Bhai Fuck Didi Chut
आप लोगों ने मेरी पहली स्टोरी पढ़ी होगी जिसमें मैंने अपनी आयेशा दीदी को चोदा था। अब ये स्टोरी मेरी दूसरी दीदी की है, जिनका नाम सादिया है। देखने में वो बहुत सेक्सी मगर हल्का साँवला रंग था। उम्र 28 साल, फिगर 34C-26-34। इस वक्त मेरी उम्र 23 साल थी। Bhai Fuck Didi Chut
और इस बार छुट्टियाँ गुजारने के लिए आयेशा दीदी की जगह उनकी बहन सादिया आ गईं। जिन्हें मैंने एयरपोर्ट पर रिसीव करके पेरेंट्स के घर से होकर अपने फ्लैट पर ले आया। तो दोस्तों, इस बार की स्टोरी आप लोग समझ गए होंगे? इसमें मुझे कुछ मुश्किल नहीं हुई मगर मुश्किल जगह की थी और आप लोग स्टोरी पढ़कर समझ जाएँगे कि जगह क्यों नहीं मिली। लेट्स बिगिन फन।
मैंने सादिया दीदी को उनका रूम दिखाया और कहा, “आप फ्रेश होकर आराम कर लें, तो शाम में बातें करेंगे।” और फिर मैं अपने रूम में चला गया। जब एक मेल को एक बार सेक्स की आदत पड़ जाए तो वो इसके लिए कुछ भी करता है, मगर मेरी इस बार की स्टोरी कुछ डिफरेंट है, जो आप स्टोरी पढ़कर समझ जाओगे।
शाम में 5 बजे के करीब सादिया दीदी उठ गईं और फ्रेश होकर बाहर टीवी लॉन्च में आ गईं। मैंने टी का पूछा तो उन्होंने हाँ कर दी और मैं चाय बनाकर ले आया। फिर हमारे बीच फॉर्मल कन्वर्सेशन शुरू हुआ। इससे पहले वो जब 18 या 19 साल की थीं तब वो इंडिया आई थीं। अब जो हमारे बीच बात शुरू हो गई।
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मैं: दीदी आपने कहाँ तक स्टडी किया?
सादिया: मैंने MCS किया है, और तुम?
मैं: मैंने BBA किया है रिसेंटली।
सादिया: ओह, दैट्स गुड। फ्यूचर प्लान्स?
मैं: CA करने का इरादा है।
सादिया: ओह रियली, या तो और भी अच्छा है।
मैं: हाँ, बस अभी सोचा है।
सादिया: सिर्फ सोचना मत, करना भी।
मैं: हाँ, लेट्स सी इफ…
मैं: दीदी, लाइफ कैसी है USA की? वहाँ ऐसा क्या है जो इंडिया में नहीं? दीदी: बहुत टफ मगर उतनी ही रंगीन भी। मेरे साथ चलो, खुद ही देख लेना। (मुस्कुराकर बोली)
सादिया: कितना अरसा से यहाँ रह रहे हो?
मैं: तकरीबन सा साल से हो गया है।
सादिया: पेरेंट्स के साथ दिल नहीं करता?
मैं: वो नहीं चाहते मैं उनके साथ रहूँ, मेरा तो दिल करता है।
सादिया: अच्छा, तुम्हारी हॉबीज क्या-क्या हैं?
मैं: बस कुछ खास नहीं, कंप्यूटर गेम्स, ट्रैवलिंग और समटाइम क्रिकेट एवं स्नूकर। और आपकी दीदी, क्या हॉबीज हैं?
सादिया: मेरी स्विमिंग और ट्रैवलिंग।
मैं: मतलब आपको भी स्टडी में कोई खास दिलचस्पी नहीं है मेरे तरह?
सादिया: हाँ, कुछ खास नहीं।
मैं: ओह हाँ।
सादिया: अच्छा, ट्रैवलिंग का प्रोग्राम है?
मैं: अगर आप कहें तो जरूर।
सादिया: कहाँ-कहाँ घुमाओगे दीदी को?
मैं: अजमेर शरीफ आपको जरूर लेकर जाऊँगा, शिमला और राजस्थान तक अगर आप में हिम्मत है तो।
सादिया: तुम लेकर जाने वाले बनो।
मैं: मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।
सादिया: अच्छा, या बताओ आयेशा दीदी को कहाँ लेकर गए थे?
मैं: बस शिमला में ही।
सादिया: या क्या बात है।
मैं: बस वो जल्दी वापस चली गई थीं इसलिए। आप तो रुकोगी न?
सादिया: हाँ, देखो इरादा तो है।
मैं: फिर भी कितना?
सादिया: 2 महीने का तो वीजा है।
मैं: बस या बहुत है हमारे घूमने के लिए।
सादिया: ओह अच्छा, हम इतनी जगहें देख लेंगे।
मैं: हाँ क्यों नहीं, मैं हूँ आपका गाइड सनी।
सादिया: अच्छा गाइड, या बताओ कितना लोगे इस फॉरेनर से?
मैं: जितना आप दे सकते हो।
सादिया: मतलब?
मैं: कुछ नहीं, बस जो आप दोगी रख लूँगा।
सादिया: हँसते हुए अगर मैं कुछ न दूँ तो?
मैं: हँसते हुए मैं पूरा कर लूँगा।
सादिया: वो कैसा?
मैं: वक्त आने पर बताऊँगा।
सादिया: ओके, लेट्स सी।
मैं: आयेशा दीदी कैसी हैं?
सादिया: अच्छी हैं मगर तुम्हें बहुत याद करती हैं।
मैं: हाँ, फ़ोन करती हैं, चैट भी होती है अक्सर।
सादिया: तुमने तो उन पर क्या जादू किया है जो वो तुम्हारी दीवानी बन गई हैं।
मैं: कुछ नहीं, मैंने तो कुछ नहीं किया।
सादिया: आयेशा मुझसे हर बात शेयर करती है, उसने मुझे सब बता दिया है।
मैं: क्या सब बता दिया? (मैं घबरा भी गया मगर खुश भी था)
सादिया: अब बनो मत, वो फिर किसी दिन बताऊँगी।
मैं: प्लीज दीदी आप अभी बताओ न, क्या बताया आयेशा दीदी ने तुम्हें?
सादिया: मैंने कहा न अभी नहीं (गुस्से में) मैं कहीं नहीं जा रही हूँ।
मैं: ऐसा मत कहो दीदी, प्लीज बता दो न।
सादिया: अच्छा तो वो…
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और अभी हम लोग बातें कर रहे थे कि मॉम और डैड आ गए। उन्होंने बताया कि मैंने एक इंडियन ट्रैवलर से बात कर ली है और हमें सुबह शिमला के लिए निकलना है। ये 2 हफ्ते का ट्रिप है। मेरा मूड ऑफ हो गया मगर दीदी खुश हो गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने मॉम से पूछा, “ये क्या बात है आपने मुझसे पूछा भी नहीं?”
तो मॉम बोलीं, “ये तुम्हारे लिए सरप्राइज था इसलिए छुपाकर रखा।”
सादिया बोलीं, “अभी हम लोग ट्रैवलिंग का प्रोग्राम बना रहे थे कि आप लोग आ गए।”
नेक्स्ट मॉर्निंग तकरीबन 7:00 AM पर पेरेंट्स आ गए और हम भी रेडी ही थे। दीदी ने सलवार कमीज पहनी थी जिससे और भी सेक्सी लग रही थीं। मैंने अपना और दीदी का सामान एक ही बैग में डाला था। फोर व्हील गाड़ी में आगे डैड और ड्राइवर बैठ गए और पीछे एक कोने पर मॉम, बीच में दीदी और आखिर में मैं था।
हमारी पहली मंजिल फिर शिमला ही थी जहाँ मैंने पहली बार आयेशा दीदी के साथ सेक्स किया था और अब सादिया दीदी की बारी थी। हम रास्ते में रुकते हुए जगह-जगह ठहरकर आगे बढ़ रहे थे इसलिए मॉम काफी थक गईं और मॉम को नींद आने लगी। तो मैं और दीदी लास्ट में चले गए और मॉम आराम से बीच वाली सीट पर लेट गईं। लास्ट पर मैं और दीदी आमने-सामने बैठे हुए थे और दीदी को भी नींद आ रही थी। मगर मेरी नजर तो दीदी पर थी।
अब जब मैंने देखा कि सब लोग सो चुके हैं, सिर्फ ड्राइवर ही ऐसा है जो कार ड्राइव कर रहा है, दीदी भी सो रही है एक साइड पर होकर, मैंने अपना पैर आगे करके दीदी के पैर पर रख दिया और मसलने लगा। जब दीदी कोई रिएक्शन नहीं दे रही थीं तो मैंने दीदी की साड़ी को ऊपर कर दिया थोड़ा सा और लेग्स के बीच में पैर से मसलने लगा।
फिर मैंने हिम्मत करके अपना पैर दीदी की चूत के पास ले गया और सोने का नाटक करने लगा साथ में दीदी की चूत भी मसलने लगा। अचानक जोरदार ब्रेक से मेरा पैर दीदी की चूत में जोर से लग गया। चूँकि ये सब अचानक हुआ था इसलिए दीदी की चीख निकल गई। मॉम ने फौरन पूछा, “क्या हुआ?” तो दीदी बोलीं, “कुछ नहीं बस ऐसे ही सिर लग गया था।” और मेरी तरफ देखकर हँस पड़ीं। और मैं भी ये देखकर हँस पड़ा और दिल में सोचा — बस अभी कुछ कर डालूँ।
मैंने दीदी को एक इशारा किया लेकिन वो समझ नहीं पाईं। चूँकि हम बोल नहीं सकते थे, सिर्फ इशारा कर सकते थे इसलिए मैंने फिर हाथ से इशारा करके दीदी की साड़ी ऊपर करने को कहा। तो वो शर्मा गईं और ना से सिर हिला दिया। फिर मैंने पैर से खुद ही साड़ी ऊपर करने की कोशिश की तो दीदी ने मुझे मना कर दिया।
मगर दोस्तों, ऐसी सुंदर चीज आपके पास हो तो क्या आप रुकोगे? कार का शीशा ब्लैक होने की वजह से मुझे बाहर का कोई डर नहीं था, बस एहतियात करनी थी थोड़ी सी। मैंने फिर उनकी साड़ी को थोड़ा ऊपर किया मगर उन्होंने फिर झटक दिया। थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी पैंट की जिप खोल दी और अंडरवियर के ऊपर से ही दीदी को अपना लंड दिखाने लगा।
दीदी ने पहले शर्मा कर आँखें बंद कर लीं, फिर थोड़ी देर बाद आहिस्ता से आँखें खोलकर देखने लगीं तो मेरे जहन में एक आइडिया आया। चूँकि आगे बैठे हुए मॉम-डैड और ड्राइवर को सिर्फ हमारे नेक से थोड़ा नीचे तक की जगह नजर आ रही थी इसलिए मैंने आहिस्ता से अपनी पैंट नीचे की और अंडरवियर भी। अब मेरा पूरा लंड 7.5 इंच का दीदी के सामने था और मैं लंड को मसलने लगा।
दीदी जब भी आँखें खोलकर देखतीं तो शर्माती भी और हँसती भी। मैंने फिर दीदी को इशारा किया कि वो भी प्लीज थोड़ी सी नीचे कर दें मगर वो नहीं मान रही थीं और मैं लंड को दीदी के सामने मसल रहा था। दीदी अब कुछ-कुछ मेरे लंड की तरफ घूरकर देखने लगीं और उनके मुँह में पानी आने लगा।
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मैंने भी अपना पैर दीदी की लेग्स पर रखकर मसलना शुरू कर दिया। इस बार दीदी ने मेरे पैर को पीछे नहीं किया बस मेरे लंड को मुसलसल देखती रहीं। दीदी ने पहली बार अपने हाथ से इशारा किया और कहा मैं अपना लंड को थोड़ा तेज-तेज मसलूँ और अपनी टाँगें खोल दूँ। मैंने ऐसा ही किया।
अब मेरा पैर दीदी की चूत तक पहुँच गया और मैं साड़ी के ऊपर से ही दीदी की चूत पैर से मसलने लगा जिससे दीदी को कुछ-कुछ मजा आने लगा मगर हम इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे। फिर दीदी ने खुद ही मेरा पैर पीछे करके अपनी चूत को हाथ से मसलना शुरू कर दिया। और फिर अपनी चूत को भी नंगा कर दिया थोड़ा सा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब पहली बार मैं दीदी की चूत देख रहा था। बहुत खूबसूरत बिना बालों की चूत थी। मेरा मुँह में पानी आ गया और सोचने लगा कब इसको चोदूँगा। दीदी ने नजर बचाकर अपनी मिडिल फिंगर गीली करके अपनी चूत में डाल दी और फिंगर से अपनी चूत मारने लगीं और आहिस्ता-आहिस्ता मेरी तरह अपनी स्पीड बढ़ा ली। दीदी चूत में फिंगर ला रही थीं और मैं लंड हिला रहा था। तकरीबन 10 मिनट में ही हम दोनों ने बारी-बारी वीर्य निकाल दिया।
वो कपड़ा दुरुस्त करके सीधा बैठ गईं। और हम रात लेट शिमला पहुँचे। डैड ने चूँकि पहले से बुकिंग करा ली थी इसलिए हमें परेशानी नहीं हुई। मगर मसला ये था कि डैड ने एक ही बड़ा 2 डबल बेड वाला रूम बुक करवाया था, जिससे मेरा सारा प्लान पर पानी फिर गया।
अब नेक्स्ट मॉर्निंग हम लोग घूमने के लिए निकल गए और ऐसे ही 2 से 3 दिन गुजर गए। हमें बिल्कुल मौका नहीं मिला। फिर चौथे दिन मैंने एक प्रोग्राम बनाया हाइकिंग का। मुझे पता था डैड और मॉम तो जाएँगे नहीं और फिर मैं और दीदी सुबह-सुबह हाइकिंग के लिए निकल गए।
अब मैं ऐसी जगह की तलाश में था जहाँ मेरे और मेरी दीदी के अलावा कोई न हो। काफी देर पैदल चलने के बाद एक जगह ऐसी नजर आई जहाँ हमें कोई देख नहीं सकता था। ये एक गाँव के साथ ऊपर काफी ऊँचाई वाली जगह थी। अब मैं और दीदी वहाँ बैठ गए। और इधर-उधर देखने लगे तो एक चरवाहा वहाँ पहले से मौजूद था मगर हमसे थोड़ा दूर था।
अब दीदी मेरी गोद में सिर रखकर मुझसे आयेशा दीदी की बातें करने लगीं — “तुमने कैसे पटाया था शी को?” मैंने बहुत मुश्किल से, वो कैसा… बस वो एक ऐसी बात है जिसे होना था और हो गई। बस अब दीदी छोड़ो भी, कोई और बात करते हैं। और कौन सी बात करोगे सनी? कुछ भी।
फिर मैंने नीचे एक हाथ दीदी के बूब्स पर लगा दिया तो वो उछल पड़ीं — “प्लीज मत करो, कोई आ जाएगा।” तो मैंने कहा, “दीदी सिर्फ हाथ लगा रहा हूँ।” फिर मैंने एक हाथ दीदी की शर्ट में से अंदर डालकर दीदी के बूब्स मसलना शुरू कर दिया और दीदी मेरी पैंट पर से मेरा लंड मसलने लगीं।
फिर मैंने दीदी से कहा, “दीदी यहाँ तो कुछ नहीं हो सकता, चलो अपना घर वापस चलते हैं।”
“नहीं नहीं नहीं, मुझे अभी बहुत सारी जगहें देखनी हैं जो तुम चाहते हो वो भी हो जाएगा।”
और दीदी ने मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे अंडरवियर में हाथ डाल दिया। ऐसा करने से मेरा लंड ने ऐसा सिर उठाया कि बस। और मेरा लंड मसलने लगीं जिससे मुझे ऐसा मजा आया जैसा पहली बार आयेशा दीदी ने मेरा लंड पकड़ा था। मैंने भी दीदी के मोटे बूब्स को ब्रा के अंदर से मसलना शुरू कर दिया।
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तब दीदी रुकीं और सीधा हो गईं। अब हमने पोजीशन चेंज की और दीदी थोड़ा सा नीचे हो गईं और हमने एक-दूसरे की तरफ मुँह कर लिया। अब दीदी ने अपना मुँह में मेरा लंड डालकर चूसना शुरू कर दिया मगर अंडरवियर की वजह से मुश्किल हो रही थी मगर अब और कुछ हो भी नहीं सकता था और दीदी मेरा लंड चूसती और हिलाती रहीं।
तकरीबन 15 मिनट में मेरा वीर्य (लंड का पानी) निकल आया और दीदी ने सारा पी लिया। मैंने दीदी को कहा, “अब मैं करूँ?” तो दीदी बोलीं, “हाँ।” फिर दीदी मेरी गोद में आ गईं और मैं दीदी के बूब्स को अंदर हाथ डालकर दबाने लगा। फिर दीदी को थोड़ा ऊपर खींच लिया जिससे दीदी की चूत तक मेरा हाथ पहुँच गया और मैंने दीदी की पैंट की जिप खोल दी और पैंटी के अंदर हाथ डालकर दीदी की चूत को मसलना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ निकाल लिया और दीदी को मुँह में फिंगर डालकर खूब गीला करवा दिया। और फिर एक हाथ से दीदी के बूब्स और दूसरे हाथ की फिंगर से दीदी की चूत मारने लगा। और अब दीदी को भी मजा आने लगा तो वो चूत में अपना हाथ रखकर मेरी फिंगर के साथ चूत मसलने लगीं और दूसरे हाथ से अपना दूसरा बूब्स दबाने लगीं।
मैंने दीदी से पूछा, “दीदी तुमने कभी चुदवाया है?” तो वो बोलीं, “नहीं मगर मैं और आयेशा लेस्बियन सेक्स करती हैं।” तो चूत में क्या डालते हो एक-दूसरे का? दीदी बोलीं, “डिल्डो है और अब तो फकिंग मशीन भी है हमारे पास।” मैं हँस दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इस तरह दीदी उरोज में पहुँचकर मुँह से सिसकारियाँ भरने लगीं — आहह्ह्ह… ओहह्ह्ह… ओओ… और फिर दीदी की चूत ने भी वीर्य पानी का दरिया बहा दिया और दीदी को भी सुकून मिला। मगर मजा दोनों को नहीं आया। और फिर दीदी मेरी गोद में बैठ गईं और मैं अपना लंड दीदी की गांड के साथ लगाकर ऊपर से चोदने लगा।
दीदी की गांड इतनी नरम थी कि लंड टाइट जींस के बावजूद गांड में दबता चला गया। फिर मैंने एक हाथ दीदी की पैंट के अंदर पीछे से डाल दिया बड़ी मुश्किल से और पैंटी के अंदर हाथ डालकर दीदी की गांड का सूराख ढूँढने लगा जो मुझे मिल गया तो मैंने अपनी फिंगर इस चिकनी गांड के सूराख में डाल दी जिससे दीदी चिल्ला उठीं — “ओईeee क्या कर रहे हो, दर्द होता है, आराम से।”
अब दीदी ने मुझे कहा, “बस अब चलते हैं, भूख लग रही है।” मैंने कहा, “थोड़ी देर रुक जाओ प्लीज।” तो वो बोलीं, “नहीं बस अब बहुत हो गया।” तो मेरा मूड ऑफ हो गया। और हम वहाँ से चले गए। अब अगले 2 दिन हमें मौका नहीं मिला और फिर तीसरे दिन ऐसा बहाना बनाकर हम लोग उसी जगह पर पहुँच गए मगर कुछ नया नहीं किया, बस वही पुराना वाला।
जब हम वापस होटल में आए तो मॉम सामान पैक कर रही थीं। दीदी ने पूछा, “क्या हुआ?” तो मॉम ने बताया, “सनी के पिता को अर्जेंट ऑफिस में बुलाया है, हम लोग वापस जा रहे हैं। तुम बताओ तुम रुकोगी या जाओगी?” तो दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने कहा, “दीदी जैसी तुम्हारी मर्जी।” तो हम लोग रुक गए और मॉम एवं डैड वापस चले गए।
मैं तो बहुत खुश था ही मगर दीदी मुझसे भी ज्यादा खुश थीं। उनके जाने के बाद मुझे दीदी ने रूम में पकड़कर जोरदार तरीके से फर्स्ट किसिंग करना शुरू कर दिया। 5 मिनट बाद दीदी ने मेरे बाल खींचना शुरू कर दिया और मुझ पर लातों, मुक्कों की बौछार शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से पूछा, “ये आपको क्या हुआ है?” तो वो बोलीं, “मुझे ऐसा प्यार पसंद है, आयेशा और मैं भी ऐसा ही सेक्स करती हैं।”
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फिर दीदी बोलीं, “सनी, मेरी एक ख्वाहिश थी कि मैं शिमला में हनीमून मनाऊँ।” मैंने कहा, “तो फिर?” वो बोलीं, “मौका अच्छा है, क्या तुम मेरे साथ दोगे?” मैं समझ नहीं पाया तो मैंने पूछा, “कैसा?” तो दीदी बोलीं, “बुद्धू, मैं तुम मेरे दुल्हा बन जाओ एक वीक के लिए।” अब मैं भी समझ गया और फौरन हाँ कर दी।
चूँकि दीदी को ये पसंद था इसलिए मैं दीदी को लेकर बाजार चला गया और वहाँ से एक दुल्हन का जोड़ा, मेकअप का सामान (कुछ पहले से था कुछ और ले दिया), इसके अलावा ज्वेलरी नॉट रियल बट लुक्स लाइक रियल आदि। और दीदी ने मुझे भी एक सूट ले दिया।
और शॉपिंग कंपलीट करके वापस आ गए। फिर दीदी ने मुझे रूम से निकाल दिया और बोला, “तब तक नहीं आना प्लीज जब तक मैं तुम्हें फोन न करूँ और सुनो, मुझे दीदी मत कहना, नाम लेकर बुलाना या जो तुम्हारा दिल चाहे।” मैंने ओके कहा और बाहर चला गया।
फिर तकरीबन 2 घंटे बाद दीदी ने मेरे सेल पर फोन करके मुझे बुला लिया और कहा, “प्लीज सीधा वॉशरूम में चले जाना, मुझे मत देखना और खुद भी तैयार हो जाना।” ये सब मुझे बहुत अच्छा लगा और ऐसा लगा जैसा सच में सुहागरात है मेरी।
और मैंने वैसा ही किया और तैयार हो गया। जब मैं वॉशरूम से बाहर आया तो दीदी नहीं थीं। फिर मैंने बाल ड्राई करके परफ्यूम लगाया और सोचने लगा दीदी कहाँ गईं। मैंने दीदी को आवाज लगाई तो वो साथ एक छोटा सा रूम था (चेंज के लिए) उस रूम में दीदी थीं। दीदी ने मुझे आवाज लगाकर कहा, “तुम बाहर जाओ, 5 मिनट के बाद आना।”
जब मैं 5 मिनट के बाद वापस आया तो दीदी बेड पर दुल्हन की तरह बैठी थीं, घूँघट ओढ़कर। उन्होंने रेड कलर का लहँगा पहना हुआ था जो मैंने लेकर दिया था। मैं उनके पास बेड पर बैठ गया। अब मुझे समझ नहीं आ रही थी कैसे बात शुरू करूँ, I was confused।
दीदी बोलीं, “बुद्धू, कोई बात करो, ऐसा तो तुम सारा मजा खराब कर दोगे।” तो मैं हँस दिया। फिर मैंने दीदी का घूँघट हटाया, तो नीचे चाँद सी शक्ल की मेरी दीदी थीं मगर उनके साथ आज मेरी सुहागरात थी। बिल्कुल दुल्हन जैसी लग रही थीं।
मैंने देखा तो बोला, “मेरी रानी तो बहुत खूबसूरत है, मैं तो समझा बस ठीक हो गई मगर मेरी रानी तो चाँद का टुकड़ा है।”
तो वो बोलीं, “तुम भी तो राजा लग रहे हो।”
फिर मैंने दीदी का हाथ पकड़ा और आगे उसके बिल्कुल पास हो गया और उसका हाथ रगड़ने लगा। फिर दीदी के कान के पास जाकर पूछा, “रानी की इजाजत हो तो राजा एक किस कर ले?” तो दीदी ने हाँ से सिर हिला दिया। मैंने दीदी के ईयर्स से किस करता हुआ चेहरा पर किस करना शुरू कर दिया, फिर मैंने अपना लिप्स दीदी के लिप्स पर रखकर चूसना शुरू कर दिया तो दीदी भी मेरे लिप्स को चूसने लगीं।
फिर मैंने अपना हाथ दीदी के बूब्स पर ले जाकर बूब्स दबाना और मसलना शुरू कर दिया और साथ में किसिंग जारी रखी। फिर सबसे पहले मैंने दीदी का लहँगा उतारा और साथ में ब्राउज भी उतार दिया। अब पहली बार मैं अपनी दीदी के नंगे बूब्स देख रहा था, गोल-गोल, बड़े-बड़े, मोटे-नोटे, ब्राउन सा कलर का निप्पल। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने दीदी को बेड पर लिटा दिया और उनके लिप्स पर किस करने के साथ-साथ उनके बूब्स दबा रहा था। फिर मैंने बूब्स और निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। तकरीबन 5 मिनट के बाद मैंने दीदी से पूछा, “रानी साहिबा, आपका चूड़ीदार पजामा तंग कर रहा है, अगर इजाजत हो तो उतार दूँ?” तो दीदी बोलीं, “राजा तुम जो मर्जी करो।” मैंने दीदी का चूड़ीदार पजामा भी उतार दिया और साथ में पैंटी भी।
जब मैंने दीदी का चूड़ीदार पजामा और पैंटी उतार दी, तो मेरे सामने अंडे (egg) की शेप की एक खूबसूरत चूत थी। मैंने उस पर अपना एक हाथ प्यार से रखा और बोला, “मेरी रानी, या तो जैसा मैंने सोचा था उससे ज्यादा खूबसूरत है।” फिर मैंने दीदी को सिर से पाँव तक खूब किस किया, फिर बूब्स को मुँह में लेकर खूब चूसा, फिर चूत पर हाथ को हल्का सा फिरा तो दीदी मजा में आकर बोलीं, “उईईईईई मेरे राजा जालिम, या क्या कर दिया।”
मैंने पहले हाथ से चूत की खूब मालिश की, फिर अपनी जुबान से चूत के लिप्स चाटे, फिर जुबान को चूत के अंदर डालकर चूत को जुबान से चोदने लगा और दीदी मजा में आकर सेक्सी आवाजें निकालने लगीं — “ओह आहह्ह्ह… मेरे राआजाआअ खूब माआजाआ दे रहे होओओ… आहह्ह्ह हााआआईन्न… प्लीज जरा जुबान को और चूत का अंदर डालो।”
दीदी अपना हाथ से अपना बूब्स मसल रही थीं। और मैं दीदी की चूत को मजा से चाट रहा था। तकरीबन 20 मिनट के बाद दीदी ने मुझे पकड़कर जोरदार चूमा दिया और मुझे नीचे लिटा दिया बेड पर और मेरे कपड़े खोलने लगीं। पहले मेरी कमीज, फिर शलवार और अंडरवियर भी, और बोलीं, “आज तो राजा का लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा है।”
तो दोस्तों, वो मेरा बड़ा मोटा लंड पकड़कर सहलाने लगीं, मसलने लगीं, फिर नीचे झुककर पहले अपनी जुबान मेरे लंड के टोपा (edge) पर मारने लगीं, फिर अपनी जुबान लंड के एक सिरे से मना शुरू करती और नीचे टट्टियों (testes) तक ले जातीं जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था।
अभी वो सिर्फ जुबान से चाट रही थीं। फिर उसने मेरा लंड को अपने मुँह में लेना शुरू कर दिया, जो कि बमुश्किल आधा से कम उसका मुँह में मेरा लंड गया और वो चूसने लगीं। अब हमें तकरीबन 40 से 45 मिनट हो चुके थे ये सब करते हुए। मैंने अब दीदी से कहा, “रानी बस अब और बर्दाश्त नहीं होता।”
तो दीदी बोलीं, “मेरे राजा, मैंने तुम्हें कौन सा रोका है, आ जाओ मेरे ऊपर।”
अब मैंने दीदी को सीधा बेड पर लिटा दिया और दीदी की लेग्स को उठाकर अपने शोल्डर पर रख दिया और दीदी की चूत को थोड़ा थूक लगाकर पहले 1 फिर 2 फिंगर डालकर थोड़ा सा फिंगर से चोदने के बाद अपना लंड दीदी की चूत के ऊपर रखकर 1, 2, 3, धक्का लगाया मगर दीदी की चूत टाइट थी, लंड अंदर नहीं जा रहा था, बस थोड़ा सा ही गया था।
फिर दीदी बोलीं, “राजा बहुत दर्द हो रहा है, प्लीज अपना लंड निकाल लो।” मैंने ऐसा ही किया और अपने लंड पर खूब सारा थूक लगाकर चिकना कर दिया। और फिर दोबारा दीदी की चूत में डाल दिया। अब लंड आहिस्ता-आहिस्ता चूत में आधा से ज्यादा घुस गया तो मैं आगे-पीछे चूत में लंड को करने लगा।
अब दीदी भी नॉर्मल हो रही थीं तो दीदी ने बोला, “राजा अब और अंदर डालो लंड को।” मैंने फिर से जोरदार धक्का लगाया — 1, 2, 3, 4 और दीदी दर्द से तड़प उठीं — “आहह्ह्ह मैं मर गईं… उए राज्ज्जा मार डाला।” मैंने पूछा, “रानी बहुत दर्द हो रहा है?” तो वो बोलीं, “बस तुम अब रुकना मत, मेरी चूतtt में धक्का लगाते जाओ।”
तो मैंने ऐसा ही किया। अब दीदी को मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगीं और मैं ऊपर से और दीदी नीचे से मेरी हिलने लगीं। मैं ऊपर से स्टॉक खालता तो वो नीचे से स्टॉक लगा रही थीं और साथ में बोल रही थीं — “आहह्ह्ह तुम बहुत अच्छा चोदते हो… काश तुम मेरा रियल पार्टनर बन जाओ।” मैं तो बस चिकनी चूत की चुदाई में ही मस्त था।
दीदी के मुँह से सेक्स भरी आहें मेरे जोश में इजाफा कर रही थीं और दीदी 10 मिनट की चुदाई में ही झड़ गईं। तो मैंने अपना लंड दीदी की चूत में से निकालकर उसके बूब्स के बीच में रखकर बूब्स की चुदाई करना शुरू कर दिया।
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तो दीदी बोलीं, “राजा तुम्हारा लंड बहुत मजा का है, मेरी गांड मारोगे?”
मैंने कहा, “हाँ मगर आपको दर्द बहुत होगा।”
तो दीदी बोलीं, “मेरे राजा वो चुदाई ही क्या जिसमें दर्द न हो।”
तो मैंने दीदी को बेड पर उल्टा लिटाकर दीदी की गांड पर एक जोर का थप्पड़ मारा जिससे उनकी गोश्त से भरी गांड लाल हो गई। फिर मैंने दीदी की मोटी गांड का सूराख खोलकर इसमें फिंगर डाल दी। दीदी — “आहह्ह्ह राजा हाँ ऐसा ही आराम से अपना लंड भी डालना, मेरी 1st टाइम गांड की चुदाई होगी।”
मैंने तो आयेशा को भी कभी गांड में कुछ नहीं डालने दिया। मैंने कहा, “अब जब वापस जाएँगे तो खुद ही आयेशा से गांड चुदवाएँगे।” तो वो हँस दीं। अब मैंने 2-2.5 फिंगर दीदी की गांड में डाली हुई थीं और साथ में बातें भी कर रहा था। फिर दीदी ने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मसलने लगीं। अब मेरा लंड दीदी की मोटी चिकनी गांड की भरपूर चुदाई के लिए तैयार था।
तो मैंने दीदी के मुँह में लंड डालकर थोड़ी देर चुसवाया, फिर दीदी को बेड के साथ खड़ा करके घोड़ा बना दिया। अब मैंने दीदी की गांड में खूब सारा थूक लगाकर मोटी गांड को जो पहले से ही चिकनी थी और चिकनी बना दिया और जोरदार 2-3 थप्पड़ लगा दिए गांड पर। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और साथ ही दीदी की गांड को दोनों हाथों से खोलकर इसमें लंड डालना शुरू कर दिया। और जैसा-जैसा लंड मोटी गांड में जा रहा था दीदी — “आहह्ह्ह ओहह्ह्ह मार दल्लाा मेरे राज्ज्जा तुमने ना मुझे मार डाला.” ऐसा कह रही थीं और मैं लगातार लंड को अंदर गांड में डाल रहा था।
तकरीबन 7 से 8 मिनट में बड़ा प्यार और आराम से मैंने अपना पूरा लंड दीदी की गांड में डालकर जोरदार मोटी चिकनी गांड की चुदाई शुरू कर दी। और दीदी भी मेरा साथ देने लगीं। 20 मिनट की जोरदार चुदाई से मेरे लंड में पानी आ गया और मैंने दीदी को सीधा करके अपना सारा पानी दीदी के बूब्स पर निकाल दिया।
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और मैं और दीदी आधा बेहोश होकर बेड पर गिर गए। आधा घंटा बाद दीदी मेरे ऊपर आ गईं और मैंने दीदी की दूसरी जोरदार चुदाई कर डाली। इस बार दीदी मेरे लंड के ऊपर बैठकर सवारी कर रही थीं मगर इस बार मैं पहले झड़ गया और दीदी अभी नहीं झड़ी थीं तो दीदी मेरे सीने पर ऐसा बैठ गईं कि उनकी चूत मेरे मुँह के साथ लग रही थी। और मैं दीदी की चूत चाटने के साथ-साथ फिंगर से भी दीदी को चोद रहा था। तकरीबन 3-4 मिनट में दीदी का वीर्य मेरे मुँह में गिर गया। मगर दोस्तों, एक अजीब बात भी हुई।
वो ये कि दीदी ने चूत के वीर्य के साथ मेरे मुँह पर पेशाब कर दिया जिसका नमकीन मगर कड़वाहट से भरपूर स्वाद बहुत अच्छा था। तो मुझे गुस्सा आ गया तो दीदी बोलीं, “राजा प्लीज मुझे बहुत जोर से पेशाब लगा था।” फिर मैंने दीदी को नीचे लिटाकर दीदी के मुँह पर पेशाब कर दिया, जिससे बेडशीट गीली हो गई। अब हम 1 हफ्ता शिमला में रहे, रोजाना 2-3 बार चुदाई करते थे। और वापस आकर पूरा दो महीना तक मैंने खूब दीदी की चुदाई की। और फिर दीदी 2 महीने गुजारने के बाद वापस चली गईं।
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