Young Girl First Sex Story
जब मैं घर पहुँचा तो देखा घर पर ताला पड़ा हुआ है। बगल में रहने वाले वर्मा जी के साथ हमारा खूब अच्छे ताल्लुकात थे, तो उनके घर चला गया। ये पूछने के लिए कि शायद मम्मी ने वहाँ चाबी छोड़ रखी होगी। उनकी बेटी उन्नति मुझसे हमेशा झगड़ी थी। मुझे देखकर बोली, “क्या हुआ, आज आपका चेहरा उतरा हुआ क्यों है?” मुझे गुस्सा आ रहा था। Young Girl First Sex Story
मैंने कहा, “तुझे देखा नहीं था ना इसलिए।”
“अब चल देख भी ली, चेहरा खिल जाएगा। तू घर के अंदर जा और मेरे घर की चाबी ले आ।”
वो चीखकर बोली, “क्या मैं तेरी नौकरानी हूँ?”
मैंने उससे बातें करना ही ठीक नहीं समझा और उनके घर के अंदर घुस गया। “आंटी आंटी” पुकारने लगा।
तभी वो पीछे आती हुई बोली, “अरे अरे हमारे घर में ऐसे क्यों घुस जाता है? घर में अकेली जवान लड़की है, कुछ ऊँच-नीच हो गया तो?”
तभी मुझे पता चला कि उनके घर पर भी कोई नहीं है।
मैंने फिर से पूछा, “मम्मी ने घर की चाबी यहाँ छोड़कर गई है क्या?”
तो मुँह फुलाते हुए उन्नति चाबी लाकर मेरे हाथों में डालकर चली गई।
मैं अपने घर पर आ ही रहा था कि पीछे से बोली, “आंटी आज नहीं आएँगी?”
“मम्मी के साथ बड़ौदा चली गई, बोलकर गई है कि रात का खाना कहीं बाहर खा लेना।”
मैं थोड़ा रुक गया और बोला, “तू क्या खाएगी रात को?”
तो वो बड़े प्यार से बोली, “तू है ना, जो भी लाएगा खाऊँगी ना?”
हँसते हुए बोला, “चलो बाजार में आज करेला सस्ता है, करेले की करी, करेले का फ्राई और करेला वाला फ्राइड राइस ले आऊँगा?”
वो चिल्ला रही थी। मैं हँसते हुए अपने घर पर चला आया। बहुत दिनों के बाद आज घर पर कोई नहीं था। मैं घर में घुसते ही कंप्यूटर ऑन कर दिया और ब्लू फिल्म लगाकर देखने लगा। अपने लौड़े को हाथ में लिए हुए हिलाता रहा। फिर तभी बाथरूम में जाकर ज़ोर-ज़ोर से हिलाकर लौड़े से पानी निकाल दिया। जब मैं कमरे में लौटा तो नज़ारा बदल चुका था।
कंप्यूटर के सामने बड़ी मुँह खोलकर उन्नति खड़ी थी। मैं क्या कहूँगा या करूँगा सोचे बगैर ही दौड़ता हुआ गया और कंप्यूटर की स्विच ऑफ कर दिया। उन्नति मुझे देखती रही फिर बोली, “तू ये क्या सब देख रहा है? घर में आंटी नहीं है तो तू जो मर्जी करेगा। चल आंटी को आने दे बोलती हूँ।” और वो घर से निकलकर चली जा रही थी। मैं पीछे से गया और उसके हाथ को पकड़कर अंदर खींच लिया।
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“उन्नति, तू क्या पागल है?”
मैंने कहा। “तू क्या कहेगी मम्मी से कि मैं ब्लू फिल्म देख रहा था? मम्मी क्या सोचेगी कि तू भी मेरे साथ ही देख रही थी। छी कितनी बदनामी होगी तेरी।”
उन्नति ने मेरी ओर देखा और कहा, “मैं कहाँ देख रही थी?”
तो मैंने कहा, “नहीं देख रही थी तो तुझे कैसे पता चला?”
उन्नति कुछ बोलने वाली थी फिर रुक गई और बोली, “तू गया, तेरा अब कुछ नहीं हो सकता, बिगड़ गया रे तू।”
उन्नति अभी 12th खत्म करके कॉलेज में गई थी। मैं अभी इंजीनियरिंग के दूसरे साल में था। वैसे बचपन से ही हमारा घर पास-पास रहने से हममें तू-तू मैं-मैं चलता रहता था। उन्नति बहुत ही सेक्सी लड़की थी। मैंने कई बार उसको देखते हुए मुठ भी मारी थी। मेरे पड़ोस में रहने के कारण मैं उसे हमेशा देखता था। कई बार उसे नंगी देखा हूँ। लेकिन कभी उसको चोदने के बारे में सोचा नहीं था।
उन्नति को देखकर बोला, “देख उन्नति ये सब नॉर्मल है। मेरी उम्र में लड़के ऐसी चीजें देखते हैं, नहीं तो कैसे सीखेंगे?”
उन्नति बोली, “अच्छा, तो तू सीखने के लिए ये सब देख रहा था? झूठा। मैं जानती हूँ तू रोज ये सब देखता होगा।”
“अरे तो क्या हुआ, जितना देखूँगा उतना सीखूँगा ना। और फिर ये तो सब लोग करते हैं, तो इसमें बुराई क्या है?”
वो बोली, “छी, तू अपना दोष छिपाने के लिए सबको दोषी बना रहा है।”
मैं हँसते हुए कहा, “अच्छा तो ये कोई नहीं करता? अगर ऐसा होता तो ना तू होती ना मैं होता। समझा, तेरे मम्मी-पापा, मेरे मम्मी-पापा सब ये चीज करते हैं।”
उन्नति को समझ में नहीं आ रहा था, बोली, “झूठ मत बोल।”
मैंने कहा, “तो ठीक है, जब तेरे मम्मी-पापा सो जाएँ, तो उनके कमरे के पास जाकर सुनना, तुझे ऐसी आवाज ज़रूर सुनाई देगी।”
वो बोली, “हाँ मैंने ऐसी आवाज सुनी तो है, लेकिन फिर वे बड़े लोग हैं, तू तो अभी बच्चा है, तुझे क्या ज़रूरत ये सब देखने की।”
अब उन्नति को समझाना मुश्किल था।
मैंने कहा, “अच्छा हा, जैसे कि तू सब कुछ जानती है? बता कंप्यूटर में वो दोनों लड़के-लड़कियाँ क्या-क्या कर रही थीं और क्यों?”
वो बोली, “मैंने कहाँ देखा उन्होंने क्या किया क्या नहीं।”
मैंने कहा, “झूठ मत बोल, कंप्यूटर के सामने खड़ी होकर बड़ी-बड़ी आँखें करके सब कुछ देख रही थी तू।”
वो मुझसे फिर भी बहस करना चाहती थी, तभी मैंने फिर से कंप्यूटर चालू कर दिया। वो उठकर चली जा रही थी, मैंने उसके हाथ पकड़ लिया और बोला, “कहाँ जाती है, बैठ इधर और देख इसे, कहाँ ये सब बुरा है बता?”
उन्नति ने जैसे ही वो फिल्म देखना शुरू किया, उसकी आँखें बड़ी हो गईं। तभी फिल्म में हीरो ने हीरोइन को किस किया, तो मैंने कहा, “इसमें क्या बुराई है? हिंदी फिल्मों में तो सब किस करते हैं।”
तभी हीरो ने हीरोइन को नंगा कर दिया। उसे देखकर उन्नति शर्मा गई। और उसके दूध को चूमने लगा। चूसने लगा। तब मैंने देखा उन्नति की आँखों में कुछ चमक आ गई है। मैंने पूछा, “कैसा लग रहा है?” वो मेरी ओर देखी ही नहीं। उठकर चली जा रही थी, फिर मैंने उसे रोक लिया, बोला, “चल बैठके देखते हैं। डरती क्यों है, आज घर पर कोई नहीं है, किसी को पता नहीं चलेगा।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो रुक गई, पर नीचे ही देखती रही। मैंने उसके चेहरे को हाथ में लेकर ऊपर उठाया और बोला, “ज़मीन क्यों देखती है, फिल्म देख, सीख मिलेगी। कैसे अपने पति को खुश कर पाएगी वो सीख मिलेगी।”
तो वो तुरंत बोली, “पति को खुश करने के लिए ये सब करना पड़ेगा?”
मैंने कहा, “और नहीं तो क्या, खाली खाना पकाने से कोई पति सुखी नहीं होता।”
वो हँसते हुए बोली, “तो ये कौनसा बड़ा काम है, कर लूँगी।”
मैंने कहा, “कर लेगी? चल करके दिखा?”
वो चौंक गई और मेरी ओर देखने लगी तो मैंने कहा, “अरे देखती क्या है, दिखा कैसे ये सब करेगी।”
वो बोली, “तेरे सामने क्यों करूँ?”
“और कोई है यहाँ जिसके सामने तू ये सब करेगी?” मैंने पूछा।
“देख वो हीरोइन फिल्म में जैसे-जैसे करती है तू भी करके दिखा, तो मैं मान जाऊँ।”
उन्नति चुप हो गई और बोली, “घर पर चाबी नहीं डाला है, अब मैं चलती हूँ।” और वो उठकर चली गई।
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मैंने कंप्यूटर बंद किया और फ्रेश होकर शाम के खाने के लिए बाजार निकला। उन्नति के घर गया तो दरवाजा खुला था। अंदर गया तो वो बैठकर टीवी देख रही थी। उसके पास बैठकर उसे चिढ़ाने लगा।
बोला, “अच्छा तो तेरे ये साधे गले टीवी सीरियल अच्छे हैं, लेकिन वो मेरा साफ-सुथरा मूवी अच्छा नहीं।” वो कुछ नहीं बोली।
तो मैंने पूछा, “क्या खाएगी रात को?”
वो बोली, “मुझे पराठे खाने हैं और उसके साथ पंजाबी सब्जी एवं पिज़्ज़ा।”
मैंने कहा, “मैं तेरा पति नहीं हूँ जो ऑर्डर देती है, चल खाना है तो साथ में चल होटल में खाएँगे और घर लौट आएँगे। वरना भूखे ही सोएगी तू आज।”
उन्नति बोली, “चलेगा, घर में बिस्किट है खा लूँगी और पानी है बहुत।”
तभी मैं उठकर बाजार निकल ही रहा था कि आंटी का फोन आ गया। उन्होंने मुझे कहा कि उन्नति के लिए खाने का बंदोबस्त कर देना, और रात को उनके ही घर पर सो जाना। वही बात उन्होंने उन्नति को भी बोल दी।
फोन रखने के बाद उन्नति बोली, “मुझे अकेले सोना है, तुम अपने घर पर सोना।”
वो आज मुझे तू से तुम बोल रही थी।
मैंने कहा, “नहीं आंटी ने कहा है तो करना ही पड़ेगा, वरना वो क्या सोचेंगी। वैसे तेरी मर्जी, देख ले, अगर अकेले रह पाएगी तो सही है, वरना आ जाना मेरे घर पर, वहाँ भी जगह है बहुत तेरे लिए। पम्मी (हमारा डॉगी) के पास सो जाना।”
मैं बाजार निकल पड़ा। मैंने खाना खा लिया और उन्नति के लिए खाना लेकर उसके घर पर लौटा। उससे अपने घर की चाबी लेते हुए कहा, “अब तू तो नहीं खाएगी, मैं ये खाना ले तो आया था, वैसे रहने दे, पानी ही खाएगी।” और मैं अपने घर पर आ गया।
मैंने ड्रेस चेंज करके हाफ पैंट और टी-शर्ट डाल दी, और बैठकर कंप्यूटर पर फिर से ब्लू फिल्म देखने लगा। मैं बैठकर वही देख रहा था कि तभी उन्नति आकर दरवाजे पर नॉक करने लगी। मैंने फिल्म बंद कर दिया और बाहर जाकर दरवाजा खोला, तो वो अंदर आ गई।
उन्नति ने नाइट सूट पहन रखा था, शायद अंदर ब्रा नहीं पहनी होगी, उसकी दोनों चुचियाँ तीर की तरह छाती से ऊपर उठती हुई नज़र आ रही थीं। मैंने दरवाजा खोला तो वो सीधे अंदर आकर किचन में घुस गई और खोजने लगी, तो मैंने कहा, “फ्रिज में ऊपर है खाना।”
वो बैठकर खाना खाने लगी, तो मैंने उसे पानी का ग्लास भी दिया। वो बहुत जल्दी में थी लगता था। उसने खाना खाने के बाद मुँह-हाथ धो डाला और सोफे पर बैठ गई।
मैंने उसे चिढ़ाते हुए कहा, “तेरा खाना खत्म हो गया ना अब तू जा अपने घर। तुझे तो अकेले ही रहना है ना। जा मुझे बैठकर शांति से मूवी देखने दे।”
वो बोली, “मुझे अकेले में डर लगता है।”
तभी मैंने तुरंत ही कह दिया, “यहाँ मेरे साथ रहना है तो चुपचाप रहना, मैं तो ब्लू फिल्म देखूँगा ही, तुझे देखना है तो आ जा, नहीं तो यहीं सोफे पर सो जाना।”
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मैं अपने कमरे में चला गया। और कंप्यूटर पर बैठकर ब्लू फिल्म देखने लगा। और बाहर की ओर देख रहा था। उन्नति बैठकर टीवी देख रही थी और थोड़ी-थोड़ी देर में मेरे कमरे की ओर देख रही थी। थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम चला गया मुठ मारने के लिए। बाथरूम की पानी की पाइप खुला करके मैं मुठ मार रहा था, और अपने कमरे को देख रहा था।
दरवाजे पर मैंने होल की हुई थी, उन्नति आकर कंप्यूटर को देखने लगी और फिर चुपचाप अपने कमरे में चली गई। मुठ मारके मैं बाथरूम से बाहर आया और ब्लू फिल्म बंद करके टीवी वाली कमरे में आ गया। उन्नति के पास बैठकर इधर-उधर की बातें करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन्नति बहुत ही सीरियस लग रही थी, मैंने ऐसे ही पूछ लिया, “तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?”
वो चिढ़कर बोली, “बॉयफ्रेंड किसलिए?”
मैंने कहा, “बॉयफ्रेंड क्यों होते हैं तुझे पता नहीं?”
वो बोली, “नहीं।”
मैंने कहा, “तभी तो तुझे बोला था कि चल मूवी देखते हैं, अब देखती तो समझ में आता ना। तू तो ऐसे बिहेव कर रही है मानो मैं कोई पाप कर रहा हूँ।”
“मेरे कॉलेज में तो हर कोई लड़की-लड़का बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बनकर फिरते हैं और ज़िंदगी के मजे लूटते हैं।”
उन्नति बोली, “हाँ हाँ वो सब गंदी-गंदी चीजें करते होंगे।”
“तुझे कैसे पता?”
मैंने तुरंत ही पूछा तो वो बोली, “हाँ हमारे क्लास में भी कई लड़कियाँ जो ये सब करती हैं।”
मैंने कहा, “तो क्या हुआ, मजा तो आता है ना? क्या तुझे कभी ये सब करने का मन नहीं करता?”
वो मेरी ओर देखती रही, फिर नीचे देखने लगी।
मैंने कहा, “तुझे अगर नींद आ रहा है तो चल सो जा। कहाँ सोएगी, यहाँ सोफे पर? तुझे डर तो नहीं लगेगा ना?”
वो बस मुझे देखती रही। मैंने उसके गाल पर धीरे से हाथ फेरते हुए कहा, “कहाँ खो गई?” वो कुछ नहीं बोली तो मैंने उसके गाल पर एक छोटा सा चुमा दे दिया और गुड नाइट कहके वहाँ से अपने कमरे में चला आया। कंप्यूटर पर बैठकर मेल चेक करने लगा ही था कि उन्नति चली आई। और मेरे पास बैठकर बोली, “क्या तू वो सब जो देख रहा था, वो बुरी चीजें नहीं हैं?” मैंने कहा, “नहीं।”
“लेकिन मम्मी तो बोलती है कि वो सब गलत है?”
मैंने कहा, “वो तो तुझे इसलिए कहती है ताकि तू बाहर जाकर किसी से वो सब चीजें ना करे। तू एक अच्छी घर की लड़की है, तो ये सब करेगी तो तुझे अच्छा थोड़े ही ना लगेगा, और फिर किसी को मालूम पड़ गया तो? कितनी बदनामी होगी आंटी की, अंकल की?”
उन्नति सिर हिलाकर हाँ-हाँ कह रही थी। “तो फिर तू क्यों ये सब देख रहा है?” उसने मुझसे पूछा।
मैंने कहा, “मुझे अच्छा लगता है।”
“इसमें अच्छा लगने वाली चीज क्या है?” वो पूछी।
मैंने कहा, “सब कुछ। तू देखेगी तो जानेगी।”
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थोड़ा चुप रहा फिर पूछा, “देखेगी क्या?” वो सिर हिलाकर हाँ बोली, तो मैंने चूत चाटने वाली क्लिप लगा दी। लड़के-लड़की जब कपड़े खोल रहे थे तो वो उन्हें ध्यान से देख रही थी।
मैंने कहा, “कितनी सुंदर लड़की है देख, फॉरेन की है ना। बॉडी तो मस्त है, लेकिन…”
तो उन्नति पूछने लगी, “लेकिन क्या?” मैंने कहा, “तेरे जैसा नहीं।”
वो हँसती हुई बोली, “मेरे जैसा? क्यों मजाक करता है। मैं कहाँ इतनी सुंदर हूँ।”
मैंने कहा, “कभी अपने आप को आईने में देखा है?”
वो बोली, “रोज देखती हूँ।”
मैंने कहा, “वैसे नहीं, पूरे कपड़े उतार के आईने के सामने खड़ी हो जा, आईना भी वर्मा जाएगा, तू इतनी सुंदर है।”
अब लड़कियों को अगर वो सुंदर है कहो तो फूलें नहीं समाएँगी। फिर हीरो ने हीरोइन की छाती से कपड़े उतारे तो उसके चुची को देखके बोला, “देख बूढ़ी जैसी छाती है इसकी, तेरे जैसी नहीं।”
उन्नति मुझे देखके बोली, “मतलब?” मैंने कहा, “तू खोल दे तो बताऊँ।”
वो बोली, “क्या कहता है?”
मैंने कहा, “कोई नहीं है, चल खोल दे।”
वो मना कर रही थी, मैंने उसके सूट का शर्ट को ऊपर से खोल दिया। उन्नति की छाती के ऊपर रखे हुए दो आधे कटे आम के तरह ही दिखते थे, और उनके ऊपर रखी हुई दो छोटी-छोटी चेरीज़।
मैंने कहा, “देख उसकी छाती और तेरी। तेरे दूध कैसे टाइट हैं और खड़े हुए हैं, मुँह में ले तो मजा आ जाए।” उन्नति शर्मा रही थी।
मैंने कहा, “उन्नति मैं तेरे मम्मे चूस लूँ?”
वो चौंक गई बोली, “क्या कह रहा है?”
मैंने कहा, “बस थोड़ा सा ही? प्लीज।”
तभी हीरो ने हीरोइन के मम्मे खाने शुरू कर दिए तो उन्नति कंप्यूटर पर ध्यान देने लगी, और मैंने धीरे से उसके गोद में सिर रखके उसके छाती को चाटने लगा। उसके दूध के चारों तरफ चूसते हुए मैंने जैसे ही उसके निप्पल को टीज किया उसके बदन में कँपकँपी होने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसके निप्पल्स को दाँतों से काटना शुरू किया तो वो आह-आह कहने लगी। फिर मैंने चूसना बंद कर दिया क्योंकि मैं उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था। तभी हीरो ने हीरोइन की पैंटी भी निकाल दी, और उसके चूत को पागलों की तरह चूसने-चाटने लगा। उन्नति उसे आश्चर्य से देख रही थी।
तभी मैंने कहा, “कितना मजा आता होगा ना?”
उन्नति बोली, “छी वहाँ पे कोई चूमता है क्या?”
मैंने कहा, “सब चूमते हैं।”
वो बोली, “लेकिन वो तो गंदी होती है?”
मैंने कहा, “नहीं, वैसा नहीं है। उससे पहले वो उसे धो देते हैं।”
उन्नति देखती रही, मैं उसके पास चुपचाप बैठा था, तभी फिल्म खत्म हो गई। खत्म होने के बाद मैंने कहा, “कैसा लगा?” उन्नति बोली, “हम जो कर रहे हैं ये सब बुरा नहीं है ना?”
मैंने कहा, “कहाँ हमने कुछ किया है, बस मैंने तुझे किस किया समझो। लेकिन तू अगर ऐसी ही डरती रही तो ज़िंदगी के मजे नहीं ले पाएगी।”
वो मुझे देखती रही तो मैंने कहा, “देख आज मौका है, तू भी है मैं भी हूँ, हम दोनों मजे करते हैं।”
उन्नति बोली, “इसमें कोई बुराई नहीं है ना।”
मैंने कहा, “नहीं रे। बस चूमा-छाती ही तो करेंगे, बुराई क्या है। लेकिन अगर किसी को पता चल गया तो?”
उसने कहा तो मैंने कहा, “तू बोलेगी क्या किसी को? मैं तो नहीं बोलूँगा। तो पता कैसे चलेगा? देख तेरे मम्मे को चूसा तो तुझे कैसा लगा?”
उन्नति मुस्कुराते हुए बोली, “बहुत बढ़िया लग रहा था।”
मैंने कहा, “चूत चूसूँगा तो स्वर्ग मिलेगा।”
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वो नहीं कर रही थी, उसके हाथ को पकड़के बाथरूम में ले गया और बोला, “चल धोके साफ होके आ जा।” वो बाथरूम में चली गई तो मैंने ड्रॉअर में से कंडोम का पैकेट निकाला जो मैंने शाम को बाजार से खरीद के लाया था। मुझे पता था आज की रात मेरे कई अरमानों की भरपाई होने को थी।
तकिए के नीचे कंडोम को रखके मैं इंतज़ार करने लगा, तभी उन्नति अंदर आई। आते ही मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी पैंट को खोल दी, वो अब सिर्फ मेरे सामने पैंटी में थी। शर्ट तो पहले ही खोल दिया था। उसकी छाती से उभरते मम्मों को चूसने लगा, तो आह-आह-आह करने लगी।
मैंने छाती को चूसता-मसलता रहा और फिर धीरे से एक हाथ से उसके चूत पर फेरने लगा। पैंटी के नीचे उसका साफ चूत मेरे हाथों को मखमली एहसास दिला रहा था। फिर मैंने उसके पेट पर चुमा देते हुए उसकी पैंटी को नीचे खींच लिया और उसके चूत को देखने लगा।
वो बोली, “क्या कर रहा है?”
मैं बोला, “देख रहा हूँ, भगवान ने किस कारीगरी के साथ तेरा ये चूत बनाया है, इतना सुंदर चूत मैंने आज तक किसी भी फिल्म में नहीं देखा है।”
और मैंने उसके चूत के ऊपर किस कर दिया, उसके चूत के दोनों तरफ चूमता रहा, फिर एक-एक करके हर एक फोल्ड को चूसता रहा, उसके बदन में बहुत ज़्यादा कँपकँपी होने लगी थी। मैंने उसके चूत को अलग करके उसके क्लिटोरिस को जैसे ही चूसा, उसकी बदन में बहुत ही बड़ा ज्वार आया और फिर थम गया।
वो झड़ने लगी थी। उसकी चूत से पानी निकलने लगा था। मैंने उसके चूत के सामने ही जीभ रखके पानी को चखने की कोशिश करने लगा। किसी जवान लड़की के चूत का पानी मीठा लगता है, मैंने उसे चाटता और चूसता रहा। करीब आधे घंटे तक मैंने उसे चूसा और चाटा। फिर वो शांत हो गई तो मैं उठके बैठ गया। अब उन्नति बहुत खुश नज़र आने लगी थी। रात के शायद दस बजने आए होंगे।
फोन पर मम्मी और आंटी से बातें करने लगे हम दोनों। उन्नति बहुत खुश लग रही थी, फोन पर बोल रही थी कि अगर ज़रूरत हो तो आप लोग दो दिन और रह जाओ वहाँ पर, यहाँ कोई परेशानी नहीं है। मुझे लग रहा था कि बिल्ली के मुँह एक बार घी लग गया तो वो ऐसा ही कुछ करेगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फोन खत्म होने के बाद मैंने उसे पूछा, “क्यों बोला उन्हें दो दिन और रहने के लिए? यहाँ कितना प्रॉब्लम है?”
उन्नति मुस्कुराते हुए बोली, “अच्छा, अगर वो रहती है तो तुझे ही फिल्म देखने को मिलेगा।”
मैं हँसते हुए बोला, “और तुझे क्या-क्या मिलेगा?”
वो बोली, “तेरे संगत में पढ़के मैं भी बिगड़ गई।”
तभी मैंने उसे धक्का दिया और बिस्तर पर उसके ऊपर चढ़ गया, और बोला, “आज की रात मैं तेरे साथ वो सब कुछ करूँगा जो बस मैंने फिल्मों में देखा था।”
उन्नति बोली, “और भी कुछ है?”
मैंने कहा, “अभी तो तूने ट्रेलर ही देखी है, पूरी की पूरी फिल्म अभी बाकी है।”
फिर मैंने लंड चूसने वाला मूवी डाला। और उसे देखके उन्नति बोली, “अब मुझे पता चला तूने मेरी चूत क्यों खाई।”
मैं चुपचाप वहाँ से उठा और बाथरूम चला गया, अपने लंड को पूरा साफ करके नंगे ही होके बाहर आ गया। बिस्तर के पास खड़ा होके बोला, “और कुछ कहूँ कि तू सब समझ जाती है।”
वो मुस्कुराते हुए बोली, “देख मुझे अगर अच्छा ना लगे तो नहीं करूँगी।”
मैंने हाँ भरी, वो धीरे-धीरे मेरे लंड के मुँह को चूमने लगी। मैंने परफ्यूम डाल रखा था, तो वो और थोड़ा अंदर लेने लगी। बस दस मिनट में ही वो मेरे पूरे लंड को अपने गले तक अंदर लेकर चूसने लगी थी। मैं उसके मुँह को चोद रहा था। वैसे ही शाम को दो बार मुठ मार ली थी तो झड़ने का कोई डेंजर नहीं था। पंद्रह मिनट बाद मेरे लंड में खलबली शुरू हुई और मुझे लगा जैसे कि मैं अब झड़ूँगा, बस मैंने ज़ोर-ज़ोर से उसके मुँह में धक्के देने शुरू कर दिए।
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वो कुछ समझ नहीं पा रही थी, बोलने के लिए चांस ही नहीं था, क्योंकि उसकी सिर को मैंने जबरन अपने लंड के ऊपर पकड़ रखा था और मैंने उसके मुँह में ही पानी डाल दी। उसे कोई फर्क नहीं पड़ा होगा क्योंकि ज़्यादा पानी नहीं निकला था। बस मैंने भी पानी डाल दी थी। फिर हम दोनों बातें करने लगे। हम दोनों ही नंगे थे।
उन्नति बहुत खुश थी, बोली, “मुझे पहले क्यों नहीं बोला ये सब इतना मज़ेदार है। जानती तो पहले ही तुझसे बहुत मजे करती ना।”
मैंने कहा, “अगर तू ये सब जानती तो कहीं किसी बुरे दोस्त के संगत में ना पड़ जाए यही सोचके मैंने तुझे ये सब नहीं बताया।”
वो बोली, “नहीं रे तेरे सिवाय किसी और से कहाँ मिलती हूँ। सुबह से स्कूल, फिर दोपहर को ट्यूशन, बस फिर तो घर पर, एक तू है जिसके साथ बातें करती हूँ, झगड़ती हूँ।”
मैंने कहा, “अब आगे देखे।”
वो बोली, “और भी है?”
मैंने कहा, “जो चीज असली है वो तो रहा गया।”
फिर मैंने फकिंग वाली वीडियो लगा दी।
वो देखके उन्नति के पसीने निकल गए, बोली, “नहीं बाबा ये मैं नहीं करूँगी। मेरे क्लासमेट्स बोलते हैं कि इससे दर्द होता है, खून भी निकलता है।”
मैंने कहा, “नहीं होगा। मैं हूँ ना। अगर दर्द होता है तो नहीं करेंगे।”
वो राजी नहीं हो रही थी और मैंने उसके चूत को चूसना-चाटना शुरू कर दिया, बस क्या था दस मिनट में ही वो पानी-पानी होने लगी। मैंने जब देखा कि वो ढीली पड़ रही है, तो मैंने अपने लंड उसके मुँह के पास दे दिया और उसके चूत के पानी पीने लगा। हम दोनों फिल्मों में जैसे 69 करते हैं वैसे कर रहे थे।
फिर जब मेरा लंड पूरा हार्ड हो गया तो मैंने उस पर कंडोम लगाया। कंडोम देखके उन्नति बोली, “ये किसलिए?” मैंने कहा, “इससे तुम्हें दर्द नहीं होगा, ना ही तुम्हें कोई परेशानी होगी।” और कंडोम के ऊपर मैं थोड़ा सा वैसीलीन लगाया ताकि उन्नति को दर्द न हो। उन्नति को नीचे सुलाया, और उसके दोनों टाँगों को ऊपर उठाकर दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपने तने हुए लौड़े को उसके चूत के सामने रगड़ते हुए धीरे से धक्का दिया.
तो मेरा लंड खिसककर अंदर चला गया। ये कमाल वैसीलीन और कंडोम का था। मामूली सा दर्द हुआ, लेकिन वो मज़ेदार था। उन्नति को भी दर्द हुआ लेकिन इतना ज़्यादा नहीं। फिर मैंने और थोड़ा प्रेशर दिया तो और थोड़ा अंदर चला गया। फिर और थोड़ा प्रेशर दिया तो पूरा लंड उसके अंदर था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा, “देखा, तुझे कोई दर्द हुआ, ना खून निकला।”
फिर मैंने धीरे-धीरे ही उसको चोदना शुरू किया। पहले-पहले माँ-माँ कह रही थी फिर आह-आह कहने लगी। मैंने दस मिनट चोदने के बाद ही उसका चूत भी ढीला होके मेरा साथ देने लगा, और मेरा स्पीड भी बढ़ गया। जैसे-जैसे धक्के बढ़ने लगे वो वैसे ही कुल्हे उछाल-उछाल के मुझे चोदने लगी।
फिर मैं थक गया तो मैं नीचे सो गया और उसे मेरे ऊपर बिठा दिया, और मुझे चोदने के लिए कहा। वो भी कंप्यूटर पर फिल्म देखते हुए मुझे चोदने लग गई थी। लेकिन बहुत देर तक वो नहीं चोद पाई, क्योंकि उसके पैरों में दर्द होने लगा था.
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तो मैंने उसे नीचे खड़ा करके बिस्तर को पकड़ा दिया और पीछे से उसकी एक टाँग को उठाकर चूत पर लंड घुसेड़ दिया और चोदने लगा। अनइमेजिनेबली मैंने एक घंटे तक उसे पोजीशन बदल-बदलके चोदता रहा। जाने कितनी बार वो झड़ी होगी। बस मेरा चोदना जारी था। हम थक गए थे, और रुक गए। रात के करीब बारह बज गए थे। हमने बहुत मजे कर लिए थे। अब उन्नति थक गई थी और मैं भी। मैंने कहा, “अब तू सो जा।” मैं बाथरूम जाकर फ्रेश होके आया तो उन्नति नहीं सोई थी। “क्या हुआ” पूछा तो वो डरी-सहमी हुई बोली, “मेरे चूत से खून निकला।”
मैंने देखा तो सही था, उसकी पैंटी पर खून के दाग थे। मैंने कहा, “डरने की कोई बात नहीं, ऐसा पहली बार होता है।” बस उसके बाद उस रात हमने और चुदाई नहीं की, लेकिन हाँ उन्नति की स्वीट दूध को रात भर पीता रहा और मेरे लंड का रस वो पी रही थी। दूसरे दिन सुबह ही आंटी का फोन आया कि वो लोग दो दिन बाद आएँगे। तो मैं अपने कमरे में आया और सोई हुई उन्नति को बिना जगाए, उसके दूध के साथ खेलने लगा, चूसने और चूमने लगा। फिर हमने दो दिन तक लगातार चुदाई की।
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