• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer

HamariVasna

Hindi Sex Story Antarvasna

  • Antarvasna
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Hindi Sex Story
  • माँ बेटे का सेक्स
  • अपनी कहानी भेजिए
  • ThePornDude
You are here: Home / Hindi Sex Story / शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 2

शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 2

अक्टूबर 10, 2026 by hamari Leave a Comment

Mast Chudai XXX Story

हेल्लो मैं आपकी फ्रेंड वैशाली कहानी का अगला भाग लेकर आई हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 1 पढ़ा होगा. जिसमे मैंने बताया था की मेरे घर मेरी सहेली एक लड़के को अपनी चुदाई करने के लिए लाइ थी. और फिर वह हमारा किरायेदार बन कर रहने लगा और हमारी बहुत मदद करने लगा. एक दिन मैंने अपने छोटी बेटी की पेंटी उसके रूम में देखी और मेरे मन में कई सवाल आने लगे. अब आगे- Mast Chudai XXX Story

अब मेरे दिमाग़ ने भी काम करना बंद कर दिया था…. कहीं मेरी बेटी ग़लत रास्ते पर तो नहीं चल रही……. मैंने मन में ठान लिया था कि, अब चाहे जो भी हो जाए….. में रश्मि से बात करके रहूंगी…… खाना खाने के बाद मैंने सारा काम खतम किया, और रश्मि के रूम में गयी…….

मुझे अपने रूम में देख कर रश्मि ने पूछा क्या हुआ माँ, तो मैंने उसकी पैंटी दिखाते हुए गुस्से से पूछा ये क्या है….. जैसे ही रश्मि ने वो अपनी पैंटी मेरे हाथ में देखी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया…. पर फिर अपनी घबराहट को छुपाते हुए बोली….. “ये ये तो मेरी पैंटी है माँ ! आप भी ना.”

में: (गुस्से से) वो तो मुझे भी दिख रहा है…… पर ये सुशांत के रूम में कैसे पहुंची?

रश्मि: (मेरी ये बात सुन कर और घबरा गयी, और रुवासी से होकर बोली) वो वो जब मैंने ऊपर छत से कपड़े उतारे थे,और सुशांत के कपड़े देने उसके रूम में गयी थी… शायद उसी के बीच में चली गयी होगी….

भले ही रश्मि कुछ और ही कह रही थी…… पर उसकी घबराहट से साफ जाहिर हो रहा था कि वो मुझ से झूठ बोल रही है…. में अब गुस्से से पागल हुई जा रही थी…… मे तेज़ी से रश्मि की तरफ गयी…… और उसके गाल पर जोरदार थप्पड़ मार दिया….. थप्पड़ पड़ते ही वो गाल पर हाथ रख कर सुबकने लगी…….

में: सच सच बता….. क्या चल रहा है तुम दोनो के बीच में…….

रश्मि: (अब जोर जोर से रोने लगी थी) सच माँ कुछ नहीं है…..

में: (और गुस्से से चिल्लाते हुए) बताती है कि नहीं कि और लगाऊ……

रश्मि: (सुबक्ते हुए) वो माँ में में सुशांत से प्यार करती हूँ……

उसकी ये बात सुन कर तो जैसे मेरे बदन में आग ही लग गयी हो……. मैंने एक के बाद एक ४-५ थप्पड़ उसके गालो पर जड़ दिए……

में: तुम जानती भी हो प्यार किसी कहते है…… ये सब गंदी हरकते करके तुम इसे प्यार का नाम दे रही हो….. तूने हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी….

रश्मि सुबक्ते हुए मेरे पास आई, और मुझसे सॉरी कहने लगी….. पर में उस पर और बरस पड़ी और बोली, “तुझे तो बाद में देखूँगी…पहले कल उसकी खबर लेती हूँ.” में ये कह कर अपने रूम में आ गयी. मुझे रह रह कर मधु की बात याद आ रही थी. सच कहा था मधु ने.

सुशांत कोई बच्चा नहीं था, वो शिकारी था और इस शिकारी ने मेरी मासूम बच्ची का शिकार कर लिया था. अब उसे इस शिकारी के चंगुल से आजाद कराने की जिम्मेदारी मेरी थी. अगली सुबह डोर बेल बजी…… मेरा गुस्सा पहले ही सातवें आसमान पर था….

में गेट पर गयी, और गेट खोला. बाहर सुशांत खड़ा मेरी तरफ देख कर मुस्करा रहा था…. जी तो चाह रहा था कि इस हरामजादे का यही मूह तोड़ दूं…… पर में नहीं चाहती थी कि हमारे घर की इज़्ज़त बाहर गली मुहल्ले में उछले……. सुशांत सीधा अंदर चला गया, और अपने रूम में जाने लगा…. मैंने जल्दी से गेट लॉक किया, और उसकी तरफ पलटी….

इसे भी पढ़े – आग लगाई भाभी की जवानी ने

में: (गुस्से से चिल्लाते हुए) वही रुक जा हरामजादे…….

मेरी आवाज़ सुन कर सुशांत मेरी तरफ पलटा, और हैरत से मेरी तरफ देखने लगा.

में: हां तुझे ही कह रही हूँ….. वेश्या की औलाद…….

सुशांत: क्या हुआ आंटी आप मुझसे ऐसे क्यों बात कर रही है……

में गुस्से से उसकी तरफ बढ़ी, और उसको उसके बालों से पकड़ कर खींचते हुए ४-५ झापड़ उसके मूह पर दे मारे…… पर इस अचानक हमले से वो लड़खड़ा कर पीछे गिर गया….. पर गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था…. में फिर उसकी तरफ लपकी….. पर उसने मुझे पीछे धक्का दे दिया…..

में: हरामज़ादे हमारी इज़्ज़त को उछालता है…. में तुझे जिंदा नहीं छोड़ूँगी…….

में उसकी तरफ फिर लपकी, और उल्टे हाथ पैर चलाने लगी……. सुशांत भी बचने के लिए हाथ पैर चलाने लगा….रश्मि जो अब तक अंदर खड़ी तमाशा देख रही थी भागते हुए बाहर आ गयी. और मुझे पकड़ने लगी……..

रश्मि: माँ क्या कर रही हो…. पूरा माहौल्ला इकट्ठा हो जाएगा……

में: रश्मि में कहती हूँ छोड़ मुझे……. में आज इसे जिंदा नहीं छोड़ूँगी…….

सुशांत: अबे क्या नौटंकी लगा रखी है…….. मैंने तेरी लड़की के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं की, अगर मेरी ग़लती है तो तेरी भी लड़की की उतनी ही ग़लती है…….

में: तू अभी के अभी निकल यहाँ से….. में तेरी शकल भी नहीं देखना चाहती. आज के बाद इधर नज़र उठाई तो तेरी आँखें निकाल दूँगी……

सुशांत: जा रहा हूँ.. जा रहा हूँ…. मुझे भी कोई शौक नहीं है यहाँ रहने का…. वो तो रश्मि से प्यार करता हूँ इसीलिए चुप हूँ…….

में: चुप कर हरामी ! गंदी हरकते करके उसे प्यार का नाम देता है.. दफ़ा हो जा यहाँ से……

सुशांत अपने रूम का डोर पटके हुए अंदर गया, और अपने कपड़े और समान बॅग में डालने लगा….. में बाहर बरामदे में चारपाई पर बैठ गयी…. सुशांत अपना समान बॅग में डाल कर चला गया…… कुछ दिन घर का महॉल ऐसे ही रहा.

सुशांत के जाने के बाद रश्मि उदास रहने लगी थी….. मुझे डर था कि बचपने में वो कोई ग़लत कदम ना उठा दे….. धीरे धीरे घर का माहौल ठीक होने लगा…… फिर हमारे दो रूम रेंट पर चढ़ गये….. दोनो ही रूम एक फॅमिली ने रेंट पर लिए थे….

उनके बच्चे अभी बहुत छोटे थे…… इसीलिए एक दिन मैंने अपने जेठ और जेठानी के घर जाने का प्लान बनाया. में सुबह किरायेदार की बीवी को ये बोल कर चली गयी कि, में किसी काम से जा रही हूँ….. वो रश्मि का ध्यान रखे……… जब में अपनी जेठानी के घर पहुँची, तो वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई, विमला ने मुझे अंदर बुलाया और खातिरदारी की, उसके बाद में हमने थोड़ा इधर उधर की बातें की……

विमला: और दीदी बताए कैसे आना हुआ……

में: दरअसल में इसलिए आई थी कि, में चाहती हूँ कि तुम रश्मि के लिए भी कोई अच्छा सा रिश्ता ढूँढ दो….. उसकी शादी भी जल्द से जल्द करवानी है मुझे…..

विमला: क्या हुआ दीदी कोई बात है क्या?

में: नहीं ऐसे ही, दरअसल मेरी तबीयत भी आज कल ठीक नहीं रहती…… सोचती हूँ कि आँखें बंद करने से पहले रश्मि भी अपने घर चली जाए…..

विमला: क्या हुआ दीदी आग लगे दुश्मनों को…… अभी तो आप जवान हो…. फिर ऐसी बात क्यों कर रही है……

में: विमला प्लीज़ रश्मि के लिए अच्छा सा रिश्ता ढूँढ लो……. प्रिया को अपने ससुराल में खुश देखती हूँ तो दिल का बोझ हल्का हो जाता है…..

विमला: में समझती हूँ दीदी….. इनको आने दो आज रात को ही बात करती हूँ…

में: ठीक है और सुनाओ बच्चे कैसे है…….

विमला: ठीक है दीदी……. स्कूल गये है…….

दोपहर को खाने के बाद में घर वापिस आ गयी….. जब में घर वापिस आई तो, रश्मि घर पर नहीं थी…… जब मैंने किरायेदार से पूछा तो बोली, वो उसकी सहेली आई थी, उसके साथ मार्केट गयी है……. मुझे पता नहीं क्यों चिंता होने लगी थी…… उस वाकये को ३ महीने गुजर गये थे……..

उसके बाद से ना तो मैंने सुशांत की शकल देखी थी, और ना ही नाम सुना था…… थोड़ी देर बाद रश्मि भी आ गयी…… दिन गुज़रते गये….. अप्रैल का महीना था…… शाम के ४ बजे की बात है….. उस घटना को लगभग ६ महीने हो चुके थे….. में अपने घर में बैठी हुई सिलाई का काम कर रही थी…… १० दिन पहले जो फॅमिली हमारे घर रहने आई थी. वो भी कमरा खाली कर जा चुके थे……

कई जगह रश्मि के रिश्ते की बात चली, पर बात नहीं बन पाई…… उस दिन में बैठी कपड़े सिल रही थी…. रश्मि अपनी सहेली के घर में थी पड़ोस में तभी बाहर डोर बेल बजी……. मैंने सोचा कि, रश्मि आ गयी है… मैंने जैसे ही बाहर जाकर गेट खोला तो, मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी….. सामने सुशांत खड़ा था…. उसको देखते ही मेरी रगो में खून का दौरा तेज हो गया…

इसे भी पढ़े – होली के दिन खुशी भाभी की प्यास बुझ गई

में: तू तू क्या लेने आया है इधर……

सुशांत कुछ नहीं बोला, और मेरी तरफ एक पैकेट बढ़ा दिया……

“क्या है ये” मैंने गुस्से से उससे कहा…..

“देखो लो…..तुम्हारे लिए बहुत ज़रूरी समान है इसमे”

मैंने उसके हाथ से वो पैकेट नहीं लिया….. उसने एक बार मेरी तरफ देखा, फिर उसने वो पैकेट गेट के अंदर नीचे फेंक दिया…… फिर वो मुड़कर वापिस चला गया….. मुझे समझ में नहीं आया वो यहाँ क्या करने आया है…. मैंने गेट बंद किया, और पैकेट को उठा कर खोला…….

जैसे ही मैंने पैकेट खोला, तो उसमे से एक डीवीडी डिस्क निकल कर बाहर आ गयी…. और उसमे एक स्लिप भी थी जिस पर लिखा हुआ था ये डीवीडी देखने के बाद तुम्हे मेरी ज़रूरत पड़ेगी….. और उसके नीचे उसका मोबाइल नंबर लिखा हुआ था……

मैंने गेट लॉक किया, और अंदर आ गयी….. न ज़ाने क्यों मेरा दिल बहुत घबरा रहा था…. रश्मि भी पड़ोस के घर में थी…. मैंने वो डीवीडी ली, और उसे डीवीडी प्लेयर में लगाया…. थोड़ी देर बाद उसमे कुछ शुरू हुआ….. कैमरा कुछ घूम सा रहा था……

फिर किसी का हाथ कैमरा के सामने आया, और कैमरा एक जगह सेट हो गया…… ये किसी रूम का नज़ारा था…… पर मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि कहाँ का सीन था. थोड़ी देर बाद सुशांत उसमे दिखाई दिया…वो बेड पर बैठा हुआ था……

और वो किसी से बात कर रहा था. जो शायद कैमरा के दूसरी तरफ था….. फिर वो शख्स सामने आया……… जिसे देखते ही मेरी रूह तक काँप गयी….. वो रश्मि थी….. रश्मि सुशांत के पास आकर बेड पर बैठ गयी….. में बड़ी हैरानी से ये सब देख रही थी…. क्योंकि जिस रूम में वो क्लिप बनी थी वो हमारा नहीं था…….

फिर सुशांत ने रश्मि को पकड़ कर अपनी तरफ खिंचा, और उसके होंठो पर होंठ लगा दिए….. ये देखते ही मेरे पैरो की ज़मीन खिसक गयी……. रश्मि कब उससे मिलने गयी…….. मुझे याद भी नहीं था कि, कब वो इतनी देर तक घर से बाहर रही… मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था……

रश्मि भी अपने बाहें सुशांत के गले में डाले हुए, उसका पूरा साथ दे रही थी…… मेरे आँखें टीवी पर इस कदर गढ़ गई थी कि, में सुशांत की हर हरक़त को देखने की कोशिश कर रही थी……… और मेरा दिल बैठा जा रहा था….. सुशांत ने अपने हाथों को उसकी कमर से ऊपर ले जाते हुए, रश्मि की स्तनों पर ले गया. जिसके कारण रश्मि उससे और चिपक गयी……..

वो रश्मि के होंठो को चूस्ते हुए उसकी स्तनों को दबा रहा था……. और बार बार उसको अपनी तरफ खींच रहा था…. फिर उसने रश्मि की कमीज़ को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया….. और मुझे ये देख कर बहुत हैरानी हुई, ये सब करते हुए, रश्मि भी उसका पूरा साथ दे रही थी….

अगले ही पल उसने रश्मि की कमीज़ को उसके बदन से अलग कर नीचे फेंक दिया…….. रश्मि की कमीज़ को नीचे फर्श पर देख कर मुझे ऐसा लगा कि हमारी इज़्ज़त नीचे फर्श पर पड़ी धूल चाट रही है…. फिर उसने उसकी स्तनों को ब्रा के ऊपर से पकड़ कर मसलना शुरू क्या..

रश्मि उसकी बाहों में छटपटाने लगी…….. फिर सुशांत ने एक हाथ नीचे ले जाते हुए, उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया…… रश्मि बेशर्मो की तरह उसकी गोद में बैठी हुई थी….. जब सुशांत ने उसकी सलवार को नीचे सरकाना शुरू किया… उसने बड़ी बेशर्मी से अपनी गांड को ऊपर उठा लिया……..

और सुशांत ने खींचते हुए उसकी सलवार उसके पैरों से निकाल कर नीचे फेंक दी…… कैमरा का फोकस सीधा उन पर था……मेरी अपनी बेटी उस हरामी की गोद में अधनंगी बैठी हुई थी… फिर सुशांत ने पीछे से उसकी टाँगों को घुटनो से मोड़ कर फेला दिया……..

और एक हाथ आगे लेजा कर उसकी पैंटी को एक साइड में कर दिया….. मेरी तो आँखें फटी की फटी रह गयी…. पैंटी को साइड करके, उसने रश्मि की योनि की फांकों को अपने हाथ की उंगलियों से खोला… उसका गुलाबी छेद में साफ साफ देख पा रही थी…….. तभी टीवी पर ब्लॅक स्क्रीन आ गयी….

डीवीडी ख़तम हो चुकी थी…… मैं सच में बहुत घबरा गयी थी…मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ……. तभी फोन की रिंग बजी…… मैंने जल्दी से प्लेयर में से डीवीडी निकली, और अपने साथ लेकर अपने रूम में आ गयी…. मैंने काँपते हुए हाथों से फोन उठाया, और बड़ी ही मुश्किल से हेलो कहा.. उधर से सुशांत की आवाज़ थी….. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

इसे भी पढ़े – गर्म कुंवारी पड़ोसन चुदवाने आ गई

सुशांत: क्यों आंटी जी कैसे लगी फिल्म……

में: अपनी बकवास बंद कर, अगर तू मेरे सामने होता ना… तेरा मूह तोड़ देती में…..

सुशांत: ओह इतना गुस्सा ! इतना गुस्सा ठीक नहीं है आपकी सेहत के लिए….. ये तो सिर्फ़ टेलर था….. अभी तो पूरी फिल्म बाकी है…… तो बोलो कब आ रही हो?

में: क्या?

सुशांत: पूरी फिल्म देखने जो मेरे पास है…….

में: हरामज़ादे में तुम्हारी रिपोर्ट पुलिस में कर दुंगी.

सुशांत: ना ना ना भूल कर भी ऐसी ग़लती मत करना….. नहीं तो मुझ से बुरा कोई ना होगा…….. पूरे बाज़ार में तुम्हारी बेटी की सहवास की मूवी बना कर बेच दूँगा…. और पता है नाम क्या रखूँगा….. रश्मि ठुकी अपने यार के लंड से… हा हा हाँ.” उसकी वो कमीनी हँसी ने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया……

“में तेरी बातों में नहीं आने वाली कमीने. जब पुलिस के हत्ते चढ़ेगा ना तब पता चलेगा. ऐसी जगह ले जा कर मारूँगी कि तुझे पानी पूछने वाला कोई ना होगा.” में गुस्से में जो मन में आ रहा था बोले जा रही थी..

सुशांत: ओह्ह अच्छा रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया…. देखते है कि तुम क्या कर सकती हो….. मेरे तो आगे पीछे कोई रोने वाला भी नहीं….. में तो मर जाऊंगा. पर तुझे और तेरी बेटी को कहीं का नहीं छोड़ूँगा……. अब तू देख में क्या करता हूँ.

ये कह कर उसने फोन रख दिया……. में वही बैठ कर फुट फुट कर रोने लगी… और उस मनहूस घड़ी को याद कर कोसने लगी….. जब मैंने उसे अपने यहाँ रहने के लिए रूम दिया था…… में काफ़ी देर तक वही बैठी रोती रही….और पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी…..

में तब उठी जब रश्मि ने बाहर आकर डोर बेल बजाई….. मैंने उठ कर बाहर गयी, और गेट खोला…… मेरी आँखें रोने से लाल हो चुकी थी…… जिसका पता रश्मि को चल गया…….. “क्या हुआ माँ आप रो रही थी” मैंने अपने आप को संभालते हुए कहा… “नहीं बस वो प्रिया की याद आ रही थी…..”

में ये बात रश्मि को नहीं बताना चाहती थे….. में चुप चाप अपने रूम में आ गयी….मुझे यही डर सता रहा था कि, गुस्से में सुशांत कुछ उल्टा सीधा ना कर दे….. में तो किसी को मूह दिखाने के लायक नहीं रहूंगी…… रात को रश्मि ने खाना बनाया……..

पर मेरा मन खाने को नहीं था.. इसीलिए में तबीयत ठीक ना होने का बहाना बना कर अपने रूम में आ गयी… में दिल बुरी तरह घबरा रहा था….. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि, में इस मुसबीत से कैसे छुटकारा पाऊ…. अब मेरे सामने मुझे कोई रास्ता नहीं आ रहा था….

में काफ़ी देर तक बस यही सोचती रही… मैंने घड़ी की तरफ देखा रात के १० बज रहे थे….. अब मुझे इस मुसीबत से निपटना ही था… में बेड से खड़ी हुई, और उस पॅकेट में जो स्लिप थी उसे निकाला, और अपने काँपते हुए हाथों से उस पर लिखा मोबाइल नंबर डायल किया…. थोड़ी देर रिंग बजने के बाद उधर से सुशांत की आवाज़ आई……

सुशांत: हेलो क्या हुआ नींद नहीं आ रही क्या? सच सच बताना मेरे ही बारे में सोच रही थी ना?

में: अपनी बकवास बंद करो. और बताओ कि तुम क्या चाहते हो…. आखिर हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है….. आखिर तुम हमारे साथ ये सब क्यों कर रहे हो?

सुशांत: अर्रे वाह तुम्हें तो भूलने की बीमारी अभी से लग गयी है. भूल गयी उस दिन कैसे तुम ने मुझे जलील करके घर से निकाला था…. अब ध्यान से सुनो कल तुम मुझे मेरे घर पर आकर मिलो…. अगर तुम चाहती हो कि, तुम्हारी बेटी की वो क्लिप दुनिया के सामने ना आए तो, और हां किसी से ये बात की तो, मुझसे बुरा कोई नहीं होगा…..

में: ठीक है! में आउंगी….पर तुम वो क्लिप किसी को ना देना… में तो जीते जी मर जाऊंगी…..

सुशांत: ठीक है……. अगर तुम चाहती हो कि, में वो क्लिप किसी को ना दिखाऊ… तुम्हे मेरी हर बात माननी होगी….. में जैसा कहूँ करना होगा……

में: (सुशांत के इस तरह की बात करने पर मुझे सुशांत की नियत पर शक होने लगा था.) तुम तुम चाहते क्या हो……

सुशांत: में वही चाहता हूँ जो मैंने तुम्हारी बेटी के साथ किया……. बस एक बार अपनी योनि का स्वाद चखा दो….. उसके बाद में वो क्लिप तुम्हें दे दूँगा…. में प्रॉमिस करता हूँ…… दोबारा तुम्हें तंग नहीं करूँगा……

सुशांत ने उसी वक़्त फोन काट दिया…. और उसके बाद में वही बैठी रोने लगी…. न ज़ाने में कितनी देर तक रोती रही…… वो हराम की औलाद मुझसे ऐसे बात कर रहा था……. और फिर बेड पर लेटे लेटे नींद आ गये. सुबह होते ही सुशांत चला गया…

उसके जाने के बाद में नहा कर नाश्ता बनाने लगी… तभी मेरे जेठ जी, रश्मि को लेकर वापिस आ गये…. और रश्मि को छोड़ कर वापिस चले गये….. में अब नये सिरे से जिंदगी शुरू करना चाहती थी….. और सब कुछ भुला कर आगे बढ़ना चाहती थी……

किस्मत भी अब हमारा साथ देने लगी थी…….. हमारे चारो रूम रेंट पर चढ़ गये थे…. सिलाई के काम की आमदनी मिला कर अच्छी इनकम होने लगी थी….. धीरे धीरे कुछ दिन गुजर गये….. मैंने वो डीवीडी भी तोड़ कर फेंक दी थी. मुझे लग रहा था कि, अब सब कुछ ठीक हो गया है……

एक दिन में कुछ खरीददारी करने मार्केट गयी हुई थी, खरीददारी करते हुए मुझे किसी ने मेरा नाम लेकर पुकारा, जब मैंने पीछे देखा, तो पीछे सुशांत मेरी तरफ हाथ हिलाते हुए, मुझे बुला रहा था….. में उसके पास गयी और कहा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

इसे भी पढ़े – छोटी बहन साथ चुदाई का सपना पूरा हो गया

में: ये क्या बदतमीजी है….. तुम यहाँ मुझे ऐसे क्यों बुला रहे हो…..

सुशांत: ओह्ह इतना गुस्सा वैशाली जी……… इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक नहीं होता.

में: हां बोलो क्या कहना है….

सुशांत: यार तुम तो मुझे भूल ही गयी. कहो तो कल तुम्हारे घर आ जाऊ.

में: नहीं ऐसा मत करना….. घर पर बहुत से किरायेदार रहते है….

सुशांत: फिर तुम वही आ जाओ….. जहा मैंने पहली बार तुम्हें ठोका था…..

में: में नहीं आउंगी. अब मुझे तुम से कुछ लेना देना नहीं…..

सुशांत: चलो जैसी तुम्हारी मर्ज़ी….. बस एक बार मेरे लंड के बारे में सोच लेना… क्यों कहर ढा रही हो मेरे लंड पर…… कल आ जाओ ना…… तुम्हारी योनि की बहुत याद आती है….. तुम्हें कभी वो पल याद नहीं आते… जब तुम मेरे लंड पर उछल उछल कर ठुक रही थी…… याद नहीं आता वो सब….. कल आ जाना… देखो इतनी सर्दी में अगर ठुकाई का मज़ा नहीं लिया तो फिर कब लोगी…. में तुम्हारा कल इंतजार करूँगा……

सुशांत बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया…… में घर वापिस आ गयी….. मेरे जहन में रह रह कर उसकी बातें घूम रही थी…. और उसकी बातें सच भी थी. में उस रात की ठुकाई को याद करके रात को तड़पती थी… पर अपने मन को ये समझा कर शांत कर लेती थी… कि अब मुझे इन सब बातों को भूल कर आगे बढ़ना चाहिए…….

उस रात में सो नहीं पे….. वासना के कारण मेरी बुरी हालत हो चुकी थी….मेरी योनि की आग ऐसे भड़क रही थी…. जैसे कभी शांत ही ना होगी. पूरे एक महीने बाद जब सुशांत को देखा तो, फिर से उस रात की यादें ताज़ा हो गयी….. किसी तरह रात गुज़री….. और मैंने सुबह उठ कर नाश्ता बनाया, घर के काम निपटा कर नाश्ता कर लिया…….

उसके बाद में अपने सिलाई के काम में लग गयी…… पर मेरा मन काम में नहीं लग रहा था……. सारी रात मेरी योनि में आग सी लगी रही थी… जो अभी तक शांत होने का नाम नहीं ले रही थी….. में उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी……. आज सनडे था, हमारे जो किरायेदार नीचे वाले रूम में रहते थे…… उसका पति घर पर ही था…..

जब में उनके रूम के सामने से गुज़री, तो मेरी नज़र अंदर चली गयी. वो दोनो पति पत्नी रज़ाई ओढ़े एक दूसरे को बाहों में लिए हुए लेटे हुए थे.. मैंने देखा किरायदार अपनी पत्नी के होंठो को चूस रहा था. और उसका एक हाथ उसके स्तनों पर था…. जो उससे ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था…….

ये देख कर मेरे अंदर की आग और भड़कने लगी….. में जल्दी से बाथरूम में गयी….. अपनी सलवार खोली, और फिर पैंटी को नीचे जाँघो तक सरका दिया. मैंने वाइट कलर की पैंटी पहनी हुई थी…… जो कि नीचे से एक दम गीली हो चुकी थी “हाए रब्बा हुन इस उम्र विच क्यों पानी छड रही है” में पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गयी…….

पेशाब करके पैंटी ऊपर की, फिर सलवार ऊपर करके बाँध कर बाथरूम से बाहर आ गयी…… मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि, में कैसे अपनी योनि की आग को ठंडा करूँ…… दूसरी तरफ रश्मि अपने रूम में टीवी देख रही थी….. मेरा दिल बार बार यही कर रहा था कि, काश सुशांत यहाँ होता, और मुझे ज़बरदस्ती ही ठोक देता. कम से कम मेरी योनि की आग तो ठंडी हो जाती.

में अपने आप से हार रही थी……. में इस कदर गरम हो चुकी थी कि, में अपना सब कुछ ताव पर रखते हुए अपने रूम में गयी, और सुशांत को फोन किया….. पर सुशांत ने फोन नहीं उठाया……. मैंने दो तीन बार ट्राइ किया. पर उसने फोन नहीं उठाया…….. अब में करूँ……मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

मुझे याद आया कि, कल सुशांत ने मुझे वही वाले घर में आने को कहा था.. अब तो जैसे में लंड के लिए पागल सी हो गयी थी…… पति की मौत के ६ साल बाद तक मैंने अपने अरमानों को मारे रखा था.. पर आज में अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पा रही थी…….. में रश्मि के रूम में गयी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

में: रश्मि वो में बाज़ार जा रही हूँ.. कुछ सामान लेने जाना है….

रश्मि: ठीक माँ….

में: घर पर ही रहना……

रश्मि : ठीक है माँ आप जाओ में घर पर ही हूँ……..

मैंने घर से निकल कर ऑटो किया, और सीधा उस पते पर चली गयी. जहाँ पहले गयी थी……मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि, में कैसे उसके सामने जाऊ. अगर उसने मुझसे पूछ लिया कि में मना करने के बाद क्यों आ गयी, तो में उसे क्या जवाब दूँगी……..

पर अपने ही दिल में पैदा हुए सवालों के जवाब मेरे पास भी ना थे. थोड़ी देर में ही में वहाँ पहुँच गयी……. मैंने ऑटो वाले को पैसे दिए. और गली में अंदर बढ़ने लगी…….. जैसे जैसे में उसके घर की तरफ बढ़ रही थी…. वैसे वैसे मेरे दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी……. मुझे आज खुद पर ही शरम आ रही थी….. मैंने गेट के सामने पहुँच कर डोर बेल बजाई…. थोड़ी देर बाद गेट खुला तो सामने सुशांत खड़ा था…..

सुशांत: (मुझे देख कर मुस्कुराते हुए) अंदर आ जाओ…..

इसे भी पढ़े – पापा के शराबी दोस्तों ने मुझे जबरदस्ती चोदा

में बिना कुछ बोले अंदर आ गयी…… मेरे अंदर आते ही उसने गेट को अंदर से लॉक कर दिया…. और रूम की तरफ जाने लगा….. में भी सर झुकाए हुए उसके पीछे रूम में जाने लगी…. अगर सुशांत घर पर ही था तो उसने मेरा फोन क्यों नहीं उठाया… ये सवाल मेरे दिमाग़ में घूम रहा था….. ”तुमने फोन क्यों नहीं उठाया मेरा” मैंने रूम में एंटर होते हुए कहा…

सुशांत: हां मैंने देखी तुम्हारी मिस कॉल. वो में सो गया था.. और फोन साइलेंट मोड पर था….

अंदर आते ही सुशांत ने अपने पायजामा को उतार कर एक तरफ फेंक दिया….. और फिर सोफे पर बैठते हुए, अपने अंडरवियर को घुटनो तक नीचे सरका दिया… उसका का लंड जो अभी पूरी तरह से खड़ा नहीं था मेरी आँखों के सामने आ गया… मैंने अपनी नज़रे झुका ली…..

सुशांत: वो मुझे ज़रूरी काम से जाना है थोड़ी देर बाद.. इसीलिए मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है….. चल आजा ज़्यादा टाइम ना लगा….

में: (एक दम से घबराते हुए) क्या….. (में मन में सोचने लगी कि ये क्या तरीका है एक तो बुलाया खुद और अब बिना कोई बात किए सीधा सीधा मुझे ठुकने के लिए कह रहा है.)

सुशांत: चल आ ना वहाँ क्या खड़ी है… चल खोल अपनी सलवार….. अच्छा चल इधर तो आ मेरे पास पहले…….

जैसे ही में सुशांत के पास गयी, सुशांत ने खड़े होते हुए मुझे बाहों में भर लिया…. और फिर अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया…. मैंने हल्का सा विरोध किया.. पर उसके हाथों की गर्मी अपने बदन पर महसूस करके में ढीली पड़ गयी….

उसने मेरे होंठो को चूसते हुए, अपने एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे सलवार का नाड़ा खोलना शुरू कर दिया…. जैसे ही मेरे सलवार का नाड़ा खुला, सुशांत पीछे हट कर सोफे पर बैठ गया. और अपने लंड को हाथ से हिलाते हुए बोला. “चल अब जल्दी कर…” मेरी सलवार ढीली होकर मेरी जाँघो पर आ चुकी थी….

मैंने सर झुकाए हुए पहले अपनी सलवार को निकाला, और फिर पैंटी को उतार दिया…… सुशांत ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया….. में घुटनो को उसकी दोनो जाँघो की तरफ करके उसके ऊपर आ गयी…. सुशांत ने अपने लंड को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया……

में कल रात से सुशांत के मोटे लंड के लिए तरस रही थी….. जैसे ही उसके तने हुए लंड का दहकता हुआ सुपाडा मेरी योनि के छेद पर लगा……. मेरे पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी…… मैंने आगे झुकते हुए, सुशांत के सर को अपनी बाहों में लेते हुए अपनी स्तनों पर दबा दिया…..

में: “अह्ह्ह्ह सुशांत तू साची मेनू गश्ती बना दित्ता है……अह्ह्ह्ह दस में की करा……क्यों तुम मेरे साथ ऐसा कर रहे हो…”

मेरी बात का उसने कोई जवाब नहीं दिया…… और मेरी कमीज़ के ऊपर से मेरे स्तनों को मूह में भर कर नीचे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाला. मेरी योनि पहले से ही पानी छोड़ रही थी….. उसके लंड का सुपाडा मेरी योनि की दीवारों को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा… में मस्ती में एक दम से सिसक उठी “आहह श्ह्ह्ह्ह सुशांत तेरी लंड नी मेरी योनि नू पागल कर छड़िया है हाए ओई होले.”

मैंने भी अपनी योनि को उसके लंड पर दबाना शुरू कर दिया…… और कुछ ही पलों में मेरी योनि उसकी के लंड को निगल गयी…… मेरा पूरा बदन मस्ती में थरथरा कर काँपने लगा….. सुशांत ने मेरी कमीज़ को ऊपर उठाना शुरू कर दिया…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जैसे ही मेरी कमीज़ ब्रा के ऊपर हुई, मैंने खुद ही मदहोश होते हुए, अपने हाथों को पीछे लेजा ते हुए, अपनी ब्रा के हुक्स खोल दिए. और फिर ब्रा के कप्स को ऊपर उठा कर अपना एक स्तन निकाल कर उसके होंठो से भिड़ा दिया.

में: आहह सीईईई सुशांत ले चूस ली अपनी आंटी की स्तन अह्ह्ह्ह मार मेरी योनि….. कल तो आग लगनी पानी छड रही है……..

सुशांत ने भी बिना एक पल देरी किए, मेरी स्तनों को जितना हो सकता था.. मूह में भर लिया….. और चूस्ते हुए, अपनी कमर को हिलाने लगा….. पर मेरा सारा वजन उसकी जाँघो के ऊपर था….. इसलिए वो शॉट नहीं मार पा रहा था… इधर मेरी योनि में आग और भड़क चुकी थी….

मैंने सुशांत के सर को अपनी बाहों में भरकर उसे अपनी स्तनों पर दबाते हुए अपनी गांड को उछालना शुरू कर दिया….. में पागलों की तरह अपनी गांड उछाल उछाल कर अपनी योनि को उसके लंड पर पटकने लगी….. वो भी मस्ती में आकर नीचे से अपनी कमर हिला रहा था…….

में: आहह ठोक अपनी गश्ती नू अह्ह्ह्ह ठोक्द्द मेनू मार ले मेरी योनि हाए ओईए हां में गश्ती बन गेययी हाए ओईई तेरा लंड मेनू जीन नहीं देन्दा आह आ अहह ह सीईईईई सीईईईईई मार्र होर्र ज़ोर दीए मार्र हइईई. तेरा लंड मैं रोज योनि च लेनाआ है हइई ओईई आग लग जाए मेरीए योनि नू..

इसे भी पढ़े – जब सास की चूत में दामाद का लंड घुसता है

में फिर से मदहोश होकर जो मूह में आ रहा था बके जा रही थी… और अपनी गांड को तेज़ी से ऊपर नीचे उछाल कर उसके लंड को अपनी योनि में ले रही थी… में कल रात से तड़प रही थी…… इसीलिए ३-४ मिनिट बाद ही मुझे लगाने लगा कि, में झड़ने वाली हूँ…..

में: हाई सुशांत मार ज़ोर दे मार….. आह देख मेरी योनि वजन लगी हाए चढ़ता पानी मेरी फुददी तो हो गयी में हो गयी मेरी योनि……..

में बिखरकर झड़ने लगी…. सुशांत ने मुझे होंठो से चूसना शुरू कर दिया…. में झड़ कर उसके ऊपर निढाल हो गयी….. पर सुशांत अभी तक नहीं झड़ा था….. “चलो हटो मुझे अभी जाना है…..बाकी फिर किसी दिन तेरी योनि के खबर लेता हूँ” ये कह कर उसने मुझे अपने ऊपर से उठा दिया…..

में: पर तुम्हारा तो अभी तक हुआ नहीं…….

सुशांत: कोई बात नहीं तुझे तो खुश कर दिया ना मेरे लंड ने…..

में सुशांत के बात सुन कर शरमा गयी…. और उसके ऊपर से उठ कर खड़ी हो गयी…. उसका लंड अभी तना हुआ झटके खा रहा था…. पता नहीं मुझे क्यों सुशांत का लंड इतना प्यारा लगने लगा था….. मैंने नीचे बैठते हुए, उसके लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया…

सुशांत ने मुस्कुराते हुए कहा “क्या हुआ.”

पर मैंने उसकी बार का कोई जवाब नहीं दिया…… और अपनी आँखें बंद करते हुए, उसके लंड के मोटे सुपाडे को अपने मूह में भर लिया…. मेरी योनि के पानी का स्वाद मेरे मूह में घुलने लगा….. में झड़ने के बाद एक दम मस्त हो चुकी थी…..

और उसके लंड के सुपाडे को अपने होंठो में दबा दबा कर चूसने लगी “अहह आंटी चूस इसी इसका ख़याल तुझे ही रखना है.” सुशांत ने मेरे सर को दोनो हाथों से पकड़ लिया…….. में कभी उसके लंड के सुपाडे को चुस्ती, तो कभी उसके लंड के सुपाडे पर जीभ घुमाने लगती….

और अपने दोनो हाथों से उसके बॉल्स को सहलाने लगी…… में करीब ५ मिनिट तक उसके लंड को ऐसे ही चुस्ती रही….. और फिर जब मुझे लगा कि, अब सुशांत झड़ने वाला है, मैंने उसके लंड को मूह से बाहर निकाल लिया….. और उसके पेशाब वाले छेद को अपने जीभ के नोक से कुरेदने लगी…….

सुशांत: अह्ह्ह्ह सीईईई आंटी मेरा छूटने वाला है……..

पर में नहीं रुकी, और फिर उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ छूटने लगी… जिससे मेरा पूरा फेस भर गया…..सुशांत का लंड रह रह कर झटके खा रहा था…. जब वो शांत हुआ तो, में खड़ी हुई, और बाथरूम में चली गयी…… अपने आप को साफ करके बाहर आई तो, सुशांत अपने कपड़े पहन चुका था…..

हम दोनो के बीच कोई बात नहीं हो रही थी…… मैने अपनी पैंटी और सलवार पहनी, और सुशांत के साथ बाहर आकर अपने घर के तरफ चली गयी….. जाते हुए सुशांत नी भी कुछ नहीं बोला….. उस दिन के बाद मुझे पता नहीं क्या हो गया…. मुझे अब रोज लंड की ललक लगाने लगी थी…..

जिसके लिए में बेशरम होकर तीन चार बार सुशांत के पास जा चुकी थी…… सुशांत भी मेरी योनि के पूरी तसल्ली करवा देता था….. फिर एक दिन की बात है, मौसम बहुत ठंडा था…… उस दिन भी सनडे था…… और मेरी योनि में सुबह से खुजली होने लगी थी….. मैंने सुशांत को फोन किया……. पर सुशांत ने इस बार मुझे साफ इनकार कर दिया……

उसके इस इनकार के कारण में एक दम से तड़प उठी, ऐसे ही दो तीन तक चला. पर सुशांत ने मुझे इनकार करना जारी रखा….. आखिर एक दिन में अपनी योनि की आग से मजबूर होकर उसके घर पहुँच गयी…. जब में और सुशांत रूम में आई, तो में सुशांत से पागलों के तरह चिपक गयी…. और उसके पूरे चेहरे पर चुंबनों की बौछार कर दी…..

में: सुशांत तुम क्यों मुझे तड़पा रहे हो……. पहले तुमने खुद ही मेरी योनि में आग लगाई. अब तुम पीछे हट रहे हो.. तो तां मेनू कमली कर देता….. दस की करा में…..

सुशांत: आंटी आप यहाँ से चली जाओ…. अब मुझे तुम से कुछ लेना देना नहीं है..

में: (सुशांत की ये बात सुन कर में गुस्से में आ गयी) क्यों लगता है उस गस्ति मधु से तेरी सुलह हो गयी है…… सुशांत मैंने पहले भी कहा था कि, वो तुम्हारी जिंदगी खराब कर देगी…..

सुशांत: और तुम? तुम क्या कर रही हो?

सुशांत की ये बात सुन कर में एक दम से चुप हो गई…… पर अब में उसके लंड की इस कदर दीवानी हो चुकी थी कि, में उसे इस तरह खोना नहीं चाहती थी.

में: फिर आखिर तुम चाहते क्या हो….. क्यों मेरे अरमानों के साथ खेला…

सुशांत: वेट वेट में कहाँ खेला तुम्हारे अरमानों के साथ…. साफ साफ क्यों नहीं कहती जब योनि की आग ठंडी नहीं होती तो तुम्हें मेरे याद आती है….

में: सुशांत तुम समझ नहीं रहे………. में नहीं रह सकती तुम्हारे बिना…..

सुशांत: ओह्ह भूल जाओ मुझे……. मेरे आगे मेरे सारी जिंदगी पड़ी है…. मुझे अपने बारे में भी सोचना है…. तुम कब तक मेरा साथ दोगी….

में: सुशांत में सारी उम्र तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूँ…. तुम जैसे कहोगे में वैसे करने को तैयार हूँ……

सुशांत: हम्म अच्छा…. जैसे में कहूँ….. वैसा तुम करोगी?

में: हां एक बार बोल कर तो देखो……

इसे भी पढ़े – कुंवारे लंड का सुपाड़ा खोला भाभी ने

सुशांत: ठीक है तो फिर सुनो…. में और रश्मि एक दूसरे से प्यार करते है…. अगर तुम मुझे चाहती हो तो, मेरी शादी रश्मि से करवा दो….

में: सुशांत मैंने पहले भी तुमसे कहा था कि, तुम रश्मि से दूर रहोगे… उसकी तरफ देखने की सोचना भी मत…. अर्रे तुम हो कौन जो उसके साथ शादी करने के ख्वाब देख रहे हो….

सुशांत: क्यों …! क्या कमी है मुझ मे…… सब कुछ तो है… कुछ महीनो बाद मुझे गवर्नमेंट जॉब मिल जाएगी… दिखने में भी ठीक ठाक हूँ….. और मेरे लंड का तो तुझे पता ही है…… खुश रखूँगा तेरे बेटी को और साथ में तुझे भी….

में: नहीं सुशांत ये नहीं हो सकता…..

सुशांत: ज़रा सोच जब में तुम्हारी और तुम्हारी बेटी की योनि को एक साथ ठोकूंगा. तो मज़ा दुगना हो जाएगा…. और अगर तू सोचती है कि ऐसा नहीं हो सकता तो, मुझे भूल जा…… और हां ये बात याद रखना, कि रश्मि आज भी मुझे उतना ही प्यार करती है…… तू कैसे भूल गये कि, उसकी योनि के सील भी मैंने तोड़ी है…… और वो भी तेरी तरह मेरे लंड के दीवानी है…….

सुशांत: चल अभी मुझे काम पर जाना है…… अगर तू मेरी शादी रश्मि से नहीं करवा सकती तो मुझे भूल जा…..

में सुशांत की बातें सुन कर बहुत परेशान हो गई….. मैंने मन ही मन फैसला कर लिया था……. कि चाहे कुछ भी हो जाए….. में रश्मि की शादी उससे नहीं होने दूँगी……….. में घर वापिस आ गयी, और अपने मन को समझा कर आगे की जिंदगी के बारे में सोचने लगी…… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कुछ दिन और बीत गये…… पर मेरी योनि की आग मुझे जीने नहीं दे रही थी, में अक्सर रात को सुशांत के लंड के बारे में सोचते हुए, अपनी योनि में उंगली करती, पर आग शांत होने की बजाए……. और भड़क उठती…….. एक दिन में ऊपर छत पर बैठी धूप सेंक रही थी……

छत पर आगे की तरफ एक रूम था…. जिसमे अली नाम का आदमी अपनी नयी नयी पत्नी नगमा के साथ रहता था. उनकी शादी को अभी तीन महीने हुए थे….. मुझे उनके रूम से नगमा के सिसकने के आवाज़ आ रही थी….. रूम के एक साइड में विंडो थी……

जो बारिश के पानी से भीग कर थोड़ी खराब हो गयी थी…… और उसमे जगह जगह दरार पड़ गयी थी……. में अपने आप को रोक ना पे, और विंडो के पास जाकर दरार में अंदर झाँकने लगी…… अंदर का नज़ारा देख मेरे पूरे बदन में आग लग गयी…. अंदर अली बेड के किनारे नीचे खड़ा था… और नगमा बेड पर घोड़ी बनी हुई सिसियाँ रही थी…..

नगमा: जी गांड में मत डालिए…. बहुत दर्द होता है..

अली: चुप कर साली क्यों नौटंकी कर रही है……… तेरी गांड को पिछले दो महीनों से मार रहा हूँ.. और अभी तक तुझे गांड में लंड लेने से दर्द होता है. में नहीं मानता…….

नगमा: सच कह रही हूँ…….

अली ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, और अपने लंड पर तेल लगाकर, अपने लंड के सुपाडे को उसकी गांड के छेद पर भिड़ा दिया… नगमा एक दम सिसक उठी. “ओह्ह जी धीरे धीरे मारना……” अली ने अपने लंड को नगमा की गांड के छेद पर दबाना शुरू कर दिया. मेरे देखते ही देखते, अली का पूरा लंड नगमा की गांड में समा गया…..और अली ने अपना लंड नगमा की गांड के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया……

नगमा: जी और ठोकिए… आह बहुत मज्जा आ रहा है…

नगमा भी अब अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलनी लगी थी. में ये सब देख कर बहुत हैरान थी, कि आदमी औरत की गांड भी मारते है, और उससे ज्यादा हैरान नगमा पर थी, जो पहले दर्द से कराह रही थी…. अब अपनी गांड को पीछे की तरफ फेंक फेंक कर अली का लंड गांड में ले कर मज़े कर रही थी…. ये सब देखते हुए मेरी बुरी हालत हो गयी……

में फौरन नीचे आ गयी……. अपने रूम को अंदर से लॉक किया…. तेज़ी से अपनी सलवार खोली, फिर सलवार के साथ साथ अपनी पैंटी को भी नीचे सरका दिया. मैंने अपनी योनि पर अपनी उंगलियाँ घुमाना शुरू कर दिया….. मेरी योनि इतनी गीली हो चुकी थी, कि कुछ ही सेकेंड्स में मेरी उंगलियाँ भी पानी से सन गयी.

पर मेरी योनि में सरसराहट और बढ़ती जा रही थी….. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि, में अपनी योनि में हो रही खुजली को कैसे शांत करूँ… में बेड पर गिरते हुए लेट गयी….. मेरे बदन में आग लगी हुई थी….. रह रह कर मुझे सुशांत के याद सता रही थी….. उसके साथ बिताए हुए हर पल मेरी आँखों के सामने घूमने लगा था……..

मेरे ज़हन में उसकी कही बातें घूमने लगी…… में उन सब बातों में उलझ कर रह गयी थी…. में मन मार कर बाहर आ गयी… मैंने देखा रश्मि अपने रूम में उदास सी लेटी हुई थी……… जब से सुशांत यहाँ से गया था, वो बेहद उदास थी…. में उसके पास गयी, और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए.

इसे भी पढ़े – ददुआ अपनी ही माँ को चोदने लगा

में: क्या हुआ बेटा उदास क्यों हो…..

रश्मि: (रूखे अंदाज़ में) कुछ नहीं……

में: देख रश्मि में कई दिनो से देख रही हूँ….. तू बहुत उदास रहती हो… बेटा मैंने जो किया वो तुम्हारे भले के लिए ही किया है…… सुशांत तुम्हारे लायक नहीं है….

रश्मि: (एक दम से रश्मि की आँखों में आँसू आ गये) माँ में उससे प्यार करती हूँ……. में नहीं रह पाउंगी उसके बिना……..

में: (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए) चुप कर, तू जानती क्या है उसके बारे में… तुझे पता है, वो जो मधु आंटी आई थी, उसकी साथ वो कौन थी…..

रश्मि: (सुबकते हुए) हां जानती हूँ माँ…… सब जानती हूँ……. सुशांत ने मुझे सब बताया था…… उनके बीच में जो होता था……

में: (रश्मि की बात सुन कर जैसे मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गयी) फिर भी तू उससे प्यार करती है…. तू ये कैसे कर सकती है….

रश्मि: मुझे नहीं पता माँ….. उसने मुझे सच तो बताया ना….. तुम ही बताओ कौन अपने ऐसे राज़ किसी को बताता है…… में अगर शादी करूँगी तो उससे ही करूँगी, नहीं तो में जहर खा कर मर जाऊंगी……

में: तू पागल हो गयी है रश्मि….

रश्मि: हां में पागल हूँ, उसके प्यार में पागल…… अब जब में उसे अपना सब कुछ दे चुकी हूँ, तो कैसे किसी और के साथ शादी कर लूँ. तुम ही बताओ माँ….

मैंने चुप कर बाहर आना ही ठीक ही समझा……. हमारी जिंदगी में ऐसा तूफान आया था. जो थमने का नाम ही नहीं ले रहा था….. रश्मि से मेरी अगले दो दिन तक बात ही नहीं हुई…. रश्मि ने दो दिन से कुछ नहीं खाया था…. वो मेरे सामने अंदर ही अंदर घुट रही थी…….

में अपनी हालत से इतना मजबूर हो गयी थी, कि आखिर मैंने सोच ही लिया कि, अब रश्मि को ही अपनी जिंदगी का फैसला लेने दूं….. आख़िर सुशांत भी ठीक ही कह रहा था…….. उसमे कोई कमी भी नहीं थी….. में रश्मि के रूम में गयी, तो उसने मुझे देख कर फेस घुमा लिया…. मैंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा “रश्मि नाराज़ हो अपनी मम्मी से” रश्मि ने कुछ नहीं बोला……

में: चल उठ कर खाना खा ले.

रश्मि: मुझे भूख नहीं है……

में: तूने कल से कुछ नहीं खाया बेटा बीमार पड़ जाएगी…..

रश्मि: मर भी जाऊँ तो उससे आपको क्या फर्क पड़ता है…

मैंने रश्मि को पकड़ कर अपने गले से लगा कर “ना बेटा ऐसा नहीं बोलते. तुझसे पहले में ना मर जाऊं…. तू सुशांत से शादी करना चाहती है ना…. जा कर ले. मुझे कोई एतराज नहीं…. पर अगर सुशांत ने तुझसे शादी करने के लिए मना कर दिया तो. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

रश्मि: (रश्मि को तो जैसे मेरी बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था…) क्यों नहीं करेगा….. वो भी मुझसे प्यार करता है……

में: चल ठीक है, जैसे तू कहेगी में राज़ी हूँ……

रश्मि मेरे बात सुन कर एक दम से उछल पड़ी…. और बेड से उतरते हुए बाहर जाने लगी… “अर्रे कहाँ जा रही है….खाना तो खा ले…….”

रश्मि: माँ सुशांत को फोन करने जा रही हूँ…. बाद में खाना खाती हूँ..

रश्मि मेरे रूम में फोन करने चली गयी……. में वही उसके रूम में बैठी सोचने लगी कि, क्या जो में कर रही हूँ , वो सही है या ग़लत…. पर इन सब सवालों के जवाब मेरे पास भी ना थे…. रश्मि करीब १५ मिनिट तक सुशांत से फोन पर बात करती रही थी…..

और जब वो मेरे रूम में आई तो, उसका चेहरा उतरा हुआ था….. उसके आँखें आँसू से भरी हुई थी….. वो मेरे पास आई, और फिर मेरे गले लग कर रोने लगी….. में उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी……. पर वो बेसूध रोए जा रही थी…. “आख़िर हुआ क्या है बता तो सही….”

रश्मि: (रोते हुए) माँ तुमने तुमने ऐसा क्यों किया मेरे साथ?

में: क्या हुआ मैंने क्या क्या बता तो सही…..

रश्मि: माँ मुझे सुशांत ने सब बता दिया है….. तुम उससे मिलने जाती थी ना…

इसे भी पढ़े – नई सलहज बिलकुल मस्त छमिया माल है

रश्मि की बात सुन कर मेरे होश उड़ गये……. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि, उसने सब रश्मि को बता दिया था…. “अर्रे में तो वैसे ही गयी थी उससे मिलने के लिए सच.”

रश्मि: (मुझे अपने दूर धकेलते हुए) झूठ मत बोलो….. तुम बहुत गंदी हो…. अपनी बेटी की उम्र के लड़के के साथ छि….. तुमने मेरा सब कुछ लूट लिया माँ……

में: (में रश्मि के सामने एक दम शर्मिंदा हो गयी) पर उसने कहा क्या?

रश्मि: अब मुझे सब बताना पड़ेगा क्या….

में कुछ ना बोल पाई, और उसके रूम से बाहर आकर अपने रूम में आ गयी… गुस्से से मेरे हाथ पैर काँपने लगे….. मैंने सुशांत को फोन लगाया.

सुशांत: हेलो…..

में: हरामजादे आखिर दिखा ही दी ना तूने अपनी औकात…..

सुशांत: हेलो तमीज़ से बोलो…….

में: अब तू मुझे तमीज़ सिखाएगा…… मैंने सोचा था कि, अगर तुम्हारी शादी रश्मि के साथ कर दूं, तो तू शायद सुधर जाए….. पर कुत्ते के पूंछ कभी सीधी नहीं होती….. में ये भूल गयी थी… क्या कहा तूने रश्मि को…

सुशांत: मैंने क्या कहा.. मैंने तो सिर्फ़ इतना कहा था कि, हम सुहागरात तीनों साथ मिल कर मनाएंगे…….

में: घिन आती है मुझे तुम्हारी सोच पर…….. तुमने एक बार भी रश्मि के बारे में नहीं सोचा…… वो पागलों की तरह तुमसे प्यार करती है… भूखी रह कर जान देने पर तुली हुई थी……. और तू छि…… तू तो आदमी के नाम पर भी कलंक है……..

सुशांत: तो में कौन सा रश्मि से प्यार नहीं करता…….. में भी तो उससे प्यार करता हूँ……. बस फर्क ये है कि, में तुम दोनों से एक जैसा प्यार करता हूँ…… अब जो मेरे दिल में है मैंने उससे कह दिया….. बाकी तुम लोग सोचो क्या करना है क्या नहीं करना है…….

में: सही हुआ जो वक़्त रहते तूने अपनी औकात दिखा दी….

सुशांत: मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है ! तुम सोचो क्या करना है…..

ये कहते हुए उसने फोन रख दिया….. में वही बैठे रोने लगी…. पता नहीं कब दोपहर हुई कब शाम और कब रात….. में और रश्मि अपने अपने कमरों में रोती रही….. करीब ८ बजे मेरे रूम के डोर पर नॉक हुआ, मैंने डोर खोला, तो देखा सामने रश्मि खड़ी थी……. उसके हाथ में खाने की प्लेट थी…. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

रश्मि: माँ खाना खा लो……

में: (अपने आँसू को साफ करते हुए) तुमने खा लाया….

रश्मि: नहीं थोड़ी देर बाद खा लूँगी….

में: अच्छा चल खाना अपने रूम में लेकर चल… साथ में खाना खाते है.

रश्मि प्लेट लेकर अपने रूम में चली गयी……. में बाथरूम में गयी….. और सोचने लगी कि, शायद रश्मि समझ चुकी है, कि सुशांत उसके लायक नहीं है… उसकी सच्चाई अब रश्मि की आँखों के सामने आ चुकी थी…. मेरे मन का बोझ थोड़ा सा हल्का हुआ….

में फ्रेश होकर बाहर आई, और रश्मि के रूम की तरफ जाने लगी. मेरे नज़र मेरे रूम में गयी….. रश्मि फोन पर किसी से बात कर रही थी. में सीधा रश्मि के रूम में चली गयी…. थोड़ी देर बाद रश्मि रूम में आ गयी, और मेरे सामने बेड पर बैठ कर खाना खाने लगी……. “किससे बात कर रही थी.”

रश्मि: (मेरी तरफ देखते हुए) सुशांत से…..

में: अब सुशांत से बात करके क्या करना है तुझे……..

रश्मि: माँ वो में तुमसे कहना चाहती थी कि.

में: हां बोल ना क्या कहना चाहती थी तू…

इसे भी पढ़े – अपनी बहन के भोसड़े में लंड घुसते देखा

रश्मि: माँ मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है…… में उस बात को लेकर आप से बिलकुल भी नाराज़ नहीं हूँ कि, सुशांत के साथ आप ने क्या किया…… और मुझे आगे भी कोई एतराज नहीं होगा अगर मुझे सुशांत को आपके साथ शेयर करना पड़े…..

रश्मि की ये बात सुन कर खाने का निवाला मेरे गले में ही अटक गया. में एक टक हैरान होते हुए, रश्मि को घुरे जा रही थी… रूम में खामोशी से छा गयी थी……… रश्मि नीचे अपनी प्लेट में देख रही थी…..

में: रश्मि तू होश में तो है ? ये क्या बके जा रही है…….

रश्मि: (घबराई हुई आवाज़ में)हां माँ में होश में हूँ… मैंने देखा है आपको तड़पते हुए….. मुझे सब मंजूर है माँ…..

में: (खाने की प्लेट एक साइड में रखते हुए) तू पागल हो गयी है…. पता नहीं उसने तेरे दिमाग़ में क्या भर दिया है….

रश्मि: प्लीज़ मान जाओ ना माँ……. में नहीं जी पाउंगी, उसके बिना. बोलो तुम उससे प्यार नहीं करती……

में: अब में तुम्हें कैसे समझाऊँ रश्मि….. ऐसा नहीं होता है….

रश्मि: प्लीज़ माँ मान जाओ, ना मेरी खातिर…… हम दोनों आपको बहुत खुश रखेंगे…….

में: मुझे कुछ वक़्त चाहिए सोचने के लिए……

रश्मि: (मेरे गाल को चूमते हुए) आइ लव यू मोम…….

मैंने खाना खाया, और अपने रूम में चली गयी….. में इस बारे में रात भर सोचती रही…… फिर सुबह हुई तो, में अपने रूम से बाहर आई. तो देखा रश्मि पहले से उठ कर नहा चुकी थी……. और खाना बना रही थी…

में: अर्रे वाह आज इतनी सुबह सुबह कैसे उठ गयी…..

रश्मि ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया….. में बाथरूम में गयी, और नहा धो कर वापिस आ गयी……. रश्मि नाश्ता लगा चुकी थी…. हम ने साथ में नाश्ता किया, और फिर में बर्तन उठाने लगी……. दोस्तों आज के ल;इए इतना ही आगे क्या हुआ जाने के लिए पढ़ते रहिये हमारी वासना डॉट नेट.

ये Mast Chudai XXX Story आपको पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और Whatsapp पर शेयर करे………….

Related posts:

  1. प्यासी औरत को संतुष्ट किया स्वामी ने 1
  2. भिखारी बाबा का लंड बहुत बड़ा था
  3. रंडी को बुलाया लंड की गर्मी निकालने को
  4. बाथटब में चोदा मोहल्ले की चुदासी लड़की को
  5. शादीशुदा लड़की की कुंवारी गांड कैसे चोदी
  6. रंडी लड़की से प्यार हो गया मुझे

Filed Under: Hindi Sex Story Tagged With: Blowjob, Boobs Suck, Hardcore Sex, Hindi Porn Story, Horny Girl, Kamukata, Mastaram Ki Kahani, Non Veg Story, Sexy Figure

Reader Interactions

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Primary Sidebar

हिंदी सेक्स स्टोरी

कहानियाँ सर्च करे……

नवीनतम प्रकाशित सेक्सी कहानियाँ

  • माँ को नए पापा से गांड मरवाते देखा
  • Hot Student Ki Chut Ki Garmi Utari
  • शिकारी के जाल में फंस गई माँ बेटी 2
  • Meri Bahan Ki Virgin Chut Chodi
  • बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 2

Desi Chudai Kahani

कथा संग्रह

  • Antarvasna
  • Baap Beti Ki Chudai
  • Bhai Bahan Sex Stoy
  • Desi Adult Sex Story
  • Desi Maid Servant Sex
  • Devar Bhabhi Sex Story
  • First Time Sex Story
  • Girlfriend Boyfriend Sex Story
  • Group Mein Chudai Kahani
  • Hindi Sex Story
  • Jija Sali Sex Story
  • Kunwari Ladki Ki Chudai
  • Lesbian Girl Sex Kahani
  • Meri Chut Chudai Story
  • Padosan Ki Chudai
  • Rishto Mein Chudai
  • Teacher Student Sex
  • माँ बेटे का सेक्स

टैग्स

Anal Fuck Story Bathroom Sex Kahani Blowjob Boobs Suck College Girl Chudai Desi Kahani Family Sex Hardcore Sex Hindi Porn Story Horny Girl Kamukata Kunwari Chut Chudai Mastaram Ki Kahani Neighbor Sex Non Veg Story Pahli Chudai Phone Sex Chat Romantic Love Story Sexy Figure Train Mein Chudai

हमारे सहयोगी

क्रेजी सेक्स स्टोरी

Footer

Disclaimer and Terms of Use

Privacy Policy

HamariVasna - Free Hindi Sex Story Daily Updated