Kamuk Maid Chudai Story
मेरे प्यारे गरमा-गरम लंड वाले और फुदकती चूतों वाली महिलाओं (लड़कियाँ भी)। आज मैं जो दास्तान सुनाने जा रहा हूँ वो एक बहुत ही गरमा-गरम वाकये की है। मुझे तो आप जानते ही हैं। मेरा नाम संजय है और मैं ठाणे (मुंबई) में रहता हूँ। मैं 40 साल का मस्त आदमी हूँ, एकदम मजबूत और मेरा लंड चोदने के लिए तड़पता रहता है। उसकी लंबाई 7.5 इंच से ज्यादा है और मोटाई भी 2.5 से 3 इंच होगी। Kamuk Maid Chudai Story
बीवी को चोद-चोद कर मेरा लंड अब बोर हो गया है और वो भी इससे परेशान हो गई है, क्योंकि ये उसकी हालत खराब कर देता है आज भी। इसलिए मेरा ये मस्ताना लंड कुछ ज्यादा ही उतावला हो गया है और ये कुछ नया खोज रहा था। हमारे घर में पार्ट-टाइम नौकरानियाँ काम करती हैं। लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी।
बीवी बड़ी होशियार थी। सब काली-कलुट्टी और भद्दी-भद्दी चुन-चुन कर रखती थी। जानती थी न कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है। उसे अच्छी तरह मालूम है कि मेरे लंड को अच्छा गरम चूत की खुशबू अगर मिली तो वो उसे चोदे बिना नहीं छोड़ेगा।
मैं भी मायूस हो गया था। जैसा कि मैंने बताया कि दिल्ली, पुणे या दूसरे शहर जा कर चुदाई करने में क्या प्रॉब्लम है। मैं नौकरी करूँ या चुदाई करूँ? मैं किसी तरह मेरे आस-पास की भाभी को कभी लाइन में ले कर एक-आध घंटे के लिए बाहर ले जाऊँ, उसकी भी गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि बीवी की नजर मुझ पर लगी रहती थी।
ऐसे में अचानक एक बार मेरे घर कोई नौकरानी काम करने को तैयार नहीं थी, क्योंकि सब को मेरी बीवी 1-2 महीने में भगा देती थी। आखिर में जब कोई नहीं मिली तो एक को रखना ही पड़ा – जो कि 23-24 साल की मस्त जवान कुंवारी लड़की थी। उसकी शादी टूट गई थी। साँवला रंग था लेकिन ज्यादा साँवला नहीं था। थी बहुत ही नमकीन और क्या जवानी। सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए।
चूँचियाँ ऐसी गोल-गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज में समाई ही नहीं। मैंने कई बार उसका साइड से देखा था। उसकी चूँचियाँ ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकलते हुए लगती थीं। बड़े गले का ब्लाउज पहनती तो दोनों चूँचियों के बीच की घाटी ऐसी दिखाती मानो अभी लंड उसका बीच रख कर रगड़ दूँ।
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साड़ी का पल्लू कभी खिसक जाता तो मुझे ऐसा लगता था कि ब्लाउज फाड़ कर चूँचियाँ बाहर निकल आएंगी। बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि वो चोदने के लिए एकदम मस्त चीज थी। सोच-सोच कर मैंने कई बार मुठ भी मारी। बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कब मौका मिले और कब मैं इसके कुंवारे चूत में अपना लंड दबा के घुसा दूँ। इसकी टाइट चूत में मेरा फौलादी लंड डालूँ और ये चीखे।
कई बार मैं जानबूझकर उसके सामने सिर्फ बर्मुडा पहन कर जाता और तब मेरा लंड उसमें से नजर आता। वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी-चोरी से नापता रहता था। मैं सोचता कि इसके छोटे से हाथ में या छोटे से मुँह में मेरे लंड का मोटा सुपाड़ा कैसा लगेगा।
मैंने आँख बंद करके अपने मन में कई बार उसे नंगा कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच-सोच कर मेरा लंड पूरे उफान पर आता और गीला हो जाता था और खड़ा हो कर फड़फड़ाने लगता जिसे मैं बड़ी मुश्किल से काबू में करता था। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल-गोल चूँचियों को दबाऊँ।
होंठ तरसते उसका रस भरे होंठों को चूसने के लिए। जीभ लपलपाती उसका निप्पल और चूत को चाटने के लिए। एक बार चाय लेते समय जब मैंने जानबूझकर उसे छुआ तो मानो करंट सा लग गया और मेरा लंड लुंगी से बाहर निकल आया। ये देखते ही वो शर्माते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गई।
मैंने कहा, “मौका आने दे रानी, तुझे तो खूब चोदूँगा। लंड तेरी चिकनी चूत में डाल कर भूल जाऊँगा। और तू अपनी चूत में लंड को कस लेगी कभी जुदा न होने के लिए। चूची को चूस-चूस कर प्यास बुझाऊँगा और दबा-दबा कर मज़े लूँगा। पूरी लाल कर दूँगा चूँचियों को। और निप्पल को काटूँगा और तू चिल्लाएगी। होंठों को तो खा ही जाऊँगा।”
रानी उसका प्यारा सा नाम था। कहते हैं उसके घर में देर है पर अंधेर नहीं। एक दिन रविवार सुबह अचानक मेरे साले का फोन आया कि उसकी माँ यानी मेरी सास बहुत बीमार है और उसे अस्पताल में एडमिट किया है। मेरी बीवी ने मुझसे चलने के लिए कहा लेकिन मैंने कहा कि मैं अचानक छुट्टी नहीं ले पाऊँगा। और सोमवार को मेरी एक ज़रूरी मीटिंग भी है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
तो बीवी ने कहा, “मैं तो मायके जा रही हूँ।”
मैंने कहा, “ठीक है तुम वहाँ जा कर मुझे फोन करना, मैं बाद में आ जाऊँगा अगर ज़रूरत हुई तो।”
उसने अपना सामान पैक किया और मुझसे कहा, “रानी आएगी तो घर का काम करवा लेना।”
रविवार का दिन था। बच्चे भी बीवी के साथ चले गए। और मेरे लंड महाराज तो उछल गए। मैं ये मौका चूकने वाला नहीं था। लेकिन शुरू कैसे करें। कहीं चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गई तो? दोस्तों, तुम ये जान लो कि लड़कियाँ कितना ही शर्माएँ लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हें छेड़े और चोदे।
मैंने दूसरे दिन ऑफिस में फोन किया और कहा, “आज मैं ऑफिस नहीं आऊँगा, सीधे एक साइट की विजिट पर जाऊँगा। मुझे कॉन्टैक्ट करना हो तो मेरे मोबाइल पर करना।”
फिर मैं रानी का इंतज़ार करने लगा। मेरा लंड शायद समझ गया था कि आज उसकी दिल की तमन्ना पूरी होने वाली है। इसलिए एकदम टाइट था। मैंने उसे किसी तरह काबू में रखा हुआ था। सुबह ठीक 9 बजे रानी आई। उसने पूछा, “मेमसाब कहाँ है?”
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मैंने कहा, “वो अपने मायके गई है।”
वो कुछ नहीं बोली, मेरी तरफ तिरछी नजर से देखा और अपना काम करने जाने लगी।
मैंने रानी को बुलाया और उसे देखते हुए कहा, “रानी, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?”
वो बोली, “क्यों साहब, क्या कम है?”
मैंने जवाब दिया, “देखो, ब्लाउज के नीचे कोई ब्रा नहीं है। सब दिखता है। लड़के छेड़ेंगे तुझे।”
वो बोली, “बाबूजी, इतने पैसे कहाँ कि चोली खरीद सकूँ।”
मैंने कहा, “तुझे चाहिए। तेरे ये कबूतर ब्रा में और भी खूबसूरत लगेंगे।”
वो शर्मा गई लेकिन उसने मुझसे पूछ लिया, “आप दिलवाओगे?”
मैंने कहा, “दिलवा तो मैं दूँगा। लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है। या किसी लड़के या मर्द के साथ तुमने कुछ किया है?”
उसने जवाब दिया, “छेड़ते तो बहुत हैं.. लेकिन मैं किसी मर्द के साथ कभी कुछ नहीं किया, मुझे किसी मर्द ने छुआ भी नहीं साहब।”
मैंने कहा, “इसका मतलब तू एकदम कुंवारी है।”
“जी साहब।”
“अगर मैं कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज तो नहीं होगी।”
“नाराज क्यों होंगी साहब। आप तो बहुत अच्छे हो।”
बस यही उसका सिग्नल था मेरे लिए।
मैंने हिम्मत रख कर पूछा, “अगर मैं तुम्हें थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा।”
अपने पैर की उँगलियों को वो ज़मीन पर मसलती हुई बोली, “आप तो बड़े वो हो साहब। मैं तो नौकरानी हूँ। आप मुझसे क्यों प्यार करेंगे?”
मैं आगे बढ़ते हुए कहा, “तू ऐसा क्यों सोचती है। तू इतनी सुंदर है और तुझे देख कर मेरा क्या हाल होता है ये तो तूने देखा है ना। और मैं तुझे बहुत सारी ब्रा, पैंटी और मेकअप का सामान भी खरीद कर दूँगा। तुझे कभी कोई ज़रूरत हो तो मुझसे कहना।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो कुछ बोली नहीं, शर्मा के नीचे देखने लगी।
मैंने कहा, “तेरी उम्र तो प्यार करने की हो गई है, कितनी जवान और सुंदर है तू। तुझे नहीं लगता कि कोई मर्द तुझे अपने बाहों में ले और बहुत अच्छे से प्यार करे? तेरे इस गदराए बदन को सहलाए और फिर तुझे बहुत रगड़े?”
उसने हाँ में सिर हिला दिया।
मैं आगे बढ़ा और कहा, “अच्छा अपनी आँखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं।”
उसने आँखें बंद कीं और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ कर दिया।
मैंने कहा, “बेटा लोहा गरम है, मार दे हथौड़ा।”
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आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर अपनी एक उँगली से उसके गुलाबी होंठों को हल्के से सहलाया। वो सिहर उठी। उसका होंठ खुलने-बंद होने लगे। मैं नीचे झुका और बहुत हल्के से जीभ निकाल के उसके होंठों को चाटा और वो संभाल पाती इसके पहले ही रख दिए अपने होंठ उसके होंठों पर।
हाय क्या गज़ब की लड़की थी। क्या रसीले और नरम होंठ थे.. क्या टेस्ट था। दुनिया की कोई भी शराब उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बाँध टूट गए। मेरे होंठों ने कस कर उसके होंठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों से मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया।
वो भी कसमसा कर मुझसे चिपक गई। उसकी चूँचियाँ मेरे सीने में धंस गईं। बहुत मांसल और सख्त चूँचियाँ थीं किसी रबर बॉल की तरह। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया, और उसकी पीठ को सहलाने लगे। मेरी जीभ उसकी जीभ की टेस्ट लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही।
अचानक उसने आँखें खोलीं और बोली, “साहबजी, बस, कोई देख लेगा।”
मैंने कहा, “रानी, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ एक बार।”
“एक बार, क्या साहब?” उसने बड़ी मासूमियत से पूछा। अभी भी वो मेरी बाहों में थी।
मैंने उसके कान पे पास जा कर कहा, “चुदवाएगी? एक बार अपनी मस्तानी कुंवारी चूत में लंड घुसवाएगी? देख मना मत करना। कितनी सुंदर है तू।”
यह कह कर मैंने उसे और कस कर पकड़ लिया और दाहिने हाथ से उसकी बाईं चूची को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होंठों पर, और हर जगह पर चूमने लगा पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानो सख्त संतरे। दबाओ तो चटक-चटक जाए। उफ्फ.. मलाई थी पूरी की पूरी। मेरे हाथों में समा गई थीं.. और वो आहें भरने लगी.. आह्ह धीरे…… मुझे कुछ हो रहा.. हाई.. उसकी आवाज अब दबने लगी थी.. एक मदकता सी छा गई उसके चेहरे पर।
मैंने कहा, “रानी कैसा लग रहा है? मेरे प्यार से तुझे मज़ा आ रहा है कि नहीं?”
रानी ने जवाब दिया, “साहबजी, मैंने ये सब कभी नहीं किया। मुझे शर्म आ रही है। और मुझे डर भी लगता है।”
उखड़ी साँसों से मैंने कहा, “हाय मेरी जान रानी, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है कि नहीं? मेरा तो लंड बेताब है जानेमन। और मत तड़पा।”
“साहब जी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जाएगा तो?” और वो मुझसे और ज्यादा लिपटने लगी।
बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और साड़ी भी निकाल दी। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने उसके पूरे बदन को चूमते हुए उसका पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया..
ओह्ह.. चूत बहुत ही मुलायम थी.. और उभरी हुई थी। शायद उसकी चूत पर बाल भी थे। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और उसने गांड ऊपर करते हुए उसे निकाल दिया.. इस तरह मैंने उसके कपड़ों को उतारा। आह्ह क्या नज़ारा था.. चूत पर बाल थे लेकिन चूत एकदम गुलाबी थी।
मैंने पूछा, “यहाँ के बाल क्यों नहीं साफ करती?”
उसने कहा, “आपको अच्छे नहीं लगते तो आप साफ कर दो ना।” मैं तो खुश हो गया..
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मैं बाथरूम जा कर अपना शेविंग किट ले आया और फिर उसकी चूत और बगल में अच्छे से साबुन लगा कर उसका बाल पूरे साफ किए। फिर उसे अच्छे से साफ किया.. वाह.. उसकी चूत सिर्फ एक गुलाबी दरार थी.. और शेविंग ब्रश रगड़ने से उसकी चूत ने काफी जूस निकाला था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने हल्के से उसकी चूत को सहलाया और चूमा.. उसके मुँह से आह्ह.. ओह्ह.. हाई.. की आवाज निकली.. और वो मचल गई.. फिर अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला। 7.5″ लंबा मेरा लंड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देख कर उसकी आँखें बड़ी हो गईं। बोली, “बाप रे.. ये क्या है? ये तो बहुत बड़ा है.. इतना लंबा और मोटा.. साहब.. इसे मेरी उसमें डालोगे.. मैं तो मर जाऊँगी.. मैंने तो आज तक उँगली भी नहीं डाली ठीक से।”
उसका कहना सही था, उसकी चूत के होंठ एकदम चिपके हुए थे.. और इतनी गुलाबी चूत तो मेरी बीवी की भी नहीं थी सुहागरात में। मैं तो पागल हो गया। मेरा लंड और ज्यादा लंबा और मोटा होने लगा। मैंने उसे इशारा किया और कहा, “पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया।
उसके बदन को पहली बार नंगा देख कर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसे मस्त थे कि पूछो मत। चूत मैंने सहलाई.. बाल साफ करने के बाद चूत एकदम ऐश्वर्या राय की चूत जैसी लग रही थी (ये मेरा सोचना था)। मेरे हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ ही गए।
और चूत के होंठ थोड़ा खोला तो उसकी चूत का दाना दिखा जिसे मैंने हल्के से अँगूठे से दबाया और फिर उसकी चूत से निकलते हुए जूस को दाने पर मलते हुए रगड़ने लगा.. आह्ह.. हाई.. माँ.. बहुत अच्छा लग रहा है साहब… और करो.. क्या गरम चूत थी। उँगली आहिस्ता से अंदर घुसाई।
रस बह रहा था और उसकी चूत गीली हो गई थी। गुलाबी-गुलाबी चूत को उँगलियों से अलग किया, मैंने उसकी चूत को चूमा। फिर चूत के खुले होंठ से मैंने अपनी जीभ अंदर डाल दी… आह्हh.. ये क्या कर रहे हो साहब.. ओह माँ.. मेरा क्या निकल रहा है.. मैं बाथरूम जाऊँगी..
मैं समझ गया वो पहली बार झड़ रही है। वो मचलती रही। मैंने उसकी चूत के लाल छेद को देखा और मुझे उसकी चूत का सील भी दिखा.. मैं उसका दाना और उसकी जाँघ से चूत पूरी मेरी जीभ से चाटने लगा.. मेरा एक हाथ ऊपर उसकी चूँचियों पर था..
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5-7 मिनट में वो चिल्लाने लगी.. साहााब्ब.. मेरी चूत.. और उसने मेरे चेहरे से चूत को एकदम चिपकाया और.. ओह.. उसकी चूत से उसकी जिंदगी में पहली बार झड़ने वाला पानी बाहर निकल आया.. क्या फोर्स था उसकी जूस का.. और पहली झड़ी का पानी… मज़ा आ गया.. नमकीन कुछ मीठा..
मैं तो जीभ से चाटने लगा.. स्लुर्रूप.. स्लुर्रूप.. और उसकी चूत को बहुत चाटा.. फिर मैं उठ कर उसकी चूची और निप्पल पर आया.. और उन्हें पूरा मुँह में भर कर चूसने लगा.. निप्पल को भी और फिर से हाथ उसकी चूत के दाने में लगाया.. चूत गीली थी.. करीब 7 मिनट बाद वो फिर से गरम हो गई थी.. और कहने लगी.. “साब्ब.. अब बर्दाश्त नहीं होता.. अपना अंदर डालो.. मैं अब नहीं रुक सकती.. मेरी चूत में चिंटियाँ चल रही हैं.. आह्ह.”
मैंने कहा, “रानी.. अब मैं तेरी चूत की सील तोड़ूँगा.. थोड़ा दर्द होगा.. मेरे लिए बर्दाश्त करना।” और मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया।
“आह्हh साहााब्ब.. अब क्यों तरसा रहे हो.. मेरे बदन में आग लग गई है.. मैं मर जाऊँगी…” मैंने कुछ कहा नहीं और मेरी बीवी के ड्रेसिंग टेबल से वैसीलीन ले कर उसकी चूत के छेद में अच्छे से लगाया और मेरे लंड के सुपाड़े पर भी लगाया और चूत के छेद पर टिका कर आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूँचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होंठों को मैं चूस रहा था।
“आह, साहबजी, आहिस्ता, लग रहा है।”
“रानी मज़ा आ रहा है?”
“साहबजी, जल्दी करिए ना जो भी करना है।”
“हाय मेरी जान, बोल क्या करूँ?”
“डालिए ना। कुछ करिए ना।”
“रानी, बोल क्या करूँ।” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया।
“अपना ये डाल दीजिए।”
“बोल ना, कहाँ डालूँ मेरी जान, क्या डालूँ।”
“आप ही बोलिए ना साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।”
“अच्छा, ये मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी गुलाबी चूत में घुसेड़ दूँ।”
“हाँ” उसने कहा और मैंने धक्का दिया.. अरे.. मर गई.. ये क्या कर दिया। साहााब.. आह्ह.. निकालो.. मैंने उसकी एक न सुनी और उसका कस के पकड़ा और दूसरा धक्का दिया.. और आधा लंड चूत के अंदर और उसकी सील टूट गई। चूत ने खून उगल दिया.. “आह्हh मर गई.. मेरी फट गई.. साहब.. छोड़ दो मुझे..”
वो छूटने की कोशिश कर रही थी.. मैंने उसे दबोच रखा था। उसकी आँखों से आँसू निकल आए थे.. मैं उसे चूमने लगा.. चूची चाटी.. बहुत प्यार किया.. उसकी चूत से निकले खून से मैं समझ गया.. अब कोई दिक्कत नहीं है.. लेकिन उसकी टाइट नई चूत थी इसलिए थोड़ा रुक गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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मैंने उससे कहा, “और अब ये तुझे चोदेगा।”
“चोदिए ना, साहबजी।”
उसके मुँह से सुन कर तो लंड और भी मस्त हो गया।
“हाय रानी, क्या चूत है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहाँ छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।”
“साहबजी, आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। कितना मजबूत है.. एकदम कड़क.. कितना मोटा है.. मेरी चूत एकदम टाइट हो गई.. आपका लंड फँस गया है.. अब देर मत कीजिए.. बस चोद दीजिए जल्दी से।”
और उसने अपने चूतड़ ऊपर कर लिए। अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल-उछल कर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदता ही रहूँ इस प्यारी-प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से उसके गुलाबी गीली गरम-गरम चूत को चोद रहा था।
“हाय, रानी चुद रही है ना। बोल मेरी जान, बोल।”
“हाँ साहब, चुद रही हूँ। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, ये मेरी चूत आपके लंड के लिए ही बनी है। है ना साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइए। साहब, ओह्ह, मज़ा आ गया, ओह्ह…”
और अब वो तीसरी बार झड़ने के करीब थी.. इसके पहले वो दर्द में झड़ी थी, इस बार उसे दर्द नहीं था… और ज़ोर से चोदो.. हाई.. क्या लंड है आपका… मेमसाब के तो मजे हैं।
मैंने कहा, “रानी अब तेरे लिए ही है ये लंड”..
और मेरी स्पीड बहुत तेज हो गई.. मेरा लंड उसकी बच्चेदानी की गहराई तक जा रहा था.. मैंने कुछ धक्के लगाए और कहा.. “रानी.. मेरा निकलने वाला है..” कहते हुए पूरा लंड जड़ तक ठूँस दिया और फिर गरम-गरम पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी.. पूरी चूत भर गई..
पहली बार चूत में किसी मर्द का क्रीम भरा था.. इसलिए वो फिर से एक बार झड़ गई और मुझे कस के जकड़ लिया। हम दोनों साथ-साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी-प्यारी नरम गुदगुदी चूत में भर दिया। हाय क्या चूत थी। क्या लड़की थी। गरम-गरम हलवा। नहीं उससे भी ज्यादा टेस्टी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने पूछा, “रानी, तेरा महीना कब हुआ था री?”
शर्माते हुए बोली, “परसों ही खत्म हुआ। आप बड़े वो हैं। ये भी कोई पूछता है।”
बाहों में भर कर होंठों को चूमते, चूँचियों को दबाते हुए मैंने कहा, “मेरी जान, चुदवाते-चुदवाते सब सीख जाएगी।” एकदम सेफ था। प्रेग्नेंट होने का कोई चांस नहीं था अभी। दोस्तों, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूँचियों को तो मसल-मसल कर और चूस-चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने।
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जाने फिर कब मौका मिले। आज इसकी चूत चूस ही लो। चूत का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होंठों को खा ही लिया। “ये मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तेरी चूत में मेरा लंड – इसी को चुदाई कहते हैं रानी। कहाँ छुपा रखा था ये चूत जान।” कहते हुए मैं बस चोद ही रहा था और मज़ा लूट रहा था। “चोद दीजिए साहबजी, चोद दीजिए। मेरी चूत को चोद दीजिए।” कह-कह कर चुदवा रही थी मेरी रानी।
दोस्तों। चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा। दबोचते हुए मैंने कहा, “रानी, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी चूत का दीवाना है ये लंड। मालामाल कर दूँगा जानेमन।” यह कह कर मैंने उसे 500 रुपये दिए और चूमते हुए मसलते हुए रुखसत किया। उसे मैंने फिर बहुत चोदा। घर में नहीं, उसे मैं होटल में ले जाता था। क्योंकि वो इतनी खूबसूरत थी कि कोई कह नहीं सकता था कि ये नौकरानी है.. बाद में उसे ब्रा और पैंटी भी खरीद कर दी और मेरी बीवी से ज्यादा सेक्सी लगती है वो.. मैं आज भी उसे चोदता हूँ।
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