XXX Didi Ko Period Me Choda
मैं एक 20 साल का लड़का हूँ। ऊँचाई 6 फुट और भरा हुआ जिस्म। मैं इनसेस्ट सेक्स पर पूरा विश्वास रखता हूँ। पर बहुत लोगों को यह पसंद नहीं है, वो लोग आगे न पढ़ें। जब अगर परिवार में ही माँ, बहन, चाची, कजिन, मामी, बुआ हो तो लोग बाहर जा के अपनी इच्छा क्यों पूरी करें। XXX Didi Ko Period Me Choda
घर परिवार में कभी न कभी ऐसी घटना आ जाती है जो आपको अंदर से झकझोर के रख देती है। जैसा गलती से आप बहन को कपड़े बदलते देख लेते हैं या फिर किसी औरत को अपने बच्चे को दूध पिलाते देख लेते हैं। ऐसी स्थिति में आपका लंड तन जाता है और आप में लस्ट जग जाता है। मैं एक ऐसी ही घटना आपको बताने जा रहा हूँ।
मेरे घर में पापा, मम्मी और मेरी दो बड़ी बहनें हैं। मैं 20 साल का हूँ और मेरी दोनों बहनें मुझसे 2 साल बड़ी हैं। एक बार मेरी माँ ने मुझे दुकान से सामान लाने को कहा और हाथ में लिस्ट थमा दिया। मैं दुकान जा ही रहा था कि मेरी बहन ने माँ को कहा- “माँ, मेरा खत्म हो गया है…”
माँ समझ गई पर मैं नहीं समझा। मेरी बहन ने लिस्ट ले लिया और उसमें एक विस्पर लार्ज लिख दिया। मैं दुकान चला गया और सारे सामान खरीद लाया। मैंने नोटिस किया कि दुकानदार ने विस्पर को एक पेपर में लपेट कर दिया। घर आते ही मेरी बहनें (प्रिया और अंकिता) दोनों आकर विस्पर को ले कर कहीं रख दिया। मेरे मन में ये बात खटकने लगी कि ये क्या चीज़ है और इसका क्या मतलब है। मैं जान-बूझ कर रात में अपनी बहन से पूछा- “दीदी, वो क्या चीज़ था जो पेपर में था?”
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पहले तो दीदी घबरा गई फिर बोली- “ये तेरे मतलब का नहीं है, जा पढ़ाई कर।”
पर दीदी नहीं बताई। एक बार घर पर कोई नहीं था। मैंने रात में अपनी दोनों बहनों को चाय बनाकर दिया और जान-बूझ कर फिर से वही सवाल किया। इतने में अंकिता ने मुझे बता दिया कि- “मेरा पीरियड्स चल रहा है और इसकी ज़रूरत होती है।”
मैंने कहा- “ये आप अपनी पैंटी में लगाते हो ना…”
वो चौंक गई और बोली- “हाँ…”
उस दिन से हम भाई-बहन ज्यादा घुल-मिल गए थे। प्रिया 21 साल की बहुत सेक्सी और 34 इंच ब्रेस्ट वाली लड़की थी, और अंकिता का गांड बहुत मस्त था पर उसके बूब्स छोटे थे। मुझे अपनी बहन पर सेक्स डिज़ायर्स आने लगे थे। एक बार विंटर के सीजन में हम लोग सब गाँव गए।
पापा और मम्मी गाँव से और कहीं किसी रिश्तेदार से मिलने चले गए। बस मैं, प्रिया, अंकिता अपने गाँव में रुक गए। काफी ठंड थी और गाँव में इलेक्ट्रिसिटी नहीं होने के कारण पूरा अंधेरा था। प्रिया ने अंकिता के कान में कुछ कहा… पर वो दोनों डर गईं… और बोली- “तू अकेले जा… मैं नहीं जाऊँगी, मुझे डर लगता है…”
मैंने उनसे पूछा- “ऐसी क्या बात है… तुमलोग के बीच…”
अंकिता ने कहा- “प्रिया को टॉयलेट जाना है… और उसे डर लग रहा है…”
आपको बता दूँ कि गाँव में हमलोगों का टॉयलेट रूम थोड़ा दूर में था… और वहाँ काफी सन्नाटा था… मैंने मौके का फायदा उठा कर प्रिया को मेरे साथ चलने को कहा। पहले तो वो नहीं मानी… पर बाद में मुझे अपने साथ ले गई… वो सलवार समीज और एक स्वेटर पहने हुई थी… मैं लैंप ले कर गया…
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वो टॉयलेट में अंदर जा कर गेट लगा ली। गेट पुराना होने के कारण उसमें बहुत छेद थे। मैं अंदर झाँका तो देखा कि प्रिया अपने पैजामे का नाड़ा खोल रही थी… और फिर पैजामा नीचे कर के अपनी रेड कलर की पैंटी भी नीचे कर के बैठ कर पेशाब करने लगी। आपको बता दूँ कि लड़कियाँ जब भी पेशाब करती हैं तो एक अजीब तरह की मदक आवाज़ आती है…
और वैसी ही आवाज़ मेरे कानों में गूँज रही थी… मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर वो बाहर आ गई। हम वापस रूम चले गए… ये घटना के बाद मेरा जीवन बदल गया। मैं दिन-रात प्रिया को इरोटिक ख्वाबों में लाकर चोदने लगा… और मज़े लेने लगा… एक बार फिर पापा-मम्मी किसी शादी में गए… घर में मैं, प्रिया और अंकिता ही थे… मैंने सोचा अपने ख्वाब को पूरा करने का यही मौका है…
ये गर्मी का वक्त था। प्रिया एक स्कर्ट पहने हुई थी… उसका टॉप में कांख पसीने से बिलकुल भींग चुका… और साइड से उसकी चूचियों का साइज दिख रहा था… रात को सोने समय मैं प्रिया के अलमारी से उसकी एक पैंटी चुरा कर ले आया और उसे अपने पैंट में रख कर प्रिया और अंकिता के बीच में सो गया… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रात में मैंने अपना ८ इंच का लंड निकाल कर उसकी पैंटी से रगड़ने लगा… इतने में अंकिता की नींद खुल गई। मेरे हाथ में पैंटी देख कर वो सबसे पहले अपनी स्कर्ट चुक कर देखी… शायद उसे लगा मैंने सपने में उसकी पैंटी खोल दी हो… वो घबरा गई और बोली- “ये तुम क्या कर रहे हो… तुम्हें क्या चाहिए… मैं सब कुछ हल्ला कर दूँगी? तुम जाओ यहाँ से?”
मैंने कहा- “हल्ला मत करो मेरी प्यारी बहन… ये तो जिंदगी का मज़ा है… अब हम बच्चे नहीं रहे, हमें मेच्योरिटी आ गई है। कुछ डिज़ायर्स आ गए हैं… ये डिज़ायर तो शादी के बाद पूरी होगी ही, पर क्यों न उसका डेमो हम आज ही देख लें…”
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वो चीखी- “ये क्या कर रहे हो? मैं चिल्लाऊँगी!”
मैंने कहा- “शशश… मत चिल्लाओ। ये तो नॉर्मल है।”
प्रिया भी जाग गई। मैंने दोनों को समझाया-
“देखो, हम बड़े हो गए हैं। बॉडी में चेंजेस हैं। डिज़ायर्स हैं। बाहर जाकर रिस्क क्यों? घर में ही ट्राई कर लें।”
अंकिता- “तू पागल है? हम तेरी बहनें हैं।”
मैंने कहा- “हाँ, लेकिन लड़कियाँ भी। देखो, मैं तुम दोनों से प्यार करता हूँ। बस एक बार ट्राई…”
प्रिया चुप थी। मैंने उनका हाथ पकड़ा, बोला- “दीदी, प्लीज…”
धीरे-धीरे वो मान गईं। मैंने अंकिता का स्कर्ट खोला- उसने ब्लैक पैंटी पहनी थी। टॉप उतारा, ब्रा में उसके छोटे ब्रेस्ट। प्रिया का स्कर्ट उतारा- वो व्हाइट पैंटी में थी, ब्रेस्ट बड़े-बड़े। मैंने अपना लंड निकाला- 8 इंच, मोटा। दोनों देख कर शर्मा गईं। मैंने प्रिया को बेड पर लिटाया। उसके होंठ चूमे- नरम, रसीले। जीभ अंदर डाली, चूसने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी- “आह… भाई…”
मैंने उसकी ब्रा खोली- बड़े ब्रेस्ट, गुलाबी निप्पल। मैंने एक को मुँह में लिया, चूसा। दूध जैसा स्वाद। वो कराह रही थी- “ओह… चूसो… और ज़ोर से…”
दूसरा ब्रेस्ट दबाया, चूसा। अंकिता देख रही थी, उसकी पैंटी गीली हो गई। मैंने प्रिया की पैंटी उतारी- उसकी चूत गोरी, बालों वाली, गीली। मैंने उंगली डाली- टाइट। वो चिल्लाई- “आह… दर्द हो रहा…”
मैंने जीभ से चाटा- नमकीन स्वाद। वो पागल हो गई- “भाई… चाटो… और…”
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मैंने 10 मिनट चाटा, वो झड़ गई- रस निकला। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा, धक्का मारा। टाइट थी, चीखी- “नहीं… दर्द…” मैंने धीरे-धीरे अंदर किया। पूरा गया। फिर पंपिंग शुरू- धीरे, फिर तेज़। वो मोन कर रही- “आह… चोदो… ज़ोर से…” मैंने 20 मिनट चोदा, विभिन्न पोज़िशन में- डॉगी, मिशनरी। आखिर में मैं झड़ा, उसके अंदर। वो भी आई। फिर अंकिता की बारी। मैंने उसका मुँह में लंड दिया- चूसने लगी। मैंने उसकी चूत चाटी। फिर चोदा- उसकी गांड मस्त, डॉगी में मज़ा आया।
रात भर हमने 4-5 बार किया। ग्रुप में भी ट्राई- मैं प्रिया को चोदता, अंकिता चाटती। फिर उस दिन मैंने रात भर प्रिया को चोदा और सारा मुठ अंकिता के मुँह में गिरा दिया… अगली सुबह हम थक गए, लेकिन खुश। दोस्तों, किसी को भी अपनी बहन पर सेक्स डिज़ायर हो तो प्लीज अपनी बहन से अप्रोच करो… क्योंकि घर की बात घर में ही दब जाती है… और मेरा विश्वास है बात ज़रूर बनेगी… अब हम अक्सर करते हैं। घर की बात घर में। मैं कहता हूँ- ट्राई करो, बहनों से।