Sexy Nurse Chudai Kahani
दोस्तों, घर में 6 लोग थे मोम, डैड, मैं और 2 सिस्टर, 1 ब्रदर। सब मुझसे बड़े हैं और शादीशुदा हैं। दोनों सिस्टर अपने ससुराल में रहती हैं और ब्रदर भाभी के साथ US में हैं। यह जुलाई 2025 की बात है जब मैं 22 साल का था। टेलीफोन की बेल बजी, मैंने हेल्लो किया तो मुंबई के अस्पताल से कॉल थी — “प्लीज आप लोग जल्दी से अस्पताल आ जाएँ।” Sexy Nurse Chudai Kahani
मैंने दोनों सिस्टर को फोन करके अस्पताल आने को कहा और मैं खुद अस्पताल पहुँच गया। सिस्टर पहले ही वहाँ पर थीं। पता चला कार एक्सीडेंट में पिताजी का देहांत हो गया है और माताजी कोमा में चली गई हैं। 1 महीना तक मॉम को होश नहीं आया और वो अभी भी कोमा में थीं।
डॉक्टर्स ने कहा अब आप इन्हें ले जा सकते हैं, और साथ में यह भी कहा कि अगर इन्हें ठंडा हिल एरिया में रखा जाए तो ये जल्दी ठीक हो सकती हैं। मगर मैं आप लोगों को बता दूँ यह बीमारी एक मिनट में भी खत्म हो सकती है या फिर मरते दम तक यह पेशेंट न बोलता है न खाता है। अक्सर पेशेंट सुन सकता है मगर इसके अलावा कुछ भी नहीं कर सकता।
फिर हम लोग मॉम को घर ले आए। क्योंकि सिस्टर की शादी हो गई थी इसलिए वो तो मॉम के साथ नहीं रह सकती थीं। भैया पहले ही us वापस चला गया था। सिस्टर ने मुझसे कहा कि तुम मॉम को लेकर सूरत नगर चले जाओ वहाँ। पर मैंने कहा वहाँ तो कोई भी नहीं है, वो तो सालों से बंद पड़ा है। तो क्या हुआ, तुम अब बड़ा हो गए हो, वहाँ जाकर कोई अच्छी सी सर्वेंट रख लेना और तुम वैसे भी स्टडी तो कर नहीं रहे।
खैर जो कुछ भी हुआ आखिर में यही डिसीजन हुआ कि मैं मॉम को लेकर सूरत नगर चला जाऊँ और वहाँ कुछ महीने और अगर रहना पड़ा तो एक साल भी या इससे ज़्यादा। जून के एंड पर सख्त गर्मियों का मौसम था। मैं मॉम को अपनी कार में सूरत नगर ले गया। इससे पहले मैं जब 10 साल का था तो अपनी फैमिली के साथ यहाँ आया था।
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सुबह बहुत जल्दी हम लोग वहाँ से निकले और दोपहर में हम लोग सूरत नगर में अपनी हवेली में थे। यह पिछला 12 साल से बंद पड़ी थी। यहाँ हमारा बहुत सारा खेत था जिन पर लोग काम करते थे। जब उन्होंने मुझे और मॉम को देखा तो फौरन हवेली में आ गए।
गाँव वालों की मदद से मैंने हवेली का कुछ हिस्सा रहने के काबिल बना दिया। अब मैंने ज़रूरी सामान खाना-पीने का मँगवा लिया। अब मुझे एक नौकर की और एक नर्स की ज़रूरत थी। गाँव वालों ने बताया कि क़रीब-क़रीब तो ऐसा कोई भी नहीं है। मैंने बड़ी दीदी को सब बता दिया। उसने न्यूज़पेपर में ऐड दे दिया मगर जब कोई मिलते तो मिलते नहीं।
मॉम ने दो दिन से एक ही कपड़ा पहना हुआ था और वो अपने रूम में ही पड़ी थीं। मैं करता भी तो क्या करता। मैंने भगवान को याद करते हुए मॉम को बेड के साथ लिटा दिया ऐसा कि जैसे वो बेड पर बैठी हों l शेप में। मैंने पानी थोड़ा सा गरम पास रखा हुआ था जिससे मॉम का मुँह, लेग्स और मिड एरिया धो दिया।
टॉवल से साफ करके मैंने मॉम को दूसरा कपड़ा पहना दिया। और खुद भी तैयार हो गए और मॉम को व्हीलचेयर पर गाँव की सैर कराने के लिए ले गया। तक़रीबन 3 घंटा तक मॉम को मैंने अपनी खातून की सैर कराई। फ्रेश एयर, लहलहाते खेत और उस पर हल्की बारिश का मौसम — यह सब मॉम के लिए बहुत अच्छा था।
डॉक्टर ने ऐसा ही मौसम में मॉम को रखने के लिए कहा था। फिर वापस आकर मैंने मॉम के लिए सूप बनाया और अपने लिए भी। मॉम को स्पून के साथ सूप पिलाना पड़ता था। इसके बाद कंटीन्यूअसली जिस्म की मालिश भी करनी थी वो भी रोज़ाना, जो कि मैं कर रहा था।
मुझे सूरत नगर में 4 दिन हो चुके थे। उसी दिन दीदी का फोन आया — “मैंने एक नर्स अरेंज कर ली है, कल सुबह उसे मैं ड्राइवर के साथ भेज दूँगी, शाम तक तुम्हारे पास हो जाएगी और अगर तुम्हें कुछ चाहिए तो वो भी बता दो, आते हुए वो साथ लाएगी।”
मैंने कुछ ज़रूरी सामान और मेरा लैपटॉप लाने को कह दिया। नेक्स्ट डे वो आ गई।
“हैलो माय नेम इज़ शबनम, मुझे आपकी दीदी ने भेजा है।”
“हाय आई एम सनी, मुझे दीदी ने आपके बारे में बताया था।”
शबनम 26 साल की लग रही थी, खूबसूरत, सुंदर मगर थोड़ी मोटी, थोड़ी सी फिगर 34C-29-36। फिर ड्राइवर ने गाड़ी से सामान उतारकर अंदर रख दिया और वापस चला गया। मैंने शबनम से पूछा तुम्हारी सैलरी क्या होगी तो उसने कहा आपकी दीदी ने 10,000 कही थी। मैंने कहा ओके, अगर मैं 5000 एक्स्ट्रा दूँ तो?
शबनम ने फौरन पूछा मुझे क्या करना होगा। मैंने कहा कुछ खास नहीं बस घर का छोटा-छोटा काम और खाना बनाना जब तक कोई मेड मिल नहीं जाती। उसने कहा ठीक है, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं। फिर मैंने उसे अपनी मॉम से मिलवाया और मॉम के बारे में सब कुछ बता दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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पहले मैं मॉम के पास दूसरा बेड पर सोता था, अब वो बेड शबनम के लिए था। और मैं दूसरे रूम में शिफ्ट हो गया। एक बात थी — मैंने जब शबनम को देखा तो मुझे वो बहुत अच्छी लगी। फिर मैंने शबनम को हवेली के बारे में और स्पेशली किचन के बारे में ज़रूरी बातें बता दीं।
फिर शबनम ने कहा मैं थोड़ी देर आराम करूँगी, उसके बाद अपना काम करूँगी। शाम 7 बजे के क़रीब वो उठ गई, नहाकर नीचे आई तो मैंने उसे टी का कप दिया। “आज मेरी तरफ से, कल से ये तुम्हारी ड्यूटी है।” वो हँसने लगी। रात का खाना खाकर शबनम ने मॉम को दवाई पिलाकर उनकी खूब मालिश कर दी।
मैं नीचे गार्डन में बैठा था और अपना लैपटॉप पर गेम खेल रहा था। तब शबनम वहाँ आकर मेरे पास बैठ गई और हम बातें करने लगे। मगर मेरा ध्यान गेम पर था। शबनम ने पूछा कौन सी गेम खेल रहे हो तो मैंने बताया बस ऐसा ही फ्री स्पेल खेल रहा हूँ।
“तुम्हारे पास स्नूकर गेम नहीं है?”
“है नहीं। क्या तुम्हें पसंद है?”
“हाँ।”
“कभी खेली है?”
“हाँ बहुत दफा।”
ओके, मैंने ई-नेट USB पोर्ट लैपटॉप से कनेक्ट की और इंटरनेट से डाउनलोड करके इंस्टॉल कर दी।
“चलो स्टार्ट कर।”
ओह फिर मैं और शबनम गेम खेलने लगे। जब उसकी बारी आती तो वो शॉट खेलने के लिए झुकती जिससे उसकी क्लिवेज लाइन साफ़ नज़र आती। वाह क्या सीन बनता! मैं तो बस बार-बार उसी को देखता। एक दफा उसने मुझे देख लिया कि मैं उसमें दिलचस्पी ले रहा हूँ।
वो हँसकर बोली “क्या बात है, कुछ चाहिए तो बताओ।”
मैं झिझककर बोला “नहीं ऐसा कुछ नहीं है।”
शबनम बोली “ओके, योर टर्न।”
मैंने कहा “हाँ ओके।”
ऐसा ही हम तक़रीबन रात 1 बजे तक खेलते रहे मगर मैं तो उसकी सुंदरता को देख रहा था, और तीनों गेम हार भी गया था। शबनम ने मुझे बताया उसे गाँव में रात को आसमान देखने का बहुत शौक था जो आज पूरा हो गया। मैंने पूछा वो क्यों? तो वो बोली “इतना साफ़ आसमान, उस पर इतने ज़्यादा तारे, गर्मियों में भी ठंडक का अहसास — ये रात किसी ख्वाब की तरह है।”
शबनम ये ख्वाब नहीं, ये हकीकत है। “चलो अब सो जाओ, सुबह मॉम को वॉक पर ले कर जाना भी है।”
“नहीं मुझे यहीं बैठना है।” “यू डोंट वरी, आई विल डू माय जॉब।”
“ओके ऐज़ यू विश।”
मैं तो चला सोने के लिए। “तुम रुकोगे नहीं?”
“नहीं मुझे नींद आ रही है।”
“अच्छा तो मैं भी फिर चलती हूँ।”
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वो आगे-आगे और मैं उसके पीछे। उसकी गांड कभी पूरे एक तरफ गिरते तो कभी दूसरे तरफ — मेरा तो मन कर रहा था। अभी शबनम की गांड को दोनों हाथों से पकड़ लूँ और उसका कपड़ा उतारकर कहूँ अब चल के दिखाओ। असल में वो मुझे सिड्यूस कर रही थी। मगर मैं चाह रहा था कि वो शुरू करे, और शायद वो भी यही सोच रही थी कि मैं पहल करूँ। मेरे दिल में एक बात आई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने कहा “शबनम रुक जाओ, तुम्हारे पीछे कुछ है।”
वो रुक गई और मैंने उसकी गांड पर हाथ लगा दिया।
उसने पूछा “क्या हुआ?”
मैंने कहा “उड़ गया।”
ओह चलो अच्छा हुआ। जब मैंने उसे हाथ लगाया था तो मेरा लंड सख्त हो चुका था। इस वक्त अगर वो पीछे देखती तो मेरी चोरी पकड़ी जाती। वो मॉम के रूम में गई, मैं उसके पीछे। मैंने मॉम को फॉरहेड पर किस किया तो शबनम मुझे देखने लगी। मैंने हल्की सी मुस्कराहट दी, उसने भी। मैंने उसी की चाल उस पर चला दी।
जब मैं रूम से बाहर जा रहा था तो मैंने भी गांड हिलाना शुरू कर दी। जिसे देखकर वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी, मगर मैंने पीछे नहीं देखा। मैं अपने रूम में चला गया मगर मुझे नींद नहीं आई। मैं वापस मॉम के रूम में आ गया और मॉम के बेड पर बैठकर शबनम को देखने लगा। लाइट ग्रीन नाइटी जो थोड़ी ऊपर उठी हुई थी — हल्की रोशनी में गज़ब ढा रही थी उसकी बॉडी।
मगर मैं कोई ऐसी बात नहीं करना चाहता था जिससे मैं शबनम की नज़रों में गिर जाऊँ। मुझे कुछ समझ नहीं आ रही थी। मैं बाहर चला गया। कुछ देर में शबनम भी आ गई। मैं उसे देखकर परेशान हो गया और सोचने लगा या क्या सोई नहीं थी।
शबनम मेरे पास आई और बोली “तुम्हें सोने की जल्दी थी, अब क्या हुआ?” मैंने कहा “कुछ नहीं बस नींद अचानक ही उड़ गई।”
करूँ तो क्या करूँ — क्या सीधा सा कह दूँ या वेट करूँ — मैं यही सोच रहा था।
शबनम ने पूछा “क्या सोच रहे हो?”
मैं चुप रहा।
शबनम ने फिर पूछा, मैं चुप रहा।
फिर शबनम मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और बोली “कहाँ गुम हो?”
मैंने कहा “कुछ नहीं।”
और सोच लिया कि सीधा-सीधा बता दूँ।
“शबनम तुमसे कुछ माँगूँ तो क्या तुम दोगी?”
शबनम ने कहा “सोचूँगी” और हँसने लगी, और बैठ गई।
मैं उसकी बैक साइड पर खड़ा हो गया और अपना हाथ उसके शोल्डर्स पर रखकर मसलने लगा। “क्या तुम भी वही सोच रही हो जो मैं?”
“शबनम मुझे क्या पता तुम क्या सोच रहे हो।”
“मैं सोच रहा था तुम कौन हो, कहाँ से आई हो, देखो कैसे हम मिले और यहाँ दूर अकेले बातें कर रहे हैं।”
वो बोली “हाँ ये तो ज़िंदगी है।”
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मैं उसके हाथों को कंटीन्यूअसली उसके शोल्डर्स पर रगड़ रहा था। “तुम्हें सर्दी नहीं लग रही शबनम?”
“हाँ हल्की सी ठंड है।”
“चलो रूम में चलते हैं।”
“हाँ चलो।”
हम दोनों मेरे रूम में बेड पर लेट गए।
मैंने पूछा “क्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?”
“हाँ बहुत सारी।”
“क्यों तुम्हारा बॉयफ्रेंड नहीं है?”
“नहीं फ्रेंड्स तो बहुत हैं मगर बॉयफ्रेंड मीनिंग में नहीं है।”
मैंने शबनम को बताया।
“ओह अब समझी तुम्हारी बात को।”
“हाँ मेरी गर्लफ्रेंड हैं।”
“क्या सच में हैं गर्लफ्रेंड्स हैं?”
“हाँ हैं।”
शबनम ने बताया। फिर बोली “यू नो दिस इज़ रिस्की टू गेट विद अ मेल, एंड विद फीमेल इट्स सो ईजी एंड विदाउट रिस्क आदि…”
“तो क्या तुम मुझसे भी डर रही हो?”
“नहीं मैं डर तो नहीं रही, अगर डरती तो ऐसा तुम्हारे बेडरूम में तुम्हारे पास साथ बेड पर नहीं होती।”
ओह और हम हँसने लगे और एक दूसरे की आँखों में देखने लगे। तक़रीबन 5 मिनट ये चलता रहा।
मैंने कहा “सो यू वांट विद मी?” और वो स्माइलिंग थी।
“वेट अ सेकंड लेट मी थिंक अबाउट योर सेल्फ, व्हाई इज़ दैट आई एम नॉट लुकिंग गुड, और आई एम वीक और समथिंग एल्स?”
“नो आई डोंट मीन सच लाइक दिस।”
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“देन व्हाट?”
“आई एम नॉट श्योर आई डोंट थिंक सो व्हाट यू वांट।”
“सॉरी लेट फॉरगेट दिस, डिस्कस समथिंग एल्स।”
“नो प्लीज फर्स्ट आंसर मी?”
“अबाउट व्हाट?”
“अबाउट व्हाट आई आस्क यू।”
“ओह यू आर सो नॉटी। आई थिंक नाउ यू वांट आई इम्प्रेस यू?”
“नो नो यू आर रियली मैड।”
“यस आई एम मैड आई वांट यू।”
“आई एम देयर व्हाट यू वांट एल्स?”
“डोंट बी सिली।”
“कम ऑन यार डोंट वेस्ट टाइम आई एम रियली हॉट नाउ।”
“ओह सो व्हाट कैन आई डू?”
“कम ऑन बेबी, आई विल डू, यू जस्ट रिलैक्स एंड क्लोज योर आइज़।”
“आह तुम भी ना…”
मैंने उसके मोटे बड़े नरम-नरम लिप्स को फिंगर्स से मसलना लगा। कभी उसके फेस पर कभी लिप्स पर फिंगर से रगड़ना लगा। उसने मेरा हाथ अपना हाथ में पकड़ लिया। मैंने दूसरा हाथ उसके लेफ्ट बूब्स पर रखकर दबाना लगा। “ओह प्लीज मुझे कुछ हो रहा है।”
फिर मैं शबनम के फेस और लिप्स को चूमना-चाटना लगा जिससे उसका बदन गरम और फेस रेड सा होने लगा। फिर मैं उसके ऊपर लेट गया। ऐसा करने से चूत और लंड आपस में प्यार करने लगे और मैं उसके फेस और लिप्स, गालों, फॉरहेड, आँखों जगह-जगह को चूमने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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“ओह प्लीज मत करो ना प्लीज मुझे कुछ हो रहा है।”
फिर मैंने उसकी नाइटी आराम से खोल दी और उसके बूब्स को दबाना लगा, लिप्स पर किसिंग करना लगा। शबनम एक गरम लोहा बन चुकी थी जिसे छूने से मैं जल रहा था। मैंने शबनम की कमर के नीचे हाथ डालकर उसके ब्लाउज़ का हुक खोल दिया और ब्लाउज़ उतारकर पीछे फेंक दिया। इस वक्त रात के तीन बज रहे थे।फिर मैं शबनम के बूब्स और निप्पल का ज़ायका चखने लगा। कभी ज़ुबान को उसकी आँखों से रगड़ता हुआ उसके मिड तक लाता और ऐसा ही ज़ुबान को वापस ला जाता।
“बस अब बस प्लीज जो करना है जल्दी करो, आरे मेरी जान।”
“ऐसे भी क्या जल्दी है, ज़रा आराम से, रात भी हमारी है दिन भी हमारा है।”
“तो जल्दी क्यों?”
“नहीं बस अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता प्लीज जो करना है करो।”
मैंने उसकी पैंटी उतारकर उसकी चूत को देखना लगा।
वो बोली “क्या हुआ?”
मैंने कहा “तुम क्या करती हो इससे?”
वो बोली “मैं नहीं मेरी गर्लफ्रेंड्स करती हैं, 7 इंच तक की कैंडल इसमें उतार देती हैं तो ऐसी ही होगी ना।” और हँसने लगी।
फिर मैंने उसे कुछ देर के लिए एक साइड पर कर दिया क्योंकि वो बहुत गरम थी, बस उसका दिल कर रहा था मैं अभी अपना लंड उसकी चूत में डाल दूँ, मगर मुझे कोई जल्दी नहीं थी। मैंने अपना कपड़ा उतार दिया, उसने भी नाइटी नीचे से निकाल दी और हम दोनों पूरा नंगे हो गए। वो मेरी तरफ झुकी और मेरे खड़े लंड पर हाथ रखकर बोली “यार ये तो कैंडल जितना है।”
मैंने कहा “हाँ होना चाहिए।” सनी का लंड है।
मैंने शबनम से पूछा “क्या तुम चूसोगी?”
शबनम बोली “कभी ऐसा किया तो नहीं मगर ये काफी हेल्दी है, ट्राई करती हूँ।”
फिर उसने पूछा “तुमने मेरी चूत क्यों नहीं चाटी?”
मैंने कहा “मुझे पता था अगर मैं ऐसा करता तो शायद तुम पानी निकाल देती इसलिए रुक गया।”
“तो मतलब तुम मेरी चूत चाटने के लिए तैयार हो?”
“हाँ ज़रूर।”
“ओके फिर मैं भी तुम्हारा लंड चूसती हूँ।”
शबनम तो पहले मेरी लेग्स के बीच में बैठकर मेरे लंड को घूर से देखती रही और हिलाती रही, टेस्टिस को भी रगड़ने लगी। फिर वो मेरे लंड पर झुक गई। पहले ज़ुबान से लंड के हेड का ज़ायका चखने लगी। उसे अजीब सा लगा। मैंने पूछा “कैसा है?” तो बोली “अजीब सा टेस्ट है।”
मैंने कहा “पूरा लंड का ज़ायका चखकर बताओ।”
“हाँ हाँ वही कर रही हूँ।”
फिर उसकी ज़ुबान मेरे पूरे लंड पर फिरने लगी जिससे मुझे गुदगुदी होने लगी। बहुत मज़ा आ रहा था। “शबनम ज़रा अपना लिप्स गीला करो, मेरे लंड पर थूक फेंको और फिर अपना लिप्स से ऐसा चाटो।” उसने ऐसा ही किया।
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मैं उठकर बैठ गया, लेग्स नीचे ज़मीन पर रख दीं और उसे नीचे लेग्स के बीच में ज़मीन पर बिठा दिया और कहा “अब चूसो।” मैंने उसे बालों से पकड़ लिया और लंड उसके मुँह में घुसाने लगा जिससे उसकी साँस रुकने लगी मगर मेरा लंड उसे छोड़ता रहा। मैं भी उसके बूब्स को पकड़कर दबाता रहा।
फिर मैंने उसे खड़ा करके किसिंग शुरू कर दी और साथ ही बेड पर गिराकर उसकी लेग्स के बीच में उसकी चूत के लिप्स को चाटने लगा। तक़रीबन 5 मिनट ऐसा करने के बाद 69 की पोजीशन में हम दोनों आ गए और दोनों एक दूसरे को चुदाई के लिए तैयार करने लगे।
वो मेरा लंड और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। 7 से 8 मिनट ऐसा 69 की पोजीशन के बाद अब शबनम चुदाई के लिए तैयार थी। मैंने शबनम से कहा “इस पर खूब सारा थूक मल दो” और मैंने भी अपना थूक अपने लंड पर लगाया, और शबनम की चूत के ऊपर लंड रखकर शबनम को किसिंग करने लगा, और साथ ही आराम-आराम से चूत में लंड डालने लगा।
शबनम को ज़्यादा दर्द नहीं हुआ क्योंकि वो तो पहले से ही कैंडल लेती थी। मैंने अपना लंड पूरा शबनम की चूत में उतार दिया और अब धक्का लगाना लगा। फर्स्ट तो कुछ देर शबनम आराम से लेटी रही आँखें बंद करके मगर फिर उसने मुझे कमर से दबोच लिया और नीचे से हिलने लगी। मैं रुक गया और वो खुद ही चुदती रही। फिर मैं शुरू हो गया और वो भी नीचे से हिलती रही।
पहली शॉट हम दोनों 12 मिनट तक खेल सके, और मैंने अपना पानी शबनम के बूब्स पर और फेस निकाल दिया और पानी को चाटने के बाद शबनम के ऊपर ही लेट गया। 1 घंटा बाद शबनम ने दोबारा मेरा लंड को पकड़ लिया। उसका मूड फिर से चुदाई के लिए हो रहा था। मैंने भी उसके साथ दिया और दोनों ने लंड और चूत चाटकर गरम कर दिया।
इस बार शबनम मेरे ऊपर बैठ गई। 10 मिनट ऊपर बैठकर चुदवाती रही। बाद में वो नीचे मैं ऊपर। 10 मिनट मैंने ऊपर से चोदा। इस बीच हम कुछ देर के लिए रुक भी जाते थे जब हमारा पानी निकलने लगता था। फिर मैंने शबनम से पूछा “गांड मरवाओगी?” वो कुछ न बोली बस चुदाई करवाती रही।
फिर मैं रुक गया और बोला “अब गांड की चुदाई करता हूँ।” वो चुप रही। ऑयल दूसरे रूम में था जहाँ मॉम सोई हुई थीं। मैंने शबनम से पूछा “गांड में कुछ लेती हो?” वो बोली “कभी नहीं, कुछ नहीं लिया।” मैं समझ गया ऐसा इसमें दर्द होगा। मैं शबनम को बाथरूम में ले गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वहाँ पर मैंने उसे आगे की तरफ झुका दिया और शबनम की गांड को चाटना लगा। फिर फिंगर गांड में डाले — 1 फिर 2 फिर 3। उसे दर्द हो रही थी तीसरे फिंगर के साथ। मैंने बहुत सारा थूक लगाकर 3 फिंगर्स शबनम की गांड में डाल दिए। इस बार कुछ दर्द कम हुआ।
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मैंने शबनम से कहा “तुम मेरे लंड पर लोशन लगाओ।” उसने ढेर सारा लोशन लगा दिया, जिससे मेरा लंड बहुत ही चिकना हो गया। फिर मैंने लोशन शबनम की गांड में लगा दिया। मैंने हाथ धो लिया और फिंगर शबनम के मुँह में डाल दी। अगर उसे दर्द हो तो वो मुझे बाइट करे, और चीख न मारे। मैंने लंड आहिस्ता-आहिस्ता शबनम की गांड में 1/3 हिस्सा डालकर आगे-पीछे होना लगा। थोड़ी देर बाद एक झटका दिया जिससे 1/2 लंड गांड में उतर गया, और शबनम दर्द से चीख उठी — “उईईई दर्द हो रही है।”
मैंने आहिस्ता-आहिस्ता आगे-पीछे किया और फिर तीसरा और चौथा झटका। शबनम की गांड में पूरा लंड चला गया। उसे दर्द तो हुआ मगर कुछ देर के लिए उसके बाद शबनम ने खूब एंजॉय किया मेरा लंड अपनी गांड में और खुद ही आगे-पीछे गांड को करने लगी। फिर उसने मुझे नीचे बाथरूम में लिटा लिया और खुद ऊपर बैठ गई, और लंड गांड में डालकर मज़ा लेने लगी। आखिर मैंने 3 से 4 मिनट की चूत की चुदाई की जिससे मेरा और शबनम का पानी निकल आया, और हम बाथरूम में ही नीम बेहोश होकर लेट गए।
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