Dehati Bhabhi Gand Sex
मैं निशा, गाँव की रहने वाली, 35 साल की शादीशुदा औरत, दो बच्चियों की माँ, घर का कामकाज करने के साथ साथ पति का भी खेतों में हाथ बटाती थी. हम मध्यम वर्ग के परिवार वालों के पास ना तो ज्यादा कुछ था पर खुशी से रहते थे पति खेतों में काम करके थक जाते थे और घर में 2 ही कमरे थे जिसके कारण पति पत्नी का मिलन अब बहुत कम ही होता था, बच्चियां भी धीरे धीरे बड़ी होने लगी थी. Dehati Bhabhi Gand Sex
सब सही चल रहा था कि एक दिन सितंबर के महीने मे बारिश हो रही थी, तो मुझे कुछ काम से मेरे पड़ोस के घर रानी चाची के घर जाना पड़ा, बारिश जोर से हो रही थी तो मैं उनके घर बिना उन्हें पुकारे किये दरवाजा खोलकर अंदर घुस गई, उनके बरामदे मे खड़ी होकर खुद को पोंछने लगी, क्योंकि छाता होने के बावजूद भी मैं थोड़ी सी भीग गई थी.
मुझे घर के भीतर से आह आह की आवाज सुनाई दी, जो कि चाची की थी. मैंने सोचा कि चाची ऐसी आवाजें क्यों निकाल रही हैं चाचा तो कमाने शहर गए हुए हैं.. रानी चाची के बारे में बता दूँ. उम्र- लगभग 47, बदन अभी भी गदराया हुआ था, देखने से उम्र पता नहीं चलता था बड़ी बड़ी चूची, मोटे मोटे कूल्हे.
मैंने अंदर झांक तो देखा कि चाची बिस्तर पे लेटी है और एक लड़का चंदू जो उनका भतीजा था, शहर से कुछ दिनों के लिए आया था उनकी एक टांग को अपने कन्धे पर रख कर खड़े होकर अपना लंड चाची की बुर मे अंदर बाहर कर रहा था. मेरा तो माथा ही घूम गया, वहाँ से हटने की कोशिश तो की पर मन नहीं मान रहा था, बाहर बारिश हो रही थी तो मैने सोचा कि देखती हूँ क्या क्या करते हैं, फिर से अंदर देखने लगी.
अंदर का नजारा….. चाची की एक चूची ब्लॉउज से बाहर निकली हुई थी, उनकी चूची हवा मे हिल रही थी, साड़ी कमर तक उठी हुई थी, मांसल जांघे भी हिल रही थी, और चंदू अपना लंड उनकी बालों से भरी बुर में अंदर बाहर कर रहा था और चाची अपनी बुर के ऊपरी हिस्से को हाथों से सहला रही थी. चंदू का लंड देखने लायक था, गोरा और बड़ा लंड जिसका सुपडा मुझे दिखाई नहीं दे रहा था.
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मेरे मन मे ना जाने कैसे कैसे ख्याल आने लगे, कि अगर ये मुझे चोदे तो मजा आ जायेगा. मैंने आजतक इतना बड़ा और सुंदर लंड देखा नहीं था मेरे पति का लंड काला और चंदू से छोटा था. मेरे मुँह मे पानी आने लगा उसके लंड को देख के मैं सोच मे पड़ गई, कि चाची इतनी उमर्दराज औरत अपने भतीजे से कैसे चुदवा सकती है. बुर की गर्मी होती ही कुछ ऐसी है, कि मुझे अंदर से आवाज सुनाई दी-
चाची- चंदू आज तो तूने जमके चोदा, मजा आ गया, चल तू सो जा मैं धो कर आती हूँ फिर खाना भी बनाना है.
मैं समझ गई कि चंदू ने अपना माल चाची की बुर मे डाल दिया है जिसको धोने की बात चाची कर रही हैं. मैं जल्दी से वहाँ से निकली, और बिना छाता लिए ही अपने घर की तरफ दौड़ी, ताकि कहीं चाची मुझे देख ना ले. दिन भर मेरे दिमाग में वही नजारा घूमता रहा, रात को नींद भी नहीं आई, ध्यान बार बार चाची के घर की तरफ जा रहा था. मैं हवस से भर चुकी थी. सुबह बच्चों के स्कूल जाने के बाद मैने अपने पति से कहा की चलिए अभी करते हैं पहले तो वो मना करने लगे.
पति- तुम्हे आज क्या हो गया है, अभी सुबह सुबह ये सब करने का वक्त नहीं है, मुझे काम करने भी जाना है.
पर मेरे जबरदस्ती करने पर वो राजी हो गए. उन्होंने मुझे सुला दिया, साड़ी उपर करके मुझपे चढ़ गए और बुर मे लंड डालकर चोदने लगे. पर मुझे मजा नहीं आ रहा था, मुझे तो बस चाची की चुदाई और चंदू के लंड की याद आ रही थी. पति देव ने दो मिनट मे ही अपना माल मेरे भीतर छोड़ दिया और उठ कर तैयार होकर खेतों की तरफ चल दिये.
मेरी वासना पुरी नहीं हुई थी तो मैं उठी कपड़े ठीक किये और चाची के घर जाने लगी. वहाँ पहुंची तो सोचा कि बिन पुकारे जाती हूँ कहीं कुछ देखने को मिल जाये, दबे पांव मैं उनके दरवाजे को खोलकर बरामदे तक पहुंची, कमरे का दरवाजा खुला हुआ था फिर भी मैं अंदर नहीं गई उनकी बातें सुनने की कोशिश की. कुछ फुसफुसाने की आवाज आ रही थी. मैं धीरे धीरे खिड़की के पास गई.
चाची- कल रात भर तूने चोद चोद के मेरी चाल ही बिगाड़ दी.
चंदू- चाची अभी तो बहुत कुछ बाकी है.
चाची- तू जो बोल रहा है, क्या कोई करता है भला.
चंदू – अरे शहर में सब करते हैं, मजा आयेगा,आज मना मत करना.
चाची- अरे बेटा मुझसे वो सब नहीं होगा, मैंने कभी किया नहीं है.
चंदू- तुमने आज तक कभी किसी का लंड चूसा था क्या.
चाची- नहीं कभी नहीं, मैं क्यों चूसूं किसी क्या, आजतक तेरे चाचा के अलावा कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया है.
चंदू- मेरे साथ तो किया है ना, और मेरा चूसा भी है.
चाची- तेरी बात अलग है, वो सब छोड़कर भी तो मजा किया जाता है.
चंदू – मैं कुछ नहीं सुनने वाला, तुमने मेरी कसम खाई है, अब मेरा जीना मरना तुम्हारे पे.
चाची- मरने की बात मत कर, ठीक है जो मर्जी कर लेना आज रात.
चंदू- रात नहीं दिन मे, रात में अंधेरा हो जाता है तो मजा नहीं आयेगा.
चाची – ठीक है, जैसे तेरी मर्जी.
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि ये क्या सब करने की बात कर रहे हैं. मैं वहाँ से दबे पाँव निकल कर घर वापस आ गई, घर के कामों को समाप्त किया बच्चियाँ स्कूल से वापस आ गई थी उन्हें खाना खिलाकर, खेतों पे उनके पिता के लिए खाना देकर भेज दिया.
मैं जानती थी कि ये जाएंगी तो शाम को अपने पिता के साथ ही घर आयेंगी. मेरे मन में कुलबुलाहट हो रही थी कि वो क्या करेंगे आज दोपहर को मैं चुपके से उनके घर में दाखिल हुई. उनके घर में दो कमरे और एक रसोई थी. एक कमरे मे चंदू को लेटा देख मैं दुसरे कमरे में घुस गई दोनों कमरो के बीच एक खिड़की थी जिसमें दरवाजा नहीं था सिर्फ एक पर्दा लगा हुआ था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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उस कमरे में अंधेरा ही था तो मैं वहाँ पलंग पर बैठ गई जो कि खिड़की के बिल्कुल पास था और दुसरे कमरे में देखने लगी. चाची नहा कर आई और कमरे का दरवाजा बंद क्या वो सिर्फ एक पेटीकोट चुचियों के ऊपर से बांध कर आई थी. गाँव मे हम सारी औरतें ऐसे ही नहाती हैं.
उनकी गोरी गोरी मांसल जांघें नजर आ रही थी. चंदू उठ के पलंग पर बैठ गया और खिड़की बंद करने को बोला. चाची अपनी गांड हिलाते हुए खिड़की बंद करने लगी खिड़की बंद होते ही चंदू उठा और उनके पीछे आ गया और चाची को पकड़ लिया. चाची घुमी तो उसने उनके होठों पे होठ रख दिया और उसे चूमने लगा.
चाची भी उसका साथ देने लगी, दोनों एक दुसरे के मुँह में मुँह डालकर चूस रहे थे. चंदू ने चाची की पेटीकोट की डोरी खोल दी जिससे पेटीकोट नीचे गिर गई चाची पुरी नंगी हो गई ये क्या बुर पे एक भी बाल नहीं था. इसका मतलब कल जो बुर बालों से भरी हुई थी, आज पूरी सफाई करवाई हुई थी.
चंदू चाची की बुर को मुट्ठी में भर के दबाने लगा चाची मचलने लगी और जोरों से उसे किस करने लगी. इधर मेरी बुर भी पनिया गई थी, मैंने भी अपनी साड़ी कमर तक उठाई और अपनी पनियाइ बुर को मसलने लगी. अंदर का नजारा…….
चाची ने चंदू के कपड़े भी उतार दिये, और चंदू को पलंग पर बिठा कर उसकी गोद में पाँव फैलाकर बैठ गई. ऐसे बैठी थी जिससे उसका लंड चाची की बुर के मुहाने को छु रहा था और चाची उसके होठों को चूसे जा रही थी. दोनों मस्ती मे एक दुसरे को चूस रहे थे कि चंदू ने उनके चुच्चो को दबाना शुरू किया, दोनों हाथों से पूरा दम लगा कर मसलने लगा, चुचे पूरा लाल हो गए.
मेरे मन में अफसोस अभी तक था कि मैं चंदू के लंड का पूरा दर्शन नहीं कर पाई थी. चाची मजे से उसके होठों को चूसे जा रही थी, चंदू उनके चूचे मसलने में मशगूल था फिर उसने चाची के चूचे चूसने शुरू किये, चाची कसमसाने लगी वो चूचे को दबाता और मुँह मे लेकर जोर जोर से चुसता. चाची के मुँह से सिसकरियाँ निकलने लगी-
चाची – चूस हरामी चूस, बचपन मे तो अपनी माँ के चूस के मन नहीं भरा होगा, चूस के पी ले सारा दूध.
वो जोश में आकर और जोर से दबा के पीने लगा. उन्हें देख कर मेरे सब्र का बांध टूट रहा था.
चंदू- चाची आओ अब इसे प्यार करो.
पहले चाची ने बहुत ना नुकूर की पर चंदू के सामने उसकी एक ना चली. चाची ने मुँह खोला ही था की चंदू ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया. चंदू के लंड के साक्षात दर्शन हो गए मुझे, जबरदस्त लंड था एकदम गोरा और टमाटर की तरह लाल सुपडा बिल्कुल सख्त जो कि चाची के मुँह को चोद रहा था.
पहली बार किसी को मुँह में चोदते देख मेरी उत्तेजना चरम पर थी, साँसे तेज हो गई थी, मन तो कर रहा था कि उनके बीच में जाकर उसके लंड को मुँह मे लेकर खा ही जाऊँ. चाची गौं गौं की आवाज करके अपना मुँह लंड से चुदवा रही थी. अचानक चंदू ने लंड मुँह से निकाल दिया, चाची खांसने लगी, फिर चंदू ने चाची को बिस्तर पे लेटाया और दोनों टांगे फैला कर उनकी बुर को मुँह मे पूरा भरकर चूसने लगा.
चाची चौंक के बोली मादरचोद ये क्या कर रहा है, वो कुछ ना बोला और चूसता रहा, चाची मदहोश होने लगी और उसके सिर को अपनी बुर पे दबाने लगी. मैं सोच मे पड़ गई भला बुर को भी कोई चूसता है, पर मै तो आँखों से देख रही थी. करीब 15 मिनट चूसने और चाटने के बाद उसने चाची को घोड़ी बनने को बोला.
चाची इतनी मदहोश थी कि वो तुरंत घोड़ी बन गई, उनकी गांड मेरे तरफ थी तो मैं उनके गांड के भूरे छेद को देख सकती थी जो थूक से सनी होने के कारण चमक रही थी, उनके बुर से पानी रिस रहा था. उसके बाद जो मैंने देखा मैं तो चौंक गई.
चंदू उनके पीछे आकर उनकी गांड के छेद को जीभ से कुरेद रहा था और जीभ से चाट रहा था. मैं सोचने लगी कि ये कितना गंदा आदमी है जो कि हगने वाली जगह चाट रहा है. पर चाची की सिसकरियाँ सुनने के बाद समझ में आया इसमें भी मजा है. चाची की सिसकारी बढ़ने लगी-
चाची- जोर जोर से चाट मेरे कुत्ते जोर से चाट.
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तभी चंदू ने अपनी एक ऊँगली मुँह मे डालकर गीला किया और आस्ते आस्ते उनकी गांड की छेद मे रगड़ने लगा और धीरे धीरे उंगली छेद मे डालने लगा. चाची का मजा और भी बढ़ गया शायद, वो जोर जोर से सिसकने लगी. चंदू धीरे धीरे उंगली अंदर बाहर करता रहा.
फिर कुछ समय बाद उसने दुसरी उंगली भी अंदर डालकर अंदर बाहर करने लगा, कुछ देर मे….. चंदू ने तेल की बोतल से बहुत सारा तेल अपने लंड पर लगाया और उनके गांड की छेद पे लगाया जिससे की छेद चिकना हो गया, उसने एकसाथ दो उँगली डाला फिर तीसरी उंगली डाली, चाची मस्ती मे आगे पीछे हो रही थी.
उंगलियाँ निकाल कर उसने अपना लंड छेद पे लगा कर, चाची को पीछे से पकड़कर एक जोर का धक्का लगाया. चाची चिल्लाने लगी लंड का सुपडा उनकी गांड मे घुस चुका था. चाची आगे की ओर जाने की कोशिश कर रही थी पड़ चंदू ने उन्हें जोरों से पकड़ा हुआ था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चाची- छोड़ रे मादरचोद, मार देगा क्या भोसड़ी वाले.
चंदू ने एक ना सुनी और लंड को गोल गोल घुमाने लगा. शायद चाची का दर्द थोड़ा कम हुआ, तो चंदू ने चाची के मम्मों को जंगलियों की तरह दबाने लगा, चाची का चिल्लाना सिसकारियों मे बदलने लगा, तो मुझे समझ मे आया कि गांड मे चुदवाने में मजा आता है, मेरी गांड में भी कुलबुलहट होने लगी, मन तो कर रहा था चंदू को चाची से अलग करके उससे चुदवाने लगूँ.
चंदू धीरे धीरे लंड अंदर बाहर कर रहा था, चाची आंहे भर रही थी मजे से. चंदू ने एक जोर का धक्का मारा चाची को जोर से पकड़ के और पूरा का पूरा लंड चाची की गांड मे चला गया. चाची छटपटाने लगी, खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी. मगर चंदू छोड़ने वाला तो नहीं था, चाची ने कुछ समय बाद विरोध करना बंद किया तो चंदू ने लंड पूरा निकाला.
मैंने देखा कि उसके लंड पे पीला पीला चाची की गांड का मसाला लगा हुआ था, फिर उसने एक झटके मे पूरा लंड गांड मे डाल दिया और धीरे धीरे गांड चोदने लगा. चाची दर्द से कराह रही थी, और हर झटके पे आगे की ओर जाने की नाकाम कोशिश कर रही थी.
चंदू ने धीरे धीरे रफ्तार बढ़ाया, चाची भी अपनी गांड पीछे करके उसका साथ देनें लगी, चंदू ने चाची के बाल पकड़ कर उसे घोड़ी के तरह चोदने लगा. आधे घंटे की चुदाई के बाद चंदू अब झड़ने लगा. चाची की जांघें भी थर्राने लगी, और बुर से पानी भी चूने लगी.
इतनी घमासान चुदाई के बाद अब वो भी झरने लगी पीछे से उनकी बुर बहुत प्यारी लग रही थी, एक फट सी आवाज के साथ चंदू का लंड उनकी गांड से निकला, चंदू जाके उनके बगल मे लेट गया, बेचारे ने इतनी मेहनत जो की थी, थक गया होगा. चाची के गांड का छेद पूरा खुल् गया था, 5 रुपए के बड़े सिक्के जितना, जिससे चंदू का सफेद गाढ़ा माल चू रहा था.
चाची भी थक गई थी, वो निढाल हो कर बिस्तर पर सो गई. दोनों लेटकर हाँफ रहे थे और थोड़ी देर मे सो गए. उनके सोने के बाद मैं निकल गई, मेरी जांघ मेरे बुर से निकली रस से भीग चुकी थी कमर और जांघ दर्द कर रहे थे. उस दिन के बाद मुझे सिर्फ चंदू के लंड की याद तड़पाने लगी.
दो दिन तक मैंने कोशिश की चाची और चंदू की चुदाई देखने की पर काम की वजह से देख नहीं पाई. एक दिन मैंने अपने बरामदे से चंदू को चाची के घर के बाहर बैठ के मेरे घर की ओर देखते देखा, वो पूरा नजर टिकाए हुए था तो मुझे कुछ शक हुआ, क्योंकि वो हमारे पन्नी से घेरे हुए संडास की तरफ ही घूर रहा था.
तभी संडास से मेरी भतीजी प्रिया निकल के आई जिसकी उम्र 19 साल थी, उसका घर मेरे बगल मे ही था. मुझे तभी समझ मे आ गया कि ये हमारे संडास की तरफ क्यों देख रहा था. थोड़ी देर में वो उठ के चला गया तो मैं उसी जगह पे खड़ी होकर अपने संडास की तरफ देखने लगी तो पाया कि संडास की पानी एक जगह से फटी ही थी और अंदर दिखाई दे रहा था.
तभी मेरी जेठानी प्रमिला संडास के अंदर घुसी, मैं खड़ी होकर देखने लगी कि देखती हूँ क्या दिखता है जो चंदू देख रहा था. जेठानी अंदर गई तो उनकी साड़ी मुझे दिखाई पड़ी. जेठानी ने अपनी साड़ी उठाई और मुतने बैठ गई और मुतने लगी, मुझे उनकी बालों से भरी क़ाली बुर से मुत निकलती दिखाई देने लगी, दूरी होने के कारण साफ तो नहीं दिख रहा था.
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मैं मन ही मन चंदू को गाली देने लगी कि कितना हरामी लड़का है, साला दूसरों के घर की औरतों के बुर ताड़ता है. फिर मैं अपने घर लौट आती हूँ, और सोचती हूँ कि चंदू को कैसे पटाया जाए, अगली सुबह वो फिर से उसी जगह बैठकर हमारे संडास की तरफ मुँह किये हुए था.
मैं मन ही मन खुश हो गई और अपनी गांड मटकाती हुई संडास मे गई, मैं जानती थी कि वो हरामी चंदू जरूर झांकेगा, तो मैंने अपनी साड़ी उठाई जिससे मेरे बुर के बाल उसे दिखाई दे, फिर मैं अपनी गांड दिखाने के लिए घूम गई और थोड़ी नीचे झुक गई ताकि उसे मेरे बड़े बड़े चूतड़ दिख जाए.
फिर मैं घूम के बैठ गई और मुतने लगी, मूतना खत्म करके मैंने अपनी उँगली अपनी बुर मे डाला और अंदर बाहर करने लगी. कुछ देर उँगली करने के बाद मैं उठी और संडास से निकल के घर की ओर जाने लगी. बरामदे पर जाके मैंने बिना घूमे उसकी ओर देखा वो मुझे एक टक देखे ही जा रहा था.
मैं समझ गई की मुर्गा फंस चुका है. मैं घर के अंदर ना जाकर बाहर आई और चाची के घर की तरफ जाने लगी. वो मुझे अपनी तरफ आता देख शायद सकपका गया, मैंने चिल्ला के पूछा कि चाची घर पे है तो वो बोला हाँ घर मे है. मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कुराई, और चाची के घर के अंदर घुस गई.
उसके चेहरे से ही पता चल रहा था कि वो घबरा गया है. मैंने चाची के साथ कुछ गप्पें लडाई और थोड़ी देर बाद मैं घर के लिए निकली तो वो आँगन मे कुर्सी पर बैठा था. मैं चाची के बाड़े से निकलते ही चिल्लाई- हाय दैय्या ये किस हरामी ने हमारे संडास की पन्नी फाड़ दी साले के घर में माँ बहन नहीं है क्या, जाके अपनी घर की औरतों के बुर देखे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उसे दिखाते हुए गाली देने लगी, चाची निकल के आई और मुझे समझाया तो मैं घर चली आई. मेरा गुस्सा बस दिखावे का था, शायद चंदू ये भाँप गया था, वो मुझे देख के मंद मंद मुस्करा रहा था. दोपहर को मै चुपके से चाची के घर पहुँची, खिड़की दरवाजे सब बंद थे पर उँह ऊँ की आवाज आ रही थी, मैं समझ गई कि अंदर चुदाई चल रही है. मैंने चाची को आवाज लगाया तो थोड़ी देर में दरवाजा खोलकर चाची निकली. वो बिना ब्लाउज के साड़ी जैसे तैसे लपेटे थी.
चाची- क्या हुआ निशा.
मैं- अरे कुछ नहीं थोड़ा चंदू को भेजोगी, चावल की बोरी अंदर करवानी थी, बारिश आने वाली है.
चाची- ठीक है तू जा मैं भेजती हूँ.
मैं ठीक है बोलके वहाँ से चली आती हूँ. 15 मिनट बाद चंदू भाभी भाभी पुकार के मेरे घर में आता है. मैं तो उसी का इंतजार कर रही थी. मैंने उससे कहा 5 बोरियां बाहर हैं, उठा के अंदर रख दो नहीं तो बारिश होने से भीग सकते हैं. वो बरामदे मे रखी एक बोरी उठाने लगा तो उससे उठा नहीं, तो बोला कि बहुत भारी है थोड़ी मदद कीजिये.
मैं गई और एक तरफ से और वो एक तरफ से बोरी को पकड़ के उठाने लगे, तो मेरा पल्लू नीचे गिर गया, जिससे मेरे चुचियो के उभार दिखने लगे. मैंने देखा कि वो मेरे चुचीयो को निहार रहा था तो मैंने बोरी को नीचे रख दिया और पल्लू को अपनी कमर मे बांध लिया और झुकके बोरी उठाने की कोशिश करने लगी.
वो मेरी चुचियों को ललचाई नजरों से देखने लगा. सारी बोरियां रखने के बाद मैंने साड़ी ठीक की उसके पैंट में तंबू बना हुआ था, मैंने देख लिया था. मन तो कर रहा था इससे अभी यहीं चुदवा लूं पर थी तो मैं एक औरत, वो पसीने मे तर बतर हो गया था, मैंने उसे लोटे मे पानी दिया, वो हाथ मुँह धोने लगा.
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मैं- चंदू कभी कभार हमारे घर भी आ जाया करो, क्या हमेशा चाची के घर में घुसे रहते हो.
चंदू- जी भाभी, अब तो आना जाना लगा रहेगा.
मैं- ठीक है, शाम को आना तुम्हारे लिए कुछ अच्छा बनाऊंगी.
चंदू- ठीक है भाभी, चलता हूँ, ज्यादा याद मत कीजियेगा.
मैं समझ नहीं पाई, फिर भी हंस के अपना माथा हाँ मे हिला दिया. शाम हुई तो वो हमारे घर के सामने से जा रहा था, तो मैंने उसे बुलाया. वो थोड़ी देर में आता हूँ बोलके चला गया. कुछ समय में जब वो नहीं आया तो मैं बेचैन होने लगी और द्वार पे आके खड़ी होकर रास्ते को तकने लगी. थोड़ी देर बाद वो मेरे पीछे से आकर भो करके मुझे डरा दिया. मैं पूरी डर गई थी, तो मैंने उसे एक हल्के से गाल पे मारा और बोला बदमाश डरा दिया तूने तो.
चंदू- क्यों भाभी किसका इंतज़ार हो रहा है इतनी देर से, शायद कोई खास है.
मैं- नहीं, नहीं तो.
चंदू- झुठ मत बोलो, मैं यहाँ 10 मिनट से खड़ा तुम्हारी बेचैनी देख रहा हूँ.
मैं- अरे किसी का नहीं तेरे भैया का इंतज़ार कर रही थी.
मैंने उसे घर के अंदर बुलाया.
चंदू- सच बोलो ना भाभी किसका इंतजार कर रही थी.
मैं- अरे बोला तो तेरे भैया का.
चंदू- मुझे तो लगा कि आप किसी और का इंतजार कर रही थी.
मैं- क्यों तुझे ऐसा क्यों लगा..
चंदू- आप जैसे बेचैन होकर रास्ते की ओर देख रही थी मुझे लगा कि आप अपने प्रेमी का इंतजार कर रही है
मैं- हट बदमाश. चल तेरे लिए मैंने पकौड़े बनाये हैं, खा ले.
चंदू- ठीक है भाभी पर बताओ कोई प्रेमी है या नहीं तुम्हारे..
मैं- अरे मेरा तो पति है, प्रेमी कहाँ से आयेगा
चंदू- अरे भाभी तुम इतनी सुंदर हो तो मैंने सोचा कोई होगा.
मैं हसने लगी और बोली तु तो बहुत मजाकिया है.
वो पकौड़े खाते खाते बातें करने लगा.
वो कुर्सी पर बैठा था, मैं नीचे फर्श पर बैठ गई और सब्जी की डोली लाकर उसके सामने बैठ गई. मैंने मन ही मन ठान लिया था कि आज उसे अपनी बुर नजदीक से दिखाऊंगी. मैंने अपनी साड़ी नीचे से अपने घुटने के उपर कर लिया जिससे वो मेरे जाँघों तक देख सके और जानबूझ कर अपना पल्लू भी सरका दिया.
वो बस मुझे देखता ही रह गया, और देखते देखते खाने लगा. फिर मैं उकडू आसन मे बैठ गई जिससे मेरे साड़ी का निचला भाग जमीन पे गिर गया, मैं समझ गई की अब मेरी झांटो वाली बुर उसे दिखाई देगा. वो अवाक होकर मेरे बुर को घूरता रहा, मैं थोड़ी देर और ऐसे ही बैठी रही, उसके पैंट का तंबू मैंने देख लिया था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
चंदू- भाभी क्या इरादा है.
मैं सकपका गई और पूछी मतलब.
चंदू- भाभी बनो मत, मैं जानता हुँ कि आपको क्या चाहिए.
मैं- क्या बोल रहे हो, खुल के बोलो.
चंदू- मैं जानता हूँ कि आप मुझसे क्या चाहती हैं, अगर चाहिए तो खुल के बोलिये वर्ना मेरे पास चाची तो है ही.
मैं- क्या बोलना चाहते हो खुल के बोलो मुझे कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है.
चंदू- मैं वही बोलना चाहता हूँ जो तुमने मुझे और चाची को करते देखा था.
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मैं समझ गई कि इसने मुझे, इन दोनों की चुदाई करते देख लिया है. मैंने कुछ नहीं कहा तो वो बोला कि अगर आप भी वो सब चाहती हैं तो मुझे खुल के बोलिये, शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है, मैं समझता हूँ तड़प कैसी होती है. मैं खुश हो गई, और उठ कर उसके पास गई.
सीधे उसके होठों पे अपने होठ रख के उसे चूमने लगी. मेरी बुर पनिया गई थी चंदू भी किस करने लगा, और अपना हाथ मेरा पल्लू हटाकर मेरे ब्लाउज के अंदर डाल कर मेरे चुचियों को मसलने लगा. करीब 10 मिनट तक ऐसा चलता रहा फिर मैं उठी और जाकर दरवाजा लगाने लगी.
वो पीछे से आके मेरी चुचियों को पकड़ के दबाने लगा और मेरे गर्दन को अपने होठों से सहलाने लगा. मेरे जिस्म की आग भड़कने लगी, मैंने उसके पैंट के उपर से उसका लंड पकड़कर लिया, जो उसके पैंट के अंदर होके भी मुझे मेरी साड़ी के ऊपर से भी मेरे चूतड़ में चुभ रहा था.
उसका लंड बहुत कड़ा हो गया था, मैं तो अपनी चूत में लेने के लिए बेचैन थी. मुझे पता था कि मेरे पति और बच्चे 9 बजे से पहले आने वाले नहीं थे, तो मेरे पास दो घंटे थे मजा करने के लिए बेचैन तो मैं बहुत थी पर, मैं चंदू को ये जताना नहीं चाहती थी, वो मेरे साथ जो जो करना चाहता है मै करने से मना नहीं करने वाली थी.
चंदू ने मेरे चुच्चो को मसलना शुरू किया मैं भी उसका लंड जोर से दबाने लगी. उसने मेरे ब्लाउज को पकड़ा और जोर से खींच कर फाड़ दिया, मैं चौंक गई और उसके लंड को छोड़ दिया और उसके तरफ घूम गई. उसने मुझे अपने आगोश में ले लिया और मेरे होठों पे अपना होठ रख दिया और चूसने लगा, मैं तो गर्म थी ही मैंने भी उसका साथ देना चालू कर दिया, मन तो कर रहा था कि उसको कच्चा चबा जाऊँ.
वो मेरे होठो को चूसता, काटता, कभी कभी जीभ अपने मुँह में लेके चूसता. मैं भी उसके जीभ को मजे से चूस रही थी, हमारी किस लगभग 5 मिनट तक चली. हम दोनो हाँफ रहे थे, मेरे चूचे हवा में लटक रहे थे और ऊपर नीचे हो रहे थे. वो मेरे मम्मों को ऊपर नीचे होते ध्यान से देख रहा था.
मैंने कहा क्या देख रहे हो चंदू.
बोलते ही वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसलने लगा, और मुँह में लेकर चूसने लगा. मैं उसके बालों में अपना हाथ घुमा रही थी कि मेरे अंदर की हवस बढ़ने लगी तो मैंने उसके बालों को पकड़ के उसके माथे को अपने मम्मे पे दबाने लगी. वो एक तरफ के मम्मे को चूसता और दुसरे तरफ के मम्मे को दबाता, मसलता, और घुंडी को उंगलियों में लेकर मरोड़ता.
मैं झड़ चुकी थी, तो मैंने एक शरारत की, अपनी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर अपनी चूत में दो उँगली घुसाई. ऊँगली निकाल कर,सीधे उसके मुँह में दे दिया वो मजे से मेरे चूत के पानी लगे ऊँगलियों को चूसने लगा. उसने मेरी साड़ी उठाई, चड्डी तो मैं पहनती नहीं थी तो उसने अपना हाथ मेरी बुर पे रख दिया, और मसलने लगा.
मेरी बुर तो पहले से पनियाई हुई थी. उसने अपनी दो उंगलियाँ बुर के अंदर डाल दिया. मैं कसमसाने लगी तो वो मेरे कान के लौ को चूसता हुआ बोला कि क्या हुआ मेरी रण्डी मजा नहीं आया क्या. उसके मुँह से खुद के बारे में इतना गंदा शब्द सुनके भी मुझे उस समय बुरा नहीं लगा, मैं उसके आगोश में मजा ले रही थी, तभी उसकी हरकत ने मेरी मदहोशी को तोड़ा.
उसने मेरी बुर से अपनी उंगलियाँ निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया जिसको मैं चाट चुकी थी. आज पहली बार मैंने अपना स्वाद चखा था. मैं असमंजस में थी कि ये क्या हो गया. मैं कुछ बोलती उससे पहले ही उसने अपनी एक ऊँगली से मेरे गांड की छेद को कुरेदने लगा, गांड के छेद पे पहली छुअन से मैं मचल गई.
मेरे पति का मेरी गांड से कोई लेना देना नहीं था. तभी दरवाजे पर एक दस्तक हुई तो मैं और वो दोनों होश में आये. मुझे लगा कि शायद मेरे पति आ गये हैं. हम दोनों की साँसे तेज हो गई थी, मैंने उसे पीछे की तरफ जाने को कहा, वहाँ से भी खेतों में जाने का रास्ता था.
मैंने खुद को ठीक किया और हड़बड़ाते हुए दरवाजा खोला, तो देखा मेरे पति का एक दोस्त आया था, जिसका नाम संजय था, उसने बताया कि आज उसके घर पे वीडियो आया है, आज बच्चे और मेरे पति वहीं रात भर सिनेमा देखेंगे और मुझसे कहा कि आपका मन हो तो खा पी के आईयेगा, मैंने कहा कि मैं थक गई हूँ, तो मैं सो जाऊँगी, उनको बोलियेगा वो बच्चों को लेकर सुबह आ जाएं. वो ठीक है बोलके चला गया.
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चंदू ने मेरी और उसकी सारी बातें सुन ली थी. दरवाजा बंद होते ही उसने फिर से मुझे पकड़ लिया और खुशी से कहा कि आज तो रात भर जी भर के चुदवायेगि मेरी रण्डी.
मैंने कहा कि और तेरी चाची की बुर जब फड़फड़ायेगी तब तुझे खोजने तो आयेगी.
वो बोला ठीक है तुम थोड़ा नहा के तैयार हो जाओ.
हम दोनों पसीने से तर बतर थे इसलिए उसने नहाने को कहा.
जाते जाते बोला अच्छे से साफ कर लेना मेरी जान मैं चाची को बताके आता हूँ.
उसके जाने के बाद मैं घर के अंदर वाले संडास में घुसी और सारे कपड़े उतार दिये. मैंने पूरे बदन पे साबुन लगाया, फिर चंदू की बात याद करके अपनी बुर के ऊपर साबुन लगाकर अच्छे से साफ किया, मैं उसके लंड के बारे में सोच सोच कर पानी पानी हो गई थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर अपने ऊपर पानी डालकर नहा लिया. संडास से बाहर निकली पूरी नंगी मैं आइने के सामने खुद को देखने लगी, लाल टेन की रोशनी में खुद को निहार कर मैं खुश होने लगी तभी चंदू ने दरवाजा खटखटाया. मैं एक साड़ी लपेट कर अपने प्रेमी के पास जाने लगी, मेरे मन में उत्साह इतना था कि मैं खुशी से पागल हो रही थी. मैंने दरवाजा खोला वो फट से अंदर आ गया मैंने दरवाजा अछे से बंद किया और पलटी तो वो चौकी पे बैठकर मुझे घूरे जा रहा था.
मैंने पूछा ऐसे क्या देख रहा है.
चंदू- भाभी तुम हो ही देखने लायक, बहुत सुंदर हो तुम.
मैं- धत पगला, मैं क्या इतनी सुंदर हो.
चंदू- अरे भाभी तुम क्या जानो तुम क्या हो मेरे लिए.
मैं- चल अब इतना भी मखन मत लगा, मैं तो बूढ़ी हो गई हूँ.
चंदू- तुम और बूढ़ी, अरे तुम्हारे सामने तो लड़कियाँ भी फेल हैं.
मैं- चल झूठा, आज मजे करने हैं तो मस्का मार रहा है.
उसने मुझे अपनी तरफ खींचा मेरा हाथ पकड़ के, उसने मुझे गोदी में बिठाया, मैं शरमाने लगी. अपने होठों से मेरे गालों को सहलाने लगा. मेरी तड़प बढ़ने लगी, वो मेरे गालों को कभी चूसता तो कभी दांतो से काटता, मुझे मजा आने लगा. धीरे धीरे वो मेरे गले को चूमने चाटने लगा.
फिर मेरी साड़ी उतार दी, मैंने भी विरोध नहीं किया और खड़ी होकर नंगी हो गई. वो धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को चाट रहा था, उसके चाटने से मेरे बदन के हर अंग मे सिहरने लगा. उसने मुझे गद्दे पे सुलाया और मेरी नाभि में जीभ डाल कर चाटने लगा, मैं मचलने लगी थोड़ी देर चाटने के बाद उसने मेरे बुर के बालों पर मुँह फिराना शुरू किया.
उसके बाद मेरे जांघो को फैलाकर वो मेरे टांगो के बीच अपना मुँह डालकर मेरी बुर को सूंघने लगा. अपनी दो उँगलियों से उसने मेरे बुर के दानों को सहलाया और बुर के फांकों को अलग करके देखने लगा. कुछ देर देखने के बाद उसने अपना मुँह मेरी बुर पर लगा दिया और जीभ से चाटने और चूसने लगा.
थोड़ी देर की चुसाई से मेरा बांध टूट गया और मेरा फव्वारा उसके मुँह में ही निकल गया फिर भी वो मजे से चूसता रहा. इतनी देर की चुसाई से कुछ देर में मेरी बुर में जलन शुरू हो गई. तब मैंने उसे सिर से पकड़ कर उठाया और उसके होठों को चूमने लगी.
वो भी मस्त मेरे होठों को जोरों से चूसने लगा, कभी मेरे मुँह में जीभ डालता जिसे मै चूसती तो कभी मेरी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसता. मुझे बड़ा मजा आ रहा था, और मै फिर से गरम होने लगी तो बड़े जोश के साथ उसका साथ देने लगी फिर वो मेरे मुँह को छोड़ मेरे दूध पे टूट पड़ा और बड़े मजे से अपने मुँह मे लेकर बच्चे की तरह चूसने लगा.
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एक हाथ से एक दूध और उसकी घुंडी को मसलता, रगड़ता और दुसरे दूध को मुँह में लेकर चूसता और कभी कभी घुंडी को दांत से काटता, उसके काटते ही मैं चिहुक जाती और उसके माथे को पकड़ के अपने दूध पे दबाने लगती. करीब आधा घंटा गुजर चुका था, तो मैंने उसे कहा चलो मुझे चोदो कितना चुसेगा.
उसने कहा कि भाभी तुम शांत रहो मैं जो करना चाहता हूँ करने दो, तुम बस मजे लो.
वो उठा और मुझे घोड़ी बनने को कहा, मैंने उसके कहने पर वैसा ही किया तो वो पीछे आ गया और मेरे कुल्हों को पकड़ कर मसलने लगा, मुझे अच्छा लग रहा था उसका मसलना अचानक उसने मेरे एक कुल्हे पे चांटा मारा तो मैं चौंकी, पीछे मुड़ी तो वो मेरे चूतड़ों को देख कर खुश हो रहा था.
फिर उसने अपनी एक उँगली अपने मुँह में डाली और थूक से गीला किया, मैं ये सब देख रही थी. उसने अपनी गीली उँगली मेरे चूतड़ के दरार पे रखी और धीरे धीरे नीचे सरकाने लगा, मैं उसकी ऊँगली मेरे गांड के छेद पे महसूस कर रही थी, मेरे मुँह से सिसकरियाँ फूट रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था.
उसकी ऊँगली धीरे धीरे मेरे लसीले गांड से होकर बुर के फांकों को छूते हुए दानों पर जाके रुकी, मेरी जांघें कांपने लगी, इतना मजा आजतक मुझे कभी भी नहीं आया था. वो बुर के दानों को ऊँगली से हल्के हल्के मसलते हुए मुझे मजा करवा रहा था.
चंदू- भाभी कैसा लग रहा है.
मैं- करते रहो चंदू, मैं जन्नत में हूँ.
वो ऐसे ही करता रहा,मेरे बुर से पानी रिसने लगा तो उसने अपनी उँगली उसी पानी से गीली की और आगे आकर मेरे मुँह मे डाल दिया, मैं मजे से उसकी ऊँगली को चूसने लगी जिसपे मेरी ही कामरस लगी हुई थी. उसने मेरे मुँह को अपने हाथ से पकड़ कर उपर उठाया और मुझे चूमने लगा, मै भी उसे चूसने लगी.
फिर वो पीछे गद्दे पे चढ़ गया और अपना मुँह मेरे चूतड़ के पास लाकर उसे सूंघने लगा,और फिर जीभ निकाल कर मेरे गांड की छेद पे रख दिया,और चाटने लगा. मैं तो मानो हवा में उड़ रही थी, जीवन मे पहली बार किसी ने गांड चूसा था. मैं कुतिया बनी हुई थी तो मेरे दूध लटक रहे थे.
मैं इतनी गरम हो गई थी कि मैंने खुद ही अपने दूध को दबाना चालू कर दिया, कभी दबाती तो कभी घुंडियों को जोर से पकड़ कर खिंचती, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है. उधर चंदू मेरी गांड और बुर को चाटने,चूसने में व्यस्त था.
मेरा पानी फिर से चूने लगा तो चंदू उसे अपनी जीभ से चाटने लगा, फिर वो खड़ा हो गया. मैं घुमी और उसे सोने के लिए कहा, वो गद्दे पे लेट गया, मैंने उसका गमछा खोला और उसके लंड को निकाला तो हैरान हो गई उसके लंड पे एक भी बाल नहीं था.
उसका गोरा लंड मुझे बड़ा प्यारा लग रहा था, पूरा तना हुआ मुझे सलामी दे रहा था, मैंने उसके लंड को हाथ में लिया और सहलाने लगी, वो मुझे ही देख रहा था. मैंने इतराते हुए उसके लंड के चमड़े को उपर नीचे करने लगी, उसे मजा आने लगा, मैंने उसके सुपड़े को जीभ से चाटा, और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी, वो मजे मे उँह उँह करने लगा.
मैं उसके लंड को पूरा मुँह के अंदर लेकर, अंदर बाहर करने लगी, उसके गोलियों से खेलने लगी. मैं बेताब होने लगी, और जोर से चूसने लगी वो मेरे बालो को पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगा. पूरे घर में गों गों की आवाज फैलने लगी. मैंने मुँह से लंड निकाला और उसके गोलियों को मुँह में भरकर चूसने लगी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर बाद वो उठा और बोला चल भाभी कुतिया बन जा मैं फट से कुतिया बन गई. वो पीछे आ गया और मेरे थूक से सने लंड को मेरी बुर के मुहाने पे रखकर एक हल्का धक्का दिया जिससे उसका आधा लंड बुर के अंदर चला गया. मेरे मुँह से चींख निकली आह.
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तो उसने फिर एक जोरदार धक्का मारा तो लंड पुरा अंदर चला गया. मैं आह ऊँह करने लगी, तो मेरी सिसकरियाँ सुनकर उसने अपनी गति तेज कर दी, उसका लंड बड़ा होने के कारण मेरे अंदर तक जाके मेरी बच्चे दानी से टकराने लगा. करीब 15 मिनट की चुदाई से मेरी जांघे कांपने लगी थी, और मैं झड़ चुकी थी. आज पहली बार मुझे चरमसुख प्राप्त हुआ था. शायद उसका भी निकालने वाला था तो उसने बुर से लंड निकाला और आगे आके मुँह में डाल दिया.
मैं भी चूसने लगी तो कुछ ही समय में उसने अपना माल मेरे मुँह में ही छोड़ दिया. मेरा मुँह उसके मलाई से भर गया था, जिसे मैंने गटक लिया. उसके लंड को मैंने चाट चाट के साफ किया और उसके मलाई की हर बूँद मैंने पी ली. वो मेरे बगल में आकर लेट गया, मैं भी उसके सीने पे सर रखकर लेट गई. मन ही मन सोचने लगी कि इतना घिनौना काम मैंने कैसे कर लिया. हम दोनों ही पसीने से तर बतर थे, तो उसके बदन की गंध मुझे बड़ी मादक लग रही थी.
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