Jija Sali Kinky Sex Story
मैं देव हूँ। विवाहित, २८ वर्ष का, ५ फीट ११ इंच लंबा, गोरा, मसल्स वाला आदमी हूँ और लगभग ७ इंच लंबा तथा १.५ इंच मोटा लंड (चूत प्रोसेसिंग यूनिट) का मालिक हूँ। उस रात फोन पर ज्योति ने बताया कि वह मेरी और वाइफ के चुदाई सेशन की आवाजें सुनकर अनगिनत बार झरी थी और कई बार मूली से अपनी चूत चोदी थी। Jija Sali Kinky Sex Story
मेरी वाइफ जब बाथरूम से बाहर निकलकर आई तो मेरा लंड फिर से तैयार हो रहा था। मेरी वाइफ मेरी एक ही चुदाई से बिल्कुल थक जाती है। वह कहने लगी, “जानू, तुम खुद मेरी चूत की हालत देख लो, कितनी लाल हो रही है। तुम्हारा लंड ऐसी मस्त चुदाई करता है कि मेरी चूत में सुबह तक झनझनाहट होती रहती है और सूजन रहती है।” फिर बोली, “प्लीज अब सोने दो।”
पर मैं मानने वाला नहीं था क्योंकि मैंने ज्योति से फोन पर बात कर ली थी। मैंने अपनी वाइफ से कुछ नहीं कहा, सिर्फ इतना कहा, “जानम, कल और परसों दो दिन की छुट्टी है, तो आज रात का उपयोग चुदाई के लिए करते हैं।” ऐसा कहते हुए मैंने उसे अपने बदन से चिपका लिया।
हम दोनों नंगे ही थे, तो मेरे बदन की गर्मी उसके शरीर में ट्रांसफर होने लगी। मैं उसके कान के पीछे लिक कर रहा था और अपने पैर से उसके पैरों के बीच यानी उसकी फूली हुई चूत (मुनिया) पर रगड़ रहा था।
वह कुछ कसमसाने लगी थी, सो मैंने उसके मस्त स्तनों को पकड़कर सहलाना और धीरे-धीरे सेंसेशन्स भेजना शुरू कर दिया। मैं इंतजार कर रहा था कि कब उसके मुँह से ‘सीई’ या ‘आआह’ का मोन निकले। और इसमें उसे ज्यादा देर नहीं लगी। जैसे ही उसने ‘ही सीई’ किया, मैंने उसे दीवार से टिकाकर उसके शरीर पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।
उसके शरीर के हर हिस्से पर — माथे पर, दोनों आँखों पर किस, कान पर, नाक पर, गर्दन के पीछे, गले में, दोनों कंधों पर, आर्मपिट में, स्तनों के किनारों (.) (.) पर, निप्पल के चारों ओर और एरोला पर, दोनों स्तनों के बीच में (.) (.), और लिक भी साथ में। वह कह रही थी, “जानू मत तड़पाओ, मेरी चूत सुलगने लगी है।”
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मैं एक हाथ से उसकी मस्त फूली हुई चूत को मसल भी रहा था। मैं सीधे उसकी चूत के पास पहुँच गया और उसकी चूत के चारों ओर लिक करने लगा। उसने अपनी दोनों टाँगें फैला रखी थीं और मेरा सिर अपनी चूत पर दबा रही थी। मेरी वाइफ जब गर्म होती है तो चिल्लाती भी बहुत है —
“अरे ले, खा जा मेरी चूत को। तेरे लंड ने इसकी शक्ल बिगाड़ दी है। देख कैसी जला कर काली कर दी है इस चूत को। ज्योति मेरी चूत की शादी के पहले तारीफ किया करती थी। कहती थी, ‘ही री तेरी चूत कितनी सुंदर और गुलाबी है।’ मेरे जीजू तुम्हारी चूत चोद-चोद कर इसे काली कर देंगे और इतनी चाटेंगे कि तुम उनके मुँह में ही झड़ जाओगी। ज्योति ने बिल्कुल सही कहा था।”
सही बताओ, उसको कैसे पता कि तुमको चूत चाटने में महारत हासिल है। मैं बहुत तेजी से उसकी क्लिट से लेकर उसकी गांड के छेद तक अपनी जीभ घुमा रहा था। उसकी चूत किसी बरसाती नाले की तरह पानी की तरह बह रही थी। मेरी वाइफ से जब रहा नहीं गया तो उसने मुझे धक्का दिया और जमीन पर गिरा दिया और मेरे तने हुए लौड़े (मुन्ना) पर टूट पड़ी।
वह उसे ऐसे चूस रही थी जैसे सालों से भूखी हो। और कुछ देर बाद उसने अपनी चूत (मुनिया) के मुँह पर लंड की टिप रखी और एक दम से लंड पर बैठ गई।
‘फच्’ की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड उसकी मुनिया (चूत) में जड़ तक समा गया। वह चिल्ला पड़ी — “आआह, जल गई मेरी मुनिया, फट गई रे।” और कुछ देर तक वैसी ही रुकी रही। फिर धीरे-धीरे अपनी गांड गोल-गोल घुमाते हुए जैसे कोई स्क्रू कस रही हो, मेरा लंड अपनी चूत (मुनिया) की गहराइयों में महसूस करने लगी।
उसे ऐसा करने में बहुत मजा आता था और उससे दोगुना मजा मुझे आने वाला था क्योंकि अब वह फ्यूरियस स्पीड से चुदवाने वाली थी और स्ट्रोक्स की स्पीड वह कंट्रोल कर रही थी। साथ ही साथ मेरे से अपने मम्मे मसलवा रही थी और मुझे जगह-जगह नोच रही थी और किस कर रही थी। इससे मेरे लंड (मुन्ना) को भी बहुत मजा आ रहा था।
अचानक उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बकबकाने लगी — “अरे साले गांडू, अपनी इस रंडी बीबी को छोड़कर मेरी सखी ज्योति पर नजर रखता है। उसकी मुनिया के छेद उड़ाना चाहता है। पहले मेरी मुनिया से तो निपट।”
वह झड़ने के करीब पहुँच गई थी और जोर से मेरे लंड की राइडिंग का पूरा मजा ले रही थी। “हाँ ले सीई हीई चिल गई मेरी मुनिया, हाँ और ले, अरे घाव हो गया रे…….” ऐसी कुछ भी आई-साई बकती जा रही थी। मैं उसके मम्मे बिल्कुल जैसे गीले कपड़े निचोड़ते हैं वैसे ही मसल रहा था।
कुछ ही देर में वह बुरी तरह से झरी और वैसी ही मेरे से चिपक गई। वह जोर से हाँफ रही थी। मैं उसकी पीठ सहला रहा था और नीचे से धीरे-धीरे धक्के भी दे रहा था। उसे बहुत अच्छा लग रहा था। वह अब शांत हो गई थी और गहरी-गहरी साँसें लेकर मेरे मुन्ना को अपनी मुनिया में कसे हुए थी।
“आह जानू, अपने मुन्ने को मेरी मुनिया से अलग मत करना। हे भगवान, आज की रात सबसे लंबी रात कर दो। और पेलो जानू, अपने मुन्ना को मेरे गले तक ले आओ। ही सीई, बड़ा ही मस्त मुन्ना है। इसने कई चूतों का खून पिया है। हीईई…… ज्योति तू न चुदवाना इस लौड़े से। ही सीई, बड़ा जालिम हाल्लाबी लौड़ा है और इसका नाम ये मुन्ना रखे हैं। हीई और चोदो प्लीज और फाड़ो।”
मैंने उसे जमीन पर लिटाया और उसकी टाँगों को उसके मम्मों से चिपका दिया और पूरा लंड पेल दिया। “हीई जालिम फाड़ दी…… अरे ज्योति कोई तो आओ बचाओ…….” ऐसे चिल्ला-चिल्ला के चुदवा रही थी। और मेरा लंड तो आज दुगना मोटा और लंबा हो गया था, यह सोचकर कि मेरे ख्वाबों की मालिका, मेरी इकलौती प्यारी साली ज्योति मेरे से चुदवाने को तैयार हो गई है।
इसी जोश में और जोर से उसकी चूत में अपना लंड पेल रहा था, जो कि उसकी चूत की आखिरी गहराई तक जाकर उसकी बच्चेदानी को धकेल रहा था। “ही मेरे राजा, ऐसा कब तक चोदोगे, तुम तो अपने मुन्ना को मेरी मुनिया के मुँह में घुसाए रहो ही, ऐसे पेलते फाड़ते रहो।”
मैंने थोड़ी स्पीड बढ़ा दी थी, जिससे उसकी नंगी पीठ मार्बल के फर्श पर चिपक कर और उसकी चूत से बहते हुए पानी के कारण ‘पिचर पिचर’ की आवाजें कर रही थी। ऐसी ही आवाज उसकी चूत से ‘पुच फुक फचा फुच’ की आ रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
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मेरी वाइफ की चूत में न जाने क्या जादू है कि वह बच्चियाँ जनम देने के बाद और मेरे से ९ सालों से रोज चुदवाने के बाद भी ढीली नहीं हुई थी। वह मेंटेन किए हुए थी। मैं इसका राज उससे कई बार पूछ चुका था। वह हर बार यही कहकर टाल देती, “मेरी चूत जब तक टाइट रहेगी, तुम मेरे कब्जे में रहोगे जानू। मैं तुमको रोज रात को किसी कुँवारी चूत जैसा ही मजा दूँगी।”
और वह अपनी बात पर कायम थी। उसकी चूत पर मैंटेन्ड झांटें रहती थीं, जैसी मुझे पसंद होती थीं, बिल्कुल वैसी ही मेंटेन करके रखती थी और चूत को रोज “गुलाब जल” से जरूर धोती थी, जिससे उसकी खूबसूरती बनी रहे और उसमें से प्यार की खुशबू आती रहे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने अब अपनी स्पीड बढ़ा दी थी और वह भी नीचे से अपनी गांड उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी। “हाँ राजा और जोर से…… थोड़ी और ताकत लगाओ, शाबाश, ऐसे ही और जोर से…… बहुत मजा आ रहा है…… अरे इस लंड को पर्दे में रखना, यदि किसी को पता लग गया तो वह तुमसे चुदवाए बिना नहीं रह सकेगी…… अरे राजा, इसके बारे में तो ज्योति को बिल्कुल मत बताना……
हाँ आजकल तुम दोनों का बहुत नैन-मत्क्का चल रहा है…… और तो और, उसको फोन पर मेरी चुदाई की बातें-आवाजें भी सुनाई दी जा रही हैं। ले…… ले और ले…… मेरी चूत से तो फ्री हो ले, फिर किसी और की चूत देखना। अब चोद जोर से, फाड़ो मेरी चूत…… बहुत बात करता है, चुदाई कम करता है, साले लंड में दम नहीं बची क्या…… मेरी चूत तो चोद नहीं पाया तरीके से, ज्योति की चूत चोदने की इच्छा रखता है। चोद…… इसे ये मुनिया काली कलूटी कुलबुला रही है और चोद।”
मैंने उससे बोला, “मुझे ज्योति की चूत दिलाओगी तो चोदूँगा, नहीं तो मैं निकल रहा हूँ।”
“अरे ही जालिम सीई, ऐसा न करो, चोदो मुझे। मैं तुमको उस कलूटी की चूत के साथ एक चूत गिफ्ट में दूँगी।” चोदते रहो, आज तो रात भर……
उसके इतना कहते ही मैंने अपनी स्पीड तूफानी कर दी। मैं अपना पूरा लंड बाहर खींचकर पूरा का पूरा एक बार में पेल रहा था। जैसे ही मेरा मुन्ना अपनी प्यारी काली कलूटी मुनिया के अंदर जड़ तक पहुँचता, तो मेरी बीबी जोर से चिल्लाती — “ही सीई मर गई जालिम……”
वह फिर से आई-साई बकने लगी थी और झड़ने के करीब थी। यहाँ मेरी भी इच्छा झड़ने की हो रही थी। सो मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी। इस पर वह बहुत जोर से झड़ गई और मेरे नीचे शिथिल पड़ गई। इधर मैं भी झड़ना चाहता था और हम दोनों के बदन पसीने में भीगे हुए थे।
मैंने अपनी स्पीड कम नहीं की, उसकी कमर थामी और भक-भक धक्के मारता रहा। उसकी चूत में जड़ तक लौड़ा घुसाकर झड़ गया। मेरे फव्वारे से वह “ही हूच हूच” कर रही थी…… मैं थक कर निढाल होकर अपने मुन्ना को उसकी काली कलूटी मुनिया के मुँह में घुसाए हुए उसके ऊपर पड़ा रहा। वह मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फिरा रही थी।
मैं उसकी गर्दन में चुम्मी ले रहा था और दोनों अपनी साँसें संभालने में लगे हुए थे। साँस थमी तो मैंने दीवार घड़ी पर नजर डाली — सुबह के ३ बज रहे थे। साँस तो नॉर्मल हो गई थी पर मेरा लंड अभी भी कुछ कड़ापन लिए उसकी चूत में आराम कर रहा था। मैं अपने लंड को उसकी चूत में चला रहा था।
वह बोली, “अब क्या इरादा है? अब नहीं, मैं बहुत थक चुकी हूँ। तुम्हारा लंड तो ठंडा होने के बाद भी मेरी चूत भरे हुए है……”
मैंने उसको गाल पर किस किया और कहा, “मेरी स्वीट स्वीट डार्लिंग, अभी तुम्हारी चूत का अभिषेक बाकी है।”
मुझे चुदाई के बाद पेशाब लगती है और मुझे चूत के अंदर पेशाब करने में मजा भी बहुत आता है। तो मैंने थोड़ा सा लंड बाहर खींचा और पेशाब करने लगा। मेरी पेशाब की धार बहुत गर्म लगती है उसको। इससे वह “आह यह क्या कर दिया…… मेरी मुनिया तुम्हारे पानी से भरी हुई थी और तुमने अब मुझे पेट तक भर दिया…… ही बहुत गुदगुदी होती है इसमें……”
उसकी चूत से मेरी पेशाब और मेरा लावा बाहर निकलकर बहने लगा। मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर खींचा तो उसकी चूत से फव्वारा निकल पड़ा। उसने बड़ी राहत महसूस की। मेरे से चुदाने के बाद उसकी हालत बहुत खराब हो जाती है और उसमें उठने की हिम्मत नहीं होती, सो मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और बाथरूम ले गया। उसको फर्श पर लिटा दिया और बाथटब को गर्म पानी से भरने लगा।
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मैंने कहा, “अभी तुम पेशाब मत करना।”
वाइफ बोली, “आ मेरे राजा, मुझे पता है तुमको पेशाब करती हुई चूत में नहाना और देखना अच्छा लगता है।”
“पर तुम जल्दी आओ, मुझे जोर से पेशाब आ रही है। मेरी थैली भरी हुई है।” मैंने कहा, “दो मिनट में फर्श साफ करके आता हूँ।”
मैंने फटाफट फर्श साफ किया और बाथरूम में स्टूल लेकर पहुँचा। उसको स्टूल पर बैठा दिया और खुद उसकी चूत के ठीक सामने बैठ गया। जैसे ही मैंने उसकी टाँगें फैलाकर उससे कहा “शूट”। उसकी काली कलूटी चूत से बहुत तेज और गरमा-गरम धार निकलकर मेरी छाती से टकराने लगी। मैं उसकी पेशाब की खुशबू का दीवाना था।
मेरी वाइफ मेरे से कहने लगी, “जनम, तुमको घिन नहीं लगती? तुम मेरी पेशाब में नहाते हो और मेरी पेशाब करी हुई चूत को चूमते और चाटते हो।”
“यही तो प्रेम रस है जो शादी के ९ साल बाद भी हम दोनों पति-पत्नी की जगह प्रेमी-प्रेमिका बनकर रहते हैं।” मैंने कहा।
मैंने पूछा, “अच्छा तुम बताओ, तुमको क्या मेरी पेशाब पसंद नहीं है?”
“बहुत पसंद है जानू,” वह बोली।
तब भर चुका था। मैंने उसको पानी से भिगोया और उसके शरीर पर साबुन लगाया और उसके शरीर की अच्छी तरह से मालिश की और हम दोनों टब में उतर गए। नहाकर बाहर आए तो वह बहुत फ्रेश दिख रही थी।
मैंने कहा, “कहो जानू, कैसा लग रहा है?”
“४ बजने को हैं सुबह के और तुम पूछ रहे हो कैसा लग रहा है। अरे मैं तो तुमको जिंदगी भर क्या हर जन्म में पाना चाहूँगी।”
फिर हम दोनों ने बादाम, काजू, किशमिश और रबड़ी खाकर सोने बेड पर आ गए। सुबह हम दोनों छुट्टी होने की वजह से ११-१२ बजे उठे थे। मैं फिर से चार्ज हो गया था क्योंकि आज ज्योति से मुलाकात होने वाली थी। सुबह फ्रेश होकर, स्नान करके पूजा-पाठ किया एवं अपनी पेट पूजा का इंतजार करने लगा। हर समय न जाने मुझे किस चीज का इंतजार था, जिसको मेरी वाइफ ने भाँप लिया था।
वह मुझे चिढ़ते हुए बोली, “क्या जानू, बड़े बेचैन दिख रहे हो।”
“नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे ही तुम्हारा इंतजार कर रहा था कब तुम आओ और मेरी पेट पूजा हो।” मैंने हड़बड़ाते हुए कहा।
मैं उससे अपनी नजरें बचाने और अपनी बेचैनी छिपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था। इसको छिपाने के लिए मैंने टीवी ऑन कर लिया। थोड़ी ही देर बाद वह खाना लेकर आ गई। हम दोनों ने खाना खाया और रात को हुई चुदाई के बारे में चर्चा की। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह कह रही थी, “मेरी मुनिया में दर्द हो रहा है और मुझे चलने में तकलीफ हो रही है।”
“जान, थोड़ा आराम कर लो और हो सके तो बर्फ से सिकाई कर लो।” मैंने सजेशन देते हुए कहा।
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मैं अब बाहर निकलने को बेचैन था। फटाफट तैयार हुआ और बाहर निकल गया। मैंने अपनी बाइक निकाली और ज्योति के घर के आस-पास २-३ चक्कर लगा डाले। उसके मोहल्ले में मेरे बहुत सारे जान-पहचान के लोग रहते थे। उसी मोहल्ले में मेरा ससुराल भी है।
इसलिए किसी ने मेरी हरकत को और मेरे यूं चक्कर लगाने को ध्यान से नहीं देखा। मैं ज्योति के दर्शन को तड़प रहा था। मैंने डिसाइड किया कि ज्योति के घर के बगल में मेरे परिचित की दूध की डेयरी है, वहाँ बैठूँगा। वहाँ से ज्योति के घर का बगीचा भी दिखता है।
आज मैं बड़ी बेसब्री से ज्योति के बगीचे की तरफ बार-बार देख रहा था। ज्योति के घर में कबाड़ी का काम होता था, आज कुछ भी हलचल नहीं दिख रही थी। इसी इंतजार में २ घंटे निकल गए। मैंने सोचा चलो ज्योति को फोन किया जाए। मैंने अपना सेल बाहर निकाला ही था कि मेरी मुराद पूरी होने की घंटी बज ही गई और ज्योति का फोन आ गया।
“हेल्लो डार्लिंग जीजू, कैसे हो?” ज्योति ने कहा।
“हाय डियर, ठीक हूँ!! तुम्हारे फोन का सुबह से बेसब्री से इंतजार कर रहा था।” मैंने रिप्लाई किया।
“रात को मजा आया। कितनी बार अपनी चूत को झड़ाया तुमने?” मैंने पूछा।
“ही मेरे चोदू राजा, रात की तो कुछ मत पूछो, अभी सोकर उठी हूँ।” टट्टी जाने की तैयारी कर रही थी, सोचा पहले तुमको फोन कर लूँ।” ज्योति ने कहा।
मैंने पूछा, “आज तुम्हारे घर कोई हलचल नहीं सुनाई पड़ रही।” “कोई नहीं है क्या?”
“नहीं डार्लिंग, कोई नहीं है…… सब बंडाकपुर गए हैं दर्शन करने।” ज्योति बोली।
“तुम क्यों नहीं गई?” मैंने पूछा।
“फिर चुदवाता कौन तुम्हारे इस मदमस्त लंड से?” मैंने बहाना कर दिया कि मेरा पीरियड चालू हो गया है।
“तो फिर दरवाजा भी नहीं खोला है आज तो तुमने। तुम्हारा न्यूजपेपर भी बाहर ही पड़ा हुआ है।”
“लगता है जीजू तुम मेरे दरवाजे खुलने के इंतजार में मेरे घर के सामने ही खड़े हो।”
“हाँ यार, ये तुम अपनी बगल वाली खिड़की खोलोगी तो मैं तुमको देख सकूँगा।” जैसे ही मैंने कहा, वह समझ गई मैं कहाँ हूँ।
बोली, “गाड़ी लिए हो क्या?” मैंने कहा, “हाँ लिया था पर यहाँ डेयरी में अंदर पार्क कर दी है।” अब तुम जल्दी से दरवाजा खोलो।
मैं बात करते-करते उसके दरवाजे के पास चला गया। उसने झट से दरवाजा खोल दिया। मैं झट से अंदर घुसकर दरवाजा बोल्ट कर दिया। फिर अपनी इकलौती साली पर नजर डाली तो मैं बेहोश होते-होते बचा। आज तो वह पूरी “रति” लग रही थी। पिंक ट्रांसपेरेंट गाउन के अंदर बिल्कुल नंगी। उसकी चूत पर हल्की सी झांटें साफ दिख रही थीं और उसके ३६ डी साइज के बिल्कुल गोल मम्मे तने हुए।
मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं झट से उसकी ओर लपक पड़ा और उसको अपने सीने में भींच लिया। उसके गाउन में मम्मे मेरी छाती में दबकर रह गए। मैं उसको यूं ही चिपकाए हुए उसकी गर्दन को और कान के पीछे लिक कर रहा था और अपनी टाँग से उसकी चूत रगड़ रहा था। अपने एक हाथ से उसके मम्मे मरोड़ने की कोशिश कर रहा था और दूसरे हाथ से उसकी पीठ से लेकर गांड तक सहला रहा था।
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ज्योति के मुँह से “आह मर डाला…… धीरे दर्द हो रहा है सीई ओम्म जीजू…… मैं दिन भर तुम्हारी हूँ प्लीज अभी रुको…….” ऐसा वह कह रही थी। मैंने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकर एक टक उसकी आँखों में देखने लगा और एकदम उसके मुलायम गुलाबी ओंठों को अपने ओंठों में कसकर चूसने लगा। डीप किस में वह भी मेरा साथ देने लगी थी।
“ज्योति आई लव यू…… लव यू वेरी मच डियर डार्लिंग। मैं तुमको उस दिन जब पहली बार देखा था तब ही से चोदना चाहता था।” हीई आज मुझे अपने आप पर यकीन नहीं हो रहा है।
ज्योति बोली, “राजा तुम ही नहीं, मैं भी तुमसे चुदवाना चाहती थी। मेरी चूत की आग तो तुम्हारी बीबी यानी मेरी सखी ने और भड़का दी जब उसने अपनी चुदाई की सारी कहानी बयान की।” जिस दिन वह मुझे अपनी चुदाई की बातें बताती, मेरी चूत न जाने कितनी बार तुम्हारे लंड की फोटो इमेजिन करके ही झड़ जाती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“अब चिंता न करो डार्लिंग, तुमको मेरा लंड साक्षात चोदेगा। इसे तुम अपनी चूत में अपने शरीर के अंदर महसूस कर सकोगी।” मैंने उसका हाथ अपने लंड पर जमाते हुए कहा।
“ही राजा कितना मोटा और सख्त गरम है।” इससे तो चुदाने में बहुत मजा आएगा। ही ओम्म मेरी तो चूत झड़ने लगी……
मैं उसकी चूत को उसके गाउन के ऊपर से मसलने लगा, जिससे वह बुरी तरह से गीली हो गई थी।
“राजा तुम टीवी देखो, तब तक मैं फ्रेश होकर आती हूँ।” ऐसा कहते हुए उसने टीवी ऑन कर दिया।
मैंने उसको अपने हाथों में लेकर गोदी में उठा लिया और उसके एक मम्मे को मुँह में भर लिया और जोर से चूसने लगा, गाउन के ऊपर से ही……
“अरे रुको ना जानू, मुझे टट्टी लग रही है जोर की। फिर आती हूँ न तुम्हारे पास।” कहने लगी।
मैंने कहा, “एक शर्त है तुमको टट्टी कराने की।”
“कौन सी शर्त, कैसी शर्त?” ज्योति बोली।
“तुमको मेरे सामने ही टट्टी करनी होगी, नहीं तो मैं तुमको नहीं छोड़ने वाला।” मैंने कहा। और उसके मम्मे को और निप्पल को जोर से चूसने बल्कि काटने सा लगा।
“ही आइ मम्मी मर गई, छोड़ो मुझे…… बहुत जोर से आ रही है ही सीई अच्छा बाबा मैं तैयार हूँ।” कहने लगी।
मैंने उसको नीचे उतारा और फटाफट अपने कपड़े उतारकर नंगा हो गया। इधर ज्योति को टट्टी तो बहुत जोर की लगी थी पर मेरे लंड देखकर वह अपने को रोक नहीं पाई और एक बार तो उसने मेरे सुपाड़े को चूस और चूम ही लिया। ज्योति भी नंगी हो गई थी। उसने भी अपना गाउन उतार दिया था।
ज्योति का रंग थोड़ा साँवला था पर उसका फेस कट बहुत ही सुंदर और सेक्सी था। उसकी गर्दन बहुत अच्छी सुराहीदार थी। उसकी नाक भी एकदम सीधी नुकीली थी। बहुत मोटे फूले हुए ओंठ थे और मम्मों के बारे में तो कहना ही क्या। मस्त तने हुए गुलाबी गोल-गोल मम्मे और उन पर काला-गुलाबी रंग का एरोला और अंगूर जैसा तना हुआ निप्पल। पतली कमर और अच्छी गहरी नाभि।
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ज्योति के खजाने की यानी मुनिया की तो कुछ मत पूछो। मेरी रगड़ाई से और मम्मे चूसने से उसकी चूत झड़ गई थी और वह जूस के कारण चमक रही थी। बहुत लंबी और बिल्कुल काली चूत थी। चूत के ऊपर बहुत अच्छी तरीके से सँवारी हुई झांटें थीं।
मैं तुरंत घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत के आस-पास जीभ फिराकर ज्योति की चूत के लिए सलामी पेश की और उसकी चूत के ओंठ खोलकर चूत में चुम्मा लिया और उसका क्लिट, जो कि कड़ा होने लगा था, अपने ओंठों में भरकर चूस लिया। उसकी चूत से उसकी पेशाब और उसकी जूस की मिलीजुली टेस्ट मिल रही थी।
“ही राजा मत तरपाओ सीई उई उम्म आआह अभी तो पूरा दिन पड़ा है…… ही जल्दी करो ना प्लीज, मुझे बहुत जोर की आ रही है, निकलने वाली है……”
मैंने उसको गोदी में उठाया और उसके बाथरूम में घुस गया। वहाँ उसको कमोड सीट पर बैठा दिया। वह जैसे ही बैठी तो उसकी चूत की फाँकें खुल गईं और उसमें से अविरल निश्चल मूत की धारा बह निकली। ठीक उसी समय मैंने अपनी बीच वाली उँगली उसकी योनि में घुसा दी तो वह चिहुँक पड़ी — “ही सीई चूत बहुत गरम थी और लिसलिसी।”
साथ ही उसकी चूत से मूत का फव्वारा निकल रहा था। उँगली घुसते ही फव्वारा रुक गया, फिर कुछ सेकंड बाद फिर से चालू हो गया। इसके बाद असली नजारा हुआ कि उसकी गांड का छेद खुला और मेरी कलाई जैसा मोटा फार्ट उसकी गांड में निकलकर ‘फड़ फाड़’ की आवाज के साथ गिरने लगे।
मैं बीच वाली उँगली उसकी चूत के छेद में घुसाए हुए था। बड़ी टाइट थी वह और थंब से उसके क्लिटोरिस को मसाज करने लगा था। जब कुछ फार्ट्स निकल लिए ज्योति ने तो वह कुछ रिलैक्स हो गई थी। उसकी चूत बहुत ही खूबसूरत दिख रही थी।
मैं उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था। ज्योति कुछ गरमाने लगी थी। इसका अंदाजा इससे हो रहा था कि वह मेरा सिर अपने बूब्स पर दबाना शुरू कर दिया था और मेरा हाथ तो उसकी चूत को सहला रहा था, उस पर भी हाथ दबाने लगी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“देव मेरे राजा, अपनी बीबी के साथ भी बाथरूम में घुसते हो क्या??” तुम तो बहुत उस्ताद हो, औरत को बिल्कुल चुदासी रंडी की तरह बना देते हो???”
मुझे इतने सालों तक क्यों तड़पाया? मेरी चूत न जाने कितने लंड का स्वाद ले चुकी है लेकिन मेरी चूत की प्यास नहीं बुझी अभी तक। मैंने उसकी चूत से हाथ हटाकर उसके दूसरे निप्पल और स्तन को सहलाने लगा और उसकी गर्दन में लिक करने लगा। अब मैं उसके दोनों मम्मों को बहुत तवज्जो दे रहा था और उनको सर्कुलर मोशन में कभी हल्का कभी बिल्कुल वैसे जैसे नींबू निचोड़ते हैं, वैसा निचोड़ रहा था।
साथ में गर्दन से उसके कान तक और गर्दन से उसके बूब्स तक लिक भी कर रहा था। वह कमोड पर बैठी अपनी साँसें भारी करती हुई मोआन कर रही थी — “ही सीई ओम्म बह बहुत अच्छा लग रहा है देव मेरे डार्लिंग जीजू…… प्लीज आज मुझे जी भरकर चोदना…… मेरी चूत की आग ठंडी कर देना…… जीजू तुम्हारा लंड कहाँ है, मुझे उसके सहलाने दो……”
ऐसा बक रही थी ज्योति।
मैंने ज्योति से पूछा, “तुमने कर ली हो तो उठो…… और चलो बाथटब में……”
वह लड़खड़ाती सी खड़ी हुई और अपनी गांड धोई — पहले पानी से फिर लिक्विड साबुन से……
मैंने बाथटब का हॉट वॉटर टैप ऑन कर दिया था। ज्योति बोली, “यहाँ नहीं, चलो पूल में।” उसने घर में छोटा सा अंडर रूफ पूल बनवा रखा था। पूल में ले गया उसको और पहले पूल के बाहर शावर से उसको नहलाया और मैंने नहाया। मेरा लंड फनफना रहा था और अपनी पूरी जवानी के जोश से आज तो मुझे नॉर्मल साइज से कुछ इंच ज्यादा ही लंबा दिख रहा था।
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मैंने पूल में घुस गया और उसको पूल के किनारे बनी टॉप पट्टी पर बैठा दिया। इससे मैं ऐसी पोजीशन में आ गया जहाँ से मैं उसकी पूरी बूदी एक्सप्लोर कर सकता था। मैंने उसकी दोनों टाँगें फैला दीं और बोला, “मेरी कबाड़न चुदो ज्योति रानी। तुम साँवली जरूर हो पर बहुत सुंदर और चुदासी हो। तुम्हारी चूत से तो किसी भट्टी की चिमनी की तरह से गर्म भाप निकल रही है।”
उसके मम्मे मसल रहा था और चूत और गांड के छेद के बीच में दो उँगलियों से मसाज भी कर रहा था। ज्योति मोन करते हुए कहने लगी, “हाय मेरे जानम, बहुत मजा आ रहा है। इस तरीके से तो किसी ने भी मुझे प्यार नहीं किया…… तुम्हारी बीबी इसलिए तुम्हारी दीवानी है और वह तुमको एक पल के लिए भी दूर नहीं करना पसंद करती है।
साली बहुत स्वार्थी है। शादी के पहले मेरे से अपनी चूत चटवाती थी और मजा लेती थी। उसने मेरे से प्रॉमिस किया था कि वह अपनी शादी के बाद अपने पति यानी तुमसे मुझे भी चुदवाएगी। ही राजा बहुत और करो, बहुत मजा आ रहा है।” मैं (ज्योति) बकती जा रही थी।
मेरे तन-बदन में आग सुलगने लगी थी। मैं देव के मस्त लंड को पूरा का पूरा अपनी चूत में महसूस करना चाहती थी। इसके लिए मैं बरसों तड़पी थी। मेरी सुहागरात भी बिल्कुल ठंडी ही रही थी क्योंकि मेरे पति दीपक मेरी चूत की गर्मी सहन नहीं कर पाए थे और मेरी चूत में घुसते ही झड़ गए थे। उनका यह हाल हर रात को होता था। मैं चुदाई की आग में तरस रही थी। यह तो अच्छा हुआ कि मेरी भी शादी हुए अभी २ महीने ही निकले थे।
“देव मेरी डार्लिंग, मुझे जल्दी से अपने प्यारे लंड से चोदो और मुझ पर किसी प्रकार का रहम मत करना।” प्लीज मेरी प्यास बुझा दो।
“आओ देव मेरे पास आओ।” देव मेरे को पूरी ताकत से थामे हुए था। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। देव पूल में था और मैं पूल की ऊपरी वॉल पर टिकी थी। इसी बीच देव ने मेरी दोनों टाँगें फैला दीं और अपनी जीभ का कमाल दिखाना शुरू कर दिया। देव मेरी इनर थाइज से चूत के बगल तक और गांड के छेद और चूत के छेद के बीच में अपनी जीभ घुमा रहा था।
देव की जीभ का हर एक स्पर्श, उसकी जीभ की गर्मी मेरी चूत में समाती जा रही थी। मैं जल रही थी। मैंने अपने हाथ से ही अपनी चूत मरोड़ना शुरू कर दिया और देव से कहा, “ही मेरे राजा मत तड़पाओ, मेरी चूत पर तरस खाओ। उम्म ही सीई मैं बहुत तरपी हूँ प्लीज देव…… बाद में चाट लेना, पहले मुझे अपने लंड से चोद दो।”
देव ने मेरी चूत की फाँक खोलकर मेरी चूत में जीभ से चोदना शुरू कर दिया था। “हाँ देव और अंदर तक और तेजी से चोदो। मेरी सखी तो खूब गांड उठा-उठा कर तुमसे अपनी चूत और गांड चटवाती और चुदवाती है।” बहुत किस्मत वाली है वह जिसको तुम्हारे जैसा प्यार करने वाला और चोदने वाला चोदू पति मिला। प्लीज अपनी साली को प्यासा मत छोड़ना। ही देव जल्दी करो।
और मैंने देव के बाल जोर से पकड़कर न जाने कहाँ से मुझे इतनी शक्ति और ताकत आ गई कि मैंने देव का मुँह अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। इधर मैं अपनी चूत भी उसके मुँह पर दबा रही थी। देव का मुँह मेरी चूत और जाँघों के बीच दब गया था, जिससे उसकी साँस रुंध रही थी। उसने मेरी दोनों टाँगें हटाकर अपना मुँह हटाया और मुझे पूल में खींच लिया।
पूल में घुटने तक पानी था। देव ने मुझे कुतिया बना दिया और पहली ही बार में वह मुझे डॉगी स्टाइल से चोदने वाला था। मैं तो खुश हो गई क्योंकि किसी का लंड मुझे मिशनरी पोजीशन में मेरी चूत की गहराई तक नहीं पहुँचा था। मेरे हसबैंड का लंड तो देव के लंड का आधा लंबा और पेंसिल की तरह पतला था और मुलायम भी था। इधर देव का लंड बिल्कुल देव जैसा लंबा-चौड़ा और नसों से भरा हुआ।
देव ने मेरी गर्दन पूल की नीचे वाली सीढ़ी पर टिका दी और मेरी एक टाँग को शावर के टैप पर टिका कर बाँध दी। मैंने पूछा, “ऐसा क्यों किया जानू?” देव बोला, “अरी चुद्दो, देख अभी तेरी चूत तो क्या तेरी गर्दन तक मेरा लंड महसूस होगा तुमको।”
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इस पोजीशन में मेरी चूत बिल्कुल खुल गई थी और देव की लंबाई ज्यादा होने के कारण एंगल उसके लंड घुसने के लिए पर्याप्त हो गया था। ऐसे में गहरा पेनिट्रेशन होना था। देव ने मेरी इनर थाइज पर फिर से लिक किया और आते हुए मेरी चूत के किनारे आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
देव मेरी लेबिया और क्लिटोरिस से नीचे पेरिनियम तक जीभ से चूत में इंग्लिश के लेटर बनाते हुए लिक कर रहा था। मैं तो न जाने कितने गहरे आनंद के समंदर में डूब उतर रही थी। मेरी चूत जोर से जूस का दरिया बहा रही थी। मेरे मुँह से “आह और सीई उम्म जल्दी चोदो मत तड़पाओ” की आवाजें लगातार निकल रही थीं।
मेरी कराहटों और मोआनिंग से देव को और आनंद आ रहा था। अभी मैं इसका मजा ले ही रही थी कि मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने बिल्कुल जलता हुआ अंगारा मेरी चूत के मुहाने पर रख दिया हो। यह देव का फनफनाता हुआ सुपाड़ा था, जिसको मैं अपनी चूत पर महसूस कर रही थी।
“देव मेरे खसम, मेरे चोदू जीजू प्लीज मैं जलकर भस्म हो जाऊँगी इस चूत की आग में। मैं तुम्हारे पाँव पड़ती हूँ, मेरी चूत फाड़ दो, चोदो प्लीज……”
देव मुस्कुराता हुआ मेरे दोनों पंडों (गांड) को सहला रहा था और मेरी गांड के छेद से लेकर चूत की ऊपरी हिस्से यानी क्लिटोरिस तक लंड रगड़ रहा था। तभी देव मेरे सामने आए और उसने मेरे बाल पकड़कर मेरा चेहरा ऊपर उठाया। देव ने बड़ी ही बेरहमी से मेरे बाल खींचे हुए थे, जिससे मेरा मुँह दर्द के मारे खुल गया था।
देव ने एक झटके में अपना हाल्लाबी लौड़ा मेरे मुँह में घुसेड़ दिया। मुझे लगा कि मेरे ओंठ साइड से फट जाएँगे और वह जोर से लंड पेलता हुआ मेरे गले तक जा पहुँचा। मेरी साँस रुकती हुई सी लगी तो एक झटके ही में निकाल लिया। मैं हड़बड़ा गई थी। देव मेरी इस हालत पर मुस्कुरा रहा था।
उसने बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमा और फिर होंठ को चूमा और बोला, “मेरी चुद्दो रानी चिनाल, कैसा लगा स्वाद? मजा आया कि नहीं? वो क्या है कि जब तक औरत तड़पे नहीं, मुझे मजा नहीं आता। इसके बाद मैं बहुत प्यार से तुमको चोदूँगा। चाटोगी मेरा लंड एक बार?”
“ही राजा, मुझे मालूम था तुम ऐसा जरूर करोगे। मैं इंतजार कर रही थी इस वक्त का। मेरे चोदू खसम आओ, मैं एक बार तो क्या जिंदगी भर तुम्हारा लौड़ा चूसना चाहूँगी।” और मैं आइसक्रीम की तरह देव का लंड चुक-चुक करके चूसने लगी, जिससे वह और कड़ा हो गया।
देव ने शेल्फ पर रखी क्रीम की डिब्बी उठाई और मेरे पीछे पहुँचकर फिर से मुझे उसी पोजीशन में कर दिया और बहुत सारी क्रीम मेरी चूत के छेद में भर दी और अपने लंड पर लगा ली। “ये क्या देव, प्लीज ये नहीं, मैं मर जाऊँगी। तुम्हारा लंड घोड़े जैसा मोटा और लंबा है।” प्लीज ये नहीं……
देव ने मेरी गांड के छेद में अपनी दो उँगलियों से बहुत सारी क्रीम घुसेड़ दी थी और वह उसे छेद के अंदर ऐसे फैला रहा था (चिकना कर रहा था) जैसे किसी चीज पर मक्खन या लोहे पर ग्रीस लगा रहा हो। देव ने फिर से अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे मेरी चूत की लंबाई की डायरेक्शन में लंड घिसने लगा।
उसका लंड बहुत कड़क और फूला हुआ था। साथ ही गरम भी बहुत था, इसलिए चूत में लगी क्रीम के साथ बहुत अच्छा लग रहा था। मैं चुदाई की चाहत में आई-बाई बकने लगी थी…… तभी अचानक मेरी आँखों में अंधेरा छा गया और मुझे मेरी चूत में ऐसा लगा जैसे किसी ने उबलता हुआ लावा और कोई बहुत मोटा डंडा घुसेड़ दिया हो……
“आई मर गई, रुक जा साले हरामी चोदू, फट गई। थोड़ा तो रहम कर देता मेरे ऊपर। रा है भगवान, मेरी चूत फट गई। रुक जाओ प्लीज, अब नहीं, निकाल लो।”
देव रुका हुआ था और मेरे दोनों मम्मों को मसल रहा था। मेरी पीठ पर और गर्दन पर वेट किसेज दे रहा था। मुझे इसमें बहुत आराम मिल रहा था। जब कुछ साँस थमी तो मैंने नीचे नजर दौड़ाई तो मेरे मुँह से “ही भगवान…… ये इतना खून कहाँ से टपक रहा है?” मेरी कई बार चुदाई हो चुकी थी पर इस दर्द के लिए मैं हमेशा ही तड़प रही थी।
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“रानी चिंता मत करो, अपनी। तुमको ये लंड भी छोटा महसूस होगा और मजा भी बहुत आएगा।” ये तुम्हारी चूत में जाम लगा हुआ था बहुत सालों से जो मेरे लंड ने खोल दिया आज।” और वह मेरे निप्पल्स मरोड़ने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और बहुत धीरे-धीरे अपना लंड बाहर खींच रहा था।
देव ने सिर्फ सुपाड़ा ही मेरी चूत में रख छोड़ा था और बाकी पूरा लंड बाहर निकाल लिया था। देव पक्का चुदक्कड़ था। उसने लंड को वहीं रोककर मेरी गांड के और चूत के दोनों तरफ दो उँगलियों से मालिश कर रहा था, जिससे मुझे बहुत आराम मिल रहा था। अब मैं भी मस्ती में आने लगी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“अरे चोदो मेरे राजा, इस दर्द के लिए बहुत तड़पी हूँ, कई रातें जागी हूँ…… मेरी चूत को इस तरीके से चोदो कि इस चुदाई का एहसास जिंदगी भर रहे।” देव के हाथ का मेरे शरीर पर फिसलना बहुत अच्छा लग रहा था। मेरे शरीर में बहुत आग लगा रहा था……
देव ने मेरे से कहा, “अरी मेरी कबाड़न काली रानी…… मैं भी तेरी इस काली कलूटी चूत का दीवाना हुआ करता था…… मैंने भी कई बार तुम्हारी चूत के नाम पर मुठ मार चुका हूँ।”
अब देव धीरे-धीरे लंड आगे-पीछे करते हुए पेलने लगा था। वह पूरा लंड सीधा खींचता और जैसे स्क्रू कस रहा हो, ऐसे लंड घुमा-घुमाकर अंदर पेलता। मेरी चूत की दीवारें देव के लंड को कसे हुए थीं। अब मुझे मजा आने लगा था।
मैंने देव को चिढ़ाने के लिए बोला, “देव मेरे जानू, तुम्हारा लंड भी कोई खास नहीं लगा मुझे। अब तो आसानी से जा रहा है लेकिन मुझे मजा बहुत आ रहा है…… देखो अब जल्दी अपना लंड खाली मत कर देना…….” नहीं तो मैं तुमको गांडू जीजू बुलाऊँगी।
मैंने देव की मर्दानगी को तगड़ी ललकार लगा दी थी लेकिन देव हल्का-हल्का मुस्कुरा रहा था। उसने अपनी स्पीड ज्यों की त्यों रखी और धीरे से मेरे से बोला, “मेरी रानी, मुझे प्यार से चोदना पसंद है। तुमको तबड़तोड़ चुदाई चाहिए क्या…… अभी मैंने सिर्फ अपना आधा ही लंड पेला है, पूरा अभी तुम्हारी चूत में नहीं घुसा है तो तुम्हारी ये हालत है।”
मैं सोच में पड़ गई और मैंने तुरंत कहा, “देव मेरे प्यारे चोदू खसम, तुम मुझे प्यार से ही चोदो…… मैं तो यूं ही तुमको चिढ़ाने के लिए कह रही थी।”
तभी देव ने अपनी दो उँगलियाँ मेरी गांड के छेद में डाल दीं और गांड और चूत को एक साथ चोदने लगा। मैं दोहरे मजे में नशे में आ गई। साथ ही मुझे जोश भी बढ़ता जा रहा था क्योंकि देव भी धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाने लगा था और मुझे दर्द भी हो रहा था चूत में क्योंकि देव हर धक्के के साथ कुछ इंच और अंदर खिसक रहा था।
मैं मस्ती में आकर अपने हाथ से अपनी गांड को फैलाया और देव को बोली, “देव आज तुम मेरी गांड भी मारना लेकिन प्यार से।”
“हाँ मेरी रानी, मैं उसी की तैयारी कर रहा हूँ।” देव बोला और तभी देव ने कहा, “ज्योति हाथ सामने टेके।” एक फाइनल धक्का और जब तक मैं हाथ टेक कर तैयार हो पाती, तभी मेरे मुँह से बहुत जोर से चीख निकल गई। वो तो मेरा घर साउंडप्रूफ है, नहीं तो मोहल्ले वाले इकट्ठे हो जाते और सारा का सारा गुरु गोबिंद सिंह वार्ड मेरे दरवाजे पर होता।
मेरी चूत में जलन हो रही थी। इधर देव का लौड़ा मेरी बच्चेदानी को ठेले हुए था। मुझे देव का लंड अपने पेट तक महसूस हो रहा था। इधर मेरी चूत से फिर से खून की धार टपकने लगी थी, जिससे पूल का पानी लाल होना शुरू हो गया था। मेरे पैर काँप रहे थे।
मैं चाहकर भी अपने पैर नहीं हिला सकती थी क्योंकि देव ने मेरे पैर बाँध दिए थे। मैं कुछ देर आँख बंद किए रही। देव अपने लौड़े मेरी चूत की जड़ तक घुसाए हुए था और वहीं गोल-गोल घुमा रहा था और मेरे स्तन मरोड़ रहा था। मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था कि मैं किस दर्द पर कराहूँ — स्तन के या चूत के।
मैंने रोते हुए देव से कहा, “जानू पेलो, चोदो मेरे को। मेरी तुमने मुराद पूरी कर दी…… आज तुमने मुझे औरत बना दिया…… आज के बाद मैं रोज साड़ी ही पहनूँगी…… आज मेरी चूत को सही मर्द मिला है।” और देव ने पूरा लंड बाहर खींचा और एक बार में ही पूरा का पूरा फिर पेल दिया।
देव ऐसे ही गहरे धक्के मार रहा था। देव ने अपनी तूफानी स्पीड पकड़ ली थी। देव अपने दोनों हाथों से मेरी गांड और चूत को फैलाए हुए था। वो पोजीशन ही ऐसी ली थी उसने कि उसका ज्यादा से ज्यादा लंड अंदर घुसेगा और डीप पेनिट्रेशन होगा। साथ ही वह मेरी चूत हाथों से फैलाकर चोदे जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मैं भी देव का साथ देने लगी थी — “हाँ देव चोदो शाबाश। मुझे भी अब मजा आ रहा है। ये बहुत अच्छा दर्द है। हाँ और जोर से और जोर से।” मैं देव के हर धक्के का जवाब अपनी गांड पीछे धकेलकर दे रही थी। मैं २-३ बार पानी छोड़ चुकी थी लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था।
देव ने मेरे पैर खोल दिए और मुझे पूल की पट्टी पर चित लिटा दिया। उसने मेरी दोनों टाँगों को कुछ देर मसाज दी, जिससे मैं फिर से चार्ज महसूस करने लगी। और देव ने मेरी दोनों टाँगें मेरे स्तनों तक मोड़ दीं, जिससे मेरी चूत बिल्कुल खुल गई। इधर देव भी ताव में था। देव पूल में ही रहा।
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उसने उसी पोजीशन में एक सिंगल स्ट्रोक में ही पूरा का पूरा लंड पेल दिया था और अब तो मुझे बहुत तूफानी रफ्तार से चोद रहा था। “हाई हुम हुम्म हूच फुक फच फक्का पुक” की आवाजें हो रही थीं और मेरे मुँह से भी “आआ हाँ और जोर से” ऐसे ही चोदते रहो। “देव तुमसे तो जो एक बार चुदवा ले, फिर किसी दूसरे के पास वह नहीं जा सकती।” हाँ मेरे राजा और जोर से, आज साली फाड़ दो इसको……
हाँ राजा बहुत खुजलाती है, बहुत परेशान करती है। चोदो मेरे राजा और जोर से। मैं आ रही हूँ हाईओ और जो और अंदर डालो शाबाश हाँ…… अरे और हिम्मत लगा। और मैंने पहली बार बहुत सारा पानी छोड़ा, जो कि देव ने मेरी गर्दन उठाकर मेरे को निकलता हुआ दिखाया और देव फिर से अपनी स्पीड जारी रखे थे। देव मेरे मम्मे मरोड़-मरोड़कर लाल-नीले कर दिए थे। देव इस समय मेरे दोनों निप्पल्स को बीच चोद रहा था।
मैं झड़ने के बाद निढाल सी होने लगी थी। तभी देव ने मुझे करवट दिला दी और फिर तिरछे में लंड पेलने लगा। मैं फिर से मस्ती में आ गई। अब तक मेरे को चुदवाते हुए लगभग ३० मिनट हो चुके थे लेकिन देव झड़ने का नाम ही ले रहा था। मैं अनगिनत बार झड़ चुकी थी। मेरे शरीर का एक-एक अंग ऐसे दुख रहा था जैसे उनमें हजारों सूइयाँ चुभो दी गई हों। मैंने देव से कहा, “राजा प्लीज अब तुम झड़ जाओ।”
“मैं तुम्हारी धार को अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूँ।”
देव ने कहा, “अभी तो मैंने चोदना शुरू किया है। अभी से बोली।”
प्लीज मुझे मेरी प्यास बुझाने दो ना…… मत तड़पाओ……
देव ने कहा तो ठीक है और तभी मेरी आँखों में फिर से अंधेरा सा छाता हुआ दिखाई दिया और दिमाग जैसे सुन्न हो गया हो। इस बार देव ने मुझे बिना तैयार किए हुए अपना सुपाड़ा मेरी गांड के छेद पर रखकर थोड़ा अंदर सरका दिया था। मैं चिल्ला पड़ी और देव से गिड़गिड़ाने लगी — “प्लीज वहाँ अभी नहीं, वो भी आज ही दूँगी पर अभी नहीं। अपनी तो मेरी चूत ही मारो।”
देव बहुत ही अच्छा आदमी है। वह जानता है औरत को कैसे खुश रखे। उसने मेरी बात मान ली और मुझे चूमते हुए मुझे चित लिटाकर मिशनरी पोजीशन में मेरे ऊपर चढ़ गया। मेरे मम्मे उसकी मर्दानी छाती से रगड़ खा रही थीं और देव मेरे ओंठों को चूसते हुए तबड़तोड़ धक्के मारे जा रहा था। इस पोजीशन में देव का लंड मेरे क्लिटोरिस को भी रगड़ रहा था, जिससे मेरी चूत फिर से झड़ने को तैयार हो गई थी।
तभी देव ने कहा, “क्यों चुद्दो रानी, मेरा लावा मुँह में लोगी या अपनी इस काली कलूटी बुर में?”
मैंने झट से कहा, “जनम, मेरी ये कलू बहुत प्यासी है। इस माधरचोद ने न जाने कितने चक्कों को चित किए हुए हैं। आज इसकी जोर से रगड़ाई हो गई है। आज इसी का पेट भर दो।” हाँ राजा, तुम बहुत अच्छे से चोदते हो।
देव मेरे मम्मों को मसल रहा था और एक निप्पल अपने ओंठों में लेकर भी चूस लेता था। साथ ही कह रहा था, “ही रानी, तुम्हारी चूत तो तुम्हारी सखी से भी ज्यादा अच्छी है। मुझे बहुत अच्छी लगी। इसका स्वाद भी अच्छा है…… और मुझे सबसे ज्यादा जो पसंद आया वो ये कि जैसी झांटें मुझे पसंद हैं, बिल्कुल वैसी ही बना रखी थी।”
तभी देव ने अपने लंड को बहुत गहरे-गहरे स्ट्रोक लगाने लगा। मैं भी फिर से झड़ने के करीब थी तो मैं देव को अपनी टाँगों में कसी हुई थी और देव का पूरा साथ दे रही थी।
एकाएक देव मुझे गालियाँ देने लगा। उसको गाली देकर चोदने में बहुत मजा आता है। “री माधरचोद ले और ले…… भोसड़ी वाली, तेरी बुर ने बहुत परेशान किया है। मेरे लंड को ले, अब खा जा माधरचोद चिनाल……”
“हाँ मेरे राजा, मैं चिनाल रंडी मदरचोदी……” मैं जवाब दे रही थी क्योंकि देव झड़ने के बिल्कुल करीब था और वह इस जोश में मेरे शरीर को भी मरोड़ और निचोड़ ले रहा था।
तभी एक और जबरदस्त धक्का लगा और देव ने अपना पूरा लंड मेरी बच्चेदानी की जड़ तक पेलकर वहीं रुककर न जाने कितनी पिचकारियाँ अपने गरम लावे की मारी होगी। उसकी इन पिचकारियों के साथ मैं भी झड़ गई…… “आई देव मेरे राजा, मैं गई उम्म लाऊ……”
देव मेरे ऊपर पड़ा ऐसे हाँफ रहा था जैसे १००-२०० किलोमीटर की दौड़ लगाकर आया हो। हम दोनों पसीने में भीगे हुए थे। उसका लंड झड़ने के बाद भी मुलायम नहीं हुआ था। वह अभी भी मेरी चूत में लंड पेले हुए पड़ा था और मुझे चूम रहा था और उसने करवट बदलकर मुझे अपने ऊपर कर लिया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उठने वाली थी तभी उसने टोक दिया, “जनम, ऐसे गलती मत करो…… प्लीज अभी एक और मजा बाकी है।”
देव के ऐसा कहने से मैं डर गई कि इतनी तबड़तोड़ चुदाई के बाद अब क्या बाकी है।
देव मुझे किस किए जा रहा था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। इससे मेरी चुदाई की थकान दूर होने लगी थी और मैं बहुत हल्का महसूस करने लगी थी।
देव ने कहा, “मेरी जान, मैं अभी तुम्हारी बुर में मूतूँगा।”
मैं चौंक पड़ी, “क्या जीजू? क्या कह रहे हो? सच में!!!! क्या ऐसा हो सकता है!!!!”
देव बोला, “क्या तुमको पसंद नहीं?”
“नहीं, ऐसे बात नहीं…… दरअसल ऐसा है कि आज तक मुझे जितनों ने भी चोदा या जितनों ने भी मुझे बताया, वो तो सब ही कह रहे थे कि बस लंड चूत में झड़ा, बल्कि चूत के दरवाजे पर ही झड़ जाता है और बस हो गया…… तुम्हारी बीबी ने सही बताया था कि देव बहुत जबरदस्त चोदता है और चुदाई के बाद असली मजा देता है।”
“मैं तैयार हूँ इसके लिए…… मुझे बताइए मुझे क्या करना होगा।” मैंने पूछा।
देव कहने लगा, “कुछ ज्यादा नहीं, अपनी चूत को थोड़ा ढीला करो।”
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और उसने लंड एडजस्ट करके बहुत गरमा-गरम जेट जैसे धार मेरी चूत में भरने लगा। मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी और मेरा पेट भी उसकी पेशाब से फूलने लगा था। उसकी पेशाब मेरी चूत से बाहर भी रिसने लगी थी। देव ने बहुत सारी पेशाब की थी और ‘पुक’ से देव ने अपना लंड बाहर खींच लिया और मेरी टाँगें फैला दी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में किसी ने फाउंटेन फिट कर दिया हो। इतनी जोर से देव का पेशाब मेरी चूत से बाहर निकल रहा था। यह तो बहुत ही अच्छा अनुभव था।
इसके बाद देव ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया, जिसको मैंने चाट-चाट कर साफ किया और देव नहाने लगा। मैंने अपनी चूत का आलम देखा तो वह सूजी-फूली हुई थी और उसका मुँह इंग्लिश के “O” के आकार में खुला हुआ था। मेरे बूब्स पर लाल और नीले देव के दिए निशान थे। हम दोनों ने नहाया और हम नंगे ही किचन में गए, जहाँ मेरी मम्मी सुबह बंडाकपुर जाने से पहले मेरे लिए पूरी, हलवा और रबड़ी छोड़ गई थी। देव ने लगभग ५०० ग्राम रबड़ी, आधा लीटर मिल्क और खूब पूरी खाई और दोनों बातें करने लगे।
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