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भाभी के बाद दोस्त के माँ को चोदा

मई 25, 2026 by hamari Leave a Comment

Horny Desi MILF Chudai

मेरे प्यारे सिस्टर, मदर्स, ब्रदर्स, आंटीज, अंकल्स… अपना हाथ अपना लंड या उंगलियाँ अपनी चूत पर रख लें। मैं आपको एक और दिलचस्प कहानी सुनाने जा रहा हूँ। उम्मीद है पिछली कहानी भाभी के पहले 2 रंडी बहनों को चोदा था आप लोग एंजॉय करेंगे और मुठ भी मारेंगे। और प्लीज मुझे जरूर बताना कि आपने मेरी कहानी पढ़ते हुए फिंगरिंग की है या नहीं… Horny Desi MILF Chudai

तो दोस्तों, ये कहानी आज से 3 साल पहले की है, जब मैं 22 साल का था और गर्मियों के दिन थे। मेरा एक कॉलेज फ्रेंड था जिसका नाम विक्की था। वो अपनी मॉम के साथ रहता था, उसके डैड नहीं थे। हमारी फैमिली उनको थोड़ी फाइनेंशियल सपोर्ट भी करती थी। उस वक्त विक्की की उम्र 21 साल थी। वो जॉब भी करता था और साथ में पढ़ाई भी।

उसकी मॉम का नाम वनिशा था, उम्र करीब 45 साल थी। उनका फिगर 38D-30-36 था। देखने में वो सेक्सी डॉल जैसी लगती थीं। रंग साँवला था, जो मुझे बहुत पसंद था। मेरा उनके घर बहुत आना-जाना था। वो लोग मुंबई के एक लो-स्टैंडर्ड इलाके में रहते थे।

एक दिन मैं उनके घर गया। मॉम ने दरवाजा खोला। मैंने विक्की के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वो ऑफिस गया है, थोड़ी देर में आ जाएगा। तुम अंदर आ जाओ। मैं वहाँ रुक गया। मॉम मेरे लिए फ्रूट लाईं और बातें करने लगीं। मैंने कभी भी मॉम को गलत नजर से नहीं देखा था।

मॉम ने पूछा, “सुबह क्या करते हो?”

मैंने बताया, “कुछ खास नहीं, बस मूवीज देखता हूँ और टाइम पास करता हूँ।” (उन दिनों मैंने फाइनल ईयर के पेपर दे दिए थे और फ्री था।)

मॉम ने कहा, “यहाँ मेरे पास आ जाया करो, मैं भी अकेली बहुत बोर हो जाती हूँ।”

इतने में विक्की भी आ गया और हम तीनों बातें करने लगे।

विक्की ने भी मुझसे कहा, “यार तुम सुबह के समय मॉम के पास आ जाया करो, मॉम अकेली बोर हो जाती हैं।”

मैंने हाँ कर दी और घर वापस आ गया। तकरीबन 3-4 दिन बाद सुबह मेरा मूड बना तो मैं मॉम के पास चला गया। डोर बेल बजाई तो अंदर से ही मॉम ने पूछा, “कौन है?”

मैंने बताया, “मैं सनी हूँ।”

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उन्होंने दरवाजा खोल दिया। जब मैंने मॉम को देखा तो दंग रह गया। मॉम ने सिर्फ एक पैंटी पहनी हुई थी और ऊपर बारीक सफेद रंग की खुली शर्ट, जिससे उनकी नंगी टांगें और बड़े-बड़े स्तन साफ नजर आ रहे थे। नीचे ब्रा भी नहीं थी।

मॉम फौरन बोलीं, “इस वक्त मैं अकेली होती हूँ ना, इसलिए ऐसे ही कपड़े पहनती हूँ। और तुम तो मेरा बेटा हो, तुमसे क्या पर्दा।”

उन्होंने मुझे बिठाया और काम करने लगीं। थोड़ी देर बाद वो कमरे से बाहर आईं, लेकिन वही कपड़े पहने हुए थीं। फिर किचन में चली गईं और मुझे भी किचन में बुला लिया। बातें करने लगीं, लेकिन मेरी नजर उनके नंगे जिस्म पर थी और मैं अपनी नजर हटा नहीं पा रहा था।

जब मॉम ने यह सब महसूस किया तो उन्होंने और इंतजार नहीं किया। पहले वो सब्जी काटने के लिए आगे झुक गईं, जिससे उनकी शर्ट पीछे से थोड़ी ऊपर हो गई। उफ्फ… क्या मोटी गांड थी! मेरा लंड खड़ा होने लगा। फिर मॉम ने मेरे पास स्टूल रखकर उस पर खड़ी होकर बोतल उतारने लगीं।

चूँकि मैं नीचे टेबल के पास ही बैठा था, इसलिए उनकी शर्ट से उनके बड़े स्तन साफ नजर आने लगे। मेरी नियत अब खराब हो चुकी थी, लेकिन मैं चाहता था कि मॉम पहले पहल करें, इसलिए मैंने अपने ऊपर काबू रखा। मेरा लंड इस वक्त तक पूरी तरह टाइट हो चुका था।

फिर मॉम ने मुझसे कहा, “सनी बेटा, यह बोतल मुझसे नहीं उतर रही, प्लीज तुम उतार दो।”

पहले तो मैं शर्मा गया क्योंकि मेरा मोटा लंड पैंट में खड़ा साफ नजर आ रहा था। लेकिन जब दूसरी बार मॉम ने कहा तो मुझे मजबूरन खड़ा होना पड़ा। मॉम ने मेरी पैंट में बना टेंट देख लिया और मुस्कुरा दीं। मैंने शर्म से आँखें नीचे कर लीं। मॉम ने दोबारा मेरी तरफ गांड करके बातें करने लगीं।

मैं पैंट के ऊपर से ही अपना लंड मसलने लगा। अचानक मॉम ने पीछे देख लिया। मैं घबरा गया और पैंट पर से हाथ हटा लिया। मॉम फिर मुस्कुराईं और अपना मुँह दूसरी तरफ करके काम करने लगीं। चूँकि मेरा लंड बहुत टाइट हो चुका था और मुझसे रहा नहीं जा रहा था, और मॉम के इग्नोर करने की वजह से मुझे हिम्मत आ गई थी, लेकिन मैंने कुछ ज्यादा करना मुनासिब नहीं समझा। फिर भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

तो मैं मॉम से इजाजत लेकर वापस जाने वाला था कि मॉम ने पूछा, “कल आओगे?”

मैंने कहा, “जरूर। आपको कुछ मँगवाना है तो बता दें, मैं कल लाते हुए आऊँगा।”

मॉम ने मुझे कुछ सब्जियाँ लाने को कह दिया। अगले दिन मैंने पैंट और शर्ट पहनी, लेकिन नीचे अंडरवियर नहीं पहना। सुबह-सुबह मैं मॉम के बताए हुए सामान लेकर उनके घर पहुँच गया। डोर बेल बजाई तो मॉम ने दरवाजा खोला। शायद मेरा इंतजार कर रही थीं। उन्होंने वही कल वाला ड्रेस पहना हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा। मैं सामान लेकर मॉम के साथ ही किचन में चला गया। सामान एक तरफ रखकर कल वाली जगह पर बैठ गया और मॉम से बातें करने लगा। मॉम फिर कल वाले अंदाज में गांड मेरी तरफ करके खाना बनाने लगीं। मैं पीछे बैठकर उनकी मोटी गांड देखकर मजे लेने लगा। ऐसे में मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया।

मैंने देखा कि मॉम सब्जी काट रही हैं, तो मैंने मौका देखकर अपना हाथ पैंट के अंदर डाल दिया और लंड को मसलने लगा। लेकिन मुझे मजा नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने अपनी पैंट की जिप खोल दी और टांग पर टांग रखकर ऐसे बैठ गया कि अगर मॉम अचानक मुड़ भी जाए तो पहली नजर में कुछ खास पता न चले।

अब मॉम मुझसे बातें कर रही थीं और मैं अपना लंड मसल रहा था तथा खयालों में मॉम को चोद रहा था। तकरीबन 8-9 मिनट बाद मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर सका और मेरा वीर्य (पानी) लंड से निकल आया, जिससे मेरी पैंट गीली हो गई।

कुछ ही देर बाद मॉम ने मुझे दूसरे कमरे में चलने को कहा, जहाँ से सोफा उठाकर दूसरे कमरे में रखना था। अब मेरी पैंट गीली थी और मैं शर्मा भी रहा था। जब मॉम की नजर मेरी पैंट पर पड़ी तो वो हँस पड़ीं। फिर मॉम ने खुद ही विक्की की एक पैंट निकालकर मुझे दे दी। मैंने शर्म से नजर झुका ली।

मॉम बोलीं, “वो काम क्यों करते हो जिसके बाद गिल्टी फील करो?”

उसके बाद उन्होंने मुझे दूसरे कमरे में ले जाकर बाथरूम दिखाया और खुद बाहर आ गईं। मैंने नहाया, ड्रेस चेंज किया और बाहर आया तो देखा कि दूसरे कमरे के बाथरूम में मॉम मेरी पैंट धो रही थीं। वो एक छोटी सी सीट पर बैठी थीं जिससे उनका चूतड़ बाहर निकला हुआ था। मैंने कुछ नहीं सोचा और पीछे से मॉम के पास जा बैठा और उनके स्तनों को पकड़कर दबाने और मसलने लगा।

मॉम ने मेरी तरफ देखा और कहा, “मैं तुम्हारी मॉम जैसी हूँ।”

मैंने कहा, “हो तो नहीं ना? प्लीज तुम बहुत सेक्सी हो… एक बार प्लीज… प्लीज…”

मैं मॉम के साथ पीछे से चिपक गया। मॉम बोलती रहीं लेकिन मैं पीछे नहीं हटा। मैंने फौरन मॉम की शर्ट वहीं बाथरूम में उतार दी। दोस्तों, मर्द कभी औरत के साथ सेक्स करने में इंतजार नहीं कर सकता। यही मेरे साथ हुआ। फिर मैंने मॉम के बड़े-बड़े स्तनों को मसलना शुरू कर दिया।

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मॉम वैसी ही बैठी रहीं। फिर मैंने मॉम की पैंटी नीचे करने की कोशिश की, लेकिन मॉम के बैठे होने की वजह से पैंटी नीचे नहीं हुई। मैंने मॉम को थोड़ा उठने को कहा, लेकिन वो कुछ नहीं बोलीं और कपड़े धोती रहीं। फिर मैंने खुद ही जबरदस्ती मॉम को ऊपर उठाकर उनकी पैंटी नीचे खींच दी।

जिससे मॉम का चूतड़ और मोटी थोड़ी काली गांड मेरे सामने नंगी हो गई। मैंने मॉम को थोड़ा सीट से पीछे खींच दिया, जिससे उनकी गांड और चूत सीट के नीचे से निकल गईं। उनकी चूत पर बाल थे। अब मैं कभी मॉम के स्तन दबाता, कभी गांड में उँगली डालता, कभी चूत में… जहाँ-जहाँ दिल करता, हाथ लगा रहा था।

इस सब के बीच मॉम ने एक-दो बार कहा, “ये ठीक नहीं है।”

मैंने जवाब दिया, “मॉम प्लीज, सब करते हैं।”

मॉम बोलीं, “करते हैं मगर मॉम के साथ नहीं।”

मैंने कहा, “प्लीज आप मेरी रियल मॉम तो हो नहीं।”

फिर वो चुप हो गईं। मैंने फिर मॉम के स्तनों को पकड़कर जोर से दबाया तो वो बोलीं, “आह्ह्ह… आराम से… क्या मार डालेगा?”

फिर मैं उठकर मॉम की गोद में बैठ गया और जैसे बचपन में अपनी माँ के स्तनों से दूध पीता था, वैसे ही दूसरे मॉम के निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा। कभी हल्का सा काट भी देता तो मॉम बोलतीं, “अरे बेटा, आराम से… दर्द होता है।”

मैंने जवाब दिया, “मॉम इसमें से दूध नहीं आ रहा, इसलिए मुझे गुस्सा आ रहा है।”

मॉम बोलीं, “अरे आराम से चूस तो निकल आएगा।”

मैं हँस पड़ा और मॉम भी हँस पड़ीं। अब मॉम ने पहली बार अपना हाथ मेरे बालों में फेरा, फिर मुँह पर, और फिर धीरे-धीरे अपना हाथ मेरे लंड पर रखकर मसलने लगीं। जिससे मेरा लंड अंगड़ाई लेने लगा। अब मैं थोड़ा ऊपर उठकर मॉम के होंठों पर अपने होंठ रखकर चूसने लगा। मॉम भी मेरे साथ देने लगीं। मैं मॉम को किसिंग भी कर रहा था, उनके स्तन भी दबा रहा था और मॉम मेरा लंड मसल रही थीं।

मॉम बोलीं, “मेरा बेटा, तेरा लंड तो बहुत हेल्दी है। आज कई सालों बाद मर्द का लंड हाथ में ले रही हूँ और वो भी इतना बड़ा मोटा लंड। ये 7-8 इंच का तो होगा।”

मैं बोला, “नाप लो मॉम, पता चल जाएगा।”

मॉम बोलीं, “चल ठीक है, अब सीधा हो, मैं देखूँ तो सही कैसा है मेरा बेटे का लंड।”

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उन्होंने मुझे नीचे गिराकर बाथरूम में ही लिटा दिया और खुद अपना मुँह मेरे लंड के पास ले जाकर उसे चूसने लगीं। जब मॉम ने पहली बार अपने होंठ मेरे लंड पर रखे तो दोस्तों, मेरी तो जान ही जैसे निकल गई हो। अब मॉम मेरा आधा लंड मुँह में लेकर चूस रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर मैंने मॉम को 69 पोजीशन में आने को कहा और साथ में मैंने शावर खोल दिया धीरे से। अब मैं मॉम की चूत चाट रहा था और मॉम मेरा लंड चूस रही थीं। शावर से बहता हुआ टिप-टिप पानी मोहल्ले को सेक्स से भरपूर बना रहा था।

जब 10 मिनट गुजर गए तो मॉम बोलीं, “बेटा बस… अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। चल बता, अब बजा दे अपनी इस मॉम का बजा, जैसा बरसों पहले विक्की के पिता बजाया करते थे।”

मैंने कहा, “मॉम, उससे कहीं अच्छा बजा बजाऊँगा आपका। बस देखती जाओ।”

अब मॉम खड़ी हो गईं और बाथरूम में लगा हुआ एक लोहे का रॉड पकड़कर आगे की तरफ झुक गईं, जिससे मॉम की चूत और गांड दोनों थोड़ी बाहर निकल आईं।

मैंने मॉम से पूछा, “पहले चूत या गांड?”

मॉम ने कहा, “बेटा, सालों से चूत में उँगली डाल रही हूँ, पहले चूत का ही बजा बजा।”

मैंने पूछा, “मॉम जोरदार झटका लगाऊँ या आराम से?”

मॉम बोलीं, “एक जोरदार झटका दे और तुझसे मेरी कसम, चाहे मैं चीखूँ चिल्लाऊँ, तू रुकना मत। बस तूने चोदना है।”

फिर मैंने अपना लंड हाथ में पकड़ा, मॉम के पीछे खड़ा होकर चूत का निशाना लगाया और चूत के ऊपर लंड रखकर पहले 3-4 दफा हल्का-हल्का दबाया। अगले ही झटके में मैंने अपना लंड आधे से ज्यादा मॉम की चूत में घुसा दिया। जिससे मॉम चीख उठीं, “ऊईईई… मर गयी… जालिम का बच्चा… क्या कर दिया!!!”

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फिर मैंने दूसरा जोरदार झटका लगाया, जिससे मॉम की आँखों में आँसू आ गए और वो दर्द से कराह उठीं। उनका सारा जिस्म काँप गया। फिर मैंने आधा मिनट के लिए रुक गया। मॉम नॉर्मल होकर बोलीं, “चल बेटा अब बस… और मत तड़पा… चोद डाल इस मॉम को…”

फिर मैंने मॉम की गांड में धक्का लगाना शुरू किया। लेकिन मैं बार-बार अनबैलेंस हो रहा था। तो मॉम ने मेरा हाथ अपने बालों से हटाकर अपने स्तनों पर रख दिया और बोलीं, “इन्हें दबाकर पकड़ ले।” फिर मैंने वैसा ही किया। अब मॉम भी मेरे साथ पूरी ताकत से देने लगीं। मैं जितनी ताकत से उनकी चूत में लंड के झटके देता, वो उतनी ही ताकत से अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ दबातीं।

“आह्ह्ह्ह… मारा रे बेटा… चोद… थोड़ा जोर… आह्ह्ह… लगाके चोद… थोड़ा जोर लगाहैं… येस… हाँ चोद… ऐसे ही थोड़ा जोर लगा हैं प्लीज बेटा… हाँनन्न… ओह चोद… आह्ह्ह… हाँनन्न… येस्स…”

और मॉम की चूत ने पहली बार पानी छोड़ दिया। फिर मैंने लंड निकालकर मॉम की चूत को चाटना शुरू कर दिया। अब मॉम ने अपना और मेरा गीला जिस्म साफ किया। फिर मुझे अपने रूम में ले जाकर बेड पर लिटाकर मेरा लंड चूसने लगीं और अपनी गांड मेरे मुँह के पास कर दी, जिसे मैं चाटने लगा। गांड चाटने के बाद अब चूत पर पहुँच गया।

फिर मॉम सीधी हो गईं, मुझे सीधा लिटाकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गईं और एक ही झटके में मेरा लंड अपनी चूत में ले लिया। और मेरा लंड अपनी चूत से चुदवाने लगीं। कमरा उन दोनों की सेक्सी आवाजों से गूँज रहा था। चुदाई की आवाज से कमरा भर पड़ा था। माहौल काफी गरम था। चप-चप की आवाजों से कमरा गूँज रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

10 मिनट की चुदाई के बाद मॉम झर गईं। फिर मैंने मॉम को बेड पर लिटाकर अपना लंड उनके स्तनों के बीच डालकर स्तन चोदना शुरू कर दिया। 2-3 मिनट बाद मेरा वीर्य मॉम के मुँह पर, गर्दन पर और स्तनों पर गिर गया। मैं मॉम के ऊपर सीधा होकर लेट गया। इसके बाद मैंने एक बार मॉम की गांड चोदने का सोचा।

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आधा घंटा बाद मैंने मॉम से कहा, “अब प्लीज मुझे आपकी गांड चाहिए।” मॉम बोलीं, “ओके।” और मेरा लंड चूसना-मसलना शुरू कर दिया। कभी मसलती, कभी चूसती, कभी जीभ से चाटतीं। 7-8 मिनट बाद मेरा लंड तैयार हो गया। अब मॉम एक बार फिर डॉगी बन गईं। मैं मॉम की गांड चाटने लगा। मॉम की गांड में खूब थूक लगाकर फिंगरिंग शुरू कर दी। मॉम की गांड में 3 उँगलियाँ आराम से चली गईं। अब मॉम की गांड मेरे लंड को खाने के लिए बेताब थी। मॉम ने हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ा और गांड के पास ले गई।

फिर इशारे से अंदर डालने को कहा। मैंने मॉम की गांड में लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद उन्हें मजा आने लगा। मैंने उनसे पूछा, “कैसा लग रहा है?” उन्होंने सिसकते हुए कहा, “आह्ह्ह्ह… मजा आ रहा है…” और जोश में वो “आह्ह्ह” किए जा रही थीं। मैं अब पूरी रफ्तार में उनकी मोटी गांड में धक्का लगा रहा था। कमरे में एक बार फिर चप-चप-चप की आवाजें गूँज रही थीं। 25 मिनट की चुदाई के बाद मेरा वीर्य तीसरी बार निकला, जो मॉम की गांड के बीच में निकल गया।

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