Incest Bhai Bahan Chudai
हाय दोस्तों, मैं हूँ आपका राजीव। मेरी उम्र 20 और मेरी बहन की 21 साल थी। मेरी बहन एक सुंदर, सेक्सी, वेल बॉडी, गार्जियस फिगर की मालिक है। यह सब इतना अचानक हुआ कि मैं सोच भी नहीं सकता था कि इतना सब कुछ हो जाएगा। मैंने बहन के बारे में कभी गंदी नजर से नहीं देखा। Incest Bhai Bahan Chudai
हग करता था मैं उसे मगर बहन-भाई के रिश्ते से। किस भी करता था फॉरहेड पर भी और चीक्स पर भी, मगर बहन-भाई के रिश्ते से। हम बचपन से ही एक ही क्लास में पढ़ते आए हैं और कॉलेज में भी साथ थे। दोनों एक साथ बैठते थे, एक साथ खाते थे, एक जैसे फ्रेंड बनाते थे आदि आदि।
बीएससी टेलीकॉम इंजीनियरिंग फाइनल ईयर का लास्ट टूर था कॉलेज का जो कश्मीर जा रहा था 2 हफ्ते के लिए। हम दोनों भी साथ हो लिए। सब मिलाकर 25 बॉयज गर्ल्स थे जिनमें से ज्यादा कपल थे। मतलब बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड। सफर शुरू हुआ तो सबने हूटिंग, सिंगिंग सॉन्ग्स और एक-दूसरे को जोक मारना शुरू कर दिया।
आहिस्ता-आहिस्ता बस के बीच में भांगड़ा का मुकाबला भी शुरू हो गया। खूब एंजॉय कर रहे थे हम सब। सारा रास्ता हमारी बस में खूब हल्ला-गुल्ला रहा। एक-दूसरे से मस्ती भी की। मैं और दीदी साथ बैठा था। दीदी विंडो वाली साइड पर और मैं उसके साथ वाली सीट पर।
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हम लोग पंजाब से निकलकर कश्मीर में एंटर हो चुके थे। वैष्णो देवी के मंदिर के पास बस रुकी थी। यहाँ हर तरफ घना फॉरेस्ट था। दूर-दूर तक बस फॉरेस्ट ही फॉरेस्ट था। बस थोड़ी देर के लिए रुकी फॉर रेस्ट पर्पज एंड फॉर फ्रेश अप। हम लोग नीचे चश्मे से पानी पी रहे थे।
ऊपर से चीखने की आवाज आई, “भागो भागो” फिर एकदम गोलियाँ चलने लगी। भगदड़ मच गई और सब भागने लगे। कोई किसी तरफ और कोई किसी तरफ। मैं और दीदी साथ थे इसलिए मैंने दीदी का हाथ पकड़ा और घने फॉरेस्ट में घुस गया। मगर जब रुका तो न कोई साथ था न दूर-दूर तक किसी की आवाज आ रही थी। कुछ पता नहीं था सब लोग कहाँ गए और हम कहाँ निकल आए।
जब हमें होश आया तो हम फॉरेस्ट के बीच में थे। बर्ड्स सिंगिंग सॉन्ग्स और जंगली डॉग्स भौंक रहे थे। दीदी तो ऐसा रोने लगी जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो और मेरे साथ चिपक गई। यह नवंबर का महीना था। शाम का वक्त था। ठंड काफी थी। यह अच्छा था कि दीदी ने अपना ऊपर गरम शॉल ली हुई थी और मैंने भी स्वेटर पहनी थी।
पहले तो मुझे आधा घंटा दीदी को चुप कराने में लगा। हम लोग ज्यादा दूर नहीं आए थे। मैंने दीदी से कहा, “या तो वापस चलते हैं या फिर यहीं रुको, सर्च टीम हमें यहाँ जरूर ढूँढने के लिए आएगी क्योंकि हम ज्यादा दूर नहीं आए हैं।” मुझे यकीन है दीदी ने बोला, “थोड़ा वापस चल चलते हैं।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
हम लोग बस के काफी नजदीक आ चुके थे मगर वहाँ कोई भी मौजूद नहीं था। मैं और दीदी वहाँ पास ही चुप करके बैठ गए। डर तो मुझे भी लग रहा था मगर फिर भी मुझे और दीदी को भूख भी लगी थी और ठंड भी लग रही थी। शाम भी गुजर रही थी और रात भी आ रही थी।
पास ही वो झील थी जहाँ से हम पानी पी रहे थे। वहाँ बहुत सारा कपड़ा और फीमेल्स बैग पड़ा था जो सब यहाँ छोड़कर भागा था। मैं और दीदी आहिस्ता से उस जगह पर पहुँचे। हमें 5 फीमेल्स के बैग्स और 2 फीमेल स्वेटर्स और 1 मेल जैकेट मिले। मैंने इधर-उधर देखा मगर कुछ था नहीं, बस यही नजर में आ रहा था।
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मैं और दीदी वापस उसी जगह चले गए। दीदी को ठंड लग रही थी। मैंने उसे 3 के 3 स्वेटर्स और दे दिए मगर फिर भी नीचे उसने एक पैंट ही पहनी थी। फीमेल्स के बैग्स में से कुछ चॉकलेट्स, जूस, स्वीट्स और चिप्स मिले जो मैंने और दीदी ने खा लिए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
दीदी ने बाद में देखकर मुझे बता दिया यह किस-किस के बैग्स हैं और किसने स्वेटर ऐसी उठाई हुई थी। दीदी को बहुत ठंड लग रही थी। मैंने दीदी को अपनी लेग्स पर बिठा लिया और कहा, “मुझे जोर से हग करो।” मुझे जो जैकेट मिली वो मैंने दीदी और अपनी लेग्स पर डाल दी। मगर ठंड काफी थी।
मैंने दीदी से बोला, “दीदी मेरे लिप्स पर अपना लिप्स रख दो।”
दीदी घबराई तो मैंने कहा, “तुम्हें मेरे जिस्म की गर्मी चाहिए इसलिए कह रहा हूँ।”
मैंने दीदी की सब स्वेटर साइड पर कर दी। दीदी के बूब्स अपने सीने के साथ टच कर दिए और फिर सब कुछ वापस पहन लिया और दीदी के बूब्स को मसलने लगा। अब दीदी को ठंड कम लग रही थी। मैंने जोर-जोर से दीदी को किसिंग की जिससे दीदी के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।
मैंने दीदी की चूत पर भी हाथ फेरा। दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया मगर यह जरूरी था तो मैंने दीदी को समझाया और दीदी ने फिर मेरा हाथ छोड़ दिया। मैं आराम से दीदी की चूत को मसल रहा था और एक हाथ से बूब्स भी दबा रहा था। साइज 34 लग रहा था। मैं दीदी को किसिंग भी कर रहा था।
जब मैंने थोड़ी देर दीदी की चूत रगड़ी तो दीदी ने मुझे जोर से अपने साथ चिपका लिया और किसिंग करने लगी। इस वक्त तक मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और लंड दीदी की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था। अपना लंड दीदी के हाथ में पकड़ाकर कहा, “इसे हिलाओ।” दीदी नर्वस थी मगर वह आहिस्ता-आहिस्ता हिलाती रही। इससे हम दोनों को काफी गर्मी मिल रही थी और हम दोनों गरम हो गए थे। मैंने महसूस किया कि दीदी की पैंट गीली हो गई है।
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मैंने दीदी से पूछा, “क्या तुम्हारा स्पर्म निकल आया?”
वो बोली, “हाँ।”
तो मैं परेशान हो गया। इससे दीदी को ठंड लग सकती थी। और ऐसा ही हुआ। अब मैंने जो भी कुछ किया मगर दीदी फिर से काँपने लगी। मुझे दीदी पर गुस्सा आया मगर अब मैं कर भी क्या सकता था। मैंने इस बार दीदी को फेस अपनी ओर मोड़कर बैठा दिया और बोला, “अगर तुम्हारा स्पर्म निकलने लगा तो मुझे बताना, आई विल स्टॉप।”
दीदी ने सर हिला दिया। इस बार मैंने दीदी की पैंट की जिप खोलकर अपना लंड भी बाहर निकालकर दीदी की पैंटी के ऊपर रखकर चूत से साथ जोड़कर हिलने लगा और अपना ऊपर-नीचे लेग्स पर सब कपड़ा डाल दिया। दीदी के बूब्स दबाना और किसिंग करना से दीदी फिर से शांत रही।
दीदी ने पूछा, “हम ऐसा कब तक रहेंगे?”
मैं बोला, “जब तक सुबह नहीं होती या कोई आ नहीं जाता।”
मैं दीदी की बुर के साथ अपना लंड रगड़ रहा था। मुझे मजा आने लगा। दीदी तो पहले से गर्म थी। मैंने ऐसा ही दीदी से मजाक किया, “दीदी मेरा लंड का भी स्पर्म निकलने लगा है और मेरा लंड तो तुम्हारी बुर के साथ जुड़ा हुआ है, अब भी तुम्हारी पैंटी गंदी हो गई।”
दीदी शर्मा कर कुछ न बोली। ऐसा कोई मुझे एक घंटा हो गया था। अब मैंने टाइम देखा तो अभी रात के 9 बज रहे थे। दीदी अब भी तो 9 ही हुआ है, अब क्या करें।
दीदी ने कहा, “बस में चलते हैं।”
मैंने कहा, “अगर वहाँ कोई हुआ तो?”
फिर दीदी चुप रही। मैंने अब अपना लंड दीदी की बुर पर से हटाकर जिप बंद कर दी मगर किसिंग करता रहा थोड़ी-थोड़ी देर बाद। ऐसा मैं दीदी को और मुझे नींद आ गई और हम सो गए। रात एक बजे अचानक से मेरी आँखें खुलीं। दीदी अभी भी मुझसे चिपकी हुई थी।
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मैंने आराम से दीदी के कान में कहा, “सो रही हो?”
वो बोली, “नहीं, नींद आती है फिर उड़ जाती है।”
“हाँ मेरे साथ भी ऐसा है।”
मैंने दीदी को कहा, “अब बस में चलते हैं, अब नहीं होगा कोई भी वहाँ पर।”
मैं और दीदी दबे पाँव बस तक आ गए। वहाँ सारा सामान खुला और बिखरा हुआ था। बस में कोई भी नहीं था और बहुत अंधेरा भी था। मैंने फर्स्ट अंदर जाकर अच्छी तरह देखा कोई भी नहीं था फिर दीदी को भी धीरे से बस में लाया और दरवाजा क्लोज करके विंडो भी क्लोज कर दी और लास्ट में आखिरी सीट पर जाकर लेट गए। बस काफी ठंडी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने दीदी से कहा, “ऐसा ही सो जाओ मुझसे चिपककर।”
तो दीदी जरा हँसकर बोली, “अब कुछ करोगे?”
मैंने आहिस्ता से जवाब दिया, “अगर तुम्हें ठंड लगी तो कुछ ज्यादा करना पड़ेगा।”
हल्की सी मुस्कराहट के साथ हम दोनों चिपककर किसिंग करने लगे। इस बार दीदी कुछ ज्यादा जोश में थी। मैंने भी लंड को बाहर निकालकर दीदी की जिप खोलकर बस पर लगा दिया और दीदी से कहा, “कुछ गर्मी महसूस है?”
“हाँ,” वो बोली।
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मैं दीदी के बूब्स जोर-जोर से दबाने लगा और ऐसा ही लेटा हुआ दीदी की पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। लंड को पीछे करके और दीदी की बुर मसलने लगा। उँगली पर थोड़ा थूक लगाया और दीदी की बुर में डालकर हिलाने लगा। दीदी ने कुछ रिएक्शन नहीं दिया तो मैंने पूछा, “क्या तुम वर्जिन हो?”
वो शर्मा कर बोली, “नहीं, मैं बुर में डिल्डो लेती हूँ।”
मैंने कहा, “गर्मी चाहिए?”
तो आहिस्ता से “हाँ” बोली। मैंने थोड़ा लंड पर थूक लगाया और दीदी की बुर में डालने लगा मगर मुश्किल हो रही थी। दीदी सीधा लेट गई और मैं ऊपर आ गया दीदी के और जोर बुर में लंड डालने के लिए जोर लगाने लगा। ऐसा करने से मेरा लंड आहिस्ता-आहिस्ता दीदी की बुर में पूरा चला गया।
अब मैं दीदी की बुर में स्टोक लगाने लगा आहिस्ता-आहिस्ता। दीदी मुझे जोर-जोर से किसिंग कर रही थी। दीदी को पसीना भी आ रहा था। मैंने सोचा अभी बहुत देर है, आराम से ही चूत में डालकर हिलाता हूँ। थोड़ी देर बुर में लंड को हिलाता और काफी देर दीदी से चिपका रहता। जब महसूस होता अब और नहीं चलेगा तो लंड को बुर में से निकाल लेता मगर दीदी के साथ चिपका रहता। ऐसा कोई 1 घंटा हमने किया।
तो दीदी बोली, “मैं थक गई हूँ, जो करना है जल्दी करो।” मैंने इस बार बुर में लंड डालकर तेज-तेज हिलने लगा और 15 मिनट तेज की चुदाई में मेरा सारा स्पर्म निकल गया। मगर मैंने स्पर्म दीदी की बुर में नहीं बल्कि बाहर निकाला बस में नीचे जमीन पर। दीदी की बुर भी सैटिस्फाई हो गई।
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1 घंटा बाद दीदी ने फिर मुझे किसिंग की। मैंने भी जोर से किसिंग की और हम दोनों फिर से जुड़कर साथ हो गए। ठंड काफी होने के कारण मैं और दीदी सिर्फ बुर में ही लंड डाल सका और मैंने दीदी के बूब्स ब्लाउज के अंदर से मसले। इस बार फिर पहले की तरह एक घंटा मजा लिया। कभी लंड बुर के ऊपर रगड़ता, कभी बुर के बीच में डालकर दीदी को चोदता, कभी दीदी की पैंट के बीच में रखकर घासा मारता और ऐसा इस बार 2 घंटे से ज्यादा किया।
और लास्ट शॉट 25 मिनट की तेज खाली और लंड का स्पर्म बस के जमीन पर निकालकर दीदी से चिपककर सो गया। सुबह हुई और आर्मी वाले आ गए। उनके साथ कुछ हमारे फ्रेंड्स भी थे। हमें बस में देखकर वो लोग बहुत खुश हुए। फिर मैंने सारी बात आर्मी वालों को बताई हम बस पर कैसे वापस आए। हमारा अभी भी 5 दोस्त मिसिंग था। आर्मी वालों ने जल्दी ही उन्हें ढूँढ लिया और हमारा टूर 2 दिन में ही वापस आ गया। मगर बस का ड्राइवर और हमारा एक टीचर आज तक नहीं मिला। कुछ दोस्तों का कहना है उन्हें मार दिया गया था।
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