XXX Jawani
यह बात पिछले साल की सर्दियों की है जब मैं अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने घर न्यू ईयर और अपने बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए जा रहा था। मैंने 2 क्लास एसी कंपार्टमेंट में रिजर्वेशन करवाया हुआ था। मुझे आज भी याद है वह दिन, it was 30 December और दिल्ली में अच्छी ठंड पड़ रही थी। XXX Jawani
मेरी ट्रेन रात को करीब 9:30 पर थी। इसलिए मैं ऑफिस से घर जाकर अपना सामान लेकर स्टेशन पर पहुँच गया। मेरी ट्रेन 12 नंबर प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी। मैंने अपना सामान केबिन में रखा और ट्रेन से बाहर निकलकर प्लेटफॉर्म पर घूमने लगा। तभी मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जो कि देखने में काफी सुंदर और अट्रैक्टिव थी।
उसने रेड कलर की ड्रेस पहन रखी थी जो कि उस पर बहुत जच रही थी। मैं उसी को देखता रहा और उसमें कब खो गया पता ही नहीं चला। कुछ देर बाद मैंने गौर किया तो देखा कि वह मेरी तरफ आ रही थी। मैं उसी की तरफ देखता रहा। वह इधर-उधर देख रही थी, जैसे कुछ तलाश कर रही हो।
तभी उसकी नजर मुझसे टकराई और वह मेरी तरफ बढ़ने लगी और मेरे पास आकर रुक गई। उसने पूछा, “क्या ये ac-2 है?” मैंने अपना सिर हिलाकर yes कहा और वह थैंक यू कहकर जाने लगी। मैं थोड़ी देर उसे जाते हुए देखता रहा। ट्रेन के चलने का समय हो चुका था। मैंने सोचा कुछ खाने के लिए लेता हूँ और मैं शॉप पर जाकर पानी और कुछ कुरकुरे और चिप्स के वेफर्स उठा लाया।
मैं अपने केबिन में पहुँचा और देखा कि सामने वाली सीट पर किसी का बैग रखा था लेकिन कोई बैठा नहीं था। मैंने अपने केबिन का पर्दा ठीक से बंद किया और अपनी सीट पर जाकर अपने सामान को ठीक से एडजस्ट करने लगा और इतने में कोई पीछे से केबिन के अंदर आया।
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पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने स्टफ को ठीक कर रहा था क्योंकि मेरी पीठ उसके सामने थी। तब तक वह अपनी सीट पर बैठ चुकी थी। जब मैं सब कुछ एडजस्ट करके पीछे मुड़ा तो I was surprised to see that same girl again and that too in my cabin।
मुझे देखकर वो भी मुस्कुराने लगी। मैंने भी स्माइल से जवाब दिया। मुझे पहले तो यकीन नहीं हुआ लेकिन फिर मन ही मन सोचा क्या किस्मत पाई है। फिर मैंने अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाया और उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया। उसने भी जवाब में हाथ मिलाया और अपना नाम बताया — श्वेता।
उसकी आवाज बहुत सेक्सी थी। फिर मैं अपनी सीट पर बैठ गया और ट्रेन भी चल दी। श्वेता ने पूछा, ‘ये आपकी सीट है?’ मैंने अपना सिर हिलाते हुए हामी भरी। फिर मैंने श्वेता से पूछा कि वह कहाँ तक जा रही है, तो उसने कहा ‘इलाहाबाद’। मैं बहुत खुश हुआ और सोचने लगा कि साथ में सफर अच्छा कटेगा
लेकिन अभी दो और लोगों को आना था जो कि ऊपर वाले बर्थ पर थे। हम दोनों की नीचे की बर्थ थी। मैंने उससे पूछा कि दिल्ली में रहती हो तो उसने कहा कि दिल्ली में कुछ इंटरव्यू के सिलसिले में आई थी और अब वापस घर जा रही थी।
मैंने पूछा, “आप अकेले ट्रेवल कर रही हो?”
तो श्वेता ने जवाब दिया कि उसका कजिन भी आने वाला था पर due to some urgent work he couldn’t make it to station और मुझे अकेले जाना पड़ रहा था।
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मैं यह सुनकर और भी खुश हुआ। फिर श्वेता ने पूछा कि मैं कहाँ तक जाऊँगा, तो I replied ‘इलाहाबाद’। यह सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराई और बोली कि चलो अच्छा है, एक साथी मिल गया वरना पता नहीं क्या होता। श्वेता मेरे सामने वाली बर्थ पर बैठी हुई थी। फिर हम दोनों कुछ जनरल बातें करने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
हम दोनों ने अपने बैकग्राउंड के बारे में शेयर किया और फिर मैंने श्वेता से कहा कि उसकी ड्रेस बहुत अच्छी लग रही है और वह उस ड्रेस में बहुत सुंदर है तो वो थोड़ा शर्मा गई और थैंक्स बोलकर अपना सिर नीचे कर लिया। फिर मैंने टॉपिक चेंज करते हुए उसे बताया कि मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर अपने घर न्यू ईयर और अपना बर्थडे सेलिब्रेट करने जा रहा हूँ।
यह सुनकर श्वेता थोड़ा एक्साइटेड हो गई और पूछने लगी कि कब है मेरा बर्थडे। मैंने उसे बताया कि मेरा बर्थडे और न्यू ईयर दोनों एक ही दिन है। तो उसने मुझे एडवांस में बर्थडे विश किया और पूछा कि ट्रीट में क्या दे रहे हो। मैंने उसे थैंक्स बोलते हुए कहा जो भी आपको पसंद हो। तो उसने कहा ठीक है फिर हम इलाहाबाद में एक रेस्टोरेंट में लंच करेंगे और मैंने हामी भर दी।
फिर मैंने पूछा, मेरा बर्थडे गिफ्ट क्या मिलेगा, तो उसने मेरा ही जवाब मुझे वापस बोल दिया कि “जो कुछ भी आपको पसंद हो।”
तब मैंने थोड़ी शरारती भरी निगाहों से पूछा “कुछ भी?”
श्वेता को बात समझ में आ गई और वो फिर शर्मा के स्माइल देने लगी। ऐसे ही हमारी बातें चलती रहीं। ट्रेन को चले हुए दो घंटे हो चुके थे और रात बढ़ रही थी और ठंड भी। मैंने कुछ वेफर्स निकाले और श्वेता को ऑफर किया। उसने कुरकुरे लिए और मैंने भी और हम दोनों खाने लगे।
फिर श्वेता ने अपनी एक शॉल निकाली और अपने ऊपर रख ली और मुझे शॉल के लिए ऑफर किया। पहले तो मैंने मना किया लेकिन फिर जब वो insist करने लगी तो मैंने कहा ठीक है और मैंने अपने पैर उसकी बर्थ पर रखा और शॉल को खोलकर हमने अपनी टाँगों पर रख लिया।
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मेरे पैर उसके पैरों में टच हुए तो मैं सॉरी बोलकर अपने पैर थोड़े अलग कर लिया। श्वेता ने कहा कोई बात नहीं और हम फिर कुरकुरे खाने लगे और बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मेरी टाँगें शॉल से बाहर निकलने लगीं और ठंड लगने लगी तो मैंने अपने पैर सीट पर से हटा लिया और कहा कि इसमें दोनों नहीं बैठ पाएंगे और उठकर कंबल खोलने लगा.
तो श्वेता ने कहा कि कोई बात नहीं, if you want तो मेरे साथ बैठकर शॉल डाल लेते हैं। मैंने सोचा ग्रीन सिग्नल मिल रहा है तो मैंने झट से ओके बोल दिया और उसके बर्थ पर जा के बैठ गया और फिर हमने एक शॉल में दोनों बैठ गए। हम दोनों एक-दूसरे को टच करने लगे।
लेकिन अभी भी ठीक से नहीं बैठ पा रहे थे तो मैंने कहा कि और पास आ जाओ और श्वेता मेरे से बिल्कुल चिपक के बैठ गई। अब मुझे कुछ होने लगा था लेकिन खुद पर कंट्रोल करके रखा हुआ था। कुछ देर और ऐसे ही बातें चलीं और ठंड और बढ़ी तो श्वेता को थोड़ी ठंड लगने लगी और शॉल को ठीक करने लगी।
जब वो शॉल को ठीक कर रही थी तो उसके 36 साइज के बूब्स मेरी कोहनी से रगड़ खा गए। मैंने अपनी कोहनी हटाई और पूछा जोर से तो नहीं लगी, वो फिर शर्माते हुए बोली ‘नहीं’। मैं समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। अब मैं जानबूझकर अपनी कोहनी उसके बूब्स से रगड़ने लगा। श्वेता अब चुप हो गई और कुछ बोल नहीं रही थी।
मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने कहा कुछ नहीं। मैं समझ गया कि श्वेता को भी मज़ा आ रहा है। फिर मैंने जानबूझकर अपने हाथ बाँधे जैसे ठंड लग रही हो और धीरे से सीधे से उसकी कमर, हाथ और उसके बूब्स पर हाथ फेरने लगा। श्वेता भी अब खुद को काफी कम्फर्टेबल करके बैठ गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
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इससे मुझे और हिम्मत मिली और मैंने श्वेता की तरफ देखा और पूछा कैसा लग रहा है। वो कुछ नहीं बोली, इसका मतलब उसकी भी हाँ थी। मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ उसके बूब्स पर फेरने लगे और उसका टिप खोज रहा था। श्वेता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुपचाप बैठी रही। उसके शरीर से अब गर्मी निकल रही थी।
मैं समझ गया कि श्वेता भी एक्साइटेड हो रही है लेकिन कोई रिएक्शन नहीं दे रही है। फिर मैंने चुप्पी तोड़ने के लिए एक बार फिर अपने बर्थडे प्रेजेंट के बारे में पूछा तो उसने बड़ी सी स्माइल दी और थोड़ा आगे आकर उसने मेरे गाल पर एक किस दिया। I was surprised और मेरी हिम्मत बहुत बढ़ने लगी तो मैंने धीरे से उसके राइट बूब को दबाना शुरू किया जो कि मेरी साइड में था। उसके मुँह से “शी” जैसी आवाज निकलने लगी।
वो गरम हो चुकी थी और अब मैं जोर-जोर से उसके बूब्स को कपड़ों के ऊपर से प्रेस करने लगा। उसे मज़ा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था लेकिन मैं कम्फर्टेबल फील नहीं कर रहा था तो मैंने उसे कहा कि अपनी स्वेटर उतार दे। पहले तो उसने मना किया लेकिन फिर मेरे insist करने पर उसने स्वेटर उतार दिया। उसने शॉर्ट साइज टॉप पहना हुआ था।
अब मुझे उसके बूब्स का सही साइज का अंदाजा हुआ था और मैं अब उसके दोनों बूब्स प्रेस कर रहा था। अचानक से वो उठी और खड़ी हो गई। मुझे समझ में नहीं आया कि क्या हुआ तो वो बोली कि मुझे वॉशरूम जाना है। मैंने पूछा क्या मैं भी कंपनी दूँ तो उसने मना कर दिया और मैं सीट पर ही बैठा रह गया और वो अपना पर्स लेकर चली गई।
करीब 15 मिनट बाद वो वापस आई तो मैंने पूछा क्या किया अंदर जाकर तो वो शर्मा गई लेकिन कुछ बोली नहीं और फिर उसने अपना पर्स अलग रखा और वो पास में बैठ गई। मुझसे अब और नहीं रहा गया और उसके बैठते ही मैंने उसे पकड़ा और उसके होठों पर ज़ोरदार किस करने लगा। वो भी साथ देने लगी।
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किस करने के दौरान मैंने अपना एक हाथ उसके टॉप के ऊपर से चुचियों पर रख दिया और दबाने लगा तो जैसे मुझे शॉक लगा हो। टॉप के नीचे कुछ नहीं था। वॉशरूम में उसने ब्रा निकाल दी थी। अब मैं जोर-जोर से बूब्स दबाने लगा और वो pleasure में आवाजें निकालने लगी।
मुझे पता था कि बोगी में ज्यादा लोग नहीं हैं तो कोई समस्या नहीं है। अब मैं और ज़ोर से दबाने लगा और वो लगभग चीख सी गई और कहने लगी कि दर्द होता है। मैं फिर किस करने लगा और अब उसे ऊपर से कमर तक सहला रहा था। श्वेता हॉट हो रही थी।
मैंने उसे गोद में उठा लिया और उसके टॉप को ऊपर कर दिया। उसके बड़े-बड़े गोरे बूब्स मेरे सामने थे। मैंने एक को मुँह में भरकर ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। श्वेता मेरे बालों को नोच रही थी और कराह रही थी — “आह्ह्ह… करण… धीरे… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैं दूसरे बूब को मसलता और चूसता रहा। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
कुछ देर बाद मैंने उसकी स्कर्ट ऊपर कर दी। उसने ब्लैक पैंटी पहनी हुई थी जो पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ और गुलाबी थी। मैंने उसे सीट पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाकर चूत चाटने लगा। श्वेता पागल हो गई — “आह्ह्ह… करण… चूसो… जीभ अंदर डालो… आह्ह्ह… मैं मर जाऊँगी…”
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मैंने जीभ अंदर डालकर चूत का रस पीना शुरू कर दिया। वो बार-बार झड़ रही थी। फिर वो उठी और मेरी पैंट खोलकर मेरा 7 इंच का खड़ा लंड बाहर निकाल लिया। उसने उसे मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। वो इतने जोर से चूस रही थी कि मैं कराहने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा दिया। पहले धीरे-धीरे फिर तेज़ी से ठोकने लगा। श्वेता चीख रही थी — “हाँ… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह… करण तुम बहुत मस्त चोदते हो…”
मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा — मिशनरी, कुतिया, ऊपर बैठाकर। आखिरकार जब मैं झड़ने वाला था तो उसने कहा, “अंदर ही छोड़ दो…” मैंने अपनी सारी गर्म मूठ उसकी चूत में भर दी। उसके बाद हम थोड़ी देर लेटे रहे। फिर रात भर हमने दो बार और चुदाई की। सुबह होने तक हम दोनों थक चुके थे लेकिन बहुत संतुष्ट थे। इलाहाबाद पहुँचने के बाद हमने एक होटल में रुककर पूरा दिन और रात साथ बिताई। उसने मुझे शानदार बर्थडे गिफ्ट दिया — अपनी पूरी जवानी। यह मेरी ज़िंदगी की सबसे यादगार ट्रेन जर्नी थी।
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