Sister Seal Break Story
हाय फ्रेंड्स, मैं आपकी कुमुद एक बार फिर आप सभी का स्वागत करती हूँ. दोस्तों आपने मेरी कहानी का पिछला भाग भैया ने कच्ची कलियों को फूल बनाया 1 और भैया ने कच्ची कलियों को फूल बनाया 2 पढ़ी मैं अब उसके आगे की कहानी पढ़ें: दोस्तों कुछ पाठकों ने अच्छे कमेंट किए जिससे पाठकों की इच्छा और पसंद का पता चलता है और अच्छी कहानी लिखने में बहुत मदद मिलती है. Sister Seal Break Story
शाम को मम्मी पापा के आने के बाद सभी सहेलियां दिनभर मजा मस्ती करने के बाद अपने घर वापस चली गई थोड़ी देर पढ़ाई करने के बाद खाना खाकर अपने कमरे में चली आई कुमुद की आँखें छत की तरफ टिकी थीं। कमरे में अँधेरा था, पर उसके मन-मस्तिष्क के अंदर का अँधेरा और गहरा हो रहा था।
दोपहर की वह सहेलियों वाली मस्ती अभी भी उसके शरीर में गूँज रही थी। सहेलियों के साथ जो लेस्बियन अनुभव, हँसी-मज़ा इससे आगे बढ़कर नेचुरल लड़के लड़की का मजा लेने का बहुत मन करने लगा लेकिन गाँव में, कॉलेज में, घर में बदनामी। अगर किसी को पता चल गया तो? उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। माँ-बाप का सिर शर्म से झुक जाएगा। नहीं नहीं वो ऐसा कुछ भी नहीं करेगी।
उसका मन शांत नहीं हुआ और शरीर कुछ अलग ही मजबूत गहरा प्यार मांग रहा था, रात भर वह कराहती रही, जागती रही, सोने की को क और छेड़छाड़ हुई थी, उसने उसके अंदर की सोई हुई भूख को जगा दिया था। वह आग बन चुकी थी। मीठी-मीठी जलन जो जाँघों के बीच से उठकर पूरे बदन में फैल जाती थी।
वह करवट बदलती रही, अपने छाती में तकिया को भींचती रही। आँखें बंद करके याद करती रही, पर हर पल के साथ उसका शरीर और बेचैन हो जाता। “मुझे असली मजा चाहिए… सिर्फ खेल नहीं इसकी सहेलियां अपने कजिन के साथ मजे ले चुकी हैं केवल उसने ही अभी तक कुछ नहीं किया,” उसके मन में आवाज़ गूँजी।
पर तुरंत ही डर ने उस आवाज़ को दबा दिया, अनजान लड़का कहीं कुछ गलत हो गया तो, वह सोने की कोशिश करती रही पर सो नहीं पाई मन मस्तिष्क में वही बेचैनी छाई रही। सुबह जब उठी तो आँखों के नीचे हल्के काले घेरे थे, पर शरीर में एक अजीब सा भारीपन थी। वह बाथरूम गई, ठंडे पानी से मुँह धोया, पर ताजे पानी की ठंडक भी उस आग को नहीं बुझा सकी।
उसने शीशे में अपनी शक्ल देखी। गोल-मटोल चेहरा, बड़ी-बड़ी बातें करती आँखें, गुलाबी होंठ, और वह शरीर जो अब खुद को छिपाने से थक चुका था। “मुझे किसी भरोसेमंद साथी की जरूरत है,” उसने फुसफुसाया। “ऐसा कोई जो कभी मुँह न खोले, जो मुझे इस्तेमाल करके छोड़ न दे, जो सुरक्षित हो कोई नजदीकी बहुत करीब से चलने वाला हो।
हेल्प लेने के लिए उसके दिमाग में सुनीता का नाम दिमाग में आया, फिर रजनी का उनके कज़िन दोनों लड़के अच्छे दिखते थे, बातें भी मीठी करते थे। पर कुमुद का दिल नहीं माना “नहीं… उनके साथ नहीं, वो मेरे लिए भरोसे वाले नहीं हो सकते आज खुश करेंगे, कल गाँव भर में कहानी फैला देंगे।” डर ने फिर से उसे जकड़ लिया।
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फिर अचानक उसके बड़े भाई रवि का चेहरा आँखों के सामने तैर गया। रवि… सत्ताईस साल का। लंबा, गठीला, डैशिंग। मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर। दिल्ली के पेंटहाउस में अकेला रहता है। कंपनी ने जो फ्लैट दिया है वह इतना बड़ा और लग्जरी है कि कोई पड़ोसी आसानी से नहीं झाँक सकता। और सबसे बड़ी बात—वह भाई है। राखी बंधवाने वाला सगा भाई। जो उसे छोटी बहन समझता है। जो कभी भी उसके बारे में गलत बात नहीं सोचेगा… जब तक कि वह खुद न चाहे।
कुमुद का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। “रवि भैया…?” उसने धीरे से नाम लिया। जीभ पर नाम रखते ही एक अजीब सी सिहरन हुई। गलत लग रहा था, बहुत गलत वो उसका सगा भाई था। पर साथ ही सुरक्षित भी लग रहा था रजनी की कजिन सुमन दीदी भी तो अपने सगे भाई पवन के साथ मजे लेती हैं, सबसे सुरक्षित संबंध रवि भैया के साथ ही था “इससे सेफ और बढ़िया कुछ नहीं हो सकता,” उसने खुद से कहा।
“वो कभी किसी को नहीं बताएगा। और अगर मैं सही तरीके से खेलूँ… तो शायद वह भी… दिमाग पर दिल की जीत हुई उसने सोचा लड़का से लड़का होता है और लड़की सिर्फ लड़की भाई बहन जैसी चीज सिर्फ दुनिया में आने के बाद बनी है और पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत होते समय सब भाई बहन ही थे. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
समाज जैसे-जैसे बढ़ता गया दूरियां आई गई और फिर रिश्तेदारी का कॉन्सेप्ट होने पर यह सब बंदिश आई अगर किसी को पता ना चले तो सब ठीक है और यहां पर खतरा भी नहीं। उसने अपने मन में निश्चय कर लिया कि वह अपने रवि भैया के साथ ही संबंध बनायेगी अपनी सहेलियों की तरह अपनी जवानी के पूरे मजे लेगी। उसने अगला पूरा दिन योजना बनाने में बिताया। ठीक एक हफ्ते बाद रक्षाबंधन आने वाला था। माँ को मनाना आसान था।
कुमुद: मां “मैं रवि भैया के पास जाकर राखी बाँधना चाहती हूँ, उसे सरप्राइज दूंगी। उसे नहीं बताना।” कुछ दिन भैया के पास रहकर आऊंगी और देखूंगी वह अकेले कैसे रहता है उसे इतने दिन अपनी छोटी बहन के हाथ का बना हुआ खाना खाने को मिल जाएगा माँ खुश हो गईं।
मां: “अच्छी बात है बेटी तुम दोनों का प्यार देखकर मुझे बहुत खुशी होती है। अकेले दिल्ली जा रही हो, सावधानी से रहना।”
कुमुद के मन में अपने भैया के लिए तड़पते हुए प्यार की जरा भी भनक मां को नहीं थी और ना ही सुमन और रजनी को उसने कुछ बताया। कुमुद ने टिकट बुक कर ली। दिल्ली जाने से पहले उसने कई रातें जागकर योजना बनाई। भैया के फ्लैट में वह क्या पहनेगी, क्या बात करेगी, कैसे नजदीक जाएगी, कैसे उसका भरोसा जीतेगी.
और फिर कैसे धीरे-धीरे उसके पास जाकर सीमाएँ लांघे की भैया को बुरा भी ना लगे और वह खुद इसको अपनी बाहों में ले ले। वह जानती थी कि एकदम से कुछ नहीं होगा। रवि बहुत समझदार और अनुशासित जिम्मेदार इंसान है वह कुमुद को अभी भी छोटी बच्ची ही समझता है और छोटी बहन होने के नाते कभी कोई गलत हरकत सोच भी नहीं सकता। उसे धीरे-धीरे, बहुत सावधानी से, फुसलाना होगा।
रक्षाबंधन वाले दिन सुबह-सुबह वह दिल्ली पहुँची। ओला बुक करके सीधे रवि की सोसाइटी में पहुंच गई रवि के पेंटहाउस का पता याद था। लिफ्ट में जाते समय उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कुमुद को कई बार घंटी बजानी पड़ी सुबह का समय था शायद रवि सो रहा हो। दरवाजा खुला तो रवि खड़ा था—नीला पजामा और सफेद टी-शर्ट में, बाल बिखरे हुए, आँखों में नींद के अवशेष। रवि की आँखें फटी की फटी रह गईं।
रवि भैया: “अरे कुमुद तू ? “तू यहाँ? अकेली? माँ-पापा कहां हैं?”
कुमुद ने शर्माते हुए मुस्कान बिखेरी।
कुमुद: “सरप्राइज भैया! रक्षाबंधन है ना… मैं खुद आकर राखी बाँधना चाहती थी आप इतने दिनों से घर नहीं आए आप मुझे प्यार नहीं करते पर मैं आपको बहुत प्यार करती हूं भैया इसलिए इस रक्षा बंधन पर मैं खुद राखी बांधने चली आई।”
उसने झूठ बोला, पर आवाज़ में नमी रखी ताकि भाई को लगे कि छोटी बहन इमोशनल है। रवि कुछ क्षण चुप रहा, फिर हँस पड़ा और उसे गले लगा लिया।
रवि भैया: “पागल है तू, आ जा अंदर छोटी।”
गले लगते समय कुमुद ने जानबूझकर अपना शरीर थोड़ा और नजदीक किया। छाती रवि की छाती से सट गई। कुछ सेकंड ज्यादा रोके रखा। रवि ने धीरे से अलग किया, पर कुमुद ने महसूस किया कि उसके शरीर में एक पल के लिए अकड़न आई थी।
रवि भैया: तूने यह कैसे सोच लिया कि मुझे तेरी याद नहीं आई एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब मैं तुझे और मम्मी पापा को याद नहीं करता और मैं भी तुझे बहुत प्यार करता हूं क्या करूं काम से छुट्टी ही नहीं मिलती कि मैं घर आ सकूं सुबह पहुंच कर शाम को लौटाना मुझे पसंद नहीं है। चल कोई बात नहीं अब तू आ गई है तो हम खूब मजे करेंगे।
भैया का पेंटहाउस विशाल था। बड़े-बड़े शीशे, मॉडर्न फर्नीचर, शहर का पूरा नजारा आंखों के सामने था। कुमुद ने घूम-घूमकर तारीफ की, पर उसकी नजर बार-बार रवि पर जा रही थी। रवि किचन में कॉफी बनाने लगा। कुमुद उसके पीछे गई।
कुमुद: “भैया, मैं आपकी मदद कर दूँ?” आप हटिये मेरे होते हुए आप किचन में काम करेंगे मैं ऐसा नहीं होंगे दूंगी। उसने पास जाकर कहा। इतना पास कि उसकी बाँह रवि की बाँह से छू गई।
रवि ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं, तू बैठ। थक गई होगी।” पर कुमुद बैठी नहीं। वह काउंटर पर झुक गई, जानबूझकर अपनी कमर को थोड़ा मोड़ा ताकि जींस में उसकी बॉडी और साफ दिखे। रवि की नजर एक पल के लिए वहाँ गई, फिर उसने जल्दी से नज़रें हटा लीं।
कॉफी पीते समय कुमुद ने बातचीत को निजी दिशा दी।
कुमुद: “भैया, आप अकेले कैसे रहते हो यहाँ? कोई गर्लफ्रेंड नहीं? अकेले मन लग जाता है इतने बड़े घर में बोर नहीं होते.”
रवि भैया: हँसा) “काम बहुत है कुमुद। बोर होने के लिए भी टाइम ही नहीं मिलता।”
कुमुद: “सच में? भैया आप इतने हैंडसम हो… दिल्ली की लड़कियाँ पागल हो जाएँगी।” कुमुद ने आँखें मिलाकर कहा।
उसकी आवाज़ में हल्की सी छेड़खानी थी, जो पहले कभी नहीं होती थी। रवि ने एक पल उसे देखा, फिर नज़रें फेर लीं।
रवि भैया: “बकवास मत कर। तू छोटी है अभी और बातें एकदम बड़ी-बड़ी कर रही है।”
कुमुद: भैया आपकी बहन “अब छोटी नहीं रही भैया,” कुमुद ने धीरे से कहा। “स्कूल में बहुत कुछ बदल गया है।”
उसने जानबूझकर बात अधूरी छोड़ी। रवि की भौंहें थोड़ी सिकुड़ गईं, पर उसने और कुछ नहीं पूछा। दोपहर में राखी का कार्यक्रम हुआ। कुमुद ने पारंपरिक कपड़े पहने—हलके गुलाबी रंग की सूट, जिसमें उसकी कमर और सीना हल्के से रेखांकित हो रहे थे। रवि के माथे पर टीका लगाया, राखी बाँधी। बाँधते समय उसकी उंगलियाँ रवि की कलाई पर ज्यादा देर तक रहीं। वह अंगूठे से धीरे-धीरे उसकी नस सहलाती रही। रवि की साँस एक पल के लिए रुकी, फिर सामान्य हो गई।
कुमुद: “मेरी राखी का बंधन बहुत मजबूत है भैया,आप हमेशा मेरी रक्षा करना… हर तरह से।”
कुमुद ने आँखों में आँसू लाते हुए कहा। रवि ने उसके सिर पर हाथ रखा और कुमुद को अपने सीने से लगा लिया।
रवि भैया: “बिल्कुल। मेरी प्यारी लाडली छोटी बहन तू मेरी जिम्मेदारी है मैं तेरी हर जरूरत और हर ख्वाहिश को पूरा करने का वचन देता हूं मैं तेरी हर तरह से रक्षा भी करूंगा।”
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राखी बंधवाने के बाद दोनों बाहर गए और पास के ही एक रेस्टोरेंट में लंच किया कुमुद को दिल्ली का खुला हुआ माहौल बहुत पसंद आ रहा था वह अपने भैया को बार-बार छेड भी रही थी और दिल्ली के बारे में जानकारी ही ले रही थी. खाना खा कर थोड़ा शाम को कुमुद ने स्नान किया। बाथरूम से निकलते समय उसने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था। बाल गीले थे, पानी की बूँदें कंधों से नीचे सरक रही थीं। रवि लिविंग रूम में लैपटॉप पर काम कर रहा था। कुमुद उसके सामने से गुजरी।
“भैया, ड्रायर कहाँ है?”
उसने पूछा। आवाज़ में नमी थी। रवि ने सिर उठाया और एक पल के लिए थम गया। तौलिया कमर तक था, और नीचे की चिकनी त्वचा चमक रही थी। उसने जल्दी से नज़रें हटा लीं। “बाथरूम के कैबिनेट में होगा।” कुमुद मुस्कुराई और चली गई। पर उसके मन में जीत का छोटा सा जश्न था। पहली चोट पड़ चुकी थी। रात का खाना साथ खाया। कुमुद ने बातचीत को और निजी बनाया। कॉलेज की लड़कियों की बातें, उनके बॉयफ्रेंड्स, छुप-छुपकर मिलने की कहानियाँ।
कुमुद: “भैया, कभी-कभी लगता है कि सब कुछ अनुभव कर लेना चाहिए… जब तक मौका है।”
रवि भैया: गंभीर हो), “संभल के रहना कुमुद। दुनिया बहुत गंदी है।”
कुमुद: “आपके साथ तो सुरक्षित हूँ ना?”
कुमुद ने आँखें मिलाकर पूछा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी। रवि कुछ नहीं बोला। बस सिर हिला दिया। रात को सोने से पहले कुमुद गेस्ट रूम में गई, पर दरवाजा बंद नहीं किया। थोड़ी देर बाद वह रवि के कमरे के पास आई। रवि बिस्तर पर लेटा किताब पढ़ रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुमुद: “भैया, नींद नहीं आ रही,” “क्या मैं आपके पास थोड़ी देर बैठ सकती हूँ?”
कुमुद ने दरवाजे पर खड़े होकर कहा। उसकी आवाज़ में उदासी थी। रवि ने किताब रखी। “आ जा।” कुमुद बिस्तर के किनारे बैठ गई। इतनी नजदीक कि उनकी जाँघें लगभग छू रही थीं। उसने रवि की बाँह पकड़ ली।
कुमुद: “भैया, मुझे बहुत अकेला लगता है कभी-कभी। कॉलेज में भी… घर में भी।”
रवि ने धीरे से उसका हाथ दबाया। “मैं हूँ ना।” कुमुद ने सिर रवि के कंधे पर रख दिया। बाल उसके गाल से छू रहे थे। वह जानबूझकर अपनी साँसें गरम-गरम उसके गले पर छोड़ रही थी।
कुमुद: “आपकी खुशबू बहुत अच्छी लगती है भैया आप बहुत हैंडसम लग रहे हो आज”, उसने फुसफुसाया।
रवि का शरीर थोड़ा अकड़ गया।
रवि भैया: “कुमुद… सो जा अब।”
कुमुद: “थोड़ी देर और बातें करते हैं आप मुझे कितने साल बाद मिले हो.”
उसने जिद की और और नजदीक सरक गई। उसका सीना रवि की बाँह से सट गया। तौलिया वाले समय की तरह ही वह महसूस कर सकती थी कि रवि की साँसें बदल रही हैं। थोड़ी देर बाद-
कुमुद: भैया मैं आपके साथ सो जाऊं जैसे बचपन में सोती थी मुझे वहां अकेले नींद नहीं आएगी।
रवि भैया: तू अभी तक डरती है बचपन में मुझे कस कर पकड़ कर सोती थी।
कुमुद: भैया मैं आपको वैसे ही पकड़ कर सोऊंगी।
भैया ने उठ कर रूम की लाईट बंद कर दी और बेड पर लेट गए कुमुद ने भैया को सामने से पकड़ लिया उसके संतरे भैया के सीने में दब गए और फिर एक टांग उठा कर अपने भैया की जांघों पर रख दी और बातें करने लगी।
कुमुद ने धीरे से कहा: “भैया,” “कभी-कभी मुझे लगता है कि राखी का बंधन सिर्फ रक्षा का नहीं होता… और भी कुछ होता है जैसे आपने आज मेरी जिम्मेदारी उठाने और हर जरूरत पूरी करने का वचन दिया है है ना।”
रवि की आँखों में एक अजीब सी चमक आई, फिर बुझ गई।
रवि भैया: हां मेरी छोटी गुड़िया तू बोल तुझे क्या चाहिए मैं दूंगा ना।
कुमुद: भैया अब मैं छोटी नहीं हूं बड़ी हो गई हूं मुझे प्यार की जरूरत है मुझे आपका प्यार चाहिए.
रवि भैया: “मत बोल ऐसी बातें।”
कुमुद: “क्यों भैया? डर लगता है?” कुमुद ने चुनौती भरी नजरों से देखा। उसकी आवाज़ में पहली बार खुला हुआ निमंत्रण था। रवि ने मुँह फेर लिया।
रवि भैया: “तू मेरी बहन है छोटी।”
कुमुद ने कदम बढ़ाया और जोर से चिपक गई।
कुमुद: “हाँ… हूँ,” पर मैं अब छोटी बच्ची नहीं रही भैया। मेरा शरीर… मेरी जरूरतें… सब बदल चुकी हैं।”
रवि की मुट्ठियाँ भींच गईं।
रवि भैया: आगे कुछ मत बोल “कुमुद, रुक जा।”
पर कुमुद नहीं रुकी। उसने रवि का हाथ पकड़ा और अपनी कमर पर रख दिया।
कुमुद ने धीरे से कहा,: “बस इतना… महसूस करो। मैं एक लड़की हूँ। आपकी छोटी बहन… और एक नई जवान लड़की भी।”
रवि का हाथ काँपा। उसने हटाने की कोशिश की, पर कुमुद ने दबाए रखा। उसकी आँखों में आँसू थे—असली आँसू।
कुमुद ने धीरे से कहा: “मुझे डर लगता है भैया। बाहर के लड़कों से, वो आवारा लड़के मुझ पर गंदी गंदी बस्तियां कसते हैं बोलते हैं ऐ रसगुल्ला मीठा शीरा पिता दे, आज दूध पिला दे मैं डरती हूं पर आपके साथ नहीं लगता। आप मुझे कभी नहीं छोड़ेंगे… ना?”
रवि की साँसें तेज हो गईं। उसकी आँखों में संघर्ष साफ दिख रहा था—भाई वाला प्यार और कुछ और जो वह नाम नहीं देना चाहता था। कुमुद ने एक कदम और बढ़ाया। उसने सिर उठाया और रवि के होंठों के बहुत नजदीक आकर फुसफुसाया,
कुमुद: “बस एक बार…मुझे लड़की होने का एहसास करा दो, मुझे महसूस होने दो कि आप मुझे प्यार करते हो मेरी हर जरूरत पूरी करोगे, मेरी सुरक्षा करोगे बाकी सब बाद में।”
रवि की आँखें बंद हो गईं। उसके माथे पर पसीना आ गया था। कुमुद जानती थी कि वह जीत के करीब है। अभी और जोर लगाने की जरूरत नहीं थी। धीरे-धीरे, बहुत सावधानी से भैया को फुसला रही थी। उसने रवि का हाथ अपनी कमर से हटाया, पर पूरी तरह दूर नहीं किया। बस उंगलियाँ पकड़ लीं।
कुमुद: “मैं आपका इंतजार करूँगी भैया। जब तक आप तैयार न हों… मैं कुछ नहीं करूँगी। बस… मुझे पास रखिए।”
रवि ने आँखें खोलीं। उनमें एक तूफान था। उसने कुछ नहीं कहा। बस कुमुद के सिर पर हाथ रखा और धीरे से सहलाया—वैसे ही जैसे सालों से सहलाता आया था। पर इस बार सहलाने में कुछ अलग था। कुछ भारी। कुछ अलग सा कुमुद मुस्कुराई। अंदर ही अंदर। पहली बड़ी जीत मिल चुकी थी। रवि अब सिर्फ भाई नहीं रह गया था उसके लिए। वह एक आदमी बन चुका था—जिसके अंदर की दीवारें हिलने लगी थीं।
रवि भैया: चल अब सो जा बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगी है बहकी बहकी भी।
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रात भर कुमुद अपने भैया के साथ कमरे में लेटी रही और योजना बनाती रही। अगला कदम क्या होगा। कैसे और नजदीक जाएगी। कैसे उसकी साँसें और तेज करेगी। कैसे उसे फुसलाकर अपनी इच्छा पूरी करेगी। अगली सुबह की रोशनी पेंटहाउस की बड़ी खिड़कियों से छनकर अंदर आई तो कुमुद की आँखें पहले ही खुली हुई थीं।
उसने रात भर बहुत कम सोई थी। शरीर में एक मीठी बेचैनी तैर रही थी। रवि के हाथ का स्पर्श, उसकी साँसों की गर्माहट, और वह अधूरी सी लड़ाई जो उसकी आँखों में दिखी थी—सब कुछ अभी भी उसकी त्वचा पर जीवित था। सुबह नाश्ते की मेज पर रवि पहले से बैठा था।
कॉफी के कप में भाप उठ रही थी। उसने कुमुद को देखा—आज उसने हल्के गुलाबी रंग की छोटी सी फ्रॉक पहनी थी, जो जाँघों के बीच तक आती थी। बाल खुले थे, होंठ पर हल्का सा ग्लॉस। रवि की नज़र एक पल के लिए उसकी जाँघों पर अटकी, फिर उसने जल्दी से नज़रें हटा लीं।
पर कुमुद ने देख लिया। उस एक पल में रवि की साँस थोड़ी तेज हो गई थी। “सुबह-सुबह इतनी तैयार?” रवि की आवाज़ में हल्की सी कोशिश थी कि वह सामान्य लगे। कुमुद मुस्कुराई और उसके बगल में बैठ गई। इतनी नज़दीक कि उनकी बाँहें छू गईं।
कुमुद: “आज आप मुझे शहर घुमाने चलोगे ना भैया? मुझे शापिंग भी कराएंगे, आपने कहा था। उसकी आवाज़ में मिठास थी, आँखों में खेल।
रवि ने सिर हिलाया। “हाँ… चलेंगे और शापिंग भी कराएंगे।” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी भारीपन था। जैसे वह खुद से लड़ रहा हो।
और कुमुद जानती थी—अब खेल सच में शुरू हो चुका है। धीरे-धीरे, बहुत धीरे-धीरे। हर छूआव, हर नजदीकी, हर अधूरी बात उसके जाल को और मजबूत बना रही थी। रवि अभी भी लड़ रहा था अपने अंदर के भाई से। पर कुमुद के शरीर की गर्मी, उसकी आवाज़ की नमी, और उसकी आँखों का खुला निमंत्रण… धीरे-धीरे उस लड़ाई को कमजोर कर रहा था।
वह जानती थी कि एक दिन रवि खुद उसके करीब आएगा। खुद उसकी साँसें सूंघेगा। खुद उसकी देह का स्पर्श मांगेगा। और तब तक… वह इंतजार करेगी। सब्र के साथ। कामाग्नि को सुलगाए रखेगी, हर रात अपने कमरे में लेटकर प्लानिंग करेगी—क्योंकि उसने सही फैसला लिया था। रवि भैया से सुरक्षित और बढ़िया कुछ नहीं हो सकता था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
नाश्ता करते समय कुमुद ने जानबूझकर अपनी जाँघ रवि की जाँघ से सटा दी। रवि हिला नहीं। न हटाया, न कुछ कहा। बस कॉफी पीता रहा। कुमुद ने महसूस किया कि उसके शरीर में एक हलकी सी कंपन है। वह जानती थी—दीवारें और हिल रही हैं। दोपहर के आसपास वे मॉल पहुँचे। एयर कंडीशंड मॉल में ठंडक थी, पर कुमुद के शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही थी।
रवि उसके बगल में चल रहा था। कभी-कभी उसकी बाँह कुमुद के कंधे से छू जाती। कुमुद हर बार उस स्पर्श को थोड़ा और लंबा कर लेती। वे एक बड़े ब्रांड के लिंगरी सेक्शन में रुके। चमकदार लाइट्स, रेशमी कपड़े, नाजुक फीते एक से एक बढ़कर नई फैंसी माॉडल्स वाली लिंगरिज़। कुमुद ने एक काले रंग की ब्रा पैंटी का सेट उठाया —बहुत पतली, बहुत खुली, उसने रवि की तरफ देखा।
कुमुद: “देखिए जी… ये कैसी लगेगी?”
रवि की आँखें सेट पर गईं, फिर कुमुद के चेहरे पर। वह कुछ नहीं बोला। बस गला साफ़ किया। तभी सेल्स गर्ल पास आई। सुंदर, मुस्कुराती हुई। उसने दोनों को देखा— रवि का लंबा गठीला शरीर, कुमुद की कोमल जवानी, और उनके बीच की वह अजीब सी नज़दीकी। वह मुस्कुराई और बोली, सर क्या लेंगे मैम के लिए, भैया शर्माते हुए बोले इनके लिए कंफर्टेबल लांजरी दिखाएं.
वो कॉटन की कुछ फैंसी लांजरी ले आई, और बोली मैम ये सेट आपके ऊपर बहुत खूबसूरत लगेगा। आपके हसबैंड की पसंद भी यही लगती है जब आप इसे पहनेंगी तो आपके हसबैंड आपके और दीवाने हो जाएंगे। कुमुद की साँस रुक गई। पत्नी… हसबैंड। शब्दों ने उसके मन में कुछ और जगा दिया। उसने रवि की तरफ देखा। रवि की गालों पर हल्का सा लाल रंग छा गया था। उसने सुधारने की कोशिश नहीं की। सिर्फ चुप रहा।
कुमुद ने सेल्स गर्ल से कहा, “जी… ये ही पसंद करेंगे ” फिर रवि की तरफ मुड़ी। “एजी… आप ही पसंद करो ना।”
रवि ने धीरे से सिर हिलाया। “ले लो जो तुम को पसंद है।” आवाज़ में एक अजीब सी राहत और बेचैनी दोनों थी।
कुमुद ने और दो सेट चुन लिए—एक गहरा लाल, एक सफेद फीते वाला। सेल्स गर्ल पैक करते हुए फिर बोली सर कुछ नए ट्रांसपेरेंट फैंसी गाउन आए हैं नाइट ड्रेस में क्या आप अपनी खूबसूरत पत्नी के लिए लेना चाहेंगे मैडम को बहुत पसंद आएंगे और उनके ऊपर अच्छा भी लगेगा, रवि भैया ने मेरे तरफ देखा मैं शर्मा गई और अपनी लेने की इच्छा जाहिर की.
रवि भैया: दिखा दीजिए मैडम जो सबसे अच्छे हो वही दिखाएगा.
फिर उसने 8 10 फैंसी डिज़ाइन की ट्रांसपेरेंट गाउन दिखाएं मैंने उसमें से एक पसंद किया तो वह बोली सर आप भी एक अपनी पत्नी के लिए पसंद कर लीजिए तो उसमें से भैया ने भी एक पसंद किया हमने वहां से दो ट्रांसपेरेंट गाउन लिए और पेमेंट कर दी।
सेल्स गर्ल: “आप दोनों की जोड़ी देखकर लगता है जैसे सालों से साथ हों। आप दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं, बहुत प्यारी केमिस्ट्री है।”
रवि ने कुछ नहीं कहा। कुमुद ने उसकी बाँह पकड़ ली। उँगलियाँ उसकी कलाई पर फिर गईं—वैसे ही जैसे राखी बाँधते समय गई थीं। रवि ने हाथ नहीं हटाया। बाहर निकल कर-
कुमुद: भैया वो हमें पति-पत्नी समझ रही थी।
रवि: तुम हो ही इतनी सुंदर आकर्षक और समझदार की साथ में हमें कोई भी पति-पत्नी समझेगा।
कुमुद: भैया वैसे तो हम भाई-बहन हैं पर हसबैंड वाइफ सुनकर मज़ा आया। यहां थोड़ी देर हम ऐसे ही विहेव करते हैं मैं आपको बाबू और आग बुलाती हूं और आप मुझे जान या जानू का कर बुलाए ना मजा आएगा, और शरारत से मुस्कुरा दी।
रवि: शरमाते हुए) चल ठीक है सिर्फ तेरी खुशी के लिए।
इसके बाद वे ज्वेलरी सेक्शन में गए। कुमुद ने एक पतली सोने की अंगूठी उठाई। साधारण, पर खूबसूरत। उसने रवि की तरफ देखा। “एजी… ये कितनी सुन्दर है ना?” रवि ने अंगूठी देखी, फिर कुमुद की आँखों में। एक पल के लिए फिर मुस्कुराया कुछ कहा नहीं।
फिर रवि भैया ने सेल्सपर्सन से कहा, “कुछ और अच्छी डायमंड की रिंग दिखाइए।” सेल्स पर्सन ने ढेर सारी हीरे की अंगूठियां निकाल कर कुमुद के सामने रख दी और बोली मैडम लीजिए पसंद कीजिए कुमुद ने एक बहुत ही अच्छी सी डायमंड रिंग पसंद की.
कुमुद: बाबू देखिए ये कैसी है अच्छी लग रही है ना।
रवि भैया: तुम्हें पसंद है जानू..
कुमुद का दिल जोर से धड़का और वो अपने भैया के मुंह से जानूं सुनकर बुरी तरह से शर्मा गई।
रवि भैया: भैया ये दे दीजिए कितने की है।
सेल्स गर्ल: सर एक लाख ग्यारह हजार की।
रवि ने पेमेंट करके अंगूठी उसकी उँगली में पहनाई, रवि की उँगलियाँ उसकी उँगलियों से छू गईं। कुछ सेकंड तक दोनों ने हाथ नहीं हटाया।
सेल्स गर्ल: मुस्कुराते हुए) मैम आपकी शादी अभी अभी हुई है “बहुत प्यारा गिफ्ट है आपके हसबैंड की तरफ से आपको बहुत प्यार करते हैं आपको। और यह हमारे शोरूम की तरफ से नए कपल को एक गिफ्ट हैंपर है इसे घर ले जाकर साथ में खोलिएगा।
कुमुद ने शर्मा कर हां में सिर हिलाया और बाहर निकलते समय कुमुद ने रवि की बाँह में अपना हाथ डाल लिया। रवि ने हटाया नहीं। वे मॉल की ठंडी हवा में चल रहे थे, पर दोनों के शरीर में एक अलग सी गर्मी थी। शाम को रवि ने उसे एक अच्छे रेस्टोरेंट में ले गया।
धीमी लाइट्स, सॉफ्ट म्यूजिक, टेबल पर एक छोटी सी मोमबत्ती। कुमुद ने फ्रॉक को थोड़ा और खींच लिया ताकि जाँघें और साफ़ दिखें। रवि की नज़र बार-बार वहाँ जाती और फिर हट जाती। खाना खाते समय कुमुद ने बातचीत को और निजी बनाया।
कुमुद: “भैया… आज वो सेल्स गर्ल हमें पति-पत्नी समझ रही थी।”
उसने धीरे से कहा। आवाज़ में हँसी थी, पर आँखों में कुछ और। रवि ने वाइन का घूँट लिया।
रवि भैया: “ वो सुंदर लड़की और जवान लड़के को साथ देखकर ऐसे ही बोलते हैं और तू भी तो आज ऐसे एंजॉय करना चाहती थी। तेरी खुशी के लिए मैंने भी तुझे सबके सामने जानूं बुलाया। फिर वाइन का दूसरा ग्लास खाली किया।
कुमुद: “बाबू मुझे बहुत अच्छा लगा आपके साथ… पत्नी जैसा महसूस करना। आप भी मुझे अपनी पत्नी की तरह शॉपिंग कर रहे थे पहले नहीं फैंसी सेक्सी लिंगरीज फिर डायमंड रिंग कितना तो कोई अपनी गर्लफ्रेंड के लिए भी नहीं करता है।
उसने अपना पैर आगे बढ़ाया और रवि के पैर से सटा दिया। जूते के ऊपर से। रवि की साँस थोड़ी तेज हो गई। उसने पैर नहीं हटाया।
रवि भैया: “कुमुद… ऐसी बातें मत कर।”
कुमुद: “क्यों?” “डर लगता है? बाबू या… अच्छा लगता है?” कुमुद ने आँखें मिलाईं।
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रवि चुप रहा। कुमुद ने अपना हाथ टेबल के नीचे बढ़ाया और रवि की जाँघ पर रख दिया। धीरे से सहलाया। रवि की मांसपेशियाँ तन गईं। उसने हाथ नहीं हटाया। कुमुद की उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगीं—जाँघ के अंदर की तरफ। बहुत हल्के से। रवि की साँसें भारी हो गईं। उसने आँखें बंद कीं, फिर खोलीं “बस…” उसकी आवाज़ फटी हुई थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
कुमुद ने हाथ हटा लिया, पर मुस्कुराई।
कुमुद: “अभी तो आपकी पत्नी ने बस छुआ है बाबू.”
खाना खत्म होने तक दोनों के बीच की हवा बदल चुकी थी। रवि की आँखों में वह पुरानी भाई वाली नज़र नहीं रह गई थी। कुछ और था—भूख, संघर्ष, और एक मौन सी स्वीकृति। रात नौ बजे वे घर पहुँचे। पेंटहाउस में अँधेरा था। रवि ने लाइटें जलाईं। कुमुद शॉपिंग बैग्स लेकर अपने कमरे में गई। दरवाजा बंद किया।
उसने नई लिंगरी निकाली— काली वाली। धीरे-धीरे फ्रॉक उतारी। ब्रा और पैंटी उतारी। नई लिंगरी पहनी। काला रेशम उसकी त्वचा पर चिपक गया। फीते कमर पर, स्तनों के बीच की गहराई को और गहरा करते हुए फिर ऊपर से वह पिंक कलर का ट्रांसपेरेंट गाउन पहना । उसने शीशे में खुद को देखा। गोल-मटोल शरीर, जाँघों की कोमलता, और वह जगह जो अब तड़प रही थी।
कुमुद: “आज मेरी बुर का उद्घाटन होगा, मेरे भैया के हाथों से… कुमुद फुसफुसाई.”
वह कमरे से निकली। रवि लिविंग रूम में खड़ा था। उसने कुमुद को देखा—काली लिंगरी में, ऊपर पिंक ट्रांसपेरेंट पतला सा गाऊन। गाऊन खुला हुआ था। रवि की आँखें फैल गईं। गला सूख गया। “कुमुद…” आवाज़ में चेतावनी थी, पर कमज़ोर जिससे कुमुद श्योर हो गई कि आज की रात माल में हुई सेल्स गर्ल के साथ हुई बातें सही हो जाएंगी.
आज वो रवि की पत्नी बन कर मज़े लेगी। कुमुद उसके पास गई। धीरे-धीरे। हर कदम के साथ रवि की साँसें तेज होती गईं। वह रुकी तो दोनों के बीच सिर्फ एक इंच की दूरी रह गई। उसने रवि का हाथ पकड़ा और अपनी कमर पर रख दिया। रेशम जैसी चिकनी कमर के ऊपर।
कुमुद: “मुझे महसूस करो भैया… आज मैं सिर्फ आपकी हूँ।”
रवि का हाथ काँपा। उसने हटाने की कोशिश की, पर कुमुद ने दबाए रखा। फिर रवि का दूसरा हाथ भी उसकी कमर पर आ गया। जैसे खुद-ब-खुद। कुमुद ने सिर उठाया। उनके होंठ बहुत नजदीक थे।
रवि भैया: पुच्च.
रवि झुका। पहले सिर्फ साँसें मिलीं। फिर होंठ। बहुत धीरे। बहुत कोमल। जैसे कोई डरे हुए सपने को छू रहा हो। कुमुद ने आँखें बंद कर लीं। रवि के होंठ उसके होंठों पर दबे। जीभ की नोक छुई। कुमुद ने उसकी गर्दन में हाथ डाल दिए। चुंबन गहरा होता गया। साँसें तेज। रवि की बाँहें उसकी कमर के चारों ओर कस गईं। शरीर सट गए।
कुमुद ने महसूस किया—रवि का शरीर सख्त हो रहा है। उसके नारी देह को इतने करीब से पा कर वह और नजदीक सरक गई। जाँघें उसकी जाँघों से सट गईं। रवि की साँसें उसके गले पर गर्म गर्म छू रही थीं। चुंबन टूटा तो दोनों हाँफ रहे थे। कुमुद की आवाज़ काँप रही थी।
कुमुद: भैया “मुझे प्यार करो… और छुओ।”
रवि के हाथ उसकी पीठ पर सरकने लगे। गाऊन के अंदर। रेशम के ऊपर। कमर से ऊपर, फिर नीचे। कुमुद की साँसें अटक गईं। रवि की उँगलियाँ उसकी रीढ़ की हड्डी पर फिर रही थीं। फिर आगे बढ़ीं—ूचियों के नीचे। धीरे से। कुमुद ने उसकी गर्दन में चेहरा छुपा लिया। “हाँ… ऐसे…”
रवि ने गाऊन के दोनों किनारों को पकड़ा और धीरे से कंधों से उतार दिया। काली ब्रा और पैंटी भी उतार दी अब कुमुद पूरी तरह नंगी थी उसकी नज़रों के सामने। चूची की गोलाई, कमर की रेखा, जाँघों की कोमलता। रवि की आँखों में प्यार तूफान था। उसने एक हाथ आगे बढ़ाया और कुमुद के चूची को छुआ रेशम के जैसे चिकनी चूची रवि ने अपने हाथ से धीरे-धीरे सहलाया कुमुद की कमर ऐंठ गई।
“भैया…” आवाज़ में विनती थी आओ भैया अपनी छोटी बहन को प्यार करो। रवि झुका और उसके गले पर होंठ रख दिए। चूमने लगा। कान के नीचे, गले की नस पर, कॉलरबोन पर। कुमुद की उँगलियाँ उसके बालों में घुस गईं। रवि का हाथ नीचे सरका—कमर से होते हुए जाँघ के अंदर तक। रेशम के किनारे पर। कुमुद की टाँगें काँपने लगीं।
रवि ने कुमुद को अपनी बाहों में उठा लिया और एक दूसरे को चूमते हुए वे धीरे-धीरे कमरे की तरफ बढ़े। चुंबन टूटता नहीं था। हाथ शरीरों पर घूमते रहे। रवि ने कुमुद को उठाया। उसने अपनी टाँगें उसकी कमर के चारों ओर लपेट लीं। शरीर और सट गए। रवि के कमरे में पहुँचे। बिस्तर के पास।
रवि ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। खुद उसके ऊपर झुक गया। दोनों हाँफ रहे थे। कुमुद ने रवि की टी-शर्ट के नीचे हाथ डाल दिए। छाती सहलाई। मांसपेशियाँ तनी हुई थीं रवि ने टी-शर्ट उतार दी। कुमुद की आँखें उसकी छाती पर टिक गईं। उसने होंठ वहाँ रख दिए और चूमने लगी।
रवि की साँसें तेज हो गईं। कुमुद की उँगलियाँ उसके ऊपर फिरने लगीं। ऊपर-नीचे। रवि हाँफ रहा था। उसने कुमुद की टाँगें और खोलीं। अपने शरीर को उसके बीच बिठा लिया। दोनों के अंग अब छू रहे थे। गर्म। गीले। धड़कते हुए। रवि झुका। माथा कुमुद के माथे से सटा।
रवि भैया: “कुमुद… अभी भी रुक सकते हैं… तू मेरी छोटी बहन है और अगर हम आगे बढ़े तो हमारा यह बहन भाई का रिश्ता खत्म हो जाएगा हमेशा के लिए।“
कुमुद: नहीं भैया आज नहीं मुझे अपना लड़की होने का एहसास करना है और जवानी के मजे अपने भैया से लेने हैं मेरा भैया मुझे बहुत प्यार करता है और वह मुझे हर तरह से खुश रखेगा यह मैं जानती हूं इसलिए भैया मुझे प्यार करो हम आपसे अकेले में पति-पत्नी के रिश्ते को आगे बढ़ाएंगे बाहर सब हमें भाई बहन ही जानेंगे मेरे भैया मुझे आज पत्नी बना लो।
रवि भैया: एक बार फिर सोच ले कुमुद क्या तू वाकई में मेरी पत्नी बनकर मजे लेना चाहती है तू अभी छोटी है 10th में पढ़ रही है अभी शरीर को पूरी तरह से मैच्योर होने में कम से कम 3 साल का समय है हम यह 3 साल बाद भी कर सकते हैं अगर मेरी बात मान ले।
कुमुद: भैया मैंने बहुत सोच विचार करके यह निर्णय लिया है मेरी सहेलियों अपने बॉयफ्रेंड के साथ मजे लेती हैं लेकिन मैं और मेरी दो पक्की सहेलियां सुनीता और रजनी बाहर किसी के चक्कर में नहीं पड़ती वह अपने कजिन के साथ मजे ले रही हैं रजनी का कजिन अपनी सगी छोटी बहन को मैं आपके साथ लेना चाहती हूं उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई इसलिए परेशान मत हो बस मुझे अपनी पत्नी बनाकर प्यार करो आई लव यू भैया.
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रवि भैया: तू इतना फोर्स कर रही है तो तेरी खुशी के लिए मैं हर सोच ले आज के बाद कभी कोई पछतावा शिकायत नहीं होनी चाहिए।
कुमुद बिना पूरी बातें सुने, मंदिर से सिंदूर की डिब्बी ले आई भैया के सामने रखकर बोली-
कुमुद: भैया लो मेरी मांग में भर दो मुझे अपनी पत्नी बना लो।
रवि ने उसका हाथ पकड़ कर सिंदूर की डिब्बी पर रखा तो उसने एक चुटकी सिंदूर निकाल कर कुमुद की मांग में भर दिया।
कुमुद: रवि भैया आज से आप मेरे पति और मैं आपकी पत्नी हूं अब आपको मुझे प्यार करने में कोई ग्लानि या शिकायत नहीं होनी चाहिए मैं आपसे वादा करती हूं कि हम अपनी यह पति पत्नी वाली बात को आपस में ही रखेंगे कभी किसी भी तीसरे को पता नहीं चलने देंगे जब मैं आपके साथ अकेले में होगी तो आपकी पत्नी बनके रहूंगी वरना सबके सामने मैं आपकी छोटी बहन रहूंगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रवि भैया: मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि मेरी इतनी छोटी बहन एक जवान मैच्योर लड़की की तरह व्यवहार कर रही है.
फिर रवि भैया ने कुमुद को सीने से लगा लिया और अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया उसके होंठों को अपने मुंह में भरकर चूसने लगे कुमुद के शरीर की सारी हड्डियां कड़कने लगी।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आआआ… ’बाबू आराम से मुझे दर्द हो रहा है उफ़ मां दर्द… हो रहा है बाबू सी…..सी……धीरे धीरे करो भैया!’ ‘उह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… हाए मर जाऊँगी…
रवि भैया: तू मेरी पत्नी है आज हम सुहागरात मनाएंगे और मैं प्यार करूंगा उसकी और अपनी सारी इच्छाएं पूरी करूंगा तू आज कितना भी चिल्लाए मुझे अपनी बनकर रहूंगा मेरी अमानत जो तूने अपनी टांगों के बीच में छुपाई है आज मैं तुझसे ले लूंगा।
कुमुद: मेरे राजा मैं भी अपनी सारी इच्छाएं पूरी करूंगी मेरी छोटी सी बुर में आपका यह मुष्टंडा लंड पुरा घुसा कर अपनी बुर का उद्घाटन करवाऊंगी आई लव यू भैया आज आप मेरी कुंवारी बुर उद्घाटन कर दीजिए मेरी बुर की मांग खून से भरिए।
रवि भैया: मेरी जान आज मैं तेरी कुंवारी बुर का उद्घाटन करूंगा और तेरी बुर की मांग को खून से भरूंगा.
रवि ने अपने हाथ गाऊन के अंदर सरका कर गए। रेशम की ब्रा के ऊपर चूचियों को दबोच कर मसलने लगे। कुमुद की कमर ऐंठ गई।
कुमुद: “आह… सी…..सी……उम्म… आह…भैया… जोर से मसलो मेरी चूचियाँ…सी…सी… मेरा बाबू आई लव यू बाबू.”
रवि ने गाऊन कंधों से उतार दिया। काली ब्रा खोली। चूचियाँ मुक्त हो गईं। गोल, भारी, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। रवि झुका। एक चूची मुँह में ले ली। जीभ से निप्पल को घुमाया, चूसा, दाँतों से हल्के से काटा। कुमुद की उँगलियाँ उसके बालों में घुस गईं।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आआआ… भैया दर्द… हो रहा है सी…..सी……धीरे धीरे करो भैया!’ ‘उह्ह… उम्म…उफ्फ कितना अच्छा लग रहा है… हाए मर जाऊँगी…’ “हाँ… ऐसे चूसो भैया… मेरी चूचियाँ चूसो…”
दूसरी चूची भी मुँह में गई। रवि की जीभ निप्पल पर नाच रही थी। थूक चमक रहा था। कुमुद की बुर और गीली हो रही थी। दरार से पानी झड़ने लगा था। रेशमी पैंटी चिपक गई थी। रवि का हाथ नीचे गया। जाँघों के बीच। पैंटी के ऊपर से बुर को मसलने लगा। उँगली दरार पर फेरने लगी। कुमुद की टाँगें काँपने लगीं।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आह… “भैया… अंदर… मेरी बुर के अंदर डालो…”सी…सी… भैया सी… ..सी……उम्म… धीरे करो भैया!’ ‘उह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… हाए मां…’
रवि ने पैंटी के किनारे से उँगली अंदर सरका दी। गीली, गरम, चिकनी दीवारें। उँगली दरार में घुस गई। कुमुद की कमर बिस्तर की तरफ उठ गई। कुमुद: सी…..सी…… उम्म… आह… भैया… और अंदर… डालो बुर में… सी…..सी…… कितनी फंसकर रगड़ देते हुए अंदर घुस रही है उम्म… आह…
रवि ने कुमुद को बिस्तर पर लिटा दिया। खुद टी-शर्ट उतारी, छाती नंगी हो गई फिर कुमुद के ऊपर चढ़कर लेट गया कुमुद ने रवि की छाती पर हाथ फेरा और उसके निप्पल पर होंठ रख दिए। जीभ से चाटने लगी। रवि की साँसें तेज हो गईं। उसने जींस खोली अपना तना हुआ 9 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा लंड बाहर निकला—सख्त, तना हुआ, नसों से भरा। कुमुद की आँखें फैल गईं। उसने हाथ बढ़ाया। उँगलियाँ लंड पर फिरने लगीं। ऊपर-नीचे। अंगूठे से सिर को सहलाया।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आह… “भैया… कितना सख्त है…ये मुस्टंडा लंड आज मेरी बुर में घुस कर मेरी सील तोड़ेगा, बहनचोद ये मेरी जान ले लेगा.
रवि हाँफ रहा था। उसने कुमुद की पैंटी पूरी तरह खींच ली। बुर नंगी हो गई। भरी हुई, गुलाबी, गीली। दरार चमक रही थी। पानी झड़ रहा था। रवि झुका। जीभ निकाली। बुर पर लगा दी। एक लंबी चाट। कुमुद की कमर उछल गई।
कुमुद: “आह्ह… भैया… जीभ… मेरी बुर चाटो…सी… ..सी……उम्म… आह…”
रवि की जीभ दरार में घुस गई। ऊपर-नीचे, गोलाई में। क्लिट को चूसा। थूक और कुमुद का पानी मिलकर बह रहा था। कुमुद की टाँगें उसके सिर के दोनों तरफ खुल गईं। उँगलियाँ उसके बालों में। कुमुद: “सी…..सी……उम्म… आह… और.. जोर से चाटो भैया… मेरी बुर झाड़ दो…सी…..सी……”
रवि ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। जीभ क्लिट पर। कुमुद कराह रही थी। शरीर ऐंठ रहा था। बुर की दीवारें उँगलियों को कस रही थीं। पानी और झड़ रहा था। बिस्तर गीला होने लगा था। रवि कुमुद को अपने नीचे दबा कर उसके ऊपर चढ़ गया लंड कुमुद की जाँघ पर सट गया। गरम, सख्त। कुमुद ने उसे पकड़ा और अपनी बुर पर रगड़ने लगी। सर से दरार तक। गीलापन लंड पर चिपक रहा था।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आह…भैया… अब बर्दाश्त नहीं हो रहा डाल दो… बहनचोद लंड को मेरी बुर में डाल दो… आज उद्घाटन कर दो…”
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रवि कुमुद के ऊपर चढ़ गया उसका माथा कुमुद के माथे से सट गया। साँसें मिल रही थीं। लंड दरार पर दबाव दे रहा था। लंड का सुपाड़ा अंदर घुसने को था। कुमुद की बुर की फांकें लंड के स्वागत में फड़क रही थी और अपने होंठों को खोल कर आमंत्रित कर रही थी।
रवि संयम से अपने लंड को बुर के होंठों पर सिर्फ रगड़ता रहा। उँगलियाँ चूचियों को धीरे-धीरे सहला रही थी जीभ गले को चूस रही थी दोनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे। रवि अपनी छोटी बहन के साथ सुहागरात को एक यादगार तरीके से मनाना चाहता था और वह उसके पहले फोरप्ले कर रहा था. कुमुद, रवि के कान में फुसफुसाई आवाज़ काँपती हुई,
कुमुद: “भैया… मेरी चूचियाँ चूसो…अपनी छोटी बहन का दूध पी लो मेरी बुर चाटो… आज मेरी जवानी तुम्हारी उँगलियों और जीभ से खुल गई… मेरी कुंवारी कच्ची कली आपके लिए जूस बना रही है पी लो यू अनमोल जूस सिर्फ तुम्हारे लिए…है बाबू.”
रवि ने जवाब में उसकी बुर में उँगलियाँ और गहराई तक धकेल दीं मुंह में निप्पल भर कर चूची दबा दबा कर पीने लगा शरीर और सट गए। लंड कच्ची कली बुर के मुँह पर धड़क रहा था। दोनों पंखुड़ियां आपस में चिपकी हुई थी। रवि के होठ कुमुद की नरम, गोल चूचियों पर थे।
कमरे में हल्की रोशनी थी, पंखे की धीमी आवाज़ के अलावा सिर्फ उनकी साँसें सुनाई दे रही थीं। रवि ने एक चूची को दोनों हाथों से सहलाया, फिर निप्पल को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे पीने लगा जैसे कोई मीठा दूध वास्तव में निकल रहा हो। कुमुद की उंगलियाँ भैया बालों में उलझ गईं। वह फुसफुसाई,
कुमुद: भैया तुम्हारे होठ…सी… सी… आ …आउ… कितने गर्म हैं… ऐसे ही जोर जोर से चूसो… सी… सी… आ भैया सारा दूध पी जाओ मुझे लगता है जैसे तुम मेरे दिल तक पहुँच रहे हो।”
रवि ने निप्पल को जीभ से घुमाया, फिर हल्के दाँतों से दबाया। कुमुद की कमर उठ गई।
कुमुद: बाबू सी… सी…आह्ह… काटो… थोड़ा और… पर प्यार से…उई मां…आराम से तुम मेरे हो ना…?”
रवि भैया: “हाँ कुमुद… सिर्फ तुम्हारा,”
रवि ने जवाब दिया और दूसरी चूची पर मुँह लगा दिया। निप्पल को दाँतों के बीच लेकर खींचा, फिर जोर से चूसा। कुमुद की साँसें तेज़ हो गईं। वह रवि के सिर को और अपनी छाती से चिपका रही थी।
कुमुद: “उफ्फ… बाबू… मेरी चूचियाँ तुम्हारे मुँह में… कितना अच्छा लग रहा है… और चूसो… मुझे पागल कर दो…सी… सी… आ …उ…इश्श…”
रवि ने दोनों निप्पलों को बारी-बारी से काटा, चूसा, जीभ से गीला किया। कुमुद की आँखें बंद थीं, होठों पर मुस्कान और कराह एक साथ।
कुमुद: “रवि भैया… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… तुम्हारे इन होठों से…सी… सी… आ …आउ… आपके मुंह में जादू है.…
फिर रवि धीरे-धीरे नीचे सरका। कुमुद की जाँघों को सहलाते हुए फैलाया। उसकी बुर पहले से चमक रही थी। रवि ने दोनों अंगुलियों से गुलाबी फाँकों को धीरे से खोला। अंदर की नरम दरार नज़र आई। बुर में एक उंगली डाल कर अंदर-बाहर करते हुए रवि ऊपर देखकर मुस्कुराया,
रवि भैया: “कुमुद… मेरी जान आई लव यू तुम्हारी ये कुंवारी कच्ची कली जैसी बुर… कितनी खूबसूरत है… क्या मैं इसे पीना चाहता हूं पी लूं होंठों और जीभ से चाटूँ ?”
कुमुद शर्म से लाल हो गई, पर सिर हिलाया।
कुमुद: “हाँ… मेरी जान आप मेरे पति हो मेरे पूरे बदन पर आपका हक है ये आज से आपका है अपनी छोटी बहन को प्यार करने के लिए आपको मेरी परमीशन नहीं लेनी चाटो… प्यार से…पी लो अपनी बहन की कच्ची कली बुर जी भर कर आज के बाद आपको ये कच्ची कली नहीं मिलेगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रवि भैया: जानूं ऐसा क्यों कह रही हो मैं तो रोज पीऊंगा इसका ताजा ताजा पानी।
कुमुद: बड़े बुद्धू हो बाबू इस कच्ची कली को अभी आप समय से पहले चोद कर खिला कर फूल बना दोगे तो फिर कच्ची कली का जूस दोबारा कहां से मिलेगा। आज के बाद आपको इस फूल का मेरी बुर का शहद पीने को मिलेगा कच्ची कली का नहीं। रवि ने जीभ बीच की दरार पर रख दी। लंबी, धीमी ऊपर से नीचे। कुमुद की कमर काँप उठी।
कुमुद: “आआआ… बाबू… वहाँ… सी… सी… आ…उ… वो बहुत साफ्ट और सेंसटिव है… आह्ह… और चाटो…”
रवि ने जीभ अंदर धकेल दी। नरम दीवारों को चाटते हुए अंदर-बाहर किया। ऊपर के छोटे मुलायम टुकड़े को होंठों से पकड़कर चूसा। कुमुद की सिसकारियाँ मीठी हो गईं।
कुमुद: “सी…..सी……उम्म… आह… “भैया… अंदर… मेरी बुर के अंदर डालो…” भैया सी… ..सी……उम्म… धीरे करो भैया!’ ‘उह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… हाए मां…’उह्ह… भैया… तुम मेरी बुर को… ऐसे चाट रहे हो जैसे… जैसे कोई मीठा रसगुल्ला… आआ… और चूसो… बाबू मज़ा आ रहा है अपनी छोटी बहन की बुर पीकर.. भैया मेरे अन्दर से कुछ निकल रहा है पी लो सी…..सी……उम्म… आह… “भैया… मेरी बुर के पी जाओ ”सी…सी… भैया उम्म… धीरे ‘उह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… हाए मां…’
कुमुद के शरीर से रस बहने लगा। रवि उसे पी रहा था, जीभ दरार के अंदर गहरी घुमा रहा था रवि ने पूरा मुँह लगा लिया। जोर-जोर से चूस कर सारा पानी पी गया। कुमुद दो बार स्खलित हो चुकी थी नाखून उसकी पीठ पर गड़ गए। थोड़ी देर बाद कुमुद ने रवि को ऊपर खींचा। उसकी आँखों में प्यार और हवस दोनों थे। उसने रवि के चेहरे को दोनों हाथों में लिया और होंठों पर चुंबन बरसाए।
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कुमुद: मेरे पति “अब मेरी बारी…मैं तुम्हें भी उतना ही प्यार दूंगी…”
उसके सीने पर मुँह रखा। निप्पल को जीभ से गीला किया, फिर मुँह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगी। दाँतों से हल्के काटे। रवि की साँसें भारी हो गईं।
रवि भैया: “कुमुद… सी…..सी……उम्म… आह… आह्ह… तुम्हारे होठ… कितने नर्म… ऐसे ही चूसो… मेरी जान तुम मुझे पागल बना दोगी…”
कुमुद नीचे सरक गई रवि का तना हुआ 9 इंच लंबा और 3:30 इंच मोटा लंड उसके मुंह के सामने था सख्त, तना हुआ, नसों से भरा। कुमुद की आँखें फैल गईं। उसने हाथ बढ़ाया। उँगलियाँ लंड पर फिरने लगीं। ऊपर-नीचे। अंगूठे से सिर को सहलाया।। उसने पहले सुपाड़े को चूमा, फिर जीभ से चारों ओर चाटा।
कुमुद: सी…..सी……उम्म… आह…बाबू… ये… तुम्हारा… कितना बड़ा और मोटा… मुझे डरा रहा है… पर… मैं इसे प्यार करूँगी… इसे पीऊंगी.
उसने दोनों हाथों से पकड़ा और मुँह में लिया। पहले सिर्फ सिर, जीभ से घुमाया, फिर धीरे-धीरे आधा अंदर। गले तक उतारने की कोशिश की। आँखों में पानी आ गया, पर वह रुकी नहीं। मुंह में धक्के मारने लगी। “घप्प… घप्प…” की आवाज़ आने लगी। रवि के हाथ उसके बालों में थे।
रवि भैया: “आह्ह कुमुद… मेरी जान गले में… पूरा ले लो… तुम बहुत सुन्दर हो… मेरी प्यारी छोटी सी परी तू मुझे पागल कर देगी…”
कुमुद ने आँखें बंद कर लीं और लंड को गले के अंदर तक उतार लिया। गर्दन फूल गई, साँस रुक रही थी, पर वह चोप्पे मारती रही। रवि की कमर आगे को धकेल रही थी। दोनों का बर्दाश्त जवाब दे चुका था। रवि ने कुमुद को धीरे से बिस्तर पर लिटाया। उसके माथे पर चुंबन दिया।
रवि भैया: मेरी जान अब बस.. मैं तुझे अपनी पत्नी की तरह प्यार करने वाला हूं मैं तेरी कच्ची कुंवारी बुर को प्यार से चोद कर फूल बनाने वाला हूं.
कुमुद ने सिर हिलाया, आँखों में आँसू और मुस्कान दोनों।
कुमुद: “भैया… तुम मेरे पति भी हो… मैं अपनी सुहागरात के तैयार हूँ… मुझे अपना बना लो पूरी तरह… मेरी कुंवारी बुर का फीता काट कर मेरी बुर का उद्घाटन कर दो। भैया आपका बहुत बड़ा है मेरी सील पैक बुर बहुत छोटी है मेरी बुर प्यार से धीरे धीरे लेना आई लव यू बाबू।
रवि भैया: “डरो मत… मैं बहुत प्यार से करूँगा… दर्द हुआ तो तुरंत बताना… मैं रुक जाऊंगा।
रवि ने अपना मोटा लंड बुर की गीली फाँकों पर रखा और सुपाड़े को बुर की चिपचिपी चिपकी फांकों के बीच की दरार पर रख कर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा कुमुद की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं और आँखों में एक गहरी प्यास झलक रही थी।
वह चुपचाप भैया की ओर देख रही थी, मानो कह रही हो—अब और मत सताओ… डाल दो। भैया ने उसकी नज़रों में छिपी मंशा पढ़ ली। उसने धीरे से मुस्कुराते हुए कुमुद के बालों को पीछे किया और उसके कान के पास फुसफुसाया,
रवि भैया: “इतनी जल्दी? मेरी जान अभी तो रगड़ना ही शुरू किया था…”
फिर भी उसने उसकी बात मान ली। एक हाथ से उसकी जांघों को और फैलाया, दूसरे हाथ से खुद को संभाला और सुपाड़े को दबा कर धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा। कुमुद की आँखें बंद हो गईं, बुर के चिपके हुए होंठ धीरे-धीरे खुल रहे थे। रवि का सुपाड़ा कुमुद की गीली, तंग सिलवटों को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा। कुमुद के होंठ थरथरा रहे थे, थोड़े से खुले हुए, और एक लंबी, दबी हुई आह उसके गले से निकल गई।
रवि ने धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया। अभी सिर्फ सिर्फ सुपाड़े का सिर अंदर गया था कि कुमुद के शरीर में एक तेज़, चुभने वाला दर्द फैल गया। उसकी योनि की दीवारें जो अभी भी बहुत तंग और संकरी थीं, जबरदस्ती फैल रही थीं। हर सेंटीमीटर मीटर के साथ जैसे कोई गर्म लोहा उसकी अंदरूनी मांसपेशियों को चीर रहा हो।
कुमुद: सी… सी… आ …आउच… भैया… दर्द… बहुत दर्द… हो रहा है पूरा मत डालो अभी… सी… सी… आ…”
उसकी आवाज़ टूट गई, आँखों में पानी आ गया। उसके नाखून रवि की पीठ में गड़ गए। अंदर एक गहरा, जलन वाला खिंचाव था—जैसे उसकी कुँवारी बुर की सिलवटें फट रही हों, गर्म और गीली होकर भी दर्द से काँप रही हों। रवि का मोटा सिर उसकी तंग दीवारों को दोनों तरफ धकेल रहा था.
और हर छोटी-सी हरकत पर कुमुद की साँस अटक जाती थी। दर्द इतना तेज़ था कि उसकी जाँघें अपने आप सिकुड़ने लगीं, शरीर अंदर से धकेलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रवि धीरे-धीरे और गहराई में धकेलता जा रहा था। रवि थोड़ा रुका, उसके होठ चूमे, चूचियाँ सहलाईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रवि भैया: “ठीक है… मेरी जान धीरे-धीरे… साँस ले… मैं हूँ ना तुम्हारे साथ…” कहते हुए फिर से धकेला।
रवि भैया का मोटा, अंडे जैसा चिकना सुपाड़ा कुमुद की कच्ची, तंग बुर के मुंह पर जोर से दबा। एक झटके में उसने आधा हिस्सा अंदर धकेल दिया। कुमुद की आँखें फटी की फटी रह गईं। तेज़ दर्द ने उसके पूरे शरीर को झकझोर दिया। उसकी कच्ची बुर फटने के कगार पर पहुँच गई थी। आँसू बेकाबू होकर उसकी आँखों से बह निकले, गालों पर लकीरें बनाते हुए।
कुमुद: “सी… सी… आ …उफ़..माँ… मर जाऊँगी… भैया… धीरे… धीरे करो… उफ्फ्… आआआआ… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है…!”
रवि ने उसकी जाँघों को और चौड़ी कर दी और बिना रुके बाकी का मोटा लंड भी अंदर धकेल दिया। कुमुद की तंग बुर उसकी मोटाई को सहने से इंकार कर रही थी। हर इंच के साथ उसकी अंदरूनी दीवारें फटती हुई महसूस हो रही थीं। दर्द इतना ज्यादा था कि उसकी साँसें अटक गईं, शरीर काँपने लगा।
कुमुद: “सी… सी… आ… आउच… आह्ह्ह… भैया… बाहर निकालो… प्लीज़.. उम्म.. मत करो… मैं मर जाऊँगी… हाय राम… बहुत दर्द हो रहा है बाबू… प्लीज़ रूक जाओ 5 मिनट!”
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उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, साँसें हाँफ रही थीं। रवि का मोटा, लंबा सुपाड़ा उसकी बुर के मुँह पर अटका हुआ था। सिर्फ अगला मोटा हिस्सा अंदर घुसा था, लेकिन वही काफी था। कुमुद की कच्ची ुअभी पूरी तरह नहीं खुली थी। दीवारें उसके लंड के चारों तरफ़ कसकर सिकुड़ गई थीं।
हर सेंटीमीटर अंदर जाने पर तीखा, जलता हुआ दर्द उसकी रीढ़ तक पहुँच रहा था। उसकी बुर लाल हो चुकी थी, सूजी हुई और फूली हुई, जैसे गर्म लोहे की राख कोई जबरदस्ती छोटी सी बुर में घुसा रहा हो। रवि उसके ऊपर लेटा रहा। उसने कुमुद के निप्पल को मुँह में ले लिया और धीरे धीरे से चूसने लगा, जबकि नीचे उसका कमर धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव डाल रहा था।
रवि भैया: “आई लव यू बेबी तेरी बुर बहुत टाइट है थोड़ा और…ले ले मेरी जान बस थोड़ा सा.”
वो फुसफुसाया कुमुद सिसक रही थी, दर्द को अपने अंदर दबाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर धक्के पर उसकी कमर काँप उठती। जब रवि ने और जोर लगाया, तो उसका पूरा मोटा लंबा हिस्सा (लगभग पूरा 2 इंच का मोटा हिस्सा) एक झटके में उसकी बुर के अंदर धँस गया। कुमुद की चीख निकल गई।
कुमुद: “आ…आह… भ..भइया…उफ्फ बहुत जोर से लग रही है..सी… सी… आ… आउच… आह्ह्ह… भैया… बाहर निकालो… बस …बस रुक जाओ…उफ्फ… बाबू… मैं मर जाऊँगी… हाय राम… बहुत दर्द हो रहा है बाबू… प्लीज़ रूक जाओ ना।
लाल, सूजे हुए, और दर्द से काँप रहे थे। बुर के अंदर की दीवारें उसके लंड को कसकर दबा रही थीं, जैसे कोई गर्म, गीली और तंग भट्ठी हो। आगे पीछे करने पर भी तीखा दर्द उठता। बुर से हल्की सी खून की धार निकल रही थी जिस छोटी सी बुर में उंगली डालने पर दर्द होता था उसमें 3 इंच मोटा लंड बुर के छोटे से छेद को फैला कर फंसा हुआ था. कुमुद की आवाज़ अब सिर्फ कराहों और टूटी हुई चीखों में बदल चुकी थी।
कुमुद: सी … सी … आ …आह… आह्ह्ह… भैया… निकालो… दर्द… बहुत दर्द…”
लेकिन रवि उसके निप्पल चूसता रहा और नीचे धीरे-धीरे हिलने लगा, हर बार थोड़ा और गहराई तक पहुँचने की कोशिश करता हुआ। उसकी बुर उसके लंड के चारों ओर फूली हुई, लाल और काँपती हुई थी — पूरी तरह भरी हुई, और हर धक्के पर और ज्यादा दर्द महसूस कर रही थी।
उसकी बुर के होंठ उसके लंड के चारों ओर खिंचे हुए थे — लाल, सूजे हुए, और दर्द से काँप रहे थे। अंदर की दीवारें उसके लंड को कसकर दबा रही थीं, जैसे कोई गर्म, गीली और तंग मुट्ठी हो। हर छोटे से हिलने पर भी तीखा दर्द उठता। बुर का बाहरी छल्ला कभी भी टूटने की कगार पर आ गया, लेकिन रवि रुकने वाला नहीं था। कुमुद की आवाज़ अब सिर्फ कराहों और टूटी हुई चीखों में बदल चुकी थी।
कुमुद: “आह्ह्ह… भैया… निकालो… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है उई.. माँ… आज तेरी बुरमरानी बेटी को तेरा बहन चोद बेटा चोद रहा है सी… सी… आ …आउच… भैया… धीरे… धीरे करो… उफ्फ… आआआ… बहनचोद दर्द हो रहा है… बस करो”
रवि को कुमुद की टाईट बुर में 3 इंच लंड घुसा कर बहुत मज़ा आ रहा था कुमुद की गालियां और उत्तेजित कर रही थी वो उसके निप्पल धीरे धीरे चूसता रहा और नीचे धीरे-धीरे हिलने लगा, हर बार थोड़ा और गहराई तक पहुँचने की कोशिश करता हुआ। उसकी बुर उसके लंड के चारों ओर फूली हुई, लाल और काँपती हुई थी — पूरी तरह भरी हुई, और थोड़ी देर बाद कुमुद की बुर 3 इंच लंड के धक्के पर मज़ा लेने लगी।
कुमुद: सी… सी… आ …भैया इसी तरह… आ धीरे धीरे पेलो।
रवि भैया: मेरी छोटी सी बुरमरानी कैसा लग रहा है रंडी अपने बहनचोद भाई के लंड को अपनी छोटी सी बुर में ले कर मज़ा आ रहा है?
कुमुद के नरम होंठों को धीरे-धीरे चूमते हुए रवि उसके शरीर को और भी पास खींच लेता है कुमुद की साँसें भारी हो रही हैं, उसकी आवाज़ में दर्द और मज़े का अजीब सा मिश्रण है—
कुमुद: “सी… सी… आ… बाबू… बहनचोद… इसी तरह… आ… धीरे-धीरे पेलो… आ… आ… मज़ा आ रहा है… थोड़ी देर पहले… बहुत दर्द हुआ था… जान निकली जा रही थी मेरी… अब अच्छा लग रहा है इसी तरह से धीरे धीरे पेलो अपनी रंडी को।
रवि का गरम, मोटा लंड कुमुद की टाइट, कुंवारी बुर के अंदर कहीं ठहर जाता है, कोई अवरोध उसे और आगे नहीं जाने दे रहा। रवि उसके माथे पर हल्का चुंबन देते हुए फुसफुसाया-
रवि भैया: मेरी रंडी, उफ्फ… तेरी इस प्यारी सील को तोड़ने का समय आ गया है। बस एक बार थोड़ा दर्द होगा… फिर तू स्वर्ग की सैर करेगी, बुरमरानी मैं हूँ ना तेरे साथ…”
कुमुद की आँखों में डर और इच्छा दोनों मिलकर चमक रहे हैं। वह मज़े की सिसकी लेते हुए अपने दोनों हाथों से रवि के चेहरे को पकड़ कर चूमने लगी और बोली-
कुमुद: “मैं तैयार हूँ… मेरे राज्जा… आजा… मैं आपसे ही अपनी कुंवारी कच्ची बुर की सील खुलवाना चाहती थी, भैया कुंवारी लड़की की सील तोड़ने में हर लड़के को मजा आता है उनकी इच्छा होती है… मैं आपको मेरी यह सील गिफ्ट में दे रही हूँ… मुझे कितना भी दर्द हो… आप अपना पूरा लंड… पूरी ताकत से झोंक दो… मेरी कच्ची बुर का उद्घाटन कर दो… आ… आई लव यू भैया, मेरी कच्ची कली सील मेरे प्यारे भैया, मेरे पति के लिए।
रवि भैया: “आई लव यू टू मेरी रानी…
रवि कुमुद की चिकनी, मुलायम टाँगों को धीरे-धीरे उठाकर अपने दोनों कंधों पर रख लेता है। वह उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर गर्म चुंबन बिखेरता है, फिर झुककर कुमुद को अपनी बाँहों में कसकर जकड़ लेता है एक पल के लिए लंड को बाहर निकाल कर, कुमुद की आँखों में देखता है फिर एक गहरी साँस लेकर अपनी पूरी ताकत झोंक कर एक ही झटके में छह इंच लंड अंदर तक घुसा देता है।
कुमुद: “आआआआआ…! रवि भैया…! आ… दर्द… बहुत दर्द… सी… सी… आआआ…मर गई रे !”
कुमुद की तेज़ चीख कमरे में गूँज उठती है। उसकी कुंवारी बुर की सील एक पल में टूट जाती है। उसके भैया का लंड बुर की सील तोड़ते हुए बच्चेदानी पर ठोकर मारता है और कुमुद की बुर से गर्म खून भलभलाकर निकलने लगता है, रवि के लंड को और भी गीला कर देता है।
दर्द इतना तीव्र है कि कुमुद की आँखें पल भर के लिए पलट जाती हैं, शरीर अकड़ जाता है और वह बेहोश हो जाती है। रवि तुरंत रुक जाता है वो अपना लंड अंदर ही रखते हुए कुमुद के चेहरे को दोनों हथेलियों में ले लेता है माथे पर बार-बार प्यार से चूमता है उसके बाल सहलाता है गालों को थपथपाते हुए होश में लाने की कोशिश करता है.
रवि भैया: “कुमुद… मेरी जान… होश में आओ… मैं यहाँ हूँ… तेरे साथ हूँ…बहुत दर्द हो रहा है क्या धीरे-धीरे… बस साँस लो… मेरी रानी…आई लव यू बेबी।
कुमुद की पलकें काँपती हैं, धीरे-धीरे होश लौटता है। उसकी आँखों से आँसू बह रहे हैं, पर होंठों पर एक दर्द भरी मरी हुई मुस्कान भी है। वह सिसकते हुए रवि को चूम कर गले से लिपट जाती है—
कुमुद: “आ… आ…सी … सी … बाबू… दर्द… बहुत तेज़ हो रहा है… ऐसा लगा कि मेरी जान निकल जाएगी… अब… थोड़ी देर मुझे नार्मल होने दो -… आ… आ… और… अंदर… मत डालना… धीरे-धीरे… हिलाना… सी… सी… बाबू मज़ा आया आपको अपनी सगी छोटी कमसिन बहन की कच्ची कली को तोड कर।
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रवि उसके होंठों को फिर से चूमता है, इस बार और भी रोमांटिक और धीरे धीरे एक हाथ से उसके बाल सहलाता है दूसरे हाथ से उसकी कमर को कसकर पकड़े हुए है लंड अब भी 6 इंच अंदर है, खून और पानी से भीगा हुआ। वे बहुत धीरे-धीरे, प्यार भरे अंदाज़ में हिल-हिलकर आगे पीछे करता हुआ। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रवि भैया: आई लव यू मेरी जान… सच आज तेरी कच्ची कली को फूल बनाने में बहुत मज़ा आ रहा है, अब आराम से… मैं तुझे दर्द नहीं दूँगा… बस प्यार करूँगा… तेरी यह पहली बार… थी हमेशा याद रहेगा तेरी कच्ची बुर का उद्घाटन आ…मेरी प्यारी कुमुद… मेरी बुरमरानी… मेरी पत्नी.”
कुमुद की सिसकियाँ अब दर्द और आनंद के बीच झूल रही हैं। वह रवि के कंधे में मुँह छुपाकर धीरे-धीरे कराहती है—
कुमुद: सी… सी… आ… आ… आ… भैया… और… थोड़ा… और… सी… सी… मज़ा… आने लगा… आ… आ…” आपने मेरी छोटी सी बुर में अपना पूरा 9 इंच घुसा दिया बाबू?
रवि उसके कान के पास फुसफुसाते हुए-
रवि भैया: नहीं मेरी जान अभी 3 इंच बाहर है धीरे धीरे पेलने लगता है।
कुमुद: सी… सी… आ …उ…जब आ ..आपने माँ… मर जाऊँगी… भैया… धीरे… धीरे करो… उफ्फ… आआआ… दर्द हो रहा है और मत घुसाना नहीं तो मैं मर जाऊंगी…
रवि ने उसकी चूचियों को सहलाते हुए माथे को चूमा।
रवि भैया: “दर्द हो रहा है तो बोल, मेरी जान रुक जाऊँ। मैं तुम्हें दुख नहीं देना चाहता।”
कुमुद ने सिर हिलाया, आँसू पोंछते हुए मुस्कुराई।
कुमुद: “नहीं…बाबू अब और अंदर मत घुसाना मेरी बुर में बहुत दर्द हो रहा है धीरे-धीरे… अंदर बाहर करते रहो अब… थोड़ा मजा… आने लगा है… आपका लंड… मेरी बुर में… नाभि से ऊपर घुसा कर पेलो रहा है कितना गर्म लग रहा है… बुर की कसी खुरदरी दीवारों को रगड़ता हुआ… प्यार से… मेरी बुर ले रहा है.”
रवि भैया: “मेरी जान मज़ा आ रहा है न… मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है, तेरी कच्ची बुर में लंड को जन्नत का मजा मिल रहा है आ…उफ्फ… कितनी टाईट है तेरी बुर… उफ.. आई लव यू बेबी.
रवि की गति बहुत धीमी थी। लंड पूरा अंदर जा रहा था, बच्चेदानी को धीरे-धीरे टकरा रहा था। बच्चेदानी से टकराने से कुमुद की सिसकारियाँ बढ़ने लगी दर्द की जगह मज़े वाली कराहने की आवाज़ें आने लगीं।
कुमुद: “हां भैया आआ… उफ्फ… भैया… और… गहरा…पेल रहा है आपका लंड आह्ह…उफ्फ मां… क्या कर रहे हो… मेरी जान निकल जायेगी बाबू मर जाऊँगी… और अंदर तक घुसा कर पेलो मुझे मार दो सी… सी… आ …आउच… फाड़ दो मेरी बुर … तुम मुझे कितना प्यार कर रहे हो…”
रवि कश्मकश में था कि अभी कुमुद की हालत कितनी खराब हो गई थी सील टूटने से कितना सारा खून निकला बेडशीट पर बड़े खून के धब्बे लगे थे केवल 6 लंड इंच ही उसकी बहन की बुर में जा पा रहा था अगर उसने पूरा 9 नौ इंच का मोटा, गर्म लंड कुमुद की कुँवारी बुर के घुसा कर चोदा तो बहुत ज्यादा दर्द होगा बेचारी को.
अभी 10वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन है उसकी बहन आज पहली बार अपनी छोटी सी बुर का उद्घाटन कराकर चुदवा रही थी जबकि रवि का लैंड 9 इंच का बहुत बड़ा था जो किसी समान में जिससे 30 साल की लड़की के लिए भी उसे अपने बुरे में ले पाना और मजे करना थोड़ा सा मुश्किल काम था की हिम्मत की दाद दे रहा था और बहुत धीरे-धीरे रगड़ रहा था—
सारी कशमकश के बाद वासना पर भाई के प्यार की जीत हुई और उसने सोच लिया कि वह अभी कुछ दिन तक केवल 6 इंच कि अपने छोटी बहन की बुर में घुसा कर चोदेगा. रवि झुका। उसके माथे पर होठ रखे, फिर पलकें, फिर गाल, फिर होंठ। हर चुम्बन हल्का था, जैसे वह उसके डर को चूम रहा हो।
रवि भैया: “नहीं। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं। अब और दर्द नहीं होगा… बेबी बहुत… मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा। तुम मेरी हो मेरी प्यारी पर्सनल रंडी मेरी जान तू चिंता मत कर मैं सँभाल लूँगा।”
फिर उसने कमर को पकड़ कर लंड को बाहर तक निकाल कर पूरा एक झटके में अंदर झोंक दिया। 7 इंच का लंड एक ही गहरे, निरंतर धक्के में कुमुद की टाइट बुर में धँस गया— पूरी तरह, बच्चेदानी के मुँह मे ठोकर मारकर अंदर जाने की कोशिश कर रहा था।
कुमुद: “आ.. आ… आ सी… सी… आ …आउच… … बाबू… बस बस और नहीं… आ..आ…आ… छोड़…दो बाबू..बहुत दर्द… उह्ह्ह्ह… मैं… मर जाऊंगी…!”
चीख कमरे में गूँज उठी। कुमुद की पीठ उठ कर कमान बन गई, आँखें फट कर बाहर निकल ने को हो गईं, आँसू बह निकले। दर्द इतना तेज़ था कि एक पल के लिए दुनिया काली पड़ गई। वह बेहोशी के किनारे पहुँच गई। उसके नाखून रवि की पीठ में गड़ गए, वह उसे दूर नहीं धकेल रही थी—उल्टे और कसकर पकड़ रही थी।
उसके अंदर हर नस जल रही थी, फैल रही थी, जैसे कोई गर्म लहर उसके पूरे शरीर में दौड़ गई हो। दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी संवेदनशीलता भी जाग रही थी—हर इंच लंड का दबाव, हर नस का स्पंदन, हर साँस का कंपन वह महसूस कर रही थी। रवि रुका। उसने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। उसकी अपनी आँखें भी नम थीं। अंगूठे से उसने उसके आँसू पोंछे।
रवि भैया: “कुमुद… देखो मुझे… मैं हूँ न… तुम्हारे साथ। बस बस हो गया मेरी जान आई लव यू बेबी…साँस लो… धीरे…धीरे हां ऐसे ही.”
कुमुद की पलकें काँपती हुई खुलीं। आँसुओं के बीच उसने रवि को देखा। किसी ने पहली बार उसके सबसे छिपे हुए, सबसे संवेदनशील हिस्से को छुआ था। उसने सिर हिलाया, आवाज़ टूटी हुई—
कुमुद: बाबू हिलना मत… सी… सी… आ …आ… अंदर… रहो… मुझे… महसूस होने दो…”
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रवि ने फिर से बहुत धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। हर बार पूरा 7 इंच अंदर तक बच्चेदानी के अंदर तक। कुमुद की चीखें बदल रही थीं। पहले सिर्फ दर्द था, फिर दर्द के बीच एक काँपती हुई गर्मी फैलने लगी मज़े की एक लहर सी उठने लगी। उसकी बुर ड़ अब खुद उछलने लगीं। वह कमर उठा-उठाकर लंड को और गहराई तक खींच रही थी—जैसे शरीर दर्द सहते हुए भी और चाह रहा हो। हर धक्के के साथ वह न सिर्फ शारीरिक रूप से भर रही थी, बल्कि भावनात्मक रूप से भी खुल रही थी।
कुमुद: “आआ… बाबू… दर्द… अब मीठा मीठा… दर्द हो रहा है… मेरी बुर… तुम्हारी… फाड़ दो… दिल तक… घुस जाओ… उह्ह… मैं… तुम्हारे बिना अब अधूरी लग रही हूँ… हर इंच… महसूस हो रहा है…”
रवि की साँसें भारी हो गईं। वह एक हाथ से उसकी चूची बहुत धीरे मसल रहा था—सिर्फ हथेली से, जैसे उसकी धड़कन सुन रहा हो। दूसरे हाथ से बुर के ऊपर वाले संवेदनशील हिस्से को अंगूठे से हल्के-हल्के रगड़ रहा था। हर स्पर्श पर कुमुद का शरीर काँप उठता।
हर धक्के के साथ वह न सिर्फ शरीर में गहराई तक जा रहा था, बल्कि कुमुद के डर, शर्म और प्यार के सबसे कोमल कोने तक भी पहुँच रहा था। कुमुद की आँखों में अब सिर्फ दर्द नहीं था—समर्पण था, विश्वास था, और एक गहरी उत्तेजना जो शरीर और मन दोनों को एक साथ छू रही थी।
कुमुद: “सी… सी… आ …बाबू… … मैं… आ रही वाली हूँ… आ..आ..आ… और जोर से… कुछ बहुत तेजी से निकलने वाला है… तुम्हारे साथ… इस दर्द को… आपके प्यार को… हमेशा याद रखूँगी… मेरी बुर…का उद्घाटन किया ये तुम्हारी… है पूरी… आ..आ..आ…!”
दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। कुमुद ने अपनी टांगों को उठाकर रवि की कमर को और दोनों हाथों से रवि की चौड़ी छाती को जकड़ लिया। रवि ने भी कुमुद को अपनी बाहों में भर कर जकड़ते हुए 7 इंच लंड से कुमुद की कच्ची टाईट बुर तेजी से चोद रहा था. रवि का लंड बच्चेदानी के मुँह पर धड़कते हुए झड़ गया। गर्म, गाढ़ा वीर्य उसके सबसे गहरे हिस्से में फैल गया.
रवि के गर्म गर्म वीर्य हर बूँद को कुमुद अपनी बुर में बच्चेदानी में महसूस कर रही थी। कुमुद की बुर जोर-जोर से ऐंठ रही थी, रस की धार बह निकली। वह रवि को इतनी कसकर जकड़े हुए थी कि लग रहा था जैसे वह अपने पूरे अस्तित्व को उसमें समा देना चाहती हो। एसी की ठंडक में पसीने से लथपथ दोनों भाई बहन की कामुक चीख अब कराह में बदल गई—
कुमुद: “रवि भइया… आई लव यू अंदर… सब अंदर… मुझे और भी अपना बना लो… मैं तुम्हारी हो गई… पूरी… दिल तक… शरीर तक… सब… हर नस… तुम्हारी…है.”
वे दोनों पसीने से लथपथ, हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपटे रहे। रवि का लंड अभी भी अंदर था, धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था। कुमुद की आँखें अभी भी आँसुओं से भरी थीं, पर उनमें एक शांत, गहरी खुशी थी—जैसे उसने कोई बहुत बड़ा अचीवमेंट कर लिया हो और दूसरी तरफ प्यार मिल गया हो। उसने उसकी पीठ सहलाते हुए फुसफुसाया, आवाज़ अभी भी काँप रही थी.
कुमुद: “बाबू आई लव यू आज… पहली बार… इतना… ढेर सारा पूरा…प्यार महसूस किया… दर्द भी हुआ… … आपके साथ… बहुत अच्छा लगा… आपने सिर्फ मेरी बुर का फीता काट कर उद्घाटन ही नहीं… मेरे अंदर के उस प्रेम को भी छू लिया… जो मैंने कभी किसी को नहीं दिखाया… आपके लंड का हर स्पर्श… हर धक्का… मेरे दिल तक पहुँच गया… आप मेरे हो… हमेशा के लिए…”
रवि ने उसके होंठ चूमे। जीभ अंदर तक गई, पर चुम्बन में अब सिर्फ वासना नहीं थी—कोमलता थी, वादा था, और एक गहरी राहत। उसने उसके बालों को सहलाया, माथे पर होठ रखे, आवाज़ गहरी और प्यार भरी—
रवि भैया: “कुमुद… तुम मेरी जान हो… आज रात मैंने तुम्हें पूरी तरह पाया… और तुम ने आज मुझे अपने अंदर समा लिया। मुझे बहुत खुशी है कि आज मैंने अपनी छोटी बहन की इच्छा को पूरा किया वो जो रक्षाबंधन का गिफ्ट चाहती थी वो मैं दे पाया हूं अब मेरी बहन मेरी गर्लफ्रेंड मेरी प्यारी प्यारी पत्नी मेरी जान मेरी बहन मेरी रंडी आल इन वन है।
कुमुद ने आँखें बंद कर लीं। उसके अंदर अभी भी रवि का गर्म वीर्य था, बुर हल्की-हल्की धड़क रही थी। दर्द और आनंद का मिश्रण अभी भी शरीर में गूँज रहा था, पर उससे भी गहरा कुछ और था—एक ऐसा जुड़ाव जो सिर्फ शरीर का नहीं, आत्मा का लग रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसने रवि को और कसकर पकड़ लिया जैसे वह पल हमेशा के लिए थाम लेना चाहती हो। आँसू अभी भी बह रहे थे, पर अब वे दर्द के नहीं, राहत और प्यार के थे। हर साँस में वह रवि की गंध, उसकी गर्मी, उसकी मौजूदगी महसूस कर रही थी। कुमुद ने रवि के होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसा और बोली,
कुमुद: आई लव यू भैया आपने मेरी मांग में सिंदूर भर कर मेरे पति, ब्वायफ़्रेंड बने बहनचोद बने,मेरी बुर का फीता काट कर उद्घाटन किया मेरी बुर की मांग खून से भरी इससे बड़ा मेरे लिए रक्षाबंधन का गिफ्ट हो ही नहीं सकता आई लव यू बाबू अब मैं अकेली नहीं रही ।
रवि भैया: कुमुद आज से तू मेरी सब कुछ है आई लव यू।
रवि भैया कुमुद ऊपर से उतर कर बगल में लेट गए और उसे अपनी बाहों में लेकर किस करने लगे प्यार करने लगे उनका यह अंदाज कुमुद को बहुत ही अच्छा लग रहा था चुदाई के बाद इस तरीके का प्यार बहुत जरूरी होता है कुमुद सहेलियां बताती थी कि उनका बॉयफ्रेंड चोदने के बाद एकदम से अलग है जाता है.
तो उनका मजा थोड़ा काम हो जाता है लेकिन अगर चुदाई के बाद साथी थोड़ा सा प्यार और करता है तो पूरा मजा मिलता है और बहुत अच्छा लगता है रवि भैया भी वही कर रहे थे. थोड़ी देर बाद जब कुमुद बिस्तर से उठी तो देखा की पूरी चादर खून से खराब हो गई है.
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कुमुद: भैया हमारे प्यार की निशानी पूरे बिस्तर पर फैली हुई है मेरी बुर का खून मेरे रज और आपके वीर्य का मिश्रण मेरे ऊपर से टप टप टप कर टपक रहा है भैया देखिए ना आपके लंड ने मेरी बुर को कितनी बुरी तरीके से मारा है कितना खून खराबा किया है सॉरी बेडशीट खून से रंग गई मेरे बुर और गांड में भी खून लगा हुआ है.
आपका लंड और जांघें भी खून से रंगी हुई है मुझे ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा आपका लंड बहुत खतरनाक है अभी सिर्फ 6 इंच में मेरा यह हाल किया है तो पूरा तो मेरी जान ही मिलेगा प्लीज जब तक मैं और बड़ी ना हो जाऊं तब तक इसे पूरा मेरी बुर में मत डालिएगा उसने मेरी क्या हालत कर दी है मेरे पेट में और बुर में बहुत दर्द हो रहा है कोई पेन किलर हो तो दे दीजिए और मुझे बॉथरूम तक ले चलिए।
भैया ने उसे अपनी बाहों में उठाया और बाथरूम में ले जाकर टायलेट करवाया और फिर बिस्तर पर ले आए।
रवि भैया: आई लव यू डार्लिंग इस तरह से प्यार करने के लिए सॉरी लेकिन इसमें हम दोनों को भी बहुत मजा आया है ना जो हमें जीवन में पहली बार मिला है अभी जब तुम पूरा लंड मेरी प्यारी बहन अपनी बुर में घुसा कर चुदवाएंगी तब बहुत मजा आयेगा.
दोस्तों आगे की कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में बता कर उत्साह बढ़ाइये जिससे और रोमांटिक कहानी लिखने में मज़ा आये.
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