Cute Desi Girl Pussy
ये बात उन दिनों की है जब हम कॉलेज में पढ़ते थे। हमारे गाँव में कॉलेज नहीं था इसलिए हम शहर में ही कमरा लेकर रहते थे और घरवालों की डर से पूरी आज़ादी थी, कहीं कोई रोकने वाला नहीं था। क्लास की करीब-करीब सभी लड़कियों से दोस्ती थी, पर तनुश्री जिसे हम तनु पुकारते थे, वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी। Cute Desi Girl Pussy
वो भी गाँव से आई थी और शहर में ही एक गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। तनु बहुत ही खूबसूरत थी। उसकी हाइट करीब 5.5 फीट थी और 34-26-30 की साइज़ थी। वो अक्सर जींस और टी-शर्ट पहनती थी, जिससे उसके सारे उभार साफ-साफ नज़र आते थे और वो किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थे।
उसने सभी लड़कों को पागल कर रखा था। कई लोग उसके नाम से मुठ मारते होंगे, पर मैं उनमें नहीं था। मैं और तनु बहुत अच्छे दोस्त थे और कभी भी कोई गलत बात न तो मैं तनु के लिए सोचता था और न ही तनु। हम अक्सर साथ घूमते और कॉलेज में तनु हमारे ग्रुप के साथ ही होती थी।
उसकी लड़कियों से दोस्ती कम थी। कई बार तनु मेरे कमरे में आकर हम लोगों के साथ पढ़ाई भी करती थी। हम दोनों कभी-कभी शहर से बाहर भी घूमने जाते थे। एक दिन मैंने तनु से कहा कि यहाँ कुछ दूर देवी का मंदिर है और पिकनिक स्पॉट भी है, वहाँ चलते हैं। वो तैयार हो गई। मैं करीब 12 बजे तनु के हॉस्टल पहुँचा।
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वो अपने वॉर्डन से छुट्टी लेकर निकली और कहा, “रात तक हम आ जाएँगे।” हम मेरी मोटरसाइकिल से निकले। उस दिन तनु ने जींस और टी-शर्ट पहना था, जिसमें वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। वो मेरी बाइक में दोनों तरफ पैर करके बैठती थी। आज भी उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरी पीठ से टकरा रहे थे, पर वो हमारे लिए आम बात थी।
उस बात को वो भी माइंड नहीं करती थी और मैं भी नहीं। मोटरसाइकिल बहुत स्पीड से चल रही थी। वो मेरी कमर को पकड़कर कस के बैठी थी। हमने बीच रास्ते में खाना खाया और करीब 3 बजे वहाँ पहुँचे। मंदिर ऊपर पहाड़ी पर था। करीब 1500 सीढ़ियाँ चढ़कर हम लोग पहुँचे। ऊपर रविवार होने के कारण बहुत भीड़ थी।
जब हम दर्शन करके नीचे पहुँचे तो 7 बज चुके थे। कुछ देर घूमने के बाद हमने खाना खाया और वापसी के लिए निकले। 8 बज चुके थे। तनु ने हॉस्टल में फोन करके बताया कि वो थोड़ा लेट से आएगी। अब वापसी के लिए चले तो थोड़ी-थोड़ी बारिश होने लगी, फिर तेज हो गई। हम कुछ देर रुक गए।
फिर कुछ कम होने पर हम चले। कुछ दूर पहुँचने पर बारिश फिर तेज हो गई। पर हम रुके नहीं। रास्ता सुनसान था, पूरा जंगली इलाका। तनु को डर भी लग रहा था। वो मुझसे बिल्कुल चिपक कर बैठी थी। उसके बूब्स मेरी पीठ से लगे हुए थे, पर इस समय मैं सिर्फ घर वापस पहुँचने के बारे में सोच रहा था और सोच रहा था कहाँ फंस गए।
कुछ दूर जाने पर मोटरसाइकिल पंचर हो गई। दूर-दूर तक कोई नहीं दिख रहा था और तनु का डर के मारे बुरा हाल था। मैंने कहा, “मैं हूँ, क्यों डर रही हो?” कुछ दूर पैदल और मोटरसाइकिल को घसीटते हुए चल रहे थे कि कहीं कोई मदद मिल जाए। पर न कोई गाड़ी न कोई आदमी। कुछ दूर चलने पर एक कुछ लाइट दिखाई दी। मैंने सोचा कोई गाँव है।
वहाँ पहुँचकर एक छोटा सा गाँव था, पर पूरी तरह सुनसान। हम लोग मोटरसाइकिल रोड पर छोड़कर गाँव के अंदर गए। वहाँ कुछ लोग घर के बाहर बैठे थे। हमने अपनी परेशानी बताई। वो बोले, “साब यहाँ तो कोई पंचर बनाने वाला नहीं है। एक है जो पास की गाँव से आता है, पर वो भी जा चुका है।” मैंने पूछा अगला गाँव तो वो बोले, “बहुत दूर है।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बारिश अभी भी हल्की-हल्की गिर रही थी। हम दोनों पूरी तरह भीग गए थे। गाँव वालों ने कहा, “साब इतनी रात को मत जाइए, आगे इलाका बहुत खराब है। जंगली जानवर भी घूमते हैं और रोड भी ठीक नहीं है।” मैंने पूछा कोई साधन जाने के लिए तो वो बोले, “कुछ नहीं है।” मैंने पूछा तो रुकने के लिए वो बोले, “एक छोटा सा फॉरेस्ट का रेस्ट हाउस कुछ दूर पर है।”
मैंने तनु से पूछा तो बोली, “मैं अब आगे नहीं जाऊँगी, भले सारी रात क्यों न जगना पड़े।” तो मैंने कहा, “चलो फिर रेस्ट हाउस को ही देखते हैं।” मोटरसाइकिल को वहीं लॉक करके गाँव वालों के बताए रास्ते पर गए। नज़दीक ही वो रेस्ट हाउस था। वहाँ चौकीदार था। उसको हमने बताया कि क्या हुआ है। वो बोला, “साब यहाँ एक ही कमरा है।” मैंने कमरा देखा। वहाँ एक ही सिंगल बेड रूम था, पर पूरी तरह साफ-सुथरा था।
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मैंने तनु की ओर देखा।
वो बोली, “ठीक है, हम आज यहीं रुकेंगे।”
वो बोला, “ठीक है।”
मैंने पूछा, “कोई तो लिया है?”
वो बोला, “साब एक ही होगा।”
मैंने तनु से कहा, “तुम अंदर चली जाओ और कपड़े सुखा लो।”
वो अंदर चली गई। मैं बाहर ही था।
मैंने चौकीदार से पूछा, “कुछ खाने को मिलेगा?”
वो बोला, “साब कोशिश करता हूँ।”
मैंने उसे पैसे दिए, वो चला गया। अब मैं बाहर अकेला ही था। करीब 10 मिनट बाद तनु ने दरवाज़ा खोला। उसने बेडशीट को पूरा लपेट रखा था।
वो बोली, “तुम भी कपड़े उतार दो।”
मैंने कहा, “मैं क्या पहनूँगा?”
वो बोली, “तोलिया लपेट लेना।”
तनु ने फैन चला कर कपड़े सुखने डाल दिए थे। जींस मोटी होने के कारण पूरा पानी टपक रहा था। मैं बाथरूम में गया। वहाँ तनु की ब्रा और पैंटी पूरी तरह गीली पड़ी थीं। वो शर्म के कारण उन्हें बाहर नहीं लाई थी। मैं भी कपड़े उतारकर तोलिया लपेट कर बाहर आ गया।
तनु कुछ शर्मा रही थी, इसलिए मैं बाहर चला गया।
तनु बोली, “क्या हुआ?”
मैंने कहा, “तुम uncomfortable feel कर रही हो?”
उसने कहा, “कोई बात नहीं है, तुम अंदर आ जाओ। बाहर ठंड बहुत है।”
कुछ देर में चौकीदार आ गया। वो कुछ मिक्सचर और दाल के पैकेट लाया था। हमने थोड़ा-थोड़ा खाया।
चौकीदार बोला, “साब अब मैं अपने क्वार्टर में सोने जा रहा हूँ। कुछ लगे तो मुझे जगा देना।” वो चला गया।
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ठंडी हवा के कारण मैंने विंडो और दरवाज़ा बंद कर लिया। अब हम दोनों अकेले ही कमरे में थे। मैंने तनु से कहा, “तुम पलंग पर सो जाओ, मैं यहाँ नीचे सो जाता हूँ।” मैंने कम्बल को बिछाया और लाइट बंद कर नाइट लैंप ऑन कर सोने की कोशिश करने लगा। तनु पलंग पर लेट गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं करवटें बदल रहा था। ये सब तनु भी देख रही थी।
वो बोली, “तुम्हें ज़मीन पर नींद नहीं आएगी, मैं सो जाती हूँ।”
मैंने कहा, “नहीं।”
तनु ने कहा, “मुझे ठंड लग रही है।” मैंने कहा, “कम्बल दे देता हूँ।” वो बोली, “तुम कैसे सोओगे?”
वो बोली, “तुम भी पलंग पर आ जाओ। दोनों कम्बल भी ओढ़ लेंगे।”
मैं डर रहा था। वो बोली, “यार कुछ नहीं होता ना। अब ऐसा करना ही था।” पलंग कुछ चौड़ा था इसलिए प्रॉब्लम नहीं थी। अब मैं भी पलंग पर था और दोनों ने एक ही ब्लैंकेट ओढ़ रखा था। मेरे बदन पर तोलिए के सिवाय कुछ नहीं था और तनु बेडशीट में थी। अब हम दोनों सोने की कोशिश करने लगे।
कुछ देर बाद तनु बोली, “कुमार मुझे नींद नहीं आ रही है। हम लोग बातें करके टाइम पास करते हैं।” मैंने कहा, “सो जाओ।” वो नहीं मानी। मैं पीठ के बल लेट गया। वो साइड से मेरी तरफ मुँह करके हम बातें करने लगे। मेरा तो लिया खुल चुका था। उसके पैर कभी-कभी मेरे पैर से टकरा जाते।
मैं उधर कर लेता। अब मैंने भी साइड बदल कर उसकी ओर हो गया। अब मेरा तो लिया पूरी तरह खुल चुका था। अचानक मेरा पैर उसके पैर पर लगा। उसकी भी टाँगें नंगी थीं। बेडशीट अस्त-व्यस्त हो गई थी। मैं अपने आप को संभाला, पर उसका स्पर्श पाकर मेरे बदन में करंट दौड़ गया। मैं फिर पीठ के बल लेट गया।
वो बोली, “क्या हो गया? बार-बार साइड बदल रहे हो।”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
मैं uncomfortable feel कर रहा था। अचानक तनु बोली, “इतने डर क्यों रहे हो?”
मैं बोला, “सो जाओ, यही अच्छा है।”
वो बोली, “नींद नहीं आ रही है।”
वो बोली, “मेरी तरफ मुँह करके सो।”
मैंने फिर साइड चेंज की। अब हम इतने नज़दीक थे कि हमारी साँसें टकरा रही थीं। उसकी गर्म साँसें मुझे मदहोश कर रही थीं। उसकी फीलिंग मेरे लंड तक पहुँच रही थी और धीरे-धीरे उसमें भी टेंशन आ रहा था।
तनु बोली, “तुम्हारा मन कहीं और है। बातें कर नहीं रहे हो, बस हाँ-नहीं में जवाब दे रहे हो।”
मेरी पोज़िशन और खराब होते जा रही थी क्योंकि तनु के पिंक-पिंक होंठ मेरी आँखों के सामने थे और ठंड के कारण थरथरा रहे थे। मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैंने अपने होंठ तनु के होंठों पर लगा दिए। तनु हड़बड़ा गई। वो बोली, “क्या हुआ?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं यार, आई एम सॉरी।”
अब मैं तनु से नज़र नहीं मिला पा रहा था और उसकी तरफ पीठ करके सो गया। फिर तनु को न जाने क्या हुआ, वो मुझसे लिपट गई। उसके बूब्स मेरी पीठ से दब रहे थे और उसकी नंगी टाँगें मेरी टाँगों से टकरा रही थीं।
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मैंने कहा, “तनु उधर मुँह करके सो जाओ।”
वो बोली, “कुछ नहीं हुआ यार। तुम लड़के होकर घबरा रहे हो।”
मैं बोला, “यार प्लीज।”
वो बोली, “कुछ नहीं है, इधर मुँह करो।”
उसने ज़बरदस्ती मेरा मुँह अपने और किया।
वो बोली, “कुछ नहीं है यार।”
मैंने आँखें बंद कर लीं। अचानक मुझे लगा कि तनु मेरे होंठों पर अपनी जीभ फेर रही है। मैंने आँखें खोलीं तो तनु अपनी आँखें बंद किए मुझे किस कर रही थी। अब मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने तनु को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हम दोनों के बदन के बीच सिर्फ तनु की बेडशीट थी और हमारी टाँगें आपस में उलझ गई थीं। मैंने बेडशीट को भी उसके बदन से अलग किया। अब दोनों की न्यूड बॉडी आपस में टकरा रही थी। मैं अब भी उसके होंठ चूस रहा था। उसका हाथ मेरी पीठ पर था और मेरा फुल टेंशन वाला लंड तनु की चूत से टकरा रहा था, जिससे वो भी उत्तेजित हो रही थी।
मेरा हाथ अब तनु के बदन को सहला रहा था और उसके साइज़ में बड़े और कड़क बूब्स को धीरे-धीरे दबा रहा था। अब मैंने तनु को अपने ऊपर ले लिया और तनु मेरे होंठ पागलों की तरह चूस रही थी। मैंने उसकी कमर और चिकनी गांड पर दोनों हाथ फेर रहे थे। अब मैंने तनु को सीधा लिटाया और कम्बल हटा दिया।
पहली बार मैंने तनु को नंगा देखा। क्या बदन था उसका! जितनी सेक्सी वो कपड़ों में लगती थी, उससे ज़्यादा सेक्सी वो न्यूड लग रही थी। मैं तो उसे देखता ही रहा। क्या बूब्स, क्या कमर और मोटी-मोटी जाँघों के बीच में काले हल्के-हल्के बालों से घिरी हुई चूत। उसने अपनी दोनों टाँगें चिपका के रखी थीं, इसलिए चूत का पूरा व्यू नहीं मिल रहा था।
अब तक हमने एक शब्द भी नहीं बोला था। मैंने कहा, “तनु, यू आर ब्यूटीफुल।” वो शर्मा गई और अपनी आँखों पर हाथ रख लिए। मैंने उसके बूब्स चूसने लगा। वो आँखें बंद करके मेरे बालों में उँगलियाँ फेरने लगी और मैंने उसके एक बूब को हाथ से दबाने लगा।
फिर मैंने नीचे होकर उसके नेवल में जीभ डालकर फेरने लगा। वो बहुत गरम हो गई थी। अब मैंने और नीचे होकर उसकी जाँघ पर चूमने लगा और फिर मैंने उसके साइड में लेट गया। अब वो मुझसे फिर से लिपट गई। वो कान में बोली, “कुमार ये क्या हो रहा है?”
मैंने कहा, “जो हो रहा है होने दो। इस जगह मैं अपने आप को नहीं रोक सकता।”
वो बोली, “ठीक है।”
वो मेरे गाल पर चूमने लगी और उसका हाथ मेरे लंड को सहला रहा था।
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मैंने तनु से पूछा, “तनु तुमने पहले कभी ऐसा किया है?”
वो शर्मा के सिर हिला दिया।
मैंने हैरान से पूछा, “किसके साथ?”
वो बोली, “फिर कभी बताऊँगी।”
मैंने भी माहौल को तनावपूर्ण नहीं करना चाहता था। अब वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे निप्पल्स को चूसने लगी। मैंने तो अपनी आँखें बंद कर लीं और वो नीचे होते जा रही थी। अब वो मेरी जाँघ पर बैठकर मेरे लंड को सहलाने लगी। वो बोली, “तुम तो दुबले हो पर ये इतना स्ट्रॉन्ग कैसे है?”
मैं कुछ नहीं बोला। अब साइड में लेट गए। अब मैंने उसके टाँगों को फैलाकर बीच में आ गया और उसकी छुपी हुई चूत पर हाथ फेरने लगा। उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। तनु भी अपनी गीली चूत में मेरा लंड डलवाने के लिए बेचैन थी। अब मैंने बिना देर किए उसकी चूत के मुँह पर अपना लंड लगा दिया।
वो भी लंड पकड़कर अंदर डालने की कोशिश करने लगी, पर उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैंने बाहर निकालकर अपने लंड और उसकी चूत पर थूक लगाई और अब अंदर डालने लगा। अब कुछ लंड अंदर गया, पर तनु को दर्द भी हो रहा था। वो बोली, “प्लीज धीरे।”
पर मैंने अनसुना कर दिया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसमें समाने की कोशिश करने लगा। वो बेचैन होकर छटपटाने लगी। मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था। मैंने कुछ देर रुककर अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगा। वो अब सी-सी-सी कर रही थी।
मैंने कहा, “चिल्लाओ मत।”
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अब मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाता हुआ उस पर छा गया और उसके होंठ चूसने लगा। उसने भी मुझे अपनी बाहों में लपेट लिया। मैंने भी उसे लपेटकर पूरी स्पीड से चोदने लगा। अब मैंने उसे अपने ऊपर ले लिया। वो बैठकर अपनी गांड आगे-पीछे करने लगी। उस पोज़िशन में हम दोनों को मज़ा नहीं आ रहा था।
मैं उठ गया और तनु की टाँगों को अपनी कमर में फँसा दिया और उसके बूब्स चूसने लगा। फिर मैंने अपने हाथ पीछे अपनी पीठ की ओर पलंग पर टिका दिए। अब तनु मेरे कंधों पर दोनों हाथों का सपोर्ट लेकर ज़ोर-ज़ोर से थप-थप मारने लगी। वो अपनी पूरी स्पीड से मुझे अपने आप में समाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुछ देर में तनु झड़ गई और वो शांत हो गई। अब मैंने तनु को सीधा लिटाया और उस पर ज़ोर-ज़ोर से स्ट्रोक लगाने लगा। तनु ओह आह ओह आह्ह्ह ओह आह कर रही थी। मैंने तनु की दोनों टाँगें मोड़ दीं जिससे मेरा लंड उसकी चूत के पूरी तरह अंदर जा सके। मुझे अहसास हो रहा था कि मैं पूरी गहराई तक तनु के अंदर समा चुका हूँ।
मैं भी उसी आनंद में खोया हुआ था। अब मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा तो तनु के ऊपर पूरी तरह छा गया और किस करता हुआ पूरी स्पीड से चोदने लगा। उसकी चूत से फच-फच की आवाज़ आने लगी। लगता था वो दूसरी बार भी झड़ गई।
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तनु पूरी तरह शांत थी और मैं अपनी मंज़िल पर पहुँचने वाला था। और मैं झड़ गया। मैंने पूरा कम उसकी चूत में ही झड़ दिया और मैं भी शांत हो गया। फिर कुछ देर यूँ ही पड़े रहे।फिर तनु ने चुप्पी तोड़ी, “कुमार हमसे गलती हो गई। ये नहीं होना था।” मैंने कहा, “जो हो गया उसका क्या करना। एक तूफान आया और हम अपने आप को रोक न सके। पर अब आगे क्या?” मैंने कहा, “आज हुआ वो इसी कमरे तक रहे तो ज़्यादा अच्छा है। हम कोशिश करेंगे कि ये गलती दोबारा न हो और न ही इस बात का कहीं जिक्र हो।”
वो बोली, “ठीक है। मैं प्रॉमिस करती हूँ कि पहल मेरी ओर से नहीं होगी।” मैंने कहा, “पर आज की रात मैं ये गलती दोबारा करना चाहता हूँ।” वो मुझे देखने लगी फिर मुस्कुरा दी। फिर हमने उस रात एक बार फिर से चोदने का आनंद लिया और इस बार भी तनु ने उतना ही स्पॉट किया। और न जाने कब हमें नींद आ गई और सुबह हो गई। हम वापस आ गए। पर दोस्तों, उस रात के बाद तनु और मेरी दोस्ती उसी तरह थी, पर हमने कभी वो रिलेशन नहीं बनाए। वो उस रात बन गए थे।
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