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हेलो फ्रेंड्स, मैं दिनेश हूँ, फ्रेंड्स, यह कहानी मेरी फ्रेंड दीक्षा, उसके हसबैंड अतुल और मेरे बारे में है। मेरी फ्रेंड दीक्षा और मैं बहुत पहले स्कूल टाइम से फ्रेंड्स हैं। मैं और दीक्षा के स्कूल टाइम से ही बड़ी दोस्ती थी। दीक्षा पहले से ही बड़ी सेक्सी है, शी इज मीडियम बिल्ट, टॉल, फेयर एंड सेक्सी। हर फिगर इज अबाउट ३६-२८-३८ और शी इज रियली फ्रेंड्स डैम सेक्सी, पर पहले मैंने दीक्षा को उस नजर से कभी नहीं देखा। Threesome XXX Porn
दीक्षा और लड़कियों की नखरे वाली या फिर अपने फिगर की वजह से स्टाइल मारने वाली टाइप की नहीं थी। इसीलिए मैंने भी स्कूल टाइम तक कभी उससे ऐसी कोई बात नहीं हुई। इन जनरल हम सब तरह की बातें किया करते थे। कॉलेज में भी मेरी और दीक्षा की दोस्ती चलती रही, दीक्षा का इंटरेस्ट स्पोर्ट्स में भी था और वह एक अच्छी एथलीट भी है।
मेरी नॉलेज में कॉलेज टाइम पर भी शायद दीक्षा का कोई बॉयफ्रेंड नहीं था अन्यथा मुझे पता जरूर होता। वैसे मैं ऐसा कोई क्लेम नहीं कर सकता क्योंकि कॉलेज टाइम में हम लोग बहुत साथ-साथ नहीं रह रहे थे पर हमारी फ्रेंडशिप हमेशा बनी रही। हम जब भी मिलते थे हमेशा एक से ही बने रहे और अभी भी यही सिलसिला जारी है। अब जबकि दीक्षा की मैरिज हो चुकी है और अब वह यूके में है।
एक बार कॉलेज टाइम की बात है, मैं दीक्षा के घर पर गया तो वह घर पर अकेली थी। उसने उस दिन चूड़ीदार सलवार और कमीज पहन रखी थी और शायद वह उसी समय कहीं बाहर से आई थी। मैं जब वहाँ पहुँचा तो वह बड़ी खुश हुई। मैं उस दिन उसे उसके ड्रेस को देखकर जो थोड़ा ट्रांसपेरेंट था और उसमें उसका फिगर एकदम निखर आया था, थोड़ा अपसेट सा होने लगा।
वह शायद मेरी हालत समझ गई और बोली क्या बात है दिनेश तुम कुछ कहना चाहते हो तो मैंने कहा तुम बुरा तो नहीं मानोगी। तो वह बोली मैंने कभी तुम्हारी बात का बुरा माना है क्या, तुम मेरे दोस्त हो जो कुछ भी कहोगे मैं बुरा नहीं मानूँगी। मैंने कहा दीक्षा यू आर रियली ब्यूटीफुल, तो वह बोली यह तुम पहले भी कह चुके हो कोई नई बात कहो।
मैंने कहा यू आर लुकिंग गॉर्जियस एंड सेक्सी इन दिस ड्रेस। दीक्षा बोली व्हाट यू मीन बाय सेक्सी, एक्सप्लेन मी तो मैंने कहा आज तुम्हारा फिगर बड़ा मस्त लग रहा है इस ड्रेस में। दिनेश यह बताओ हाउ यू फीलिंग विद मी लाइक अ सेक्सी गर्ल अलोनी विद यू टेल मी दिनेश हाउ यू फीलिंग।
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मैंने कहा अगर मैं सच बोल दूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी। दीक्षा बोली प्लीज बोर मत करो अगर तुमने अब अपने दिल की बात नहीं कही तो मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगी और बाय यू तुम झूठ मत बोलना जो तुम्हारे दिल में है मुझसे खुलकर बोल दो। अब मैं सचमुच ट्रबल में आ गया था झूठ बोल नहीं सकता था और सच बोलने पर अगर उसने बुरा मान लिया तो?
मैंने हिम्मत करके कहा दीक्षा तुम्हें देखकर मुझे मन कर रहा है कि मैं तुमको अपनी बाहों में लेकर चूम लूँ और तुम्हारे बदन के हर अंग पर अपने प्यार की बारिश कर दूँ। मैं इससे आगे कुछ कह नहीं पाया मेरी तो जुबान ही बंद हो गई थी.
पर दीक्षा बोली बस इतनी सी बात दिनेश यह बात कोई बड़ी बात नहीं मुझे तुम्हारी डिजायर पूरी करने में कोई परेशानी नहीं और फिर मैं भी तुम्हारे प्यार को अपने बॉडी से महसूस करना चाहती हूँ लेकिन मैं लड़की हूँ जैसे तुमने कह दिया इस तरह कह नहीं सकती थी। आज मौका भी घर पर सभी लोग बाहर गए हैं और आधी रात या कल ही आएंगे, इसलिए हम दोनों के पास आज अपने प्यार को एक्सप्रेस करने के लिए काफी टाइम है।
मैं दीक्षा से कहा कि मुझे भूख लग रही है मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ तो वह बोली ठीक कुछ पैटीज ले आओ मैं चाय बनाती हूँ। मैं जनरल स्टोर तक गया और मैं चार पैटीज और सॉस पैक करवा ली और आते हुए मैंने मेडिकल स्टोर से एक कंडोम का पैकेट भी ले लिया।
मैं अपनी तरफ से पूरी तैयारी करके जाना चाहता था, जिससे बीच में कोई प्रॉब्लम न हो। जब मैं वहाँ पहुँचा चाय रेडी हो गई थी और फिर मैंने और दीक्षा ने बैठकर साथ-साथ पैटीज और चाय ली। उसके बाद मैं और दीक्षा ड्रॉइंग रूम में सोफे पर बैठ गए। दीक्षा मेरे बिल्कुल पास आ गई और मुझसे बोली तो अब बताओ ना मैं कैसी लग रही हूँ और वह मेरे नजरों से अपनी नजरें मिलाते हुए मेरी आँखों में देखने लगी।
मैं थोड़ा नर्वस सा हो गया था क्योंकि मेरे साथ यह इस तरह का पहला एक्सपीरियंस था फिर मैंने दीक्षा को अपनी बाहों में ले लिया। फिर मैं दीक्षा के शोल्डर पर अपनी फिंगर्स से धीरे-धीरे रब करने लगा दीक्षा चुपचाप रही। फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने दीक्षा की कमीज के बाहर से ही उसके बूब्स के ऊपर से हाथ फेरना शुरू कर दिया तो दीक्षा एक्साइट होने लगी और मुझे भी मजा आने लगा। दीक्षा की कमीज एकदम टाइट थी और उसके बूब्स जैसे उसकी कमीज और ब्रा के अंदर कैद होकर रह गए थे।
जब दीक्षा एक्साइटमेंट में आहें भरने लगी तो मुझसे नहीं रहा गया और मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए मेरे इस एक्शन पर दीक्षा को शायद बड़ा मजा आया और उसने भी मेरे लिप्स को अपने लिप्स से चूमना शुरू कर दिया। फिर दीक्षा ने अपनी टंग से मेरे लिप्स पर लिक करना शुरू कर दिया और मेरे लिप्स के बीच अपनी टंग ले जाकर मेरी टंग से अपनी टंग टच कर दी।
मैंने भी अपनी टंग से उसकी टंग को टच करना शुरू कर दिया। अब मुझे बड़ा मजा आया और दीक्षा तो बिल्कुल मस्त हो गई थी। फिर मैं उसकी पीठ (बैक) पर हाथ फेरते हुए उसकी कमीज की जिप को थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी नेक के नीचे हल्का मसाज सा करने लगा।
दीक्षा कुछ नहीं बोली तो मैं भी उसकी कमीज के अंदर नीचे तक उसकी बैक पर हाथ फेरने लगा। दीक्षा की बैक बड़ी चिकनी थी और वह हर तरह से सेक्सी माल थी, पर मुझे आज उसकी बॉडी का रियल टच मिलने पर ही यह अंदाजा हो रहा था कि अगर मैंने यह काम एक-दो साल पहले किया होता।
दीक्षा टॉल थी, गोरी थी उसके बॉडी का हर पार्ट परफेक्ट था और उसकी पतली कमर मेड साइज के टाइट बूब्स और बड़े-बड़े चूतड़ (बट्स)। मैंने दीक्षा को सोफे पर लिटा दिया और अपने आप उसके सर की तरफ नीचे जमीन पर बैठ गया और उसके चेहरे और गर्दन के आसपास किस करने लगा दीक्षा उसका पूरा मजा लेती और कभी-कभी रिप्लाई में वह भी मुझे किस करती।
मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ पर उसकी कमीज के अंदर डाल रखा था और दूसरे हाथ से उसकी कमीज के बाहर से ही उसके बूब्स पर हल्के से हाथ फेर रहा था बस इतना कि मुझे उसके बूब्स का साइज और शेप फील हो रहा था। फिर मैंने दीक्षा की कमीज की जिप को पीछे से धीरे-धीरे पूरा खोल दिया और अब मैं कभी उसकी बैक पर ऊपर और कभी नीचे के हिस्से में मसाज करने लगा.
पर मैं यह काम बहुत धीरे से कर रहा था जिससे बस मुझे उसकी स्किन का टच हो रहा था और दीक्षा भी बस मेरे हाथ को फील कर सकती थी। अभी मैंने उसे मसलना या जोर से रब करना शुरू नहीं किया था मैं जैसे बस उसकी सारी बॉडी को टच करना चाहता था। उसकी पूरी पीठ पर हाथ फेरने बस यह दिक्कत थी कि उसकी ब्रा का स्ट्रैप बीच में आ जाता था।
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धीरे मैंने दीक्षा के बूब्स को आगे से जरा और नजदीक से हल्का सा दबाना और रब करना शुरू कर दिया जिससे दीक्षा की एक्साइटमेंट बढ़ने लगी और वह मेरे इस एक्शन से थोड़ा मस्त होकर मुझे चूमने और मेरे लिप्स पर जोर से किस करने लगी। बस मौका मिलते ही मैंने दीक्षा की कमीज ऊपर को कर दी जिससे वह कमर की तरफ से आधी नंगी हो गई।
फिर मैंने उसकी कमर के आसपास उसको हल्के से टच करना शुरू कर दिया तो वह और मजा लेने लगी। अब मैंने उसकी कमीज को उतारने के लिए और ऊपर को खींचा तो शायद परेशान होकर उसने भी मुझे कोऑपरेट करते हुए मुझे मदद की और अपनी कमीज उतार दी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब दीक्षा के ऊपर के पार्ट सिर्फ ब्रा थी और मैं पहली बार उसकी नंगी बॉडी का नजारा कर रहा था वैसे हम दोनों सालों से साथ-साथ थे और कई बार कंधे में डालकर या बाहों में बाहें डालकर भी घूमा करते थे पर मैंने कभी उसकी बॉडी को उसके साथ रहते हुए सेक्सुअली फील नहीं किया था।
पर आज मैं अपने आप को बेवकूफ समझ रहा था जो ऐसा नहीं किया हूँ अकेले में कई बार मैं उसकी बॉडी का नजारा करके मैं अपने लंड को शांत किया करता था। पर सामने में उसके साथ मस्ती का यह पहला मौका था जब दोनों ही सेक्स डिजायर से एक-दूसरे की बॉडी को टच कर रहे थे।
दीक्षा अब शायद गरम होने लगी थी पर मैं देर तक मस्ती करना चाहता था इसलिए मैंने कोई जल्दबाजी नहीं की और उसे ब्रा के बाहर से ही उसकी बूब्स को मसलने लगा दीक्षा के बूब्स बड़े टाइट थे और साइज में थोड़े बड़े थे और मेरे एक हाथ में एक बार में नहीं आ पा रहे थे।
पर फिर भी मैं उनको एक हाथ से ही मसलने की कोशिश कर रहा था। दीक्षा से अब सहन नहीं हो पा रहा था और उसने अपने शोल्डर से अपनी ब्रा के स्ट्रैप्स अपने आप ही उतार दिए जैसे मुझसे कहना चाह रही थी कि मेरी ब्रा उतार दो, दीक्षा अपने बूब्स और बॉडी को अपनी ब्रा से आजाद करना चाहती थी पर वह मुझसे कुछ बोली नहीं पर वह ऐसा दिखा रही थी जैसे ब्रा की वजह से उसे परेशानी हो रही थी।
पर मैं भी उसकी डिजायर को इग्नोर करते हुए उसके क्लीवेज ब्रा के बाहर और बैक पर हल्का टच, और कभी-कभी किस कर रहा था पर मैंने उसकी ब्रा का हुक नहीं खोला, दीक्षा ऐसी पोजीशन में नहीं थी कि अपनी ब्रा का हुक खोल पाती। एट लास्ट वह परेशान हो गई तो बोली दिनेश यू फूल बस ऐसे ही करते रहोगे कि आगे भी बढ़ोगे जब मेरे बॉडी को अच्छी तरह से टेस्ट लेना है तो मेरे बॉडी को इस ब्रा से फ्री करो ना।
मैंने बहाना किया कि दीक्षा तुमने बताया नहीं नहीं तो मैं कब का यह काम कर देता पर मुझे ऐसा करते हुए शर्म आ रही थी और मैं तुमको नंगा करने में डर रहा था कि कहीं तुम बुरा न मान जाओ। दीक्षा बोली बेवकूफ क्या तुम ऐसे ही पैदा हो गए अगर तुम्हारे पिताजी भी ऐसे शर्माते तो तुम इस दुनिया में नहीं होते, अब जल्दी करो टाइम वेस्ट मत करो।
मैंने कहा जैसे तुम चाहो और मैंने दीक्षा की ब्रा का हुक खोला तो उसने तुरंत अपनी ब्रा उतारकर फेंक दी। वाओ जैसे दीक्षा ने ब्रा उतारी उसके बूब्स उछलकर बाहर आ गए और मैं उसकी नंगी बॉडी को देखकर पागल हो गया। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उनको दबाऊँ या चूसूँ, मसलूँ, काट लूँ क्या करूँ मैं तो उसकी बूब्स देखकर पागल सा हो गया.
फिर मैंने उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों से पकड़कर हल्के-हल्के मसलना शुरू कर दिया तो दीक्षा बोली दिनेश आराम से प्लीज मुझे एक्सपीरियंस नहीं है। मैंने कहा मैं भी तुम जैसा ही हूँ और फिर मैं उसके बूब्स पर जस्ट हाथ फेरने लगा। दीक्षा अपने बूब्स पर मेरे टच का मजा लेने लगी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं.
कुछ मिनट्स के बाद मैंने उसके बूब्स पर प्रेशर बढ़ाना शुरू कर दिया तो भी दीक्षा ने कोई विरोध नहीं किया तो मैं अब दोनों हाथों से उसके बूब्स को मसलने लगा तो दीक्षा बोली दिनेश प्लीज कहीं इनको मरोड़कर घायल मत कर देना प्लीज थोड़ा आराम से करो ना।
मैं फिर भी उनको मसलना जारी रखा और अब मैंने उसके लेफ्ट बूब को दोनों हाथों में लेकर मसलना शुरू कर दिया दीक्षा को अब मजा आने लगा था और वह मेरे प्यार के दर्द में भी मस्त हो रही थी। फिर मैं दूसरे बूब पर भी इसी तरह से मसलना और दबाना शुरू कर दिया तो दीक्षा ने कोई जवाब नहीं दिया।
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अब मेरे मस्ती बढ़ने लगी तो मैं उसके निप्पल को अपने लिप्स से पकड़कर चूसने सा लगा तो दीक्षा मस्ती में सोफे पर उछलने लगी। मुझे और मजा आने लगा अब मैं ऐसा ही दूसरे बूब पर किया तो दीक्षा मस्ती में और उछलने लगी। मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उसके निप्पल को अपने दाँतों से हल्के से काट लिया तो दीक्षा चीख पड़ी और ऊऊईईई म्म्माआआन् करके हाथ-पैर पटकने लगी.
उसकी चीख मुझे अच्छी लगी और मैं दूसरे बूब पर भी दाँतों से काट दिया तो दीक्षा झूठा गुस्सा दिखाते हुए मुझे गालियाँ देने लगी। मुझे किसी ने बताया था कि अगर लड़की ऐसे समय में गालियाँ दे तो इसका मतलब है उसे मजा आ रहा है। अब मैं उसकी अपर बॉडी पर पूरी तरह से सवार होकर उसकी बूब्स, बैक, नेवल, कमर, क्लीवेज, नेक, लिप्स और फेस पर कहीं चूमता कहीं दबाता कहीं पिंच करता कहीं किस करता कहीं चाट रहा था.
और हर तरह से अपने और दीक्षा की बॉडी को एक्साइट करने की कोशिश कर रहा था मैं आज दीक्षा को वह सब मजा देना चाहता था जो मैं ३-४ साल में नहीं दे पाया था, साथ उसकी बॉडी का भी पूरा मजा खुद ले लेना चाहता था पता नहीं नेक्स्ट चांस कब मिले।
मैंने दीक्षा की अपर बॉडी के एक-एक सेमी एरिया पर अपने प्यार के निशान बना दिए थे इससे एक्साइट होकर अब दीक्षा ने भी मेरी कमीज उतार दी और मुझे अपनी बाहों से पकड़कर वह भी मेरे सीने, लिप्स, फेस, शोल्डर्स, बैक आदि एरियाज पर अपने प्यार का इजहार करने लगी और मैं अब शांत होकर बस उसकी बॉडी पर मसाज करते हुए अपनी तरफ से उसे थैंक्स कह रहा था.
और उसके प्यार को उसकी हाथों और लिप्स से अपनी बॉडी के हर एरिया पर महसूस कर रहा था। दोनों अब एक-दूसरे को कॉम्प्लिमेंट करते हुए एक-दूसरे की बॉडी के अपर एरिया पर मसाज, किस, लिक, रब और कैरस कर रहे थे एक कुछ करता तो दूसरा उसका जवाब देता और दूसरा कुछ करता तो पहला उसका जवाब देता जब दीक्षा मेरे प्यार के टच से पूरी तरह से मस्त हो गई.
तो मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया और उसके वेस्ट एरिया पर मसाज करते हुए मैं उसकी सलवार के आसपास रब करने लगा और फिर मैंने उसकी चूड़ीदार सलवार के बाहर से ही उसके पेटों पर मसाज करना शुरू कर दिया और उसे एक्साइट करने लगा तो दीक्षा परेशान होने लगी और अपनी सलवार उतारने के लिए अपनी सलवार का नाड़ा ढूँढने लगी।
मैं उसकी मदद करने और उसे नंगा करने के लिए उसकी सलवार का नाड़ा खोलना चाहता तो वह खुल नहीं पा रहा था तो हम दोनों परेशान हो गए फिर मैंने उसकी सलवार में अंदर तक हाथ डालकर उसकी सलवार का नाड़ा ही जोर से खींचकर तोड़ दिया जिससे दीक्षा को वेस्ट पर रैशेस से भी आ गए और वह दर्द में चीखते हुए मुझे गालियाँ देने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसकी सलवार नीचे खींच दी तो उसने अंदर से ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी उसके गोरे बदन पर ब्लैक पैंटी बड़ी ही ऑड लग रही थी ऐसा लगता था जैसे उसके चाँद से जिस्म को बादलों ने घेर लिया हो। मैंने उसकी थाइज पर धीरे-धीरे मसाज करना शुरू कर दिया और ऊपर उसकी बॉडी को चूमना और चाटना जारी रखा।
दीक्षा को थोड़ी शर्म सी भी लग रही थी जिसकी वजह से वह अपनी टाँगों को चिपका लेती थी तो मैं उसकी दोनों टाँगों के बीच में रास्ता बनाने की कोशिश करने लगा। अब मैं भी उसके साथ सोफे पर बगल में जगह बनाकर आधा लेट गया जिससे उसकी बॉडी को नजदीक से टच कर सकूँ और वह भी मेरी बॉडी का टच ले सके।
इसी बीच दीक्षा ने मेरी बेल्ट खोल दी और मेरी जिप पर भी हाथ डालने लगी। दीक्षा के मेरी जिप के आसपास हाथ फेरने पर मैं अलर्ट हो गया और मैंने काउंटर में उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया तो दीक्षा रुक गई। पर मैंने अब अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अंदर ही डाले रखा और उसकी चूत के आसपास के एरिया पर टच करके उसकी चूत को गरम करने की कोशिश करने लगा।
फिर मैंने उसकी चूत के जस्ट ऊपर क्लिट पर अपनी उँगलियाँ धीरे-धीरे फिरानी शुरू कर दी और दूसरे हाथ से उसके थाइज और बट्स पर मसाज करने लगा। दीक्षा के चूतड़ बड़े सॉलिड और बड़े थे और उन पर हाथ फेरने में बड़ा मजा आया। जब दीक्षा मेरे टच से और मस्त होने लगी तो उसने आँखें बंद कर लीं और अपनी दोनों बाहों से मुझे बैक की तरफ से पकड़कर मुझसे चिपक गई।
मैंने भी अब उसकी पैंटी को और नीचे कर दिया और उसकी चूत के चारों ओर और थाइज और बट्स पर मसलना और मसाज करने लगा। बीच-बीच में मस्ती में, मैं उसकी चूतड़ पर जोर से स्लैप भी कर देता था जिससे एक शानदार आवाज होती और मुझे बड़ा मजा आता था।
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दीक्षा को भी इसमें मजा आता था पर अब मैंने उसकी चूत के आसपास के एरिया पर टच करके उसकी चूत का बुरा हाल कर दिया था। दीक्षा अपनी चूत की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और चुदवाने के लिए पूरी तरह तैयार थी पर मैं उसको और बेचैन कर देना चाहता था जिससे उसकी चुदाई और मजा आए।
अब मेरा लंड भी जोर मारने लगा जिस वजह से मुझे उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मैंने भी अपनी ट्राउजर उतारकर अलग कर दी और मैं भी केवल अंडरवियर में था और दीक्षा एकदम नंगी। अब मैंने दीक्षा के क्लिटोरिस पर अपनी उँगली से धीरे टच करना शुरू कर दिया जिससे दीक्षा पागलों की तरह हाथ-पैर मारने लगी और सिसकियाँ भरने लगी पर मैंने काम जारी रखा और दूसरे हाथ से उसके बट्स को भी मसलता रहा।
उसके बट पर स्लैप करने में जो आवाज होती तो बड़ा मजा आता था ऐसा लगता था जैसे वॉलीबॉल में जोरदार स्मैश लगाया हो। दीक्षा वॉलीबॉल अच्छा खेलती थी उसे जरूर ऐसा लगता होगा जैसे किसी ने उसकी बट्स को वॉलीबॉल बनाकर स्मैश कर दिया हो।
जब दीक्षा चुदवाने के लिए मचलने लगी तो मैं अपना लंड जो पहले से आयरन रॉड की तरह टाइट था को उसकी चूत के लिप्स को दो उँगलियों से फैलाकर उनके बीच रख दिया और केवल हेड को वहाँ पर डाला। पर इस चक्कर में कंडोम तो लगाना ही भूल गया और दीक्षा ने भी ध्यान नहीं दिया।
मेरे ऐसा करते ही दीक्षा तो और परेशान हो गई पर उसकी परेशानी बड़ी अजीब थी उसे मेरे लंड की वजह से दर्द हो रहा था पर वह फिर भी उसे अंदर डलवाना चाहती थी और मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ क्योंकि मुझे भी दर्द हो रहा था। इसी बीच पता नहीं क्यों मैंने अपना लंड बाहर खींच लिया तो दीक्षा तड़पने लगी।
दीक्षा की हालत अजीब थी जब मैं लंड उसकी चूत में डाल रहा था तो वह दर्द से चीख रही थी और बाहर निकलते ही वह मेरे लंड के लिए तड़पने लगी। वह चीख रही थी दिनेश ऐसा मत करो डरो मत अंदर डाल दो उसे नहीं तो मैं आज मर जाऊँगी। मेरे दर्द की परवाह मत करो जल्दी करो अगर वह नहीं कर सकते कुछ और डाल दो अंदर। दिनेश प्लीज जल्दी करो.
मैं तो दंग रह गया मैं नहीं जानता था कि हम जैसे चोदने के लिए परेशान रहते हैं वैसे ही लड़कियाँ भी चुदवाने को परेशान रहती हैं। मैंने इस बार दीक्षा की चूत के दोनों लिप्स को फैलाकर अपने लंड को बीच में टारगेट करके एक धक्का लगाया पर फिर भी मेरा लंड दीक्षा की चूत के अंदर सिर्फ १ या १.५″ तक ही जा पाया और मुझे बड़ा दर्द हो रहा था क्योंकि मेरे लंड की स्किन फट रही थी पर फिर भी मजा आ रहा था।
उधर दीक्षा का भी ऐसा ही हाल था वह भी दर्द से कराह रही थी पर मेरे लंड के अंदर जाने पर वह बड़ी खुश थी और मुझे मेरे लंड को और अंदर तक डालने के लिए एनकरेज कर रही थी चाहे दर्द के मारे उसका भी बुरा हाल था। मैंने इस बार हिम्मत करके एक और जोरदार धक्का पूरी ताकत से दीक्षा की चूत के अंदर लगाया.
और मेरा लंड दीक्षा की चूत के अंदर ¾ तक चला गया पर मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया और मुझे अपने लंड पर कुछ गीलापन सा लगा तो मैंने देखा कि दीक्षा की चूत पर से कुछ खून सा निकल रहा था पर मैं नहीं समझ पाया कि वह कहाँ से निकला। शायद या तो मेरे लंड की स्किन फट गई थी या दीक्षा की चूत पता नहीं।
दीक्षा की चूत बड़ी टाइट थी जबकि वह साइज में मुझसे बड़ी थी पर उसकी चूत किसी १० साल की लड़की जितनी टाइट और इंटैक्ट थी और मुझे उसकी थुआकी की शुरुआत में ही इतनी मेहनत करनी पड़ रही थी। दीक्षा तो मेरे एक्शन से मस्त होती जा रही थी और उसकी भूख बढ़ती जा रही थी और वह मुझे और अंदर डालने के लिए कह रही थी।
मैंने भी फिर हिम्मत की और एक धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और दीक्षा अपनी गाँड उठाकर और अपनी तरफ से धक्का लगाकर चुदवाने को बेताब थी इससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था पर दीक्षा के धक्के से मैं पूरा ही हिल रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में फँस गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जब मेरा दर्द कम हुआ तो मैंने अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए दीक्षा को पकड़ लिया और एक जोर का धक्का आगे-पीछे लगाया तो दीक्षा तो मस्ती में उछल पड़ी और दर्द के बावजूद मुझसे बोली दिनेश बस ऐसे ही आगे-पीछे करो मेरे दर्द की परवाह मत करो चाहे मैं कितना चिल्लाऊँ। चाहे फाड़ ही डालो पर यार बड़ा मजा आ रहा ऐसा पहली बार है जब दर्द में भी मजा आ रहा है।
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दीक्षा आगे बोली यार मैंने काश तुमसे पहले कहा होता पर आज जो मजा तुमने मुझे दिया याद रहेगा, मैं तो दर्द और मस्ती में कुछ कह नहीं पा रहा था बस धक्के पर धक्का लगाने लगा वही मेरा जवाब था। शुरू में एक-एक धक्के के लिए मुझे बड़ी मेहनत करनी पड़ी पर दीक्षा के मस्ती से मुझे मजा आ रहा था और मैं अपने दर्द की परवाह किए बिना उसको और जोर से पेलने लगा।
एक-दो मिनट के बाद मुझे धक्के लगने में दर्द नहीं हो रहा था और दूसरी तरफ से दीक्षा भी धक्कों का जवाब देने लगी। मेरी स्पीड कम होने लगी और दीक्षा की नीचे से स्पीड बढ़ने लगी। यहाँ तक कि मैं रुक गया और दीक्षा ही नीचे से धक्के लगाकर चुदवाने लगी। मैं बीच-बीच में काउंटर अटैक करने लगा।
ऐसे ही कुछ मिनट बीते थे कि मेरे लंड अंदर से गीला हो गया और मैंने दीक्षा की चूत पर झुकते हुए उसे पकड़कर अपने लंड को एकदम उसकी चूत के अंदर रोक लिया। पर अब तक शायद दीक्षा भी गीली हो चुकी थी तो उसने अपनी गीली चूत को जैसे नीचे को खींचा तो मेरा लंड झटके से उसकी चूत से बाहर निकल गया तो दीक्षा परेशान हो गई।
पर जैसे ही मेरा लंड बाहर आया उसमें से सारा माल दीक्षा के बूब्स पर गिर गया और दीक्षा ओह शिट कहती हुई नाराज सी हो गई, वह घबरा गई थी कि कहीं वह प्रेग्नेंट न हो जाए। यह बात उसे अचानक ध्यान में आई थी, पर इस बात से मेरा तो सारा चुदाई का मजा ही खराब हो गया था।
दीक्षा की सारी मस्ती गायब हो गई थी और वह मुझे सारा ब्लेम करने लगी कि तुम मेरी जिंदगी खराब कर दोगे आदि। मैं भी गुस्से में यह कहकर चला आया कि ठीक है अगर मैं ही जिम्मेदार हूँ तो तुमसे जो बने कर लेना मैं जा रहा हूँ। इसके बाद दीक्षा और मेरी दोस्ती भी खत्म हो गई कभी-कभी अचानक मिली भी तो दीक्षा ने नॉर्मल वे में ही बात की उस रात का जिक्र न उसने किया न मैंने।
कुछ टाइम बाद मुझे उसकी मैरिज का इनविटेशन भी आया और मैं उसकी मैरिज पार्टी में कुछ टाइम के लिए फॉर्मली गया, वह मुझसे बात करना चाहती थी पर मैंने फॉर्मली बात करके वहाँ से आ गया। दीक्षा की मैरिज के बाद दीक्षा अपने हबी के साथ यूके चली गई और इस तरह से अब हमारी बातचीत भी एक तरह से बंद हो गई। दीक्षा के इनलॉज पुणे में रहते थे तो मुझे फिर उसके बारे में ज्यादा पता नहीं चला।
कुछ टाइम पहले दीक्षा का मुझे अचानक फोन आया तो मुझे सरप्राइज हुआ क्योंकि उसके पास मेरा फोन नंबर कैसे आया यह मैं समझ नहीं पा रहा था। दीक्षा फोन पर मुझसे बहुत आराम से बात कर रही थी जैसे कॉलेज टाइम में करते थे उसने मुझे बताया कि वह इंडिया में है और वह और उसका हबी अतुल मुझसे मिलना चाहते हैं।
मैं उसे मना नहीं कर पाया और उसने मुझसे शाम को ९:०० पीएम पर घर पर बुलाया। मैं फैसला नहीं कर पा रहा था कि कैसे उससे मिलने जाऊँ और पता नहीं उसका हबी अतुल मेरे और उसके बारे में क्या सोचेगा। एट लास्ट मैंने अपनी और दीक्षा की दोस्ती की खातिर उससे मिलने जाने का फैसला किया और शाम को एक फ्लावर बौके लेकर उससे मिलने चला गया।
जब मैं दीक्षा से मिलने गया तो वह उसी समय घर पर पहुँची थी और उसने साड़ी पहन रखी थी जो उसके नेवल से थोड़ा नीचे बंधी हुई थी। ऊपर उसने बैकलेस ब्लाउज पहना हुआ था और मैरिज के बाद यूके जाकर उसका फिगर और कॉम्प्लेक्शन और निखर गया था अब वह ज्यादा स्लिम और उसका स्किन ज्यादा ग्लोइंग लग रहा था।
जैसे ही मैंने उसको ही बोला और उसे बौके दिया उसने बौके रखकर थैंक कहने के साथ ही मुझे हग किया और मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए। मैं ऐसा एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था और इस तरह के एक्शन के लिए तैयार नहीं था मैं घबरा गया कि कहीं अतुल न आ जाए और पता नहीं क्या सोचे।
मेरी घबराहट को देखकर दीक्षा हँसने लगी और बोली अरे यार यहाँ तुम्हारे और मेरे सिवा कोई नहीं है तुम घबराओ मत। फिर वह बोली दिनेश तुमको पता है मैंने तुमको इस टाइम क्यों बुलाया है। मैं कुछ नहीं समझ पाया और केवल गर्दन हिला दी तो वह बोली, दिनेश तुम्हें वह रात तो याद होगी जब तुम और मैं अकेले मेरे घर पर एक साथ थे।
मैंने उस दिन जो भी किया वह जानबूझकर किया क्योंकि मैं उस दिन थोड़ा नर्वस हो गई थी और तुमको रोकना चाहती थी। पता नहीं क्यों मुझे उस दिन एक डर सा लगने लगा और मुझे उस तरह से तुमको रोकना पड़ा। पर दिनेश मुझे उस दिन तुमको इस तरह से इन्सल्ट नहीं करना चाहिए था। मैंने आज तुमको इसलिए ही बुलाया है कि मैं और तुम वह सब आज दोबारा करें जो उस दिन किया था।
मैंने दीक्षा से कहा प्लीज दीक्षा मुझसे ऐसी बातें अब मत करो मुझे जाने दो अब तुम किसी और के साथ हो, यह सब ठीक नहीं। दीक्षा बोली कम ऑन दिनेश क्या तुम अपनी दोस्त की इतनी सी इच्छा पूरी नहीं करोगे और शायद तुम्हारी भी तो तब यह इच्छा थी। मैं उस रात का प्यार आज तक नहीं भूल पाई और अब तक उस रात के एक-एक पल को याद कर मेरे पूरे बॉडी में कुछ होता है.
इतना कहकर उसने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिराकर अपनी दोनों बाहें खोल दीं मैं उसके सेक्सी फिगर को देखकर बेचैन हो गया पर उसकी पहली वाली बात याद कर कुछ नहीं कर पाया तो उसने आगे बढ़कर मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैं हाइट में उससे थोड़ा छोटा था, उसने मुझे अपनी दोनों बाहों में जकड़ लिया।
मैं उसकी गरम साँसें महसूस कर रहा था। फिर उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। जैसे ही मैंने उसकी साड़ी के पल्लू जमीन से उठाया उसने मुझे छोड़ दिया और सर्कल में घूमने लगी जिससे उसकी साड़ी उसके वेस्ट से निकलती चली गई और थोड़ी देर में उसकी साड़ी का पल्लू मेरे हाथ में था और दूसरा एंड जमीन पर।
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दीक्षा दोबारा मुझसे लिपट गई मैं कुछ डिसीजन नहीं ले पा रहा था कि साली को दबा लूँ या छोड़कर चला जाऊँ। मैं बेवकूफ नहीं बनना चाहता था और उसके इरादे को समझने की कोशिश कर रहा था। दीक्षा को मैंने बैक से पकड़ लिया उसने बैकलेस ब्लाउज और अंदर ब्रा पहनी हुई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
पर उसके बूब्स उसके टाइट ब्लाउज के अंदर से ही जोर मार रहे थे और मैं अपनी चेस्ट पर उनकी गोलियाँ और हार्डनेस फील कर रहा था। उसके बदन की गर्मी से अब मुझे भी एक्साइटमेंट होने लगी और मैंने उसके ब्लाउज को उतारना शुरू कर दिया तो दीक्षा बोली दिनेश प्लीज बेडरूम में चलते हैं। आई वांट यू टू बी कंफर्टेबल, मैंने कहा ओके और अब मैंने दीक्षा की चुदाई का फैसला कर लिया था।
बेडरूम में जाते ही मैंने दीक्षा का ब्लाउज उतार दिया और अब वह केवल ब्रा में थी ऊपर से और बैक से ऊपर की तरफ एकदम नंगी थी। मैरिज के बाद दीक्षा की स्किन और ग्लोइंग हो गई थी और अब मेरे हाथ उसकी बॉडी पर ऐसे फिसल रहे थे जैसे मार्बल हो। उसका गोरा बदन एकदम संगमरमर बन गया था।
मैं कंट्रोल नहीं कर पाया और दीक्षा के बैक पर मसाज करते हुए उसके बूब्स को ब्रा के बाहर से ही टच करने लगा। साथ ही मैं उसके संगमरमरी बदन पर चूमने और चाटने लगा उसके बदन पर मेरे लिप्स का टच दीक्षा को बेचैन कर रहा था और वह थैंक्स, आह्ह , म्मम, उह्ह्ह करके अपनी मस्ती का इजहार कर रही थी। फिर मैंने अपने लिप्स से उसके बूब्स के बाहर से ही चूमना शुरू कर दिया।
फ्रेंड्स मैंने सुना है कि फीमेलस के बूब्स मैरिज के बाद बड़े और ढीले हो जाते हैं पर दीक्षा के बूब्स तब के मुकाबले और टाइट हो गए थे। मैं ज्यादा देर तक कंट्रोल नहीं कर पाया और मैंने दीक्षा की ब्रा भी उतार दी तो उसके बूब्स देखकर मैं पागल सा हो गया। वाओ उसकी पतली कमर और उसके ऊपर उसके टाइट बूब्स कोई बस देखकर और महसूस करके ही जान सकता है, आई कांट डिस्क्राइब दैट सीन।
उसके बूब्स एकदम टाइट और तने हुए थे बिल्कुल भी लटक नहीं थे। उसके नंगे बूब्स उसकी नंगी कमर के ऊपर साइड से ऐसे लग रहे थे जैसे किसी मैंगो की जोड़ी हो उसके बूब्स का निप्पल ब्राउनिश पिंक और उसके बूब्स व्हाइटिश पिंक लग रहे थे। मन कर रहा था किसी मैंगो की तरह उनका रस चूस लूँ।
दीक्षा को मैंने बेड पर आराम से लिटा दिया और खुद भी उसकी बगल में लेट गया। फिर मैंने उसके लिप्स पर लिप्स रखकर उसे किस किया तो वह भी रिप्लाई देने लगी और अपनी टंग मेरे लिप्स पर ले जाकर लिप्स के अंदर से टंग टू टंग कॉन्टैक्ट करने लगी मुझे भी मजा आने लगा तो मैंने भी रिप्लाई में ऐसा ही किया।
फिर मैंने उसकी नेक, शोल्डर और आर्मपिट्स पर किस करते हुए उसके क्लीवेज पर किस करने लगा। मैंने अपने एक हाथ से दीक्षा को बैक से होल्ड कर लिया और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को टच करने लगा। मैं उसके बूब्स पर अपने हाथ से सर्कल बनाते हुए धीरे से टच कर रहा था अभी मैंने उसके बूब्स को दबाना शुरू नहीं किया था।
मैंने इसके बाद दीक्षा के बूब्स पर टंग से लिक करना शुरू कर दिया पर मैंने यह काम बड़े केयरफुली कर रहा था। जब मैंने उसके दोनों बूब्स को लिक कर लिया तो फिर अपने हाथ से उसके बूब्स पर अब हल्का दबाव बनाते हुए उनको रब करने लगा और उसकी बॉडी के और हिस्सों और उसके नेवल के एरिया पर लिक करने लगा दी देर में कुछ अच्छा मौका है।
मैं अपनी एक्साइटमेंट को अपने हाथों से ही यूज कर रहा था और मैंने उसके पेटीकोट को नीचे से उसकी नी तक सरका दिया और जोर से उसकी दोनों टाँगों को नीचे से लेकर उसके नीज तक स्लोली रब करने लगा। मैं कभी जोर से दबाता और कभी आराम से सहलाता। पर अब दीक्षा अपनी आइज क्लोज करके मेरी मसाज का मजा ले रही थी और उसे अपने बचे हुए क्लोथ्स का भी ध्यान नहीं था।
अब मैंने उसके पेटीकोट को उसके नी से थोड़ा ऊपर तक कर दिया था। फिर मैंने सहलाने का दायरा उसकी नीज तक कर दिया। दीक्षा ने कुछ नहीं कहा वह पहले की तरह ही शांत थी। अब मैं दीक्षा की टाँगों को उसके नीज से लेकर नीचे पैरों और फीट फिंगर्स तक रब कर रहा था। कभी एक टाँग पर करता फिर दूसरी टाँग पर।
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ऐसे मैं धीरे-धीरे और मस्ती के साथ सहला रहा था। एक्चुअल दीक्षा मेरे और मैं उसके बॉडी टच का मजा ले रहे थे पर एक-दूसरे से कुछ नहीं कह रहे थे। जैसे ही मैंने दीक्षा की नी से ऊपर को बढ़ना चाहा तो उसकी थंडरिंग स्मूथ थाइज का एरिया शुरू होता था। वहाँ मसाज करने से पहले मैं चाहता था कि दीक्षा पूरी तरह मेरे टच से मस्त हो जाए और मेरी मस्ती में कोई रुकावट न पैदा करे।
इसलिए मैंने केयरफुली पहले दीक्षा जो साइड एक्शन में लेटी हुई थी की अपर थाई को अपने आर्म से दबाया जिससे अगर वह मना करे तो आगे न बढ़ जाए। पर दीक्षा ने कोई रिएक्ट नहीं किया तो मैंने उसकी लोअर थाई को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसके लोअर (नीचे वाले) लेग पर उसकी थाई से लेकर नीचे तक धीरे-धीरे रब करने लगा।
दीक्षा अब आराम से शांत थी और मैं भी बदल-बदलकर उसकी दोनों थाइज, नीज, लेग्स और फीट एरिया पर आराम से रब करने लगा। उसकी चिकनी, गोरी और स्मूथ टाँगें और थाइज को टच करने में बड़ा मजा आ रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि इन सब एरिया को किस करूँ, काट लूँ और या फिर अपना लंड निकालकर अपने लंड पर ऑयल लगाकर लंड से मसाज करूँ।
पर यह सब इतनी जल्दी नहीं किया जा सकता था इसके लिए माहौल तैयार करना जरूरी था। अब मैं अश्योर्ड हो चुका था कि दीक्षा पूरी तरह मस्त हो चुकी है और मेरे फिंगर्स के टच से अपना दर्द भूल चुकी है। मैं समझ गया था कि अब मैं उसको और गरम करके उसकी चूत की प्यास बढ़ाकर अपने लंड की भूख को मिटा सकता हूँ, पर यह एक लॉन्ग प्रोसेस थी।
पहले मुझे उसको गरम करके उसकी चूत की प्यास को बढ़ाना था जिससे वह मुझसे चुदवाने को और भी बेचैन हो जाए। रीडर यू नो जब एक औरत सेक्स के लिए प्यासी होती है तो उसका क्या हाल होता है, मुझे दीक्षा को उसी स्टेज पर ले जाकर चोदना था।
दीक्षा के लेटे होने और ब्रीथ करने के कारण उसकी गोरी चिकनी कमर को देखते ही मुझे और मजा आने लगा और अचानक मैंने उसकी कमर पर बैक साइड से हल्के से रब किया। मेरे इस एक्शन पर दीक्षा एकदम से अपने पेट के बल चित लेट गई। जिससे मैं समझ गया कि उसे मेरे टच से मजा आ रहा है और वह अपनी वेस्ट पर रब करवाना चाहती है।
अब मैं अपने दोनों हाथों से उसकी बैक के नंगे पोर्शन पर आराम से रब करना शुरू कर दिया। दीक्षा ने कोई नेगेटिव रिएक्शन नहीं किया तो मैं अपना प्रेशर और स्पीड बढ़ा दी और उसके बैक के पूरे नंगे एरिया पर रब करने लगा। दीक्षा कभी-कभी साँसें जोर-जोर से लेकर और अपनी टाँगों को ऊपर उठाकर पटक रही थी। मैं समझ गया था कि उसे मजा आ रहा है और मेरे एक्शन से वह मस्त हो रही है।
अब मैं आराम से और मस्ती के साथ दीक्षा की नंगी पीठ (बैक) पर अपने हाथ का कमाल दिखाना शुरू कर दिया और कभी-कभी उसकी साइड यानी आर्मपिट्स के आसपास भी हाथ फिराने लगा। जिससे दीक्षा के एक्साइटमेंट बढ़ने लगी तो मैंने दीक्षा की बैक पर पूरी तरह से मसलना, मसाज करना और रब करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कभी-कभी मैं साइड से दीक्षा बूब्स को भी टच कर देता था पर अभी मैं उसकी नंगी बैक को अपने हाथों से मसल रहा था और मुझे तो उसकी नंगी बॉडी को दबाने में मजा आ रहा था। साइड से दीक्षा के गुलाबी बूब मुझको दोबारा से बेचैन कर रहे थे, इसी बीच दीक्षा ने अपने दोनों हाथ ऊपर को कर दिए तो उसके बूब्स और आर्मपिट मुझे और एक्साइट करने लगे।
मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं उसकी बैक पर मसाज छोड़कर दोनों साइड से उसके बूब्स पर रब किया तो मेरे हाथों को ऐसा मजा आने लगा कि वहाँ से हटे ही नहीं। दीक्षा को भी इससे एक्साइटमेंट हुई और वह एकदम से पलट गई उसके बूब्स १५ साल की लड़की के जैसे उसके चूचे देखकर तो मैं एकदम बेचैन सा हो गया और मेरे पूरे बदन में कंपकंपी सी होने लगी।
मन तो कर रहा था कि साली के चूचों को मुँह में लेकर सारा दूध पी जाऊँ। अब दीक्षा खड़ी हो गई वह केवल पेटीकोट पहने हुए थी और पेटीकोट के अंदर उसने पैंटी नहीं पहनी थी जो कि साफ बाहर से ही पता चल रहा था। उसकी नंगी जाँघें उसके पेटीकोट के अंदर से ही साफ महसूस हो रही थीं और उसकी चूत के एरिया का ट्रायंगल भी उसके पेटीकोट के बाहर से ही साफ दिखाई दे रहा था।
मुझे उसे देखकर शर्म सी आ रही थी और मैं उसके बदन में उसके बॉडी को टच नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं उससे नजरें नहीं मिला पा रहा था। जबकि वह औरत होकर भी मेरे सामने नंगी थी, फिर भी मैं ही उससे शर्मा रहा था। फिर हिम्मत करके मैंने दीक्षा के बूब्स को मलने के लिए तैयार हो गया।
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मैंने निप्पल्स के आउटर एरिया में रब करना शुरू कर दिया और इसके बाद मैं दोनों बूब्स को हाथों में लेकर जैसे ही रब किया साले मेरे हाथ से फिसल गए। उधर इस बात पर दीक्षा जोर से हँस पड़ी तो मैंने फिर ट्राई किया पर इस बार फिर उसके बूब्स मेरे हाथों से फिसल गए। हार्ड और स्मूथ होने की वजह से वह ज्यादा ही चिकने हो गए थे और मेरे हाथों की पकड़ से बाहर हो जाते थे।
अब मैंने दोनों बूब्स को पकड़ने की बजाय हाथों से मसलना शुरू कर दिया जैसे रोटी बनाने के लिए आटा गूंथते हैं। बीच-बीच में मैंने उसके निप्पल के आउटर एरिया को हाथों में लेकर जोर से मसला तो दीक्षा की चीख निकल गई। फिर मैंने दीक्षा के बूब्स और अराउंड एरिया को एक साथ मसलना और उस पर मसाज करना शुरू कर दिया.
तो दीक्षा को मजा आने लगा और वह अपने मुँह से जोर-जोर से आआह्ह उउउह्ह्ह म्मम करके आवाजें निकालने लगी। कभी वह अपने चूचों को जोर से दबाने का कहती और जब मैं जोर से दबाता तो कहती अरे धीरे से क्या मार डालोगे मुझे। दीक्षा के चूचों पर मालिश करने में बड़ा मजा आ रहा था.
पर मैं आज उसे इतनी जल्दी छोड़ने वाला नहीं था आज मैं उसके बदन का एक-एक पुरजा मसल देना चाहता था जिससे साली मेरी चुदाई को याद रखे। मैं साइड में उसकी आर्मपिट और शोल्डर एरिया पर भी मसाज कर रहा था। फिर मेरा ध्यान दीक्षा की पतली कमर पर गया वह इतनी पतली तो नहीं थी २८-२९″ की होगी पर एक शादीशुदा लेडी के हिसाब से तो वह मस्त माल थी।
अब मैंने उसकी पतली कमर पर भी मसाज करना शुरू कर दिया तो दीक्षा बेड पर मस्ती में उछलने लग गई तो मैं उसके ऊपर लेटकर उसको दबा दिया। इस पर दीक्षा फिर मस्ती में आने लगी और जोर-जोर से साँसें लेती हुई आहें भरने लगी, जिसे सुनकर मेरी बेचैनी बढ़ रही थी पर दोस्तों बड़ा मजा आ रहा था।
मैंने अभी तक दीक्षा के एब्डॉमेन या नेवल से नीचे के एरिया को टच नहीं किया था अब मैंने आगे बढ़ने का इरादा किया तो मेरा ध्यान दीक्षा के पेटीकोट पर गया जो उसकी सेक्सी फिगर को कवर करने में नाकामयाब था और उसकी चूत के आसपास और जाँघों (थाइज) का एरिया पेटीकोट के बाहर से ही फील किया जा सकता था।
मैंने दीक्षा के पेटीकोट की डोरी को साइड से खोल दिया पर मैंने पेटीकोट को उतारा नहीं। मैं तो केवल मसाज के लिए रास्ता बना रहा था। अब उसका पेटीकोट ढीला हो गया था और मैं दीक्षा के नेवल के नीचे के एरिया में भी रब करने लगा।
इस एरिया में मसाज करने पर दीक्षा की एक्साइटमेंट बढ़ गई थी और वह जोर से अपने पैर पटकने लगी जिससे उसका पेटीकोट नीचे से उसकी थाइज तक सिमट गया और ऊपर से तो वह खुला हुआ ही था। लेकिन मेरा हाल थोड़ा बुरा हो गया था मुझे अपने लंड को कंट्रोल करना पड़ रहा था जो मेरे लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा था।
जब दीक्षा की एक्साइटमेंट ज्यादा बढ़ गई तो मैंने फिर से दीक्षा के बूब्स और कमर के एरिया में दोबारा मसलना शुरू कर दिया। मैं दीक्षा के नेवल से अपर के एरिया पर और नीचे हाथ डालकर उसकी बैक पर भी मसाज करने लगा। मैंने सोच लिया था कि जब तक दीक्षा खुद नहीं कहेगी मैं उसके पेटीकोट को नहीं टच करूँगा।
मैं फिर और दीक्षा के बूब्स, बेली, कमर, आर्मपिट, शोल्डर और बैक पर दोबारा लगाया और फिर मसाज करने लगा पर इस बार मैंने अपने हाथों का प्रेशर बढ़ा दिया था। जिससे दीक्षा को मजा आ रहा था। पर जब मैंने उसके बूब्स पर जोर-जोर से मसलना और मसाज करना शुरू किया तो वह एकदम पागल सी हो गई और जोर-जोर से मोन करने लगी।
आआह्ह उउउह्ह्ह म्मम श्श्श्श और अजीब से आवाजें निकालने लगी। मुझे भी मजा आने लगा तो मैं और जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलने लगा और बीच में उसकी दोनों चूचियों को जोर-जोर से मसल देता था तो दीक्षा चीखने लगती थी। मुझे मस्ती आने लगी तो अब मैंने उसकी दोनों निप्पल्स को अपनी फिंगर्स से मसलना शुरू कर दिया.
तो दीक्षा और जोर से चीखने लगी और मुझे भी और मजा आया। अब दीक्षा मस्ती से पागल होने लगी थी, वह हाँफते हुए बोली दिनेश प्लीज अब कमर नीचे भी तो कुछ करो नहीं तो तुम आज पूरी रात मेरी चूचियों को काट डालोगे। मैंने कहा जैसी आपकी मर्जी पर मेरा आपकी चूचियों का दूध पीने का मन कर रहा था।
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तो वह बोली वह भी पिलाऊँगी पर पहले तुम मुझे पूरी तरह मस्त कर दो मेरे बदन के एक-एक पार्ट को अपनी फिंगर्स से मस्त कर दो बड़ा मजा आ रहा है जहाँ तुम्हारी फिंगर्स का टच नहीं हुआ वहाँ डर हो रहा है। मैंने कहा मेरे पास तुम्हारी चूत अंदर तक मसाज करने वाला हथियार भी है।
मेरी इस बात पर दीक्षा बोली तुम बहुत शैतान हो गए हो और ज्यादा बातें बनाने लगे हो। मैंने कहा तुम्हारे गोरे नंगे बदन को देखकर तो अंधा भी शैतानियाँ करने लगे। और मैंने तो अभी शैतानी शुरू भी नहीं की है, पर जब करूँगा तो तुम मुझसे दोबारा करने को कहोगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने जैसे ही दीक्षा के पेटीकोट को नीचे को पुल कर दिया तो दीक्षा ऑलमोस्ट नंगी हो गई उसकी चूत के आसपास एब्डॉमेन का एरिया एकदम नंगा हो गया। दीक्षा ने शायद आज ही अपनी चूत शेव करवाई थी वह एकदम बाल्ड थी। पर सामने से उसकी चूत बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही थी बस वर्टिकल लिप्स के बीच की लाइन से दिखाई दे रही थी।
मैंने अपने हाथों से धीरे-धीरे पूरे एरिया पर रब करने लगा। पर जैसे ही मैं किसी एरिया पर मसाज के लिए प्रेशर इंक्रीज करता दीक्षा पागलों की तरह से अपनी टाँगें और हाथ मारने लगती। जब मैंने उसकी थाइज पर जोर से मसाज किया तो उसने अपनी दोनों थाइज को क्लोज करके चिपका दिया।
मैंने भी जल्दी से उसकी चूत पर हाथ डालकर वहाँ पर रब करने लगा तो दीक्षा का तो बुरा हाल हो गया था वह मस्ती में छटपटाने लगी और उसने अपनी दोनों थाइज को ओपन कर दिया तो मेरे तो मजे ही आ गए अब मैं उसकी चूत, थाइज या एब्डॉमेन जहाँ चाहे वहाँ फिंगर्स कर सकता था।
दीक्षा की हालत अब खराब हो गई थी वह अब मेरे एक्शन को रोक नहीं पा रही थी, मैं जैसे मर्जी आए उसके हर पार्ट को मसलता, रगड़ता और मसाज कर रहा था। जब मेरी मस्ती और बढ़ी तो मैंने दीक्षा की चूत पर उसकी चूत के लिप्स के बीच फिंगर्स डालकर अंदर तक उँगली डाल दी।
दीक्षा परेशान हो गई पर शायद उसे उतना ही मजा भी आ रहा था क्योंकि उसने मुझे रोका नहीं। मेरा भी बुरा था साला लंड संभाल नहीं पा रहा था पर मैं अपना ध्यान लंड से हटाकर उसे रोकने की कोशिश कर रहा था। उसके बाद मैंने उँगली से उसकी चूत के छेद के अंदर तक रब करना शुरू कर दिया।
मेरे इस एक्शन से तो दीक्षा पूरी तरह से चित हो गई और बोली दिनेश प्लीज अब बस करो और एकदम से पलट गई। दीक्षा की चूत का बुरा हाल हो गया था अगर मैं नहीं होता तो वह अपनी चूत के अंदर कुछ भी डाल लेती। फिर मैंने अपने थंब को दीक्षा की चूत के आसपास रब करना शुरू कर दिया और मौका पाते ही उसकी चूत के अंदर पूरा थंब डाल दिया।
मेरा थंब पूरा उसकी चूत में गया तो दीक्षा की खुजली जरा कम हुई और वह अब थोड़ा इंडायरेक्ट चुदाई का मजा लेने लगी। शायद वह ऐसा अक्सर करती होगी फर्क बस यह था कि थंब उसके बजाय मेरा था। मेरा थंब लंड की तरह चूत में अंदर-बाहर फिसलने लगा। दीक्षा को मजा तो आ रहा था पर उसकी चूत की खुजली पूरी तरह से दूर नहीं हो रही थी।
वह मस्ती में मेरे से चिपक गई जैसे कहना चाहती हो कि कब चोदोगे पर वह बोली कुछ नहीं। मैंने अपने आप को दीक्षा की दोनों टाँगों के बीच फिक्स कर लिया और उसकी दोनों टाँगों को और फैलाकर उसकी चूत को और चौड़ा कर दिया मुझे उसकी चूत का छेद साफ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमें मैं अपने थंब को सीधा डाल सकता था।
पर मैंने बिना टाइम वेस्ट किए अपने लंड को सीधा उसकी चूत के छेद में झोंक दिया और मेरा लंड दीक्षा की चूत में आधा धंस गया। यह शायद पहला मौका था जब चुदाई में मुझे इतनी आसानी लंड डालने का मौका मिला हो। मैंने एक और जोर का धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड दीक्षा की चूत में कील (कील) की तरह ठोक गया।
आज उसकी चूत चिकनी हो रखी थी इसलिए अब मैं अपने लंड को ऊपर-नीचे रगड़ने लगा तो दीक्षा की चूत में सरसराहट होने लगी। दीक्षा ने भी नीचे से काउंटर अटैक कर दिया और अपनी गाँड का एरिया ऊपर को उठाकर खुद भी चुदाई करवाने लगी। आज दीक्षा को चुदाई में दर्द नहीं हो रहा था और दोनों ही मस्त थे वह आज बड़ी सैटिस्फाइड और हैप्पी लग रही थी।
मैंने दीक्षा की चूत में ऊपर-नीचे रगड़म-पड़े शुरू कर दी और दीक्षा भी अपनी चुदाई करवाने लगी। धीरे-धीरे मेरी स्पीड बढ़ गई तो बेड पर जैसे तूफान सा आ गया। मैंने चुदाई के साथ-साथ दीक्षा पूरे बदन को चूमना, चाटना, मसलना और रब करना भी चालू रखा था। मेरे इस एक्शन का दीक्षा भी सेम जवाब दे रही थी बस जवाब के लिए उसके पास लंड नहीं था नहीं तो वह भी पूरे जोर से हमारी चुदाई एक्सप्रेस को धकेल रही थी।
अचानक दीक्षा ने मुझसे रिवर्स पोजीशन में आने को कहा मतलब मैं बेड पर लेट गया और दीक्षा मेरे ऊपर आ गई। मुझे तो इससे फायदा ही हुआ क्योंकि मैं पूरी ताकत से चोदने के चक्कर में अपनी काफी एनर्जी वेस्ट कर चुका था और इस पोजीशन में मुझे रिचार्ज होने का मौका मिल गया।
इतने में मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरी पीठ पर हाथ लगाया पहले मैंने सोचा कि मुझे धोखा हुआ है पर जैसे ही मैंने पीछे देखा तो मेरी तो साँसें ही रुक गईं, एक अबाउट ५’ ६″ का बंदा मेरे पीछे एकदम नंगा खड़ा था और उसका लंड जो मेरे लंड से थोड़ा मोटा और लंबा भी था तना हुआ था। मेरी तो हालत खराब हो गई मुझे समझ में आ गया कि वह दीक्षा का हबी अतुल था।
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पर वह मुझे देखते हुए हँसने लगा और बोला कैरी ऑन दिनेश, तू जिसको चोद रहा मेरी ही बीबी है। मुझे अपनी बीबी को चोदते देखना बड़ा रिलैक्सिंग लगता है और मेरे कहने पर ही दीक्षा और मैंने मिलकर यह सारा ड्रामा किया था और मैं तुमको स्टार्टिंग से ही देख रहा हूँ।
यू आर एक्सीलेंट पर यार अब मुझसे कंट्रोल नहीं होता इसलिए अब मैं भी पीछे से दीक्षा की गाड़ी (गाँड) की सवारी करूँगा तुम आगे से लगे रहो। इसके बाद अतुल ने थोड़ा थूक लेकर अपने खड़े लंड पर लगा दिया और पूरे लंड को तेल चिकना कर लिया। इसके बाद मैं पीछे से दीक्षा के दोनों चूतड़ को थोड़ा फैलाकर सीधे दीक्षा की गाँड का निशाना लिया और अपना लंड उसकी गाँड में पेल दिया।
पर उसके लंड का आधा हिस्सा ही अंदर जा पाया और दीक्षा तो एकदम से हैरान रह गई कि यह क्या हुआ। उसको बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि वह उसकी गाँड में अपना लंड ठोकने वाला है, पर उसे मजा आ रहा था। अब जैसे ही अतुल ने उसकी गाँड में अपना लंड दोबारा धकेला उसने भी पीछे को ठुकवाने के लिए अपनी गाँड को धकेला।
जिससे मेरा लंड दीक्षा की चूत से आधा बाहर आ गया और अतुल का लंड दीक्षा की गाँड की गहराई में समा गया और दीक्षा की दर्द और मस्ती में हल्की सी चीख निकल गई। जैसे ही उसे अपनी चूत में मेरे आधे लंड की कमी महसूस हुई वह फिर अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ धकेलने लगी और पीछे से अतुल का आधा लंड उसकी गाँड से बाहर आ गया।
अतुल ने दीक्षा की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और उसकी गाँड में धक्का लगाने की कोशिश करने लगा, एक-दो बार तो उससे जोर लगाना पड़ा पर दीक्षा ने भी फिर पीछे को जोर लगाया। क्योंकि दीक्षा की गाँड धक्के के बाद ही अतुल का लंड उसकी गाँड में आगे-पीछे होने लगा।
आज पहला मौका था जब मैं इस तरह की सिचुएशन में था और दीक्षा चुदवाने और गाँड मरवाने का मजा एक साथ ले रही थी नहीं तो साली औरतें गाँड मरवाने में बड़ा नखरा करती हैं। शायद उनको इसमें दर्द ज्यादा होता है, मैं भी चोदने में ज्यादा इंटरेस्टेड रहता हूँ। पर आज वह भी दोनों तरफ से धक्कों का जवाब अपने चूतड़ आगे और पीछे धकेलकर दे रही थी।
ऐसे में दीक्षा की चुदाई के साथ गाँड मस्ती का मेरा मजा डबल हो गया था। हम दोनों भी मस्त होकर उसकी चूत और गाँड में अपना लंड पूरी ताकत से ठोकने लगे। उधर दीक्षा भी मस्त होकर अपने चूतड़ आगे और पीछे धकेलकर चुदवाने और गाँड मरवाने में पूरा कोऑपरेट कर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने भी मौका देखकर उसके चूचे दबाने शुरू कर दिए क्योंकि अब उसको कमर से पकड़ने की जरूरत नहीं थी वहाँ अतुल अपने आप ही उसको थामे हुए था। दीक्षा भी मस्ती एंजॉय कर रही थी जिसका पता मुझे उसके बूब्स से चल रहा था क्योंकि मस्ती की वजह से उसके बूब्स एकदम टाइट हो गए थे जिनको मसलने में मुझे और भी मजा आ रहा था।
इधर दीक्षा की तो डबल मस्ती हो गई थी क्योंकि वह भी मेरे साथ अपने चूचे दबवाने और गाँड मरवाने का डबल मजा ले रही थी। अतुल और मेरा लंड दीक्षा की गाँड और चूत में सुपर फास्ट ट्रेन की तरह दौड़ रहा था और दीक्षा भी अपनी गाँड और चूत के अंदर डबल लंड की सरसराहट का मजा ले रही थी।
सरप्राइज कि उसे दो लंडों की वजह से गाँड और चूत में दर्द नहीं हो रहा था। वैसे अतुल का लंड दीक्षा की गाँड में पूरी तरह से ठुका हुआ था वह ढीला नहीं था पर धक्का पेलने में ज्यादा पेन नहीं हो रहा था साथ ही आज दीक्षा की मसाज करके मैंने उसकी पूरी बॉडी को मस्त कर रखा था।
अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ाकर दीक्षा की चूत को अपने लंड से पूरी ताकत के साथ ठोकना शुरू कर दिया। दीक्षा अब जोर-जोर से आवाजें निकाल रही थी पर अब वह पहले की तरह खुश नजर नहीं आ रही थी पर उसकी आहें मुझे और एक्साइट कर रही थीं और मैंने और जोर से उसकी चुदाई करने लगा।
मुझे दीक्षा की चीख में एक अलग ही मजे का एक्सपीरियंस हो रहा था और मैं और जोर से उसकी चूत को अपने लंड से ठोक रहा था। उधर पीछे से उसका हबी अतुल उसे पूरी मस्ती से उसकी गाँड मार रहा था, मुझे ऐसा लगा कि वह गाँड मारने में एक्सपर्ट था और दीक्षा भी गाँड मरवाने में एक्सपर्ट हो गई थी।
मेरे अतुल की बीबी को चोदने से उसे कोई ऑब्जेक्शन नहीं हो रहा था और वह तो अपनी बीबी को चुदते देखने में मजा ले रहा था। करीब ५-६ मिनट बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और मैं थकने लगा तो मैंने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो दीक्षा भी थोड़ा रिलैक्स लगने लगी। पर उसकी गाँड पर अतुल पूरी ताकत से पेलाई कर रहा था।
अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड के अंदर कुछ सरसराहट सी हो रही है और अंदर कोई लिक्विड निकलने को बेताब है मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है दीक्षा तो शायद डबल धक्कों की वजह से पहले ही झड़ चुकी थी। मैंने दीक्षा की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोककर स्टॉप कर दिया और फिर अपने लंड को जैसे ही बाहर निकाला दीक्षा ने लपककर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया।
इससे अतुल का खड़ा लंड दीक्षा की गाँड से निकलकर बाहर आ गया। मेरे लंड के अंदर से सारा लिक्विड धीरे-धीरे होता हुआ दीक्षा के मुँह में जाता सा लगने लगा। उधर दीक्षा ने मेरे लंड के जूस को ऐसे पी लिया जैसे वह कोई सॉफ्ट ड्रिंक या फ्रूट जूस हो। जैसे ही दीक्षा ने मेरे लंड को छोड़ा तो वह सिकुड़कर एकदम पीनट बन गया था।
मैं बेड से उठकर अलग हो गया और क्लोथ्स लेकर बाथरूम में चला गया। उधर बाहर आते ही अतुल के लंड का भी बुरा हाल हो गया था पर जैसे दीक्षा ने मेरे लंड को छोड़ा मेरे बाथरूम से बाहर आने तक दीक्षा ने अतुल के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में ही अतुल के लंड का भी मेरे जैसा ही हाल हुआ और दीक्षा उसके लंड का भी सारा जूस पी गई।
मैंने दीक्षा जैसी सेक्स एक्सपर्ट लेडी पहले नहीं देखी थी, मेरे दोस्त कहा करते थे कि लंबी लड़कियाँ सेक्स में भी ज्यादा एक्सपर्ट होती हैं। मैं अब बेड से दूर अपने क्लोथ्स पहनकर सोफे पर बैठ गया और हबी-वाइफ की सेक्स लीला का आनंद ले रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई पॉर्न मूवी देख रहा हूँ।
अतुल के लंड का पूरा रस चूसने के बाद दीक्षा उसके लंड को सहलाने लगी और कभी टंग से चाट रही थी। मुझे लगा कि वह अतुल से भी चुदवाना चाहती थी। दीक्षा तो जबरदस्त सेक्सी थी डबल ठुकाई के बाद भी चुदवाने को रेडी हो गई थी पर यह बात है कि मैंने उसकी चूत पर फोर्सफुल ठुकाई नहीं की थी.
पर अतुल ने उसकी गाँड पक्का फाड़कर रख दी थी जिसकी वजह से अब वह उसे चोदने में परेशानी महसूस कर रहा था। इधर मुझे नींद आ रही थी पर दीक्षा की चुदाई देखने के कारण मैं वहीं सोफे पर ही लेट गया। फिर दीक्षा ने अतुल के लंड को एकदम टाइट बना दिया था.
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और वह उसे बेड पर लिटाकर उसके ऊपर उसकी कमर के पास अपनी दोनों टाँगें फैलाकर उसके लंड का निशान लेकर चुदवाने वाले एक्शन में बैठ गई पता नहीं अतुल का लंड उसकी चूत में गया था या नहीं पर उसके एक्शन से ऐसा लग रहा था कि वह चुदवाना शुरू कर चुकी थी। मुझे दीक्षा को चोदने की इच्छा तो हो रही थी पर एक तो मैं उससे अब अकेले में चोदना चाहता था और दूसरा आज मुझे नींद आ रही थी। ऐसे ही उनको चोदते और चुदवाते देखते हुए मुझे नींद आ गई।
जब मेरी नींद खुली सुबह के ६:०० बज गए थे और अंदर बेडरूम में दीक्षा और अतुल वैसे ही नंगे लेटे हुए थे। नंगी लेटी दीक्षा को देखकर मुझे रात की याद आ गई और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने जल्दी से दोनों जगाते हुए उनको बाय कहकर उनके बेडरूम से बाहर निकल आया दीक्षा और अतुल अभी भी नींद में थे और उन्हें मेरे जाने का कोई पता नहीं चला। मैंने बाहर आकर रूम का बेडरूम का डोर क्लोज कर दिया। फिर मैं बाथरूम में गया और फ्रेश होकर मैंने एक हल्का शावर लिया। फिर मैं उनके घर से अपने घर में आ गया।
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