Kamuk Bahu Chudai
आजकल एक बात देखने को मिलती है कि लड़का हो या आदमी, अपनी सेक्स प्रॉब्लम को लेकर परेशान होता है। वो अपनी गर्लफ्रेंड या बीवी के सामने पूरी तरह से मर्द नहीं बन पाता। कई किस्सों (केस) में तो ऐसा भी होता है कि गर्लफ्रेंड या बीवी को नंगा करने पर ही वो 50% झड़ने पर होता है और बाद में 5-6 धक्के लगाने के बाद ही पूरा झड़ जाता है. Kamuk Bahu Chudai
और गर्लफ्रेंड या बीवी को संतुष्ट (मज़ा) नहीं दे पाता और वो समझता है कि वो पूरा मर्द नहीं है। ये बिल्कुल गलत बात है। इसमें क्या होता है कि गर्लफ्रेंड या बीवी हो, लड़की जाति को सेक्स काफी देर में चढ़ता है और जब चढ़ता है तो जल्दी उतरना मुश्किल हो जाता है। जब लड़का या आदमी को एक बार झड़ने पर पूरा आराम मिलता है तो लड़कियों को 2-3 बार झड़ने पर पूरा सुख या आराम मिलता है और वो लड़का समझ नहीं पाता।
अक्सर लड़का लड़की को चोदने के लिए तैयार करता है तो वो बहुत गर्म होता है। इसका मतलब वो अपने वीर्य (पानी) को 50% आगे ले आता है और जब लड़की चुदवाने के लिए राजी होती है तो बस 5-6 धक्कों में वो पूरा झड़ जाता है। ऐसा इंडिया के 55% आदमी या लड़कों के साथ होता है और लड़कियाँ या बीवी अधूरी रह जाती हैं और उनकी नज़र में बॉयफ्रेंड या आदमी पूरा मर्द साबित नहीं हो पाता।
पर वो कहती नहीं और कोई समझ नहीं पाता। लेकिन इसका उपाय है अगर जानना चाहो तो। ऐसी कई बीमारियों का इलाज होता है और वो भी बिना किसी खर्च के (बस थोड़े से रुपये का खर्च होता है)। पर इस चक्कर में पड़कर कई लोग बाज़ार में बिकने वाली सेक्स मेडिसिन पर हज़ारों रुपये खर्च करते हैं। अगर मैं आपकी कुछ मदद कर सकूँ तो मुझे खुशी होगी। आप मुझे अपनी बात बता सकते हैं। सॉरी अगर किसी के दिल को ठेस पहुँचा हो तो।
अब मैं आपके सामने के ऐसे ही प्रॉब्लम वाला एक ई-मेल रखता हूँ। ये बात मिडिल क्लास वाले एक मेहनती (हार्डवर्कर) सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति की जो काफी शर्मीला था। बस अपने काम से काम रखना, ज़्यादा किसी से बात नहीं करना। सुबह ऑफिस में जाना और शाम होते ही सीधे घर आना ये उसका रोज़ का सिलसिला था।
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उसका नाम राकेश है। वो किसी प्राइवेट एक्सपोर्ट ऑफिस में काम करता है। ऑफिस में भी वो बॉस का चहेता है। इसलिए सारे बड़े काम हों तो उसे आउट ऑफ स्टेट बाहर भी जाना पड़ता। उसके घर में माँ-बाप और एक छोटी बहन थी। उसके फादर भी एक प्राइवेट ऑफिस में काम करते हैं।
अब एक दिन एक अच्छे खानदान से राकेश के लिए एक शादी का प्रस्ताव आता है। लड़की वाले भी मिडिल क्लास के हैं पर सुखी थे। लड़की का नाम दीक्षा था। दिखने में वो बहुत साँवली थी पर बहुत सेक्सी और आकर्षक थी। गुब्बारे के समान तने हुए बड़े और सख्त बूब्स थे। कमर का भाग पतला और गाँड के भाग ऊपर की ओर आता था।
जब वो चलती थी तो उसकी लचकदार गाँड ऐसे हिलती जैसे तराजू के दो पल्ले कभी ऊपर कभी नीचे और पैरों में घुँघरू वाला झांझर पहनती। ऊफ्फ्फ जब छाँन छ्हाम्म छ्हाँन छ्हाँन करके चलती और साथ अपनी गाँड भी ऊपर-नीचे हिलाती तो लोगों का लंड हिलने लगता। उसके दो बड़े-बड़े तने हुए बूब्स भी उसका साथ देते साथ में उछलते रहते। लगता जैसे अभी बाहर आएँगे। इतनी कातिल और भरावदार लड़की थी दीक्षा।
दीक्षा की शादी राकेश के साथ हो गई। सुहागरात के दिन राकेश अपने शर्मीले व्यक्तित्व (पर्सनालिटी) के कारण काफी तकलीफ में था। वो चोदने की शुरुआत नहीं कर पा रहा था जबकि इधर दीक्षा सुहागरात का इंतज़ार करती थी। राकेश चुपचाप था। वो थोड़ा डरा और थोड़ा घबराया था।
इसलिए दीक्षा ने ही रूम की लाइट ऑफ कर दी और नाइट लैंप जला दिया और कहा—अ-. जी क्या हुआ। राकेश ने कहा कुछ नहीं। तो दीक्षा ने जानबूझकर पहल की और राकेश को चिपक गई। वो धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतारने लगी। बाद में वो अपने चूड़ियों भरे दोनों हाथों से घाघरा अपनी जाँघों तक ऊँचा किया और अपनी चुत को खुजलाते हुए बोली— देखो ना कुछ काट रहा है।
और ऐसे करते ही उसने घाघरा उतार दिया और चुत को ज़ोर से मसलने लगी। धीरे-धीरे वो अपना ऊपर का ब्लाउज़ उतार दिया, सिर्फ़ ब्रा में हो गई। सोचिए जब साँवली लड़की के चूड़ियों भरे हाथ, पैरों में घुँघरू वाले झांझर हों, साँवली सी गाँड जो इतनी भरावदार और लचकदार हो जिसमें चड्डी भी छोटी पड़ती हो मानो अभी फट पड़ेगी और इतने बड़े और तने हुए बूब्स कैसे लगती होगी।
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दीक्षा ने अपने हाथों से अपने पूरे बदन को सहलाना और मसलना शुरू किया। कभी अपनी गाँड को हिलाती कभी कूद-कूद कर अपने बूब्स को हिलाती। ये देख राकेश को सेक्स चढ़ने लगा। उसने दीक्षा की चड्डी उतार दी। अपने हाथ से उसकी चुत को सहलाने लगा। फिर ब्रा को खींचकर उतार दिया और दीक्षा के बड़े-बड़े साँवले से बूब्स धन्न से बाहर आ गए।
राकेश ये देख उनको चूसने लगा। उसकी निप्पल को दाँत से काटने लगा। उसका एक हाथ तो दीक्षा की चुत पर ही था। वो तेज़ी से चुत को सहलाता और मसल रहा था और बोला—अब खुजली कम हो गई। तो फ़ौरन दीक्षा ने कहा—नहीं लगता है इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। तो राकेश ने कहा—ठीक है लगा देते हैं। और वो दीक्षा पर चोदने के लिए चढ़ गया।
उसने दीक्षा की चुत में अपना लंड घुसाया। थोड़ा गया फिर कोशिश में पूरा गया। वैसे ही दीक्षा के मुँह से आवाज़ आई—आआह्ह्ह। फिर वो धक्का लगाने लगा। जैसे ही दीक्षा की चुत में लंड का धक्का लगता उसकी पैरों में घुँघरू वाली झांझर छ्हाँन से बोलती और वो अपने चूड़ियों भरे हाथों से राकेश की पीठ और सर के बालों को सहलाती और ज़ोर से कसती। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मगर राकेश पहली बार किसी लड़की को चोद रहा था और वो भी इतनी सेक्सी और भरावदार शरीर वाली। इसलिए वो काफी गर्म हो चुका था। बस 8-9 धक्के में ही राकेश पूरा झड़ गया और दीक्षा का सेक्स अधूरा रह गया। दीक्षा ने दोबारा कोशिश की। वो राकेश के लंड को अपने हाथों से मसलने लगी तो फिर राकेश में जोश आया लेकिन इस बार वो 10-12 धक्कों में पस्त हो गया और सो गया।
इस तरह शादी के 2 महीने गुज़रने को थे और दीक्षा को राकेश से पूरा सेक्स का सुख नहीं मिल पाता। वो हमेशा अधूरी रह जाती थी। एक दिन दीक्षा नहाकर बाहर आई। उसके बालों में पानी भरा था और वो पानी उसकी गाँड पर गिर रहा था और दीक्षा ने अंदर की चड्डी नहीं पहनी थी।
सिर्फ़ नाइटी (जो रात को औरत पहनती है) और वो भी चिकनी (सिल्क) की थी। पानी की वजह से उसकी गाँड से चिपक गई और बड़ी और भरावदार गाँड होने की वजह से जब चलती तो लगता वो नंगी चल रही है। वैसे में दीक्षा के 42 ईयर ओल्ड ससुर यानी राकेश के फादर की नज़र दीक्षा और उसकी लहरती, उछलती गाँड पर पड़ी तो उनकी जवानी लौट आई।
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उनमें वासना (सेक्स) जाग उठी। उनका लंड हिलने लगा। वो दीक्षा की गाँड को छूना चाहते थे पर कैसे। ससुर ने अपने आप पर कंट्रोल किया। दीक्षा आईने के सामने थी। वैसे में वो उसके पीछे खड़े ससुर को काँच में से देख रही थी कि दीक्षा के ससुर उसकी भरावदार और नरम मुलायम तकिए के समान गाँड को देख रहे थे।
तो दीक्षा ने भी जानबूझकर अपनी नरम और लचकदार गाँड हिलाकर दो-चार ठुमकों जैसी हरकत की। दीक्षा के ससुर वो देखकर और भी हवस में लीन हो गए। पर ये बात ससुर को ठीक नहीं लगी। वो दीक्षा की इज़्ज़त करते थे पर साथ ही साथ वो दीक्षा को चोदने का मज़ा भी लेना चाहते थे।
इधर दीक्षा को अपने ससुर की सेक्स (वासना) भरी नज़रों से सेक्स चढ़ने लगा था। अचानक उसको ख्याल आया कि वो क्या कर रही है और वो अपने रूम में जाकर राकेश को चिपकने लगी। पर ऑफिस के लिए देर हो रही है कहकर वो चला गया और दीक्षा चुत मसलते किचन में चली गई।
इधर दीक्षा को चुदाई का पूरा सुख न मिलने की वजह से दीक्षा अपने ससुर की वासना भरी आँखों के बारे में सोचने लगी थी। एक दिन दीक्षा वही सिल्क वाली नाइटी पहनकर कपड़े धो रही थी। उतने में दीक्षा का ससुर बिल्कुल उसके सामने आकर खड़ा हो गया। जब दीक्षा झुकती तो उसके भरावदार बूब्स आधे से ज़्यादा बाहर आते।
पीछे घूमती तो दीक्षा की नाइटी पानी की वजह से दीक्षा की गाँड से चिपक जाती और पूरी गाँड नज़र आती। ये सब देखकर दीक्षा के ससुर के मुँह में पानी आ रहा था। लंड खड़ा हो रहा था पर दीक्षा को ये सब नहीं पता। जब दीक्षा की नज़र ससुर पर पड़ी तो उसने भी ससुर को दिखाते हुए नाइटी को जाँघों तक ऊपर चढ़ा लिया.
और उनके सामने बैठकर कपड़े धोने लगी और जब वो कपड़े को ब्रश से धक्का लगाती तो उसके बड़े और सख्त बूब्स हिलते ऐसे ऊपर-नीचे जाते कि ससुर के मुँह से आआह्ह निकलती। ये सब करके वो अपने ससुर की हिम्मत बढ़ा रही थी। दीक्षा सोचने लगी कि अब वो क्या करे।
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राकेश उसको पूरा चोद नहीं पाता था और दीक्षा कड़क चुदाई चाहती थी क्योंकि वो तो था ही शांत और शर्मीला व्यक्ति। इसलिए दीक्षा कुछ नहीं बोल पाती थी और इधर दीक्षा के ससुर की हिम्मत बढ़ रही थी। अरे हिम्मत काहे की वासना बढ़ रही थी। वो तो अब दीक्षा को मन ही मन चोदने भी लगे थे।
जब भी दीक्षा उनके सामने आती तो वो आँखों से उसके बूब्स को चूमते, उसकी चुत को चूमते। ये देखकर दीक्षा शरमा जाती और हल्की स्माइल देकर अपने रूम में चली जाती। आख़िर वो करती भी क्या। ससुर की वासना भरी नज़र से उसकी बूब्स की निप्पल कड़क हो जाते। दीक्षा की चुत में चुदाई की खुजली हो जाती। इसलिए वो चुप थी।
इतने में देखिए राकेश को बाहर आउट ऑफ स्टेट जाना हुआ और वो भी 8 दिनों के लिए और दीक्षा चाहे अधूरी ही सही पर राकेश से चुदाई बिना नहीं रह सकती थी। वो घबराने लगी—अब क्या होगा। इधर दीक्षा के ससुर की भी नज़र दीक्षा को चोदने पर आ चुकी थी।
राकेश के जाते ही दीक्षा ने अपने माँ-बाप के घर जाने को कहा ताकि सेक्स चढ़ने पर वो अपने ससुर से चुदाई न करवा ले। लेकिन सास ने प्यार से मना किया—खा बेटी, छुटकी (राकेश की छोटी बहन) की एग्ज़ाम चल रही है और मेरी भी तबियत ठीक नहीं है। तुम न जाओ तो मेहरबानी होगी। दीक्षा मान गई और नहीं गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दूसरे दिन सुबह जब दीक्षा किचन में थी उसके ससुर ने मौका पाते ही दीक्षा की लचकदार और ऊपर की ओर उठती गाँड को हाथों से धक्का दिया कि वो तुरंत हिलने लगी। दीक्षा अपने ससुर को देखने लगी तो ससुर ने कहा—गलती से हाथ लग गया है। तो दीक्षा ने भी कुछ नहीं बोला और बर्तन धोने लगी और जब कपड़े सुखाने के लिए टेरेस (छत) पर गई तो उसका ससुर भी पीछे आया।
तो दीक्षा ने ये देखके रस्सी पर कपड़े सुखाने के बहाने वो उछल-उछल कर कपड़े सुखाने लगी जैसे कि रस्सी बहुत ऊँची हो और जब वो उछलती तो उसके बड़े और भरावदार बूब्स इतने बाहर आते कि आधे से ज़्यादा बाहर उछल पड़ते। ये देख दीक्षा के ससुर का लंड कड़क हो गया। अब वो बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
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ससुर ने दीक्षा से कहा—“दीक्षा ये सब जानबूझकर कर रही हो।” तो दीक्षा को अब मौका मिला था। उसने कहा—“क्यों पापा जी बुढ़ापे में भी तुम्हारा लंड खड़ा होता है।” बस फिर क्या था। दीक्षा के ससुर ने फ़ौरन अपनी लुंगी उठाकर अपना खड़ा हुआ लंड दीक्षा को दिखाया और कहा—“इतना काफ़ी है या और भी दिखाऊँ।”
दीक्षा ने पहली बार किसी 42 ईयर ओल्ड बुड्ढे का लंड देखा था और वो भी इतना ज़्यादा मोटा। ये सब के बाद वो वहाँ से चली गई। शाम को जब दीक्षा खाना बना रही थी वैसे में दीक्षा के ससुर अपनी हिम्मत एक करके उसके पीछे आकर अपनी लुंगी उठाई और अपना खड़ा हुआ लंड से दीक्षा की नरम मुलायम बिल्कुल तकिए के समान उभरी हुई गाँड के बीच वाली जगह (जहाँ गाँड का काना होता है) पर टिका दिया और एक धक्का भी जमा दिया।
दीक्षा एक ही धक्के में पूरी हिल गई। उस वक्त उसे वो धक्का अच्छा भी लगा पर दीक्षा को ससुर से चुदाई करवाना ठीक नहीं लग रहा था। इसलिए भारी आवाज़ में ससुर से कहा—“यहाँ से चले जाओ वरना ठीक नहीं होगा।” ससुर ने भी प्यार से कहा—“ठीक है बेटा पर तुमने ही कहा था अब कहो कैसा लगा।” और वो चला गया।
अब इधर दीक्षा को राकेश की याद आने लगी मतलब कि वो भी वासना (सेक्स) में आने लगी पर राकेश से भी उसको पूरा सुख नहीं मिल पाता। वो हमेशा अधूरी रह जाती और एक तरफ़ उसको ससुर का लोहे जैसा लंड का एक धक्का बेक़रार कर रहा था। वो सोच में पड़ गई। उसने सोच लिया कि वो कल से अपने ससुर को कुछ नहीं बोलेगी। चुप रहेगी और वो जैसा करेंगे करने देगी।
दूसरी सुबह दीक्षा की सास और छुटकी (राकेश की बहन) हॉस्पिटल चले गए। अब घर में जवान बहू अकेली ही थी। दीक्षा खाना बनाने की तैयारी कर रही थी। इतने में उसका ससुर आया। उसने दीक्षा को घर में अकेला पाया तो पूछा—“सब कहाँ गए हैं।” दीक्षा ने कहा—“हॉस्पिटल।” और अपने काम में लग गई और मन ही मन अपने ससुर का इंतज़ार करने लगी कि वो आएँ और दीक्षा के बदन से छेड़खानी करें।
पर दीक्षा ने उनको धमकाया था इसलिए वो शांत और जैसे कुछ भी न हुआ हो ऐसे करने लगे। दीक्षा ने ससुर को शांत देखा तो वो खुद ही उनके पास गई और चाय का पूछने लगी तो ससुर ने हाँ कहा। तो अपनी गाँड दिखाते हुए जानबूझकर उछल-उछल कर चलने लगी जिसमें उसके पैरों के झांझर ज़ोर से छ्हाम्म…छ्हाँन करने लगे और अपनी उभरी हुई लचकदार गाँड को और हिलाते हुए चलने लगी।
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इधर ये सब देखकर दीक्षा के ससुर का सब्र टूट गया। वो फिर दीक्षा के पास किचन में जाकर दीक्षा की पीठ पर अपनी उँगलियों को फेरने लगा लेकिन दीक्षा कुछ नहीं बोली। धीरे-धीरे ससुर ने दीक्षा की नाइटी की चेन उतारी। दीक्षा फिर भी चुप थी। अब ससुर अपने दोनों हाथ दीक्षा की नाइटी के अंदर घुसाए तो देखा दीक्षा ने ब्रा नहीं पहनी थी।
वो अंदर से नंगी थी। हाथ घुसाते ही ससुर ने कहा—“कितने बड़े और कड़क हैं। मेरे तो हाथ में भी नहीं आ रहे हैं। कितने बड़े हैं तुम्हारे बूब्स।” लेकिन दीक्षा चुपचाप चाय बनाने में लगी थी। ससुर हैरान था—दीक्षा आज क्यों कुछ बोल नहीं रही। उसने दीक्षा के कड़क और कातिल भरावदार बूब्स पीछे की तरफ़ से ही दोनों हाथों से दबाना शुरू किया।
कभी हाथ के अंगूठे और उँगली के सहारे से वो निप्पल खींचता तो कभी दोनों हाथों से खूब ज़ोर से दबाते तो दीक्षा के मुँह से आआह्ह निकलती और ज़ोर-ज़ोर से साँसें भरने लगती। अब धीरे-धीरे दीक्षा को मज़ा आ रहा था इसलिए वो चुप थी। ऐसे में दीक्षा ससुर की तरफ़ मुँह करके पलटी और ससुर की आँखों में देखकर बोली—“पापा जी क्या आप मुझे चोदना चाहते हो।”
तो उसके ससुर ने कहा—“अरे मैं इतने दिनों से तुमको चोदने के लिए तो पीछे पड़ा हूँ पर क्या तुम मेरे लंड से चुदवाओगी।” बस इतना सुनते ही दीक्षा ने अपनी नाइटी इस तरह से नीचे की कि उसके बड़े और भरावदार बूब्स ही बाहर आए। ये देखकर दीक्षा के ससुर के मुँह में पानी आ गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
वो तो फ़ौरन उसे दबाने लगे। एक हाथ से दबाते दूसरे को होठों से चूसते। उनकी मूँछें थीं इस वजह से जब वो दीक्षा के बड़े से बूब्स की निप्पल चूसते तो उनकी मूँछों के बाल दीक्षा के बूब्स की आजू-बाजू की नाज़ुक चमड़ी में घुसते तो दीक्षा को चुभन भी होती और एक अजीब सी गुदगुदी होती और वो ज़ोर से हँस पड़ती। हँसते-हँसते आवाज़ आती— आआह्ह्ह… ओउह्ह्ह… आआउउवाआह्ह्ह।
दीक्षा को दर्द होने लगा लेकिन ससुर के मज़बूत हाथों से अपने बूब्स दबवाने और चुसवाने में दीक्षा को मज़ा आ रहा था। पर जब उसके ससुर हद से ज़्यादा ज़ोर से दबाना और चूसना शुरू किया तो वो रहे नहीं पाई और बोली—“पापा जी प्लीज़ थोड़ा धीरे से दबाओ ना। दर्द होता है। देखो ना मेरे बूब्स में अब तो खून उभर आया है।”
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तो उसके ससुर ने उसको कहा—“क्यों जब मेरा लड़का दबाता है तो कुछ नहीं होता।” इस पर दीक्षा ने कहा—“क्या पापा जी तुम्हारा लड़का तो कुछ भी नहीं करता। वो तो ठीक से चोद भी नहीं पाता। तो क्या ख़ाक मेरे इतने बड़े बूब्स दबाएगा। उसको तो किस करना भी नहीं आता।” ये सुनते ही दीक्षा के ससुर ने उसके नाज़ुक और कोमल होठों को अपने जड़े और मूँछों भरे होठों से दबा दिया।
इधर दीक्षा ने भी जवाब में ससुर की ज़ुबान को अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। दोनों हाथों से वो दीक्षा के बड़े और भरावदार बूब्स दबाते और दीक्षा को किस करते हुए अपनी ज़ुबान भी चुसवाते। अब दीक्षा के ससुर की मनपसंद जो दीक्षा की गाँड थी उन्होंने वहाँ हाथ ले जाना शुरू किया।
दीक्षा की नाइटी को उसकी गाँड तक ऊँचा किया और पीछे से जब हाथ दीक्षा की गाँड के अंदर डाला तो क्या था— दीक्षा ने अंदर की चड्डी नहीं पहनी थी। उसके ससुर ने तुरंत पूछा— “क्या बात है बेटी आज तो अंदर से पूरी नंगी हो।” तो दीक्षा ने अपने दोनों चूड़ियों भरे हाथ अपने ससुर की पीठ पर फेरते हुए कहा— “मैंने तो कल रात को ही तुमसे चुदवाने का मन बनाया था और तुम्हारे लिए आज मैं अंदर से पूरी नंगी हूँ।”
और कहते हुए ससुर के होठों को अपने होठों में लिया और अपने चूड़ियों भरे दोनों हाथों से ससुर को अपने बाहों में कस लेती तो कभी एक हाथ ससुर की लुंगी के अंदर खड़ा हुआ लंड पर हाथ फेरती। इधर जवाब में ससुर ने अपने एक हाथ को दीक्षा की गाँड पर फेरने लगा और ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ की तरह थपने लगा। जैसे ही वो हिलती वो और ज़ोर से मारता।
उस पर दीक्षा कहती— “बस पापा जी अब जलन हो रही है।” तो ससुर हँसते हुए दीक्षा को अपने दोनों हाथों से अपने शरीर के साथ ज़ोर से कस लेता। अब ससुर अपनी उँगलियों से दीक्षा की गाँड का सुराख वहाँ उँगली फेरने लगा और जैसे ही फेरता दीक्षा को गुदगुदी होती और वो एक अजीब तरह से हँस पड़ती और इतरा-इतरा (लाड़-प्यार) कर अपने ससुर की बाहों में उछलती।
अब दीक्षा ने कहा— “पापा जी अब और मत तड़पाओ। मैं बरसों से भूखी हूँ।” तो ससुर ने कहा— “हाँ बेटा अब मैं भी चोदना चाहता हूँ।” कहते ही उसने दीक्षा की नाइटी को पीठ तक ऊपर चढ़ा दिया और पूरी नंगी करके दीक्षा से कहा— “मैं तुम्हें तुम्हारी गाँड की तरफ़ (डॉगी, कुत्ते वाली स्टाइल) से चोदना चाहता हूँ।”
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तो दीक्षा ने कहा— “पापा जी अब ये शरीर तुम्हारा है। चाहे जहाँ से चोदो पर जल्दी चोदो।” बस फिर क्या था। दीक्षा ने दोनों हाथों से किचन में रखी हुई कुर्सी पकड़ ली। फिर बड़ी और लचकदार मानो तकिए समान नरम मुलायम गाँड अपने ससुर के हवाले कर दी। ससुर ने दीक्षा की गाँड की तरफ़ से दीक्षा की चुत में लंड डाला और दीक्षा के मुँह से आआह्हाआ…उउईईम्माआ निकल गई।
इधर ससुर पूरी मस्ती में चोदने लगे। जब ससुर लंड से धक्का लगाते तो दीक्षा की भरावदार और उभरी हुई पूरी गाँड तेज़ी से हिलती और प्पोआओक्क…प्पोआओक्क आवाज़ आती। जैसे ही उसकी गाँड हिलती वो थप्पड़ की तरह ज़ोर से थपते। ससुर के मज़बूत धक्के में दीक्षा पूरी उछल जाती और पैरों की घुँघरू वाली झांझर ज़ोर से बोलती—छ्हाँन्न छ्हाँन्न छ्हाम्म…।
ससुर के इतने तेज़ धक्के लगते कि हाथों की चूड़ियाँ भी ख्खाँन…ख्खाँन… बोलने लगतीं। जब दीक्षा के ससुर दीक्षा की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर दीक्षा की गाँड की तरफ़ से दीक्षा की चुत में धक्का लगाते तो दीक्षा को ससुर का लंड अपने पेट तक महसूस होता था। दीक्षा ने इतनी कड़क चुदाई कभी नहीं करवाई थी।
वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी— आआह्ह्ह… ओह्ह्व्व… उउह्ह्ह्म्म उउह्ह्ह्म्म। पर उसको मज़ा भी बहुत आ रहा था इसलिए वो सब कुछ खुशी-खुशी बर्दाश्त कर रही थी। दीक्षा बहुत दिनों बाद पूरी झड़ रही थी। दीक्षा की चुत का पानी निकल रहा था। इतने में ससुर भी झड़ने को था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दोनों इतनी मस्ती में और चुदाई में खोए हुए थे कि ससुर ने दीक्षा की चुत में ही लंड का पानी निकाला। दोनों ज़ोर से साँसें भरते हुए आआह्हाआ… ह्ह्ह्म्म… ह्ह्हीउउम्म करने लगे थे। दीक्षा के ससुर ने कहा— “क्या तुम मेरा लंड मुँह में लेना चाहोगी।” तो दीक्षा ने हाँ कहा। दीक्षा के लिए पहली बार था। उसने कभी लंड मुँह में लिया नहीं था।
फिर भी दीक्षा ने ससुर का लंड मुँह में लिया। ससुर का लंड दीक्षा और ससुर के पानी में भीगा था। पानी से गीला लंड दीक्षा के मुँह में अजीब स्वाद दे रहा था और दीक्षा को पानी का स्वाद बहुत पसंद आया। वो धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह में लेकर उउम्म्ह्ह उउम्म्ह्ह आवाज़ें निकालकर चूस रही थी।
बाद में दीक्षा अपने ससुर का लंड पकड़कर कहा—“पापा जी अब कब चोगे।” तो ससुर ने कहा— “तुम कहो तो आज रात को ही फिर से चोदूँगा।” दीक्षा ने कहा—“मैं इंतज़ार करूँगी।” अब दोनों ने जल्दी से कपड़े पहने और अपने काम में लग गए। ठंड बहुत बढ़ चुकी थी इसलिए रात को सब जल्दी सो गए।
क़रीब 11:15 बजे दीक्षा का ससुर उसके कमरे में आया तो दीक्षा कंबल ओढ़े थी। जब ससुर को देखा तो कंबल हटा दी। वो पूरी नंगी थी। उसने ससुर को देखते ही ससुर को चिपक गई। ठंड बहुत थी इसलिए जल्दी से ससुर की लुंगी और कोट उतारकर उसे नंगा कर दिया और अपने कंबल में ले लिया।
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दोनों (हस्बैंड-वाइफ़) की तरह एक ही कंबल में हो गए। अब दीक्षा ने जी भरके अपने ससुर का लंड चूसा। लंड के नीचे गोटी भी चूसती और ससुर बस ह्ह्हाआआ… आह्ह्हाआआ… करता। जब दीक्षा का लंड चूसकर मन भर गया वो अपने पैर जिसमें घुँघरू वाली झांझर थी आसमान की ओर पूर्व-पश्चिम को करके सो गई।
फिर ससुर अपने पूरे जोश से दीक्षा के बड़े कड़क और भरावदार बूब्स पकड़े और दीक्षा के शरीर पर चोदने के लिए चढ़ गया। ससुर ने अपने दोनों मज़बूत हाथों से दीक्षा के बूब्स को पकड़ा था। अपना सारा शरीर का और दोनों हाथों का वजन वो दीक्षा के कड़क और बड़े बूब्स पर डाले हुए अपना लंड दीक्षा की चुत में घुसाया और कड़क और बड़े बूब्स पकड़ते हुए धक्के लगाने लगा।
जब भी धक्का लगाता तब दीक्षा की झांझर…छ्हाँन…छ्हाम्म के बोलती। इस पर दीक्षा दर्द भरी पर मीठी आवाज़ में कहती— “तुम्हारा लड़का जब मुझे चोदता है तो कभी मेरी झांझर ऐसी बोलती न थी।” तो ससुर ने कहा— “क्यों।” दीक्षा ने कहा— “वो इतनी ज़ोर से और मेरे पेट तक धक्के लगाता ही नहीं। तुम्हारा हर धक्का मेरे पेट तक आ रहा है। प्लीज़ पापा जी और अंदर तक ले जाओ।”
बस फिर ससुर इतनी ज़ोर से धक्का लगाता कि दीक्षा पूरी ऊपर उछल जाती और मज़ा लेती और अपने दोनों टाँगों को ससुर की गाँड पर फँसाकर अपने ससुर के धक्कों के साथ ऊपर-नीचे होती। दोनों एक कंबल में दीक्षा नीचे और ऊपर ससुर चोदता हुआ। सोचिए कैसे लगता होगा।
पर दोनों इतने मस्ती में होते कि ससुर ने हमेशा दीक्षा की चुत में अपना पानी निकाला। अब तो क्या था। जब मौका मिलता दीक्षा का ससुर दीक्षा को चोद लेता। जैसे अपनी बीवी (राकेश की माँ) को भी चोदा नहीं था। वैसे वो दीक्षा हर तरीके से चोदता।
एक दिन टेरेस पर कपड़े सुखाते वक़्त दीक्षा के ससुर ने दीक्षा को पकड़ लिया और उसका घाघरा ऊँचा किया और अपनी लुंगी उठाकर पीछे से (डॉगी कुत्ता स्टाइल) से चोद रहा था। दीक्षा भी पीछे की ओर उछल-उछल कर ससुर को मदद कर रही थी। दोनों मस्ती में चुदाई कर रहे थे। इतने में राकेश ने दोनों को पकड़ लिया। राकेश पर आसमान फट गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके पैरों के नीचे ज़मीन हट गई और वो दोनों भी घबरा गए। दीक्षा अपना घाघरा नीचा किया और वहाँ से भागकर रूम में आई और राकेश के फादर चुपचाप वहीं खड़े रहे और चले गए। लेकिन राकेश क्या करता। वो फूट-फूट कर रोने लगा। रोते-रोते वहीं बैठ गया। क़रीब 5 घंटे तक अकेले टेरेस पर बैठाकर रोता रहा। फिर शाम को अपने रूम आया। वहाँ दीक्षा रो रही थी।
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राकेश ने देखा और पागलों की तरह देखता रहा पर वो कुछ नहीं बोल पाया। क्या बोलता। उसका अपना बाप ने उसका सब कुछ छीन लिया था। बस दीक्षा से इतना पूछा— “ये सब कैसे और कब से चल रहा है।” तो दीक्षा ने पूरी बात बताई शुरू से आख़िर तक। ये सुनकर वो रोने लगा। वो कुछ भी करता तो पूरे खानदान और दुनिया में थू-थू होती। सब लोग मज़ाक बनाते और नीच नज़रों से देखते। वो अंदर ही अंदर घुट रहा था कि पता चला कि दीक्षा पेट से है (प्रेग्नेंट)। उसे यक़ीन है ये उसका बच्चा नहीं है।
बताओ दोस्तों अब वो क्या करे। वो 2 बार ज़हर पीने की कोशिश कर चुका है। एक तरफ़ अपना सगा बाप है दूसरी तरफ़ बीवी और पूरा समाज (खानदान-दुनिया)। क्या करे। मेरे तो कुछ समझ नहीं आ रहा। अब आप बताओ। बच्चा गिराता है तो खानदान वालों के अजीब सवाल खड़े होंगे। दीक्षा को तलाक़ देता है तो भी वो फँस जाएगा। दोस्तों अगर ये किस्सा पढ़ो तो इसका ज़रूर जवाब देना कि आख़िर गलती किसकी है— राकेश की, उसके बाप की या दीक्षा की। मुझे इंतज़ार रहेगा…
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