Kamwali Sex Story
मेरी उम्र करीब 40 वर्ष है। नौकरी करने के लिए घर से दूर रहता हूँ और हफ्ते 2 हफ्ते पर ही घर जाने पर बीवी के साथ चुदाई का सुख नसीब होता। वैसे मेरी बीवी है बड़ी चुदक्कड, मुंह में लंड ऐसा चूसती है कि बस। चूत गाँड़ जो कह दो देने से मना नहीं करती और एक बूंद माल भी मुंह से बाहर नहीं गिरने देती चुदाई के बाद मेरा लंड चाट चाट के साफ करती है। Kamwali Sex Story
लेकिन मर्द मर्द होता है और लन्ड को नया छेद बहुत भाता है तो वही अपना भी है। ऑफिस मार्किट आसपास जहां मौका दिखे छोड़ता नहीं 25 साल में एक भी औरत जो चुद सकती थी, उसको छोड़ा नहीं। खैर ये कहानी मेरे पिछले ट्रांसफर के बाद कि है। नए शहर पंहुचा तो घर खोजा, फिर कुछ दिन बाद साफ सफाई के लिए एक मेड कि जरूरत हुई तो अपनी मकान मालकिन को कहा, उसने कहा सामने वाले घर में एक काम करने वाली आती है उसको बोलती हूँ।
4/5 दिन गुजर गए तो मैं एक दिन पूछा तो बोली कि मना कर रही है.। मैंने पूछा क्यों तो बोली बैचलर के घर मे काम नहीं करना चाहती। बात आई गयी हो गयी….. फिर एक दिन ऑफिस निकलते समय दिख गई….. गेंहुआ रंग साड़ी पहने कोई 27/28 साल कि रही होगी, माल तो नहीं लेकिन ठीक ही थी, खैर मुझे काम कराना था और मौका लगे तो चुदाई करनी थी।
सो मैंने खुद ही टोक दिया लेकिन बंदी थी बहुत टेढ़ी, सीधा बोल दिया कि ना, अकेले मर्दों के घर नहीं करती। बुरा तो बहुत लगा लेकिन क्या कर सकता था, बात खत्मम दो चार रोज बाद मकान वाली ने एक दूसरी औरत से बात करा दी, वो आने लगी।
वो कोई 35 साल की औरत थी, गहरा सांवला सा रंग, उन्नत उरोज और भरे बदन वाली, लेकिन बाल गन्दे, शरीर से मसाले और पसीने की बू आती थी, पहली नज़र में तो किसी काम की नहीं थी लेकिन वो थी बड़ी चंट, हर 5 /7 दिन पर पैसे मांगे और महीने में आये 20 दिन, कभी कुछ कभी कुछ।
ऐसे ही दिन कट रहे थे, कोई माल फंसी नहीं, मुठ मार कर लन्ड हिलाते पांच छह महीने निकल गए और ठण्ड आई…. और मेरे पीठ में थोड़ा दर्द हो गया। डॉक्टर से दिखाया तो उसने मालिश करने को कहा और कुछ दवाएं दे दीं। अब दिक्कत ये की मालिश करेगा कौन, तो मैंने अपनी काम वाली को ही कहा की देखो ऐसे बात है और डॉक्टर ने कहां की मालिश को; अब किसी को बोलूंगा तो पैसे तो देने ही होंगे, सो तुम्ही कर दिया करो तुम्ही को कुछ दे दिया करूंगा।
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पहले तो थोड़ा हिचकिचाई फिर शायद पैसों का सोच कर मान गयी। सुबह आती, झाड़ू पोंछा बर्तन वगैरह करके तेल गरम के मेरी पीठ पर मालिश कर देती, 3/4 दिन बाद में कहा थोड़ा तलवा दबा दिया करो और 200 रुपये दे दिए तो मान गई फिर धीरे धीरे कमर कंधे सब दबाने लगी….. अब हुआ यार की जब कमर दबती तो मेरा लन्ड खड़ा हो जाता, लेकिन उसे चोदने की इच्छा फिर भी नहीं थी
इधर ऑफिस में काम ज्यादा होने की वजह से घर भी नहीं जा पाया 3/4 हफ़्तों से तो मुठ मारना ही एक मात्र सहारा था। एक रात लन्ड हिलाते हिलाते दिमाग मे आया कि चुदाई न सही चुसवा तो सकता ही हूँ! सो मन ही मन प्लान बनाया और सो गया।
अभी तक जब पीठ दबाने के बाद तलवों की मालिश करती थी तो मैं पेट के बल ही रहता था, ताकि उसे मेरे खड़े लन्ड के पता न चले। एक दिन मैंने उसे कहा कि तलवे से ऊपर थोड़ा पैर दबा दो…. तो थोड़ा हिचकिचाई और बेमन से थोड़ी देर दबाने के बाद जाने लगी तो मैंने बुलाया और कहा की तुमने बहुत ध्यान रखा, ये लो रख लो और ऐसा कह कर दो 500 के नोट पकड़ा दिए।
कहाँ तो वो 1500 में पूरे महीने झाड़ू पोंछा करती थी कहाँ 7/8 दिन में ही हजार मिल गए थे, एकदम खुश हो गयी। दूसरे दिन जब पांव दबाने बोला तो बिना हिचकिचाहट के दबाने लगी और अच्छे से दबाया लेकिन घुटने तक ही, जबकि मैं उसको लन्ड पकड़ाने के चक्कर में था तो धीरे इसी प्रोसेस से ही कभी 100 कभी 200 पाकर वो हफ्ते भर में ही मेरे जांघों से होते हुए चूतड़ दबाने लगी।
अगले दिन मैंने उसके आने से पहले अंडरवियर और उसके ऊपर एक बहुत ढीला बरमूडा पहन लिया ताकि उसको मेरा खड़ा लन्ड न दिखे……और जब वो पांव दबा चुकी तो मैं सीधा लेट गया और उसे आगे से पांव दबाने बोला, वो फिर झिझकी लेकिन फिर दबाने लगी, पर घुटनों तक ही मुझे अब बेकरारी हो रही थी, सो मैंने इशारे से ऊपर दिखाया कि यहाँ भी।
अब तो वो थोड़ी रुक ही गयी, फिर रूखेपन से थोड़ा इधर उधर हाथ लगा के उठ गई। मैंने जान बूझ कुछ नहीं कहा न रोज की तरह कोई पैसा दिया। उसके चेहरे पर मायूसी छा गयी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और चली गयी। अगले दिन मैंने फिर वही दोहराया तो उसने मान लिया दबाने लगी और मैंने धीरे उसके अपने अंडर वियर के कोर तक पंहुचा लिया।
अब तो मेरा लन्ड मारे चूसाई की आशा के बमपिलाट बन गया और शायद उसे भी मेरे खड़े लन्ड का एहसास हो गया था, पर उसने कुछ कहा नहीं बस सर झुकाए दबती रही। काम खत्म होने पर मैंने उसे 500 रुपये दिए, जिसे लेकर वो चली गयी, यही खेल अगले दो तीन दिन चला और वो इसके लिए सामान्य हो गयी चौथे दिन मै ने अंडरवियर नहीं पहना, उसने दबाना शुरू किया, फिर मैं पीठ के बल लेट गया।
वो तलवों शुरू कर धीरे ऊपर आ रही थी और मेरा लन्ड तन रहा था और गीला होने लगा। जब उसने हाथ बरमूडा के अंदर डाल कर दबाना शुरू किया तो मैंने सोने का नाटक करना शुरू किया। थोड़ी ही देर में उसका हाथ मेरे लन्ड टकराया और उसमें मेरा टपक रहा प्रिकम भी लग गया।
उसे जैसे करंट लग गया हो उसने अपना हाथ झट से बाहर खिंच लिया और उठ कर खड़ी हो गयी, मैंने चौंक कर उठने का ड्रामा किया और पूछा क्या हुआ, कुछ बोल न पाई बस चली गयी। अगले दिन फिर वही धीरे धीरे वो समझ गई। तो उसने करना ये शुरू किया कि जितना बचा सकती उतना बचा के मालिश कर देती.
फिर भी लन्ड तो उसके हाथ को छू ही जाता और हाथ में लण्डरस लग ही जाता, पर पैसे के लालच में करती रही मैंने अबकी उसे 5 दिन का समय दिया ताकि मेरा लन्ड छूना उसके लिए नार्मल हो जाये। 5 दिन में वो आराम से मालिश करने लगी और मेरा लन्ड उसके लिए नॉर्मल हो गया।
सुबह आती काम निबटाती फिर मालिश, हाँ मैं आंखे बंद किये नींद में होने का ड्रामा किये रहता। 10 वें दिन, जब वो मालिश कर रही थी तो मैं ने अचानक आंखें खोल दीं, वो हड़बड़ा सी गयी और उठने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा जब इतना कर रही हो तो जरा इसकी भी मालिश कर दिया करो।
ये सुनते ही उसने मेरी ओर गुस्से से देखा तो मैंने कहा 1000 दूंगा, बस इसकी मालिश कर दे। 1000 सुन के वो असमंजस में पड़ गई। कुछ देर तो मैं भी शांत रहा फिर धीरे से बरमूडा नीचे सरका कर उसका हाथ अपने लन्ड पर रख दिया, पूरा लन्ड प्रिकम से लिसड़ा हुआ था.
उसने हाथ खिंचने की कोशिश की तो मैं ने नहीं छोड़ा और जोर से लन्ड पर दबा दिया। क्योंकि आज आरपार का मामला था और इस चक्कर मे उसे 4/5 हजार दे चुका था। आज अगर उसने लन्ड नहीं पकड़ा तो बाजी हाथ से गयी थी। कुछ देर की अजीब से बिना हरकत की चुप्पी के बाद उसने धीरे हाथ हिलाया…. और मुझे देखते हुए बोली मैं चुदवाउंगी नहीं।
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मुझे हंसी आ गयी की इसे लगता है मैं इसे चोदूंगा!! मैंने कहा उसकी बात ही नहीं तू बस मालिश कर दे। उसने कहा तो कुछ नहीं पर मेरे हाथ हटा लेने के बाद भी लंड पकड़े रही। फिर धीरे धीरे उसने उसे सहलाना शुरू किया और फिर मालिश शुरू हो गई।
इन सब में मैं इतना उत्तेजित हो गया था कि 5 मिनटों में ही लन्ड ने लावा उगल दिया और पूरा वीर्य उसके हाथों में लग गया, ये होते ही उनका चेहरा अजीब सा हो गया और उसने हाथ हटा लिए। मैंने तकिए के नीचे से एक साफ हैंड टॉवल उसे बढ़ाया और कहा हाथ पोंछ लो, उसने झट से ले लिया और हाथ पोंछ कर उठने लगी, तो मैं इशारा करते हुए कहा इसे भी तो पोंछ।
उसने कहा जाने वाले निगाह दी लेकिन फिर पोंछने लगी। मैं ने हाथ से दिखा दिखा कर उस से पूरा लन्ड साफ करवाया और फिर 1000 की जगह 2 हज़ार दे दिए। इस दरिया दिली से उसकी सब परेशानियां दूर हो गयीं और अब ये सिलसिला निकल पड़ा। सुबह आती, मेरा बरमूडा खिंच के निकालती, पैर दबाती, फिर लन्ड मसाज करती, मेरा माल झाड़ती फिर जो दे देता ले कर निकल जाती।
हाँ धीरे मैंने उसे माल निकलने के बाद भी लन्ड को मिंजना सिखा दिया, उसे अब मेरे माल से कोई दिक्कत नहीं होती जब वो उसके हथेलियों पर बहता तो भी। धीरे लन्ड फेंटते समय उस से बातें शुरू कर कर दीं और धीरे अश्लील बातें कर ने लगा उस से, कुछ बोलती तो नहीं पर कभी कभार मुस्कुरा देती अब वो मेरे लन्ड को बड़े अच्छे से तेल लगा लगा कर मलती और वीर्य निकलने पर उस से खेलने भी लगी थी।
अब वक्त था लन्ड उसके मुंह में देने का सो सुबह जब उसने मेरी मालिश खत्म की तो मैं उठ कर पलंग के किनारे बैठ गया और उस से कहा नीचे बैठ के लन्ड की सेवा कर। नीचे बिछाने के लिए उसे योगा मैट दे दिया ताकि उसके घुटने न छीलें। अब स्थिति ये थी कि लन्ड उसके मुंह से मात्र कुछ इंचों पर था और वो दोनों हाथों से उसे फेट रही थी।
थोड़ी देर बाद मैंने उसके बालों हाथ फिरना शुरू किया. और धीरे सर के पीछे के बाल मुट्ठी में भर लिए। वो अपनी रौ में लन्ड मालिश कर रही थी शायद अब लन्ड मलते मलते वो भी उत्तेजित हो जाती थी। मैंने पूछा कभी लन्ड चूसी हो? उसने मेरी गुस्से से देख कर जैसे ही इनकार में सर हिलाया मैंने मेरी मुट्ठी में पकड़े बालों के गुच्छे को कस दिया।
दर्द से उसका मुंह आह करने को खुला ही था कि उसके सर को धकेल के आगे किया और लन्ड पूरा उसके मुंह में ठूंस दिया! इस अचानक हुए हमले लिए तैयार नहीं थी सो एकदम से सर पीछे करने लगी पर मेरी पकड़ मजबूत थी सो मैंने उसका मुंह लन्ड पर दबाए रखा और कहा चूस इसको। लेकिन वो नहीं मानी और लन्ड बाहर निकालने के लिए जोर लगाने लगी।
मैंने कहा की अब तो घुस ही गया है तो थोड़ा चूस ले सब चूसतीं हैं, पैसे भी दूंगा। थोड़ी देर के कशमकश के बाद वो सर आगे पीछे करने लगी तो मैंने हाथ हटा लिया। उसने एक दम से मुह पीछे किया और जोर की सांस ली और मुझे घूरने लगी। मैंने फिर सर के पीछे हाथ लगाया और उसको लन्ड की तरफ बढ़ा दिया, लन्ड उसके होंठों पर लगा.
मैं उसके होंठों पर लन्ड रगड़ने लगा, थोड़ी देर बाद उसने होंठ खोले फिर धीरे धीरे चूसने लगी। बहुत अच्छा नहीं लेकिन चूस रही थी यही बहुत था। जब मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने उसका सर पकड़ लिया और लन्ड गले तक ठूस दिया और सारा माल उसके गले मे उड़ेल दिया।
उसकी सांस रुक सी गयी थी सो मजबूरी में उसने सब गले से नीच उतारा। लन्ड मुह से बाहर निकलने पर बोली मैं तो मर ही जाती अभी!!! मैंने अपने पर्स से 1000 रुपये निकाले और उसे अपने पास बुलाया जब वो झुकी तो उसके ब्लाउज़ में फंसा दिए…. ये उसके रंडी बन जाने का सबूत था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
धीरे धीरे में उसको मस्त लन्ड चूसना, टट्टे चुभलाना, गाँड़ चाटना सब सिखा दिया। जब वो लन्ड मुंह में लेकर अंदर जीभ से दबा कर चाटती है तो कसम खुदा की जन्नत का नज़ारा हो जाता है। अब तो कभी चॉकलेट सिरप तो कभी शहद कभी व्हिप क्रीम से लन्ड का मसाज करती…. और फिर चाट चाट के पूरे लन्ड को एक दम साफ कर देती।
अगले 2/3 महीने में पक्की लन्ड खोर रांड बन गयी वो, और अब उसे उसके किसी भी प्रकार यूज़ किये जाने से दिक्कत नहीं थी. जिंदगी एक दम मजे में थी, सुबह सुबह एक मर्द को क्या चाहिए कि एक औरत सुबह आये अच्छे से मस्त मालिश करे और फिर लन्ड को मसाज करने के बाद उसे चूसे, गाँड़ चाटे, टट्टे चूभलाये और फिर माल को कभी सिधा पी जाये तो कभी हाथ मे गिरा कर फिर चाट चाट के खाये।
उसकी पगार बढ़ा के 6000 महीने कर दी थी, और उपर 3/4 हजार द्दे देता,सो अब उसे लन्ड चूसने में कोई दिक्कत नहीं थी। लन्ड चुसवाते चुसवाते मैंने उसके शरीर को देखा, काली भले थी लेकिन नैन नक्श सुडौल थे। कसे हुए चुंचे, सपाट पेट, उभरी हुई गांड, हाँ थोड़ी गन्दी रहती थी।
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सोचा इसको एक इसे नहला धुला कर देखता हूँ सो एक शाम बाजार से हेयर रिमूविंग क्रीम, और एनीमा ले आया। जब वो मेरा लन्ड चूसने आयी तो मैंने उसे कहा कि पहले जाकर नहा कर आओ फिर उसे शैम्पू, हेयर रिमूवल क्रीम और एनीमा दिया। उसे सब तो समझ आ गया लेकिन एनीमा समझ न आया तो मैंने उसे उसका प्रयोग समझाया।
उसने पूछा ये क्यों मैंने कहा शरीर साफ करने गैस नहीं बनती और मुंह से बदबू भी नहीं आती। उसे कुछ समझ आया या नहीं, पता नहीं, पर 3 महीने से लन्ड चुसवाने के मेरे नायाब तरीकों से वो इतना तो जानती थी कि मैं मानूंगा नहीं। सो लेकर बाथरूम में चली गयी, जाते जाते मैंने कहा ये कपड़े फिर मत पहन लेना, उसने कहा, फिर???
मैंने एक झीना सा मीटर भर का सफेद गमछा बढ़ा दिया…. आधे घण्टे बाद जब नहा धो कर नीचे और बगल के बाल साफ करके, शैम्पू से सर के बाल धो कर मुंह ब्रश करके जैसा कहा था, सिर्फ वही पतला तौलिया जो उसे दिया था, लपेट के बाहर निकली।
उसमें उसके आधे चुंचे और आधा गाँड ढंका था। मैंने पहली बार उसके शरीर को गौर से नापा….. चुंचे ठीक ठाक थे….. गीले निप्पल्स जो छोटे काले अंगूर जैसे थे पतले तौलिए के चिपक गए थे….. मैं आगे बढ़ा और उसे घूमा दिया….. पीछे उठी हुई गीली गांड।
नहा धोकर के एकदम चोदेबुल माल हो गई थी, उसे फिर घुमाया…. और उसके चुंचे पर बंधे तौलिए को खींच कर खोल दिया! शर्म तो अब क्या ही रही होगी जब तीन महीने से मेरा लन्ड चूस चूस कर माल गटक रही थी लेकिन अचानक हुई इस हरकत से वो हड़बड़ा सी गयी और नारी सुलभ लज्जा ने हाथों से चूत को ढंक दिया।
मैं कुछ बोल नहीं बस पीछे आने का इशारे कर ड्राइंग रूम में पड़े सोफे की ओर चल पड़ा, वो नंगी ही पीछे आयी, मैं सोफे बैठ गया। वो दरवाजे पर रुक गई और मुझे देखा; मैंने अपना बरमूडा निकाल दिया तो मेरा लन्ड तन के खड़ा हो गया, उसे फिर इशारा किया कि सामने आओ, थोड़ी झिझक के साथ आ गई और सामने खड़ी हो गई।
माहौल एकदम चुप्पी भरा था, मैं जान बूझ के चुप था बस इशारे कर रहा था। उसे और पास बुलाया और उसके हाथ चूत से हटा दिया, बिना बालों की काली चूत अंदर हल्का गुलाबीपन, मैंने उसे हाथ सर के पीछे बांधने कहा, इस से उसके चुंचे दुनाली बंदूक की तरह आगे को निकल आये, अब मैं बोला घूमो, वो घूमी, पीछे एकदम चिकनी गांड, मैंने हाथ लगा कर उसके टांगे फैला दिन और उसे आगे झुकाया।
वो यंत्रवत हुक्म मान रही थी, झुक जाने से उसकी चूत पीछे से खुल गई थी। मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ फिराया और फिर दोनों के बीच की गीली दरार में उंगली फिराई और धीरे उसकी चूत के मुहाने तक पंहुच गया, उंगली के चूत से छूते ही वो उसका शरीर में थरथराया और उसने वही पड़े सेंटर टेबल को सहारे के लिए पकड़ लिया, उसके मुह से अनायास सिसकारी निकल गई।
उसकी चूत पनियाई हुई थी, एक दम गीली, मैंने उंगली उसकी चूत में उतार दी, इस बार उसने जोर की सिसकी ली, आह्ह!!! मैंने उसकी चूत को उंगली से चोदना शुरू कर दिया, और उसकी चूत के दाने को अंगूठे से रगड़ने लगा, मारे आनद को कांपने लगी, उसके मुंह से अजीब सी गुर्राहट और सिसकारियां निकल रहीं थीं, कुछ ही मिनटों में वो एक घुटी चीख के साथ एकदम से अपने घुटनो पर गिर गयी और फर्श पर लेट गई।
मेरी उंगली उसके चूत के रस से भीग गई थी और वो अपने अपने चरम सुख में लीन थी… सो मैं वापस सोफे पर बैठ गया।पास पड़े बरमुडे की जेब से सिगरेट और लाइटर निकल और जला लिया। थोड़ी देर बिना हरकत वो वहीं फर्श पर पड़े रहने के बाद हिली और फिर धीरे से उठी। मैंने आवाज दी तो शायद धरती पर आई।
इशारे से पास बुलाया तो बैठे बैठे ही खिसक आयी सोफे के पास। चेहरे पर झड़ जाने के बाद का इत्मीनान पसरा था। मैंने सर के पीछे हाथ लगाया और उसका चेहरा अपने लन्ड के पास झुकया उसने मुंह खोल कर पूरा लन्ड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी।
अजीब सी हरारत थी आज उसके चूसने में एकदम मस्ती से चूस रही पूरा का पूरा लन्ड निगल कर गले मे ले जा रही थी और जीभ निकल के टट्टों को चाट रही थी। फिर लन्ड मुंह से निकाल टट्टों के नीचे वाले भाग को चाटने लगी और धीरे धीरे मेरी गाँड़ के छेद पर जीभ फिरानी लगी, मेरी गाँड़ कि पुरी दरार से उसकी लार चू रही थी।
फिर ऊपर आई और जैसे बिल्ली चूहे को पकड़ती है वैसे ही हपक के लन्ड को मुंह में गटक लिया और लन्ड मुंह में लिए हइये ही ऊपर देखा और मेरी आँखों मे आँखे डाल कर मुस्काई। ये पहला ही मौका था वरना चुपचाप नजर नीचे लिए हुए चुसती माल गटकती और निकल जाती। उसके ऑर्गेज्म ने शायद समीकरण बदल दिए थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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वो इतना जबरदस्त चूस रही थी कि मैं सोफे सरक कर जमीन पर लेट गया और थोड़ी ही देर में छूट गया। उसका मुंह भर गया तो सारा माल लौंड़े पर ही उगल दिया और हाथों से मलने लगी, फिर लगी चाटने एक एक बूंद चाट गई। पूरा लन्ड और आसपास जहां भी वीर्य फैला सब चाट गई।
हम दोनों वहीं फर्श पर ही सो गए, कोई घण्टे भर बाद मेरी नींद खुली तो उसे हिलाया और हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ बढ़ गया और उसे खींच कर बेड पर ले लिया। अब मैं उसकी पीठ से चिपका था और दोनों हाथों से उसके चुंचे और निप्पल मसल रहा था, वो आंखे बंद किए मजे ले रही रही, मेरे हाथ आवारा की तरह उसका बदन टटोल रहे थे।
मेरा लन्ड उसकी गांड की दरार को गिला करता हुआ फिसल रहा था। मैंने उसका चेहरा घुमाया तो पूरी ही पलट गई अब उसके चुंचे मेरे सीने से दबे थे, मैंने उसके होठों पर होंठ रख दिया। आग दोनों तरफ थी, हम दोनों एक दूसरे के होंठ और जीभ चूसने लगे, ये वेट किसिंग और सलाइवा इंटरचेंज काफी देर चलता रहा, वो किसी नागिन सी लिपटी थी मुझ से।
फिर मैंने उसे अलग किया और कहा लन्ड चूस, उसने बिना किसी झिझक के लन्ड मुंह मे भर लिया। थोड़ी देर में ही मेरा कन्द एक दम कड़क खड़ा हो गया, मैंने उसका गाँड़ सहलाना शुरू कर दिया और उसकी गाँड़ अपनी ओर खींची तो वो तिरछी होकर लन्ड चुसने लगी अब उसकी गाँड़ और चूत मेरी उंगलियों की जद में थीं, मेरा इरादा उसकी गाँड़ मारने का था।
सो मैं ने ड्रावर में पहले से मंगा के रखी लुब्रीकेंट की ट्यूब निकाली और ल्यूब को उसकी गाँड़ के छेद पर लगाकर उंगली से उसकी गाँड़ की छेद को सहलाने लगा। ल्यूब होने की वजह से उसकी बड़ी आसानी उंगली उसकी गाँड़ में समा गई। उसने बस हल्की सिसकारियां ही लीं.
थोड़ी देर में मैंने धीरे से दूसरी उंगली घुसाई, वो थोड़ा कसमसाई लेकिन लन्ड चूसना नहीं छोड़ा। थोड़ा और ल्यूब डाल कर उसकी गाँड़ को एकदम फ्रिक्शन लेस बनाया और फिर ऊगली निकाल के खड़ा हो गया। उसे पलंग पर घुटनो में बल लिटाया और सर तकिये पर टिका दिया इस से उसकी गाँड़ एक दम से उठ गई.
मैने लन्ड सेट किया उसके छेद पर वो थोड़ा कसमसाई शायद उसे उम्मीद थी कि पहले चूत चूदेगी, लेकिन मेरी आदत है पहले गांड मारने की। मैंने दबाव बढ़ाया तो लन्ड का सुपाड़ा गच्च से पहले से उंगलियों से खोली गाँड़ में जा घुसा, उसने हल्की सी दर्द भरी सिसकी ली, मैंने थोड़ा और जोर लगाया और लन्ड थोड़ा और अंदर चला गया।
चुकी लुब्रिकेशन सफिसिएंट था…. उसे बहुत दिक्कत नहीं हुई। मैंने धीरे धीरे लन्ड अंदर बाहर करना शुरू किया और चार पांच धक्कों में ही पूरा लन्ड गाँड़ में अंदर जाने लगा। वो भी मस्ती में आ चुकी थी, दर्द का डर दूर हो चुका था अब वो गाँड़ हिला रही थी, लन्ड सटासट उसकी कसी हुई गांड में अंदर बाहर हो रहा था।
मैंने कमर से हाथ बढ़ा कर उसके चुंचे पकड़ लिए और उन्हें आते तरह गूंथने लगा, उसने मुह पीछे घुमाया और हम एक दुरे के होंठ चूसने लगे। मेरा बाया हाथ फिसलत हुआ उसकी चूत पर जा पंहुचा, वहां बाढ़ आई हुई थी, उसकी चूत बुरी तरह से टपक रही थी।
मैंने उसका दाना टटोला और उसले रगड़ने लगा, हम दोने की मस्ती आसमान में थी। थोड़ी देर में मेरे टट्टों मे लावा उबलने लगा और मैं चरम पर पंहुच गया, मैंने उसकी गाँड़ में ही माल छोड़ दिया, वो भी अपनी मंजिल पा चुकी थी। हम दोनों बीएड पर ही गिर पड़े, थोड़ी देर मैं उसके ऊपर ही पड़ा रहा, लन्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया और मैं उसके ऊपर से नीचे लुढ़क गया।
वो घूम कर मेरी ओर हो गई तो मैं फिर उसके खींच या और उसके होंठों को चुसने लगा और मम्मे दबाने लगा। थोड़ी देर बाद उसका सर लन्ड की तरफ दबाया और चूसने कहा उसने बे झिझक अपनी गाँड़ से निकले लन्ड को चूस चाट के साफ कर दिया।
थोड़ी देर यूं ही पड़े रहने के बाद में समय देखा तो लगभग 2.30 बज चुके थे और भूख भी लग आयी थी…. सो मैंने नजदीक के ही एक रेस्टोरेन्ट को फोन कर के खाना मंगा लिया। जब तक खाना आया, हम दोनों ने खुद को साफ किया और मैंने बरमुडा और टीशर्ट पहन लिया और एक सिगरेट जलाकर और बाहर सोफे पर जाके बैठ गया थोड़ी देर में खाना आ गया.
मैंने डिलीवरी ली और उसे आवाज दी, वो आई और ड्राइंग रूम के दरवाजे से झांकी की कहीं कोई और तो नहीं है जब देखा कोई नहीं है तो आ गई एकदम नंगी। मैंने अपनी बनियान उतारी और उसे पहना दिया। बनियान उसके नितम्बो तक पंहुच रहा था और उसमें उसका शरीर और भी मादक दिख रहा था, चुंचे छलक से रहे थे।
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वो खाना निकाल कर ले आई, हमने खाना खत्म किया, फिर मुझे ऑफिस से सम्बंधित कुछ कॉल्स आने लगे, उन्हें निबटाते निबटाते शाम हो गई, वो चाय बना लाई। अब भी उसी बनियान में ही थी, मै ने कहा रात यही रुक जा, वो बोली ठीक है। मुझ बाद अचम्भा हुआ कि घर पर कोई पुछेगा नहीं? बोली अकेले कमरा लेकर रहती है।
आसपास किसी को बहुत फर्क नहीं पड़ता, वैसे भी अक्सर वो किसी न किसी के यहाँ रुकती है, रात को पार्टी वगैरह की वजह से। तो मकान मालिक सोचेगा कि कहीं रुक गई होगी। आज पूरी रात के लिए माल का जुगाड़ था, सो मै थोड़ी देर के लिए बाहर निकला, दारू चखना सिगरेट, खाने का इंतजाम और उसके लिए एक छोटी शॉर्ट्स, उसके साइज़ के हिसाब से दो बनियान और कुछ अंडर गारमेंट्स और दो साधारण से सलवार कमीज खरीद लाया।
वापस आकर देखा तो फिर से नहा चुकी थी लेकिन ड्रेस वही थी। मैंने उसे सारे पैकेट्स दिए और लाये हुए कपड़ों में से उसकी बनियान और गुलाबी पैंटी निकल कर कहा, इसे पहन लो, उसने ले लिए और बाथरूम में जाने लगी, मैंने कहा, यही बदलो। चुकी मैं अब तक उसके रसीले बदन के हर हिस्से को नाप चुका था सो उसे कोई दिक्कत नहीं थी।
उसने चुपचाप कपड़े उतार कर नए पहन लिए। बनियान उसकी नाभि तक थी और नीचे गुलाबी लेसदार पैंटी में सीमा अब चुमने, चाटने और चोदने योग्य शानदार माल बन चुकी थी। उसका ये रूप अच्छे अच्छों का लन्ड फौलाद बना देने वाला था।
मैं दारू की बोतल और 2 ग्लास लेकर बैठ गया, वो प्लेट में स्नैक्स निकाल लाई। मैंने पैग बनाये और उसे बढ़ाया। वो चुपचाप फर्श पर बैठी रही जब मैंने कहा कि लो, तो बोली मैं नहीं पीती। ग्लास टेबल पर रख मैंने उसे अपने पास बुलाया और गोद मे बिठा लिया, और पीने लगा, साथ ही उसके मादक अंगों को छेड़ने मसलने सहलाने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सीमा अब कामातुर हो रही थी, मैंने एक घूंट मुंह में भरा और उसका मुंह पास खींच उसके होठों से किस किया, और फिर धीरे धीरे सारी शराब उसके मुंह में उड़ेल दी, उसने कुछ पीया कुछ वापस मेरे मुंह में वापस डाल दिया, ऐसे ही दोनों पेग खत्म हुए। मैंने फिर दो पेग बनाये और उसे बढ़ाया, तो बोली आप मानेंगे तो है नहीं।
उसने ग्लास ले लिया और एक छोटा घूंट भरा, शराब की कड़वाहट उसके चेहरे पर थी तो मैंने थोड़ा नमकीन खिला दिया। धीरे धीरे सीमा 2 पेग गटक गई। नशे से उसकी आँखों मे लाल डोरे तैर रहे थे, चेहरा खिंचा खिंचा सा हो गया। मैं समझ गया कि अब इस से आगे ये बेसुध हो जायेगी, सो खाना निकालने कहा, नशे में मस्त सीमा झूमते लड़खड़ाते निकाल लाई, हमने खाना खाया।
प्लेट्स वगैरह समेटते समेटते नशा और उसके अधनंगे बदन की खुमारी मेरे सर चढ़ कर बोल रही थी। वो प्लेट्स धोने लगी तो मैंने पीछे से उसे बाहों में समेट लिया, हाथ बनियान के अंदर से उसके उन्नत उरोजों को मसल रहे थे और मैं उसके गले को चुम रहा था, कभी उसकी कान की लॉ को होंठों से चबाता कभी कंधों में दांत गड़ा देता।
मेरा लन्ड पीछे से उसकी गुलाबी पैंटी को गीला कर उसके गाँड़ के छेद पर दस्तक दे रहा था। सीमा भी अब मस्त हो चुकी थी, उसने बर्तन छोड़ दिया और गर्दन घूमा कर मेरे साथ फ्रेंचकिस करने लगी हमारी जबानें एक दूसरे लिपटने लड़ने लगीं। कामोत्तेजना हम दोनों के बर्दाश्त से बाहर थी, वैसे ही लिपटते चिपटते हम किचन से फिर ड्राइंग रूम पंहुचे और वहां सोफे पर गिर पड़े.
मैंने अब उसके शरीर हर इंच को चूमना चाटना और हल्का हल्का काटना शुरू किया, पूरा कमरा सीमा की उत्तेजक और कामातुर सिसकारियों से गूंज रहा था। मैं उसकी चुंचियों को मुंह में भर भर कर चूस रहा था। निप्पल्स उंगलियों के बीच बेरहमी से मसल रहा था। उसके पेट, पीठ, रानों नितम्बो सब जगह मेरे काटने के निशान थे।
सीमा एकदम बौराई सी हो रही थी। उसकी चूत से पानी बह कर उसकी टांगो पर बह रहा था, मैंने उसे सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और उसकी टांगे उठा कर उसके चुंचो में सटा दीं। उसकी चूत उस ग़ुलाबी पैंटी पर उभर आई, मैंने उसके इलास्टिक में उंगलियां फँसाई तो अनायास ही सीमा ने अपनी गाँड़ उठा दी.
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मैंने पैंटी उतार कर एक तरफ फेंकी और अपना सूपड़ा उसकी चूत पर लगाया, लन्ड तो ऑलरेडी गीला ही था और उसकी चूत चुदाई की आस में लबालब बह रही थी। मैंने लन्ड थोड़ा चूत के लबों पर फिराया ही था कि सीमा ने अचानक गाँड़ ऊपर उठाई और अपने पैर मेरी कमर से लिपटा दिया, लन्ड एकदम से उसकी गीली चूत में घुस गया, सीमा ने एक आहहहहह भरी सिसकी ली।
उसकी भट्टी जैसी गर्म चूत ने लन्ड को जकड़ लिया, मैंने उसको ठोकना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मैंने लन्ड बाहर निकाला तो वो एकदम से मेरी आँखों मे देखने लगी,मै खिंच कर उसे सोफे हैंडल पर ले आया, उसके नितम्ब सोफे हैंडल पर टिका दिए। अब उसकी चूत ऊपर उठ गई थी और और हचक के चोदने वाली पोजीशन में आ गई थी.
मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और उसे लन्ड पकड़ कर चूत के छेद पर लगाने कहा, सीमा अब लन्ड के लिए बेकरार थी, उसने झट लन्ड को चूत के मुहाने पर सेट कर दिया, मैंने ठाप मारी और लन्ड पूरा उसके बूर में समा गया, इस पोजीशन में होने होने की वजह से लन्ड गहरे तक चूत में जा रहा था, और सीमा की तेज सिसकियां और गीली चूत की फचफच ने कमरे को चुदाई के संगीत से भर दिया।
मैंने चुदाई की गति तेज कर दी, कुछ देर बाद सीमा के पैर मेरी कमर पर कसने लगे और बदन अकड़ने लगा, उसने खिंच कर मुझे अपनी छातियों से चिपका लिया और और मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए, यूं कि जैसे मुझे खुद में समा लेना चाहती हो, उसकी पांवों की पकड़ इतनी जबरदस्त थी की मेरे लिए अब ठाप मारना मुश्किल हो रहा था.
मैं समझ गया कि सीमा चरम सुख के सागर में गोते लगा रही थी, सो मैंने भी चुदाई रोक कर, सीमा के चुम्बन का साथ देना शुरू किया, सीमा को जबदस्त ऑर्गेज़्म हुआ था, मेरे बालों में उंगलियां पिरोए हुए वो मुझे अपने होठों से चिपकाए थी। दो तीन मिनट बाद उसको होश आया और उसने मुझ पर अपनी पकड़ ढीली की।
थोड़ी देर की चुदाई में ही हम दोनो पसीने से लथपथ थे, तब ध्यान आया की पंखा ऐसी दोनों बन्द थे। मैंने सीमा को खड़ा किया और पीछे से बाहों में कस लिया, उसकी नंगा पीठ मेरे सीने से चिपकी थी और उसके कड़क चुंचे अपने हाथों में भर लिए और उन्हें आंटे तरह गूंथने लगा।
मेरा लन्ड पीछे उसके नितम्बो के बीच फंसा और फिर फिसल रहा था। सीमा फिर गर्म होने लगी, मैंने उसे छोड़ा सिगरेट की डिब्बी उठाई और उसे दारू की बोतल और ग्लास लेकर बैडरूम में आने को कहा। बेडरूम में पंहुच कर मैंने सिगरेट सुलगाई और तकिये पर टेक लगा कर लेट पीठ के बल लेट गया, और सीमा को एक पेग बनाने कहा.
पेग लेकर मैंने सीमा को लन्ड चूसने का इशारा किया, जो एकदम तना हुआ था और उसके चूत के रस से गीला हुआ चमक रहा था। सीमा ने झुक कर मेरे होंठों पर एक गिला सा चुम्बन दिया, और फिर मेरे सीने को चाटने लगी, मेरे निप्पल्स को मुंह में भरकर दांतो से काटते हुए वो धीरे धीरे नीचे बढ़ने लगी, मेरे लन्ड मारे उत्तेजना के फटने को हो रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सीमा ने अपने दोनों हाथों से मेरे लन्ड को गोटियों सहित पकड़ लिया और उनके नीचे की जगह पर जीभ फिराने लगी और फिर उसकी जीभ मेरी गाँड़ की दरार में फिसलने लगी, उसकी जुबान का अहसास अपने गाँड़ के छेद पर पाकर मैं उछल गया। सीमा अब ऊपर आयी और मेरे लन्ड को मुंह में लेकर चूसने लगी.
जब वो उसे अपने गले मे उतारती तो उसकी नाक मेरे पेट मे गड़ती, पूरा लन्ड उसकी लार से लिपटा था वो जब सांस लेने को मुंह ऊपर उठाती तो मेरे लन्ड और उसकी लार के मिले जुले रस के तार खींच जाते, सीमा आज एक दम रति का रूप लग रही थी।
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मेरा पैग खत्म हो चुका था, सिगरेट का आखिरी काश खींच कर मैं बेड से उठ खड़ा हुआ, सीमा की सवारी को। मैंने सीमा को कुतिया बनने कहा और उसे पलंग के कोने पर ले आया, और सीमा की चूत पर लन्ड सेट कर के एक ही झटके में पूरा लन्ड अंदर पेल दिया, इस अचानक हुए हमले ने सीमा की चीख निकाल दी, मुझ पर चौथे पेग का नशा हावी था.
मैंने सीमा की कमर पकड़ के उसकी जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी, मेरे लन्ड के ठापों से सीमा की चूत लिजलिजा उठी और सीमा की मजे और दर्द भरी सिसकारियों से कमरा भर उठा। मेरा लन्ड तेजी से उसकी चूत में किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था। सीमा नीचे हाथ निकल कर मेरे गोटे सहलाने लगी।
हम दोनों रफ्तार से अपनी अपनी मंजिल की ओर बढ़ चले। कुछ ही देर में मैंने अपने टट्टों मे उबलता लावा उसकी चूत में खाली कर दिया और उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। मैं उसके ऊपर ही लुढ़क गया, वो भी पेट के बल ही पलंग पर गिर पड़ी.
थोड़ी देर बाद जब हम शिखर से नीचे आये तो मेरा लन्ड उसकी चूत से बाहर निकल आया और हमारा मिला जुला पानी उसकी चूत से बह कर बेडशीट को गीला करने लगा, सीमा उसे पोछने को उठाने लगी तो मैंने खींच कर अपने आगोश में भर लिया और उसके होंठों पर होंठ रकह दिए, हम दोनों लम्बे गहरे चुम्बन में रत हो गए।
काफी देर बाद हम एक दूसरे अलग हुए डोली ने अपना सर मेरे सीने पर रख दिया, और अचानक मुझे उसकी लन्ड मालिश करने से पहले कही बात याद आ गई; मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया और कहा तुझे चुदना तो नहीं था!!! सीमा ने लजा कर फिर अपना मुंह मेरे सीने में छुपा लिया।
और अचानक उसकी जबान मेरे निप्पल्स पर हरकत करने लगी। और वो फिर नीचे की ओर बढ़ गई. सीमा मेरे सीने और पेट को चूमती काटती मेरे लन्ड तक पंहुच गयी। दिन भर में तीन बार स्खलित हो चुका मेरा लन्ड आराम मुद्रा में सिकुड़ा हुआ पिघले हुए चॉकलेट सा नरम पड़ा मेरे और सीमा का कामरस से लसलसा था।
सीमा ने जीभ से उसकी सफाई शुरू की और मूह में भर कर चुभलने लगी, थोड़ी देर चूसने के बाद वो उठी और किचन से चॉकलेट और साल्टेड कारमेल सिरप उठा लाई, और साथ मे एक साफ तौलिया भी लेकर आई। मेरी गाँड़ के नीचे तौलिया बिछा कर, मेरे लन्ड को चॉकलेट सिरप से नहला दिया और फिर टट्टों को साल्टेड कारमेल सिरप से कोट कर दिया.
दोनों लिक्विडस इतनी अधिकता में डाले गए थे वो बह कर मेरी गाँड़ की दरार में चुने लगे। अब सीमा ने उनको चाटना शुरू किया और मेरे लन्ड को अपनी लम्बी जबान से चाट कर साफ करती हुई टट्टों को मुंह लेकर चूसने लगी और वहां से मेरी अब तक चॉकलेट और कारमेल से सराबोर हो चुकी गाँड़ तक जा पँहुची।
उस के इस चाटने चूमने चूसने से मेरे लन्ड फिर अकड़कर लोहा हो गया। लन्ड एक हाथ मे पकड़ कर ऊपर उठाए सीमा मस्ती में मेरी गाँड़ के पोर पोर को चाट रही थी। मजे से मेरा हाल खराब था लेकिन सीमा तब तक चाटती रही जब तक सिरप्स के आखिरी कतरे का निशान नहीं खत्म हो गया।
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मेरी पूरी गाँड़ उसकी लार से गीली थी और लन्ड तमतमा कर लोहे के रॉड सा खड़ा था। सीमा उठी और फिर चॉकलेट सिरप उठाया, इस बार उसने अपनी एक चुंची को चोकलेट से और दूसरी को कैरामेल से कोट किया और अपनी दोनों राने मेरे अगल बगल रख कर लन्ड को अपनी चूत में सेट कर उसे अपनी बुर की गहराइयों में समा लिया।
लन्ड को जड़ तक बुर में घुसा लेने के बाद उसने एक आनंद भरी सिसकी ली और मुझ पर झुक आई। अपने हाथ से चॉकलेट में लिपटे चुंचे को मेरे मुंह में दे दिया। चॉकलेट और कैरेमल ने उसकी चुंचियों में दुगना स्वाद भर दिया था, मैं किसी दूध मुहे सा उन्हें चाट चूस के साफ करने लगा और सीमा मेंरे लन्ड की सवारी गांठने में मग्न हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चुकी वो मुझ पर झुकी हुई थी इस लिए उसकी गति कम थी और हम दोनों धीमी चुदाई का आनंद भोग रहे थे; जल्दी थी भी किसे? धीरे धीरे मैंने उसकी चुंचो को चाट चाट कर साफ कर दिया। सीमा सीधी हो गयी और उसके उछलने की गति भी बढ़ गई, मैंने उसके चुचको को अपनी उंगलियों में घूमना और दबाना शुरू कर दिया।
चुकी हम दोनों सुबह से 3/4 दफा छूट चुके थे इसलिए दोनों का चरम दूर था, ये चुदाई बिना किसी जल्दी के मस्ती भरी थी हम एकदूसरे को चूम सहला रहे थे, और एकदूसरे पर उलट पुलट हो रहे थे। हमने कई आसनों के इस्तेमाल किया और सीमा कई बार लन्ड को चूत से निकाल कर चूसने लगती।
हम दोनों में किसी को मंजिल की जल्दी नहीं थी, हम चुदाई के आनंद को लम्बा खींचने में लगे थे। एक दूसरे के अंगों को चूमने चाटने काटने सहलाने के आनंद में रत रात गहरा रही थी। करीब 2 घण्टे चले इस खेल ने धीरे धीरे हम दोनों को चरम बिंदु की ओर धकेलना शुरु किया, हममें अब शिखर पाने की उत्तेजना भरने लगी।
मैं बिस्तर से उठ खड़ा हुआ और सीमा को एक बार फिर चौपाया बना कर उसकी गीली चूत में अपना लन्ड पेल दिया और तेज गति से उसको ठोकने लगा, सीमा की आनंदातिरेक सिस्कारियां रात के सन्नाटे को चीरने लगीं। शायद किसी ने सुनी भी, लेकिन हम दोनों इसकी चिंता से दूर अपनी मदभरी चोदन क्रिया में रत थे।
सीमा ने अचानक एक तेज चीख मारी और उसका बदन अकड़ सा गया। और वो निढाल पड़ गई, लेकिन मेरी मंजिल अभी कुछ दूर थी। मैंने लन्ड उसकी चूत निकाला और उसकी गाँड़ के छेद पर सेट कर दिया, और थोड़ जोर लगते ही गीले लन्ड की चिकनाई ने सुपारे को उसकी गाँड़ में प्रवेश करा दिया.
लेकिन सीमा अचानक गाँड़ में बिना ल्यूब घुसे लन्ड की वजह से दर्द से चीख पड़ी और मुझे ये समझ आ गया कि बिना ल्यूब के अंदर जाना हमदोनो के लिए दर्द भरा होगा। मैंने बेड साइड ड्रावर से ल्यूब की ट्यूब निकली और सुपारा अंदर जाने से खुली उसकी गाँड़ में डालने लगा.
ल्यूब की ठंडी बूंदों के एहसास से सीमा ने राहत भरी सांस छोड़ी और अपनी गाँड़ को ढीला छोड़ दिया अब वो गाँड़ मरवाने को तैयार हो चुकी थी। मैंने ल्यूब की अच्छी मात्रा उसकी गाँड़ में डाली और लन्ड को फिर उसकी कसी हुई गाँड़ के छेद पर सेट किया और धीरे अंदर पेलने लगा.
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लन्ड के पूरा अंदर जाने तक सीमा दांत पर दांत जमाये अपनी चीख रोके रही और मै हर सेंटी मीटर पर ल्यूब डालता रहा। थोड़ी ही देर उसकी गाँड़ एकदम चिकनी होकर लन्ड को लीलने लगी। अब मैंने सीमा की कमर को पकड़ कर जोरदार ठुकाई शुरू की। उसकी गाँड़ भी अब तक मस्त हो चुकी थी और उसके शरीर ने फिर मस्ती की लहरों पर सवारी शुरू कर दी, वो अपने एक हाथ से अपनी चूत का दाना मसलने लगी। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेजी से लन्ड के ठाप उसकी गाँड़ में मरने लगया। सीमा भी दो तरफे मजे में थी।
थोड़ी ही देर में मुझ पर मस्ती छाने लगी और मैंने एक जोरदार ठाप के साथ लन्ड उसकी गाँड़ की गहराइयों उतार कर माल छोड़ दिया और तभी सीमा की बुर ने भी पानी छोड़ दिया। हम दोनों एकदम निढाल पस्त होकर बिस्तर पर गिर पड़े और एक दूसरे से लिपट कर नींद की आगोश में खो गए। सीमा मेरी उम्मीदों से कहीं बेहतर अभिसारिका थी, उसको सेक्स में किसी चीज़ से आपत्ति नहीं थी। मैंने उसके अंदर दबी चुदैल को जगा दिया था। सीमा मेरे जीवन की सबसे शानदार फतह साबित होने वाली थी और उसकी चूत के रास्ते मुझे कई चूतें हासिल होने वालीं थीं।
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