Monsoon Chudai
ये घटना आज से 18 साल पुरानी है। उस समय मैं ट्रेनिंग कर रहा था। हमारे स्कूल में लड़के और लड़कियां साथ-साथ ट्रेनिंग करते थे। लड़कों के लिए हॉस्टल था, लेकिन मैं बाहर कमरा लेकर रहता था। उस शाम को बहुत तेज बारिश हो रही थी। सब लोग अपने घरों में बंद थे। Monsoon Chudai
मुझे पता था कि सीमा — मेरी गर्लफ्रेंड — कहीं गई हुई है और मेरा कमरा रास्ते में ही पड़ता है। इसलिए मैंने घर का दरवाजा थोड़ा सा खुला रखकर उसकी राह देख रहा था। सीमा मेरी दोस्त थी और हमारे बीच पूरी समझदारी थी। काफी समय से हम ऐसे किसी मौके का इंतजार कर रहे थे।
आज मेरा पूरा प्लान था उसे चोदने का। उसकी भरी-भरी जवानी के बारे में सोच-सोचकर बदन में कांटे खड़े हो रहे थे। अचानक वह सामने से आती हुई दिखी। मैंने दरवाजा थोड़ा और खोला और उसे कहा, “अंदर आ जाओ, इस बारिश में कहाँ जाओगी। जब रुक जाए तो चली जाना।”
वह पूरी गीली हो चुकी थी और उसे भी मेरे साथ रहना अच्छा लगता था, इसलिए बिना कुछ कहे अंदर आ गई। मेरे मन की मुराद पूरी हो गई। अब उसका काम होना ही था। सीमा अंदर आकर अपना बदन पोंछने लगी। उफ्फ! पानी से गीला पूरा बदन, कपड़े शरीर से चिपके हुए।
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एक-एक अंग साफ झलक रहा था जैसे सामने नंगी खड़ी हो। उसकी सलवार जांघों के अंदर तक चली गई थी। क्या क़यामत की जवानी पाई थी उसने। बड़े-बड़े टाइट बूब्स, पतली कमर और वाह! बड़ी-सी गोल-गोल गांड। देखकर मजा आ गया। मैं तो पहले से ही तैयार बैठा था। उसे देखकर सब्र का बंधन टूट गया।
मैंने बिना देर किए पीछे से उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया और लंड से उसकी गांड पर जोर देने लगा। पहले उसकी कमर और फिर उसके बूब्स को जोर-जोर से रगड़ने लगा। मेरा लंड तनतनाकर उसकी गांड की पिछली लाइन के अंदर घुस गया और फनफनाने लगा। मन किया कि पूरा गांड के अंदर डाल दूं। दिमाग में बिजली सी दौड़ रही थी। सारा बदन कांप रहा था।
सीमा भी जैसे तैयार ही थी। मेरे छूते ही वह ढीली पड़ गई। एक तो गीला बदन और उस पर वासना का नशा — दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। अब तो बस हाथ और मुंह चल रहे थे। और फिर हमारा खेल शुरू हो गया, जिसके लिए हम दोनों लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
मैं धीरे-धीरे उसके गीले कपड़े निकाल दिए और उसके गीले बदन को चूमता हुआ उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा। और जैसे ही मैंने चूत पर अपने होंठ रखे, सीमा तड़प उठी। सीमा ने मेरे सिर को पकड़कर अपनी कमर आगे की और अपनी चूत मेरे नाक पर रगड़ने लगी।
मैंने भी उसके चूतड़ को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उनकी गांड सहलाते हुए उनकी रस रही चूत को चूमने लगा। सीमा की चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में छाने लगी। मैं दीवाने की तरह उसकी चूत और उसके चारों तरफ के इलाके को चूमने लगा। बीच-बीच में मैं अपनी जीभ निकालकर उसकी रानो को भी चाट लेता।
वह मस्ती से भरकर सिसकारियां लेते हुए बोली, “हाय राजा अह्ह्ह्ह! जीभ से चाटो ना। अब और मत तड़पाओ राजा… अंदर डालकर जीभ से चाटो।”
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अब तक उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे बुरी तरह पागल बना दिया था। मैंने उसकी चूत पर से मुंह उठाए बिना उन्हें खींचकर पलंग पर बिठा दिया और खुद जमीन पर बैठ गया। उसकी जांघों को फैलाकर अपने दोनों कंधों पर रख लिया और फिर आगे बढ़कर उसकी चूत के होंठों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सीमा मस्ती से बड़बड़ाने लगी और अपनी चूतड़ को और आगे खिसकाकर अपनी चूत को मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दी। अब उसके चूतड़ पलंग से बाहर हवा में झूल रहे थे और उनकी मखमली जांघों का पूरा दबाव मेरे कंधों पर था। मैंने अपनी जीभ प्यारी की पूरी उसकी चूत में ठेल दी और चूत की अंदरूनी दीवारों को सहलाने लगा। सी
मा मस्ती से तिलमिला उठी और अपने चूतड़ उठा-उठाकर अपनी चूत मेरी जीभ पर दबाने लगी। “हाय राजा, क्या मजा आ रहा है। अब अपनी जीभ को अंदर-बाहर करो ना! चोदो राजा चोदो! अपनी जीभ से चोदो मुझे मेरे जान। अब सारी कसर निकालूंगी। बड़ा तड़पा पिछले साल भर से। हाय राजा चोदो मेरी चूत को अपनी जीभ से।”
मुझे भी पूरा जोश आ गया और मैंने उसकी चूत में जल्दी-जल्दी जीभ अंदर-बाहर करते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया। सीमा भी जोर-जोर से कमर उठाकर मेरे मुंह को चोद रही थी। मुझे भी इस चुदाई से बड़ा मजा आने लगा। मैंने अपनी जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके उसकी चूत को चोदने लगा। उसका मजा दोगुना हो गया।
अपने चूतड़ को जोर-जोर से उठाते हुए बोली, “और जोर से, और जोर से, हाय मेरे प्यारे… अह्ह्ह! उईई माँ!” सीमा अब झरने वाली थी। वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए अपनी चूत मेरे पूरे चेहरे पर रगड़ रही थी। मैं भी पूरी तेजी से जीभ लपलपाकर उसकी चूत पूरी तरह से चाट रहा था।
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सीमा पलंग पर पेट के बल लेट गई और अपने घुटनों के बल होकर अपने चूतड़ हवा में उठा दिए। देखने लायक नजारा था। सीमा के गोल-मटोल गोरे-गोरे हिप्स मेरी आंखों के सामने लहरा रहे थे। मुझसे रहा नहीं गया और झुककर चूतड़ को मुंह में भरकर कसकर काट लिया। उसकी चीख निकल गई।
फिर मैंने ढेर सारा वैसलीन लेकर उसके चूत की दरार में लगा दिया। सीमा बोली, “ऊपर से लगाने से नहीं होगा। उंगली से लेकर अंदर भी लगाओ और अपनी उंगली पेल-पेलकर पहले छेद को ढीला करो।” मैंने अपनी बीच वाली उंगली पर वैसलीन लगाकर उसकी चूत में घुसाने की कोशिश की।
पहली बार जब नहीं घुसी तो दूसरे हाथ से छेद फैलाकर दोबारा कोशिश की तो मेरी उंगली थोड़ी सी अंदर घुस गई। मैंने थोड़ा बाहर निकालकर फिर झटका देकर डाला तो घपाक से पूरी उंगली धंस गई। उसने एकदम से अपने चूतड़ सिकोड़ लिए जिससे कि उंगली फिर बाहर निकल गई।
सीमा बोली, “इसी तरह उंगली अंदर-बाहर करते रहो कुछ देर तक।” मैं उसके कहे मुताबिक उंगली तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था। उसने भी कमर हिला-हिलाकर मजा ले रही थी। कुछ देर उसी मजा लेने के बाद उसने बोला, “चलो राजा आ जाओ, अपना डाल दो ना।”
मैं उठकर घुटने का बल बैठ गया और लंड को पकड़कर उसकी चूत पर गांड के पीछे से छेद पर रख दिया। उसने थोड़ा पीछे होकर लंड को निशाने पर रखा। फिर मैंने उसके चूतड़ को दोनों हाथों से पकड़कर धक्का लगाया। उसकी चूत का छेद बहुत टाइट था।
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मैं बोला, “सीमा नहीं घुस रहा है।” तब उसने अपने दोनों हाथों से अपने चूतड़ को खींचकर चूत का छेद चौड़ा किया और दोबारा जोर लगाने को कहा। इस बार मैंने थोड़ा और जोर लगाया और मेरा सुपाड़ा सीमा की चूत के लाल-लाल छेद में चला गया। सीमा की कसी चूत ने मेरे सुपाड़े को जकड़ लिया। मुझे बड़ा मजा आया।
मैंने दोबारा धक्का दिया और उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा आधा लंड उसकी चूत में दाखिल हो गया। उसने जोर से चीख उठाई, “उईई माँ, दुखता है जरा आराम से डालो।” पर मैंने उसकी चीख पर कोई ध्यान नहीं दिया और लंड थोड़ा पीछे खींचकर जोरदार शॉट लगाया। मेरा 8 इंच का लौड़ा उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर दाखिल हो गया। उसने फिर चीख उठाई।
वह बार-बार अपनी कमर को हिला-हिलाकर मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। मैं आगे को झुककर उसकी चुचियों को पकड़ लिया और उन्हें सहलाने लगा। लंड अभी भी पूरा का पूरा उसकी चूत के अंदर था। कुछ देर बाद सीमा की चूत में लंड डाले-डाले उनकी चुचियों को सहलाता रहा।
जब वह कुछ नॉर्मल हुई तो अपने चूतड़ हिलाकर बोली, “चलो अब ठीक है।” उसके सिग्नल पर मैंने दोबारा सीधे होकर उसके चूतड़ पकड़कर धीरे-धीरे कमर हिलाकर लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी। इसे चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। अब उसने भी अपना दर्द भूलकर सिसकारियां भरते हुए मजा लेना शुरू कर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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पूरे कमरे में चुदाई का थप-थप की आवाज गूंज रही थी। जब उसके थिरकते हुए चूतड़ से मेरी जांघें टकराती थीं तो लगता कोई तबलची तबले पर थप दे रहा हो। हम दोनों ही पसीने-पसीने हो गए थे पर कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसने मुझे बार-बार ललकार रही थी, “चोद लो, चोद लो अपनी सीमा की चूत। आज फाड़ डालो इसे। और जोर से राजा और जोर से। फाड़ डाली तुमने मेरी तो।” मैं भी हुमच-हुमचकर शॉट लगा रहा था। पूरा का पूरा लंड बाहर खींचकर झटके से अंदर डालता तो उसकी चीख निकल जाती।
मेरा लावा अब निकलने वाला था। उधर उसने भी अपनी मंजिल के पास थी। मैंने उसके बदन को पूरी तरह अपनी बाहों में समेटकर दनादन शॉट लगाने लगा। उसने भी संभालकर जोर-जोर से “अह्ह्ह उह्ह्ह” करती हुई चूतड़ आगे-पीछे करके अपनी चूत में मेरा लंड लेना शुरू कर दिया। हम दोनों की सांस फूल रही थी। आखिर मेरा ज्वालामुखी फूट पड़ा और मैं उसके पीठ से चिपककर सीमा की चूत में झर गया। सीमा का पानी भी निकलने को था और उसने भी चीखते हुए झर गई। हम दोनों उसी तरह चिपके हुए पलंग पर लेट गए और सुस्ताने लगे।
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