Chut Gand Pela Peli Kahani
रीमा का बेटा विपुल कॉलेज से छुट्टियों में घर आया। दोनों मियाँ-बीवी ने मिलकर अपने अलग होने की खबर उसे सुनाई। वह करता भी क्या? आखिर उसके वश में कुछ नहीं था। उसने अपनी छुट्टियाँ बिताईं और वापस अपने कॉलेज चला गया। इसी बीच रीमा और संजय दोनों अलग होने की बात पर बहस करते रहे। Chut Gand Pela Peli Kahani
दोनों को अलग तो होना ही था। साथ जीना दूश्वर था। इसलिए दोनों मिलकर एक फैसले पर पहुँचे। संजय अपनी जमा-पूँजी अपने पास रखना चाहता था। इसलिए दोनों ने यह फैसला किया कि रीमा उससे एक रुपया नकद नहीं लेगी, हाँ उन दोनों का जो फ्लैट है उसके बिकने पर जो रकम आएगी वह रीमा की होगी।
यह मकान 22 पहले संजय ने पूरी कीमत चुकाकर खरीदा था। इस मकान में कई यादें बसी थीं जिन्हें भूलाना न तो संजय के वश में था न ही रीमा के वश में। जिंदगी उन्हें आज इस मोड़ पर ले आई थी जहाँ दोनों को अलग होना पड़ रहा था। रीमा को भी प्रस्ताव अच्छा लगा क्योंकि आज की कीमत के हिसाब से मकान की कीमत करीब 50,00,000/- थी और फिर संजय ने उसे कुछ नकद देने का भी वादा किया था।
सो रीमा को अपनी जिंदगी में पैसों की तकलीफ नहीं होने वाली थी। रीमा ने जो मकान का पैसा उसे मिलने वाला था उसे बेचने के लिए इश्तिहार दे दिया। उसने एक एस्टेट एजेंट से मिलने का अपॉइंटमेंट ले लिया। एस्टेट एजेंट समीर ने उससे कहा कि वह उसके मकान पर ही उससे मिलेगा जिससे वह मकान भी देख लेगा।
समीर एक मेहनती नौजवान था, साथ ही बड़ा हैंडसम और ईमानदार भी था। वह सही वक्त पर सही जगह पहुँच गया। उसने वो सारे कागजात लाए थे जिसे उसे रीमा को समझाने थे। जब वह रीमा के घर पहुँचा तो उसे अपनी किस्मत पर नाज़ होने लगा। बाहर से ही मकान इतना अच्छा था। जरूर उसे कमीशन के रूप में अच्छे-खासे पैसे मिलने वाले थे। उसने दरवाजे की घंटी बजा दी।
रीमा ने दरवाजा खोला और अपने दरवाजे पर एक नौजवान को खड़ा देख चौंक पड़ी। उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका एस्टेट एजेंट इतना हैंडसम और नौजवान होगा। उसने समीर को अंदर आने के लिए कहा। अंदर आते ही उसने देखा कि समीर की निगाहें उसके अधखुले ब्लाउज से नजर आती उसकी चुचियों पर टिकी हुई थीं। उसकी चूत में सनसनी मचने लगी।
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संजय को छोड़ने के बाद वह कुछ ज्यादा ही सेक्सी कपड़े पहनने लग गई थी। उसने महसूस किया था कि अपनी ढलती उम्र के बावजूद वह मर्दों के आकर्षण का केंद्र बन जाती है। जहाँ भी जाती, नौजवान मर्द उसे घूरने लगते। और यह सब देख वह खुश होती। दोनों जन बैठकर विचार-विमर्श करने लगे। फिर रीमा ने समीर को घर दिखाया।
एक बार फिर रीमा ने महसूस किया कि समीर कभी उसकी चुचियों पर नजरें गड़ा देते तो कभी उसके उभरे हुए कुल्हों पर। रीमा ने उसे चिढ़ाने के लिए अपने हाथ अपनी चुचियों पर रखकर अपनी ब्रा को एडजस्ट करने लगी। और वहीं समीर को अपने आप को संभालने में बड़ी मुश्किल होने लगी रही थी। घर का चक्कर लगाने के बाद दोनों वापस हॉल में आ गए।
समीर उसके साथ बैठकर कुछ कागजों की खाना-पुर्ती करने लगा। लेकिन रीमा थी जो अब खुलेआम चिनालों की तरह उससे छेड़छाड़ कर रही थी। उसने झुककर अपना हाथ उसकी जांघों पर रखा और अपनी लो-कट के ब्लाउज से उसे चुचियों के दर्शन कराने लगी। जब रीमा ने उससे पूछा कि वह कमीशन कितना लेगा तो समीर ने उसे बताया कि वैसे तो आजकल रेट 2-3% का चल रहा है।
रीमा उसकी जांघों को सहलाते हुए बोली, “क्या मेरे लिए कुछ कम नहीं कर सकते?”
समीर के मुँह से तो कोई शब्द ही नहीं निकल पाया। बड़ी मुश्किल से उसने कहा, “आप क्या चाहती हैं?”
“क्या कोई तरीका नहीं है कि मुझे दलाली कुछ कम लगे?” रीमा ने अपनी मदक आवाज में कहा और अपने हाथ को उसकी जांघों पर ऊपर बढ़ाने लगी।
समीर बेचारा क्या कहता? उसका लंड उसकी पैंट के अंदर तनकर खड़ा हो चुका था, जिसका उभार पैंट के ऊपर से रीमा को दिखाई दे रहा था।
“ठीक है, अगर आप इतना ही रिक्वेस्ट कर रही हैं तो शायद मैं इसमें कुछ कम कर पाऊँ। आपके लिए मैं 2% ले लूँगा।” समीर ने जवाब दिया।
लेकिन रीमा के दिमाग में तो कुछ और था। जितना पैसा वह मकान के बेचने से बचा पाएगी उतना ही वह पैसे उसके बुढ़ापे में काम आएगा। उसने यह तय किया था कि मकान की कीमत 50,00,000/- है। और अगर वह 2% तक भी बचा पाने में कामयाब हो जाती है तो उसे 1,00,000/- की बचत हो जाती है।
उसने अपना हाथ उसकी जांघों के बीच रखा और उसके खड़े लंड को पकड़ लिया। “क्या और कोई तरीका नहीं है जिससे तुम मुझसे थोड़ा कम ले लो?” रीमा ने उसके लंड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए पूछा। समीर आखिर जवान था, 22 साल की उम्र, ऊपर से अभी तक कुंवारा। उसके दिमाग ने हरकत करनी शुरू कर दी। “आप बताइए कि आपके दिमाग में क्या है?” समीर ने पूछा।
रीमा को पता था कि यह छोकरा उसकी अदाओं के जाल में फंस ही जाएगा। “अगर तुम मुझसे सिर्फ 1% कम करने के लिए तैयार हो जाओ तो मैं तुम्हें खुश कर सकती हूँ।” रीमा ने उससे कहा। फिर खड़ी होकर उसने अपने ब्लाउज के बटन खोल दिए और अपनी ब्रा में कैद चुचियों को मसलने लगी।
“क्या तुम्हारा दिल नहीं कर रहा कि मैं तुम्हारे लंड को अपने मुँह में ले चूसूँ?” वह उसे फिर चिढ़ाते हुए बोली। “और हाँ, अगर तुम 2% कम कर अगर सिर्फ 1% लोगे तो मैं हर तरह से तुम्हें खुश कर दूँगी। तुम अगर चाहो तो मुझे चोद सकते हो या फिर दिल करे तो मेरी गांड भी…”
रीमा ठीक किसी रंडी की तरह उससे सौदा-बाजी करने लगी। समीर पहले ही उत्तेजित था और जवान खून उबल रहा था। उससे अपने लंड का तनाव सहन नहीं हो रहा था। अगर आज यह औरत उसे सारी दलाली छोड़ने को कहती शायद वह हाँ कर देता। उसने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रीमा उसके सामने घुटनों पर बैठ गई और उसकी पैंट की जिप खोलने लगी। फिर उसके लंड को पैंट से बाहर अपने मुँह में लिया। पहले तो वह अपनी जीभ उसके सुपाड़े पर फिराती रही, फिर अपने मुँह को पूरा खोल अंदर ले चूसने लगी। फिर अपने मुँह को ऊपर-नीचे कर जोर-जोर से चूसने लगी।
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जब समीर का लंड अच्छी तरह उसके थूक से चिकना हो गया तो उसने अपनी ब्रा खोलकर निकाल दी। फिर उसके लंड को अपनी चुचियों के बीच रखा और अपनी चुचियों को पकड़ उसके लंड को घिसने लगी। समीर को इस चुची-चुदाई में मजा आने लगा। वह अपने बदन को ऊपर-नीचे करते हुए उसे चुची-चुदाई का मजा देने लगी।
समीर मजे से इस नए अनुभव का मजा ले रहा था। उसने कई लड़कियों को चोदा था लेकिन यह औरत तो कुछ खास ही थी। उसकी भारी चुचियाँ उसके लंड के इर्द-गिर्द उसे बहुत अच्छी लग रही थीं। थोड़ी देर उसके लंड को अपनी चुचियों के बीच मसलने के बाद रीमा खड़ी हो गई। और जाकर हॉल में पड़ी कुर्सी के पास खड़ी हो गई।
फिर उसने अपनी स्कर्ट उठाई। हर बार की तरह उसने पैंटी नहीं पहन रखी थी। फिर अपनी चूत को हवा में उठाए वह कुर्सी के सहारे झुक गई। रीमा अपनी गांड को उठाए समीर से बोली, “अब बैठे-बैठे सोच क्या रहे हो? कभी किसी औरत की गांड नहीं देखी क्या? जल्दी यहाँ आओ, मुझे जोर-जोर से चोदो।”
समीर तो जैसे इसी बात का इंतजार कर रहा था। उछलकर खड़ा हुआ और किसी उतावले कुत्ते की तरह चढ़ गया और अपने खड़े लंड को उसकी चूत में घुसा दिया। वह किसी नौसिखिए लड़के की तरह उसे चोद रहा था। और रीमा थी कि उसे उकसा रही थी।
“हाँ चोदो मुझे, ओह हाँ जोर-जोर से चोदो। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी चूत के मजा अपना पानी छोड़ के लो।”
अब कुछ भी समीर के वश में नहीं था। वह तो पागल हो चुका था। इतनी कामुक औरत उसने कभी नहीं देखी थी। कितने धड़ल्ले से उसे चुदवा रही थी। वह और जोर-जोर से अपने लंड को अंदर-बाहर करने लगा। साथ ही रीमा का इस तरह बातें करना अच्छा लग रहा था। जैसे कि उसमें एक नया जोश भरता जा रहा है। समीर का लंड कोई खास लंबा और मोटा नहीं था लेकिन रीमा फिर भी सिसक-सिसक उसे उकसा रही थी।
“हाँ ऐसे ही चोदो अपने मोटे लंड से… ओह हाँ अंदर तक घुसा दो अपना घोड़े जैसा लंड।”
समीर उछल-उछलकर धक्के मारने लगा। दोनों जन चुदाई की मस्ती में लगे हुए थे। रीमा को भी अपने आप को रोक पाना मुश्किल हो रहा था। वह अपने कुल्हे पीछे कर उसके हर धक्के का साथ दे रही थी, साथ ही चिल्ला रही थी।
“हाँ चोद और चोद, जोर-जोर से चोद, ओह मजा आ गया, हाँ ऐसे ही चोद, ओह मैं तो गई…”
समीर भी अब कहाँ रुकने वाला था। उसने तीन-चार धक्के लगाए और उसकी चूत में अपना पानी छोड़ दिया। रीमा ने इस बारिश में उसका साथ दिया। और उसकी चूत झड़ गई।
“कहो कैसी रही? अब क्या खयाल है?” रीमा ने पूछा।
“सौदा बुरा नहीं है। मैं आपकी बात मान लेता हूँ। क्या हम फिर मिल सकते हैं?” समीर ने पूछा।
“अरे तुम एक बार मेरा मकान बिकवा दो और दलाली सिर्फ 1% लो, उसके बाद देखना क्या होता है। एक बार तो क्या, तुम जब चाहोगे हम मिल लेंगे। यह मेरा वादा है।” रीमा ने कहा।
“तब ठीक है, मैं आपकी बात मानते हुए मो पर 1% दलाली लिख देता हूँ…” कहकर समीर ने पेपर की खाना-पुर्ती पूरी की। “क्यों अब ठीक है ना?”
“ये हुई ना बात। अगर ये डील सही हो गई तो मैं तुम्हें बोनस दूँगी।” रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा।
“बोनस!” समीर चौंक पड़ा।
“हाँ, अगली बार तुम चाहो तो मेरी गांड मार सकते हो।” रीमा ने हँसते हुए कहा।
समीर तो खुश हो गया। उसे लगा कि भगवान उस पर मेहरबान है। और रीमा सोच रही थी कि उसे आज यश की तरह एक और खिलौना मिल गया खेलने के लिए। वह जब चाहे इसे बुला, इसके लंड का मजा उठा सकती है। अपना काम खत्म कर जब समीर जाने लगा तो पता नहीं क्यों रीमा ने पीछे से आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“अब जल्दी ही मिलेंगे समीर।” कहकर रीमा ने उसके गालों को चूम लिया।
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समीर मुस्कुराते हुए चला गया। रीमा ने दरवाजा बंद किया और उसका सहारा ले खड़ी रही। उसने एक गहरी साँस ली और अपने आप पर खुश होने लगी। थोड़ी सी मेहनत और थोड़ी सी ख्वाहिश ने आज उसे 1,00,000/- बचा दिए थे। और साथ ही उसे मिल गया था एक नया जवान लंड जिससे वह दिल चाहे वैसे खेल सकती थी।
समीर को एक हफ्ता बीत चुका था जब वह रीमा के मकान के लिए मिला था। उसने बहुत मेहनत की लेकिन कोई ग्राहक अभी तक हाथ नहीं लगा था। उसने अपने दूसरे साथी एजेंट्स से भी बात कर रखी थी। लेकिन कोई आगे नहीं आया था। सबका यही कहना था कि इस डील में दलाली कम है।
समीर ने 1% दलाली रीमा से तय की थी और वह उसमें से आधा यानी 1/2% देने को तैयार था। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। उसे लगने लगा कि रीमा की चूत के चक्कर में कहीं उसने गलत फैसला तो नहीं कर लिया। आखिर समीर ने तय किया कि वह रीमा से मिलकर इस विषय पर बात करेगा और उसे कुछ और ज्यादा देने के लिए मना लेगा।
उसने रीमा को फोन किया और पूछा कि क्या वह मिल सकते हैं। समीर की आवाज में बेचैनी थी इसलिए रीमा ने उसे तुरंत घर आने के लिए कह दिया। जब समीर का फोन आया तो उसने सिर्फ नाइट गाउन पहन रखा था। इसलिए उसका फोन रखने के बाद वह अपने बेडरूम में कपड़े बदलने के लिए चली गई। उसने अलमारी में से एक सेक्सी ड्रेस निकाली और पहन ली।
समीर ने घर की बेल बजाई और रीमा ने दरवाजा खोल उसे अंदर आने को कहा। उसने देखा कि रीमा ने एक सेक्सी ड्रेस पहन रखी थी जिसमें उसका पूरा बदन झलक रहा था। लेकिन आज वह अपना दिल पक्का करके आया था कि वह बहकेगा नहीं और न ही रीमा को उस पर हावी होने देगा। वह उसे ज्यादा दलाली देने के लिए तैयार कर लाएगा।
हॉल में आते ही रीमा ने समीर को अपनी बाहों में भींचा और अपनी खड़ी चुचियाँ उसकी छाती पर रगड़ने लगी। समीर को लगा कि उसका लंड हरकत करने लगा है। रीमा के बदन से उठती रीमा उसे मदहोश किए जा रही है। और उसके खयाल में पिछली बार रीमा के साथ गुजारे वक्त के दृश्य चलने लगे।
रीमा ने समीर को अपने से अलग किया, “हाँ अब कहो क्या परेशानी है?”
“मिसेज सहगल थोड़ी समस्या है। जो मेमो हमने आपस में साइन किया था… शायद मैं बहक गया था और मैंने आपकी शर्त मान ली।” समीर ने बड़ी सावधानी से कहा। वह उसे नाराजीव भी नहीं करना चाहता था।
“चलो बहके… लेकिन सच कहना तुम्हें मजा तो आया कि नहीं।” रीमा ने एक कातिल मुस्कान अपने होंठों पर लाते हुए कहा।
दोनों दीवान पर बैठ गए। रीमा जानबूझकर उसके पास इस तरह से बैठी कि उसके लूज टॉप के अंदर से बिना ब्रा की चुचियाँ उसे साफ दिखती रहें। समीर अपनी नजरें उसकी चुचियों पर से हटा नहीं पा रहा था। रीमा ने देखा कि समीर की नजरें उसके मामों पर ही गड़ी हुई हैं तो उसने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखते हुए कहा, “जो देख रहे हो क्या पसंद आ रहा है?”
समीर ने अपने आप को संभाला और उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, “फिलहाल ये सब बंद करो। मैं बहुत सीरियस हूँ। मैं कोई भी ग्राहक नहीं ला पा रहा हूँ और न ही दूसरे एजेंट साथ दे रहे हैं क्योंकि कमीशन बहुत कम है। हमें मेमो बदलना होगा। वरना हम यह मकान कभी नहीं बेच पाएंगे।”
“अरे तो इसमें इतना परेशान होने की क्या बात है। मुझे लगता है कि कोई न कोई रास्ता निकल ही आएगा।” कहकर वह उसकी जांघ को सहलाने लगी।
समीर का लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था। उसकी हिम्मत साथ नहीं दे रही थी। उत्तेजना हावी होने लगी। कि तभी रीमा ने उसके खड़े लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया।
“याद है मैंने तुमसे कुछ बोनस का वादा किया था पिछली बार जब तुम यहाँ आए थे।” वह उसके लंड को मसलते हुए बोली।
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समीर ने अपनी गर्दन हिला दी। रीमा खड़ी होकर उसे देखने लगी। फिर घूमकर वह थोड़ा झुक गई और उसने अपनी स्कर्ट ऊपर उठा दी। उसकी गोली-गोल गांड नजर आने लगी। समीर ने देखा कि उसने कोई अंडरवीयर नहीं पहन रखी थी।
“क्या तुम अपना मोटा लंड मेरी गांड में घुसाना चाहोगे?” रीमा ने उसे चिढ़ाते हुए पूछा।
रीमा की गोरी और चिकनी गांड देख समीर के मुँह में तो पहले से ही पानी आ गया था। “हाँ।” उसने जवाब दिया।
“फिर तो मुझे लगता है कि तुम्हें अपनी काबिलियत पर कोई शक नहीं होगा। तुम्हें दूसरे एजेंट्स की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। तुम खुद ही कोई ग्राहक ढूँढ़ लोगे मेरे मकान के लिए।” रीमा ने कहा।
“अगर आपको मुझ पर इतना विश्वास है तो मुझे भी लगता है कि मैं कर लूँगा।” समीर ने जवाब दिया।
“इंसान को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए,” कहकर रीमा समीर के सामने नीचे उसकी टांगों के बीच बैठ गई। उसने उसकी पैंट की जिप खोली और उसके खड़े लंड को आजाद कर दिया।
“अब पहले मुझे तुम्हारे लंड को अच्छी तरह गीला और चिकना कर लेने दो, जिससे यह आसानी से मेरी गांड में घुस सके।”
स्वभाव से रीमा एक रंडी तो बन ही चुकी थी। वह ठीक किसी वैश्या की तरह उसके लंड को चूसने लगी और अपने थूक से चिकना करने लगी। फिर वह खड़ी हुई और उसने अपनी स्कर्ट उतार दी और फिर पास ही पड़ी कुर्सी पर अपने हाथों का सहारा ले झुक गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“चलो अब देर मत करो, अपने इस लंड को मेरी मोटी गांड के अंदर घुसा दो।” रीमा ने उससे कहा।
समीर बिना कोई समय बिताए रीमा के नजदीक आया और उसने अपना खड़ा लंड उसकी गांड में घुसा दिया। “ओह हाँ।” रीमा सिसक पड़ी। समीर और जोर से अपने लंड को उसकी गांड के अंदर-बाहर करने लगा। उसकी गांड काफी कसी हुई थी इसलिए समीर को मजा आ रहा था। उसने रीमा के दोनों कुल्हों को पकड़ा और धक्के मारने लगा।
रीमा को भी समीर का इस तरह धक्के मारना अच्छा लगने लगा। लेकिन उसे तो अब गंदी बातें करते हुए चुदवाने की आदत सी हो गई थी। और वह अपने आप को रोक न पाई। वह चाहती थी कि समीर भी राजीव की तरह उसे गंदे-गंदे नामों से बुलाए। लेकिन उसने अपने आप को रोक लिया।
वह अपनी कमजोरी नहीं जताना चाहती थी। उसे तो समीर को वश में करना था। इसलिए वह उससे सिर्फ बातें करने लगी। “तो मजा आ रहा है कि नहीं? एक ही डील में कितने फायदे… कमीशन के साथ-साथ चूत और गांड का मजा। तुम्हें नहीं पता तुममें कितनी काबिलियत है। अपने लंड को और जोर से अंदर तक घुसाओ और मेरी गांड का मजा लूटो।” रीमा ने कहा। समीर हुंकार भरते हुए किसी गदहे की तरह उसकी गांड मारने लगा।
“ओह हाँ ऐसे ही मारो… आज फाड़ दो मेरी गांड को, ओह हाँ तुम्हारा लंड कितना अच्छा लग रहा है…” रीमा ने उससे कहा।
समीर तो जैसे पागल हो गया था। वह उछल-उछलकर धक्के लगाने लगा।
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“हाँ ऐसे ही मारो… अगर तुमने मेरी गांड अच्छी तरह से मारी तो मैं तुम्हें अपने लंड का पानी अपनी चुचियों पर छुड़ाने दूँगी। तुम्हें मेरी चुचियाँ बहुत पसंद हैं ना?” रीमा ने उसे और उकसाते हुए कहा। समीर और जोर से धक्के लगाने लगा। रीमा भी उसका साथ अपने कुल्हों को आगे-पीछे कर दे रही थी।
उसे लगा कि समीर अब छूटने ही वाला है। “जब तुम्हारा छूटने वाला हो तो मुझे बता देना। मैं तुम्हारे गरम अमृत को अपनी चुचियों पर गिरते देखना चाहती हूँ।”
समीर से अब सहन नहीं हो रहा था। और दो-तीन धक्के मार उसने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाल लिया। रीमा घूमी और उसके सामने नीचे बैठ गई। उसने अपना टॉप खोलकर निकाल दिया। और उसके खड़े लंड को अपने हाथों में भर अपनी चुचियों की सीध में किया और मसलने लगी।
थोड़ी ही देर में समीर के लंड ने वीर्य की धार छोड़ने लगी। पहली उसकी एक चुची पर, दूसरी दूसरी पर और तीसरी… इसी तरह उसकी छाती समीर के रस से भीगती रही। समीर निढाल हो दीवान पर पसर गया था। रीमा उसके बगल में लेटी थी। उसकी चूत में अभी भी आग लगी हुई थी और वह अपनी चूत की गर्मी शांत करना चाहती थी।
“यार ये तो कोई बात नहीं हुई? मेरी खुशी का कोई खयाल नहीं। चलो आ अब मेरी चूत चूसकर मेरी भी गर्मी शांत कर दो।” रीमा ने कहा।
समीर उठा और रीमा की टांगों के बीच आ गया। रीमा ने अपनी टाँगें फैलाईं और अपने हाथों से चूत को फैलाते हुए उसे हुक्म दिया, “हाँ अब चाटो और चूसो इसे।” समीर ने उसकी बात मानते हुए उसकी चूत पर टूट पड़ा। वह अपनी जीभ ऊपर से नीचे फिरा उसकी चूत को अच्छी तरह चाटने लगा। उसकी चूत की फाँकों को चूसने लगा। उसने अपनी एक उँगली उसकी चूत के अंदर डाली और उसकी चूत को चूसने लगा।
रीमा सिसक पड़ी। उसे समीर की जीभ का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसने उसके सिर को पकड़ा और अपनी चूत पर दबाने लगी। समीर और जोर-जोर से उसकी चूत को चूसने लगा। अपनी उँगली को अंदर-बाहर करने लगा। कि तभी रीमा जोरों से सिसक पड़ी। “ओह हाँ, ओह मैं तो गई…”
उसका बदन ने कई झटके खाए और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर दोनों इस तरह अपनी साँसें संभालते रहे। फिर रीमा उठी और उसने समीर से कहा, “तुम्हारे पास एक मकान है बेचने के लिए इसलिए अच्छा होगा कि तुम काम पर लग जाओ।”
समीर उठा और उसने अपने कपड़े ठीक किए और जाने लगा। रीमा उसे छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई। “मुझे उम्मीद है तुम्हें मजा आया होगा? अगर फिर कभी ऐसी मस्ती की इच्छा हो चले आना।” रीमा ने उससे कहा। “मजा तो बहुत आया, साथ ही आपकी बात भी। मैं जल्दी ही आऊँगा।” मुस्कुराते हुए समीर ने कहा और चला गया।
समीर चला गया था और उसकी चूत का पानी भी छूट चुका था लेकिन रीमा के मन को शांति नहीं पड़ी थी। उसकी चूत में अभी आग लगी हुई थी। उसे राजीव की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी। वह चाह रही थी कि कोई उसे बुरी तरह चोदे, उसकी चूत को फाड़ दे और ऐसा राजीव ही कर सकता था।
रीमा ने अपना सेल फोन उठाया और उसका नंबर लगाया लेकिन हर बार की तरह उसने जवाब नहीं दिया। दोपहर का वक्त था। रीमा ने उसके लिए मैसेज छोड़ दिया कि शाम को वह काम के बाद आ जाए। वह उसके लिए खाना बना के रखेगी और जो उसकी इच्छा होगी वह उसे देगी। कहकर उसने फोन रख दिया और नहाने चली गई।
राजीव ने साइड टेबल पर पड़े अपने फोन को उठाया और नंबर को देख उसे रीमा को पकड़ा दिया। जो उसकी टांगों पर झुकी उसके लंड को किसी भूखी रंडी की तरह चूस रही थी। “देख ये मेरी दूसरी भूखी रांड का फोन जिसे तेरी तरह मेरे लंड की भूख लगी है…” राजीव ने उसे दिखाते हुए कहा।
रीमा ने उसके लंड को अपने गले तक ले लिया और राजीव की झांटें उसकी नाक को छूने लगीं। राजीव ने फोन को वापस रखा और उसके सिर को पकड़ अपने लंड पर ऊपर-नीचे करने लगा। “मुझे लगता है कि पहले तुम्हारी गांड मार लूँ उसके बाद उसके पास जाकर देखूँ कि वो बुढ़िया भी तेरी ही तरह मेरे लंड की भूखी है क्या?”
राजीव की इस तरह की गंदी बातें सुन रीमा तो और उत्तेजित हो रही थी। उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रखा और मसलने लगी। साथ ही उसके लंड को भी चूस रही थी। “हम्म तो तुम्हें मेरा आइडिया अच्छा लगा कि मैं तुम्हारी गांड मारने के बाद तुम्हारी उस छिनाल सखेली के पास जाऊँ।” राजीव ने कहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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रीमा और जोरों से अपनी चूत को रगड़ते हुए बोली, “हाँ।”
राजीव ने अपना लंड उसके मुँह से बाहर खींच लिया और उसे खड़े हो जाने को कहा। रीमा उसकी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई।
“छिनाल रांड अब खड़ी ही रहेगी या मेरे लंड पर भी बैठेगी।” राजीव ने जोर से कहा।
रीमा उसके लंड पर आई और उसे अपनी चूत से लगा उस पर बैठ गई। राजीव आराम से बैठा रीमा को मेहनत करते देख रहा था और मजे ले रहा था। कितनी चुदासू है ये बुढ़िया… सारी मेहनत खुद ही करती है। उसे तो बस अपने खड़े लंड का मजा लेना होता है।
रीमा अपनी चुचियों को मसलते हुए राजीव के लंड पर उछाल रही थी। उसकी चूत में उबाल आने लगा। उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। राजीव सीधा हुआ और उसकी चुचियों को पकड़ जोर-जोर से भींचने लगा। और तभी रीमा की चूत ने पानी छोड़ दिया।
जब उसकी चूत ठंडकी पड़ गई तो राजीव ने उसे अपने ऊपर से हटा दिया और उसे सोफे पर पेट के बल लेट जाने को कहा। वह उसकी टांगों के बीच आ गया और उसने रीमा से अपनी गांड को फैलाने के लिए कहा। रीमा ने अपने दोनों हाथ पीछे किए और अपनी गांड के छेद को चौड़ा दिया।
“अब बोलो मिसेज शर्मा तुम्हें क्या चाहिए?” राजीव ने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड घिसते हुए पूछा।
“तड़पाते भी हो और पूछते भी हो… प्लीज अपने लंड को मेरी गांड में घुसा दो… और जोर-जोर से मेरी गांड मारो…” रीमा ने कहा।
राजीव ने अपना लंड को उसके छेद से भिड़ाया। “ऐसे नहीं किसी रंडी की तरह मुझसे भीख माँगो…”
“प्लीज घुसा दो अपना लंड… ओह घुसाओ ना…” रीमा गिड़गिड़ाने लगी। “ओह मर गई…”
राजीव ने जोर का धक्का मार एक ही धक्के में अपना पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया। राजीव ने उसके दोनों कुल्हों को पकड़ा और जोर-जोर के धक्के लगाने लगा। और रीमा उसके हर धक्के पर उसे उकसा रही थी।
“हाँ ऐसे ही जोर-जोर से मारो… ओह हाँ फाड़ दो मेरी गांड को आज… ओह हाँ और जोर-जोर से…”
राजीव ने दो-चार जोर-जोर के धक्के मार अपना वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया। रीमा महसूस कर रही थी कि किस तरह उसका पानी उसकी गांड को भर रहा था। और जब राजीव का लंड ढीला पड़ा तो हर बार की तरह कुछ कहे बिना उसने कपड़े पहने और वहाँ से चला गया।
राजीव ने फोन करके रीमा से कह दिया था कि वह रात के खाने के वक्त उसके पास पहुँच जाएगा। रात के करीब 9 बजे दरवाजे की घंटी बजी तो रीमा दौड़ते हुए दरवाजे तक पहुँची और खोल दिया। राजीव आज फिर उसे सेक्सी ड्रेस में देख खुश हो गया। आज उसने फिर एक छोटी स्कर्ट पहन रखी थी जो बड़ी मुश्किल से उसकी फूली हुई गांड को ढक पा रहा था।
और अधगले का टॉप जिससे उसकी चुचियाँ बाहर को उछलकर आती नजर आ रही थीं। रीमा ने जब से रीमा के घर में वो डीवीडीज़ देखी थीं उसकी जिज्ञासा और बढ़ गई थी। जिस तरह रीमा और राजीव उसे अपने काबू में कर उसे चोदते थे उसे उसमें मजा आता था। किसी का गुलाम बन उसके वश में रहना उसे पसंद आने लगा था।
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उसे लगता था कि जैसे राजीव उसका मालिक है। और आज की रात वह उसकी गुलाम बन उसकी और अपनी जिस्मानी प्यास बुझाना चाहती थी। राजीव घर के अंदर आ गया और रीमा को इस तरह तैयार खड़े देख मुस्कुरा उठा। “तुम तो एकदम किसी रंडी की तरह तैयार बैठी हो…?”
रीमा उसकी बात पर मुस्कुरा दी। “मैंने बहुत सी रंडियाँ देखी हैं, लेकिन तुम्हारे जैसी नहीं। कोई भी रंडी अपने ग्राहक या यार के लिए तैयार नहीं होती। इस बुढ़ापे में तुम्हें रंडी बनने का शौक चढ़ा है।”
“हाँ क्या करूँ? तुम्हारे या तुम्हारे लंड के बिना नहीं रह पाती। हर वक्त तुम्हारा लंड मेरे दिमाग में घूमता रहता है। मुझे ऐसा लगता है कि जैसे कि मैं तुम्हारी गुलाम हूँ और तुम मेरे मालिक। और मालिक को खुश करना हर गुलाम का फर्ज होता है।” रीमा ने जवाब दिया।
“ओह तो तुम मेरी गुलाम हो… इसी लिए रंडी की तरह तैयार हुई हो। ठीक है देखते हैं तुम गुलाम की तरह मेरा कहना मानती हो कि नहीं… अब अपने घुटनों के बल बैठ जाओ।” राजीव ने उसे हुक्म दिया।
रीमा ने तुरंत उसकी बात मान ली।
“मेरे लंड को बाहर निकालो…” राजीव ने फिर कहा, “लेकिन इसे अभी चूसना नहीं।”
रीमा ने उसकी पैंट के बटन खोले और जिप को नीचे खींच उसकी पैंट को पैरों में गिर जाने दिया। राजीव का लंड उछलकर बाहर आ गया। राजीव के लंड को देखते ही उसकी चूत गीली होने लगी। वह ललचाई नजरों से उसके लंड को देखने लगी।
“उम्म तो मुँह में पानी आ रहा है… मेरा लंड चूसना चाहती हो?” राजीव ने पूछा।
“हाँ मैं तुम्हारे लंड को चूसना चाहती हूँ। मुझे इसका स्वाद अच्छा लगता है। प्लीज मुझे अपना लंड चूसने दो।” रीमा गिड़गिड़ा उठी।
रीमा के मुँह से निकलते हर शब्द के साथ उसका लंड और तनता जा रहा था। “ठीक है छिनाल चल चूस ले मेरा लौड़ा… तू भी क्या याद रखेगी।”
जैसे छोटा बच्चा कैंडी आइसक्रीम को देख टूट पड़ता है वैसे ही रीमा ने उसके लंड को अपने हाथों में पकड़ा और पूरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। और जोर-जोर से चूसने लगी। कितनी प्यासी थी वह राजीव के लंड के लिए। कितना तड़पी थी। उसे दूसरे जवान मर्दों के साथ मजा तो आया था लेकिन कोई भी राजीव की तरह नहीं था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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राजीव एक संपूर्ण मर्द था। उसे चुदवाने में, उसका गुलाम बन उसके हुक्म मानने में उसे जितना आनंद आता था उतना उसे किसी के साथ नहीं आया था। हर बार की तरह राजीव ने उसके सिर को पकड़ा और उसके मुँह को चूत की तरह चोदने लगा। वह उसे चूसने का मौका ही नहीं दे रहा था। सिर्फ अपने लंड को और खड़ा करने के लिए उसके मुँह का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन रीमा को फिर भी मजा आ रहा था। वह अपना हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को मसलने लगी।
“हाँ अब चूस रही है ना मेरी रांड की तरह… तुम्हें मेरा लंड बहुत पसंद है ना?” राजीव ने उसे चिढ़ाया।
“हाँ मुझे तुम्हारा लंड बहुत पसंद है। और जब तुम मुझे रांड… छिनाल बुलाते हो तो मैं तो पागल हो जाती हूँ… तुमने मुझे जिंदगी की सच्ची खुशी दी है। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ।”
रीमा ने थोड़ी देर के लिए उसके लंड को बाहर निकालकर कहा। और फिर उसका लंड चूसने लगी। रीमा अपनी चूत में और जोर-जोर से उँगली कर रही थी। राजीव ने एक जोर का धक्का उसके मुँह में मारा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। राजीव ने जब देखा कि रीमा झड़ चुकी है तो उसने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और उसे बेडरूम में चलने के लिए कहा।
कमरे में आते ही राजीव ने उसे बिस्तर का सहारा ले घोड़ी बना दी और अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रख दिया। “तो तुम्हें गांड में लेना बहुत अच्छा लगता है ना?” राजीव ने अपने लंड को घिसते हुए कहा।
“हाँ गांड में तो क्या मैं तुम्हारा लंड अपने शरीर के हर छेद में लेने के लिए तड़पती रहती हूँ।” रीमा ने अपने कुल्हों को थोड़ा पीछे करते हुए कहा।
“तो कैसी गांड में लंड लेना पसंद करोगी…”
“इस मोटी गांड में…” रीमा ने कहा।
“ऐसे नहीं गिड़गिड़ाते हुए बोलो?” राजीव ने फिर कहा।
“ओह मेरी इस मोटी और फूली हुई गांड में प्लीज अपना लंड घुसा दो…” रीमा ने कहा।
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राजीव को मजा आ रहा था। किस तरह उसे जलील कर गिड़गिड़ाने पर मजबूर कर दिया था। उसे औरतों को सताने में बहुत मजा आता था। उसने उसके दोनों कुल्हों को पकड़ा और बिना कोई रहम दिखाए एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। रीमा एक बार सुबह समीर से गांड मरवा चुकी थी लेकिन उसे राजीव के मोटे लंड से गांड मरवाने में ज्यादा मजा आ रहा था। वह उसके हर धक्के पर अपनी गांड पीछे कर उसके लंड को और अंदर तक लेती और जोर से सिसकने लगती।
“हाँ मारो गांड, जोर-जोर से मारो… ओह हाँ घुसा दो अपना मोटा लंड और फाड़ डालो साली को… ओह बहुत अच्छा लग रहा है… तुम्हारा लंड मुझे ओह हाँ और जोर-जोर से।” राजीव का लंड पानी छोड़ने ही वाला था। उसने उसके कुल्हों को जोर से पकड़ और कस-कस के धक्के लगाने लगा। थोड़ी ही देर में उसके लंड ने रीमा की गांड में पानी छोड़ दिया। हर बार की तरह राजीव ने अपने कपड़े पहने और वहाँ से चला गया। रीमा अपने खयालों में खोई रही कि उसे अब आगे क्या करना है… यही सोचते हुए वह नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई।
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