Virgin Sali First Sex Porn
मैं 18 साल की खूबसूरत लड़की हूं, कॉलेज में पढ़ती हूं। घर में मम्मी-पापा, बड़े भैया और भाभी (रिंकी) हैं। मेरी एक बहन है दिव्या जो मुझसे बड़ी है, जिसकी शादी हो चुकी है। मेरे जीजू (अजय) एक स्मार्ट लड़के हैं। दीदी उनके साथ बहुत खुश है। हम भी जीजू को बहुत मानते हैं। Virgin Sali First Sex Porn
मैं अपनी फिगर बता दूं। मेरा कद 5.3” है, फिगर 32-30-34 है, रंग गोरा है। मेरी भाभी बहुत खुले विचारों की हैं। वो मुझे हर वक्त छेड़ती रहती हैं, मुझसे पूछती रहती हैं कि कोई चक्कर है या नहीं। एक दिन वो मुझे छेड़ रही थीं — “सिया, तेरा कोई प्रेमी नहीं है क्या?”
मैं बोली, “भाभी तुम तो ऐसी बात करती हो जैसे प्रेमी बाहर पड़े हैं।”
वो बोली, “यार लड़के तो लड़कियों के दीवाने होते हैं, कमाल है तू ऐसी ही घूम रही है।”
मैं बोली, “भाभी लगता है भैया तुम्हें अच्छी डोज देते हैं।”
वो बोली, “जान तेरे भैया ही नहीं, मेरे ऊपर तो कई सवारियां करके चले गए। तेरी जैसी चिकनी घोड़ी पर लगता है कोई नहीं चढ़ा। मैंने तो जीजू को, उनके दोस्तों को सब से मजे किए हैं। तू बता, तेरा भी इंतजाम करूं?”
मैं बोली, “जीजू भी?”
वो बोली, “जीजू ही नहीं, उनका दोस्त भी। देख सिया, तू अजय की आधी घरवाली तो है ही, एक दिन की पूरी बन जा। वैसे भी जीजू का लंड बड़ा मस्त है।”
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मैं बोली, “पर मुझे शर्म आएगी।”
भाभी बोली, “यार एक दिन शर्म छोड़ दे। तेरे भैया और पापा शॉप पर होते हैं, मम्मी मंदिर में। सारा दिन मजे करेंगे।”
मैं तैयार हो गई। भाभी ने जीजू को फोन कर दिया। जीजू अगले दिन आने को कह दिया।
मम्मी भी शाम को बोलीं, “रिंकी मैं तो कल सारा दिन मंदिर में रहूंगी, वहां कीर्तन है।”
भाभी बोली, “कोई बात नहीं मां, आप आराम से जाना।”
भाभी मुझे बोली, “सिया कल अपना भी कीर्तन है।”
रात को मुझे नींद नहीं आई। मुझे पता था कि कल मेरी चुदाई होने वाली है, इसलिए मेरी चूत भी फूल गई और पानी छोड़ने लगी। सुबह भैया और पापा शॉप पर चले गए, मम्मी मंदिर गईं और भाभी घर पर थीं।
भाभी: “सिया तैयार है? जल्दी से नहा ले, अजय आता ही होगा।”
मैं अच्छी तरह नहाई, सारे बाल साफ किए, नाइट सूट वाली पजामी और टी-शर्ट पहन ली। भाभी ने साड़ी डाली थी।
मैं बोली, “भाभी कब आएंगे जीजू?”
भाभी मेरी चुचियां मसलती हुई बोली, “क्या बात, बहुत जल्दी लगी है।”
इतने में डोर बेल बजी तो भाभी बोली, “लो आ गए।”
सच में ही बाहर जीजू थे। उनके साथ उनका दोस्त नीरज था। भाभी नीरज को जानती थी। नीरज ने आते ही भाभी को गले लगाकर किस किया। नीरज भाभी को गोदी में उठाकर रूम में आ गए। तो मैं शर्म से मरी जा रही थी। मैं बोली, “मैं चाय लाती हूं।”
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जीजू ने देखा और बोले, “मम्मी कहां है?”
भाभी बोली, “मम्मी कीर्तन के लिए मंदिर गई हैं।”
मैं चाय बनाने चली गई। आई तो देखा भाभी खाली पेटीकोट में दोनों के लंड चूस रही है। मैं वापस जाने के लिए मुड़ी तो भाभी भाग के मेरे पास आई। उसकी बड़ी चुचियां उछाल रही थीं। मुझे पकड़ के रूम में ले गई कमरे में जीजू और नीरज अपने लंड सहला रहे थे। भाभी पूरी मस्ती में थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
भाभी बोली, “सिया जाओ, लंड देवता को झुक कर सलाम करो।”
मैं सर झुकाए चुपचाप खड़ी थी।
जीजू बोले, “सिया तेरी चूत में जाने के लिए देखो लंड कैसे मचल रहा है।”
भाभी बोली, “अजय ये भी आज साली से पूरी घरवाली बन जाने के लिए तैयार है, रात की तरस रही है।”
भाभी ने मुझे पकड़ा और उन दोनों के सामने खड़ा कर दिया। बोली, “चल सलाम कर।”
मैंने हाथ उठाकर सलाम किया तो भाभी बोली, “पागल तू लंड देवता को नाराज करेगी?”
मैं बोली, “भाभी और कैसे करते हैं?”
भाभी नीरज के लंड के पास बैठी। पहले उसका लंड अपने माथे से लगाया, फिर उसके लाल-लाल सुपाड़े पर किस किया, फिर मुंह में भर कर चूसा। बोली, “ऐसे, चल जल्दी कर।”
मैं भी नीचे बैठ कर जीजू के लंड के साथ वैसा ही किया और जीजू का लंड मुंह में भर कर चूसा और भाभी की तरफ देखा।
भाभी बोली, “वाह सिया, इतनी जल्दी सीख गई।”
भाभी ने अपना पेटीकोट उतारा, फिर मुझे नंगी करने लगी।
मैं बोली, “मुझे शर्म आती है।”
नीरज मेरी चुचियों से खेलता हुआ बोला, “इस खेल में शर्म का क्या काम?”
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नीरज मेरा सर पकड़ कर मेरे मुंह में लंड आगे-पीछे कर रहा था। जीजू भाभी को घोड़ी बना कर पीछे से लंड घुसा रहे थे। मैं पूरी तरह गरम हो चुकी थी। जीजू का लंड जैसे ही भाभी की चूत में घुसा, भाभी “ऊऊऊ” करने लगी। मैं भाभी की तरफ देख रही थी।
भाभी बोल रही थी, “मार डाला रे कसाई, तुम्हारा लंड है हथौड़ा। आआ मेरे अजय, जोर से धक्के मारो। मेरी चूत बड़ी प्यासी है, फाड़ दे मेरी चूत को। ओह्ह्ह अजय।”
जीजू भी बोल रहे थे, “ले ममता रानी, ले अंदर तक ले, साली रंडी। तेरी चूत को इतना चोद लिया फिर भी टाइट है।”
मैं बोली, “भाभी ये क्या, खुद मजे ले रही हो। इधर मेरी बुर में आग लगी है। जल्दी से मेरी चूत में लंड घुसाओ।”
भाभी चुदवाते हुए बोली, “मेरी रानी, मुझे पता है पर थोड़ा सब्र कर। अगर तेरी चूत में अभी लौड़ा डाल दिया तो तू प्यासी रह जाएगी। ये दोनों झड़ने वाले हैं। तू नीरज का लंड चूस।”
मैं दोबारा नीरज का लंड चूसने लगी। 4-5 मिनट में ही उसने अपने लंड का सारा माल मेरे मुंह पर डाल दिया।
इधर अजय पूछ रहा था, “रिंकी अंदर छोड़ूं या बाहर?”
भाभी बोली, “अजय अंदर छोड़ो, मुझे तुम्हारे बच्चे की मां बनना है। अगर लड़का हुआ तो तुम्हारी तरह लड़कियों की चूत फाड़ेगा और लड़की हुई तो अपनी मां और बुआ की तरह चुदक्कड़ बनेगी।”
जीजू का और भाभी का शरीर झटके खाने लगा। जीजू 2-3 मिनट तक ममता के ऊपर पड़े रहे, फिर अपना लंड निकाला। लंड भाभी की चूत रस से चमक रहा था। भाभी ने चूस कर साफ किया। अब वे तीनों सुस्त पड़े थे और मैं सुलग रही थी।
मैं भाभी को गालियां दे रही थी, “कमीनी अपनी चूत तो फड़वा ली, मुझे ऐसे ही छोड़ दिया।”
मैं जीजू को बोली, “क्यों जीजू, मेरी चूत में कांटे लगे थे जो तुम्हारा लंड इसमें छिल जाता?”
जीजू ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोले, “साली साहिबा, तुम्हारी चूत का तो हमें कब से इंतजार है।”
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मेरे होंठ चूसने लगे, मेरे गाल पर चुंबन खाने लगे। हाथों से मेरे चूतड़ सहला रहे थे, दबा रहे थे। सामने से नीरज आया और अपना लंड मेरे मुंह में ठूस दिया। उसका ढीला लंड मैं आइसक्रीम की तरह चूस रही थी। उधर भाभी अपना मुंह जीजू के लंड पर चला रही थी। जीजू मेरी चुचियां और गाल बेदर्दी से चूस रहे थे।
मैं बोली, “जीजू आराम से करो, मम्मी को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।”
जीजू बोले, “तेरे जैसे मस्त चीज को देखकर काबू कहां रहता है। बाकी आज मेरा लंड इस घर की सारी लड़कियों की चूत का स्वाद ले।”
इतने में नीरज बोला, “यार तू ही नहीं, मैं भी।”
मैं बोली, “नीरज तुमने दिव्या को भी चोदा है?”
वो बोला, “हां मेरी जान, हम दोनों ने अपनी बीवियां बदली हुई हैं। बाकी दिव्या बहुत मस्त है।”
मैं बोली, “तुम्हें मैं मस्त नहीं दिखती या भाभी मस्त नहीं दिखती?”
नीरज का लंड लंबा होता जा रहा था।
मैं बोली, “अब कुछ करोगे भी या नहीं? मेरी चूत देखो कैसे लंड मांग रही है।”
भाभी बोली, “चलो अजय, अब मत तरसाओ। आज इस घर की आखिरी रंडी का भी कल्याण कर दो। तुम कह रहे थे दिव्या की सील टूटी हुई थी पर आज उसकी छोटी बहन की कुंवारी चूत तुमसे खुलवा कर उसका बदला उतार देगी। क्यों सिया, अपनी चूत का ताला इस चाबी से खुलवाएगी?”
मैं बोली, “जीजू आप चाबी लगाओ, ताला तो खुलने को बेताब है।”
मैं जीजू के लंड पर उकड़ू बैठ गई। भाभी ने जीजू का लंड मेरी चूत के छेद पर सेट कर दिया और बोली, “सिया चूत का ताला खुलते हुए थोड़ा दर्द होता है।”
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मैं बोली, “कोई बात नहीं, अब जो दर्द है उससे ज्यादा दर्द नहीं हो सकता।”
भाभी बोली, “गुड, अब अपनी चूत का दबाव लंड पर दे।”
मैंने लंड पर चूत को दबाना शुरू किया पर अंदर नहीं गया। थोड़ा सा दर्द भी हुआ। मैं बोली, “भाभी ये तो अंदर ही नहीं जा रहा।” भाभी ने मुझे कंधों से दबाव देना शुरू किया। मैंने जोर लगाया, थोड़ा सा लंड अंदर गया। मुझे तेज दर्द हुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं बोली, “भाभी बहुत दर्द हो रहा है, बस और अंदर मत डालना।”
भाभी बोली, “मेरी जान, लंड को चूत की खुशबू आ जाए तो अंदर तक जाता है, चाहे लड़की रोए या दर्द हो।” बोली, “जिस तरह पहली बार मेरी चुदाई की थी वो ही करो।”
जीजू ने झटके से मेरी टांगें पकड़ के अपनी ओर खींच ली। मेरा सारा भार लंड पर टिक गया। ऊपर से भाभी ने नीचे दबाया। लंड सारी दीवारें तोड़ता हुआ अंदर घुस गया। मेरे चूतड़ जीजू की जांघों पर टिक गए। मैं जोर से चीखी, “आआ आआ आआ।” मेरी आंखों में पानी आ गया।
मैं उठने को हुई तो भाभी ने उठने नहीं दिया। भाभी मेरी पीठ सहला रही थी और नीरज मेरी चुचियां चूसने लगा। भाभी मस्ती में बोली, “लो अजय, तुम्हारे लौड़े ने 18 साल पुराना ताला खोल दिया।” मैं 2-3 मिनट ऐसे ही पड़ी रही। मुझे कुछ आराम मिला तो मैं थोड़ा उठी। जीजू का लंड खून से भरा पड़ा था। मैं डर गई।
मैं बोली, “जीजू खून कैसा?”
भाभी बोली, “जब लड़की की चूत की सील टूट जाती है तो खून आता है, पर अब तो तेरे मजे हैं।”
जीजू ने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया और मेरे लिप्स चूसने लगे। मैं भी धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। भाभी नीरज को बोली, “नीरज मेरी चूत भी लौड़ा मांग रही है।”
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नीरज बोला, “मैं तो तैयार हूं।”
नीरज ने भाभी को दोबारा घोड़ी बनाया। नीरज ने पीछे से भाभी की चूत में लंड डाला और लगा चोदने।
नीरज बोला, “रिंकी एक बात बता, तूने कितनों को अपनी सवारी करवाई है?”
भाभी बोली, “बहुत थे यार।”
इधर जीजू ने मेरी चूत में कस-कस के झटके लगाने शुरू कर दिए थे। मेरी चूत से पानी निकल गया था, इसलिए अब जीजू का लंड आराम से अंदर-बाहर हो रहा था।
जीजू बोले, “सिया कैसा लगा मेरा लंड?”
मैं बोली, “जीजू बड़ा जालिम है, पहले दर्द देता है फिर मजा।”
जीजू बोले, “देखो मेरी बुर कह रही है, मेरे मालिक जरा जोर से अंदर-बाहर हो।”
जीजू ने नीचे से धक्के तेज कर दिए। बोले, “ले साली, तेरी चूत में ये गया मेरा लौड़ा।”
मैं ऊपर से पागलों की तरह लंड पर कूद रही थी। “लो मेरे राजा, ये चूत तो तुम्हारी हुई। आज इसका बोसड़ा बना दो। जोर-जोर से करो।”
इसी तरह बोलते हुए हम एक साथ झड़ गए। उधर भाभी और नीरज भी झड़ गए। मैंने, नीरज और भाभी ने अजय का लंड अपनी जीभ से साफ किया। उसके बाद नीरज ने मेरी चूत की सवारी की।
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