Love Story Porn
हमारी कहानी की शुरुआत होती है कहानी के हीरो पीयूष के विवाह से। पीयूष की शादी आराधना के साथ हुई। पीयूष दुनिया में अकेला था। उस के माता-पिता दोनों का देहात हो चुका था। विवाह होने के बाद जब रात को वह सुहागरात के लिये अपनी पत्नी के पास कमरे में पहुँचा तो उसके सामने एक ऐसा रहस्य खुला कि उस की जिन्दगी की सारी आधारशिला ही हील गयी। Love Story Porn
उस की नई नवेली दुल्हन ने कहा कि वह उस के साथ नहीं सोयेगी। वह किसी और को चाहती है और उसी के साथ विवाह करना चाहती थी। लेकिन उस के परिवार वालों ने उसकी शादी पीयूष के साथ जबरदस्ती करवा दी है। वह उसे नहीं चाहती है। पीयूष यह बात सुन कर अंदर तक हील गया। लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें?
उस ने आराधना को यह राय दी कि वह उस से तलाक ले ले और अपने प्रेमी से शादी कर ले। आराधना इस बात के लिये तैयार नहीं हुई, उस ने बताया कि उस के परिवार वाले ऐसा नहीं होने देंगे। वह बहुत रुढ़िवादी है ऐसी कोई बात होने पर उस के दादा जी अपने प्राण त्याग देंगे।
पीयूष ने उसे सुझाया कि वह अपने मायके चली जाये तो वह इस के लिये भी तैयार नहीं थी। उसे पता था कि उस का परिवार उसे फिर से वापस यही भेज देगा। अंत में यह निर्णय हुआ कि वह और पीयूष दोनों अलग-अलग कमरों में रहेंगे। केवल पीयूष अपने नौकर को दिखाने के लिये उस के कमरे का बाथरूम इस्तेमाल करेगा। आराधना इस बात के लिये राजी हो गयी।
शादी के अगले दिन ही पीयूष अपनी मित्र मंडली में वापस पहुँच गया। उसे वहाँ देख कर उसके सब मित्र हैरान रह गये। जब सब ने इस का कारण पुछा तो वह बोला कि कोई खास बात नहीं है सब कुछ सही है। मित्र उस की बात समझ गये। फिर सब मित्र बातों में डुब गये।
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पीयूष की जिंदगी ऐसे ही गुजरने लगी। लेकिन वह प्रयास कर रहा था कि उसके और आराधना के बीच सब कुछ सही चलता रहे। शुरु में तो आराधना उस के हर प्रयास को रोकने की कोशिश करती थी। एक दिन रात को उसे बहुत बुखार हो गया और उस की तबीयत खराब हो गयी।
उसने जा कर आराधना के कमरे का दरवाजा खटखटाया, आराधना ने उस की आवाज सुन कर दरवाजा खोल दिया। उस ने आराधना को बताया कि उसे बहुत बुखार है और उस की तबीयत खराब हो रही है। यह सुन कर आराधना ने अपने परिवार के डाक्टर को फोन कर के बुला लिया।
डाक्टर ने आ कर आराधना को बताया कि पीयूष को सर्दी लग गयी है इसी कारण से उसे बुखार आ गया है। वह दवा दे कर चले गये। जाने से पहले वह आराधना को समझा कर गये कि पीयूष का कैसे ध्यान रखना है। आराधना ने अगले 10 दिन तक उस की बहुत सेवा-शुश्रूषा करी और वह पुरी तरह से सही हो गया।
इस कारण से आराधना और उस के बीच के संबंध सहज हो गये। पहले आराधना उस के साथ कहीं भी बाहर जाने से मना कर देती थी, लेकिन अब वह खुद कह कर पीयूष के साथ फिल्म देखने जाने लगी। दिन ऐसे ही गुजर रहे थे। लेकिन उन दोनों की जिन्दगी में अभी एक बड़ा तूफान आने वाला था, यह उन दोनों को पता नहीं था।
एक दिन शाम को पीयूष अपने मित्रों के पास जाने ही वाला था तभी उस के एक मित्र का फोन आया और उसे बाहर मिलने के लिये कहा। पीयूष उस से मिलने के लिये निकल गया। वह आराधना से आधें घंटे में आने के लिये कह कर गया था। काफी समय बीत गया लेकिन पीयूष नहीं आया।
आराधना बहुत चिन्ता कर रही थी लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी। उसे पीयूष के किसी मित्र का फोन नंबर भी पता नहीं था। काफी रात को किसी अस्पताल से नर्स का फोन आया और उस ने आराधना को बताया कि उस का पति घायल है और अस्पताल में भर्ती है।
यह सुन कर आराधना के पैरों के नीचे से धरती निकल गयी और वह बदहवास सी हो कर अस्पताल के लिये चल पड़ी। वहाँ पहुँच कर उसे पता चला कि उस के पति की पीठ में किसी ने कुछ मार दिया था। इस कारण से वह बेहोश हो गया था। कुछ लोगों ने उसे वहाँ बेहोश पाया तो उसे लेकर अस्पताल आ गये।
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वहाँ पर आ कर लाने वाले लड़कों में से एक ने उसे पहचान लिया कि यह तो उस का मालिक पीयूष है। पीयूष को जब होश आया तो उस ने घर का फोन नंबर बताया और अस्पताल ने उसे इस बारे में सुचित किया। आराधना अपने पति की देखभाल में लग गयी। पुलिस इस घटना की तहकीकात करने लगी।
क्योंकि पीयूष एक बड़ी कंपनी का CEO था और उस का कोई दुश्मन नहीं था इसी लिये सब बहुत परेशान थे। पुलिस की जाँच पड़ताल जब आगे बढ़ी तो उन्हें पता चला कि आराधना ने एक बार अपने घर से भाग कर प्रेमी के पास जाने की कोशिश करी थी, लेकिन वह अपनी इस कोशिश में सफल नहीं हो पायी थी।
उसे उस के भाई ने घर के बाहर ही पकड़ लिया था। पुलिस को शक था कि उस के प्रेमी ने ही, हो सकता है पीयूष की हत्या करने की कोशिश करी हो। आराधना ने उन्हें कुछ खास नहीं बताया। पुलिस आराधना के धनी परिवार के कारण उस से ज्यादा पूछताछ भी नहीं कर सकती थी।
लेकिन पुलिस के जासूसों ने यह पता लगा लिया कि आराधना का इस घटना में कोई हाथ नहीं था। उस के प्रेमी ने ही उस के पति की हत्या की प्लानिंग करी थी और इसे सिरियल किलिंग दिखाने के लिये इस के पहले तीन गरीब लोगों की हत्या कर दी थी। हत्यारा पीयूष की मित्र मंडली का ही एक सदस्य था, जिसने जबरदस्ती आराधना को अपने जाल में फँसा कर रखा हुआ था।
आराधना जो कर रही थी वह उस का बचपना था। पुलिस ने मामला हल करके आराधना को उसके प्रेमी के जाल से मुक्त कर दिया। 15 दिन अस्पताल में रख कर पीयूष वापस घर आ गया। इस दौरान आराधना हर समय उस की बगल में बैठी रही, जरा भी उस के पास से नहीं हटी।
आराधना ने पीयूष की बहुत सेवा-शुश्रूषा की। इस घटना के कारण दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ गये। अपने तथाकथित प्रेमी की सच्चाई जानने के कारण आराधना के मन से उस का नाम भी निकल गया। अब वह अपने पति के बहुत निकट आ गई थी।
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दोनों जब घर में एकान्त में मिले तो उन्होंने तय किया कि अब वह अपनी सुहाग रात दुबारा मनायेंगे क्यों शादी के बाद तो वह दोनों एक-दूसरे से अलग-अलग ही रह रहे थे। अब हमारी कहानी असल में शुरु होती है कि उन की यह सुहागरात कैसे हुये, इसी का वर्णन इस कहानी का उद्देश्य है। पीछे की सारी कहानी तो आप कह सकते है कि कहानी की भूमिका ही थी।
दोनों ने अपनी सुहागरात की खुशी में अपने घर में एक बहुत बड़ी पार्टी दी। पीयूष और आराधना के रिश्तेदार और मित्र इस में आये। रात को उन के जाने के बाद जब दोनों एक साथ एक कमरे में सोने गये। कमरे का दरवाजा बंद करने के बाद पीयूष ने पुछा कि आराधना क्या हाल है.
तो वह बोली कि मुझे आप के सामने बहुत शर्म आ रही है। आप ने मेरे बचपने को इतने दिन तक बर्दाश्त किया और किसी को इस बारें में पता भी नहीं चलने दिया।
पीयूष बोला कि तुम मेरी पत्नी हो तुम्हारी कोई भी बुराई मेरी बदनामी है ऐसा मैं कभी नहीं कर सकता। जो तुम कर रही थी वह मुझे समझ में नहीं आ रहा था लेकिन मैं तुम्हें कुछ समय देना चाहता था। मैंने वैसा ही किया और सब कुछ सही हो गया। तुम ने भी कितनी बार मेरी सेवा-शुश्रूषा करी थी। वह कोई और नहीं कर सकता था केवल पत्नी ही कर सकती थी। जो बीत गया उसे भुल जाओ।
अपने पति की बात सुन कर आराधना उस के पाँव छुने झुक गयी। पीयूष ने उसे उठा कर गले से लगा लिया और उसे आलिंगन में भर लिया। दोनों के शरीर पहली बार एक-दूसरे से मिले थे। उन्हें एक-दूसरे के बदन की खुशबु का भी पता नहीं था। आज पहली बार दोनों ने एक-दूसरे की गंध को अपने नथुनों में महसूस किया।
पीयूष की नाक में आराधना के बदन की मादक सुगंध समा रही थी ऐसा ही आराधना का हाल था उस की नाक में भी अपने पति की सुगंध छा रही थी। आराधना के हाथ भी पति की कमर पर कस गये। पीयूष ने अपनी पत्नी के माथे पर प्यार से चुम्बन ले लिया।
इससे एक तरंग सी आराधना के शरीर में दौड़ गयी। इस के बाद पीयूष के होंठ आराधना के होंठों पर आ गये और दोनों एक गहरे चुम्बन में रत हो गये। दोनों बहुत प्यासे थे। उन दोनों के बीच दूरी भले ही रही हो लेकिन समय के साथ दोनों के मन में एक दूसरे के लिये लगाव पैदा हो गया था। वही लगाव अब दिखायी देने लगा था।
पीयूष के आलिंगन में आराधना समा गयी। दोनों चुम्बन में काफी देर तक खड़े रहे। जब दोनों की सांस फुल गयी तो दोनों अलग हो गये। पीयूष ने आराधना को बेड पर बिठा दिया, और वह खुद भी उस की बगल में बैठ गया। आराधना प्रथम मिलन के कारण शर्म से लजा रही थी।
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उसका चेहरा इस कारण से नीचे झुका हुआ था। पीयूष को पता था कि आज उसे ही आगे बढ़ कर सब कुछ करना पड़ेगा। आराधना तो नारी सुलभ लज्जा के कारण उस का साथ पुरी तरह से नहीं दे पायेगी। वह भी प्रथम मिलन के कारण कुछ घबराया हुआ सा था। लेकिन अब जो होना था सो होना ही था।
स्त्री-पुरुष में जो आज तक होता आया है वही अब उन दोनों के मध्य होना था। वह कैसे होगा यह उन दोनों के उपर निर्भर करता है। यह वह दोनों अच्छी तरह से जानते थे। गहन चुम्बन ने दोनों के शरीर में काम अग्नि प्रज्वलित कर दी थी। पीयूष ने आराधना को बेड पर लिटा दिया और उस की बगल में बैठ गया।
उस ने आराधना की साड़ी उस के शरीर से अलग कर दी। आराधना ने अपने दोनों हाथों से अपनी छातियाँ को ढँक लिया। पीयूष ने आराधना के होंठों पर फिर से अपने होंठों की छाप लगानी शुरु कर दी। उस के होंठ आराधना के होंठों से उतर कर उस की गरदन पर चुम्बन लेने लग गये।
आराधना की हालत खराब सी हो रही थी। वह इस के कारण होने वाली उत्तेजना की आदी नहीं थी। गरदन के बाद उसके पति के होंठ आराधना के वक्षस्थल के मध्य चुम्बन लेने लगे। आराधना 18 साल की जवान थी यौवन उस के शरीर में भरा हुआ था। पुष्ट उरोज ब्लाउज में और फुल गये थे।
उरोजों के मध्य चुमने के बाद पीयूष के होंठ आराधना की कमर पर आ गये। सपाट चिकनी कमर पर चुम कर वह नाभी को चुमने लगा। इस के बाद उस ने पेटीकोट के ऊपर से उस की जाँघों को सहलाया। इस सहलाने से आराधना काँप सी गयी। पीयूष पेटीकोट के ऊपर से ही आराधना की भरी हुई जाँघों को सहलाता रहा।
इस के कारण उस के शरीर में भी उत्तेजना भरती जा रही थी। उस की जाँघों के मध्य में रक्त का प्रवाह बहुत बढ़ गया था। वह अपने लिंग को तनाव लेता महसुस कर रहा था। दोनों अब ऐसे सफर पर चलने के लिये तैयार थे जिस पर दोनों पहले नहीं चले थे।
पीयूष ने अपनी पत्नी के ब्लाउज को उतारने की कोशिश की तो पहली बार आराधना ने उसे उतारने नहीं दिया। दूसरी बार जब पीयूष ने कोशिश की तो आराधना ने विरोध नहीं किया। पीयूष ने हुक खोल कर ब्लाउज खोल दिया। ब्लाउज के खुलते ही दूध की तरह धवल पुष्ट उरोज पीयूष के सामने आ गये।
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उन को देख कर पीयूष के होंठ सुख गये। उस ने हाथ से एक उरोज को सहलाया और दूसरे के कुचांग पर अपने होंठ रख दिये। आराधना का शरीर ऐठने लग गया। वह आहहहहहहहहहहहहहह उहहहहहहहहहहहहहहह करने लगी। निप्पल फुल कर लम्बा हो गया। फिर दूसरे का नंबर आया वह भी फुल कर लम्बा हो गया।
भरे हुये उरोजों को पीयूष दबाने लगा इस से वह दोनों भी कड़े हो गये। पीयूष फिर से आराधना के होंठों को चुमने लगा। दोनों के शरीर में वासना की तरंगें दौड़ने लगी। वासना का तूफान अब दोनों के शरीर में उफान पर था। पीयूष ने आराधना के पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे नीचे खिसका दिया।
नीचे करने से अब आराधना की हल्कें बालों से ढ़की योनि उभर कर सामने आ गयी। पीयूष ने अपने हाथ से उस की योनि को सहलाना शुरु कर दिया। उत्तेजना के कारण आराधना की योनि से पानी निकल रहा था। पीयूष अपनी पत्नी की जाँघों को सहलाता रहा फिर उन्हें चुमता हुआ उस के पंजों तक पहुँच गया।
वहाँ पर दोनों पंजों की उंगलियों को चुम कर फिर से पिंडलियों को चुमता हुआ ऊपर आया और अपनी पत्नी के कूल्हों को चुम कर उस की पीठ पर चुमता हुआ फिर से उस की गरदन पर पहुँच गया। आराधना ने करवट बदल कर पति के होंठों को चुम लिया।
अब दोनों प्यार की रेस में दौड़ने के लिये पुरी तरह से तैयार थे। काम पुरी तरह से उन दोनों के शरीर में जाग गया था। पीयूष ने अपने कपड़े उतार कर रख दिया। अब दोनों बिना कपड़ें के थे। दोनों फिर से आलिंगन में बंध गये। कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे के शरीर की गर्मी लेते रहे।
इस के बाद पीयूष आराधना की जाँघों में जगह बना कर उन के बीच में बैठ गया। उस का पाँच इंच लंबा लिंग कड़ा हो कर आराधना की योनि को छु रहा था। पीयूष ने उसे आराधना की योनि पर दो-तीन बार फिराया और फिर लिंग को आराधना की कसी हुई योनि के मुँह पर लगा कर दबाव डाला।
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पहली बार में लिंग योनि में नहीं गया। दूसरी बार प्रयास करने पर लिंग का सुपाड़ा योनि में अंदर गया। आराधना की योनि बहुत कसी हुई थी लेकिन वहाँ नमी भी थी। योनि के अंदर बहुत गर्मी थी। आराधना का दर्द के कारण बुरा हाल था। उसे पता था कि पहली बार में बहुत दर्द होता है।
पीयूष ने फिर से धक्का लगाया तो उस का लिंग योनि में आधा चला गया। दर्द के कारण आराधना ने अपने नीचे के होंठ से उपर का होंठ दबा लिया। पीयूष को लग रहा था कि उस का लिंग किसी भट्टी में घुस गया है। लिंग को रुकावट मिल रही थी।
पीयूष ने जोर से धक्का दिया तो लिंग कुछ फाड़ता हूआ योनि में समा गया। दर्द के कारण आराधना सर को इधर-उधर पटक रही थी। पीयूष कुछ देर के लिये रुक गया। उस ने झुक कर आराधना को चुमा और फिर से लिंग को अंदर बाहर करना शुरु किया। योनि के कसे होने के कारण उस के लिंग पर भी बहुत घर्षण हो रहा था।
लेकिन उत्तेजना के कारण वह रुक नहीं पा रहा था। उस के कूल्हे जोर-जोर से धक्कें लगाने लग गये। कुछ देर बाद आराधना का दर्द कुछ कम हो गया और वह अपने कूल्हों को उठा कर पीयूष का साथ देने लग गयी। अब दोनों रेस में पुरी ताकत से दौड़ने लग गये। यह रेस काफी देर तक चलती रही, फिर दोनों के शरीर में लगी आग चरम पर पहुँच कर बुझ गयी। और दोनों पस्त हो कर एक-दूसरे की बगल में लेट गये।
कुछ देर बाद दोनों को होश आया तो दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा। दोनों के शरीर के नीचे का हिस्सा गिला था और पीयूष का लिंग और आराधना की योनि खुन से लाल हो रही थी। बेड की चद्दर भी लाल हो गयी थी। आराधना की योनि से अभी भी लाल पानी निकल रहा था।
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कुछ देर तक दोनों अपने प्रथम मिलन का आनंद लेते रहे फिर उठ कर बैठ गये। पीयूष ने उठ कर आराधना को कपड़ा दिया और योनि साफ करने को कहा। आराधना ने कपड़ा ले कर योनि साफ की और पीयूष को कपड़ा वापस कर दिया। पीयूष ने भी अपना शरीर साफ कर लिया। पीयूष को कुछ ध्यान आया तो उस ने आराधना से पुछा कि अब दर्द का क्या हाल है तो उस ने कहा कि कम हो गया है। प्रथम संभोग के कारण दोनों थक गये थे इस लिये हाथों में हाथ डालें निंद्रा देवी की अराधना में डुब गये।
सुबह जब पीयूष की नींद खुली तो उसने देखा कि बगल में आराधना नहीं है। उसे चिन्ता सी हुई, लेकिन वह जब उठ कर बैठा तो उस ने देखा कि आराधना बाथरूम से नहा कर निकल रही है। नहा कर निकली आराधना गीले बालों में बहुत सुन्दर लग रही थी। पति को अपने आप को घुरता देख आराधना नें शर्मा् कर अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया और कमरे से बाहर भाग गयी। पीयूष के मन में संतोष हुआ कि अब उस के और उसकी पत्नी के बीच कोई दुराव नहीं है। वह भी बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया और बाथरूम के लिये चल दिया।
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