Cousin Sex Kahani
मेरा नाम रितेश है, मैं 26 साल का हूँ और सरकारी नौकरी कर रहा हूँ। मैं पानीपत से हूँ, देखने में हैंडसम हूँ और ६ फीट का हूँ। ये स्टोरी मेरी और मेरी मौसी की बेटी की है। उसका नाम काजल है और वह अभी 12वीं क्लास में है। वह 18 साल की है, दिखने में बहुत सेक्सी और गोरी है। Cousin Sex Kahani
मैंने उसके बूब्स मसल मसल कर पी पी कर 32 के कर दिए पर आज भी बहुत सेक्सी दिखती है। ये सेक्स स्टोरी दो साल पहले की है जब वह मेरे घर आई थी अपने 10वीं के एग्जाम देकर। उसके छोटे-छोटे बूब्स निकल रहे थे अभी एक दम कच्चे नींबू, पीरियड्स भी आने नहीं शुरू हुए थे, हुआ कुछ ऐसा कि उसका फोन इस्तेमाल करते-करते मैं हिस्ट्री में जाकर देखा कि उसने पोर्न सर्च किया हुआ था।
वहाँ से मुझे काजल पर शक होने लगा कि इसे भी जवानी चढ़ रही है। फिर कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।
वह इतनी सेक्सी दिखती और चलती है कि किसी का भी लंड खड़ा कर दे। बहुत मटक-मटक कर चलती है। फिर धीरे-धीरे मुझे भी फीलिंग्स आने लगीं कि क्यों न इसकी प्यास बुझाई जाए। फिर मैंने दिन भर उसे घूरना शुरू कर दिया। कभी उसके बूब्स घूरता, कभी गाँड, तो कभी गाँड पर टच कर देता और वह बस एक स्माइल करके चली जाती। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा।
एक दिन हुआ ऐसा कि लाइट नहीं थी तो मेरे घर में २ ही एसी लगे हैं—एक मम्मी-पापा के और दूसरा मेरे रूम में। तो मम्मी ने काजल को बोला कि तू आज नितेश भैया के साथ सो जा, क्योंकि जून की ही बात है और गर्मी बहुत हो रही है। ये सुनकर मैं बहुत खुश हुआ कि चलो कुछ तो अच्छा हुआ और मैं बेसब्री से रात का इंतज़ार करने लगा।
रात हुई। हम लोगों ने डिनर किया और अपने-अपने रूम में चले गए। थोड़ी देर बाद काजल भी आ गई और मेरे बगल में लेट गई आकर। फिर हम दोनों बातें करने लगे और बातों-बातों में मैंने उससे पूछ लिया कि तेरा कोई बीएफ है? तो उसने ना बोला। तब मैं बोला—तभी तू पोर्न सर्च करती है नेट पर।
तो वह एकदम से शॉक्ड हो गई कि भैया आपको कैसे पता चला? प्लीज़ मुझे माफ कर दो, किसी को मत बताना। आप जो बोलोगे मैं वो करूँगी पर प्लीज़ किसी को मत बताना, मेरी इंसल्ट हो जाएगी। फिर मैंने बोला कि ठीक है, टाइम आने पर बताऊँगा, अब सो जा। फिर वह मेरी साइड बैक करके सो गई।
मुझे नींद ही नहीं आ रही थी उसकी गाँड को देख-देख कर। तो मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसकी गाँड पर रख दिया और उसकी गाँड और जाँघें सहलाने लगा। काजल तब तक सो चुकी थी। उसके बाद मैंने उसके छोटे-छोटे बूब्स भी सहलाए। तब तक मेरा खड़ा हो चुका था। मैंने मुठ मारना शुरू कर दिया था और सारा माल उसकी गाँड पर निकाल दिया।
सुबह मम्मी-पापा को किसी काम से बाहर जाना था। जब मैं उठकर बाहर आया तो वह मुझे घूर-घूर के देख रही थी। तो मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो काजल गुस्से में बोली कि कल रात को आपने मेरे साथ क्या किया? तब मैं हँस पड़ा और बोला कि क्या करूँ, नींद ही नहीं आ रही थी। वह बहुत गुस्से में थी और बोली कि बताती हूँ आपको। तभी कुछ देर में मम्मी-पापा आ गए और हम नॉर्मल हो गए।
ऐसे ही दिन बीत गया। रात को हमने डिनर किया और अपने रूम में चले गए। मैं अपने रूम में लेटा फोन चला रहा था तभी देखा कि काजल रूम में एंटर हो रही है। क्या बताऊँ क्या लग रही थी उस टाइम काजल! उसने व्हाइट शॉर्ट्स पहनी थी और ब्लू स्लीवलेस टॉप। उसे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा।
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मैंने लंड सेट किया और हम सोने लगे। थोड़े टाइम बाद मुझे फील हुआ कि मेरे शॉर्ट्स के अंदर कुछ है। फिर देखा तो वह काजल का हाथ था। वह मेरा लंड सहला रही थी और एक हाथ से अपनी बुर को सहला रही थी। मैं भी अंजान बना रहा। थोड़ी देर में उसने पानी छोड़ दिया और वह सो गई।
फिर मुझे कहाँ नींद आने वाली थी—इतने कोमल हाथ जो मेरे लंड पर लग गए थे। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी गाँड और बुर सहलाना शुरू कर दिया और उसके टॉप के ऊपर से उसके बूब्स प्रेस करने लग पड़ा। वह सोई नहीं थी, नाटक कर रही थी सोने का। तभी मैंने उसके बूब्स जोर से दबा दिए तो वह उछल पड़ी और कहने लगी कि भैया ये आप क्या कर रहे हो? ये गलत है, मैं मौसी को बता दूँगी।
तो मैंने बोला—अगर ये गलत है तो जो तूने थोड़ी देर पहले किया वो कहाँ से सही था? ये बोलते ही मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसे लिप किस करने लग पड़ा। ५ मिनट बाद जब काजल को मज़ा आने लगा तब वह भी रिस्पॉन्स देने लगी मुझे। हम दोनों लिप किसिंग एंजॉय करने लगे और साथ में एक हाथ से मैं उसकी नींबू जैसी चूचियों को भी मसल रहा था।
वह मोन करने लग पड़ी। उसको सेक्स की चाह होने लगी थी। फिर मैंने उसका टॉप निकाल दिया और ऊपर से उसे नंगा कर दिया और उसके नींबू बारी-बारी चूसने लगा। वह भी मोन कर रही थी और साथ में मेरा सिर पकड़-पकड़ के बूब्स पर दबा रही थी। और बोलने लगी—चूसो भैया, पूरे बूब्स चूस डालो, ये आपके ही हैं। आज मेरी पूरी प्यास को बुझा दो।
ये सब सुन-सुन कर मुझे और जोश आ गया। फिर मैंने उसकी पूरी बॉडी को सक किया। सक करते-करते नीचे पहुँचा। फिर मैंने उसकी शॉर्ट्स खोली। अंदर उसने ब्लू पैंटी पहनी थी, साथ ही वह भी खोल दी। क्या बताऊँ भाई, उसकी बुर एकदम प्यारी गुलाबी थी झांकें भी नहीं आई थी। ये देखते ही मेरा पूरा 8 इंच का लंड खड़ा हो गया।
फिर मैंने उसकी टाँगें खोलीं और उसकी बुर चूसने लग पड़ा। वह उछल पड़ी, उसे बहुत मज़ा आने लग पड़ा। मैं बहुत प्यार से उसकी बुर चाट रहा था। थोड़ी ही देर में उसने पानी निकाल दिया। उसकी पूरी बॉडी अकड़ चुकी थी। तभी काजल बोली कि भैया मुझे आपका देखना है, बाहर निकालो। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: खुद निकालो और देख लो।
काजल: ओके।
और लंड बाहर निकालने लगी। देखते ही काजल चौंक गई— भैया आपका कितना बड़ा है, मैं तो मर ही जाऊँगी।
तब मैंने बोला— कुछ नहीं होता, मैं तुझे प्यार से करूँगा, डर मत।
मैं: मेरा लंड मुँह में डाल और सक करो।
पहले तो वह मना कर रही थी पर बाद में मान गई और मेरा लंड चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मैं तो जैसे जन्नत में था। फिर मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और टाँगें खोल दीं उसकी और उसकी बुर पर लंड सेट किया। लंड अंदर जा नहीं रहा था तो मैंने लंड पर और उसकी बुर पर थोड़ा थूक लगाया और दोबारा लंड सेट किया और एक धक्का मारा। मेरे लंड का टोपा अंदर जा चुका था।
वह चिल्ला उठी और उसकी सील भी टूट चुकी थी और उसकी बुर में से भल भर खून निकल पड़ा। तब मैं वहीं रुक गया। वह उसको किस करने लग पड़े। तब वह थोड़ी शांत हुई। तभी मैंने एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया और मेरा लंड उसकी बुर की सील तोड़ता हुआ अंदर चला गया।
तब उसे थोड़ा कम दर्द हुआ। मैंने धक्के मारना शुरू कर दिया। और उसे भी मज़ा आने लगा और वह भी अपनी गाँड उछाल रही थी और लगातार मोनिंग किए जा रही थी— आह्ह्ह्ह्ह..आह्ह …आ….सी… सी. आह्ह्ह्ह्ह… भैया आई लव यू, आप बहुत अच्छे हो, चोदो चोदो।
मुझे चोदो, मैं आपकी ही हूँ और जोर से चोदो, फाड़ दो मेरी बुर , फाड़-फाड़ के इसका भोसड़ा बना डालो, मेरी प्यास बुझा दो, चोदो भैया… आह्ह्ह्ह… आज्ह्ह्ह्ह आह्ह …आ….सी… सी बहुत मज़ा आ रहा है, आपका लंड बहुत बड़ा और बहुत अच्छा है, लव यू आह्ह्ह्ह। ये अब सुनकर मेरा और जोश बढ़ गया और मेरे धक्कों की स्पीड भी बढ़ गई।
करीब २० मिनट चोदने के बाद मैंने पोज़ चेंज किया, उसे कुतिया स्टाइल में लाया और पीछे से उसे चोदने लगा। वह लगातार मोनिंग कर रही थी और उसके बूब्स नीचे लटक रहे थे और हिल रहे थे। मैं अंदर-बाहर करता रहा और स्पीड बढ़ा दी। तब तक काजल से ३ बार पानी छोड़ दिया।
थोड़ी देर में मेरा आने वाला था तो मैंने लंड बाहर निकाल के काजल को लंड चूसने को कहा और खुद लेट गया। काजल लंड चूसने लगी। २ मिनट बाद मेरा भी निकल गया और काजल मेरा सारा माल पी गई। मज़े-मज़े में उसे बहुत टेस्टी लगा और वह खुश हो गई.
और मेरे ऊपर ही लेट गई और कहने लगी— भैया इसने कितनी बेरहमी से मेरी बुर का उद्घाटन किया पर बाद में बड़ा मज़ा आया। आपका लंड बहुत प्यारा है, इसने कितनी मैं आपसे ही चुदवाया करूँगी। और मेरे ऊपर ही सो गई। उस रात हमने ३ बार सेक्स किया।
अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो काजल अभी भी मेरे ऊपर ही लेटी हुई थी। उसके नंगे बूब्स मेरे सीने से चिपक रहे थे और उसकी टाँगें मेरे लंड के आसपास लिपटी हुई थीं। रात भर के तीन राउंड के बाद भी मेरा लंड फिर से हल्का सा खड़ा हो रहा था। मैंने धीरे से उसके बाल सहलाए और बोला, “काजल… उठ जा, मम्मी-पापा आ जाएँगे।”
वह आँखें मलते हुए उठी और मेरे होंठों पर हल्की सी किस कर दी। “भैया… कल रात बहुत मज़ा आया। मैं फिर से करना चाहती हूँ।”
मैंने हँसकर उसके गाल पर चुटकी ली, “अभी नहीं। पहले घरवालों को संभाल। शाम को सोचते हैं कुछ प्लान।”
दिन भर घर में नॉर्मल रहने की कोशिश की। काजल मुझे देख-देखकर मुस्कुराती रहती और कभी-कभी चुपके से मेरे हाथ को छू लेती। शाम को जब मम्मी-पापा सोने चले गए तो मैंने काजल से कहा, “कल सुबह पिकनिक पर चलते हैं। पास में ही एक छोटा सा जंगल है, वहाँ झाड़ियाँ बहुत घनी हैं। कोई नहीं आता। रोमांटिक बातें करेंगे… और जो दिल चाहे वो करेंगे।”
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काजल की आँखें चमक उठीं। “सच में भैया? मैं तैयार हूँ।”
अगली सुबह हम दोनों ने बहाना बनाया कि भैया कॉलेज के दोस्तों के साथ पिकनिक जा रहे हैं तो काजल को भी ले जाएं। बैग में पानी की बोतल, कुछ स्नैक्स और एक चादर रख ली। मोटरसाइकिल पर बैठकर निकल पड़े। काजल पीछे बैठी थी और उसकी छातियाँ मेरी पीठ से सट रही थीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रास्ते भर वह मेरे कान में फुसफुसाती रही, “भैया आज मुझे बहुत प्यार करना… धीरे-धीरे… पूरा डाल कर प्यार करना”
करीब आधा घंटा बाद हम उस जगह पहुँचे। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ और घनी झाड़ियाँ थीं। थोड़ी दूर एक छोटी सी नदी भी बह रही थी। हमने मोटरसाइकिल छिपाई और झाड़ियों के बीच घुस गए। एक साफ-सुथरी जगह मिली जहाँ घास नरम थी। मैंने चादर बिछा दी। काजल मेरे सामने बैठ गई। सूरज की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसके गाल लाल हो रहे थे।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला, “काजल… तू जानती है ना, पहली रात से ही मुझे तेरे लिए कुछ अलग फील हो रहा है। सिर्फ शरीर नहीं… दिल भी।”
वह शरमा गई। “भैया… मैं भी। जब आपने मेरी सील तोड़ी तो दर्द हुआ था, पर उसके बाद सिर्फ प्यार फील हुआ। मैं आपके बिना नहीं रह सकती अब।”
मैंने उसे अपनी गोद में खींच लिया। उसके होंठ मेरे होंठों से मिले। धीरे-धीरे किस गहरी होती गई। मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गई और वह भी जवाब देने लगी। उसके बूब्स मेरे सीने से दब रहे थे। मैंने उसका टॉप ऊपर उठाया और उसके ब्रा के ऊपर से ही चुचियों को मसलने लगा। काजल की साँसें तेज हो गईं।
“भैया…आह्ह …आ….सी… सी यहाँ कोई देख तो नहीं लेगा न?” वह फुसफुसाई।
“नहीं जानू… ये झाड़ियाँ इतनी घनी हैं कि दस फीट दूर से भी कुछ नहीं दिखेगा। आराम से कर।”
मैंने उसका टॉप और ब्रा दोनों उतार दिए। उसके छोटे-छोटे पर बहुत गोल और सख्त बूब्स धूप में चमक रहे थे। मैंने एक चुची मुँह में ले ली और जीभ से घुमाने लगा। दूसरी को हाथ से मसल रहा था। काजल का सिर पीछे की ओर झुक गया और वह धीरे-धीरे कराहने लगी, “आह्ह …आ….सी… सी… भैया… और चूसो… दोनों चूसो… आह्ह …आ…. सी… सी.”
मैंने दोनों बूब्स बारी-बारी से चूसे, काटे, चाटे। फिर नीचे की ओर बढ़ा। उसकी जींस और पैंटी एक साथ खींच ली। अब वह पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थी। उसकी गुलाबी बुर थोड़ी सी गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी टाँगें फैला दीं और जीभ से उसकी बुर पर लंबा चाट मारा।
काजल उछल पड़ी। “आह्ह्ह भैया… धीरे… बहुत सेंसिटिव है…आह्ह …आ….सी… सी.”
मैंने और धीरे से चाटना शुरू किया। क्लिट को जीभ की नोक से सहलाया, फिर अंदर थोड़ी सी जीभ घुसाई। काजल के हाथ मेरे बालों में उलझ गए। वह मेरे सिर को और जोर से दबा रही थी। “भैया… मैं आने वाली हूँ… आह्ह्ह…आह्ह …आ….सी… सी.”
थोड़ी देर में उसके पूरे शरीर में कंपन हो गया और उसने मेरे मुँह पर पानी छोड़ दिया। मैंने सब चाट लिया। फिर ऊपर आकर उसके होंठों पर किस किया ताकि वह अपना स्वाद चख सके। अब मेरा लंड बहुत सख्त हो चुका था। काजल ने खुद ही मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। उसने दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर-नीचे करना शुरू किया। फिर मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे पूरा लंड उसके गले तक पहुँचाने की कोशिश कर रही थी। उसकी आँखों में आँसू आ गए पर वह रुकी नहीं।
“बहुत अच्छा चूस रही है तू…” मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा।
जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसे चादर पर लिटा दिया। उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और लंड को उसकी गीली बुर पर सेट किया। धीरे से अंदर धकेला। काजल की आँखें बंद हो गईं और वह कराह उठी, “आह्ह्ह… भैया… पूरा अंदर कर दो… आह्ह …आ….सी… सी.”
मैंने पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। झाड़ियों के बीच सिर्फ हमारे कराहने की आवाज़ और पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी। काजल मेरे गले में बाँहें डाले हुए थी और मेरे कान में बोल रही थी, “भैया… आह्ह …आ….सी… सी मुझे बहुत प्यार है आपसे… हमेशा ऐसे ही चोदो… आह्ह …आ….सी… सी… आई लव यू.”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। उसके बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने एक हाथ से उसकी चुची मसलनी शुरू की। थोड़ी देर बाद मैंने पोज़ बदला। उसे कुतिया बना दिया। पीछे से लंड अंदर किया और उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। काजल की गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी।
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“और जोर से भैया…आह्ह …आ….सी… सी फाड़ दो मेरी बुर …आह्ह.. बाबू.आ….सी… सी… आई लव यू” वह चिल्ला रही थी।
मैंने और तेजी से चोदा। करीब पंद्रह मिनट तक इसी पोज़ में रहा। काजल दो बार और पानी छोड़ चुकी थी। फिर मैंने उसे ऊपर बैठा लिया। उसने खुद लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे होना शुरू किया। उसके बूब्स मेरे चेहरे के सामने थे। मैंने दोनों को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। काजल पागलों की तरह उछल रही थी।
“भैया… मैं फिर से आ रही हूँ… आह्ह्ह्ह…”
जब वह तीसरी बार आई तो मैंने भी बर्दाश्त नहीं किया। मैंने उसे नीचे लिटाया और जोरदार धक्के मारते हुए अपना सारा माल उसकी बुर के अंदर ही छोड़ दिया। गर्म पानी उसकी बुर में भर गया। काजल मेरे ऊपर लेटी रही और मेरे पीठ को सहलाती रही। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
थोड़ी देर आराम करने के बाद हम दोनों नंगे ही चादर पर लेटे रहे। काजल ने मेरा लंड फिर से हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। “भैया… एक बार और कर लो… प्लीज़… मुझे और चाहिए।”
मैंने हँसकर उसके माथे पर किस किया। “तू पागल है। अभी थोड़ी देर आराम कर। फिर नदी के किनारे जाकर करेंगे।”
हमने पानी पिया, कुछ स्नैक्स खाए। फिर काजल ने मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया। इस बार हम नदी के किनारे चले गए जहाँ और भी घनी झाड़ियाँ थीं। वहाँ मैंने उसे पेड़ से सटाया और खड़े-खड़े ही चोदना शुरू किया। एक टाँग ऊपर उठाई हुई थी। काजल की पीठ पेड़ की छाल से रगड़ रही थी पर वह मज़े ले रही थी।
“भैया… आज तो आपने मेरी पूरी प्यास बुझा दी… आह्ह… और अंदर… और गहरा…”
मैंने उसकी दोनों टाँगें पकड़कर हवा में उठा लिया और खड़े-खड़े ही जोर से चोदने लगा। काजल मेरे गले में लिपटी हुई आह्ह …आ….सी… सी…. भैया रही थी। आखिर में मैंने फिर से उसके अंदर ही पानी छोड़ दिया। दोनों थककर चादर पर लेट गए।
काजल मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “भैया… अब मैं हमेशा आपके साथ रहना चाहती हूँ। घर जाकर भी रात को आपके रूम में आऊँगी।”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “ठीक है जानू। लेकिन सावधानी से। और अगली बार… तेरी गाँड भी लूंगा। आज तूने बहुत मना किया था याद है?”
काजल शरमा गई और मेरे लंड को हल्के से दबाया। “अगली बार… कोशिश करूँगी।”
हमने कपड़े पहने, जगह साफ की और घर की तरफ निकल पड़े। रास्ते भर काजल मेरे पीछे बैठी हुई मेरे कान में फुसफुसाती रही कि रात को फिर से आना है।
पिकनिक से घर पहुँचते ही मम्मी ने पूछा, “कहाँ घूम आए इतनी देर?”
मैंने हँसकर कहा, “दोस्तों के साथ नदी किनारे घूमे, खाना खाया।”
काजल चुपचाप मुस्कुराती हुई अपने कमरे में चली गई। हमने नॉर्मल एक्ट किया। दोनों ने नॉर्मल रहने की कोशिश की, लेकिन जब-जब हमारी नज़रें मिलतीं तो कल की झाड़ियों वाली बातें याद आ जातीं। रात के करीब साढ़े दस बजे मम्मी-पापा सो चुके थे।
मैं अपने रूम में लेटा फोन चला रहा था कि दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। काजल अन्दर घुसी। उसने सिर्फ एक पतली सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, नीचे कुछ नहीं। दरवाज़ा बंद करके उसने धीरे से ताला लगा दिया। वह मेरे बिस्तर के पास आकर बैठ गई। उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे।
मैंने उसका हाथ पकड़ा, “इतनी रात को कैसे आ गई जानू? अगर कोई उठ जाए तो?”
काजल ने मेरे गाल पर हाथ फेरा और फुसफुसाई, “भैया… आज जंगल में आपने कहा था ना… कि अगली बार मेरी गाँड भी लोगे। मैं दिन भर वही सोचती रही। मुझे डर भी लग रहा है… लेकिन आपसे प्यार इतना है कि मैं तैयार हूँ।”
मैंने उसे अपनी गोद में खींच लिया। उसके नरम बूब्स मेरे सीने से सट गए। “सच में? डर तो लगेगा पहली बार। मैं बहुत प्यार से करूँगा। जबरदस्ती नहीं। अगर दर्द ज्यादा हो तो तुरंत रोक दूँगा। ठीक है?”
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वह मेरे होंठों पर हल्की सी किस करके बोली, “हाँ भैया… आप जैसे कहो। बस मुझे अपने करीब महसूस कराओ। आज सिर्फ शरीर नहीं… दिल से प्यार करो।”
मैंने उसके होंठों को गहराई से चूम लिया। जीभ से जीभ मिलाई। उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने नाइट ड्रेस ऊपर सरका दी। उसके नंगे बूब्स मेरे हाथों में आ गए। मैंने दोनों को धीरे-धीरे मसलना शुरू किया, निप्पल्स को उंगलियों के बीच दबाया।
काजल कराह उठी, “आह्ह… भैया… आज और प्यार से… बहुत प्यार से…”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा—गर्दन, कॉलर बोन, फिर दोनों बूब्स। एक-एक चुची को मुँह में लेकर धीरे-धीरे चूसा, जीभ घुमाई। काजल के हाथ मेरे बालों में थे। “भैया… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… आप ऐसे ही सहलाते रहो…”
फिर मैं नीचे गया। उसकी टाँगें फैलाकर उसकी पहले से गीली बुर पर जीभ फेरने लगा। क्लिट को धीरे-धीरे चाटा, अंदर उंगली डाली। काजल की कमर उछल रही थी। “आह्ह्ह भैया… और अंदर… दो उंगली कर दो…”
मैंने दो उंगलियाँ अंदर घुसाकर ऊपर की ओर दबाया। साथ में क्लिट चूसता रहा। थोड़ी देर में काजल का शरीर अकड़ गया और उसने मेरे मुँह पर पानी छोड़ दिया। मैंने सब साफ किया और ऊपर आकर उसके माथे पर किस किया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“अब तैयार है?” मैंने पूछा।
काजल ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन पहले सामान्य वाला कर लो… फिर… पीछे वाला।”
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पहले से सख्त खड़ा था। काजल ने खुद उसे पकड़कर मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगी, जीभ से नीचे तक चाटा। मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “बहुत प्यार से चूस रही है तू… आज तू और भी प्यारी लग रही है।”
जब और देर नहीं हो सकी तो मैंने उसे सीधा लिटाया। लंड उसकी बुर पर सेट करके धीरे-धीरे अंदर धकेला।
काजल ने आह भरी, “आह्ह… पूरा अंदर… आज और गहरा…”
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। एक हाथ से उसके बाल सहला रहा था, दूसरे से चुची मसल रहा था। बीच-बीच में उसके होंठ चूमता रहा। “काजल… तू सिर्फ शरीर नहीं… मेरी जान बन गई है। मैं तुझे सिर्फ चोदना नहीं चाहता… तुझे महसूस करना चाहता हूँ।”
काजल की आँखों में आँसू आ गए। “भैया… मैं भी… हमेशा आपके पास रहना चाहती हूँ… आह्ह… और जोर से… लेकिन प्यार से…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके पैर मेरे कंधों पर थे। हर धक्के के साथ उसकी बुर सिकुड़ रही थी। करीब दस-बारह मिनट बाद काजल ने फिर पानी छोड़ दिया। मैंने लंड बाहर निकाला। अब बारी थी पीछे की। मैंने उसके नीचे एक तकिया रखा ताकि उसकी गाँड थोड़ी उठी रहे। उसके दोनों गालों को फैलाया। छोटी सी गुलाबी गाँड की छेद दिख रही थी। मैंने थूक लगाकर उंगली से धीरे-धीरे अंदर घुसाने की कोशिश की। काजल सहम गई।
“दर्द हो रहा है भैया…”
“शांत हो जा जानू… साँस ले… मैं बहुत धीरे कर रहा हूँ।”
मैंने और थूक लगाकर एक उंगली पूरी अंदर कर दी। धीरे-धीरे घुमाने लगा। थोड़ी देर बाद दूसरी उंगली भी डाल दी। काजल की साँसें तेज थीं लेकिन वह बर्दाश्त कर रही थी। जब लगा कि थोड़ा ढीला हो गया है तो मैंने लंड पर थूक और उसके अपने पानी से गीला किया। टोपा गाँड की छेद पर रखा और बहुत धीरे-धीरे दबाव डाला।
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काजल ने तकिया दबा लिया। “आह्ह्ह… भैया… बहुत टाइट है… धीरे…”
“बोल अगर रोकना हो,” मैंने कहा।
“नहीं… करते रहो… बस धीरे…”
धीरे-धीरे आधा लंड अंदर चला गया। काजल की आँखें बंद थीं, माथा पसीने से भीगा हुआ। मैंने रुककर उसे किस किए, बाल सहलाए।
“तू बहुत बहादुर है जानू… अब और थोड़ा…”
पूरा लंड अंदर जाने में काफी टाइम लगा। जब पूरा अंदर हो गया तो मैंने हिलना बंद रखा। काजल की गाँड मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
थोड़ी देर बाद उसने खुद कहा, “अब धीरे-धीरे हिलाओ भैया…”
मैंने बहुत धीमी गति से बाहर खींचा और फिर अंदर धकेला। हर बार थोड़ा तेज करता गया। काजल की कराहें बदलने लगीं— दर्द से मज़े में। “आह्ह… भैया… अब अच्छा लग रहा है… और अंदर…”
मैंने एक हाथ उसकी बुर पर रखा और क्लिट सहलाने लगा। दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़ी। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। काजल अब पीछे की ओर धक्के देने लगी थी। “भैया… गाँड में भी बहुत मज़ा आ रहा है… आपका लंड पूरा अंदर है… आह्ह्ह…”
मैंने और जोर से चोदना शुरू किया। उसकी गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी। बीच-बीच में मैं झुककर उसके कान में बोलता रहा, “तेरी ये टाइट गाँड सिर्फ मेरी है… आज से… हमेशा…”
काजल पागलों की तरह कराह रही थी। “हाँ भैया… सिर्फ आपकी… फाड़ दो… लेकिन प्यार से… आह्ह… मैं आने वाली हूँ…”
उसकी बुर और गाँड दोनों एक साथ सिकुड़ने लगीं। वह जोर से पानी छोड़ते हुए आह्ह …आ….सी… सी…. भैया पड़ी। उसके शरीर के कंपन से मेरा भी नियंत्रण टूट गया। मैंने कुछ और जोरदार धक्के मारकर अपना सारा गर्म माल उसकी गाँड के अंदर ही छोड़ दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। मेरा लंड अभी भी उसकी गाँड में था। काजल मेरे सीने पर सिर रखकर साँसें ले रही थी। मैंने उसके पसीने से भरे माथे को चूमा।
“कैसा लगा जानू?”
काजल ने धीरे से कहा, “पहले बहुत दर्द हुआ… फिर दुनिया की सबसे अच्छी चीज़ लगने लगी। भैया… आपने आज मुझे पूरा अपना बना लिया। अब मैं कभी नहीं मना करूँगी… चाहे बुर हो या गाँड…”
मैंने उसे कसकर गले लगाया। “सो जा अब। सुबह तक यहीं रह। मैं संभाल लूँगा।”
काजल मुस्कुराई और मेरे ऊपर ही सो गई। उसका नंगा शरीर मेरे से सटा हुआ था। रात के बाकी बचे घंटों में हमने दो बार और प्यार किया—एक बार धीरे-धीरे बुर में, दूसरी बार फिर से उसकी अब थोड़ी ढीली हो चुकी गाँड में। हर बार रोमांटिक बातें, किसें और प्यार भरे शब्द। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
सुबह होने से पहले काजल अपने कमरे में चली गई। लेकिन जाते-जाते दरवाज़े पर खड़ी होकर बोली, “भैया… अगली छुट्टी पर फिर जंगल चलेंगे… इस बार और देर तक…”
मैंने सिर हिलाया। बिस्तर पर लेटे हुए मैं सोच रहा था—ये रिश्ता अब सिर्फ शरीर का नहीं रह गया था। दिल भी पूरी तरह उलझ चुका था। काजल के मम्मी-पापा सुबह ही आ गए। मौसा-मौसी भी साथ थे। घर में चार कमरे थे— एक मम्मी-पापा का, एक मौसा-मौसी का, एक गेस्ट रूम और मेरा रूम।
जगह कम होने की वजह से मम्मी ने साफ कह दिया, “काजल आज नितेश के साथ सो जाएगी। गर्मी भी ज्यादा है और एसी भी उसी रूम में है।”
काजल की आँखों में शरारत चमक उठी। उसने मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुरा दी। दिन भर हम दोनों नॉर्मल बने रहे, लेकिन नज़रें मिलते ही दिल जोर से धड़कने लगता था। रात के खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए। मैंने बाथरूम में जाकर एक वियाग्रा की गोली खा ली। आधा घंटा भी नहीं बीता था कि मेरा लंड पत्थर की तरह सख्त और भारी हो गया। काजल दरवाज़ा बंद करके अंदर आई। उसने सिर्फ एक पतली सफेद नाइट ड्रेस पहनी थी, नीचे कुछ नहीं।
“भैया… आज पूरा घर भरा पड़ा है,” उसने फुसफुसाया, लेकिन आँखों में भूख साफ दिख रही थी।
मैंने उसे दीवार से सटा दिया और गहरी किस करने लगा। जीभ उसके मुँह में घुस गई। काजल भी उतनी ही आक्रामक हो गई। उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरा लंड बाहर निकालकर दोनों हाथों से पकड़ लिया।
“इतना सख्त… भैया आज तो तुम पागल हो गए हो,” वह कराहते हुए बोली।
मैंने उसकी नाइट ड्रेस ऊपर खींच दी। उसके नंगे बूब्स मेरे हाथों में आ गए। मैंने एक चुची मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगा।
काजल की सिसकारी निकल पड़ी— “आह्ह्ह… भैया… धीरे… नहीं… जोर से चूसो… आह्ह्ह…”
मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। उसकी टाँगें फैलाकर उसकी पहले से गीली बुर पर जीभ फेरने लगा। क्लिट को जोर से चाटा, अंदर उंगली घुसाई। काजल की कमर उछल रही थी।
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“आह्ह्ह भैया… और अंदर… दो उंगली… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … आह्ह्ह… मैं आने वाली हूँ…”
थोड़ी देर में उसने जोर से पानी छोड़ दिया। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैंने तुरंत लंड उसकी बुर पर सेट किया और एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह्ह… भैया… पूरा… फाड़ दिया… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया …”
मैंने आक्रामक धक्के मारने शुरू किए। बिस्तर चरमरा रहा था। काजल के नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए।
“चोदो… जोर से चोदो भैया… मेरी बुर फाड़ दो… आह्ह्ह… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … और गहरा…”
मैंने उसके बाल पकड़कर और तेज धक्के मारे। करीब दस मिनट बाद काजल फिर से काँपते हुए पानी छोड़ दी। मैंने लंड बाहर निकाला और उसे खींचकर बाथरूम में ले गया। बाथरूम की रोशनी कम थी। मैंने उसे सिंक पर बैठा दिया, टाँगें फैलाईं और फिर से लंड अंदर घुसा दिया। काजल की पीठ शीशे से लग रही थी। हर धक्के के साथ उसकी चीखें निकल रही थीं—
“आह्ह्ह… भैया… बाथरूम में… कोई सुन लेगा… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … फिर भी मत रुको… चोदो…”
मैंने उसके बूब्स जोर से मसले और मुँह में ले लिया। काजल ने खुद अपना हाथ नीचे ले जाकर क्लिट सहलाने लगी। दोनों की साँसें तेज थीं। पानी की बूंदें शरीर पर गिर रही थीं। फिर मैंने उसे घुमाया। उसने खुद झुककर मेरा लंड मुँह में ले लिया। गले तक। उसकी आँखों में आँसू आ गए लेकिन वह रुकी नहीं। मैंने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“चूसो… पूरा चूसो जानू… आह्ह…”
काजल ने लंड को अच्छी तरह गीला किया। फिर मैंने उसे खड़ा किया और उसकी गाँड के गाल फैलाए। थूक लगाकर टोपा उसकी टाइट छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेला।
“आह्ह्ह्ह… भैया… गाँड… बहुत टाइट… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … धीरे… नहीं… पूरा अंदर कर दो…”
मैंने पूरा लंड उसकी गाँड में घुसा दिया। काजल की सिसकारियाँ और चीखें बाथरूम में गूँज रही थीं। मैंने एक हाथ उसकी बुर पर रखा और क्लिट सहलाते हुए जोर-जोर से धक्के मारे।
“आह्ह्ह… भैया… गाँड फाड़ रहे हो… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … और जोर से… मैं आ रही हूँ…”
वह काँपते हुए पानी छोड़ दी। मैंने कुछ और तेज धक्के मारकर अपना माल उसकी गाँड के अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर दीवार से लग गए। लेकिन वियाग्रा की वजह से मेरा लंड फिर से सख्त हो गया। काजल ने मेरी आँखों में देखा और फुसफुसाई, “बालकनी… अंधेरी बालकनी में ले चलो भैया…”
हमने तौलिए लपेटे और चुपके से बालकनी का दरवाज़ा खोला। बाहर अंधेरा था, सिर्फ दूर शहर की लाइटें चमक रही थीं। हवा ठंडी थी। मैंने काजल को रेलिंग से सटाया। उसने खुद अपनी टाँग ऊपर उठाई। मैंने पीछे से लंड उसकी अभी भी गीली बुर में घुसा दिया।
“आह्ह्ह… भैया… खुली हवा में… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … कोई देख लेगा… फिर भी मत रुको…”
मैंने उसके बाल पकड़कर जोरदार धक्के मारे। काजल की चीखें हवा में उड़ रही थीं। फिर मैंने लंड निकाला और उसकी गाँड में फिर से घुसा दिया। इस बार और गहरा।
“आह्ह्ह्ह… गाँड… पूरा अंदर… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … भैया… मैं पागल हो जाऊँगी… चोदो… फाड़ दो…”
मैंने दोनों हाथों से उसके बूब्स मसले और कान में कहा, “तेरी ये गाँड और बुर सिर्फ मेरी है… आज रात पूरी तेरी प्यास बुझा दूँगा…”
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काजल की सिसकारियाँ और चीखें अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी थीं। वह पीछे की ओर धक्के दे रही थी। थोड़ी देर में वह जोर से काँपते हुए पानी छोड़ दी। मैंने भी बर्दाश्त नहीं किया और उसका सारा गर्म माल उसकी गाँड के अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर बालकनी की कुर्सी पर बैठ गए। काजल मेरे सीने से लिपट गई। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं।
“भैया… आज तुमने मुझे पूरा अपना बना लिया… आह्ह …आ….सी… सी…. भैया … आह्ह …आ….सी… सी … सब कुछ… मैं हमेशा तुम्हारी रहूँगी…”
मैंने उसके माथे पर किस की और बाल सहलाए। “सो जा जानू। सुबह तक यहीं रह। घरवाले कुछ नहीं जानेंगे।”
रात के बाकी बचे घंटों में हमने बिस्तर पर फिर से प्यार किया—इस बार थोड़ा धीमे, लेकिन उतने ही गहरे। हर बार काजल की सिसकारियाँ और हल्की चीखें निकलती रहीं। सुबह होने से पहले काजल चुपके से अपने कमरे में चली गई, लेकिन जाते-जाते मेरे कान में फुसफुसाई— “कल रात… फिर से वियाग्रा खा लेना भैया… मैं और मजे लेना चाहती हूँ।”
आज की रात आखिरी पूरी रात थी। परसों सुबह काजल अपने मम्मी-पापा के साथ अपने शहर वापस चली जाएगी। दोनों को पता था कि अब कई हफ्तों तक मिलना मुश्किल होगा। रात के खाने के बाद घरवाले अपने-अपने कमरों में चले गए। काजल चुपके से मेरे रूम में आई। दरवाज़ा बंद करते ही उसने मुझे कसकर गले लगा लिया। उसकी आँखों में हल्की नमी थी।
“भैया… परसों मैं चली जाऊँगी,” उसने धीरे से कहा। “आज की रात… मुझे याद रखने लायक बना दो। सिर्फ शरीर नहीं… दिल से प्यार करो।”
मैंने उसके माथे पर किस की, फिर होंठों पर। धीरे-धीरे, बहुत धीरे। जीभ से जीभ मिलाई। कोई जल्दबाजी नहीं थी। मैंने उसकी नाइट ड्रेस के बटन एक-एक करके खोले। उसके नंगे शरीर पर मेरी उंगलियाँ धीरे-धीरे फिरती रहीं—पीठ, कमर, फिर उसके गोल बूब्स।
“काजल… तू मेरी जान बन गई है,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा। गर्दन, कॉलरबोन, दोनों चुचियाँ। एक-एक निप्पल को मुँह में लेकर धीरे-धीरे चूसा, जीभ घुमाई। काजल की सिसकारी हल्की और लंबी निकल रही थी— “आह्ह… भैया… ऐसे ही… बहुत प्यार से… आह्ह्ह…”
फिर मैं नीचे गया। उसकी टाँगें फैलाकर उसकी पहले से गीली बुर पर जीभ फेरने लगा। क्लिट को बहुत धीरे-धीरे चाटा, फिर अंदर उंगली डाली। काजल के हाथ मेरे बालों में उलझ गए।
“आह्ह्ह भैया… और अंदर… दो उंगली…घुसा कर पेलो आह्ह …आ….सी… सी … मैं आ रही हूँ…”
थोड़ी देर में उसके पूरे शरीर में कंपन हो गया और उसने मेरे मुँह पर पानी छोड़ दिया। मैंने सब चाट लिया और ऊपर आकर उसके होंठों पर किस किया। अब काजल ने खुद मेरे कपड़े उतारे। मेरा लंड सख्त खड़ा था। उसने दोनों हाथों से पकड़कर धीरे-धीरे सहलाया, फिर मुँह में ले लिया। जीभ से नीचे तक चाटा, गले तक ले जाने की कोशिश की। उसकी आँखों में प्यार और भूख दोनों थे।
“बहुत प्यार से चूस रही है तू…” मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा।
जब और देर नहीं हो सकी तो मैंने उसे सीधा लिटाया। लंड उसकी गीली बुर पर सेट करके बहुत धीरे-धीरे अंदर धकेला। काजल की आँखें बंद हो गईं।
“आह्ह्ह… भैया… पूरा अंदर… आज और गहरा… आह्ह …आ….सी… सी…”
मैंने पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया। फिर धीमी-धीमी गति से धक्के मारने लगा। एक हाथ से उसके बाल सहला रहा था, दूसरे से चुची मसल रहा था। बीच-बीच में उसके होंठ चूमता रहा।
“काजल… तू सिर्फ शरीर नहीं… मेरी साँस बन गई है। मैं तुझे सिर्फ चोदना नहीं चाहता… तुझे महसूस करना चाहता हूँ।”
काजल की आँखों में आँसू आ गए। “भैया… मैं भी… हमेशा आपके पास रहना चाहती हूँ… आह्ह… और जोर से… लेकिन प्यार से… सिसकारी…”
मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ाई। उसके पैर मेरे कंधों पर थे। हर धक्के के साथ उसकी बुर सिकुड़ रही थी। करीब पंद्रह मिनट बाद काजल ने जोर से पानी छोड़ दिया। उसकी सिसकारियाँ और हल्की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने लंड बाहर निकाला। अब मैंने उसे कुतिया स्टाइल में कर दिया। पीछे से लंड अंदर किया और उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। काजल की गाँड मेरे पेट से टकरा रही थी।
“भैया… गाँड भी ले लो… प्लीज़… उसने कराहते हुए कहा।
मैंने थूक और उसके पानी से लंड गीला किया। टोपा उसकी टाइट छेद पर रखा और बहुत धीरे-धीरे अंदर धकेला।
“आह्ह्ह्ह… भैया… गाँड… बहुत टाइट है… मुझे लग रही है आह्ह …आ….सी… सी … धीरे… पूरा अंदर कर दो…”
मैंने पूरा लंड उसकी गाँड में घुसा दिया। काजल की सिसकारियाँ लंबी और गहरी हो गईं। मैंने एक हाथ उसकी बुर पर रखा और क्लिट सहलाते हुए धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।
“आह्ह्ह… भैया… गाँड में भी बहुत मज़ा आ रहा है… आपका लंड पूरा अंदर है… उं…उन.. आह्ह …आ….सी… सी…. भैया…”
मैंने और गहरा धक्का मारा। काजल अब पीछे की ओर धक्के देने लगी थी। थोड़ी देर में वह जोर से काँपते हुए पानी छोड़ दी। मैंने भी बर्दाश्त नहीं किया और अपना सारा गर्म माल उसकी गाँड के अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। मेरा लंड अभी भी उसकी गाँड में था। काजल मेरे सीने पर सिर रखकर साँसें ले रही थी। मैंने उसके पसीने से भरे माथे को चूमा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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“कैसा लगा जानू?”
काजल ने धीरे से कहा, “आज की रात… मैं कभी नहीं भूलूँगी। भैया… आपने मुझे पूरा अपना बना लिया।”
मैंने उसे कसकर गले लगाया। “कल तू चली जाएगी… लेकिन हम मिलेंगे। अगले महीने मैं तेरे शहर आऊँगा। होटल बुक कर लूँगा। फिर पूरी रात… बिना किसी डर के।”
काजल ने मेरे होंठों पर हल्की सी किस की। “वादा है न भैया? मैं इंतज़ार करूँगी। और जब मिलेंगे… फिर से ऐसे ही प्यार करना… और भी गहरा।”
मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “वादा। अब सो जा। सुबह तक यहीं रह। मैं संभाल लूँगा।”
रात के बाकी बचे घंटों में हमने एक बार और बहुत धीमे-धीमे प्यार किया—इस बार सिर्फ बुर में, आँखों में आँखें डाले हुए, बिना एक शब्द के। सिर्फ सिसकारियाँ और साँसें। सुबह होने से पहले काजल चुपके से अपने कमरे में चली गई, लेकिन जाते-जाते दरवाज़े पर खड़ी होकर मुस्कुराई— मैंने उसके माथे पर किस की।
“अब जा। घरवाले बुला रहे होंगे। और हाँ… जब मिलेंगे तो मैं तुझे और भी प्यार से चोदूँगा। वादा।”
काजल ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। उसने जल्दी से कपड़े ठीक किए, मेरे गाल पर एक आखिरी किस की और बाहर चली गई। दो घंटे बाद कार निकल गई। काजल पीछे की सीट से मेरे तरफ देखती रही जब तक गाड़ी मोड़ पर गायब नहीं हो गई। और पीछे काजल के साथ बिताए गए पल की यादें रह गईं.
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