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तलाकशुदा मौसी और उनकी बेटी दोनों को पेला

अगस्त 29, 2026 by hamari

XXX Incest Kahani

मेरा नाम अर्जुन है, मैं अभी ग्रेजुएशन कर रहा हूँ. मैं जहाँ पढ़ता हूँ, उस शहर में मेरी माँ की छोटी बहन यानी मेरी मौसी रहती है। वह अकेली रहती है क्योंकि उसका डिवोर्स हो चुका है। इसलिए वह और उसकी लड़की, ये दो लोग ही रहते हैं। मेरी मौसी जिनका नाम गरिमा है, स्कूल में टीचर हैं और उनकी लड़की का नाम चित्रा है। वह पढ़ती है। वह मुझसे सिर्फ दो साल छोटी है। हम लोग जब भी मिलते हैं तो बहुत मस्ती करते हैं। XXX Incest Kahani

रक्षाबंधन के दिन मैं उनके घर गया था, शाम को। मैं जब भी जाता हूँ तो शाम का खाना खाकर ही वापस आता हूँ। इस बार भी मैं खाना खाने के लिए रुका था। बारिश का मौसम था लेकिन कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी, इसलिए मैं रेनकोट भी साथ में नहीं लाया था।

तभी बहुत जोर से अचानक बारिश शुरू हो गई। मौसी ने कहा कि कल तो छुट्टी है, तो आज रात यहीं ठहर जा, सुबह चले जाना। मैं मान गया और वहीं रुक गया। रात को उन्हें बहुत नींद आ रही थी तो वह जल्दी ही अंदर जाकर सो गईं। थोड़ी देर बाद चित्रा भी सोने चली गई।

मैं अकेला टीवी में मूवी देख रहा था। मूवी खत्म होने में थोड़ी देर थी, तभी मौसी आईं और मेरे पास बैठ गईं। वे इतनी पास बैठी थीं कि उनका हाथ मेरे हाथ को छू रहा था। मैं थोड़ा दूर गया तो वे भी थोड़ी नजदीक आ गईं। मुझे भी अच्छा लग रहा था इसलिए मैं ऐसे ही बैठा रहा।

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थोड़ी देर बाद फिल्म में सुहागरात का सीन आया तो गरिमा बहुत ही उत्तेजित हो गईं। उन्होंने मेरे हाथों को कसकर पकड़ा और देखते-देखते ही मेरे हाथों को किस करने लगीं। मैंने उनकी ओर देखा तो उन्होंने मुझे सीधे ही कहा, “अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो तो अंदर चलें।”

मैं भी तब उत्तेजित हो गया था। मैंने हाँ कहा तो वे उठकर चलने लगीं और बोलीं, “आ जाओ अंदर, तुम्हें आज अंदर की चीजें दिखाती हूँ।”

मैंने कहा, “सिर्फ दिखाने से काम नहीं होने वाला।”

तो वे बोलीं, “तुम अंदर तो चलो, फिर बोलना।” इतना बोलकर वे अंदर चली गईं।

मैं टीवी बंद करके चित्रा के रूम में देखा तो वह सो रही थी, ऐसा लगता था। फिर मैं गरिमा के रूम में गया। जैसे ही मैं अंदर गया और देखा तो मेरी मौसी गरिमा अपने सिर्फ पैंटी में ही थीं। वे बोलीं, “चल आ जा, कई सालों से मैं प्यासी हूँ। आज मेरी प्यास पूरी कर दे।”

मैंने कहा, “जिसकी प्यास है वह तो अभी कपड़ों में है।”

तो वे बोलीं, “नजदीक आओ फिर बोलो।”

जैसे ही मैं नजदीक गया तो सीधे ही उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और बोलीं, “ये भी तो रेडी है।”

मैंने कहा, “हाँ, वो तेरा इंतजार कर रहा है।”

उन्होंने जल्दी से मेरा पैंट उतार दिया और मेरे अंडरवियर के सामने देखने लगीं।

मैंने पूछा, “क्या देख रही हो? सिर्फ यही देखना है?”

तो बोलीं, “नहीं, सिर्फ देखना ही नहीं, और भी बहुत कुछ करना है।”

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फिर उन्होंने मेरा अंडरवियर निकाला। तब तक मैंने भी उनकी पैंटी निकाल दी। मेरा 12 इंच का बड़ा लंड देखकर वे देखती ही रह गईं।

मैंने पूछा, “क्या हुआ?”

तो बोलीं, “बाप रे! इतना बड़ा लंड?”

मैंने कहा, “हाँ। तुम्हारे पति का कितना बड़ा था?”

तो बोलीं, “तुम्हारे लंड से तो बहुत छोटा था, तकरीबन सात इंच के करीब होगा।”

फिर बोलीं, “इतना मैं कैसे ले पाऊँगी?”

मैंने कहा, “सिर्फ तुम्हारी भोस से काम नहीं चलेगा, मैं तो पूरा मजा लेना चाहता हूँ।”

फिर मैंने अपने लंड को उनके मुँह के सामने रख दिया और बोला, “चलो, ट्राई करो पूरा लेने की।”

फिर उन्होंने पहले मेरे लंड के टॉप को चाटना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे चूसने लगीं। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो पा रहा था इसलिए मैंने उनका सिर पीछे से पकड़ा और जोर से मेरा लंड उनके मुँह में घुसा दिया। मेरा आधे से ज्यादा लंड उनके मुँह में था इसलिए वे कुछ बोल नहीं पा रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मगर उनका पूरा मुँह भर गया था। मैंने फिर से एक और जोर से धक्का लगाया। अब मेरा पूरा लंड उनके मुँह में था, हलक तक पहुँच गया था। वे बाहर निकालना चाहती थीं मगर मैंने उनका सिर पीछे से इतनी जोर से पकड़ा था कि वे हिल नहीं पाईं।

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फिर धीरे-धीरे मैंने उनके मुँह में ही अंदर-बाहर करना शुरू किया। तब उन्हें थोड़ी शांति मिली। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और थोड़ी देर बाद मेरा पहला लोड पूरा ही उनके मुँह के अंदर निकाल दिया। फिर मैंने अपना लंड उनके मुँह से बाहर निकाला और उनको फिर से चूसकर साफ करने को कहा। गरिमा ने बहुत ही अच्छी तरह से मेरा पूरा लंड साफ कर दिया।

फिर वे बोलीं, “अब तो ज्यादा देर रहा नहीं जा रहा। अब तो मेरी प्यास बुझा दो।”

मैंने कहा, “जरूर।”

मेरे इतना बोलते ही गरिमा ने अपनी पूरी टाँगें फैला दीं और बोलीं, “मासी चोद-चोद दे तेरी इस मौसी को और बुझा दे उसकी प्यास।” मैं भी उनका ही इंतजार कर रहा था। मैंने अपने लंड को उनकी बुर में डाल दिया। तो पहले तो उसको घुसाने में थोड़ी तकलीफ हुई मगर घुसने के बाद मजा आने लगा। उन्हें चुदवाने का बड़ा मजा आ रहा था। उनकी बातों से साफ पता चल रहा था।

वे बोल रही थीं, “आज तो मुझे इतना चोद, इतना चोद कि मेरी भोस फटकर रोने लगे।”

मैंने कहा, “मैं तुम्हें ऐसे ही छोड़ने वाला नहीं हूँ और अब तो मैं हर बार तुम्हें चोदूँगा।”

तो बोलीं, “मादरचोद, बाद की बात बाद में करना। अभी तो मुझे तू चोद। तू बहुत सीधे तरीके से ठोक रहा है। क्या तू गालियाँ नहीं बोलता?”

तो मैंने कहा, “अगर मैं अपना असली रूप दिखाऊँगा तो तू सहन नहीं कर पाएगी।”

तो बोलीं, “क्या करेगा तू?”

मैंने कहा, “भड़वी, जो लंड अभी तेरी भोस में ही है वो मैं मुँह से बाहर निकालूँगा।”

तो वे ज्यादा उत्तेजित हो गईं और उछल-उछलकर चुदवाने लगीं। मैं भी उनका मजा ले रहा था। थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद वे बोलीं, “मैं अभी झड़ जाऊँगी।”

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मैंने कहा, “मुझे तो अभी टाइम है, मैं तो तुम्हें और ज्यादा टाइम चोदूँगा।”

थोड़ी देर बाद वे झड़ गईं और बोलीं, “अब तू मेरी गांड में डाल और तेरे लंड की बाकी प्यास बुझा ले, फिर बोलना मत कि गरिमा ने मेरे पास मुँह चुदवाया नहीं।”

मेरा लंड तो तैयार ही था। मैंने कहा, “चल, पलट जा ताकि मैं तेरी गांड अच्छी तरह से मार सकूँ।”

फिर वे पलट गईं और मैंने मेरा लंड उनकी गांड में डाला तो उससे चीख निकल गई। जबकि मेरे लंड का सिर्फ टॉप ही उनके अंदर गया था।

मैंने कहा, “क्यों, अभी से फट गई?”

तो बोलीं, “हाँ फट गई मगर तू उसे इतना फाड़ दे कि तू उसमें मजा ले पाए।”

मैं भी तैयार था। जोर से तीन-चार धक्के लगाए और पूरा लंड घुसा दिया। हम लोग ऐसे ही मजा ले रहे थे तभी हमारी नजर दरवाजे की ओर गई तो चित्रा वहाँ अपना नाइटड्रेस ऊपर उठाए खड़ी थी। उसका एक हाथ उसकी भोस के अंदर था और दूसरे हाथ से अपने ऊपर के सूट को ऊपर उठाए हुए खड़ी थी जिसमें उसके छोटे से बूब्स साफ दिखाई दे रहे थे। नीचे का सलवार पूरा नीचे था और उसकी पैंटी साफ दिखाई दे रही थी और उसके अंदर उसका हाथ था।

मैंने कहा, “वहाँ क्या कर रही हो? अंदर आ जाओ।”

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तो जैसे ही वह अंदर आई तो गरिमा ने ही उसके ऊपर का निकाल दिया और उसे टॉपलेस कर दिया और बोलीं, “ऐसे किया नहीं करते। मैं बताती हूँ तुम्हें कैसे करना चाहिए।” बोलते-बोलते उन्होंने चित्रा की पैंटी भी निकाल दी। अब मेरे सामने गरिमा और चित्रा दोनों ही पूरी नंगी थीं। गरिमा की गांड तो मैं मार ही रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

पैंटी उतारने के बाद गरिमा मुझसे कहने लगीं, “मेरे बाद अब इसकी भी प्यास बुझा देना।”

मैंने मना किया और कहा, “तुम्हारे बूब्स देखो और इसके देखो। और जब तुम्हें भी मेरा लंड लेने में तकलीफ हुई तो इसको कितनी होगी? इसने कभी लंड डलवाया है?”

तो चित्रा ने कहा, “नहीं, कभी लंड नहीं डलवाया पर हाथ जरूर घुसाती हूँ।”

मैंने कहा, “अच्छा तो जब तक मैं तेरी माँ की गांड मार रहा हूँ, तब तक तू अपनी चार उँगलियाँ अपनी भोस में डालकर रख, मैं भी देखूँ तेरी भोस कितनी खुली हुई है।”

मेरी बात सुनकर गरिमा ने चित्रा से कहा, “चल, उल्टी लेट जा, मैं ही तेरी भोस को इसके लंड के अनुकूल कर देती हूँ।”

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फिर जो नजारा देखने को मिला, वो शायद ही किसी को देखने का नसीब होता है। एक माँ अपनी बेटी को चुदवाने के लिए तैयार कर रही है और वो भी अपने हाथों को उसकी भोस में डालकर। वाह! क्या नजारा था। ये देखकर मुझे और इच्छा हो गई और मैं जोर-जोर से गांड मारने लगा। मेरा लोड भी निकलने ही वाला था। तभी गरिमा बोलीं, “क्या चित्रा की भोस इतनी पसंद आई कि इतने उतावले हो रहे हो?” मैंने कहा, “हाँ, जब माँ अपनी बेटी को इस तरह हेल्प कर रही हो तो मजा और दुगना हो जाता है न!!”

तो बोलीं, “वो भी है।” थोड़ी देर बाद मैंने अपना लोड गरिमा की गांड में ही निकाल दिया। फिर जैसे ही मेरा लंड बाहर निकाला तो गरिमा ने चित्रा से कहा, “चल शुरू हो जा। पहले लंड को मुँह में ले और पूरी तरह साफ कर।” फिर वे बताती गईं और चित्रा करती गई। मैंने उन दोनों माँ-बेटी को सुबह तक चोदा। आज भी जब भी जाता हूँ तो मौका मिलते ही चोद लेता हूँ। अब तो चित्रा की भोस और गांड दोनों ही मेरे लंड के माप की हो गई हैं। अब तो चोदने का और भी ज्यादा मजा आता है।

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