New Fuck Story
हाय दोस्तों, मेरा नाम जूली है। मैं बिहार पटना की रहने वाली हूँ। मेरी शादी को 8 साल हो चुके हैं। मैं काफी सुंदर और सेक्सी फिगर वाली औरत हूँ। मेरी उम्र 28 साल है और मेरे पति की 32 साल। हम दोनों की शादीशुदा लाइफ काफी अच्छी है और सेक्स लाइफ भी ठीक-ठाक है। लेकिन मैं चुदाई में काफी माहिर हूँ। New Fuck Story
मेरा फिगर काफी सेक्सी है — बूब्स 34, कमर 32 और चूतड़ 38। कोई कुँवारा या बूढ़ा भी देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाएगा। मैं बिना चुदाए एक दिन भी नहीं रह सकती। अगर मेरे पति कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाते हैं तो मैं बेचैन हो जाती हूँ। मेरी चूत में आग लग जाती है, मन करता है नंगी होकर किसी और से चुदवा लूँ। लेकिन डरती हूँ बदनामी से।
वैसे मेरे पति का लंड ६ इंच का है। मुझे बड़ा लंड बहुत पसंद है। कभी-कभी मेरे पति XXX मूवी लाते हैं तो मैं ज़रूर देखती हूँ। एक बार मेरे पति ने एक XXX हिंदी फिल्म लाए जिसमें दो मर्द एक औरत को उसके पति के सामने चोद रहे थे और वो औरत उछल-उछलकर अपने बूर में लंड ले रही थी। मैं यह फिल्म देखकर काफी गरम हो गई। मेरे पति भी गरम हो गए।
मेरे पति ने मजाक में कहा, “क्यों रानी दो लंड अगर तुम्हें एक साथ मिले तो कैसा रहेगा?”
मैं शर्मा गई और उनसे बोली, “तुम भी न कुछ से कुछ बोलते हो।”
लेकिन सच पूछो तो मैं मन ही मन सोच रही थी कि काश ऐसा हो जाता तो कैसा मजा आता। यह सोचकर मेरी चूत गीली हो गई। मैं जल्दी से चुदाना चाहती थी। लेकिन तभी फोन की घंटी बज गई। मेरे पति ने फोन उठाया। मैं गरम होकर अपनी साड़ी के ऊपर से बूर सहला रही थी।
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फोन रखकर मेरे पति बोले, “चलो हम दोनों अभी स्टेशन जाना है, मेरे दूर के एक रिश्तेदार आने वाले हैं।”
मेरा तो मूड ऑफ हो गया। पति ने जल्दी से कार निकाली और हम स्टेशन की ओर चल पड़े। इस वक्त रात के 9 बज रहे थे। मैं मन ही मन उस रिश्तेदार को कोस रही थी। हम स्टेशन पहुँच गए। 5 मिनट में गाड़ी 9:30 में आने वाली थी। गाड़ी आ गई लेकिन मेरे पति के रिश्तेदार नहीं उतरे।
मेरे पति ने सारे रेलगाड़ी के डिब्बों को चेक किया लेकिन उनके रिश्तेदार नहीं मिले। तभी मेरे पति के मोबाइल पर फोन आया। पति ने बात कर फोन काट दिया। बार-बार पति कह रहा था ठीक नहीं होगा। मेरे पति का नाम दिनेश राठौर है। दिनेश ने मुझे बोला कि जो रिश्तेदार आने वाले थे वो अब कल शाम को आएँगे।
मैं बहुत खुश हो गई। चलो अब घर जाकर जमके दिनेश का लंड अपने चूत में लेकर अपनी चूत की गर्मी को शांत करूँगी। हम दोनों जल्दी से गाड़ी में आकर बैठ गए। स्टेशन से निकलते ही तेज बारिश शुरू हो गई और आँधी भी आ गई। सामने कुछ नजर नहीं आ रहा था।
मेरे पति ने किनारे करके गाड़ी रोक दी। मेरा तो मन जल्द से जल्द घर पहुँचने का था लेकिन लगता है कि आज मेरी चूत की गर्मी शांत नहीं होगी। जहाँ हमने गाड़ी रोकी थी वहाँ एक छोटा सा घर था। मेरे पति ने कहा कि जूली चलो हम कुछ देर इस घर में रुक जाते हैं। आगे पेड़ भी गिर गया है। जब तक पानी बंद नहीं होता और पेड़ नहीं उठाया जाता तब तक रोड जाम रहेंगे और रात भी काफी हो चुकी है।
मैंने दिनेश से कहा, “ये घर किसका है, तू जानते भी नहीं है और घर के लोग हमें रहने देंगे भी या नहीं?”
दिनेश ने तब कहा कि अंदर जा कि घर के मालिक से पूछ के आता हूँ। तुम गाड़ी में बैठो क्योंकि बाहर तेज बारिश हो रही है। दिनेश उस घर की ओर चला गया। मैं गाड़ी में बैठकर मन ही मन ऊपर वाले को कोस रही थी। मेरी चूत की आग और बढ़ रही थी। क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा था।
तभी दिनेश वापस आया और बोला कि चलो हम कुछ देर यहाँ रुक जाते हैं जब तक बारिश कम नहीं हो जाती। मैं गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर आ गई। बाहर तेज बारिश हो रही थी। मैं पूरी तरह भीग गई। मेरा सारा साड़ी भीग गया। मेरे सारे मेरे साड़ी से चिपक गए।
ब्लाउज भी भीग चुका था। मेरा ब्लाउज मेरी चुचियों से चिपक गया था। मेरी दोनों चुचियों के गुड्डी ब्रा के ऊपर से नंगे ही नजर आ रहे थे। मैं भीगती हुई दिनेश के साथ उस घर में घुस गई। जब मैं अंदर गई तो अंदर तो लोग बैठे थे जो करीब 35 और 40 के होंगे। दोनों एकदम हट्टे-कट्टे मर्द थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं पूरी तरह भीग चुकी थी जिस कारण मेरा सारा शरीर सभी को साफ दिख रहा था। वो दोनों मुझे घूर-घूर के देख रहे थे। मैं शर्म से और भी पानी-पानी हो गई। उन दोनों ने हमें बैठने के लिए कहा। मैं और दिनेश पूरी तरह भीग चुके थे। उन्होंने कहा कि अरे आप लोग तो पूरी तरह से भीग चुके हैं।
उन दोनों ने हमें एक तौलिया दिया और कहा कि जा के कपड़े बदल लीजिए। मैंने गौर से घर को देखा तो पता चला कि किसी कंपनी का ऑफिस है। उन दोनों ने कहा कि यहाँ कोई कपड़ा भी नहीं है बदलने को। दिनेश ने कहा कोई बात नहीं, बारिश अगर कुछ देर में रुक जाए तो हम चले जाएँगे।
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दिनेश ने मुझे कहा कि जूली तुम जा के अपने कपड़े को सुखा लो। दिनेश उन दोनों से बाथरूम के बारे में पूछा तो उन्होंने इशारे से बता दिया। मैं बाथरूम की तरफ चली गई और दिनेश वहीं उन दोनों के पास बैठ गया। बाथरूम में जाकर अपने शरीर के सारे कपड़े खोलकर अच्छे तरह से निचोड़ लिया ताकि पानी निकल जाए।
तभी मुझे बाथरूम की खिड़की पर एक परछाई देखी। मैं जल्दी से साड़ी को उठाकर अपने चूचे को ढक लिया। मैं खिड़की से जाकर देखी तो बाहर उसी घर का एक आदमी खड़ा था। वो मुझे देखकर हड़बड़ा गया और मुड़ गया जैसे उसने मुझे देखा ही न हो। मुझे तो बहुत गुस्सा आया उस पर, लेकिन मजबूरी थी कुछ नहीं बोल पाई और गुस्से से खिड़की को बंद कर दी।
मैंने सोचा वो चला गया होगा। मैं बिना खिड़की खोले ही एक छेद से झाँकी तो देखा कि वो आदमी अपने पैंट की जिप खोलकर अपना लंड निकाल रहा था। जब मैंने उसके लंड को देखा तो दंग रह गई। करीब 9 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था। मैंने आज तक इतना लंबा और मोटा लंड नहीं देखा था।
मेरे बूर में तो चींटियाँ रेंगने लगीं। मैंने अपने एक उँगली से अपने बूर को सहलाने लगी। मेरा बूर अब तो और भी गरम हो गया। वो मुझे नहीं देख सकता था क्योंकि मैंने खिड़की बंद कर दी थी। वो अपने लंबे और मोटे लंड को निकालकर पेशाब कर रहा था और हिला भी रहा था खिड़की की ओर देखकर।
मैं समझ गई कि वो ज़रूर मुझे नंगा देख लिया होगा इसलिए वो मुझे ही याद करके अपना लंड हिला रहा है। मैं बहुत गरम हो गई। मन तो कर रहा था कि खिड़की खोलकर देख लो और उसे बोलो ले उसका मोटा लंड अपने चूत में डाल लो लेकिन लोक-लाज के कारण कुछ नहीं कर पाई।
मेरी चुचियाँ और भी तनकर खड़ी हो गईं। तभी भीतर से किसी ने आवाज लगाई, “राजू ओ राजू।” वो आदमी हड़बड़ाकर जल्दी से अपने पैंट की जिप बंद कर चला गया। मैं समझ गई कि उसका नाम राजू है। मैं भी अपने चूत को सहलाना बंद कर कपड़े पहन ली और बाहर आ गई।
बाहर दिनेश उन दोनों के साथ बैठे थे। राजू मुझे घूर-घूर के देख रहा था। लगता था जैसे राजू मुझे नजरों से चोद रहा है। मैं नजर झुकाकर थोड़ी दूर सोफे पर बैठ गई। बाहर तेज बारिश हो रही थी जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। मुझे कुछ ठंड लग रही थी क्योंकि मेरे कपड़े अभी तक भीगे थे।
शायद वो दोनों समझ गए तो राजू ने दूसरे वाले जिसका नाम अरविन्द था उसे कहा कि यार क्यों न गरमा-गरम चाय हो जाए। इन दोनों की ठंड भी कुछ कम हो जाएगी। अरविन्द ने कहा कि हाँ यार आइडिया अच्छा है। तेरा अब अरविन्द भी मेरे छिपके हुए शरीर की ऊपर से मुझे सेक्सी नजरों से घूर रहा था।
मैं नजर झुकाए चोर नजरों से सब कुछ देख रही थी। मेरे सारे शरीर में काँप-काँपी सी उठ गई और बूर में करंट सा दौड़ गया। तब तक राजू चाय बनाकर ले आया। उसने पहले दिनेश को चाय दी फिर मेरी ओर आने लगा। मैं नजर झुकाए उसके पैंट की जिप के अंदर के उठे लंड को सोच रही थी कि उसने कहा, “भाभी जी चाय लीजिए, कहाँ खो गई हैं आप?”
मैं हड़बड़ा गई। सभी जोर-जोर से हँस पड़े। दिनेश भी हँस पड़ा। तब मुझे याद आया कि मेरे पति भी यही है। झट से चाय ली। चाय लेते वक्त राजू ने मेरे हाथों को सहला दिया। मेरे तो सारे शरीर में करंट दौड़ गया। बूर में भी कुलबुलाहट होने लगी। वो चाय देके वापस दिनेश और अरविन्द के पास बैठ गया और मुझे घूरने लगा।
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मैं जब भी उसके तरफ देखती तो वो मुझे आँख मार देता। मेरा दिल और जोर से धड़क जाता। मेरा तो मन कर रहा था कि साड़ी उठाकर अपने चूत को सहला दूँ लेकिन मजबूरी थी। तभी अरविन्द ने दिनेश से कहा कि दिनेश जी आपके कपड़े तो काफी गीले हैं। आप ठंड लग जाएँगे। अगर बुरा न माने तो एक बात बोलूँ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिनेश ने कहा क्या बोलिए। अरविन्द ने कहा कि एक-एक पेग हो जाए। आपकी ठंड भी चली जाएगी। दिनेश ने मेरी ओर देखा तो अरविन्द ने कहा कि भाभी जी आपको कोई एतराज तो नहीं। सिर्फ एक-दो पेग ही पिएँगे ताकि आपके पति को ठंड न लगे। मैंने कहा ठीक है पी लीजिए।
राजू तीन ग्लास ले आया और दिनेश, राजू और अरविन्द तीनों पीने लगे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। अब रात के 11 बज चुके थे। मैंने देखा वो दोनों कम पी रहे थे लेकिन दिनेश को गिलास भर-भरके पिला रहे थे। मैं कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।
तभी राजू ने कहा, “या हम तीनों तो पी रहे हैं और बेचारी भाभी जान ठंड में काँप रही हैं। मैं अंदर से भाभी जान के लिए गरम दूध ला देता हूँ और टीवी ऑन कर देता हूँ।”
मैंने कहा कोई बात नहीं लेकिन राजू नहीं माना और एक ग्लास गरम दूध ले आया। मैं जल्दी से दूध पी ली। दूध थोड़ा तीखा लगा लेकिन मैं चुपचाप दूध पी ली। दिनेश इतना पी चुका था कि उसे अब अपना कोई होश नहीं था। तब राजू अंदर गया और वापस आया तो उसने बदन पर सिर्फ लुंगी थी।
दिनेश शराब के नशे में निढ़ाल हो चुका था। तभी राजू ने टीवी ऑन कर दिया और लाइट बंद कर दी। मुझे भी कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। मेरे सारे शरीर में गर्मी बढ़ गई। ज़रूर राजू ने दूध में कुछ मिला दिया होगा। दिनेश नशे में कुर्सी पे ही सो गए। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
तभी टीवी पे ब्लू फिल्म चलने लगी। मैं हड़बड़ा गई लेकिन कुछ नहीं बोल पाई। मैंने अंधे में देखा राजू अपने लंड को निकालकर मुझे देख रहा था और उधर अरविन्द भी अपना लंड निकालकर बाहर किए हुए था। मैं अपनी नजर टीवी की तरफ की तो दो मर्द एक औरत को चोद रहे थे और वो औरत बोल रही थी, “फाड़ दो मेरी चूत, जोर से डालो राजा, फाड़ दो।”
मैं अजीब मुसीबत में फँस गई थी। मन को कितना भी समझा रही थी नहीं मान पा रही थी। मेरी चूत में करंट सा दौड़ने लगा। मैं अपने चूत को छूना चाह रही थी। मेरे सारे बदन में गर्मी महसूस हो रही थी। तभी राजू मेरे बगल में आकर बैठ गया और मेरे जाँघों में हाथ रखके बोला, “भाभी जी ठंड लग रही है आपको?”
मैंने कहा, “नहीं गर्मी लग रही है।”
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राजू ने कब मेरी साड़ी उठाकर मेरी जाँघों को सहला रहा था मुझे पता भी न चला। मेरे मुँह से ओह ओह ओह राजू प्लीज ऐसा मत करो, मेरे पति हैं यहाँ। मेरे सब्र का बाँध टूट रहा था। मैं राजू के कड़े लंड को छूना चाह रही थी। ओओह्ह याह्ह ओआह्ही राजू का हाथ धीरे-धीरे मेरी जाँघों की साड़ी को सरकाते हुए उसकी उँगलियाँ मेरी भीगी पैंटी को छू रही थीं। ओह ह्हीइल्याह्हो ओह राजू थोड़ा और ऊपर मेरी चूत को छुओ।
मैं यह बात कब कह गई मुझे पता भी न चला। अरविन्द भी मेरे दूसरे तरफ आकर मेरी दूसरी जाँघ को सहलाने लगा। मैं और भी पागल हो गई। मुझे जरा भी होश नहीं रहा कि मेरा पति सामने सो रहा है। ओओउह्हीइयाह्ह ओह्ह।
राजू ने कहा, “ओह रानी अब जरा लंड को तो छू के देखो।”
फिर दोनों ने मेरे दोनों हाथों को अपने-अपने लंड पे रख दिए। मेरे दोनों हाथों में दो लंड थे। मैं गरम लंड छूकर और गरम होकर बोली, “हाय क्या मस्त लंड है तुम दोनों का। मेरी तो चूत ही फट जाएगी।”
“हाँ रानी” राजू ने कहा, “अरे तू तो एकदम रंडी हो चुकी हो रानी। जरा अपना चूत तो दिखा दो।”
मैंने कहा, “खुद ही पैंटी खोलकर देख लो।” मैं तो ये लंड चूसूँगी।
मैं ज़मीन पे घुटनों के बल बैठ गई। वो दोनों सोफे पे नंगे बैठे थे। मैं बारी-बारी से लंड चूस रही थी। ओह क्या लंड है। आज मेरी चूत की सारी प्यास बुझ जाएगी। दो लंड से। हाँ कुतिया रंडी चूस साले चूस। अपने पति के सामने चूस रंडी। दूसरे मर्द का लंड चूस। ओह याह्होह्हीह्हीमी।
10 मिनट तक लंड चूसती रही। मुँह में भर-भरके क्या मजा आ रहा था मैं बता नहीं सकती। मैं अपने सिर उछाल-उछालकर चूस रही थी। तब दोनों ने मिलकर मेरी चुचियों को ब्लाउज और ब्रा से आजाद कर चुके थे। मैं ऊपर पूरी तरह से नंगी थी। दो पराए मर्द मेरे पति के सामने मेरी चुचियों को जोर-जोर से दबा रहे थे।
“वाह रंडी क्या चूसती है तू। ओह ली चूस रंडी चूस…… ओह्ह।” फिर दोनों ने मिलकर मुझे खड़ा किया। मैं खड़े-खड़े दोनों हाथों से दोनों के लंड हिला रही थी। ओह क्या नशा जैसा मजा आ रहा था। मेरी चूत गीली हो चुकी। मैं बार-बार अपने हाथ से अपनी बूर को भी सहला रही थी। ओह क्या लंड है ओह ओह्हीइ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं ऊपर तो नंगी ही थी नीचे अभी साड़ी थी। दोनों खड़े होकर मेरी एक-एक चुची को मुँह में लेकर चूस रहे थे। ही क्या मजा आ रहा था। मेरे दोनों निप्पल को दो मर्द चूस रहे थे। मेरी चूत का पानी जाँघों तक आ चुका था। “ओह और जोर-जोर से दबाओ मेरी चुचियों को। हो दबाओ पेलो सारा दूध पेलो इस चुची का।”
दोनों बोल भी रहे थे, “हाय रानी क्या चुचियाँ हैं तेरी। एकदम सख्त।” मैं ओह्हीइ क्या हो रही थी। पूरा कमरा इसी आवाज में गूँज रहा था और मेरा पति नशे में निदाल होकर सो रहा था। मैं अब पूरी तरह दोनों के कब्जे में आ गई थी। मैं अब जल्द से जल्द चूत में लंड लेना चाहती थी।
तभी राजू ने मेरी साड़ी को खींचकर खोल दिया और पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया। मेरी व्हाइट पैंटी में गजब की लग रही थी। मेरी फूली और भीगी चूत साफ-साफ पैंटी के ऊपर से दिख रही थी। मैं मदहोश हो चुकी थी। मैं चाह रही थी जल्दी से राजू मेरी पैंटी को खोल दे।
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मैं बोली, “जल्दी से मेरी पैंटी खोलो राजू। मेरी चूत में आग लग चुकी है ओह्हीइ ओह्ह।”
राजू बोला, “रुक रंडी जल्दी क्या है। अभी तो पूरी रात बाकी है।”
मैं कराह रही थी। अरविन्द मेरी दोनों चुचियों को चूस रहा था। राजू अब धीरे-धीरे मेरी नाभि को चूमते हुए मेरी फूली हुई बूर को पैंटी के ऊपर से चाटने लगा। मैं तो अब पागलों की तरह बोली, “जल्दी मेरी बूर से पैंटी को हटा कर मेरी चूत को चाटो प्लीज ओओह्हीइयाह्हकोह्हच।” मैं राजू के सर के बालों को हाथ से पकड़कर अपने टाँगों को फैला के रगड़ने लगी और बोली, “चूस मादरचोद चूस मेरी चूत को।”
वो मेरी पैंटी को उतार दिया और मेरी घने और रेशमी बालों वाली चूत को देखकर बोला, “ओह क्या चूत है रंडी तेरी। काश ये तू मेरी बीबी होती तो तुझे मैं रोज 4 बार चोदता। ओह हो तेरे पति बहुत लकी है। साले को क्या चूत वाली बीवी मिली है। ओह रंडी तू रोज आना। मैं तुझे रोज चोदूँगा।”
“हाँ राजा मैं रोज आकर तेरे लंड से चुदूँगी। मैं तो उस वक्त तुझसे चुदवा लेती जिस वक्त तू बाथरूम के बाहर हिला रहा था।”
राजू बोला, “साली रंडी तू तो एक नंबर की चुदक्कड़ है। हाँ मैं चुदक्कड़ हूँ। मेरे पति का लंड छोटा है।”
राजू ने एक उँगली मेरी चूत में डाली और बोला, “साली बहुत गरम है तेरी चूत। अब तो इसे चाट के शांत करना पड़ेगा।”
“हाँ चूस साले चूस ना जल्दी से। मेरी चूत में अपनी जीभ डाल। मत तड़पा। जल्दी से चूस।”
राजू और जोश में आ गया। वो अपने दोनों हाथों से मेरी बूर को फैला दिया। मैंने भी अपने टाँगों को फैला दिया और उसके बालों को पकड़कर अपने चूत पे रख दे। जब राजू का पहली बार उसका जीभ मेरी चूत पे लगा तो मैं पागल हो गई। “हो राजू जल्दी चाटो मेरी चूत को। जमके चाटो। ओह्हीइ ओह ओह्हयाह्ह मर गईी ओइह्ह।”
सच दोस्तों इतना मजा तो उस वक्त भी नहीं आता था जिस वक्त मेरे पति मेरी चूत चाटते थे। ये तो मेरी चूत में और भी आग लगा चुका था। “ओह चूस पूरी तरह चूस। देख दिनेश आज तेरी बीबी तेरे सामने अपनी चूत फैला-फैला के चुसा रही है। ओह मेरे राजा राजू चूस।”
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राजू ने अपना पूरा जीभ मेरी चूत में डाल दिया। मेरी चूत के सारे पानी को पी जा। ओह्हीइ ओह्ह। राजू मेरी सारी चूत के पानी को पी रहा था। “जो रंडी क्या पानी है तेरी चूत का। रोज आना अपने चूत के पानी को पिलाने। हाँ मेरे राजा मैं रोज आऊँगी तुमसे चूत चटवाने और चूत फड़वाने के लिए।”
इधर अरविन्द मेरी चुचियों को जमके पी रहा था। मैं पूरे जोश में आ गई। मैंने अपना सारा पानी छोड़ दिया उसके मुँह में। वो चाट-चाट के सारा पानी पी गया। अब उसने मुझे सोफे पे लिटा दिया और अपना 9 इंच का लंड मेरी चूत पे रगड़ने लगा। मैं जोश में आ गई और अपनी कमर को उठाकर लंड को अपनी चूत में लेना चाह रही थी।
राजू सनक चुका था। वो एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। मैं जोर से चीख पड़ी, “ओह मर गई। निकाल लो मेरी चूत फट गई। निकालो मेरी चूत से अपना लंड।” अरविन्द बोला, “साली बहुत चिल्ला रही है। चल चूस मेरे लंड को।”
वो अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मैं उसके लंड को चूसने लगी। ओह ह्हीइ ओह्हयाह्ह ओह्होइ। राजू जोर से अपना लंड मेरी चूत में डाल रहा था। “ले रंडी ले मेरे लंड को अपनी चूत में।” मैं बोली, “जोर से ओह्होर जोर से ओह ह्हीइ फाड़ दो चीर दो पेलो मेरे राजा। मेरे पति के सामने इस रंडी को आज मैं रंडी हूँ तुम दोनों के लिए।”
10 मिनट चोदने के बाद राजू ने मुझे उठाया और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। उसका लंड मेरी गांड के छेद में डालने लगा। मैं घबरा गई। मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई सो। राजू बोला, “चुप रंडी आज गांड का भी मजा ले।” तू समझ। राजू ने अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी अरविन्द ने आगे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और बोला, “क्यों रानी कभी ऐसा मजा लिया हो नहीं मेरे राजा।” “चोदो चोदो ओह्हीइ ज्जोर से जोर से। ये चुदाई यादगार बन।” बाहर बारिश हो रही थी और अंदर मेरी चूत और गांड को दोनों मिलकर संत कर रहे थे। दिनेश अभी था सोया था और मैं उसके रंडी बीबी दो लंड का मजा ले रही थी। राजू बोला, “अगर तेरा पति तुझे इस हाल में देखता तो वो साला भी तुझे रंडी के तरह हमारे साथ ही चोदता।”
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“ओह्ह चोदो दो इस रंडी को। मेरे पति के सामने इस रंडी को चोदो लो मजा।” दोनों की स्पीड तेज होने लगी और मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगी। ओह्हीइ ह्हीप्ह्ह ओह्हम। अभी तक मेरी चूत का तीन बार पानी गिर चुका था। दोनों ने अपने-अपने लंड को निकालकर मुझे घुटनों के बल बिठा दिया और मुझे मुँह खोलने को कहा। मैंने मुँह खोला। दोनों ने सारा अपना लंड का गाढ़ा रस पिचकारी की तरह फेंका। मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने दोनों के सारे रस के बूँद को पी गया और लंड चाट-चाटकर साफ किया।
और तब दोनों ने के बीच मैं नंगी सो गई। बड़ा मजा आया। रात भर मैं चुदाई रही। चुदाते-चुदाते मेरे बूर सूज गए थे। सुबह के 5 बजने वाले थे। मैं जल्दी उठी बाथरूम गई और अपने को साफ किया और अपने कपड़े को पहन ली। अब दिनेश भी जग चुका था। वो भी बाथरूम जाकर फ्रेश हो गया। तब जाते वक्त दिनेश ने उन दोनों का शुक्रिया अदा किया। दिनेश गाड़ी का गेट खोल रहा था और वो दोनों मेरे चूतड़ सहला रहे थे। ओह काई मजा दिया दोनों मिलकर। मैं पति जाते ही रोज दोनों से आकर चुदाती हूँ।
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