Kamuk Bap Beti Chudai
हेल्लो फ्रेंड्स, मैं प्रतीक्षा आप सभी का फिर स्वागत करती हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग बाप बेटी ने मर्यादा की सीमाएँ लांघी 2 पढ़ा होगा. आपने पढ़ा था की पापा अब खुल कर मेरे जिस्म का मजा लेने लगे थे. और रात में मेरे रूम में आकर मेरी चूत सहलाते थे और मेरे ऊपर मुठ मार कर गिराते थे. और मैं भी पापा को पूरा मजा लेने देती थी अपनी चूत का. अब आगे- Kamuk Bap Beti Chudai
इससे पापा की हिम्मत थोड़ी बढ़ी और अब वे धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों को जांघों पर घुटनों की तरफ से ऊपर की और सरकाते हुए ले आए और जांघों के ऊपरी हिस्से सहलाने लगे।
पापा बोले- “काश, तुम मेरे साथ हमेशा इसी तरह घर में ही रहती और रोज मैं तुम्हें इस तरह अपनी गोद में बैठाता!”
बात करते हुए मैं अपनी गांड को पापा के लण्ड पर हल्का-हल्का रगड़ती जा रही थी। वहीं पापा भी अपने लण्ड को मेरी गांड पर दबाए हल्का-हल्का अपनी कमर को हिला रहे थे। हम आपस में बातें भी कर रहे थे।
तभी पापा बोले- “बेटा, थोड़ा एक मिनट के लिए उठोगी तो मैं थोड़ा पैर ठीक कर लूँ फिर आराम से ठीक से गोद में बैठ जाना।”
मैंने ‘ठीक है’ बोलकर अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दिया. तो पापा अपने पैरों को थोड़ा फैलाया और फिर ऐसा लगा जैसे मेरी स्कर्ट को पीछे से कुछ किए।
उसके बाद मुझसे बोले- “हाँ अब बैठ जाओ बेटा!”
मैंने अब खुद ही अपना मुंह पापा की ओर कर लिया था. ताकि पापा को देखती भी रहूं। जैसे ही मैं वापस उनकी गोद में बैठी मैं समझ गयी पापा ने क्या किया है। दरअसल पापा ने अपने लंड को एडजस्ट कर ठीक मेरी गांड के नीचे कर लिया था अब पापा के लण्ड का गर्म गर्म सुपाड़ा ठीक मेरी गांड के छेद पर था.
हमारी कामुक बातचीत से पापा की हिम्मत और बढ़ गयी थी जिससे अब वह मेरी जांघ सहलाना छोड़कर मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और बैठे-बैठे ही अपनी कमर को हल्का-हल्का हिलाते हुए अपने लण्ड को मेरी गांड पर रगड़ने लगे।
पापा ने बात करना बंद कर दिया था और उनके मुंह से धीमी-धीमी सिसकारी निकल रही थी। मेरा भी मन अब बात करने में कम था और सारा ध्यान अपनी जांघों के बीच पनियायी चूत पर आ गया था जिसकी खुजली अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी।
मैं भी हल्का-हल्का कमर हिलाते हुए उनका साथ दे रही थी। हम दोनों एकदम चुप थे बस हमारे शरीर हिल रहे थे। अब पापा और मैं खुल कर गांड पर लण्ड रगड़ रहे थे. हम दोनों की साँसे बहुत तेज चल रही थी, पर चाहे पोर्न कहानियों में कितना ही लिखा जाये, पर असल मैं और भारतीय समाज में बाप बेटी के बीच के सामाजिक सम्बन्धों और बंधनों का टूटना इतना आसान नहीं है.
मैं पापा की गोद में उनके लौड़े पर अपनी गांड घिसने की कोशिश कर रही थी और उधर पापा भी अपना नंगा लौड़ा मेरी गांड पर रगड़ रहे थे पर फिर भी वो तेजी और वो रगड़ाई नहीं हो पा रही थी, मैं तेज तेज और ज्यादा मजा लेना चाहती थी.
अब हम दोनों बाप बेटी जान तो रहे ही थे कि हम क्या कर रहे हैं, बस आपसी सम्बन्धो का ही बंधन था. पापा का लण्ड पाजामे और उनकी अंडरवियर के बीच था और मैंने भी कच्छी पहनी हुई थी. चाहे पापा ने स्कर्ट पीछे से ऊपर उठा दी थी पर फिर भी इतने कपड़ों के कारण हमें लण्ड चूत रगड़ाई का वो मजा नहीं आ रहा था.
पापा बहाने से बोले- “प्रतीक्षा! मुझे पेशाब आया है. जरा उठना मैं पेशाब करके आता हूँ.”
इसे भी पढ़े – झांट छिल कर पेलवाया खाला की बेटी ने
पापा बाथरूम में गए और थोड़ी देर बाद आ कर बैठ गए. जब में दुबारा उनकी गोद में बैठी तो मुझे उनकी शरारत का पता चला. असल में बाथरूम में जा कर पापा ने अपनी अंडरवियर निकाल दी थी. अब मेरी गांड और पापा के लौड़े में सिर्फ मेरी पैंटी और उनके पाजामे का कपडा ही था.
अब पहले से कहीं ज्यादा मजा आ रहा था.मैंने एक चाल सोची और पापा से कहा- “पापा मुझे याद है की बचपन में जब मैं आपकी गोद में बैठती थी तो आप मुझे गुदगुदी करते थे. और मैं बहुत हंसती और आपकी गोद में उछलती थी.”
पापा गोद में उछलने की बात से समझ गए कि मेरे मन में क्या है, यह उनके लिए भी एक सुनहरा मौका था. पापा मेरी बगलों में हाथ डाल कर मेरी कांखों में ऊँगली घुमाते बोले- “मुझे सब याद है प्रतीक्षा। मैं तो कब से तुम्हे उसी तरह गुदगुदी करना चाह रहा था. मैं तुम्हे गुदगुदी करता हूँ.”
असल में अभी उनका लण्ड मेरी गांड दी दरार में घिस रहा था. पापा शायद अब डायरेक्ट मेरी चूत पर हमला करना चाहते थे. मैं तो तैयार थी ही, पापा ने फिर धीरे से अपना हाथ मेरे पीछे ले जा कर मेरी स्कर्ट को पीछे से ऊपर उठा दिया था जिस से मेरी गांड फिर से नंगी हो गयी थी.
मैंने अपनी टाँगे पूरी चौड़ी कर ली ताकि मेरी चूत का मुँह पूरा खुल जाये, मुझे अपने पर बहुत गुस्सा आ रहा था की बेवकूफ तुमने आज पैंटी क्यों पहनी, यदि न पहनी होती तो आज पापा द्वारा अभी गुदगुदी के बहाने से तुम्हारी चूत का उद्घाटन समारोह हो जाता.
पर फिर मैंने सोच पर यदि मैंने कच्छी न पहनी होती तो शायद फिर पापा भी अपना लौड़ा अंडरवियर से बाहर न निकालते। खैर अब जो भी है उसी से मजा लेते हैं और कोशिश करती हूँ की पापा आज मुझे चोद ही दें.
पापा मुस्कुराते हुए बोले – “प्रतीक्षा! बोलो तो क्या मैं फिर से तुम्हे गुदगुदी करु?”
मैं हँसते से बोली “पापा आप की मर्जी है.”
पापा को इशारा मिलते ही उन्होंने मेरी बगलों में हाथ डाल कर मुझे गुदगुदाना शुरू कर दिया. मैं भी इस तरह नाटक करने लगी की जैसे मुझे बहुत गुदगुदी हो रही हो और मैंने हँसते हुए पापा की गोद में उछलना शुरू कर दिया. पापा गुदगुदी तो थोड़ी कर रहे थे पर मैं उनकी गोद में उछल ज्यादा रही थी.
असल में मैं चाह रही थी की पापा का लण्ड जो अब बहुत टाइट हो चूका था. और इस समय मेरी गांड पर रगड़ रहा था किसी तरह मेरी चूत के ऊपर आ जाये. मैं हिलने के बहाने से अपनी गांड थोड़ी पीछे कर रही थी और अपनी चूत आगे ला रही थी.
पापा भी शायद मेरी इच्छा समझ गए थे. वो भी जानते तो थे ही की लौंडिया दाना चुगना चाह रही है, उन्होंने भी कोशिश करनी शुरू कर दी की किसी तरह लौड़ा जो मेरे चूतडों के नीचे दबा पड़ा है, बाहर आ जाये ताकी वो उसे मेरी चूत पर सेट कर सकें.
पापा ने एक हाथ से गुदगुदी करते हुए दूसरा हाथ हमारी जांघों के बीच लाया, मैंने पापा को मौका देने के लिए हंसने का नाटक करते हुए अपनी आँखें बंद कर ली. और अपनी टांगों पर जोर देते हुए अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठा ली। और अपनी टांगें पुरी तरह से चौड़ी कर ली.
पापा ने तुरंत अपना लौड़ा मेरी गांड के नीचे से निकाला और मेरी चूत (जिसका मुंह अब पूरा खुल चूका था) की फांकों के बीच फंसा दिया. ज्योंही पापा के लौड़े का गर्म गर्म सुपाड़ा मेरी चूत के मुंह के बीच आया मेरे मुंह से एक जोर की आह निकल गयी. पापा के मुंह से भी उतने ही जोर की आह की आवाज़ आयी.
अब स्थिति यह थी की पापा का लौड़ा जो कि सिर्फ पाजामे के अंदर , पूरी तरह से नंगा था. मेरी पैंटी में ढकी हुई चूत के मुंह में लगा हुआ था. हम दोनों ही बाप बेटी जन्नत के साक्षात् दर्शन कर रहे थे और स्वर्गिक आनंद का अनुभव ले रहे थे.
पापा ने फिर से गुदगुदी करनी शुरू कर दी और इस बहाने से उन्होंने मेरी चूत में धक्के देने शुरू कर दिए. मुझे भी बहुत ही मजा आ रहा था. मैंने भी गुदगुदी का बहाना लेते हुए पापा के लौड़े पर अपनी चूत घिसनी शुरू कर दी. हम दोनों बाप बेटी बहुत जोश में आ चुके थे.
और पापा जोर जोर से मेरी चूत में ऐसे धक्के लगा रहे थे की यदि मैंने पैंटी न पहनी होती तो अब तक तो कभी का पापा का पूरा लण्ड उनकी बेटी की चूत में जड़ तक घुस गया होता. हम दोनों बाप बेटी गुद्गुदी कम और धक्का पेल ज्यादा कर रहे थे. हम दोनों की ही सांसे बहुत तेज चल रही थी.
मेरी चूत में पानी आ रहा था और ऐसा लग रहा था की मेरा निकलने ही वाला है, मैंने सोचा की अब जब इतना सब कुछ हो ही गया है तो शर्म कैसी? और मैंने तेज तेज अपनी चूत पापा के लण्ड के सुपाडे पर रगड़नी चालू कर दी. पापा के भी धक्के अब बहुत तेज और जोरदार हो गए थे.
इसे भी पढ़े – सोये देवर के लंड पर चूत रगड़ने लगी भाभी
पापा ने इतना ध्यान रखा की धक्कों की रफ़्तार में भी उनके लण्ड का सुपाड़ा उनकी बेटी की चूत के मुंह से हिलने न पाए. हम दोनों के मुंह से आह आह और हु हूँ की आवाज़ निकल रही थी. बहुत मजा आ रहा था. मैंने सोचा शायद आज काम बन ही जाये और हम बाप बेटी की चुदाई हो जाये.
पापा ने अपना अंडरवियर निकाल कर इशारा तो दे ही दिया था, तो मैंने भी सोचा कि किसी बहाने अपनी पैंटी भी निकाल दूँ. पर पापा दी गोद मैं उनके लौड़े पर चूत घिसने से इतना मजा आ रहा था तो उठ कर बाथरूम जाने का मन नहीं था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने साइड में रखा चाय का कप उठा लिया जैसे चाय पीना चाहती होऊं, पर गुदगुदी के बहाने से हिलने के कारण मैंने जान बूझ कर थोड़ी चाय अपनी गोद में गिरा ली. चाय तो मेरी स्कर्ट पर ही गिरी थी, पर मैंने उछलने का ऐसा नाटक किया कि चाय मेरी पैंटी तक गिर गयी है.
मैं चिल्लाने का नाटक करते बोली- “ओह पापा! चाय मेरी पैंटी तक गिर गयी है. बहुत गर्म लग रहा है. मुझे उठने दो मुझे पैंटी निकालनी पड़ेगी।”
पापा मेरा नाटक समझ रहे थे, तो बात पकड़ते हुए बोले- “प्रतीक्षा! अब सिर्फ पैंटी निकालने के लिए बाथरूम कहाँ जाओगी। ऐसा करो यही उठ कर अपनी पैंटी निकाल दो. स्कर्ट तो पहनी ही है.”
मैं समझ रही थी कि पापा मुझे एक पल के लिए भी जाने नहीं देना चाहते तो मैंने भी उन्हें और आनंद देने के लिए बोली- “पापा! मेरे हाथ में तो चाय का कप है. ऐसा करती हूँ, कि मैं खड़ी हो जाती हूँ, आप मेरी पैंटी उतार दो.”
(चाय का कप रख भी सकती थी मैं, पर जब बात चुदाई तक लानी हो तो पैंटी पापा के हाथों से ही उतरवानी होगी ना।) पापा तो खुश हो गए. मैं उठ कर खड़ी हुई और पापा ने मेरी स्कर्ट ऊपर उठा कर अपनी उँगलियाँ मेरी पैंटी के दोनों किनारों में डालने की बजाए आगे की तरफ से डाली।
यानि पैंटी की साइड में न डाल कर एक हाथ मेरी चूत के ऊपर और दूसरा पीछे मेरी गांड के ऊपर से डाला, पैंटी उतारने के लिए. पापा निश्चय ही मेरी चूत को टच करना चाहते थे. मेरी तो चूत में तो पानी की जैसे बाढ़ ही आ गयी.
पापा ने धीरे से पैंटी को नीचे खिसकाना शुरू किया। क्योंकि पापा ने स्कर्ट थोड़ा ऊपर करी थी तो मैंने उसे ऊपर ही पकड़ लिया। अब पापा पैंटी उतारते तो मेरी चूत नंगी उनके चेहरे के सामने आती और उन्हें अपनी प्यारी बेटी का स्पष्ट दर्शन होता।
चाहे पापा पहले कईं बार मेरी नंगी चूत कमरे में देख चुके थे पर यह होश में जागते हुए पहला मौका था. पापा ने धीरे धीरे मेरी पैंटी नीचे खींची। और मेरी गीले चूत पापा के आँखों के सामने आ गयी. क्योंकि मैं पापा की गोद में खड़ी थी, तो मेरी चूत उनके चेहरे के बिलकुल सामने ही थी.
चूत बिलकुल गीली थी, और पानी छोड़ रही थी. पैंटी उतारते पापा ने अपनी उँगलियाँ मेरी चूत की दरार में रगड़ दीं और पीछे वाले हाथ की उँगलियाँ मेरी गांड की दरार में रगड़ दीं. मेरे मुंह से एक आह निकल गयी. पैंटी उतरते शर्मा कर झट से पापा की गोद में बैठ गयी.
अब मैं बिलकुल नंगी थी, चाहे मेरी चूत स्कर्ट से ढकी थी, पर नीचे की रगड़ की लिए तो नंगी ही थी ना. और पापा के लौड़े और मेरी चूत में सिर्फ अब पापा के पाजामे का पतला सा कपडा था. पापा ने फिर से गुदगुदी शुरू कर दी और उस बहाने से मेरी चूत की दरार में अपने लौड़े रगड़ना चालू कर दिया।
अब तो मजे की इंतिहा ही हो गयी थी. पापा के लौड़े का सुपाड़ा मेरी चूत के बिलकुल छेद पर आ गया था और चिपक गया था. गुदगुदी के बहाने से पापा उस के धक्के मार रहे थे. यदि बीच में पाजामे का कपडा ना होता तो अब तक को कभी का उनका लण्ड मेरी चूत में घुस चूका होता। खैर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। पापा और मैं दोनों बाप बेटी गुदगुदी के बहाने से मजा कर रहे थे.
मैं पापा से मुस्कुराती हुई बोली- “पापा! आप ने आज मुझे बहुत बढ़िया सी चॉकोबार खिलाई है. और मुझे शॉपिंग भी करवाई है. आप का दिल बहुत बड़ा है.”
पापा पर तो वासना का भूत सवार था तो मुस्कुराते हुए और मेरी चूत पर अपने लण्ड का धक्का मारते हुए बोले- “प्रतीक्षा! पापा का दिल ही नहीं और भी बहुत कुछ बड़ा है.”
लौड़े के धक्के से मैं गनगना गयी और मुस्कुराते हुए अपनी चूत को पापा के लौड़े पर आगे धकेलते हुए बोली- “पापा! हाँ वो तो मुझे भी पता है. कि बहुत बड़ा है. मुझे कब से चुभ रहा है.”
पापा आगे बढ़ते बोले- “तुम्हारी माँ को तो इसकी चुभन बहुत अच्छी लगती है. तो क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा. चुभ रहा है तो उसे पकड़ कर एक साइड में कर दो.”
अब तो बात खुल कर होने लगी थी. पापा ने साफ़ साफ़ लौड़ा पकड़ने को बोल दिया। मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाया और बोली- “पापा ऐसे कैसे पकड़ लूँ.”
पापा ने झट से मेरी एक चूची को पकड़ लिया और बोले- “अरे ऐसे पकड़ कर एक साइड में कर दे ना।”
मैं तो मस्त ही हो गयी. यह आज पहली बार था कि पापा ने सरेआम मेरी चूची पकड़ ली थी। मैंने भी कोई कोशिश नहीं की उसे छुड़वाने की, चूची अभी भी पापा के हाथ में ही था. पापा ने मुझे कोई एतराज करते ना मेरे मुम्मे को धीरे धीरे सहलाना और मसलना भी शुरू कर दिया।
मैंने सोचा कि आज तो कुछ हो ही जाए तो बोली- “पापा! आप तो मेरी टी शर्ट के ऊपर से पकड़ रहे है, पर आप ने तो कोई टी शर्ट नहीं पहनी तो मैं क्या करूँ?”
पापा ने अपना हाथ मेरी शर्ट के अंदर घुसेड़ कर मेरी चूची को नंगी पकड़ लिया और पूरी छाती को मसलते बोले- “अरे प्रतीक्षा! मेरा मतलब इस तरह कपडे के अंदर हाथ डाल कर पकड़ ले.”
इसे भी पढ़े – जवानी के जोश में थी मैंने चोद दिया
अब मैंने भी और ज्यादा लेट करना ठीक नहीं समझा और पापा के पाजामे में हाथ डाल कर पापा के लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया। पापा के मुंह से एक जोर की आह निकल गयी. अब दिन के उजाले में दोनों बाप बेटी एक दुसरे के अंगों से खेल रहे थे.
मैंने पापा के लौड़े को एक बार मसला और फिर छोड़ कर कहा- “पापा यह तो बहुत बड़ा है और गर्म भी बहुत है. मेरा हाथ न जल जाये।”
वैसे तो मैं पापा का लौड़ा चूस चुकी थी पर अब सरेआम मजा कर रही थी तो थोड़ा तो नखरा करना ही था. पापा को भी लग रहा था की आज उन्हें अपनी प्यारी बेटी की चुदाई करने का मौका मिल सकता है. तो पापा मुझे चूमते हुए बोले- “प्रतीक्षा! तुम्हे वैसे ही लग रहा है. कोई बड़ा नहीं है. चाहे तो इसे पाजामे से बाहर निकाल कर देख लो.”
यह कहते हुए पापा पाजामे का नाडा खोल कर अपना नंगा लण्ड जो अब लोहे की तरह सख्त हो चूका था. को बाहर निकाल लिया। पर मैंने भी इस सब के बीच में पापा के लौड़े को अपने हाथ से नहीं छोड़ा और उसे उसी तरह सहलाती रही. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं बोली “हाँ पापा! आपका यह तो सच में बहुत बड़ा है. मुझे डर लग रहा है. देखो आपका यह कितने गुस्से में है और कैसे गुस्से में फुंकार रहा है.”
पापा मेरी चूची को एक हाथ से मसलते रहे और बोले- “प्रतीक्षा! यह पापा का “यह” क्या बोल रही है. इसका नाम बोल ना. इसे लण्ड या लौड़ा कहते है.”
मैंने शर्माने की पूरी एक्टिंग करते हुए कहा- “हाय पापा! आप तो पूरे ही बेशर्म हो रहे हो. कोई बाप भला अपनी बेटी के हाथ में अपना लण्ड थोड़े हो ना पकड़ाता है? और इसे देखो कैसे गुस्से में हिल रहा है?”
पापा मेरी मसखरी समझ रहे थे कि मैं अब लण्ड जैसे शब्द बोल रही थी और पापा के लौड़े को सहला भी रही थी.
पापा बोले- “प्रतीक्षा बेटा! यह गुस्से में नहीं है. बल्कि तुम्हारे हाथों में आ कर बहुत खुश है और ख़ुशी के मारे मचल रहा है. देखो अपने चेहरे की एक आँख (लौड़े के छेद) से कैसे तुम्हे देख रहा है और देखो इसकी एकमात्र आँख में ख़ुशी के आंसू आ रहे है.”
पापा के लौड़े ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. प्रिकम की एक बूँद उनके लण्ड के छेद पर थी पापा बारे में कह रहे थे. मैंने पापा के लौड़े के सुपाडे पर हाथ फेरते हुए प्रिकम को उस पर मल दिया।
पापा बोले- “बेटी देखो तुम्हें देख कर मेरा लण्ड कितना खुश है. इसे एक प्यार भरी पप्पी दे दो. बेचारा तुम्हारे प्यार के लिए तरस रहा है.”
मैं :- हाय पापा ! क्या बोल रहे हो. भला इस पर भी कोई पप्पी करता है.
पापा:- बेटी! इस पर किस करने में तो औरतोँ को बहुत मजा आता है. तुम्हारी मम्मी तो रोज सोने से पहले इस पर किस करती है. बल्कि अच्छी तरह से चूसती भी है. उसके बिना तो उसे नींद ही नहीं आती. तुम भी पापा के लौड़े किस दे दो.
मैं नादान बनने का नाटक करते हुए बोली- “पापा! मुझे नहीं आता. आप बता दीजिये ना.”
हालाँकि मैं पिछले दिन ही पापा के लण्ड को चूस कर उसका जूस पी चुकी थी. पर नाटक तो करना ही था ना.
पापा ने मुस्कुराते हुए कहा- “प्रतीक्षा! तुम अपने दोनों होंठों को गोल करके मेरे लौड़े के सुपाडे पर रखो को फिर जीभ से इसकी एकमात्र आँख पर प्यार करो.”
यह कहते हुए पापा मेरे सामने खड़े हो गए और अपना पजामा खोल कर परे फेंक दिया। पापा का हलब्बी लण्ड मेरे चेहरे के सामने झूल रहा था. मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. और मैं ज्यादा समय खराब करने के हक़ में नहीं थी.
तो मैंने अपने होंठ पापा के लण्ड पर रख दिए और होंठों के अंदर से अपनी जीभ पापा के सुपाडे पर फेरनी शुरू कर दी. पापा के मुंह से आनंद भरी सिसकारियां निकलने लगी. वो चाहते थे कि मैं उनके पूरे लौड़े को मुंह में ले लूँ तो वे मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरते हुए बोले- “प्रतीक्षा बेटी! बहुत अच्छा लग रहा है. तुम्हारे प्यार करने से देखो मेरा लौड़ा कैसे उछल रहा है ख़ुशी से. तुम उसे और अधिक अपने मुंह में ले कर चूसो।”
पापा ने फिर मुझे अच्छा ढंग से लौड़ा चुसवाने के लिए उठाया और वो मुझे अपनी बाहों में ले कर किस करने लगे, वो मेरे नाज़ुक होठों को किसी जंगली की तरह चाट रहे थे। वो ऐसे मेरे मूह को चूस चाट रहे थे जैसे खा जाएंगे। इस बाद में मैं भी उनका साथ देने लगी।
लेकिन वो जैसे मेरे पूरे मुँह को चाट और मेरे होंठों को चूस रहे थे। कुछ ही देर में मेरा पूरा मुँह उन के थूक से भीग चुका था। मेरी टी शर्ट अब नीचे धूल चाट रही थी, मैं अब पूरी नंगी थी , और पापा के हाथ मेरे मासूम निपल्स को मरोड रहे थे।
उनके ऐसा करने से मुझे तकलीफ होती। और मेरे मुँह से आआह्ह्ह… निकल जाती लेकिन उनको इस की ज़रा भी परवाह नहीं थी। इस के बाद उन्होंने मेरे मम्मो पर हमला कर दिया। वो तो जैसे मेरे मम्मो को खा जाना चाहते थे। कभी मेरे मम्मो को पूरा मुँह में लेने की कोशिश करते तो कभी मेरे निपल्स पर दांत गड़वा देते।
कुछ ही देर में मेरे मम्मो पर पहले की तरह लाल, नीले निशान पर गए। फिर पापा ने मुझे जमीन पर बिठा दिया और मैंने झट से उनके लण्ड को अपने मुंह में भर लिया, जैसे किसी बच्चे को अपनी प्यारी लॉलीपॉप मिल गयी हो. पापा के मुँह से आआह्ह्ह… की आवाज़ निकल गई। जिससे साफ़ पता चलता था कि उनको मज़ा आया है।
मैंने अब आहिस्ता आहिस्ता उनके लंड को मुँह में चूसना शुरू कर दिया। उनका शानदार लंड मेरे लिए किसी मज़ेदार आइसक्रीम से कम नहीं था। मैं अब पूरे मन से उनका लंड चूसने लगी। साथ-साथ में अपने दोनों हाथों से उनके टट्टों को सहलाते हुए प्यार करने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – भतीजे चाची के बीच चुदाई की कहानी
जिसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही पलों में उनका लंड पूरी तरह से लोहे की तरह सख्त और खड़ा हो गया। जो किसी तरह 10 इंच से कम नहीं था। उनका आधा लंड मेरे मुँह में अंदर बाहर हो रहा था। मेरी पूरी कोशिश के बजह से मेरे दांत कभी कभी उनके लंड से टकरा जाते हैं। जिस से उनके मुँह से दर्द भरी आआह्ह निकल जाती है।
पापा:- आआआह्ह… ख्याल से बेटी तुम्हारे दांत मेरे लंड पर लग रहे हैं। आआआह्ह… कितना गरम मुँह है तुम्हारा। बहुत मज़ा आ रहा है। आआआह्ह… बेटी साथ साथ मेरे टट्टों को प्यार कर दो। काफी टाइम इनकी सेवा नहीं हुई। प्लीज बेटी।
उनकी ये बात सुनते हुए मेरे उन बॉल्स से अपना मुँह लगा दिया। पापा के लण्ड की शानदार सुगंध मेरे नाक के रास्ते मेरे जिस्म में फैल गई। लेकिन ये सब मेरे लिए किसी तरह के नशे से कम नहीं थी। मैं पूरे शौक से उन बॉल्स पर अपनी ज़बान का जादू चलाने लगी।
मैंने उन बॉल्स को अपने मुँह में लेने की काफ़ी कोशिश की, लेकिन वो टेनिस बॉल साइज़ के गोले भला कहाँ मेरे छोटे से मुंह में आते हैं? आखिर काफ़ी देर उन बॉल्स को चाटने के बाद जब मैं उनका लंड चाटने लगी. मैं तो ये सब दिल से एन्जॉय कर रही थी। और तो और पापा का लौड़ा मेरे लिए किसी मज़ेदार कैंडी से कम नहीं था।अब मैं उनके लंड को मुँह में लेने लगी तो उन्होंने मेरा सिर पकड़कर लिया।
पापा:- बेटी अपना मुँह पूरा खोलो। ताकि तुम्हें मेरा लंड चूसने में आसानी हो।
मेरा मुँह खुद बा खुद खुल गया। जैसे मैं उन के लण्ड का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूँ। और फिर उनका लंड चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सर को सहलाते हुए इधर-उधर हिल रहे थे। कुछ देर बाद वो अपने लंड को मेरे मुँह से निकाल मेरे चेहरे पर रगड़ने लगे।
इस के बाद फिर से अपना लंड मेरे मुँह डाल दिया। जिसको मैं चूसने लगी। अब पापा बार बार यही कर रहे थे, कभी मेरे मूँह में लंड डालकर अंदर बाहर करते तो कभी मेरे थूक से भीगे अपने लंड को मेरे चेहरे पर रगड़ते। मेरा सारा मेकअप वगैरह मेरे पूरे चेहरे पर फैल चुका था।
अब पापा मेरे मूँह में लंड डालकर तेज़ी से अंदर बाहर कर रहे थे। वो शायद अब झरने के करीब थे इस लिए लंबी लंबी सांसें ले रहे थे. तभी उन्होंने अपना लंड मेरे गले तक डाल दिया और तेज तेज झटके लगाने लगे. मैं जान रही थी कि पापा का स्खलन आ रहा है.
उनके झटके इतने तेज और जोरदार थे की उनका लौड़ा मेरे गले के अंदर टकरा रहा था. मैंने उनके लौड़े की जड़ में अपने हाथ से पकड़ लिया ताकि वो मेरे गले में न लगे, पर मैं और भी तेजी से लौड़े को चूसती रही. पापा के मुंह से अचानक एक जोर की आह निकली और रह रह कर उनका जिस्म और लंड झटके खाने लगा.
उनके लंड से अमृत रुपी पानी की धारें निकल कर मेरे गले तक जा रही थीं. जिन को मैं तेज़ी से अपने पेट में उतार रही थी. पता नहीं क्यू! उनकी मन्नी का टेस्ट मुझे खोया की तरह लग रहा था. मेरा दिल चाह रहा था कि मैं ये खाती जाऊं.
आखिर कुछ देर बाद उनका वीर्य का झरना बंद हुआ. और उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह से निकाल लिया. बिना कुछ कहे मैंने उनका लंड पकड़कर लिया और अच्छी तरह से चाट कर साफ कर दिया। पापा कुछ देर के लिए वहां बैठ गए। और अपने आपको ठीक करने लगे। शायद आज काफी टाइम बाद झड़े थे और पूरे तरीके से, इसके लिए वो काफी थकावट महसूस कर रहे थे।
पापा:- आआआआह्ह्ह…. मज़ा आ गया बेटी। तुम कमाल हो। मैं तो खुश नसीब हूँ कि तुम मुझे मिली हो।
मैं वॉशरूम गयी और खुद को साफ़ किया, खुद को शीशे में देखकर एक बार तो यकीन नहीं हुआ कि ये मैं ही हूँ। मेरा पूरा चेहरा और बाल इस वक़्त बिगड़े हुए थे। जैसे पता नहीं कितने लोगों ने मेरे साथ ज़बरदस्ती की हो। मैं इस वक़्त किसी चीप रंडी से कम नहीं लग रही थी।
इसे भी पढ़े – पूरी रात माँ की पेलाई देखी बेटे ने
मेरा मेकअप, मेरी लिपस्टिक मेरे पूरे चेहरे पर अजीब तरह से फैली हुई थी। अंदर ही अंदर मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी। पिछले कुछ दिनों से बढ़ती मेरी प्यास फिलहाल बुझ चुकी थी। बस अब देर थी तो पापा से चुदवाने की. मुझे पूरी आशा थी कि आज मेरी यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी।
मेरा मन तो कर रहा था कि अब पापा मुझे चोद भी दें. पर समय काफी हो चूका था. नानी और मम्मी को भी लेने जाना था. तो ना चाहते हुए भी हम उन्हें लेने चले गए. अगले दिन फिर मम्मी और नानी ने शाम को उस सत्संग में जाने का कहा. मैं और पापा खुशी से तैयार हो गए.
शाम को हमने मम्मी और नानी को सत्संग में छोड़ा, मम्मी को मेरे सत्संग में ना जाने और पापा के साथ घर पर ही रहने पर कोई शक ही नहीं हो सकता था क्योंकि हम दोनों तो बाप बेटी थे. पर मम्मी को क्या पता था की बाप बेटी घर पर क्या गुल खिलने वाले हैं.
उन्हें छोड़ कर हम दोनों वापिस घर आ गए. हम दोनों बाप बेटी जानते थे कि आज क्या होने वाला है. पापा का लौड़ा तो पहले से ही सख्त हो चूका था और मेरी चूत में भी पानी की नदी बह रही थी, घर में आ कर कुण्डी लगाते ही पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे चूमते हुए ड्राइंगरूम में आ गए.
पापा सोफे पर बैठ गए मैं अभी भी पापा की गोद में ही थी, मुझे शर्म आ रही थी क्योंकि हम दोनों जानते थे कि क्या होने वाला है. पापा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथ को मेरी टी शर्ट में डाल कर मेरे मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया।
पापा का लौड़ा लोहे की तरह सख्त हो चूका था. और मेरे चूतड़ों में चुभ रहा था. मेरा मन तो कर रहा था की पापा के लण्ड को अपने हाथों में ले लूँ पर शर्म आ रही थी। पापा मेरी हालत समझ गए और उन्होंने चुपचाप अपना पाजामे का नाडा खोल दिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया। मैंने भी देर न करते हुए पापा के लौड़े को पकड़ लिया और टोपे से लेकर लौड़े की जड़ तक उसे प्यार से सहलाने लगी.
पापा ने मुझे चूमते हुए पुछा- “प्रतीक्षा बेटी! कल पापा का लौड़ा चूसने में मजा आया था?”
मैंने शर्म से सिर्फ गर्दन हिला कर हाँ में जवाब दिया।
पापा फिर बोले- ” तो आज भी मजा लेना चाहती हो, अगर कहो तो उस से भी अधिक आनंद दूँ?”
मैं समझ नहीं पायी कि अधिक मजा कैसे आएगा। मैंने हैरानी से पापा की तरफ देखा।
तो पापा मुस्कुराते बोले- “बेटी! लण्ड चूसने या चूत चटवाने से भी कहीं अधिक मजा तो चुदवाने में आता है, क्या आज अपने पापा से चुदवाना चाहोगी। बहुत मजा आएगा पापा के इस लौड़े से चुदोगी तो.”
मैं क्या बोलती आखिर वो मेरे पापा थे. चाहे मैं पापा से चुदवाना चाहती थी पर ऐसे कैसे हाँ बोल सकती थी. तो मैंने शर्म से अपना मुंह पापा की छाती में छुपा लिया।
पापा फिर मुझे सहलाते हुए बोले- “प्रतीक्षा! बतलाओ ना. चुदवाना चाहती हो ना अपने पापा से? लोगी क्या अपने पापा का लौड़ा?”
मुझे बहुत शर्म आ रही थी, मैंने पापा को झप्पी डाल ली और अपनी बाहें पापा के गले पर लपेट लीं और अपना मुंह पापा के कान पर ला कर धीरे से बोली- “हाँ पापा! बहुत मन कर रहा है. अपने पापा से चुदवाने को. चोद लीजिये आज अपनी प्यारी बेटी को.”
यह कहते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही थी, पर मैं आज का मौका खोना नहीं चाहती थी तो पापा को हाँ कर दी. पापा बहुत खुश हो गए. पापा से अब तो एक पल की भी देरी सहन नहीं हो पा रही थी तो वे तुरंत मेरी टी शर्ट उतर कर ब्रा के ऊपर से ही मेरे दूध पर टूट पड़े और बुरी तरह से दोनों दूध को चूमने लगे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – मेरी माँ की ब्लू फिल्म की शूटिंग देखा मैंने
जल्द ही पापा ने मेरे दूध को ब्रा के बाहर निकाल लिया और मेरे निप्पलों को चूसने लगे। मैं बहुत जोश में थी और जोर जोर से ‘आआह आआह… ऊऊईई ऊऊईई’ कह रही थी। पापा ने मेरा मुँह बंद किया और बोले- आवाज मत करना, चुपचाप रहना!
अब उन्होंने मुझे बुरी तरह से अपने सीने से चिपका लिया और बुरी तरह से सभी जगह चूमने लगे। जल्द ही उन्होंने मेरी ब्रा भी निकाल दी और मुझे लेटा कर मेरे दूध को बुरी तरह से चूसने लगे। मेरी चूत ने जमकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और लगातार पानी निकलने से मेरी पैन्टी गीली हो गई थी।
जल्द ही पापा मुझे चूमते हुए मेरी पैन्टी तक जा पहुँचे और मेरी पैन्टी भी निकाल फेंकी। अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी और पापा ने मेरे दोनों पैरों को फैला दिया। पहले उन्होंने मेरी चूत को हाथों से छुआ और फिर अपना मुंह मेरी चूत में लगा दिया।
पापा अपनी जीभ निकालकर मेरी चूत को चाटने लगे और फिर मेरी चूत को मुँह में भरकर बुरी तरह से चूसने लगे। मैं किसी तरह से अपने आप को रोक रही थी कि मुँह से आवाज न निकले और बुरी तरह से बिस्तर पर मचल रही थी। बस पापा और मैं एक दूसरे के अंगों को महसूस कर रहे थे।
पापा बिना रुके मेरी चूत को चाट रहे थे और मैं सोफे पर इधर उधर मचल रही थी। काफी देर तक पापा मेरी चूत को चाटते रहे और मैं ज्यादा देर तक उनकी जीभ का रगड़ना बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ गई। मेरी चूत से गर्म पानी की धार फूट पड़ी और पापा उस पानी को भी चाटते चले गए।
जल्द ही पापा ने मेरी चूत का एक एक बूंद पानी चाट कर साफ कर दिया। मैं निढाल होकर सोफे पर लेट गईं। इसके बाद भी पापा नहीं रुके और मुझे दुबारा गर्म करने की कोशिश करते हुए लगातार मेरी चूत को चाटते रहे। कुछ ही देर में मेरे बदन में वासना की आग दुबारा से भड़क उठी और एक बार फिर से मैं गर्म हो गई।
अब पापा ने भी अपनी चड्डी निकाल दी और जल्दी से मेरे ऊपर आकर मेरे गालों को चूमते हुए मेरे होंठों को चूमने लगे। पापा ने मेरी दोनों जांघों को फैला दिया और और अपने लंड से मेरी चूत को मसलने लगे। पहली बार मुझे उनके लंड का अनुभव हुआ लेकिन अभी मैंने पापा का लंड देखा नहीं था।
पापा के लंड का आकार काफी मोटा लग रहा था और काफी गर्म भी था। वे लंड को मेरी चूत के छेद पर ऊपर नीचे रगड़ रहे थे और लगातार मेरे होंठों को चूम रहे थे। फिर पापा ने छेद पर लंड लगाया और मुझे जोर से जकड़ लिया और लंड को चूत में डालने की कोशिश करने लगे।
काफी प्रयास के बाद भी उनका लंड चूत में नहीं जा पाया क्योंकि मेरी चूत उनके लंड के हिसाब से छोटी ही थी। भले मेरा बदन भरा हुआ और गदराया हुआ था लेकिन उस वक्त मैं केवल 19 साल की ही थी और अभी तक मुझे किसी ने छुआ तक नहीं था।
उनका लंड इतना मोटा था कि वह बार बार फिसलकर कही मेरी जांघ पर चला जाता था तो कभी मेरे पेट की तरफ चला जाता था। एक बार लंड थोड़ा सा ही अंदर जा पाया था कि मैं जोर से उछल पड़ी. पापा ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया।
मैं भी खुशी खुशी उनकी बांहों में चली गई और पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मुझे गोद में उठाये हुए पापा मुझे बेडरूम में ले गए। बेडरूम में लेजाकर पापा मेरे होंठों पर टूट पड़े और मैंने भी उनका साथ देते हुए अपने आप को उनको सौंप दिया।
पापा लगातार मेरे होंठों को चूम रहे थे। मैं तो पूरी तरह से नंगी थी. जल्द ही पापा ने भी अपने कपड़े निकाल दिए और केवल अन्डरवियर में रह गए। काफी देर तक हम दोनों बिस्तर के बाहर ही एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे और फिर पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गए।
इसे भी पढ़े – सेक्सी मॉडर्न ड्रेस पहना कर पेला मम्मी को
पापा ने एक झटके में ही मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे तने हुए दूध पर टूट पड़े। वे मेरे दूध को अपनी मुठ्ठी में भरकर मसलने लगे और निप्पलों को चूसने लगे। उनके निप्पल चूसने से मेरे पूरे बदन में आग लग गई और मैं बिस्तर पर मछली की तरह मचलने लगी।
मैं जोर जोर से बस यही कह रही थी- आआह पापा… आह पापा… ऊऊईई मम्मीई… पापा आराम से… आआह ऊऊऊ ऊऊ ऊऊईई!
पापा लगातार मेरे दूध को चूस रहे थे और मेरे बदन को सहलाते जा रहे थे। जल्द ही पापा खुद भी नंगे हो गए। अब हम दोनों एक दूसरे के नंगे बदन को सहला रहे थे और चूम रहे थे। हम दोनों एक दूसरे से बुरी तरह से लिपटे हुए थे और कभी मैं पापा के ऊपर होती कभी पापा मेरे ऊपर हो जाते थे।
काफी देर तक हम दोनों के बीच ऐसे ही आलिंगन चलता रहा और फिर पापा ने मुझे लेटा कर मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और मेरी छोटी सी खूबसूरत चूत उनके सामने आ गई। उन्होंने मेरे जांघों को जकड़ लिया और अपना मुंह मेरी चूत पर लगा दिया।
पापा अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत को बुरी तरह से चाटने लगे। मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और पापा उस पानी को पूरा ही चाट रहे थे। मेरे बदन में जैसे आग ही लग चुकी थी और मुझे अब बस ऐसा लग रहा था कि कितनी जल्दी पापा अपना लंड मेरी चूत में डाल दें और मेरी इतने दिनों की गर्मी को शांत कर दे।
पापा मेरी चूत को बुरी तरह से चाट रहे थे और मैं जोर जोर से ‘आआह पापा … आआह पापा ’ कर रही थी। पापा भी मुझे बुरी तरह से गर्म कर रहे थे और लगातार मेरी चूत को चाट रहे थे। काफी देर बाद जब मैं बुरी तरह से मदहोश हो गई और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैं अपने हाथ बिस्तर पर पटकने लगी तब पापा ने मेरी चूत चाटना बंद किया।
अब पापा ने मेरी टाँगों को फैलाकर अपने हाथ में फँसा लिया और मेरे ऊपर लेट गए। पापा का विशाल मोटा लंड बिल्कुल मेरी चूत के छेद पर लगा हुआ था। अब वह पल आ गया था जब मेरी पापा के लौड़े से पहली चुदाई होने वाली थी. और हम दोनों के बीच का इतने दिनों का रिश्ता अपने मुकाम पर पहुँचने वाला था।
पापा का लंड पहली बार मेरी चूत के अंदर जाने के लिए बिल्कुल तैयार था और मैं भी चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार थी। लेकिन मुझे पता था कि पापा का विशाल लंड मेरी छोटी सी चूत के लिए काफी बड़ा है और मुझे बहुत दर्द भी होने वाला था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन इन सब को भुलाकर उस वक्त मुझे बस ऐसा लग रहा था कि बस आज पापा मुझे चोद ही दें। उस वक्त मेरे बदन की गर्मी अपने उफान पर थी और मैं हर दर्द सहने के लिए तैयार थी। पापा मेरे ऊपर लेटे हुए थे और फिर उन्होंने मेरे गालों को चूमते हुए कहा- तुम तैयार हो न?
“हाँ पापा !” मेरी हाँ सुनते ही पापा ने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और अपने लंड पर जोर देना शुरू कर दिया। लंड का सुपाडा चूत को फैलाकर अंदर छेद में गया और मेरे मुँह से निकला- सीईई ईईई ईईई पापा आ! उस वक्त तक मुझे लगा कि लंड तो आराम से अंदर जा रहा है लेकिन ये मेरी गलतफहमी थी लंड तो अभी बस चूत के थोड़ा अंदर गया था।
इसके बाद पापा ने और जोर लगाया और लंड चूत में धंसने लगा और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी चूत के अंदर कोई गर्म रॉड डाल रहा है। पापा ने मुझे जोर से जकड़ लिया और मैं भी उनसे चिपक गई। जैसे ही पापा ने थोड़ा और जोर दिया लंड मेरी चूत के हर बंधन को तोड़ता हुआ आधा अंदर चला गया।
इसे भी पढ़े – सेक्सी माल अपने अंगो का दर्शन करा रही थी
मेरे मुंह से जोर से चीख निकली- ऊऊईई ईईई मम्मीई ईईईई आ आआ आआह!
मेरी आँखों के सामने जैसे अंधेरा छा गया और उनसे आंसुओं की धार निकल पड़ी। मैं पापा को जोर जोर से धक्का देने लगी और किसी तरह से उनसे छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन पापा ने मुझे जबरदस्त तरीके से जकड़ लिया था जिससे मैं हिल भी नहीं पा रही थी।
जल्द ही पापा ने एक जोर का धक्का लगा दिया और पूरा का पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर तक चला गया। मैं तो दर्द से जैसे पागल सी हो गई थी और बुरी तरह से चिल्ला रही थी। पापा बार बार मेरे मुँह को बंद कर रहे थे लेकिन दर्द के कारण मैं उनका हाथ झटक दे रही थी।
मैं जोर जोर से कह रही थी- पापा निकाल लो… निकाल लो प्लीज… निकाल लो. मैं नहीं सह पाऊंगी. प्लीज निकाल लो।
पापा मेरी बातों को अनसुना करते हुए एक दो बार लंड को बाहर करते हुए फिर से अंदर पेल दिए जिससे उनका लंड अच्छे से मेरी चूत में सेट हो गया। उनका लंड इतना मोटा था कि चूत के अंदर हवा तक जाने की जगह नहीं थी। इतने दिनों तक पापा ने मेरे बदन में चुदाई की जो गर्मी भरी थी वो उस वक्त हवा हो गई थी।
उस वक्त मुझे समझ में आया कि पापा में सबके रहते हुए मुझे क्यो नहीं चोदा था अगर घर वालो के रहते हुए मेरी चुदाई हुई होती तो मेरी चीखे सुनकर पता नहीं क्या हो जाता। पापा को चुदाई का बहुत अनुभव था और वे उस वक्त अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल कर रहे थे।
वे चुपचाप मेरे ऊपर लेटे हुए थे और उनका लंड मेरी चूत में धंसा हुआ था। काफी देर तक पापा ऐसे ही बिना कुछ किये मेरे ऊपर लेटे रहे और मेरे गालों और जांघों को सहलाते रहे। काफी देर बाद मेरे अंदर दर्द की लहर धीमी होने लगी और धीरे धीरे दर्द कम होने लगा।
पापा लगातार मेरी जांघ पर अपनी उंगली चला रहे थे और एक बार फिर से मेरी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था। मेरे बदन में वासना की लहर फिर से दौड़ने लगी थी और मेरी चीखें मदहोश करने वाली सिसकारियों में बदल गई थी। अब पापा ने भी आहिस्ते आहिस्ते लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.
और मेरे मुंह से बेहद गंदी गंदी आवाजें निकलने लगी- आआ आऊ ऊऊऊ ऊऊ आआ आऊ ऊह पापा लल्लऊऊऊ पापा आआह ऊऊह! उस वक्त पापा बेहद आहिस्ते आहिस्ते मुझे चोद रहे थे लेकिन अब मुझे दर्द की जगह मजा आ रहा था।
मेरी उंगलियां पापा की पीठ पर चलने लगी थी और मेरे होंठ पापा के सीने को चूम रहे थे। अब तक पापा भी समझ चुके थे कि अब मुझे चुदाई में मजा आ रहा है इसलिए पापा ने भी चुदाई की रफ्तार तेज करनी शुरू कर दी। पापा के धक्कों की रफ्तार तेज होती जा रही थी और मेरी सिसकारियों की आवाज भी कमरे में गूंजती जा रही थी।
सारा कमरा मेरी कामुक आवाज से गूंज रहा था- अई अई ऊह ऊऊह आह आअ आह ऊऊई उई अई मम्मीई ऊऊई अई फ़फ़ ऊऊफ़ पापा आआह ओह आआह ऊऊई मम्मीई अई! जल्द ही पापा की रफ्तार इतनी तेज हो गई थी कि पूरा पलंग जोर जोर से हिलने लगा था और पापा के धक्के मेरे पेट पर जोर जोर से बज रहा था।
अब तक पापा को समझ आ गया था कि मुझे दर्द नहीं हो रहा है और मैं चुदाई का मजा ले रही हूं. इसलिए पापा ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ के नीचे लगाकर मेरे चूतड़ को हवा में उठा लिया और अपनी पूरी रफ्तार से धक्के लगा लगा कर मेरी चुदाई करने लगे।
मेरी चूत पूरी तरह से पानी से भर गई थी और चुदाई करते समय फच्च फच्च की आवाज निकलने लगी। जल्द ही पापा ने अपना लंड बाहर किया और मुझे घुटनों पर होने के लिए कहा। मैं समझ गई कि वे मुझे घोड़ी बनने के लिए कह रहे हैं और मैं चुपचाप घोड़ी बन गई।
पापा अब मेरी गांड की तरफ थे और पीछे से उन्होंने मेरी चूत में लंड डाल दिया। उन्होंने मेरी कमर को पकड़ा और धक्के देना शुरू कर दिया। मेरे दोनों दूध नीचे की तरफ लटकते हुए तेजी से झूल रहे थे और पापा दनादन धक्के लगा रहे थे। इस पोजीशन में चुदाई को मैं ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाई और जल्द ही झड़ गई।
चूत का गर्म गर्म पानी बिस्तर पर टपक रहा था और पापा लगातार चुदाई किये जा रहे थे। कुछ देर बाद एक बार फिर से पापा ने अपना लंड बाहर किया और अब उन्होंने मुझे पलंग के नीचे खड़ी कर दिया और मेरी एक टांग उठाकर पलंग पर रख दिया.
फिर पापा ने अपना एक हाथ मेरी कमर पर कसा और लंड को चूत में पेल दिया। उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया और दूसरे हाथ से मेरी गांड थामकर धक्के देना शुरू कर दिया। उनका लंड किसी मशीन की तरह मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था और मेरे दोनों दूध उनके सीने पर दबे जा रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इसे भी पढ़े – अब फिरदौस मुमानी के चुदने की बारी थी
ऐसे ही चोदते हुए पापा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे उछाल उछाल कर मेरी चुदाई शुरू करने लगे। पापा के हर पोजीशन में मुझे अलग ही मजा आ रहा था। मेरी पहली ही चुदाई में पापा ने इतने सारे पोजीशन में मुझे चोद लिया था।
पापा लगभग 40 मिनट से मुझे चोद रहे थे और मैं दो बार झड़ चुकी थी लेकिन पापा का अभी तक पानी नहीं निकला था। पापा पोजिशन बदल बदल कर मुझे चोदे जा रहे थे और मैं बिंदास होकर अपनी पहली चुदाई का मजा ले रही थी।
इसके बाद पापा ने मुझे खड़े खड़े ही घोड़ी बना लिया और पीछे से आकर मेरी चुदाई करने लगे। इस बार पापा के धक्के इतने ज्यादा जोरदार थे कि मेरा पूरा बदन हिल गया था। मेरी गांड में फट फट करते हुए धक्के पड़ रहे थे और मेरे दूध बुरी तरह से इधर उधर उछल कूद कर रहे थे।
जल्द ही पापा ने मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया और उनका गर्म फव्वारा मेरी चूत के अंदर ही फट गया। उनके गर्म गर्म पानी से मेरी चूत पूरी भर गई थी और मेरे जांघों से होकर जमीन पर टपक रहा था। पापा ऐसे ही लंड डाले हुए मुझे बिस्तर पर लेटा दिए और मेरे ऊपर ही लेट गए।
उनका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर धसा हुआ था लेकिन जल्द ही उनका लंड ढीला होकर चूत से बाहर निकल आया। पापा मुझसे अलग हुए और हम दोनों काफी देर तक नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे। मैं बुरी तरह से थक चुकी थी और अब मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी।
पापा भी थक गए थे और फिर वे मेरे नंगे बदन से लपट कर लेट गए। मेरा तो पूरा बदन दर्द से टूट रहा था। पर मुझे ख़ुशी थी की मैंने अपने पापा से आखिर चुदवा ही लिया। फिर मैंने बाथरूम जाकर पेशाब किया और अपने नंगे बदन को आईने में देखा तो मेरे दूध और जांघ पर लाल निशान पड़ गए थे जो पापा के मसलने के कारण बने थे।
हम दोनों ही कब से चुदाई के प्यासे थे और हम दोनों को ही चुदाई की भूख थी। अब मुझे बाहर किसी लड़के की कोई जरूरत नहीं थी. मुझे घर पर ही एक अनुभवी लंड मिल गया था और इसके बारे में कभी किसी को भी पता नहीं चलेगा।
हम दोनों बाप बेटी थोड़ी देर तक इसी तरह लेटे रहे, पापा मेरी चूचियों को सहलाते रहे और मैं उसी तरह पापा के लण्ड को सहलाती रही. थोड़ी देर में पापा का लण्ड फिर से खड़ा होने लग गया. मुझे भी फिर से पेशाब लग रही थी तो मैंने बाथरूम में जाने को बोला तो पापा ने कहा कि उन्हें भी पेशाब आया है तो हम दोनों बाथरूम में जाने को उठे.
मैं तो नंगी ही थी, अब चुदाई होने के बाद मुझे शर्म आ रही थी. तो मैंने अपनी टी शर्ट उठाई तो पापा उसे पकड़ कर बोले- “प्रतीक्षा! क्या जुल्म करती हो? अब जब तक तुम्हारी मम्मी नहीं आ जाती तुम नंगी ही रहो. तुम मुझे ऐसे बहुत अच्छी लगती हो. देखो मैं भी तो नंगा ही हूँ.”
इसे भी पढ़े – बहन को पेला मामा के बारात में
मुझे शर्म लग रही थी तो पापा ने मुझे गोद में नंगी ही उठा लिया और मुझे बाथरूम में ले गए. वहां मैं बैठ कर पेशाब करने लगी तो पापा ने मुझे रोक दिया। और मुझे गोद में उठा लिया। मैंने अपनी टाँगे पापा की कमर के गिर्द जकड़ ली, पापा का लौड़ा पूरा सख्त हो चूका था. पापा ने उसे मेरी चूत के छेद पर टिका दिया और मुझे पेशाब करने को बोले। मैं तो पापा की हरकतों पर गनगना ही गयी. पापा तो चुदाई के कितने शरारतें जानते थे. मैंने उसी तरह पापा की गोद में लटके लटके ही मूतना शुरू कर दिया।
मेरा मूत सीधा पापा के लौड़े पर गिर रहा था. पापा को मेरे गर्म गर्म मूत का एहसास हुआ तो उन्होंने भी मूतना शुरू कर दिया। कि पापा का लौड़ा मेरी चूत के छेद पर टिका हुआ था तो पापा का पेशाब सीधे मेरी चूत में गिरने लगा. मुझे बड़ा अजीब लग रहा था पर मजा भी बहुत आ रहा था। जिंदगी में पहली बार किसी लौडे पर पेशाब कर रही थी और उस का पेशाब मेरी चूत में जा रहा था. दोस्तों आगे पापा ने मेरी चूत को कैसे मजा दिया ये कहानी के अगले भाग में…
प्रातिक्रिया दे