Dehati Chudai Wala Pyar
प्रिया और दिव्या दोनों बहनें थीं। प्रिया की उम्र १८ साल और दिव्या १९ साल की थी। दोनों दिखने में बहुत सुंदर थीं। वे अपने माँ रेशमा और बापू मनोहर जो एक किसान था, इस गाँव में सालों से रहते थे। उनका राजेश सिंह से अच्छी बनती थी जो अपनी माँ और बेटे शैलेश के साथ उनके पड़ोस में ही रहता था। Dehati Chudai Wala Pyar
राजेश एक छोटा व्यापारी था इसलिए उसे ज्यादातर घर से दूर रहना पड़ता था और उसकी माँ की भी काफी उम्र हो चुकी थी। जब शैलेश १० साल का था, राजेश सिंह की पत्नी का देहांत हो गया। तब से मनोहर के परिवार वाले शैलेश का बहुत ख़याल रखते थे। इसलिए प्रिया, दिव्या और शैलेश बचपन से एक-दूसरे को जानते थे।
अब शैलेश १९ साल का हो चुका था और काफी बड़ा हो गया था। गाँव काफी पिछड़ा हुआ था इसलिए वहाँ बिजली तो थी ही नहीं और पानी के लिए एक कुआँ था जिसमें से गाँव के सारे लोग पानी भरते थे। घरों में टॉयलेट और बाथरूम नहीं होते थे। लोग खेतों में या पहाड़ी के पीछे जाकर अपने आपको हल्का करते थे।
नहाने के लिए वह घास-फूस का छोटा सा बाथरूम होता था। अब प्रिया, दिव्या और शैलेश जवानी की दहलीज़ पर कदम रख रहे थे। लेकिन उनकी दोस्ती में अभी भी कोई बदलाव नहीं था। प्रिया जो बड़ी थी, वो थोड़ी होशियार थी। अब वो धीरे-धीरे सेक्स, औरत और मर्दों के बीच का संबंध तथा उनके सेक्स अंगों के बारे में जानने लगी थी।
उसकी कुछ सहेलियाँ जो उम्र में उससे बड़ी थीं और जिनकी शादी हो चुकी थी, वो प्रिया को चूत, लंड, संभोग और बच्चे पैदा करने आदि के बारे में जानकारी दिया करती थीं। प्रिया ये सब बातें दिव्या को बताती थी। प्रिया ने देखा कि उसके स्तन भी बड़े हो रहे थे और उसकी चूत पर भी बाल उग आए थे।
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एक दिन उसने दिव्या से कहा, “दिव्या, तुम अपना फ़्रॉक उतारो।”
दिव्या ने पूछा, “क्यों दीदी?”
प्रिया ने कहा, “मुझे तेरे स्तन और चूत देखनी है। मेरे स्तन बड़े हो रहे हैं और चूत पर बाल भी हैं। क्या तेरी चूत पर बाल हैं?”
दिव्या ने अपना फ़्रॉक उतार दिया। गाँव की औरतें और लड़कियाँ पैंटी नहीं पहनती थीं, कभी एक अंगिया पहन लेती थीं अंदर। दिव्या ने तो वो भी नहीं पहना था। प्रिया उसके नज़दीक आ गई और उसके छोटे-छोटे स्तनों को अपने हाथों में ले लिया और हल्के से दबाने लगी।
दिव्या बोली, “दीदी, गुदगुदी हो रही है।”
प्रिया ने कहा, “तेरे स्तन तो मेरे स्तनों से थोड़े छोटे हैं।”
फिर प्रिया ने देखा कि दिव्या की चूत पर हल्के और कोमल बाल उगे हुए थे। वो उस पर हाथ फेरकर बोली, “तेरी चूत पर भी बाल हैं। मतलब अब तू भी औरत बन रही है।” फिर दोनों हँसने लगीं। अब शैलेश को भी इन सब बातों में दिलचस्पी होने लगी थी।
उसे कुछ ऐसे दोस्त मिल गए थे जो उसे सेक्स के बारे में बताते थे। वो सब शहर जाकर आते और ब्लू फिल्म देखने के बाद सारा किस्सा शैलेश को बताते थे। शैलेश को उन्होंने एक किताब भी दी थी जिसमें नंगी लड़कियों और औरतों के फोटो होते थे। ये सब देखकर शैलेश गरमा जाता था। उसके दोस्तों ने उसे मुठ मारने के बारे में भी बताया था।
प्रिया ने १०वीं कक्षा पास की और फिर उसने पढ़ाई छोड़ दी। दिव्या १०वीं फेल हो गई थी इसलिए उसने भी पढ़ाई छोड़ दी। शैलेश भी १०वीं की पढ़ाई कर रहा था। शैलेश का मन पढ़ाई में कम और सेक्स की बातों में ज्यादा लगा रहता था। अब वो फोटो के बजाय हकीकत में किसी लड़की या औरत को नंगा देखना चाहता था। वो हमेशा इसी फिराक में रहता था कि कब उसे ऐसा मौका मिले।
एक दिन वो प्रिया और दिव्या से मिलने आया। शैलेश ने प्रिया को आवाज़ लगाई। इतने में दिव्या ने जवाब दिया, “मैं नहा रही हूँ। माँ और बाबूजी दूसरे गाँव में कुछ काम से गए हैं और दीदी अपनी किसी सहेली के घर गई है।” शैलेश को लगा यही मौका है दिव्या के नंगे बदन को देखने का और वो जहाँ दिव्या नहा रही थी वहीं एक पेड़ के पीछे छुप गया।
घास-फूस का बना हुआ बाथरूम था इसलिए यहाँ-वहाँ से खुला हुआ था। शैलेश एक खुली जगह से झाँकने लगा। उसने देखा दिव्या के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसके स्तन छोटे और गोल थे। उसका पेट एकदम समतल था और नीचे उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल उगे हुए थे।
उसकी गांड भी छोटी और गोल थी। दिव्या अपने हाथों से अपनी चूत साफ कर रही थी। बीच में वो अपने निप्पल्स को भी मसलकर साफ कर रही थी। ये सब देखकर शैलेश का लंड उसके पजामे के अंदर खड़ा हो गया और लंड के आगे से थोड़ा पानी निकला जिससे उसका पजामा गीला हो गया।
वो वहीं खड़े-खड़े मुठ मारने लगा। बहुत देर के बाद उसका लंड शांत हुआ। दिव्या नहाकर बाहर निकली। शैलेश पेड़ के पीछे से बाहर आया। इस वक्त दिव्या ने घाघरा और चोली पहना था। शैलेश उसके पास आ गया। दिव्या ने पूछा, “क्या हुआ शैलेश?”
शैलेश ने कहा, “ऐसे ही तुम दोनों से मिलने आया था।”
दिव्या ने कहा, “अच्छा किया। मैं भी अकेली थी।”
शैलेश ने कहा, “चलो कुछ खेलते हैं।”
दिव्या ने कहा, “क्या खेलें?”
शैलेश ने कहा, “अंदर कमरे में चलो। मैं तुम्हें आज एक नया खेल सिखाता हूँ।”
दिव्या ने कहा, “ठीक है।”
दोनों अंदर चले गए और शैलेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
शैलेश ने कहा, “मैं कुछ करतब दिखाऊँगा। तुम्हें वैसा ही करना होगा। अगर तुमने वैसा ही किया तो तुम जीत गईं। फिर तुम जो बोलोगी वो मैं करूँगा।”
दिव्या ने कहा, “क्या करना होगा मुझे?”
शैलेश ने कहा, “पहले मैं जो करता हूँ वो देखो फिर वैसा ही करो।”
शैलेश हाथ-पैर हिलाकर कुछ करतब दिखाता था। दिव्या वैसा ही करती थी। फिर शैलेश सर नीचे और पैर ऊपर करके दीवार के सहारे खड़ा हो गया। काफी देर तक वैसा ही खड़ा रहा।
शैलेश ने दिव्या से कहा, “अब तुम इस तरह खड़ी हो जाओ।”
दिव्या ने कहा, “मैं ये नहीं कर पाऊँगी।”
शैलेश ने कहा, “इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। मैं तुम्हारी मदद करूँगा।”
और शैलेश की बात सुनकर वो सर नीचे करके पैर ऊपर उठाने लगी। तभी शैलेश ने उसकी दोनों टांगें पकड़कर ऊपर कर लीं। ऐसे करने में दिव्या का घाघरा नीचे की ओर उसके मुँह पर गिरा और दिव्या का मुँह ढक गया। शैलेश को दिव्या की जाँघें और चूत दिखाई दे गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिव्या चिल्ला रही थी और कह रही थी, “मुझे कुछ दिख नहीं रहा है। मैं गिर जाऊँगी। शैलेश मुझे सीधा कर दो।”
शैलेश दिव्या के दोनों पैर पकड़कर खड़ा था।
शैलेश ने कहा, “कुछ नहीं होगा।” और उसके पैरों को दीवार के सहारे खड़ा किया।
शैलेश ने कहा, “तुम हिलना मत।”
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और अपना हाथ उसके कोरी जाँघों पर फेरने लगा। फिर उसने उसकी टांगें थोड़ी फैला दीं और अपनी एक उँगली उसकी चूत की छेद में डाल दी। अचानक दिव्या की टांगें दीवार से थोड़ी दूर हो गईं और एक तरफ वो कमर के बल गिर पड़ी। दिव्या रोने लगी। शैलेश ने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया।
शैलेश ने पूछा, “तुम्हें कहीं चोट तो नहीं लगी?”
दिव्या ने कहा, “नहीं। पर कमर में थोड़ा दर्द हो रहा है।”
शैलेश ने पूछा, “तुमने अपनी टांगें क्यों दीवार से हटाईं?”
दिव्या ने कहा, “वो तुम मेरी चूत में उँगली डाली और मुझे गुदगुदी हो रही थी।”
शैलेश ने कहा, “ठीक है। मैं तुम्हारी कमर पर तेल से मालिश कर देता हूँ।”
शैलेश तेल लेकर आया और उसने दिव्या के घाघरे को ऊपर किया। फिर वो उसकी कमर को तेल की मालिश करने लगा। धीरे-धीरे वो उसकी गांड और जाँघों का भी मालिश कर रहा था। शैलेश उसकी चूत में फिर से उँगली डाली और हिलाने लगा। उसकी चूत पर भी तेल लगाया। दिव्या अब हँस रही थी और कहने लगी, “शैलेश मुझे वहाँ गुदगुदी होती है।”
शैलेश ने पूछा, “तुम्हें ये अच्छा लगता है?”
दिव्या ने कहा, “हाँ, बड़ा मज़ा आ रहा है।”
शैलेश ने कहा, “तुम बस ऐसी ही लेटी रहो।”
शैलेश ने उसकी चूत के बालों पर हाथ फेरा और उसकी जाँघों को चाटने और चूमने लगा। उसकी चूत की छेद को फैलाकर उसमें जीभ डालकर फेरने लगा। दिव्या मस्त होती जा रही थी। वो कहने लगी, “शैलेश बहुत मज़ा आ रहा है।” और आहें भर रही थी।
शैलेश ने पीछे से उसकी चोली के हुक खोल दिए और चोली को अलग कर दिया। दिव्या अब ऊपर से नंगी हो गई और उसके गोल स्तन शैलेश के सामने थे। शैलेश दोनों हाथों से उसके दोनों स्तनों को दबाने लगा। और बीच में निप्पल्स को उँगलियों के बीच में रखकर मसलता था।
दिव्या शैलेश के बालों में हाथ फेर रही थी और उसका मुँह अपने स्तनों पर दबा रही थी। इतने में उन्हें प्रिया की आवाज़ सुनाई दी। वो दिव्या को बुला रही थी। तभी शैलेश खड़ा हो गया और जल्दी से दिव्या को चोली पहनाकर उसके हुक लगा दिए। दिव्या ने दरवाज़ा खोला और प्रिया ने देखा शैलेश अंदर बैठा हुआ था।
प्रिया ने पूछा, “शैलेश तुम कब आए?”
शैलेश ने कहा, “अभी थोड़ी देर पहले और हम दोनों बैठे-बैठे बात कर रहे थे।”
प्रिया नहाने चली गई।
तब शैलेश ने दिव्या से कहा, “मैं जा रहा हूँ।”
दिव्या ने कहा, “हम फिर कब ऐसे…”
शैलेश ने कहा, “हम फिर कभी फुरसत में मिलेंगे तब ये खेल खेलेंगे।”
दिव्या मुस्कुरा दी। एक दिन सुबह शैलेश जल्दी उठ गया। वो ऐसी ही सैर करने के लिए खेत की ओर चल पड़ा। उसने देखा एक औरत और लड़की हाथ में लोटा लिए पहाड़ी की तरफ जा रही थीं। उसे पता चल गया कि ये शौच करने जा रही हैं और वो उनके पीछे-पीछे चल पड़ा।
वो पहाड़ के पीछे की तरफ जा रही थीं। शैलेश उनके पीछे-पीछे जा रहा था। औरत वहाँ जाकर रुक गई और इधर-उधर देखने लगी। शैलेश झाड़ियों के पीछे छुप गया। वो औरत झाड़ियों के कुछ फासले पर खड़ी थी और उसके साथ उसकी लड़की भी थी। शैलेश ने देखा उस औरत ने अपना घाघरा कमर तक ऊपर कर लिया और अपने दोनों घुटनों से मोड़कर गांड फैलाकर बैठ गई।
शैलेश को उसकी बड़ी और घने बालों वाली काली चूत साफ दिखाई दे रही थी। उसने देखा वो औरत पेशाब कर रही थी और उसकी चूत से पेशाब की धारा निकल पड़ी। उसकी गांड में से कुछ निकल रहा था। शैलेश समझ गया वो शौच निकाल रही है। उसने देखा लड़की ने अपना सलवार खोला और गांड शैलेश की तरफ घुमाकर बैठ गई।
उसने देखा लड़की की गांड की छेद खुल रहा था और उसमें से शौच की लंबी लड़ी निकली। ये सब देखकर शैलेश का लंड खड़ा हो गया और वो वहीं मुठ मारने लगा। थोड़ी देर बाद वो औरत अपनी गांड में पानी डालकर हाथ से उसको साफ कर रही थी। उसने अपनी चूत को भी साफ किया। लड़की भी गांड धोकर खड़ी हो गई। वो दोनों वहाँ से चल दीं। शैलेश भी वहाँ से चला गया।
एक दिन प्रिया से मिलने उसकी सहेली गौरी आई थी। दिव्या उस वक्त बाहर गई हुई थी। गौरी की शादी हो चुकी थी और अपने ससुराल और पति के बारे में बता रही थी। उसने अपने सुहागरात के किस्से बताए। ये सुनकर प्रिया की चूत गीली होने लगी। उसका चेहरा भी कुछ लाल पड़ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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गौरी ने पूछा, “क्यों प्रिया, ये सब सुनकर तेरी चूत गीली हो गई ना?”
प्रिया चौंक गई और पूछा, “तुझे कैसे पता चला?”
गौरी ने कहा, “तेरा चेहरा और हाव-भाव देखकर पता चल गया।”
प्रिया ने कहा, “क्या करूँ गौरी, मुझे शादी करने की इच्छा है लेकिन शादी से पहले मैं कुछ मज़ा लूटना चाहती हूँ।”
गौरी ने कहा, “मैंने भी यही किया था। अपने गाँव में कल्लू है ना। उसके साथ मैंने कई बार चुदाई की थी। कल्लू की शादी हो गई तब उसने मुझे छोड़ दिया इसलिए मैंने भी शादी कर ली। मेरे पति और ससुराल वालों को इस बारे में कुछ नहीं पता।”
गौरी ने पूछा, “तुझे कोई पसंद है?”
प्रिया ने कहा, “हाँ… मुझे वो शैलेश पसंद है।”
गौरी ने कहा, “अच्छी बात है। उससे शादी कर ले।”
प्रिया ने कहा, “लेकिन उसकी पढ़ाई अभी बाकी है।”
गौरी ने कहा, “ठीक है, पढ़ाई के बाद शादी की बात करना। लेकिन अभी तू अपनी चूत को शांत करवा सकती है।”
प्रिया हँस पड़ी। एक दिन शाम को दिव्या कुएँ में पानी भरने जा रही थी। शैलेश ने उसे देख लिया और उसको बुलाया। दिव्या दौड़कर शैलेश के पास गई।
शैलेश ने कहा, “चलो हम खेत के पीछे चलते हैं। उस दिन की तरह हम वहाँ खूब मज़ा करेंगे।”
दिव्या ने कहा, “लेकिन पानी भरकर ले जाना है।”
शैलेश ने कहा, “घबराओ मत। कह देना शैलेश के साथ थी इसलिए थोड़ी देर हो गई।”
दोनों खेत की तरफ चल पड़े। खेत की चौड़ पर एक पेड़ के नीचे दोनों बैठ गए। दिव्या ने अपना घड़ा एक तरफ रख दिया। चारों ओर बड़ी घास होने के कारण किसी की नज़र उन पर नहीं पड़ सकती थी और वहाँ लोगों को आना-जाना कम था।
दिव्या ने कहा, “शैलेश, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
शैलेश ने कहा, “मैं भी।”
और दिव्या को अपने गले से लगा लिया। शैलेश ने दिव्या के गाल, सर, गर्दन और होंठों को चूमने लगा। दिव्या भी उसे चूम रही थी। फिर शैलेश ने दिव्या की चोली खोलकर अलग कर दी और उसका घाघरा भी उतार दिया। अब दिव्या पूरी तरह नंगी होकर शैलेश की गोद में लेटी हुई थी।
शैलेश ने भी अपना जब्बा और पजामा उतार दिया। दिव्या ने पहली बार किसी लड़के का लंड देखा था। शैलेश का लंड काफी बड़ा था। शैलेश ने अपने लंड को दिव्या के हाथ में थमा दिया। दिव्या बड़े प्यार से लेकर सहलाने लगी। शैलेश के बदन पर एक सिहरन दौड़ गई।
शैलेश ने कहा, “तुम इसे अपने मुँह में लेकर चूसो।”
दिव्या ने कहा, “मैं ये नहीं कर सकती।”
शैलेश ने कहा, “तुम एक बार करो। बाद में तुम इसे बार-बार चूसना चाहोगी।”
दिव्या ने शैलेश का लंड मुँह में भर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। शैलेश की आँखें बंद हो रही थीं। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था। अब दिव्या भी उसके लंड चूसने में लीन हो गई थी। अचानक ही शैलेश झड़ गया और अपना लंड का पानी दिव्या के मुँह में ही छोड़ दिया। दिव्या को झटका लगा।
उसने लंड को अपने मुँह से निकाल दिया। अभी भी लंड से लार टपक रही थी। दिव्या ने लंड को पकड़कर उसे चाटने लगी। शैलेश दिव्या के स्तनों को दबाने लगा। दिव्या ने कहा, “शैलेश मेरी चूत गीली हो रही है। लगता है मेरी चूत से भी अपना पानी निकलेगा।”
शैलेश दिव्या के दोनों टांगें फैला दीं और उसकी चूत में अपनी उँगली डाल दी। उसने देखा उसकी उँगली गीली हो चुकी थी। वो उँगली निकालकर चाटने लगा। ये देखकर दिव्या और गरमाने लगी और उसकी चूत से फुहारा छूट पड़ा। शैलेश ने अपने जीभ से उसके रस की चाटने लगा।
फिर वो कुछ रस लेकर अपने लंड पर लगा दिया और लंड को दिव्या की चूत के द्वार पर रखकर हल्का सा धक्का दिया। लंड आसानी से दिव्या की चूत के अंदर घुस गया। दिव्या चिल्ला उठी, “ओईईई माँ… मैं मर गई… आह… ओई… मेरी चूत फट गई।” शैलेश पूरे जोश में अपने लंड को दिव्या की चूत के अंदर-बाहर कर रहा था।
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दिव्या अब चिल्लाने के बजाय सिसकारियाँ भर रही थी। उसने अपनी टांगें और फैला दीं। शैलेश साथ में उसके स्तनों को भी दबा रहा था। दिव्या कह रही थी, “शैलेश और जोर से… वाह… आह… और जोर से… बहुत मज़ा आ रहा है… आह… सीई… आह।” इतने में दिव्या एक बार और झड़ गई और शैलेश ने भी अपना पानी दिव्या की चूत में उड़ेल दिया।
अब अंधेरा हो रहा था। दोनों फिर अपने कपड़े पहन लिए। शैलेश ने दिव्या को एक गोली दी और बोला, “इसे खा लेना तो तुम्हारा बच्चा नहीं होगा। वरना तुम माँ बन जाओगी।” दिव्या ये सुनकर डर गई। दिव्या अपना घड़ा लेकर कुएँ की ओर चल पड़ी और पानी भरकर घर गई। उसके माँ ने देर होने की वजह पूछी तो दिव्या ने कहा, “मैं शैलेश से मिली थी और बात करते-करते देर हो गई।”
जब से गौरी की बात सुनी थी तब से प्रिया बेचैन सी रहने लगी थी। उसे अपनी चूत की अंगार को शांत करना था। एक दिन सुबह प्रिया शौच करने के लिए निकल पड़ी। शैलेश ने प्रिया को देख लिया और उसका पीछा किया। वो प्रिया के ठीक पीछे-पीछे जा रहा था। प्रिया को थोड़ा सा शक हुआ कि कोई उसके पीछे है।
वो पहाड़ के पीछे जाकर झाड़ियों में अपना घाघरा ऊपर करके शौच करने के लिए बैठ गई। शैलेश एक पेड़ के पीछे से ये सब देख रहा था। लेकिन उसे कुछ साफ-साफ दिखाई नहीं दे रहा था। प्रिया की चूत की झलक उसे दिखाई दी और ये देखकर ही मुठ मारने लगा। प्रिया को पेड़ के पीछे झाड़ियों में कुछ आहट सुनाई दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसे लगा कि कोई उसे देख रहा है। वो जल्दी से अपनी गांड साफ करके घास में से छुपकर वहाँ से निकल गई। शैलेश मुठ मारने में मशगूल था। उसने देखा तो प्रिया वहाँ से जा चुकी थी। वो जैसे ही अपना पजामा ऊपर कर रहा था पीछे से किसी ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया। उसने मुड़कर देखा तो प्रिया थी। शैलेश एकदम चौंक गया।
प्रिया ने पूछा, “तो आप मेरा पीछा कर रहे थे। अगर गांड देखने का इतना ही शौक है तो चलो मैं दिखाती हूँ।”
प्रिया ने अपना घाघरा उतारकर ज़मीन पर डाल दिया। अब वो नीचे से बिल्कुल नंगी थी। प्रिया ने कहा, “चलो जो करना है कर लो।” शैलेश ने आगे बढ़कर उसके गांड के पास जाकर बैठ गया और दोनों गांड पर हाथ फेरकर दबाने लगा। बाद में उसकी गांड को फैलाकर उसकी छेद में नाक डालकर सूँघने लगा।
शैलेश ने कहा, “प्रिया तुम्हारी गांड से बड़ी मदक खुशबू आ रही है।”
प्रिया ने अभी-अभी शौच किया था इसलिए उसकी गांड से गंध आ रही थी। शैलेश ने थोड़ी देर अपनी नाक उसकी गांड की छेद में डालकर रगड़ी और फिर जीभ निकालकर चाटने लगा। प्रिया ने कहा, “बहुत अच्छा लग रहा है शैलेश।” शैलेश उसकी गांड की छेद में जीभ डालकर घुमा रहा था और अपने हाथ आगे ले जाकर प्रिया की चूत की छेद में उँगली डालकर हिला रहा था।
प्रिया आहें भरने लगी, “ऊह… आह… सीईह… आह।” थोड़ी देर में प्रिया की चूत से रस बहने लगा और शैलेश का पूरा हाथ गीला कर दिया। शैलेश रस से भरे हाथ को चाटने लगा। ये देखकर प्रिया और भी गरम गई और चोली के ऊपर से अपने स्तनों को दबा रही थी। प्रिया ने कहा, “शैलेश मैं तुमसे प्यार करती हूँ। तुम मेरी चूत की प्यास कब बुझाओगे?”
शैलेश ने कहा, “वक्त आने दो। मैं तुम्हारी चूत की प्यास बुझाऊँगा।” इतने में कुछ लोगों की बातें करने की आवाज़ आने लगी। शैलेश जल्दी से खड़ा हो गया और प्रिया ने घाघरा फटाक से लेकर पहन लिया। दोनों वहाँ से चल पड़े। रास्ते में प्रिया ने कहा, “मैं कल शाम को नदी पर नहाने जाऊँगी। तुम वहाँ आ जाना।”
शैलेश खुश हो गया। उसे दोनों बहनों को चोदने को मिल रहा था। और दोनों उससे प्यार भी करती थीं। दूसरे दिन शाम होते ही शैलेश नदी के पास जाकर बैठ गया। लेकिन काफी देर के बाद भी प्रिया नहीं आई। सूरज ढल रहा था। कुछ देर बाद उसे कोई आता हुआ दिखाई दिया। वो प्रिया थी।
शैलेश ने पूछा, “तुमने आने में देर क्यों कर दी?”
प्रिया ने कहा, “मैंने सोचा थोड़ा अंधेरा हो जाएगा तो कोई हमें देख नहीं सकता।”
शैलेश बहुत खुश हो गया। फिर प्रिया ने अपनी चोली और घाघरा उतार दिया और पूरी तरह नंगी हो गई। शैलेश ने अपना जब्बा और पजामा उतार दिया। दोनों फिर एक-दूसरे से लिपट गए और पानी में उतरे। प्रिया के स्तन शैलेश की छाती से दब रहे थे। शैलेश का लंड खड़ा हो गया था और वो प्रिया की जाँघों के बीच घुस रहा था।
दोनों पानी डालकर एक-दूसरे को साबुन से रगड़कर साफ करने लगे। शैलेश प्रिया के स्तनों और पेट को हल्के-हल्के हाथ से रगड़ रहा था। प्रिया शैलेश की छाती पर हाथ घुमा रही थी। बीच में दोनों एक-दूसरे को चूमा-चाटी भी करते थे। शैलेश ने प्रिया की चूत को अपने हथेली में भर लिया और उसके चूत के होंठों को दबाने लगा। प्रिया चिल्ला उठी।
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प्रिया ने कहा, “तुम तो बड़े बेरहम हो। ज़रा धीरे से।”
शैलेश ने कहा, “ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता।”
प्रिया ने कहा, “मैं तो हमेशा तैयार हूँ। तुम जब चाहे मुझे चोद सकते हो।”
शैलेश ये सुनकर खुश हो गया और अपनी एक उँगली उसकी चूत में डाल दी। प्रिया साबुन लगाकर शैलेश की लंड की सफाई कर रही थी। लंड अभी भी तना हुआ था।
प्रिया ने कहा, “तुम्हारा लंड तो काफी बड़ा है।”
शैलेश ने कहा, “तुम्हारी कोरी चूत देखकर ये और बड़ा हो गया।”
प्रिया झुककर उसके लंड को अपने मुँह में ले गई और चूसने लगी। काफी देर तक चूसती रही तब शैलेश ने उसके मुँह में झड़ दिया। प्रिया ने उसके लंड का सारा पानी पी लिया। फिर शैलेश ने प्रिया की गांड के ऊपर और छेद में साबुन लगाया। अपने लंड पर भी साबुन लगाकर और लंड को प्रिया की गांड के छेद के पास रखकर एक धक्का दिया। लंड पूरा प्रिया की गांड में घुस गया। प्रिया चिल्ला उठी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसने कहा, “निकालो अपना लंड। मुझे दर्द हो रहा है।”
शैलेश ने कहा, “थोड़ी देर में दर्द कम हो जाएगा।”
शैलेश अपना लंड उसकी गांड के अंदर-बाहर करने लगा और अब प्रिया को बहुत मज़ा आ रहा था। दोनों ने एक-दूसरे की अच्छी तरह सफाई की। नहाकर कपड़े पहन लिए और घर की ओर चल पड़े। घर पहुँचने पर माँ ने पूछा, “प्रिया इतनी देर क्यों लगा दी?”
प्रिया ने कहा, “एक सहेली भी साथ में थी नदी पर। उसके साथ बात करते-करते वक्त निकल गया और पता भी नहीं चला।”
अब शैलेश ने १०वीं की परीक्षा दी। उसे पास होने की कोई उम्मीद नहीं थी। पर जब रिजल्ट आया तो उसने देखा वो पास हो गया। उसने दिव्या और प्रिया को ये खबर सुनाई। दोनों बहुत खुश हो गईं। राजेश सिंह भी बेटे की कामयाबी पर खुश हो गया। अब शैलेश शहर जाकर कुछ नौकरी करना चाहता था।
राजेश सिंह ने कहा, “जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।”
एक दिन रेशमा और मनोहर की अपने किसी रिश्तेदार की लड़की की शादी के लिए शहर जाना था। वो प्रिया और दिव्या को भी ले जाना चाहते थे। प्रिया ने साफ मना कर दिया। उसने सोचा अगर माँ, बापू और दिव्या चले जाएँ तो वो शैलेश के साथ अकेले कुछ वक्त बिता सकेगी। प्रिया के मना करने पर मनोहर ने कहा, “दिव्या तुम भी दीदी के साथ यहीं रुक जाओ। हम दोनों जाकर आते हैं।”
प्रिया ने बहुत समझाया कि वो दिव्या को भी साथ में ले जाएँ। उसने कहा, “डरने की कोई बात नहीं है बापू और फिर पड़ोस में शैलेश और उसकी दादी भी तो हैं।” लेकिन उसकी माँ के जिद करने पर उसको मान जाना पड़ा और दिव्या को प्रिया के साथ रहने के लिए कहा गया। जाने से पहले मनोहर ने जाकर शैलेश और उसकी दादी को कहा, “हम दो दिन के लिए शहर जा रहे हैं। तुम ज़रा प्रिया और दिव्या का ख़याल रखना।”
शैलेश ये सुनकर खुश हो गया और कहा, “हम अच्छी तरह उनका ख़याल रखेंगे।” दूसरे दिन दोपहर को मनोहर और रेशमा शहर के लिए निकल पड़े। शाम को शैलेश दिव्या और प्रिया के पास आया। दोनों बहनें उसे देखकर खुश हो गईं। दिव्या ने कहा, “शैलेश तुम रात को यहीं रुक जाओ ना…”
शैलेश ने कहा, “कोई बात नहीं। मैं यहीं रुक जाता हूँ।”
फिर रात को तीनों ने साथ में खाना खाया। शैलेश मनोहर के कमरे में सोने चला गया। दिव्या और प्रिया अपने कमरे में सोने की तैयारी करने लगीं। करीब एक घंटे तक सन्नाटा था पूरे घर में। शैलेश अभी सोया नहीं था। वो ख़यालों में खोया हुआ था कि अचानक उसकी कमरे का दरवाज़ा खुला और उसने देखा प्रिया कमरे में दाखिल हो रही थी।
शैलेश उठकर खाट पर बैठ गया। प्रिया ने उसके पास आकर उसे लिपट गई। शैलेश भी उसे लिपट गया और दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। प्रिया ने कहा, “मैं तो दिव्या के सोने का इंतज़ार कर रही थी। मेरी चूत में खुजली हो रही थी और जब तुम बापू के कमरे में हो तो मेरी चूत और बेचैन हो उठी। मेरी चूत को तुम्हारा लंड चाहिए।”
शैलेश ने कहा, “मैं भी सोच रहा था कि तुम कब आओगी।”
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दोनों खाट पर लेट गए। शैलेश ने सिर्फ पजामा पहना हुआ था। प्रिया शैलेश की छाती के ऊपर हाथ घुमा रही थी। वो शैलेश के गाल, गर्दन, छाती और पेट पर चूमने लगी। शैलेश उसके पीठ पर हाथ घुमा रहा था। प्रिया ने उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और नीचे की तरफ खींच लिया।
शैलेश ने अंदर कुछ न पहना था। उसका ६ इंच का लंड एकदम तनकर खड़ा था जो अब साँप के तरह फन उठाए खड़ा था। प्रिया उसके लंड के नज़दीक जाकर उसे अपने हाथ में भर लिया और दबाने लगी। उसने लंड का ऊपरी कवच को नीचे की तरफ किया जिससे लंड का अंदर का लाल रंग का हिस्सा दिखने लगा।
प्रिया ने उसे अपने मुँह में भर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी। शैलेश मस्त होता जा रहा था। बीच-बीच में प्रिया उसके लंड के नीचे के गोलियों को चाट रही थी। शैलेश अब कराहने लगा था। उसने वहीं झड़ दिया और प्रिया ने उसके लंड से निकला रस को पूरी तरह चाट लिया। शैलेश ढीला होकर खाट पर लेटा था।
प्रिया ने अपनी कमीज और सलवार उतार दी और वो शैलेश के ऊपर आ गई। उसकी चूत पर एक सफेद रंग का कपड़ा बंधा हुआ था। शैलेश ने पूछा, “ये क्या बाँध रखा है तुमने?” प्रिया ने कहा, “मेरा मासिक चल रहा है इसलिए मैंने ये कपड़ा बाँधा है जिससे मेरी सलवार खराब न हो।”
फिर वो अपनी चूत शैलेश के मुँह के पास लेकर आई। उसकी चूत में से रस बह निकला था जिसकी गंध शैलेश की नाक में घुस गई। शैलेश ने पहले वो कपड़ा निकाल दिया जो पूरी तरह गीला हो चुका था। प्रिया की चूत के बालों पर भी उसका चूत रस लगा हुआ था। शैलेश ने उसके चूत के होंठों को फैला दिया और अपनी नाक उसकी चूत की छेद में डालकर रगड़ने लगा।
प्रिया अपनी चूत को धक्का मार रही थी शैलेश के मुँह पर। शैलेश ने जीभ निकालकर उसकी चूत के बालों को चाटा। उसने चूत के होंठों को चूमा और फिर अंदर छेद में डालकर चूसने लगा। शैलेश अपने हाथों को प्रिया की गांड की तरफ ले गया और गांड की छेद में उँगली डालकर रगड़ने लगा।
प्रिया खुद ही अपने स्तनों को मसल रही थी। उसकी आँखें बंद थीं और आहें भर रही थी। शैलेश के लगातार चाटने से प्रिया की चूत से और रस निकलने लगा। शैलेश ने उस रस को पी लिया। अब शैलेश उठ गया और प्रिया को खाट पर लिटा दिया। उसने लंड पर कंडोम पहन लिया। शैलेश प्रिया के ऊपर बैठ गया और पहले उसके स्तनों को मसलने लगा।
उसके निप्पल्स को चूसा। प्रिया कुछ बड़बड़ाए जा रही थी। “ऊह… हम्म… आह्ह… सीई… हम्म… आह।” ये सुनकर शैलेश का लंड फिर तनकर खड़ा हो गया। उसने अपने लंड को प्रिया की चूत के द्वार पर रख दिया और धीरे-धीरे अंदर की ओर घुसाने लगा। शैलेश ने पहले दिव्या को चोदा था जिससे उसे इसका अनुभव हो गया था।
लेकिन प्रिया की चूत अभी कोरी थी। शैलेश ने कोशिश जारी रखी और एक झटका देकर उसने अपना लंड प्रिया की चूत में डाल दिया। प्रिया चिल्ला उठी… “ओई माँ… मैं मर गई… ओह्ह… शैलेश… अपना लंड निकालो… आह… बहुत दर्द हो रहा है… आह।” शैलेश मस्त होकर अपने लंड को प्रिया की चूत के अंदर-बाहर कर रहा था।
थोड़ी देर बाद प्रिया शांत हो गई। अब वो अपनी टांगें और फैला दी जिससे शैलेश को और सुविधा हो उसे चोदने में। प्रिया कह रही थी, “बहुत मज़ा आ रहा है शैलेश। चोदो मुझे… खूब चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… सीईह… आह… हम्म… आह।” साथ में शैलेश उसकी स्तनों की हाथ से चुदाई कर रहा था।
थोड़ी देर में उसके लंड ने पानी छोड़ दिया लेकिन कंडोम पहना हुआ होने के कारण उसका पानी प्रिया की चूत में नहीं उतरा। प्रिया की आवाज़ सुनकर दिव्या उठ गई। उसने आवाज़ की दिशा में कान लगाए तो पता चला कि आवाज़ शैलेश जहाँ सो रहा था उस कमरे से आ रही थी। उसने कमरे की छोटी खिड़की से देखा तो एकदम चौंक गई।
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उसकी दीदी और शैलेश चुदाई कर रहे थे। उसे ये सहन नहीं हुआ और वो दरवाज़े को धक्का देकर अंदर घुस गई। अचानक दिव्या के अंदर आने से शैलेश और प्रिया अवाक रह गए। दोनों नंगे हालत में थे। दिव्या ने कहा, “तो ये बात है दीदी। मुझे सुलाकर खुद मस्त होकर चुदाई कर रही हो।”
प्रिया खड़ी हो गई और उसने कहा, “हाँ मैं चुदाई कर रही हूँ। तो तुझे क्यों तकलीफ हो रही है?”
दिव्या ने कहा, “मुझे तकलीफ है। शैलेश सिर्फ मेरे साथ ही चुदाई करेगा।”
प्रिया ने कहा, “अरी जा… मैं शैलेश से प्यार करती हूँ। हम दोनों ने पहले एक बार भी चुदाई कर चुके हैं।”
दिव्या ने कहा, “देखो दीदी। पहले शैलेश ने मुझे चोदा था। जब मैं एक बार कुएँ में पानी भरने गई थी। तब हम दोनों ने एक-दूसरे से प्यार का इजहार किया था।”
प्रिया ने कहा, “प्यार का इजहार तो शैलेश ने मुझसे भी किया था।” क्यों शैलेश? प्रिया ने शैलेश से पूछा।
शैलेश ने कहा, “तुम दोनों लड़ाई मत करो। देखो मैं तुम दोनों से प्यार करता हूँ। और तुम दोनों को खुश रखूँगा।”
दिव्या ने कहा, “नहीं। मैं तुम्हें किसी और के साथ नहीं बाँट सकती।”
मुझे भी अच्छा नहीं लगता तुम किसी और के साथ चुदाई करो, चाहे वो फिर मेरी बहन ही क्यों न हो। प्रिया ने कहा।
शैलेश अब परेशान हो गया। अभी भी प्रिया और शैलेश नंगे हालत में ही खड़े थे। दिव्या की नज़र बीच-बीच में शैलेश के लंड के ऊपर पड़ रही थी। शैलेश ने भी ये देख लिया।
शैलेश ने कहा, “देखो रात काफी हो चुकी है। दो दिन के लिए मैं तुम दोनों की चुदाई करूँगा। पर भगवान के लिए लड़ाई मत करो।”
दिव्या ने कहा, “ठीक है।”
प्रिया भी मान गई।
दिव्या ने कहा, “अब मेरी बारी है। तुम इतनी देर दीदी को खुश किया अब मुझे चोदो।”
शैलेश ने कहा, “ठीक है।”
दिव्या ने अपनी घाघरा चोली उतार दी और खाट पर लेट गई। दिव्या ने कहा, “तुम अपना लंड मुझे चूसने दो।” शैलेश ने अपना लंड दिव्या के मुँह में रख दिया और वो मज़े से चूसने लगी। शैलेश दिव्या के दोनों स्तनों को मसलने लगा। ये सब देखकर प्रिया की हालत खराब होने लगी।
वो वहीं खड़े-खड़े अपनी चूत में उँगली डालकर चुदाई कर रही थी। थोड़ी देर में शैलेश का लंड ने दिव्या के मुँह में पानी छोड़ दिया। शैलेश ने दिव्या को पेट के बल लिटा दिया और उसकी गांड को फैलाकर अंदर जीभ डालकर चाटने लगा। प्रिया से रहा नहीं गया और वो पास आकर शैलेश के लंड को सहलाने लगी और जीभ से चाट रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
शैलेश का लंड तनकर खड़ा हो गया और उसने लंड को दिव्या की गांड के द्वार पर रखकर एक धक्के में अंदर डाल दिया। दिव्या चिल्ला उठी… “ओईई माँ… मैं मर गई… आह… शैलेश रगड़-रगड़कर दिव्या की गांड मारने लगा। अब दिव्या को भी मज़ा आने लगा। थोड़ी देर के बाद दोनों थक गए और शैलेश दिव्या के बगल में लेट गया।
प्रिया उसके पास आकर उसे चूमने लगी। शैलेश भी उसे चूमने लगा। फिर दोनों बहनें उसके दोनों तरफ लेटी थीं और शैलेश उनके बीच में था। तीनों सो गए। सुबह हुई और शैलेश की आँखें खुल गईं। उसने देखा प्रिया और दिव्या अभी सो रहे थे। उसने दोनों की चूत को सहलाया फिर दोनों को बारी-बारी से चूमा।
दोनों के स्तनों को सहलाया और बारी-बारी से दोनों के होंठों को चूमा। इतने में दोनों बहनें उठ गईं। दोनों ने शैलेश को गले लगाया और चूमने लगीं। तीनों ने स्नान किया और कपड़े पहन लिए। प्रिया ने कुछ नाश्ता बनाया और तीनों ने नाश्ता किया।
दिव्या ने कहा, “शैलेश तुम मुझसे शादी करोगे?”
प्रिया ने कहा, “नहीं, शैलेश मुझसे शादी करेगा।”
दोनों फिर लड़ाई पर उतर आए।
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शैलेश दोनों को शांत करते हुए बोला, “मैं अभी शादी नहीं कर सकता। मैं शहर जाकर नौकरी करूँगा और जब मेरे पास बहुत रुपया आ जाएगा तब मैं शादी करूँगा।”
प्रिया ने कहा, “मुझे मंजूर है लेकिन शादी तुम मुझसे ही करना।”
दिव्या बोल पड़ी, “नहीं मुझसे।”
शैलेश ने कहा, “मेरे पास बहुत रुपया आ जाएगा तब तो मैं तुम दोनों से शादी कर लूँगा। लेकिन तब तक तुम दोनों को इंतज़ार करना पड़ेगा।”
दोनों बहनें ये सुनकर उदास हो गईं। शैलेश ने पूछा, “क्या तुम दोनों मेरा इंतज़ार कर सकती हो?” दोनों ने हाँ में गर्दन हिला दी। दोपहर को तीनों ने मिलकर चुदाई की। रात को फिर तीनों साथ में लेटे हुए थे। तीनों ने कुछ नहीं पहना था। शैलेश दिव्या और प्रिया के बीच में लेटा हुआ था।
प्रिया उसके गर्दन और गाल को चूम रही थी और छाती पर हाथ घुमा रही थी। दिव्या शैलेश के लंड को हिला रही थी। शैलेश को बहुत मज़ा आ रहा था। शैलेश का लंड तनकर खड़ा हो गया। शैलेश दोनों की चूत में उँगली डालकर हिला रहा था। थोड़ी देर तीनों ऐसे ही लेटे रहे। फिर शैलेश उठकर बैठ गया।
प्रिया ने पूछा, “क्या हुआ?”
शैलेश ने कहा, “मैं आज तुम दोनों को चोदने जा रहा हूँ।”
दिव्या ने कहा, “अच्छी बात है। बाद में तुम बताना किसे चोदने में ज्यादा मज़ा आया।”
प्रिया ने कहा, “इसमें बताने वाली क्या बात है। मुझे चोदने में ही शैलेश को ज्यादा मज़ा आने वाला है। ये तो उसको पहले ही पता है।”
शैलेश ने कहा, “कोई बात नहीं। मैं आज तुम दोनों को चोदने के बाद फैसला करूँगा।”
दिव्या ने कहा, “ठीक है।”
शैलेश प्रिया की चूत को चाटने लगा और दिव्या की चूत में उँगली डालकर चोद रहा था। फिर दोनों के स्तनों को मसलने लगा। दोनों बहनों को खूब मज़ा आ रहा था। शैलेश ने दोनों बहनों को अपने टांगें फैलाकर खड़े होने को कहा। दोनों खड़ी हो गईं। शैलेश दिव्या के पीछे आकर उसके गांड के ठीक नीचे बैठ गया और छेद में जीभ डालकर चाटने लगा।
वो प्रिया की गांड में उँगली डालकर हिला रहा था। शैलेश ने प्रिया को खाट पर लिटा दिया और उसकी चूत के आगे बैठ गया। उसने प्रिया की चूत के छेद को खोल दिया। उसने पहले अपनी थूक से उसकी चूत की मालिश की और लंड उसके द्वार पर रख दिया। धीरे-धीरे वो लंड को प्रिया की चूत के अंदर डालने लगा और पूरा लंड प्रिया की चूत की गहराइयों में उतार दिया।
प्रिया को खूब मज़ा आ रहा था। वो सिसकियाँ भर रही थी। ये देखकर दिव्या अपनी चूत में उँगली डाल दी। शैलेश ने कहा, “दिव्या तुम मेरी गांड को चाटो।” दिव्या शैलेश की गांड के नीचे लेट गई और अपनी जीभ उसकी गांड की छेद में डालकर रगड़ना शुरू किया। शैलेश को भी मज़ा आने लगा।
इतने में प्रिया की चूत से पानी का फव्वारा छूट पड़ा। शैलेश जमकर प्रिया को चोद रहा था। प्रिया भी उसको सहयोग दे रही थी। उसने अपनी टांगें और फैला दीं। थोड़ी देर में शैलेश ने भी अपना पानी प्रिया की चूत की गहराइयों में उतार दिया। दिव्या शैलेश की गांड चाट रही थी। शैलेश ने प्रिया की चूत से अपना लंड निकाला और उसने प्रिया को उसे चूसने को कहा।
उसका लंड उसका और प्रिया का पानी से पूरा गीला था। प्रिया उसे चूसने लगी। शैलेश का लंड फिर तनकर खड़ा हो गया। उसने दिव्या को खाट पर पेट के बल लिटा दिया और अपना लंड उसकी गांड के द्वार पर रखकर एक धक्के में अंदर डाल दिया। दिव्या चिल्ला उठी… “ओई माँ… मैं मर गई… आह… मेरी गांड फट गई… ओई… निकालो अपने लंड को… ओई…” शैलेश कहाँ सुनने वाला था।
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उसने जमकर दिव्या की गांड को चोदा। उसने अपना पानी दिव्या की गांड में छोड़ दिया। शैलेश ने अपना लंड दिव्या की गांड से निकाल दिया पर दिव्या को अभी भी दर्द हो रहा था। उसकी आँखों में आँसू आ गए। ये देखकर शैलेश ने पूछा, “दिव्या, क्या तुम्हें दर्द हो रहा है, गांड में?”
दिव्या ने कहा, “नहीं। बस थोड़ा सा।” वो अपना दर्द छुपा रही थी। शैलेश ने दिव्या को प्यार से गले लगा लिया और चूमने लगा। दिव्या भी उसे चूमने लगी। फिर उसने प्रिया को भी गले लगाया और उसके स्तनों को चूमने लगा। उनको इस खेल में काफी समय निकल गया और सुबह हो चली थी। तीनों फिर सो गए और सुबह देर से उठे।
दोपहर को दिव्या और प्रिया के माँ-बाप आने वाले थे। तीनों नहा-धोकर तैयार हो गए। शैलेश अपने घर चला गया। दोपहर में मनोहर और रेशमा घर पहुँचे। उन्होंने दोनों बेटियों से उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने कहा, “हमें कोई तकलीफ नहीं हुई माँ। शैलेश ने हमारा बहुत अच्छा ख़याल रखा।”
कई दिन बीत गए। एक दिन शैलेश का एक दोस्त शहर से आया। उसने कहा वो जहाँ काम करता है वहाँ एक आदमी की ज़रूरत है और अगर चाहे तो वो आ सकता है। शैलेश ये सुनकर खुश हो गया और शहर जाने की तैयारी करने लगा। राजेश सिंह ने भी उसे इजाजत दे दी। उसने ये बात प्रिया और दिव्या को बताया।
दोनों दुखी हो गए पर शैलेश ने उन्हें उसने जो पहले कहा था वो बात याद दिलाई। फिर शैलेश सबसे विदाई लेकर शहर चला गया। कई महीने बीत गए। इधर मनोहर और रेशमा प्रिया की शादी करवाने का सोच रहे थे। लेकिन प्रिया तैयार नहीं हो रही थी। उसने शैलेश की बात अपने माँ-बाप को नहीं बताई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दिव्या भी शैलेश को लेकर चुप थी। उसने सोचा अगर दीदी की शादी हो जाए तो वो शैलेश से शादी की बात अपने माँ-बाप को बता सकेगी। प्रिया के ऊपर शादी के लिए उसके माँ-बाप का दबाव बढ़ रहा था। शैलेश का भी कुछ अता-पता नहीं था। एक दिन प्रिया ने शैलेश के पिताजी राजेश सिंह से शैलेश के बारे में पूछा।
उन्होंने कहा, “शहर में उसकी नौकरी मिल गई है। उसने मुझे बताया था। इसके अलावा मुझे उसके बारे में कुछ पता नहीं।”
प्रिया ये सुनकर निराश हो गई। एक दिन उसने अपने और शैलेश के बारे में रेशमा को सब बता दिया। रेशमा ने मनोहर को बताया। उन्होंने सोचा इसमें कोई बुराई नहीं है और प्रिया से कहा, “हम तुम्हारी शादी शैलेश से करवा देंगे।” दिव्या को जब ये पता चला तो उसे झटका लगा। उसने भी अपने और शैलेश के बारे में माँ-बाप को बता दिया और कहा कि वो भी शैलेश से ही शादी करना चाहती है।
अब मनोहर और रेशमा परेशान हो गए। उन्होंने शैलेश के पिता राजेश सिंह से बात की। राजेश ने शैलेश से बात करने के लिए कहा। लेकिन शैलेश का कुछ अता-पता नहीं था। शैलेश को गए एक साल होने आया था। एक दिन उसका दोस्त जो उसे लेकर गया था वो गाँव आया।
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राजेश ने उससे शैलेश के बारे में पूछा तो उसने कहा, “वो तो अब बड़ा आदमी हो गया है। किसी फैक्टरी के सेठ का खास आदमी बन गया है। उसके पास भी उसका खुद का घर, गाड़ी और बहुत से पैसे भी हैं।” राजेश ये सुनकर खुश हो गया। उसने पूछा कि वो गाँव आने वाला है। उसके दोस्त ने कहा, “ये तो मुझे पता नहीं।” प्रिया और दिव्या को भी ये बात पता चल गई। वो अभी भी शैलेश के आने का इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन मनोहर की परेशानी बढ़ रही थी।
उसने फिर दोनों बहनों की शादी करवाने का फैसला किया। उसने दोनों की शादी एक साथ करवा दी। लेकिन दोनों इस शादी से खुश नहीं थे। शादी के बाद दोनों दूसरे गाँव चले गए। दिव्या और प्रिया की शादी के करीब ६ महीने के बाद शैलेश गाँव आया। राजेश सिंह और उसकी दादी बहुत खुश हो गए। तब उसे पता चला कि दिव्या और प्रिया की शादी हो गई है। उसने मनोहर से कहा, “आपने अच्छा किया जो उनकी शादी करवा दी। मेरी शादी हो चुकी है।” शैलेश ने शहर में एक लड़की से शादी कर ली थी।
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