5, 2026 by hamari Leave a Comment

XXX Kunwari Ladki Chudai Kahani

मेरा नाम अंशुल हैं, मुझे सब अंशू बुलाते हैं. मेरी उम्र 32 वर्ष है , मैं 5.8 का गोरा चिट्टा लड़का हूं. मैं गाड़ियों की सर्विस सेंटर में मैनेजर के पद पर कार्यरत हूँ. मेरे घर में 4 लोग हैं. मेरे पिता जी, जो एक बैंक मैनेजर हैं. उनका नाम बृजेश वर्मा है. दुसरी मेरी माता जी, जो घरेलू महिला हैं. उनका नाम छाया है. तीसरी मेरी बड़ी बहन, एक प्राइवेट टीचर हैं. जिसका नाम दीक्षा हैं. हम लोग मध्य प्रदेश के बुंदेलखण्ड के एक छोटे से शहर में रहते हैं. XXX Kunwari Ladki Chudai Kahani

ये कहानी आज से 4 साल पहले की है. तो हुआ यूं कि मेरे पापा के मामा की बेटी की बेटी की शादी थी. पापा के मामा की बेटी जिनका नाम फूला हैं, पापा कि बहन हुईं और वह मेरी बुआ हुईं. तो उनके पति यानि फूफा निमंत्रण घर देकर चले गए. तो हमारे यहां यह बात चलने लगी कि उनके यहां शादी में जायेगा कोन? क्यूँ कि हमारे समाज में हम लोग सबसे संपन्न है.

इस वजह से सब रिश्तेदार हमलोगों से रिश्ते बनाये रखना चाहते हैं.(क्यूँ कि हमारी कास्ट में ज्यादातर लोग गरीब ही रहते है.) पहले मम्मी ने बोला कि वह और दीदी जाएगी. लेकिन बाद में दीदी ने जाने से मना कर दिया. वह बोली मेरे स्कूल के बच्चों के बोर्ड के पेपर हैं.

मुझे और पापा को कुछ पता नहीं था हमे लगा मम्मी और दीदी शादी में जाने वाली है. जिस दिन शादी थी उस से एक दिन पहले मेरी गाड़ी खराब हो गयी. तो मैं अपनी गाड़ी सर्विस सेंटर दे आऊंगा, और मैंने सोचा कल दीदी कि स्कूटी से ऑफिस चला जाऊँगा. मैं शाम को अपनी बाइक सर्विस सेंटर पर देते हुए, ओटो से घर आ गया.

खाना खाते समय मम्मी ने मुझ से बोली कल तू शादी में चला जाना. मैंने कहा कि आप पहले बोलती तो मैं छुट्टी ले लेता, मैं यैसे कैसे जा सकता हूं. तो मम्मी ने कहा कि उनका गाँव जादा दूर नहीं है. तू कल दिन भर काम करना और शाम को शादी में चले जाना. मैंने कहा ठीक हैं.

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मैंने कल के लिए दीदी से स्कूटी माँगी तो दीदी ने मना कर दिया. वह बोली मुझे सुबह वक्त से पहुँचना होता है. तो मैं मजबूर हो गया किराये से जाने के लिए. अगले दिन मेरी 5 बजे छुट्टी हुईं तो मैं ऑफिस से ही बस स्टैंड गया और वहीं से बुआ के गाँव पहुंच गया.

वहॉं मुझे कुछ पता नहीं था कि बुआ का घर कहा है और शादी कहा से है. तो मैंने अपनी सगी बुआ के लड़के को कॉल लगाया. वह हम दोनों भाई बहन से बड़े हैं. उनका नाम ईश्वर है. वह उनके यहां शादी के 15 दिन पहले से वहीं पर थे. फिर वह मुझे गाँव के बाहर हाई वे पर लेने आए.

फिर हम फूला बुआ के यहां पहुंच गए. वहॉं मुझे मेरे सगे छोटे फूफा – बुआ और बड़ी बुआ और उनके नाती नातिन और मुझे पापा के मामा मिले. जिन सब के मैंने पैर छुए. गांव में शादी गाँव के बाहर बने मैदान में थी. तो ईश्वर भैया ने मुझ से बोला कि चलो हम शादी वाली जगह पर चलते हैं.

तो हम शादी वाले मैदान में आ गए. वहॉं पर इंट्री गेट पर ही फूला बुआ के पति, अन्नू फूफा व्यवहार की डायरी लिए बैठे हुए थे. गर्मी का समय था, तो ठंडा रखने के लिए. ईश्वर भैया को वर्फ लेने भेज दिया. उन्होंने व्यवहार की डायरी मुझे पकड़ा दी और एक छोटी-सी कॉपी, उन्होंने अपने बड़े भाई के बेटे जिसका नाम अवनीश हैं. वह भी मुझ से उम्र में बड़े हैं. उन्हें पकड़ा दी.

हमारे यहाँ जिस लड़की की शादी होती हैं, उसे सारी लड़कियां गिफ्ट देती हैं. उस उपहार को प्रेजेंट बोलते हैं. फिर मैं वैभार और अवनीश प्रेजेंट लिखने लगे. यैसे ही 11 बज गये. तो अवनीश के प्रेजेंट लिखना बंद हो गए थे लेकिन मेरे पास लोग आकर व्यवहार लिखवाते जा रहे थे.

तो मैं अवनीश को डायरी पकड़ा कर चला गया और खाना खा कर फिर से व्यवहार लिखने बैठ गया. फिर अवनीश वहॉं से दारू पीने चला गया. अब मैं अकेला व्यवहार लिख रहा था. करीब 1 बजे जयमाला का कारी क्रम चालू हुआ. तब मुझे जरा शांति मिली. उस समय रिश्ते दार व्यवहार नहीं लिखवा रहे थे. तो मुझे नींद आने लगी.

तो मैं वही कुर्सी पर बैठ कर सोने लगा. तब करीब 10 मिनट बाद एक लड़की मेरे पास आई और वह बोली मुझे 500 के खुल्ले दे दो. मैं उसे देखता ही रह गया, वह 5 फिट कि बला कि खूबसूरत लग रहीं थीं. उसने क्रीम कलर का लहंगा और चोली पहने हुए थी. जिसमें से उसके चूचो कि घाटी साफ दिख रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैंने जैसे ही उसे देखा मेरी सारी नींद उड़ गयी और मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं जैसे तैसे मन मारके रह गया. मैं सारी रात बस उसे ही देखता रहा. सुबह से रिश्तेदार अपने अपने घर जाने लगे तो मेरा काम और बढ़ गया. मैं बस व्यवहार लिखता रहा. करीब दो बजे तक विदाई हुई तब मैं फ्री हुआ.

तो मैंने अन्नू फूफा से बोला तो मैं चलता हू तो वह मुझ से बोले सब रिश्तेदार जा चुके हैं. तुम थोड़ा काम करवा दो कल सुबह चले जाना. तो मैंने उनसे मना किया. तो मेरे पीछे से वहीं लड़की आई जिस पर मैं रात में मोहित हो गया था. वह बोली भैया आज रुक जाओ कल 6 बजे निकल जाना.

दरअसल वह अन्नू फूफा कि छोटी बेटी थी. उसका नाम नम्रता हैं उसे सब नमो बुलाते हैं. फिर मैं रुक गया, वहां ईश्वर भैया और मैं ही रुके थे. बाकि सब जा चुके थे. फिर हमने मैदान से सारा सामान जिसका था उस को पहुंचाया और जो अन्नू फूफा का था वह उनके घर रखवा दिया.

इन्हीं सब कामों में कब दस बज गय पता ही नहीं चला. फूला बुआ विदाई के बाद भी रोती रही तो वह अपने कमरे में सो चुकी थी. उनका लड़का अभी छोटा था तो वह भी छत पर सो चुका था. नमो खाना लेकर आयी और हम सबने खाना खाया. खाना खाने के बाद अन्नू फूफा बोले जिस को जहां लेटना हो लेट जाओ.

हमारे यहाँ बेटा कितना भी बड़ा हो माँ के साथ सो सकता है. उसी प्रकार बहन भाई भी साथ में सो सकते हैं. कोई गलत नहीं मानता है. अन्नू फूफा के घर में दो कमरे हैं. एक कमरे में बुआ और फूफा सो गए. ईश्वर भईया बोले मैं तो छत पर सोउंगा, और वह छत पर सो गए.

तब नमो मुझ से बोली भैया आप इस दूसरे वाले कमरे में सो जाओ इस में कूलर है. और वह खुद छत पर चली गयीं. उस कमरे में समान भरा हुआ था, उसमें एक निबाङ बाला पलंग था. जिसकी निबाङ ढीली भरी हुई थी. मैं उस पर कूलर चालू करके लेट गया. इतना थक गया था कि लेटते ही मुझे नींद आ गई.

करीब एक बजे नमो को छत पर मच्छर काटने लगे तो वह मेरे पास आकर लेट गयी. 4 बजे के आसपास मुझे एहसास हुआ कि कोई मेरे साथ लेटा हैं. मैंने देखा तो नमो लेटी हुई थी. वह पलंग के किनारे पर लेटने कि कोशिश करती लेकिन वह फिसल कर मेरे पास आ जाती.

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जिससे उसकी गांड मेरे लंड से चिपक जाती. जिससे मेरा लंड खङा हो गया और वह नमो कि गांड में चुभने लगा. लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, तो मैं उसकी गांड में कपडों के ऊपर से ही डालने लगा. मैं नमो से पूरा चिपक गया. तब भी उसने कुछ नहीं बोला, तो मैं उसके बूब्स ऊपर से दबाने लगा.

तो नमो मादक सिसकारियां लेने लगीं. मैं समझ गया इसको य़ह सब अच्छा लग रहा है, तो मैं अपने हाथ से उसकी चूत ऊपर से सहलाते हुए उसे चूमने लगा. कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ उसकी सलवार का नाड़ा खोलने बढ़ाया तो उसने पकड़ कर अलग कर दिया.

तो मैंने नमो से पूछा क्या हुआ? वह बोली इससे आगे मैं तुम्हें कुछ नहीं करने दूँगी. मैंने कहा क्यूँ? वह बोली मैं उसे यह सब उसी के साथ करुँगी जो मेरी मांग भरेगा. फिर क्या था? मैंने करवट दूसरी तरफ ली और लंड हिला कर पानी निकाल कर सो गया.

सुबह जब मैं जगा तो 9 बज चुके थे. मैं जैसे ही नहा धोकर, खाना खा कर तैयार हुआ. तो 11 बज चुके थे तब ईश्वर भैया मुझ से बोले चलो अंशू. हमे 12 किलोमीटर तक का साथ था. तब फूला बुआ ने कहा आज का दिन तुम्हारा बर्बाद हो ही चुका है कल चलना हमारे साथ.

दरअसल उन्हें दिल्ली जाना था मजदूरी करने और स्टेशन हमारे शहर मे है. तो उनका और मेरा साथ मेरे घर तक का साथ था. तो ईश्वर भैया बोले नहीं मुझे घर पर काम है. वह खेती करते हैं तो उन्हें काम रहता है. तो वह चले गए और मैं रुक गया. बुआ फूफा और नमो मिलकर कल सुबह निकलने कि तैयारी करने लगे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं उनके लड़के के साथ गाँव में घूमने लगा. शाम को नमो चूलें पर खाना बना रहीं थीं और मैं उसके पास बैठ गया. उस समय घर में कोई नहीं था. उसका भाई गेट के बाहर अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था. नमो मुझ से आंखे नहीं मिला रहीं थीं और मैं बस उसे ही देखे जा रहा था.

फिर उसकी जुल्फे उसके चहरे पर से लटकने लगीं. तो मैंने उन्हें पीछे कर दिया. तो वह नीचे मुह करके हँसने लगीं. फिर मैंने उससे कहा मतलब अपने आशिक को इतना तडपाओगी. वह बोली तुम मेरे भाई लगते हो, तुम्हें शर्म नही आती. मैंने कहा मैं कौनसा तुम्हारा सगा भाई हूं. हमारी दूर कि रिश्तेदारी है और हम तो मिले भी पहली बार है.

वह बोली कुछ भी हो भाई तो भाई होता है. जैसे ही मैंने उसके मुँह से भाई भाई सुना मुझे जाने क्या हुआ. मैंने सिंदूर ला कर उसकी माँग में भर दिया. वह चौक कर उठी और अपने दुपट्टे से माँग साफ कर के मुझ पर गुस्सा हुई. तो उसका भाई अन्दर आ गया उसने पूछा क्या हुआ? दीदी.

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तब नमो ने बात घुमा दी और कहा कि अभी मैं जल जाती इसकी गलती कि वजह से. फिर बुआ और फूफा आ गए और बात आई गयी हो गयी. फिर हम खाना खा कर सोने चले गए. बुआ फूफा अपने कमरे में, मैं दूसरे कमरे में और वह दोनों बहन भाई छत पर सो गए.

फिर वही हुआ जो कल हुआ था, वह आज फिर 11 बजे मेरे पास आ गई. आज उसका शरीर महसूस हुआ तो मैं समझ गया कि वह आज चुदने आई है. वर्ना वह आती ही नहीं. मैंने भी विना देरी कि खुद पूरा नंगा हो गया और उसके कपड़े उतार दिए. उसने कुछ नहीं कहा.

मैं उसके ऊपर आ कर उसके होठों में होंठ फसा कर किस किया. फिर दूध पीए और मसले. फिर मैंने उससे कहा क्या हुआ? बोलो कुछ. वह बोली जो तुम्हें करना हो वह करलो. मैंने कहा- कल तुम्हारी बहन की सुहागरात थी, आज तुम्हारी है. नमो बोली चोद लो चुपचाप.

फिर मैंने अपना लंड उससे चूसने को कहा तो उसने मुँह में लेने से मना कर दिया. मैंने कहा कि अगर गिला नहीं होगा तो चूत में जायेगा कैसे? उसने कहा मुझे नहीं मालूम. फिर मैंने उसी कमरे में रखा सरसों का तेल ढूंढ कर लंड पर लगाया. फिर मैंने लंड चूत में डाला तो नमो हिलने लगी. फिर मैंने आराम आराम से अपना पूरा लंड चूत में उतार दिया.

वह दर्द से कराहने लगीं. उसका पहली बार था. तो मैंने अपने होठों से उसका मुंह बंद कर के चोदने लगा. कुछ देर बाद नमो ने मेरे मुंह को अपने मुँह से अलग करके बोलीं- प्लीज रुक जाओ मुझे बहुत दर्द हो रहा है. मैंने झटके मारने बंद कर दिये. उसका मुंह लाल पड़ गया था और वह दर्द से कराह रहीं थीं. फिर मैं उसकी चूत से लंड निकाल कर, उसके ऊपर से उठ गया. फिर मैं उसे कपड़े पहनाने लगा.

तो वह बोली – हो गया तुम्हारा.

मैंने कहा- नहीं.

नमो- तो कर लो.

मैं- तुम अभी सहज नहीं हो.

नमो- अब ठीक हू तुम कर लो.

फिर मैंने उस के पोन्दो के नीचे तकिया लगाई और चूत में लंड डाल दिया. अब वह चूदाई में मेरा साथ दे रही थी. हमने खूब चुदाई की. हमे चुदाई करते करते सुबह हो गयीं. तो हम अपने अपने कपड़े पहन कर काम में लग गए. हम सब नहा धोकर तैयार हो कर 2 बजे की बस में बैठ गए. बुआ फूफा और छोटू एक साथ बैठ गए और हम दोनों दो लोगों बाली शीट पर एक साथ बैठ गए. जब हम आधा सफ़र तय कर चुके थे. तो

नमो- जब तुमने मेरी माँग भरी तब तुम सीरीयस थे या ये सब मजा लेने के लिए किया तुमने.

मैं – नहीं, मैं सच में गम्भीर हूं.

नमो- तो मुझे अपने साथ रखो.

मैं- तुम मेरे साथ ही रहोगी अब जिंदगी भर.

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जब हम मेरे शहर के बस स्टैंड पर पहुँचे तो मेने उन्हें अपने घर होते हुए जाने को कहा. हम सब लोग मेरे घर पर आ गए. तो मम्मी ने उन सब की आओ भगत की. मम्मी नमो से बोली तुम पढ़ती नहीं हो.

नमो- बी.ए का फाइनल ईयर है.

मम्मी- जब तुम दिल्ली जाओगी. तो तुम्हारी पढ़ाई कैसे हो पाएगी.

बुआ- क्या करें कहा छोड़ दें इसे अकेला. पहले बड़ी बहन थी तो तीनों भाई बहन घर पर बने रहते थे. अब उसकी शादी हो गई, तो इसे अकेले कैसे छोड़ दें. छोटू थोड़ा बड़ा हो जाय तो दोनों गाँव में बने रहेंगे.

तो मम्मी ने बोल दिया कि आप नमो को हमारे यहाँ छोड़ दो. दो महिने कि तो बात है. दो महिने बाद आप आ जाओ तो ले जाना. आप कहा जवान बेटी को लेकर घूमोगे जमाना खराब है. तो बुआ फूफा मान गए और वह लोग नमो को हमारे घर छोड़ गए. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर नमो मेरी दीदी के कमरे में रहने लगीं. तो मेरा बहुत मन होता था. उससे प्यार करने का लेकिन समय ही नहीं मिलता था. दिन में मैं रहता नहीं था और शाम सुबह घर वाले होते थे. रात में वह दीदी के साथ सोती थी. ऊपर से जैसे ही हम अकेले होते थे तो वह शादी करने की बात करती थी. वह कुछ करने ही नहीं देती थी.

यैसे ही 10 -12 दिन निकल गए. तब मुझे लगा अब शादी करनी ही पड़ेगी. मैंने कोर्ट मैरिज कि तैयारी करने लगा और सही समय का इंतजार. कुछ 15 दिन बाद हमे मोका मिला. एक दिन हमारे घर पर कोई नहीं था. बैंक वालों कि हड़ताल थी तो पापा दो दिन वहॉं व्यस्त थे.

मम्मी मामा के यहाँ गयीं हुईं थीं. मेरे मामी के लड़का हुआ था. दीदी कि एस.एस.सी के पेपर में ड्यूटी लगीं हुईं थीं. मैंने उसी दिन अपने दोस्तों को बुला कर हम लोगों ने कोर्ट मैरिज कर ली. शादी तो हमारी हो गयीं. लेकिन प्यार फिर भी हमे छुप छुप कर करना पड़ रहा था.

लेकिन उसमे मजा भी आ रहा था. अब वह भी चुदाई के लिए बहुत उत्तेजित रहती थी. रात में मैं अपने कमरे का दरवाज़ा खुला रखता था. नमो रोज दीदी के सोने के बाद मेरे पास आ जाती थी. तो हम रोज हचक के चुदाई करते थे. पर हम पूरा ध्यान रखते थे कि नमो प्रेगनेंट ना हो जाए.

अब हम सबसे नजर बचा के एक दूसरे को छेड़ने लगे. तो मेरी दीदी को हम पर सक होने लगा. फिर नमो के फाइनल पेपर आ गए, तो मम्मी ने मुझ से बोला तू दिवा ला पेपर पर दीदी बीच में कुन्द गयीं. वह बोली मैं जाऊँगी पेपर दिलवाने. फिर दीदी और नमो चली गई. वह दोनों साथ में 7-8 दिन गयी पेपर देने, तो नमो ने दीदी को सब बता दिया. फिर जब दीदी को पता चला, तो वह उसी रात मम्मी पापा के कमरे में जाने के बाद मुझ से बोली क्यूँ बे य़ह क्या किया तूने?

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मैं – सॉरी दीदी अब वो हो गया. अब क्या करें.

दीदी- यैसा कब तक चलेगा?

मैं – मेरे पास एक प्लान है सब ठीक हो जाएगा.

फिर मैंने अगले दिन कोटा में ट्रांसफर की अपील की. फिर एक हफ्ते बाद में कोटा में चला गया था. फिर दो तीन दिन बाद नमो को बुआ फूफा दिल्ली से आ कर अपने गांव ले गए. जैसे ही वे लोग गाँव पहुंचे मैं भी उसके अगली रात में उनके गाँव के बाहर रोड पर स्विफ्ट कार ले कर पहुंच गया.

मैंने सब नमो को पहले ही बता दिया था. वह चुप चाप अपना सामान ले कर आ गई. फिर हम कोटा आ गए. यहाँ हड़कंप मच गया. फूफा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी. उन्हें मुझ पर सक था. तो वह मेरे घर गए वहॉं उन्हें कुछ नहीं मिला. अब मैं समझ गया था कि फूफा कोटा आ सकते है.

तो मैंने नमो को अपने एक कलीग के यहाँ रहने भेज दिया. वह कलीग 45 साल कि तलाक शुदा महिला थी. वह अकेली रहती थीं. फिर फूफा और अवनीश मेरे कोटा वाले घर आए और एक दिन रुक के चले गये. अब हम दोनों आराम से रहने लगे. उधर दीदी ने मम्मी पापा को सब बता दिया था.

तो पहले कुछ दिनों तक वो लोग नाराज रहे. फिर मान गए. फिर मम्मी रोज नमो से कॉल पर बात करने लगीं. अब हम रोज सेक्स करते थे. मैं दिन में नौकरी पर जाता था तो नमो चाय नास्ता और लंच देती थी. वह सारे घर के काम करती थी. मैं रोज शाम को रोज कुछ न कुछ उसके लिए लेकर आता था.

शाम को घर के कामों में उसका हाथ बटाता था. रात को खाने के बाद वह सोने के लिए सिर्फ पेन्टी ब्रा में आती थी. मैं उसे अपनी गोद में बिठा कर उसके चूचे दबाता था और उसे चूमता था. वह भी मुझे चूमती थी. हम पूरे घर में चुदाई करते थे. हम टीवी में पोर्न चलाकर देखकर चुदाई करते थे.

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हम पूरी रात नंगे रहते थे. पहले वह मुझे करने नहीं देती थी अब रुकती नहीं थी. मैं जैसे ही सोता था तो वह बैसे ही लंड मुहँ में भर के जगा देती थी. खुद दिन में सो लेती थी पर मुझे सोने नहीं देती थीं. एक दिन संडे का दिन था नमो दोपहर में सो रहीं थीं.

मुझे लगा कि जब य़ह मुझे रात में नहीं सोने देती मैं इसे दिन में नहीं सोने दूँगा. वह उल्टी सो रहीं थी. मैंने उसकी मैक्सी उपर करदी. और उसकी पेन्टी उतार दी. फिर मैंने लिंग पर क्रीम लगा कर उसकी गांड पर क्रीम लगा दी. फिर मैंने उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया. अभी टोपा ही गया था कि वह जोर से चिल्ला उठी. मै उसी स्थिति में रुक गया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

नमो – क्या कर रहे हों उठो.

मैं – कब से इंतजार कर रहा हूं, तुम्हारी गांड मरने का. मारने दो ना.

नमो- चाहे मेरी जान निकल जाय?

मैं – कुछ नहीं होगा, प्लीज करने दो न.

फिर वह गांड फैला कर घोड़ी बन गयी. मैंने उसकी गांड में लंड पेल दिया. फिर मैं धक्के मारने लगा. उसे बहुत दर्द हो रहा था. वह बेड शीट को दोनों हाथों से कस के पकड़े थी. उसकी आँखों से आंसू आने लगे. वह बेड पर पसर गयीं. कुछ मिनटों बाद मैं झड़ गया मैंने उसकी गांड वीर्य से भर दी. वह असहनीय दर्द के कारण बेसुध सी डली थी.

मुझे बहुत बुरा लगा तो मैने उससे माफी मांगी और यैसा कभी न करने का प्रण लिया. मैंने उसे एक दर्द कि दवा खिलाई. वह सही से चल तक नहीं पा रहीं थीं. उसने मुझसे दो दिन तक बात नहीं की. मैंने उसे उपहार और घुमा फिरा कर मनाया. करीब तीन महिने बाद पुलिस ने हमे पकड़ लिया. तब मैंने अपने वकील दोस्त को बुलाया.

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तो उसने पुलिस को बताया कि ये लोग बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है. हमने शादी का सर्टिफिकेट दिखाया तो पुलिस ने हमे छोड़ दिया. लेकिन फूला बुआ और फूफा हमारे इस रिश्ते से खुश नहीं थे. हम दोनों कोटा में रहने लगे. दो महीने बाद नमो प्रेग्नेंट हो गई. उसने मेरी मम्मी को बताया तो उन्होंने अपने घर आने को कहा. फिर मैं ट्रांसफर लेकर अपने घर वापस पहुंच गया. मेरे घर में सब लोग खुश थे. मम्मी और दीदी नमो कि देख भाल करने लगीं.

नौ महीने बाद हमारा लड़का हुआ. तब अन्नू फूफा – बुआ को अवनीश और उनके परिवार वालों ने समझाया. जो हुआ वो छोड़ो अपनी लड़की खुश है. हमे दुनिया से क्या लेना? बैसे भी हम ऐसे सम्पन्न परिवार में उसकी शादी कभी कर ही नहीं पाते. फिर वह लोग मान गए. लड़का होने कि खुशी में प्रोग्राम था तो नमो कि बड़ी बहन जीजा, बुआ फूफा, छोटू और अवनीश सब रिस्तेदार आये. प्रोग्राम खत्म हुआ सब लोग चले गए. फिर हम लोग हँसी ख़ुशी से रहने लगे.

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