Romance Porn Story
एक व्हाट्सअप ग्रुप, जिस में, मैं काफी सक्रिय था, उस की एक महिला सदस्य से जान पहचान थी, जिन का नाम अस्मिता था। वह अपने जीवन में काफी उथल-पुथल का सामना कर रही थी। मुझे अंदाजा तो था लेकिन किसी के निजी जीवन में हस्तक्षेप करना मुझे पसन्द नहीं था इस लिये कभी उन से इस बारें में कुछ पुछा नहीं। Romance Porn Story
एक दिन दोपहर में उन का फोन आया कि क्या आप से मिलना हो सकता है? तो मैंने हाँ में जवाब दिया। वह और मैं एक ही शहर में नौकरी करते है। यह मुझे पता था। पांच बजे के बाद मिलने का बोला तो वह बोली कि आप 14 सेक्टर की मार्किट में मिल जाना। मैंने इस के लिये हाँ कर दी।
ऑफिस से निकल कर मैं सेक्टर 14 के मार्किट में गाड़ी पार्क ही कर रहा था कि वह महिला आती दिखाई दी। पास आ कर बोली कि आप समय के बड़े पाबन्द है। मैंने कहा कि जब किसी से वायदा किया है तो उस को पुरा करना ही पड़ता है। फिर आप तो परीचित है। वह मेरी बात सुन कर मुस्करा दी।
इस के बाद हम दोनों एक रेस्तराँ में जा कर बैठ गये। कॉफी ऑडर करने के बाद दोनों आराम से बैठे तो मैंने प्रश्नवाचक नजरों से उन को देखा तो वह बोली की आप से कुछ राय लेनी थी। मुझे आपका जिन्दगी के प्रति नजरिया पसन्द है। मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कराया तो वह बोली कि यह बात सब के सामने नहीं की जा सकती है, इस लिये आप को यहाँ बुलाया हैं।
कुछ देर चुप रहने के बाद वह बोली कि मेरा वैवाहिक जीवन सही नहीं चल रहा है, तलाक का केस चल रहा था। अब मुझे तलाक मिल गया है। अब मेरे ऊपर कई फैसले लेने का बोझ आ गया है। समझ नहीं आया कि क्या करुँ तो यही सोचा कि आप से राय ले कर देखती हूँ। मैं चुप रहा, समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोलुं?
मुझे चुप देख कर वह बोली कि कुछ ज्यादा ही तो नहीं माँग रही हूँ आप से। मैंने ना में सर हिलाया तो वह बोली कि सोचती हूँ लड़के को किसी बोर्डिग स्कूल में डाल दूँ। लड़की अभी छोटी है उसे कुछ समय बाद अपने से दूर भेजने की सोचुँगी। मैंने कहा कि बात तो सही सोची है। लेकिन आप के ऑफिस जाने के बाद लड़की की देखभाल कौन करेगा?
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वह बोली कि ज्यादातर तो मेरी माँ मेरे साथ रहती ही है। वही उस की देखभाल करेगी। आप को मेरे साथ बेटे को छोड़ने दार्जिलिंग चलना पड़ेगा। मैं कोई निर्णय करने वाला ही था कि वह बोली कि आप की हाँ समझु। मैंने कहा कि आप मुझे पहले बता देना। वह बोली कि हाँ यह तो मैं करुँगी ही।
वेटर कॉफी रख कर चला गया। दोनों कॉफी पीने लगे। कॉफी खत्म होने के बाद मैंने पुछा कि कुछ और लेना है तो वह बोली कि आज नहीं, आज तो आपकी हाँ ने मेरी बहुत बड़ी समस्या हल कर दी। बाद में कभी आराम से कुछ खायेंगे पीयेंगे। यह सुन कर मैं मुस्कराया तो वह बोली कि क्या मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है।
मैं चुप रहा तो वह बोली कि ऐसा मौका नहीं दूंगी आप को की आप मुझे झुठा समझे। मैंने हाथ के इशारे से उन्हें आश्वस्त किया। हम दोनों रेस्तराँ से निकल कर अपने अपने रास्ते पर चल दिये। अस्मिता को अपने लड़के का एडमीशन बोर्डिग स्कूल में कराना था। एक दिन उन का फोन आया कि आप को कष्ट दे रही हूँ आप को दो दिन के लिये मेरे साथ दार्जिलिंग चलना है। वहाँ पर लड़के का एडमीशन करवाना है, आप का साथ चाहिये।
मैंने कहा कि मैं चला चलुंगा। दो दिन बाद हम तीनों कार से दार्जिलिंग पहुंच गये। वहां पर स्कूल में लड़के का एडमीशन करवा कर हम दोनों रात को झील के किनारे घुमने निकल गये। रात को रोशनी से चमचमाती नैनी झील बहुत रोमांटिक लगती है। मैं और अस्मिता दोनों धुन्ध में डुबी मॉल रोड़ कर चहलकदमी करने लगे।
राह में अस्मिता बोली कि मैं आप के साथ जबरदस्ती तो नहीं कर रही हूँ। मैंने पुछा कि ऐसा क्यों लगा आप को तो वह बोली कि मैंने आप से आप की हाँ या ना नहीं पुछी और बस आप तो चलने के लिये कह दिया। अगर मैं नहीं आना चाहता तो आप को मना कर देता। मैं स्पष्ट वादी हूँ। आप के मेरे बारे में पता है।
अस्मिता ने सर हिलाया। हम दोनों ऐसे ही घुमते रहे। हाल में ही तलाकशुदा हुई महिला के साथ मैं दार्जिलिंग की झील के पास घुम रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कर क्या रहा हूँ? दार्जिलिंग से आने के बाद कई बार अस्मिता से मिलना हुआ लेकिन हर बार हम लोग ग्रुप के मीटअप में ही मिल पाये थे।
फोन पर ही बातचीत में अस्मिता से हालात पता चल पाते थे। अस्मिता अपने साथ हो रही बातों को मुझ से साझा करती थी। मैं अगर कोई सहयोग होता था तो कर देता था। अगर वह कोई सुझाव माँगती थी तो वह भी फोन पर ही दे देता था। अस्मिता से व्यक्तिगत रुप से मिलना संभव नहीं हो पा रहा था।
अस्मिता मिलने को कहती तो थी लेकिन मैं ऑफिस से शाम को बहुत देर से निकल पाता था इस लिये शाम को मिलना हो ही नहीं पा रहा था। तलाक लेने के बाद अस्मिता अकेली हो गयी थी। सारे काम उन्हें अपने आप ही करने पड़ रहे थे। मैं साथ होने के बावजूद हर समय उस की सहायता नहीं कर पाता था।
मैं भी उन से मिलना चाहता था लेकिन समय की कमी होने के कारण ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा था। इस संबंध में अब गहराई आ रही थी, हम दोनों के बीच में लगाव बढ़ रहा था। उस का इजहार दोनों में से कोई नहीं कर रहा था। मैं अपने परिवार पर कोई असर ना पड़े इस डर से चुप था, अस्मिता भी इसी डर से चुप थी। लेकिन इस डर के बावजूद दोनों एक-दूसरें के करीब आते जा रहे थे।
एक दिन सुबह जब ऑफिस पहुँचा तो बॉस ने अपने कमरे में बुला कर कहा कि आप को आज एक पार्टी से मीटिंग के लिये पुणे जाना पड़ेगा। आपकी टिकट बुक है आप एअरपोर्ट चले जाये। मैं जैसा आया था वैसा ही एयरपोर्ट के लिये निकल गया। दो घंटे बाद पुणे पहुँच गया। गाड़ी बाहर मेरा इंतजार कर रही थी।
12 बजे की मीटिंग थी क्लाइट के साथ। मीटिंग अच्छी गुजरी, दुपहर का खाना क्लाइट के साथ खा कर उस से विदा लेकर सोच ही रहा था कि अब क्या करुं, तभी अस्मिता जी का फोन आया कि आप कहाँ पर है। मैंने कहा कि आज तो बाहर हूँ तो वह बोली कि मैं भी दो दिन से बाहर हूँ, आप कहाँ हो?
मैंने बताया कि पुणे आया हूँ। रात की फ्लाइट है इस लिये समय काटने की सोच रहा हूँ। वह मेरी बात सुन कर बोली कि आज तो मजा आ गया आप भी यहाँ पर आ गये है मैं भी यही पर हूँ। मुझे यह जान कर अच्छा लगा कि वह भी यहाँ पर ही थी। उन की आवाज फोन पर आयी कि आप मेरे होटल आ जाओ।
मैंने उन से होटल का पता लिया और बाहर आ कर कैब करके होटल पहुँच गया। शनिवार का दिन होने के कारण भीड़ काफी थी। 9वीं मंजिल पर पहुँच कर उन के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो फौरन ही दरवाजा खुल गया। वह साड़ी पहने खड़ी थी।
मुझे अंदर ले कर उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया। मुझे लगा कि वह कुछ करना चाहती थी लेकिन हिचक रही थी। मैं समझ रहा था, लेकिन हम दोनो के बीच की शर्म हट नहीं रही थी। कमरे में आ कर मैं कुर्सी पर बैठ गया। वह भी सामने बेड़ पर बैठ कर बोली।
आज तो आप बहुत स्मार्ट लग रहे है। बिजनेस सुट में जंच रहे है। कितनों के दिलों पर बिजली गिरी होगी?
मीटिंगों में फोरमल सुट पहनना मजबूरी है।
आप को पहले साधारण कपड़ों में ही देखा है, आज ऐसे देख कर अचरज हुआ। फोरमल आप पर जँचते है।
आज मैं आप को याद ही कर रही थी इस लिये फोन किया, मुझे क्या पता था कि आप यहाँ ही मिल जायेगे। मैंने मुस्कराते हुए कहा कि कई बार मन की मुराद पुरी हो जाती है। वह बोली कि हाँ आज तो मन की बात पुरी हो गयी है। आप पानी पीयेंगे या कुछ और मंगाऊँ।
मैंने कहा कि पानी से काम चला लूंगा तो वह मुस्कराती हूँई पानी गिलास में डालने लग गयी। फिर पानी का गिलास मुझे दे कर बोली कि खाना मंगाऊँ? मैंने कहा कि खाना अभी खा कर आया हूँ तो वह बोली की चलिये बैठ कर बातें करते है आज आप से बहुत सी बातें करने का मन है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने पानी पीते पीते देखा कि अस्मिता की आँखों में अजीब तरह की चमक थी। शायद कोई प्यास थी जो आँखों से पुरी की जा रही थी। वह मुझे ही देख रही थी। मैंने यह देख कर पुछा कि क्या बात है जो मेरी याद आ रही थी। अस्मिता बोली कि क्या मैं आप को याद भी नहीं कर सकती?
मैंने कहा कि बिल्कुल याद कर सकती है मैं तो बस जानना चाहता था कि किस बात को ले कर याद कर रही थी। वह बोली कि आज मेरे को आप की याद बस ऐसे ही आ गयी। अकेलापन महसूस हो रहा था तो अपने मित्र की याद आना स्वाभाविक है या नहीं?
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हाँ सो तो है.
इसी लिये आप को याद किया और आप यहाँ मेरे पास आ गये.
अच्छा किया फोन किया नहीं तो मैं रात तक ऐसे ही भटकता रहता.
मेरे रहते भटकने का क्या मतलब?
मुझे क्या पता था कि आप यहाँ पर है.
मुझे भी तो नहीं पता था कि आप यहाँ पर है.
मैं दो दिन पहले आयी थी। आज जा कर फ्री हूँई हूँ.
बढ़िया है.
हाँ मेरा अपनी मनमर्जी करने का मन कर रहा है.
किस ने रोका है?
अस्मिता बेड़ से उठी और मेरे पास आ कर खड़ी हो गयी और बोली कि आप उठ कर खड़े होगे। मैं उठ कर खड़ा हो गया। अब मैं और अस्मिता एक दूसरे के सामने खड़े थे। उस ने अपनी बांहें मेरे गले में डाल दी और उस के होंठ मेरे होंठों से जुड़ गये।
अचानक हुये इस चुम्बन से मैं हड़बड़ाया तो लेकिन फिर मैंने उन का चेहरा अपने हाथों में पकड़ लिया और दोनों गहरे चुम्बन में डुब गये। जब दोनों की सांस फुल गयी तब वह अलग हुई। अस्मिता के चेहरे पर संतोष की झलक थी। वह मेरी तरफ देख कर बोली की आप से प्यार करना है। मैं यह सुन कर हड़बड़ाया तो वह बोली कि
डर रहे है?
नहीं तो.
फिर घबराहट कैसी?
तुम्हें सब पता है फिर भी मुझ से पुछती हो?
अपने लिये इतना सा भी नहीं माँग सकती?
माँग कर तो देखो.
आज मेरे से प्यार करो ना, मैं बहुत प्यासी हूँ.
प्यासा तो मैं भी हूँ.
फिर मना क्यों कर रहे हो?
जिस रास्ते पर चलने को कह रही हो, उस पर मैं तुम्हें कुछ दे नहीं पाऊँगा.
मुझे कुछ नहीं चाहिये, बस मुझे अपना थोड़ा सा प्यार दे दो.
देख लो बाद में कुछ और मत माँग लेना, मैं दे नहीं पाऊँगा.
नहीं मुझे और कुछ नहीं चाहिये, कभी कभी मुझ से प्यार कर लिया करो.
मैंने अस्मिता को अपने आलिंगन में ले लिया वह भी लता की तरह मेरे से लिपट गयी। उस के परफ्युम की मादक सुंगंध मेरे नथुनों में घुस रही थी। वह मुझ से लिपटी खड़ी थी। उस के उरोज मेरी छाती में गड़े जा रहे थे। मादकता मुझ पर हावी हो रही थी तभी दिमाग ने कहा कि कपड़े खराब हो जायेंगे।
मैंने अपनी पकड़ ढ़ीली कर दी। वह भी अलग हो गयी। मैंने कहा कि मुझे सुट उतारना पड़ेगा। वह मेरी बात सुन कर मुस्कराई और बोली कि ऐसे समय में भी इतना सब सोच पाते है। मैंने कहा कि हाँ नहीं तो आफत हो जानी थी। तुम्हारे परफ्युम की सुंगंध घर तक पहुँच जाती और जवाब देना मुश्किल हो जाता। बताओ क्या करुँ?
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वह हँसी और बोली कि एक ही उपाय है अपने कपड़े उतार कर मेरा पायजामा डाल लो। मैं बोला कि यह तो सही नहीं है। वह बोली कि और कोई हल है तो बताओ। मैंने कोट उतार कर कुर्सी पर डाल दिया, फिर शर्ट भी उतार दी। बनियान का भी नंबर आ गया। अस्मिता मुझे कमर से ऊपर नंगा देख रही थी।
उस की आँखों की चमक बढ़ रही थी। मैंने पेंट उतार कर रख दी और उसे पास ला कर कहा कि चलों बिस्तर पर चलते है। वह मुझ से लिपट गयी। हम दोनों बेड़ पर गिर गये। वह मेरे ऊपर पड़ी थी। उस के होंठों ने मेरी आँखें मेरे गाल सब को चुमना शुरु कर दिया था। मेरे हाथ उस की पीठ पर पड़े थे।
मैंने उस के ब्लाउज को पीछे से खोल दिया और उस की ब्रा के हुक को भी खोल दिया। अब मेरे हाथ अस्मिता की नंगी पीठ पर घुम रहे थे। इस से उस के शरीर में उत्तेजना की लहर सी उठ रही थी। अस्मिता मेरे कान में बोली कि आज तुम्हें देख कर मेरा अपने आप पर से कंट्रोल हट गया है।
उस ने अपने दांतों से मेरे कान की लौ काटनी शुरु कर दी। वह बहुत उत्तेजित होती जा रही थी। मेरे होंठ भी उस की गरदन पर चुम्बन ले रहे थे। उस के बाद उस की छातियों के मध्य उतर गये। अभी ब्रा वहाँ पर थी। उस ने हाथ से ब्रा और ब्लाउज को नीचे फेक दिया। अब उस के भरे हुये उरोज मेरी छाती में समा गये। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन की गर्मी मेरे शरीर में समा रही थी। मेरा शरीर भी उत्तेजना से भरा जा रहा था। मैंने उसे पकड़ कर नीचे लिटा लिया और उस के बगल में आ कर उस के उरोजों के भुरे निप्पलों को चुसने लगा। वह आहहहहहह उहहहहहहहहहह करने लगी। हम दोनों इस खेल के पुराने खिलाड़ी थे। इस लिये खेल तो जोरदार होना था।
वह और मैं दोनों ही बहुत दिनों से प्यासे थे। उस के उरोजों को मैं अपने मुँह में समाने की कोशिश करने लगा तो वह कराहने लगी। फिर मेरे दांत उन्हें काटने लग गये। उस के नाखुन मेरी पीठ में गड़ गये। मेरे हाथ उस की कमर से होता हुआ उसी की जाँघों के मध्य उतरने लगा लेकिन वहाँ पर साड़ी और पेटीकोट बाधा बन कर खड़े थे।
मैंने हाथ से उस की साड़ी पेटीकोट से बाहर निकाल कर एक तरफ फैक दी और पेटीकोट को नीचे खिसका दिया। यह पेटीकोट इलास्टिक वाला था जो शरीर पर कसा हुआ था। अब मेरा हाथ उस की पेंटी के ऊपर घुम रहा था। उसकी उभरी हुई योनि उत्तेजना के कारण ज्यादा ही उभर गयी थी।
उसकी फलके पेंटी में दिखाई दे रही थी। वहाँ पर नमी भी थी। मैंने पेंटी में हाथ डाल कर उस की योनि को सहलाया और उसकी योनि में अपनी उँगली डाल दी। वह कसमसाई मेरी उंगली और गहराई में उतर गयी। मैं उस के जी स्पाट को सहला रहा था। कुछ देर ऐसा करने से अस्मिता की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी कि उस ने मेरा चेहरा पकड़ कर अपने होंठों से मेरे होंठ काट लिये।
उस का सारा शरीर काँप रहा था। उस की जीभ मेरे मुँह में घुस कर कलोल कर रही थी। मेरी जीभ भी उसे छु कर सहला रही थी। अस्मिता बोली कि पेटीकोट उतार दो मुझे दर्द हो रहा है। मैंने हाथ पेंटी से निकाल कर उस के पेटीकोट को नीचे कर के पाँवों से बाहर कर दिया इस के बाद पेंटी का नंबर आया अब वह भी फर्श पर पहुंच गयी।
अस्मिता मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी। मैं उस के सामने ब्रीफ में खड़ा था उस ने मेरी ब्रीफ में उंगलियां फंसा कर उसे नीचे कर दिया। ऐसा करने से मेरा तना हुआ लिंग जो 6 इंच का पुरा साइज ले चुका था उस के सामने आ गया। उस ने उसे अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह से चुसना शुरु कर दिया।
मैं उस के पैरों की तरफ झुक गया और हम दोनों 69 की पोजिशन में आ गये। मैं उस की योनि का स्वाद ले रहा था वह मेरे लिंग का स्वाद चख रही थी। मेरी जीभ उस की योनि की गहराई में चली गयीऔर मैं उस के कसैले स्वाद को पीने लगा। मेरे हाथ उस की भरी हुई जाँघों को सहला कर उसे उत्तेजित करने लगे। हम दोनों के शरीर में वासना की आग पुरी तरह से भड़क गयी थी।
मेरा लिंग उस के मुँह की नमी और जीभ के स्पर्श से स्खलन की ओर जा रहा था। अब कुछ नहीं हो सकता था। मैं उस के मुँह में स्खलित हो गया। कुछ देर बाद उस की योनि भी पानी से भर गयी और मैं उसे पीने लगा। हम दोनों ने एक दूसरे का भरपुर स्वाद ले लिया था। स्खलन के बाद मैं उस की बगल में लेट गया। वह मेरी तरफ मुँह करके बोली कि
कैसा लगा?
सही था.
सफर तो अभी शुरु हुआ है.
तुम बहुत बदमाश हो, बहुत काटते हो
तुम कितना नोचती हो.
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अस्मिता ने अपने होंठों से मेरा मुँह बंद कर दिया। उस के हाथ मेरी छाती पर फीर रहे थे। उस की उंगलियों नें मेरे चुचकों को मसलना शुरु कर दिया। उसे पता था कि आदमी को कैसे भड़काया जाता है वह यहीं अब मेरे साथ कर रही थी। मेरी उँगली उस की योनि में दुबारा घुस गयी और अंदर-बाहर होने लगी। थमी आग फिर से जोर से भड़क गयी। अस्मिता आहहहहहहहहहहह……… उहहहहहहहहहह…….. करने लगी।
मैंने उठ कर उस के ऊपर आ कर उसकी जाँघों को चौड़ा किया और बीच में बैठ कर उस की योनि पर अपने लिंग को दो तीन बार रगड़ा। योनि का स्पर्श पा कर लिंग में दूबारा से तनाव आ गया। मैंने लिंग को योनि के मुँह पर रख कर दबाया तो लिंग अस्मिता की योनि में प्रवेश कर गया। अस्मिता ने आहहहहहहहहहहह……. की.
मैंने और जोर से दबाया तो आधा लिंग उस की योनि में समा गया। अब मुझ से रुका नहीं गया। अंदर योनि की नमी से जरा सा दबाव डालने से पुरा लिंग अस्मिता की योनि में चला गया। मैं धीरे-धीरे धक्कें लगाने लगा। अस्मिता के दोनों हाथ मैंने उस के सर के ऊपर अपने हाथों से पकड़ रखे थे और नीचे से मेरे कुल्हें उस के अंदर समाने के लिये प्रहार कर रहे थे।
अस्मिता उत्तेजना के कारण अपना सर इधर-उधर पटक रही थी। वह कराह रही थी। मेरे धक्कें उस की कराह को सुन कर और तेज हो गये। फिर एक आदिम शक्ति मेरे में समा गयी और मैं उत्तेजना के वशीभुत हो कर उस में समाने लगा। वह नीचे से आहहहहहहहहहहहहहह उहहहहहहहहहहहहहह करती रही।
मेरी गति बढ़ती गयी। कुछ देर बाद मेरी आँखों के सामने तारे झिलमिला गये और मैं अस्मिता के ऊपर लेट गया। अस्मिता की बांहे मेरी पीठ पर कस गयी और उस के पैर मेरी कमर पर कस गये। अब मैं पुरा उस में समाया हुआ था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हम दोनों के शरीर एक दूसरे से इस तरह से चिपके हुये थे कि बीच में हवा भी नहीं जा सकती थी। कुछ देर बाद में अस्मिता के ऊपर से उठ कर उसकी बगल में लेट गया। वह अभी भी आँखें बंद किये पड़ी थी। मैंने उसे हिलाया तो वह बोली कि मैं हवा में उड़ रही हूँ मुझे उड़ने दो।
उस ने आँखें खोली और मुझे देख कर कहा कि तुम ने आज क्या किया है? मेरा सारा शरीर हल्का हो गया है।
मैंने कहा कि तुम इस चीज से बहुत दिनों से दूर थी आज जब वह मिली है तो तुम उस का पुरा मजा ले रही हो।
वह बोली कि तुम्हें मजा नहीं आया?
मैंने उसे बताया कि मुझे भी बहुत मजा आया है।
अस्मिता बोली कि तुम्हें देख कर मैंने बहुत बार कल्पना करी थी, कि कब तुम मुझे अपनी बाँहों में भरोगे? लेकिन तुम से इस का इजहार करने में डर लगता था कि कही तुम मुझे छोड़ ना दो। इसी डर से इतने समय तक मैंने तुम से अपनी इच्छा का इजहार नहीं किया। लेकिन आज तुम्हें यहाँ पर देख कर मुझ से रहा नहीं गया और मन की बात जुबा पर आ ही गयी। बुरा तो नहीं लगा।
नहीं बुरा नहीं लगा लेकिन हैरानी जरूर हुई थी।
तुम को अपने पास देख कर मुझ से रहा ही नहीं गया। नहीं तो इतने वर्षों से मैंने अपने पर रोक लगाना ही तो सीखा है।
यह क्या बात हुई?
लम्बी कहानी है फिर कभी बताऊंगी.
जैसी तुम्हारी मर्जी.
अभी मन भरा नहीं है.
कुछ देर आराम करो फिर दूबारा करते है।
अस्मिता उठी और मुझे चुम कर बाथरूम चली गयी। मुझे भी प्रेशर बन रहा था। जब वह आयी तो मैं भी बाथरूम चला गया। हम दोनों की प्यास अभी बुझी नहीं थी इस लिये कुछ देर बाद फिर से वही खेल शुरु हो गया। अब की बार अस्मिता मेरे ऊपर थी और मैं नीचे से उस के उरोजों को चुम रहा था।
उस के कुल्हें जोर जोर से मेरे लिंग को समाने के लिये प्रहार कर रहे थे। कुछ देर में अस्मिता थक कर बगल में आ गयी। अब की बार मैंने उसे डोगी स्टाइल में करा और पीछे से उस की योनि में अपना लिंग डाला। अस्मिता आहहहहह……… उहहहहहहहहहह….. करने लगी।
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मेरा लिंग उसके कुल्हों के बीच से योनि में घुस रहा था। मेरे प्रहारों के कारण उस के कुल्हों का रंग लाल हो गया। कुछ देर बाद मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उस की योनि में अपना लिंग डाल दिया वह अपने कुल्हों को हिला हिला कर लिंग को अंदर समा रही थी। मैं उस के उरोजों का रसपान कर रहा था।
हमारा संभोग आधा घंटा चला और जब हम दोनों स्खलित हुये तो हमारे शरीर थकान से चुर चुर हो गये थे। कुछ देर हम दोनो ऐसे ही लेटे रहे, फिर मैंने कहा कि मैं नहाने जा रहा हूँ इस के बाद तैयार हो जाता हूँ अस्मिता ने भी सर हिला कर मेरा समर्थन किया।
मैं बाथरुम में चला गया। नहा कर तन से थकान निकल गयी। बाहर आ कर कपड़े पहन कर तैयार होने लगा तो अस्मिता बोली कि तुम्हारी फ्लाइट मेरे साथ ही है इतनी जल्दी क्या है? मैंने कहा कि तुम्हारे पास और कपड़े है मेरे पास तो यही है इस लिये तैयार हो गया हूँ।
वह बोली कि चलों मैं भी नहा लेती हूँ। यह कह कर वह भी नहाने चली गयी। नहा कर जब आयी तो गीले बालों में सुन्दर लग रही थी। मुझे अपने को घुरता पा कर बोली कि पहले तो नजर भी नहीं मिलाते थे अब क्या नजरों से खाने का इरादा है।
मैंने कहा कि पहले तुम दोस्त थी उस की मर्यादा का पालन करना था, अब कुछ और बात है।
तुम इतने शरीफ नहीं हो जितने उपर से दिखते हो?
अब ऐसा क्या किया है मैंने.
जैसे तुम्हे पता ही नहीं.
तुम्हारे मन का करा है.
दो बार में सारा शरीर तोड़ दिया है.
अभी मन भरा नहीं है.
वाह क्या बात है.
दूबारा जब मौका मिलेगा तो बताऊंगा प्यार कैसे होता है?
अभी कुछ और भी बाकी है.
अभी तो शुरुआत है.
बड़े खतरनाक आदमी हो तुम से बच कर रहना पड़ेगा.
अब तो चाह कर भी मुझ से बच नहीं सकती.
बचना कौन चाहता है.
अस्मिता ने अपने गीले बालों से गिरता पानी मेरे पर छिड़का और कपड़े पहनने लग गयी। रात के नौ बजे हम होटल से निकल गये। 11 बजे की फ्लाइट पकड़ कर दोनों वापस अपने शहर आ गये। वह अपने रास्ते चली गयी और मैं अपने रास्ते। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हम दोनों वापस आ कर अपने-अपने कामों में डुब गये। आपस में मिलना हुआ ही नहीं। फोन पर ही बात हो पाती थी। ग्रुप के साथ दो बार मिलना हुआ। वहाँ पर कुछ कहा नहीं जा सकता था। इसी तरह कई महीनें बीत गये। अस्मिता ने फोन पर कहा कि तुम से प्यार किये कितना समय हो गया है।
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मन कर रहा है कि कहीं चले या तुम कुछ करो। मैंने उसे बताया कि मेरा बाहर जाना संभव नहीं है। कुछ देर इंतजार तो करना ही पड़ेगा। वह मेरी बात समझ गयी। गर्मी की छुट्टियों में उसकी माँ बेटी को लेकर अस्मिता के मायके चली गयी। अब वह घर पर अकेली थी।
मेरी पत्नी भी कुछ दिनों के लिये मायके बच्चों के साथ चली गयी। बच्चें नाना के घर जाने के लिये मरे जा रहे थे। मैं भी घर पर अकेला रह गया। मैंने यह बात अस्मिता को बतायी तो वह बोली कि ऐसे तो मैं तुम्हारे घर नहीं आ सकती हूँ। तुम ही कुछ उपाय सोचों। बुधवार को यह बात हुई।
अगले दिन मेरे दिमाग में आइडिया आया कि शुक्रवार की रात को अस्मिता मेरे साथ मेरे घर आ सकती है। फिर हम दोनों शनिवार और रविवार एक साथ मना कर सोमवार को ऑफिस जा सकते है। मैंने यह बात अस्मिता को बतायी तो वह बोली कि आइडिया तो सही है लेकिन मैं तुम्हारे साथ आऊंगी तो किसी को पता नहीं चलना चाहिये।
मैंने कहा कि इस बारे में कुछ सोचता हूँ लेकिन तुम अपने कपड़े एक बैग में रख कर तैयार रहना। शुक्रवार की शाम को ऑफिस से निकल कर मैंने अस्मिता को उस के घर से पिक किया और उस के बाद हम दोनों ने रेस्टारेट में जा कर डिनर किया और उस के बाद कार में घर के लिये निकल गये।
रास्ते में मैंने अस्मिता को कहा कि उसे मेरे घर से पहले कार की पिछली सीट के नीचे लेटना पड़ेगा ताकि कोई उसे देख ना सके। घर पहुँच कर मैं उसे कार से निकाल कर घर में ले लुँगा। वह यह सुन कर बोली कि कुछ ज्यादा नहीं हो रहा है। मैंने उसे समझाया कि मेरे घर में कार घर के अंदर खड़ी होती है।
कार के खड़ी करने की जगह पर अंधेरा होता है। रात में घर में भी अंधेरा होगा। इस लिये मैं तुम्हें अंधेरे में घर के अंदर ले लुँगा, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा लेकिन कुछ देर के लिये तुम्हें सीट के नीचे लेटना पड़ेगा, कपड़े भी खराब हो सकते है।
वह बोली कि तुम्हारे साथ समय बिताने के लिये मैं कुछ भी कर सकती हूँ। जयदेव की विरहिणी नायिका की तरह मेरी हालात है। उस की इस बात पर मेरी हँसी निकल गयी। वह बोली कि अभी तो हँस रहे हो, लेकिन मेरी तरह सोचो तो हँस नहीं पाओगे। मेरे सहमति में सर हिला दिया।
रात को घर पहुँचते काफी देर हो गयी थी। घर में अंधेरा था, सड़क भी अंधेरे में डुबी थी। मैंने दरवाजे का ताला खोल कर घर के अंदर कार खड़ी करी और घर के अंदर जा कर सारा घर देखा उस के बाद कार के पास आ कर उस का पिछला दरवाजा खोल कर अस्मिता को हाथ से इशारा किया।
वह सीट पर बैठ गयी और उस के बाद कार से निकल गयी। मैंने कार का गेट बंद किया और घर के अंदर आ गया। अस्मिता सोफे पर बैठी थी। मुझे देख कर बोली कि मेरी पीठ का हाल बुरा है। मैंने उस के कंधें थपथपाये और दरवाजा खोल कर बाहर आ गया। कार की डिक्की खोल कर अस्मिता का बैग निकाला और उसे लेकर कमरे में आ गया।
अस्मिता आराम से सोफे पर लेटी थी। मुझे देख कर बोली कि आगे क्या करना है। मैंने कहा कि मैं घर को बंद करके आता हूँ जब तक तुम चाहों तो हाथ मुँह धो लो। चाहों तो कपड़े बदल लो। यह सुन कर वह बोली कि पहले तुम अपने काम से फ्री हो लो।
मैं घर को बंद करने चला गया। कुछ देर बाद वापस आया तो वह सोफे पर ही लेटी थी। मैंने उसे बांहों में उठाया और बेडरुम में ले जाकर बेड पर लिटा दिया। वह बेड पर बैठ गयी और मुझे भी अपने पास बिठा लिया। हम दोनों कुछ देर तक एक-दूसरें के हाथों को थामें बैठे रहे।
ऐसे ही रात बिताने का इरादा है.
रात तो अपनी है.
हाँ सो तो है.
कुछ पीना है.
क्या है.
सब कुछ जो कहो.
बीयर पीते है.
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मैं फ्रीज से बीयर की बोतल और गिलास ले कर आ गया। दोनों ने कुछ ही देर में बोतल खाली कर दी। नशा अपना असर दिखा रहा था। वह बोली कि बेड पर कोई और चद्दर बिछा लो। मैंने यह सब पहले ही सोच रखा था सो अलमारी से चद्दर निकाल कर बिछा दी।
इस के बाद हम दोनों बेड के किनारे पर बैठ गये। मैंने आगे बढ़ कर अस्मिता के होंठों पर अपने प्यासे होंठ रख दिये। उस के होंठों की मिठास मेरे लबों नें महसुस करनी शुरु कर दी थी। हम दोनों ना जाने कितनी देर तक चुम्बन में डुबे रहे। उस की बांहें मेरी गरदन के इर्द गिर्द कस गयी।
अस्मिता मेरे कान में फुसफुसाई की बड़ी रोमांटिक रात है। प्रेमी के घर पर उस के बिस्तर पर मैं बैठी हूँ। मैंने उसे आलिंगन में कस लिया, मुझे पता चला कि अस्मिता ने काफी वजन कम किया है। मुझे इस बारें में कुछ पता नहीं था। आज से पहले मैंने उसे काफी दिनों से देखा भी नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी अस्मिता बोली कि मैं मुँह धोने जा रही हूँ तुम भी कपड़े बदल कर हाथ-मुँह धो लो, फिर सोते है। मैं कपड़े बदलने लगा और अस्मिता वाशरुम में चली गयी। उस के बाहर आने के बाद मैं वाशरुम में घुसा। वहाँ जा कर मुझे कुछ ध्यान आया। हाथ-मुँह धोने के बाद कमरे में वापस आया तो अस्मिता से पुछा कि तुम कोई कॉन्टरसेप्टिव् लेती हो।
वह बोली कि यह बात कैसे ध्यान में आयी तो मैंने उसे बताया कि अभी वाशरुम में ध्यान आयी है। वह बोली कि तुम इस की चिन्ता ना करो, मैं पिल्स लेती हूँ। पिछली बार मैं पिल्स पर नहीं थी इस लिये पुणे से आते ही गर्भनिरोधक गोली लेनी पड़ी थी। महीना आने तक डर ही लगा रहा था। अब कोई डर नहीं है।
मैं तो कपड़े उतार चुका था सिर्फ तौलिया लपेटे हुये था। अस्मिता साड़ी में थी। उस ने नजरों से इशारा किया तो मैंने उस की साड़ी पकड़ कर खींच ली। साड़ी उस के बदन से अलग हो गयी। अब वह पेटीकोट और ब्लाउज में थी। वह पहले के मुकाबले काफी पतली हो गयी थी।
छ महीने पहले वह मांसल बदन की मालकिन थी लेकिन अब वह सुघठित शरीर की स्वामिनी थी। खुब सेक्सी लग रही थी। मैंने झुक कर उस के ब्लाउज को पीछे से खोल दिया और उस की ब्रा का हुक भी हटा दिया। इस के बाद उस के पेटीकोट को पांव के नीचे खींच दिया।
अब वह बिना कपड़ों के थी। उस ने हाथ बढ़ा कर मेरी तौलिया खींच ली। अब मैं भी उस के सामने ब्रीफ में खड़ा था। वह उठी और मेरी ब्रीफ को नीचे खिसका दिया। मेरा लिंग अपने पुरे शबाव में तन कर उस को सलामी दे रहा था। वह कुछ देर तक तो उसे हाथ से सहलाती रही फिर उस के सुपाड़ें पर चुम्बन दे कर बोली कि इस का इसकी दोस्त से मिलन करवायों वह बड़ी प्यासी है।
मैंने कहा कि जल्दी क्या है मिलन तो होना ही है। मैंने उस के पांव बेड से नीचे किये और उन्हें खोल कर उन के बीच में बैठ गया। मेरी आँखों के सामने उस की फुली हुई चिकनी योनि थी, मैंने उस के फलकों को अलग किया और उस के अंदर अपनी जीभ डाल दी। जीभ उस की योनि की गहराई में उतर गयी।
कसैला स्वाद भी मजेदार लग रहा था। अस्मिता ने आहहहहहहहहहहहहहहहह उहहहहहहहहहहहहहह करना शुरु कर दिया। उत्तेजना के कारण उस का बदन कांप रहा था । उस ने मेरे बाल पकड़ कर मेरे सिर को अपनी योनि से चिपका दिया। अस्मिता के पांव मेरी पीठ पर आ गये।
कुछ देर बाद मैं उठ कर उस के साथ बेड पर आ गया। हम दोनों 69की पोजिशन में एक-दूसरे का स्वाद लेते रहे। कुछ देर बाद मैं ने उठ कर उस के उरोजों को मसलना शुरु कर दिया। उस के हाथ मेरी छाती पर घुम रहे थे। वासना की आग हम दोनों के शरीर में भड़कती जा रही थी।
अब उस का शमन होना जरुरी था। अस्मिता का वजन कम होने के कारण उस के उरोज अब ज्यादा पुष्ट हो गये थे। ऐसा नहीं लग रहा था कि वह दो बच्चों की माँ के उरोज है। मैं उन के निप्पलों को चुस रहा था। अस्मिता आह भर रही थी। उसे भी मजा आ रहा था। उस के उरोजों पर दांतों के निशान आने लगे।
उस के नाखुन मेरी पीठ पर अपनी छाप छोड़ रहे थे। हम दोनों पसीने से नहा गये थे। मैंने उसे उल्टा कर के उस के शरीर पर हर हि्स्से को चुमा और उस के पांवों की उँगलियों को मुँह में ले कर चुसा उस की ऊंचाईयों के बीच की गहराई को अपनी उंगली से सहलाया। अस्मिता का सारा शरीर अकड़ रहा था।
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अब देर नहीं की जा सकती थी। मैंने उसे सीधा किया और उस के ऊपर लेट गया। उस ने अपनी बांहों से मुझे अपने से चिपका लिया। उस के होंठ मेरे कंधें को काट रहे थे। मैंने कुल्हों को उठा कर लिंग को उस की योनि में डालने की कोशिश की तो वह फिसल गया। इस पर अस्मिता ने अपने हाथ से लिंग को पकड़ कर योनि के मुँख पर रखा और मेरे जोर लगाने पर लिंग योनि में घुस गया।
अंदर बहुत नमी थी। लिंग सरकता हूआ पुरा योनि में समा गया। ऊपर से अस्मिता ने अपनी बांहों में मुझे अपने से चिपका रखा था और नीचे से मैं उस में समाया हुआ था कुछ देर मैं ऐसे ही लेटा रहा फिर कुल्हों को उठा कर धक्के लगाने लगा। अस्मिता भी अपने कुल्हों को उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
दोनों में युद्ध सा छिड़ गया कि कौन किस को अपने अंदर समाता है। अस्मिता ने अपनी योनि को कसना शुरु कर दिया मेरा लिंग उस की योनि में मथा सा जा रहा था। कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा। फिर मैं थक कर अस्मिता की बगल में लेट गया।
अस्मिता ने मेरे ऊपर आ कर कमांड अपने हाथ में ले ली और अब उस के कुल्हें मेरे लिंग को अंदर समाने की जोर आजमाइश कर रहे थे। मेरे हाथ उस के कुल्हों पर कसे हुये थे। उस ने करवट ली और मैं उस के ऊपर आ गया। मेरी गति बढ़ गयी और अस्मिता के कराहने की आवाज आने लगी।
कमरा फच फच की आवाज से भर गया। बेड भी कराह रहा था। तभी अस्मिता के पैर मेरी कमर पर कस गये वह स्खलित हो गयी थी। कुछ देर बाद मेरे लिंग के मुँह पर भी आग सी लग गयी। मैं भी स्खलित हो गया। हम दोनों के शरीर में लगी आग का शमन हो गया था। कुछ देर बाद हम दोनों एक-दूसरे की तरफ मुँह किये लेटे थे।
अस्मिता बोली कि आज तुम ने सारी कमी पुरी कर दी है। मैंने अस्मिता से पुछा कि तुम पतली कैसे हो गयी हो? वह बोली कि चलो तुम्हें पता तो चला, नहीं तो मुझे लग रहा था कि जिस के लिये यह सब किया है वह ही नहीं देख रहा है। मैंने उसे बताया कि मैंने महसूस तो कर लिया था लेकिन पुछा नहीं था।
वह बोली कि वजन कुछ ज्यादा था तो उसे कम करके सही कर लिया है। आदमियों को तो मांसल औरते ही अच्छी लगती है। मैंने कहा कि मेरे लिये तो तुम जैसी हो अच्छी हो। वह बोली कि मुझे पता है लेकिन बढ़ती उम्र में वजन कम ही रहे तो सही है। मैंने सहमति में सर हिला दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वह बोली कि आज तो तुम ने किसी फिल्म की तरह से सब कुछ किया है। मुझे छुपा कर यहाँ ला कर। मैंने कहा कि हाँ खतरनाक तो है लेकिन मिलन के लिये और कोई तरीका समझ ही नहीं आया। वह बोली कि दो दिन तक मजा करेगें। जब मन करेगा प्यार करेगे। मैंने कहा हाँ जब मन किया तब प्यार करेगें।
वह बोली कि पड़ोसी शक तो नहीं करेगें? मैंने कहा कि कोई किसी के मतलब नहीं रखता है। तुम घर के बाहर नहीं निकलना और परदे नहीं खोलना। वह बोली हाँ यह सावधानी तो मैं रखुँगी। मैंने उसे अपने से लिपटा लिया और हम दोनों नींद की आराधना में डुब गये।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो अस्मिता को देख कर मेरा महाराज सुबह का सलाम देने लगा। मैंने अस्मिता के पीछे से प्रवेश किया अस्मिता कुनमुनाई, मैं पीछे से संभोग करता रहा। वह सोते सोते संभोग कर मजा उठाती रही। संभोग के बाद मेरी नींद फिर से लग गयी। दूबारा मेरी नींद अस्मिता के मुझे उठाने से खुली।
अस्मिता ने मुझे उठा कर कहा कि अब उठ जाओ। मैं उठ कर बैठ गया। अस्मिता मुझे देख कर बोली कि उठने का मन है या नहीं? मैंने कहा कि छुट्टी का दिन है जब मन करेगा तब उठेगे। अस्मिता ने कहा कि बताओ किचन कहा है चाय बना कर लाती हूँ। मैंने कहा कि रुकों चाय पीने से पहले एक बार प्यार तो कर ले।
मेरी बात से वह भी सहमत थी। मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और हम दोनों फिर से संभोग में डुब गये। दस मिनट बाद जब ज्वार उतर गया तो हम दोनों बेड से उतर गये। दोनों ने कपड़े पहन लिये। इस के बाद मैं किचन की तरफ चल दिया। अस्मिता मेरे पीछे पीछे आ गयी।
मैं किचन में चाय बनाने लगा और अस्मिता मुझे देखती रही। चाय बना कर हम दोनों वही पर चाय पीने लग गये। चाय पीने के बाद दोनों के बदन में ताकत आ गयी और हम दोनों कमरे में वापस आ गये। अस्मिता बोली कि आज दिन में क्या करने का विचार है?
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मैंने कहा कि पहले नहा लेते है रात को इतनी बार संभोग किया है कि सारा शरीर चिपचिपा हो रहा है। इस के बाद हम नाश्ता करते है फिर कुछ और करने का सोचते है। मेरी सुन कर अस्मिता बोली कि यही सही रहेगा। हम दोनों नित्यकर्म में लग गये। उस से निवृत हो कर नहाने चले गये।
नहाने के बाद अस्मिता नाश्ता बनाने चली गयी। मैं घर में सफाई करने लग गया। अस्मिता ने नाश्ता लगा दिया तो हम दोनों नाश्ता करने बैठ गये। नाश्ता अस्मिता नें बढ़िया बनाया था। नाश्ता कर के मन तृप्त हो गया। अस्मिता खाना अच्छा बनाती है यह मुझे पता नहीं था। लेकिन आज यह भी पता चल गया।
अस्मिता ने पुछ ही लिया कि नाश्ता कैसा बना है? मैंने उसे बताया कि नाश्ता बढ़िया बना है। मेरी बात सुन कर उस के चेहरे पर संतोष झलक गया। वह बोली कि रात को कितनी बार प्यार किया है हमने? मैंने कहा कि सुबह तक तीन बार कर चुके है। वह बोली कि प्यार की प्यास बुझ ही नहीं रही है।
मैंने कहा कि जो मौका मिला है उस का पुरा फायदा उठाना है। वह बोली कि इतना बड़ा खतरा उठाया है तो ऐसा करना तो बनता है। नाश्ता करने के बाद अस्मिता ने बेड पर पड़ी चद्दर धोने डाल दी। रात के खेल के कारण सारी चद्दर दाग से भर गयी थी। मैंने नई चद्दर निकाल कर बेड पर बिछा दी।
वह बेड पर लेट गयी और बोली की सारा बदन टुट रहा है तुम ने दम निकाल दिया है। मैंने कहा कि इतने दिन बाद मिली थी रुका ही नहीं जाता है। वह बोली कि मुझ से कौन सा रुका जा रहा था। छह महीने बाद मौका मिला है। ऐसा कब तक चलेगा? उस के इस सवाल पर मैं चुप रहा तो वह बोली कि नाराज मत होना, मन है कि मानता ही नहीं है।
मैंने कहा कि अपनी तो ऐसे ही चलेगी। संबंध को छुपा कर ही रखना पड़ेगा पता नहीं कब तक ऐसा कर पायेंगे। वह बोली हां यह तो है मैं तुम्हारे परिवार को कोई दर्द नहीं देना चाहती हूँ। मैंने खुद अपना परिवार ऐसे बर्बाद होते देखा है किसी और परिवार की बर्बादी का कलंक अपने सर नहीं ले सकती। अपने को ही दबा कर रखना होगा। यह मैं पहले से जानती हूँ।
मैंने उस के कंधें थपथपा दिये। मुझे भी इस बारें में कुछ पता नहीं था। भविष्य के बारे में कोई कुछ नहीं बता सकता था। दोपहर के खाने के बाद फिर से हम दोनों ने संभोग किया। शाम को उठ कर चाय पी और रात का खाना खाने के बाद हम दोनों सोने आ गये। रात को फिर से खेल शुरु हो गया।
मुझे जितने आसन आते थे आज अस्मिता के साथ सब आजमा लिये। तीन-चार बार संभोग करने के बाद ही हम नींद के आगोश में चले गये। सुबह उठ कर फिर से एक बार जोरदार खेल हुया। जब मन भर गया तब दोनों उठ कर नित्य के कामों में लग गये।
नाश्ते के समय अस्मिता बोली कि मुझे छोड़ कर कैसे आओगे? मैंने उसे बताया कि सुबह तो छोड़ना संभव नहीं होगा इस लिये सोचता हूँ कि रात को ही तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ आऊँ। वह बोली कि मुझे तो छोड़ दोगें लेकिन रात को लेट आ कर सुबह ऑफिस कैसे जाओगे।
मैंने कहा कि मैं काम चला लुगा लेकिन तुम्हें आज रात को ही तुम्हारे घर छोड़ कर आता हूँ वह बोली कि आज कहाँ छुपा कर ले जाने का विचार है मैंने कहा कि जैसे आयी थी वैसे ही जाना पड़ेगा। यह सुन कर वह बोली कि मेरी कमर का कचुमर पहले ही बना हुआ है, इस के बाद तो खड़ा होना भी मुश्किल होगा।
मैंने कहा कि आज तुम्हें थोड़ी देर ही लेटना पड़ेगा। तुम नीचे की बजाए सीट पर ही लेट जाना। तुम्हारे ऊपर कंबल डाल दुंगा। मेरा विचार अस्मिता को समझ आ गया। दिन में भी हम दोनों नें अपने मन का करा और रात को अंधेरा होने पर मैंने कार के पीछे की सीट पर अस्मिता को लिटा कर उस के ऊपर कंबल डाल कर घर से बाहर निकल गया।
कुछ दूर जाने के बाद मैंने अस्मिता को बैठ जाने को कहा। वह उठ कर बैठ गयी। उस के घर पहुँच कर उसे घर छोड़ कर मैं वापस अपने घर आ गया। कुछ देर बाद अस्मिता ने फोन करके पुछा कि पहुँच गये? मैंने उसे बताया कि मैं अभी पहुँचा हूँ वह बोली कि मैं तो सोने जा रही हूँ। सारे शरीर में दर्द हो रहा है, लगता नहीं है कि मैं कल ऑफिस जा पाऊंगी, मैंने कहा कि कल छुट्टी ले लेना।
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वह बोली कि मैं भी ऐसा ही सोच रही हूँ। सुबह बताती हूँ। तुम्हारा क्या हाल है? मैंने कहा कि मेरा भी तुम्हारे जैसा हाल है सोच रहा हूँ कि दर्द की गोली खा कर सोता हूँ। वह बोली कि मैं भी कोई पैन किलर खा लेती हूँ। मैंने फोन काट दिया। दोनों के संबंध ऐसे ही चोरी छिपे चल रहे थे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पत्नी को किस तरह से इस के बारे में बताया जाये। मुझे पता था कि इस संबंध को वह बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगी। वह क्या कदम उठायेगी मुझे पता नहीं था।
मैं अपने परिवार को तबाह नहीं करना चाहता था लेकिन अस्मिता को भी छोड़ना नहीं चाहता था। उस के साथ मेरा लगाव गहरा हो गया था। वह मेरे दूख-दर्द में शामिल थी और मैं उस के दुख-दर्द में शामिल रहता था। जीवन ऐसे ही चल रहा था। हर दिन उस का मेरे जीवन में हिस्सा बढ़ता जा रहा था। हम दोनों के बीच का संबंध गहराता जा रहा था। उस की गहराई अब इतनी थी कि अस्मिता को मैं अपने से अलग नहीं कर सकता था। वह अकेली जिन्दगी काट रही थी लेकिन उसे पता था कि वह अकेली नहीं है मैं हर पल उस के साथ हूँ।
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