Incest Sex
हाय, मैं बोकारो से हूँ। मेरी माता जी एक घर में काम करती हैं, उसी घर में मेरा पिता ड्राइवर हैं। हम तीन भाई और एक बहन थे। मगर अब सिर्फ एक बहन और एक भाई हैं, दो भाइयों को कैंसर था, पैसा न होने के कारण इलाज नहीं हो सका और वो भगवान के पास चले गए। Incest Sex
गर्मियों की छुट्टियों का दिन था। मेरी दीदी बी.एससी और मैं एम.एससी कर रहा था। छुट्टियाँ थीं कॉलेज से गर्मियों की। माता और पिता अपने साहिब के साथ उनके फार्म हाउस पर गए थे। मैं और दीदी घर पर अकेले थे। हम लोग गरीब थे, घर में नीचे जमीन पर ही सोते और जमीन पर ही खाते थे।
और एक रूम को दो हिस्सों में बाँटा हुआ था, बीच में चादर की दीवार थी। एक साइड पर पैरेंट्स, दूसरी साइड पर मैं और दीदी सोते थे। मेरी दीदी 22 साल की, मैं 20 का। दीदी काफी सेक्सी, भरा हुआ जिस्म, मोटे होंठ, साँवला रंग, हाइट 4.9″। मेरा लंड का साइज 6.7″ है, चार्मिंग बॉडी आदि आदि।
दीदी सुबह घर का काम करती और फिर मुझे स्टडी में मदद करती थी। कभी-कभी जब वो नहाकर निकलती तो उसका बदन गीला होता, बाल गीले होने के कारण पीछे से उसकी कमीज गीली होकर बॉडी से चिपक जाती। जिससे मेरा लंड दीदी को देखकर सलाम करने लगता, मगर मैं कंट्रोल करता।
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मैं जानता था अगर मैंने ऐसा कुछ किया तो दीदी गुस्सा हो सकती है। एक दिन मैं बाजार से कुछ लाने गया था। वापसी पर आया तो देखा दीदी के कपड़े पीछे से फटे हुए हैं, उसकी पीठ नंगी है, उस पर नाखूनों के निशान हैं और उसकी पीठ से खून भी निकल रहा है।
मैंने देखा तो दीदी की तरफ भागा और पूछा, “क्या हुआ?”
तो उसने बताया, “तुम्हारे जाने के बाद मैं दरवाजा बंद करना भूल गई थी। घर में 4-5 बंदर घुस आए थे। जब उन्हें खाने के लिए कुछ नहीं मिला तो उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया।”
बोकारो के लोग इन बंदरों को अच्छी तरह जानते हैं कि ये कैसा हमला करते हैं, जो जानलेवा भी हो सकता है। कैसे ये बंदर लोगों के घरों में घुसकर तोड़-फोड़ करते हैं। फिर दीदी ने बताया कि साथ वाली आंटी दवा लाने गई हैं, अभी आती ही होंगी। थोड़ी देर में वो आ गईं और बोलीं, “ये दवा है लगानी है, दिन में तीन बार, और गर्म पानी से कपड़ा गीला करके उसकी कमर साफ भी कर लेना।” यह कहकर वो चली गईं।
मैंने दीदी की पीठ कपड़े से ढँकी हुई थी। मैं दीदी की तरफ देखकर सोचता रहा कि क्या करूँ। दीदी जमीन पर उल्टी लेटी हुई थी। मैंने पानी गर्म करके दीदी के पास रखा और उसकी पीठ से कपड़ा हटा दिया। दीदी ने अपना मुँह जमीन के साथ दबा दिया शर्मा कर, मगर मेरी मजबूरी थी।
मैंने उनके पीछे पर कपड़ा गीला करके खून के निशान साफ करने लगा। ज्यादा गहरी चोट नहीं थी। मैंने दीदी को बताया कि वो जल्द ही ठीक हो जाएगी। जिससे दीदी ने एक लंबी साँस ली। दीदी की पीठ साफ करने के बाद अब उस पर दवा लगानी थी। मैंने अपने हाथ पर थोड़ी सी दवा लगाई और दीदी की पीठ की मालिश करने लगा।
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दीदी आराम से लेटी हुई थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मेरा लंड भी खड़ा हो गया। जिसे मैंने एक हाथ में पकड़ लिया और दीदी की गांड को देख-देखकर मुठ मारने लगा। मैंने 30 मिनट तक दीदी की पीठ की मालिश की। फिर दीदी जब बोली, “बस कर, थक जाएगा,” तो मुझे होश आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मगर मैं उस वक्त तक लुंगी में से लंड को रगड़-रगड़कर मुठ मार चुका था और मेरी लुंगी गीली हो गई थी। दीदी ने जब अपना मुँह मेरी ओर किया तो मेरी लुंगी गीली देखकर शर्मा गई। वो समझ गई कि मैंने कुछ गलत किया है। फिर मैंने दीदी के लिए और अपने लिए खाना गर्म किया, लुंगी बदलकर खाना खाने के बाद हम दोनों सो गए।
उठने के बाद मैंने बर्तन धोए, दीदी को चाय पिलाई, फिर बाहर चला गया दोस्तों के पास। रात को डर से आया तो दीदी सो रही थी, मगर दीदी की मालिश भी तो करनी थी। मैंने जल्दी-जल्दी से ठंडा ही खाना खा लिया। लुंगी पहनकर दवा उठाई और दीदी की पीठ पर से कपड़ा हटा दिया।
दीदी शायद अभी भी सो रही थी। मैं एक हाथ से दवा लगाने लगा तो दूसरे हाथ से दीदी की सलवार थोड़ी नीचे कर दी। उसने इलास्टिक वाली पहनी थी, ढीला जिस्म होने के कारण आराम से चूतड़ तक सलवार नीचे आ गई। थोड़ी सी दीदी की गांड पर मलहम लगाया तो वो नहीं हिली।
मैंने उसकी गांड को खोल दिया और उसकी गांड का सूराख देखने लगा। अब मुझे शक हुआ कि दीदी नाटक कर रही है, मगर मैं तो अपना लंड दीदी के सूराख के ऊपर रखकर मुठ मार रहा था। मैंने दीदी की गांड का सूराख खोला हुआ था आहिस्ते से, मगर मैं अपना लंड ऊपर रखकर साथ जोड़कर नहीं मुठ मारता रहा।
थोड़ी देर बाद ऐसा लगा कि मेरा पेशाब निकल गया जो थोड़ा सा दीदी की गांड के सूराख पर भी गिरा। मगर फिर दीदी एक साइड पर हो गई। मेरा जहन में एक आइडिया आया। मैं दीदी के साथ पीछे से चिपक गया, मगर दीदी आगे को हो गई। शायद उनकी पीठ बहुत जख्मी थी, इसी लिए दर्द हो रही थी।
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फिर रात को किसी पल मेरी आँख खुली तो दीदी की गांड मेरी ओर पीछे की तरफ थी और मेरा लंड भी लोहे की तरह सख्त था। मैंने सिर्फ अपना लंड दीदी की गांड नंगी करके उसके ऊपर रखकर उसे रगड़ने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने अपना मुँह मेरी तरफ कर दिया। मैं कुछ देर शांत रहा।
फिर जब समझा कि दीदी सोई है तो दीदी के बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा। दीदी ने ब्लाउज पहना था, बाकी नंगी थी। मैंने उसका ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू किया। ऐसा करने से मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर मैंने अपनी जुबान उनके बूब्स पर रखकर चाटना शुरू किया। ऊपर ब्लाउज था, मुझे मजा नहीं आ रहा था।
तभी दीदी ने l शेप में अपनी लेग्स खोल दीं क्योंकि वो सीधी नहीं हो सकती थीं। मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत साफ नजर आ रही थी क्योंकि मैंने उनकी सलवार पहले ही पीछे से नीचे कर दी थी। फिर क्या था, मैं उनके चूत पर झुककर उनकी चूत को चाटने लगा। वह बहुत गर्म थी और कुछ-कुछ गीली भी थी।
मैंने चूत में दो उँगलियाँ आहिस्ते से घुसाकर दीदी की चूत की चुदाई शुरू कर दी उँगलियों से। मैंने दीदी के बूब्स 2-3 बार आहिस्ते से और फिर थोड़ा जोर से दबाए मगर उन्होंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। फिर तो मैं उनकी चूत के साथ लंड लगाकर ऐसा कि मेरी बॉडी का वजन उन पर न पड़े, बस सिर्फ चूत और लंड मिलाता रहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे यह नहीं पता था दीदी वर्जिन है या नहीं, इसी लिए मैंने ऊपर-ऊपर से लंड रगड़ दिया। ऐसा करने से मैं थक चुका था, इसी लिए मैंने पहले अपना लंड की मुठ मार ली हाथ से और सारा पानी दीदी की चूत पर गिरा दिया और फिर दीदी की चूत को चाट-चाटकर और फिर अंत में उँगली से चोदकर उनकी चूत से भी पानी निकाल दिया और शांत होकर मैंने दीदी के चीक्स पर किसिंग की।
मुझे दीदी के मोटे होंठ बहुत अच्छे लगते थे। मैंने उन्हें प्यार किया जिससे दीदी हिलने लगी और मैं पीछे हटकर सो गया। 15 दिन तक मैं ऐसा ही दीदी के साथ करता रहा। इसी बीच मैंने यह भी जान लिया कि दीदी वर्जिन नहीं है। दीदी अब ठीक थी मगर मैं मुठ मारने के कारण दीदी की मालिश करता था।
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दीदी सब जानती थी कि मैं उसके साथ क्या करता हूँ मगर वो ऐसा बताती थी जैसे उसे कुछ पता ही नहीं। जब मैं उससे कोई बात करता तो वो शर्मा कर टाल देती। एक दिन मैंने सोचा, जब दीदी को सब पता है और दीदी अब ठीक भी हो गई है, आज लंड को चूत में डालकर मजा लूँ जो मैंने पहले कभी नहीं लिया था।
रात को सोने के थोड़ी देर बाद मैं दीदी को सुलाने लगा। फिर दीदी की कमीज ऊपर करके बूब्स नंगे कर दिए। फिर इन बूब्स को दबाने लगा। दीदी अब ब्रा और पैंटी उतारकर सोती थी जिससे मुझे आसानी रही। दीदी के बूब्स मुँह लेकर चूसता रहा। दीदी सीधी लेटी हुई थी।
जब मैं उनके निप्पल्स को दाँत से बाइट करता तो वो आँखें जोर से बंद कर देती। फिर मैंने दीदी के कान में बोला, “दीदी आज आपकी चूत में लंड का मजा ला रहा हूँ, थोड़ा ढीला जिस्म रखना।” यह कहकर मैंने अपना लंड दीदी के लिप्स और मुँह पर रगड़ना शुरू किया। दीदी ने थोड़ा सा लिप्स गीला कर दिया।
कुछ मैंने अपना लंड उनके लिप्स में फँसाकर चुसवाने लगा। पहले तो मुश्किल हुई, बाद में बहुत ही मजा आया जब दीदी ने ऐसा मुँह खोलकर चूसा मगर वो ऐसी ही थी जैसे सोई है। मैंने अब दीदी की चूत पर थूक दिया और फिर दीदी की चूत पर से अपना थूक जुबान से वापस पीने लगा।
दीदी ने अपना आप जकड़ लिया। मैंने अपनी दो उँगलियों से दीदी की चूत को मसलता हुआ दीदी की चूत चाट भी रहा था। ऐसा मैं दीदी की चूत गीली होने लगी। तो मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया। दीदी की चूत पहले से ही गीली थी। फिर लंड को दीदी की चूत पर रखकर एक आहिस्ते सा झटका लगाया।
दीदी ने चूत को जोर से बंद कर लिया। दूसरा झटका और जोर का था जिससे मेरा लंड थोड़ा सा दीदी की चूत में उतर गया और दीदी ने जोर से आँखें बंद कर लीं। मैंने थोड़ा सा लंड और चूत में डालकर आगे-पीछे हिलने लगा। दीदी ने जमीन पर पड़ा कपड़ा को मुट्ठी से जोर से दबोच लिया। फिर मैंने आहिस्ते-आहिस्ते जोर लगाकर चूत में पूरा लंड उतार दिया और दीदी की चूत को चोदने लगा।
जोर-जोर से आगे-पीछे हो रहा था। इस सब में दीदी ने कुछ बोल रही थी न कुछ मदद कर रही थी। मैंने दीदी की चूत में जोर-जोर से धक्का लगाया ताकि उसे दर्द हो तो वो कुछ बोले मगर उसने बहुत कंट्रोल किया। दीदी को पसीना आने लगा। मैंने अपना हाथ दीदी के बूब्स पर रखकर उन्हें और जोर-जोर से चोदने लगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मगर वो तो बस मजा ले रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मैंने दीदी को बेहोश किया है और उन्हें चोद रहा हूँ। खैर, मैंने 15 मिनट धीरे और तेज-तेज दीदी की चूत मारी जिससे मेरी दीदी की चूत का पानी निकल आया और वो रिलैक्स हो गई। फिर मैंने जल्दी से लंड निकालकर दीदी के मुँह के पास ला जाकर पहले थोड़ा चुसवाया और फिर मुठ मारने लगा और दीदी के फेस पर सारा पानी निकालकर मैं उसे चाटने लगा। नेक्स्ट मॉर्निंग सब नॉर्मल था, ऐसा लग रहा था जैसे कुछ नहीं हुआ।
मैं चाहता हूँ मेरी चुदाई में मेरी दीदी साथ दे मगर वो सब एक ख्वाब रखना चाहती है। शायद वो भाई-बहन का रिश्ता बदनाम नहीं करना चाहती या फिर कुछ और वजह है। मैंने आज तक दीदी के साथ कभी भी कोई सेक्स की बात नहीं की, बस रात के अंधेरे में या दिन जब पैरेंट्स नहीं होते तब उसको चोदकर खुश कर देता हूँ और खुद भी खुश हो जाता हूँ। पर शायद यह मेरे लिए एक ख्वाब ही है। मैं चाहता था कि दीदी से इतना पूछूँ कि उसकी वर्जिनिटी कैसे टूटी मगर शायद मुझे इसका जवाब न मिल सका।
@kumar0113 says
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