Hot Bhabhi Jordar Chudai
रजनी जल्दी जल्दी अपना और अपने पति पुलकित का टिफ़िन पैक कर रही थी तभी पुलकित बेडरूम से ही चिल्लाया, “रजनी!!! मेंरी सफेद शर्ट नहीं मिल रही, कल ही तो प्रेस की थी।” “कुछ नहीं मिलता तुम्हें, वही सामने अलमारी में रक्खी है,” रजनी रसोई से झुंझलाते हुए बोली। दोनों ही काम पर जाने के लिए सुबह सुबह तैयार हो रहे थे। Hot Bhabhi Jordar Chudai
रजनी की परवरिश बरेली में हुई थी और करीब दो साल पहले ही वो शादी करके अपने पति के साथ लखनऊ रहने आ गयी थी। पुलकित एक शुगर मिल में काम करता था और लखनऊ आने के बाद रजनी भी एक कंपनी में छोटी सी जॉब शुरू कर दी थी ताकि दोनों लोग मिल कर होम लोन की किस्त चुका पाये।
दोनों कुछ महीने पहले ही अपने नए मकान में शिफ्ट हुए थे। ज्यादा बजट न होने के कारण मकान शहर के बाहर की तरफ बाईपास रोड पर नई बनती कॉलोनी में ही ले पाये थे। शादी से पहले बरेली में रजनी अपने मोहल्ले की सबसे खूबसूरत लड़की मानी जाती थी। 18 साल की उम्र से ही उसका बदन भर गया था और उसके गदराय जिस्म को देख लड़कों ने घर के चक्कर लगाने शुरू कर दिये थे।
रजनी की माँ बहुत ही घाघ किस्म की औरत थी उसने किसी लड़के की परछाई भी रजनी पर नहीं पड़ने दी और जल्दी से जल्दी उसकी शादी करने की फिराक में जुट गयी और 20 साल की उम्र में शादी करा के ही मानी। शादी के बाद रजनी बड़े अरमानों के साथ अपनी पति के साथ रहने आयी थी पर शादी के तुरंत बाद ही उसे हकीकत का अहसास हो गया था और जो भी रोमांटिक सपने उसने देखे थे वो सब मन में ही रह गए।
पुलकित साधारण सा इंसान था और साधन सीमित थे। रजनी को घर गृहस्ती में व्यस्त हो जाना पड़ा, और तो और सेक्स में भी पुलकित साधारण ही था। पुलकित रजनी का पहला मर्द था तो उसको कोई तजुरबा नहीं था पर जो कुछ भी उसने अपनी सहेलियों से सुना था की शादी के बाद शुरू शुरू में दर्द होता है पर कुछ दिनों में ही इतना मज़ा आता है की पति को छोड़ने का मन ही नहीं करता।
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रजनी को दर्द तो हुआ पर वो मज़ा कब आयेगा इसको वो 2 साल से इंतज़ार ही कर रही थी। जब भी कोई सहेली मिलती और अपने बेडरूम के किस्से सुनाती तो रजनी मन मसोस कर रह जाती। शादी के दो साल हो चुके थे पर रजनी अभी बच्चा नहीं चाहती थी तो वो नियमित रूप से गोलियाँ लेती थी, लेकिन इन दो सालो में उसका बदन और भी भर गया था, तने हुये स्तन और चौड़ा पिछवाड़ा देखने वालों के लंड खड़े कर देता था।
जहां इन लोगो ने मकान लिया था वो कॉलोनी अभी बन ही रही थी और आस पड़ोस में अभी ज्यादा आबादी नहीं हुई थी। यहाँ भी आस पास के शोहदे रजनी के ऊपर लाइन मारने की कोशिश करते रहते थे। वो जब भी घर से बाहर निकलती तो आस पास के लड़के उसे ताड़ते रहते और मौका मिलते ही अश्लील कमेंट भी कर देते थे।
रजनी उन्हें नजरअंदाज करके आगे बढ़ जाती थी। मोहल्ले में देवा नाम का एक गुंडा था जो की लोकल विधायक की चमचा गिरि और छोटी मोटी चोरी चकारी करता रहता था, उसने अपना एक छोटा सा गैंग भी बना रखा था और उसका सबसे करीबी चेला सोनू था।
एक बाइक रिपेयरिंग की दुकान भी खोल रखी थी जो ज्यादा चलती नहीं थी और दोनों दिनभर आवारागर्दी करते रहते या फिर मोहल्ले की औरतों पे दाना डालते रहते। कुछ मोहल्ले की चालू औरतों के साथ उसकी सेटिंग भी हो गयी तो वो और भी निडर हो गया था। जब से रजनी मोहल्ले में आई थी देवा की नज़र उसपर लगी थी।
लेकिन जब भी उसने रजनी पे लाईन मारने की कोशिश की तो उसे रजनी की तरफ से कोई भी प्रोत्साहन नहीं मिलता, वो कोई भी प्रतिक्रिया दिये बिना चली जाती थी। देवा उसकी कड़क जवानी और गदराए हुए शरीर को देख देख के आहें भरता रहता था। उस दिन सुबह जब वो रजनी को ऑफिस जाते हुए ताड़ रहा था तो सोनू उसके साथ में ही खड़ा था,
“भाई, कब तक देख देख के आहे भरते रहोगे,” सोनू खी खी करता हुआ बोला, “ये हाथ आने वाली कबूतरी नहीं है।”
“इस कबूतरी का शिकार मै ही करूंगा,” देवा दाँत पीसता हुआ बोला, “और जब मै शिकार कर लूँगा तो साले तू ही लार टपकता हुआ आ जाएगा दावत उड़ाने।”
“वो तो है ही भाई, लेकिन कब तक इंतज़ार करना होगा,” सोनू खीसे निपोरते हुए बोला।
“भोसड़ी के तू झाटे साफ करके तैयार रहना,” देवा गुर्राया।
रजनी ने आफिस आने जाने के लिए एक स्कूटी ले रखी थी पर उस दिन स्कूटी खराब थी और बनने के दी हुई थी। तो स्कूटी न होने के कारण वो ऑटो करके घर आ रही थी, वैसे भी उस दिन वो घर आने में लेट हो गयी थी। जब ऑटो घर के थोड़ी दूर था तो ऑटो वाले ने ऑटो रोक दिया।
“क्या हुआ,” रजनी बोली।
“आगे नहीं जा पायेगा, आगे रोड अभी बनी नहीं है,” वो बोला।
वहा से घर थोड़ी ही दूरी पर था, स्कूटी से तो रजनी रोज किनारे से निकाल जाती थी पर ऑटो वाला उस रोड पर चलने से माना कर रहा था, तो रजनी ऑटो वही छोड़ कर पैदल ही घर की तरफ चल पड़ी। रात के आठ ही बजे थे पर रास्ता सुनसान और अंधेरा था।
रास्ते में छोटा सा ग्राउंड था जिसकी प्लाटिंग हो गयी थी पर घर अभी तक नहीं बने थे। सुनसान रास्ता देख के डर भी लग रहा था पर फिर अपने मन को तसल्ली देते हुए रजनी तेजी तेजी आगे बढ्ने लगी। इधर देवा और सोनू दारू के इंतजाम में जा रहे थे की उन्होने रजनी को अकेले आते देख के अपना रास्ता बदल लिया।
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“भाई क्या उठी हुई गांड है, साली को नंगी करके उल्टा लिटाने का मन कर रहा है,” सोनू आह भरता हुआ बोला।
“चल आज कर ही डालते है नंगी साली को,” देवा बोला।
“सच भाई,” सोनू अगल बगल देखता हुआ बोला।
“आज दे के जाएगी चूत ये,” देवा दृढ़ता से बोला।
रजनी अभी बीच में ही थी की अचानक दोनों सामने आ गए। रजनी के मुंह से जोर की सिसकारी निकाल गयी और दिल धक धक करने लगा। दोनों उसका रास्ता रोक कर खड़े हो गए। रजनी दोनों को पहचान तो नहीं पायी पर अंधेरा होने के बावजूद दिख रहा था की दोनों गुंडे टाइप तगड़े आदमी है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“बहुत जल्दी है क्या, रात में कहा घूम रही है,” देवा बोला।
“काम से वापस आ रही हूँ,” रजनी बोली और उनके बगल से निकालने की कोशिश करने लगी पर वो उसकी बाँह पकड़ लिया।
“शरीफ घर की औरते रात को नहीं घूमती है।”
“छोड़ो,” रजनी बहुत घबरा गयी और हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी, “छोड़ो।”
“चुप,” वो गुर्राया और खट से एक चाकू उसके सामने लहराने लगा, “आवाज निकाली तो घोप दूँगा।”
रजनी की डर के मारे घिग्घी बंध गयी। चारों ओर देखा तो दूर दूर तक अंधेरा था और कोई इंसान भी नहीं दिख रहा था। वो उसे खींच के रोड से नीचे ग्राउंड में उतारने लगा।
“क्या कर रहे हो, क्या चाहिए,” रजनी घबराने लगी पर वो दोनों उसे ग्राउंड में धकेल दिये।
उन्होंने रजनी का पर्स छीन लिया और खोल के सारे पैसे निकाल लिए।
“400 रूपय, साली बस इतना ही माल लेके चलती है,” वो गुर्राया। फिर उसकी नज़र उसके गले में पड़ी चेन पर गयी और वो चेन खोलने लगा, रजनी चुपचाप प्रार्थना करती रही की वो चेन और पर्स ले कर चले जाये।
“कुछ भी नहीं है इसके पास तो, ये पतली सी चेन है,” सोनू बोला, “हाथ में भी काँच की चूड़िया है।”
“बस यही है,” रजनी किसी तरह हिम्मत करके बोली, “अब मै जाऊ।”
“अबे तू साले ये चैन के पीछे क्यू पड़ गया है, तेरे को ये माल नहीं दिखाई पड़ता क्या,” देवा उसके उरोजों की तरफ अश्लील इशारा करता हुआ बोला तो रजनी का दिल बैठने लगा।
“ये ही वो नया माल है न मोहल्ले का जिसके बारे में सारे लौंडे बोल रहे थे,” वो बोला।
वो दोनों हाथो से रजनी को पकड़ के अपने सामने खड़ा कर दिया।
“प्लीज… प्लीज… चेन और पर्स तो ले लिया है अब जाने दो,” रजनी घबराते हुए विनती करने लगी।
देवा उसको खींच के झड़ियो के पीछे ले जाने लगा तो रजनी के हाथ पैर शीतल पड़ने लगे वो समझ गयी की ये लोग उसके साथ कुछ भी बदतमीजी कर सकते है, पर उसकी उनके सामने एक न चली। देवा ने झटके से उसे खीच के अपनी बांहों में दबोच लिया,
“नहीं, नहीं, छोड़ो,” रजनी ज़ोर से चिल्लाई और कंपकंपाते हुए आस पास देखने लगी पर वहाँ दूर दूर तक कोई नहीं था सुनने वाला। वो उसके ब्लाउज़ पे हाथ रख दिया तो रजनी सिहर गयी।
“ये है माल,” वो कुत्सित स्वर में बोला तो सोनू ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा।
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वो लंबा तगड़ा आदमी था और रजनी उसकी पकड़ में सिर्फ छटपटा कर रह गयी। दूर दूर तक अंधेरा ग्राउंड ही था और अब उसकी पूरी तरह से समझ आ गया था की ये उसकी इज्जत लूट के ही मानेंगे। उसके दिमाग में वो सारे किस्से घूमने लगे जो उसने सुने थे रेप के बारे में, कैसे ये लोग लड़कियों को बेबस कर देते है।
“चुप नखरा बिलकुल नहीं,” वो फिर से धमकाता हुआ बोला और उसको जमीन पर गिरा दिया। रजनी का दिमाग सुन्न हो रहा था, वो बेबसी में छटपटा के रह गयी जब सोनू उसके दोनों हाथो को सर के पीछे करके जकड़ लिया।
“नहीं, नहीं, छोड़ो, छोड़ो,” रजनी ज़ोर से चिल्लाई पर वहाँ दूर दूर तक कोई सुनने वाला नहीं था।
“चुप, बिलकुल चुप,” देवा का तमतमाया चेहरा और उठा हुआ हाथ देख के रजनी की घिघी बंध गयी, “आवाज निकली तो मार खायेगी।”
“पुच पुच, आराम से लेटी रह,” देवा उसके ब्लाऊज के बटन खोलने लगा। रजनी उससे हाथापाई करने लगी पर वो उसे रोक नहीं पा रही थी।
जैसे जैसे ब्लाउज़ के बटन खुलते गए वैसे वैसे रजनी का दिल बैठता जा रहा था। वो कुछ भी नहीं कर पा रही थी। उसकी रोकने के सारी कोशिश बेकार हो गयी और देवा ने उसका ब्लाउज़ और ब्रा को नोच कर ग्राउंड पे फेंक दिया। सोनू मुंह बाए रजनी के तने हुए दूधिया उरोजों को देख रहा था जो तेज चलती साँसो के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।
“मस्त माल है,” देवा उसकी एक चूचि को अपनी हथेली में दबोच लिया, उसका चेहरा वासना से तमतमाने लगा और वो रजनी के फड़फड़ाते जिस्म को अपने नीचे समेटने लगा। “नहीं… नहीं… प्लीज,” रजनी शर्म और डर से काँपने लगी, वो उसके भारी शरीर के नीचे हिल भी नहीं पा रही थी और उसके विरोध का दोनों पर कोई असर नहीं हो रहा था।
सोनू उसके दोनों हाथो को सर के ऊपर करके पकड़े रहा और देवा रजनी के शरीर का मर्दन करने लगा। रजनी इस सुनसान मैदान में पीठ के बल लेटी हुई आसमान को तक रही थी और यकीन नहीं कर पा रही थी की ये सब उसके साथ क्या हो रहा है। सब कुछ एक बुरे सपने जैसा लग रहा था पर बार बार आंखे बंद और खोलने के बाद भी हकीकत बादल नहीं रही थी।
उसकी छाती में होती सनसनाहट साबित कर रही थी की देवा उसके निप्पल को बेरहमी से चूस और मसल रहा है। “अहह… अहह… नहीं…” रजनी कसमसाती रही और दोनों अपने काम पर लगे रहे। सोनू उसके दोनों हाथो को दबोचे रहा और देवा उसकी साड़ी, पेटीकोट और चड्डी भी उतार फेंका। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
गरमियों का मौसम होने के बावजूद रात की ठंडी ठंडी हवा रजनी के जिस्म को कंपकंपाने लगी। जब देवा अपने कपड़े उतार रहा था तो रजनी इधर उधर देख रही थी की शायद कोई आ जाए और ये लोग उसे छोड़ दे, पर वैसा कुछ नहीं हुआ और रजनी शर्म के मारे अपनी टाँगो को भीच के अपनी आबरू को ढकने की विफल कोशिश करने लगी. देवा ने जैसे ही अपना काच्छा उतारा तो उसका मोटा काला लंड तन कर खड़ा हो गया।
रजनी की न चाहते हुए भी नज़र उस पर पड गयी तो उसका दिल गले में आ गया। उसने कभी इतना बड़ा लंड नहीं देखा था और ये एहसास होते ही की ये आदमी उसके अंदर ये लंड घुसायेगा रजनी के जिस्म में सिहरन दौड़ गयी। वो नंगा हो के उसके दोनों तरफ पैर डाल के चढ़ गया तो उसका मूसल जैसा लंड उसके पेट पर गड़ने लगा। वो अब खुश नज़र आ रहा था की रजनी कोई विरोध नहीं कर रही थी। वो धीरे धीरे उसके ऊपर पसर गया,
“गुड गर्ल,” उसकी साँसे उसके गालों पर पड़ने लगी.
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रजनी शर्म से गड़ी जा रही थी, वो कभी भी अपने पति के अलावा किसी पर पुरुष के सामने नंगी नहीं हुई थी और यहाँ वो इन दो हरामियो के सामने नंगी पड़ी थी। उसने कनखियों से देखा तो दूसरा नदीदो की तरह उसके नंगे जिस्म को घूर रहा था.
“अहह, अहह, नहीं, अहह,” रजनी ज़ोर से कसमसाई जब देवा उसका एक स्तन अपने मुह में भर लिया और कस कस के चूसने लगा।
“छोड़ो, छोड़ो, अहह, आई,” रजनी के मुह से रह रह के सिसकियाँ निकालने लगी।
“सोनू साले, तू यहाँ पर कब तक सर पर खड़ा रहेगा, चल झाड़ी के पीछे जा और रोड पर नज़र रख,” वो बोला तो सोनू नाराजगी सी दिखता हुआ दोनों को छोड़ के पीछे चला गया.
“पुच पुच, गया वो,” वो उसके बालो को सहलाता हुआ बोला, “अब प्यार से लेने दे,” और उसकी मजबूत हथेली उसके उरोजों पर कसने लगा।
“अहह… अहह… नहीं” रजनी के हाथ अब फ्री हो गए थे और वो देवा की पीठ पर मुक्के बरसने लगी पर उसका कमजोर विरोध देवा पर कोई असर नहीं कर रहा था। वो मस्त हो के उसके मम्मे रगड़ता रहा और उसके निप्प्ल्स को अपने अंगूठे और उंगली के बीच मसलता रहा।
“आई… आई… नहीं… प्लीज… नहीं…” पर रजनी की कराहे सुनने वाला कोई नहीं था।
रजनी अब अपने को हालात के हवाले कर चुकी थी और अपने मन को समझा रही थी की जो होना है वो तो होगा ही । उसके मुंह से अब लगातार कराहे निकाल रही थी और देवा अपनी कई महीनों की हसरत पूरी करने में जुट गया। धीरे धीरे रजनी की साँसे भी भारी होने लगी थी और वो अपनी आंखें बंद कर ली।
बीच बीच में उसे अपने पति का ख़याल भी आ जाता तो मन में हुक सी उठ जाती की जो शरीर सिर्फ उसके पति का होना चाहिए वो ये हरामी जबरदस्ती लूट रहा है, पर फिर दिल को तसल्ली देती की जो कुछ भी हो रहा है उसमें उसका कोई दोष नहीं है।
इसी ऊहापोह में कितना समय बीत गया पता ही नहीं चला। चारों तरफ सन्नाटा था और रजनी बिलकुल भूल गयी की वो ग्राउंड में इन हरामियो की जबरदस्ती का शिकार हो रही थी बल्कि उसे ऐसा लगा की वो अपने बेडरूम की सुरक्षा में अपने मर्द को अपना शरीर सौंप रही है।
उसके होंट स्वतः खुल गए और देवा उसके मुह के जीभ डाल के चूमने लगा और रजनी अनजाने में ही जैसे कोई स्वचालित गुड़िया हो, उसके होंठ और जीभ को चूसने लगी। देवा तो जैसे स्वर्ग में आ गया हो, इतना मस्त और गदराया हुआ जिस्म इससे पहले कभी उसके हाथ नहीं आया था। जब उसका हाथ रजनी की टाँगो के बीच पहुंचा तो उसकी टाँगे स्वतः ही फैल गयी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“अहह… अहह…” रजनी अधखुली आंखो से देवा के हवस भरे चेहरे को देख गहरी गहरी साँसे लेने लगी। देवा ने रजनी का हाथ पकड़ के अपने तने हुए लंड पर रख दिया, “सहलाओ इसे,” तो उसके जिस्म में सनसनी दौड़ गयी। उसे महसूस हुआ की उसका लंड कितना लंबा और मोटा था। रजनी न चाहते हुये भी उसके लंड को अपने पति के लंड से तुलना करने लगी।
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गरम गरम लंड उसकी पूरी हथेली को भर दिया था और रजनी शर्म के बावजूद उत्तेजना से काँपने लगी। “सहलाओ इसे,” देवा भर्राई आवाज में फुसफुसाया तो रजनी का हाथ अपने आप चलने लगा और वो धीरे धीरे उसे उपर से नीचे तक सहलाने लगी।
रजनी का दिमाग उस वक़्त पूरी तरह से शून्य हो चूका था और उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, वो एक अजीब से नशे में डूबती जा रही थी और उसका अपने शरीर पे कोई कंट्रोल नहीं रह गया था। बस मन कर रहा था की वो एसे ही उसके शरीर को मथता रहे। बार बार दिमाग में उसका मोटा लंड घूम रहा था और रजनी उसको अपने अंदर महसूस करना चाहती थी।
रजनी की चूत में अजीब सी बैचनी भर गयी थी, जैसी कि उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी, अपने पति के साथ भी रजनी कभी इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी। रजनी अपनी टांगे फैला के उससे जोर से चिपक गयी और वो उसकी टाँगो के नीचे अपने हाथ डाल के एकदम से ऊपर उठा दिया। रजनी की गीली चूत बिलकुल खुल के उसके सामने थी।
“अहह…अहह… ओहह… ओहह…” रजनी ज़ोर से कराह उठी जब मूसल जैसा लंड उसकी मुलायम चूत की फाँको को फैला के अंदर घुसने लगा।
देवा उसको दबोच कर उसके ऊपर पूरा पसर गया और रजनी के घुटने दोहरे होकर उसकी छाती से लग गए।
“अह, अह, अहह, क्या गदराई हुई बॉडी है तेरी,” देवा की हाफती हुई साँसे रजनी के गालो पर पड़ने लगी और वो अपना पूरा वजन उसके ऊपर डाल के अंदर घुसेड़ने लगा।
“अहह…अहह…अहह…अहह…अहह…अहह…अहह…अहह…” रजनी की लगातार सिसकारिया छूटने लगी।
सोनू थोड़ी दूर झाड़ी के पास खड़ा हुआ हैरत और प्रसंसा भरे भाव से देख रहा था, “भाई ने सेट कर ही लिया साली को, क्या चिपक चिपक के दे रही है,” वो बुदबुदाया। वो अपने खड़े लंड को सहलाता हुआ टकटकी लगाए देवा को देखने लगा जो रजनी को एसे भभोड़ रहा था जैसे एक शेर हिरनी को भभोड़ रहा हो।
रजनी अब सब कुछ भूल के देवा से चिपकी हुई थी जो हुमच हुमच के धक्के मार मार के चोदने में लगा हुआ था। रजनी अपने अंदर एक उबाल महसूस करने लगी और वो भी नीचे से अपनी कमर हिला हिला कर देवा का साथ देने लगी।
रजनी के जिस्म में चूत से लेकर चूचियो तक सनसनी दौड़ रही थी,
“अहह… मम्मी… आई… उफ़्फ़,” रजनी का बदन उत्तेजना से एठने लगा।
“करते रहो… करते रहो…” वो अनजाने में फुसफुसाने लगी और कस कर देवा से चिपक गयी। उसके अंदर का उबाल अब चरम पर था,
“आई, मम्मी, मै मर जाऊँगी… आई… आई…ई…ई…” वो देवा से चिपक कर झड़ने लगी।
पर देवा अभी भी पूरे जोश में पेलता जा रहा था, उसका भारी जिस्म रजनी की टांगो के बीच चोट करता रहा और उसका मोटा लंड चूत में फ़च फ़च की आवाज के साथ अंदर बहार होता रहा। रजनी अपने शरीर को ढीला छोड़ दी और आँख बंद करके मीठे मीठे दर्द का मज़ा लेने लगी।
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“तेरी चूत भर दूँगा आज,” वो उत्तेजना में बड़बड़ाया।
“अहह, अहह,” उसका चेहरा परमसुख से विकृत हो रहा था और वो झटके मार मार के चूत में झड़ने लगा.
झड़ने के बाद वो थोड़ी देर उसके ऊपर पड़ा हाँफता रहा और फिर साइड में लुढ़क गया। रजनी आंखें बंद करके गहरी गहरी साँसे लेने लगी और फिर धीरे धीरे उसे एहसास होने लगा की क्या हुआ। शर्म और ग्लानि से वो आँख भी नहीं खोल पा रही थी की कैसे वो सब कुछ भूल के इस गुंडे को अपना शरीर सौप रही थी और कैसे वो इस घृणित कृत का आनंद ले रही थी।
“ही ही ही, अब मेंरी बारी है,” सोनू खीसे निपोरता हुआ रजनी को दबोच लिया।
रजनी जानती थी की न नुकुर का कोई फायदा नहीं है तो वो चुपचाप लेटी रही और फिर उस रात दूसरा मर्द उसके ऊपर चढ़ गया। रजनी को अब उतनी शर्म और ग्लानि नहीं हो रही थी जो शुरू शुरू में देवा के साथ हो रही थी। अब वो निर्विकार भाव से टांगे खोल के लेटी रही और अपने आप को समझा लिया की सोनू की हवस का शिकार होने के बाद ही वो घर जा सकती है। सोनू का सख्त हाथ तुरंत ही उसके बदन पर फिरने लगा, रजनी को वो देवा से भी ज्यादा कड़क लगा।
“आई, नहीं, इतनी ज़ोर से नहीं,” वो चिहुक पड़ी जब सोनू उसके तने हुए उरोजों को मसलने लगा। पर सोनू पूरे जोश में था वो उसके शरीर को कस कस कर निचोड़ने लगा।
“नहीं, नहीं, ज़ोर से नहीं, छोड़ो, छोड़ो,” रजनी छटपटा गयी उसके शरीर में दर्द की लहर दौड़ गयी, “प्लीज आराम से करो, ज़ोर से नहीं।”
“आई, अहह, ऊई माँ, नहीं, अहह, नहीं,” रजनी लगातार सिसकियाँ भरने लगी। उसके सख्त हाथ कभी उसकी छातियों को नोचे तो कभी गांड को। उसके सारे शरीर पर उसके मजबूत हाथ फिरने लगे और रजनी रह रह कर कराहती रही। देवा एक सिगरेट सुलगा लिया और झाड़ियों के पीछे नज़र रखने चला गया और रजनी की आहे कराहे फिर से गूंजने लगी।
सिगरेट खत्म करने के बाद वो झांक के देखा तो रजनी टाँगे ऊपर उठा के सोनू की कमर पे लपेटे हुई थी और सोनू उसे अपने नीचे समेंट कर मस्ती से धक्के मार रहा था। सोनू का मोटा लंड चूत रस से लिप्त चमचमा रहा था और आराम से रजनी की चूत में फिसल रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
देवा के होंठों पर मुस्कान फैल गयी ये देख के की कैसे रजनी जोश में पूरा सहयोग कर रही थी सोनू के साथ। कैसे वो उत्तेजना में सोनू की पीठ मसल रही थी और उसके होंटो को चूस रही थी। देवा के लंड में फिर से जान आने लगी। रजनी अब सबकुछ भूल के अपने ऊपर चढ़े सोनू को जकड़े हुए थी, वो यकीन नहीं कर पा रही थी दस मिनट में ही वो फिर से चरम पर पहुचने वाली है।
तभी अचानक मोबाइल की घंटी बजने लगी। आवाज रजनी के हैंडबैग से आ रही थी, देवा मोबाइल निकाल लाया, स्क्रीन पर देखा की पुलकित, उसके पति, का फोन था। अचानक रजनी धरातल पर आ गयी और अहसास हुआ की वो शादीशुदा है और घर में पति इंतज़ार कर रहा है। रजनी फोन उठाना नहीं चाहती थी पर देवा बटन दबा कर मोबाइल उसको पकड़ा दिया।
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“हैलो,”
“रजनी कहा हो तुम इतने देर से ट्राइ कर रहा था,” पुलकित चिंतित स्वर में बोला।
सोनू अभी भी उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और रजनी उसके मोटे बांस को अपने अंदर बाहर होते हुए महसूस कर रही थी।
“अह… मै… ऑफिस में लेट हो गयी हू,” रजनी किसी तरह अपनी साँसो को कंट्रोल करके बोली।
“सब ठीक है न, तुम्हारी आवाज भारी सी लग रही है, क्या हुआ।”
“कुछ नहीं, चल रही हूँ इस लिए साँसे भारी हो रही है।”
“कब तक आओगी,” वो बोला तो रजनी देवा की तरफ देखने लगी। देवा अपना खड़ा हुआ लंड सहलाता हुआ कुटिलता से मुसकुराने लगा।
“लगभग घंटा और लग जाएगा,” वो बोली और फोन काट दिया।
“गुड गर्ल,” देवा भराई आवाज में बोला और रजनी के करीब बैठ कर उसके बालो को सहलाने लगा। ग्राउंड में सन्नाटा पसरा हुआ था बस हवा से हिलती झड़ियों के सरसराने की आवाज या फिर सोनू के धक्को से फ़च फ़च की आवाज ही आ रही थी। देवा उसका सर अपनी गोदी में खींच लिया और लंड उसके होंठों और गालों पर रगड़ने लगा। रजनी समझ गयी की ये क्या चाहता है। इससे पहले वो कभी भी लंड मुंह में नहीं ली थी, पर आज सबकुछ बदलने वाला था। वो हिचकिचाने लगी।
“इसको घुटनो के बल ले कर पीछे से डाल,” वो सोनू से बोला तो वो रजनी को उल्टा लिटा दिया और उसके चूतड पकड़ के लंड निशाने पर लगा दिया।
“मुह खोलो,” देवा उसके बालो को पकड़ता हुआ फुसफुसाया तो रजनी झिझकते हुए होंठों को सिकोड़ के लंड के सुपाड़े को चूम ली।
“अहहम,” होंठों की गर्मी लगते ही देवा के मुह से हुंकार निकाल गयी।
उधर सोनू उसकी गांड पकड़ के धक्के मारने लगा। देवा जल्दबाजी किए बिना रजनी का सर सहलाता रहा, उसे पता था की वो अब पूरी तरह से समर्पण के लिए तैयार है। वो बालो को पकड़ के उसके सर को आगे पीछे करने लगा।
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“अग्ग, गौ,”
“मुह खोल, लंड चूसने का भी मज़ा है।”
रजनी चुपचाप आंखे बंद करके दो दो लंड अपने अंदर लेने लगी। उसको अपना मुह पूरा खोलना पड़ा मोटा लंड लेने के लिए।
“अहहम्म अहह, गुड गर्ल,” वो बड़बड़ाया। दोनों रजनी को बीच में एडजस्ट करके धक्के मारने लगे।
दोनों रजनी को उस रात जम के चोदे, सीधा लिटा कर, उल्टा लिटा कर, कुतिया बना कर, लंड चुसवा के। सोनू दो बार करके पूरी तरह निढाल पड़ा था पर देवा तीसरी बार भी रजनी को अपने लंड पर बैठा लिया था।
“भाई अब चलते है,” सोनू उनकी तरफ देखता हुआ बोला, देवा आराम से लेटा हुआ था और रजनी उसके ऊपर चढ़ के अपनी गांड ऊपर नीचे कर के लगी हुई थी। वो सोनू की बात सुन के ठिठक गयी।
“तू क्यो रुक रही है, करती रह,” देवा बोला और उसकी गर्दन में हाथ डाल के उसे अपने से चिपका लिया, “बहुत जान है,” वो रजनी के गांड थपथपाया, “जब तक माल निकल नहीं जाता करती रह।”
रजनी अपनी कमर आगे पीछे ऊपर नीचे करके देवा के लंड का रस निचोड़ने लगी। बाद में चलते हुए दोनों ने रजनी का लूटा हुआ पर्स, पैसे और चेन सब वापस कर दिया।
“अब तो मिलते रहेंगे,” देवा मुसकुराता हुआ बोला।
प्रातिक्रिया दे