Sali Ko Khet Me Choda
ये उन दिनों की बात है जब मेरी शादी को अभी कुछ दिन ही हुए थे. ज़िन्दगी बहुत रंगीन चल रही थी. मेरी वाइफ बहुत मस्त माल है. फिगर 36-30-34 का और पूरा फुल मज़ा देती थी. उधर मेरी साली कल्पना 19 की उम्र में ही 32-28-34 की थी. Sali Ko Khet Me Choda
देखने में ऐसी के देख के बुड्ढो का भी लंड झटके मारने लगे बेहद खूबसूरत. हमें अलग रूम दिया गया, यानि की चुदाई का पूरा ख़याल रखा गया, ससुराल में भी और हमने भी बीवी को उसके ही घर में पूरी-पूरी रात चोदा. जब वापस आने लगे तो कल्पना बोली: जीजू मुझे भी आपका घर देखने जाना है.
सासु माँ बोली: इसे भी ले जाओ कुछ दिन अपनी दीदी के साथ रह लेगी.
मैंने बोला ठीक है. अंजू ने भी बोला ले चलते है और वो हमारे साथ आ गयी. गाँव में उसे अलग रूम में शिफ्ट कर दिया. हम तो चुदाई के बिना रह ही नहीं सकते थे. पर कुछ दिनों बाद अंजू को पीरियड्स आ गए. एक दिन मैं घर पर ही था तो कल्पना बोली-
कल्पना: जीजू चलो आपके खेत देखने चलते है.
अंजू बोली: इसे ले जाओ, मेरी सेहत ठीक नहीं.
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मैंने कल्पना को ट्रैक्टर पर बिठाया और खेतों में ले गया. कोई 11 बजे का टाइम था और गर्मी के दिन थे. तो गर्मी में दोपहर को बाहर कोई नहीं होता. मैंने कल्पना को वह कुछ सब्ज़ी और फ्रूट तोड़ के दिए. वह खेतों के बीचों-बीच एक रूम है जिसमें फैन और बेड भी है.
कभी-कभी रात को पानी देना होता है फसल को तो, वहाँ रहते है. अभी एक दिन पहले ही पानी दिया भी था तो अभी भी नाले में पानी था. मैंने कल्पना को बोला मैं अभी आता हूँ तुम जाओ अंदर रूम में फैन चला के थोड़ा बैठो, फिर चलते है.
फिर मैं थोड़ा काम करने लगा और कल्पना रूम की तरफ चल पड़ी. अभी थोड़ा रूम से दूर ही थी की वो पानी वाले नाले में फिसल के गिर गयी. उसने सूट-सलवार पहना था जो पूरी तरह कीचड़ में लथ-पथ हो गया. मैं उसे उठा के ले जा रहा था और उसकी गांड और बूब्स दबाने का मौका मिल गया. मैंने कल्पना को अंदर बिठाया और बोला-
मैं: मैं पानी चला देता हूँ तुम ट्यूबवेल के नीचे खड़े होकर अपने कपड़े और खुद को साफ़ कर लो. दोपहर का टाइम है वैसे भी कोई नहीं आएगा.
वो फिर बोली: ठीक है जीजू तुम जाओ.
मैं जाने की बजाये पानी चला के गन्ने के खेत में छुप गया. कल्पना बाहर आयी और पानी में उतर गयी और पूरी तरह भीग गयी. मिटटी तो उतर गयी पर हुस्न बाहर आ गया. यानि के गर्मी का पतला सूट भीग कर जिस्म से चिपक गया. नीचे पहनी ब्लैक पैंटी और वाइट ब्रा साफ़ दिखने लगी.
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मेरे से ये नज़ारा देख के कण्ट्रोल नहीं हुआ. फिर मैंने लंड बाहर निकाला और हाथ से ही कल्पना के नाम की मुठ मारने लगा. तब तक कल्पना भी पानी से निकल के अंदर चली गयी. कोई 2 मिनट ही हुए थे. मैंने सोचा की अब मैं अंदर जाता हु. क्या देखता हूं की कल्पना बाहर आयी. हाथो में उसका सूट-सलवार था और खुद ब्रा पैंटी पहने हुए थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर उसने अपना सूट सलवार बाहर घास पे डाल दिया, जब तक मैं बाहर आ गया. मेरा लंड उसे देख के रोड बन गया. कल्पना मुझे देख के भाग के अंदर चली गयी. मैंने भी कुर्ता पायजामा पहन रखा था जो मैंने बाहर ही उतार दिया और सिर्फ अंडरवियर में अंदर चला गया. मुझे देख के कल्पना खुद को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी.
कल्पना: जीजू क्या कर रहे हो? बाहर रुको न थोड़ी देर. आपने कपड़े क्यों उतार लिए?
मैं: कल्पना क्यों छुप रही हो? आओ बाहर आओ. तुम ही तो बोलती हो की मेरी आधी घरवाली हो. तो हस्बैंड से क्या शर्माना.
कल्पना: जीजू मत करो मुझे शर्म आ रही है.
मैं वापस मुड़ा और दरवाज़ा बंद किया.
कल्पना: जीजू क्या कर रहे हो? प्लीज दरवाज़ा खोलो.
तब तक मैं कल्पना के पास पहुँच गया. मेरा अब खुद पर भी कण्ट्रोल नहीं था. कल्पना ने मेरी तरफ पीठ कर ली. मैंने पैंटी से पकड़ के उसको पीछे खींचा और बाँहों में भर लिया. उसने अपने एक हाथ से पैंटी और एक से ब्रा पकड़ रखी थी.
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जैसे ही मैंने अपना हाथ आगे से उसके बूब्स के नीचे किया कल्पना दोनों हाथ से मेरे बाजू को पकड़ के हटाने लगी. इससे मुझे मौका मिल गया. मैंने पहले ब्रा की हुक खोली. फिर पीछे से पैंटी नीचे खींच दी. मैंने अपनी भी अंडरवियर नीचे की और पीछे से कल्पना को चिपक गया.
लंड खुद ब खुद गांड की दरार में घुस गया और मैं उसे कानो के नीचे गले पर चूमने और चाटने लगा. इससे कल्पना कुछ ढीली पड़ गयी. मैंने पीछे से कल्पना को उठाया और बेड पर ले गया. सिंगल बेड पर वो उलटी ही लेट गयी और बूब्स छुपा लिए.
पर इससे वो पूरी घोड़ी जैसी बन गयी. क्या गोरी मोटी और गोल गांड थी कल्पना की. मैंने पीछे से उसकी चूत पर ऊँगली फेरी. वो झट से उछल के सीधी हो गयी. फिर मैं भी उसके ऊपर चढ़ गया और ब्रा निकाल दी. उसने अपने निप्पल्स हाथो से छुपा लिए.
मैंने भी पहले उसको किस करना शुरू किया, गालों पर गले पर, होंठो पर और नीचे लंड भी चूत को छेड़ रहा था. उसने एक हाथ चूत पर रखा और उसे ढक लिया. इससे निप्पल्स आज़ाद हो गए. मैंने उँगलियों से निप्पल्स को खींचा और घूमाने लगा।
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एक हाथ से उसकी चूत से हाथ हटाया और चूत को रगड़ने लगा. उसकी चूत अब गीली हो रही थी. मैं समझ गया की अब उसका भी मन चुदाई का था. मैंने अपनी मिडिल फिंगर चूत में डाल दी. अब कल्पना ने अपने दोनों हाथ नीचे करके बेड की चादर पकड़ ली.
मैंने भी निप्पल्स मुँह में लेके खूब चूसे और बूब्स को हल्का-हल्का काटा भी. फिर मैं उठा और कल्पना की टांगो को खोला और नीचे बैठ गया. उसकी चूत पर हलके-हलके बाल थे. मैंने चूत पर किस की और चारो तरफ चाटा और फिर चूत के ऊपर जीभ फेरने लगा.
कल्पना की चूत बिलकुल सील बंद टाइट चूत थी। जो अब पूरी रसीली हो गयी थी. मैंने चाटते हुए जीभ अंदर डाल दी. कल्पना एक पल के लिए चीख पड़ी. फिर आँखें बंद करके लेट गयी. मैंने जीभ अंदर-बाहर की और उसका जूस निकालने लगा. अब मैं उठा और कल्पना की टाँगे ऊपर उठा ली. फिर लंड चूत पर रगड़ा. कल्पना अब खामोश थी.
उसकी ख़ामोशी चुदाई की परमिशन थी. मैंने लंड चूत के होल पर सेट किया और एक झटका दिया. आधा लंड अंदर चला गया और वो चिल्लाने लगी। कल्पना: आह जीजू छोड़ो मुझे, ऊईईईईईईई माँ मर गयी. उसकी आँखों से आंसू निकल आये. मैंने लंड अंदर ही रहने दिया और झुक के निप्पल्स चूसने लगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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कुछ देर बूब्स चूसने के बाद जब कल्पना थोड़ा शांत हुई तो दूसरा झटका दिया. अब पूरा लंड अंदर चला गया. बहुत टाइट चूत थी और उमसे से खून निकल रहा था. वो रो रही थी पर अब मैं रुक नहीं पा रहा था. मैंने अब लगातार अंदर-बाहर करना चालु रखा. कुछ देर बाद ही कल्पना की चीखें मज़े की आह्हः आह में बदल गयी और नीचे से गांड भी उछालने लगी. कल्पना की जवानी और हुस्न इतना कमाल था की एक बार हाथ से करने के बावजूद भी जल्दी पानी निकल गया.
मैंने भी अंदर ही पानी छोड़ दिया. कल्पना का भी जूस पूरा निकल गया. मैं उसके ऊपर ही लेट गया. कुछ देर बाद मैं उठा और अपना लंड और उसकी चूत दोनों साफ़ किये. कल्पना की सील टूट गयी थी, अपने जीजू के लंड से. हम दोनों घर गए तो अंजू ने हालत देख के पुछा की क्या हुआ. तो कल्पना ने बोला मैं गिर गयी थी और मेरी टांग पर चोट लग गयी. उसने सब राज़ रखा और मेरा साथ दिया और आगे के लिए रास्ता खुला रखा.
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