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स्कूल गर्ल ने चुदास में बुर फड़वा लिया

जुलाई 4, 2026 by hamari Leave a Comment

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मेरा नाम राज है। लोग प्यार से मुझे राजा भी कहते हैं। 28 साल का हूँ और थोड़ा सा हैंडसम और स्टाइलिश भी हूँ। गोरा रंग, ब्रॉड शोल्डर्स, मस्कुलर बॉडी और हेयरी चेस्ट। मैं एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में मेंटेनेंस इंजीनियर हूँ। हमारी कंपनी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स भी बनाती है जिसकी इंडस्ट्रियल एरिया में एक मीडियम साइज़ की फैक्टरी भी है। Kamuk Teen Girl Porn

यह जॉब जॉइन करके मुझे बस 3 ही महीने हुए हैं। हमारी फैक्टरी शहर से तकरीबन 25 किलोमीटर की दूरी पर है। हमारी कंपनी का एक शोरूम और मेंटेनेंस सेक्शन का एक ऑफिस शहर में भी है जहाँ मुझे डेली जाना पड़ता है। तो मैं डेली 25 किलोमीटर का अप एंड डाउन अपनी यामाहा बाइक पर ही करता हूँ।

मुझे बाइक्स का बहुत शौक है और मैं 1 या 2 साल में बाइक्स बदलता रहता हूँ। इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्टरी वर्कर्स और स्टाफ के लिए छोटे-छोटे हाउसिंग कॉलोनियाँ बनी हुई हैं जो फैक्टरियों से थोड़ी दूर की दूरी पर हैं। मैं भी ऐसी ही एक कॉलोनी के एक इंडिपेंडेंट घर में रहता हूँ।

मेरा घर बहुत बड़ा भी नहीं और बहुत छोटा भी नहीं। मेरे घर के सामने छोटा सा गार्डन है फिर गेट है। मेरा घर मीडियम साइज़ का है जिसमें एक सिटिंग रूम, 2 मीडियम साइज़ के बेडरूम, 1 ड्रॉइंग कम डाइनिंग रूम है जहाँ टीवी, वीडियो और म्यूजिकल सेट भी रखा हुआ है।

शौकीन मिजाज का हूँ इसलिए बहुत पावरफुल स्पीकर्स को ऐसे छुपा के रखा है कि वो किसी को भी दिखाई नहीं देते बस वंडरफुल ब्लास्ट करते रहते हैं जिसे सुन के तबीयत मस्त हो जाती है और छोटी से छोटी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट की साउंड भी बहुत बढ़िया और क्लियर आती है।

मैंने अपना कंप्यूटर अपने बेडरूम में रखा हुआ है जिसमें हाई स्पीड इंटरनेट adsl कनेक्शन भी है जहाँ मैं रात के समय लड़कियों से सेक्सी चैटिंग करता हूँ और सेक्स स्टोरीज़ पढ़ता और लिखता हूँ और मेरे पास सेक्स पिक्चर्स का बहुत बड़ा खजाना है।

मेरे डैडी और मम्मी दोनों अलग-अलग MNC में काम करते हैं और दूसरे शहर में ही रहते हैं। मेरी अभी शादी नहीं हुई है और मैं यहाँ अपने घर में अकेला ही रहता हूँ। अभी हाउस मेड की सर्च कर रहा हूँ जो मेरे लिए खाना बना दे और कपड़े धो के इस्त्री कर दे और घर की सफाई वगैरह कर दिया करे पर अभी तक कोई हाउस मेड नहीं मिली।

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खाना पकाना तो आता नहीं इसलिए लंच और डिनर होटल से ही खाता हूँ। कभी-कभी पैक करवा के घर ले आता हूँ और घर पर ही खा लेता हूँ। ब्रेकफास्ट खुद ही बनाता हूँ — ब्रेड, बटर, जैम, अंडे या कॉर्नफ्लेक्स विद मिल्क बना के खा लेता हूँ। अपने कपड़े तो लॉन्ड्री में दे देता हूँ पर अपनी प्लेट्स खुद ही धोनी पड़ती हैं।

मेरे घर के सामने ही बस स्टॉप भी है जहाँ स्कूल की बस भी स्कूल के लड़कियों को पिक करती है। मैं डेली अपने घर से और ऑफिस जाते समय स्कूल की लड़कियों को बस का इंतजार करते देखता हूँ और यह बस स्टॉप मुझे मेरे ड्रॉइंग रूम की विंडो से भी नजर आता है। स्कूल ड्रेस में मुझे वो बहुत अच्छी लगती हैं।

मेरे टाइम पर बहुत तो नहीं बस 3 या 4 एडवांस क्लास की लड़कियाँ ही होती हैं। ब्लू कलर का स्कर्ट और व्हाइट शर्ट और उस पर ब्लू टाई के यूनिफॉर्म के साथ उनके सर से झूलती हुई पॉनी टेल बहुत अच्छी लगती है। मैं उनको देखता हुआ चला जाता हूँ। कभी ऐसा कोई गलत खयाल मेरे मन में नहीं आया था। बस एक ग्लांस डाल के मैं चला जाता हूँ।

मैं डेली रूटीन की तरह से 9 बजे घर से निकला। अभी शायद 50 मीटर भी नहीं आया था कि एक लड़की ने हाथ हिला के मुझे रुकने का इशारा किया तो मैं रुक गया। एक नजर में देखा कि वो एक बहुत ही क्यूट लड़की है। होगी शायद कोई 18 साल की। मैं उसको देखता ही रह गया।

बहुत गोरा रंग, इतना गोरा कि मानो हाथ लगाते ही मैला हो जाए। बस मलाई लगती थी मलाई, लाल कश्मीरी सेब जैसे गाल, बड़ी-बड़ी हिरनी जैसी लाइट ब्राउन कलर की आँखें, चीक्स में डिंपल, लाइट ब्राउन हेयर, मीडियम हाइट, भरे-भरे बदन वाली लड़की थी। उसके ब्लू स्कर्ट जो उसके घुटनों से थोड़ा ऊपर था जिससे उसकी शेपली और वंडरफुल सिडॉल थाइज नजर आ रहे थे।

लगता था कि वो स्पोर्ट्स गर्ल होगी। उसके स्कर्ट के ऊपर व्हाइट और थोड़ी सी टाइट शर्ट में से उसके छोटे से सेब (बेबी एप्पल) या छोटे साइज़ के संतरे (ऑरेंज) जैसे चुचियाँ उभरी हुई दिख रही थीं। उसकी टाई दोनों चुचियों के बीच में लटक रही थी। मैं बाइक रोक के खड़ा हो गया और उसकी खूबसूरती में डूब के रह गया और उसको देखा तो देखता ही रह गया।

बहुत ही खूबसूरत थी जैसे कोई आकाश से उतरी हुई अप्सरा। उसे देख के यह खयाल भी नहीं रहा कि उसने मुझे इशारा करके रुकाया है। मैं सोच रहा था कि यह लड़की नहीं यह तो क़यामत है क़यामत। और अभी इस उम्र में इसकी खूबसूरती का यह हाल है तो जब यह बड़ी हो जाएगी तो क्या होगा। सड़क पर चलते लोग मुड़-मुड़ के देखेंगे इसकी मस्त जवानी को।

वो मेरी तरफ थोड़ी देर तक अपनी बड़ी-बड़ी शरारती आँखों से देखती रही और फिर मेरे हाथ पर अपना हाथ रख के कहा, “अंकल कहाँ खो गए आप!!!” मेरे मुंह से एकदम से निकल गया, “Oh wow you are the most beautiful girl I have seen। तुम बहुत ही सुंदर हो।” तो वो थैंक्स अंकल कह के मुस्कुरा दी।

फिर मुझे एहसास हुआ कि मैंने यह क्या कह दिया और फिर सडनली मैं अपने खयालों से वापस आया और पूछा क्या बात है। तो उसने कहा, “अंकल आज मेरी बस मिस हो गई। क्या आप मुझे स्कूल तक ड्रॉप दे सकते हैं?” मैंने पूछा कौन सा स्कूल और कहाँ है तुम्हारा स्कूल।

तो उसने कहा कि वो st. Mary’s convent high school में पढ़ती है और 10th क्लास में है। उसका स्कूल मेरे ऑफिस के करीब ही था इसलिए मैंने कहा कि आओ पीछे बैठ जाओ। उसने थैंक्स अंकल कहा और पीछे की सीट पर उचक के बैठ गई। उसने खुद ही बात शुरू करते हुए कहा कि मेरा नाम नैंसी शर्मा है।

मेरे डैडी स्टील फैक्टरी में सीनियर सेल्स डायरेक्टर हैं और मम्मी प्लास्टिक फैक्टरी में अकाउंटेंट हैं। सुबह दोनों मेरे से पहले ही ऑफिस को चले जाते हैं। डैडी और मम्मी के जाने के बाद हमारी हाउस मेड आती है और उसके आने के बाद ही मैं स्कूल के लिए निकल जाती हूँ पर आज थोड़ी देर हो गई और बस मिस हो गई और अब कोई दूसरी बस भी नहीं है।

डैडी भी ऑफिस के काम से बाहर गए हुए हैं और मम्मी अपने जॉब पर सुबह ही चली जाती है तो मुझे कोई लिफ्ट नहीं मिलती। आज आप आ गए थैंक्स अंकल नहीं तो मेरा स्कूल मिस हो जाता। मैंने कहा कोई बात नहीं, you are most welcome। कौन सी क्लास में हो?

तो उसने बताया कि वो 10th में है और अपनी क्लास की कैप्टन भी है और स्पोर्ट्स की सेक्रेटरी भी है इसलिए उसको स्कूल अटेंड करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। मैं सोचने लगा कि स्पोर्ट्स में है इसलिए इतना सिडॉल बदन है इसका, वंडरफुल थाइज और एकदम से हेल्दी और एक्टिव लग रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कॉलोनी खत्म होने के बाद मेन रोड पर आ गए। मेन रोड पर उतनी ज़्यादा ट्रैफिक नहीं रहती और यहाँ से टाउन तक रोड के दोनों तरफ बड़े-बड़े नीम के पेड़ (trees) हैं और दूर-दूर तक खेत भी हैं जहाँ से खेतों की मधुर सुगंध आती रहती है खासकर शाम में और रात में।

रात में यह पूरा रास्ता लगभग अंधेरा ही रहता है और कोई ट्रैफिक भी नहीं होती। मेन रोड से टर्न लेने के बाद भी तकरीबन 3 किलोमीटर पर हमारी कॉलोनी शुरू होती है और कॉलोनी के करीब ही लाइट्स लगी हुई हैं वरना टाउन से बाहर निकलने के बाद तकरीबन 28 किलोमीटर अंधेरे में ही हमारी कॉलोनी तक ट्रैवल करना पड़ता है।

स्कूल की लड़कियाँ तो बस से स्कूल जाती हैं और स्कूल खत्म होने के साथ ही शाम से पहले बस से ही वापस आ जाती हैं या उन्हें उनका कोई रिलेटिव या जानने वाला लिफ्ट दे देता है। अब कॉलोनी से हम मेन रोड पर आ गए। उसने बताया कि अंकल हमारा स्कूल 10:30 बजे से शुरू होता है तो मेरे पास टाइम है आप इत्मिनान से बाइक चलाइए।

वो बाइक के दोनों तरफ अपने पैर रख के बैठी थी। उसके बैक पर उसका स्कूल बैग लगा हुआ था और उसने हाथ मेरे पेट पर लपेट के मुझे पकड़ रखा था। मेरी यामाहा की सीट थोड़ी सी स्लैंटिंग थी पीछे से उठी हुई थी और सामने से झुकी हुई थी इसलिए वो मुझसे चिपक के बैठी थी और मुझे मेरे बैक पर उसके चुचियाँ लग रहे थे जिससे मेरे शरीर में इलेक्ट्रिसिटी दौड़ रही थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मैं बाइक स्पीड से चला रहा था और वो मुझसे पूरी तरह से चिपकी हुई थी और उसके चुचियाँ मेरे बैक से प्रेस हो रहे थे और जब बाइक झटका खाती तो उसकी चुचियाँ मेरे बदन पर ही ऊपर-नीचे जाते थे। इसी तरह से रास्ता गुज़र गया। हम तकरीबन 35 या 40 मिनट में शहर में एंटर हो गए।

पहले मेरा ऑफिस आता था। मैंने नैंसी को बताया कि देखो यह मेरा ऑफिस है तो उसने कहा कि अंकल मेरा स्कूल भी तो यही है यह सिग्नल के पीछे वाली रोड पर है। मैं उसको उसके स्कूल पर ड्रॉप किया तो पता चला कि स्कूल और मेरे ऑफिस के बीच में हार्डली 5 मिनट का वॉकिंग डिस्टेंस है।

मैंने कहा कि कभी भी कोई ज़रूरत हो या कुछ भी हो तो मेरे पास ऑफिस को आ जाना। उसने थैंक्स कहा और मेरी तरफ हाथ हिला के बाय करती हुई मुस्कुराती हुई स्कूल के गेट में दौड़ती हुई चली गई। मैं बहुत देर तक उसके डांस करते चुचियाँ और उसकी लटकती हुई पॉनी टेल और उसके मलाई जैसे गोरे और शेपली सेक्सी थाइज को देखता ही रह गया और फिर पलट के ऑफिस आ गया।

ऑफिस में किसी काम में दिल नहीं लगा। बार-बार उसके चुचियाँ, उसकी मोटी सेक्सी थाइज और लटकती हुई पॉनी टेल ही दिमाग में घूमती रही। शाम हो गई और वो नहीं आई शायद बस मिल गई होगी। मैं ऑफिस खत्म होने के बाद घर आ गया। बस स्टॉप देख के मुझे नैंसी की याद आई पर थोड़ी देर में ही भूल गया और अपना खाना खा के टीवी देखने लगा। थोड़ी देर चैटिंग कर के सो गया।

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दूसरे दिन मैं रेडी हो के बाइक पर निकला तो देखा कि नैंसी वही खड़ी है। मैं बाइक उसके करीब ले गया और रोक के पूछा कि आज क्या हुआ? क्या फिर से बस मिस कर दी?? तो वो मुस्कुरा के बोली कि सॉरी अंकल आज मैंने जानबूझ के बस मिस की है। I wanna go with you। कल आपके साथ बाइक पर बैठना मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे बहुत मज़ा आया। tell me uncle can you take me to my school। आप माइंड तो नहीं करोगे ना अंकल? वो बहुत अच्छी इंग्लिश बोल रही थी।

मैंने कहा my pleasure, come on sit on my pillion seat। वो उचक के मेरे पीछे बैठ गई और बाइक चलाने से पहले ही मुझे ज़ोर से ऐसे चिपक गई जैसे मुझे अपने चुचियाँ फील करवाना चाहती हो। आज हम इधर-उधर की बातें कर रहे थे। उसके फ्रेंड्स की, स्कूल की, उसके टीचर्स की। वो बहुत इंटरेस्ट ले के मेरे साथ बातें कर रही थी। ऐसे ही बातें करते-करते रास्ता गुज़र गया।

स्कूल आ गया और नैंसी बाइक से उतरते हुए बोली कि अंकल आज मेरी स्पेशल क्लास है। probably मैं आपके साथ ही वापस जाऊंगी। अगर मैं आपके ऑफिस खत्म होने तक नहीं आई तो आप ऑफिस के बाद भी थोड़ी देर मेरा वेट कर लेना प्लीज। I have already informed my mom and told her about you. She is very happy that you are giving me lift. इस वीकेंड पर मैं आपको अपनी मम्मी से मिलवाऊंगी।

मैंने बोला कि कोई बात नहीं। तुम इत्मिनान से अपनी स्पेशल क्लास अटेंड कर के मेरे ऑफिस आ जाना। दोनों मिल के वापस चलते हैं। मैं तुम्हारा वेट करूँगा। यह बोल के मैं ऑफिस आ गया और बेचैनी से शाम का इंतजार करने लगा। मैं ऑफिस के डेली रूटीन वर्क में बिजी हो गया। इसी में शाम हो गई।

नैंसी का स्कूल खत्म हो गया और वो मेरे ऑफिस पर आ गई लेकिन मुझे अभी थोड़ा और काम बाकी था। मैंने कहा कि अभी थोड़ी देर में चलते हैं। उसने अपने घर फोन करके उसकी मम्मी को बता दिया कि वो मेरे साथ है और मेरे साथ ही वापस आएगी। उसकी मम्मी ने एडवांस में थैंक्स कहा और कहा कि अंकल को परेशान नहीं करना।

जब उनका काम खत्म हो तब ही आना। उसने कहा ओके मम्मी डोन्ट वरी I wont trouble him. ऑफिस से काम खत्म करके निकलते-निकलते लेट इवनिंग हो गई थी। थोड़ा-थोड़ा अंधेरा भी होने लगा था। बाइक स्टार्ट किया और नैंसी उचक के पीछे बैठ गई। शहर से हम बाहर निकल आए।

बाहर आते ही दोनों तरफ के खेतों से ठंडी-ठंडी हवा आ रही थी। मौसम बहुत अच्छा हो गया था। खेतों की यह मधुर सुगंध मुझे बहुत अच्छी लगती है और मैं बाइक को धीरे-धीरे चलाता और खेतों की सुगंध का मज़ा लेते हुए बाइक चला रहा था। नैंसी भी बाइक के फुट रेस्ट पर पैर रख के खड़ी हो गई और मेरे नेक पर अपने हाथ डाल दिए और राइडिंग का मज़ा लेने लगी।

वो थोड़ी-थोड़ी देर में उठ जाती थी और बैठ जाती थी जिससे उसके चुचियाँ मेरे बैक पर रगड़ खा रहे थे और मेरा लंड पैंट के अंदर से बाहर निकलने को बेचैन हो गया और अकड़ने लगा। यह रोड पर कोई ट्रैफिक नहीं रहती थी क्योंकि यह रोड सिर्फ इंडस्ट्रियल एरिया की हाउसिंग कॉलोनी को ही जाती थी।

सिर्फ रिलेटेड लोग ही इस रोड पर आते-जाते थे। कभी-कभी कोई कार या बाइक बाजू से चली जाती। मैं बाइक बहुत धीमी गति से चला रहा था। नैंसी की चुचियों को अपनी पीठ पर फील कर के मज़े ले रहा था और कोई जल्दी भी तो नहीं थी। अब तो नैंसी की मम्मी को भी मालूम हो गया था कि वो मेरे साथ है।

उसके हाथ मेरे पेट से स्लिप हो गए और मेरे थाइज पर आ गए। मेरे बदन में इलेक्ट्रिक के झटके लगना शुरू हो गए। बाहर की मस्त हवा थी या नैंसी की रगड़ती चुचियाँ या उसकी चढ़ती जवानी का नशा कि नैंसी ने अपना हाथ और करीब कर लिया और मुझसे चिमट गई जिससे उसके हाथ मेरे जांघ पर आ के रुक गए।

पोजीशन ऐसी थी कि बस 2 या 3 इंच और उसके हाथ नीचे उतर जाते तो सीधे मेरे लंड पर ही उसके हाथ होते। अपने लंड के इतना करीब उसके हाथ का स्पर्श महसूस करके मेरा लंड बहुत ही ज़ोर से अकड़ गया और पैंट के अंदर से बाहर निकलने को मचलने लगा।

नैंसी मेरे कान के करीब अपना मुंह ला के मेरे कान में धीरे से बोली, “आप बहुत अच्छे हो अंकल। you are really very very sweet and wonderful. You have a powerful body.” और जो मुझे ज़ोर से हग किया तो उसके हाथ मेरे लंड से टकरा गए और उसने अपने हाथ मेरे लंड के पास से नहीं हटाया। वहीं लंड से लगाए ही रहने दिया।

आह्ह्ह मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। उसने पूछा क्या हुआ अंकल तो मैंने कहा कुछ नहीं आज राइडिंग में बहुत मज़ा आ रहा है। उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है अंकल। ऐसा मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया और कभी किसी की बाइक पर भी नहीं बैठी।” फिर एक हग और किया तो उसका हाथ डायरेक्ट मेरे लंड के ऊपर ही गया।

उसने अपना हाथ वहाँ से नहीं हटाया। ऐसे ही मेरे अकड़े हुए लंड पर रहने दिया। मुझे यकीन हो गया कि उसने मेरे अकड़े हुए लंड को महसूस किया होगा और जानबूझ के अपना हाथ वहाँ से नहीं हटाया। अभी हम शहर से हार्डली 4 या 5 किलोमीटर ही आए थे। अभी तकरीबन 20 किलोमीटर और डिस्टेंस बाकी था।

नैंसी का मस्त बदन, बाहर की हल्की ठंडी हवा और खेतों की मधुर सुगंध से मुझे तो नशा जैसा हो गया था और मैं अपने अकड़े हुए लंड पर नैंसी के हाथों के स्पर्श से जैसे दीवाना हो गया था। गहरी-गहरी सांसें ले रहा था। नैंसी मेरे से बहुत ज़ोर से चिपक के बैठी थी और ऐसे खामोश थी जैसे हम दोनों के बीच कोई खामोश रहने की अनकही अंडरस्टैंडिंग हो।

थोड़ी ही देर में उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरे बदन में 2000 वोल्ट्स के करंट के झटके लगने लगे और मुंह से ओह्ह्ह की एक सिसकारी निकल गई। मुझे यकीन हो गया कि अब तक तो शायद बिना जाने ही उसका हाथ मेरे लंड से लग रहा था पर इस टाइम पर तो श्योर उसने जानबूझ के लंड पकड़ा था।

आह्ह्ह मैं तो दीवाना हो गया और एक ज़ोर की सिसकारी मेरे मुंह से निकल गई। थोड़ी देर तक ऐसे ही लंड को पकड़ने के बाद नैंसी बोली, “अंकल अच्छा लग रहा है क्या?” तो मैं बोला कि आह्ह्ह हाँ बहुत ही अच्छा लग रहा है। मेरा इतना बोलना था कि उसने मेरे लंड को अच्छी तरह से अपने हाथ में पकड़ लिया और पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं नैंसी से पूछा कि तुम ब्रेसियर पहनती हो क्या? तो उसने कहा हाँ अंकल कभी ब्रेसियर पहनती हूँ कभी बनियान पहनती हूँ। मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं। बस इतना ही पूछ सका कि क्या साइज़ की ब्रा? तो उसने कहा 28C। मैं सोचने लगा कि वो दिन कब आएगा जब मैं यह 28C साइज़ की चुचियाँ को कब अपने हाथों से दबाऊंगा और कब अपने मुंह में ले के चूसूंगा।

मेरा और मेरे लंड का बुरा हाल था। पैंट से बाहर निकलने को मचल रहा था लेकिन मैं अपनी तरफ से कुछ स्टार्ट नहीं करना चाहता था। मैं सोच रहा था कि वो ही कुछ करे। पर उस दिन और कुछ नहीं हुआ। बस वो मेरा लंड पकड़े रही और दबाती रही।

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घर आ गया और उसको घर पर ड्रॉप किया तो उसने कहा, “अंकल मम्मी से मिल लीजिए ना।” तो मैंने अपने लंड की तरफ इशारा करके कहा कि ऐसी पोजीशन में तुम्हारी मम्मी से मिला तो वो मुझे मार ही डालेगी। तो वो हंसने लगी और कहा ठीक है वीकेंड पर मिल लेना। और थैंक्स का एक किस मेरे गाल पर कर के अंदर चली गई।

मैं रात भर तड़पता रहा और 2 टाइम मुठ मार के सो गया। सुबह नैंसी फिर से वही खड़ी मिली। अब वो जानबूझ कर अपनी बस को मिस करने लगी थी ताकि मेरे साथ चल सके। मुझे भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी तो मैं डेली नैंसी को ले के आने और अपने साथ ही वापस लाने लगा।

वो डेली रास्ते में मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही पकड़ के दबाती रहती और बहुत टाइम तो मेरी क्रीम निकलते-निकलते रह गई। दिन इसी तरह से गुज़रते रहे और नैंसी को मेरे साथ आते-जाते एक हफ्ता हो गया था। डेली रूटीन बन गया था। मेरे साथ आती और शाम में स्कूल के बाद ऑफिस आ जाती.

और फिर हम दोनों रात में वापस आते और हमारे शहर से बाहर निकलते ही मेरे लंड को अपने हाथ में ले के ऐसे दबाने लगती जैसे हमारे बीच एक साइलेंट एग्रीमेंट हो। और मुझसे चिपक के अपनी चुचियों से मेरे बैक से घिसती रहती और मुझे महसूस होता कि वो सीट पर आगे-पीछे होती रहती है जिससे उसकी चूत सीट से रगड़ खाती रहती और जिससे शायद उसको मज़ा आता और शायद उसका जूस भी निकल जाता होगा।

यह उसके चूत का मसाज ऐसे ही करती होगी। एक शाम मेरे दिमाग में एक खयाल आया। नैंसी बाइक पर पीछे बैठी थी। उसकी चूत का पेड़ू उठा हुआ था और उसकी चूत पर बहुत हल्का-हल्का ब्राउन कलर का रुआ जैसा था। लगता था अभी झाटें भी सही तरीके से नहीं आई हैं पर कुछ ही दिनों में आने वाली हो।

थोड़ी देर तक उसकी मस्त मलाई जैसी चिकनी चूत को देखता रहा और निहारता रहा और फिर उसकी चूत पर एक किस किया तो उसके मुंह से निकल गया, “आह्ह्ह्ह्ह अंकल बहुत अच्छा लगता है।” और मेरे सर को ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी चूत को मेरे मुंह पर रगड़ने लगी।

मैं उसकी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत में मेरी टंग लगते ही उसकी लेग्स खुल गईं और उसके मुंह से निकला, “ओह्ह्ह्ह अंकल आह्ह्ह।” और अपनी चूत को मेरे मुंह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी। उसकी चूत में से कुँवारी चूत की मधुर सुगंध आ रही थी जिसने मेरे लंड में तूफान मचा दिया था और मेरा लंड स्प्रिंग की तरह से ऊपर-नीचे होने लगा जैसे नैंसी की चूत को प्रणाम कर रहा हो और लंड के सूराख पर प्री-कम के ड्रॉप्स आने लगे।

नैंसी मेरे मुंह में अपनी चूत घुसेड़ रही थी और अपनी गांड ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करके जैसे मेरे मुंह को चोद रही हो। और इमीडिएटली उसकी आँखें बंद हो गईं और उसके मुंह से ऊह्ह्ह स्सीईई आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह निकला और उसका बदन हिलने लगा और उसकी ग्रिप मेरे सर पर ढीली हो गई।

उसका बदन कांपने लगा और वो झड़ने लगी और उसका बदन ढीला पड़ने लगा और उसकी चूत में से कुँवारा जूस निकलता रहा और मैं उसके जूस को चूसता रहा। बड़ा मस्त मीठा टेस्ट था उसकी कुँवारी चूत के कुँवारे जूस का। उसके ऑर्गेज्म के साथ ही मानो उसके बदन से जान ही निकल गई हो और वो टेबल पर गिर सी गई और गहरी-गहरी सांसें लेने लगी।

उसकी आँखें बंद हो गई थीं और वो टेबल पर चित्त पड़ी थी। मैं उसके छोटी सी चुचियों को ऊपर-नीचे होते देख रहा था और सोच रहा था कि नैंसी का बदन कितना प्यारा है और क्या यह कच्ची कली की छोटी सी चिकनी और कच्ची चूत मेरे इतने लंबे और मोटे मूसल जैसे सख्त लंड से चुद पाएगी।

और जब मेरा लंड पूरे का पूरा उसकी छोटी सी चिकनी चूत में घुस जाएगा तो इस नन्ही सी चूत का क्या हाल होगा। यह तो फट ही जाएगी और शायद स्टिचेस भी लगवाने पड़ें और एक ही चुदाई में यह चूत से भोसड़ा बन जाएगी। यही सोच के थोड़ा सा फिक्रमंद हुआ पर चोदना तो था ही इसलिए सोचा कि देखेंगे क्या होता है आगे-आगे।

नैंसी लंबी-लंबी और गहरी-गहरी सांसें ले रही थी। मेरा अकड़ा हुआ लंड उसकी चूत के लिप्स के ऊपर पड़ा हुआ था और मैं उसके पेट पर हाथ फेर रहा था और उसके उठे हुए पेड़ू (चूत का फूला हुआ पोर्शन) और चूत को सहला रहा था। थोड़ी ही देर में उसकी आँखें खुल गईं और मेरी तरफ देख के मुस्कुरा दी और कहा कि अंकल you are wonderful। ऐसा मज़ा मुझे आज से पहले कभी नहीं आया।

मैं नैंसी को उठा के सामने की चेयर पर बिठा दिया और खुद उसके सामने खड़ा हो गया और उसने ऑटोमैटिकली मेरे लंड को अपने हाथों में ले के मसलना और दबाना शुरू कर दिया। मैं थोड़ा और करीब आ गया तो उसने मेरे लंड पर किस किया और लंड के सूराख से निकलते प्री-कम को अपनी जीभ से चाट लिया और मज़े से चटकारे लेने लगी।

तो मेरा हाथ उसके सर पर आ गया और उसके मुंह में अपना लंड का टोपा घुसाने की कोशिश करने लगा। पहले तो वो लंड के टोपे पर किस करती रही और फिर मेरे लंड को अपने मुंह में ले के आइसक्रीम की तरह से चूसने लगी। मेरा लंड बहुत मोटा है जिसका टोपा बहुत चिकना है इसलिए वो सिर्फ मेरे सुपाड़े को ही अंदर ले पाई और सुपाड़े को ही चूसने लगी।

मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल था। मैं उसके सर को पकड़ के उसके मुंह में अपना लंड घुसाने की कोशिश करने लगा और तकरीबन आधा लंड उसके मुंह में घुस पाया और उसके हलक (throat) को लगने लगा और उसके मुंह से आग्ग्ह्ह जैसी साउंड निकलने लगी और उसकी आँखें लाल हो गईं और गले की veins मोटी हो गईं जैसे उसका दम घुट रहा हो।

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थोड़ी देर के बाद वो थोड़ा सा रिलैक्स हुई और मेरे लंड को अपने मुंह में एडजस्ट कर लिया तो मैं अपनी गांड आगे-पीछे करके उसके मुंह को ही चोदने लगा और वो मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह से चूसने लगी। मैं एक हाथ से उसके सर को पकड़ के अपने लंड को उसके मुंह में घुसेड़ रहा था और दूसरे हाथ से उसके मस्त चुचियों को दबा रहा था।

उसका एक हाथ उसकी चूत के ऊपर था और वो अपनी चूत का मसाज कर रही थी। लगता था कि चूत के अंदर लगी खुजली को मिटाने की कोशिश कर रही हो। उसके चूसने से मैं मस्त हो गया था। मेरी आँखें बंद हो गईं और मेरी मलाई लगभग रेडी हो गई थी निकलने के लिए तो मेरी स्पीड बढ़ गई और मुझे लगा मेरे बॉल्स में तूफान उठने लगा हो.

और फिर मेरी गाढ़ी-गाढ़ी गरम-गरम थिक मलाई मेरे बॉल्स से निकल के लंड के सूराख में से बाहर पिचकारियाँ बनाती हुई नैंसी के मुंह में उछल-उछल के गिरने लगी और डायरेक्ट उसके हलक (throat) से उसके पेट में चली गई। वो ग्ग्घ्हह ग्ग्घ्हह करती रही पर मैंने उसका सर अपने लंड से नहीं हटाया और सारी मलाई उसके पेट में डाल दी।

मेरी आँखें बंद हो गई थीं और लंड नैंसी के मुंह में ही था जिसे अब वो धीरे-धीरे चूस रही थी जैसे मेरी क्रीम का एक-एक ड्रॉप पी जाना चाहती हो। मेरी सारी क्रीम निकल गई पर उसने अपने मुंह से मेरा लंड बाहर नहीं निकाला और मेरे चूतड़ों को आहिस्ता से मसलने लगी और लंड को चूसते ही रही। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

थोड़ी ही देर में मैं अपने सेंसेज में वापस आ गया और फिर मेरे लंड में मूवमेंट शुरू हो गई और वो फिर से नैंसी के मुंह के अंदर ही अंदर मेरा लंड अकड़ने लगा और एक ही मिनट के अंदर मेरा लंड फिर से लोहे जैसा सख्त हो गया। और मेरे लंड से नैंसी का मुंह भर गया। वो मेरे लंड को आइसक्रीम की तरह चूस रही थी।

नैंसी को उसके बगल (armpits) से पकड़ के चेयर पर से उठा लिया तो उसने अपने पैर स्ट्रेट अवे मेरे बैक पर लपेट लिए जिससे उसकी चूत एक बार फिर से मेरे लंड से टकराने लगी। मैं उसको उठाए-उठाए अपने बेडरूम में ले आया और बेड पर लिटा दिया और नैंसी को देखने लगा तो वो मुस्कुरा दी और पूछा कि ऐसे क्या देख रहे हो अंकल।

तो मैं बोला कि सोच रहा हूँ कि अब क्या करूँ मैं तुम्हारे साथ। तो वो हंस के बोली कि आ जाओ अंकल। आज आपका जो मन कहे वो कर डालो मेरे साथ। मैं आपकी ही हूँ। I am all your. Do whatever you want to do uncle। और धीरे से बोली कि अंकल I love you and your lovely thick cock.

इतना सुनते ही मेरा लंड स्प्रिंग की तरह झटके खाने लगा और पेट की तरफ उठ गया जैसे मेरा पेट कोई मैग्नेट हो और लोहे जैसे लंड को अपने से चिपका लिया हो। मैं बोला कि नैंसी तुम्हारी चूत तो बहुत ही छोटी है। पता नहीं मेरा इतना बड़ा मोटा लोहे जैसा सख्त लंड तुम्हारी चूत में घुसेगा तो क्या होगा।

उसने कहा, “अंकल यह मेरी चूत की सील तो कभी न कभी टूटने ही वाली है और मुझे अगर मेरे प्यारे अंकल के इतने मस्त लंड से अपनी सील तुड़वानी पड़े तो मैं अपने आप को लकी समझूंगी। you come on uncle lets try. I am sure कि मैं पेन बर्दाश्त कर लूंगी और अपनी चूत में आपके लंड को ले पाऊंगी।” वो मेरी तरफ मुस्कुरा के देखते हुए वासना भरी सेक्सी आवाज़ से बोली।

मैं बेड पर चढ़ गया और नैंसी के साथ लेट गया। हम दोनों एक दूसरे की तरफ मुंह करके लेटे थे और मैंने उसको अपने बदन से लिपटा लिया तो मेरा लंड उसके थाइज से लगने लगा। तो नैंसी ने अपनी एक टांग उठा के मेरे थाई पर रख ली और उसके फेस पर किस करने लगा और फिर उसके लिप्स पर किस किया तो ऑटोमैटिकली ही उसका मुंह खुल गया.

और मेरी टंग उसके मुंह में घुस गई और वो मेरी टंग को किसी बड़ी और एक्सपीरियंस्ड चुदक्कड़ औरत की तरह से चूसने लगी। दोनों एक दूसरे की तरफ मुंह करके लेटे थे। नैंसी अपनी एक टांग उठा के मेरे बैक पर रख दी जिससे उसकी चूत के लिप्स खुल गए। मैं उसके थोड़ा और करीब आ गया.

जिससे मेरे लंड का चिकना टोपा जिसमें से प्री-कम के बड़े-बड़े ड्रॉप्स निकल रहे थे उसकी चूत के सामने आ गया। नैंसी मेरे लंड के डंडे को अपनी मुट्ठी में पकड़ के लंड के मोटे और चिकने सुपाड़े को अपनी छोटी और गीली चूत में ऊपर से नीचे रगड़ने लगी।

नैंसी की चूत तो बहुत ही गीली हो चुकी थी और मेरे प्री-कम से उसकी चूत बहुत ही स्लिपरी हो गई थी। कभी-कभी मेरे लंड का टोपा उसके चूत के सूराख में अटक जाता था तो उसके मुंह से आह्ह्ह की आवाज़ निकल जाती और फिर लंड को निकाल के अपने चूत के दाने (क्लिटोरिस) को लंड से रगड़ने लगती। उसके मुंह से मस्ती की आह्ह्ह्ह स्स्स स्स्स और ऊफ्फ्फ्फ जैसी आवाजें निकल रही थीं।

मैं चाह रहा था कि चुदाई नैंसी ही स्टार्ट करे और मैं अपने आप को कंट्रोल करूँ। अगर मैं अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाया तो मेरा लंड नैंसी की छोटी सी चूत को एक ही झटके में फाड़ डालेगा और वो बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। इसलिए उसको जितना चाहिए उतना ही लंड अपनी चूत में ले ले। यह सोच के उसको ही कंट्रोल करने दिया।

मेरे दिमाग में एक तरीका आया। मैं किचन में गया और शहद (honey) की बोतल ले के आया और अपने लंड को उस शहद की बोतल में डाल के लंड को मीठा बनाया और लेट गया और नैंसी से बोला कि मेरे ऊपर 69 पोजीशन में आ जाए और मेरे लंड को चूस के गीला कर दे और मैं उसकी चूत को चूस के गीला करता हूँ ताकि मेरा लंड उसकी चूत में आसानी से घुस सके।

नैंसी हंसने लगी और बोली कि वाह अंकल क्या मस्त आइडिया है और मेरे ऊपर चढ़ के आ गई और अपनी दोनों टांगें मेरे बदन के दोनों तरफ रख के झुक गई और मेरे लंड को अपने मुंह में ले के चूसने लगी और शहद चाटने लगी। मैं थोड़ा सा शहद अपनी उंगली में ले के उसकी चूत के अंदर लगा दिया तो उसकी रसीली और मीठी चूत और मीठी हो गई और मैं चूसने लगा।

मैं अपने हाथों से उसके चिकने चूतड़ों को मसाज कर रहा था और चूत को चाट रहा था। नैंसी की चूत में मेरी टंग लगते ही वो फुल जोश में आ गई और मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। वो ऐसी मस्ती में आ गई थी कि उसे यह भी खयाल नहीं रहा कि मेरा लंड का सुपाड़ा उसके हलक (throat) के अंदर पूरे का पूरा घुस चुका है और उसकी आँखें बाहर निकल गई थीं।

नेक की सारी veins ब्लड से भर गई थीं और वो ग्ग्घ्हह ग्घ्ह्ह की साउंड भी निकल रही थी पर लंड को पूरे जोश से चूस भी रही थी। मुझे आश्चर्य हुआ कि नैंसी फुल जोश में थी और मेरे पूरे के पूरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी और ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी। मैं उसकी चूत को चाट रहा था और कभी तो पूरी चूत को मुंह में ले के अपने दांतों से काटता तो वो दीवानी हो जाती और मेरे मुंह पर अपनी चूत को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगती.

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और फिर अपनी गांड उठा-उठा के मेरे मुंह पर ऐसे मार रही थी जैसे मेरे मुंह को चोद रही हो। उसके चूत के दाने (क्लिटोरिस) को अपने दांत से काटा तो उसके बदन में बिजली सी दौड़ गई और एकदम से उसका बदन बहुत ज़ोर से कांपने लगा और उसके मुंह से आह्ह्ग्ग्ग आह्ह्ग्ग्ग ओग्ग्ह्ह्ह की आवाजें निकलने लगी।

उसका ऑर्गेज्म बहुत पावरफुल था और वो झड़ने लगी। मेरे मुंह में उसका शहद जैसा जूस निकल के गिरने लगा जिसे मैं मज़े से पीने लगा। जितनी देर तक उसका ऑर्गेज्म चलता रहा वो ज़ोर से कांपती रही और मेरे बदन पर बेदम पड़ी रही और मेरा लंड उसके मुंह से बाहर निकल के स्प्रिंग की तरह से हिलने लगा।

थोड़ी देर के बाद जब उसका ऑर्गेज्म खत्म हुआ और उसको होश आया तो मेरे हिलते लंड को अपने मुंह के सामने पाया तो मेरे लंड को पकड़ के एक चुम्बन लिया और फिर अपने मुंह में ले के चूसने लगी। और मैं उसकी खुली चूत जो अब अंदर से लाल हो चुकी थी उसको फिर से चूमने और चाटने लगा। देखा तो उसकी चूत के लिप्स सूज कर मोटे और लाल हो गए थे।

थोड़ी ही देर में वो फिर से मस्ती में आ गई और उसकी रसीली चूत रस से भर गई तो मैं अपने लंड पर फिर से शहद लगा दिया और उसको पलट के अपने ऊपर लिटा लिया। अब मैं स्ट्रेट लेटा था। मेरा लंबा मोटा लंड रॉकेट की तरह तैयार खड़ा था। नैंसी मेरे कमर के दोनों तरफ अपने पैर घुटनों से मोड़ के बैठी थी जैसे जॉकी घोड़े की सवारी के टाइम पर रखता है।

उसी तरह से उसके दोनों पैर मेरे दोनों तरफ थे। उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर। नैंसी घुटने के बल थोड़ा सा उठ गई और मेरे लंड के डंडे को अपने हाथ से पकड़ के लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के सूराख से सटा दिया और मेरे ऊपर झुक के मुझे किस करने लगी। लंड का सुपाड़ा उसके चूत के लिप्स के बीच में था और वो थोड़ा-थोड़ा आगे-पीछे हो रही थी जिससे लंड का सुपाड़ा उसके चूत के सूराख से टकरा रहा था।

नैंसी की मस्त और गरम चूत के स्पर्श से मेरे लंड का तो बुरा हाल हो गया था। मन कर रहा था कि उसको नीचे पटक के उसकी चूत में लंड को घुसेड़ के उसकी कुँवारी चूत को फाड़ के चोद डालूँ। नैंसी अब आगे-पीछे हो के अपनी चूत को मेरे लंड में घुसाने की कोशिश कर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कभी-कभी मैं अपनी गांड उठा के अपने लंड को उसकी चूत में घुसेड़ने लगता तो वो उचक जाती। मैं उसको झुका के उसकी छोटी-छोटी कोनिकल चुचियों को चूसने लगा। मेरे हाथ उसकी गांड पर थे। मैं उसके चूतड़ों को मसल रहा था। नैंसी मस्ती में आके जो झटके से मेरे लंड पर बैठी तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस गया और उसके मुंह से ओओईई माँ निकल गया।

मैं उसके शोल्डर्स को ज़ोर से पकड़े रखा ताकि वो चूत में से लंड को बाहर न निकाल सके। थोड़ी देर तक उसको ऐसे पकड़े रहा और अपनी गांड उठा के एक हल्का सा झटका लगाया तो वो दर्द से चिल्लाई ओओईई माँ आ और उचक के लंड को बाहर निकाल दिया।

तो मैं नैंसी से पूछा कि क्या तुम खुद ही मुझे चदोगी या मैं तुम्हें नीचे लिटा के चोदूँ। तो वो बोली कि अंकल मुझे थोड़ा ट्राई करने दो फिर आप ऊपर आ जाना। मैंने कहा ठीक है। वो फिर से मेरे लंड को अपनी चूत के सूराख पर एडजस्ट कर के ज़ोर लगाया तो सुपाड़ा थोड़ा सा अंदर घुसा।

वो आगे-पीछे हिल-हिल के कोशिश कर रही थी पर शायद उसे डर लग रहा था और उसका मुंह सिर्फ सुपाड़े को अंदर ले के ही खुल गया था। मैंने बोला कि क्या हुआ नैंसी। तो बोली कि अंकल मेरे से नहीं होता। आप ही कुछ करो प्लीज। तो मैं बोला कि सोच लो पहली बार है ना तो दर्द तो बहुत होगा।

उसने कहा क्या करूँ अंकल अब तो मेरा मन कर रहा है कि चाहे जितना भी दर्द हो चाहे मैं दर्द से मर ही क्यों न जाऊँ। मुझे आज यह लंड अपनी चूत के अंदर लेना है। मैंने फिर पूछा कि सोच लो। तो उसने कहा अब मुझे कुछ नहीं सोचना। बस अब आप ही मेरे ऊपर आ जाओ और बस मुझे लड़की से औरत बना डालो।

मैंने कहा कि ठीक है। और मैं उसको नीचे लिटा के उसकी टांगों के बीच में लेट के उसकी चूत को किस किया और चूसने लगा। तो उसने मेरे सर को पकड़ के अपनी चूत में घुसेड़ लिया और अपनी टांगें मेरी गर्दन पर लपेट ली। मैं नैंसी की चूत को फिर से चूसने और काटने लगा और जब उसकी क्लिटोरिस को दांतों से काटा तो अपनी गांड उछाल के मेरे मुंह को चोदने लगी.

और उसकी चूत रस से भर के रसीली हो गई थी। नैंसी की आँखें बंद हो गई थीं। मैंने अब और देर करना ठीक नहीं समझा और उसके ऊपर लेट के उसकी चुचियों को मुंह में ले के चूसने लगा और उसने मेरे लंड के डंडे को अपने हाथ में पकड़ के सुपाड़े को अपनी चूत के सूराख में रगड़ने लगी।

लंड शहद से चिकना था और लंड में से प्री-कम भी निकल के नैंसी की चूत को चिकना और स्लिपरी बना रहा था। मैं नैंसी के हाथ को अपने लंड से हटा के अपने गर्दन पर रखने को कहा और बोला कि मुझे टाइट पकड़े रहना और जब तुम कहोगी मैं अपने लंड को अंदर डालूँगा। उसने कहा ओके अंकल।

तो मैं अपने लंड के सुपाड़े को उसके चूत के सूराख से टिकाया और एक धीरे से धक्का दिया तो वो कसमसा गई और उसका बदन अकड़ने लगा और उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया। मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और लंड को उसकी चूत के सूराख में ही थोड़ा-थोड़ा अंदर-बाहर कर रहा था।

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और एक धक्का लगाया तो उसकी टाइट गीली चूत की फांकों को चीरता हुआ मेरा लंड का सुपाड़ा अंदर घुस गया। “आह्ह्ह अंकल दर्द कररर रहा है” उसके मुंह से निकला। नैंसी दर्द से चीख उठी। ऊईई आह्ह्ह ओह्ह्ह नहीं अंकल आ आ प्लीज धीरे से। नैंसी ऐसे चीख रही थी जैसे कि मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ के पेट के अंदर तक घुस गया हो लेकिन अभी तो लंड सिर्फ उसकी चूत के सूराख में ही अटका हुआ था।

उसकी आँखें दर्द से छलकने लगीं। वो दर्द से छटपटा रही थी। मैंने पूछा क्या हुआ? नहीं चुदवाना है क्या? तो उसने कहा अंकल बहुत दर्द हो रहा है थोड़ा धीरे करो ना प्लीज। मैंने कहा ठीक है और ऐसे ही लंड के सुपाड़े को उसकी चूत के सूराख में रखे उसको किस किया और उसकी टंग को चूसने लगा।

जब वो थोड़ा सा मस्ती में आ गई तो उसके हाथ मेरे बैक पर सहलाने लगे। मैं समझ गया कि अब उसको दर्द नहीं हो रहा है तो मैं लंड के सुपाड़े को अंदर-बाहर अंदर-बाहर करने लगा। उसके मुंह से आह्ह्ह अंकल बहुत अच्छा लग रहा है। तो मैं ऐसे ही करता रहा। उसकी चूत में से रस निकलने लगा था।

चूत फिर से गीली हो गई थी तो मैं एक और धक्का मारा। मेरा लंड 2 इंच उसकी चूत में घुस गया और वो ज़ोर से चिल्लाई ओओईईई माँ मारrr ग्गाई अंकल और मुझे टाइट पकड़ लिया और मेरे शोल्डर को अपने दांतों से ज़ोर से काट लिया (जिसका निशान आज भी मेरे शोल्डर पर है)। तो मैं रुक गया और वेट करने लगा और उसकी चुचियों को चूसने लगा।

उसका बदन थोड़ा सा रिलैक्स हुआ तो मैं फिर से लंड अंदर-बाहर करने लगा। नैंसी की चूत फिर से गीली और रिलैक्स होने लगी और उसको फिर से मज़ा आने लगा और अपनी गांड उठा-उठा के मेरे लंड को चूत में लेने का प्रयास करने लगी। मैं लंड को अंदर-बाहर करते-करते फिर से एक ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा लंड थोड़ा और अंदर घुस गया।

वो मुझसे चिमट गई और बहुत ज़ोर से चीखने लगी, “ओओईई माँ ऊह्ह निकाल्लो ओ अंकल जलन हो रही हैii बहुत दर्द हो रहा है” और मेरे चेस्ट पर मारने लगी। उसकी आँखों से आँसू निकल के नीचे गिरने लगे। मुझे पता था कि पहली बार चुदने वाली लड़की को बहुत दर्द तो होता ही है पर बाद में मज़ा आता है।

मैं लंड उसकी चूत में ही घुसाए रखा और बोला, “देखो नैंसी first time तुम्हें दर्द तो बहुत होगा पर एक ही टाइम होगा फिर बाद में मज़ा ही मज़ा आएगा।” वो रिलैक्स हो गई और कहा हाँ अंकल ठीक है आप धीरे-धीरे करो ना प्लीज। मैं बोला ठीक है और अपने आधे अंदर घुसे हुए लंड को अंदर-बाहर करने लगा।

थोड़ी देर में उसने बताया कि उसकी जलन कम हो गई है तो मैं बोला कि तुम रेडी हो तो ही मैं तुम्हारी सील तोड़ूँगा। तो उसने कहा कि अंकल मुझे आपसे ही और आज ही अपनी सील तुड़वानी है। I want you to fuck me and tear my cunt into pieces. I want to feel your wonderful cock deep in my burning cunt. मैं अपनी गरम चूत को अब और नहीं सहार सकती अंकल।

तो बोला ओके और लंड को अंदर-बाहर करने लगा जिससे उसको सुकून मिलने लगा। चूत रिलैक्स होने लगी और गीली होने लगी और वो मज़े में आ गई और कहा कि अंकल अब बहुत अच्छा लग रहा है। और मैं एक ज़ोर का धक्का मारा तो फिर से वो चिल्लाई ओह्ह्ह अंकल धीरे करो ना प्लीज but मेरा लंड उसकी चूत में आधा घुस गया और उसकी सील (झिल्ली) से टकराने लगा।

जब उसकी सांसें ठीक हुईं तो मैं बोला कि देखो नैंसी अब मेरा लंड तुम्हारी सील से टकरा रहा है। अभी भी टाइम है। तुम बोलोगी ही तो मैं अपना लंड बाहर निकाल लूँगा और आगे कुछ नहीं करूँगा तो तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम वर्जिन ही रहोगी। तुम सोच लो अच्छी तरह से।

तो उसने कहा कि अंकल आज मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मुझे चोद डालो और मेरी चूत में मची खुजली को हमेशा के लिए मिटा डालो। I want you to fuck me uncle. I need your cock in my pussy now now pleeess और अब देर न करो प्लीज। मेरी यह बेचैन और क्रेजी चूत को चोद डालो। वो एक अदा से मुस्कुराते हुए अपनी चूत की तरफ इशारा कर के बोली।

मैंने बोला कि ठीक है। तुम यही चाहती हो तो no problem for me. You want it, you surely will get it. Don’t worry मेरी नैंसी जान। मैं और मेरा मूसल लंड अब उसकी चूत को फाड़ने के लिए रेडी हो गया था। मैंने कहा अब मैं बिना बोले के ही सील को तोड़ दूँगा। तुम रेडी रहना। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

तो उसकी आँखें बंद हो गईं और मुंह ऊपर को उठ गया और मुंह से धीरे से निकल गया, “हे भगवान आज मैं तुझे साक्षी मान के अपनी चूत राजा के हवाले कर रही हूँ। मुझे हिम्मत दे और मेरा राजा के लंड की रक्षा करना।” और मैं धीरे से मुस्कुरा दिया। मैं अपने हाथ उसके बगल से निकाल के उसके शोल्डर्स को ज़ोर से पकड़ लिया।

उसकी लेग्स मेरे बैक से लिपटी हुई थीं। मेरे लेग्स पीछे स्ट्रेट थे और पैरों को बेड से टका के अपने हाफ लंड को उसकी टाइट गीली चूत में आगे-पीछे करने लगा। उसने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर ली थीं और चूत के फटने का वेट कर रही थी और मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और वेट करने लगी कि कब मैं अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ के चूत फाड़ दूँगा।

मैं धीरे-धीरे अपने लंड को उसके चूत में हाफ ही अंदर-बाहर अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी शायद उसका रस निकल गया था। कुछ ही देर में वो रिलैक्स हो गई और मज़ा लेने लगी, “आह्ह्ह ओह्ह्ह अंकल बहुत मजा आ रहा है।” अब मैं उसको कुछ बताने वाला नहीं था और उसको टाइट पकड़ा हुआ था।

अपने लंड को उसकी चूत से पूरा बाहर निकाल के उसको बिना बताए एक इतनी ज़ोर का धक्का मारा और उसने मुझे कस के पकड़ लिया और ज़ोर चीख मारी, “ऊईईई दाईय्या आह्ह्ह म्मार ग्गाईईई ओओईई माँ मुझे बचाओ… आह्ह्ह बाहर निकालो अंकल बहुत दर्द कर रहा है। आग लग रही है मेरी चूत में। अंदर से जल गई है। प्लीज अंकल धीरे करो।”

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उसकी बात पर ध्यान दिए बिना फिर से अपने रॉकेट की तरह खड़े लोहे जैसे सख्त मोटे लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाला तो मेरा लंड उसकी फटी चूत के ब्लड से और जूस से फुल था और एक पूरी ताकत से धक्का मारा तो मेरा पूरे का पूरा रॉकेट जैसा लंड उसकी टाइट छोटी सी चूत को फाड़ता हुआ अंदर उसके पेट में घुस गया।

और नैंसी बहुत ज़ोर से चिल्लाई, “आआईईई म्मा उ म्मार ग्गाईईई” और नैंसी की आँखें उलट के अपने सॉकेट में ऊपर चढ़ गईं और उसका मुंह खुला का खुला रह गया और मेरे बदन से उसकी ग्रिप लूज़ हो गई और उसके हाथ और पैर ढीले पड़ के बेड पर गिर गए। वो गहरी-गहरी सांसें ले रही थी। उसकी आँखें बंद थीं और आँख में से आँसू निकल रहे थे।

मैंने उसको देखा तो लगा कि वो तो बेहोश हो चुकी थी। मैंने झुक के अपने लंड को देखा तो पाया कि मेरा लंबा मोटा लोहे जैसा लंड उसकी चूत के अंदर पूरा घुस चुका है और उसकी चूत के लिप्स पूरे खुल के मेरे मोटे लंड से चिपके हुए हैं। नैंसी की फटी चूत से निकलते खून को देख के मेरी समझ में नहीं आया कि क्या करूँ।

अपने लंड को उसकी फटी चूत से खींच के बाहर निकाला तो लंड के साथ ही उसकी फटी चूत से खून की धारा निकलने लगी। मेरे लंड पर भी उसकी सील टूटी हुई चूत का खून था और उसकी चूत से तो बहुत खून निकलने लगा और बेड पर गिरने लगा। मैं तो घबरा गया और डर गया कि अब क्या होगा। कहीं डॉक्टर के पास जाना पड़ा तो मुसीबत आ जाएगी।

नैंसी की यह हालत देख के मेरा खड़ा लंड मुरझा गया और ढीला पड़ गया। मैं भागते हुए बाथरूम से पानी ले के आया और उसके फेस पर छिड़कने लगा। उसकी आँखें बंद थीं और गहरी-गहरी सांसें ले रही थीं। उसकी चूत में से अभी भी खून टपक के बेड पर गिर रहा था। मैं थोड़ी देर तक पानी डालता रहा पर उसके बदन में हरकत नहीं हुई। मैं दीवानों की तरह से इधर-उधर देखने लगा। मेरे दिमाग का बल्ब फ्यूज हो चुका था।

पास पड़े टॉवल से अपने लंड से लगा खून साफ किया और टॉवल को पानी में गीला कर के नैंसी की चूत को पोंछने लगा। नैंसी की चूत से खून साफ किया और चूत के लिप्स खोल के अंदर देखने लगा कि मेरे मूसल लंड ने नैंसी की कुँवारी चूत का क्या हाल बना दिया है। देखा तो उसकी चूत अंदर से डार्क रेड कलर की हो चुकी थी और चूत का छोटा सा सूराख फट के बहुत बड़ा हो चुका था।

चूत के अंदर के सारे टिश्यू टूट चुके थे और लाल हो गए थे। अभी मैं चूत को देख ही रहा था कि नैंसी के बदन में मूवमेंट महसूस हुई तो मुझे इत्मिनान हुआ और मैं उसके फेस की तरफ देखा तो उसकी आँख धीरे से खुल गई और वो ऐसे इधर-उधर देखने लगी और अपने नंगे बदन पर हाथ फेरने लगी जैसे उसे पता ही नहीं हो कि वो कहाँ है और वो नंगी क्यों है।

मेरे नंगे बदन को और लटकते हुए लंड को देखा तो उसकी आँखें पूरी तरह से खुल गईं और उसको धीरे-धीरे समझ में आने लगा कि वो कहाँ है और उसको क्या हुआ है। धीरे से मुस्कुराते हुए उसने पूछा क्या हुआ अंकल। मुझे तो मैंने कहा अपनी चूत पर हाथ लगा के देखो। उसने हाथ लगाया तो उसके हाथ में खून लगा।

उसने खून को देखा और मेरी तरफ देखा तो मेरे हाथ के टॉवल पर नजर पड़ी और उसने पूछा यह खून मेरी सील टूटने का है क्या अंकल। उसने अपने चूत की तरफ इशारा कर के पूछा तो मैंने हाँ में सर हिला दिया। और वो घबरा गई और रोने लगी। बोली कि अंकल मुझे बहुत ज़ोर का दर्द हो रहा है। चूत तो लगता है जैसे किसी ने नाइफ से काट डाली हो। अंदर से बहुत ज़्यादा जलन हो रही है।

मैं उसके फेस पर किस किया और बोला कि घबराने की बात नहीं है। अभी सब ठीक हो जाएगा। और उसको बेड पर उठा के बिठा दिया। तो उसकी नजर बेड पर पड़े खून पर पड़ी। वो हैरान हो गई और पूछा उफ्फ अंकल यह मेरी सील का ही खून है ना। तो मैंने कहा हाँ पर अब तुम घबराओ नहीं। अब कभी तुम्हें खून नहीं निकलेगा।

और उसको उठा खड़ा कर के बाथरूम की साइड ले जाने लगा तो देखा कि उसको चलना नहीं आ रहा था। मैं और भी घबरा गया कि अब क्या करूँ। नैंसी को मैं अपने हाथों में उठा के बाथरूम में ले गया और बाथ टब में गरम पानी भर के उसको बाथ टब में बिठा दिया और बोला कि तुम धीरे से अपनी चूत को गरम पानी में मसाज करो। तुम्हारे मसल्स थोड़े रिलैक्स हो जाएंगे तो आराम मिलेगा। और वो ऐसा ही करने लगी।

जब वो शावर ले चुकी तो उसको बाहर निकाला पर उसको फिर भी चलना नहीं आ रहा था तो मैं उसको उठा के बेड पर लिटा दिया। उसका बदन टॉवल से साफ किया और ब्लैंकेट ओढ़ाया तो वो फौरन गहरी नींद सो गई। नैंसी उठी तो शाम हो चुकी थी। देखा तो उसको थोड़ा सा बुखार चढ़ा हुआ था। मैं उसको अपनी बाइक पर बिठा के उसके घर ले गया और उसको सहारा दे के अंदर ले आया।

अभी अंदर आए ही थे कि उसकी हाउस मेड गंगा दिखाई दी। वो दौड़ती हुई आई और पूछा कि बेबी को क्या हुआ। तो मैंने कहा कि इसको थोड़ा सा बुखार चढ़ा हुआ है और बोला कि फिकर न करो मैं नैंसी को इंजेक्शन दे दिया है (गंगा को क्या पता कौन सा इंजेक्शन)। थोड़ी देर आराम कर लेगी तो ठीक हो जाएगी। तो उसका घबराना थोड़ा कम हुआ।

गंगा अच्छी खासी सुंदर थी। जूही चावला जैसा फेस और वैसे ही सेक्सी थी। बहुत मोटी भी नहीं बहुत दुबली भी नहीं। मीडियम बिल्ट। हार्ड वर्क की वजह से शायद बदन घटेला हो गया था। खुलता हुआ साँवला रंग, मस्त चुचियाँ, लंबे हल्के से घुंघराले बाल, काली बड़ी-बड़ी चमकदार आँखें, 36 साइज़ की बड़ी-बड़ी मस्त चुचियाँ जिसके निप्पल ब्लाउज़ से नजर आ रही थीं और उसकी चुचियाँ जो उसके ब्लाउज़ से बाहर आने को मचल रही थीं।

कभी महाराष्ट्रीयन हाफ साड़ी पहनती, कभी सलवार सूट तो कभी लहंगा चोली और जब घाघरा चोली पहनती तो पैरों में पायल ज़रूर पहनती और मटक-मटक के चलती तो उसकी पायल की म्यूजिक से लोगों के लंड अकड़ जाते और उनके लंडों के मुंह में पानी आ जाता। पर आज वो हाफ साड़ी में थी और उसके गदराए बदन की गदराई पिंडलियाँ दिखाई दे रही थीं। वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

उसको देखते ही मेरे लंड में हलचल होना शुरू हो गई थी। इन शॉर्ट वो एक चलता-फिरता सेक्स बॉम्ब थी। गंगा हमारे साथ ही नैंसी के बेडरूम में आ गई और मैं नैंसी को ब्लैंकेट ओढ़ा के बाहर आ गया और बोला कि तुम सो जाओ। मैं तुम्हारी मॉम के आने तक यहीं बाहर टीवी रूम में बैठा हूँ। नैंसी ब्लैंकेट ओढ़ के आँखें बंद कर के लेट गई और मैं बेडरूम के बाहर आ गया। मेरे साथ ही गंगा भी आ गई।

मैं उसको घूर से देख रहा था तो वो एक अजीब से अंदाज से अपना नीचे का होंठ काटते हुए बोली कि राजा बाबू कभी हमें भी अपनी फटफटिया की सवारी करवा दो ना। तो मैं हंस दिया और बोला कि ठीक है जब भी तुम्हारा मन करे तो मेरे पास आ जाना मैं तुम्हें सवारी करा दूँगा।

फिर गंगा खुद ही बोली कि मेम साब बोल रही थी कि आपको कोई काम (गंगा ने “काम” को एक आँख बंद कर के कहा) करने वाली चाहिए। तो मैंने कहा कि हाँ चाहिए तो सही। जो मेरे घर की सफाई कर दे, थोड़ा सा खाना पका दे और मेरे कपड़े धो के इस्त्री कर दे।

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तो वो बोली कि मैं फुल टाइम तो नहीं दे सकती आपको लेकिन कोशिश करूंगी कि आपके लिए शाम में थोड़ा टाइम निकाल के आपके सारे काम (फिर एक आँख बंद कर के बोली) कर दूंगी। तो मैं हँसते हुए थैंक्स बोला और बोला कि चलो इतना ही ठीक है जितना हो सकता है कर देना। मैं अकेला ही तो रहता हूँ ज़्यादा काम भी तो नहीं होता।

तो वो एक अदा से बोली अच्छा अकेले ही रहते हैं तो फिर आपके पास तो डेली आना पड़ेगा। और फिर मुस्कुरा के बोली कि हो सके तो मैं आपके पास शाम का काम कर लूंगी। 3 बजे से 7 बजे तक फ्री रहती हूँ और 7:30 को सिटी बस से मैं शहर अपने घर चली जाऊंगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

असल में गंगा तो किसी गाँव की थी पर अब वो शहर में रहने लगी थी। गंगा बोली कि मैं यहाँ मेम साहेब के पास सुबह 9 बजे से 3 बजे तक ही काम करती हूँ। मैं डेली 3:30 के बस से अपने घर चली जाती थी पर अब मैं आपका काम (उसने फिर से काम को एक आँख दबा के कहा था) करके शाम में ही जाऊंगी।

मैंने कहा ठीक है। मेरे पास से स्पेयर चाबी ले लेना और तुम घर खोल के अंदर आ जाना और अपना काम कर लेना। ((गंगा के साथ कैसा टाइम गुज़रा यह कहानी बाद में सुनाऊंगा))।

गंगा का टाइम हो गया था और वो चली गई। मैं और नैंसी अकेले ही थे घर में। वो सो रही थी गहरी नींद। लगभग रात के 9 बजे के करीब प्रीती आंटी का फोन आया। मैं कॉल रिसीव किया और बोला कि मैं नैंसी को शाम में ले के आ गया था और अभी तो वो बाथरूम में है। आप थोड़ी देर से कर ले फोन।

तो प्रीती आंटी बोली कि कोई बात नहीं। उससे कहना कि सो जाए और हाँ राज्ज अगर तुम फ्री हो तो तुम भी आज रात वहीं मेरे घर में रुक जाना क्योंकि मेरे फ्रेंड्स इतनी तेज़ बारिश में मुझे घर जाने नहीं दे रहे हैं तो मैं शायद रात यहीं रुक जाऊंगी और कल शाम तक घर आऊंगी। तुम मेरे बेडरूम में सो जाना। कोई प्रॉब्लम नहीं है।

तो मैं इत्मिनान की सांस लिया और बोला कि कोई बात नहीं आंटी you take your time. मैं यहीं हूँ घर पर। आप फिकर न करें। मैं आपके बेडरूम में ही सो जाऊंगा। मुझे आपका बेडरूम और बेड बहुत पसंद आया। तो प्रीती आंटी हंसने लगी और बोली कि ठीक है तुम्हें इतना पसंद है तो जब तुम्हारा मन करे सो जाया करो। अब मेरी बारी थी।

मैं हंसने लगा और सोचा कि आंटी आपके बेडरूम में तो आपके साथ ही सोऊंगा। मैं केबल टीवी पर एक इंग्लिश फिल्म देखने लगा। रात के तकरीबन 1 बजे नैंसी उठ गई। वो पुकार रही थी तो मैं टीवी बंद कर के उसके पास चला गया। उसका हाल पूछा। अब तक उसका बुखार कुछ कम हो गया था।

गंगा ने उसके लिए दूध गरम कर के थर्मोस में पहले से रखा हुआ था। उसको दूध पिलाया तो वो कुछ फ्रेश हुई और पूछने लगी कि मुझे क्या हो गया था अंकल। तो मैं उसको पूरी डिटेल बताया कि कैसे उसने चुदाई को insist किया और मेरा लंड उसकी छोटी सी टाइट चूत फाड़ के अंदर घुस गया।

उसकी सील टूट गई और वो बेहोश हो गई। तो वो धीरे से मुस्कुरा के अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी। इसकी चूत में अभी भी दर्द हो रहा था। मैं उसके बाजू में लेट गया तो उसने मेरा अकड़ा हुआ लंड अपने हाथ में ले के दबाने लगी और मुझे इशारा किया कि लंड उसके मुंह में डाल दूँ। तो मैं ऊपर आ गया और वो मेरा लंड चूसने लगी।

तो मैं भी पलट गया। उसने अपने लेग को घुटनों से मोड़ के खड़े कर लिया और मैं उसका स्कर्ट उठा के उसकी चूत को देखा तो पाया कि उसकी चूत के लिप्स फूल के सूज गए हैं और एकदम से लाल हो गए हैं। मैं उसकी चूत को किस करने लगा और चाटने लगा तो वो थोड़ी ही देर में मस्ती में आ गई।

शायद उसकी चूत को आराम मिल रहा था मेरी टंग से। पर मैं उसकी फटी और सूजी हुई चूत को अब चोदना नहीं चाह रहा था। वो लंड चूसती रही। मैं थोड़ी ही देर में उसके हलक में अपनी मलाई गिरा के हट गया और हम दोनों सो गए। सुबह उठे तो उसको दर्द तो नहीं था पर अभी भी चलने में मुश्किल हो रही थी।

थोड़ी देर में ही गंगा भी आ गई और नैंसी को ऐसे चलते देखा तो शायद कुछ समझ गई और मेरी तरफ शरारत से मुस्कुरा के देखने लगी और एक आँख बंद कर के बोली कि राजा बाबू लगता है बेबी को आपने कोई तगड़ा सा इंजेक्शन दिया है और आपके तगड़े इंजेक्शन का ही दर्द हो रहा है शायद बेबी को।

अभी तक मैं यह सुन के मुस्कुरा दिया तो वो खिलखिला के हंसने लगी और बोली कि हमें भी बुखार है हमें भी तो आपका इंजेक्शन लगा दो ना राजा बाबू। और अपनी साड़ी का पल्लू मुंह में दबा के हंसने लगी और बोली कि मैं आज ही शाम में आपके घर आ रही हूँ। आपका काम मैं कर दूंगी और आप मुझे ताकत का इंजेक्शन दे देना। और हंसने लगी।

तो मैं भी हंसने लगा और मैंने कहा ठीक है आ जाओ। तुम्हें जो चाहिए मिल जाएगा। और मैं भी एक आँख दबा के हंसने लगा और बोला कि आज शाम मैं तुम्हारा वेट करूँगा। और वो अपने काम में लग गई और मैं अपने घर चला आया। वापस आने से पहले मैं गंगा को अपना फोन नंबर देना नहीं भूला और बोला कि अगर शाम तक प्रीती आंटी नहीं आईं तो मुझे फोन कर देना। मैं नैंसी के पास उसकी मॉम के आने तक आ जाऊंगा।

उसने फोन नंबर अपने ब्लाउज़ में चुचियों के पास घुसेड़ के रख लिया तो मेरा दिल और हाथ दोनों मचलने लगे कि बस अभी उसकी चुचियों को दबोच लूँ और उसका ब्लाउज़ खोल के उसकी मस्त टाइट चुचियों को दबा के मसल डालूँ और चूसते-चूसते उसका सारा दूध पी जाऊँ और उसकी चूत में से जितना जूस जमा है वो सब बाहर निकाल दूँ।

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फिर मैंने सोचा कि अब तो गंगा खुद ही चुदवाएगी और उसकी शरारत देखते हुए लगता था कि बहुत ही सेक्सी है और मज़े ले-ले के चुदवाएगी। मैं बेसब्री से गंगा को चोदने का इंतजार करने लगा। संडे की शाम प्रीती आंटी वापस आ गईं। तब तक नैंसी का बुखार नॉर्मल हो चुका था। प्रीती आंटी ने मुझे फोन किया और मेरा थैंक्स बोला। तो मैंने बोला कि come on आंटी इस में थैंक्स की क्या बात है। यह तो मेरा कर्तव्य था जो मैंने निभाया।

आंटी ने एक बार फिर अपने घर आने का न्योता दिया। मैं बोला कि ठीक है आंटी आप जब बुलाओगी मैं आ जाऊंगा। मंडे को नैंसी मुझे फिर से वही खड़ी मिली और मेरी बाइक रोकते ही वो उचक के पीछे की सीट पर बैठ गई और फौरन मेरे बदन से चिपक गई और अपनी चुचियाँ मेरे बैक से रगड़ने लगी और रास्ते में जहाँ भी मौका मिलता वो मेरे लंड को पकड़ के दबा देती और जब तक मौका मिलता लंड को पकड़े ही रहती।

नैंसी शाम को मेरे ऑफिस आ गई। ऑफिस से निकलते-निकलते लेट इवनिंग हो गई थी और हम as usual बाइक पर निकल गए। शहर से बाहर निकलते ही उसने कहा कि अंकल मैं सामने बैठती हूँ। तो मैंने बाइक रोक के उसको सामने बिठा लिया। तो वो ऐसे बैठी कि उसका मुंह मेरी तरफ था। अब वो ऐसे ही बैठने लगी थी बिना चड्डी के और मैं भी शहर से बाहर आते ही अपने पैंट से लंड बाहर निकाल लेता।

इस टाइम भी वो सामने आ गई। रात हो रही थी। बिना चड्डी के वो मेरे थाइज के ऊपर दोनों तरफ अपने थाइज रख के मेरे बैक पर अपने पैर लपेट के बैठी और बैठने से पहले मेरे लंड के डंडे को पकड़ के लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के सूराख पर रख लिया। अंदर नहीं डाला।

नैंसी के इस पोजीशन में बैठने से उसकी चूत खुल गई थी। उसका हाथ लगते ही मेरे लंड से प्री-कम निकलना शुरू हो गया था और उसकी गीली चूत को चिकना बना रहा था। लंड का सुपाड़ा तो आसानी से उसकी खुली हुई चूत के सूराख में घुस चुका था। वो मेरे बदन से चिपकी हुई बैठी थी। बाइक आहिस्ता-आहिस्ता से चल रही थी।

मैं उसको सैटरडे की दास्तान सुना रहा था कि चुदाई कैसे हुई। वो सब बता रहा था और वो हैरानी से सुन रही थी। मेरे लंड के सुपाड़े को चूत में महसूस कर रही थी और मस्ती में आ गई थी। कभी-कभी थोड़ा सा उठ के मेरे लंड के डंडे को पकड़ के अपनी गीली चूत में रगड़ लेती फिर वैसे ही सुपाड़े को चूत के सूराख के अंदर घुसा के बैठ जाती।

बाइक के झटकों से लंड थोड़ा-थोड़ा उसकी टाइट खुली चूत में घुसने लगा था। अब नैंसी की चूत मेरे लंड को एडजस्ट कर रही थी। बाइक चलते-चलते एक गड्ढे में से उछली तो नैंसी भी मेरे लंड से उचली और जब बैठी तो उसके मुंह से ओह्ह्ह अंकल निकला और मेरा मोटा तगड़ा लंड जिसका टोपा किसी मिसाइल के हेड की तरह शार्प था और प्री-कम से चिकना और स्लिपरी हो गया था।

एक ही झटके में उसकी टाइट चूत में रॉकेट की तरह पूरे का पूरा अंदर तक घुस गया था। और वो मेरे बदन से ज़ोर से चिपक गई। उसकी आँख से पानी निकल गया और मुझे ज़ोर से पकड़े-पकड़े मेरे लंड पर ही बैठी रही। अब वो मेरे लंड को अपनी चूत में अच्छी तरह से फील कर रही थी और मेरे मूसल जैसे मोटे लंड पर उसकी टाइट चूत महसूस हो रही थी।

नैंसी मेरी गर्दन में हाथ डाल के लंड पर उछल-उछल के चुदने लगी। बड़ा मज़ा आ रहा था। यह ऑटोमैटिक चुदाई। मेरा लंड उसके पेट तक घुस रहा था। वो सिसकारियाँ ले रही थी। उसकी चुचियाँ भी उछल-उछल के मज़े ले रही थीं और मैं भी जानबूझ के बाइक को गड्ढों में से चला रहा था जिससे बाइक उछल रही थी और नैंसी मेरे लंड पर उछल रही थी।

अब मुझे पता चल गया था कि नैंसी को मज़ा आ रहा है तो मैं बाइक को रोड से साइड में उतार दिया और नीम के पेड़ों की आड़ में बाइक रोक के नैंसी को बाइक के पेट्रोल टैंक पर लिटा के उसको घचा-घच चोदने लगा। उसके चुचियों को पकड़ के मसलने और चूसने लगा तो उसको बहुत ही मज़ा आने लगा।

ऐसे सही ग्रिप नहीं मिल रही थी तो उसको अपने लंड पर बिठाए हुए मैं बाइक से नीचे उतर गया और उसको नीम के पेड़ के तने से टिका दिया। तो उसने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए और मैं उसको खड़े-खड़े स्टैंडिंग पोजीशन में मस्त तरीके से चोदने लगा।

“आह्ह्ह अंकल बहुत ही मज़ा आ रहा है। ओह्ह्ह अंकल मस्त मज़ा आ रहा है।” मैं अपने लंड को चूत से पूरा बाहर निकाल-निकाल के चोद रहा था और अब वो फुल मस्ती में आ के चुदाई के मज़े लेने लगी और सडनली उसके ग्रिप मेरे बदन पर टाइट हो गई और उसका बदन कांपने लगा जैसे इलेक्ट्रिक के झटके लग रहे हों और मेरी गर्दन (neck) को ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे महसूस हुआ कि वो अपनी चूत से मेरे लंड को चूस रही है।

तो मेरे लंड से मलाई की मोटी-मोटी पिचकारियाँ निकलने लगी और उसकी चूत को भरने लगी। आह्ह्ह अंकल स्स्स्स स्स्स्स और उसके हाथ मेरी गर्दन पर लूज़ हो गए। वो झड़ने लगी और बेदम हो के मेरे बदन से झूलने लगी। तो मैं उसको नीचे बिठा दिया। और जब थोड़ी देर के बाद हम दोनों अपने-अपने सेंसेज में वापस आए तो हम दोनों बाइक पर बैठ गए और घर की तरफ चल दिए।

रास्ता भर वो मेरे लंड पर ही बैठी रही और कॉलोनी की टर्निंग से कुछ पहले उतर के पीछे आ गई। अब यह डेली रूटीन बन गया कि वो मेरे लंड की सवारी करती हुई घर आती और रास्ते में हम डेफिनेटली कहीं न कहीं रुक के चुदाई करते। थोड़े ही दिनों में उसको मेंसेज भी चालू हो गए और कच्ची कली खुल के गुलाब का फूल बन गई और जवान हो गई।

जब वो मेंसेज में होती तो कहीं बाइक रोक के मेरे लंड को चूसती और उसमें से निकलती टेस्टी मलाई को मज़े से खा जाती। दिन ऐसे ही गुज़रते रहे। मैं और नैंसी चुदाई के मज़े लेते रहे। एक दिन उसने बताया कि गंगा ने बातों ही बातों में उससे पूछ ही लिया कि मैं नैंसी को चोदता हूँ।

इनफैक्ट गंगा मेरे घर काम करने लगी थी और मैं उसकी मस्त रसीली चूत चोद भी चुका था और वो बड़े मस्त स्टाइल में चुदवाती थी। (गंगा को फर्स्ट टाइम कैसे चोदा यह कहानी फिर कभी सुनाऊंगा)। नैंसी और गंगा को चोदते-चोदते लगभग एक महीना हो गया था। एक रात बहुत ज़ोर की बिजली चमक रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

शायद बारिश होने वाली थी कि मेरे फोन की घंटी बजी। मैं घड़ी की तरफ देखा तो तकरीबन रात के 12 बजे थे। मैं हैरान था कि इस टाइम पर मुझे कौन फोन कर सकता है। फोन उठाया hello तो दूसरी तरफ से प्रीती आंटी की आवाज़ आई, “Hello राज्ज्ज क्या कर रहे हो कहीं सो तो नहीं गए।” तो मैं बोला कि नहीं आंटी सोया नहीं था टीवी देख रहा था। तो आंटी बोली कि राज्ज्ज क्या तुम यहाँ मेरे घर पे आ सकते हो?

मैं कुछ सेकंड्स के लिए खामोश रहा। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा कि कहीं आंटी को मेरे और नैंसी के बारे में पता तो नहीं चल गया। तो दूसरी तरफ से हँसते हुए आंटी बोली, “क्यों राज्ज्ज क्या हुआ भूल गए अपना वादा। तुम ने ही तो कहा था कि आंटी आप रात के 12 बजे भी बुलाओगी तो मैं चला आऊंगा। याद है ना राज्ज्ज। और आज तो नैंसी भी अपने पापा के साथ शहर गई हुई है।

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उसको कुछ शॉपिंग करना था और उसके पापा का टूर भी है। मैं अकेली घर में बहुत bore हो रही हूँ। वो लोग 3 दिनों बाद आने वाले हैं तो मैं अभी और 3 दिन तक अकेली ही रहूंगी। और ऐसा लगता है कि आज बारिश भी होने वाली है और जब बारिश तेज़ हो जाती है तो लाइट भी तो चली जाती है। मुझे डर लग रहा है। तुम आ जाओ तो थोड़ा सा इत्मिनान भी हो जाएगा और टाइम भी पास हो जाएगा और साथ में मेरे केबल के चैनल्स भी सेट कर देना।” तो मैं अपने खयालों से बाहर आया। इत्मिनान का सांस लिया कि आंटी को मेरे और नैंसी के बारे में पता नहीं चला.

और मुस्कुरा के कहा, “At your service आंटी। अभी आ रहा हूँ।” और फटाफट बिना अंडरवियर के ट्रैक सूट पहनने से पहले ही मेरा 9 इंच लंबा 3 इंच मोटा मूसल लंड अकड़ के स्प्रिंग की तरह से मेरे पेट से चिपक गया और मैं दौड़ता हुआ बाहर आया और बाइक स्टार्ट कर के तेज़ी से प्रीती आंटी के घर की तरफ चल दिया। प्रीती आंटी के साथ क्या हुआ और कैसा टाइम गुज़रा यह कहानी मैं आपको जल्दी ही बताऊंगा। वेट करें प्लीज। और हाँ यह ज़रूर बता ना कि मेरी यह कहानी आपको कैसी लगी। waiting for your comments.

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