Hot Didi Anal Sex
दोस्तों आप सभी का फिर से स्वागत है मेरी कहानी में. दोस्तों आपने मेरी पहली कहानी दीदी को भी मजा आया मुझसे चुदवाने में पढ़ी होगी जिसमे मैंने बताया था कि मैं अपने चचेरी दीदी के ससुराल गया था. जहां केवल दीदी और उनके ससुर रहते थे जीजा दुबई में रहते है. और कैसे मैंने एक रात दीदी की प्यासी चूत को चोद दिया था. और कुछ दिन वह रहने के बाद मैं वापस अपने घर आ गया. अब आगे- Hot Didi Anal Sex
धीरे धीरे जनवरी का महीना आ गया। एक दिन दीक्षा दीदी का कॉल आया.
वे मेरी मम्मी से बोली- आंटी जी! हमारे यहां सबके खेत में पानी चल चुका है, सिर्फ मेरे खेत को छोड़ के। क्योंकि हमाँरा खेत गांव से दूर जंगल के पास है. और ट्यूबवेल से पानी भी रात को मिल रहा है। अगर आप भेज देती तो अच्छा होता!
मेरी मम्मी ने कहा- ठीक है!
अगली सुबह मैं दीक्षा दीदी के घर चला गया। इतने दिन बाद जब मैंने दीक्षा दीदी को देखा तो दंग रह गया। मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। वे पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो चुकी थी। उनके बड़े बड़े चूचे बिल्कुल टाइट थे, जैसे कोई कुंवारी लड़की हो।
उन्हें देख कर कोई यह नहीं कह सकता कि उनकी एक बच्ची भी है। उनकी गांड के बारे में तो पूछो ही मत, बस इतना समझ लो कोई भी एक बार देख ले तो बिना मुठ मारे रह ही न पाए। जब वे अंदर से मेरे लिए चाय ले कर आई तो, उन्हें देख कर मेरा लंड उफान मारने लगा।
मन में यह ख्याल चलने लगा कि आज मिल जाए तो मैं इनकी गांड जरूर मारूंगा। सबकी नजर से छुपा कर मैं अपने लंड को दबा कर बैठ गया। जब उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मैं अपने लंड के तरफ देख कर मुस्कुरा दिया। इस पर उन्होंने कोई रिएक्ट नहीं किया, उल्टा उन्होंने मुझे गुस्से भरी निगाह से देखा और हुए अंदर चली गई।
मुझे उनका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा। मुझे लगने लगा कि शायद अब उन्हें मुझमें कोई रूचि नहीं है या उन्हें कोई और मिल गया होगा। मैं पूरे दिन कोशिश करता रहा लेकिन उन्होंने कोई भाव नहीं दिया। उनके भाव न देने की वजह से मुझ बहुत गुस्सा आया।
अब मुझे यकीन हो गया था कि अब हम दोनों के बीच कुछ नहीं हो सकता। मैंने भी गुस्से में सोच लिया कि अब ये खुद भी मेरे पास आना चाहें तो मैं इन्हें दूर कर दूंगा। शाम हो गई थी। दीक्षा दीदी ने सबको खाना दिया। सब लोग खाना खा रहे थे।
इसे भी पढ़े – पड़ोसन की चूत में ऊँगली डाल कर देखा
तभी उनके ससुर दीक्षा दीदी से बोले- बहू, तुम भी खेत में आकाश के साथ चले जाना।
दीक्षा दीदी ने हा में सर हिला दिया।
खाना खाने के बाद दीक्षा दीदी ने कहा- रात के आठ बजने वाले है, और ठंड भी ज्यादा है। एक काम करो तुम जल्दी से गर्म कपड़े पहन लो, फिर है हम लोग चलते हैं।
मैंने जल्दी से तैयार होकर अपनी बाइक निकालते हुए दीक्षा दीदी को आवाज दी- दीदी, जल्दी चलो।
वे घर से बाहर आई. उस समय उन्होंने पीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी। वे अपने बालों को संवारती हुई जैसे ही बाहर निकली, मैं उन्हें देखता ही रह गया। मेरे मन में एक बार फिर उन्हें चोद देने की इच्छा जागने लगी। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
लेकिन इस बार मैं खुद को समझाया कि अब हम दोनों के बीच कुछ नहीं हो सकता। वे आकर मेरी बाइक पर मुझसे दूर होकर बैठते हुए बोली- चलो! उस समय वे ऐसे तैयार हुई थी जैसे कोई लड़की शादी में जा रही हो। बाइक चलाते वक्त कई बार मेरे मन में ख्याल आया कि यहीं बाइक रोक के पटक कर उन्हें जी भर के चोदूं; उनको चोद चोद कर उनकी चूत का भोसड़ा बना दूँ, अपने लंड से उनकी गाड़ फाड़ दूँ।
यही सब सोचते हुए हम लोग खेत में पहुंच गए। खेत एक किनारे एक पीपल का बड़ा पेड़ था। पेड़ के नीचे एक छोटी से झोपड़ी बनी हुई थी, खेत की रखवाली के लिए। मैंने वहीं अपनी बाइक रोक कर खड़ी कर दी। मैंने नौ बजे तक ट्यूबैल से पानी खेत में खोल दिया। हम दोनों साथ में खेत की चारों तरफ घूमने लगे। चांदनी रात थी, दस बजने वाले थे। दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। अब मुझे उनसे कोई उम्मीद भी नहीं थी।
खेत घूमते घूमते मैंने दीक्षा दीदी से पूछा- कितने घंटों में पानी चल जायेगा?
दीक्षा दीदी ने कहा- पांच से छः घण्टे लगेंगे।
फिर उन्होंने कहा- चलो पेड़ के नीचे थोड़ी देर आराम कर लेते है। ठंड भी है।
मुझे भी ठंड लग रही थी लेकिन उन पर गुस्सा भी आ रहा था।
मैंने उनसे बोला- दीदी आप चलो, मैं अभी आया। तब तक आप वहां आग जलाने की व्यवस्था करो।
“ठीक है!” कह कर वे अपनी गांड मटकाती हुई चली गई।
उनकी गांड देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैं अपने लंड को हाथ से दबा कर उन्हें मन ही मन गाली देने लगा- साली रण्डी! एक बार चोदवा लेती तो सारी ठंड दूर हो जाती। दीक्षा दीदी के जाने के बाद मैं अपना लंड निकाल कर मूतने लगा। मूतने के बाद मेरा लंड थोड़ा शांत हुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके बाद मैं मन ही मन उन्हें गाली देते हुए पीपल के पेड़ के पास चला गया। वहाँ जाकर देखा कि दीदी ने अभी तक आग जलाई नहीं है, बस पेड़ के पास बिना शाल के खड़ी होकर चुपचाप खेत देख रही हैं। यह देख कर मुझे बहुत गुस्सा आया ‘ एक तो साली रण्डी अपनी चूत नहीं दे रही है, और ऊपर से अभी तक आग भी नहीं जलाई है.’
मैं अपने गुस्से को काबू में करते हुए बोला- दीदी आपने अभी तक आग क्यूं नहीं जलाया है? मुझे ठंड लग रही है।
वे मेरे पास आकर अपनी साड़ी खोलते हुए बोलने लगी- आग तो सुबह से लगी है, बस तुम्हें बुझानी है।
इसे भी पढ़े – औरत की मजबूरी एक दर्दभरी सेक्सी कहानी
इतना कह कर वे मुझ पर टूट पड़ी, मुझसे चिपक कर बेतहाशा मेरे ओठों को चूसने लगी। उनके इस तरफ मुझसे चिपक कर किस करने से मैं सारा गुस्सा भूल गया। मां चुदाने जाए गुस्सा… आज इस बहन की लोड़ी को पेल पेल कर इसकी चूत फाड़ दूंगा।
मैं सेक्स के लिए एकदम तैयार था. तभी दीक्षा दीदी ने मेरे दोनों हाथ पकड़ते हुए अपनी मोटी गांड पर रख दिये। उनकी गांड बिल्कुल मक्खन की तरह मुलायम थी। वे पेटीकोट और ब्लाउज में मुझसे चिपकी हुई थी। मैं अपने दोनों हाथों से उनकी गांड को बड़ी बेरहमी दबाए जा रहा था।
किस करते करते हम दोनों पेड़ में जाकर चिपक गए। करीब दस मिनट तक हम दोनों किस करते रहे। फिर वे मेरे होंटों से अपना होंट हटाकर मेरी गर्दन पर किस करने लगी। मैं बीच बीच में अपने दोनों हाथों से उनके गांड को फैला देता जिससे वे और भी कामुक हो कर सिसकारियां निकालने लगती।
मैंने उन्हें किस करते हुए पूछा- दीदी, जब आपको चुदवाना ही था तो सुबह से इतने नखरे क्यूं दिखा रही थी?
वे कामुक आवाज में बोली- एक तो तू मुझे चोद भी रहा… और ऊपर से दीदी भी बोल रहा। बहनचोद रण्डी बोल!
उनके चूचों को दबाते हुए बोला- रण्डी बोलने की जरूरत ही क्या है? तुम तो हो ही रण्डी!
मेरा लंड लोअर में तनकर उनकी चूत की दरार में रगड़ रहा था जिसकी वजह से वे और भी कामुक हुई जा रही थी। दीदी अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए, मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़ रही थी।
धीरे धीरे वे मेरा जैकेट उतारती हुई बोली- साले अगर मैं नखरे नहीं दिखाती, तो तू मुझे घर में चोद देता और मैं चुदवा भी लेती। जब से तू आया है, तभी से मेरी चूत में तुझसे चुदवाने की खुजली मची हुई है। मैं घर में तुझसे चुदवा के सारा मजा नहीं खराब करना चाहती थी।
बोलते बोलते वे नीचे बैठ कर मेरे लोअर से मेरा लंड निकाल कर अपने हाथ में लेते हुए बोली- साले, यह तो पहले से भी बड़ा और मोटा हो गया है। सच सच बता, मेरी चूत को याद करके कितनी बार मुठ मारता था?
मैं अपना लंड उनके होठों पर रगड़ते हुए बोला- जितनी बार आपने मुझे याद करते अपनी चूत में उंगली की होगी।
दीक्षा दीदी ने बड़े प्यार से लंड को देखा और कहने लगी- कब से इसके लिए तरस रही थी. आज इससे अपनी प्यास बुझाऊंगी।
मेरा लंड अपने होंठों पर रगड़ती हुई दीक्षा दीदी बोली- एक बार भी मैंने तुम्हें याद करके अपनी चूत में उंगली नहीं की क्योंकि मुझे अपनी चूत में तुम्हारा लंड लेना था, अपनी उंगली नहीं!
फिर वे मेरे लौड़े को अपने होंठों पर रख कर मुंह के अंदर लेने लगी।
उसकी जीभ मेरे टोपे पर टच होते ही मैंने कहा- यस बेबी… आह्ह… पूरा चूस… चूस जाओ दीदी।
इसे भी पढ़े – बहन को होटल में पेल कर बर्थडे मनाया
उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और कुल्फी की तरफ चूसने लगीं. मैं अपनी बहन से अपना लंड चुसवा कर मस्ती से आवाजें निकालने लगा. साथ ही मैं दीदी के चूचों को भी मसलता जा रहा था. लंड चुसवाते समय मेरे मुँह से मादक आवाजें निकल रही थीं- आह… हहहह… इस्स… दी चूस साली रण्डी बड़ा मजा आ रहा है.
उनके मुंह में इस तरह से लंड पेलने से गू… गू… सर्र… सर्र…की आवाज आ रही थी। जिससे मैं और उत्तेजित होकर और जोर से पेल रहा था। उनकी आँखों से आंसू निकल रहे थे। करीब पांच मिनट बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुंह से निकाला। रात में चांदनी होने की वजह से हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से देख पा रहे थे।
दीक्षा दीदी ने मेरा गीला लण्ड हाथ में पकड़ा और गुलाबी टोपे को जीभ लगाने लगी. आह्ह… मैं तो सिसकार उठा. वो साली मुझे पागल कर रही थी, वो अपनी जीभ मेरे टोपे पर गोल गोल घुमा रही थी। मेरा लंड उनकी लार से भीग चुका था। दीदी ने मेरे लंड को फिर से अपने मुंह में ले लिया और अपने हाथ से मुठ मारने लगी।
कुछ समय ऐसे ही मुठ मारने के बाद वे खड़ी होकर मुझे किस करने लगी। उनका एक हाथ मेरे लंड पर था और एक हाथ से मेरे सर को पकड़ कर मेरे होठों को चूम रही थी। धीरे धीरे दीक्षा दीदी को किस करते हुए मैंने उनके पेटीकोट को ऊपर कर दिया जिससे मेरा लंड पैंटी के ऊपर से ही उनके चूत की दरार में अच्छे से रगड़ पा रहा था।
अपने एक हाथ से मैं उनके एक पैर को अपने कमर तक उठाए हुए था और एक हाथ से उनके गांड को दबाए जा रहा था। वे पूरे जोश में अपना जीभ मेरे मुंह के अंदर डालकर किस कर रही थी। उनका गोरा बदन मुझे पागल किए जा रहा था। कुछ समय बाद दीक्षा दीदी ने मुझे पकड़ कर नीचे बैठा दिया और वे खुद खड़ी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं नीचे बैठ कर उनके पैरों को चूमते हुए उनके पेटीकोट के अंदर घुस गया। दीदी ने अपने हाथों से अपने पेटिकोट को ऊपर कर लिया। मैंने बिना समय गंवाए पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हमला कर दिया। अपनी जीभ से चाट चाट कर उनकी पेंटी को मैंने पूरा गीला कर दिया।
दीक्षा दीदी अपने दांतों से अपने होटों को काट रही थी। वे अपने एक हाथ से अपने चूचों को ब्लाउज के ऊपर से दबा रही थी, अपने दूसरे हाथ से मेरा सर पकड़ कर कस के दबाया हुआ था। मैंने अपना दोनों हाथ उनके पेटीकोट में घुसा कर गांड को दबाते हुए, उनकी पैंटी को अपने दांतों से खींचते हुए उनके घुटने तक नीचे सरका दिया।
पेंटी नाचे सरकाने के बाद मैं उनके चूत को बड़े ध्यान से देखने लगा. चांदनी रात में उनकी गीली चूत मोती की तरह चमक रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस चूत को मैंने पहले चोदा है, क्या वे यही चूत थी? या कोई दूसरी चूत है। इस बार उनकी चूत में कुछ अलग बात तो थी जो आज रात मुझे पहले से भी ज्यादा मजा देने वाली थी।
इसे भी पढ़े – भाभी को नहाते हुए देखा दरवाजे के छेद से
उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था जिसे देख कर मुझे रहा नहीं जा रहा था। मैं बिना देरी किए मैं उनकी चूत चाटने के लिए आगे बढ़ा. दीदी की की चूत की वो खुशबू… आह्ह… क्या कहूं दोस्तो! अपनी जीभ मैं चूत के पास ले गया और चूत को चूमते हुए चूत के होंठों को दांतों से दबाया.
दीक्षा दीदी कसमसा उठी. मैंने उनकी पूरी चूत पर जीभ फेरी। उनकी पूरी चूत थूक और चूत के पानी से सन गयी. मैंने जीभ अंदर डाल दी और ऊपर नीचे करके चाटने लगा। दीक्षा दीदी मस्त होकर सिसकारने लगी- इस्स… उम्म… आह्ह… बहन चोद… खा लो पूरी चूत!
मैं उनकी चूत को बड़े बेरहमी से चाटने लगा। मैंने अपनी जीभ उनकी चूत की दरार के अंदर घुसा दी। दीक्षा दीदी काफी उत्तेजित होकर मुझे गन्दी गन्दी गालियां देने लगी- बहनचोद… साले, फाड़ दे मेरी चूत को! मुझे अपनी रण्डी बना दे… रोज चोद चोद के मेरे चूत का भोसड़ा बना देना।
वे इतनी जोर से मुझे गाली दे रही थी कि खेतों के चारो तरफ सिर्फ उनकी ही आवाज गूंज रही थी। मैं उनकी बातें सुन कर गुस्से में और जोर जोर से उनकी चूत को चाटता जा रहा था। कभी कभी मैं उनकी चूत पर अपना दांत भी गड़ा देता जिससे वे चिहुंक जाती और अपनी गांड थोड़ी पीछे कर लेती।
कुछ समय तक मैं ऐसे ही उनकी चूत को अपनी जीभ से चोदता रहा। दीक्षा दीदी ने उत्तेजना से पागल होकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। मैं अभी और उनकी चूत को चाटना चाहता था। लेकिन अब वे अपनी चूत में लंड लेने के लिए बेताब हो गई थी।
वे मुझे ऊपर खींच कर अपने होठों को मेरे होठों पर किस करते हुए बोली- बहन चोद! यहीं खड़े खड़े सिर्फ मेरी चूत को चाटेगा या इसमें अपने लंड को डालकर चोदेगा भी?
उनका एक हाथ मेरे लंड पर था, और मेरा एक हाथ उनके चूत से खेल रहा था।
मैं उनको अपने होठों से दूर करते हुए, उनकी आँखों के आंखें डालकर बोला- दीक्षा दीदी! आप सच में रण्डी हो गई हो। मेरा इरादा तो यही है कि आपको यहीं खड़े खड़े चोद दूं, लेकिन अभी नहीं! झोपड़ी में चल कर अच्छे से चोदूंगा। उसके बाद फिर यह लाकर खड़े खड़े आप को चूत का भोसड़ा बना दूंगा।
दीक्षा दीदी हवस भरी नज़रों से देखते हुए बोलती- ठीक है! अब अपनी इस रण्डी बहन को अब मत तड़पाओ जान… अब जल्दी से चलो झोपड़ी में और मुझे अच्छे से चोदो!
मैंने बोला- चल साली रण्डी, आज तेरी चूत की गर्मी शांत करूं!
इसे भी पढ़े – दीदी ने अपना कामुक रूप दिखाया भाई को
दीक्षा दीदी ने अपनी पैंटी ऊपर करते हुए अपनी शाल उठाई और साड़ी को वहीं छोड़ दिया। फिर मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर झोपड़ी में लेकर चली गई। जैसे ही दीदी शाल बिछाने लिए झुकी, उनका पेटीकोट उनकी गांड में घुस गया। जिसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने पेटीकोट के ऊपर से ही उनके गांड की दरार के बीच में उंगली फंसाते हुए उनकी गांड के छेद में अपनी उंगली घुसा दी।
दीक्षा दीदी चिहुंकती हुई गुस्से में बोली- बहनचोद! मेरी चूत की गर्मी शांत करनी है, मेरी गांड की नहीं!
फिर वे जल्दी से नीचे सीधी हो कर लेट गई। मैं अपने खड़े लंड को हाथ में लिए खड़ा था और उन्हें बड़े गौर से निहार रहा था। मुझे खड़ा देख कर दीक्षा दीदी ने अपने पैर से मेरा लंड पकड़ कर नीचे बैठने का इशारा किया। नीचे बैठते ही मैंने अपने हाथों से उनका पेटीकोट ऊपर कर दिया, फिर उनकी गांड दबाते हुए उनकी पैंटी को नीचे सरकाने लगा।
वे अपनी गांड ऊपर करके अपनी पैंटी निकलवाने में मेरी मदद करने लगी। मैंने कुछ ही पल में उनकी पैंटी निकाल दी, उन्होंने अपनी पेंटी अपने हाथ में ले ली। एक बार फिर मेरे सामने उनकी नंगी चूत थी। उनकी चूत देख कर ऐसा लग रहा था जैसे छेने की मिठाई से रस निकल रहा हो।
मुझे रहा नहीं गया, मैं झुक कर उनकी चूत को फिर से चाटने लगा। पहले तो वे अपनी गांड उठा कर चूत चटवाने का मजा लेने लगी, फिर कुछ ही पल में मुझे ऊपर खींचते हुए बोली- बाद में मेरी चूत को खा लेना, अभी इसमें अपना लंड डाल दो।
मैं अपने लोअर को नीचे करके अपने लंड को हाथ में लेकर उनकी चूत पर रगड़ते हुए छेद में घुसाने लगा। मेरा लंड जैसे ही उनकी चूत में थोड़ा सा घुसा, वे दर्द से तिलमिलाने लगी और मेरा लंड अपने चूत से निकाल कर अपने हाथ में ले लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मेरे लंड के चमड़े को ऊपर करके गुलाबी टोपे को अपनी चूत की दरार में रगड़ती हुई बोली- यार भाई! तेरा लंड इतना बड़ा और मोटा हो गया है कि मेरी गांड फट रही है इसे अपनी चूत में लेने में!
मैं उन्हें किस करते हुए बोला- तो क्या नहीं चुदवाओगी?
मेरे लंड को अपने चूत के छेद पर रखते हुए बोली- इसके लिए तो इतने दिन से तड़प रही हूँ, आज मौका मिला है तो अच्छे से चुदवाऊंगी। चाहे मेरी गांड की क्यों न फट जाए।
फिर वे लंड को अपने हाथ से अपनी चूत में घुसाते हुए बोली- धीरे धीरे डालो।
मैं धीरे धीरे उनको ऊपर से चोदने लगा। मेरे लंड का सिर्फ टोपा अंदर जाते ही वे बाहर निकाल देती। इससे मुझे बहुत गुस्सा आने लगा। फिर मुझे एक आइडिया आया। मैं उनकी चूत में अपने लंड का टोपा घुसाकर रुक गया और उन्हें किस करते हुए उनकी दोनों हाथों को ऊपर करके अच्छे से पकड़ लिया।
इसे भी पढ़े – सौतेले बेटे को जवानी में बहकने से बचाया
फिर धीरे धीरे उनकी चूत में सिर्फ टोपे को अंदर बाहर करने लगा। जब उन्हें लगा कि मैं इससे अंदर नहीं डालूंगा तो वे मेरे होंठों को किस करती हुई अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी। मैं इसी मौके की तलाश में था, मैंने अपने लंड को थोड़ा ऊपर करके, अपनी पूरी ताकत के साथ एक झटका दिया।
मेरा लंड उनके चूत को चीरते हुए पूरा अंदर चला गया। दीदी दर्द से तिलमिला उठी और मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी। मैंने इस तरह उनको पकड़ा का था कि वे हिल भी नहीं पा रही थी। मैं अपने होंठों से उनके होंठों को दाबे हुए था, वे दर्द से चिल्ला भी नहीं पा रही थी।
बस उनकी आँखों से आसूं गिर रहे थे। मैं उनके दर्द का परवाह ना करते हुए अपने घुटनों को जमीन में दबा कर उनकी कमर को जमीन से चार इंच ऊपर उठा उठा के जमीन पर पटक कर बड़े बेरहमी से चोदने लगा। वे मेरी कमर को अपने पैरों से जकड़ी हुई थी।
जमीन पर पटकने के वजह से उनकी गांड पर चोट भी लग रही थी। दीदी ऊं… उम्म… ऊं… करके आवाजें निकाल रही थी। कुछ समय ऐसे ही चोदने के बाद जब उनका थोड़ा दर्द कम हुआ और उन्हें लगा कि अब मैं नहीं छोड़ने वाला तो वे अपने पैरों से मुझे आजाद करते हुए अपने पैरों को फैला कर चुदाई का मजा लेने लगी।
मैंने भी उन्हें ढील देते हुए उनके होंठों को आजाद किया। होंठ आजाद होते ही दीक्षा दीदी कराहते हुए मुझे गाली देने लगी- उईई… स… साले… बहन चोद… इतनी बेरहमी से मत चोद… कि मैं एक दो दिन चल ही न पाऊं. उफ्फ तेरा लंड… उई मां… ऐसा लग रहा मेरी चूत में एक साथ दो तीन लंड घुस गए है। आ… ह… आ… आ…ह… ईस… धीरे चोद!
मैं उनकी बातों को नजर अंदाज करते हुए घपाघप पेले जा रहा था। वे अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी- और जोर जोर… अह आहा! मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई तो उसने भी अपनी कराहें बढ़ा दीं- अहह… आहा… उई.. मां… मेरी चूत! झोपड़ी में फच… पच… की आवाज़ होने लगी थी.
दीक्षा दीदी की आवाज़ें और तेज होने लगीं और वे जोर जोर से ‘आह… आह…’ करने लगी. उनकी सांसें फूलने लगी थीं; उनका गोरा चेहरा लाल हो रहा था. हम दोनों अपनी पूरी उत्तेजना में लगे हुए थे. वे पहली बार मुझसे पहले झड़ गयी. मगर मैं रुका नहीं, मैं जोर जोर से उसे पेले जा रहा था।
थोड़ी देर बाद वे मुझे रोक कर कराहती हुए बोली- अब तुम नीचे लेटो और मैं चढ़ती हूं।
मैंने उनकी बात मान कर अपने लौड़े को उनकी चूत से बाहर निकाल लिया. तब जा कर उनकी जान में जान आई. मैं नीचे लेट गया और वे अपनी पेटीकोट को ऊपर करते हुए मेरे लंड पर बैठने लगी. मेरा लंड जैसे ही उनकी चूत में घुसा, वे ‘ऊईई ईई ईईई सीईई ईई’ करके चिल्ला उठी।
मैंने उनकी क़मर पकड़कर बिठा दिय और मेरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया। मैं नीचे से झटके लगाने लगा, उनकी चूचियां उनके हाथ में थी जिन्हें वे बेरहमी से दबा रही थी. तभी दीदी ने अपना ब्लाउज खोल कर एक किनारे फेंक दिया और मेरा शर्ट भी निकाल दिया।
वे पेटीकोट और ब्रा में मेरे लंड के ऊपर बैठी थी और मेरा सिर्फ लोअर घुटने तक बचा था, बाकी सब निकल चुका था। धीरे धीरे उन्हें मजा आने लगा और वे मेरे लंड पर उछल उछल कर गांड पटकने लगी. अब दोनों तरफ से बराबर धक्के लगने शुरु हो गए और थप थप थप की आवाज झोंपड़ी में भरने लगी।
दीक्षा दीदी शादीशुदा औरत थी, पहले भी खूब चुदवाती रही हैं लेकिन मेरे लंड ने उनकी हालत बिगाड़ दी। अब हम दोनों एक-दूसरे को चोद रहे थे, कभी लंड तो कभी चूत! एकदम से उन्होंने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और मेरे ऊपर उछलने लगी जैसे फुटबॉल! एक बार फिर उनकी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया लेकिन मेरा लंड तो झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
इसे भी पढ़े – बीवी की चूत छोटी थी तो सास को चोदा
फिर वे निढाल होकर बोली- अब मेरी हिम्मत खत्म हो गई है। मेरी चूत में काफी जलन भी हो रही है, अब मैं तुम्हारा लंड एक पल भी नहीं ले पाऊंगी। मेरे पति तो बस मेरे ऊपर चढ़कर मुझे थोड़ी देर चोदते और थककर सो जाते थे लेकिन तुम्हारा फौलादी लंड ने आज मेरी चूत का भरता बना दिया।
इतना कह कर वे मेरे लंड पर से घुटने के बल उठ गई।
मैं भी घुटने के बल उठाते हुए, उनकी चूत के दरार की बीच अपने लौड़े को रगड़ते हुए बोला- लेकिन मेरे लंड का क्या?
फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा- ठीक है! मैं इसका कुछ करती हूं, पहले तुम खड़े हो जाओ।
अब मैंने अपना लोअर और अंडरवियर पूरा निकाल कर फेंक दिया और उनके सामने पूरा नंगा खड़ा हो गया। मेरा लंड उनके चेहरे में लग रहा था। उन्होंने अपनी ब्रा का हुक खोल कर अपने बड़े बड़े चूचों को आजाद कर दिया और मेरे लंड को अपने दोनों चूचों के बीच डालकर ऊपर नीचे करने लगी।
मुझे भी मजा आने लगा और मैं जोर जोर से उनकी चूचियों को पेले जा रहा था। वे बीच बीच में मेरे लंड को अपने मुंह में लेती। करीब पांच मिनट बाद उनके घुटनों में दर्द होने लगा। वे मुझे नीचे लेटने का इशारा करने लगी। मैं नीचे लेट गया। मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
वे खड़ी होती हुई अपना पेटीकोट निकाल कर पूरी नंगी हो गई। हम दोनों 69 ने पोजीशन में एक दूसरे का चाटने लगे। वे बहुत तेजी से मेरे लंड को चूसे जा रही थी, मैं भी उनकी चूत को मजे के साथ चाट रहा था। चारों तरफ पुच… पुच… सरप… सरप की आवाजें आ रही थी। 10 मिनट में उनका शरीर ऐंठने लगा और उनकी चूत से पानी निकल गया। मैं उनका नमकीन पानी पूरा पी गया।
वे मेरे शरीर से उतर कर घुटने के बल भी बैठी हुई बोली- साले, यह तेरा लंड है या लोहे का रॉड जो थक ही नहीं रहा। अब मुझसे कुछ नहीं होगा, प्लीज अब रहने दो।
मैं भी घुटने के बल बैठ के उनके बालों को पकड़ते हुए बोला- साली! छिनाल इतनी ही तेरी चूत में चुदास थी, सारी गर्मी निकल गई?
वे मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर अपनी चूत की दरार में रगड़ती हुई बोली- अब तुम ही बताओ, इसे शांत करने के लिए मैं क्या करूं? तुम जो बोलोगे, मैं वही करूंगी।
अब उनके ऊपर आ गया और चूत में लंड घुसा कर गपागप गपागप तेज़ी से चोदने लगा। मेरा लंड अब राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन की रफ्तार से मेरी चूत में दौड़ रहा था। वे चिल्लाती रही लेकिन मेरे कानों पर उनकी आवाज़ नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे मैं आज उनकी चूत फाड़कर ही दम लूंगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उनकी चूचियां को तेज़ तेज़ दबाना शुरू कर दिया. मेरे हर झटके से उनकी जान निकल रही थी। वे ‘ऊई ऊइई ऊईई ईई आहह हहह आह हहह… छोड़ो मुझे छोड़ो…’ चिल्लाती रही लेकिन मैं उन्हें पागलों की तरह चोदता रहा। कुछ ही समय में मुझे लगा अब मैं झड़ने वाला हूं।
इसे भी पढ़े – पुरानी गर्लफ्रेंड से मिल कर वासना जग गई
मैं और तेजी से उन्हें चोदते हुए बोला- मेरा मॉल निकलने वाला है, इसे कहां निकालूं? दीक्षा दीदी अपना गांड उठाते हुए बोली- जहां मन करे वहाँ जल्दी से निकाल ले बहन चोद, नहीं तो मेरी जान निकल जायेगी। जोरदार झटकों के साथ मैंने एक पिचकारी उनकी चूत में छोड़ दी। मेरा गर्म लावा उनकी चूत में जाते ही वे आह… करके सिहर उठी। फिर मैंने अपना लंड निकाल कर दूसरी पिचकारी उनकी चूत के पास से उनके मुंह पर मारी। जिससे मेरा माल उनकी नाभि और चूचियों से होकर उनके मुंह के ऊपर गिरा।
मैंने जल्दी से अपना लंड उनके मुंह में डाल कर पूरा माल वहीं निकल दिया। मेरे माल से उनका पूरा मुंह भर गया और बाहर गिरने लगा। लेकिन वे जल्दी जल्दी मेरे लंड की पकड़ कर पूरा रस घट घट कर के पी गई और मेरे लंड को अच्छे से चाट कर साफ किया। मेरा लंड साफ होने के बाद मैंने उन्हें करवट लेटा कर उनके गांड की दरार में अपना लंड सटाते हुए पूछा- कैसी रही चूदाई? वे अपने पेट पर लगे वीर्य को उंगली से चाटते हुए बोली- यह मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन चुदाई थी।
प्रातिक्रिया दे