Sexy Virgin Student XXX
धृति वैसे तो सिर्फ उन्नीस साल की सेक्सी माल थी जो अपनी बारहवीं की परीक्षा की तैयारियाँ कर रही थी। शहर के सबसे नामचीन व्यक्ति की सबसे छोटी बेटी होने के कारण उसके बाप मिस्टर शरद ने अपनी बेटी का दाखिला पैसे देकर सबसे बड़े कॉलेज में करवा दिया था। Sexy Virgin Student XXX
अभी-अभी जवानी की दहलीज पर उसके कदम पड़ ही रहे थे, शरीर के खास अंगों पर मांस चढ़ने लगा था और दिन-ब-दिन उसकी जवानी के चर्चे पूरे कॉलेज में फैल रहे थे। उसका बाप शरद और माँ रीना अपने कारोबार के चलते अपने दोनों बेटियों पर कुछ खास ध्यान नहीं दे पाते।
धृति की बड़ी बहन श्रृष्टि भी अब चौबीस की हो चुकी थी और अपनी पढाई पूरी करने के बाद अपने बाप का कारोबार देखने में मदद कर रही थी। सूरत के सबसे धनवान लोगों में शरद की गिनती होती थी, उस हिसाब से उनका रहन-सहन भी उसी प्रकार का था। घर में नौकर-चाकर, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ और जिंदगी जीने का खुलापन तो देखते बनता था।
श्रृष्टि तो वैसे नेक लड़की थी। पढ़ाई के दौरान और बाद भी उसका किसी लड़के से कोई चक्कर या संबंध नहीं थे, पर इसके विपरीत थी उसकी छोटी बहन धृति। स्कूल से ही उसकी कमसिन चूत कुलबुलाने लगी थी। स्कूल के कुछ नटखट सहेलियों से उसने पहली बार वो गंदी वाली सिनेमा देखी थी और उन्हीं सहेलियों की बातों में आकर हर रात वो अपने माँ-बाप के कमरे में कान लगाके उनकी चुदाई सुनती थी।
बड़ा शातिर दिमाग था लौंडिया का। किसी तरह शरद और रीना की चुदाई आँखों से देखने के लिए इस लड़की ने अपनी ही माँ-बाप के कमरे की खिड़की में एक सुराख बना दिया था। जब भी उसके कानों पर अपनी मम्मी की सिसकियाँ पड़तीं तो वो भागके उनकी चुदाई देखने पहुँच जाती।
माँ-बाप की नंगी चुदाई देख ये बिगड़ी हुई लड़की अपनी चूत को बड़े प्यार से सहलाती। धनवान घर की लड़की होने के कारण इसको अपना खुद का एक कमरा मिला हुआ था और इस कमरे में आने की इजाजत सिर्फ एक इंसान को थी और वो है उसकी माँ रीना। बाकी शरद और श्रृष्टि तो मुड़के भी उस कमरे को नहीं देखते।
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श्रृष्टि अपने बाप के कारोबार को बढ़ाने में पूरी जी-जान लगाके मेहनत कर रही थी और यहाँ उसकी छोटी बहन अपने माँ-बाप को नंगा देखके मजे ले रही थी। इसका असर जो होना था वही हुआ। धीरे-धीरे उसका ध्यान पढ़ाई से हटने लगा और दिन हो या रात उसके दिमाग में बस एक ही बात चलती और वो थी चुदाई।
रात को पूरी नंगी होके अपने नींबू मसल-मसलके इस लौंडिया ने उसके अमरूद बना दिए थे। दसवीं से बारहवीं आने तक धृति का सीना बत्तीस इंच का हो चुका था। बारहवीं के आखिरी परीक्षा का रिजल्ट जिस दिन सामने आया वैसे धृति की गाँड फट गई। साली पूरा साल मटरगश्ती करती रही और अब पढ़ाई करने का सोचके उसकी चूत का पानी सूख गया।
अपने मन को समझाते हुए उसने अपना ध्यान पढ़ाई की तरफ देना चालू किया और इन्हीं दिनों में उसको पता चला कि कॉलेज के कुछ प्रोफेसर बच्चों को निजी प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके बारे में पता चलते ही उसको एक आशा की किरण दिखाई दी कि जैसे-तैसे करके वो बारहवीं की परीक्षा पास हो जाएगी।
दूसरे ही दिन उसने उन प्रोफेसरों में से एक को चुना और उनसे मिलने उसके घर चली गई। उसको लगा शायद पैसों का लालच इन प्रोफेसर को देने से शायद वो परीक्षा पास होने में उसकी कुछ खास मदद कर दे तो और भी अच्छा रहेगा। यहाँ मनीष अपने निजी कोचिंग सेंटर में बैठा सब छात्रों की यादें बना रहा था जिन्होंने हाल ही में उससे स्पेशल क्लास के लिए पैसे भरे थे।
धृति उस कमरे के पास आई और उसने दरवाजे पर थपथपाके अंदर आने की इजाजत माँगी। मनीष बयालीस साल का सुशील स्वभाव का आदमी है जिसने अपनी पूरी उम्र पढ़ाई और इनसे संबंधित कामों में ही खर्च करने की शपथ ले रखी थी। उसकी बीवी रमा ने भी उसका आज तक अच्छे से साथ दिया था। लेकिन जितना वो सुशील था उतना ही कामपिपासा।
कॉलेज की ऐसी बहुत सी लड़कियाँ थीं जिनको पास करने के बदले में मनीष से उनकी जवानी के मजे लिए थे, और इन कमसिन लड़कियों की नथ उतारने में मनीष माहिर था। मनीष के कमरे के बाहर आकर धृति ने दरवाजा टकटकाया और अंदर आने की अनुमति ले ली।
धृति तो वैसे भी कॉलेज में मशहूर थी अपने जवानी के जोर पर और आज वही लड़की अपने पास आती देख मनीष ने झट से उसे अंदर बुला लिया। मनीष के पास आकर धृति ने कहा, “सर मुझे भी आपकी ट्यूशन में आना है। मुझे आशा है कि आप मुझे भी पास होने में जरूर मदद करेंगे।”
मनीष धृति की तरफ हँसता हुआ बोला, “अरे मैं कोई पेपर्स नहीं दे रहा परीक्षा के, बस सब विषयों पर कैसे पढ़ाई करनी है इस बारे में गाइड करूँगा। और रही बात तुम्हारी, तुम तो इस साल जरूर फेल होने वाली हो। पूरा साल तो तुमने मस्ती करने में लगा दिया, अब इन आखिरी दिनों में क्या कर लोगी तुम?”
धृति को इस बात का बड़ा बुरा लगा, पर मनीष सर जो भी बोल रहे थे वो भी तो सच ही था और इसलिए उसकी शक्ल रोने जैसी हो गई। लड़की चाहे कैसी भी हो पर अपने माँ-बाप से डरती थी। बड़ी बहन की सफलता सुन-सुनके उसके कान अब पक चुके थे और वो भी अपने माँ-बाप की नजर में चमकना चाहती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मनीष सर उसकी आखिरी आशा थे जो उसको परीक्षा पास होने में मदद कर सकते थे। ये जानते हुए वो झट से मनीष के कदमों में बैठ गई और उसके पैर पकड़ते हुए बोली, “ऐसा ना करो सर, बस आप ही हैं जो मेरी गलती को माफ करके मुझे मदद कर सकते हो। आप जो बोलो उतने पैसे मैं आपको दे दूँगी, बस आप मेरा ये एक काम करवा दो…”
धृति का रहन-सहन बड़ा उच्च दर्जे का था। उसके कपड़े उसके शरीर को ढकते कम थे और दिखाते ज्यादा। इसी वजह से जब वो नीचे बैठी तो उसका टॉप आगे से उभर आया। अभी-अभी फूला हुआ उसका सीना देखके मनीष एक बार हड़बड़ाया पर खुद को काबू करते हुए उसने धृति को उसके कंधों के सहारे खड़ा किया और बोला,-
“अरे ये क्या कर रही हो? देखो मैं गाइड तो कर दूँगा तुमको पर पास होने के लिए तुमको भी उतनी ही कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।” ये बोलते हुए उसके हाथ धृति के कंधों से होते हुए उसके सीने के उभार पर आ गए और उन कच्चे आमों को सहलाते हुए वो बड़े निर्लज्जता से धृति को देखकर कुटिल मुस्कान करने लगा।
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धृति उस अचानक हुए स्पर्श से घबराके पीछे हटने लगी पर मनीष ने अपने दूसरे हाथ से उसको पकड़ते हुए बोला, “अरे? अब क्या हुआ, अभी-अभी तो तुम बोल रही थी कि तुम कड़ी मेहनत करोगी? बस इतने से डर गई?”
धृति खुद को संभालते हुए बोली, “प-प्-पर सर आपके साथ ऐसे, प्लीज सर मुझसे नहीं होगा। घर पर पता चला तो मेरी जान ले लेंगे। आप जितने पैसे बोलो उतने दे दूँगी सर…”
धृति जैसे उसके साथ भाव कर रही थी। अपनी जवानी बचाकर पैसे देकर वो अपना स्वार्थ साध रही थी पर उसको मनीष के बारे में पता नहीं था। पैसा तो उसके पास भी था पर उसके लौड़े की हवस बुझाने के लिए उसकी बीवी असमर्थ थी।
मनीष फिर से हँसते हुए बोला, “सुन लड़की, ये पैसा रख तेरे पास और हाँ अगर पास होना है तो कीमत मैं तय करूँगा, तुम नहीं।”
धृति अब थोड़े गुस्से में बोली, “छी, कितनी गंदी सोच है आपकी सर। मैं तो मदद माँगने आई थी और आप मेरे ही साथ ऐसे कर रहे हो? शरम आनी चाहिए आपको। आपको पता है मैं इस बात की शिकायत प्रिंसिपल और मेरे पापा से कर दूँ तो आपका क्या होगा?”
मनीष ने बिना कुछ बोले अपना मोबाइल निकाला और उसके सामने एक वीडियो चालू करके मोबाइल उसके सामने कर दिया। वीडियो देखकर जैसे धृति के प्राण ही निकल गए और धड़ाम से जमीन पर बैठकें रोने लगी। धृति और उसकी कुछ बिगड़ी हुई सहेलियाँ रोज शाम को कॉलेज छूटने के बाद रिसर्च लैब में जमा होतीं और एक-दूसरे के साथ समलैंगिक हो जातीं।
पूरी नंगी करके धृति और उसकी तीन सहेलियाँ रोज शाम को अकेले में अपनी जवान कमसिन चूत एक-दूसरे की चूत से रगड़वातीं और चुदाई का मजा लेतीं। ना जाने कैसे मनीष को इस बात का पता चला और उसने एक दिन चोरी-छुपे उन सबका वीडियो बना लिया।
वही वीडियो दिखाकर उसने धृति को फिर से अपने पैरों पर गिड़गिड़ाने के लिए छोड़ दिया। धृति उसके पैर पकड़कर माफी माँग रही थी, रोए जा रही थी पर मनीष के सामने धृति का जवान बदन ही आ रहा था। उसके दिल में धृति के प्रति कोई दया का भाव नहीं था।
धृति को अपने पैरों पर गिड़गिड़ाता देखके वो बोला, “जा कर दे शिकायत मेरी बहनचोद। आज ही शाम को तेरा ये वीडियो सबको भेज दूँगा, तेरे बाप को भी समझी? फिर देख तेरी क्या हालत होगी।”
धृति के पास अब उसकी बात मानने के अलावा और कोई भी चारा नहीं था। बहुत देर रोने के बाद वो खुद खड़ी हुई और मनीष की तरफ ना देखते हुए वो बोली, “ठीक है सर, आप जैसा कहोगे वैसे ही होगा, पर मेरी एक शर्त है।”
मनीष पाने की कामयाबी पर हँसता हुआ बोला, “हाँ रंडी अब तू शर्त रखेगी? देखा है मैंने कैसे नंगी होके उस महक की चूत चूस रही थी तू? अच्छा ठीक है बता तेरी शर्त।”
मनीष के मुँह से रंडी जैसा शब्द सुनके एक बार तो धृति को बुरा लगा पर फिर भी उसने निडर होकर कहा, “मैं सिर्फ एक ही बार करूँगी और मुझे परीक्षा में पूरे मार्क्स के साथ पास करना होगा आपको।”
मनीष के लिए ये मामूली सी बात थी और उसको ये भी पता था लौंडिया एक बार फँसी तो उसको कैसे और फँसाना है, इसलिए उसने भी खुश होके कहा, “बस इतनी सी बात? ये तो हो ही जाएगा। चल अब जा दरवाजा बंद करके आ जा मेरे पास, आज ही तुझे चेक करता हूँ।”
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वैसे धृति कम हरामी नहीं थी। साली खुद अपने माँ-बाप को चुदाई करवाते देख अपनी अनचुदी चूत को रगड़-रगड़कर रस निकालती, सहेलियों के साथ मिलके हर दूसरे-तीसरे दिन लैब में नंगी होके अपनी चूत महक, निशा और रिया से चुसवाती और खुद भी अपनी जुबान से उनके फुद्दी को मजे से चूसती।
धृति जैसे ही दरवाजा बंद करने के लिए मुड़ी वैसे उसके शातिर दिमाग ने सोचा, “सोच क्या रही है रंडी, वैसे भी तेरी फुद्दी तरस रही है चुदवाने को और ये तो तुझे अच्छा मौका मिल रहा है, चुद भी जाएगी और पास भी हो जाएगी।”
अपने दिमाग की बात मानते हुए धृति ने दरवाजा बंद किया और वो फिर से मनीष सर के सामने आकर खड़ी हो गई। सर की आँखों में देखके वो अपने ओठ चबाते हुए मनीष को इशारा करने लगी। धृति का वो ओठों को काटना और हलके से शरमाके मुस्कुराना तो किसी बाजारू धंधेवाली रंडी जैसा लग रहा था। रांड बाजार में जैसे वेश्या अपने ग्राहक को इशारा करती है वैसे ही इशारे ये उन्नीस साल की रंडी कर रही थी।
धृति के इशारे समझने में मनीष को देर नहीं लगी। उसने धृति को मुस्कुराते हुए अपनी तरफ खींचा और उसको अपने सीने से लगाते हुए उसे चूमने लगा। धृति भी किसी दो कौड़ी की रंडी की तरह मनीष से लिपट गई। अपनी बाँहों का हार उसके गले में डालते हुए वो भी मनीष को चूमने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मनीष के हाथ भी उस उन्नीस साल की कमसिन धृति की गाँड को दबाते हुए उसे अपने बदन पर दबाने लगे। धृति के चूँचे अब मनीष की छाती पर पूरे दब चुके थे। धृति को चूमते हुए उसने अपना हाथ अब उसके टॉप की तरफ बढ़ाया और धीरे-धीरे उसे ऊपर सरकाने लगा। धृति का बदन अब खुलने लगा था और अगले ही पल उसने उस टॉप को खींचते हुए धृति के बदन से अलग कर दिया।
धृति को अपने आप से अलग करते हुए उसने उसकी ब्रा निकाल दी और खुद कुर्सी पर बैठते हुए धृति से बोला, “आ जा मेरे पास और निकाल मेरा लौड़ा बाहर जल्दी से, आज तेरे मुँह में मेरे लौड़े का पानी गिरना है।”
धृति वैसे भी बहुत चुदक्कड़ लड़की थी। उसको भी कहीं न कहीं चुदवाने का मौका मिल ही रहा था और इस बार तो कोई खतरा नहीं उल्टा उसका मुनाफा ही था। मनीष सर एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति थे और उसका लंड कमजोर होगा ये सोचके धृति भी चुदवाने के लिए तैयार हो गई।
मनीष के इशारे पर वो उसके सामने घुटनों पर बैठी और मनीष की पैंट के बटन खोलने लगी। जल्दी ही उसके सामने मनीष का सोता हुआ लंड लहराने लगा और उस सोते हुए लौड़े का आकार देखके धृति खुश हो गई। पर उसको पता नहीं था कि मनीष का शेर अभी सो रहा है, जब जाग जाता है तो फुल्के आठ इंच का जानवर बन जाता है।
धृति को अच्छे से पता था कि लौड़ा कैसे चूसते हैं। अपनी माँ को देखा था कई बार उसने उसके पापा का लौड़ा चूसते हुए। मनीष का लंड हाथ में लेके उसको देखे बिना धृति उसे अपने मुँह के करीब ले गई और अगले ही पल मनीष का लंड उसके मुँह में दाखिल हुआ।
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मनीष ने भी हल्का सा झुकते हुए अपने हाथ धृति के चुचों की तरफ बढ़ाए और वो धीरे-धीरे उनको मसलने लगा। पुरुष का स्पर्श होने से धृति के अंदर की हवस भी जागने लगी और वो भी जोश में आकर उस लंड को चूसने लगी। पहले तो उसका स्वाद उसे पसंद नहीं आया पर अब धीरे-धीरे उस स्वाद का जैसे उसका चसका लग गया।
किसी पेशेवर रंडी की तरह वो अपने प्रोफेसर का लौड़ा चूस रही थी। जवान लड़की से लंड चुसवाके मनीष भी गरमाने लगा। लौड़ा धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था और धृति के मुँह में समाने से इनकार करने लगा। उसका एक हाथ धृति की छाती पर और दूसरा धृति के सिर पर था। धृति का सिर अपने लौड़े पर दबाता हुआ तो धृति की कमसिन चूचियाँ मसलने लगा। धृति की जुबान जैसे ही उसके सुपाड़े पर घूमती तो मनीष आनंद से सिसक रहा था।
“आअह्ह्ह्हह माँ की लौड़ी, चूस मेरा लौड़ा ठीक से रंडी, खा जा मेरे लौड़े को। आज क्या मस्त सीना है तेरा धृति, अब देख कुछ ही दिनों में इनको कैसे और खूबसूरत बनाता हूँ।” बोलके उसने अपनी कमर हिलाना चालू किया।
लंड का सुपाड़ा अब धीरे-धीरे धृति के गले तक जाने लगा। उसकी साँस अटकने लगी थी पर मनीष की ताकत के सामने वो कुछ नहीं कर सकी। धृति की बत्तीस इंच की चूँचियाँ खुली हवा में साँस लेने लगी थीं पर मनीष के हाथों की गिरफ्त उन पर छा गई। मर्दाना स्पर्श से धृति के चुचुक भी कड़कने लगे और उसके संतरों में एक कड़ापन आ चुका था।
धृति का जोश देखने लायक था। किसी अनुभवी औरत के जैसे मनीष का लंड चूसते-चूसते वो खुद अब अपनी फुद्दी की आग से गरम हो चुकी थी और मनीष का लंड तो कब से उस अनचुदी चूत को खोलने के लिए बेकरार था। लंड धृति के थूक से गीला हो चुका था। थूक नीचे की तरफ सरकते हुए टट्टों को भी गीला कर रहा था और लंड का सुपाड़ा फूलके लाल हो चुका था।
काफी देर लंड चुसवाने के बाद मनीष ने धृति को खड़ा किया और खुद अपने कपड़े निकालकर नंगा हो गया। धृति का स्कर्ट नीचे खींचते हुए उसने उस कमसिन लड़की को बस उसकी चड्डी में खड़ा किया। धृति वैसे ही चुदने के लिए तड़प रही थी तो उसने भी अपना नंगा बदन छिपाने की कोशिश नहीं की, उल्टा खुद अपनी चड्डी निकालते हुए वो नंगी हो गई। उसकी इस अदा पर मनीष फिदा हो गया।
धृति को अपने टेबल पर लिटाते हुए वो खुद कुर्सी पर बैठ गया और अब धृति की नन्ही सी चूत जिसने कभी लंड को देखा भी नहीं था वही आज मनीष के सामने नंगी हो गई थी। धृति के पैर अपने कंधे पर रखते हुए मनीष आगे बढ़ा और अपना मुँह धृति की जाँघों में घुसा दिया।
गोरी-गोरी जाँघों पर चूमते हुए अब वो धृति की चूत पर टूट पड़ा। अपनी उँगलियों से चूत के लब फैलाते हुए उसने अपनी जीभ उस अनचुदी चूत में घुसा दी और जोर-जोर से उसको चूसने लगा। वैसे तो धृति की चूत कई बार उसकी सहेलियों ने चूसी थी पर आज एक मर्द पहली बार उसकी फुद्दी का रस चूस रहा था।
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मनीष की खुरदरी जीभ जैसे ही उसके चूत के अंदर नाचने लगी वैसे-वैसे धृति किसी रंडी की तरह सिसकने लगी। मनीष के बाल अपनी मुट्ठी में दबाते हुए उसने उसका मुँह अपनी फुद्दी की तरफ और घुसा दिया। गुलाबी चूत मनीष भूखे कुत्ते की तरह था और उन्नीस साल की बालिग लड़की आज अपने बाप की उम्र के आदमी के सामने नंगी लेटी थी।
चूत के लब जिन उँगलियों ने फैलाके रखे थे उसी उँगली को अब मनीष धृति के नन्ही सी चूत के दाने पर ले गया। मटर के दाने जितना छोटा वो दाना मनीष के मुँह से चूस-चूसके लाल हो चुका था। उँगलियाँ जैसे-जैसे उस दाने को सहलाने लगीं वैसे-वैसे धृति तड़पने लगी। उसकी बुर का पानी बाहर निकला जा रहा था और टेबल के ऊपर कुछ बूँदें गिर ही गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मनीष अपने क्लास के रूम में ना जाने कितनी लड़कियों को ऐसे नंगी करके चोद चुका था और आज धृति नाम की रंडी उसके लौड़े से चुदवाने खुद उसके पास चली आई थी। कभी अपनी जीभ तो कभी दो उँगलियाँ घुसाके उसने धृति की कमसिन चूत अंदर से पूरी गीली कर दी। चूत की पंखुड़ियाँ चुतरस से भीग चुकी थीं और मनीष किसी जंगली जानवर की तरह उसके चूत पर टूट पड़ा था।
“आअह्हह्ह्ह्ह साररररररर मर गईइइइइइइ उम्म्म्म हम्म्म्म और जोरररर से सरररर…” की कराहने की आवाजें रूम की दीवारों पर गिर रही थीं। धृति को भी पता चला कि वो इस हमलावर का सामना ज्यादा देर नहीं कर पाएगी।
धृति की चूत खोलने के लिए उसका एक बार झड़ना मनीष के लिए मददगार साबित होने वाला था और धृति को झड़ने के लिए उसने अपनी पूरी जीभ अब धृति की चूत में सरका दी। गरम खुरदरी जीभ से चूसना और उँगली से चूत का दाना रगड़ना धृति जैसे नई लड़की बर्दाश्त नहीं कर पाई।
“ममिइइइइइइ ओह्ह्ह्हह गॉडडडडडडड” चिल्लाते हुए उन्नीस साल की कुँवारी धृति शरद अपने प्रोफेसर के मुँह में झड़ गई। इतना पानी तो उसका इससे पहले कभी नहीं निकला था। धृति झड़ते ही मनीष ने अपनी जीभ उसके चूत से बाहर निकाली और वो धृति को बाँहों में भरके उसको चूमने लगा। धृति अब अपने ही फुद्दी का रस चख रही थी— नमकीन, खारा पानी।
धृति को चूमने के बाद उसने धृति को अपने बाँहों में उठाया और कमरे में रखे सोफे पर उसको पटक दिया। धृति को पता चल चुका था कि आज उसकी चूत की झिल्ली का आखिरी दिन है। मनीष ने अपने टेबल पर रखा धृति का पर्स उठाया और जल्द ही उसने एक कोल्ड क्रीम निकाली।
साले को बराबर पता था कि हर लड़की के बैग में कोई न कोई क्रीम जरूर होती है। धृति की टाँगें फैलाकर उसने आधी क्रीम उसके चूत के आसपास लगा दी और बाकी बची हुई अपने लौड़े पर मलने लगा। धृति की चूत उसके चूत के पानी से और क्रीम से पूरी तरह चिकनी हो चुकी थी।
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कमसिन चूत के मुँह पर अपना लौड़ा रखते हुए उसने धृति से कहा, “देख आज कैसे तेरे फुद्दी का उद्घाटन करता हूँ छिनाल, आज के बाद तू यही खुद आएगी मेरे लौड़े से चुदवाने।”
धृति को अब मनीष का गाली देना पसंद आ रहा था। हवस उसके दिल-दिमाग पर चढ़ चुकी थी और उसी आवेश में उसने कहा, “इस्सस सर चोदो मुझे, बना दो आपकी रंडी। बड़े दिन से चुदवाना था मुझे पर लगता है आपके लौड़े का नाम लिखा है मेरी चूत पर।”
धृति की चुदास देखके मनीष ने धीरे से अपना लौड़ा उस नन्ही सी चूत में धकेला और धृति चिल्लाने लगी। उसको चिल्लाते देख झट से मनीष ने अपने हाथ से उसका मुँह दबाकर उसको शांत कर दिया। मनीष को तो इसकी आदत थी। कम से कम तीस-पैंतीस कुँवारी लड़कियाँ इसी रूम में और इसी सोफे पर चुदी थीं। उनकी चूत की झिल्ली फटके निकला हुआ खून इसी सोफे पर कई बार गिरा था।
धृति की तंग चूत में अब मनीष दाखिल हो रहा था। उसके सुपाड़े के घुसने से ही उस बच्ची की जान निकल रही थी पर हैवान के सामने धृति खुद आई थी और उस मनीष ने भी धृति का मुँह दबाते हुए जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लौड़ा अंदर धकेल दिया। मुँह तो बंद था बेचारी का, आँखों से निकलता पानी उसका दर्द की जुबान बोल रहा था। धृति उसके गिरफ्त से छूटने के लिए हाथ-पैर मारने लगी थी।
मनीष तो माहिर खिलाड़ी था। उसको पता था कैसे इस फड़फड़ाती हुई मुर्गी को शांत करना है और उसने अपना लौड़ा लगभग पूरा बाहर निकालते हुए फिर से उसी गर्मजोशी से उसे अंदर धकेल दिया। इस बार तो धृति जैसे छोटी लड़की का जो हाल होना था वही हुआ। दबी-दबी सी एक चीख निकालके धृति बेहोश हो गई।
दोपहर के बारह बज रहे थे और यहाँ धृति के चेहरे पर भी वही हाल था। दिन-दहाड़े एक उन्नीस साल की कुँवारी लड़की खुद एक अधेड़ उम्र के आदमी से चुद गई। उसका कौमार्य उस हैवान के लंड से ताड़-ताड़ हो चुका था। धृति बेहोशी में भी कराह रही थी।
दर्द क्या होता है ये इस अमीर घर की लड़की को पता ही नहीं था पर आज उसके प्रोफेसर ने उसको ये भी सिखा दिया। मनीष को पता था कि धृति बेहोश होने वाली है। वो तो इसी पल का इंतजार कर रहा था और जैसे ही धृति बेहोश हुई उसने धृति की चूत में लंड दबाके रखते हुए अपने मोबाइल से उसके चुदाई की वीडियो बनानी चालू की।
वीडियो चालू करके उसने मोबाइल को उसी जगह रख दिया जहाँ वो हमेशा से रखता था। इस दिशा से चुदाई की वीडियो बहुत ही सटीक और साफ बनती और इन वीडियो के सहारे ही वो इन लड़कियों को बार-बार चुदवाने के लिए बुला लेता। आधे से ज्यादा तो लड़कियाँ खुद उससे चुदवाने आ जाती थीं.
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पर कुछ मुर्गियाँ ऐसी भी थीं जिनको वश में करना थोड़ा मुश्किल होता था तो मनीष अपना वीडियो नामक शस्त्र का इस्तेमाल करके अपनी हवस को मिटाता। जैसे ही उसने मोबाइल सेट किया वैसे ही उसने धृति की दोनों टाँगें उठाके अपने कंधे पर रख दीं और धृति का शरीर अपने बदन के नीचे दबाते हुए उसने धृति की चूत का भोसड़ा बनाना चालू किया।
बेहोशी के आलम में भी धृति की चीखें निकल रही थीं। थप-थप की आवाजें कमरे में शोर मचा रही थीं और मनीष का आठ इंच का काला लंड धृति की चूत को लहूलुहान कर रहा था। चूत की झिल्ली ऐसे फटी जैसे किसी ने उसको चाकू से काट दिया हो।
खून की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी पर मनीष को पता था, जख्मी चूत को चोद-चोदकर उसको खोल देना ही समझदारी है। क्योंकि एक बार ये होश में आ गई तो चोदने में आनाकानी करेगी और चुदाई का मजा किरकिरा हो जाएगा। मनीष का लंड पूरा बाहर निकलके फिर से अंदर घुस रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
भले ही धृति बेहोश थी पर उसकी चुदने वाली चूत जाग रही थी। मनीष का लौड़ा उसके होश उड़ा रहा था और इस खूंखार चुदाई का मजा लेते हुए धृति की चूत भी खुलने लगी। अपना पानी निकालके वो मनीष के लौड़े को धन्यवाद देने लगी। जैसे-जैसे चूत फूलने लगी वैसे-वैसे अब धृति भी होश में आने लगी। “पानी… पानी…” की आवाज देते हुए उसने अपने बदन को नोचते हुए मनीष से दया की भीख माँग ली।
मनीष ने भी उस पर दया दिखाते हुए धृति को चोदना रोका। धृति के ऊपर से उठते हुए उसने टेबल पर रखी पानी की बोतल उठाई और खुद अपने हाथ से धृति को पानी पिलाने लगा। धृति ने भी ऐसे पानी पिया जैसे कि वो कई सालों की प्यासी थी। पानी पेट में जाते ही धृति पूरी तरह होश में आ चुकी थी।
उसने उठने की कोशिश की पर उसके बदन में इतने प्राण नहीं बचे थे कि खुद उठ सके। मनीष ने अपना लौड़ा उसके चूत से निकाले बिना ही उसको सहारा देके अपने ऊपर ले लिया और खुद सोफे पर बैठ गया। धृति किसी बच्ची की तरह उससे लिपटी रही और अपने दर्द को भूलने की कोशिश करने लगी।
मनीष ने धृति को अपनी गोद में बिठाके उसकी कमर पकड़ ली और उसे धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। कमसिन धृति की चूत भी अब उस लौड़े से घिसने लगी और अगले कुछ ही पल में धृति की चूत उस लौड़े को स्वीकार कर गई। दर्द और चीखने की आवाज अब सिसकियों में बदलने लगी थी।
धृति की कमर अब अपने आप ही आगे-पीछे होकर अपनी घायल चूत की मरम्मत करवाने लगी थी। सुपाड़ा चूत के अंदर ऐसे फँसा था कि मानों वो बस उसी चूत के लिए बना हो। “आआह्ह्ह्हह धृतिइइइइइइ शाबाशशशशशश चुद ले साली रंडी” बोलते हुए अब मनीष ने भी अपनी गाँड नीचे से उठानी चालू की।
मनीष के धक्कों से धृति ऊपर उठने लगी और फिर से नीचे गिर जाती। ऐसे करने से लंड अब पूरी तरह से चूत का आखिरी हिस्सा छूने लगा था। सुपाड़े का स्पर्श जैसे ही बच्चेदानी पर होता तो धृति थरथरा जाती। उसकी चूत से निकलता पानी चप-चप की आवाजें निकाल रहा था। धृति को गोद में बिठाके मनीष उसके संतरे भी चूस रहा था। चुचुक ऐसे ऊपर उठे थे कि मनीष उनको देखकर काटने लगा।
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धृति अब पूरी तरह से खुल चुकी थी। उसकी चूत भी लौड़े को जोर-जोर से गले लगा रही थी और चुदाई के नशे में वो जाने क्या-क्या बड़बड़ा रही थी, “फाड़ दे मेरी चूत साले रंडीबाज, बेटी को चोदने वाला कुत्ता साला मादरचोद, चोद मुझे, दम लगा भोसड़ीके।” मनीष तो धृति के मुँह से गालियाँ सुनके खुश हो गया। उसने भी धृति को अपनी गोद में लेके खड़ा हो गया और जोर-जोर से उसको अपने लौड़े पर पटकने लगा। “ले रंडी की औलाद, तेरी माँ का भोसड़ा मारूँ साली रंडी, कैसे चुदवा रही है अब मादरचोद, रखैल बना दूँगा तुझे मेरी हरामी की औलाद।”
जैसे अपमानित करने वाले शब्द सुनके धृति और उत्तेजित होने लगी। खुद उछल-उछलकर वो मनीष की गोद में चुदवा ने लगी। मनीष भी उस हल्के वजन की चुदाई की गुड़िया को किसी जंगली जानवर की तरह चोदने लगा। इस भयंकर चुदाई से धृति की चूत हार गई। “आआह्ह्ह्ह मम्मीईईईई मूत दी मैं सरररररररर” बोलके वो जोर से मनीष से लिपटी और उसकी चूत का पानी लंड, टट्टों को भिगोता हुआ नीचे फर्श पर गिरने लगा। थरथराता बदन अपने बाँहों में लेके मनीष ने भी धृति को झड़ने का पूरा मजा लेने दिया।
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