New Cousin Porn Story
मेरी चचेरी बहन दीक्षा अपनी ससुराल महाराजगंज में अकेले रहती थीं. उनके पति को विदेश गए दो साल हो गए थे. उनके परिवार में उनके अलावा एक छोटी बेटी और सास-ससुर थे. उनका घर काफी बड़ा था. जब भी उनके घर में कोई काम होता तो मुझे वहां जाना पड़ता था. कई बार तो दस से पन्द्रह दिन भी रुकना पड़ जाता था. New Cousin Porn Story
हम लोग दोस्त जैसे रहते थे, एक दूसरे से काफी बातें शेयर कर लेते थे. दीदी मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछती रहतीं और मेरे बदन पर हाथ भी फेरती रहती थीं. मुझे उनका हाथ अपने बदन पर बड़ा ही अच्छा लगता था. वो मेरे बदन पर अपना हाथ क्यों फेरती थीं, ये मुझे नहीं मालूम था मगर मुझे अच्छा बहुत लगता था.
दीदी दिखने में काफी खूबसूरत और सेक्सी थीं. उनकी चूचियां काफी तनी हुई थीं और गांड का इलाका भी एकदम मादक था. मैंने उनकी नंगी चुचियों को कई बार उस वक्त देखा था, जब वो अपनी बेटी को दूध पिलाया करती थीं. हालांकि अब उनकी बेटी बड़ी हो गई है और उसने दीदी की चूचियों से दूध पीना बंद कर दिया है.
कभी कभी मैं उनके मम्मों को याद करके मुठ मार लिया करता था. मैं हमेशा यही सोचता रहता था कि काश एक बार दीक्षा दीदी को चोद लूं. मैं उनसे बात करते समय कई बार कोशिश की कि मैं अपने दिल की बात उनसे कह दूँ पर मेरी हिम्मत ही नहीं होती थी.
बस इसी तरह दिन बीतते गए. मैं लंड हिला कर खुद को शांत करता रहा. एक बार नवरात्रि में मैं उनके घर गया हुआ था,उनके यहां काफी अच्छा मेला लगता है तो मेले में घूमने का काफी मन था मेरा! मेले वाले दिन दीक्षा दीदी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, वो बहुत ही खूबसूरत और एक दुल्हन की तरह लग रही थीं.
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उनको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. मेरे मन में बस हवस दौड़ रही थी. मन तो कर रहा था कि आज पेल ही दूँ. बस किसी तरह मन को शांत किया हुआ था. हम लोग जब मेला घूमने जा रहे थे. मैं उनके पीछे पीछे चल रहा था. दीदी मटक मटक कर चल रही थीं तो उनकी गांड देख कर मेरा लंड शांत ही नहीं हो रहा था.
मैंने तो रास्ते में ही मन बना लिया था कि आज कुछ भी हो जाए, दीदी को चोदना ही है. पूरे मेले में मेरी नजरें उनकी गांड पर टिकी रही थीं. जब हम लोग मेला घूम कर वापस आ रहे थे तो उनकी बेटी रास्ते में ही सो गई. मैं तो मन ही मन खुश हो रहा था कि आज मौका अच्छा है, आज चोद ही दूंगा.
यही सोचते हुए घर वापिस आ गए. घर आकर उन्होंने अपनी बेटी को बेड पर सुला दिया और मुझसे कहा- भाई, तुम पहले कुछ खा लो, फिर अपने रूम में जाकर सो जाओ. हम दोनों काफी थक गए थे, रात भी काफी हो गई थी. लेकिन अब भी मेरे मन में सेक्स चल रहा था, मुझे नींद कहां आने वाली थी.
मैंने एक प्लान बनाया और उनसे बोला- दीदी, मुझे भूख नहीं लगी है, लेकिन मुझे बहुत जोर से प्यास लगी है, प्लीज थोड़ा पानी पिला दो.
दीक्षा दीदी- ठीक है, यहीं रुको, मैं लेकर आती हूँ.
इतना कह कर वह जाने लगीं. मैं हिम्मत करके धीरे धीरे उनके पीछे पानी के मटके जिधर रखे रहते थे, उसके पास जाने लगा. वह पानी के पास जाकर अचानक से इधर उधर देखने लगीं. मैं डर कर वहीं बगल की दीवार में चिपक कर खड़ा हो गया.
मुझे लगा कि उन्होंने मुझे आते हुए देख लिया. उधर बगल में मोरी भी बनी थी. दीदी ने एक दो पल बाद अपनी साड़ी उठाई और ब्लैक कलर की पैंटी नीचे सरका कर बैठ कर मूतने लगीं. पहली बार मैं किसी लड़की की गोरी गांड देख कर पागल हुए जा रहा था.
इससे पहले मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था. ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड पैंट को फाड़ कर बाहर आ जाएगा. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन डर भी लग रहा था. फिर मेरे मन में आया कि अभी नहीं तो कभी नहीं. तब तक वह मूत कर खड़ी हो गई थीं, दीदी ने अपनी पैंटी को ऊपर किया और साड़ी को नीचे करके हाथ धोकर पानी भरने लगीं. अचानक से मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया, पहले तो वह डर गईं.
फिर जब मुझको देखा, तो गुस्से में बोलीं- भाई… यह क्या कर रहे हो?
मेरी तो गांड फटी जा रही थी लेकिन मैं हिम्मत करके बोला- दीदी आप मुझे बहुत ही अच्छी लगती हो, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ.
दीक्षा दीदी- तुम पागल तो नहीं हो गए हो. मैं तुम्हें अपना भाई समझती हूं और एक अच्छा दोस्त… बस इससे ज्यादा कुछ नहीं. वैसे भी तुम मेरे सामने अभी छोटे हो.
मैं- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या सोचती हो, मुझे बस इतना मालूम है, जीजा जी काफी महीनों से नहीं आए है. आप भी तो एक औरत हो, क्या आपको को सेक्स का मन नहीं करता?
इस पर वह थोड़ा चुप हो गईं और बोलीं- इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपने भाई के साथ… लोग क्या कहेंगे?
मैं- जब लोगों को पता चलेगा तब ना! और वैसे भी हम लोग सगे भाई बहन थोड़ी हैं.
दीक्षा दीदी- सगे नहीं हैं तो क्या हुआ… इसका मतलब कुछ भी करेंगे?
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इतना बोल कर वह मुझे खुद से अलग करने लगीं. मैं भी सेक्स की जिद में था, मैंने उन्हें और कसके पकड़ लिया. उनकी गर्दन को चूमने लगा. धीरे धीरे मैं दीदी की गांड को भी दबाए जा रहा था. दस मिनट तक ऐसा ही चलता रहा, मैं कभी उनकी गर्दन को चूमता, कभी उनके चूचों को दबाता.
अब वह थोड़ा शांत हो गई थीं, शायद वह भी गर्म हो गई थीं. इधर मैंने एक बात ये भी समझ ली थी कि यदि दीदी का मन नहीं होता तो वो चिल्ला कर भी मुझे रोक सकती थीं. उनके न चिल्लाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी. मैं धीरे धीरे अपना हाथ उनकी चूत पर ले गया और साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा.
अचानक से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीमे से बोलीं- भाई प्लीज अब छोड़ दो.
लेकिन मैं कहां मानने वाला था, मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था. उनको मैंने दीवार से सटा कर दबा रखा था ताकि वह मुझसे छूट न सकें. मेरा एक हाथ उनकी गांड पर था और एक उनकी चूत पर था. मैं साड़ी के ऊपर से ही दबाए जा रहा था. बार बार मैं उन्हें किस करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह अपने होंठ खोल ही नहीं रही थीं. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी उनके ससुर के खांसने की आवाज आई, तो मैं डर गया और मैंने उन्हें छोड़ दिया. वह जाने लगीं. मैं भी उनके पीछे पीछे जाने लगा. रूम में आते ही मैंने उन्हें फिर पकड़ लिया, लेकिन वह इस बार उन्होंने कुछ नहीं बोला. उनको मैंने बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ कर किस करने लगा.
इस बार उन्होंने न सिर्फ अपने होंठ खोले बल्कि मुझे चूमने भी दिया. हालांकि अब भी वो खुद कुछ नहीं कर रही थीं. मैं उनके होंठों का रस पिए जा रहा था. उनके होंठों का रस बिल्कुल मीठा अमृत की तरह था. मुझे अलग ही नशा छा रहा था, जी कर रहा था बस पीता जाऊं.
बीच बीच में मैं साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत को रगड़ता जा रहा था. वे आह भरने लगी थीं. अब सारी हदें पार हो गई थीं. मेरा लंड दीदी की चूत में जाने के लिए बेकरार था. मैं उनकी साड़ी को धीरे धीरे ऊपर करने लगा. अब दीदी बेड पर पड़ी थीं. मैं उनके ऊपर चढ़ा था. साड़ी पैंटी तक उठी हुई थी.
मैं उठ कर बैठ गया और उनकी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगा. लेकिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने ऊपर खींच लिया. शायद उन्हें शर्म आ रही थी. मैं समझ गया था इसलिए कुछ नहीं बोला. अब उनके ऊपर लेटे हुए ही बिना देखे उनकी पैंटी को सरकाने लगा.
इस बार वह कुछ नहीं बोलीं और अपनी गांड को ऊपर उठा दिया. इससे पैंटी पूरी निकल चुकी थी. मैंने जैसे ही हाथ उनके चूत पर लगाया, उनकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और उनकी झांटें काफी बड़ी बड़ी थीं. मैं दीदी की चुत देखने के लिए काफी बेचैन था, पर वह मुझे छोड़ ही नहीं रही थीं.
किसी तरह मैंने अपना हाथ नीचे करके अपने पैंट को खोला और नीचे तक सरका दिया. अब मेरा लंड उनकी चूत के ऊपर था… उनकी झांटों के साथ के खेल रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रख दिया. एक छोटा सा धक्का मारा, तो मेरा आधा लंड उनकी चूत के अन्दर चला गया.
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वो जोर से चिल्ला दीं… पर उनकी आंखें अभी तक बंद थीं. मैंने एक और धक्का देकर अपना लम्बा लंड दीदी की चूत में पेल दिया. लंड चुत को फाड़ता हुआ अन्दर तक चला गया. अब उनकी आंखों से पानी आने लगा था. उन्होंने मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया.
दीदी ‘ऊई… मां… मर गई… आह सी… सी…’ करके आहें भरने लगीं. अब मैंने उन्हें रिलैक्स होने दिया. मैं रुक गया और धीरे धीरे उनकी चूचियों को मसलने लगा और चूमने लगा. फिर मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और उनके चूचों को पीने लगा. थोड़ी देर बाद उनकी चूत का दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया.
दीक्षा दीदी ‘आह हह अहहह हहह…’ की आवाज करके लंड लेने लगीं. मेरा लंड अन्दर बाहर अन्दर बाहर हो रहा था. उनका बदन पूरा का पूरा हिल रहा था. तभी मुझे उनकी चूत की गर्मी का अहसास होने लगा था. उनकी चूत काफी कसी हुई थी. मैं अब अपनी स्पीड बढ़ाए जा रहा था.
दीक्षा दीदी ‘आह आह आह…’ कर रही थीं. तभी दीक्षा दीदी की जोर की सिसकारी निकली- आहह हहहह ऊईईई ईईईई मर गई ऊईई. मैंने झटकों की रफ़्तार फुल स्पीड में कर दी और तेज़ी से चोदने लगा. अब उनकी चीख सिसकारियों में बदल गई, उन्हें भी मज़ा आने लगा. गपागप गपागप चुदाई चलने लगी.
दीक्षा दीदी- आहह हहह ऊईई ईईई ऊईई मां… मर गई भाई प्लीज धीरे धीरे करो.
मगर मैंने झटकों की रफ़्तार तेज ही रखी और उनकी कमर पकड़ कर तेज़ी से चोदने लगा. ‘आहह हहह ऊईईई ईई आहह ऊईईई…’ और ‘थपथप थपथप…’ की आवाज से पूरा कमरा गूंजने लगा. मैं पूरे जोश में आ गया और चुदाई की गर्मी का मजा लेने लगा. दीदी की चुत से रस निकल रहा था तो चिकनाई के कारण पूरा लंड दीदी की चुत में जड़ तक हमला कर रहा था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उस समय तक दीदी की टांगें हवा में उठ चुकी थीं और वो मुझसे मस्ती से चुदने लगी थीं. हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे और फच्च फच्च थपथप थपथप फच्च फच्च की मादक आवाज हम दोनों की उत्तेजना को बढ़ाने में सहायक हो रही थी.
उसी समय दीदी की आवाज एकदम से थरथराने लगी और वो अपने बदन को ऐंठाने लगीं. मैं समझ गया कि दीदी की चूत का काम तमाम होने ही वाला है. मैंने अपने धक्के एकदम से तेज कर दिए और दीदी ने अपनी चूत का पानी फेंक दिया. दीदी की चूत के गर्म पानी से मेरे लंड ने भी हार मान ली और अब मेरा शरीर भी अकड़ने लगा.
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और उनकी चूत में मेरे लंड का पानी निकल गया. मैं झड़ कर उनके ऊपर ऐसे ही लेट गया. कोई आधा घंटा बाद शायद आवाज और झटकों की वजह से या भूख लगने के कारण उनकी बेटी जग गई थी और रोने लगी. मैं जल्दी जल्दी उठा और अपने रूम में चला गया.
अगली सुबह मैं करीब 9 बजे सोकर उठा और फ्रेश हुआ. हम दोनों ने एक साथ नाश्ता किया. वह बिल्कुल नॉर्मल दिख रही थीं. बस उनके चेहरे पर अलग ही खुशी झलक रही थी. हम दोनों में से किसी ने रात के बारे में जिक्र नहीं किया. मैं भी बेफिक्र होकर मैच खेलने चला गया और दीदी मार्केट चली गईं.
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पूरा दिन इसी तरह बीत गया लेकिन मैं बहुत खुश था. रात में खाने के बाद करीब 9 बजे दीदी बाथरूम में नहाने चली गईं. मैं छत पर घूम रहा था. उस दिन काफी गर्मी पड़ रही थी, हल्की बारिश की वजह से उमस भी थी और लाईट भी नहीं थी. हमारा छत पर ही सोने का प्लान था.
वह नहाने के बाद ऊपर आईं, काफी खुश लग रही थीं. दीदी मेरे पास आकर खड़ी हो गईं. उनके शरीर से मस्त सी खुशबू आ रही थी. मैं धीरे धीरे मदहोश हो रहा था, लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं. उनकी बेटी जगी हुई थी. मेरे मोबाइल में गेम खेल रही थी. हम दोनों दीवार के पास कोने में खड़े थे.
मैंने पूछा- इतनी रात में क्यों नहाई हो?
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- बाल साफ करने थे.
मैंने बोलो- गंदे ही कब थे?
उन्होंने फिर से मुस्कुरा कर कहा- मेरे भोले भाई, नीचे के बाल साफ़ करने थे काफी बड़े हो गए थे.
इतना कह कर शर्माती हुई दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया.
फिर उन्होंने कहा- देखो भाई, ये सब बातें हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए, किसी को पता चला तो बदनामी हो जाएगी. मेरे पति के बाद तुम ही हो जिसके साथ यह सब हुआ. आज तक किसी गैर के पास नहीं गई हूँ. तुमने नहीं किया होता, तो यह सब नहीं हुआ होता.
यह सुनकर मैं थोड़ा मायूस हो गया.
फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- लेकिन मुझे अच्छा लगा.
मैं उनसे नजरें मिलाते हुए बोला- कुछ कमी रह गई हो, तो माफ कर देना क्योंकि यह मेरा फर्स्ट टाइम था, सब जल्दी जल्दी के चक्कर में हुआ. वैसे भी आप मान भी नहीं रही थीं और आपका छेद भी बहुत टाइट भी था.
दीदी मुस्काने लगीं.
मैं- लेकिन मैंने तो सुना था कि जिनका बच्चा हो जाता है, उनका छेद इतना टाइट नहीं रहता और उनको दर्द भी कम होता है? लेकिन आपका इतना टाइट कैसे था… और आप काफी आवाजें भी कर रही थीं?
दीक्षा दीदी मुस्कुराती हुई- मेरा छेद इसलिए टाइट है, क्योंकि मेरी बेटी आपरेशन से हुई है. और आवाजें इसलिए कर रही थी कि तुम्हारा वो भी बहुत बड़ा है, इतना बड़ा तो तुम्हारे जीजू का भी नहीं है.
मैंने दीदी की शर्म खत्म करने के लिहाज से पूछा- मेरा वो क्या बड़ा है?
दीदी शर्माती हुई धीरे से बोली- लंड… मुझे लगा था कि तुम्हारा छोटा सा होगा लेकिन इतना बड़ा… बाप रे… मैं तो मर ही गई थी. लेकिन मजा बहुत आ रहा था.
मैं- लेकिन मैं अब भी आपसे नाराज हूँ.
दीक्षा दीदी- क्यूं?
मैं- आपने अपनी चूत मुझे देखने भी नहीं दी.
दीक्षा दीदी- अब देख लो ना… मैंने मना नहीं किया है.
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इतना कह कर दीदी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया और मुस्कुराने लगीं. मैं साड़ी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाए जा रहा था. अभी भी उनकी बेटी और घर के बाकी लोग जागे हुए थे, मैं इसलिए कुछ कर नहीं रहा था, थोड़ा डर रहा था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वे समझ गईं और बोलीं- किसी को कुछ नहीं पता चलेगा. वैसे भी दीवार काफी ऊंची है, तुम नीचे बैठ जाओ. मम्मी पापा नीचे हैं. नीचे तक आवाज नहीं जाती है.
मैं नीचे बैठ गया. उन्होंने अपनी साड़ी को ऊपर कर दिया. चांदनी रात थी, मुझे सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था. उनकी टांगें काफी खूबसूरत थीं, उन्होंने पिंक कलर की पैंटी पहन रखी थी. उनकी ये पैंटी इतनी पतली थी कि उनकी चूत की दरार मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी. मन तो कर रहा था कि काट कर खा जाऊं.
मैंने उनकी पैंटी नीचे की तरफ खींचा, आह… अन्दर का क्या मस्त नजारा था. किसी जन्नत से कम नहीं था. इतनी गोरी चिकनी चूत पहली बार देख रहा था, कोई भी पहली बार देखता, तो पागल हो ही जाता. मुझसे रहा नहीं गया मैंने झट से अपना मुँह उनकी चूत पर लगा दिया और चूसने लगा.
एकदम ठंडा नमकीन जैसा, मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था. जी तो कर रहा था, बस चूसता ही जाऊं. वह मस्ती में एक हाथ से अपने चूचे को दबा रही थीं और एक हाथ में मेरे सर को सहला रही थीं. करीब 5 मिनट तक ऐसे ही उनकी चूत चाटता रहा. फिर उन्होंने मुझे ऊपर की तरफ खींचा और मेरे होंठों को काटने लगीं.
मुझे बहुत ही मजा आ रहा था. फिर 3-4 मिनट किस के बाद वह नीचे बैठ गईं और मेरे पैंट को नीचे कर दिया. मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मुँह में डाल लिया और रंडी की तरह लंड चूसने लगीं. मानो मैं तो जन्नत में था, मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे. वह जोर जोर से लंड चूसे जा रही थीं. अब ‘फच… फच सर्रे… सर्रे…’ की आवाजें आ रही थीं. कुछ ही समय में मैं झड़ने वाला था, मैंने उनको अपनी तरफ ऊपर खींचा.
उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
मैंने बोला- मैं झड़ने वाला हूं.
दीक्षा दीदी- कोई नहीं, मेरे मुँह में ही झड़ जाओ. मैं भी तो देखूं मेरे भाई का रस कैसा है?
वो फिर से लंड चूसने लगीं. इस बार कुछ जल्दी जल्दी चूस रही थीं. मैं एक मिनट बाद ही उनके मुँह में ही झड़ गया. उन्होंने लंड का पूरा रस पी लिया और अपनी जीभ से चाट कर मेरा लंड को भी साफ कर दिया. अब मेरा लंड शांत हो गया था.
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वे खड़ी होकर मुझसे लिपट गईं और फिर से किस करना शुरू कर दिया. मैं धीरे धीरे उनके चूचों को दबाता कभी कभी उनकी गांड को दबाता. अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था. उन्होंने मेरा लंड हाथ में लिया और बोलीं- इतनी जल्दी यह फिर से खड़ा हो गया?
मैंने बोला- दीदी, यह अब आपकी चूत को चोदना चाहता है.
दीक्षा दीदी- इतनी जल्दी… नहीं अभी पूरी रात बाकी है. अच्छे से मजे लेकर करेंगे.
फिर मैंने उनकी साड़ी और ब्लाउज को खोल कर वहीं फैंक दिया. पेटीकोट के ऊपर से ही उनकी चूत को रगड़ने लगा. अब तक उनकी बेटी सो चुकी थी. हम दोनों जल्दी से बिस्तर पर गए और एक दूसरे पर टूट पड़े. उन्होंने जल्दी जल्दी अपनी पैंटी निकाली और हम दोनों 69 की पोजीशन में आकर एक दूसरे को चाटने लगे.
अभी भी हम दोनों ने अपने पूरे कपड़े नहीं निकाले थे. मैंने पूरे कपड़े निकालने के लिए बोला लेकिन उन्होंने मना कर दिया और बोलीं- कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी. दस मिनट ऐसे ही चलता रहा. कुछ देर बाद मैंने दीक्षा दीदी की गांड के नीचे तकिया लगाया, अपने लंड को दीक्षा दीदी की चूत में घुसा दिया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
दीक्षा दीदी- आहह हह ऊईई आहह सीईई आह मजा आ गया.
उनकी सिसकारियां तेज़ होने लगीं. मैं जोर जोर से दीक्षा दीदी को चोद रहा था. “आहह भाई चोद मुझे… और चोद आहह आहह फ़ाड़ दे… आहह हहह चोद मुझे… ले ले मेरी आहह.” अब मैंने उनकी दोनों टांगों को चौड़ा कर दिया और लंड को चूत की गहराई तक पेलने लगा. हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे. दीक्षा दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया और लंड फच्च फच्च फच्च करके अन्दर बाहर होने लगा. मैंने लंड निकाल लिया और उनकी चूचियों को मसलने लगा.
वो बोली- भाई चोद मुझे… और चोद… आज मेरी प्यास मिटा दे.
मैंने लंड को उनके मुँह में डाल दिया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा. फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर घोड़ी बनाया और पीछे से दीदी की चूत में लंड घुसा दिया. मैं तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.
वो सिसकारियां भरने लगीं- आहह हह मेरे राजा… और तेज़ तेज़… आहह… आहह… चोद चोद चोद मुझे… मार ले मेरी… आहह.
दीक्षा दीदी अपनी गांड को पीछे करके लंड लेने लगीं. अब मैंने दीक्षा दीदी को पलट दिया और उनकी चूत में लंड घुसा कर गपागप गपागप अन्दर बाहर करने लगा. थोड़ी देर बाद उनका और मेरा पानी निकल गया और दोनों चिपक कर लेट गए. बीस मिनट बाद दीक्षा दीदी फिर से मेरे लौड़े से खेलने लगीं.
मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा और चूसने लगा. इससे मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. उन्होंने देर ना करते हुए लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और लंड को मस्त कर दिया. मैंने उनकी चूत को चाट कर गीला कर दिया और उनकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर लंड को अन्दर घुसा दिया. ‘आहह हहह ऊईईई मर गई भाई धीरे ऊईई.’ उनकी चीख कुछ ही झटकों में सिसकारियों में बदल गई. उन्हें भी मज़ा आने लगा. गपागप गपागप चुदाई चलने लगी.
वो बोलीं- भाई तेरी जीजू मुझे ऐसे कभी नहीं चोदा. आज जीभर के चोद दे. आहह ऊईईई आ हहह.
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चुदाई की आवाज पूरे छत पर गूंजने लगी थी. कुछ देर बाद मैंने दीक्षा दीदी को घोड़ी बनाया और उनकी चूत में अपने लंड को घुसा दिया. “आहह हऊ हह ऊईईई ऊईई मां बचाओ… मर गई… मेरी चूत फट गई… मां बचाओ… भाई निकाल लंड.” मैं चुप रहा और धीरे धीरे उनकी चूचियों को मसलने लगा, उन्हें चूमने लगा. थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हुआ तो मैंने लंड को चलाना शुरू कर दिया. दीक्षा दीदी ‘आह आहह हहह…’ की आवाज करके लंड लेने लगीं. दीदी भी अब गांड आगे पीछे करने लगी थीं.
फिर दीदी ने कहा- मुझे ऊपर आना है.
मैंने ओके कहा और दीदी को अपने लंड पर बिठा कर लंड की सवारी करवाने लगा. ऐसे में दीदी की चूचियां भी चूसने को मिल रही थीं.
दीदी बोलीं- तेरे लंड में बड़ा दम है. मजा आ गया.
मैंने कहा- मुझे आपकी गांड मारने का दिल करता है दीदी.
दीदी बोलीं- वो भी मार लेना… पर अभी मेरी चूत की आग तो बुझा दे.
मैंने ओके कहा और गांड उठा कर दीदी को चोदना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए. दीदी झड़ गई थीं तो थप-थप थप-थप की आवाज आ रही थी. अब मेरा शरीर भी अकड़ने लगा था. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उनकी चूत में पानी निकल गया. मैं उन्हें पलटा कर उनके ऊपर लेट गया. हम दोनों सो गए.
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