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गुड़िया को जवानी का मजा दिया

जून 15, 2026 by hamari Leave a Comment

Indian Virgin Girl Tight Chut

वो एक मासूम लड़की थी, जिसे मैंने वक्त से पहले ही जवानी के मजे देना शुरू कर दिया था और वो भी एक मासूम कली से खिलकर फूल बन गई थी। आज एक साल हो गए हमें एक-दूसरे के साथ मजे करते हुए। इसकी शुरुआत हुई जब वो 18 साल की थी और उसके सीने पर उभार आना शुरू ही हुए थे, लेकिन उसमें कुछ ऐसी बात थी जो मुझे जैसे 34 साल के आदमी को भी मदहोश कर देती थी। Indian Virgin Girl Tight Chut

मैं उसे गुड़िया कहकर बुलाता था। वो हमारे पड़ोस में रहती थी। एक साल पहले ही वो यहाँ रहने आई थी। उसके परिवार के साथ हमारे अच्छे संबंध बन गए थे। रोज का आना-जाना एक-दूसरे के घर में होने लगा। गुड़िया भी हमारे घर आती थी, मेरे बच्चों के साथ खेलने।

गुड़िया के परिवार में उसका छोटा भाई, उसकी माँ और बाप थे। गुड़िया की माँ को देखकर बताया जा सकता था कि उसने ये जिस्म और खूबसूरती कहाँ से पाई थी। गुड़िया की माँ उसे हमेशा घुटनों से ऊपर वाली फ्रॉक पहनाती थी, जिससे उसकी भरी हुई जाँघें अच्छे से दिखती थीं। मगर उसकी उम्र की सभी बच्चियाँ ऐसे ही कपड़े पहनती थीं, लेकिन गुड़िया अपनी उम्र की लड़कियों से बड़ी और भारी हुई दिखती थी।

मेरे अंदर उसे चोदने की इच्छा उस दिन जागी जब एक दिन गुड़िया स्कूल से जल्दी वापस आ गई और बाहर तेज बारिश हो रही थी, जिससे वो पूरी तरह भीग गई थी। उसके घरवाले किसी रिश्तेदार के घर गए थे, इसलिए गुड़िया हमारे घर आ गई। उस दिन मेरी बीवी की तबीयत खराब थी, इसलिए मैं ऑफिस नहीं गया था।

गुड़िया ने दरवाजे पर दस्तक दी तो मैंने ही दरवाजा खोला। “अरे गुड़िया! आज जल्दी आ गई तुम स्कूल से?” “हाँ अंकल, आज स्कूल में गेम्स डे था, इसलिए मैं जल्दी आ गई।” “गुड़िया, तुम तो पूरी तरह भीग चुकी हो, जल्दी अंदर आ जाओ, नहीं तो सर्दी लग जाएगी।”

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गुड़िया के अंदर आने के बाद मैं पीछे से उसकी भरी-भरी चूतड़ों को देख रहा था। स्कूल ड्रेस पूरी तरह उसकी गांड पर चिपक गई थी और उसकी चड्डी की लाइन साफ नजर आ रही थी। उसकी जवानी का यही नजारा देखकर मेरे अंदर का जानवर जाग गया था और उसे चोदने के लिए मैं मचल उठा था।

घर में उस वक्त सिर्फ मैं और मेरी बीवी ही थे। अंदर आने के बाद मैंने गुड़िया से कहा, “बेटा, तुम्हारी आंटी की तबीयत थोड़ी खराब है, आओ मैं ही तुम्हारे कपड़े बदल देता हूँ।” गुड़िया ने भी हाँ कह दिया। मैं बिस्तर पर बैठ गया और उसे अपने पास आने के लिए कहा। मैंने अपने साथ एक तौलिया ले आया था। “गुड़िया, जल्दी इधर आओ, मैं तुम्हारा ड्रेस बदल देता हूँ और तुम्हें ये फ्रॉक पहना देता हूँ।”

गुड़िया मेरे पास चली आई। मैंने उसे पीछे घुमा दिया और उसकी ड्रेस की चेन खोलने लगा। ड्रेस उतारने के बाद अब वो सिर्फ व्हाइट कलर की समीज और चड्डी पर थी। उसके दूध आना शुरू हो गए थे, लेकिन उसकी माँ ने अभी उसे ब्रा पहनाना शुरू नहीं किया था।

ड्रेस उतारने के बाद मैंने गुड़िया से कहा, “बेटा, तुम्हारी तो समीज भी पूरी तरह भीग गई है, इसे भी उतारना होगा।” गुड़िया ने कुछ नहीं कहा। समीज में गुड़िया सेक्स की देवी लग रही थी। उस छोटी सी उम्र में उसकी भरी हुई गांड और रसीली जाँघें देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

मैंने उसे अपने और पास खींचते हुए कहा, “गुड़िया, तुम बहुत सुंदर हो।” और उसके गालों को चूम लिया। गुड़िया मुस्कुरा दी। गुड़िया बोली, “अंकल, जल्दी उतारिए, नहीं तो ठंड लग जाएगी।” मैंने झट से उसकी समीज भी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ चड्डी में खड़ी हुई थी। उसकी गोलाईयाँ मैं साफ देख सकता था। उसके निप्पल हल्के गुलाबी रंग के थे और अभी नींबू के बराबर उसकी चुचियाँ मसलने के लिए मैं बेकरार हो उठा।

अब वो मेरे सामने सिर्फ चड्डी में खड़ी थी और उसकी छाती मेरे सामने नंगी थी। मैं तौलिया लेकर उसका सिर पोंछने लगा, लेकिन मेरी नजर उसकी चुचियों पर ही गड़ी हुई थी। गुड़िया इस सब से बेखबर आराम से अपना जिस्म मुझसे पोंछवा रही थी।

सिर पोंछने के बाद मैंने उसे अपने और पास खींच लिया। अब वो मेरी दोनों टांगों के बीच में खड़ी हुई थी और मेरा लंड मेरी लुंगी के अंदर खड़ा हो चुका था। जैसे ही वो मेरे पास आई, उसका हाथ मेरे लंड से टकरा गया। उसे भी समझ नहीं आया कि वो क्या था। उसने झट से अपना हाथ हटा लिया, लेकिन फिर भी मेरा 6 इंच लंबा लंड उसकी कमर से रगड़ खा रहा था।

अब मेरे हाथ उसकी चुचियाँ पोंछ रहे थे। मैंने अचानक से तौलिया हटाकर अपने हाथों से उसकी नंगी चुचियों को सहला दिया। उसके जिस्म में एक बिजली सी दौड़ गई और वो काँप उठी। इसके बाद वो मुझे घूर-घूर के देखने लगी और उसके होंठों पर एक अजीब सी शरारत भरी मुस्कान थी।

मैं अब उसकी कमर पोंछते हुए उसकी गांड पर आ गया था और अपने हाथों से उसकी गांड को छूते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारी चड्डी भी गीली हो गई है, इसे भी उतार दो।” वो थोड़ा शर्माई और बोली, “नहीं अंकल, इसे रहने दीजिए।” ये कहते वक्त मेरे हाथ उसकी गांड को सहला रहे थे, चड्डी के ऊपर से। उसे भी कुछ अजीब सा महसूस हुआ, इसलिए वो मुझसे दूर होते हुए बोली, “अंकल, अब मैं खुद ही फ्रॉक पहन लूँगी।”

मैंने कहा, “ठीक है।” और मैं बिस्तर से उठते हुए उसे अपनी ओर खींचकर कहा, “गुड़िया, तुम बहुत सुंदर हो।” और उसे होंठों के एकदम पास चूम लिया और अपना हाथ उसकी गोलाईयों पर एक बार और सहला दिया। वो फिर से काँप उठी और मुझसे दूर हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैं अब कमरे से बाहर चला गया और बाहर ही उसका इंतजार करने लगा। जब गुड़िया बाहर आई तो वो फ्रॉक जो मैंने उसे पहनने को दी थी, वो उसे थोड़ी छोटी और टाइट हो रही थी, जिससे उसकी जाँघें और चुचियाँ और उभरकर बाहर आ गए थे। मेरा लंड अब एकदम खड़ा हो गया था और लुंगी के अंदर तड़प रहा था — गुड़िया की चूत पाने के लिए।

वो आकर मुझसे थोड़ा दूर खड़ी हो गई। उसने मुझसे पूछा, “आंटी जी कहाँ हैं?” मैंने कहा, “बेटा, वो सो रही हैं। आओ, मैं तुम्हें कुछ खाने को दे देता हूँ। तुम स्कूल से आई हो, तुम्हें भूख लगी होगी।” और ये कहकर मैं किचन की तरफ बढ़ गया। वो भी मेरे पीछे-पीछे आ गई।

किचन में आने के बाद मैंने उसे नीचे बैठने का इशारा किया। हम सभी लोग ज़मीन पर बैठकर ही खाना खाते थे। गुड़िया भी नीचे बैठ गई। फ्रॉक छोटी होने की वजह से उसके बैठते ही फ्रॉक उसकी जाँघों से ऊपर हो गई और उसकी गीली चड्डी साफ दिखने लगी।

मैंने उसे खाना देने के बाद उसके पास ही बैठ गया। वो इस बात से बेखबर कि मैं उसकी चड्डी से चिपकी हुई उसकी चूत को देख रहा हूँ, वो खाना खाने लगी। उसकी चूत की फाँकें उसकी चड्डी से चिपक गई थीं और साफ उभरी हुई दिख रही थीं। उसने व्हाइट कलर की चड्डी पहनी हुई थी, जिसकी वजह से वो और साफ दिख रही थी।

मैंने गुड़िया से कहा, “देखो, मैंने कहा था ना चड्डी भी उतार दो, देखो वो गीली हो गई है।” मेरे ये कहने के बाद उसने मेरी तरफ देखा। मैं उसकी गीली चूत को चड्डी के ऊपर से घूर रहा था। ये देखकर वो शर्मा गई और कुछ नहीं बोली। ये देखकर मेरी हिम्मत और थोड़ी बढ़ गई। मैंने कहा, “देखो, अगर चड्डी नहीं उतारोगी ना तो पेशाब वाली जगह पर खुजली होने लगेगी। लड़कियों को वो जगह हमेशा साफ और सूखी रखनी चाहिए।”

मेरी इस तरह की बेशर्म बातें सुनकर वो हँस पड़ी और खाना बीच में ही छोड़कर खड़ी हो गई और कहा कि उसका हो गया। मैंने कहा, “पूरी तो खा लो।” उसने कहा, “नहीं, पेट भर गया।” मैं उसका हाथ अपनी तरफ खींचते हुए उसे अपनी गोद में बैठा लिया और कहा, “अभी कैसे हो गया? ये तो पूरा खाना पड़ेगा। चलो, मैं खिला देता हूँ।” और उसके गालों को हल्के से चूम लिया। इस पर वो कुछ नहीं बोली।

उसे गोद में बैठने के बाद मेरा खड़ा लंड उसकी गांड से दब गया। मैंने उसे कमर से उठाते हुए कहा, “बेटा, अच्छे से बैठो, देखो मेरी पेशाब करने वाली जगह तुमने दबा दी।” वो बोली, “सॉरी अंकल।” मैंने कहा, “कोई बात नहीं बेटा। चलो, अब मैं खिला देता हूँ।”

मेरा खड़ा हुआ लंड उसकी गांड के अंदर धँस गया था, जिसे शायद वो भी महसूस कर रही थी, इसलिए जल्दी-जल्दी खाना खाकर वो खड़ी हो गई। अब शाम के 4:30 बज गए थे और मेरे बच्चों के स्कूल से आने का समय हो गया था। मैंने गुड़िया से कहा, “बेटा, अब तुम टीवी देखो, मैं जाकर थोड़ा आराम कर लेता हूँ।” ये कहकर मैं अपने बेडरूम की तरफ चल दिया।

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वहाँ मेरी बीवी अभी तक सो रही थी। उसका सुबह से ही सिर दर्द हो रहा था, इसलिए वो आराम कर रही थी। बेडरूम में आहट से उसकी नींद खुल गई। वो सिर्फ नाइट्टी पहनकर सो रही थी। मेरी बीवी भी कम सेक्सी नहीं थी। उसके बड़े-बड़े दूध और भरी-भरी चूतड़ उस नाइट्टी में और भी सेक्सी लग रहे थे।

एक तो बारिश का मौसम और दूसरा गुड़िया के जिस्म को छूने से जो आग मेरे अंदर लग गई थी, अब मैं उसे अपनी बीवी से ही मिटाना चाह रहा था। मैं उसके बाजू में लेट गया और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा, “अब कैसा लग रहा है?” वो बोली, “अब सिर दर्द नहीं है।”

ये सुनकर मैं खुश हो गया और उसकी चूतड़ पर हाथ घुमाने लगा और उसे मसलने लगा। बीवी बोली, “क्या करते हो, बच्चे आने वाले हैं।” मैंने कहा, “जब तक बच्चे आएंगे, मैं तुम्हें दो बार चोद चुका होंगा।” ये सुनकर वो हँस दी और लुंगी के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ लिया और बोली, “आज तो आप मेरी हालत खराब करने के मूड में हैं। ये लंड आज इतनी जल्दी नहीं बैठने वाला है, इसका मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।”

और वो उठकर बैठ गई और मेरी चड्डी के अंदर हाथ डालकर मेरे लंड को सहलाने लगी। मेरी बीवी की चुचियों का साइज इतना बड़ा था कि दोनों हाथों में भी उसकी एक चूची नहीं आती थी। मैं उसके दूधों को मसलने लगा जोर-जोर से और फिर उसकी नाइट्टी को उतारकर फेंक दिया और उसके दूधों को चाटने लगा। वो भी गरम हो गई थी और मेरे लंड को चड्डी से बाहर निकालकर जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगी।

मैं उसकी चूत में दोनों उँगलियों को डालकर अंदर-बाहर करने लगा और फिर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। करीब 10-15 मिनट तक उसे चोदने के बाद मैं झड़ गया और ऐसे ही लेट गया उसके बाजू में। जैसे ही मैं बीवी के ऊपर से हटा, बेडरूम के दरवाजे पर दस्तक हुई और बाहर से गुड़िया की आवाज आई, “अंकल, मैं घर जा रही हूँ… पापा-मम्मी वापस आ गए हैं।”

शायद गुड़िया ने हम दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया था और वो पूरा देखने के बाद ही वहाँ से जाने का बोलकर गई थी। ये सोचकर मैं खुश हो गया। अगले दिन शाम 6 बजे का समय फिक्स किया। उसकी माँ ने गुड़िया की ट्यूशन के लिए जो वो मुझसे लेने वाली थी (लेकिन उसे क्या पता था कि ट्यूशन उसे किसकी मिलने वाली थी)। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अगले दिन ऑफिस से मैं जल्दी आ गया और शाम के 6 बजने का इंतजार करने लगा। ऑफिस से आने के बाद मैं झट से नहा लिया और साफ-सुथरा होकर जैसे ही 6 बजे बाहर गेट खोलकर आँगन में बैठ गया। थोड़ी देर में ही गुड़िया अपने घर से बाहर निकली और मेरे घर की तरफ आने लगी। वो बाहर निकली तो सीधे उसकी नजर मुझ पर पड़ी। मुझे देखते ही वो मुस्कुराई और पास आकर बोली, “नमस्ते अंकल, मैं लेट तो नहीं हुई?”

मैंने कहा, “नहीं बेटा, बिल्कुल सही समय पर आई हो।” और ये कहकर उसके गालों को सहला दिया। अब हम दोनों घर के अंदर आ गए। गुड़िया के साथ मैं अपने बच्चों को भी पढ़ाने वाला था। मेरे एक लड़का था जो 8 साल का था और एक लड़की जो अभी 4 साल की थी।

अब मैं गुड़िया और मेरे दोनों बच्चों के साथ रूम में बैठ गया। गुड़िया को मैंने अपने बराबर वाली सीट में बैठाया और अपने बच्चों को सामने वाले सोफे पर। गुड़िया आज कुछ ज्यादा ही बन-सँवरकर आई थी। पिंक कलर का फ्रॉक पहनकर आई थी, जो गले से ज्यादा गहरा था और वो फ्रॉक स्लीवलेस था। सिर्फ दो स्ट्रैप्स लगे हुए थे, जो उसकी नंगी बाहों को नहीं छुपा सकते थे। उसे इस रूप में देखकर मेरा मन मचल उठा।

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पढ़ाई शुरू हुई। वो सवाल करने के लिए टेबल पर झुकती तो उसकी छोटी-छोटी चुचियों के साफ दर्शन हो जाते। एक सवाल को समझाते हुए मैंने उसकी जाँघ पर हाथ रख दिया। वो कुछ नहीं बोली। सवाल समझाने के बाद भी मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों से नहीं हटाया। मैंने सोचा कि देखता हूँ वो क्या रिएक्शन देती है, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और अपना सवाल करने लगी।

अब मेरा हाथ उसकी जाँघ पर था। धीरे से मैंने अपना हाथ उसकी जाँघ से थोड़ा और ऊपर किया। वो फिर भी कुछ नहीं बोली। मैंने और हिम्मत की और अपना हाथ और थोड़ा ऊपर ले गया तो उसकी चड्डी टच हो गई। वो एकदम से सवाल करते-करते रुक गई और मुझे देखने लगी।

मैंने उसे देखा और एक शरारत भरी हँसी हँसते हुए उसे पूछा, “क्या हुआ गुड़िया? कुछ परेशानी आई क्या सवाल में?” वो बोली, “नहीं अंकल।” मैंने अपना हाथ फिर भी वहाँ से नहीं हटाया। जैसे ही मैंने अपनी हथेली से थोड़ा जोर डाला, उसने मेरा हाथ पकड़कर हटा दिया और बोली, “अभी नहीं।”

ये सुनकर मैं दंग रह गया। मैं तो समझ रहा था कि वो कुछ समझती नहीं है, लेकिन वो उस छोटी सी उम्र में सब समझती थी। मैंने भी हाथ हटा लिया और उसे सवाल समझाने लगा। अब तो बात-बात पर मैं उसकी पीठ पर हाथ रख देता और धीरे-धीरे उसकी कमर पर हाथ ले जाता। कभी उसे चूम लेता, कभी उसकी जाँघों को मसल देता। वो इन सब बातों का मजा लेने लगी।

एक दिन मैं बच्चों को सवाल देकर डाइनिंग टेबल पर बैठकर अपना ऑफिस का काम भी खत्म कर रहा था, तभी गुड़िया मेरे पास आई और मुझसे कहा, “ये सवाल आप भी नहीं कर सकते, इतना कठिन है।” मैंने उसे देखा और कहा, “तुम अभी जानती नहीं हो कि मैं क्या-क्या कर सकता हूँ, ये सवाल क्या चीज है।” इस पर वो शर्माई और बोली, “कब बताएँगे आप कि आप क्या-क्या कर सकते हैं?” और ये कहकर वो मुस्कुरा दी।

मैं उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी ओर खींच लिया, “कहो तो अभी बता दूँ… मैं तो तैयार हूँ, तुम बोलो तुम तैयार हो?” ये सुनकर वो कुछ नहीं बोली और शर्मा गई। मैं अपना हाथ अब उसकी कमर से नीचे ले गया और उसकी गांड को सहलाने लगा। वो वहीं खड़ी रही।

अब मैंने उसकी गांड को पूरी ताकत से मसल रहा था। एक उँगली मैंने उसकी गांड के बीच में डाल दी। वो एकदम से घबरा गई और दूर होने लगी। मैंने उसे कमर से पकड़ लिया और अपनी गोद में बैठा लिया और कहा, “सच में ये सवाल तो बहुत कठिन है… इसे अच्छे से समझाना होगा तुम्हें।”

और फिर उसकी जाँघों पर अपना हाथ सहलाने लगा। ये सब मेरे बच्चे नहीं देख पा रहे थे क्योंकि उसकी टांगें डाइनिंग टेबल के अंदर छुपी हुई थीं। आज मैंने पूरी हिम्मत कर लेने का फैसला कर लिया था। और सीधे अपना हाथ उसकी चूत पर ले गया और फ्रॉक के ऊपर से ही सहलाने लगा।

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वो बोली, “क्या कर रहे हैं अंकल? आपके बच्चे देख लेंगे।” मैं बोला, “तुम उसकी चिंता मत करो, किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। तुम बस मजे लो।” और फिर अपना हाथ मैंने उसकी फ्रॉक के अंदर डाल दिया और उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत के फाँकों को सहलाने लगा। वो धीरे-धीरे गरम होने लगी। इतने में ही मेरी बीवी की आवाज आई और मैंने उसे कहा कि ये सवाल मैं अच्छे से कल बता दूँगा।

अगले दिन मेरी बीवी बच्चों के साथ मायके जाने वाली थी। उसकी माँ की तबीयत कुछ खराब थी। मैंने ऑफिस से छुट्टी नहीं मिलने का बहाना बनाकर रुक गया। गुड़िया ये बात नहीं जानती थी। अगले दिन शाम को वो ट्यूशन पढ़ने के लिए आई। उस दिन वो व्हाइट कलर का फ्रॉक पहनकर आई थी, जो ट्रांसपेरेंट थी। कुछ उसकी पीठ और पेट उसमें से साफ नजर आ रहे थे।

उसके अंदर आने के बाद मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वो बोली, “आंटी कहाँ हैं? और बच्चे भी नहीं दिख रहे हैं।”

मैंने कहा, “क्यों, आंटी नहीं रहेंगी तो क्या तुम मुझसे मिलने या ट्यूशन पढ़ने नहीं आओगी?”

ये सुनकर वो बोली, “ऐसी बात नहीं है अंकल। ट्यूशन तो मुझे आप ही से पढ़ना है अब हमेशा। आप बहुत अच्छी तरह से समझाते हैं हर चीज। मुझे तो बहुत अच्छा लगता है आपसे पढ़ना।”

ये सुनकर मैं उसके पास आया और उसे अपनी बाहों में भर लिया और ऊपर उठाकर उसके गालों को चूम लिया।

वो फिर बोली, “अंकल, ये आप क्या कर रहे हैं? आंटी देख लेगी।”

मैंने कहा, “तुम्हारी आंटी जी अपने मायके गई हैं एक हफ्ते के लिए। अब सिर्फ मैं और तुम हैं घर में।”

ये सुनकर वो थोड़ा घबराई, लेकिन कुछ देर में ही संभलती हुई बोली, “तो फिर आज आओ, वो कल वाला सवाल अच्छे से समझा देंगे ना?”

मैंने हाँ बोल दिया और उसे अपने बेडरूम में ले गया। “आज हम यहाँ पढ़ाई करेंगे क्या?” उसने पूछा। मैंने कहा, “उस सवाल को यहीं मैं अच्छे से समझा सकता हूँ।”

“चलो अब जल्दी से मेरी गोद में आकर बैठ जाओ।” वो बोली, “आज गोद में बैठने की क्या जरूरत है? आज तो आपके बच्चे भी नहीं और आंटी भी नहीं हैं। आज तो आप साफ-साफ समझाइए।”

ये सुनते ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मेरा लंड अब तक पूरी तरह खड़ा हो चुका था और लुंगी से बाहर झाँकने लगा था। ये देखकर उसने पूछा, “अंकल, जब भी आप मेरे साथ अकेले होते हैं, आपकी लुंगी यहाँ से ऐसे क्यों हो जाती है?” वो मेरे लंड की तरफ इशारा कर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैंने उससे पूछा, “तुम्हें पता है ये क्या चीज है?” उसने नहीं कह दिया। मैंने कहा, “तो फिर आओ, आज मैं तुम्हें इसके दर्शन करवाऊँ।” और उसे अपने पास बिस्तर पर बैठा लिया और उसके हाथ अपने हाथों में लेकर अपने लंड पर रख दिया।

उसने हटके से अपना हाथ खींच लिया और बोली, “अंकल, ये क्या कर रहे हैं आप?” मैंने बोला, “घबराओ मत, वो काटेगा नहीं।” और फिर उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया। इस बार उसने हाथ नहीं हटाया, बल्कि अपनी पूरी मुट्ठी मेरे मजबूत लंड को पकड़ लिया और जैसे हर लड़की पहली बार लंड पकड़ने के बाद उसे दबाती है, गुड़िया ने भी ठीक वैसा ही किया। वो मेरा लंड अपनी मुट्ठी में लेकर दबाने लगी।

मैंने गुड़िया से पूछा, “गुड़िया, एक बात सच-सच बताना। उस दिन जब तुम बारिश में भीगकर स्कूल से आई थी हमारे घर, उस दिन तुमने मुझे और तुम्हारी आंटी को इसी बिस्तर पर कुछ करते हुए देखा था?” वो पहले थोड़ा शर्माई और अपनी गर्दन को हाँ में हिलाने के बाद मेरे लंड को देखने लगी, जो उसकी मुट्ठी में आने के बाद और टाइट हो गया था।

मैंने उससे कहा, “तुमने क्या देखा?” वो बोली, “मैंने देखा कि आप नंगे हो गए थे और आंटी ने भी नाइट्टी उतार दी और आप अपनी इस लंबी सी चीज को आंटी के दोनों टांगों के बीच में डाल रहे थे और आंटी के सीने को जोर-जोर से मसल रहे थे और उसे चूम भी रहे थे और आंटी को दर्द हो रहा था, तभी वो आहें भर रही थी।”

ये सुनकर मुझे हँसी आ गई और मैंने उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “बेटा, उसे दर्द नहीं हो रहा था, बल्कि उसे मजा आ रहा था। वो जोश में आकर आहें भर रही थी।” और जिसे तुम सीना बोल रही हो, उसे सीना नहीं, चुची बोलते हैं। देखो, तुम्हारी भी है। और ये कहकर मैंने उसकी एक चूची को अपने हाथों से छू लिया। वो मेरी इस हरकत पर कुछ नहीं बोली। फिर थोड़ी देर तक उसकी चूची सहलाता रहा।

फिर वो बोली, “अगर ऐसा करने से मजा आता है तो मुझे क्यों नहीं आ रहा? मुझे क्यों नहीं आती आहें?”

मैं बोला, “रुको, अभी मजा आएगा।” और उसकी फ्रॉक उतारने लगा।

वो बोली, “अंकल, ये आप क्या कर रहे हैं?” मैंने कहा, “अगर मजा चाहिए तो इसे उतारना तो पड़ेगा। और वैसे भी मैं ये काम पहले भी कर चुका हूँ जब तुम भीगकर आई थी। तो फिर अब क्या शर्माना?”

ये सुनकर वो चुपचाप फ्रॉक उतरवा ली। आज उसने समीज नहीं पहनी हुई थी। फ्रॉक उतारने के बाद अब वो मेरे सामने सिर्फ लाल रंग की चड्डी में थी। उसकी नंगी छाती को देखकर मेरा लंड अब और फिंकार मारने लगा, जो अब फिर से गुड़िया के मुट्ठी की गिरफ्त में आ गया था।

वो बड़ी बेशर्मी से फ्रॉक उतरवाने के बाद पास आई और मेरा लंड पकड़कर सहलाने लगी। मैंने उसकी चुचियों को सहलाने लगा एक-एक करके। फिर धीरे से उसकी एक चूची पर अपने होंठ रख दिए। वो काँप गई और इतने में ही उसके मुँह से आह निकल गई।

अब मैं उसके छोटे से गुलाबी निप्पल को अपने होंठों के बीच में लेकर चूस रहा था और वो मेरे लंड को पकड़कर सहला रही थी। अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने उससे कहा, “तुम्हें पता है मेरी इस चीज को क्या बोलते हैं?” उसने नहीं कहा, मैंने गर्दन हिला दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने कहा, “इसे लंड कहते हैं। क्या तुम इसे देखना चाहोगी?” उसने हाँ कहा और मैंने झट से अपने लंड को चड्डी की कैद से आजाद कर दिया और अपने लंड को सहलाते हुए बोला, “इसे लंड कहते हैं।” और उसके हाथों में अपना लंड दे दिया। मेरा लंड देखकर उसकी आँखों में एक चमक सी आ गई थी। अब वो मेरे लंड को ऊपर-नीचे करने लगी और मैं उसकी चुचियों को एक-एक करके चूस जा रहा था।

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अब मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया और उसके होंठों पर उँगलियाँ फिराने लगा। वो अब गरम हो चुकी थी। मैं उसके होंठों को चूमने लगा तो वो बोली, “अंकल, ये क्या कर रहे हैं आप?”

मैंने कहा, “तुमने उस दिन नहीं देखा था कि आंटी के साथ मैं जब ये कर रहा था तो आंटी को कितना मजा आ रहा था? अगर तुम्हें भी वैसा ही मजा चाहिए तो चुप रहो।”

और ये बोलकर उसके होंठों को अपने होंठों के बीच में लेकर चूसने लगा। मेरा एक हाथ अब उसकी गांड पर था, जो मैं जोर-जोर से मसल रहा था। उसकी गांड उसके जिस्म का सबसे सेक्सी पार्ट था। कोई भी जवाँ लंड उसकी नंगी गांड को देखकर खड़ा हो जाए। मैंने उससे कहा, “गुड़िया, तुम बहुत सेक्सी हो।” वो कुछ नहीं बोली और शर्मा गई।

आज तो मैं उसे पूरे जवानी के मजे देने वाला था और वो भी दिल खोलकर जवानी के मजे लेने के लिए तैयार हो रही थी कि तभी मैंने उसे अपनी गोद में और अच्छे से बैठाया। मेरे दोनों हाथ अब उसकी नंगी पीठ पर थे। मैंने धीरे-धीरे उसके होंठों को चूमना शुरू किया। पहले हल्के-हल्के, फिर धीरे-धीरे गहरे किस करने लगा। गुड़िया भी अब मेरे किस का जवाब देने लगी थी। उसके छोटे-छोटे होंठ मेरे होंठों के बीच दब रहे थे।

मैंने एक हाथ उसकी नंगी पीठ पर फिराते हुए दूसरा हाथ उसकी लाल चड्डी के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरी उँगलियाँ उसकी चूत की नरम फाँकों को छुईं, गुड़िया ने सिहरकर मेरी पीठ पर अपनी उँगलियाँ गड़ा दीं और मुँह से एक लंबी आह निकली — “आह्ह्ह्… अंकल…”

उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी मध्यमा उँगली धीरे से उसके चूत के ऊपरी हिस्से पर फिराई। गुड़िया काँप उठी और मेरे सीने से और चिपक गई। “गुड़िया… तुम्हें अच्छा लग रहा है ना?” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए पूछा।

वो शर्म से सिर झुकाए हुए बस हाँ में गर्दन हिला दी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। अब वो मेरे सामने पूरी तरह लेटी हुई थी — सिर्फ लाल चड्डी के अलावा कुछ नहीं। मैंने धीरे से उसकी चड्डी का नाड़ा खींचा और उसे उसकी जाँघों से नीचे सरकाया। गुड़िया ने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं।

उसकी चूत अब पूरी तरह नंगी थी। बहुत ही छोटी, गुलाबी और साफ। ऊपर हल्के-हल्के बाल उगने शुरू हुए थे। मैंने उसके दोनों पैर फैलाकर घुटनों के बल बैठ गया और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। “आह्ह्ह्… अंकल… क्या कर रहे हैं… उफ्फ्…” गुड़िया ने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया।

मैंने अपनी जीभ से उसके छोटे-छोटे क्लिटोरिस को चाटा और फिर पूरी चूत को चूसने लगा। गुड़िया की साँसें तेज़ हो गईं और वो बार-बार आहें भरने लगी। उसकी छोटी चूत से एक मीठा-मीठा रस निकल रहा था, जिसे मैं चाट-चाटकर पी रहा था।

कुछ देर बाद जब गुड़िया काफी गरम हो गई तो मैं उठा और अपनी लुंगी उतार दी। मेरा 6 इंच का मोटा लंड अब पूरी तरह खड़ा और तना हुआ था। गुड़िया ने उसे देखा तो उसकी आँखें फैल गईं। “अंकल… ये… बहुत बड़ा है…” वो डरते-डरते बोली।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “घबराओ मत गुड़िया… पहले बार थोड़ा दर्द होगा, फिर बहुत मजा आएगा।”

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और अपना लंड उसकी छोटी चूत के मुंह पर रख दिया। धीरे-धीरे दबाव डालने लगा। गुड़िया ने आँखें बंद कर लीं और अपने होंठ काट लिए। “आह्ह्ह्… अंकल… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…” वो कराह उठी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने एक झटके में अपना लंड का सिरा उसके अंदर डाल दिया। गुड़िया जोर से चीख पड़ी — “उई माँ… आह्ह्ह्!” उसके आँसू निकल आए। मैं रुक गया और उसके गालों को चूमने लगा। धीरे-धीरे मैंने अपना लंड आगे बढ़ाया। करीब आधा लंड अंदर जाने के बाद मैंने धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

गुड़िया दर्द और अजीब से सुख के मिश्रण में कराह रही थी — “आह्ह्… अंकल… धीरे… आह्ह्… उफ्फ्…” धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और गुड़िया की आहें अब मस्ती भरी होने लगीं। मैंने अपनी रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। अब कमरे में “पच… पच… पच…” की आवाज़ होने लगी थी। मैंने झुककर उसकी छोटी-छोटी चुचियों को चूसना शुरू कर दिया।

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गुड़िया अब अपने हाथों से मेरी पीठ को नोच रही थी और बार-बार मेरे नाम की आहें भर रही थी। करीब 8-10 मिनट तक उसे चोदने के बाद मैंने उसे कुत्तिया बनाया। अब मैं पीछे से उसकी भरी हुई गांड पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। गुड़िया की छोटी चूत मेरे मोटे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी। “आह्ह्ह्… अंकल… बहुत गहरा जा रहा है… आह्ह्… हाँ…” आखिरकार मैं भी अपने चरम पर पहुँच गया। मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में गाड़ दिया और जोर-जोर से झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य की धार गुड़िया की छोटी चूत में भर गई।

गुड़िया भी पहली बार झड़ चुकी थी। वो थककर बिस्तर पर लेट गई। उसके शरीर पर पसीना चमक रहा था और साँसें तेज़ चल रही थीं। मैं उसके पास लेट गया और उसे अपनी बाहों में ले लिया। गुड़िया ने शर्म से मेरी छाती में अपना चेहरा छुपा लिया। मैंने उसके बालों में हाथ फिराते हुए कहा, “गुड़िया… अब तुम मेरी हो… समझी?” वो बस शर्माते हुए हाँ में सिर हिला दी। उस दिन के बाद गुड़िया मेरी पूरी तरह से दीवानी हो गई। जब भी मौका मिलता, वो मेरे पास आ जाती और बिना शर्म के खुद को मेरे हवाले कर देती।

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