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कुछ साल पहले की बात है, मैं अपनी दूर की रिश्ते की मामी और दो बहनों (मामी की बेटियों) के कहने पर उनके साथ कुल्लू गया। कुल्लू में मेरे परदादा हमारे नाम एक मकान छोड़ गए थे। हम लोगों के पहुँचने के घंटे भर बाद ही ज़ोरदार बर्फ गिरना शुरू हो गया। मकान में बत्ती चली गई। मैं अंधेरे में टटोलता हुआ ऊपर गया और चार-पाँच कंबल और चादरें ले आया। Free Sexy Hindi Kahani
नीचे तब तक मामी और बहनों ने आग जला कर रखी थी। हम सब लोग आग के पास ही बिस्तर लगाकर कंबल ओढ़कर लेट गए। आग और कंबल की गरमाहट से नींद आ गई। मेरी आँख शायद मुश्किल से बीस मिनट हुई होंगी। जब आँख खुली तो मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ की बजाय किसी और का हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड को सहला रहा है।
आग की मंद रोशनी में मैं यह जान पाया कि मेरी मामी और मेरी बहन सीमा गहरी नींद में सो रही थीं। तो फिर बची दूसरी बहन निशा, जो मेरी पीठ के पीछे सो रही थी। मैंने बहुत धीरे से करवट बदली और अपने आप को निशा की मुस्कुराती आँखों में देखते पाया। कोई लज्जा नहीं, न कोई हिचक, बस एक मुस्कुराहट, और मेरे आधे खड़े लंड पर उसका हाथ।
कंबल की गहराइयों में से उसने अपना दूसरा हाथ निकाला और एक उँगली अपने होंठों पर रखकर मुझे शांत रहने का इशारा किया। वो धीरे से मेरे पास खिसक आई और अपने कोहनी पर उठकर मामी और सीमा की ओर देखते हुए अपने होंठ मेरे कान के पास ले आई और बोली, “मेरी जिस्म में बहुत ज़ोर से आग लगी है,” मेरे कान को चूमते हुए फुसफुसाई।
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“पागल हो गई हो?” हैरानी में आकर मैं धीरे से गुर्राया। “नहीं,” वो सिर हिलाते हुए बोली, “उन्हें कभी पता नहीं लगेगा, मैं वादा करती हूँ।” ऐसा कहकर उसने मेरी गर्दन को चूम लिया। निशा थी तो सिर्फ 19 साल की, लेकिन उसके हर अंग से जवानी फूटती थी। दो शानदार स्तन, और एक मस्त, गोल गाँड उसे कुदरत ने दी थी।
हाँ, यहाँ सब चीजें देखने को मिलती हैं जब बहनें भूल जाती हैं कि घर में एक मर्द भाई है और आधी नंगी अवस्था में इधर-उधर घूमती रहती हैं। निशा मेरी आँखों में देखती रही, लेकिन मैंने उसके हाथ को मेरे पजामे का नाड़ा खोलते हुए महसूस किया। उसने अपने हाथ में फूँक मारी और मेरे खुले हुए पजामे में से अपना हाथ अंदर डालकर मेरे लंड को पकड़ लिया।
लंड को पजामे के बाहर खींचते हुए उसने फिर मामी और सीमा की ओर देखा। “उनकी तरफ नज़र रखना,” वो बोली और कंबल में घुस गई। उसका इरादा क्या है, यह जानने में केवल 5 सेकंड लगे। मेरे लंड को अचानक बहुत गरमाहट महसूस हुई। उसके होंठ मेरे लंड के सुपाड़े के चारों ओर थे, उसकी जीभ मेरे सुपाड़े के चारों ओर चक्कर काट रही थी, और उसका हाथ अभी भी मेरे लंड को सहला रहा था।
मैंने जल्दी से मुड़कर मामी और सीमा की ओर देखा, लेकिन चाहता तो मैं यह था कि उसको अपना लंड चूसते हुए देखूँ। जब निशा ने मेरा लंड छोड़ दिया तब मैंने एक गहरी साँस ली। लेकिन अभी प्यारी बहन की आग कहाँ बुझी थी? खड़ी होकर उसने अपने नाइटी ऊपर उठाई और अपने पैंटी उतार दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर वह बिस्तर में मेरे पास घुस गई और अपने जिस्म को मेरे जिस्म से लिपटाकर फुसफुसाई, “तुम मत हिलो, सब मुझे करने दो।” मेरा लंड अब पत्थर की तरह खड़ा हो गया था। मुझसे चिपके हुए निशा ने अपनी जाँघें ज़रा सी खोलीं और मेरे लंड को उनके बीच में ले लिया। फिर आगे-पीछे हिलाते हुए उसने मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया।
एक बार फिर मामी और सीमा की ओर देखते हुए उसने अपने आप को ज़रा सा नीचे खिसकाया और फिर ऊपर उठते हुए मेरे लंड को पूरी तरह अपनी चूत में घुसा लिया। बाप रे बाप! निशा की चूत की गरमाहट ने मुझे पागल बना दिया। उस समय मेरी बहन की चूत से गरम और कोई जगह उस घर में नहीं थी, और मेरा लंड उस गरमाहट का पूरा फायदा उठा रहा था।
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निशा के कहे अनुसार मैं बिना हिले-डुले लेटा रहा। निशा अब उछल-उछलकर अपने आप को चुदवा रही थी। मैं साँस रोके इसका पूरा आनंद ले रहा था। निशा की चूत रह-रहकर मेरी जाँघों से टकरा रही थी और उसकी गीली, गरम चूत मेरे लंड पर ऊपर-नीचे फिसल रही थी। निशा को झड़ने में करीब 9 मिनट लगे।
जब वो झड़ी तो उसने अपने दाँतों के बीच मेरे होंठों को भींच लिया और काफी ज़ोर से झुरझुराई। झड़ने के बाद निशा ने ऊपर उछलकर अपनी चूत को मेरे लंड से छुड़ाया और बोली, “मैं ज़रा मूत कर आती हूँ,” और चलती बनी। मुझे बहुत गुस्सा आया। मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं अपनी दूसरी बहन सीमा को अपने पास आते नहीं देखा।
सीमा मेरी ओर हाथ बढ़ाकर धीरे से बोली, “चलो।” मुझे नहीं मालूम था कि उसके दिमाग में क्या है, लेकिन जो कुछ भी था, मैं मना करने वाला नहीं था। हम दोनों वहाँ से निकलकर एक दूसरे कमरे में गए जहाँ सूटकेस वगैरह रखे थे। दरवाजा बंद करते ही सीमा मुझसे चिपक गई और मेरे लंड को सहलाते हुए बोली, “निशा तो बहुत चुदती है।”
अब तक मेरा लंड फिर पूरे तरह कड़ा हो गया था। सीमा ने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे ज़िपर खुलने की आवाज आई। अगले दो सेकंड में सीमा की गाँड और चूत मेरे लंड से लगी हुई थीं। “चलो, चोदो,” वो बोली। मैंने अपना हाथ उसके चूतड़ों पर फिराया और उसके चूत तक पहुँच गया। दूसरे हाथ से मैंने अपना लंड सीमा की चूत पर रख दिया।
फिर एक हल्के से धक्के के साथ मेरा लंड मेरी दूसरी बहन की रेशमी चूत में घुस गया। वाह! क्या कसी हुई चूत थी सीमा की। मुझे तो चोदने का मज़ा आ गया। दरवाजे से लगा हुआ मैं सीमा की कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार-मारकर उसे चोद रहा था। सीमा भी अपनी चूत को आगे-पीछे करते हुए मेरे लंड से मिला रही थी।
“मैं झड़ने वाला हूँ। क्या मैं तुम्हारी चूत में झड़ जाऊँ?” “हाँ, ठीक है,” काँप-काँपती आवाज में मेरी बहन बोली। मैं और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। “आह… आह… ओह सीमा… चुद… चुद… और चुद मेरी बहन… आज तुझे अच्छी तरह चोदकर रहूँगा।” बोलते-बोलते मैं सीमा की चूत में झड़ने लगा। तभी सीमा भी साथ-साथ झड़ने लगी।
उसका शरीर बिल्कुल जकड़ गया और उसकी चूत मेरे लंड से चिपक गई। “मुझे सहारा दो,” वो बोली। उसने पीछे की ओर हाथ बढ़ाकर मेरी गाँड को पकड़ लिया ताकि मेरा लंड उसके चूत में बना रहे। जब सीमा झड़ चुकी तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहन लिए।
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आगे वाले कमरे में वापस आकर हमने देखा कि निशा सीमा की जगह आँखें बंद करके लेटी है। हम लोग कंबल के नीचे घुस गए और एक-दूसरे से चिपककर सो गए। दूसरे दिन सुबह तक बर्फ और तूफान थम चुके थे। मामी ने निशा और सीमा को बाजार भेज दिया और मुझे किचन में छोड़कर दूसरे कमरे में चली गई।
दो मिनट बाद ही उनके बुलाने की आवाज मेरे कानों में पड़ी। मैं जब चलकर कमरे में पहुँचा तो नज़ारा देखता ही रह गया। सामने गद्दे पर मेरी मामी बिल्कुल नंगी लेटी थीं। उनकी बड़े-बड़े स्तन और कड़े निप्पलों को मैं निहारता रह गया। “मुझे पहले होना चाहिए था,” मामी अपने चूत को सहलाते हुए बोलीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“चलो, देख क्या रहे हो? ये लोग अभी घूमते आ जाएँगे।” मैं जल्दी से अपने कपड़े उतारकर मामी के बगल में गद्दे पर लेट गया। मामी फिर मेरे ऊपर 69 की तरह आ गईं। मेरी ओर देखते हुए उन्होंने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी। दूसरी तरफ मामी अपना चेहरा नीचे झुकाया और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं।
वाह! क्या बात थी। इधर मैं अपनी मामी की चूतड़ें फाड़कर उनकी चूत चाट रहा था, उधर मेरी मामी मेरा लंड चूस रही थीं। मामी के चूतड़ पकड़कर मैंने उनकी चूत को अपने और पास खींचा और अपनी जीभ दूर अंदर तक घुसा दी। मामी के शरीर में कसकर झुरझुरी दौड़ गई और वो मेरा लंड अपने गले तक उतारकर और ज़ोर से चूसने लगीं।
चूत चाट-चाटकर मैंने मामी को तीन बार झड़ाया। मेरा लंड भी झड़ने के लिए बेचैन था। मैंने लंड को मामी के मुँह में से निकाला तो क्षण भर के लिए उनके चेहरे पर उदासी आ गई। “ऐसे ही लेटे रहो,” मैंने कहा और अपने घुटनों के बल आ गया। शायद यह सुनकर अजीब लगे लेकिन मैं अपनी मामी को चोदने के लिए तैयार था।
क्यों न चोदूँ? दोनों बहनों को तो चोद ही चुका था, मामी ही बची थीं। मामी की चूत खोलते हुए मैंने अपना लंड जगह पर लगाया और एक हल्के झटके से अंदर घुसा दिया। मुझे जानकर आश्चर्य हुआ कि मामी की चूत सीमा की चूत की तरह कसी हुई थी। फिर मैंने सोचा, हो भी क्यों न, आखिर जहाँ तक मुझे पता था, मामा की डेथ के बाद से वो किसी मर्द के साथ नहीं रही थीं।
ऐसा लगता था जैसे कि मैं एक 40 वर्ष की औरत का भोसड़ा नहीं, बल्कि एक जवान लड़की की नयी चूत चोद रहा हूँ। एक हाथ से मामी की कमर और दूसरे से उनकी एक लटकती हुई चुची पकड़कर मैं अपनी पूरी ताकत से चोदने लगा। “तुम्हें तो सज़ा मिलनी चाहिए,” मामी हाँफते हुए बोलीं।
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“क्यों मामी?” “क्योंकि तुमने इससे पहले आज तक मुझे नहीं चोदा।” “सच तो यह है मामी,” मैंने जवाब दिया, “कि मैं तो जाने कब से तुमको चोदना चाह रहा था।” यह कहते हुए मैंने अपना लंड उनके चूत में से निकाल लिया और ले जाकर उनकी गाँड के छेद पर रख दिया। मामी ने मुड़कर मेरी ओर एक अजीब तरह से देखा, लेकिन मना नहीं किया।
मुझे तीन ज़ोरदार धक्के लगाने पड़े, आखिर मेरा सुपाड़ा मामी की गाँड में घुस गया। उसके बाद तो काम आसान हो गया और मेरा लंड आराम से गाँड में चला गया। “तुम गाँड इससे पहले भी मरवा चुकी हो,” मैंने कहा। “हाँ,” मामी बोलीं, “लेकिन ज़रा तमीज़ से कहो।” “सॉरी,” मैंने कहा और उनकी गाँड मरता रहा। मेरे झड़ने का समय आ गया था।
जैसे ही मैंने अपने आप को झड़ने के लिए तैयार किया, वैसे ही सैंडलों की आहट मेरे कानों में पड़ी। घूमकर मैंने देखा तो कमरे के दरवाजे में निशा और सीमा हाथों में पैकेट लिए खड़ी थीं। निशा की आवाज पहले निकली, “हे भगवान,” उसने कहा और उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं। “अच्छा, हट भी,” सीमा तुनककर बोली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“कल रात को तो बड़ा कूद-कूदकर चुदवा रही थी तू।” “लेकिन गाँड थोड़े ही मरवाई थी। इसमें तो बड़ा दर्द हो रहा होगा,” निशा मामी की तरफ देखते हुए बोली। “देखो, अगर तुम दोनों को मुझे बुरा-भला ही कहना है, तो कृपा करके कहीं और जाकर कहो।” यह मामी की आवाज थी। कहते-कहते मामी का शरीर हिलने लगा और वह झड़ने लगीं।
“मामी ठीक कहती हैं,” सीमा बोली और मुड़कर जाने लगी। निशा तीन और धक्कों के लिए रुकी और फिर सीमा के पीछे चल दी। धक्के मारते-मारते मैंने मन ही मन फैसला किया कि अगर मौका मिला तो निशा की गाँड अच्छी तरह मारकर रहूँगा। तभी मैं ज़ोर से झड़ने लगा मामी की गाँड में।
मामी ने एक कराह निकाली और अपने चूतड़ मेरे लंड के चारों तरफ गोल-गोल घुमाने लगीं और अपनी गाँड कसकर मुझसे चिपका दी। अपनी ताकतवर गाँड से मामी ने मेरे लंड को ऐसे तरफ चूस लिया। जब हम दोनों यह सब कर रहे थे, मेरी बहनें किचन में नाश्ता तैयार कर रही थीं।
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खा-पीकर मैंने थोड़ा आराम किया और सामान खोलने और लगाने में सबकी मदद की। फिर मैं बाजार चला गया हीटर खरीदने और लकड़ी का इंतजाम करने। वापस आया तो मामी और बहनें मीटिंग कर रही थीं। वे लोग न केवल जो कल रात और आज हुआ, वह बातचीत कर रहे थे, बल्कि आगे कैसे क्या होगा, यह भी तय कर रहे थे। क्योंकि मैं था नहीं इसलिए मेरी सलाह ली नहीं गई। सीमा ने मुझे बताया कि एक बात यह तय की गई थी कि अगली बार किसका नंबर पहले आएगा। क्योंकि पिछली बार निशा सबसे पहले चुदी थी और मामी सबसे बाद में.
तय किया गया कि अगली बार चुदाई की लाइन में मामी पहले होंगी। दोपहर को खाने के बाद मामी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैं ज़मीन पर घुटनों के बल बैठा हुआ मामी की चूत चाट रहा था कि निशा और सीमा कमरे में दाखिल हुए। मेरी दोनों बहनें आज तक किसी बात पर सहमत नहीं हुई थीं, लेकिन आज मैंने दोनों को कहते सुना कि अगली बार चारों एक साथ चुदाई के खेल में शामिल होंगे। मामी यह सुनकर ज़ोर से मुस्कुराईं। हम लोग अब भी कुल्लू में ही रहते हैं और साथ-साथ मज़ा करते हैं।
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