2026 Jawan Girl Chudai
मेरी उम्र 18 साल है, मैं कुंवारी युवती हूँ। मैंने 12वीं का एग्जाम दिया है। मैं अपने बारे में यह बताना जरूरी समझती हूँ कि मेरी फैमिली काफी एडवांस है, और मुझे किसी प्रकार की बंदिश नहीं लगाई जाती। मैं अपनी मर्जी से जीना पसंद करती हूँ। अपने ही ढंग से फैशनेबल कपड़े पहनना मेरा शौक है। और क्योंकि मैं मम्मी-पापा की इकलौती बेटी हूँ इसलिए किसी ने भी मुझे इस तरह के कपड़े पहनने से नहीं रोका। 2026 Jawan Girl Chudai
स्कूल आने-जाने के लिए मुझे एक ड्राइवर के साथ कार मिली हुई थी। वैसे तो मम्मी मुझे ड्राइव करने से मना करती थीं, मगर मैं अक्सर ड्राइवर को घूमने के लिए भेज देती और खुद ही कार लेकर सैर करने निकल जाती थी। स्कूल में पढ़ने वाला एक लड़का मेरा दोस्त था। उसके पास एक अच्छी सी बाइक थी।
मगर वो कभी-कभी ही बाइक लेकर आता था, जब भी वो बाइक लेकर आता मैं उसके पीछे बैठकर उसके साथ घूमने जाती। और जब उसके पास बाइक नहीं होती तो मैं उसके साथ कार में बैठकर घूमने का आनंद उठाती। ड्राइवर को मैंने पैसे देकर मना कर रखा था कि घर पर मम्मी या पापा को न बताए कि मैं अकेली कार लेकर अपने दोस्त के साथ घूमने जाती हूँ।
इस प्रकार उसे दोहरा फायदा होता था, एक तो उसे पैसे भी मिल जाते थे और दूसरी ओर उसे अकेले घूमने का मौका भी मिल जाया करता था। दो बजे स्कूल से छुट्टी के बाद अक्सर मैं अपने दोस्त के साथ निकल जाती थी और करीब ६-७ बजते-बजते घर पहुँच जाती थी। एक प्रकार से मेरा घूमना भी हो जाता था और घरवालों को कुछ कहने का मौका भी नहीं मिलता था।
मेरे दोस्त का नाम तो मैं बता ही भूल गई। उसका नाम शिवम है। शिवम को मैं मन ही मन प्यार करती थी और शिवम भी मुझसे प्यार करता था, मगर न तो मैंने कभी उससे प्यार का इजहार किया और न ही उसने। उसके साथ प्यार करने में मुझे कोई झिझक महसूस नहीं होती थी।
मुझे याद है कि प्यार की शुरुआत भी मैंने ही की थी जब हम दोनों बाइक में बैठकर घूमने जा रहे थे। मैं पीछे बैठी हुई थी जब मैंने रोमांटिक बात करते हुए उसके गाल पर किस कर लिया। ऐसा मैंने भावुक होकर नहीं बल्कि उसकी झिझक दूर करने के लिए किया था। वो इससे पहले प्यार की बात करने में भी बहुत झिझकता था।
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एक बार उसकी झिझक दूर होने के बाद मुझे लगा कि उसकी झिझक दूर करके मैंने ठीक नहीं किया। क्योंकि उसके बाद तो उसने मुझसे इतनी शरारत करनी शुरू कर दी कि कभी तो मुझे मजा आ जाता था और कभी उस पर गुस्सा। मगर कुल मिलाकर मुझे उसकी शरारत बहुत अच्छी लगती थी। उसकी इन्हीं सब बातों के कारण मैं उसे पसंद करती थी और एक प्रकार से मैंने अपना तन-मन उसके नाम कर दिया था।
एक दिन मैं उसके साथ कार में थी। कार वो ही ड्राइव कर रहा था। एकाएक एक सुनसान जगह देखकर उसने कार रोक दी और मेरी ओर देखते हुए बोला, “अच्छी जगह है ना! चारों तरफ अंधेरा और पेड़-पौधे हैं। मेरे खयाल से प्यार करने की इससे अच्छी जगह हो ही नहीं सकती।” यह कहते हुए उसने मेरे होंठों को चूमना चाहा तो मैं उससे दूर हटने लगी।
उसने मुझे बाहों में कस लिया और मेरे होंठों को जोर से अपने होंठों में दबाकर चूसना शुरू कर दिया। मैं जबरन उसके होंठों की गिरफ्त से आजाद होकर बोली, “छोड़ो, मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही है।” उसने मुझे छोड़ तो दिया मगर मेरी चूची पर अपना एक हाथ रख दिया। मैं समझ रही थी कि आज इसका मन पूरी तरह रोमांटिक हो चुका है।
मैंने कहा, “मैं तो उस दिन को रो रही हूँ जब मैंने तुम्हारे गाल पर किस करके अपने लिए मुसीबत पैदा कर ली। न मैं तुम्हें इस करती और न तुम इतना खुलते।” “तुमसे प्यार तो मैं काफी समय से करता था। मगर उस दिन के बाद से मैं यह पूरी तरह जान गया कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो। वैसे एक बात कहूँ, तुम हो ही इतनी हसीन कि तुम्हें प्यार किए बिना मेरा मन नहीं मानता है।”
वो मेरी चूची को दबाने लगा तो मैं बोली, “उम्म्म क्यों दबा रहे हो इसे? छोड़ो ना, मुझे कुछ-कुछ होता है।” “क्या होता है?” वो और भी जोर से दबाते हुए बोला, मैं क्या बोलती, ये तो मेरे मन की एक फीलिंग थी जिसे शब्दों में कह पाना मेरे लिए मुश्किल था। इसे मैं केवल अनुभव कर रही थी। वो मेरी चूची को बदस्तूर मसलते दबाते हुए बोला, “बोलो ना क्या होता है?”
“उम्म उफ्फ मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं इस फीलिंग को कैसे व्यक्त करूँ। बस समझ लो कि कुछ हो रहा है।” वो मेरी चूची को पहले की तरह दबाता और मसलता रहा। फिर मेरे होंठों को किस करने लगा। मैं उसके होंठों के चुम्बन से किच-किच गर्म होने लगी। जो मौका हमें संयोग से मिला था उसका फायदा उठाने के लिए मैं भी व्याकुल हो गई।
तभी उसने मेरे कपड़ों को उतारने का उपक्रम किया। होंठ को मुक्त कर दिया था। मैं उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराने लगी। ऐसा मैंने उसका हौसला बढ़ाने के लिए किया था। ताकि उसे एहसास हो जाए कि उसे मेरा सपोर्ट मिल रहा है। मेरी मुस्कुराहट को देखकर उसके चेहरे पर भी मुस्कुराहट दिखाई देने लगी।
वो आराम से मेरे कपड़े उतारने लगा, पहले उसका हाथ मेरी चूची पर ही था सो वो मेरी चूची को ही नंगा करने लगा। मैं धीरे से बोली, “मेरा विचार है कि तुम्हें अपनी भावनाओं पर काबू करना चाहिए। प्यार की ऐसी दीवानगी अच्छी नहीं होती।” उसने मेरे कुछ कपड़े उतार दिए।
फिर मेरी ब्रा खोलते हुए बोला, “तुम्हारी मस्त जवानी को देखकर अगर मैं अपने आप पर काबू पा लूँ तो मेरे लिए ये एक अजूबे के समान होगा।” मैंने मन में सोचा कि अभी तुमने मेरी जवानी को देखा ही कहाँ है। जब देख लोगे तो पता नहीं क्या हाल होगा। मगर मैं केवल मुस्कुराई। वो मेरे मम्मे को नंगा कर चुका था।
दोनों चूचियों में ऐसा तनाव आ गया था उस वक्त तक कि उसके दोनों निप्पल अकड़ कर और ठोस हो गए थे। और सुई की तरह तन गए थे। वो एक पल देखकर ही इतना उत्तेजित हो गया था कि उसने निप्पल समेत पूरी चूची को हथेली में समेटा और कस-कस कर दबाने लगा। अब मैं भी उत्तेजित होने लगी थी।
उसकी हरकतों से मेरे अरमान भी मचलने लगे थे। मैंने उसके होंठों को किस करने के बाद प्यार से कहा, “छोड़ दो ना मुझे। तुम दबा रहे हो तो मुझे गुदगुदी हो रही है। पता नहीं मेरी चूचियों में क्या हो रहा है कि दोनों चूचियों में तनाव सा भरता जा रहा है। प्लीज छोड़ दो, मत दबाओ।”
वो मुस्कुरा कर बोला, “मेरे बदन के एक खास हिस्से में भी तो तनाव भर गया है। कहो तो उसे निकाल कर दिखाऊँ?” मैं समझ नहीं पाई कि वो किसकी बात कर रहा है। मगर एकाएक वो अपनी पैंट उतारने लगा तो मैं समझ गई और मेरे चेहरे पर शर्म की लाली फैल गई।
वो किसमें तनाव आने की बात कर रहा था उसे अब मैं पूरी तरह समझ गई थी। मुझे शर्म का एहसास भी हो रहा था और एक प्रकार का रोमांच भी सारे बदन में अनुभव हो रहा था। मैं उसे मना करती रह गई मगर उसने अपना काम करने से खुद को नहीं रोका, और अपनी पैंट उतार कर ही माना। जैसे ही उसने अपना अंडरवियर भी उतारा तो मैंने जल्दी से निगाह फेर ली।
वो मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए बोला, “छू कर देखो ना। कितना तनाव आ गया है इसमें। तुम्हारे निप्पल से ज्यादा तन गया है ये।” मैंने अपना हाथ छुड़ाने की एक्टिंग भर की। सच तो ये था कि मैं उसे छूने को उतावली हो रही थी। अब तक देखा भी नहीं था। छू कर देखने की बात तो और थी।
उसने मेरे हाथ को बढ़ा कर एक मोटी सी चीज पर रख दिया। वो उसका लंड है ये मैं समझ चुकी थी। एक पल को तो मैं सन्न रह गई, उसके लंड को पकड़ने के बाद। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज हो गई कि खुद मेरे कानों में भी गूंजती लग रही थी। मैं उसके लंड की जड़ की ओर हाथ बढ़ाने लगी तो एहसास हुआ कि लंड लंबा भी काफी था। मोटा भी इस कदर कि उसे एक हाथ में ले पाना एक प्रकार से नामुमकिन ही था।
वो मुझे गरम होता देख कर मेरे और करीब आ गया और मेरे निप्पल को सहलाने लगा। एकाएक उसने निप्पल को चूमा तो मेरे बदन में खून का दौरा तेज हो गया, और मैं उसके लंड के ऊपर तेजी से हाथ फिराने लगी। मेरे ऐसा करते हुए उसने झट से मेरे निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब तो मैं पूरी मस्ती में आ गई और उसके लंड पर बार-बार हाथ फेर कर उसे सहलाने लगी। बहुत अच्छा लग रहा था, मोटे और लंबे गरम लंड पर हाथ फिराने में। एकाएक वो मेरे निप्पल को मुँह से निकाल कर बोला, “कैसा लग रहा है मेरे लंड पर हाथ फेरने में?”
मैं उसके सवाल को सुनकर शर्मा गई। हाथ हटाना चाहा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर लंड पर ही दबा दिया और बोला, “तुम हाथ फेरती हो तो बहुत अच्छा लगता है, देखो ना, तुम्हारे द्वारा हाथ फेरने से और कितना तन गया है।” मुझसे रहा नहीं गया तो मैं मुस्कुरा कर बोली, “मुझे दिखाई कहाँ दे रहा है?”
“देखोगी! ये लो।” कहते हुए वो मेरे बदन से दूर हो गया और अपनी कमर को उठा कर मेरे चेहरे के समीप किया तो उसका मोटा तगड़ा लंड मेरी निगाहों के आगे आ गया। लंड का सुपाड़ा ठीक मेरी आँखों के सामने था और उसका आकर्षक रूप मेरे मन को विचलित कर रहा था। उसने थोड़ा सा और आगे बढ़ाया तो मेरे होंठों के एकदम करीब आ गया।
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एक बार तो मेरे मन में आया कि मैं उसके लंड को किस कर लूँ मगर झिझक के कारण मैं उसे चूमने की पहल नहीं कर पा रही थी। वो मुस्कुरा कर बोला, “मैं तुम्हारी आँखों में देख रहा हूँ कि तुम्हारे मन में जो है उसे तुम दबाने की कोशिश कर रही हो। अपनी भावनाओं को मत दबाओ, जो मन में आ रहा है, उसे पूरा कर लो।”
उसके यह कहने के बाद मैंने उसके लंड को चूमने का मन बनाया मगर एकदम से होंठ आगे न बढ़ा कर उसे चूमने की पहल न कर पाई। तभी उसने लंड को थोड़ा और आगे मेरे होंठों से ही सटा दिया, उसके लंड के दहकते हुए सुपाड़े का स्पर्श होंठों का अनुभव करने के बाद मैं अपने आप को रोक नहीं पाई और लंड के सुपाड़े को जल्दी से चूम लिया।
एक बार चूम लेने के बाद तो मेरे मन की झिझक काफी कम हो गई और मैं बार-बार उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर सुपाड़े को चूमने लगी, एकाएक उसने सिसकारी लेकर लंड को थोड़ा सा और आगे बढ़ाया तो मैंने उसे मुँह में लेने के लिए मुँह खोल दिया, और सुपाड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी।
इतना मोटा सुपाड़ा और लंड था कि मुँह में लिये रखने में मुझे परेशानी का अनुभव हो रहा था, मगर फिर भी उसे चूसने की तमन्ना ने मुझे हार मानने नहीं दिया और मैं कुछ देर तक उसे मजे से चूसती रही। एकाएक उसने कहा, “हााई तुम इसे मुँह में लेकर चूस रही हो तो मुझे कितना मजा आ रहा है, मैं तो जानता था कि तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो, मगर थोड़ा झिझकती हो। अब तो तुम्हारी झिझक समाप्त हो गई, क्यों है न?”
मैं हाँ में सिर हिलाकर उसकी बात का समर्थन किया और बदस्तूर लंड को चूसती रही। अब मैं पूरी तरह खुल गई थी और चुदाई का आनंद लेने का इरादा कर चुकी थी। वो मेरे मुँह में धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा। मैंने अंदाजा लगा लिया कि ऐसे ही धक्के वो चुदाई के समय भी लगाएगा।
चुदाई के बारे में सोचने पर मेरा ध्यान अपनी चूत की ओर गया, जिसे अभी उसने निर्वस्त्र नहीं किया था। जबकि मुझे चूत में भी हल्की-हल्की सीहरन महसूस होने लगी थी। मैं कुछ ही देर में थकान का अनुभव करने लगी। लंड को मुँह में लिये रहने में परेशानी का अनुभव होने लगा। मैंने उसे मुँह से निकालने का मन बनाया मगर उसका रोमांच मुझे मुँह से निकालने नहीं दे रहा था।
मुँह थक गया तो मैंने उसे अंदर से तो निकाल लिया मगर पूरी तरह से मुक्त नहीं किया। उसके सुपाड़े को होंठों के बीच दबाए उस पर जीभ फेरती रही। झिझक खत्म हो जाने के कारण मुझे जरा भी शर्म नहीं लग रही थी। तभी वो बोला, “हाय मेरी जान, अब तो मुक्त कर दो, प्लीज निकाल दो ना।”
वो मिन्नत करने लगा तो मुझे और भी मजा आने लगा और मैं प्रयास करके उसे और चूसने का प्रयत्न करने लगी। मगर थकान की अधिकता हो जाने के कारण, मैंने उसे मुँह से निकाल दिया। उसने एकाएक मुझे धक्का दे कर गिरा दिया और मेरी जींस खोलने लगा और बोला, “मुझे भी तो अपनी उस हसीन जवानी के दर्शन करा दो, जिसे देखने के लिए मैं बेताब हूँ।”
मैं समझ गई कि वो मेरी चूत को देखने के लिए बेताब था। और इस एहसास ने कि अब वो मेरी चूत को नंगा करके देख लेगा साथ ही शरारत भी करेगा। मैं रोमांच से भर गई। मगर फिर भी दिखावे के लिए मैं मना करने लगी। वो मेरी जींस को उतार चुके के बाद मेरी पैंटी को खींचने लगा तो मैं बोली, “छोड़ो ना! मुझे शर्म आ रही है।”
“लंड मुँह में लेने में शर्म नहीं आई और अब मेरा मन बेताब हो गया है तो सिर्फ दिखाने में शर्म आ रही है।” वो बोला। उसने खींच कर पैंटी को उतार दिया और मेरी चूत को नंगा कर दिया। मेरे बदन में बिजली सी भर गई। ये एहसास ही मेरे लिए अनोखा था। उसने मेरी चूत को नंगा कर दिया था। अब वो चूत के साथ शरारत भी करेगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो चूत को छूने की कोशिश करने लगा तो मैं उसे जाँघों के बीच छिपाने लगी। वो बोला, “क्यों छुपा रही हो। हाथ ही तो लगाऊँगा। अभी चूमने का मेरा इरादा नहीं है। हाँ अगर प्यारी लगी तो जरूर चूमूँगा।” उसकी बात सुनकर मैं मन ही मन रोमांच से भर गई। मगर प्रत्यक्ष में बोली, “तुम देख लोगे उसे, मुझे दिखाने में शर्म आ रही है। आँख बंद करके छूओगे तो बोलो।”
“ठीक है! जैसी तुम्हारी मर्जी। मैं आँख बंद करता हूँ, तुम मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख देना।” मैंने हाँ में सिर हिलाया। उसने अपनी आँख बंद कर ली तो मैं उसका हाथ पकड़ कर बोली, “चोरी-छिपे देख मत लेना, ओके, मैं तुम्हारा हाथ अपनी चूत पर रख रही हूँ।”
मैंने चूत पर उसका हाथ रख दिया। फिर अपना हाथ हटा लिया। उसके हाथ का स्पर्श चूत पर लगते ही मेरे बदन में सनसनाहट होने लगी। गुदगुदी की वजह से चूत में तनाव बढ़ने लगा। उस पर से जब उसने चूत को छेड़ना शुरू किया तो मेरी हालत और भी खराब हो गई। वो पूरी चूत पर हाथ फेरने लगा।
फिर जैसे ही चूत के अंदर अपनी उंगली घुसाने की चेष्टा की तो मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई। वो चूत में उंगली घुसाने के बाद चूत की गहराई नापने लगा। मुझे इतना मजा आने लगा कि मैंने चाहते हुए भी उसे नहीं रोका। उसने चूत की काफी गहराई में उंगली घुसा दी थी। मैं लगातार सिसकारी ले रही थी।
मेरी कुंवारी और नाजुक चूत का कोना-कोना जलने लगा। तभी उसने एक हाथ मेरी गांड के नीचे लगाया कमर को थोड़ा ऊपर करके चूत को चूमना चाहा। उसने अपनी आँख खोल ली थी और होंठों को भी इस प्रकार खोल लिया था जैसे चूत को होंठों के बीच में दबाने का मन हो। मेरी हल्की झांटों वाली चूत को होंठों के बीच दबा कर जब उसने चूसना शुरू किया तो मैं और भी बुरी तरह छटपटाने लगी।
उसने कस-कस कर मेरी चूत को चूसा और चंद ही पलों में चूत को इतना गरम कर डाला कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और होंठों से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं। इसके साथ ही मैं कमर को हिला-हिला कर अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ने लगी। उसने समझ लिया कि उसके द्वारा चूत चूसे जाने से मैं गरम हो रही हूँ।
सो उसने और भी तेजी से चूसना शुरू किया साथ ही चूत के सुराख के अंदर जीभ घुसा कर गुदगुदाने लगा। अब तो मेरी हालत और भी खराब होने लगी। मैं जोर से सिसकारी लेकर बोली, “शिवम ये क्या कर रहे हो। इतने जोर से मेरी चूत को मत चूसो और ये तुम छेद के अंदर गुदगुदी…… उउएई…… मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है। प्लीज निकालो जीभ अंदर से, मैं पागल हो जाऊँगी।”
मैं उसे निकालने को जरूर कह रही थी मगर एक सच ये भी था कि मुझे बहुत मजा आ रहा था। चूत की गुदगुदी से मेरा सारा बदन काँप रहा था। उसने तो चूत को छेद-छेद कर इतना गरम कर डाला कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई। मेरी चूत का भीतरी हिस्सा रस से गीला हो गया। उसने कुछ देर तक चूत के अंदर तक के हिस्से को गुदगुदाने के बाद चूत को मुक्त कर दिया।
मैं अब एक पल भी रुकने की हालत में नहीं थी। जल्दी से उसके बदन से लिपट गई और लंड को पकड़ने का प्रयास कर रही थी कि उसे चूत में डाल लूँगी कि उसने मेरी टाँगों को पकड़ कर एकदम ऊँचा उठा दिया और नीचे से अपना मोटा लंड मेरी चूत के खुले हुए छेद में घुसाने की कोशिश की। वैसे तो चूत का दरवाजा आम तौर पर बंद होता था।
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मगर उस वक्त क्योंकि उसने टाँगों को ऊपर की ओर उठा दिया था इसलिए छेद पूरी तरह खुल गया था। रस से चूत गीली हो रही थी। जब उसने लंड का सुपाड़ा छेद पर रखा तो ये भी एहसास हुआ कि छेद से और भी रस निकलने लगा। मैं एक पल को तो सिसियाई उठी। जब उसने चूत में लंड घुसाने की बजाय हल्का सा रगड़ा। मैं सिसकारी लेकर बोली, “घुसाओ जल्दी से.. देर मत करो प्लीज..”
उसने लंड को चूत के छेद पर अड़ा दिया। पहली बार मुझे ये एहसास हुआ कि मेरी चूत का सुराख उम्मीद से ज्यादा ही छोटा है। क्योंकि लंड का सुपाड़ा अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरी हालत तो ऐसी हो चुकी थी कि अगर उसने लंड जल्दी अंदर नहीं किया तो शायद मैं पागल हो जाऊँ। वो अंदर डालने की कोशिश कर रहा था।
मैं बोली, “क्या कर रहे हो जल्दी घुसाओ ना अंदर। उफ्फ उम्म अब तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। प्लीज जल्दी से अंदर कर दो।” वो बार-बार लंड को पकड़ कर चूत में डालने की कोशिश करता और बार-बार लंड दूसरी तरफ फिसल जाता। वो भी परेशान हो रहा था और मैं भी। मैं सिसियाने लगी, क्योंकि चूत के भीतरी हिस्से में जोरदार गुदगुदी सी हो रही थी।
मैं बार-बार उसे अंदर करने के लिए कहे जा रही थी। वो प्रयास कर तो रहा था मगर लंड की मोटाई के कारण चूत के अंदर नहीं जा पा रहा था। तभी उसने कहा, “उफ्फ तुम्हारी चूत का सुराख तो इस कदर छोटा है कि लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा है मैं क्या करूँ?”
“तुम तेज झटके से घुसाओ अगर फिर भी अंदर नहीं जाता है तो फाड़ दो मेरी चूत को।” मैं जोश में आ कर बोल बैठी। मेरी बात सुनकर वो भी बहुत जोश में आ गया और उसने जोर का धक्का मारा। एकदम जानलेवा धक्का था, भक् से चूत के अंदर लंड का सुपाड़ा समा गया, इसके साथ ही मेरे मुँह से चीख भी निकल गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चूत की ओर देखा तो पाया कि बीच से फट गई थी और खून निकल रहा था। खून देखने के बाद तो मेरी घबराहट और बढ़ने लगी मगर किसी तरह मैंने अपने आप पर काबू किया। उसके लंड ने चूत का थोड़ा सा ही सफर पूरा किया था और उसी में मेरी हालत खराब होने लगी थी।
चूत के एकदम बीचोबीच धंसा हुआ उसका लंड खतरनाक लग रहा था। मैं दर्द से कराहते हुए बोली, “माय गॉड! मेरी चूत तो सचमुच फट गई उफ्फ दर्द सहन नहीं हो रहा है। अगर पूरा लंड अंदर घुसाओगे तो लगता है मेरी जान ही निकल जाएगी।” “नहीं यार! मैं तुम्हें मारने थोड़े ही दूँगा।” वो बोला और लंड को हिलाने लगा तो मुझे ऐसा अनुभव हुआ जैसे चूत के अंदर बवंडर मचा हुआ हो।
जब मैंने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, उसके बाद धक्के मारना तो उसने लंड को जहाँ का तहाँ रोक दिया और हाथ बढ़ा कर मेरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा। चूची में कठोरता पूरे शबाब पर आ गई थी और जब उसने दबाना शुरू किया तो मैंने चूत की ओर से कुछ राहत महसूस की।
कारण मुझे चूचियों का दबवाया जाना अच्छा लग रहा था। मेरा तो ये तक दिल कर रहा था कि वो मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसता। इससे मुझे आनंद भी आता और चूत की ओर से ध्यान भी बँटता। मगर टाँग उसके कंधे पर होने से उसका चेहरा मेरे निप्पल तक पहुँच पाना एक प्रकार से नामुमकिन ही था।
तभी वो लंड को भी हिलाने लगा। पहले धीरे-धीरे उसके बाद तेज गति से। चूची को भी एक हाथ से मसल रहा था। चूत में लंड की हल्की-हल्की सरसराहट अच्छी लगने लगी तो मुझे आनंद आने लगा। पहले धीरे और उसके बाद उसने धक्कों की गति तेज कर दी। मगर लंड को ज्यादा अंदर करने का प्रयास उसने अभी नहीं किया था। एकाएक शिवम बोला, “तुम्हारी चूत इतनी कमसिन और टाइट है कि क्या कहूँ?”
उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा कर रह गई। मैंने कहा, “मगर फिर भी तो तुमने फाड़ कर लंड घुसा ही दिया।” “अगर नहीं घुसाता तो मेरे खयाल से तुम्हारे साथ मैं भी पागल हो जाता।” मैं मुस्कुरा कर रह गई। वो तेजी से लंड को अंदर-बाहर करने लगा था। अब चूत में दर्द अधिक तो नहीं हो रहा था हाँ हल्का-हल्का सा दर्द उठ रहा था।
मगर उससे मुझे कोई परेशानी नहीं थी। उसके मुकाबले मुझे मजा आ रहा था। कुछ देर में ही उसने लंड को ठेल कर काफी अंदर कर दिया था। उसके बाद भी जब और ठेल कर अंदर घुसाने लगा तो मैं बोली, “और अंदर कहाँ करोगे, अब तो सारा का सारा अंदर कर चुके हो। अब बाकी क्या रह गया है?”
“एक इंच बाकी रह गया है।” कहते ही उसने मुझे कुछ बोलने का मौका दिए बगैर जोर से झटका मार कर लंड को चूत की गहराई में पहुँचा दिया। मैं चिहुँक कर रह गई। उसके लंड के जोरदार प्रहार से मैं मस्त हो कर रह गई थी। ऐसा आनंद आया कि लगा उसके लंड को चूत की पूरी गहराई में दाखिल करवा ही लूँ। उसी में मजा आएगा। ये सोच कर मैंने कहा, “हाई और अंदर.. घुसाओ। गहराई में पहुँचा दो।”
उसने मेरी जाँघों पर हाथ फेरा और लंड को जोर से ठेला तो मेरी चूत से अजीब तरह की आवाज निकली और इसके साथ ही मेरी चूत से और भी खून गिरने लगा। मगर मुझे इससे भी कोई परेशानी नहीं हुई थी, बल्कि ये देख कर मैं आनंद में आ गई कि चूत का सुराख पूरा खुल गया था और लंड सारा का सारा अंदर था।
एक पल को तो मैं ये सोच कर ही रोमांचित हो गई कि उसके बाँस जैसे लंड को मैंने अपनी चूत में पूरा डलवा लिया था। उस पर से जब उसने धक्के मारने लगा, तो एहसास हुआ कि वाकई जो मजा चुदाई में है वो किसी और तरीके से मौज-मस्ती करने से नहीं है। उसका ८ इंच लंड अब मेरी चूत की गहराई को पहले से काफी अच्छी तरह नाप रहा था। मैं पूरी तरह मस्त होकर मुँह से सिसकारी निकालने लगी।
पता नहीं कैसे मेरे मुँह से एकदम गंदी-गंदी बात निकलने लगी थी। जिसके बारे में मैंने पहले कभी सोचा तक नहीं था। फाड़.. दो मेरी चूत को.. पेलो और तेज पेलो टुकड़े-टुकड़े कर दो मेरी चूत के। एकाएक मैं झड़ने के करीब पहुँच गई तो मैंने शिवम को और तेज गति से धक्के मारने को कह दिया, अब लंड मेरी चूत को पार कर मेरी बच्चेदानी से टकराने लगा था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी चूत में ऐसा संकुचन हुआ कि मैंने खुद-ब-खुद उसके लंड को जोर से चूत के बीच में कस लिया। पूरी चूत में ऐसी गुदगुदी होने लगी कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे मुँह से जोरदार सिसकारी निकलने लगी। उसने लंड को रोका नहीं और धक्के मारता रहा। मेरी हालत जब कुछ अधिक खराब होने लगी तो मेरी रुलाई छूट निकली।
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वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरे रो देने पर उसने लंड को रोक लिया और मुझे मनाने का प्रयास करने लगा। मैं उसके रुक जाने पर खुद ही शांत हो गई और धीरे-धीरे मैं अपने बदन को ढीला छोड़ने लगी। कुछ देर तक वो मेरी चूत में ही लंड डाले मेरे ऊपर पड़ा रहा। मैं आराम से कुछ देर तक सांस लेती रही।
फिर जब मैंने उसकी ओर ध्यान दिया तो पाया कि उसका मोटा लंड चूत की गहराई में वैसे का वैसा ही खड़ा और अकड़ा हुआ पड़ा था। मुझे नॉर्मल देखकर उसने कहा, “कहो तो अब मैं फिर से धक्के मारने शुरू करूँ।” “मारो, मैं देखती हूँ कि मैं बर्दाश्त कर पाती हूँ या नहीं।” उसने दोबारा जब धक्के मारने शुरू किए तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में काँटे उग आए हों, मैं उसके धक्के झेल नहीं पाई और उसे मना कर दिया।
मेरे बहुत कहने पर उसने लंड बाहर निकालना स्वीकार कर लिया। जब उसने बाहर निकाला तो मैंने राहत की सांस ली। उसने मेरी टाँगों को अपने कंधे से उतार दिया और मुझे दूसरी तरफ घुमाने लगा तो पहले तो मैं समझ नहीं पाई कि वो करना क्या चाहता है। मगर जब उसने मेरी गांड को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसमें लंड घुसाने के लिए मुझे आगे की ओर झुकाने लगा तो मैं उसका मतलब समझ कर रोमांच से भर गई।
मैंने खुद ही अपनी गांड को ऊपर कर लिया और कोशिश की कि गांड का छेद खुल जाए। उसने लंड को मेरी गांड के छेद पर रखा और अंदर करने के लिए हल्का सा दबाव ही दिया था कि मैं सिसकी लेकर बोली, “थूक लगा कर घुसाओ।” उसने मेरी गांड पर थूक चुपड़ा दिया और लंड को गांड पर रखकर अंदर डालने लगा।
मैं बड़ी मुश्किल से उसे झेल रही थी। दर्द महसूस हो रहा था। कुछ देर में ही उसने थोड़ा सा लंड अंदर करने में सफलता प्राप्त कर ली थी। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा, तो लंड मेरी गांड के अंदर रगड़ खाने लगा। तभी उसने अपेक्षाकृत तेज गति से लंड को अंदर कर दिया, मैं इस हमले के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए आगे की ओर गिरते-बचते।
सीट की पुश्त को सख्ती से पकड़ लिया था मैंने। अगर नहीं पकड़ती तो जरूर ही गिर जाती। मगर इस झटके का एक फायदा ये हुआ कि लंड आधा के करीब मेरी गांड में धंस गया था। मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकारियाँ निकलने लगीं उउफ..आआह्ह.. मर गई.. फट गई मेरी गांड.. हाई उसने अपना लंड जहाँ का तहाँ रोक कर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
मुझे अभी आनंद ही आना शुरू हुआ था कि तभी वो तेज-तेज झटके मारता हुआ काँपने लगा, लंड का सुपाड़ा मेरी गांड में फूल पिचक रहा था, ह्ह्ह आआई केता हुआ वो मेरी गांड में ही झड़ गया। मैंने महसूस किया कि मेरी गांड में उसका गाढ़ा और गरम वीर्य टपक रहा था।
उसने मेरी पीठ को कुछ देर तक चूमा और अपने लंड को झटके देता रहा। उसके बाद पूरी तरह शांत हो गया। मैं पूरी तरह गांड मरवाने का आनंद भी नहीं ले पाई थी। एक प्रकार से मुझे आनंद आना शुरू ही हुआ था। उसने लंड निकाल लिया। मैं कपड़े पहनते हुए बोली, “तुम बहुत बदमाश हो। शादी से पहले ही सब कुछ कर डाला।”
वो मुस्कुराने लगा। बोला, “क्या करता, तुम्हारी कमसिन जवानी को देख कर दिल पर काबू रखना मुश्किल हो रहा था। कई दिनों से चोदने का मन था, आज अच्छा मौका था तो छोड़ने का मन नहीं हुआ। वैसे तुम ईमानदारी से बताओ कि तुम्हें मजा आया या नहीं?”
उसकी बात सुनकर मैं चुप हो गई और चुपचाप अपने कपड़े पहनती रही। मैं मुस्कुरा भी रही थी। वो मेरे बदन से लिपट कर बोला, “बोलो ना! मजा आया?” “हाँ” मैंने हौले से कह दिया। “तो फिर एक काम करो, मेरा मन नहीं भरा है। तुम कार अपने ड्राइवर को दे दो और उसे कह दो कि तुम अपनी एक सखी के घर जा रही हो। रात भर उसके घर में ही रहोगी। फिर हम दोनों रात भर मौज-मस्ती करेंगे।”
मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा कर रह गई। बोली, “दोनों तरफ का बाजा बजा चुके हो फिर भी मन नहीं भरा तुम्हारा?” “नहीं! बल्कि अब तो और ज्यादा मन बेचैन हो गया है। पहले तो मैंने इसका स्वाद नहीं लिया था, इसलिए मालूम नहीं था कि चूत और गांड चोदने में कैसा मजा आता है। एक बार चोदने के बाद और चोदने का मन कर रहा है। और मुझे यकीन है कि तुम्हारा भी मन कर रहा होगा।”
“नहीं मेरा मन नहीं कर रहा है” “तुम झूठ बोल रही हो। दिल पर हाथ रख कर कहो” मैंने दिल की झूठी कसम नहीं खाई। सच कह दिया कि वाकई मेरा मन नहीं भरा है। मेरी बात सुनने के बाद वो और भी जिद करने लगा। कहने लगा कि प्लीज मान जाओ ना! बड़ा मजा आएगा। सारी रात रंगीन हो जाएगी।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं सोचने लगी। वैसे तो मैं रात को अपनी सखियों के पास कई बार रुक चुकी थी मगर उसके लिए मैं मम्मी को पहले से ही बता देती थी। इस प्रकार ऐन मौके पर मैंने कभी रात भर बाहर रहने का प्रोग्राम नहीं बनाया था। सोचते-सोचते ही मैंने एकाएक प्रोग्राम बना लिया। मगर बोली, “सवाल ये है कि हम लोग रात भर रहेंगे कहाँ? होटल में?”
“होटल में रहना मुश्किल है। खतरा भी है। क्योंकि तुम अभी कमसिन हो। मेरे दोस्त अजय का एक बंगला खाली है। मैं उसे फोन कर दूँगा तो वो हमारे पहुँचने से पहले सफाई वगैरह करवा देगा।” उसकी बात मुझे पसंद तो आ रही थी मगर दिल गवारा नहीं कर रहा था। एकाएक उसने मेरे हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और बोला, “घर के बारे में नहीं, इसके बारे में सोचो। ये तुम्हारी चूत और गांड का दीवाना है। और तुम्हारी चूत मारने को उतावला हो रहा है।”
उसके लंड को पकड़ने के बाद मेरा मन फिर उसके लंड की ओर मुड़ने लगा। उसे मैं सहलाने लगी। फिर मैंने हाँ कह दिया। उसके लंड को जैसे ही मैंने हाथ में लिया था, उसमें उत्तेजना आने लगी। वो बोला, “देखो फिर खड़ा हो रहा है। अगर मन कर रहा है तो बताओ चलते-चलते एक बार और चुदाई का मजा ले लिया जाए।”
ये कहते हुए उसने लंड को आगे बढ़ा कर चूत से सटा दिया। उस वक्त मैंने जींस और पैंटी नहीं पहनी थी। वो चूत पर लंड को रगड़ने लगा। उसके रगड़ने से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी, मेरे मन में चुदाई का विचार आने लगा था। मगर मैंने अपनी भावनाओं पर काबू पाने का प्रयास किया।
उसने मेरी चूत में लंड घुसाने के लिए हल्का सा धक्का मारा। मगर लंड एक ओर फिसल गया। मैंने जल्दी से लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया, और बोली, “चूत में मत डालो। जब रात रंगीन करने का मन बना ही लिया है तो फिर इतना बेताब क्यों हो रहे हो। या तो इसे ठंडा कर लो या फिर मैं किसी और तरीके से इसे ठंडा कर देती हूँ।”
“तुम किसी और तरीके से ठंडा कर दो। क्योंकि ये खुद तो ठंडा होने वाला नहीं है।” मैं उसके लंड को पकड़ कर दो पल सोचती रही फिर उस पर तेजी से हाथ फिराने लगी। वो बोला, “क्या कर रही हो?” “मैंने एक सखी से सुना है कि लड़के लोग इस तरह झटका देकर मुठ मारते हैं और झड़ जाते हैं।”
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वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा कर बोला, “ऐसे चुदाई का मजा तो लिया जाता है मगर तब, जब कोई प्रेमिका न हो। जब तुम मेरे पास हो तो मुझे मुठ मारने की क्या जरूरत है?” “समझो कि मैं नहीं हूँ?” “ये कैसे समझ लूँ। तुम तो मेरी बाहों में हो।” कह कर वो मुझे बाहों में लेने लगा। मैंने मना किया तो उसने छोड़ दिया।
वो बोला, “कुछ भी करो। अगर चूत में नहीं तो गांड में…….” कह कर वो मुस्कुराने लगा। मैं शर्मा कर बोली, “धत”। “तो फिर मुँह से चूस कर मुझे झड़ दो।” मैं नहीं-नहीं करने लगी। आखिर में गांड मराना मैंने पसंद किया। फिर मैं घोड़ी बनकर गांड उसकी तरफ कर घूम गई।
उसने मेरी गांड पर थोड़ा सा थूक लगाया और अपने लंड पर भी थोड़ा सा थूक चुपड़ा और लंड को गांड के छेद पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा और अपना आधा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। मेरे मुँह से कराह निकल गई आआईई मम्मी मार दिया फाड़ दी मेरी गांड बचाओ मुझे।
उसने दो-तीन झटकों में ही अपना लंड मेरी गांड के आखिरी कोने तक पहुँचा दिया, ऐसा लगा जैसे उसका लंड मेरी आंतड़ियों को चीर डाल रहा हो। मैंने गांड में लंड डलवाना इसलिए पसंद किया था, कि पिछली बार मैं गांड मरवाने का पूरा आनंद नहीं ले पाई थी और मेरा मन मचलता ही रह गया था, वो झड़ जो गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मैं इसका भी मजा लूँगी ये सोच कर मैं उसका सपोर्ट करने लगी। गांड को पीछे की ओर धकेलने लगी। वो काफी देर तक तेज-तेज धक्के मारता हुआ मुझे आनंदित करता रहा, मैं खुद ही अपनी २ उंगलियाँ चूत में डाल कर अंदर-बाहर करने लगी, एक तो गांड में लंड का अंदर-बाहर होना और दूसरा मेरे उंगलियों से अपनी चूत को कुचलना दो तरफा आनंद से मैं जल्द ही झड़ने लगी.
और झड़ते हुए बदबदाने लगी, आआह्ह स्स्हीवम मेरे यार मजा गया, कहते हुए मैं झड़ने लगी, वो भी ३-४ तेज धक्के मारता हुआ बदबदाता हुआ झड़ने लगा आआह्ह हाई तेरी गांड आआह्ह लंड कैसे कस-कस कर जा रहा है मम्म कहता हुआ वो मेरी पीठ पर ही गिर पड़ा और हाँफने लगा।
थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद, हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और वहाँ से वापस आ गए। ड्राइवर का घर पास में ही था। उसके पास जाकर मैंने उसे कार दे कर कहा कि हम लोग आज कहीं पार्टी में जा रहे हैं। मैंने उसे समझा दिया कि वो घर में कह दे कि मैं एक सखी के घर चली गई हूँ। आज रात उसके घर पर ही रहूँगी।
फिर मैंने उसे ५०० का नोट पकड़ा दिया। रुपये पाकर वो खुश हो गया, बोला, “मैडम जी! आप बेफिक्र हो जाइए। मैं सब संभाल लूँगा। मालकिन को ऐसा समझाऊँगा कि वो कुछ नहीं कहेंगी आपको।” उसके बाद हम दोनों वहाँ से निकल गए। एक जगह रुक कर शिवम ने टेलीफोन बूथ से अपने दोस्त को फोन कर दिया।
उसके बाद उसने मुझे बताया कि उसका दोस्त मौजूद था और उसने कह दिया है कि वो सारा इंतजाम कर देगा। “सारे इंतजाम से तुम्हारा क्या मतलब?” “मतलब खाने-पीने से है।” शिवम ने मुस्कुरा कर कहा। हम दोनों एक ऑटो के जरिए उसके दोस्त के बंगले में पहुँच गए। अच्छा खासा बंगला था, काफी अच्छी तरह सजा हुआ।
शिवम के दोस्त ने हम दोनों का स्वागत किया। वो भी आकर्षक लड़का था। वो शिवम से तो खुलकर बात करने लगा मगर मुझसे बात करने में झिझक रहा था। अंदर जाने के बाद मैंने शिवम से कहा कि मैं अपने घर फोन करना चाहती हूँ। उसने सहमति जताई तो मैंने मम्मी को फोन करके कह दिया कि मैं आज रात नीमा के घर में हूँ और कल सुबह ही आऊँगी।
मम्मी कुछ खास विरोध नहीं कर पाई। नीमा का नाम मैंने इसलिए लिया था कि उसके घर का फोन नंबर मम्मी के पास नहीं था। वो उससे फोन करके पूछ नहीं सकती थी कि मैं उसके पास हूँ या नहीं। फिर एकाएक विचार आया कि अगर मेरी डायरी मम्मी को मिल गई तो उसमें फोन नंबर है।
इसलिए मैंने नीमा को भी इस बारे में बता देना ठीक समझा। नीमा को फोन किया तो वो पहले तो हँसने लगी फिर बोली, “लगता है शिवम के साथ मौज-मस्ती करने में लगी हुई है। अकेले-अकेले मजे लेगी अपनी सखी का कुछ खयाल नहीं है तुझे।” वो बड़ी सेक्सी लड़की थी।
मैंने भी हँस कर कहा, “अगर तेरा मन इतना बेताब हो रहा है चुदवाने का तो फिर तू भी आ जा, वैसे भी यहाँ दो लड़के हैं। एक तो शिवम है और दूसरा उसका दोस्त। आ जा तो तेरा भी काम बन जाएगा। मैं उसे तेरे लिए मना कर रखती हूँ।” “वो मान जाएगा?” “क्यों नहीं मानेगा यार। तेरी जैसे लड़की की चूत को देखकर कोई भी लड़का चोदने के लिए मना नहीं करेगा। तू है ही ऐसी कि, कोई मना करे ये नामुमकिन है।”
“ठीक है तो फिर मैं भी घर में कोई न कोई बहाना बना कर आ रही हूँ।” उसने फोन काट दिया। मैंने उसके बारे में शिवम को बताया, तो वो अपने दोस्त को बोला ले यार अजय तेरा भी इंतजाम हो गया है। इसकी एक सखी है नीमा, वो आ रही है। अजय के चेहरे पर निखार आ गया।
बेड रूम में आ कर हम तीनों बातें करने लगे। कुछ देर में ही अजय से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। उसने बताया कि वो भी पहले एक लड़की से प्यार करता था मगर बाद में उसने धोखा दे दिया तो उसने किसी और को प्रेमिका बनाने के बारे में सोचा ही नहीं। थोड़ी देर तक बैठे-बैठे मुझे बोरियत महसूस होने लगी।
शिवम ने मेरी मनोस्थिति भाँप ली। वो अपने दोस्त से बोला, “यार अजय! जरा उस तरफ देखना।” अजय दूसरी ओर देखने लगा तो शिवम ने मुझे बाहों में ले लिया और मेरी चूचियों को दबाने लगा। होंठों को भी हौले-हौले किस करने लगा। तभी वहाँ नीमा आ गई। शिवम मुझसे लिपटा हुआ था, उसे देखकर हम दोनों अलग हो गए।
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मैंने कहा, “हम तेरी ही राह देख रहे थे, वाह भी बेचैनी से।” उसके बाद मैंने उसका परिचय शिवम और अजय से करवाया। मैं देख रही थी कि अजय गहरी निगाहों से नीमा की ओर देखे जा रहा था। साफ जाहिर हो रहा था कि नीमा उसे बहुत पसंद आ रही है। एकाएक मैं बोली, “यार, तुम दोनों ने एक-दूसरे को पसंद कर लिया है तो फिर तुम दोनों दूर-दूर क्यों खड़े हो। एंजॉय करो यार।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ये कहते हुए मैंने नीमा को अजय की ओर धकेल दिया। अजय ने जल्दी ही उसे बाहों में ले लिया। वे दोनों झिझकें नहीं ये सोच कर मैं भी शिवम से लिपट गई और उसके होंठों को चूमने लगी। शिवम मेरी चूची दबाने लगा तो अजय ने भी नीमा के मम्मों पर हाथ रख दिया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा। मैं नीमा की ओर देखकर मुस्कुराई। नीमा भी मुस्कुरा दी फिर अजय के बदन से लिपट कर उसे चूमने लगी।
उन दोनों की शर्म खोलने और दोनों को ज्यादा उत्तेजित करने के इरादे से मैं शिवम के कपड़े उतारने लगी। कुछ देर में मैंने उसके कपड़े उतार दिए और लंड को पकड़ कर सहलाने लगी तो वो भी मेरी चूचियों को बेपर्दा करने लगा। उधर नीमा मेरी देखा-देखी, अजय के कपड़े उतारने लगी। कुछ ही देर में उसने अजय के सारे कपड़े उतार दिए।
वो तो मुझसे भी एक कदम आगे निकली और उसने झुक कर अजय का लंड दोनों हाथों में पकड़ा और सुपाड़े को चाटने लगी। मैंने भी उसकी देखा-देखी, शिवम के लंड को मुँह में ले लिया और उसे सुपाड़े को चूसने लगी। एक समय तो हम दोनों सखियाँ मस्ती से लंड मुँह में लिये हुए चूस रही थीं। मुझे जितना मजा आ रहा था उससे कहीं ज्यादा मजा नीमा को अजय का लंड चूसने में आ रहा था.
ये मैंने उसके चेहरे को देखकर अंदाजा लगाया था। वो काफी खुश लग रही थी। बड़े मजे से लंड के ऊपर मुँह को आगे-पीछे करते हुए वो चूस रही थी। थोड़ी देर बाद उसने लंड को मुँह से निकाला और जल्दी-जल्दी अपने निचले कपड़े उतारने लगी। मुझसे नजर टकराते ही मुस्कुरा दी।
मैं भी मुस्कुराई और मस्ती से शिवम के लंड को चूसने में लग गई। कुछ देर बाद ही मैं भी नीमा की तरह शिवम के बदन से अलग हो गई और अपने कपड़े उतारने लगी। कुछ देर बाद हम चारों के बदन पर कोई कपड़ा नहीं था। अजय नीमा की चूत को चूसने लगा तो मेरे मन में भी आया कि शिवम भी मेरी चूत को उसी तरह चूसे। क्योंकि नीमा बहुत मस्ती में लग रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे वो बिना लंड घुसवाए ही चुदाई का मजा ले रही है। उसके मुँह से बहुत ही कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं। शिवम भी मेरी टाँगों के बीच में झुक कर मेरी चूत को चाटने-चूसने लगा तो मेरे मुँह से भी कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं। कुछ देर तक चूसने के बाद ही मेरी चूत बुरी तरह गरम हो गई। मेरी चूत में जैसे हजारों कीड़े रेंगने लगे।
मैंने जब नीमा की ओर देखा तो पाया उसका भी ऐसा ही हाल था। मेरे कहने पर शिवम ने मेरी चूत चाटना बंद कर दिया। एकाएक मेरी निगाह अजय के लंड की ओर गई, जिसे थोड़ी देर पहले नीमा चूस रही थी। लंड उसके मुँह के अंदर था इसलिए मैं उसे ठीक से देख नहीं पाई थी।
अब जब मैंने अच्छी तरह देखा तो मुझे अजय का लंड बहुत पसंद आया। मेरे मन में कोई बुरा खयाल नहीं था। न मैं शिवम के साथ बेवफाई करना चाहती थी। बस मेरा मन कर रहा था कि एक बार मैं अजय का लंड मुँह में लेकर चूसूँ। ये सोच कर मैंने कहा, “यार! क्यों न हम चारों एक साथ मजा लें। जैसे ब्लू फिल्म में दिखाया जाता है।”
अब अजय और नीमा भी मेरी ओर देखने लगे। मैं बोली, “हम चारों दोस्त हैं। इसलिए आज अगर कोई और किसी और के साथ भी मजा लेता है तो बुरा नहीं होगा। क्यों शिवम, मैं गलत कह रही हूँ?” “नहीं!” वो बोला, मगर मुझे लगा कि वो मेरी बात समझ ही नहीं पाया है। नीमा ने पूछ लिया।
मैंने कहा, “मान ले शिवम अगर तेरी चूत चाटे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उसी प्रकार अगर मैं अजय का लंड मुँह में ले लूँ तो बाकी तुम तीनों को फर्क नहीं पड़ेगा। मैं ठीक कह रही हूँ न?” मेरी बात का तीनों ने समर्थन किया। मैं जानती थी कि किसी को मेरी बात का कोई ऐतराज नहीं होगा।
क्योंकि एक प्रकार से मैंने सबके मन की इच्छा पूरी करने की बात कही थी। सब राजी हो गए तो मैंने आइडिया दिया कि बिल्कुल ब्लू फिल्म की तरह से जब मर्जी होगी, लड़का या लड़की डबल लेंगे। मेरी ये बात भी सबको पसंद आ गई। उसी समय शिवम ने नीमा को खींचकर अपने सीने से लगा लिया और उसके सीने पर कश्मीरी सेब की तरह उभरे हुए मम्मों को चूसने लगा।
और मैं सीधे अजय के लंड को चूसने में लग गई। उसके मोटे लंड का साइज था तो शिवम जैसा ही मगर मुझे उसके लंड को चूसने में कुछ ज्यादा ही आनंद आ रहा था। मैं मजे से लंड को मुँह में काफी अंदर डाल कर अंदर-बाहर करने लगी। उधर नीमा भी शिवम के लंड को चूसने में लग गई थी। तभी अजय ने मेरे कान में कहा, “तुम्हारी चूत मुझे अपनी ओर खींच रही है। कहो तो मैं तुम्हारी चूत अपने होंठों में दबाकर चूस लूँ?”
ये उसने इतने धीमे स्वर में कहा था कि मेरे अलावा कोई और सुन ही नहीं सकता था। मैंने मुस्कुरा कर हाँ में सिर हिला दिया। वो मेरी जाँघों पर झुका तो मैंने अपनी टाँगों को थोड़ा सा फैला कर अपनी चूत को खोल दिया। वो पहले तो मेरी चूत के छेद को जीभ से सहलाने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा था।
मैं उसे काट-काट कर चूसने के लिए कहने वाली थी, तभी उसने जोर से चूत को होंठों के बीच दबा लिया और खुद ही काट-काट कर चूसने लगा। मेरे मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं “आआह्ह उउम्म अज्ज्जय ह्हेरे क्क्काट्ट्टो आआह्ह ह्ही म्म बहुत मा ज्ज्जा आआ।
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अब तो मैं और भी मस्त होने लगी और मेरी चूत रस से गीली होने लगी। वो फाँकों को मुँह में लेकर जीभ रगड़ रहा था। मैंने शिवम की ओर देखा तो पाया कि वो भी नीमा की चूत को चूसने में लगा हुआ था। नीमा के मुँह से इतनी जोर से सिसकारियाँ निकल रही थीं कि अगर आस-पास कोई घर होता तो उस तक आवाज पहुँच जाती और वो जान जाते कि यहाँ क्या हो रहा है।
“ख्हा ज्ज्जा ओ च्हो ओ और ज्ज्जोर्र..” खैर मेरी चूत को चूसते हुए जब अजय ने चूत को बहुत गरम कर दिया तो मैं जल्दी से उसके कान में बोली, “अब और मत चूसो। मैं पहले ही बहुत गरम हो चुकी हूँ। तुम जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो वरना शिवम का दिल आ जाएगा। जल्दी से एक ही झटके में घुसा दो।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो भी मेरी चूत में अपना लंड डालने को उतावला हो रहा था, मैंने अजय के साथ चुदवाने का इसलिए मन बनाया था ताकि मुझे एक नए तरीके का मजा मिल सके। उसने लंड को चूत के छेद पर रख कर अंदर की ओर धकेलना शुरू किया तो मैं इस डर में थी कि कहीं शिवम मेरे पास आकर ये न कह दे कि वो मुझे पहले चोदना चाहता है।
मैंने जब उसकी ओर देखा तो वो अब तक नीमा की चूत को ही चूस रहा था। उसका ध्यान पूरी तरह चूत चूसने की ओर ही था। मैंने इस मौके का लाभ उठाने का मन बनाया और चूत की फाँकों को दोनों हाथों से पकड़ कर फैला दिया ताकि अजय का लंड अंदर जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
और जब उसने मेरी चूत में लंड का सुपाड़ा डाल कर जोर का धक्का मारा तो मैं सिसियाई उठी। उसका लंड चूत के अंदर लेने का मन एकाएक कुछ ज्यादा ही बेताब हो गया। मैंने जल्दी से उसका लंड एक हाथ से पकड़ कर अपनी चूत में डालने की कोशिश करनी शुरू कर दी।
एक तरफ मेरी मेहनत और दूसरी तरफ उसके धक्के, उसने एकदम से तेज धक्का मार कर लंड चूत के अंदर आधा पहुँचा दिया। ज्यादा मोटा न होने के बावजूद भी मुझे उसके लंड का झटका बहुत आनंद दे गया और मैं कमर उछाल-उछाल कर उसका लंड चूत की गहराई में उतरवाने के लिए उतावली हो गई।
तभी मैंने शिवम की ओर देखा। वो भी नीमा को चोदने की तैयारी कर रहा था। उसने थूक लगा कर नीमा की चूत में लंड घुसाया तो नीमा सिसकारी लेकर बोली, “उईई दैया कितना मोटा है। मेरी सखी देख रही है तेरे लवर का लंड। ये तो मेरी नाजुक चूत को फाड़ ही देगा। ओओह्ह स्सी धीरे-धीरे घुसो। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।”
वो मेरी ओर देख कर कह रही थी। उसकी हालत देखकर मुझे हँसी आ रही थी। क्योंकि मुझे मालूम था कि वो जरूर एक्टिंग कर रही होगी। क्योंकि वो पहले भी कई बार चुदवा चुकी थी। इसका सबूत जरा ही देर में मिल गया, जब वो सिसकारी लेते हुए शिवम को लंड जड़ तक पहुँचाने के लिए कहने लगी।
शिवम ने जोरदार धक्का मार कर अपना लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुँचा दिया था। इधर मेरी चूत में भी अजय के लंड के जोरदार धक्के लग रहे थे। कुछ देर बाद शिवम ने कहा, “अब हम लोग पार्टनर बदल लें तो कैसा रहेगा?” वैसे तो मुझे मजा आ रहा था, मगर फिर भी तैयार हो गई। अजय ने मेरी चूत से लंड निकाल लिया।
मैं शिवम के पास चली गई। उसने नीमा की चूत से लंड निकाल कर मुझे घोड़ी बनाकर मेरे पीछे से चूत में लंड पेल दिया, एक झटके में आधा लंड मेरी चूत में समा गया, इस आसन में लंड चूत में जाने से मुझे थोड़ी परेशानी हुई मगर मैं झेल गई। उधर मैंने देखा कि अजय ने नीमा की चूत में लंड घुसाया और तेजी से धक्के मारने लगा।
साथ ही उसकी चूचियों को भी मसलने लगा। कुछ ही देर बाद हमने फिर पार्टनर बदल लिए। अब मेरी चूत में फिर से अजय का लंड था। उधर मैंने देखा कि नीमा अब शिवम की गोद में बैठ कर उछल रही थी, और नीचे से शिवम का मोटा लंड उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रहा था। वो सिसकारी लेकर उसकी गोद में एक प्रकार से झूला झूल रही थी।
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मैंने अजय की ओर इशारा किया तो उसने भी हामी भर दी। मैं उसकी कमर से लिपट गई। दोनों टाँगें मैंने उसकी कमर से लपेट दी थीं और उसके गले में बाहें डाले, मैं झूला झूलते हुए चुदवा रही थी। बहुत मस्ती भरी चुदाई थी। कुछ देर बाद लंड के धक्के खाते-खाते मैं झड़ने लगी, मेरी चूत में संकुचन होने लगा जिससे अजय भी झड़ने लगा।
उसका वीर्य रस मेरी चूत के कोने-कोने में ठंडक दे रहा था, बहुत आनंद आ रहा था। उसके बाद उसने मेरी चूत से लंड बाहर निकाल लिया। उधर वो दोनों भी झड़-झुड़ कर अलग हो चुके थे। हम सबने खाने-पीने का प्लान बनाया। दोनों सामान मौजूद थे। मैं आम तौर पर नहीं पीती हूँ और न ही नीमा पीती है, मगर उस दिन हम सबने व्हिस्की पी।
खा-पी चुकने के बाद हम चारों फिर मस्ती करने लगे, मस्ती करते-करते ही मैंने फैसला कर लिया था कि इस बार गांड में लंड डलवाएँगे। जब मैंने अजय और शिवम को अपनी मंशा के बारे में बताया तो वो दोनों राजी हो गए। नीमा तो पहले से ही राजी थी शायद। हम सबने तेल का इंतजाम किया।
तेल लगा कर गांड मरवाने का ये आइडिया नीमा का था। शायद वो पहले भी इस तरीके से गांड मरवा चुकी थी। तेल आ जाने के बाद मैंने शिवम के लंड को पहले मुँह में लेकर चूस कर खड़ा किया और उसके बाद उसके खड़े लंड पर तेल चुपड़ा दिया और मालिश करने लगी। उसके लंड की मालिश करके मैं उसके लंड को एकदम चिकना बना दिया था।
उधर नीमा अजय के लंड को तेल से तर करने में लगी हुई थी। शिवम ने लंड को पकड़ कर मैंने कहा “इस बार तेल लगा हुआ है, पूरा मजा देना मुझे।” “फिक्र मत करो मेरी जान।” वो मुस्कुरा कर बोला और उसने मेरी गांड के सुराख पर रगड़ता रहा उसके बाद एक ही धक्के में अपना आधा लंड मेरी गांड में डाल दिया।
मेरे मुँह से न चाहते हुए भी सिसकारी निकलने लगी। जितनी आसानी से उसका लंड अपनी चूत में मैं डलवा लेती थी, उतनी आसानी से गांड में नहीं। खैर जैसे ही उसने दूसरा धक्का मार कर लंड को और अंदर करना चाहा, मैं अपना काबू नहीं रख पाई और आगे की ओर गिरी और वो भी मेरे साथ मेरे बदन से लिपटा मेरे ऊपर गिर पड़ा।
एकाएक वो नीचे की ओर हो गया और मैं उसके ऊपर, दबाव से उसका सारा लंड मेरी गांड में समा गया। मैं मरे दर्द के चीखने लगी। ह्ही फाड़ दी मेरी गांड कोई बचाओ मुझे। मैं उससे छूटने के लिए हाथ-पैर मारने लगी तो उसने मुझे खींच कर अपने से लिपटा लिया और तेजी से उछाल-उछाल कर गांड में घुसे पड़े लंड को हरकत देना शुरू कर दिया। मेरी तो जान जा रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
ऐसा लग रहा था कि आज मेरी गांड जरूर फट जाएगी। मैं बहुत मिन्नत करने लगी तो उसने मुझे बराबर लिटा दिया और तेजी से मेरी गांड मारने लगा। बगल में होने से वैसे तो मुझे उतना दर्द नहीं हो रहा था मगर उसका मोटा लंड तेजी से गांड के अंदर-बाहर होने में मुझे परेशानी होने लगी। मैं नीमा की ओर नहीं देख पाई कि वो कैसे गांड मराई का मजा ले रही है, क्योंकि मुझे खुद के दर्द से फुर्सत नहीं थी।
शिवम काफी देर से धक्के मार रहा था मगर वो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। तभी मैंने पाया कि नीमा जोर-जोर से उछल रही थी और अजय को बार-बार मुक्त करने के लिए कह रही थी। कुछ देर बाद अजय ने लंड बाहर निकाल लिया। मेरे पास आकर बोला, “कहो तो लंड तुम्हारी चूत में डाल दूँ। नीमा तो थक गई है।”
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मैंने शिवम की ओर देखा तो उसने हामी भर दी तो मैंने भी हाँ कह दिया। फिर मैं शिवम के सहयोग से उठ कर शिवम के ऊपर आ गई, नीचे शिवम मेरी गांड में लंड डाले पड़ा हुआ था, ऊपर मैं चूत फैलाए हुए अजय का लंड डलवाने के लिए बेताब हो रही थी। अजय ने एक ही धक्के में अपना पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया। उसके बाद जब मुझे दोनों ओर से धक्के लगने लगे तो मुझे इतना मजा आया कि मैं बता नहीं सकती। बिल्कुल ब्लू फिल्मों की तरह का सीन इस समय हो रहा था, मैं गालियाँ देते हुए दोनों तरफ से चुद रही थी।
नीमा पास खड़ी हम तीनों को मजा लेते देख रही थी। कुछ ही देर में हम तीनों झड़ कर लस्त-पस्त हो गए। सुबह तक हमने कुल मिलाकर ४ बार चुदाई का आनंद लिया। उसके बाद अगले दिन मैं नीमा के साथ पहले उसके घर गई, फिर उसे अपने घर भी ले आई। ताकि मम्मी को यकीन हो जाए कि मैं रात भर उसी के घर पर थी। मम्मी को कुछ शक नहीं हो पाया। आज भी हम चारों मिल कर ऐसे ही प्लान बनाते हैं और अजय के बंगले पर चुदाई का आनंद उठाते हैं, अब तो उसमें शिवम के २-३ दोस्त और भी शामिल हो गए हैं। वो कहानी फिर कभी।
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