Virgin Girl Chudai
ये कहानी एकदम सच्ची है और इसमें कोई मसाला नहीं है। अगर आपको पसंद आए तो कमेंट्स में जरूर अपने कमेंट्स देना। मैं एक स्टूडेंट हूँ और 1 अगस्त को हमारा कॉलेज शुरू हो गया। मेरे साथ एक लड़की पढ़ती है जिसका नाम है पलक। वो हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं रहती, सिर्फ 20 मिनट का पैदल रास्ता है और हम साथ ही कॉलेज से घर आते हैं। Virgin Girl Chudai
हमारी तरफ से सिर्फ हम दो ही उस कॉलेज में पढ़ने जाते हैं। इसी वजह से हमारी दोस्ती भी काफी अच्छी है। अब मैं पलक के बारे में थोड़ा डिटेल में बताता हूँ। उम्र 20, रंग गोरा, हाइट 5 फीट 6 इंच। कुल मिलाकर एक ऐसी नॉर्मल लड़की जो काफी सुंदर दिखती है।
तो बात ऐसे हुई कि छुट्टी के बाद हम घर वापस आ रहे थे कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। जुलाई-अगस्त हरियाणा, पंजाब में मानसून सीजन होता है इसलिए बारिश आना कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिन बारिश का अचानक तेज आना सनसनीखेज था।
बारिश इतनी तेज थी कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और चलना लगभग नामुमकिन था। हम मेरे घर के काफी पास पहुँच चुके थे तो जैसे-तैसे हिम्मत करके हम घर पहुँच गए। मैंने पलक से कहा कि बारिश रुकने तक यहीं पर रुको, फिर चली जाना। वो कहने लगी, “पहले घर के अंदर तो घुसो।”
तभी मुझे मेन गेट पर ताला देखकर शॉक लगा। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूँ। तभी मुझे ध्यान आया कि सेकंड की मेरे पास ही तो है। मैंने लॉक खोला और अंदर जाकर डैडी को फोन किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अर्जेंटली बाहर जाना पड़ गया इसलिए कल आएँगे।
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पलक तब तक गेट पर खड़ी थी। मैंने उसे अंदर बुलाया भी नहीं क्योंकि किसी की गैरमौजूदगी में एक लड़की का घर आना अच्छा नहीं लगता। तभी मुझे आइडिया आया कि क्यों न पलक के डैडी को फोन करके बता दें कि पलक मेरे घर है और आकर ले जाइए।
पलक ने हमारे लैंडलाइन फोन से अपने डैडी को फोन किया। लेकिन उसके डैडी कहने लगे कि इस हालत में नहीं आया जा सकता। बारिश और भी तेज हो चुकी थी और तूफान का रूप धारण कर लिया था।तब मैंने उसके डैडी से फोन पर बात करके कहा, “अंकल, आज घर पर मम्मी नहीं हैं तो आप पलक को ले जाइए। अगर किसी ने यहाँ देख लिया तो लोग पता नहीं क्या कहेंगे?”
तब अंकल बोले, “बेटा मुझे तुम पर भरोसा है। तुम पलक का खयाल रखना। बारिश रुकने पर मैं उसे ले जाऊँगा।”
मैंने कहा, “ठीक है अंकल, आप चिंता मत करो।”
फोन रखकर मैंने पलक की तरफ देखा तो मेरे होश उड़ गए। वो ठंड से बुरी तरह काँप रही थी। बारिश के साथ-साथ तेज हवा भी थी सो ठंड बहुत ज्यादा हो गई थी। उसकी आँखें बंद होने लगी थीं। मैं डर गया कहीं पलक की तबीयत ज्यादा न खराब हो जाए।
तभी मैं टॉवल और मेरी जींस तथा एक गर्म टी-शर्ट लेकर अलमारी से आया और पलक को कपड़े बदलने को कहा। उसके हाथ-पैर काम नहीं कर रहे थे। वो बिल्कुल जाम गई थी। मैं और भी ज्यादा डर गया। फिर मैंने जल्दी से उसे दूध में पट्टी डालकर तेज चाय बनाकर पिलाने की कोशिश की।
जैसे-तैसे 2 घूँट पिला दिए। फिर उसे उठाया और बाथरूम तक ले गया और कपड़े देकर अंदर भेज दिया। लेकिन मुझे डर था कहीं उससे कपड़े न पहने जाएँ। लेकिन जैसे-तैसे करके वो बदलकर बाहर आ गई। वो अब भी काँप रही थी। बाहर आकर वो सोफे पर बैठ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसे एक चादर ओढ़ने को दी तो वो ओढ़कर बैठ गई। मैंने फिर से दोनों के लिए चाय बनाई। ठंड मुझे भी लग रही थी लेकिन उसकी ठंड को देखते हुए मैं खुद को भूल गया था। मैंने उसे चाय दी और दोनों पीने लगे। वो आँखें बंद करके चाय पी रही थी। चाय पीते-पीते मुझे छींक आ गई तो उसने आँखें खोलीं।
मेरी हालत भी ज्यादा ठीक नहीं थी। उसने मुझे देखकर कहा, “मैं ठीक हूँ, तुम कपड़े बदल लो प्लीज।” तब मैं भी कपड़े बदलने चला गया। कपड़े बदलकर आया तो देखा कि वो वहीं पर सो गई थी। मैं मुस्कुराकर अंदर चला गया। तभी मुझे खयाल आया कि वो सोफा उसके लिए छोटा है।
मैं उसे अंदर सोने के लिए कहने को बाहर आया तो देखा कि वो अब भी काँप रही थी। मैं उसे इसी हालत में छोड़कर रसोई में चला गया खाने के लिए। मम्मी खाना बनाकर गई थीं। मैंने गरम किया और पलक के लिए ले आया। पलक काँपते हुए उठी। खाना देखकर वो थोड़ी रिलैक्स हुई।
वो खाना खाकर फिर सोने लगी तो मैंने कहा, “बेडरूम में सो जाओ, यहाँ ठंड ज्यादा है।” वो मुस्कुराकर अंदर चली गई। अब मैं बारिश रुकने का इंतजार करने लगा लेकिन मानसून के कारण बारिश रुकना मुश्किल ही लग रहा था। दोपहर का 1:30 बज चुका था। वो अंदर से दरवाजा बंद करके सो गई थी।
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मेरे दिल में अब तक कोई गलत फीलिंग्स नहीं थी उसके बारे में। मैं बाहर सोफे पर बैठकर मोबाइल में गेम खेलने लगा। खेलते-खेलते मेरी आँख लग गई। 4 बजे मुझे अचानक पलक की आवाज सुनाई दी और मैं हड़बड़ाकर उठा। पहले बाहर देखा। बारिश अब भी हो रही थी।
तेज तो नहीं थी ज्यादा लेकिन इतनी कम भी नहीं थी कि इस हालत में जाया जा सके। फिर मैंने पलक से पूछा, “क्या काम है?” वो कहने लगी, “मुझे डर लग रहा है।” मैंने कहा, “डैडी को बुलाऊँ?” उसने सिर हिलाया हाँ में। मैंने उसे अपना मोबाइल दे दिया और वो बात करने लगी। वो थोड़ी मायूस थी। शायद अंकल अभी आ नहीं सकते थे।
मैंने कहा, “क्या हुआ?”
वो बोली, “प्लीज मेरे पास बैठ जाओ, मुझे अकेले डर लग रहा है।”
मैंने कहा, “टीवी देख लो फिर नहीं लगेगा।”
लेकिन वो जिद करने लगी तो मैं बैठ गया वहाँ उसके पास। टीवी ऑन करके एक पुराना क्रिकेट मैच देखने लगा। वो कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ देखती रही।
मैं बोला, “खाएगी क्या? आज मुझे जो ऐसे देख रही हो।”
वो बोली, “हाँ खाऊँगी, मुझे भूख लगी है।”
इतना कहकर उसने मुझसे रिमोट लिया और चैनल चेंज करने लगी। कार्टून नेटवर्क चैनल लगा के मेरे पास आ गई और मेरी राइट आर्म को पकड़ के कंधे पर सिर रख के टीवी देखने लगी। उसने फिर चैनल किया, इस बार म्यूजिक चैनल लगाया। उस चैनल पर एक रोमांटिक गाना चल रहा था — ‘आएगा मजा अब बरसात का तेरी मेरी दिलकश मुलाकात का’। वो देखती रही। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसी बीच मैं बोला, “क्या हुआ?”
वो बोली, “कुछ नहीं।”
मैंने पूछा, “अब तो ठंड नहीं लग रही ना?” कहने लगी, “लगती है थोड़ी-थोड़ी।” और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी। उसकी इस मुस्कान में शैतानी छिपी थी। मैंने उसे इग्नोर कर दिया।
फिर वो कहने लगी, “क्या हुआ?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
फिर वो बोली कि “तुम कितने अच्छे हो। मेरा कितना खयाल रखा आज।”
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मैंने भी अब उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसकी उँगलियों से खेलने लगा। हम ऐसे ही बातें करते रहे लेकिन गलत खयाल दिल में नहीं था। तभी टीवी पर ‘भीगे होंठ तेरे’ गाना आ गया। ये चैनल लोकल था और इस पर रिक्वेस्ट्स प्ले होती थीं। मैं टीवी की तरफ ध्यान नहीं दिया लेकिन पलक उसे ध्यान से देख रही थी।
मैंने कहा, “इतने गौर से क्यों देख रही हो? पहले नहीं देखा क्या?”
वो बोली, “देखा है पर आज इसे देखकर अजीब सा महसूस हो रहा है।”
मैंने कहा, “अजीब सा क्यों?” कहने लगी, “मुझे नहीं पता।” उसकी आँखों में अचानक लाली आ गई थी और साँसों की गर्मी मुझे महसूस होने लगी। उसके दिल की तेज धड़कन भी महसूस हो रही थी। मैं उसकी तरफ मुँह करके बैठ गया, उसका चेहरा अपने हाथों में ले लिया और पूछा, “पलक, अचानक क्या हुआ तुम्हें?”
उसने आँखें बंद कर लीं, मेरे अँगूठे पर अपने होंठ धीरे से लगा दिए। उसकी गर्म साँस मेरे अँगूठे के ऊपरी हिस्से से टकरा रही थी। तब मेरा ध्यान उसके सीने पर चला गया तो उसकी ब्रेस्ट ऊपर-नीचे हो रही थी। मैं समझ गया कि पलक गर्म हो गई है सॉन्ग देखकर।
तब मैं अपने होंठ उसके होंठों के पास ले गया लेकिन आधा इंच की दूरी पर रुक गया। अब उसकी साँस मेरे होंठों से टकरा रही थी और गर्म साँसों ने मुझे भी गर्म कर दिया। लेकिन किस भी नहीं किया। मैं 1 मिनट तक उसी पोजीशन में उसकी गर्मी महसूस करता रहा।
फिर अचानक उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और पागलों की तरह चूमने लगी। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसे सीने से लगा लिया। उसकी तेज धड़कन के कारण उसकी छाती भी ऊपर-नीचे हो रही थी और मेरे सीने से टकरा रही थी। इस हरकत ने मुझमें तूफान ला दिया।
अब तक सिर्फ वो मुझे किस कर रही थी लेकिन अब मैं उसे किस करने लगा। मैंने उसके पूरे चेहरे पर किस की बारिश कर दी। वो मुझसे ऐसे-ऐसे लिपट गई जैसे मिठाई पर चाँदी का वर्क लिपटा होता है। उसने धीरे से मेरे कान में कहा, “आई लव यू।” इस बात ने मुझमें और जोश भर दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मैंने उसे लिटा दिया और लिटाकर किस करने लगा। मैंने अभी तक उसके बूब्स पर हाथ नहीं रखा था इसलिए जोर-जोर से ऊपर-नीचे हो रहे थे। फिर मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा और एक हाथ से उसका बूब दबा दिया। हाथ रखते ही उसके अंदर करंट सा दौड़ गया और वो मोन करने लगी, “म्म्म्ह्ह्ह।”
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मुझे इस आवाज ने अजीब सा संतोष दिया। फिर मैंने ऊपर से ही उसके बूब्स दबाए और वो आहें भरने लगी, “आह्ह्ह… ऊऊम्म्म।” फिर एक हाथ नीचे ले गया और उसकी चूत पर रख दिया। वहाँ हाथ लगाते ही वो जोनक की तरह सिकुड़ गई। अब मैं उसे किस भी कर रहा था और उसकी चूत पर हाथ भी फेर रहा था।
तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी पैंटी गीली है। मैं समझ गया था कि पूरी हॉट हो चुकी है। लेकिन मैं आज पूरा मजा लेना चाहता था इसलिए उसके कपड़े नहीं उतारे। मैं अब उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा और वो मचलने लगी। आज किसी के आने का डर नहीं था इसलिए हर लम्हे का मजा लूटना चाहता था मैं।
हम इस तरह 30 मिनट तक चुम्मा-चाटी करते रहे। फिर उसने पैंट के अंदर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। मैंने कहा, “इसे छोड़ो अभी और मजा करते हैं।” ये कहकर मैंने उसकी टी-शर्ट निकाल दी। भीगने के कारण उसने अपने सब कपड़े चेंज किए थे पैंटी को छोड़कर।
टी-शर्ट उतारने के बाद मैं उसके रंग-रूप और उसके बूब्स की गोलाई देखकर हैरान रह गया। उफ्फ! मैं उसके बूब्स की खूबसूरती बयान नहीं कर सकता। फिर मैंने उसके नंगे शरीर पर हाथ रखा तो उसके शरीर में कँपकँपी सी हुई। फिर मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा जो मचल रहे थे। या रब्बा, क्या बूब्स थे! एकदम नरम लेकिन बॉल की तरह गोल-गोल। अब मैं उनसे खेलने लगा तो पलक भी अपनी सारी हदों को पार करती सी दिखी।
फिर मैंने उसकी पैंट और पैंटी भी उतार दी। उसकी गोरी और भारी-भारी जाँघें देखकर पागल हो गया और किस करने लगा वहीं पर। किस करते-करते ही मैंने अपना हाथ उसकी नंगी चूत पर रख दिया। वो तिलमिला उठी और सिसियाने लगी। उसकी आवाजों से पूरे कमरे में रोमांटिक माहौल था।
अब मैंने उसकी जाँघों से हटकर उसकी नाभि पर किस किया तो उसने अपना पेट अंदर खींच लिया। ऐसा करने से उसके बूब्स और भी सेक्सी लगने थे। मैंने उसकी चूत पर से हाथ नहीं हटाया और उसे मसलता रहा। अब मैं पूरी तरह उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसकी चूत देखने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसकी चूत पर हल्के छोटे बाल थे, यानी कोई 10-12 दिन के शेव्ड। उसकी चूत सुर्ख गुलाबी और बहुत ही छोटी सी थी। ये देखकर मेरी जीभ अपने आप उसकी चूत की पंखुड़ियों की तरफ चली गई। जीभ लगाते ही वो सिहर उठी और पूरा कमरा एक बार फिर उसकी आवाज से गूँज उठा — “आआह्ह्हह्ह्ह म्म्मूईई ह्हीी आआह्ह्ह।”
इतनी देर में ही उसकी चूत से पानी का फव्वारा फूट पड़ा। मैं समझ गया कि ये अब और इंतजार नहीं कर सकती, नहीं तो ब्लास्ट हो जाएगी। अब मैंने भी कपड़े उतार दिए। मेरा 8 इंच लंबा लंड देखकर उसकी आँखें फट गईं लेकिन बोली कुछ नहीं। वो मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।
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मैंने कहा, “इस अपनें मुँह में लो।”
तो उसने मना कर दिया। मैंने जिद नहीं की और उसकी टाँगों के बीच में आ गया। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी।
वो कहने लगी कि “मुझे डर लग रहा है। तुम्हारा लंड अंदर नहीं जाएगा। छेद बहुत छोटा है मेरा।”
मैंने कहा, “ये अपना रास्ता खुद बना लेगा, तुम चिंता मत करो।”
फिर मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसके छेद पर रखा। उसने पहली ही आँखें बंद कर लीं। मैं अंदर डालने की कोशिश करने लगा लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद लंड अंदर नहीं गया।
वो कहने लगी, “मैंने कहा था अंदर नहीं जाएगा। रहने दो, मत डालो। वैसे भी ये मेरी चूत के चिथड़े-चिथड़े कर देगा। प्लीज मत डालो।”
मैंने कहा, “असली मजा तो यही है। अगर ये अंदर नहीं गया तो समझो हमने पाप किया है।”
वो कहने लगी, “डालो लेकिन दर्द मत करना। मुझे दर्द से डर लगता है।”
बेड के ड्रॉअर में क्रीम पड़ी थी। मैंने वो अपने लंड पर लगाकर ट्राई करने लगा। उसकी टाँगों के बीच में आकर दोबारा छेद पर रखा लेकिन सेटिंग नहीं बनी। फिर मैंने उसके नीचे तकिया दिया तो उसकी चूत थोड़ा ऊपर हो गई। अब मैंने उसके छेद पर अपना लंड रखा और जोर का धक्का मारा। लंड 3 इंच अंदर चला गया।
वो चीख पड़ी — “आआह्ह्ह मर गईईई। प्लीज बाहर निकालो प्लीज। मर जाऊँगी मैं।”
इतना कहकर वो रोने लगी। फिर मैंने 1 इंच लंड बाहर किया और उसे किस करने लगा। 5 मिनट बाद वो थोड़ा रिलैक्स हो गई और सिसकियाँ बंद हो गईं। तभी मैंने अचानक उसके होंठों को दबाकर जोर का धक्का मारा और लगभग पूरा लंड अंदर चला गया। वो चीखना-चिल्लाना चाहती थी लेकिन कुछ न कर सकी।
उसकी चूत से खून की धार बहने लगी। वो तड़पने लगी और छुड़ाने लगी लेकिन मैंने नहीं छोड़ा और उसे पागलों की तरह किस करता और बूब्स दबाता रहा जब तक वो शांत नहीं हुई। करीब 8 मिनट बाद मैंने धीरे-धीरे से धक्के मारने शुरू किए। वो अब थोड़ी सी रिलैक्स थी लेकिन दर्द अभी भी था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
8-10 स्ट्रोक्स के बाद उसका दर्द खत्म हो गया। अब वो भी मेरा साथ दे रही थी और चूतड़ उछालकर खुद ही सपोर्ट कर रही थी। अब मैं पूरे जोश में था और उसका दर्द खत्म होते देख स्ट्रोक्स की स्पीड तेज कर दी। इसी दौरान उसके सागर में एक लहर उठी और साहिल से टकराकर शांत हो गई।
लेकिन मैं अपने पूरे जोश में लगा हुआ था। करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं एंड पर पहुँच गया और झड़ गया उसी के अंदर। मैं तेज-तेज साँसें ले रहा था और वो भी। वो बहुत खुश थी और मुझे सीने से लगाकर कुछ देर उसी पोजीशन में लेटी रही।
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5 मिनट बाद मैं उसके ऊपर से हट गया और उठकर बाथरूम की तरफ चलने लगा और उसे भी नहाने को कहा। वो उठी तो देखा कि पूरी बेडशीट खून से लथपथ थी और उसकी चूत भी। वो घबरा गई। तब मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और समझाया कि पहली बार ऐसा होता है। वो रिलैक्स हो गई और उठने लगी। उससे उठा न गया तो मैंने सहारा देकर उठा दिया और गोद में उठाकर बाथरूम ले गया। फिर नहा-धोकर वापस आए तो मैंने उसे दूसरे कपड़े दिए डालने के लिए।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी रौनक थी। फिर उस दिन हमने दोबारा सेक्स नहीं किया क्योंकि बारिश कम हो चुकी थी और 6:30 बज गए थे। फिर मैंने पलक के डैडी को फोन किया कि आकर ले जाएँ। वो बोले, “बेटा तू खुद ही छोड़ जा।” फिर मैं उसे छोड़ने चला गया। वो रिलैक्स होकर चल नहीं पा रही थी लेकिन उसने एडजस्ट कर लिया था। फिर उसे घर छोड़कर मैं वापस आ गया और बाहर खाना खाने चला गया। 8 बजे खाना खाकर घर आकर सो गया। दोस्तों, उसके बाद भी मैंने पलक के साथ बहुत मजे किए। लेकिन वो बाद में बताऊँगा।
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