Office Me Chudai XXX
मैं अनुष्का को हमेशा पार्टियों या किसी शादी के फंक्शन्स में ही देखा था। अनुष्का समाज की एक मानी हुई हस्ती थी। कामयाब बिजनेस वुमन होने के अलावा वो सामाजिक कार्यकर्ता भी थी। अक्सर उसके किसी न किसी सामाजिक कार्य के लिए चर्चित रहती थी। अनुष्का का आकर्षक व्यक्तित्व और उसका सुंदर बदन किसी भी मर्द को उसकी तरफ आकर्षित कर सकता था। Office Me Chudai XXX
एक फंक्शन में मुझे उसके बगल में बैठने का मौका मिला। मैं उससे बात करना चाहता था पर ऐसा हुआ नहीं। उसे किसी चैरिटी फंक्शन में जाना था और वो एक अलग सी छाप मेरे जहन में छोड़कर चली गई। अनुष्का की एक एडवरटाइजिंग कंपनी थी जिसे वो बेचना चाहती थी.
और इसी सिलसिले में वो मेरी सेक्रेटरी रागिनी से अपॉइंटमेंट बुक करना चाहती थी। मेरी एड कंपनी अच्छी चल रही थी, और ना मैं कोई कंपनी को खरीदने का इरादा रखता था। जब अनुष्का की कंपनी के बारे में मुझे रागिनी ने बताया तो मैंने उससे पूछा, “क्या तुम पर्सनली उसके बारे में कुछ जानती हो?”
“मेरा एक दोस्त उसके लिए काम करता है।” उसने जवाब दिया।
“तुम उसके बारे में कितना जानती हो?” मैंने फिर पूछा।
“यही कि उसकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी नहीं है। किसी कारण से उसका तलाक होने वाला है। अनुष्का एक बहुत ही मेहनती और ईमानदार महिला है। अपने वर्कर्स का वो अपने परिवार के सदस्यों जैसा खयाल रखती है।” रागिनी ने जवाब दिया।
“ठीक है, मैं उससे मिलूँगा।”
रागिनी ने हँसते हुए कहा, “मैं जानती थी आप उससे जरूर मिलेंगे।”
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अनुष्का ने मेरे केबिन में इस तरह कदम रखा जैसे कि वो केबिन उसी का हो। उसका ऑफिस में घुसने का अंदाज साफ कह रहा था कि वो एक फर्स्ट क्लास बिजनेस वुमन थी। दिखने में वो 5 फीट 4 इंच की थी। वो मेरे टेबल की ओर बढ़ी और मुझसे हाथ मिलाया। मैंने भी खड़े होकर उससे हाथ मिलाया और अपनी कुर्सी पर झट से बैठ गया।
इस तरह की औरतें मुझे काफी गरम कर देती थीं और उनसे अपने खड़े लंड को छुपाना मुश्किल हो जाता था। अनुष्का मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गई, उसने अपना ब्रीफकेस बगल में रख लिया। अनुष्का ने घुटने तक का काले रंग का स्कर्ट पहन रखा था जिससे उसकी आधे से ज्यादा नंगी टाँगें दिखाई दे रही थीं। उसे देखते ही मेरे लंड में सिहरन हुई और वो गरमाने लगा।
“मुकेश, मुझे खुशी हुई कि तुमने मुझसे मिलने के लिए वक्त निकाला। मुझे मालूम है तुम अपने बिजनेस में काफी कामयाब हो और मेरी कंपनी तुम्हारी कंपनी के मुकाबले कुछ भी नहीं है।” अनुष्का मुझे देखते हुए बोली।
“मुझे भी आपसे मिलकर काफी खुशी हुई।” मैंने कहा।
“हम बात आगे बढ़ाएँ, उसके पहले मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहती हूँ।” वो अपना ब्रीफकेस उठाने के लिए थोड़ा नीचे झुकी तो उसकी स्कर्ट थोड़ा और ऊपर खिसक गई जिससे उसकी जाँघों का ऊपरी हिस्सा नजर आने लगा। वो वापस घूमकर अपना ब्रीफकेस अपनी गोद में रख लिया।
उसने ब्रीफकेस खोलकर उसमें से एक फाइल निकाली और फिर ब्रीफकेस बंद कर उसे अपने पैरों के पास रख दिया। इस दौरान उसने कई बार अपने पैर पर पैर चढ़ाए और सैंडल उतारे जो एक औरत के लिए नॉर्मल सी बात है लेकिन अनुष्का ने इस तरह से किया कि मुझे उसकी ब्लैक कलर की पैंटी साफ दिखाई दे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो खड़ी हो गई और झुककर मुझे फाइल दिखाने लगी। मैंने तिरछी नजरों से देखा कि उसके सफेद बूब्स लो कट के ब्लाउज में से साफ झलक रहे थे। उसने एक काले रंग की पारदर्शी नेट वाली ब्रा पहने हुई थी।
“मुकेश, इस डील से तुम्हें पहले ही साल में rs. 500 लाख का फायदा हो सकता है।” वो और टेबल पर झुकते हुए बोली।
पर मेरा ध्यान उसकी बैलेंस शीट देखने में कहाँ था। मेरा ध्यान तो उसकी अनबैलेंस्ड चुचियों पर अटका था। मैंने देखा कि उसके ब्लाउज के ऊपरी दो बटन खुले थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि जब वो ऑफिस में आई थी तो उसके ब्लाउज के सभी बटन बंद थे। जरूर उसने वो बटन जब अपनी ब्रीफकेस में से फाइल निकाल रही थी तब खोले होंगे।
मुझे ये औरत काफी खेली-खाई और समझदार लगी। मैं भी इस खेल में उसका साथ देने लगा। उसने मुझे फाइल के एक-एक पन्ने को दिखाते हुए जानबूझकर अपना पेन जमीन पर गिरा दिया। और जब घूमकर वो पेन उठाने के लिए झुकी तो उसकी मस्त चूतड़ ठीक मेरे चेहरे के सामने थे। उसकी मस्त गांड को देखकर मेरा लंड एकदम तन गया।
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उसने पेन उठाया और फिर टेबल पर झुक गई। मैं भी अपनी कुर्सी को थोड़ा पीछे खिसका ऐसे बैठ गया जिससे उसे मेरा लंड जो पैंट में तंबू बनाए हुए था साफ दिखाई दे। पर वो एकदम अनजान बने हुए मुझे पेपर्स समझाने लगी। फाइल के पन्ने पलटते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया।
तब मुझे उसके बदन से आने वाले परफ्यूम की महक आई। महक तो कमरे में पहले से फैली हुई थी किंतु उसके बदन की सुंदरता में मैं इतना खोया हुआ था कि महसूस नहीं कर पाया। खुशबू गुलाब की थी या हीना की पता नहीं पर उसका नजदीक होना और बदन से उठती खुशबू मुझे पागल किए दे रही थी।
मैं उसे छूना चाहता था, पर मैं अपने जज्बातों को रोक रहा था। अनुष्का मुझे एक चीज समझा रही थी, और मैं उसके चुचियों की गोलाइयों में खोया उसके हाँ में हाँ मिला रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी प्यारी गांड पर हाथ फेर दूँ, पर जल्दबाजी में कहीं थप्पड़ न पड़ जाए सोचकर चुप रह गया। मैंने सोचा चलो टाँगों से शुरू करते हैं।
जैसे ही मैंने अपनी उँगली धीरे से उसकी टाँगों को छुई, “मुकेश जहाँ तक मैं समझती हूँ तुम्हारी कंपनी खर्चों के मामले में कुछ ज्यादा लापरवाह है। हमारी कंपनी एक प्लान के तहत ही खर्चा करती है, ये तुम्हारे काम आएगी। पैसों को पकड़कर जब्त करना चाहिए ना कि खर्च करना।” वो मेरी ओर देखते हुए बोली।
तब मैंने उसके घुटनों को जब्त कर लिया, जब्त नहीं बल्कि अपनी पूरी हथेली उसके घुटनों पर रख दी। उसे इस बात का अहसास जरूर हुआ होगा पर वो फिर अनजान बनते हुए बोली, “मुकेश ये अच्छा समय है, मार्केट में बहुत काम है और तुम अपने सब सपने पूरे कर सकते हो।”
मुझे लगने लगा कि वो भी मुझसे खेल खेल रही है। वो मुझे अपने और कामों के बारे में बताने लगी और मैं अपना हाथ धीरे-धीरे ऊपर बढ़ाने लगा। घुटनों से होता हुआ मेरा हाथ अब उसकी जाँघों पर था। एयरकंडीशन चालू होने के बावजूद मुझे गर्मी लगने लगी। मैंने अपने बाएँ हाथ से अपनी टाई की नॉट ढीली की और दूसरे हाथ से उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और मुझे अपनी फाइल दिखाने और समझाने लगी। मेरा हाथ ऊपर की ओर बढ़ रहा था और वो अनजान बनी मुझे समझा रही थी। मेरा हाथ अब उसकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर रेंग रहा था। अगर वो इस समय मुझे रोकती तो मैं नहीं जानता कि मैं क्या करता पर मैंने अपने हाथ को हटाया नहीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा हाथ अब इसके आगे नहीं बढ़ सकता था जब तक कि वो अपनी टाँगों को थोड़ा और फैला मुझे रास्ता दे। “मुकेश तुम्हारी कंपनी पुराना सॉफ्टवेयर यूज करती है, हमारी कंपनी के माध्यम से तुम लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से काम ले सकोगे। इससे तुम हर क्लाइंट की अंदरूनी से अंदरूनी जानकारी हासिल कर सकोगे।”
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ये कहते हुए वो अपने ब्रीफकेस से एक फाइल निकालने के लिए झुकी और इस दौरान अपनी टाँगें थोड़ी फैला दी। अंदरूनी जानकारी हासिल करने के लिए मेरे हाथों को रास्ता मिल चुका था। मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर खिसकाया तो पाया उसकी पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
“मुकेश हमारी कंपनी के पास एक सॉफ्टवेयर है जिससे कंपनी का हर आदमी किसी भी डेटा को चेक कर सकता है। तुम उन डेटास को भी पा सकते हो जो आम इंसान के पाने की हद के बाहर है।” उसने अपनी टाँगों को और फैलाते हुए कहा। मैं और मेरा हाथ तो किसी और डेटा की तलाश में थे। मैंने अपना हाथ उसकी गीली हुई चूत पर पैंटी के ऊपर रख दिया। उसकी पूरी पैंटी गीली थी और मेरी शर्ट भी पसीने में भीग चुकी थी।
वो अब टेबल पर बैठ चुकी थी, “मुकेश हमारे पास में ऐसे वेब सर्वर्स हैं जो हर दिक्कतों को मिटा सकते हैं। तुम्हारे मुलाजिम 24 घंटे किसी भी डेटा को पा सकते हैं।”
मैं उसकी चूत में उँगली किए जा रहा था।
“रुको, पहले रास्ते की दिक्कतों को हटाओ?” मैंने धीरे से उसकी चूत को दबा दिया।
मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी पैंटी के इलास्टिक में फँसाईं उन्हें नीचे खिसकाना शुरू किया। अनुष्का अभी भी शांत बनी हुई मुझे अपनी कंपनी का हर डेटा समझा रही थी। मैंने अपनी एक उँगली उसकी चूत में घुसाई तो मुझे लगा जैसे कि मैंने किसी भट्टी में उँगली डाल दी हो।
उसकी चूत से पानी बह रहा था। मैंने अपनी दो उँगलियों से उसे चोद रहा था पर उस पर इस बात का बिल्कुल भी असर नहीं था। मैंने उसकी पैंटी उतारकर जमीन पर गिरा दी थी। उसकी खुली हुई चूत मुझे इनवाइट कर रही थी।
मैंने अपना हाथ बढ़ाया उसके टॉप को खोलना चाहा, “मुकेश तुम्हें हमारी कंपनी से काफी फायदे हो सकते हैं, इससे तुम्हारे बिजनेस में काफी तरक्की हो सकती है।” अनुष्का मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली।
मैं और जोर से उसकी चूत में उँगली करने लगा। उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़ पूछा, “अब मेरी कंपनी को खरीदने का और क्या लोगे?”
मैंने देखा कि वो इस डील को खत्म ही करना चाहती है, और उसके लिए वो कुछ भी पेश कर सकती है, अपने आप को भी। मैंने फोन उठाया और इंटरकॉम पर अपनी सेक्रेटरी रागिनी का नंबर दबाया। उम्मीद थी कि वो लंच से वापस आ गई हो।
“हाँ मुकेश।”
“रागिनी क्या तुम हमारे लॉयर के साथ बात कर डॉक्यूमेंट्स तैयार कर सकती हो कि हम मिसेज अनुष्का की फर्म को rs 3000 करोड़ में खरीद रहे हैं, एक कन्फर्मेशन लेटर पहले तैयार करके ले आओ।”
“अभी लेकर आती हूँ।” रागिनी अपने काम में काफी होशियार थी।
मैंने अनुष्का की स्कर्ट को ऊपर उठाता रहा जब मैं रागिनी से बात कर रहा था, अब उसकी जाँघें और चूत एकदम नंगी हो चुकी थीं। उसकी गुलाबी चूत और झीने झीने भूरे बाल दिखाई दे रहे थे।
अनुष्का मेरी ओर देखते हुए बोली, “मुकेश इस डील का तुम्हें मुझे एडवांस देना होगा?”
“अनुष्का क्या एडवांस लेना होगा?” मैंने पूछा।
“तुम्हें मुझे चोदना होगा। अपना लंड अपनी पैंट से बाहर निकालो, पिछले एक घंटे से सहन किए जा रही हूँ। जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डालकर मुझे जोरों से चोदो।”
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जैसा अनुष्का ने कहा था मैं खड़ा होकर उसके पीछे आ गया। अनुष्का टेबल पर झुककर घोड़ी बन गई। मैंने अपनी पैंट और अंडरवीयर उतार दी। अनुष्का ने अपने टाँगें एकदम फैला दी थीं जिससे उसकी चूत का मुँह और खुल गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“तुम मुझे पहले ही इतना गीला कर चुके हो कि तुम्हारा जी चाहे वैसे और उतने जोर से चोद सकते हो।” अनुष्का ने मेरी ओर गर्दन घुमाकर कहा।
मैंने अपने लंड को थोड़ी देर उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अपने सुपाड़े को अंदर घुसाया। जैसे ही मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत की दीवारों को चीरते हुए अंदर घुसा उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी, “मुकेश तुम्हारा लंड कितना बड़ा है। मैंने सुना था तुम्हारे लंड के बारे में कि काफी बड़ा है और तुम चुदाई भी अच्छी करते हो।”
“कहाँ सुना तुमने ये?” मैंने अपने लंड को पूरा उसकी चूत में घुसाते हुए कहा।
“मुकेश इस तरह की बातें बहुत जल्दी फैलती हैं सोसाइटी में। एक औरत से दूसरी औरत तक फिर सड़कों पर। मुकेश सुना है कि तुम चोदने में माहिर हो, औरत को चुदाई का पूरा मजा देते हो। मैंने ये भी सुना है कि तुम गाड़ी (व्हीकल) और औरत की ऐसी हालत कर देते हो कि उसको सेकंड हैंड लेने वाला सोचता है कि ये क्या ले लिया मैंने…
मेरी गाड़ी आज वैसी ही कर दो अपने इस तगड़े लंड से। इसलिए आज मैं तुमसे चुदवा के पता लगाना चाहती हूँ कि तुम कैसा चोदते हो। लेकिन मुझे लग रहा है कि जो सुना उससे कहीं बेहतर चोदते हो।” अनुष्का ने अपने चूतड़ पीछे करते हुए कहा।
मैं जोर-जोर से उसकी चूत में धक्के मार रहा था। वो भी पूरे जोश में अपने चूतड़ पीछे धकेल मेरे धक्के का जवाब दे रही थी, “मुकेश मजा आ रहा है, और जोर से चोदो, फाड़ दो मेरी चूत को।” मैं और जोर से अपने लंड को उसकी चूत की जड़ तक घुसा धक्के मार रहा था।
उसकी चूत इसके पहले कई बार चुद चुकी थी… लेकिन फिर भी गुलाबी थी और कुछ टाइट भी। उसे मेरा 8 इंच का लंड अंदर लेने में दर्द तो ज्यादा नहीं हुआ लेकिन वो मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी। उसकी चूत बहुत टाइट और गरम थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने उसकी स्कर्ट को एकदम ऊपर उठा उसके चूतड़ को कसके अपने हाथों से पकड़ जोर के धक्के मार रहा था। “रुको मत चोदते जाओ हाँ ऐसे ही… ओह्ह मुकेश मेरा छूटने वाला है,” वो जोर के धक्के लगा रही थी। मैंने उसके पानी का स्पर्श अपने लंड के चारों ओर महसूस किया। तभी मेरी नजर दरवाजे पर खड़ी रागिनी पर पड़ी।
रागिनी मेरे ऑफिस के बंद दरवाजे पर खड़ी एक हाथ में अनुष्का का लेटर और अपनी स्कर्ट पकड़े हुए थी, और दूसरे हाथ से अपनी खुली चूत में उँगली कर रही थी। (रागिनी को मैं रोज चोदता था, और ऑफिस में वो बिना पैंटी के रहती है। घर जाते वक्त पैंटी पहनती है.)
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अनुष्का की नजर उसपर पड़ी और वो मुस्कुरा दी, समझ गई कि एक बॉस के केबिन में अगर उसकी सेक्रेटरी अपनी चूत में उँगली कर रही है तो कोई मुसीबत नहीं आने वाली। रागिनी समझ गई कि मैंने उसे देख लिया है। वो मुस्कुराते हुए हमारे करीब आई और हम लोगों को चुदाई करते देखने लगी। मैंने अनुष्का को चोदना जारी रखा था।
रागिनी हमारे करीब आई और अपने हाथ अनुष्का की गांड पर रख बोली, “मुकेश इसकी गांड कितनी सुंदर और प्यारी है, है ना!” रागिनी ने अपना एक हाथ अनुष्का के खुले टॉप के अंदर डाल उसकी चुचियों को सहलाया और उसके निप्पल मसल दिए, “और सुंदर चुचियाँ भी हैं।”
मैंने कहा, “मुकेश अनुष्का बहुत सुंदर है, क्या इसकी चूत भी इसकी चुचियों की तरह कसी है?”
“हाँ बहुत ही टाइट चूत है इसकी।” मैंने जोर का धक्का मारते हुए कहा।
“तुम्हें पता है आज मैं खाना खाने कहाँ गई थी?” ये क्या चुदाई के बीच में ये खाना का रोना लेकर बैठ गई, मैं सोचने लगा, “नहीं मुझे नहीं पता।” मैं थोड़ा उखड़ते हुए बोला।
“मैं आज सीजर्स पैलेस गई थी।” मैं रागिनी को सुन रहा था और अनुष्का ने अपनी चूत को सिकोड़ मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ्त में ले लिया। अनुष्का सिसकारियाँ भरते हुए मेरे लंड के पानी को निचोड़ रही थी। उसने एक हाथ बढ़ाकर रागिनी के टाँगों पर से रेंगते हुए उसकी चूत पर रख दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“ओह मुकेश देखो तो ये मेरी चूत से खेल रही है।” अनुष्का ने अपनी दो उँगलियाँ रागिनी की चूत में डालकर अपने अँगूठे से उसकी चूत के दाने को सहला रही है।
“तुम मुझे सीजर्स पैलेस के बारे में बता रही थी?”
“गोली मारो सीजर्स पैलेस को इस वक्त, जब हम इससे निपट लेंगे तब मैं तुम्हें बताऊँगी।” वो अपनी कमर हिलाते हुए बोली।
अनुष्का अपनी उँगलियों से रागिनी की चूत को चोद रही थी, रागिनी की साँसें भी अब उखड़ने लगी थीं। रागिनी ने अपना हाथ बढ़ा अनुष्का की चूत पर रख दिया। मेरा लंड अनुष्का की चूत में घुसते हुए मेरा लंड रागिनी की उँगलियों से टकराता तो एक अजीब ही सनसनी मच जाती। अब वो अनुष्का की चूत को सहला रही थी।
“क्या तुम्हें मेरी चूत अच्छी लगी मुकेश?” उसने जोर से मेरे लंड को भींचते हुए अपना पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया। मैंने भी दो-तीन धक्के जोर के मार के अपना सारा पानी उसकी चूत में उंडेल दिया। मैंने अपना लंड अनुष्का की चूत से बाहर निकाला। मेरे लंड से छूकर अनुष्का की चूत का पानी जमीन पर टपक रहा था।
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अनुष्का भी जब सीधा होना चाही तो रागिनी ने उसे रोक दिया। रागिनी उसके पीछे आकर अपनी दो उँगलियाँ अनुष्का की चूत में घुसा दी। थोड़ी देर अपनी उँगली उसकी चूत में घुमाने के बाद, मेरे और अनुष्का के क्रीम से लिपटी अपनी उँगली उसने अनुष्का को चूसने के लिए दी।
अनुष्का ने बिना झिझकते हुए अपने मुँह के अंदर तक लेकर उसकी उँगलियाँ चूसी और चाटी। रागिनी ने अपनी उँगलियाँ बाहर खींच ली। अनुष्का खड़ी होकर अपने स्कर्ट को सीधा करने लगी। रागिनी ने अनुष्का की पैंटी जो जमीन पर पड़ी थी, उसे उठाकर सूँघने लगी। अनुष्का की ओर देख आँख मारकर बोली, “तुम्हारी चूत की खुशबू सच में बड़ी मतवाली है।” कहकर उसने पैंटी अनुष्का को पकड़ा दी।
अनुष्का ने पैंटी पहन अपने कपड़े ठीक कर लिए। अनुष्का ने अपनी स्कर्ट और ब्लाउज भी ठीक किया पर अपने ब्लाउज के दो बटन खुले ही रहने दिए। उसने डील का लेटर उठाया और मेरे सामने रख दिया। मैंने साइन करके उसे वो लेटर दे दिया। उसने वो लेटर लेकर अपने ब्रीफकेस में रख उसे बंद किया और खड़ी हो गई।
“थैंक यू मुकेश। उम्मीद है हमारा रिश्ता आज के बाद और मजबूत होगा।” कहकर वो वहाँ से चली गई।
“कमाल की औरत है, ऐसी औरतें कम ही देखने को मिलती हैं।” रागिनी मेरी ओर देखते हुए बोली।
“हाँ तुम सही कह रही हो, इतना आत्मविश्वास किसी में कम ही होता है। अनुष्का उन औरतों में से है, जो चाहा वो हर हाल में हासिल करती है।” मैंने रागिनी की बात का जवाब दिया।
“मैं शुरू से ही तुम्हें देख रही थी। जब तुम अनुष्का को चोद रहे थे तो मुझसे रहा नहीं गया, मैं भी इस सुंदर औरत की चूत देखना चाहती थी, इसलिए चली आई।”
“कोई बात नहीं, अच्छा तुम सीजर्स पैलेस के बारे में कुछ बता रही थी?” मैंने रागिनी से पूछा।
“मैं वहाँ पे टेबल पर बैठी सूप पी रही थी कि तभी एक बहुत ही सुंदर लड़की जिसका नाम चाँदनी था मेरे पास आई और पूछा कि क्या वो वहाँ बैठ सकती है। बड़ी ही अजीब लड़की थी। हम लोग बात कर रहे थे और उसी दौरान उसने अपना हाथ मेरी जाँघों पर रख मेरी चूत से खेलने लगी।”
“फिर क्या हुआ?” मैंने पूछा।
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“उसने मुझसे लेडीज वॉशरूम में चलने को कहा, वो इतनी सुंदर थी और साथ ही उसने मेरी चूत को सहला-सहलाकर इतना गरम कर दिया था कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाई और उसके पीछे वॉशरूम में आ गई।” रागिनी अपनी चूत खुजाते हुए बोली, “वहाँ उसने मेरी चूत को इतना कस-कसके चूसा और चाटा कि मेरी चूत ने तीन बार पानी छोड़ा। मुझे देर हो रही थी इसलिए मैं उसकी चूत का स्वाद नहीं चख पाई।” “उम्म्म काफी दिलचस्प लड़की होगी।” रागिनी वापस अपने केबिन में जाने के लिए उठी,
“वैसे मुकेश वो डॉल्टन एंड जॉनसन में काम करती है। मैंने उसे अपनी कंपनी में काम करने के लिए मना लिया है। वो कल से मेरी असिस्टेंट के रूप में हमें जॉइन कर रही है, तुम चाहो तो सुबह उसका इंटरव्यू ले सकते हो।” मैं भी उस लड़की की सुंदर चूत और बदन के खयालों में खो गया… एक बात बताऊँ… चाँदनी आई लेकिन अनुष्का तो अनुष्का ही थी। उसके बाद तो मैंने अनुष्का को कई बार चोदा… उसे मेरे लंड से अलग-अलग तरीके से चुदवाने में मजा आता है…
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