Sexy Story
मेरा नाम गौतम है, 19 साल का लड़का हूँ। मेरे पापा अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, इसलिए घर में सिर्फ मै और मेरी माँ ही ज्यादातर मौजूद रहते हैं। माँ 37 साल की बहुत ही खूबसूरत औरत है, उसके बड़े-छोटे कर्व्स, गहरी क्लीवेज और टाइट ब्लाउज में उभरते बूब्स किसी को भी दीवाना बना सकते हैं। Sexy Story
घर के ऊपर वाले फ्लोर पर दिलीप अंकल रहते हैं, जो 36 साल के किरायेदार हैं। उनकी बीवी मायके गई हुई थी। रात के करीब 10 बजे माँ ने दिलीप के लिए खाना ऊपर ले जाने का फैसला किया। जब वह उनके कमरे के पास पहुँची, तो देखा कि दरवाजा थोड़ा सा खुला था। माँ ने अंदर झाँका तो उनकी आँखें फट गईं।
दिलीप अपनी पैंट नीचे करके बैठकर अपने मोटे, लंबे लंड को हाथ से सहला रहे थे। उनका लंड इतना बड़ा और मोटा था कि माँ को देखकर साँस रुक गई। वह कुछ पल तक चुपचाप खड़ी देखती रही, फिर धीरे से दरवाजे को खटखटाया। दिलीप का चेहरा रंग बदल गया। वह जल्दी से अपने लंड को छुपाने की कोशिश करने लगे, लेकिन समझ गए कि माँ ने सब देख लिया है।
दिलीप: अरे भाभी जी… आप कब आईं? मुझे तो पता ही नहीं चला!
माँ मुस्कुराते हुए अंदर आईं और बोलीं,
माँ: आप अपने काम में इतने बिजी थे, आपको कैसे पता चलता? लगता है आपको अपनी बीवी की बहुत याद आ रही थी।
दिलीप शर्माते हुए बोला,
दिलीप: हाँ भाभी जी… याद तो बहुत आती है। रोज रात को उनके साथ करता हूँ, अब आदत हो गई है। जब तक मेरा निकल न जाए, तब तक बेचैन रहता हूँ। सॉरी… दरवाजा बंद करना भूल गया था।
माँ ने हाथ में रखा थाली आगे बढ़ाया और कहा,
माँ: कोई बात नहीं। ये लीजिए, आपके लिए खाना लाई हूँ। और कुछ चाहिए तो बता देना।
दिलीप ने माँ को गहरी नजर से देखा और धीरे से बोला,
दिलीप: भाभी जी… आप बहुत खूबसूरत हैं। भाई साहब को आपके साथ हाथ से करने की जरूरत ही नहीं पड़ती होगी।
माँ का चेहरा लाल हो गया। वह बोलीं,
माँ: ये आप कैसी बातें कर रहे हैं?
दिलीप ने आगे बढ़कर कहा,
दिलीप: भाभी जी, अगर आप बुरा न मानें तो एक बात बोलूँ?
माँ: हाँ हाँ, बोलिए।
दिलीप: आप मेरी मदद करेंगी? मेरा लंड बहुत दर्द कर रहा है। रोज अपनी पत्नी के साथ सेक्स करता हूँ, अब आदत पड़ गई है। जब तक मेरा निकल न जाए, तब तक मैं बिल्कुल बेचैन रहता हूँ।
माँ: आप कहना क्या चाहते हैं? मैं समझी नहीं।
दिलीप ने धीरे से कहा,
दिलीप: बस एक बार… आप अपने कोमल हाथों से मेरा लंड हिला दें। जल्दी ही शांत हो जाएगा। प्लीज भाभी जी… सिर्फ हाथ का स्पर्श चाहिए।
माँ पहले तो गुस्से से बोलीं,
माँ: आप पागल तो नहीं हो गए? मैं शादीशुदा औरत हूँ! आप मुझे समझ क्या रहे हैं?
दिलीप ने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए कहा,
दिलीप: मैं आपके साथ सेक्स करने को नहीं बोल रहा हूँ भाभी जी। बस आपके हाथ का एहसास चाहिए। एक बार मेरा साथ दे दीजिए… प्लीज।
माँ कुछ देर सोचती रहीं। दिलीप और भी ज्यादा गिड़गिड़ाने लगे। आखिरकार माँ ने साँस छोड़ते हुए कहा,
माँ: ठीक है… बस एक बार।
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दिलीप ने तुरंत अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे करके अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाल लिया। माँ की आँखें उसके लंड पर अटक गईं। वह धीरे-धीरे उसके पास गईं और उसके लंड को बड़ी ध्यान से देखने लगीं— उसका रंग गहरा था, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा इतना बड़ा था कि माँ को देखकर मुँह में पानी आ गया।
दिलीप ने धीरे से पूछा,
दिलीप: कैसा लगा भाभी जी मेरा लंड?
माँ मुस्कुराते हुए बोलीं,
माँ: आपका तो बहुत बड़ा है…
दिलीप ने अपना लंड माँ के चेहरे के सामने कर दिया और कहा,
दिलीप: भाभी जी इसे पकड़ लीजिए न… किसका इंतजार कर रही हैं?
माँ ने नीचे की तरफ देखते हुए कहा,
माँ: मेरा बेटा नीचे सो रहा है…
दिलीप: अरे वह सो रहा है भाभी जी, वह ऊपर थोड़ी आएगा। आप पकड़ लीजिए… आपको मजा आएगा।
माँ ने आँखें नीचे करते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया और दिलीप के गरम, मोटे लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया। उसके हाथ का स्पर्श पाते ही दिलीप की साँस रुक गई। माँ धीरे-धीरे उसके लंड को ऊपर-नीचे हिलाने लगीं। दिलीप की आँखें बंद हो गईं और मुँह से धीमी सी सिसकारी निकलने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ: आपका लंड इतना गरम है…
दिलीप: भाभी जी आपके हाथ बहुत कोमल हैं… आपकी उँगलियाँ मेरे लंड को इतना अच्छे से पकड़ रही हैं…
माँ धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाने लगीं। दिलीप का लंड उसके हाथों में और भी सख्त होता जा रहा था। माँ कभी उसके लंड के सुपाड़े को अंगूठे से रगड़तीं, कभी पूरी मुट्ठी से दबाकर हिलातीं। दिलीप की साँसों में गहराई आ गई।
दिलीप: भाभी जी… आप बहुत अच्छे से हिला रही हैं… थोड़ा और जोर से… हाँ बिल्कुल ऐसे…
माँ का चेहरा लाल हो चुका था। वह धीरे से बोलीं,
माँ: आपका लंड इतना बड़ा है कि मेरा हाथ भी नहीं भर रहा…
दिलीप ने अपना लंड माँ के हाथों में और आगे कर दिया। माँ अब दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगीं। दिलीप की कमर हिलने लगी और वह धीमी आवाज में मोन करने लगे।
दिलीप: भाभी जी… आपकी उँगलियाँ इतनी नरम हैं… मुझे लग रहा है कि अभी निकल जाएगा…
माँ ने स्पीड और बढ़ा दी। दिलीप का लंड उसके हाथों में फड़फड़ा रहा था। आखिरकार दिलीप की कमर अकड़ गई और उसने जोर से सिसकारी ली। उसके लंड से गरम-गरम कम की मोटी-मोटी बूँदें निकलकर माँ के हाथों पर गिरने लगीं। माँ ने हाथ नहीं हटाया और पूरा कम निकलने तक हिलाती रहीं। दिलीप धीरे-धीरे शांत हुआ। माँ ने अपने हाथ से उसका कम साफ किया और मुस्कुराते हुए कहा,
माँ: अब ठीक हो गया न?
दिलीप ने धीरे से कहा,
दिलीप: भाभी जी… आपने मेरी जान बचा ली। कल फिर आएंगी न?
माँ ने आँखें झुकाते हुए कहा,
माँ: देखेंगे…
नीचे मैं अपने कमरे में सो रहा था, बिल्कुल अनजान कि उसकी हॉट माँ अभी-अभी ऊपर दिलीप के लंड को अपने हाथों से हिला चुकी थीं। रात के करीब 2 बजे माँ अपने कमरे में लेटी हुई थीं। नीचे मैं अपने कमरे में गहरी नींद में था। माँ का फोन वाइब्रेट किया। वह उठकर देखा तो दिलीप का मैसेज था।
दिलीप: भाभी जी… आपकी याद आ रही है।
माँ: तो मैं क्या करूँ?
दिलीप: अगर आप कहें तो मैं आपके पास आ जाऊँ।
माँ: नहीं, कोई जरूरत नहीं है।
दिलीप: मेरा लंड फिर से हार्ड हो चुका है।
माँ: तो खुद ही शांत कर लीजिए।
दिलीप: आपकी मदद चाहिए। प्लीज एक बार अपने कमरे में आने दीजिए न।
माँ: आप पागल हो गए हैं क्या? मेरा बेटा नीचे सो रहा है।
दिलीप: वह तो अपने कमरे में सो रहा है न। मैं आपके कमरे में आकर अंदर से दरवाजा बंद कर दूँगा।
माँ: अगर वह जाग गया तो बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी।
दिलीप: कुछ नहीं होगा। अंदर दरवाजा लॉक रहेगा तो कुछ नहीं होगा। वैसे भी वह सो रहा है, सुबह ही उठेगा।
दिलीप के बार-बार जिद करने पर माँ ने फाइनली हाँ कर दी।
माँ: ठीक है… आओ।
दिलीप तुरंत नीचे आया। माँ ने दरवाजा खोला। दिलीप अंदर आते ही माँ ने कहा,
माँ: अरे दरवाजा तो बंद कर दीजिए।
दिलीप ने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और माँ के बगल में लेट गया।
दिलीप: थैंक यू भाभी जी।
दिलीप ने धीरे से माँ को देखा और बोला,
दिलीप: आपको भाई साहब की याद आ रही है न?
माँ: नहीं, ऐसा नहीं है। बस ऐसे ही नींद नहीं आ रही थी।
दिलीप ने अपनी पैंट नीचे की और अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया।
दिलीप: भाभी जी… आपके हाथ में जाने को बेताब है।
माँ ने तुरंत उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगीं। दिलीप की साँस तेज हो गई।
दिलीप: भाभी जी एक बात बोलूँ… आप बुरा तो नहीं मानोगी?
माँ: क्या बात है बोलिए।
दिलीप: क्या मैं आपके चुचियों को पकड़ सकता हूँ?
माँ ने आँख दिखाते हुए कहा,
माँ: आपका दिमाग खराब है क्या? मैं किसी की पत्नी हूँ।
दिलीप ने हाथ जोड़कर कहा,
दिलीप: मैं जानता हूँ लेकिन मुझे मेरी पत्नी की बहुत याद आ रही है। एक बार अपने चुचियों के साथ खेल लेने दीजिए न।
माँ पहले मना करती रहीं लेकिन दिलीप के बार-बार जिद करने पर वह मान गईं।
माँ: अच्छा ठीक है… लेकिन थोड़ी देर बस।
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दिलीप खुश होते हुए माँ के कपड़ों के ऊपर से ही उनकी बड़ी-बड़ी चुचियों को दबाने लगे। माँ की साँस धीरे-धीरे तेज होने लगी। दिलीप ने धीरे से माँ के ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया और उनकी नंगी, गरम चुचियाँ बाहर निकाल लीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ: दिलीप… मत कीजिए।
लेकिन दिलीप ने उनकी एक चूची को मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। माँ की कमर हिलने लगी।
माँ: भाई साहब… बस कीजिए अब। जाइए यहाँ से।
दिलीप ने मुँह हटाकर कहा,
दिलीप: अरे भाभी जी अभी मेरा लंड शांत कहाँ हुआ है।
माँ दिलीप के लंड को लगातार जोर-जोर से हिलाती रहीं। दिलीप माँ की दोनों चुचियों को मुँह में लेकर चूस रहे थे। माँ की साँसें तेज हो रही थीं। उनके हाथ दिलीप के लंड पर तेज होते जा रहे थे।
दिलीप: भाभी जी आपके हाथ इतने नरम हैं… और आपकी चुचियाँ इतनी बड़ी और नरम हैं… मैं इनको चूसके ही मर जाऊँ।
माँ: बस… थोड़ा और… जल्दी शांत हो जाइए।
दिलीप माँ की चुचियों को चूसते हुए उनके निप्पल्स को जीभ से रगड़ रहे थे। माँ की आँखें बंद हो गई थीं। उनका हाथ दिलीप के लंड पर और तेज हो गया।
दिलीप: भाभी जी… मैं अब निकलने वाला हूँ।
माँ ने और जोर से हिलाया। दिलीप की कमर अकड़ गई और उनका गरम कम माँ के हाथों पर निकल पड़ा। माँ ने हाथ नहीं हटाया और पूरा कम निकलने तक हिलाती रहीं।
दिलीप धीरे-धीरे शांत हुआ। माँ ने धीरे से कहा,
माँ: अब जाइए… वरना सुबह हो जाएगी।
दिलीप ने दरवाजा खोला और धीरे से ऊपर चला गया। माँ अकेली अपने कमरे में लेटी हुई थीं, उनके हाथ अभी भी दिलीप के कम से गीले थे। रात के करीब 2 बजे वाली मुलाकात के बाद अगले दिन सुबह 11 बजे मैं कॉलेज के लिए निकल गया।
घर में अब सिर्फ माँ और दिलीप ही थे। दिलीप ने ऊपर से धीरे से नीचे आने का फैसला किया। वह किचन की तरफ बढ़ा जहाँ माँ अपनी साड़ी को ठीक करते हुए सुबह का काम कर रही थीं। उनकी पीठ दिलीप की तरफ थी। दिलीप तुरंत उनके पीछे जाकर उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
माँ: अरे भाई साहब… आप ये क्या कर रहे हैं?
दिलीप ने उनकी चिकनी गोरी कमर पर अपना हाथ फेरते हुए कहा,
दिलीप: अपनी प्यारी भाभी जी को प्यार कर रहा हूँ। आप मेरी इतनी मदद करती हैं उसके लिए थैंक यू भाभी जी।
अब दिलीप का हाथ धीरे-धीरे माँ की कमर से ऊपर की तरफ बढ़ा और उनकी बड़ी चुचियों को कपड़े के ऊपर से ही दबाने लगा। उनका हार्ड और मोटा लंड माँ की गाँड से सट गया था। माँ को वह साफ महसूस हो रहा था।
माँ: आज आप ऑफिस नहीं गए क्या?
दिलीप: नहीं भाभी जी… आज थोड़ा लेट से जाना है। पहले आपको थोड़ा टाइम देना जरूरी था।
दिलीप ने अब ओपनली माँ की चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया। माँ की साँस तेज हो गई।
माँ: आआह्ह्ह भाई साहब… ये आप क्या कर रहे हैं? मैं किचन में काम कर रही हूँ। यहाँ ये सब नहीं करते।
दिलीप: तो चलिए न बेडरूम में चलते हैं।
माँ: अरे मुझे अभी काम है… आप बाद में आइएगा।
दिलीप: बाद में मौका नहीं मिलेगा भाभी जी। अभी हम दोनों घर में अकेले हैं। खुल कर मजे ले सकते हैं।
दिलीप ने माँ को अपनी तरफ घुमा दिया और उनके होठों पर अपने होठ रख दिए। पहले माँ ने थोड़ा मना किया लेकिन दिलीप ने उनके नीचे वाले होंठ को अपने मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे। उनका एक हाथ माँ की गाँड पर चला गया और जोर से दबाने लगे।
माँ: हम्म्म भाई साहब… ये आप क्या कर रहे हैं? मैं आपकी बीवी नहीं हूँ। ये सब सिर्फ बीवी के साथ किया जाता है।
दिलीप: मेरी भोली भाभी जी… आजकल ऐसा कुछ नहीं है। आपके पति इतने दिन तक बाहर रहते हैं और पक्का उनको भी शांत करने के लिए कोई न कोई होगा। मेरी बीवी का भी कोई न कोई साथी होगा। आजकल ये आम बात है। हर औरत को संतुष्टि चाहिए जो सिर्फ पति नहीं दे सकता।
माँ: लेकिन ऐसा होना ठीक नहीं है।
दिलीप: आप मेरी बात को समझिए और मेरे साथ मजे कीजिए। मैं वादा करता हूँ अगर आपको मेरे साथ मजा नहीं आया तो मैं आपके पास कभी नहीं आऊँगा।
दिलीप ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया।
दिलीप: देखिए भाभी जी… ये कितना हार्ड हो चुका है। इसे पकड़िए और इसके साथ मजे लीजिए।
माँ ने तुरंत दिलीप का गरम लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगीं। दिलीप ने उनके होठों पर फिर से किस की और माँ ने भी अब जवाब देना शुरू कर दिया। दिलीप माँ की गाँड को जोर-जोर से दबाए जा रहे थे।
दिलीप ने माँ की साड़ी को नीचे से उठाना शुरू किया।
माँ: ये क्या कर रहे हैं आप?
दिलीप: भाभी जी आपको मजे देने की कोशिश कर रहा हूँ। प्लीज एक बार करने दीजिए न।
माँ मुस्कुराते हुए बोलीं,
माँ: अच्छा ठीक है… लेकिन ऊपर से ही करिएगा।
दिलीप खुश हो गया। उसने माँ की साड़ी ऊपर उठाई और उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगा। दिलीप ने तुरंत नोटिस किया कि माँ की पैंटी उनके चूत के रस से पूरी तरह गीली हो चुकी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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दिलीप: भाभी जी… आपको मजा तो आ रहा है न? देखिए आपकी चूत जोश से कितनी गीली हो चुकी है।
माँ शर्माते हुए बोलीं,
माँ: अरे भाई साहब… आपका इतना तगड़ा लंड मेरे हाथ में इतने देर से है तो किसी की भी पैंटी गीली हो जाएगी।
दिलीप ने अब माँ की पैंटी में हाथ डाल दिया और उनकी गीली गरम चूत पर अपनी उँगली फेरने लगा।
माँ: अरे नहीं भाई साहब… मैंने मना किया था सिर्फ ऊपर से ही कीजिए।
दिलीप: अरे भाभी जी… आप कितनी जवान हैं। और जवानी का मजा खुल कर लीजिए न। अपने मन को दबाइए मत।
दिलीप ने माँ की पैंटी को नीचे करना शुरू किया। माँ ने रोकने की कोशिश की लेकिन उनके अंदर का नशा इतना बढ़ चुका था कि वह रोक न पाईं।
माँ: अरे भाई साहब… आआह्ह्ह नाहीई…
दिलीप: भाभी जी अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। आपकी चूत की सुगंध मुझे बेताब कर रही है।
माँ: भाई साहब… मेरे अंदर की काम वासना को आप जगा रहे हैं जो सालों से दबी हुई थी।
दिलीप ने माँ की गीली चूत पर अपना हाथ लगाया और जोर-जोर से रगड़ने लगा।
दिलीप: भाभी जी आपकी चूत कितनी गरम है… हम्म।
माँ: आज पहली बार किसी ने मेरी चूत को हाथ लगाया है मेरे पति के अलावा। ये आपका कैसा जादू कर दिया है कि मैं आपको मना भी नहीं पाई। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी चूत को ऐसे कोई टच करेगा… आआह्ह्ह स्स्स्ह्ह।
दिलीप ने अब माँ की चूत में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा। माँ की आँखें जोश से बंद होने लगीं। वह पूरी तरह से कामुक हो गई थीं। दिलीप ने उनकी चूत को अपनी उँगलियों से जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद माँ की चूत से पानी निकलने लगा और दिलीप का हाथ उसके रस से गीला हो गया। दिलीप ने अपना हाथ मुँह में ले लिया और उसका रस चाटने लगा। माँ उन्हें देखकर मुसकुराईं और उन्होंने दिलीप का लंड और जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। दिलीप का गाढ़ा कम निकलने लगा।
माँ: आपकी मलाई बहुत गाढ़ी निकलती है… हम्म्म।
दिलीप: हाँ भाभी जी… मेरी बीवी भी यही कहती है। वह तो मेरी मलाई को चाट जाती है। क्या आपने अपने पति की मलाई कभी चाटी है?
माँ: नहीं… मैंने ऐसा नहीं किया।
दिलीप: आज आपको मजा आया कि नहीं भाभी जी?
माँ मुस्कुराते हुए बोलीं,
माँ: हाँ… आज काफी दिनों बाद इतना मजा आया। वरना मैं तो ये सब भूल ही गई थी।
दोनों धीरे-धीरे शांत हुए। माँ ने अपनी पैंटी ठीक की और दिलीप ने अपना लंड अंदर किया। दिलीप ने माँ को एक और किस दी और धीरे से ऊपर अपने फ्लोर पर चला गया। माँ किचन में अकेली रह गईं, उनकी चूत अभी भी गीली थी और मन में नए जोश का एहसास था।
रात के करीब 12 बज रहे थे। गौतम अपने कमरे में गहरी नींद में सो चुका था, उसे पता भी नहीं था कि घर के ऊपर वाले हिस्से में क्या होने वाला है। दिलीप, जो आज ऑफिस देर से गया था, अभी-अभी घर लौटा था। थका हुआ होने के बावजूद, उसके दिमाग में सिर्फ एक ही चीज चल रही थी.
माँ की वह गीली गरम चूत और उनका वह कामुक अंदाज जो उसने दोपहर में देखा था। माँ ने, जो अब दिलीप की आदत बन चुकी थीं, उनके लिए खाना तैयार किया और ट्रे लेकर ऊपर उनके कमरे की तरफ बढ़ीं। जैसे ही माँ ने कमरे में कदम रखा, दिलीप की नजरें उनकी खूबसूरत काया पर टिक गईं।
दिलीप: अरे भाभी जी, मैं नीचे आ जाता… आप क्यों परेशान हुईं इतनी रात को ऊपर आकर?
माँ ने एक हल्की मुस्कान के साथ ट्रे टेबल पर रखी और जाने के लिए मुड़ीं।
माँ: अरे कोई बात नहीं, आप बस खाना खा लीजिए। मैं चलती हूँ, मुझे भी सोना है।
लेकिन दिलीप ने उन्हें जाने नहीं दिया। जैसे ही माँ मुड़ने लगीं, दिलीप ने तेजी से आगे बढ़कर उन्हें पीछे से अपनी मजबूत बाँहों में जकड़ लिया। उसने अपने हाथ माँ की पतली कमर में डाले और उनके नरम शरीर को अपने से चिपका लिया। दिलीप ने अपना चेहरा माँ की गर्दन के पास ले जाकर वहाँ गहरे और गरम किस करने लगे। माँ की साँस फूलने लगी और उन्होंने थोड़ा झटकने की कोशिश की।
माँ: अरे… पागल हो गए हैं क्या? बेटा अभी जाग रहा होगा… अगर वह उठ गया तो क्या होगा?
दिलीप ने उनकी गर्दन पर एक और जोर का चूसकर निशान बनाया और धीरे से बोला,
दिलीप: आप बस यहीं रुकिए भाभी जी… मैं अभी देखकर आता हूँ।
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दिलीप तुरंत नीचे मेरे कमरे में गया। उसने देखा कि मैं गहरी नींद में खर्राटे ले रहा था। यह देखकर दिलीप के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आई। वह तेजी से वापस ऊपर अपने कमरे में आया और माँ को देखा, जो अभी भी वहाँ खड़ी उनका इंतजार कर रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिलीप: भाभी जी… वह गहरी नींद में सो रहा है। अब कोई हमें डिस्टर्ब नहीं करेगा। अब आप आइए मेरी बाँहों में।
दिलीप ने बिना वक्त गवाए माँ को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को अपने होंठों से जोरदार तरीके से टकराया। वह माँ के होठों को इतनी शिद्दत से चूसने लगे जैसे कोई प्यासा इंसान पानी पीता है। माँ की हिम्मत जवाब दे रही थी और वह दिलीप के इस जनून में बहने लगीं।
दिलीप का हाथ अब माँ के ब्लाउज की तरफ बढ़ा। उसने धीरे-धीरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए और उनकी भरी-भरी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने लगा। माँ के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
माँ: आआह्ह्ह… हम्म… भाई साहब…
दिलीप ने पीछे से ब्रा का हुक खोला और एक झटके में ब्रा को निकालकर बिस्तर पर फेंक दिया। माँ की बड़ी और गोरी चुचियाँ अब दिलीप के सामने नंगी थीं, जो जोश से उभरी हुई थीं। इस बार माँ ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि उनके गले में अपनी बाँहें डाल दीं।
दिलीप ने माँ को उठाकर बेड पर लिटा दिया। उसने माँ की दोनों चुचियों को अपने मुँह में लेने लगे और उनके सख्त निप्पल्स को जोर-जोर से चूसने लगा। साथ ही साथ, उसका एक हाथ माँ की साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसकाने लगा।
माँ: आआह्ह्ह्ह… भाई साहब… क्या कर रहे हैं… बेटा… बेटा जाग सकता है…
दिलीप ने उनके निप्पल से मुँह हटाया और उनकी आँखों में देखते हुए बोला,
दिलीप: अरे भाभी जी, मैंने अभी देखकर आया हूँ, वह गहरी नींद में सो रहा है। आज रात सिर्फ मैं हूँ और आप हैं। बस मजे कीजिए।
दिलीप ने एक ही झटके में साड़ी को ऊपर तक खिसका दिया। जैसे ही साड़ी ऊपर गई, दिलीप की आँखें फटी की फटी रह गईं। माँ ने आज पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी नंगी, गोरी और गुलाबी चूत एकदम साफ दिख रही थी। दिलीप ने जैसे ही अपना हाथ उनकी चूत पर रखा, उसने महसूस किया कि वह पहले से ही गीली और चिपचिपी हो चुकी थी।
दिलीप: वाह भाभी जी… आपने तो आज पैंटी भी नहीं पहनी। आप कितनी बेसब्र हैं मेरे लिए।
दिलीप अब धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरका और माँ की टाँगों के बीच में जगह बनाई।
माँ: ये… ये आप क्या कर रहे हैं?
दिलीप: भाभी जी… मैं आपकी इस प्यारी और गीली चूत को चूसना चाहता हूँ। मुझे इसका स्वाद चाहिए।
माँ ने थोड़ा शर्माते हुए और घबराते हुए कहा,
माँ: लेकिन भाई साहब… ये सही नहीं है। बस कीजिए अब… मैं जा रही हूँ।
माँ ने उठने की कोशिश की, लेकिन दिलीप ने उनकी टाँगों को पकड़कर रखा और गिड़गिड़ाते हुए बोला,
दिलीप: भाभी जी, प्लीज… मैं वादा करता हूँ कि मैं आपकी चूत में अपना लंड नहीं डालूँगा जब तक आप खुद नहीं बोलेंगी। लेकिन प्लीज, एक बार मुझे अपनी चूत का स्वाद चखने दीजिए न। मैं पागल हो रहा हूँ आपके लिए।
माँ ने दिलीप के चेहरे पर वह तड़प और जनून देखा। उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आई और वह वापस बेड पर लेट गईं, अपनी टाँगों को थोड़ा और फैलाया। दिलीप के लिए यह एक “ग्रीन सिग्नल” था। दिलीप ने बिना एक सेकंड वेस्ट किए अपना मुँह माँ की गीली चूत की तरफ ले गया। उसने अपनी लंबी जीभ निकाली और माँ की चूत की दरारों को नीचे से ऊपर तक चाटना शुरू किया।
माँ: आआह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… भाई साहब… स्स्स्ह्ह…
माँ के मुँह से जोर-जोर से सिसकारियाँ निकलने लगीं। जब दिलीप की जीभ उनके क्लिटोरिस (चूत की नोक) पर लगने लगी, तो माँ ने अपनी कमर ऊपर उठाई और उनके बालों को कसकर पकड़ लिया। दिलीप ने अपनी जीभ को चूत के अंदर तक घुसाया और उसे जोर-जोर से चाटने लगा। माँ पूरी तरह से कामुक हो चुकी थीं और उनकी चूत से रस की धार बहने लगी, जिसे दिलीप बड़े मजे से चाट रहा था।
दिलीप अब पूरी तरह से माँ की गीली चूत का मजा ले रहा था। उसने अपनी जीभ से उनके क्लिटोरिस को इतना चाटना शुरू किया कि माँ की साँसें तेज हो गईं और वह बेड पर तड़पने लगीं। लेकिन दिलीप की भूख अभी खत्म नहीं हुई थी। उसने अपनी जीभ को थोड़ा पीछे किया और अपनी दो उँगलियाँ माँ की गरम और चिपचिपी चूत के अंदर घुसा दीं।
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माँ: आआह्ह्ह्ह! भाई साहब… उँगलियाँ… ओह्ह्ह गॉड… आआह्ह्ह!
जैसे ही दिलीप की उँगलियाँ उनकी तंग चूत के अंदर गईं, माँ ने एक जोर की सिसकारी भरी। दिलीप ने अपनी उँगलियों को अंदर-बाहर तेजी से चलाना शुरू किया। वह उँगलियों से उनकी अंदरूनी दीवारों को कुरेद रहा था, जिससे माँ का शरीर झटके खाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिलीप ने अपनी उँगलियों की रफ्तार बढ़ा दी और साथ ही साथ अपने मुँह से उनके निप्पल्स को चूसना शुरू किया। माँ की हालत खराब हो रही थी। उनका पूरा शरीर काँप रहा था और वह अपने पैरों को मोड़ रही थीं। उन्हें महसूस हो रहा था कि उनके अंदर एक तूफान उठ रहा है।
माँ: आआह्ह्ह… बस… भाई साहब… मैं… मैं नहीं सह पाऊँगी… ओह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह!
कुछ ही पलों में, माँ की उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई। उनकी चूत ने एक जोर का झटका लिया और उनका गरम-गरम पानी धारों की तरह बहने लगा। माँ एक जोर की चीख के साथ ऑर्गेज्म तक पहुँच गईं और उनका शरीर ढीला पड़ गया।
दिलीप ने एक पल के लिए भी देरी नहीं की। जैसे ही माँ ने अपना पानी छोड़ा, दिलीप ने अपना मुँह वहाँ जमाए रखा और उस सारे रस को अपने मुँह में भर लिया। वह एक-एक बूँद को चाटने लगा, जैसे कोई अमृत पी रहा हो। दिलीप ने अपना मुँह हटाया और अपने होठों पर लगे रस को चाटते हुए बोला,
दिलीप: आआह्ह्ह भाभी जी… आपकी चूत का स्वाद तो काफी नमकीन है… मजा आ गया इसे पीकर। आपकी ये गीली चूत मुझे पागल कर रही है।
माँ अभी भी ऑर्गेज्म के असर से हाँफ रही थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और चेहरा सुकून और शर्म से लाल हो चुका था।
माँ: हाआह… हाआह… आप… आप कितने कामुक हैं भाई साहब…
दिलीप ने देखा कि माँ अब पूरी तरह से खुल चुकी हैं और उनका शरीर और ज्यादा माँग रहा है। दिलीप ने तुरंत अपनी पैंट की चेन खोली और अपना बड़ा, सख्त और नसों से भरा हुआ लंड बाहर निकाल लिया। उसका लंड जोश में एकदम खड़ा था और उसकी नोक से थोड़ा सा प्री-कम निकल रहा था। दिलीप ने अपना लंड माँ की गीली चूत के होठों पर रगड़ना शुरू किया। माँ ने जब उस सख्त लंड का स्पर्श महसूस किया, तो उनकी साँसें फिर से तेज हो गईं।
दिलीप: भाभी जी, अब देखिए मेरा लंड आपकी इस प्यासी चूत को कैसे भरता है। अब मैं इसे अंदर डालने वाला हूँ।
माँ ने शर्माते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उन्होंने अपने पैरों को और फैलाया, जो इस बात का इशारा था कि वह अब दिलीप के लंड को अपने अंदर महसूस करना चाहती हैं। दिलीप ने अपना सख्त लंड माँ की गीली और फिसलती हुई चूत के मुँह पर जोर से रगड़ा। माँ ने जब उस लंड की गरमी और सख्ती को महसूस किया, तो उनका शरीर एक झटके से काँप उठा। वह डर और उत्तेजना के बीच फँसी हुई थीं।
माँ: नहीं… नहीं भाई साहब… प्लीज… अंदर मत डालिए… ये बहुत गलत हो जाएगा। अगर किसी को पता चला तो… ओह्ह्ह… प्लीज रुक जाइए!
दिलीप ने एक शैतानी मुस्कान के साथ माँ की आँखों में देखा और उनकी कमर को कसकर पकड़ लिया। उसने अपना लंड एक बार फिर जोर से उनकी चूत की दरारों में रगड़ा।
दिलीप: भाभी जी, गलत क्या है? इस कमरे में सिर्फ मैं और आप हैं। और रही बात गलत होने की… तो भाभी, आपके अंदर जो ये प्यास है, जो आग लगी है, अगर वह आज नहीं बुझी तो वह ज्यादा गलत हो जाएगा। आपका शरीर चीख-चीख कर मेरा लंड माँग रहा है।
माँ ने सिसकारी भरी,
माँ: आआह्ह्ह… लेकिन…
दिलीप ने उनके होठों को एक गहरी किस के साथ चुप करा दिया और धीरे से उनके कान में फुसफुसाया,
दिलीप: आप बस मेरा साथ दीजिए भाभी जी… आज सब भूल जाइए। आज रात सिर्फ आप और मैं हैं। बस आँखें बंद कीजिए और फुल एन्जॉय कीजिए। मैं आपको वह मजा दूँगा जो आपने आज तक नहीं महसूस किया होगा।
दिलीप की बातों ने माँ के दिमाग पर जादू कर दिया। उनका डर अब पूरी तरह से कामुकता में बदल चुका था। माँ ने हार मान ली और अपनी टाँगों को और ज्यादा फैलाया, अपने घुटनों को दिलीप के कंधों तक ले आईं, जिससे उनकी गुलाबी चूत एकदम खुलकर सामने आ गई। दिलीप ने बिना किसी देरी के, अपने लंड की नोक को माँ की गीली चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड उनकी तंग चूत के अंदर उतार दिया।
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माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!
माँ के मुँह से एक जोर की चीख निकली, लेकिन उन्होंने तुरंत अपना हाथ अपने मुँह पर रख लिया ताकि नीचे गौतम न जाग जाए। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं जब उन्होंने महसूस किया कि दिलीप का बड़ा और मोटा लंड उनकी चूत की गहराइयों को चीरते हुए एकदम अंदर तक पहुँच गया है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिलीप: ओह्ह्ह गॉड… भाभी जी… आपकी चूत कितनी टाइट और गरम है… मजा आ गया!
दिलीप ने थोड़ी देर के लिए वहीं रुककर माँ को उस सख्ती को महसूस करने दिया। माँ की साँसें उखड़ रही थीं, उन्हें महसूस हो रहा था कि उनका अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह से भर चुका है। फिर दिलीप ने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला.
लगभग नोक तक, और फिर एक जोरदार धक्के के साथ वापस अंदर घुसा दिया। छप… छप… छप… गीली चूत और सख्त लंड के टकराने की आवाज कमरे में गूँजने लगी। दिलीप ने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू कर दी। वह पूरी ताकत से माँ की चूत में लंड मारना शुरू किया।
माँ: म्मम्ह्ह्ह… आआह्ह्ह… भाई साहब… ओह्ह्ह गॉड… बहुत बड़ा है… आआह्ह्ह… मुझे बहुत मजा आ रहा है… और जोर से… और जोर से मारिए!
माँ अब पूरी तरह से बह चुकी थीं। वह बेड की चादर को कसकर पकड़े हुए थीं और हर धक्के के साथ उनकी चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। दिलीप ने एक हाथ से माँ की एक चूची को जोर से मसला और दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़कर उन्हें और तेजी से ठोंकने लगा।
दिलीप: भाभी जी… आपकी चूत मेरा लंड ऐसे जकड़ रही है जैसे छोड़ना ही नहीं चाहती। आज मैं आपको पूरी तरह से निचोड़ दूँगा!
दिलीप अब पूरी तरह से जोश में आ चुका था। उसने माँ की टाँगों को और ज्यादा फैलाया और उन्हें अपने कंधों पर रख लिया, जिससे माँ की चूत पूरी तरह खुल गई और दिलीप का लंड सीधा उनके गर्भ-गृह से टकराने लगा। थप… थप… थप… दिलीप ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। वह इतनी तेजी से लंड मार रहा था कि माँ का पूरा शरीर बेड पर उछल रहा था। माँ की चीखें अब सिसकियों में बदल चुकी थीं।
माँ: ओह्ह्ह… आआह्ह्ह… भाई साहब… आप तो मुझे चीर देंगे… म्मम्ह्ह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… आआह्ह्ह!
दिलीप ने उनकी कमर को कसकर पकड़ा और उन्हें थोड़ा ऊपर उठाकर और जोर से ठोंकना शुरू किया। हर धक्का इतना सख्त था कि माँ की चुचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। दिलीप ने एक हाथ से माँ का गला हल्के से दबाया और दूसरे हाथ से उनकी एक चूची को उँगलियों से मसलने लगा, जिससे माँ को एक साथ दो जगह से मजा मिल रहा था।
दिलीप: भाभी जी, अभी तो शुरुआत है। आज मैं आपको हर तरीके से चुदाऊँगा। आप बस महसूस कीजिए कि मेरा लंड आपकी हर एक नस को छू रहा है।
दिलीप ने माँ को पलटा दिया और उन्हें ‘डॉगी स्टाइल’ पोजीशन में कर दिया। माँ अपने घुटनों और हाथों के बल झुक गईं, उनकी भरी और गोल हिप्स दिलीप के सामने एकदम खुली थीं। दिलीप ने पीछे से उनकी हिप्स को जोर से थपथपाया, जिससे एक लाउड छटाक की आवाज आई।
माँ: आआह्ह्ह! ये क्या कर रहे हैं… म्मम्ह्ह्ह…
दिलीप ने बिना वक्त गवाए, अपना लंड पीछे से माँ की टाइट चूत में जोर से घुसा दिया। पीछे से लंड का प्रवेश और भी गहरा था। माँ ने बेड की चादर को अपने दाँतों से पकड़ लिया ताकि वह जोर से न चिल्लाए।
दिलीप: ओह्ह्ह गॉड… पीछे से आपकी चूत और भी ज्यादा टाइट है भाभी! क्या मजा आ रहा है!
दिलीप ने उनकी कमर को पकड़कर उन्हें अपनी तरफ खींचा और तेजी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। छप… छप… छप… गीली चूत और लंड के टकराने की आवाज कमरे में गूँज रही थी। माँ की कमर हर धक्के के साथ पीछे की तरफ झुक रही थी।
माँ: आआह्ह्ह… भाई साहब… पीछे से बहुत मजा आ रहा है… ओह्ह्ह… और जोर से… मुझे पूरा भर दीजिए… आआह्ह्ह!
कुछ देर बाद, दिलीप ने माँ को वापस सीधा किया और उन्हें अपने ऊपर लेटा लिया। अब दिलीप ऊपर था और माँ नीचे। दिलीप ने अपने लंड को निकाला और उसे माँ के क्लिटोरिस पर रगड़ा, जिससे माँ तड़पने लगीं। फिर उसने एक बार फिर से लंड को अंदर उतारा, लेकिन इस बार वह बहुत धीरे-धीरे और गहराई से मूव कर रहा था।
माँ की आँखें बंद थीं और वह बस उस सुकून को महसूस कर रही थीं। दिलीप ने उनके कान को चाटना शुरू किया और धीरे-धीरे उनकी गर्दन पर किस करने लगा, जबकि नीचे उसका लंड माँ की चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। अचानक, दिलीप ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वह अब पागलपन की हद तक लंड मार रहा था। माँ की साँसें तेज हो गई थीं, उनका शरीर काँप रहा था।
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माँ: आआह्ह्ह… मैं… मैं जाने वाली हूँ… ओह्ह्ह गॉड… आआह्ह्ह!
माँ ने दिलीप को कसकर पकड़ लिया और एक जोरदार ऑर्गेज्म के साथ उनकी चूत ने दिलीप के लंड को कसकर जकड़ लिया। उसी पल, दिलीप ने भी एक आखिरी जोरदार धक्का मारा और अपना सारा गरम कम माँ की गहराइयों में छोड़ दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आआआह्ह्ह्ह्ह्ह! दोनों ने एक साथ एक गहरी साँस ली और एक दूसरे के ऊपर गिर गए। कमरे में सिर्फ उनकी तेज साँसों की आवाज आ रही थी। दिलीप ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे माँ की चूत से सफेद कम बाहर निकलने लगा। दिलीप ने मुस्कुराते हुए अपना लंड माँ के चेहरे के पास लाया, जो अभी भी थोड़ा सख्त था और उसकी नोक से थोड़ी मलाई जैसी कम निकल रही थी।
दिलीप: भाभी जी, अब मेरी मलाई का स्वाद चखेंगी?
माँ ने दिलीप की तरफ देखा और एक शर्मीली मुस्कान के साथ बोलीं,
माँ: मैंने कभी चाखा तो नहीं है…
दिलीप ने उनकी आँखों में देखा और लंड को उनके होठों के पास ले जाते हुए कहा,
दिलीप: एक बार इसका स्वाद लेकर देखिए… तो मजा आ जाएगा!
माँ ने दिलीप की बात मानी और धीरे से अपना सिर आगे बढ़ाया। उसने पहली बार दिलीप के सख्त लंड को अपने होठों से छुआ। लंड की गरमी और उसकी नोक से निकलने वाली थोड़ी सी मलाई को महसूस करते ही माँ के अंदर एक अजीब सी उत्तेजना जाग गई। उसने अपने होठों को गोल किया और दिलीप के लंड की नोक को अपने मुँह में ले लिया।
स्लर्प… म्मम्ह्ह… माँ ने धीरे-धीरे लंड को चाटना शुरू किया। उसने अपनी जीभ से लंड की नसों को रगड़ा और फिर पूरे लंड को गहराई तक अपने गले में उतारने की कोशिश की। दिलीप ने एक गहरी आह भरी और माँ के बालों को पकड़कर उसे अपने लंड पर और जोर से दबाने लगा।
दिलीप: ओह्ह्ह… भाभी… आप तो कमाल की ब्लो जॉब दे रही हैं… म्मम्ह्ह्ह… ऐसे ही चाटते रहिए… हाँ… वही…
माँ ने लंड को मुँह में लेकर उसे सक करना शुरू किया, जिससे एक छप-छप की आवाज आने लगी। उसने लंड की नोक को अपनी जीभ से लपेटा और फिर उसे जोर से चूसा। दिलीप का शरीर काँपने लगा और वह बस माँ के इस नए अंदाज का मजा लेने लगा।
कुछ देर तक माँ ने उसके लंड को पूरी तरह से साफ किया और उसका स्वाद लिया, जिसके बाद दोनों ने थोड़ी बातें कीं और दिलीप वापस अपने कमरे में चला गया। अगले दिन, सुबह का वक्त था। गौतम तैयार होकर अपने कॉलेज निकलने की तैयारी कर रहा था।
दिलीप ऊपर अपने कमरे में था, लेकिन उसका ध्यान सिर्फ एक ही चीज पर था—माँ। वह बस इस बात का इंतजार कर रहा था कि कब गौतम घर से बाहर निकले और वह नीचे जा सके। जैसे ही गौतम ने दरवाजा बंद किया और घर से बाहर निकला, दिलीप ने एक सेकंड भी बर्बाद नहीं किया।
वह तुरंत सीढ़ियों से उतरता हुआ नीचे आया। माँ किचन में काम कर रही थीं, लेकिन उनकी नजरें बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थीं। जैसे ही दिलीप किचन में दाखिल हुआ, माँ ने उसे देखा और एक शरारती मुस्कान के साथ बोलीं।
माँ: आप तो बहुत जल्दी आ गए… मुझे लगा शायद आप भूल गए होंगे।
दिलीप ने पीछे से आकर माँ की कमर को कसकर पकड़ लिया और उसके कान के पास फुसफुसाया।
दिलीप: मैं आपको कैसे भूल सकता हूँ भाभी? कल रात से मेरा लंड सिर्फ आपकी उस टाइट चूत के लिए तड़प रहा है। आज तो घर में सिर्फ हम दोनों हैं… आज मैं आपको पूरी तरह से निचोड़ लूँगा।
माँ ने एक गहरी साँस ली और दिलीप की तरफ मुड़कर उसके गले में बाँहें डाल दीं।
माँ: तो फिर इंतजार किस बात का है… मुझे भी वही मजा चाहिए जो कल रात मिला था… लेकिन इस बार मैं कोई रुकावट नहीं बनूँगी।
दिलीप ने बिना वक्त गवाए माँ की साड़ी का पल्लू खींचा और उसे नीचे गिरा दिया। उसने माँ के ब्लाउज के बटन तेजी से खोले और उसकी भरी, गोल चुचियों को बाहर निकाल दिया। दिलीप ने दोनों चुचियों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें जोर-जोर से सक करने लगा।
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माँ: आआह्ह्ह… हाँ… वही… और जोर से… म्मम्ह्ह्ह…
दिलीप ने माँ को उठाकर किचन के स्लैब पर लिटा दिया। उसने माँ की पेटीकोट और अंडरवियर को एक झटके में नीचे खींच दिया, जिससे माँ की गोरी, चमकती हुई चूत पूरी तरह खुल गई। माँ की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। दिलीप ने अपना लंड बाहर निकाला, जो पहले से ही पूरी तरह सख्त और खड़ा था। उसने लंड की नोक को माँ के क्लिटोरिस पर रगड़ा, जिससे माँ तड़पने लगीं।
माँ: भाई साहब… प्लीज… अब और इंतजार नहीं होता… घुसा दीजिए इसे… मुझे आपके लंड की जरूरत है… आआह्ह्ह!
दिलीप ने एक जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लंड माँ की टाइट चूत में उतार दिया। माँ की एक जोरदार चीख निकली, लेकिन इस बार वह दर्द की नहीं, बल्कि सुकून की थी।
माँ: ओह्ह्ह गॉड्ड!!! आआह्ह्ह… कितना बड़ा है… पूरा अंदर तक चला गया… म्मम्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है!
दिलीप ने अपनी रफ्तार बढ़ाई। थप… थप… थप… किचन में उनके शरीरों के टकराने की आवाज गूँजने लगी। दिलीप ने माँ की टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया और पूरी ताकत से लंड मारने लगा। माँ की चुचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं और वह बस सिसकारियाँ भर रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिलीप: भाभी… आज आपकी ये चूत मेरा लंड पी जाएगी… देखिए कैसे कसकर पकड़ा है आपने मेरे लंड को!
माँ: आआह्ह्ह… और जोर से… मुझे और जोर से चुदाइए… मुझे पागल कर दीजिए… ओह्ह्ह… हाँ… वही… गहराई तक… आआह्ह्ह!
घंटों तक यह सिलसिला चलता रहा। दिलीप ने माँ को हर पोजीशन में चुदाया। कभी उसे बेड पर ‘डॉगी स्टाइल’ में करके पीछे से लंड मारा, तो कभी उसे दीवार से टिकाकर उसकी टाँग उठाकर लंड घुसाया। माँ इस बार पूरी तरह खुल चुकी थीं। वह खुद दिलीप की कमर को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच रही थीं ताकि लंड और गहरा जाए।
माँ: ओह्ह्ह… भाई साहब… आप तो कमाल के चुदाई करते हैं… मुझे तो अब इसकी आदत हो गई है… आआह्ह्ह… और तेजी से… और तेजी से!
दिलीप ने माँ को अपने ऊपर लेटा लिया और उसे ‘काउगर्ल’ पोजीशन में लाया। माँ ने खुद दिलीप के लंड को पकड़ा और उसे अपनी चूत में धंसते हुए ऊपर-नीचे होने लगीं। उसका शरीर पसीने से लथपथ था और उसकी आँखें मजा लेते हुए बंद हो रही थीं।
माँ: म्मम्ह्ह्ह… मेरा पूरा अंदर का हिस्सा आपके लंड से भर गया है… आआह्ह्ह… मैं… मैं फिर से जाने वाली हूँ… ओह्ह्ह गॉड!
दिलीप ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और दोनों एक साथ क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ने लगे। दिलीप ने माँ की कमर को जोर से पकड़ा और आखिरी कुछ धक्के इतने सख्त मारे कि माँ का पूरा शरीर काँपने लगा।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!
माँ एक जोरदार ऑर्गेज्म के साथ झटके खाने लगीं और उसकी चूत ने दिलीप के लंड को इतनी जोर से जकड़ लिया कि दिलीप ने भी एक जोरदार चीख मारी और अपना सारा गरम, गाढ़ा कम माँ की गहराइयों में छोड़ दिया।
स्स्ह्ह… स्स्ह्ह… दोनों हाँफ रहे थे। दिलीप ने अपना लंड बाहर निकाला, तो माँ की चूत से सफेद कम का धार बाहर निकलने लगा। दिलीप ने मुस्कुराते हुए अपना लंड माँ के होठों के पास लाया। इस बार लंड की नोक से ढेर सारी सफेद मलाई निकल रही थी।
दिलीप: भाभी जी… अब तो आपने कल रात का वादा याद रखा होगा? अब मेरी मलाई का स्वाद लीजिए।
माँ ने इस बार बिना किसी हिचकिचाहट के, एक शर्मीली लेकिन प्यासी मुस्कान के साथ लंड को अपने मुँह में ले लिया। उसने लंड की नोक को अपनी जीभ से साफ किया और सारी मलाई को चाटकर पी ली।
माँ: (लंड मुँह से निकालते हुए) म्मम्ह्ह्ह… आपने सही कहा था… इसका स्वाद सच में बहुत लाजवाब है… मुझे तो इसकी लत लग गई है।
दिलीप ने माँ को गले से लगाया और दोनों ने घंटों तक उस सुकून का मजा लिया, यह जानते हुए कि अब यह उनका एक गहरा और गंदा राज़ बन चुका है। रात के करीब एक बज रहे थे। पूरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था। मैं अपने कमरे में गहरी नींद में सो चुका था, लेकिन माँ की आँखों में नींद कहाँ थी?
उसका शरीर अभी भी उस दोपहर की गरमी को याद कर रहा था जब दिलीप ने उसे किचन में बुरी तरह निचोड़ा था। दिलीप ने पहले ही माँ को मैसेज करके कह दिया था कि आज रात वह उसे एक खास सरप्राइज देना चाहता है और उसे एक पतली, ट्रांसपेरेंट सिल्क की नाइटी पहनने को कहा था।
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माँ ने वैसा ही किया। उसने एक गहरी लाल रंग की सिल्क नाइटी पहनी थी, जो इतनी पतली थी कि उसके नीचे उसकी गोरी चुचियाँ और उसकी गीली चूत साफ झलक रही थी। उसने कोई अंडरवियर नहीं पहना था, जैसा कि दिलीप ने शर्त रखी थी।
माँ ने धीरे से दिलीप को मैसेज किया: “मैं इंतजार कर रही हूँ… जल्दी आइए।”
कुछ ही मिनटों में, दिलीप दबे पाँव सीढ़ियों से उतरता हुआ माँ के कमरे में दाखिल हुआ। जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया और माँ को उस लाल नाइटी में देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। माँ के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी— एक ऐसी चमक जो सिर्फ एक औरत के चेहरे पर तब आती है जब वह अंदर से पूरी तरह उत्तेजित और प्यासी हो। दिलीप ने एक गहरी साँस ली और माँ के करीब आया।
दिलीप: ओह्ह्ह भाभी… आप तो आज कयामत लग रही हैं। ये नाइटी… म्मम्ह्ह्ह… आपकी गोरी त्वचा इसमें और भी ज्यादा चमक रही है।
माँ ने शर्माते हुए अपनी नजरें नीचे कीं, लेकिन उसके होठों पर एक मुस्कान थी।
माँ: आपने ही तो कहा था ये पहनने को… देखिए, मैं आपकी बात मानती हूँ।
दिलीप ने बिना देर किए माँ की कमर को पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। उसने माँ के होठों को अपने होठों से जोड़ा। यह एक गहरी और भूखी किस थी। दोनों की जीभें एक दूसरे से उलझ गई थीं, और वह एक दूसरे का स्वाद ले रहे थे। दिलीप ने किस करते-करते माँ को बेड की तरफ धकेला और उसे धीरे से लिटा दिया।
दिलीप ने अपने होठों को माँ के गले से नीचे उतारा और उसकी चुचियों पर पहुँच गया। उसने नाइटी के पतले कपड़े को साइड किया और माँ की भरी, गोल चुचियों को अपने मुँह में भर लिया। स्लर्प… म्मम्ह्ह्ह… दिलीप ने माँ की चुचियों को जोर-जोर से सक करना शुरू किया, जिससे माँ की कमर बेड से ऊपर उठने लगी।
माँ: आआह्ह्ह… हाँ… वही… म्मम्ह्ह्ह… आपकी जीभ… ओह्ह्ह गॉड!
दिलीप ने एक चूची को अपने दाँतों से हल्के से काटा और फिर उसे चाटने लगा, जिससे माँ सिसकारियाँ भरने लगीं। उसका पूरा शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। दिलीप ने दोनों चुचियों को बारी-बारी से पिया, जैसे कोई प्यासा आदमी पानी पीता है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर दिलीप ने नाइटी को पूरी तरह ऊपर उठा दिया। माँ की गोरी टाँगों के बीच उसकी गुलाबी, गीली चूत पूरी तरह खुली हुई थी और वहाँ से पानी बह रहा था। दिलीप ने अपना सिर नीचे किया और माँ के क्लिटोरिस को अपनी जीभ से टच किया। लिक… स्लर्प… माँ एक जोरदार चीख मारी और अपने पैरों को दिलीप के सिर के पास मोड़ लिया।
माँ: ओह्ह्ह!!! भाई साहब… वहाँ… हाँ… वही… आआह्ह्ह… आपकी जीभ बहुत गरम है… म्मम्ह्ह्ह!
दिलीप ने पूरी शिद्दत से माँ की चूत को चाटना शुरू किया। उसने अपनी जीभ को माँ की चूत की गहराइयों में उतारा और उसे पूरी तरह साफ करने लगा। माँ पागल हो रही थी, वह बेड की चादर को अपने हाथों से कसकर पकड़ रही थी। दिलीप ने फिर माँ को पलटा और उसे ‘डॉगी स्टाइल’ पोजीशन में कर दिया। उसने माँ की गोरी, गोल गाँड को देखा और उसे जोर से थप्पड़ मारा छटाक!
माँ: आआह्ह्ह!
दिलीप ने माँ की गाँड के बीच के हिस्से (एनस) को चाटना शुरू किया। यह माँ के लिए एक नया अनुभव था। जब दिलीप की जीभ ने उसके पिछले हिस्से को छुआ, तो माँ को एक अजीब सा झटका लगा, लेकिन फिर उसे मजा आने लगा।
माँ: ओह्ह्ह… ये… ये क्या कर रहे हैं… म्मम्ह्ह्ह… बहुत अजीब लग रहा है… लेकिन मजा आ रहा है… आआह्ह्ह!
दिलीप ने उसे पूरी तरह से चाटकर गीला कर दिया। अब माँ की प्यास हद से ज्यादा बढ़ चुकी थी। उसने खुद ही मुड़कर दिलीप को इशारा किया। माँ ने दिलीप का सख्त लंड बाहर निकाला, जो अब तक फूलकर एक डंडे जैसा हो चुका था।
माँ ने लंड की नोक को अपनी जीभ से छुआ और फिर उसे पूरा अपने मुँह में उतार लिया। गल्प… स्लर्प… माँ ने बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से ब्लो जॉब देना शुरू किया। वह लंड को गहराई तक अपने गले में ले जाती और फिर उसे सक करती। दिलीप की आँखें बंद हो गईं और वह बस माँ के मुँह के मजे लेने लगा।
दिलीप: ओह्ह्ह भाभी… आप तो मुझे पागल कर देंगी… अब और नहीं सहा जाता… अब मैं आपको चुदाऊँगा!
दिलीप ने माँ को बेड पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसने अपने लंड की नोक को माँ की गीली चूत पर रगड़ा और फिर एक जोरदार धक्का मारा।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!
लंड पूरा अंदर तक धंस गया था। माँ को ऐसा लगा जैसे उसका पूरा शरीर फट गया हो, लेकिन वह दर्द सुकून में बदल गया। दिलीप ने अपनी रफ्तार बढ़ाई। दिलीप ने एक के बाद एक सख्त धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ माँ की चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं और उसके मुँह से बस “आआह्ह्ह” और “ओह्ह्ह” की आवाजें निकल रही थीं।
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दिलीप: भाभी… आज तो आपकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया है… देखिए कैसे टाइट है ये!
माँ: आआह्ह्ह… और जोर से… मुझे और जोर से चुदाइए… मुझे पूरा भर दीजिए… ओह्ह्ह गॉड… हाँ… वही!
तभी दिलीप ने माँ को एक सरप्राइज दिया। उसने माँ को उठाकर बेड के किनारे पर बिठाया और उसे अपने ऊपर ‘काउगर्ल’ पोजीशन में लाया। लेकिन इस बार, दिलीप ने एक स्पेशल लुब्रिकेंट (ऑयल) का इस्तेमाल किया जो वह अपने साथ लाया था।
उसने माँ की चूत और अपने लंड पर वह ऑयल लगाया, जिससे फ्रिक्शन कम हो गया और लंड मक्खन की तरह अंदर-बाहर होने लगा। माँ को यह सरप्राइज बहुत पसंद आया। उसे महसूस हुआ कि लंड अब पहले से ज्यादा स्मूथ और तेजी से अंदर जा रहा है। वह खुद ही ऊपर-नीचे होने लगी, अपने शरीर को दिलीप के लंड पर रगड़ती हुई।
माँ: ओह्ह्ह… ये क्या लगाया आपने… म्मम्ह्ह्ह… कितना स्मूथ है… आआह्ह्ह… मुझे बहुत मजा आ रहा है… मैं… मैं फिर से जाने वाली हूँ!
दिलीप ने माँ की कमर को पकड़ा और उसे नीचे खींचा, और फिर तेजी से ‘मिशनरी’ पोजीशन में लंड मारना शुरू किया। दोनों का पसीना एक दूसरे से मिल रहा था। कमरे में सिर्फ उनके शरीरों के टकराने की और माँ की चीखों की आवाज गूँज रही थी।
दिलीप: अब आखिरी बार… भाभी… तैयार हो जाइए!
दिलीप ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और आखिरी 10-12 धक्के इतने जोर से मारे कि माँ का पूरा शरीर झटके खाने लगा।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!! ओह्ह्ह गॉड्ड!!!!
माँ एक बहुत बड़े ऑर्गेज्म के साथ काँपने लगी और उसकी चूत ने दिलीप के लंड को इतनी जोर से निचोड़ा कि दिलीप ने भी एक जोरदार चीख मारी और अपना सारा गरम, गाढ़ा कम माँ की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों हाँफ रहे थे। दिलीप ने लंड बाहर निकाला तो माँ की चूत से सफेद कम का धार बाहर निकल रहा था। माँ ने सुकून की साँस ली और दिलीप के सीने पर सिर रख दिया।
माँ: आपने आज मुझे जन्नत दिखा दी… मुझे कभी नहीं लगा था कि चुदाई इतनी सुकून देने वाली होती है।
दिलीप ने उसे किस किया और दोनों ने उस रात को अपनी जिंदगी की सबसे यादगार रात बना लिया। अगली सुबह जब सूरज निकला, तो दिलीप के घर में एक नया मेहमान आया— मनीष। मनीष, दिलीप का बचपन का जिगरी यार था, जो किसी जरूरी काम से शहर आया था और दो-तीन दिनों के लिए दिलीप के यहाँ रुकने वाला था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मनीष एक हट्टा-कट्टा, गोरा और काफी सेक्सी मर्द था, जिसकी आँखों में एक अलग ही शरारत थी। दिन भर दिलीप और मनीष अपने पुराने किस्से याद करने में और काम निपटाने में व्यस्त रहे। लेकिन दिलीप के दिमाग में तो बस माँ का वह लाल नाइटी वाला रूप और उसकी गीली चूत घूम रही थी।
वह मनीष के साथ था, लेकिन उसका मन नीचे माँ के कमरे में था। रात हुई, घर में सन्नाटा छा गया। गौतम अपने कमरे में गहरी नींद में था। दिलीप ने मनीष को अपने कमरे में आराम करने को कहा और खुद दबे पाँव सीधा माँ के कमरे की तरफ निकल गया।
माँ अपने बेड पर लेटी हुई थीं। उन्होंने एक बहुत ही पतली और सेक्सी सैटिन की नाइटी पहनी थी, जो उनके शरीर से चिपकी हुई थी। जैसे ही दिलीप कमरे में दाखिल हुआ, उसने दरवाजा लॉक किया और बिना एक शब्द बोले माँ के बगल में लेट गया। उसने माँ को अपनी बाँहों में भरा और उनके होठों को भूखी तरह से चूमने लगा। माँ ने थोड़ा हिचकिचाते हुए दिलीप को दूर धकेला और फुसफुसाते हुए बोलीं,
माँ: अरे… ऊपर आपका दोस्त आया है न? अगर उसे शक हो गया या वह नीचे आ गया तो क्या सोचेगा कि आप इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हैं?
दिलीप ने एक शैतानी मुस्कान के साथ माँ की गर्दन पर अपने होठ रख दिए और धीरे से बोला,
दिलीप: अरे भाभी जी, उसकी फिक्र छोड़िए… उसे सब पता है कि मैं यहाँ आपकी चुदाई करने आया हूँ।
माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने हैरत और गुस्से के मिश्रण के साथ दिलीप को घूरा और बोलीं,
माँ: ये क्या कह रहे हैं आप? पागल तो नहीं हो गए हैं? आपने उसे मेरे बारे में सब बता दिया?
दिलीप ने माँ की चूची को नाइटी के ऊपर से जोर से मसला और बोला,
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दिलीप: अरे भाभी जी, परेशान मत होइए। वह किसी से कहने थोड़ी जा रहा है। हम दोनों बचपन के दोस्त हैं और हमारे बीच कोई पर्दा नहीं है। सच तो यह है कि हम दोनों एक-दूसरे की बीवियों को भी चोदते हैं।
माँ यह सुनकर पूरी तरह चौंक गईं। उनका दिमाग घूम गया।
माँ: ये क्या बोल रहे हैं आप? आप… आप उनकी बीवी की भी चुदाई करते हैं?
दिलीप ने माँ के कान में फुसफुसाया,
दिलीप: हाँ भाभी जी, अब आपसे क्या छुपाना। मनीष मेरी बीवी की चुदाई कई बार कर चुका है, और उसे मजा भी बहुत आता है। कहें तो उसे भी यहीं बुला लूँ? तीनों मिलकर मजे करेंगे… मजा आ जाएगा!
माँ पहले तो घबरा गईं। उन्होंने जोर से मना किया,
माँ: अरे नहीं नहीं! मैं सिर्फ आपके साथ ही ये सब कर सकती हूँ… किसी तीसरे का होना मुझे मंजूर नहीं।
लेकिन दिलीप ने हार नहीं मानी। उसने माँ की टाँगों के बीच अपना हाथ डाला और उनकी गीली चूत को उँगलियों से रगड़ने लगा। माँ के मुँह से एक सिसकारी निकली।
दिलीप: घबराइए मत भाभी जी, यह राज़ हम तीनों के अलावा किसी को पता नहीं चलेगा। सोचिए, दो सख्त लंड एक साथ आपकी चूत और गाँड को फाड़ेंगे… कितना सुकून मिलेगा। बुला लीजिए न, मजा आएगा!
दिलीप की बातों और उसके हाथों की हरकतों ने माँ के अंदर की छिपी हुई हवस को जगा दिया। उन्हें खयाल आया कि दो मर्द एक साथ उन्हें प्यार करेंगे तो कैसा एहसास होगा। उन्होंने धीरे से हाँ कह दिया। दिलीप ने मनीष को मैसेज किया, और कुछ ही मिनटों में मनीष दबे पाँव नीचे आ गया। जैसे ही मनीष ने माँ को उस सेक्सी नाइटी में देखा, उसकी आँखों में चमक आ गई। उसने बिना वक्त गवाए अपनी पैंट उतारी और उसका बड़ा, मोटा लंड बाहर निकल आया।
मनीष: वाह दिलीप! तूने बताया था कि भाभी जी हॉट हैं, लेकिन वह तो अप्सरा हैं।
मनीष माँ के करीब आ गया। अब असली खेल शुरू हुआ।
दिलीप ने माँ को पीठ के बल लिटाया और मनीष ने उनके पैर पकड़ लिए। दोनों ने मिलकर माँ को चूमना शुरू किया। एक माँ के होठों को चूम रहा था, तो दूसरा उनकी चुचियों को चूस रहा था। माँ दो मर्दों के बीच फँसी हुई थीं और उनका शरीर उत्तेजना से काँप रहा था।
मनीष ने माँ की नाइटी को ऊपर उठाया और उनकी गोरी, गोल गाँड को जोर से थप्पड़ मारा। माँ चीख उठीं, लेकिन वह चीख दर्द की नहीं, मजे की थी। मनीष ने अपनी जीभ निकाली और माँ की गाँड के छेद (एनस) को चाटना शुरू किया, जबकि दिलीप ने माँ की चूत को अपनी जीभ से गीला कर दिया। माँ पागल हो रही थीं।
माँ: आआह्ह्ह… ओह्ह्ह गॉड… दो-दो लोग… म्मम्ह्ह्ह… मुझे और चाहिए!
दिलीप ने अपना लंड माँ के मुँह में ठूँस दिया। माँ ने उसे गहराई तक चूसना शुरू किया, जबकि मनीष ने अपने लंड की नोक माँ की चूत के द्वार पर रगड़ना शुरू किया। माँ ने दिलीप का लंड चूसते हुए मनीष की तरफ देखा, उनकी आँखों में भूख थी। दिलीप ने लंड बाहर निकाला और माँ को ‘डॉगी स्टाइल’ पोजीशन में कर दिया। दिलीप ने पीछे से माँ की चूत में अपना लंड जोर से धंसाया।
माँ: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!
जैसे ही दिलीप ने पहला धक्का मारा, मनीष ने आगे से माँ के होठों को पकड़ा और अपना मोटा लंड माँ के मुँह में उतार दिया। माँ अब दो लंडों के बीच फँसी हुई थीं—एक उनके गले में और एक उनकी चूत में। दिलीप तेजी से धक्के मार रहा था, और माँ मनीष का लंड चूस रही थीं। कमरे में सिर्फ शरीरों के टकराने की और माँ की घुटने वाली आवाजें आ रही थीं। मनीष ने अपना लंड माँ के मुँह से निकाला और दिलीप से कहा,
मनीष: अब मेरी बारी है।
दिलीप ने माँ को पलटा और उन्हें पीठ के बल लिटाया। दिलीप ने माँ की एक टाँग अपने कंधे पर रखी और मनीष ने दूसरी। दोनों ने मिलकर माँ की चूत और गाँड को टारगेट किया। दिलीप ने चूत में लंड डाला और मनीष ने माँ की गाँड (एनस) में अपना लंड धकेलना शुरू किया। माँ की आँखें बाहर आ गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
माँ: ओह्ह्ह माय गॉड!!! दोनों जगह… म्मम्ह्ह्ह… मैं फट जाऊँगी… आआह्ह्ह… लेकिन बहुत मजा आ रहा है!
दो सख्त लंड एक साथ माँ के शरीर को चीर रहे थे। दिलीप आगे से और मनीष पीछे से, दोनों एक ही रफ्तार में धक्के मार रहे थे। माँ का पूरा शरीर झटके खा रहा था। उनकी दोनों चुचियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
दिलीप: भाभी जी, आपकी चूत तो मक्खन है… मनीष, देख रहा है कैसे जकड़ रखा है इसने हमें!
मनीष ने जोर से धक्का मारा,
मनीष: हाँ भाई, ऐसी चुदाई मैंने जिंदगी में नहीं की!
माँ अब पूरी तरह से उनके कब्जे में थीं। वह बस चीख रही थीं,
माँ: और जोर से… मुझे और जोर से चुदाइए… मुझे पूरा भर दीजिए… आआह्ह्ह!
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रात भर यह सिलसिला चलता रहा। उन्होंने पोजीशन्स बदलीं—कभी माँ ऊपर थीं और दोनों लंडों को एक-एक करके चूस रही थीं, तो कभी वह दोनों मर्दों के बीच लेटी हुई थीं। आखिर में, दिलीप और मनीष दोनों ने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। तीनों पसीने से लथपथ थे। दिलीप: अब आखिरी बार… भाभी जी… तैयार हो जाइए! दोनों ने एक साथ आखिरी और सबसे जोरदार धक्के मारे। माँ एक बहुत बड़े ऑर्गेज्म के साथ झटके खाने लगीं।
उसी पल, दिलीप ने माँ की चूत में और मनीष ने उनकी गाँड में अपना सारा गरम, गाढ़ा कम छोड़ दिया। माँ एक लंबी चीख के साथ बेहोश होने जैसी हो गईं। उनका शरीर अभी भी काँप रहा था। उनके अंदर दो मर्दों का कम भर चुका था, जो धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था। माँ ने सुकून की साँस ली और दोनों मर्दों की बाँहों में सिमट गईं। उन्हें महसूस हुआ कि आज उन्होंने वह सुख पाया जो उन्होंने सपनों में भी नहीं सोचा था। तीनों ने उस रात को अपनी जिंदगी की सबसे कामुक और यादगार रात बना लिया।
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