Hot Sister Period Sex
मैं सुशील हूँ। मैं राजस्थान के बीकानेर के पास के एक दूर-दराज के इलाके से हूँ। मेरे पिता बहुत बड़े ज़मींदार थे और उनके पास 1000 एकड़ ज़मीन थी। लेकिन जब मैं 10वीं में पढ़ रहा था, तभी मेरे मम्मी और पापा दोनों एक एक्सीडेंट में गुज़र गए। उसके बाद मैं लगातार बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता रहा और सारी प्रॉपर्टी की देखभाल मेरे मौसा और मौसी कर रहे थे। Hot Sister Period Sex
मेरी एक बहन भी है, जो मुझसे 2 साल छोटी है। वो गाँव में ही रहती है। मैं आज गाँव लगभग 5 साल बाद जा रहा था। नया-नया जॉब लगा था, इसलिए मैं सबके लिए कुछ-न-कुछ गिफ्ट लेकर चला था। टैक्सी से उतरकर मैं घर पहुँचा तो सबसे पहले मौसी मिलीं। लेकिन उनका स्वर बहुत ठंडा था। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे आने की उन्हें कोई खुशी नहीं हुई हो।
मौसी: और बेटा, कैसा है? उन्होंने इधर-उधर की बातें करने लगीं।
मेरी नज़रें मेरी बहन को खोज रही थीं। मैंने पूछा, “प्रतिमा कहाँ है?”
मौसी ने आवाज़ लगाई। और पर्दे के पीछे से एक लड़की प्रकट हुई। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। “अरे तू इतनी बड़ी हो गई!” वो “भैया” कहती हुई मेरे गले से लग गई। मुझे सचमुच बहुत अजीब सा महसूस हुआ। उसके बड़े और भारी बूब्स मेरे सीने से कुचल गए थे। मैंने भी उसे बाहों में भर लिया। जब मैंने प्रतिमा को आखिरी बार देखा था, वो छोटी-सी बच्ची थी।
मौसी बोलीं, “देखा कितनी बड़ी हो गई है, पूरी औरत हो गई है, पर अकल ढेले भर की भी नहीं है।”
मैंने कहा, “मौसी ऐसे क्यों बोल रही हो? अभी भी बच्ची है।”
पर प्रतिमा बहुत खुश थी मेरे आने से। वो मेरा सामान लेकर मेरे कमरे में ले आई और मेरे साथ बातें करने लगी। उसकी खुशी के मारे आँसू निकल रहे थे।
मैंने कहा, “प्रतिमा तू कितनी बड़ी हो गई है…”
“भैया आप भी ना, कितने स्मार्ट हो गए हैं।”
सचमुच प्रतिमा बहुत सुंदर हो गई थी। और उसकी चुचियाँ व गाँड तो कमाल की हो गई थीं। उसकी सुंदरता का मैं बयान नहीं कर सकता।
मैंने पूछा, “मौसी को क्या हो गया है?”
प्रतिमा उदास होकर बोली, “बताऊँगी?”
“क्या? बताएगी?”
“बोला ना, रात में बताऊँगी। बहुत लंबी कहानी है।”
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फिर मैंने उसे ढेर सारे गिफ्ट दिए। वो बहुत खुश हुई। खासकर उसे लहंगा-चुनरी बहुत पसंद आया। मैंने कुछ अंडर गारमेंट्स भी खरीदे थे। उन्हें देखकर वो शर्मा गई।
“भैया ये… क्या हुआ? गाँव में कहाँ मिलते होंगे? वैसे भी ये लहंगे के साथ फ्री मिले हैं। अब कहीं फेंक कर तो नहीं आता…”
उसका गोरा मुँह लाल हो गया। फिर बोली, “ठीक है। थैंक्स भैया फॉर योर वंडरफुल गिफ्ट।”
हम सबने खाना खाया। रात में मौसा भी आ गए। वो दारू पिए हुए थे। उनका भी बिहेवियर कुछ अच्छा नहीं लगा। ऐसा लगा जैसे उन्हें मेरा आना अच्छा नहीं लगा हो। रात में प्रतिमा मेरे कमरे में आई। उसने रोते-रोते बताया कि मौसी-मौसा की नज़र हमारी सारी प्रॉपर्टी पर है। उसने बताया कि एक दिन ये बात कर रहे थे —
“अगर सुशील (मैं) पढ़कर आएगा और अपनी प्रॉपर्टी के लिए कुछ कहेगा तो उसे मार देंगे और साली इस लौंडिया को फार्म पर रखैल बना कर रखूँगा।” और उसने बताया कि मौसा की मेरे ऊपर गलत नज़र है। अक्सर मुझे बुलाकर इधर-उधर हाथ फेरते हैं। और मौसी भी इसमें शामिल हैं। “आपको तो पता है मौसी बाँझ हैं। मुझसे कहा रही थीं — तू मौसा से मुझे एक बच्चा दे दे, तुझे रानी बना कर रखूँगी।”
“अब भैया आप ही बताओ, मैं अब इस नर्क में एक पल भी नहीं रहूँगी।”
मैंने कहा, “प्रतिमा अब इस नर्क में तो मैं भी तुझे एक पल नहीं रहने दूँगा। लेकिन इन लालची लोगों को सबक तो सिखाना पड़ेगा।”
मेरा गुस्से से बुरा हाल था। मैंने कुछ प्लान किया और मौसा-मौसी को भगाने का सारा प्लान तैयार कर लिया। अगले दिन मैंने ऑफिस फोन करके अपनी जॉइनिंग बढ़वा ली। अगले दिन मैं और प्रतिमा शहर गए। वहाँ मेरे दोस्त का भाई SSP था, पुलिस में। वो भी हमारे IIT से पास आउट था। मैंने उसे सारी कहानी बताई और कहा कि मेरे मौसा-मौसी से हमें जान का खतरा भी है।
हमने वहीं एक एडवोकेट बुलाया और सारे लीगल डॉक्यूमेंट तैयार करवाए। एक एस्टेट एजेंट को बुलाकर प्रॉपर्टी का वैल्यूएशन करवाया और उससे कहा कि कोई बायर ढूँढे। सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि पता ही नहीं चला। सारा काम खत्म होते-होते रात हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
हमारा गाँव करीब 100 किलोमीटर था और हम बाइक पर थे। हमने सारे डॉक्यूमेंट और कुछ खाने का सामान बैग में रखा। मैंने चुपके से एक व्हिस्की की बोतल भी ले ली। हम जैसे ही निकले, बारिश शुरू हो गई। और बारिश धीरे-धीरे तेज हो गई। दूरी ज्यादा थी और रोड भी सही नहीं था।
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हम भीग गए। प्रतिमा ने मुझे जोर से पकड़ लिया। उसकी कठोर चुचियाँ मेरी पीठ से टकरा रही थीं। मेरा बुरा हाल था। रास्ते में रोड के किनारे मैंने बाइक रोकी और प्रतिमा से कहा कि वो दोनों तरफ टाँगें करके बैठ जाए, जिससे बैलेंस ठीक रहेगा। तब मेरी नज़र उस पर पड़ी।
उसकी सफेद सलवार-कमीज़ बिल्कुल ट्रांसपेरेंट हो गई थी और शरीर से चिपक गई थी। उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ आसानी से visible थीं। मेरा बुरा हाल था। मेरा लंड खड़ा हो गया। प्रतिमा ने मुझे जोरों से जकड़ लिया। चुचियाँ मुझे एनर्जी दे रही थीं। मैंने मन ही मन प्लान बना लिया — I will fuck damn bitch with all her approval। क्योंकि सहमति से ही संभोग में मज़ा आता है। आप अंदाज़ भी नहीं लगा सकते मैं कितने मज़े में था।
जस्ट इमेजिन — आपकी बहन, जिसकी चुचियाँ XL साइज़ हों और तेज़ बारिश में बाइक पर आपसे चिपककर बैठी हो, तो आपकी क्या हालत होगी। (डियर थोज़ हू थिंक टू फक देयर सिस्टर, दिस इज़ अ सिचुएशन। उन्हें किसी तरह तैयार करके बारिश में घुमाने ले जाएँ, उनका काम 50% समझो बन जाएगा, बाकी 50% घर पर)।
मेरा लंड अपने पूरे ताव पर था। अचानक प्रतिमा का हाथ मेरे लंड पर गया। मेरा तो बुरा हाल था, लेकिन लौंडिया भी ताड़ गई कि भैया पूरी गर्मी में हैं। बारिश तेज़ होने लगी। प्रतिमा के लंड टच करने से लौड़े में और जवानी आ गई। मैं तो जैसे स्वर्ग में था। तभी सड़क पर बाढ़ का पानी आ गया। हमारी बाइक पूरे पानी में चली गई और बंद हो गई। बाइक के इंजन में पानी चला गया।
मेरी तो गाँड़ फट गई। सुनसान सड़क, तेज़ बारिश, और साथ में इतनी सुंदर बहन। ऑल ऑड्स… लेकिन I have to face all awkward things & then win। पानी कमर तक था। मैंने किसी तरह बैग संभाला। सारा सामान (मोबाइल फोन और डॉक्यूमेंट) उसमें डाले। बाइक को थोड़ी हाइट पर ले जाकर खड़ा किया। और कुछ मदद देखने लगा। दूर-दूर तक घना अंधेरा था। प्रतिमा तो ठंड के मारे काँपने लगी।
वो मेरे से चिपक गई — “भैया अब क्या होगा?”
मैंने उसे दिलासा दिया, “चिंता मत कर, मैं हूँ ना। कुछ ना कुछ वर्क आउट करते हैं।”
तभी मेरी नज़र एक छोटे से झोपड़े पर पड़ी। मेरी आँखों में खुशी छा गई। झोपड़ी थोड़ी पहाड़ी पर थी और उसमें पानी का भी डर नहीं था। मैंने प्रतिमा का हाथ पकड़ा और उसे झोपड़ी में ले गया। झोपड़ी में एक छोटी-सी खाट पड़ी थी। मैंने आस-पास से कुछ लकड़ियाँ और पेपर डाले और लाइटर से आग लगाने की कोशिश करने लगा। फिर उसमें थोड़ी व्हिस्की डाली, जिससे आग पकड़ गई।
जिससे झोपड़ी में थोड़ी गर्मी आई। प्रतिमा ठंड से बुरी तरह काँप रही थी। मैंने उससे कहा कि उसके कपड़े गीले हो गए हैं, उन्हें उतार दें। और मैंने भी अपनी शर्ट और जींस उतार दी। मैंने देखा प्रतिमा वैसी ही खड़ी थी। मैंने कहा, “भाई कपड़े उतार दो, गीले हैं, निमोनिया हो जाएगा।”
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लेकिन वो शर्मा रही। “नहीं भैया, मुझे शर्म आ रही है।”
मैंने उसे समझाते हुए कहा, “जिंदा रहोगी तभी शर्माओगी। इस हालत में तो सुबह तक मर जाओगी।”
फिर मैंने झोपड़ी में एक बोरी देखी। मैंने कहा, “ये कपड़े उतार दो और ये बोरी लपेट लो। शर्माओ मत, हमने बचपन में एक-दूसरे को बहुत बार नंगा देखा है और मैं तुम्हारा भाई हूँ, कोई ग़ैर नहीं। अभी सवाल ज़िंदगी और मौत का है।”
उसने कहा, “आप मुँह फेर लो।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
उसने कपड़े उतार दिए और बोरी लपेट ली। आप अंदाज़ लगा सकते हैं, एक बोरी से प्रतिमा का कितना शरीर ढक सकता था। उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ साफ़ दिख रही थीं और नीचे वो बोरी केवल कमर तक थी। तो आप अंदाज़ लगा सकते हैं, अगर वो बोरी को नीचे खींचती तो चुचियाँ नंगी होतीं, नहीं तो चूत। बड़ी असमंजस की स्थिति थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और ऐसा ही हाल कुछ मेरा था। मेरे बदन पर भी केवल एक छोटी-सी तौलिया थी और उसमें लंड पूरा खड़ा था। आप समझ सकते हैं मेरी हालत। चलो, मैंने किसी तरह मैनेज किया। प्रतिमा ठंड की वजह से छींकने लगी। मैंने व्हिस्की एक ग्लास में डाली और बारिश का पानी मिलाया और उसे दिया — “इसे पी लो, ठंड दूर हो जाएगी।”
“नहीं भैया, मैं शराब नहीं पियूँगी।”
मैंने उसे समझाया कि ये शराब नहीं, दवाई है और इस समय हमें इसकी सख्त ज़रूरत है। ये कहकर मैंने ग्लास उसके मुँह से लगा दिया। इसके बाद मैंने कोई 2 पेग उसे और पिलाए और दो-तीन मैंने पिए। प्रतिमा को अच्छा-खासा नशा हो गया था। लौंडिया झूमने लगी।
मुझसे बोली, “भैया भूख लग रही है।”
मैंने झोपड़ी में देखा, आलू पड़े हुए थे। मैंने वोही आलू आग में डाले, उन्हें भूनकर हम दोनों ने खा लिए।
वो बोली, “हाय भैया मज़ा आ गया।”
हम दोनों को अच्छा-खासा नशा हो गया था। फिर मैंने एक गाना गुनगुनाने लगा — “रूप तेरा मस्ताना… मस्ताना… प्यार मेरा दीवाना… दीवाना… भूल कोई न हमसे हो जाए…” गाना सुनकर वो शर्मा गई। लेकिन लौंडिया पूरे शबाब पर थी और उस पर शराब का नशा।
हम दोनों बेहद थके हुए थे और नींद भी आने लगी। लेकिन बाहर बारिश और तूफान बंद होने का नाम नहीं ले रहा था, और एक तूफान शरीर के अंदर चल रहा था। सारे शरीर की नसों में एक तनाव था। लंड कब से 90% पर खड़ा था।
प्रतिमा बोली, “भैया नींद आ रही है।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
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मैंने 2 बोरी निकाली। प्रतिमा को खाट पर लिटाया और उसे सोने के लिए कहा। वो लेट गई। मैं उसके सिरहाने बैठकर प्यार से उसका माथा सहलाने लगा और फिर उसे चूम लिया।
उसने आँखें खोलीं और कहा, “क्या आप नहीं सोएंगे?”
मैंने कहा, “नहीं, तू सो जा। आज मैं जागकर काटूँगा।”
वो बोली, “नहीं, आप प्लीज लेट जाओ, नहीं तो तबीयत खराब हो जाएगी और मॉर्निंग में बाइक भी चलानी है।”
वो खाट में थोड़ी खिसक गई और बोली, “नीचे कितना गीला, आप यहाँ लेट जाओ। We will manage। केवल एक रात की बात है।”
मैं प्रतिमा के बगल में सो गया। खाट में जगह कितनी होती है, आप समझ सकते हैं। हमारा शरीर एक-दूसरे से रगड़ रहा था। बेहद ठंड हो रही थी और जवान लौंडिया आपके बगल में हो, आपकी क्या हालत होगी अगर वो लौंडिया आपकी बहन हो, जस्ट इमेजिन।
लेटने से प्रतिमा के शरीर से बोरी हट गई और मेरी तौलिया खुल गई और हम दोनों के शरीर नंगे हो गए। उसका नंगा शरीर मेरे शरीर से टकरा रहा था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ। प्रतिमा भी कसमसा रही थी। मेरा लंड उसकी गाँड के आस-पास घूम रहा था।
उसकी गुदगुदी से वो इठला रही थी। लेकिन मैं अपने आपको किसी तरह कंट्रोल किए हुए था, लेकिन मन मेरा बहुत दहाड़ें मार रहा था। मुझे मेरे लंड पर कुछ गीला-गीला सा लगा। मैंने हाथ लगाकर देखा तो खून था। मैं एकदम से डर गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने प्रतिमा से कहा, “अरे ये क्या हो गया? खून कहाँ से आ गया?”
वो शर्माते हुए बोली, “नहीं भैया, मेरे पीरियड्स चल रहे हैं। उसका खून आपको लग गया होगा।”
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मेरा माथा ठनका। और ये निश्चित हो गया कि आज मैं इसकी चूत नहीं मार पाऊँगा। क्योंकि MC में चुदाई से लंड को नुकसान होता है और बच्चा ठहरने के भी चांस ज्यादा होते हैं। मैं दोनों काम नहीं चाहता था। लेकिन इस मौके को फ्यूचर में चुदाई की भूमिका के लिए इस्तेमाल कर सकता था।
मैंने धीरे से अपनी बाहें निकालीं और प्रतिमा ने अपना सिर उस पर रख दिया और सीधे होकर लेट गई। मैंने उसके गाल पर किस कर दिया। वो थोड़ी शर्माई। और उसे बाहों में लेकर उसे अपने शरीर से सटा लिया। हम दोनों के बीच सूत भर कपड़ा नहीं था।
मेरा लौड़ा साँप की तरह उसकी चूत के आस-पास ठोकरें मार रहा था और प्रतिमा को मेरे लंड का अच्छा-खासा अहसास हो रहा था। प्रतिमा कसमसा रही थी। मेरे से नहीं रहा गया। मैंने धीरे से उसकी चुचियों पर हाथ फेर दिया। उसके मुँह से ज़ोर से “आह्ह” निकली। सचमुच बाहर का टेम्प्रेचर 2-3 डिग्री सेल्सियस होगा लेकिन हमारा टेम्प्रेचर 50-60 होगा।
“हाय भैया क्या कर रहे हो?”
लौंडिया सहम गई। मैंने उसके गालों को चुमने लगा और फिर तो मैंने जमकर उसकी चुचियों को मसलने लगा। “हाय भैया प्लीज छोड़ दो, ये अच्छी बात नहीं है।” लौंडिया पर शराब और शबाब का असर था। मेरे पर भी दोनों नशे काम कर रहे थे। मैंने आँख देखी न ताव और उसकी चुचियों पर मुँह रख दिया और उन्हें चूसने लगा।
लौंडिया का बुरा हाल था। उसकी साँसें तेज़-तेज़ चलने लगीं। “भैया… प्लीज… मर जाऊँगी… हाय… ये क्या कर रहे हो… हे भगवान…” मैंने उसकी चुचियों को छोड़ा नहीं। लौंडिया की चुचियों की घुंडी खड़ी हो गई थी, जो ये प्रूव कर रही थी कि उसे भी मज़ा आ रहा है। मैं तो आनंद के सागर में गोते लगा रहा था। अब प्रतिमा ने भी मुझे बाहों में भर लिया। मेरा लंड तो जैसे लोहे का हो गया था। एक बार मन हुआ कि प्रतिमा को MC में ही चोद दूँ।
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मैंने कहा, “जान बहुत मन कर रहा है… प्लीज कुछ करो ना।”
वो बोली, “मैं क्या करूँ? सब कुछ तुम कर ही रहे हो।”
“प्रतिमा प्लीज आज चोदने दे, मैं ये अहसान ज़िंदगी भर नहीं भूलूँगा।”
“भैया आप mc में कैसे कर सकते हैं? अब आपने इतना-इतना कुछ कर ही लिया। पता नहीं कुदरत को क्या मंजूर है? अब तो लगता है आप ही मेरे मालिक बनोगे… पर भैया अपने इस रिश्ते का अंजाम क्या होगा?”
“तू क्वेश्चन बहुत करती है। मेरे पर भरोसा है ना? मैं हूँ ना… मैं सब संभाल लूँगा।” जैसे मैं उसे बचपन में समझाता था और वो मान जाती थी।
“लेकिन भैया आज नहीं, नहीं तो मेरी बहुत ब्लीडिंग होगी और आपके प्यारे लंड जो अब मेरा है… वो भी डैमेज हो सकता है।”
लेकिन इतना कहकर उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे किस किया। मेरा तो बुरा हाल था। हाय… कितना मज़ा आ रहा था। मेरे कुछ कहे बिना मेरी प्यारी बहन ने मेरा लौड़ा अपने मुँह में डाल लिया और उसे चूसने लगी। मुझे सचमुच बहुत मज़ा आ रहा था। हम सारी रात मस्ती करते रहे। कुछ देर बाद मैं झड़ गया। और फिर हम दोनों चिपककर सारी रात सोए। मैं रात भर प्रतिमा की चुची को चूसता रहा।
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