Dadi Pota Sexy Chudai Kahani
ये कहानी 6 साल पुरानी है जब मैं 2020 में पुणे की एक छोटी सी कंपनी में काम करता था। जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा, तो शुरू के कुछ महीने तो मुझे पूरी तनख्वा मिली, और मैं खुद को काफी खुशकिस्मत मान रहा था। लेकिन जब परिस्थिति और बिगड़ी, मेरे कंपनी में से काफी लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया। Dadi Pota Sexy Chudai Kahani
परिस्थिति ऐसी थी कि कहीं और नौकरी मिलना भी असंभव सा ही था। एक महीने तो किसी तरह पुणे में ही निकले, लेकिन अब पैसे की दिक्कत महसूस होने लगी। मैंने घर पर बात कर के निर्णय लिया कि अपने घर, अपने प्रदेश वापस जाकर माता-पिता के साथ रहूं, और जब परिस्थिति ठीक हो, तो वापस आने का सोचूंगा।
जिस दिन मेरी लखनऊ के लिए फ्लाइट थी, उसी दिन मेरे पिता जी का फ़ोन आया कि वो और माँ, दोनों कोरोना पॉजिटिव थे, और हमारा मोहल्ला कन्टेनमेंट ज़ोन बना दिया गया था। उन्होंने मुझे कहा कि मैं एयरपोर्ट पर उतर कर सीतापुर के लिए निकल जाऊं अपनी दादी के पास। लखनऊ से सीतापुर 50 किलोमीटर दूर है। और मेरा गांव वहां से और 10 किलोमीटर अंदर है।
गांव में वैसे भी लोग इन चीज़ों को तवज्जो कम देते हैं, क्यूंकि अगर वो हर दिन कमाएंगे नहीं तो खाएंगे क्या। मैंने गांव में देखा सख्ती थोड़ी कम थी, और बहुत कम ही लोग मास्क लगा कर घूम रहे थे। मैं पहुँच गया अपनी दादी के घर। दादी को मैं 3 साल बाद मिल रहा था। दादी घर पर अकेली ही रहती थी क्यूंकि दादा जी को गुज़रे कई साल हो गए थे, और पापा और दोनों बुआ शहर में रहने लगे थे।
दादी के साथ गांव की एक लड़की रहती थी जो दादी की सेवा करती थी, और खेत में भी दादी का हाथ बंटा देती थी। जब मैं दादी से मिला, मैं उन्हें देखता ही रह गया। दादी एक पतली की साड़ी पहने हुए थी, और बिल्कुल एक हलके कपड़े का ब्लाउज जिससे उनके दूध का आकार स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
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उनका पेट बिल्कुल सपाट था और गांड बिल्कुल उभरी हुई थी। उनके इस मदमस्त बदन का राज़ ये था कि दादी बिल्कुल जवानी से ही खेतों में काम कर रही थी, और दादा जी के जाने के बाद उनका काम और ज़्यादा बढ़ गया था। जिस वजह से उनपे बुढ़ापा अभी भी नहीं चढ़ा था।
दादी की शादी 18 साल की उम्र में ही हो गयी थी और उनका पहला बच्चा 19 में। अभी वो 61 साल की थी लेकिन देखने में मेरी माँ की बहन लगती थी। 38-40 की ही लगती थी और पूरे बदन में झुर्रियां तो थी ही नहीं। मेरी दादी का बिल्कुल कसा हुआ बदन था जिसको देख कर किसी का भी लौड़ा खड़ा हो जाएगा।
दादी के घर पे कोई कमी नहीं थी, समय से खाना, अपने ही घर का मुर्गा, मटन, अपने ही तालाब से मछली, कुछ ज़्यादा ही ऐश से भरी ज़िन्दगी थी। दादी भी मेरे लिए कोई कमी नहीं छोड़ती थी। हर सुबह दूध, घर का ही घी वगैरह। कुछ दिन मैं भी उन्हें शहर के कुछ व्यंजन बना कर खिलाता। शुरू के 10-12 दिन काफी बढिया कटे, पर फिर मैं बोर होने लगा।
कभी कभी मैं अपने कमरे में अकेला बैठ कर हमारी वासना पर कहानियां पढ़ता, कभी कभी पोर्न देख कर अपना लौड़ा हिलाता। और इन सब के वजह से मेरे लौड़े को अब चूत की भूख लगने लगी। मैं सुबह-सुबह खेतों की तरफ सैर पर निकल जाता, इस फिराक में कि तालाब के पास कोई भाभी, चाची नहाते हुए दिख जाए तो पटा कर चोद दूंगा।
पर कोरोना के वजह से कोई ज़्यादा निकलता नहीं था। कभी-कभी मन करता दादी की सेवा करने वाली लड़की को पेल दूं, पर डर था कि कही दादी को पता ना चल जाए। एक रात, हम खाना खा कर अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। मुझे वैसे भी रात में जल्दी नींद नहीं आती है, और आज ना किसी दोस्त से बात हो पायी, ना कोई गेम खेलने का मन था।
तो मैं पोर्न चला कर देखने लगा। मुझे लगा दादी और वो लड़की सो गयी होंगी, और क्यूंकि मेरा कमरा उनके कमरों से ज़रा दूर था, मैंने सोचा कि बिना ईयरफ़ोन्स के ही धीमे आवाज़ में देख लेता हूँ, किसी को कुछ सुनाई नहीं देगा। मैं मस्त होकर देख रहा था और पयजामे में से अपना लौड़ा निकाल कर लौड़े को हिला रहा था, कि इतने में अचानक दादी की आवाज़ आयी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दादी: का देख रहे हो बऊवा?
मैं: कुछ नहीं दादी। एक फिल्म देख रहा था।
दादी: आजकल ई वाला फिल्म बहुत देख रहे हो, का बात है?
दादी के आवाज़ में एक नटखटपन था, और मैंने देखा वो धीरे-धीरे मेरे पास आ रही थी। मैं थोड़ा सा सहम गया और बहाने बनाने लगा, और जल्दी से अपने लौड़े को अंदर छुपाने लगा।
मैं: अरे नहीं-नहीं, दादी। ऐसा कुछ नहीं है। वो तो अंग्रेजी फिल्म में एक दो सीन आ जाते है।
दादी: अरे बऊवा। तुम्हरी दादी गांव में रहती है लेकिन बच्ची थोड़ी है। हम रोज़ देखते है जब तुम अपना नुन्नू हिला कर अपना रस निकालते हो। रोज़ तुम्हरे पयजामे और चादर में सफ़ेद दाग देखते हैं हम। तुम्हरा उम्र में तो तुम्हरे दादा और बाप, दोनों बाप बन गए थे। तुम्हरा भी जरूर मन करता होगा औरत पेलने का।
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मैं दादी के मुंह से ऐसी बातें सुन कर शर्मा रहा था।
मैं: नहीं दादी। ऐसा कुछ नहीं है।
दादी: अरे मेरा मुन्ना, यही तो उम्र है चोदम-चुदाई करने की। अब नहीं करेगा तो बुढ़ापे में करेगा? कोनो लड़की को किये हो की नहीं?
मेरी एक गर्लफ्रेंड तो थी, पर उसकी कभी चुदाई नहीं की थी मैंने।
मैं: नहीं दादी, कभी मौका नहीं मिला। कोई ऐसी लड़की मिली भी नहीं।
इतने में दादी मेरे बिल्कुल बगल में बिस्तर पर बैठ गयी, अपने हाथों को पयजामे के ऊपर से मेरे लौड़े को सहलाने लगी। मेरा लौड़ा जो वैसे भी ना झड़ने के कारण टाइट ही हुआ था, और ज़्यादा टाइट और खड़ा हो गया।
दादी: कोनो बात नहीं। तुम्हरी दादी तुम्हरी अच्छे से सेवा करेगी। आखिर हमरा लाल जो हो।
दादी अपने सर को बिल्कुल आगे ले आकर मेरे होंठों को चूमने लगी। मैं भी पूरा गरम था इसीलिए बिना कुछ सोचें उनका साथ देने लगा और हम दोनों एक-दूसरे को चूमे जा रहे थे। इतने में मैंने महसूस किया कि दादी का एक हाथ मेरे पयजामे के अंदर घुस रहा था, और उन्होंने मेरे लौड़े को पकड़ कर पयजामे से बाहर कर दिया।
दादी: अरे माई रे। बउवा, ई तो बहुते बड़का लौड़ा है। और तुम अभी तक इसको इस्तेमाल नहीं किये हो?
मैं शर्माते हुए बोला: नहीं दादी, किसी लड़की को इतना बड़ा दिखाएंगे तो डर जायेगी।
दादी: चूतिया होगी उ लड़की। तुम्हरा ई मशाल से तो अच्छा-अच्छा चूत का आग बुझ जाएगा। इतना बड़का लौड़ा बहुत ज़माना बाद पकड़ रहे हैं।
और यह कह कर मेरी प्यारी दादी मेरे लौड़े को अपने मुंह में लेकर अंदर-बाहर करके चूसने लगी। मुझे गज़ब का मज़ा आने लगा।
दोस्तों, मेरा लौड़ा 9 इंच लम्बा और 3.5 इंच मोटा है। ये मैं कोई घमंड से या फिर दिखावे के लिए नहीं बता रहा। सुनने में चाहे जितना अच्छा लगे, ये संभालने में बहुत मुश्किल होती है। इतने बड़े लौड़े के साथ मुझे जीन्स और फॉर्मल पैंट पहनने में काफी तकलीफ होती है। और अगर किसी कारण लौड़ा टाइट हो जाए, तो मेरा बुरा हाल हो जाता है।
मैं: आह दादी, क्या मस्त लौड़ा चुस्ती हो। बहुत मज़ा आ रहा है।
दादी: अरे, मेरा लाल, तुम्हरी दादी को तुम अभी पहचाने कहां हो।
और ये कह कर दादी और ज़ोर-ज़ोर से लौड़ा चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं दादी के बालों को पकड़ कर उनका चेहरा अपने लौड़े पे दबा रहा था, और दादी गौ गौ गौ गौ करके मेरा पूरा लौड़ा चूसे जा रही थी। मेरे लौड़े पे अपनी जीभ घुमा-घुमा कर चूसती, फिर अपने मुंह से मेरे लौड़े को बाहर कर मेरे सुपाड़े को चूमती, उसके छेंद पे जीभ से चाटती और फिर पूरा लौड़ा अपने मुंह में लेकर अंदर बाहर करती।
करीब पंद्रह मिनट लौड़ा चुसाई का सिलसिला चलता रहा, और फिर मैं झड़ गया, और सारा रस दादी के मुंह में ही निकल गया। मुझे लगा था दादी को अजीब लगेगा, पर मेरी सोच के विपरीत वो पूरा रस मज़े से पी गयी और जो कुछ बूंदे इधर-इधर गिर गई थी, वो भी चाट कर पी गयी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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दादी: आह रे मुन्ना, बहुत मजा आया रे, मेरे लाल। बहुत दिन बाद मूठ पिए है किसी का। बहुत मीठा है तुम्हारा मुठ, बऊवा। पर रुको, आज तो पूरी रात तुमको खेलना है, ई पंद्रह मिनट से काम नहीं चलेगा।
और दादी उठ कर रूम से बाहर चली गयी। और मैं वहीं अपना लौड़ा निकाल कर पड़ा रहा। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मेरी अपनी दादी मेरा लौड़ा चूस रही थी। पर सच में, बहुत मज़ा आया। 5 मिनट बाद दादी दूध का एक ग्लास लेकर आयी और मुझे पीने को कहा।
दादी: ई ले बऊवा, पी ले, इसमें तुम्हरी दादी का विशेष जड़ी-बूटी मिलाएं हैं। आज पूरा रात तुम्हरा गाड़ी चलेगा।
मैंने पूरी ग्लास एक बार में ख़तम कर दिया। दादी मेरे हाथों से ग्लास लेकर टेबल पर रख दिया, और अब मेरे पास आ गयी। मेरे हाथों को पकड़ कर अपने दोनों दूध पर रख दिया और दबवाने लगी।
दादी: ए मुन्ना, थोड़ा जोर-जोर से दूधिया मसलो। अब थोड़ा हमरा भी सेवा करो। सब सेवा तुम्हें लेगा? अपनी दादी की सेवा नहीं करेगा?
मैं: अरे दादी, आप हुकुम तो करो।
अब धीरे-धीरे दूध का असर दिखने लगा। पता नहीं उसमे क्या था, पर अब मुझे बहुत गर्मी लगने लगी। मैंने अपने पूरे कपड़े उतार कर फ़ेंक दिए, और दादी को अपनी तरफ खींच कर उनकी साड़ी हटा दी। उफ़, इस बुढ़िया की पतली कसी हुयी कमर क्या कहर ढा रही थी। मैंने जल्दी से दादी का पतले कपड़े का ब्लाउज फाड़ दिया। उनके गोल सुडौल दूध लपक के बहार आ गए।
गांव में रहने के कारण दूध-दही की कोई कमी नहीं थी। इसीलिए दादी भी पूरी की पूरी दूधिया मालदार आम थी। उनका दूध बिल्कुल आम के जैसा टाइट था, और उनके निप्पल बिल्कुल काले अंगूर जैसे मोटे और गाढ़े। मैंने एक पल भी और इंतज़ार करना बेवकूफी समझी, और दादी की कमर को पकड़ कर अपने और करीब खींच लिया और सीधे उनके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। दादी कराहने लगी।
दादी: आह रे, मेरा राजा। मेरी जान। चूस बेटा, बहुत दिन कोई हमरा दूधिया चूसा नहीं है। बहुत खुजली मचती है दुधवा में। और मसल मुन्ना, और जोर से चूसो।
दादी जितना बोल-बोल कर आहें भर रही थी, मैं और ज़ोर-ज़ोर से उनके दूध को चूस रहा था, मसल रहा था। इसी बीच दादी अपने हाथों से मेरे लौड़े को लेकर खेल रही थी। मेरे सुपाड़े को उंगलियों से दबा रही थी, ऊपर के चमड़े को नीचे खींच रही थी। मुझे हल्का दर्द हो रहा था, पर काफी मज़ा आ रहा था।
दादी थी बिल्कुल डीज़ल इंजन। गरम होने में टाइम लगता है, पर एक बार गरम हो जाए तो फिर सरपट दौड़ता है। अब दादी बिल्कुल गरम और जंगली होने लगी। उनकी आहें और कराहटें ज़ोर-ज़ोर से होने लगी। मुझे लगा आवाज़ कुछ ज़्यादा ही हो रही थी, तो मैंने दादी से कहा-
मैं: दादी, गेटवा लगा दें का? नहीं तो तुम्हरा आवाज मैना सुन लेगी, फिर बात बढ़ेगी।
दादी मैना का नाम सुन कर हंसने लगी, और अचनाक से चिल्लाई-
दादी: ए रिंकिया, इधर सुन, भैया तुमको बुला रहे हैं।
मैं डर गया। मैना दरवाज़े के पास ही खड़ी थी और वो शर्माते हुए अंदर आ गयी। मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था।
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दादी: मैना तो एक नंबर की रांड है। जब से तुम आया है, तब ए से तुम्हरा लौड़ा लेने के लिए मरे जा रही है। तुम जो रोज चादर और पयजामा में मुठ निकालते हो, धोने से पहले रोज सूंघती है। इसको भी खुश करना है तुमको। लेकिन अभी नहीं।
इतने में दादी मैना के तरफ पलट कर बोली,
दादी: रिंकिया, तू आज जा के सुतो। आज हम अपना पोतवा का सेवा करेंगे। सबसे पहला हक़ हमरा है। तुम कल से करना। कल चोद देंगे तुमको भैया।
मैना: जी, दादी जी।
मैना बड़े ही शिष्टतापूर्वक वहां से चली गयी।
अब किसी और चीज़ का डर नहीं था। अब तो खुल कर दादी और मैं चोदम-पट्टी कर सकते हैं।
दादी: बऊवा, अब तू हमरा भोंसड़ा चाट के पानी निकाल दो, जैसे हम तुम्हरे लौड़े से पानी निकाले।
और दादी बिस्तर पर लेट कर अपनी टाँगे खोल कर मेरे सामने परोस दी और मेरे हाथ को पकड़ कर बिस्तर पे खींच लिया। मेरे माथे को पकड़ कर उन्होंने अपने चूत पर सेट कर लिया। और मैं अपने जीभ से उनके चूत को चाटने लगा। एक भीनी और मादक सी खुशबु उनकी चूत से आ रही थी जो मुझे मदहोश कर रही थी। मैं जब उनकी चूत को चाट रहा था, तो वो मेरे बालों को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से खींच रही थी और चिल्ला रही थी।
दादी: हाय रे मेरा मुन्ना, मेरा बऊवा। पानी निकाल दो हमरा राजा। अपना दादी का भोंसड़ा को आचार जैसा चाटो बेटा। अपना जीभ और घुमाओ बेटा। अंदर तक घुसाओ, मेरे राजा। अंदर तक जीभ से चोदो हमको।
मैं काफी देर तक उनके चूत को चाटता और चूसता रहा। दादी और गरम होते जा रही थी और ज़ोर-ज़ोर से आहें भर रही थी।
दादी: आह रे, आह आह ओह मेरा मुन्ना, मेरा पोता, चूस बेटा, अपना दादी का भोंसड़ा का पानी निकाल दे पूरा। ऊंगली दे देकर चाट बऊवा।
अब मुझे एहसास हुआ कि मुझे अब कंट्रोल ले लेना चाहिए। मेरा लौड़ा फूल कर बिल्कुल लौकी जैसा हो गया था। अब मेरे लौड़े को चूत की ज़रूरत पड़ने लगी। मेरे अंदर का असली मर्द जागने लगा। अब सामने अपनी दादी हो या माँ, एक चुदासी औरत थी और मैं एक मर्द। मैंने दादी का चूत चूसना छोड़ा और उन्हें उठा कर अपना लौड़ा उनके मुंह में घुसेड़ दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं: साली बुढ़िया, शर्म है ना लाज। कैसे अपने ही पोते से अपनी चूत चुसवा रही है। ले बहन की लौड़ी, मेरा लौड़ा चूस कर साफ़ कर। मैंने देखा दादी के चेहरे पे एक अलग मुस्कान सी आ गयी। शायद वो भी चाहती थी कि अब मैं उनकी एक रंडी की तरह चुदाई करूं।
दादी मेरे लौड़े को चूसते हुए मेरे आँखों में आँखें डाल कर इशारा कर रही थी कि मैं उनके मुंह को चोदूं। और मैंने उनके मुंह में अपना लौड़ा अंदर-बाहर करना और तेज़ कर दिया। एक तो मेरा इतना बड़ा लौड़ा, दादी के मुंह से सिर्फ गौ गौ गौ गौ की आवाज़ आ रही थी, और मुंह से पूरा लार नीचे तक टपक रहा था। तेज़ी बढ़ाने के कारण उनके आँखों में आंसू थे। पर उनके चेहरे में एक हवस से भरी ख़ुशी थी। अब दादी लौड़ा चूसते-चूसते थक गयी और जैसे ही मैंने उनके मुंह से अपना लौड़ा निकाला, वो बोल पड़ी-
दादी: बउवा, अब भोंसड़ा में घुसा दे अपना मशाल। हमरा आग बुझा दे बेटा। बहुत दिन से खुजली हो रहा है। रिंकिया से चूत चंटवा के शान्ति नहीं मिलती, मुन्ना।
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मैं: पहले बोल, तू हमरी रंडी है।
दादी: हां मुन्ना, हम तुम्हरी रंडी है, बेटा।
मैं: नहीं, ठीक से बोल।
दादी: हाँ-हाँ, हमरी जान। हम तुम्हरी रंडी है। हमको चोद-चोद के मार दो बेटा। हमरा भोंसड़ा फाड़ दो बेटा।
मैं: बोल की जब तक तू ज़िंदा है, हमरी रखैल बन के रहेगी।
दादी: और मत सताओ, राजा। हमको रखैल बनाओ, छिनाल बनाओ, रांड बनाओ, कुतिया बनाओ। बस हमरा मईया चोद दो बउवा।
मैं: चल, मेरी रांड दादी, अपना चूत खोल।
मेरे कहते ही दादी ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत के द्वार को खोल कर मेरे सामने परोस के दिया। दादी की चूत बहुत ज़्यादा चुदा हुई थी इसीलिए मैंने रहम करना फ़िज़ूल समझा और सीधा अपना बड़ा सा लौड़ा उनकी चूत में दे घुसाया। दादी चीख उठी।
दादी: रे माधरचोद, सच में फाड़ दिया रे बहन का लौड़ा।
अब मैं उनको चोदने लगा। उनकी चूत में अपना लौड़ा अंदर-बाहर करने लगा और वो ज़ोर-ज़ोर से कराह रहीं थी और आहें भर-भर कर चिल्ला रहीं थी।
दादी: आह आह। और चोद बहनचोद, जोर से चोद, जोर से चोद। फाड़ दे हमरा भोंसड़ा। भोंसड़े का भोंसड़ा निकाल दे।साली भोंसड़ी बहन की लौड़ी बहुत सताती है। बहुत खुजली देती है। ओह उफ़, आह आह, और तेज़ चोद बेटा और तेज़।
जैसे-जैसे मैं दादी को चोद रहा था, उनका खूबसूरत दूध हिल रहा था। उनके दूध को देख कर मुझे लालच आ गया और चोदते हुए मैं उनके ऊपर झुक गया और उनके दाएं दूध को अपने मुंह में लेकर उनका निप्पल चूसने लगा। दादी और मदमस्त हो गयी।
दादी: बहुत मज़ा आ रहा है, मुन्ना। ऐसे ही करते रहो।
एक हाथ से वो अपने एक दूध को भींच रही थी और दूसरे हाथ को मेरे बालों पर सहला रही थी।
अब मैं इस आसन में उन्हें चोदते हुए थक गया। मैंने जैसे ही उनकी चूत से अपना लौड़ा निकाला, वो रोने लगी।
दादी: बउवा, रुक काहे गए राजा? हमको चोदो ना मुन्ना।
मैं: अरे मेरी रांड की जनि, तुमको बिना संतुष्ट करके नहीं जाएंगे मेरी रानी।
मैंने दादी को बिस्तर से खींचा और नीचे उतार दिया। अब उनके एक पैर को उठा कर बिस्तर पर रख दिया, और पीछे से उनकी चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया और चोदने लगा। मैं पीछे से धक्के मारने लगा। पूरे कमरे में थप-थप की आवाज़ गूंज रही थी और साथ में मेरी रांड दादी की आहें।
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दादी: आह आह अहा हां हां आह ओह। हाय राजा, मेरा जान, मेरा बउवा। इतना मजा बहुत दिन बाद आ रहा है बेटा। और तेज़ चोदो मेरा राजा।
खड़े-खड़े हम दोनों थक गए तो मैं फिरसे बिस्तर पर चढ़ गया और दादी को खींच कर ले आया और उन्हें कुतिया बना दिया। उनकी गांड क्या मस्त लग रही थी। इतनी मोटी गांड पे मैंने कई बार ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ मारा और दादी दर्द में चीख उठती। उनकी कसी हुए मस्त कमर को पकड़ कर मैंने उनकी चूत में फिर से अपना लौड़ा घुसा दिया और हचक कर चोदने लगा।
उनकी मोटी गांड पर मेरे शरीर के लगने से थप-थप की ज़ोर से आवाज़ हो रही थी। बीच-बीच में उनकी फूली हुई गांड को देख कर हाथ अपने आप उनकी गांड को थप्पड़ मार देता। बीच-बीच में मैं उनके बालों को अपने हाथों में लपेट कर ज़ोर-ज़ोर से खींचता और घोड़े की लगाम जैसा पकड़ कर तेज़ी से चोदता और दादी मस्ती में चिल्लाती, आहें भरती, गालियां देती। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अब मेरी पीठ दर्द करने लगी। मुझे एहसास हुआ कि मेरी प्यारी दादी की ठुकाई करते हुए डेढ़ घंटे से ऊपर हो गया था। मैं थक के चूर हो गया था, क्यूंकि ये मेरे लिए पहली बार था। मैं अभी भी झड़ा नहीं था, पता नहीं दादी ने दूध में क्या मिलाया था। मैं बिल्कुल थक कर बिस्तर पर सपाट लेट गया पर इस रांड की गर्मी अभी ख़तम कहां हुई थी, और मेरा लौड़ा भी अभी तक तना हुआ था, बिल्कुल सीधा तम्बू जैसा। मेरी प्यारी रांड आकर मेरे होंठो को चूमने लगी।
दादी: का हुआ, बउवा? थक गया का?
मैंने उनके दूध को पकड़ते हुए कहा-
मैं: साली बुढ़िया, कौन चूल्हा का गर्मी है की ख़तम ए नहीं होती?
दादी शर्मा कर हंसने लगी और फिर से चूमने लगी। मैंने उनकी गांड को उठाया और अपने खड़े लौड़े पर बैठा दिया और इशारा किया कि अब वो खुद से ही करें। दादी मेरे लौड़े के ऊपर एक छोटी बच्ची के तरह कूदने लगी और चुदवाने लगी। जब वो कूद रही थी तो उनके दूध भी ऊपर नीचे कूद रहे थे।
अब मैं बस दादी को निहारने लगा। साली बुढ़िया जब इस उम्र में इतनी कातिलाना है, तो जवानी में क्या माल रही होंगी। और जब अभी तक इतनी गर्मी है तो जवानी में तो इनकी हवस बुझाना नामुमकिन होगा। करीब 5 मिनट तक और दादी मेरे लौड़े पर कूदती रही और मैं झड़ गया।
मेरा पूरा रस दादी के चूत में ही निकल गया। दादी अभी भी मेरे लौड़े पर ही बैठी थी। जैसे ही वो उठी, उनके चूत से मेरा रस टपक कर मेरे पेट पर गिर गया। वो झट से आकर मेरे पेट से मेरा रस चाटने लगी और चाट-चाट कर पूरा रस पी गयी। हम दोनों की सांसें चढ़ी हुई थी। दादी भी अब निढाल हो कर मेरे बगल में आ कर गिर पड़ी। करीब 5 मिनट बाद जान में जान आयी, तो मैंने दादी के तरफ देख कर कहा-
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मैं: दादी, तुम हमको स्वर्ग दिखा दी। कभी नहीं सोचें थे कि सबसे पहली बार अपना ही दादी को चोदेंगे।
दादी: अरे बउवा। हमको भी बहुत ख़ुशी है की हमरा दुलारा पोता का सबसे पहली बार चुदाई हमरा से हुआ। चलो, थोड़ा नहा लो। तब नींद बहुत बढिया आएगी।
मैं और दादी एक साथ बाथरूम में नहाने लगे। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हुआ तो मैंने दादी को खींच कर उनको उनके घुटनों पर बैठा दिया और अपना लौड़ा उनके मुंह में घुसेड़ दिया। वो भी बिल्कुल एक छोटी बच्ची के तरह मेरे लौड़े को लोल्लिपॉप जैसा चूसने लगी। पर मैं अब 2 मिनट में ही झड़ गया।
जो थोड़ा बहुत मुठ नाली में बचा था, वो निकल गया, टंकी पूरी खाली हो गयी। नहाने के बाद मैं और दादी नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। अगले दिन से एक नई दिनचर्या बन गई हमारी। अगले दिन दोपहर में मैंने मैना को भी चोदा। जवान है इसलिए चूत बहुत कसा हुआ था।
और मेरा बड़ा से लौड़ा लेने के वजह से उसकी सांसें अटक गयी थी। पर फिर एकदम रंडी जैसा चुदने लगी। शाम में मैना को ठोकते थे और रात की हकदार तो सिर्फ मेरी प्यारी दादी थी। अगली रात मैंने दादी की पहले से ढीली गांड को और ढीला कर दिया। दादी को गांड मरवाना ज़्यादा पसंद था। मैना की गांड खोलने में ज़रा परेशानी हुई।
मैं दादी के पास सीतापुर में लगभग 6 महीने रहा और ऐसा कोई दिन नहीं गया जिस दिन मैंने दादी को और मैना को नहीं चोदा होगा। कई बार दादी और मैना को एक साथ चोदा। कभी-कभी मैना का बड़ा भाई आ जाता तो चारों मिल कर चुदाई करते। कई बार तो मैना और दादी बारी-बारी कर एक बार में दो लौड़े से चुदी हैं। एक लौड़ा चूत में, दूसरी गांड में।
सुबह, दादी और मैना, दोनों घर का काम करके खेतों में चले जाते थे। तो मैंने दादी से इच्छा ज़ाहिर की कि गांव कि कुछ और माल के चुदाई का इंतज़ाम करें। और दादी अपने पोते से इतना प्यार करती थी कि किसी भी फरमाईश को मना नहीं करती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उन्होंने दिन के समय के लिए गांव की कुछ भाभियों का और कुछ जवान लड़कियों का इंतज़ाम करवा दिया जिन्हे मैं चोदता था। मेरे दादा जी जब ज़िंदा थे तो गांव के मुखिया थे और दादी की भी सब इज़्ज़त करते थे। और गांव की सारी औरतें दादी के पास मदद वगैरह के लिए आती रहती थी।
तो दादी को कोई मना नहीं करता था। पर जो मज़ा दादी को पेलने में आता था, वो किसी में नहीं था। दादी बिल्कुल बेहुदी होकर चुदती थी। ऐसा लगता था कि पैसे के लिए अपने मालिक को खुश कर रही थी। 6 महीने में मैंने दादी और मैना को मिला कर कुल 8 औरतों को चोदा।
लेकिन दादी के बाद जिसको चोदने में सबसे ज़्यादा मज़ा आया, वो थी मौजूदा सरपंच कि बीवी। अभी का सरपंच जवान और पढ़ा-लिखा, और कम उम्र का लड़का था, जिसकी हाल ही में शादी हुयी थी। हमारे खेतो में पानी का लाइन पास कराने के लिए दादी बहुत दिनों से उसके पास अर्ज़ी दे रही थी, पर वो अनसुना कर देता था।
एक दिन हम गांव के बाजार गए थे तो एक बला की खूबसूरत, बिल्कुल जवान और किसी सिनेमा की हीरोइन जैसे एक लड़की को देखा। जब मैंने दादी से पूछा तो पता चला की यही थी सरपंच की शहरी बीवी, मेनका। मेनका पे मेरा दिल आ गया। जब मैंने दादी से उसको सेट करने के लिए बोला तो दादी ने कहा-
दादी: बउवा। तू गांव की जो लड़की को बोलेगा, उसको चुदवा देंगे, सरपंच की माई तक को चुदवा देंगे, लेकिन उसकी मेहरारू बिल्कुल असंभव है।
पर असंभव को संभव करने का एक अलग ही मज़ा है। और दादी के साथ 6 महीने रह कर उनके भी कई राज़ खुले, कैसे दादा जी अपने दोस्तों के साथ दादी को एक साथ चोदते थे। दादा जी के जाने के बाद कितने मर्दों से दादी ने चुदाई करवाई। दादी की चूत सबसे पहले किसने चोदी थी, और एक बार में दादी ने कितने लौड़े लिए है।
दादी के मनोहर कहानियों से ये साफ़ था की मेरी प्यारी दादी शुरू से ही एक नंबर की रंडी थी, पर दिल की बहुत साफ़ थी। मुझे तो लखनऊ जाने का मन ही नहीं करता था। हर बार मां-पापा को बहाने दे देता था की अभी यहां स्थिति ख़राब है, यहां निकलने नहीं दे रहे।
ऐसे बहाने करते-करते मैंने 6 महीने सीतापुर में अपनी दादी को ठोकते हुए गुज़ार दिए। फिर भी मन नहीं भरा था। उसके बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी। सीतापुर तो बाइक से भी आराम से जाया जा सकता है तो मैं किसी ना किसी बहाने से हर शनिवार-इतवार को सीतापुर चला जाता था.
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और दिन-रात दादी और मैना की ठुकाई करता था। कुछ महीनों बाद फिर से पुणे के एक कंपनी में मुझे नौकरी मिल गयी थी, और इस बार अच्छी तनख्वाह के साथ। तो मैंने एक फ्लैट रेंट पे ले लिया। मैंने एक महीने के लिए दादी को अपने पास बुला लिया। उन्होंने कभी अकेले सफर नहीं किया था इतना दूर, तो ज़ाहिर सी बात है की मैना भी साथ आयी। पापा-मां ने उन्हें लखनऊ में ट्रैन में बैठा दिया और मैंने उन्हें पुणे स्टेशन में उतार लिया।
फिर दोनों को पुणे घुमाया, वहां का रहन-सहन, कपड़े, खाने का अंदाज़ उन्हें सिखाया। मेरी बुढ़िया रांड को मस्त-मस्त कुछ ब्रा-पैंटी और छोटे-छोटे कपड़े खरीद के दिया, जिसे वो पुणे में पहन सके। दादी शुरू के एक-दो दिन शर्माती थी, क्यूंकि उनके लिए पूरा माहौल ही नया था और भाषा भी अलग, पर फिर धीरे-धीरे घुल गयी। मैं शाम में जल्दी ही ऑफिस से जाता, फिर हम लोग घूमने-फिरने जाते, फिर रात में आकर बिस्तर गरम करके चोदम-चुदाई करते।
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