Dehati Chudasi Maa
दोस्तों, मैं अपनी पिछली स्टोरी प्रह्लाद चचा ने माँ को खेत में चोदा में आपको बता चुका हूँ कि कैसे मम्मी प्रह्लाद चाचा और उसके दोस्त अभिषेक से चुद चुकी थीं। अब उससे आगे की कहानी आप लोगों को बताता हूँ। अब मम्मी और चाचा घर में भी अवसर देखकर चुदाई का खेल खेलने लगे थे और मम्मी की जवानी हर रोज़ की भरपूर चुदाई से और भी निखर रही थी। Dehati Chudasi Maa
मम्मी को चाचा से चुदते हुए अब एक महीना हो गया था और चाचा को उनकी गांड के छेद का चस्का कुछ ज्यादा ही लग गया था। एक रात जब चाचा मम्मी को पेट के बल लिटाकर उनके चूतड़ों को खोल रहे थे तो मम्मी ने बोला, “प्रह्लाद तुझे लगता है गांड के छेद का चस्का लग गया जो हर बार इसी छेद को अपने लंड से चोदता है।”
और बात भी सच थी क्योंकि मम्मी के चूतड़ पहले ही बहुत भारी थे और अब रोज़-रोज़ की गांड चुदाई के बाद तो दोनों चूतड़ और फट गए थे और एक दूसरे से और ज्यादा दूर हो गए थे। क्योंकि मैंने कई बार देखा था कि अब मम्मी की नाइटी, सलवार या साड़ी बार-बार उनके चूतड़ों की फांक के बीच फंस जाती जिसे मम्मी हाथ से निकालती रहती थी।
और जब मम्मी नाइटी में घर में घूम रही होती तो उनके गदराए चूतड़ों का कटाव और हिलना साफ-साफ दिखता। मम्मी अब ज्यादातर समय घर पर नाइटी में ही रहती और जिसके नीचे उन्होंने कुछ भी नहीं पहना होता था, जिसमें से उनके चुचियों के बड़े-बड़े निप्पल और चूत के छेद का गहरा रंग साफ झलकता था। पर उन्हें लगता था कि उनकी गदराई जवानी उन्होंने ढक ली है।
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मेरी नजरें बचाकर कभी चाचा मम्मी की चूत में 2 से 3 मिनट उँगली कर देते थे और मम्मी भी तुरंत उनके लंड को हाथ से मुठ मारना शुरू कर देती या चूस भी लेती और चाचा के लंड का पानी भी पी लेती थी। थोड़ा सा पानी अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों के निप्पल पर लगा लेती और फिर काम करते हुए अपने निप्पल पर से चाचा के पानी का टेस्ट लेती रहती।
और कई बार तो चाचा भी मम्मी की चुचियों को चाटकर अपने पानी का टेस्ट लेते और उन्होंने कई बार मम्मी की चूत में उँगली करने पर मम्मी का जो रस निकलता था उसे अपनी उँगलियों से चाटा भी था और मम्मी भी उनकी उँगलियों को चाट लेती थी और कहती थी, “प्रह्लाद तेरा पानी ज्यादा नमकीन और रसीला है।”
चाचा को 2 दिन के लिए शहर जाना पड़ गया और तीसरे दिन वो सुबह 6 बजे की ट्रेन से वापस आने वाले थे। तीसरे दिन मैं सो रहा था और मम्मी किचन में काम कर रही थी कि किसी ने दरवाजा नॉक किया तो मेरी आँख खुल गई पर मैं आलस में लेटा रहा। मम्मी ने जाकर दरवाजा खोला तो मम्मी की खुशी भरी आवाज आई।
थोड़ी देर में मैंने देखा कि चाचा ने मम्मी को गोद में उठाकर किचन में लेकर आ रहे हैं और उनका दाहिना हाथ मम्मी की नाइटी के अंदर से गांड के नीचे था और मम्मी ऊपर को उठाते हुए सिसकी भर रही थी और कह रही थी, “प्रह्लाद बस एक उँगली डाल, दूसरी मत कर, अभी ड्राई है तो दर्द कर रहा है।”
तो चाचा बोले, “भाभी तुझे अपने दर्द की पड़ी, मेरा लंड 2 दिन से तेरी चूत चोद नहीं पाया, उसकी कोई फिकर नहीं।”
तो मम्मी बोली, “मेरी जान प्यासी तो मेरी चूत भी है पर अभी विकास उठने वाला है तो थोड़ी देर में करेंगे।”
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पर चाचा पर चुदाई का जुनून सवार था और मैंने देखा कि उन्होंने वहीं किचन में ही मम्मी को टेबल पकड़ाने के लिए थोड़ा आगे की तरफ झुकाया और खुद उनके पीछे अपनी पैंट उतारकर खड़े हो गए। आज उनका लंड और भी ज्यादा मोटा और लंबा लग रहा था, शायद 2 दिन चुदाई न मिलने के कारण ज्यादा ही एक्साइटेड हो रखा था।
अब चाचा ने मम्मी की नाइटी को उठाकर कमर तक फोल्ड करके मम्मी को कमर तक नंगा कर दिया था। अब मम्मी के गोरे-गोरे चूतड़ चाचा की तरफ खुले हुए थे और उनके बीच से गांड का छेद और चूत का छेद उनकी तरफ खुलकर आ गया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं ये देख नहीं पाया था क्योंकि मेरे रूम का दरवाजा और किचन का दरवाजा आमने-सामने थे और इस वजह से मम्मी और चाचा मुझे साइड से दिखाई पड़ रहे थे। अब चाचा ने मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फिराते हुए हल्के से थप्पड़ मारा और बोले, “भाभी मैंने कई चूत चोदी हैं पर तेरी चूत और चूतड़ों के जैसी कोई भी नहीं थी।”
ये कहकर चाचा ने अपना दाया हाथ मम्मी की कमर के आगे से ले जाकर मम्मी की चूत में उँगली डाली तो मम्मी आहें भरने लगी और अपने चूतड़ों को पीछे करके चाचा के लंड पर रगड़ने लगी और बोली, “प्रह्लाद जल्दी कर कहीं विकास न उठ जाए।”
अब चाचा ने किचन की स्लैब पर रखे हुए देसी घी के डिब्बे को उठाया और मम्मी की पीठ पर उड़ेलने लगे। अब घी मम्मी की चूतड़ों के बीच से होते हुए चाचा के लंड और मम्मी की चूत और गांड के छेद को चिकना करने लगा।
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अब चाचा बोले, “भाभी अब तो तेरे दोनों छेद पूरे चिकने हो गए हैं और मेरा लंड भी पूरा घी में नहा चुका है, अब चुदने के लिए तैयार है।”
तो मम्मी बोली, “प्रह्लाद तेरे लंड से तो मैं रोज चुदना चाहती हूँ, अब जल्दी से कर कहीं विकास उठ गया तो मुसीबत हो जाएगी।”
अब चाचा ने मम्मी को थोड़ा सा और आगे की तरफ झुकाया और लंड को गांड के छेद पर रखा और एक झटका दिया तो लंड स्लिप करता हुआ पूरा का पूरा गांड में समा गया और मम्मी हल्के से सिसकी भरते हुए अपने होंठों को भींचने लगी।
अब चाचा ने मम्मी को कमर से पकड़ा और धकाधक अपना लंड मम्मी के चूतड़ों को चीरते हुए गांड में पेलने लगे और मम्मी की दबी हुई आहें निकलने लगी। चाचा ने मम्मी की राइट लेग को हल्के से ऊपर उठाकर पास में रखे हुए स्टूल पर कर दिया और राइट हाथ फिर से कमर के आगे से ले जाकर चूत में उँगली डालकर मम्मी को मस्त करने लग गए।
तो मम्मी भी अपनी कमर को हिला-हिलाकर चाचा का साथ देने लगी। अब चाचा ने चोदने की स्पीड और तेज कर दी। मुझे उनके चुदाई के खेल देखने के साथ घुप्प घुप्प घुप्प का शोर भी सुनाई दे रहा था। चाचा का लंड मम्मी के चूतड़ों में चमकता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था.
और मम्मी अपने एक हाथ से अपने चुचे रगड़ रही थी और मस्ती के कारण उनकी आँखें बंद हो रखी थीं और वो बोले जा रही थी, “ओओह् आआह्ह्ह और जोर से… ओओ प्रह्लाद और जोर से पेल… आआह्ह्ह आज मेरी चूत और गांड को फाड़ दे…”
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तो चाचा ने मम्मी की चूत में अब चारों उँगलियाँ डाल दी और जोर से हिलाते हुए गांड की पिलाई करने लगे। कुछ देर के बाद चाचा ने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला और हाथ चूत में से निकाला तो मम्मी लंबी-लंबी आहें भरते हुए सीधी हुई और मम्मी ने अपनी नाइटी उतारकर फेंक दी और चाचा की तरफ घूम गई और स्टूल पर अपना लेफ्ट फुट रखा और राइट फुट ज़मीन पर रखते हुए आहें भरने लगी।
इधर चाचा का लंड पूरे तनाव में था और चिकना हो जाने के कारण और ज्यादा मोटा लग रहा था। अब चाचा ने मम्मी की चूत के छेद पर लंड को रखा और दोनों हाथों को मम्मी के पिछवाड़े पर ले जाकर चूतड़ों को पकड़ा और एक झटका दिया तो फिर से लंड अपनी फेवरेट जगह के अंदर चला गया और मम्मी ने आगे झुककर चाचा के कंधे पर हाथ रखकर सहारा लिया।
चाचा ने अब पूरे जोश के साथ लंड को पेलना शुरू किया। मम्मी के मोटे-मोटे चुचे जोर-जोर से हिल रहे थे और फिर अचानक मम्मी जोर-जोर से झटके लेने लग गई और चीखने भी लगी थी। उनकी आँखें बंद थीं। मम्मी लगभग 1 मिनट तक झटके लेती रही पर चाचा की स्पीड में कोई फर्क नहीं पड़ा था। वो उसी तेजी से चूत पेल रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मम्मी ने आँखें खोली तो ऐसे लग रहा था जैसे वो सोकर उठी हो। फिर चाचा ने भी अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया पर स्पीड चाचा ने कम नहीं की। उनका लंड पानी चूत में छोड़ जा रहा था क्योंकि चाचा का शरीर भी अकड़ रहा था और रिलैक्स हो रहा था पर लंड था कि तना ही हुआ था।
और फिर चाचा का पानी और घी का मिला हुआ लिक्विड उनके लंड के साथ लगकर चूत से धीरे-धीरे बाहर आने लगा था और जिसमें से कुछ चाचा के लंड का सहारा लेकर उनके लंड के बालों में जा रहा था और कुछ मम्मी की चूत से निकलकर उनकी जांगों पर से होता हुआ नीचे गिर रहा था।
फिर थोड़ी देर तक चाचा ने मम्मी को और चोदा। फिर उनका लंड शांत होने लगा तो उन्होंने उसे चूत से बाहर निकाला तो मम्मी ने लंड को हाथ में लेकर सहलाया और फिर नीचे बैठने लगी और बोली, “आज तो दो असली घी का मिला हुआ घी पीने को मिलेगा।”
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और चाचा की मस्ती में आँखें अभी बंद थीं पर वो भी इस शानदार चुदाई से बहुत खुश थे। फिर मम्मी ने पूरा लंड चूसकर साफ कर दिया और खड़ी हो गई और बोली, “प्रह्लाद आज पहली बार मुझे इतना मजा आया है, शायद ऑर्गेज्म हुआ था।”
“हाँ भाभी मैं भी देख रहा था कि तू आज बहुत ज्यादा मस्ती में थी और तेरी चूत और गांड इतने घी के बाद भी मेरे लंड को पकड़ रही थी।”
मम्मी बोली, “शायद ये हमारे विकास हमें चुदाई करते हुए न देख ले के डर से हुआ है। आज खेत में विकास को मैं लेकर आऊँगी और हम उसे चुप कर फिर चुदाई का खेल खेलेंगे क्योंकि मुझे वो मस्ती फिर से चखनी है।”
तो चाचा बोले, “भाभी जैसी तेरी मर्जी। वैसे मैंने शहर से तेरे लिए और इंतजाम भी किया है जिसे मैं बाद में बताऊँगा।”
मम्मी ये सुनकर बहुत खुश हुई और चाचा से लिपट गई और बोली, “प्रह्लाद तुझे मेरा पति होना चाहिए था।”
तो चाचा बोले, “भाभी अभी भी तो पति का ही फर्ज निभा रहा हूँ और देवर-भाभी के रिश्ते की चुदाई का अलग ही मजा है।”
फिर मम्मी हँसते हुए अपनी चुदाई के खेल के निशान साफ करने लगी। तो दोस्तों, ये थी मेरी मस्ती भरी हुई चुदाई की कहानी। अभी आगे और भी है जिसे मैं लिखता रहूँगा।
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