Kunwari Khala Chudai Kahani
ये कहानी आज से करीब ६ साल पहले की है। उस वक्त मेरी उम्र २४ साल थी और मैं अपने नाना के घर कराची गया हुआ था। वहाँ मेरे मामू भी नाना के साथ रहते थे। मेरे नाना के एक भाई मलिक थे जिनकी दो बेटियाँ और एक बेटा था। बड़ी बेटी का नाम सैमा और छोटी बेटी का नाम रैमा था और बेटे का नाम कामरान था। Kunwari Khala Chudai Kahani
रिश्ते में उनके अब्बू भी मेरे नाना लगते थे। मेरा उनके घर आना-जाना ज़्यादा था। यहाँ मैं बता दूँ कि मेरे मामू बस चलाते थे और बड़ी खाला की शादी हो गई थी, जबकि छोटी खाला घर में नानी के साथ रहती थी। छोटी खाला बड़ी मस्त माल थी। उसकी उम्र उस समय १९ साल थी लेकिन उसके ब्रेस्ट बहुत बड़े-बड़े थे। उसका जिस्म कमाल का था — ३९-३४-३७।
उस समय मेरा मन उसको चोदने का हो गया और मैं उसके लिए प्लान बनाने लगा। मैं उसके ज़्यादा क़रीब रहने लगा। मेरी नानी जो घर में कम ही रहती थीं, इसलिए मुझे खाला से बात करने का चांस ज़्यादा मिल जाता था। वो जो काम भी कहती, मैं फौरन कर देता।
एक दिन मैं उनके घर में सोने के लिए गया। उस वक्त रात के ९ बजे थे। उनके घर में चूँकि २ कमरे थे, इसलिए नाना और नानी एक कमरे में सो गए और मामू ने मुझे छत पर अपने साथ सोने के लिए कहा। लेकिन मैंने कहा कि मैं अभी नीचे रहूँगा क्योंकि मुझे टीवी देखना है।
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वो मुझे जल्दी आने को कहकर छत पर चले गए। अब मैं और खाला एक कमरे में थे। मैं टीवी देख रहा था जबकि खाला सोने के लिए अपनी चारपाई पर लेट गई। मेरा ध्यान टीवी की तरफ कम और उसके बड़े-बड़े मम्मों की तरफ ज़्यादा था, लेकिन उसको पता नहीं चला।
अचानक क्या हुआ कि लाइट चली गई और कमरे में अंधेरा हो गया। खाला को अंधेरे से बहुत डर लगता था। उसने अचानक कहा कि वो डर गई है और मेरी चारपाई पर आ गई और मेरे पास बैठ गई। ये बात मेरे गुमान में भी नहीं थी। लेकिन जब उसका जिस्म मेरे साथ टच हुआ तो मेरे जिस्म में करंट दौड़ गया और मैं भी उसके साथ टच होने की कोशिश करने लगा।
खाला को तसल्ली देने के लिए मैंने कहा, “क्यों खाला, क्या हुआ?”
तो वो कहने लगी, “अंधेरे में मुझे डर लगता है, प्लीज कोई कैंडल वगैरह जलाओ।”
मैं तो उसके और क़रीब होना चाहता था।
मैंने कहा, “खाला, इस वक्त कैंडल कहाँ मिलेगी? थोड़ी देर में लाइट आ जाएगी, तुम मेरे पास ही बैठी रहो, कुछ नहीं होगा।”
उसने कहा, “ठीक है,”
और मुझसे और चिमटकर बैठ गई। अंधेरे में कुछ नज़र नहीं आ रहा था और मैं उसके जिस्म को महसूस करना चाहता था। इसलिए मैंने इधर-उधर हाथ मारना शुरू किया तो मेरा एक हाथ उसके बड़े-बड़े मम्मों पर गया। वो फौरन कहने लगी, “क्या कर रहे हो? तुम्हें शर्म नहीं आती?”
तो मैंने अनजान बनकर कहा, “आंटी क्या हुआ?” वो कुछ नहीं बोली तो उठकर अपने बेड पर चली गई। तब तक लाइट आ गई। तो जब मैं दोबारा टीवी देखने लगा तो गुस्से से बोली, “इसको बंद करो और जा कर सो जाओ।” मैंने टीवी बंद किया और जाने लगा तो वो बोली, “कहाँ जा रहे हो? यहीं सो जाओ। अगर फिर लाइट चली गई तो मुझे डर लगेगा।”
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मैं दिल ही दिल में खुश हो गया और वहीं बेड पर लेट गया। लेकिन मैंने पक्का इरादा कर लिया कि खाला को ज़रूर चोदूँगा। खाला का जिस्म इतना सेक्सी था कि मुझे रात को नींद ही नहीं आ रही थी। मेरा लंड लोहे की तरह तना हुआ था। जब थोड़ी देर गुज़र गई और मैंने देखा कि खाला सो गई है तो मैं उठा और बाथरूम चला गया और ख्यालों में खाला के जिस्म को लेकर मुठ मारने लगा।
जब वापस आया तो क्या देखता हूँ कि खाला जाग रही है और मुझे देखते ही बोली, “कहाँ चले गए थे?” तो मैंने डरते हुए कहा कि बाथरूम में था। तो वो दोबारा सोने को कहकर मुस्कुराती हुई सो गई। लेकिन उस समय मुझे समझ नहीं आई कि वो क्यों मुस्कुराई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुबह जब मैं उठा तो वो पहले ही उठ चुकी थी। मैंने नाश्ता किया और घर से बाहर चला गया लेकिन मेरा दिमाग खाला की ही तरफ था। अचानक मुझे एक आइडिया आया और मैं वापस घर की तरफ चल पड़ा। मैंने घर में दाखिल होते ही नानी का पूछा जो उस समय घर में नहीं थीं और खाला घर का काम कर रही थी।
मैंने उसको कहा कि क्यों न आज समंदर देखने के लिए जाएँ। तो वो भी खुश हो गई और कहने लगी कि नानी से पूछ लो। जब नानी घर आईं तो मैंने नानी से कहा। उन्होंने थोड़ी देर के बाद जाने की इजाजत दे दी लेकिन जल्दी घर आने को कहा। मैं और खाला ४ बजे के करीब घर से निकले।
तो मैंने कहा कि टैक्सी कर लेते हैं लेकिन खाला कहने लगी कि बस में चलते हैं। मैं दिल ही दिल में खुश हो गया कि चलो इस बहाने खाला के क़रीब तो बैठूँगा। हम बस में एक सीट पर बैठ गए। बस लोगों से भरी हुई थी। खाला खिड़की की तरफ बैठ गई और मैं उसके साथ चिपककर बैठ गया।
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मैं इस तरह बैठा कि मेरी लेफ्ट आर्म खाला के बूब्स से टकरा रही थी। साथ ही टांगें भी मैंने खाला की टांगों के साथ ही जोड़कर रखी हुई थीं। यानी दोस्तों, मैं बस में जितना फायदा उठा सकता था, मैंने उठाया। जब हम समंदर पर पहुँचे तो हमने खूब सैर की। खाला पानी में जाने से डर रही थी।
लेकिन मैं उसे ज़बरदस्ती पानी में ले गया। अचानक पानी में खाला का पाँव फिसला और वो गिरने ही वाली थी कि मैंने उसे पकड़ लिया। इसकी वजह से मेरा हाथ उसके बूब्स पर पड़ा और मैंने खाला के बूब्स को थोड़ा प्रेस भी कर लिया। लेकिन खाला ने कुछ नहीं कहा।
मैंने खाला से कहा, “कहीं दोबारा न फिसल जाओ, लाओ मुझे अपना हाथ पकड़ा दो।”
तो उसने मुझे अपना हाथ दे दिया। क्या हाथ थे — सफेद, मुलायम और सेक्सी। मैंने उसके हाथ को दबाया तो उसने कुछ नहीं कहा। इतने में अंधेरा होने लगा तो खाला ने कहा कि अब वापस चलते हैं। मैंने वहाँ खाला को फिश लाज़मी खिलाई क्योंकि मुझे किसी ने बताया था कि ये गरम होती है।
जब हम घर पहुँचे तो बहुत थक गए थे इसलिए जल्दी सोने के लिए चले गए। लेकिन शायद किस्मत साथ दे रही थी कि दोबारा बिजली चली गई और मैं चूँकि खाला के कमरे में ही था, इसलिए खाला फिर मेरे पास बेड पर आ गई। मैंने फौरन खाला का हाथ पकड़ लिया। जब खाला ने मुझे कुछ नहीं कहा तो मैं शेर बन गया और खाला को थोड़ा अपनी तरफ खींचा जिससे वो मेरे क़रीब हो गई।
अब पोजीशन ये थी कि खाला का हाथ मेरे हाथ में और मेरी बाहें उसके बूब्स से टकरा रही थीं। थोड़ी देर हम इसी तरह बैठे रहे और मैं उसके हाथ दबाता रहा।
तब खाला ने कहा, “आज तुम टॉर्च तलाश नहीं कर रहे?”
तो मैंने कहा, “कल भी आप नाराज हो गई थीं।”
तो वो कहने लगी, “नहीं, मैं नाराज नहीं होती, तुम तलाश करो, अंधेरा बहुत है।”
मैं खुश हो गया और वैसा ही हाथ चलाने लगा कि मेरा हाथ उसकी फुद्दी के ऊपर पहुँच गया।
तब मैंने कहा, “टॉर्च नहीं मिल रही।”
तो उसके मुँह से एक “आह” निकली और कहने लगी, “फिर तलाश करो, मिल जाएगी, यहीं होगी।”
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इसका मतलब था कि वो भी यही चाहती थी। मैंने एक हाथ उसकी फुद्दी के ऊपर रखकर थोड़ा ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया। तो वो मेरे और क़रीब हो गई। तो मैंने उसको कहा, “खाला तुम भी तो तलाश करो।” तो वो भी हाथ मारने लगी। उसका जो हाथ मेरे हाथ में था, वो उसने छुड़ा कर जब अंधेरे में मारे तो मेरे लंड के पास आकर रुक गया और उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया।
फिर तो क्या था, सारी झिझक खत्म हो गई क्योंकि उसका हाथ मेरे लंड पर और मेरा उसकी फुद्दी पर था। इतने में लाइट आ गई तो वो फौरन अपने बेड पर चली गई। लेकिन अब मैं कहाँ रहने वाला था। मैंने फौरन लाइट ऑफ कर दी और उसके बेड पर चला गया।
वहाँ जाते ही मैंने उसके बूब्स दबाना शुरू कर दिए और उसके होंठों पर किस कर दी। जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि लोहा गरम है। मैंने अपना एक हाथ उसकी टांगों के दरमियान ले गया और उसकी फुद्दी को रगड़ने लगा। उसका हाथ मेरे लंड पर था और मैं उसे किस पर किस कर रहा था।
इसके बाद मैंने उसकी कमीज़ के बटन खोले और उसकी छातियों को बाहर निकालकर चूसने लगा। अब वो भी रेस्पॉन्स देने लगी थी और मेरी सलवार के अंदर हाथ डालकर मेरे लंड को मसल रही थी। मैंने खाला की कमीज़ पूरी तरह उतार दी। अब वो सिर्फ सलवार में थी। मैं उसके बड़े-बड़े बूब्स को दोनों हाथों से मसलता हुआ चूसने लगा। खाला की साँसें तेज हो गई थीं और वो बार-बार “आह्ह… उफ्फ…” कर रही थी।
मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींचा और उसे भी उतार दिया। अब खाला पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी फुद्दी पर हल्की-हल्की झाँटें थीं और वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी सलवार भी उतार दी। मेरा ८ इंच का तना हुआ लंड बाहर आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
खाला ने उसे देखा तो उसके मुँह से निकला, “बाप रे… इतना बड़ा…”
मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को चूसते हुए बोला, “खाला, आज मैं तुम्हें पूरी तरह चोदने वाला हूँ।” खाला ने शर्माते हुए आँखें बंद कर लीं और अपने दोनों पैर फैला दिए। मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी के छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाया। खाला के मुँह से “आह्हh… धीरे…” निकला। मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया और आधा लंड अंदर चला गया। खाला ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए।
“आह्ह… भैया… फट गई…”
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मैं रुका नहीं। दो-तीन और झटकों में पूरा लंड उसकी टाइट, गीली और गरम फुद्दी में घुस गया। फिर मैंने तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया। खाला भी अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी। वो अपने चूतड़ ऊपर-नीचे करके मेरे साथ साथ देने लगी और बोलने लगी, “ज़ोर से… और ज़ोर से चोदो… आह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… उफ्फ… कितने दिन से तरस रही थी…” मैंने खाला को कई पोजीशन में चोदा — पहले मिशनरी में, फिर डॉगी स्टाइल में, और आखिर में वो मेरे ऊपर सवार होकर उछल-उछलकर चुदवाने लगी। उसके बड़े बूब्स उछल रहे थे।
करीब ४० मिनट की जोरदार चुदाई के बाद खाला ज़ोर-ज़ोर से काँपने लगी और चीखकर बोली, “मैं गई… आह्ह… निकल रहा है…” और वो झड़ गई। उसके कुछ ही देर बाद मैं भी उसके अंदर अपना पूरा गर्म वीर्य छोड़ दिया। हम दोनों पसीने से तर-बतर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। खाला ने मेरे गाल चूमते हुए कहा, “तुमने आज मुझे औरत बना दिया।” उस रात हमने दो बार और चुदाई की। उसके बाद जब तक मैं कराची में रहा, लगभग हर रात खाला मेरी चूत चुदवाती रही। ये हमारी पहली और यादगार चुदाई की कहानी थी।
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