Kunwari Bahan Fuck
हेलो दोस्तों, मेरा नाम सोहन है। मे बुलंदशहर का रहने वाला हूं। मेरा शरीर बिल्कुल फिट है। मेरे लंड का साइज़ 8 इंच है, जो किसी भी चूत का भूत बनाने के लिए काफी है। दोस्तों मैंने अपनी बुआ की लड़की को जबरदस्ती चोदा, और फिर वो बाद में मेरे लंड की ऐसी दीवानी हुई कि अब हर रोज मेरे 8 इंच के लंड से अपनी चूत मरवाती है। Kunwari Bahan Fuck
दोस्तों, दरअसल हुआ ऐसा कि मेरी मम्मी जी को सीढ़ी से नीचे गिरने के कारण पैर में काफी चोट आ गई थी। अब घर का काम करने में मुझे और पापा को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। क्योंकि मम्मी जी को दो महीने का पलस्तर हो गया था।
तो फिर एक दिन पापा जी ने बुआ जी से बात करके उनकी लड़की को लाने के लिए मुझे भेज दिया। मैंने अपनी बाइक उठाई और बुआ जी के घर पे चला गया। उनके घर जाने के बाद मैंने सबको नमस्ते किया और चाय पानी का इंतजार करने लगा। क्योंकि देर हो रही थी, वापस घर भी आना था। बरसात का सीजन चल रहा था।
फिर बुआ की लड़की रीमा चाय लेकर आई तो मैं उसको देखता ही रह गया। दोस्तों वो 20 साल की थी, लेकिन उसका फिगर बिल्कुल 18 साल की लड़की जैसा था। गोल मटोल चुचि उठी हुई गांड, पतली कमर, बस तबाही लग रही थी।
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दोस्तों उस बला को देखते ही मुझे उसको चोदने का मन कर गया। खैर मैने चाय पी और बैग बाइक पे बांध लिया। और रीमा के तैयार होने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद रीमा आई तो मेरी आँखे फटी की फटी रह गई।
उसने ब्लैक कलर का टाइट लोअर और रेड कलर की टी-शर्ट पहनी थी। टी-शर्ट में उसकी चुचि बिल्कुल उभरी हुई थी और गांड भी। फिर मैंने बुआ जी को नमस्ते किया और रीमा को साथ लेकर चल दिया। बाइक पे जब भी ब्रेक लगता तो रीमा की चुचि मेरी पीठ से टकराती और मेरा लंड खड़ा होने लगता।
जब हम घर से 20 किलोमीटर दूर रह गए तो बारिश काफी तेज होने लगी और जंगल का रास्ता होने के कारण कोई भी छुपने की जगह दिखाई नहीं दे रही थी। रीमा बोली कि भईया कही पे रुक जाओ। थोड़ी दूर चलने के बाद सड़क से थोड़ी दूर एक पुराना सा खंडहर दिखाई दिया।
मैने समय न गंवाते हुए बाइक खंडहर की तरफ मोड़ दी। हम वहां पहुंचे और हम दिन काफी भीग चुके थे। खंडहर के अंदर काफी सन्नाटा था। दरअसल वो पुराना मकान था। बस रिनोवेशन न होने की वजह से खंडहर जैसा दिखाई दे रहा था।
मकान पूरा खाली था। रीमा को तो डर लग रहा था और सर्दी भी। मैंने उसके कंधे पे हाथ रखते हुए कहा कि डरो मत मैं हूँ ना। बाहर बारिश इतनी तेज थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अब रीमा भीग जाने के कारण सर्दी के काँप रही थी।
मैंने बाहर देखा तो एक पराली का ढेर रखा था। उसमें से मैंने नीचे से सूखी सूखी पराली बाहर निकाली और अंदर ले आया। और साफ सी जगह देख कर बिछा दी। रीमा को देखा तो मेरा मन उसकी कमसिन चूत को फाड़ने का कर गया। मौका भी अच्छा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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फिर मैंने रीमा को बैग में से कपड़े बदलने को कहा क्योंकि उसके पास तो सूखे कपड़े भी थे। उसने दूसरे कमरे में जाकर कपड़े बदलने शुरू किये तो मैंने उसको छुपकर देखा। उसके बदन को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैने उसको जाकर पीछे से पकड़ लिया।
तो वो बोली कि भईया आप ये क्या कर रहे हो। मैंने कहा कि तुम्हें ठंड लग रही हैं और मैं तुम्हें अपने शरीर की गर्मी देना चाहता हूं। तुम्हारी जवानी को देखकर मुझे तुम्हें चोदने का मन कर रहा है। तभी उसने गुस्से से मुझे पीछे धकेल दिया और कहने लगी कि तुम्हें शरम आनी चाहिए, मैं तुम्हारी बहन जैसी हु।
फिर मैंने उसको जोर से पकड़ा और कहा कि तुम मेरी सगी बहन तो नहीं हो। और अपने होंठ उसके होठो पे रख दिए और उसको पराली पे लेटा दिया और उसके ऊपर लेटकर उसको बेतहाशा चूसने लगा और उसकी चुचि जोर जोर से दबाने लगा
वो छूटने का प्रयास करने लगी लेकिन मेरी मजबूत पकड़ के सामने वो कली मुरझा गई। और फिर वो रोने लगी। लेकिन मैंने उसके ऊपर कोई दया नहीं दिखाई और उसको चुसता रहा और अपना हाथ उसके लोवर में घुसा दिया। फिर उसकी चूत के दाने को हिलाने लगा।
अब वो मादक आवाजें निकाल रही थी और धीरे धीरे मेरा साथ देने लगी थी। लेकिन वो पूरा साथ नहीं दे रही थी। लेकिन मुझे क्या मुझे जो चाहिए था वो तो मुझको मिलने ही वाला था। फिर मैंने समय न गंवाते हुए उसका लोअर और टी शर्ट निकाल दी और उसकी चूत चूसने लगा।
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उसकी चूत पे हल्के हल्के भूरे बाल थे। उसके बदन को देखकर में बिल्कुल पागल सा हो गया और मैंने उसको और जोर जोर से चुसना शुरू कर दिया। अब वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी। क्योंकि लड़की चाहे कितनी भी बलशाली हो लेकिन चूत पे हाथ लगने के बाद गरम हो ही जाती हैं।
फिर मैंने अपना बलशाली 8 इंच का लंड उसकी चूत पे रखा और इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी कोमल की चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। और रीमा इतनी जोर से चीखी के अगर वो घर पे होती तो पूरा मोहल्ला हमारे घर पे इकठ्ठा हो जाता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन वहां बारिश के सुनसान मौसम में उसकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था। वो रोने लगी और चूत में से लंड निकालने की प्रार्थना करने लगी। लेकिन मैं कहा छोड़ने वाला था। मैंने एक मिनट का टाइम लेते हुए फिर जोर से धक्का मारा और इस बार पूरा 8 इंच का लंड उसकी छोटी सी चूत मैं समा गया और उसकी चूत खून के लथपथ हो गई।
क्योंकि इतनी छोटी सी उम्र में उसकी कोमल सी चूत की सील टूट गई थी। फिर उसने मुझे जोर से अपनी बाँहों में भर लिया। फिर मैंने उसका दर्द कम करने के लिए उसके होंठों को चुसना शुरू कर दिया। 5 मिनट होंठ चुसवाने के बाद वो नॉर्मल हो गई।
फिर मैंने उसको कहा कि जान अब तुम्हारी चूत की सील टूट चुकी है। अब दर्द कम होगा। फिर मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकाला और कपड़े से साफ किया और चूत भी साफ की। फिर मैंने धीरे से अपना लंड रीमा की चूत में डाला और धीरे धीरे धक्के मारने लगा।
अब उसको दर्द कम हो रहा था। फिर मैंने रीमा के होठों पे अपने होंठ रखे और 15 मिनट तक उसको बुलेट ट्रेन की रफ्तार से धक्के मारता रहा। वो दर्द से पूरी तरह छटपटा रही थी लेकिन मैंने उसके ऊपर दया न दिखाते उसकी कोमल चूत को जोर जोर से बजाता रहा।
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अब वो बेहोश होने वाली थी तो फिर मैंने अपनी स्पीड कम की। और थोड़ी देर ऐसे ही अपना लंड उसकी चूत में देकर उसके ऊपर ही पड़ा रहा। और उसके होंठ और चुचि चुसता रहा। अब उसको मजा आने लगा और वो मेरे ऊपर आने की जिद करने लगी।
फिर मैं सीधा लेटा और अपना लंड सीधा खड़ा कर लिया, फिर उसने लंड के ऊपर चूत रखकर दबाया तो पूरा लंड चूत में अंदर घुस गया। तो वो थोड़ी सी हिचकी लेकिन रीमा की हिम्मत गजब की थी। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा लंड अपनी चूत में ले रखा था।
भला 8 इंच के लंड की चुदाई से तो 2 बच्चों की मां भी हाथ जोड़ने लगती हैं। फिर रीमा मेरे लंड के ऊपर बैठकर उछल उछल कर अपनी चूत चुदवाने लगी। और बोली कि भईया मुझे ऐसा सुख आज तक नहीं मिला। वादा करो कि आप मुझे हमेशा ऐसा ही अपना लंड देते रहोगे।
मैंने वादा किया और फिर वो जोर जोर से धक्के मारने को कहने लगी। बस फिर क्या था मैंने उसको अपनी बाँहों में भरके नॉन स्टॉप उसकी चूत बजाई। फिर वो आधे घंटे की चुदाई के बाद थकने लगी और तो मैने उसको अपने ऊपर से उतारकर नीचे लिटाया.
और उसकी टाँगे ऊपर उठाकर लंड चूत में घुसा दिया। और फिर दस मिनट तक इतने जोर जोर से धक्के मारे कि उस ठंडे मौसम में भी उसको पसीना आ गया। फिर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी मोटी गांड में लंड घुसाया लेकिन उसकी गांड बहुत टाइट थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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लेकिन भला लंड के आगे सब छेद बड़े हो जाते हैं। लंड पूरा गांड में घुसा तो वो जोर से चीखी और गांड मारने को मना करने लगी। लेकिन मैं कहा छोड़ने वाला था मैंने उसकी ऐसी गांड बजाई कि वो छटपटाने लगी। और जब थोड़ा सा दर्द कम हुआ तो फिर आराम से गांड मरवाने लगी। फिर मैं झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा कि कहा छोडू तो उसने चूत की तरफ इशारा किया। और मैंने लंड गांड में से निकाल कर उसकी चूत में पूरा अंदर घुसा दिया.
और 10/ 15 धक्के ऐसे मारे कि सारा मॉल उसकी चूत की गहराई में समा गया। अब वो काफी थक चुकी थी। फिर उसने मेरा लंड चूस के साफ किया और फिर हम दोनों ने कपड़े पहने को बारिश रुकने का इंतजार करने लगे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। लगभग आधे घंटे बाद बारिश खत्म हुई और फिर हम घर की तरफ रवाना हुए। दोस्तों घर जाकर हम दोनों के क्या मस्ती की वो आपको अगले भाग में बताऊंगा। धन्यवाद।
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