Desi Holi Group Sex
ये मेरी फ्रेंड शोभा की कहानी है। वह आपको बताने जा रही है कि कैसे उसने अपनी सहेली और उसके बड़े भाई के साथ चुदवाया। इस होली पर मम्मी-पापा बाहर जा रहे थे। रिलेशन में एक डेथ हो गई थी। माँ ने पड़ोस की आंटी को मेरा ध्यान रखने को कह दिया था। आंटी ने कहा था कि आप लोग जाइए शोभा का हम लोग ध्यान रखेंगे। माँ ने हमें समझाया और फिर चली गई। Desi Holi Group Sex
पड़ोस की आंटी की एक लड़की थी दिव्या जो मेरी उम्र की ही थी। वह मेरी बहुत फास्ट फ्रेंड थी। वह बोली कि जब तक तुम्हारे मम्मी-पापा नहीं आते तुम खाना हमारे घर ही खाना। मैं खाना और समय वहीं बिताती पर रात में सोती दिव्या के साथ अपने घर पर ही थी। दो दिन हो गए और होली आ गई।
सुबह होते ही दिव्या ने अपने घर चलने को कहा तो मैं रंग से बचने के लिए बहाने करने लगी। दिव्या बोली, “मैं जानती हूँ तुम रंग से बचना चाहती हो। नहीं आई तो मैं खुद आ जाऊँगी।” “कसम से आऊँगी।” मैं जान गई कि वह रंग लगाए बिना नहीं मानेगी। मैंने सोचा कि घर पर ही रहूँगी जब आएगी तो चली जाऊँगी।
होली के लिए पुराने कपड़े निकाल लिए थे। पुराने कपड़े छोटे थे। स्कर्ट और शर्ट पहन लिया। शर्ट छोटी थी इसलिए बहुत कसी थी जिससे दोनों चूचियाँ मुश्किल से संभल रही थीं। बाहर होली का शोरगुल मच रहा था। चड्डी भी पुरानी थी और कसी थी। कसे कपड़े पहनने में जो मजा आ रहा था वह कभी सलवार कमीज में नहीं आया।
चलने में कसे कपड़े चूचियों और चूत से रगड़ कर मजा दे रहे थे इसलिए मैं इधर-उधर चल फिर रही थी। मैं अभी दिव्या के घर जाने को सोच ही रही थी कि दिव्या दरवाजे को जोर-जोर से खटखटाते हुए चिल्लाई, “अरी शोभा की बच्ची जल्दी से दरवाजा खोल।” मैंने जल्दी से दरवाजा खोला तो दिव्या के पीछे ही उसका बड़ा भाई मुकेश भी अंदर घुस आया। उसकी हथेली में रंग था।
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अंदर आते ही मुकेश ने कहा, “आज होली है बचोगी नहीं, लगाऊँगा जरूर।”
दिव्या बचने के लिए मेरे पीछे आई और बोली, “देखो भैया यह ठीक नहीं है।”
मेरी समझ में नहीं आया कि क्या करूँ। मुकेश मेरे आगे आया तो ऐसा लगा कि दिव्या के बजाय मेरे ही न लगा दे।
मैं डरी तो वह हथेली रगड़ता बोला, “बिना लगाए जाऊँगा नहीं दिव्या।”
“हाय राम भैया तुमको लड़कियों से रंग खेलते शर्म नहीं आती।”
“होली है बुरा न मानो। लड़कियों को लगाने में ही तो मजा है। तुम हटो आगे से शोभा नहीं तो तुमको भी लगा दूँगा।”
मैं डर से किनारे थी। तभी मुकेश ने दिव्या को बाँहों में भरा और हथेली को उसके गाल पर लगा रंग लगाने लगा। दिव्या पूरी तरह मुकेश की पकड़ में थी।
वह बोली, “हाय भैया अब छोड़ो ना।”
“अभी कहाँ मेरी जान अभी तो असली जगह लगाना बाकी ही है।”
और वह पीछे से चिपक दिव्या की दोनों चूचियों को मसल उसकी गांड को अपने लंड पर दबाने लगा।
“हाय भैया।” चूचियों दबाने पर दिव्या बोली तो मुकेश मेरी ओर देख अपनी बहन की दोनों चूचियों को दबाता बोला, “बुरा न मानो होली है।” दिव्या की मसली जा रही चूचियों को देख मैं अपने आप कसमसा उठी। चूचियों को अपने भाई के हाथ में दे दिव्या की उछल-कूद कम हो गई थी। मुकेश उसकी दोनों चूचियों को कसकर दबाते हुए उसकी गांड को अपनी रानों पर उठाता जा रहा था।
“हाय भैया फ्रॉक फट जाएगी।”
“फट जाने दो। नई ला दूँगा।”
और अपनी बहन के दोनों अमरूद दबाने लगा। इस तरह की होली देख मुझे अजीब लगा। मैं समझ गई कि मुकेश रंग लगाने के बहाने दिव्या की चूचियों का मजा ले रहा है। “हाय अब छोड़ो ना।” दिव्या मेरी ओर देखते कहा तो मुझे दिव्या में एक बदलाव लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी मुकेश उसकी गोल-गोल चूचियों को दबाते हुए बोला। “हाय इस साल होली का मजा आ रहा है। हाय दिव्या अब तू पूरा रंग लगाकर ही छोड़ूँगा।” और पूरी चूचियों को मुट्ठी में दबा बेताबी से दबाने लगा। मैंने देखा कि मुकेश का चेहरा लाल हो गया था।
अब दिव्या विरोध नहीं कर रही थी और वह मेरे सामने ही अपनी बहन को रंग लगाने के बहाने उसकी चूचियाँ दबा रहा था। इस सीन को देख मेरे मन में अजीब सी उलझन हुई। मेरी और दिव्या की चूचियों में थोड़ा सा फर्क था। मेरी दिव्या से जरा छोटी थी। सहेली की दबाई जा रही चूचियों को देख मेरी चूचियाँ भी गुदगुदाने लगीं और लगा कि मुकेश मेरी भी रंग लगाने के बहाने दबाएगा।
दिव्या को वह अपने बदन से कसकर चिपकाए था। “हाय छोड़ो भैया सहेली क्या सोचेगी।” दिव्या चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से दबवाती मेरी ओर देख बोली तो मुकेश उसी तरह करते हुए मेरी ओर देखता बोला, “सहेली क्या कहेगी। उसके पास भी तो हैं। कहेगी तो उसको भी रंग लगा दूँगा।”
मेरी हालत यह सब देख खराब हो गई थी। मैंने सोचा कि कहीं मुकेश अपनी बहन को रंग लगाने के बहाने यहीं चोदने न लगे। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। मुझे लगा कि वह अपनी बहन को चोदने को तैयार है। दिव्या के हाव-भाव और खामोश रहने से ऐसा लग रहा था कि उसे भी मजा मिल रहा है। मैं जानती थी कि चूचियाँ दबवाने और चूत चुदवाने से लड़कियों को मजा आता है। मुझे दोनों भाई-बहन के खेल देखने में अच्छा लगा। मेरे अंदर भी वासना जागी। तभी दिव्या ने नखरे दिखाते हुए कहा, “हाय भैया फाड़ दोगे क्या?”
“कायदे से लगवाओगी तो नहीं फाड़ेंगे। मेरी जान बस एक बार दिखा दो।”
और मुकेश ने दोनों चूचियों को दबाते हुए उसके चूतड़ को अपनी रान पर उभारा। “अच्छा बाबा ठीक है। छोड़ो, लगवाऊँगी।” “इतना तड़पा रही हो जैसे केवल मुझे ही आएगा होली का मजा। आज तू बिना देखे नहीं रहूँगा चाहे तुम मेरी शिकायत कर दो।”
फिर दिव्या मेरी ओर देख बोली, “दरवाजा बंद कर दो शोभा, मानेगा नहीं।”
दिव्या की आवाज भरी हो रही थी। चेहरा भी तमतमा रहा था। मुकेश ने देखने की बात कर मेरे बदन में सनसनी दौड़ा दी थी। मेरी चूत भी चुनचुनाने लगी थी। तभी मुकेश उसकी चूचियों को सहलाकर बोला, “बंद कर दो आज अपनी सहेली के साथ मेरी होली मन जाने दो।”
मुकेश की बात ने मेरे बदन के रोएँ गनगना दिए। मैंने धीरे से दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही दरवाजा बंद किया, मुकेश उसको छोड़ आँगन में चला गया। उसके जाते ही अपनी सिकुड़ी हुई फ्रॉक ठीक करती दिव्या मेरे पास आ बोली, “शोभा किसी से बताना नहीं। भैया मानेगा नहीं। देखा मेरी चूचियों को कैसे जोर-जोर से दबा रहे थे।”
उसका बदन गरम था। मैं गुदगुदाते मन से बोली, “हाय दिव्या तुम चुदवाओगी क्या?”
दिव्या मेरी चूचियों को दबाती मेरे बदन में करंट दौड़ा बोली, “बिना चोदे मानेगा नहीं। कहना नहीं किसी से।”
“पर वह तो तुम्हारा बड़ा भाई है?”
“तो क्या हुआ। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।”
“ठीक है नहीं कहूँगी।”
“हाय शोभा तुम कितनी अच्छी सहेली हो।”
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और दिव्या मेरी दोनों चूचियों को छोड़ मुस्कुराती हुई अंगड़ाई लेने लगी। हर साँस के साथ मेरी चूचियों और चूत का वोल्टेज बढ़ रहा था। मुकेश अभी तक आँगन में ही था। दिव्या की दबाई गई चूचियाँ मेरी चूचियों से ज्यादा तेजी से हाँफ रही थीं। उसकी फ्रॉक बहुत टाइट थी इसलिए दोनों निप्पल उभरे थे। अब मेरी कसी चड्डी और मजा दे रही थी। मैं होली की इस रंगीन बहार के बारे में सोच ही रही थी कि दिव्या मुस्कुराती हुई बोली, “शोभा तुम्हारी वजह से आज हमको बहुत मजा आएगा।”
“बुला लो ना अपने भैया को।”
“पेशाब करने गया होगा। देखा था मेरी चूचियों को मसलते ही भैया का फनफना गया था। हाय भैया का बहुत तगड़ा है। पूरे 7 इंच लंबा लंड है भैया का।”
मस्ती से भरी दिव्या ने हाथ से अपने भाई के लंड का साइज बनाया तो मुझे और भी मजा आया। अब खुला था कि सहेली अपने भाई से चुदवाने को बेचैन है। “हाय दिव्या मुझे तो नाम से डर लगता है। कैसे चोदते हैं।” अब मेरे बदन में भी चींटियाँ चल रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“बड़ा मजा आता है। डरने की कोई बात नहीं फिर अब तू हम लोग जवान हो गए हैं। तू कहे तो भैया से तेरे लिए बात करूँ। मौका अच्छा है। घर खाली ही है। तुम्हारे घर में ही भैया से मजा लिया जाएगा। जानती है लड़कों से ज्यादा मजा लड़कियों को आता है। हाय मैं तो दबवाते ही मस्त हो गई थी।”
दिव्या ऐसी बातें करने में जरा भी नहीं शरमा रही थी। उसके मुँह से चुदाई की बात सुन मेरी चूत दुपदुपाने लगी। मेरा मन भी दिव्या के साथ उसके भाई से मजा लेने को करने लगा। दिव्या की बात सही थी कि घर खाली है किसी को पता नहीं चलेगा। मैं दिव्या को दिल की बात बताने में शरमा रही थी।
तभी दिव्या ने अपनी दोनों चूचियों को अपने हाथ से दबाते हुए कहा, “अपने हाथ से दबाने में जरा भी मजा नहीं आता। तुम दबाओ तो देखें।” मैंने फौरन उसकी दोनों चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ कर दबाया तो मुझे बहुत मजा आया पर सहेली बुरा सा मुँह बनाती बोली, “छोड़ो शोभा मजा लड़के से दबवाने में ही आता है। तुमने दबवाया है किसी से?”
“नहीं दिव्या।” मैं उसकी चूचियों को छोड़ बोली तो दिव्या मेरे गाल मसल बोली, “तू आज मेरे साथ मेरे भैया से मजा लेकर देखो ना। मेरी उम्र की ही हो। तुम्हारी भी चुदवाने लायक होगी। हाय शोभा तुम्हारी तो खूब गोरी-गोरी मक्खन सी होगी। मेरी तो साँवली है।”
दिव्या की इस बात से पूरे बदन में करंट दौड़ा। दिव्या ने मेरे दिल की बात कही थी। मैं दिव्या से हर तरह से खूबसूरत थी। वह साधारण सी थी पर मैं गोरी और खूबसूरत। कंट… मैंने सोचा जब मुकेश अपनी इस बहन को चोदने को तैयार है तो मेरी जैसी गदराई कुंवारी खूबसूरत लौंडिया को तो वह बहुत प्यार से चोदेगा।
“हाय दिव्या मुझे डर लग रहा है।”
“पगली मौका अच्छा है मेरे भैया एक नंबर का लौंडियाबाज है। भैया के साथ हम लोगों को खूब मजा आएगा। भैया का लंड खूब तगड़ा है और सबसे बड़ी बात यह है कि आराम से तुम्हारे घर में मजा लेंगे।”
दिव्या की बात सुन फुदकती चूत को चिकनी रानों के बीच दबा रजामंद हुई तो दिव्या मेरी एक चूची पकड़ दबाती बोली, “पहले तो हमको ही चोदेगा। कहो तो तुमको भी….” मैं शर्माती सी होली की मस्ती में राजी हुई तो वह बाहर मुकेश के पास गई।
कुछ देर बाद वह मुकेश के साथ वापस आई तो उसका भाई मुकेश मेरे उभारों को देखता अपनी छोटी बहन दिव्या की बगल में हाथ डाल उसकी चूचियों को मसलता बोला, “ठीक है दिव्या हम तुम्हारी सहेली को भी मजा देंगे पर इसकी चूचियाँ तो अभी छोटी लग रही हैं।”
“कभी दबवाती नहीं है ना भैया इसलिए।” दिव्या प्यार से अपने भाई से चूचियों को मिसवाते बोली।
“ठीक है हम शोभा को भी खुश कर देंगे पर पहले तुम प्यार से मेरे साथ होली मनाओ। अब जरा दिखाओ तो।”
मुकेश मस्ती के दिव्या की चूत पर आगे से हाथ लगा मस्त नजरों से मेरी ओर देखते बोला तो मैंने कुंवारेपन की गर्मी से बैचैन हो दिव्या को कहते सुना, “यार कितनी बार देखोगे। जैसी सबकी होती है वैसी मेरी है। अब सहेली राजी है तो आराम से खेलो होली।”
“हाय दिव्या क्या मस्त चूचियाँ हैं तुम्हारी। ऐसी चूची पा जाए तो बस दिन भर दबाते रहें।” और कसकर अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा। दिव्या और उसके भाई की इन हरकतों से मेरे बहके मन पर अजीब सा असर हो रहा था। अब तो मन कर रहा था कि मुकेश से कहें आओ मेरी भी दबाओ।
मेरी दिव्या से ज्यादा मजा देंगी इतना ताव कुंवारे बदन में आज से पहले कभी नहीं आया था। चूत की फांक फनफनाकर चड्डी में उभार आई थी। जैसे-जैसे वह दिव्या की जवानियों को सहलाता जा रहा था वैसे-वैसे मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी।
“ओह्ह भैया अब आराम से करो ना। सहेली तैयार है। मनाओ हमदोनों से होली। अब जल्दी नहीं मुकेश भैया। सहेली ने दरवाजा बंद कर दिया है। जितना चोद सको चोदो।” दिव्या मस्त निगाहों से अपनी दबाई जा रही चूचियों को देखती सीना उभारती बोली तो मुकेश ने उसको चूमते हुए कहा, “तुम्हारी सहेली ने कभी नहीं दबवाया है?”
“नहीं भैया।”
“पहले बताया होता तो इसकी भी तुम्हारी तरह दबा-दबाकर मजा देकर बड़ा कर देते। लड़कियों की यही उम्र होती है मजा लेने की। एक बार चुद जाए तो बार-बार इसको खोलकर कहती हैं फिर चोदो मेरे राजा।” मुकेश दिव्या की चूत को कपड़े के ऊपर से टटोलता बोला।
“ठीक है भैया मैं तो चुदवाऊँगी ही पर साथ ही इस बेचारी को भी आज ही…”
“ठीक है पहले तुमको फिर इसको। अपने लंड में इतनी ताकत है कि तुम्हारे जैसी 4 को चोदकर खुश कर दूँ। पर यह तो शरमा रही है। दिव्या अपनी सहेली को समझाओ कि अगर मजा लेना है तो तुम्हारे साथ आए। एक साथ दो मैं हमको भी ज्यादा मजा आएगा और तुम लोगों को भी।”
“ठीक है भैया आज मेरे साथ शोभा को भी। अगर इसे मजा आया तो फिर बुलाएगी। आजकल इसका घर खाली है।”
“तो फिर आज पूरी नंगी होकर मजा लो। कसम दिव्या जितना मजा हमसे पाओगी किसी और से नहीं मिलेगा।”
“ओह्ह भैया मुझे क्या बता रहे हो मैं तो जानती हूँ। राजा कितनी बार तो तुम चोद चुके हो अपनी इस बहन को। पर भैया आजकल घर में मेहमान आने की वजह से जगह नहीं। वो तो भला हो मेरी प्यारी सहेली का जिसकी वजह से तुम आज अपनी बहन के साथ ही उसकी कुंवारी सहेली की भी चोद सकोगे।”
“भैया इस बेचारी को भी…”
“कह तो दिया। पर इसे समझा दो कि शर्माए नहीं। एक साथ नंगी होकर आओ तो तुम दोनों को एक साथ मजा दे। दो एक सहेलियों को और बुला लो तो चारों को चोदकर मस्त न कर दूँ तो मेरा नाम मुकेश नहीं।”
सहेली के भाई की बात से मेरा पारा चढ़ता जा रहा था।
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“ओह्ह दिव्या तुम कपड़े उतारो देर मत करो। तुम्हारी सहेली शरमा रही है तो इसे कहो कि कमरे से बाहर चली जाए तो तुमसे होली का मजा लूँ।” इतना कह मुकेश ने दिव्या की चूचियों से हाथ हटा अपनी पैंट उतारनी शुरू की तो मैंने सनसनाकर दिव्या की ओर देखा तो वह मेरे पास आ बोली, “इतना शरमा क्यों रही हो? बड़ा मजा आएगा आओ मेरे साथ।”
अब दिव्या की बात से इनकार करना मेरे बस में नहीं था। चूत चड्डी में गीली हो गई थी। चूचियों के निप्पल दिव्या के निप्पल की तरह खड़े हो गए थे। मुकेश ने जिस तरह से मुझे बाहर जाने को कहा था उससे मैं घबरा गई थी। तभी दिव्या मेरा हाथ पकड़ मुझे मुकेश के पास ले जाकर बोली, “मैं बिस्तर लगाती हूँ भैया जब तक तुम शोभा को अपना दिखा दो।”
मैं सहेली के भाई के पास आ शर्माने लगी। तभी मुकेश बेताबी के साथ अपनी पैंट उतार खड़े लाल रंग के लंबे लंड को सामने कर मेरे गाल पर हाथ लगा मुझे जन्नत का मजा देता बोला, “देखो कितना मस्त लंड है। इसी लंड से अपनी बहन को चोदता हूँ। तुम्हारी चूत इससे चुदवाकर मस्त हो जाएगी।”
मैं पहली बार इतनी पास से किसी मस्ताए खड़े लंड को देख रही थी। नंगे लंड को देखने के साथ मुझे अपने आप अजीब सी मस्ती का अनुभव हुआ। उसका लंड एकदम खड़ा था। दिव्या ने जैसा बताया था, उसके भाई का वैसा ही था। लंबा मोटा और गोरा। पहली बार जवान फनफनाए लंड को देख रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुकेश पैंट खिसका प्यार से लंड दिखा रहा था। दिव्या चुदवाने के लिए नीचे जमीन पर बिस्तर लगा रही थी। गुलाबी रंग के सुपाड़े वाले गोरे लंड को करीब से देख मेरी कुंवारी चूत में चुदासी का कीड़ा बिलबिलाने लगा और शर्ट के दोनों अनार जोर-जोर से धड़कने लगे।
लंड को मेरे सामने नंगा कर मुकेश ने फौरन शर्ट की दोनों चूचियों को पकड़कर मसला। मसलवाते में मजा से भर गई। सच बड़ा ही मजा था। चूचियों को उसके हाथ में दे मैं उसकी ओर देखा तो मुकेश सिसकारी ले बोला, “बड़ा मजा आएगा। जवान हो गई हो। दिव्या के साथ आज इस पिचकारी से रंग खेलो। अगर मजा न आता तो मेरी बहन इतनी बेचैन क्यों होती चुदवाने के लिए।”
एक हाथ को लपलपाते नंगे लंड पर लगा दूसरे हाथ की चूची को कसकर दबाते कहा तो मैं होली की रंगिनी में डूबने की उतावली हो फिर उसके लंड को देखने लगी। उसके नंगे लंड को देखते हुए चूचियाँ दबवाने में गजब का मजा आ रहा था। चूचियाँ टटोलवाने में चड्डी की गदराई चूत के मुँह में अपना फैलाव हो रहा था।
पहले केवल सुना था पर करवाने में तो बड़ा मजा था। तभी चूची को और जोर-जोर से दबा हाथ के लंड को उभारते बोला, “ऐसा जल्दी पाओगी नहीं। देखना आज तुम्हारी सहेली दिव्या को कैसे चोदता हूँ। कभी मजा नहीं लिया तुमने इसलिए शरमा रही हो। तुमको भी बड़ा मजा आएगा हमसे चुदवाने में।”
मुकेश चूची पर हाथ लगाते अपने मस्त लंड को दिखाता जो होली की बहार की बातें कर रहा था उससे हमें गजब का मजा मिल रहा था। मस्ती के साथ अपने आप शरम खत्म हो रही थी। अब इनकार करना मेरे बस में नहीं था। अब खुद शर्ट के बटन खोल दोनों गदराई चूचियों को उसके हाथ में दे देने को बेचैन थी।
बड़ा मजा आ रहा था। मेरी नजरें हिन्हिनाते लंड पर जमी थीं। तभी दिव्या जमीन पर बिस्तर लगा पास आई और मुकेश के लंड को हाथ में पकड़ मेरी मसली जा रही चूचियों को देखती बोली, “भैया हमसे छोटी हैं ना?” “हाँ दिव्या पर चुदवाएगी तो तुम्हारी तरह इसको भी प्यार से दूँगा पर अभी तो तुम्हारी सहेली शरमा रही है। तुम तो जानती हो कि शर्माने वाली को मजा नहीं आता।”
और मुकेश ने मेरी चूचियों को मसलना बंद कर दिव्या की चूचियों को पकड़ा। हाथ हटते ही मजा किरकिरा हुआ। दिव्या अपने भाई के लंड को प्यार से पकड़े थी। मैं बेताबी के साथ बोली, “हाय कहाँ शरमा रही हूँ।” “नहीं शर्माएगी भैया इसको भी चोदकर मजा देना।”
दिव्या ने कहा तो मुकेश बोला, “चोदने को हम तुम दोनों को तैयार हैं। घर खाली है जब कहोगी यहाँ आकर चोद देंगे पर आज तुम दोनों को आपस में मजा लेना भी सिखाएँगे।” और एक हाथ मेरी चूची पर लगा दूसरे हाथ से दिव्या की चूची को पकड़ लंड को दिव्या के हाथ में दे एक साथ हम दोनों की दबाने लगा। मेरा खोया मजा चूचियों पर हाथ आते ही वापस मिल गया। तभी दिव्या उसके खड़े लंड पर हाथ फेर हमको दिखाती बोली, “शरमाओ नहीं शोभा मैं तो आज भैया से खूब चुदवाऊँगी।”
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“नहीं शर्माऊँगी।”
“तो लो पकड़ो भैया का और मजा लो।”
और दिव्या अपने भाई के लंड को मेरे हाथ में पकड़ा खुद बगल हटकर दबवाने लगी। मुकेश के लंड को हाथ में लिया तो बदन का रोआँ-रोआँ खड़ा हो गया। सचमुच लंड पकड़ने में गजब का मजा था। तभी मुकेश बोला, “हाय दिव्या बड़ा मजा आ रहा है तुम्हारी सहेली के साथ।”
“हाँ भैया नया माल है ना।”
“कहो तो इसका एक पानी निकाल दे।”
और दिव्या की चूचियों को छोड़कर एक साथ मेरी दोनों चूचियाँ दबाता लंड को मेरे हाथ में कड़ा कर खड़ा हुआ। तभी दिव्या मुझसे बोली, “शोभा रानी इसका पानी निकाल दो तब चुदवाने में मजा आएगा। अब हमलोग मुकेश भैया की जवानी चूसकर रहेंगे। हाय तुम्हारे अनार मसलते भैया मस्त हो गए हैं।”
मुकेश आँखें बंदकर तमतमाए चेहरे के साथ मेरी चूचियों को शर्ट के ऊपर से इतनी जोर-जोर से मीस रहा था कि जैसे शर्ट फाड़ देगा। मेरी चूत सनसना रही थी और लंड पकड़कर मिसवाने में गजब का मजा मिल रहा था। अब तो दिव्या से पहले उसकी पिचकारी से रंग खेलने का मन कर रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मुकेश ने लंड मेरी चड्डी से चिपका दिया था। अब मुकेश धीरे-धीरे दबा रहा था। चड्डी से लगा मोटा गरम लंड जन्नत का मजा दे रहा था। उसने एक तरह से मुझे अपने ऊपर लाद लिया था। दिव्या धीरे से अपनी चड्डी खिसकाकर नंगी हो रही थी। दिव्या ने अपनी चूत नंगी कर मस्ती में चार चाँद लगा दिए थे।
अब मैं मुकेश की गोद में थी और गजब का मजा आ रहा था। दिव्या की चूत साँवली और फांक दबे से थे पर मेरी फांक से उसकी फांक बड़ी थी। मैं सोच रही थी कि दिव्या चूत नंगी करके क्या करेगी। मैं सहेली की नंगी चूत को प्यार से देखती अपने दोनों अमरूदों को मिसवा रही थी। तभी दिव्या आगे आई और चूत को उछकाती बोली, “देखो शोभा इसी तरह से तुमको भी चटाना होगा।”
“ठीक है।”
फिर वह अपनी चूत को अपने भाई के मुँह के पास ला तिरछी होकर बोली, “ले बहनचोद चाट अपनी बहन की चूत।” मुकेश एक साथ हम दोनों सहेलियों का मजा लेने लगा। मुझे सहेली की अपने ही भाई को बहनचोद कहना बड़ा अच्छा लगा। दिव्या बड़े प्यार से उँगली से अपनी साँवली सलोनी चूत के दरार फैला फैलाकर चटवा रही थी।
सहेली का चेहरा बता रहा था कि चूत चटवाने में उसे बड़ा मजा मिल रहा था। दिव्या की चूत को जीभ से चाटते ही मुकेश का लंड मेरी चड्डी पर चोट करने लगा। मैंने दिव्या को चटवाते देखा तो मेरा मन भी चटाने को करने लगा। तभी उसने मेरे निप्पल को मिसा तो मैं मजा से भर उसकी गोद में उचकी तो वह अपनी बहन की चूत से जीभ हटाकर मेरी चूचियों को दबा मुझसे बोला, “हाय अभी नहीं झड़ा शोभा तुम अपनी चटाओ।”
“चटाओ।” मैं मस्ती से भर दिव्या की तरह चूत चटवाने को तैयार हुई। तभी दिव्या अपनी चटी गई चूत को उँगली से खोलकर देखती बोली, “हाय मुकेश भैया मेरा पानी तो निकल गया।” “तुम्हारी सहेली की नई चूत चाटूँगा तो मेरा पानी निकलेगा।” और मेरी कमर में हाथ से दबाकर उठाया।
अब मेरी गोरी-गोरी चूचियाँ एकदम लाल थीं। तभी दिव्या मुझे बाँहों में भर अपने बदन से चिपकाती बोली, “चटवाने में चुदवाने से ज्यादा मजा आता है। चटाओ।”
“अच्छा दिव्या चटवा दो अपने भैया से।”
“भैया सहेली की चाटो।”
“मैं तो तैयार हूँ। कहो मस्ती से चटाए। इसकी चटते मेरा निकलेगा। हाय इसकी तो खूब गोरी-गोरी होगी।” और बेताबी के साथ लंड उछालते हुए पोज बदला। अब वह बिस्तर पर पेट के बल लेटा था। उसका लंड गद्दे में दबा था और चूतड़ ऊपर था। तभी दिव्या ने कहा, “अपनी चटवाऊँ क्या?”
“हाँ दिव्या अपनी चटवाओ तो शोभा को और मजा आएगा।”
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तब दिव्या ने हमको मुकेश के सामने डॉगी स्टाइल में होने को कहा। मैं जन्नत की सैर कर रही थी। मजा पकड़ तड़प गई थी। मेरी कोशिश थी कि मैं दिव्या से ज्यादा मजा लूँ। उसकी बात सुन मैंने कहा, “चड्डी उतार दूँ दिव्या?”
“तुम अपना चूतड़ सामने करो, भैया चड्डी हटाकर चाट लेंगे। अभी तो यह हमलोगों का ब्रेकफास्ट है। केवल चूत में लंड घुसवाकर कच-कच चुदवाने में मजा नहीं आता। हमलोग अभी कुंवारी लौंडियाँ हैं। असली मजा तो इन्हीं सब में आता है। जैसे बताया है वैसे करो।”
“अच्छा।”
और मैं मुकेश के सामने चौपाया (डॉगी पोजिशन) में आई तो मुकेश ने पीछे से मेरा स्कर्ट उठाकर मेरे चूतड़ पर हाथ फेरा तो हमको बड़ा मजा आया। मेरी चूत इस पोज में चड्डी के नीचे कसी थी। दिव्या ने खड़े-खड़े चटाया था पर मुझे निहुराकर चटाने को कह रही थी। अभी मुकेश चूतड़ पर हाथ फेर रहा था।
दिव्या ने मेरे मुँह के सामने अपनी चूत की ओर बोली, “शोभा पेट को गद्दे में दबाकर पीछे से चूतड़ उभार दो। तुम्हारी भैया चाटेंगे तुम मेरी चूत चाटो और हाथ से मेरी चूचियाँ दबाओ फिर देखना कितना मजा आता है।” इस पोज में दिव्या की साँवली चूत पूरी तरह से दिख रही थी।
उसकी चूत मेरी चूत से बड़ी थी। दरार खुली हुई थी। दिव्या की चूत देख मैंने सोचा कि मेरा तो सब कुछ इससे अच्छा है। अगर मेरे साथ मुकेश को ज्यादा मजा आया तो वह दिव्या से ज्यादा हमको प्यार करेगा। मैंने चूचियों को गद्दे में दबा पीछे से चूतड़ उभारा और मुँह को दिव्या की चूत के पास ला प्यार से जीभ को उसकी चूत पर चलाया.
तो दिव्या अपनी चूत को हाथ से खोलती बोली, “चूत के अंदर तक जीभ डालकर तब तक चाटना जब तक भैया तुम्हारी चाटते रहें। मजा लेना सीख लो तभी जवानी का मजा पाओगी।” दिव्या की चूत पर जीभ लगाने में सचमुच हमको काफी मजा आया।
तभी मुकेश नीचे कसी चड्डी की चूत पर उँगली चला हमें मजा के सागर में ले जाते बोला, “तुम्हारी चड्डी बड़ी कसी है। फाड़कर चाट लें?” “हाय फाड़ दीजिए ना।” मैं दिव्या की झरी चूत के फैले दरार में जीभ चलाती दोनों हाथों से मर्द की तरह उसके गदराए अनारों को दबाती वासना से भर बोली। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तभी मुकेश ने दोनों हाथों को चड्डी के इधर-उधर लगा जोर से खींचा तो मेरी पुरानी चड्डी एक झटके में ही चर्र से फट गई। उसे पूरी तरह अलग कर मेरी गदराई हसीन गुलाबी चूत को नंगी कर उँगली को दरार में चलाता बोला, “जरा सा चूतड़ उठाओ।” नंगी चूत को मुकेश की उँगलियों से सहलाने में इतना मजा आया कि मेरे अंदर जो थोड़ी बहुत झिझक थी, वह भी खत्म हो गई।
मैंने चूतड़ उठाया तो वह बोला, “जरा दिव्या की चूत चाटना और चूची दबाना बंद करो।” मैं चूची से हाथ अलग कर चूत से जीभ निकाली तो उसने मेरी चूत को उँगली से कुरेदते पूछा, “अब ज्यादा मजा आ रहा है कि दिव्या की चटाई हुई?”
“जी अब कम आ रहा है।”
“ठीक है तुम दिव्या की चाटो।”
मैं फिर दिव्या की चूत चटते हुए उसकी चूचियाँ दबाने लगी तो मुकेश से नंगी चूत सहलवाने में गजब का मजा आने लगा। अभी मुकेश ने मेरी चाटना शुरू नहीं किया था पर उँगली से ही हल्का पानी बाहर आया तो वह मेरी फटी चड्डी से मेरी चूत को पोंछते पूरी चूत को सहलाता अपनी बहन से बोला, “दिव्या इसकी अभी चुदाई नहीं हुई।”
“हाँ भैया मेरी सहेली को तुम ही चोदकर जवान करना। अब तो शरमा भी नहीं रही है।”
“ठीक है रानी इसको भी तेरी तरह जवान कर देंगे। वैसे चोदने लायक पूरी गदराई चूत है। क्यों शोभा कितने साल की हो?”
“जी 18 की।”
“बड़ी मस्त हो बोलो इसका मजा हमसे लोगी या शादी के बाद अपने पति से?”
“हाय आपसे।”
मैं दिव्या की चूत से मुँह अलग कर बोली। “दिव्या तुम्हारी सहेली की चूत टाइट है। तुम अकेले में इसको तैयार करना। हमें बहुत पसंद है तुम्हारी सहेली।”
“हाँ राजा यह तो पड़ोस की ही है। भैया इसे तो तुम जानते ही हो।”
“हाँ पर आज पहली बार मिल रहा हूँ।” और इसके साथ मेरी मस्त गुलाबी फाँकों को चुटकी में दबाकर मसला तो मैं अपने आप कमर उभारती बोली, “हाय मुकेश अच्छा लग रहा है। ऐसे ही करो।” तभी आगे से दिव्या चूत को उछकाती बोली, “आ रहा है ना जन्नत का मजा?”
“हाँ हाय।”
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“शोभा। इसी तरह शर्माना नहीं, जिसको मेरे भैया चोद देते हैं वह मेरे भैया की दीवानी हो जाती है। अभी तो शुरुआत है आगे देखना। मैं तो भैया से खूब चुदवाती हूँ। रोज रात में भैया के कमरे में हो सोती हूँ। तुम्हारे लिए भी बड़ा अच्छा मौका है। घर खाली है जब चाहो भैया को बुलाकर डलवा लो। फिर जब मम्मी-पापा आ जाएँ तो मेरे घर आ जाना।”
दिव्या की बातों से हमें अपने बदन का लाजवाब मजा मिल रहा था। वह अभी तक मेरी गदराई चूत को सहला रहा था। मैं चूचियाँ दबाती सहेली की चूत चटती मजा ले रही थी। बाहर होलिका हुरदंग मचा था और घर में जवानी का। तभी मेरी फांक को उँगली से कुरेदते मुकेश ने पूछा, “सच बताओ हमारे साथ चूत का मजा आ रहा है।”
“जी हाय बहुत आ रहा है। हाय नहीं शर्माएँगे, हमको भी दिव्या की तरह चोदिए।”
“अभी दिव्या और तुमको चोदकर चले जाएँगे। तुम खा-पीकर घर पर रहना तो तुमको अकेले मजा लेने सिखाएँगे। चूत तुम्हारी बड़ी मस्त है। जितना चुदवाओगी उतना ही मजा पाओगी।”
फिर वह अपनी बहन से बोला, “दिव्या तुमको ऐतराज न हो तो दोपहर को अकेले तुम्हारी सहेली को चोद दें।”
“नहीं भैया कहो तो अभी चले जाएँ।”
“ठीक है जाओ। आज मैं तुम्हारी इस गदराई कुंवारी सहेली को जी भरकर रंग खिला दूँ।” और झुककर मेरी गदराई गोरी-गोरी चूत को जीभ से लपलप चाटने लगा। हमको अब तक का सबसे हसीन मजा चटवाने में आया। वह चूत की दरारों को फैला रानों के बीच मुँह डाल जीभ को दरार और गुलाबी छेद पर चला रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरी आँखें बंद हो गईं। करीब 10 मिनट तक मेरी चूत को इसी तरह से चाटता रहा और जब अलग हुआ तो दिव्या नहीं थी। उसका लंड अभी भी उसी तरह खड़ा था। मस्ती के आलम में दिव्या कब कमरे से चली गई इसका पता ही नहीं चला। मैं घबराई.
तो वह मेरे उभारों को हाथ से थपथपाते बोला, “दिव्या को हटा दिया है अब अकेले मजा लो। उसके रहने से तुम्हारा मजा किरकिरा हो जाता। पहली बार चुदोगी तो पूरा मजा आराम से लो। हाय तुम्हारी चूत और चूचियाँ दिव्या से अच्छी हैं अब तुम्हीं को पेला करेंगे।”
अब मुझे दिव्या से जलन होने लगी। चूत चटकर पूरी तरह मस्त कर हमें अपना दीवाना कर दिया था। मुकेश ने चटकर मजा के साथ जो मेरी चूत को अपनी बहन दिव्या की चूत से हसीन और लाजवाब बताया तो उससे मैं पूरी तरह अपनी जवानी का मजा उसे देने को तैयार थी।
मन में यही था कि अभी ऊपरी खेल खेल रहा है तो इतना मजा आ रहा है, जब लंड पेलकर चूत चोदेगा तो कितना मजा आएगा। वैसे दिव्या की चूत चाटने और उसकी सेब सी बड़ी-बड़ी चूचियाँ दबाने में मजा आया था पर उसका अपने भाई को मेरे पास अकेले छोड़कर चला जाना बड़ा ही अच्छा लग रहा था।
इस समय मेरी चटी गई चूत झनझना रही थी। मुकेश ने जीभ को चूत के गुलाबी छेद में डालकर चाटा था उससे मैं बुरी तरह उत्तेजित हो गई थी। उसके लंड ने इतने पर भी पानी नहीं फेंका था। उसने चड्डी फाड़कर मजा लिया था। शर्ट खुली थी और दोनों अमरूद तने थे। लास्ट पार्ट वह मेरी गोल-गोल छोटी-छोटी चूचियों को कसकर दबाते हुए बोला, “सच बताना मेरे साथ होली का मजा आ रहा है या नहीं?”
“जी बहुत मजा आ रहा है।”
“तभी तो दिव्या को हटा दिया। होती तो कहती पहले मेरी चोदो। पिछली होली से उसे चोद रहा हूँ पर अभी भी उसका मन नहीं भरा। रोज रात में दो-तीन बार चुदवाती है। अब उसे कम चोदा करेंगे। बस तभी जब तुम्हारी नहीं मिलेगी। कितनी काली सी बेकार चूत है उसकी। हाय तुम्हारी चूत तो देखते ही पागल हो गए हैं। ऐसी पाए तो बस चौबीस घंटे डाले पड़े रहें। काश मेरी बहन की ऐसी होती।”
उसने एक हाथ से आगे से फटी चड्डी की नंगी चूत को सहलाते कहा तो मैं बोली, “मेरी चूत तो आपकी ही है। इसे चोदिए ना।”
“बर्दाश्त नहीं कर पाओगी रानी चूत फट जाएगी। इतनी हसीन चूत को जल्दी में खराब न करवाओ। रात में तुम अपने ही घर में सोना तो आकर रात में चोदेंगे। जितना चुदवाओगी उतनी ही खूबसूरती आएगी और चूत भी जवान होगी। अगर तुम्हारी भी दिव्या की तरह होती तो अभी चोदकर खराब कर देता। हाय काश दिव्या की भी ऐसी ही होती।”
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“हाय मुकेश मेरी भी तुम्हारी है।”
“हाँ रानी पर दिव्या तो मेरी बहन है, हमेशा घर में ही रहती है। जब चाहा चोद लिया पर जब तुम्हारे मम्मी-पापा आ जाएँगे तो कैसे होगा।”
“हो जाएगा। दिन में आपके घर आ जाया करूँगी और रात में आप पीछे वाले दरवाजे से आ जाया करिएगा।”
“हाँ यह ठीक रहेगा। दिव्या की देखा है।”
“हाँ।” “दिव्या की तुम्हारी जैसी जंदर फांक नहीं हैं। चोदने में फाँके ही सुपाड़े से रगड़ खाती हैं तो लड़कियों को मजा आता है। मम्मी-पापा तो कई दिन बाद आएँगे।”
“जी।”
अब हमें बैठकर एक हाथ से चूची के उठे-उठे निप्पल और दूसरे हाथ से लहसुन (क्लिटोरिस) मिसवाते हुए उसके लंड को झटका खाते देखने में ऐसा मजा आ रहा था कि मैं मुकेश की दीवानी हो गई। उसे मैं दिव्या से ज्यादा पसंद थी। “शोभा।”
“जी।”
“दिव्या की चूत काली है।”
“जी पर आप तो उसे खूब चोदते हैं। पिछले साल होली से बराबर चोद रहे हैं।”
“होली में मस्त था। रंग लगाया और मन किया तो पटककर चोद दिया। तब से साली रोज चुदवा रही है। तुम्हारे आगे तो वह एकदम बेकार है। बोलो जमकर चुदवाओगी हमसे?” और उँगली को एक इंच बैठे-बैठे गैप से डाला तो उँगली घुसने में और मजा आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“जी चुदवाऊँगी।”
“जैसे मजा दे वैसे लेना। फिर उँगली से पेलकर फैलाओ। बाद में तेल लगाकर इससे पेलेंगे तो खूब मजा पाओगी।”
वह अपना लंड दिखाता बोला। गरम चूत को उँगली से खुदवाने में गजब का मजा आ रहा था। 9-10 बार चूत में आधी उँगली को उसी तरह सामने बैठकर पेला और फिर बोला, “दिव्या पूछे तो बताना नहीं कि तुमको खूब मजा देने के बाद चोदा है। उसकी तो मैं चूची दबाकर फौरन डाल पेलता हूँ।”
“नहीं बताऊँगी।”
“बता दोगी तो हमसे इसी तरह करने के लिए कहेगी। तुम्हारी कुंवारी गोरी अनचुदी गुलाबी फांक वाली है इसलिए खूब प्यार से पेलेंगे ताकि खराब न हो। चोदने के भी अलग-अलग तरीके होते हैं। हर बार पेलवाओगी तो हम नए-नए तरीके से पेलेंगे। देखना जब तक मम्मी-पापा आएँगे, तुम्हारी चूचियों को डबल करके चूत को सयानी कर देंगे। पेलवाने के बाद और खूबसूरत लगने लगोगी। तुम्हें खूब मजा देने के लिए ही दिव्या को भगा दिया है। जाओ पेशाब करके सब कपड़े उतार कर पूरी नंगी होकर थोड़ा सा तेल लेकर आओ। कोकोनट ऑयल लाना।”
उसने सटाक से चूत से उँगली बाहर निकाली तो आने वाला मजा किरकिरा हो गया। मैं मजा से झड़ी तो कई बार थी पर इस खेल में नई थी इसलिए मजा कम नहीं हुआ। मैं फौरन कमरे से बाहर गई, तपक से शर्ट उतारी और फटी चड्डी को खिसका एक तरफ फेंका और पेशाब करने बैठी।
चटी गई और उँगली से धीरे-धीरे पेली गई चूत का तो हुलिया ही बदल गया था। दोनों दरारें लाल थीं। पेशाब करते हुए पहली बार चुदवाने वाले छेद में फैलाव नजर आया। मुकेश की मस्त हरकतों से होली के दिन मेरी चूचियाँ और चूत दोनों खिल उठी थीं। हमने उसके मोटे और लंबे लंड को देखा था पर परवाह नहीं थी कि जब पेलेगा तो चूत फटेगी या रहेगी।
वैसे तेल लगाकर पेलने की बात कर मन में और मस्ती भर दी थी। सच तो यह था कि बिन चुदवाए ही इतना मजा आया था कि दोबारा उसे घर बुलाने को तैयार थी। दिव्या तो अपनी सड़ीयल चूत चटाकर खिसक गई थी। पेशाब कर पूरी नंगी हो तेल लेकर कमरे में वापस आई तो वह मुझे पूरी नंगी देख तड़प उठा और उसका तना लंड झटके खाने लगा।
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मैं खुद चुदवाने के लिए तेल लेकर आई थी जिससे उसे बड़ा मजा आया। वह पास आ मेरी मस्ताई खरबूजे की फांक सी चुदासी चूत को उँगली से दबाता बोला, “ठीक से पेशाब कर लिया है ना?” “जी” नंगे होने का तो मजा ही निराला था। “अब आएगा मजा।” “जी पर किसी को पता न चले।”
मैं चूत में उँगली का मजा लेते बोली तो उसने कहा, “नहीं चलेगा। अभी तुम कुंवारी हो अगर सीधे पेल दिया तो फट जाएगी और फिर चुदवाने का मजा भी नहीं आएगा। पेशाब न करा हो तो ठीक से कर लो। एक बार चोदते हुए दिव्या ने मूत दिया था। सारा मजा खराब हो गया था।”
मुकेश की इस बात से और मजा आया। मेरी दोनों आँखें मजा से खुल नहीं रही थीं। मैं चूत को उछकाती बोली, “कर लिया है।” “तो आराम से चित होकर लेटो।” मैं फौरन तकिए पर सिर रख टाँग फैलाकर लेटी। उस समय चूत चुदास से भरी थी। गरम-गरम साँसें बाहर आ रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दो बार झड़ी थी पर मस्ती बरकरार थी। लेटने के साथ ही उसने लंड को मेरी चूत पर रखा और दोनों चूचियों को दबाता बोला, “दिव्या को यह बात न बताना कि तुमको हमने इस तरह से मजा दिया है। तुम्हारी चूत अच्छी है इसलिए खूब प्यार करने के बाद ही चोदकर सयानी करेंगे।”
चूत पर तना मोटा लंड का गरम सुपाड़ा लगवाकर चूचियों को दबवाने में नया मजा था। मैं मस्ती से बोली, “उसे कुछ नहीं बताएँगे। आप बराबर मेरे पास आया करिए।” “जितना हमसे चुदवाओगी उतनी ही खूबसूरती आएगी।” और झुककर बाकी चूची को रसगुल्ले की तरह मुँह में ले जो चूसा तो मैं मजा से भर सिसकार उठी।
उसने एक बार चूसकर चूची को मुँह से बाहर कर दिया। मैं इस मजा से बेकरार होकर बोली, “हाय बड़ा मजा आया। ऐसे ही करिए।” “चूचियाँ पिलाओगी तो तुम्हारी भी दिव्या की तरह जल्दी बड़ी होंगी।” और चूत पर सुपाड़े को नीचे कर लगाया। “बहुत अच्छा लग रहा है। बड़ी कर दीजिए मेरी भी।”
तब वह दोनों गोल-गोल खड़े निप्पल वाली चूचियों को दोनों हाथ से सहलाता बोला, “पहले चूत का छेद बड़ा करवाओ। एक बार इससे रंग लगवा लो फिर चूसकर खूब प्यार से तेल लगाकर पेलेंगे। जब तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की चुदवाने को तैयार हो तो दिव्या को क्यों चोदें। देखो जैसे दिव्या ने अपनी चूत हाथ से फैलाकर चटवाई थी उसी तरह अपनी फैलाओ तो अपने रंग से इसे नहला दे।”
मैंने फौरन हाथ से चूत के फांक खोले तो वह मेरी टाँगों के बीच घुटने के बल बैठ एक हाथ से लंड पकड़ गरम सुपाड़े को चूत के फांक में चलाने लगा। मुझे मजा आया। 9-10 बार सुपाड़े को चूत पर रगड़ने के बाद बोला, “मजा आ रहा है?” “जी… हायययय आआह्ह्ह्ह।”
“ऐसे ही फैलाए रहना बस निकलने ही वाला है।” उसने सुपाड़े को 5-10 बार चूत पर रगड़ा ही था कि गरम-गरम पानी दरार में आया। उसका लंड फड़फड़ा कर झड़ने लगा। गरम पानी पाते ही मैं हाय आआह्ह्ह करने लगी। वह सुपाड़ा दबाकर 2 मिनट तक झड़ता रहा। मेरी चूत लपलपा गई पर लंड से निकले पानी ने बड़ा मजा दिया।
झड़ने के बाद उँगली को छेद पर लगा अंदर किया तो लंड के पानी की वजह से पूरी उँगली सट से अंदर चली गई। जब पूरी उँगली अंदर गई तो मैं मजा से टाँगों को अपने आप उठाती चूत को उभारती बोली, “हाय मुकेश बड़ा मजा आ रहा है। उँगली से खूब करो।” मुकेश उँगली से चूत को चोदता बोला, “इस तरह फैलवा लोगी तो लंड जाने में दर्द नहीं होगा। इतने प्यार से बिना फाड़े कौन चोदता तुमको।”
“हाय आप सच कह रहे हैं।” चूत में सक्क-सक्क अंदर-बाहर आ जा रही उँगली बड़ा मजा दे रही थी। हमको चुदवाने सा मजा आ रहा था। वह उँगली को पूरी की पूरी तेजी के साथ पेलता ध्यान से मेरी फैल रही चूत को देख रहा था। ज्यों-ज्यों वह सटासट चूत में उँगली डालने-निकालने की रफ्तार बढ़ा रहा था त्यों-त्यों मैं होली के रंगीन मजा में खोती अपना तन-मन उसके हवाले करती जा रही थी।
मैं शायद फिर पानी निकालने वाली थी कि उसने एक साथ दो उँगली अंदर कर दी। मैं कसकी तो वह निप्पल को चुटकी दे बोला, “फटेगी नहीं।” अब दो उँगली से चूत को चुदवाने में और मजा आ रहा था। लगा कि दूसरी उँगली से चूत फौरन पानी फेंकेगी। तभी वह बोला, “पानी निकला?”
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“जी हाय और चूसिए।” “ज्यादा चूसाओगी तो बड़ी-बड़ी हो जाएँगी।” “होने दीजिए। हमको पूरा मजा लेना है।” “चूचियाँ तो दिव्या भी खूब पिलाती है पर उसकी चूत में जरा भी मजा नहीं है। अब जिस दिन तुम नहीं चुदवाओगी, उसी दिन उसकी चोदेंगे।” “हम रोज चुदवाएँगे। घर खाली है, रोज आइए। रात में मेरे घर पर ही रहिएगा।” “पहले आगे के छेद का मजा देंगे फिर तुम्हारी गांड भी मारेंगे। दिव्या अब गांड भी खूब मरवाती है।” उसने गांड के छेद पर उँगली लगाई।
फिर मुकेश ने तेल की बॉटल मुझे दे कहा, “लो लंड पर और अपनी चूत पर तेल लगाओ फिर इससे पेलवाकर जन्नत का मजा लो।” मैंने उठकर उसके लंड पर हाथ से तेल लगाया और उँगली से अपनी चूत पर लगाकर फिर चित लेट गई। उसने गांड के नीचे तकिया लगाकर चूत को उभारा और दोनों टाँगों के बीच बैठ सुपाड़े को छेद पर लगा दोनों चूचियों को पकड़ जोर से पेला। मैं एक आह्ह के साथ सुपाड़े को चूत में दबा लिया। ऐसा लगा कि चूत फट गई हो। वह धक्के मारकर पेलने लगा और मैं मस्ती में आआह्ह्ह स्स्सीई करने लगी।
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