Sasur Fuck Young Bahu
मेरा नाम स्मृति है। उम्र 23 साल, शादीशुदा, और एक बेहद आकर्षक, कामुक शरीर वाली औरत। मेरे पति पंकज एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन सेक्स के मामले में काफी रूढ़िवादी और संकोची हैं। शादी के बाद भी मेरी अधूरी काम-इच्छाएँ और जवान शरीर की भूख मुझे अंदर ही अंदर तड़पाती रहती थी। Sasur Fuck Young Bahu
फिर ज़िंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मेरे ससुर — राजकुमार जी — उम्र 58 साल, लेकिन देखने में अभी भी दमदार, आकर्षक और बेहद मर्दाना। उनकी नज़रों में एक ऐसी आग थी जो मुझे पहली मुलाकात से ही अंदर तक झुलसा गई। धीरे-धीरे वो नज़रें मेरे बदन पर घूमने लगीं, मेरी चाल-ढाल पर टिकने लगीं, और मेरी कामुकता को भाँपने लगीं।
जब पंकज विदेश के एक प्रोजेक्ट पर छह महीने के लिए चला गया, तब घर में सिर्फ मैं और मेरे ससुर जी रह गए। उसी समय मेरे अंदर दबी हुई औरत जाग उठी। वो औरत जो अपने ससुर की मर्दानगी के सामने घुटने टेकने को तैयार थी।
यह कहानी है मेरी और मेरे ससुर राजकुमार जी की। यह कहानी है एक युवा बहू और एक अनुभवी, ताकतवर ससुर के बीच विकसित हुए गुप्त, ज्वलंत और बेहद कामुक शारीरिक संबंध की। यह कहानी है उन रातों की, उन पलों की, जब मर्यादा की दीवारें टूट गईं और सिर्फ दो भूखे जिस्म बचे — एक तरसती हुई बहू और एक भूखा शेर।
जो शुरू हुआ एक चोरी-छिपे नज़रों के आदान-प्रदान से, वो आगे चलकर बन गया पूरे बदन की आग बुझाने वाला तूफान। तो तैयार हो जाइए… क्योंकि यह कहानी सिर्फ सेक्स नहीं, बल्कि वर्जित इच्छाओं, छिपी हुई भूख और खतरनाक आकर्षण की एक सच्ची, गर्म और बेहद रोमांचक यात्रा है।
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राजकुमार जी का लिंग उनके घने बालों के बीच खड़ा हुआ झटके खा रहा था। मैंने उसे एक बार अपनी मुट्ठी में लेकर उसके ऊपर की चमड़ी को ऊपर-नीचे किया और फिर छोड़ दिया। मेरी इस हरकत से उनके लिंग के ऊपर एक बूँद प्रीकम चमकने लगी।
राजकुमार जी ने अपने सूखते हुए होंठों पर अपनी जीभ फिराकर मुझे स्कर्ट उतारने के लिए इशारा किया। मैंने स्कर्ट के इलास्टिक में अपनी उँगलियाँ डालकर उनकी तरफ देखा। उनकी आँखें मेरी स्कर्ट से चिपकी हुई थीं। वो उतावले होते जा रहे थे। मैंने उन्हें कुछ और परेशान करने की सोची। मैंने उनकी तरफ अपनी पीठ कर ली और अपनी स्कर्ट को धीरे-धीरे नीचे कर दी। वो मेरी मोटी-मोटी गांड को ललचाई नज़रों से देख रहे थे।
मैं अब खड़े होकर अपने बदन को म्यूजिक पर थिरकने लगी। कुछ देर बाद मैं धीरे-धीरे सामने की ओर मुड़ी। मेरी नग्न योनि अब उनके सामने थी। वो एकटक मेरी काले सिल्की झाँटों से भरी योनि को निहार रहे थे। अब तो उन्हें अपने ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया।
वो उठे और मुझे बाहों में लेकर मेरे साथ कमर हिलाने लगे। उनका गाउन उन्होंने बिस्तर पर ही छोड़ दिया था। वो मेरे पीछे से सटे हुए थे। हमारे नग्न बदन एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे। मेरी योनि गीली हो गई थी। उनका लिंग मेरे दोनों नितंबों के बीच जगह तलाश कर रहा था। उनके हाथ मेरे बदन पर फिसल रहे थे।
सामने आदमकद आइने में मैंने हम दोनों के अक्स को एक-दूसरे से गुँथे हुए देखा तो एक्साइटमेंट और बढ़ गई। उन्होंने मुझे आइने में देखता देखकर मुस्कुराकर मुझे वहीं छोड़कर मेरे पीछे पहुँचे और मेरे दोनों बगलों से अपने हाथ डालकर सामने मेरे स्तनों को सहलाने लगे।
मैंने अपने सुंदर स्तनों को राजकुमार जी के हाथों द्वारा मसले जाते देखा। मेरी पीठ उनके सीने से लगी हुई थी। मैंने अपना सिर पीछे की ओर करके उनके कंधे पर रख दिया। उनके हाथ मेरे दोनों स्तनों को बुरी तरह मसल रहे थे। आइने में हमारा यह पोज बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।
उन्होंने मेरे दोनों निप्पल्स अपनी उँगलियों से पकड़कर आइने की तरफ खींचा। मेरे दोनों निप्पल्स खिंचाव के कारण लंबे-लंबे हो गए थे। उनके मसलने के कारण दोनों स्तनों की रंगत सफेद से गुलाबी हो गई थी। उनकी गर्म साँसें मैं अपनी गर्दन पर इधर से उधर फिरते हुए महसूस कर रही थी।
उनके होंठ मेरी गर्दन के पीछे जहाँ से मेरे बाल शुरू हो रहे हैं, वहाँ जाकर चिपक गए। फिर उन्होंने मेरी गर्दन पर हल्के से दाँत गड़ा दिए। उनके होंठ मेरी गर्दन पर घूमते हुए मेरे बाएँ कान तक आए। वो मेरे लेफ्ट कान के ऊपर अपने होंठ फिराने लगे। कान औरत का एक जबरदस्त एक्साइटमेंट पॉइंट होता है।
मैं उनकी हरकतों से उत्तेजित हो गई। मैंने अपने हाथों से अपनी योनि को सख्ती से दबा रखा था। मेरे मुँह से उत्तेजना में टूटे हुए शब्द निकल रहे थे। मैंने अपने होंठों को दाँतों में दबा रखा था फिर भी पता नहीं किस कोने से मेरे मुँह से “आह… उफ्फ…” जैसी आवाज़ें निकल रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर उसने कान पर अपनी जीभ फिराते हुए कान के निचले हिस्से को अपने मुँह में भर लिया और हल्के-हल्के से उसे दाँत से काटने लगा। मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थाम रखा था। हमारे बदन एक-दूसरे से सटे हुए संगीत की धुन पर इस तरह से थिरक रहे थे मानो दो नहीं, एक ही जिस्म हों।
उन्होंने मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरे स्तनों पर अपने होंठ रखकर मेरे निप्पल्स को चूसने लगे। इसी तरह की हरकतों की ख्वाहिश तो जब से मैंने उन्हें पहली बार देखा था, तब से मेरे मन में थी। मुझे उनके साथ पेरिस आने का निमंत्रण स्वीकार करते समय ही पता था कि इस टूर में हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता जन्म लेने वाला है। मैं उसके लिए शुरू से ही उतावली थी।
मैंने भी उनको अपनी ओर से पूरा आनंद प्रदान करना चाहती थी। मैं भी उनकी छातियों पर झुककर उनके छोटे-छोटे निप्पल्स को अपने दाँतों से कुरेदने लगी। मैंने अपनी जीभ से उनके निप्पल्स को सहलाना शुरू किया। उत्तेजना से उनके निप्पल्स भी खड़े हो गए। मैं उनके बालों से भरे सीने को सहला रही थी।
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मैंने अपने दाँतों को उनके सीने में गड़ा कर जगह-जगह अपने दाँतों के निशान छोड़ दिए। मैंने कुछ देर तक उनके निप्पल्स से खेलने के बाद अपने होंठ नीचे की ओर ले जाते हुए उनकी नाभि में अपनी जीभ घुसा दी। उनकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगी। वो मेरे खुले बालों में अपनी उँगलियाँ फिरा रहे थे।
फिर मैं घुटनों के बल उनके सामने बैठ गई और उनके लिंग को अपने हाथों में लेकर निहारने लगी। मैंने मुस्कुराकर उनकी ओर देखा। फिर मैंने उसके लिंग के ऊपर से चमड़ी को नीचे की ओर खींचा। उनके लिंग का गोल-मटोल टोपा बाहर निकल आया। मैंने उसके टिप पर अपने होंठ लगा दिए।
एक छोटा सा किस लेकर अपने चेहरे के सामने उनके लिंग को सहलाने लगी। उनके लिंग को अपने मुँह में लेने की इच्छा तो हो रही थी लेकिन मैं उनके द्वारा रिक्वेस्ट करने का इंतज़ार कर रही थी। मैं उनके सामने यह नहीं शो करना चाहती थी कि मैं पहले से ही कितनी खेली-खाई हुई हूँ।
“इसे मुँह में लेकर प्यार करो।” “म्म्म नहीं, ये गंदा है।” मैंने लिंग को अपने से दूर करने का अभिनय किया, “छी, इससे तो पेशाब भी किया जाता है। इसे मुँह में कैसे लूँ?” “तुमने अभी तक पंकज के लिंग को मुँह में नहीं लिया क्या?” “नहीं, वो ऐसी गंदी हरकतें नहीं करते हैं।” “ये गंदा नहीं होता है, एक बार तो लेकर देख। ठीक उसी तरह जैसे चॉकोबार आइसक्रीम को मुँह में लेकर चाटती हो।”
मैंने झिझकते हुए अपनी जीभ निकालकर उनके लिंग के टोपे पर फिराने लगी। मेरे बाल खुले होने के कारण उनको देखने में परेशानी हो रही थी। इसलिए उन्होंने मेरे बालों को पकड़कर जूड़े के रूप में बाँध दिया। फिर मेरे चेहरे को पकड़कर अपने लिंग को मेरी ओर धकेलने लगे।
मैंने उनकी हरकत के समर्थन में अपना मुँह खोल दिया। उनका लिंग आधा अंदर जाकर मेरे गले के द्वार में फँस गया। “बस्स… और नहीं जाएगा।” मैं कहना चाहा लेकिन मुँह से बस “बस…” जैसी आवाज़ निकली। इसलिए मैंने उनके लिंग को अपने मुँह में लिए-लिए ही उन्हें इशारा किया। वो अपने लिंग को अब आगे-पीछे करने लगे।
मैं उनके लिंग को अपने मुँह से चूस रही थी। साथ-साथ उनके लिंग पर अपनी जीभ भी फिरा रही थी। “पूरा ले। मज़ा नहीं आ रहा है। पूरा अंदर जाए बिना मज़ा नहीं आएगा।” उन्होंने अपने लिंग को बाहर खींचा। “इतना बड़ा लंड पूरा कैसे जाएगा। मेरा मुँह मेरी योनि जैसा तो है नहीं कि कितना भी लंबा और मोटा हो सब अंदर ले लेगा।” मैंने कहा।
उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गई। अब उन्होंने मेरे बदन को कंधों से पकड़कर बिस्तर से बाहर की तरफ खींचा। अब मेरा सिर बिस्तर से नीचे लटकने लगा था। “हाँ, ये ठीक है। अब अपने सिर को बिस्तर से नीचे लटकाते हुए अपने मुँह को खोल।” मैंने वैसा ही किया। इस पोजीशन में मेरा मुँह और गले का छेद एक सीध में हो गए थे।
ससुर जी अब मेरे मुँह में अपने लिंग को डालते हुए मुझसे बोले, “एक जोर की साँस खींच अंदर।” मैंने वैसा ही किया। वो अपने लिंग को अंदर धकेलते चले गए। उनका मोटा लंड सरसराता हुआ गले के अंदर घुसता चला गया। पहले तो उबकाई जैसी आई लेकिन उनका लिंग फँसा होने के कारण कुछ नहीं हुआ।
उनका लिंग अब पूरा अंदर घुस चुका था। उनके लंड के नीचे लटकते दोनों गेंद अब मेरी नाक को दबा रहे थे। एक सेकंड इस अवस्था में रखकर उन्होंने वापस अपने लंड को बाहर खींचा। उनका लिंग जैसे ही गले को खाली किया, मैंने अपने फेफड़ों में जमी हवा खाली की और वापस साँस लेकर उनके अगले धक्के का इंतज़ार करने लगी।
उन्होंने झुककर मेरे दोनों स्तनों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और उन्हें मसलते हुए वापस अपने लिंग को जड़ तक मेरे मुँह में धकेल दिए। फिर एक के बाद एक धक्के मारने लगे। मैं अपनी साँसों को उनके धक्कों के साथ एडजस्ट कर ली थी। हर धक्के के साथ मेरे स्तनों को वो बुरी तरह मसलते जा रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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साथ-साथ मेरे निप्पल्स को भी उमेठ देते। जैसे ही वो मेरे निप्पल्स को पकड़कर खींचते, मेरा पूरा बदन धनुष की तरह ऊपर की ओर उठ जाता। काफी देर तक यूँ ही मुँह में लेने के बाद उन्होंने अपना लिंग बाहर निकाल लिया। और ज़्यादा देर चूसने से हो सकता है मुँह में ही निकल जाता। उनका लिंग मेरी थूक से गीला हो गया था और चमक रहा था।
उनके उठते ही मैं भी उठ बैठी। उन्होंने मुझे बिस्तर से उठाकर वापस अपनी आगोश में ले लिया। मैंने उनके सिर को अपने हाथों से थामकर उनकी होंठों पर अपने होंठ सख्ती से दबा दिए। मेरी जीभ उनके मुँह में घुसकर उनकी जीभ से खेलने लगी। मैंने अपने पंजे उनके पैरों के ऊपर रखकर अपनी एड़ी को ऊपर किया जिससे मेरा कद उनके कद के कुछ हद तक बराबर हो जाए।
फिर मैंने अपने दोनों स्तनों को हाथों से उठाकर उनके सीने पर इस तरह रखा कि उनके निप्पल्स को मेरे निप्पल्स छूने लगे। उनके निप्पल्स भी मेरी हरकत से एकदम कड़े हो गए थे। मेरे निप्पल्स तो पहले से ही उत्तेजना में तन चुके थे। मैंने अपने निप्पल्स से उनके निप्पल्स को सहलाना शुरू किया।
उन्होंने मेरे नितंबों को सख्ती से पकड़कर अपने लिंग पर खींचा। “म्म्म सिमी म्म्म… तुम बहुत सेक्सी हो। अब अफसोस हो रहा है कि तुम्हें इतने दिनों तक मैंने छुआ क्यों नहीं। ओफ्फो तुम तो मुझे पागल कर दोगी। हाँआँ ऐसे ही…” वो अपने लिंग को मेरी योनि के ऊपर रगड़ रहे थे।
कुछ देर तक हम एक-दूसरे के बदन को रगड़ने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर के पास ले जाकर मेरे एक पैर को उठाकर बिस्तर के ऊपर रख दिया। अब घुटनों के बल बैठने की उनकी बारी थी। वो मेरी टांगों के पास बैठकर मेरे रेशमी झाँटों पर अपनी जीभ फिराने लगे।
मुझे अपनी योनि पर हल्के रेशमी बाल रखना बहुत अच्छा लगता है इसलिए अक्सर मेरी योनि छोटे-छोटे रेशमी बालों से घिरी रहती थी। शायद उन्हें भी वहाँ बाल देखना पसंद था इसलिए राजकुमार जी अपने दाँतों से मेरी सिल्की झाँटों को पकड़कर उन्हें हल्के-हल्के से खींच रहे थे।
फिर उनकी जीभ मेरी टांगों के जोड़ पर घूमने लगी। उनकी जीभ मेरे घुटने पर से धीरे-धीरे आगे बढ़ती हुई मेरी टांगों के जोड़ तक पहुँची। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी चूत को ऊपर से चाटना शुरू किया। वो अपने हाथों से मेरी चूत की फाँकों को अलग करके मेरी चूत के भीतर अपनी जीभ डालना चाहते थे।
“नहीं। ऐसे नहीं।” कहकर मैंने उनके हाथों को अपने बदन से हटा दिया और मैं खुद एक हाथ की उँगलियों से अपनी चूत को खोलकर दूसरे हाथ से उनके सिर को थामकर अपनी योनि से सटा दिया। “लो अब चाटो इसे।” उनकी जीभ किसी छोटे लिंग की तरह मेरी योनि के अंदर-बाहर होने लगी।
मैं बहुत उत्तेजित हो गई थी। मैं उनके बालों को अपनी मुट्ठी में पकड़कर उन्हें खींच रही थी मानो उन्हें उखाड़ ही देना चाहती हूँ। दूसरे हाथ की उँगलियों से मैंने अपनी योनि को फैला रखा था और साथ-साथ एक उँगली से अपनी क्लिटोरिस को सहला रही थी।
मैंने सामने आइने में देखा तो हम दोनों की अवस्था को देखकर और अपने ऊपर कंट्रोल नहीं कर पाई और मेरे बदन से लावा बह निकला। मैंने सख्ती से दूसरे हाथों की मुट्ठी में उनके बालों को पकड़े हुए उनके सिर को अपनी योनि में दबा रखा था।
उनकी जीभ मेरी योनि से बहते हुए अमृत धारा को अपने अंदर समा लेने में व्यस्त हो गई। काफी देर तक इसी तरह चूसने के बाद जब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो मैंने उनके सिर को अपनी चूत से खींचकर अलग किया। उनके सिर के कई बाल तोड़कर मेरी मुट्ठी में आ गए थे।
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उनके होंठ और ठुड्डी मेरे वीर्य से चमक रहे थे। “ऊह्ह रााज…” अब मैं अपने संबोधन में बदलाव लाते हुए उन्हें ऊपर अपनी ओर खींची। वो खड़े होकर मुझसे लिपट गए। और मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मेरे होंठों को अपने मुँह में खींच लिया और उन्हें बुरी तरह चूसने लगे।
मैं नहीं जानती थी कि उधर भी इतनी ज़्यादा आग लगी हुई है। उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मुँह में अजीब सा टेस्ट समा गया। मैंने ज़िंदगी में पहली बार अपने वीर्य का स्वाद चखा। मैंने उनके चेहरे पर लगे अपने वीर्य को चाटकर साफ किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन्होंने थिरकते हुए बिस्तर के साइड में अपने साथ लाए फ्रेंच वाइन की बोतल उठा ली। उसके कॉर्क को खोलकर उन्होंने उसमें से एक घूँट लगाया। फिर मुझे अपने से अलग कर अपने सामने खड़ा कर दिया। फिर उस बोतल से मेरे एक ब्रेस्ट पर धीरे-धीरे वाइन डालने लगे।
उन्होंने अपने होंठ मेरी निप्पल के ऊपर रख दिए। रेड वाइन मेरे स्तनों से फिसलती हुई मेरे निप्पल के ऊपर से होती हुई उनके मुँह में जा रही थी। बहुत ही एक्ज़ॉटिक सीन था वो। फिर उन्होंने बोतल को ऊपर कर मेरे सिर पर वाइन उड़ेलने लगे। साथ-साथ मेरे चेहरे से, मेरे कानों से, मेरे बालों से टपकते हुए वाइन को पीते जा रहे थे।
मैं वाइन में नहा रही थी और उनकी जीभ मेरे पूरे बदन पर दौड़ रही थी। मैं उनकी हरकतों से पागल हुई जा रही थी। इस तरह से मुझे आज तक किसी ने प्यार नहीं किया था। इतना तो साफ दिख रहा था कि मेरे ससुर जी सेक्स के मामले में तो सबसे अनोखे खिलाड़ी थे।
जब बोतल आधी से ज़्यादा खाली हो गई तो उन्होंने बोतल को साइड टेबल पर रखकर मेरे पूरे बदन को चाटने लगे। मेरा पूरा बदन वाइन और उनकी लार से चिपचिपा हो गया था। उन्होंने एक झटके में मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और अपनी बाहों में उठाए हुए बाथरूम में ले गए।
इस उम्र में भी इतनी ताकत थी कि मुझे उठाकर बाथरूम ले जाते वक्त एक बार भी उनकी साँस नहीं फूली। बाथरूम में बाथ टब में दोनों घुस गए और एक-दूसरे को मसल-मसलकर नहाने लगे। साथ-साथ एक-दूसरे को छेड़ते जा रहे थे। सेक्स के इतने रूप मैंने सिर्फ कल्पना में ही सोचे थे।
आज ससुर जी ने मेरे पूरे वजूद पर अपना अधिकार जमा दिया। वहीं पर बाथ टब में बैठे-बैठे उन्होंने मुझे टब का सहारा लेकर घुटनों के बल झुकाया और पीछे की तरफ से मेरी योनि और मेरे गुदा पर अपनी जीभ फिराने लगे। “ये क्या कर रहे हो… वहाँ जीभ से मत चाटो… नाहि… हाँ और अंदर… और अंदर…”
मैं उत्तेजना में ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगी। ससुर जी मेरे गुदा द्वार को अपनी उँगलियों से फैलाकर उसके अंदर भी एक बार जीभ डाल दिए। मेरी योनि में आग लगी हुई थी। मैं उत्तेजना में अपने ही हाथों से अपने स्तनों को बुरी तरह मसल रही थी।
“बस बस और नहीं… अब मेरी प्यास बुझा दो। मेरी चूत जल रही है, इसे अपने लंड से ठंडा कर दो। अब मुझे अपने लंड से चोद दो। अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती। ये आपने क्या कर डाला, मेरे पूरे बदन में आग जल रही है। प्लीज… और नहीं…” मैं तड़प रही थी।
उन्होंने वापस टब से बाहर निकलकर मुझे अपनी बाहों में उठाया और गीले बदन में ही कमरे में वापस आए। उन्होंने मुझे उसी अवस्था में बिस्तर पर लिटा दिया। वो मुझे लिटाकर उठने को हुए तो मैंने झट से उनके गर्दन में अपनी बाहें डाल दीं जिससे वो मुझसे दूर नहीं जा सकें। अब इंच भर की दूरी भी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी।
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उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी बाहों को अपनी गर्दन से अलग किया और अपने लिंग पर बोतल में बची हुई वाइन से कुछ बूँदें रेड वाइन डालकर मुझसे कहा, “अब इसे चूसो।” मैंने वैसा ही किया। मुझे वाइन से भीगा उनका लिंग बहुत ही टेस्टी लगा। मैं वापस उनके लिंग को मुँह में लेकर चूसने लगी।
उन्होंने अब उस बोतल से बची हुई वाइन धीरे-धीरे अपने लिंग पर उड़ेलनी शुरू की। मैं उनके लिंग, उनके अंडकोषों पर गिरते वाइन को पी रही थी। कुछ देर बाद उन्होंने मुझे लिटा दिया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख दीं। फिर उन्होंने मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा कर मेरी योनि के ऊपर से मेरी झाँटों को हटाकर योनि की फाँकों को अलग किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उनके लिंग के प्रवेश का इंतज़ार करने लगी। उनके लिंग को मैं अपनी योनि के ऊपर सटे हुए महसूस कर रही थी। मैंने आँखें बंद कर अपने आप को इस दुनिया से काट लिया था। मैं दुनिया के सारे रिश्तों को, सारी मर्यादाओं को भूलकर बस अपने ससुर जी का, अपने बॉस का, अपने हुज़ूर राज, अपने राजू के लंड को अपनी चूत में घुसते हुए महसूस करना चाहती थी।
अब वो सिर्फ और सिर्फ मेरे प्रेमी थे। उनसे बस एक ही रिश्ता था जो रिश्ता किसी मर्द और औरत के बीच जिस्मों के मिलन से बनता है। मैं उनके लिंग से अपनी योनि की दीवारों को रगड़ना चाहती थी। सब कुछ एक स्वर्गिक अनुभूति दे रहा था। उन्होंने मेरी चूत की फाँकों को अलग करके अपने लिंग को मेरे प्रवेश द्वार पर रखा।
“अब बता मेरी जान, कितनी प्यास है तेरे अंदर में? मेरे लंड को कितना चाहती है?” राजकुमार जी ने मुझे अपने लिंग को योनि के द्वार से रगड़ते हुए पूछा।
“आह क्या करते हो… म्म्म अंदर घुसा दो इसे।” मैंने अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरी।
“मैं तो तुम्हारा ससुर हूँ… क्या ये उचित है?”
“ऊह्ह रााज… रााज मेरे जान… मेरा इम्तिहान मत लो… डाल दो इसे… अपने लड़के की बीवी की चूत फाड़ दो अपने लंड से… कब से प्यासी हूँ… ओह कितने दिनों से ये आग जल रही थी। मैं तो शुरू से तुम्हारी बनना चाहती थी। ओह तुम कितने पत्थर दिल हो… कितना तरसाया मुझे… आज भी तरसा रहे हो।”
मैंने उनके लिंग को अपने हाथों से पकड़कर अपनी योनि की ओर धकेला मगर उन्होंने मेरी कोशिश को नाकाम कर दिया। मेरी योनि का मुँह लिंग के आभास से लाल होकर खुल गया था जिससे उनके लिंग को किसी तरह की परेशानी न हो। मेरी योनि से काम रस झाग के रूप में निकलकर मेरे दोनों नितंबों के बीच से बहता हुआ बिस्तर की ओर जा रहा था। मेरी योनि का मुँह पानी से उफन रहा था और उस पत्थर को मुझे छेड़ने से फुरसत नहीं थी।
“अंदर कर दूँ…?” “हाँ… ओह हाँ…” “मेरे लंड पर किसी तरह का कोई कंडोम नहीं है। मेरा वीर्य अपनी कोख में लेने की इच्छा है क्या?” “हाँ… ओह माँ… हाँ… मेरी योनि को भर दो अपने वीर्य से… डाल दो अपना बीज मेरी कोख में…” मैं तड़प रही थी। पूरा बदन पसीने से तर-बतर हो रहा था। मेरी आँखें उत्तेजना से उलट गई थीं और मेरे होंठ खुल गए थे। सूखे होंठों पर अपनी जीभ चला कर गीला कर रही थी।
“फिर तुम्हारी कोख में मेरा बच्चा आ जाएगा।”
“हाँ हाँ मुझे बना दो प्रेग्नेंट। अब बस करो। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ और मत सताओ। मत तड़पाओ मुझे।” मैंने अपने दोनों पैर बिस्तर पर जितना हो सकता था फैला लिए, “देख तुम्हारे बेटे की दुल्हन तुम्हारे सामने अपनी चूत खोलकर लेटी तुमसे गिड़गिड़ा रही है कि उसकी योनि को फाड़ डालो। रगड़ दो उसके नाजुक बदन को। मसल डालो मेरे इन स्तनों को जिन पर मुझे नाज़ है। ये सब आपके स्पर्श, आपके प्यार के लिए तड़प रहे हैं।” मैं बहकने लगी थी।
अब वो मेरी मिन्नतों पर पसीज गए और अपनी उँगलियों से मेरी क्लिटोरिस को मसलते हुए अपने लिंग को अंदर करने लगे। मैं अपने हाथों से उनकी छातियों को मसल रही थी। उनके लिंग को अपनी चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर प्रवेश करते महसूस कर रही थी।
“हाँ मेरे रााज… इस आनंद का मुझे जन्मों से इंतज़ार था। तुम इतने नासमझ क्यों हो… मेरे दिल को समझने में इतनी देर क्यों कर दी।” उन्होंने वापस मेरी टांगों को अपने कंधों पर रख दिए। उनके दोनों हाथ अब मेरे दोनों स्तनों पर थे। दोनों हाथ मेरी छातियों को ज़ोर-ज़ोर से मसल रहे थे।
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मेरे निप्पल्स को उँगलियों से मसल रहे थे। मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी इसलिए उनके लिंग को प्रवेश करने में ज़्यादा परेशानी नहीं हुई। उनका लिंग पूरी तरह मेरी योनि में समा गया था। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लिंग को पूरी तरह से बाहर खींचकर वापस एक धक्के में अंदर कर दिया।
अब उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधे से उतार दी और मेरे ऊपर लेट गए। मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होंठों को चूमने लगे। सिर्फ उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। मेरे पैर दोनों ओर फैले हुए थे। कुछ ही देर में मैं उत्तेजित होकर उनके हर धक्के का अपनी कमर को उनकी तरफ उठाकर और उछालकर स्वागत करने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं भी नीचे की ओर से पूरे जोश में धक्के लगा रही थी। एयर कंडीशनर की ठंडक में भी हम दोनों पसीने-पसीने हो रहे थे। कमरे में सिर्फ एयर कंडीशनर की हमिंग के अलावा हमारी “ऊह्ह…” “ओह्ह…” की आवाज़ गूँज रही थी। साथ में हर धक्के पर फुच-फुच की आवाज़ आती थी। हमारे होंठ एक-दूसरे से सिले हुए थे।
हमारी जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। मैंने अपने पाँव उठाकर उनकी कमर को चारों ओर से जकड़ लिया। काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद वो उठे और मुझे बिस्तर के किनारे खींचकर अधलेटी अवस्था में लिटाकर मेरी नंगों के बीच खड़े होकर मुझे चोदने लगे।
उनके हर धक्के के साथ पूरा बिस्तर हिलने लगता था। मेरी योनि से दो बार पानी की बोछार हो चुकी थी। कुछ देर तक और चोदने के बाद उन्होंने अपने लिंग को पूरी जड़ तक मेरी योनि के अंदर डालकर मेरे दोनों स्तनों को अपनी मुट्ठी में भरकर इतनी बुरी तरह मसला कि मेरी तो जान ही निकल गई।
“ले ले मेरा बीज… मेरा वीर्य अपने पेट में भर ले। ले ले मेरे बच्चे को अपने पेट में। अब नौ महीने बाद मुझसे शिकायत नहीं करना।” उन्होंने मेरे होंठों के पास बड़बड़ाते हुए मेरी योनि में अपना वीर्य डाल दिया। मैं उनके नितंबों में अपने नाखून गड़ा कर अपनी योनि को जितना हो सकता था ऊपर उठा दी और मेरा भी रस उनके लंड को भिगोते हुए निकल पड़ा।
दोनों खल्लास होकर एक-दूसरे के बगल में लेट गए। कुछ देर तक यूँ ही लंबी-लंबी साँसें लेते रहे। फिर वो करवट लेकर अपना एक पैर मेरे बदन के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे स्तनों से खेलते हुए बोले, “ऊफ्फ स्मृति तुम भी गजब की चीज़ हो। मुझे पूरी तरह थका दिया।”
“अच्छा?”
“इसी तरह अगर अक्सर चलता रहा तो बहुत जल्दी ही मुझे दवाई लेनी पड़ेगी ताकत की।”
“मज़ाक मत करो। अगर दवाई की किसी को ज़रूरत है तो मुझे। जिससे कहीं प्रेग्नेंट न हो जाऊँ।”
हम दोनों वापस एक-दूसरे से लिपट गए और उस दिन सारी रात एक-दूसरे से खेलते हुए गुज़र गई। उन्होंने उस दिन मुझे रात में कई बार अलग-अलग तरीके से चोदा। सुबह और उठने की इच्छा नहीं हो रही थी। पूरा बदन टूट रहा था। आज हैमिल्टन और शाशा भी हमारे साथ मिल गए।
हैमिल्टन मौका खोज रहा था मुझ संग संभोग का। लेकिन अब मैं राजकुमार जी के ही रंगों में रंग चुकी थी। मेरा रोम-रोम अब इस नए साथ को तरस रहा था। उस दिन भी वैसी ही चुहलबाज़ी चलती रही। मैंने स्विमिंग पूल पर अपनी सबसे छोटी बिकिनी पहनी थी। मेरा आशिक तो उसे देखते ही अपने होश खो बैठा। हैमिल्टन के होंठ फड़क उठे थे। हैमिल्टन ने पूल के अंदर ही मेरे बदन को मसला।
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शाम को हम डांस फ्लोर पर गए। डांस फ्लोर पर कुछ देर हैमिल्टन के साथ रहने के बाद राजकुमार जी ने मुझे अपने पास खींच लिया। शाशा भी उनके बदन से चिपकी हुई थी। दोनों को अपनी दोनों बाजुओं में कैद करके वो थिरक रहे थे। हैमिल्टन टेबल पर बैठा हम तीनों को देखते हुए मुस्कुराता हुआ अपने कॉकटेल को सिप कर रहा था। हम दोनों ने राजकुमार जी की हालत सैंडविच जैसी कर दी थी।
मैं उनके सामने सटी हुई थी तो शाशा उनकी पीठ से चिपकी हुई थी। हम दोनों ने उनके बदन से शर्ट नोचकर फेंक दी थी। उन्होंने भी हम दोनों को टॉपलेस कर दिया था। हम अपने स्तनों को, अपने सख्त निप्पल्स को उनके बदन पर रगड़ रहे थे। कुछ देर बाद हैमिल्टन भी स्टेज पर आ गया। उसके साथ कोई और लड़की थी। इसे देखकर शाशा हमसे अलग होकर हैमिल्टन के पास चली गई।
जैसे ही हम दोनों अकेले हुए, राजकुमार जी ने अपने तपते होंठ मेरे होंठों पर रखकर एक गहरा चुम्बन लिया। “आज तो तुम स्विमिंग पूल पर गजब ढा रही थीं।” “अच्छा? मिस्टर राजकुमार एक स्टड ऐसा कह रहा है जिस पर यहाँ कई लड़कियों की आँखें गड़ी हुई हैं। जनाब जवानी में तो आपका घर से निकलना मुश्किल रहता होगा?” “शैतान मेरी खिंचाई कर रही है।”
राजकुमार ने मुझे अपनी बाहों में लिए-लिए स्टेज के साइड में चले गए। “चलो यहाँ बहुत भीड़ है। स्विमिंग पूल पर चलते हैं, अभी पूल खाली होगा।” “लेकिन पहले बिकिनी तो ले लें।” “उसकी क्या ज़रूरत।” मैंने उनकी तरफ देखा, “आज मूनलाइट में न्यूड स्विमिंग करेंगे। बस तुम और मैं।”
उनकी प्लानिंग सुनते ही उत्तेजना में मेरा रोम-रोम थिरक उठा। मैंने कुछ कहा नहीं बस चुपचाप राजकुमार जी के साथ हो ली। हम लोगों से बचते हुए कमरे से बाहर आ गए। स्विमिंग पूल का नज़ारा बहुत ही दिलकश था। हल्की रोशनी में पानी का रंग नीला लग रहा था। तब शाम को ९ बज रहे थे इसलिए स्विमिंग पूल पर कोई नहीं था और शायद इसलिए रोशनी कम कर दी गई थी। ऊपर पूनम का चाँद ठंडी रोशनी बिखेर रहा था।
हम दोनों वहाँ पूल के निकट पहुँचकर कुछ देर तक एक-दूसरे को निहारते रहे फिर हम दोनों एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए। मैंने ड्रेस कोड के अनुसार इनर गारमेंट्स नहीं पहन रखा था। इसलिए जैसे ही वो मेरी स्कर्ट को खींचने लगे मैंने उन्हें रोका। “प्लीज… इसे नहीं… किसी ने देख लिया तो?” “यहाँ कोई नहीं आएगा। और किसे परवाह है? देखा नहीं हॉल में सब नंगे घूम रहे थे।”
हम दोनों बिल्कुल नग्न हो गए। सबसे पहले राजकुमार जी ने पूल में प्रवेश किया फिर मुझे हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया। मैं खिलखिलाकर हँस पड़ी। मैंने अपनी अंजुरी में पानी भरकर उनके चेहरे पर फेंका। तो वो मुझे पकड़ने के लिए मेरे पीछे तैरने लगे। हम दोनों काफी देर तक चुहलबाज़ी करते रहे।
एक-दूसरे के बदन से खेलते रहे। हम दोनों कसके एक-दूसरे से लिपट जाते और एक-दूसरे का बदन चूमने लगते। राजकुमार जी ने मेरे बदन का कोई हिस्सा नहीं छोड़ा जहाँ उनके होंठों का स्पर्श न हुआ हो। मैंने स्विमिंग पूल के किनारे को पकड़कर अपने आप को स्थिर किया।
राजकुमार जी पीछे से मेरे बदन से लिपटकर मेरे गीले स्तनों को मसल रहे थे। मैं अपनी गर्दन को पीछे घुमाकर उनके होंठों को अपने दाँतों से काट रही थी। उनका लिंग मेरे दोनों नितंबों के बीच सटा हुआ था। मैंने अपने एक हाथ से उनके लिंग को थामकर देखा लिंग पूरी तरह तना हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“आज जाओ जान, पानी भी मेरे बदन की आग को बुझा नहीं पा रहा है। जब तक तुम मेरे बदन को शांत नहीं करोगे मैं ऐसे ही फुँकती रहूँगी।” मैंने उनके बालों को अपनी मुट्ठी में भरकर अपनी तरफ मोड़ा और उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उस जगह पर पानी कम था।
वो पानी पर खड़े होकर मुझे उठाकर स्विमिंग पूल के ऊपर बिठा दिया। मेरी टांगें पूल के किनारों पर झूल रही थीं। वो अपने दोनों हाथों से मेरी टांगों को फैलाकर मेरी टांगों के बीच आ गए। मैंने अपनी टांगें उठाकर उनके कंधों पर रख दी। इससे मेरी योनि ऊपर होकर उनके चेहरे के सामने हो गई।
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उन्होंने मेरी योनि पर अपने होंठ टिका दिए और अपनी जीभ को योनि के ऊपर फिराने लगे। मैंने उनके सिर को अपने एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ को ज़मीन पर रखते हुए उनके सिर को अपनी योनि पर दबा दिया। वो अपनी जीभ को मेरी योनि के अंदर डालकर उसे आगे-पीछे करने लगे।
मैं उत्तेजना में अपने दोनों हाथों से राजकुमार जी को पकड़ ली और अपनी कमर को उनके मुँह की तरफ उठाने लगी। उन्होंने मेरे दोनों नितंबों पर अपनी उँगलियाँ गड़ा दीं और मेरे क्लिट को अपने दाँतों के बीच दबाकर हल्के-हल्के से कुतरने लगे। वो इस हालत में पीछे हटे तो मैं उनको पकड़े-पकड़े ही वापस स्विमिंग पूल में उतर गई।
मैंने अपनी टांगों को कैंची की तरह उनके बदन को चारों ओर से जकड़ लिया था। फिर उनके सिर को थामे हुए अपनी टांगों को हल्का सा लूज़ करते हुए उनके बदन पर फिसलती हुई नीचे की ओर खिसकी। जैसे ही अपने बदन पर उनके लिंग का स्पर्श महसूस किया तो अपने हाथों से उनके लिंग को अपनी योनि पर सेट करके वापस अपने बदन को कुछ नीचे गिराया।
उनका लिंग मेरी योनि के दरवाजे को खोलता हुआ अंदर घुसता चला गया। उन्होंने मेरी पीठ को स्विमिंग के किनारे से सटा दिया। मैंने अपने हाथों से पीछे की ओर स्विमिंग पूल का सहारा लेकर अपने बदन को सहारा दिया। वैसे मुझे सहारे की ज़्यादा ज़रूरत नहीं थी क्योंकि मेरी टांगों ने उनके बदन को इस तरह जकड़ रखा था कि वो मेरी इच्छा के बिना हिल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के देना शुरू किया।
“……राज… राज… हाँ… हाँ… और ज़ोर से… मज़ा आ गया… ऊफ्फ… ज़ोर से… म्म्म…” मैंने अपने बाहों का हार उनके गले में डाल दिया और उनके होंठों से अपने होंठ चिपका दिए। मैं उनके होंठों को काट खा रही थी। “ले ले ले ले अंदर ले ले अंदर पूरा… आह क्या चीज़ है…” कहते हुए उन्होंने मुझे सख्ती से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने रस की धार मेरी योनि में बहाना शुरू किया।
मैंने इस मामले में भी उनसे हार नहीं मानी। मेरा भी वीर्य उनके रस से मिलने निकल पड़ा। हम दोनों अपने जिस्म को दूसरे के जिस्म में समा देने के लिए जी-तोड़ कोशिश करने लगे। दोनों एक-दूसरे से इस तरह लिपट रहे थे कि पानी से भाप उठना ही बाकी रह गया था।
हम दोनों झड़कर स्विमिंग पूल पर कुछ देर तक किसी जल की मछलियों की तरह अठखेलियाँ करते रहे। उसके बाद पानी से निकलकर एक-दूसरे के बदन को साथ के बाथरूम में जाकर पोंछा। फिर हम अपने कमरे में वापस लौट गए। खाना कमरे में ही मँगाकर खाया। राजकुमार जी कुछ ज़्यादा ही रोमांटिक हो रहे थे। उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठाकर अपने हाथों से खिलाया।
अगले दिन हैमिल्टन और शाशा पीछे ही पड़ गए। हम दोनों को अलग नहीं छोड़ा। हमने उनके साथ ही ग्रुप सेक्स का मज़ा लिया। लेकिन हैमिल्टन के साथ वो मज़ा नहीं आया जो मुझे इस प्यारे बूढ़े शेर में आया। हम जितने भी दिन वहाँ ठहरे, खूब एंजॉय किए। वापसी में हम चारों को एक-दूसरे से बिछुड़ते हुए बहुत दुख हुआ।
वापस आने के बाद हम दोनों मेरी सासू जी की नज़रें बचाकर कभी रात को तो कभी घर से बाहर किसी होटल में तो कभी उनके केबिन में मिलते थे। सासू जी को हमारे जिस्मानी ताल्लुकात की भनक नहीं लगी। अभी पंकज के वापसी में काफी दिन बचे थे। जब हफ्ता भर बचा रह गया तो जेठ जी मुझे लेने आ गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
काफी दिनों से उनके पास आकर ठहरने के लिए जिद कर रहे थे। लेकिन मैं ही टालती रही मगर इस बार ना कहा नहीं गया। मैं उनके साथ उनके घर हफ्ते भर रही। हम दोनों औरतें उनकी दो बीवियों की तरह उनके अगल-बगल सोती थीं। रात को कमल जी हम दोनों को ही खुश कर देते। उनमें अच्छा स्टैमिना था। जब वो ऑफिस होते तो हम दोनों कभी-कभी लेस्बियन सेक्स भी एंजॉय करते। मेरी जेठानी तो मुझ पर जान छिड़कने लगी थी।
हमारे बीच अब कुछ भी गुप्त नहीं रहा। कमल जब ऑफिस से लौटते उसके पहले वो खुद बन-सँवरकर तैयार होती और फिर मुझे भी सजाती-संवारती। हम दोनों उनके आने के बाद संक्षिप्त कपड़ों में उनसे लिपट जाते और उनके साथ कामुकता का खेल शुरू हो जाता। हफ्ते भर बाद पंकज वापस आ गया। हम वापस मथुरा शिफ्ट हो गए। लेकिन मैंने राजकुमार जी से मिलने का एक रास्ता खोल रखा।
राजकुमार जी ने पंकज को कह दिया, “स्मृति एक बहुत अच्छी सेक्रेटरी है। अभी जो सेक्रेटरी है वो इतनी एफिशिएंट नहीं है। इसलिए कम से कम एक बार हफ्ते में इसे भेज देना दिल्ली। मेरे ज़रूरी काम निबटा कर चली जाएगी।” पंकज राजी हो गया कि मैं हफ्ते में उनके ऑफिस आ जाया करूँगी और सारे पेंडिंग काम निबटा जाया करूँगी।
लेकिन असल में मैंने कभी भी ऑफिस में कदम नहीं रखा। राजकुमार जी ने एक फाइव स्टार होटल में सूट ले रखा था जहाँ मैं सीधी चली जाती और हम दोनों एक-दूसरे के बदन से अपनी प्यास बुझाते। अभी पंकज के आए हुए आठ-दस दिन ही हुए थे कि मुझे ज़ोर की उबकाई आई।
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मैंने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने प्रेग्नेंसी कन्फर्म कर दी। मैं खुशी से उछल पड़ी। लेकिन इसका असली बाप कौन? यह विचार दिमाग में घूमता रहा। मैंने अपने तीनों सेक्स पार्टनर्स, जिनके साथ मैं पिछले महीने हम बिस्तर हुई थी, यह न्यूज़ दी। तीनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तीनों को मैंने कहा कि वो बाप बनने वाले हैं। पहले के लिए: इस उम्र में बाप बनने की खुशी। दूसरे के लिए: उसकी मर्दानगी का सबूत। और तीसरे के लिए: उसके घर की पहली खुशी थी। तीनों ने मुझे प्यार से भर दिया।
पूरे घर में हर व्यक्ति खुशी में झूम रहा था। सास, जेठानी सभी बिज़ी थे घर के नए मेंबर के आगमन की खुशी में। हमारा पूरा परिवार सिमट आया था दिल्ली में राजकुमार जी के निवास पर। बस मुझे एक अजीब सी उलझन कचोट रही थी कि मेरे होने वाले बच्चे का बाप कौन है। फिर भी दिल में एक तसल्ली थी कि चाहे वो जिसका भी हो, होगा तो वो इसी घर का खून। देखने-बोलने में इसी परिवार का ही नज़र आएगा। वरना मैंने जितने लोगों के साथ सेक्स किया था उनमें से किसी और का होता तो लोगों को शांत कर पाना मुश्किल होता।
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